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‘रूस से तेल खरीदने वालों पर ठोकें हाई टैरिफ’: G7 देशों पर अमेरिका डाल रहा दबाव, EU-भारत के FTA वार्ता पर भी ट्रंप की पैनी नजर

अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर 50% तक टैरिफ लगाया और अब G7 देशों पर भी दबाव डाल रहा है। यूरोप संकोच कर रहा, जबकि भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते की तैयारी जारी है।

भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका लगातार कोई न कोई नया बखेड़ा खड़ा कर रहा है। पहले अमेरिका ने भारतीय सामानों के आयात पर 50% तक का शुल्क (25% रूसी तेल पर और 25% भारत के ऊँचे आयात शुल्क पर) लगा रखा है। इसके बाद अब वॉशिंगटन अपने G7 साझेदारों पर दबाव बना रहा है कि वे भी भारत और चीन जैसे उन देशों पर हाई टैरिफ लगाएँ, जो अभी भी मास्को से ऊर्जा खरीद रहे हैं।

शुक्रवार (12 सितम्बर 2025) को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने G7 देशों के वित्त मंत्रियों से बात की। उनका कहना था कि अगर दुनिया को सच में रूस की आय कम करनी है और यूक्रेन युद्ध खत्म करना है तो एकजुट होकर कदम उठाने होंगे। अमेरिकी ट्रेज़री प्रवक्ता ने तो और आगे बढ़ते हुए कहा ‘भारत और चीन से आने वाले सामान पर सार्थक टैरिफ लगाया जाए।’

गौरतलब है कि 2022 से भारत रूस का सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदार बन चुका है। इससे वैश्विक तेल बाजार स्थिर तो रहा है, लेकिन वॉशिंगटन को नई दिल्ली का यह रुख रास नहीं आया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही भारतीय उत्पादों पर दोगुना शुल्क लगा चुके हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता ठप हो गई है।

चौंकाने वाली बात यह है कि चीन पर अभी तक ऐसे कदम नहीं उठाए गए। ट्रंप का तर्क है कि बीजिंग के साथ उनकी वार्ता चल रही है, इसलिए वहाँ अतिरिक्त दबाव नहीं बनाया जा सकता। इससे अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।

उधर यूरोप की स्थिति भी विरोधाभासी है। वहाँ अब भी रूसी गैस की भारी खपत हो रही है। हाल ही में यूक्रेन द्वारा गैस पाइपलाइन पर हमले से आपूर्ति बाधित हुई तो ट्रंप ने कीव पर नाराजगी जताई। यूरोपीय देश भले ही रूस पर निर्भरता घटाने की बातें कर रहे हों, लेकिन वे अब भी रूसी LNG (Liquefied Natural Gas) का बड़ा आयात कर रहे हैं।

इस बीच, ट्रंप लगातार EU पर दबाव बना रहे हैं कि भारत पर भी भारी शुल्क लगाया जाए। लेकिन यूरोपीय संघ ऐसा करने से हिचक रहा है, क्योंकि भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है और इसे इस साल के अंत तक फाइनल करने की योजना है।

कनाडाई वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन की मेजबानी में हुई G7 बैठक में रूस के जमे हुए संसाधनों को यूक्रेन की मदद के लिए इस्तेमाल करने और नए प्रतिबंध लगाने पर भी चर्चा हुई। वहीं बेसेंट अब मैड्रिड में चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लीफेंग से मिलने वाले हैं, जहाँ TikTok और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मुद्दे भी उठेंगे।

ट्रंप ने फ़ॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि उनकी ‘रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ धैर्य की सीमा अब खत्म हो रही है।’ उन्होंने संकेत दिया कि रूसी बैंकों और तेल पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि ऐसे हर कदम में यूरोपीय सहयोग आवश्यक है।

ट्रंप ने साफ कहा, “हमें अब बेहद सख्ती से कदम उठाने होंगे।” अमेरिकी ट्रेजरी प्रवक्ता ने भी यही दोहराया कि G7 साझेदारों को रूस पर और दबाव डालना होगा। ‘राष्ट्रपति ट्रंप की Peace and Prosperity Administration तैयार है और अब समय है कि हमारे G7 साझेदार भी आगे बढ़ें।’

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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