उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अयोध्या को एक आधुनिक ‘सोलर सिटी’ बनाने जा रही है। भगवान राम के सूर्यवंश की राजधानी रही अयोध्या अब सौर ऊर्जा के जरिए अपने गौरवशाली इतिहास को भविष्य से जोड़ेगी। सूर्यवंश का सूर्य देव से गहरा नाता रहा है और इसी प्रेरणा से योगी सरकार इस पवित्र नगरी को स्वच्छ ऊर्जा का मॉडल बनाना चाहती है। यह प्रोजेक्ट देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
क्या है सोलर सिटी प्रोजेक्ट?
उत्तर प्रदेश नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग (UPNEDA) इस प्रोजेक्ट को लीड कर रहा है। अयोध्या को सोलर सिटी बनाने का मतलब है कि यहाँ बिजली का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से आएगा। इस मॉडल को बाद में प्रदेश के 16 अन्य नगर निगमों और नोएडा में लागू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत अयोध्या में सौर ऊर्जा से चलने वाली कई सुविधाएँ शुरू की जाएँगी।
सौर पैनल की स्थापना: अयोध्या के 117 सरकारी इमारतों की छतों पर 2.5 मेगावाट के सौर पैनल लगाए जाएँगे। इसमें राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में 250 किलोवाट, कृषि विश्वविद्यालय में 155 किलोवाट, जिला कोर्ट में 100 किलोवाट, राम कथा संग्रहालय में 58 किलोवाट और कई सरकारी स्कूलों में 50 किलोवाट के सौर पैनल शामिल हैं।
सौर पार्क: सरयू नदी के किनारे 40 मेगावाट का सोलर पार्क बनाया जाएगा, जो अयोध्या की 40% बिजली जरूरतों को पूरा करेगा। यह पार्क रामपुर हलवारा, मांझा क्षेत्र में बन रहा है।
सौर उर्जा से जुड़ी बुनियादी सुविधाएँ: शहर में सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीट लाइट्स, सोलर चार्जिंग पॉइंट, पेयजल कियोस्क और सोलर ट्री लगाए जाएँगे। साथ ही, सरयू नदी में सौर ऊर्जा से चलने वाली नावें भी शुरू होंगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा: सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित कर रही है। लोगों को अपनी छतों पर सौर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी भी दी जाएगी।
कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?
यह पाँच साल का प्रोजेक्ट है, जो 2023 में शुरू हुआ और 2028 तक पूरा होगा। यह उत्तर प्रदेश की सौर ऊर्जा नीति 2022 का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2026-27 तक 22,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन करना है। इसमें 14,000 मेगावाट सौर पार्कों से और 8,000 मेगावाट छतों पर सौर पैनलों से आएँगे।
अयोध्या का यह प्रोजेक्ट न सिर्फ पर्यावरण को बचाएगा, बल्कि शहर को एक आधुनिक और स्वच्छ ऊर्जा का केंद्र भी बनाएगा। यह भगवान राम की नगरी को नई पहचान देगा और देश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को अग्रणी बनाएगा।
नेपाल में लगातार कई दिनों से भड़की हिंसक झड़पों के बाद हालात काबू से बाहर हो गए हैं। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि गुरुवार (11 सितम्बर 2025) को पूरे देश में कर्फ्यू और कड़ी पाबंदियाँ लगा दी गईं। छोटे से हिमालयी देश को हिलाकर रख देने वाले इन प्रदर्शनों का नेतृत्व मुख्यतः Gen-Z (नई पीढ़ी) कर रही है।
इन प्रदर्शनों में अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 600 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राजधानी काठमांडू में सेना ने नागरिकों से घरों के भीतर रहने की अपील की है। बुधवार (11 सितम्बर 2025) की देर रात बड़ी संख्या में सैनिकों को सड़कों पर उतारकर हालात पर काबू पाने की कोशिश की गई।
हफ्ते की शुरुआत में ही प्रदर्शनकारियों ने सरकारी दफ्तरों और इमारतों को आग के हवाले कर दिया था। इसके बाद राजनीतिक संकट इतना गहराया कि सरकार ही धराशायी हो गई। इस अफरातफरी में देशभर की 77 जिलों की जेलों से करीब 13,000 कैदियों के फरार होने की भी पुष्टि हुई है।
बुधवार (10 सितम्बर 2025) को प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों ने काठमांडू स्थित सेना मुख्यालय में जाकर सैन्य अधिकारियों से बातचीत की। चर्चा का विषय यह था कि अंतरिम सरकार का नेतृत्व किसके हाथ में होना चाहिए।
इस दौरान आंदोलन के भीतर से कुछ आवाजें नेपाल की पूर्व मुख्य जज सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने के पक्ष में उठीं। उधर, काठमांडू के युवा मेयर बालेन शाह, जो सिर्फ 35 साल के हैं और इंजीनियर व राजनेता बनने से पहले एक रैपर भी रह चुके हैं, उन्होंने आंदोलनकारियों से शांति बनाए रखने और अंतरिम प्रशासन की घोषणा तक संयम बरतने की अपील की है।
सोशल मीडिया पर प्रतिबंध से लेकर सड़क पर विरोध प्रदर्शन तक
नेपाल में सोमवार (8 सितम्बर 2025) को सोशल मीडिया पर अचानक लगाए गए बैन के बाद ही हालात बेकाबू होने शुरू हो गए। सरकार के इस फैसले से नाराज युवाओं ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। पुलिस ने भीड़ पर गोलियाँ चलाईं, जिससे गुस्सा और भड़क उठा।
जिसके बाद मंगलवार (9 सितम्बर 2025) तक आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया। हजारों युवाओं ने सरकारी दफ्तरों पर हमला कर दिया और कई इमारतों में आग लगा दी। दरअसल, सरकार ने यह कदम उस विवादित कानून के तहत उठाया, जिसमें तय समय-सीमा तक फेसबुक, यूट्यूब और ‘X’ समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के रजिस्ट्रेशन न होने पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया था।
सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर नफरत फैलाने, अफवाहें गढ़ने, धोखाधड़ी करने और साइबर अपराधों को अंजाम देने वालों पर लगाम कसने के लिए यह आदेश दिया गया।
नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण को निर्देश दिया गया कि जो प्लेटफॉर्म्स रजिस्टर नहीं हुए हैं, उन्हें बंद कर दिया जाए। हालाँकि, नोटिस में यह साफ नहीं किया गया कि किन प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने इतना जरूर कहा कि आदेश मानने के बाद सेवाएँ बहाल कर दी जाएँगी। अधिकारियों का दावा है कि यह कदम केवल साइबर अपराध रोकने के लिए उठाया गया है। लेकिन युवाओं के लिए यह सीधे उनकी आवाज पर हमला साबित हुआ। यही वजह है कि आंदोलन धीरे-धीरे भड़क कर पूरे देश में आग की तरह फैल गया।
#NepoKids का बढ़ता चलन
हालाँकि नेपाल में भड़के इस आंदोलन की जड़ें सिर्फ सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं हैं। इसकी शुरुआत तो हफ़्तों पहले ऑनलाइन ही हो चुकी थी। पिछले कुछ दिनों से इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर लगातार वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे थे, जिन पर हैशटैग ‘#NepoKids’ ट्रेंड कर रहा था।
इन वीडियो में नेपाल के सीनियर नेताओं के बेटे-बेटियाँ अपने महँगे Gucci हैंडबैग, प्राइवेट जेट और विदेशी विश्वविद्यालयों की डिग्रियाँ दिखाते नजर आए। यह चमक-धमक उस नेपाल से बिलकुल अलग तस्वीर पेश कर रही थी, जहाँ आम गरीब परिवार रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
एक पोस्ट में तो साफ लिखा था – “नेपो-बच्चे आलीशान जिंदगी जीते हैं, वो भी उस पैसे पर जो उनके भ्रष्ट माता-पिता जनता से लूटते हैं, वही पैसा जो प्रवासी मजदूरों की पसीने से भीगी मेहनत से कमाकर नेपाल भेजा जाता है।”
In Nepal, a hashtag turned into a movement. #NepoKids started trending as young people began calling out the unfair privileges enjoyed by politicians’ children — flaunting Gucci, global degrees, and private jets, while ordinary Nepali youth face joblessness, inequality, and the… pic.twitter.com/ud4ueT7MYQ
कई युवाओं के लिए यह ट्रेंड महज मजाक नहीं था, बल्कि एक आईना था जिसने नेपाल की राजनीतिक जमात के बच्चों की अय्याशी को उजागर कर दिया। जहाँ सत्ता परिवारों के वारिस आराम से विदेशों में पढ़ाई और ऐशो-आराम में डूबे हैं, वहीं आम नेपाली युवा बेरोजगारी और अनिश्चित भविष्य से जूझ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भड़का यह गुस्सा धीरे-धीरे सड़कों पर फूट पड़ा और देखते ही देखते यह आंदोलन नेपाल के इतिहास के सबसे बड़े जन-आंदोलनों में बदल गया।
दो दुनिया, एक देश
एक तरफ नेपाल के असरदार नेताओं के बच्चे विदेशों में बसे हैं, बिजनेस क्लास में उड़ान भरते हैं, ऊँची-ऊँची इमारतों में रहते हैं और ऐसी जिंदगी जी रहे हैं जिसका खर्च असल में नेपाल की जनता की गाढ़ी कमाई से उठाया जा रहा है।
Two Nepals, One Reality
On one side, nepo kids enjoying luxury from corrupt money. On the other, ordinary citizens struggling for basic survival.
Nepali leaders could take a lesson from Indian politicians—where luxury is often enjoyed in private, while the public sees only a… pic.twitter.com/p65tEFlRBj
दूसरी तरफ करोड़ों नेपाली नागरिक बुनियादी जरूरतों के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, सस्ती शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ और सुरक्षित रोज़गार तक उनके लिए सपना बन गया है। हालात इतने खराब हैं कि युवा अपने घर-परिवार का पेट पालने के लिए विदेशों में मज़दूरी करने को मजबूर हैं।
इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट
सोशल मीडिया पर लगातार ऐसे वीडियो वायरल हुए जिन पर हैशटैग #NepoKid, #NepoBabies, #PoliticiansNepoBabyNepal चलने लगे। इनमें सीधा सवाल उठाया गया, क्या नेताओं के बच्चों की सफलता उनकी मेहनत का नतीजा है या फिर परिवार की मलाई खाने का? कई जगहों से तो सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन की अपीलें भी सामने आईं।
What began as an online trend has now become the core of a national uprising. The hashtag #NepoKids exposed the lavish lifestyles of political elites' children, revealing a stark contrast to the struggles of ordinary Nepali youth facing unemployment and economic hardship.
अब यह खाई इतनी चौड़ी हो चुकी है कि उसे नजरअंदाज करना नामुमकिन हो गया है। युवाओं के लिए यह ईर्ष्या का नहीं, बल्कि न्याय और अस्तित्व का सवाल बन गया है। उनका सीधा सवाल है, आख़िर कब तक वे नेताओं के बच्चों को ऐशो-आराम की जिंदगी जीते देखते रहेंगे जबकि खुद न्यूनतम जरूरतों के लिए संघर्ष करते रहेंगे?
एक पीढ़ी जो चुप रहने से इनकार करती है
यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा। नेपाल का युवा सालों से उपेक्षा झेल रहा है। चाहे पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की सरकार रही हो या उसके पहले की, किसी ने भी जनता से संवाद बनाने या अपने वादे पूरे करने की जहमत नहीं उठाई। जनता की चिंताओं को बार-बार दरकिनार किया गया और सुधारों के नाम पर किए गए वादे कभी जमीनी हकीकत नहीं बने।
लेकिन इस बार सरकार ने जब सोशल मीडिया पर बैन लगाकर आवाज दबाने की कोशिश की तो दाँव उल्टा पड़ गया। पहले से ही भ्रष्टाचार और परिवारवाद से नाराज Gen-Z ने साफ कर दिया, अब बहुत हो चुका।
युवाओं ने सिर्फ बैन का विरोध नहीं किया, बल्कि इसे अपने आंदोलन का झंडा बना दिया, एक ऐसा आंदोलन जो भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सत्ता के रसूख़दार वर्ग की अय्याशियों को जड़ से खत्म करने की माँग कर रहा है।
एक विरोध प्रदर्शन जिसने रातों रात नेपाल को बदल दिया
हैशटैग #NepoKids अब नेपाल के इस जनविद्रोह का चेहरा बन चुका है। जो बहस ऑनलाइन शुरू हुई थी, वही आज राजनीतिक भूकंप में बदल गई है। प्रदर्शन इतने प्रचंड हुए कि प्रधानमंत्री समेत कई मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा। यह साफ बताता है कि जनता का गुस्सा किस कदर फूट पड़ा है।
मौतों का आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है और हजारों लोग घायल हो चुके हैं। राजधानी काठमांडू में सेना की मौजूदगी यह साबित करती है कि हालात कितने गंभीर हैं। लेकिन एक सच यह भी है कि इस आंदोलन ने नेपाल की राजनीति की तस्वीर हमेशा के लिए बदल दी है।
डिजिटल युग में यह साबित हो गया कि एक हैशटैग सरकार गिरा सकता है और जिस पीढ़ी को कभी ‘बहुत छोटी’ कहकर नजरअंदाज़ किया जाता था, वही आज एक न्यायपूर्ण देश की लड़ाई की अगुवाई कर रही है।
अगर इन प्रदर्शनों की गहराई में जाएँ तो एक साफ सच्चाई सामने आती है, नेपाल के युवा केवल सोशल मीडिया बैन का जवाब नहीं दे रहे थे। वे उन दशकों की नाराज़गी का हिसाब माँग रहे थे, जिसमें भ्रष्टाचार थमा नहीं, नेता जनता के पैसों को अपनी जागीर समझकर लूटते रहे और सियासी घरानों के बच्चे विदेशों में ऐशो-आराम की जिंदगी दिखाते रहे, जबकि आम नेपाली अपने ही देश में बुनियादी जरूरतों के लिए तरसते रहे।
आख़िरकार, यह गहरी खाई गुस्से के विस्फोट में बदल गई। अनसुने रहने से तंग आकर GenZ सड़कों पर उतर आया, सिर्फ बैन के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, परिवारवाद और सत्ता के रसूख़दारों की अय्याशी को खत्म करने की माँग के लिए।
(मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में श्रीति सागर ने लिखी है, इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है)
मद्रास हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप लगाया था। इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) को कोर्ट ने न सिर्फ खारिज किया, बल्कि याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला कॉन्ग्रेस के ‘वोट चोरी’ के झूठे प्रचार को बेनकाब करता है और भारत के चुनावी प्रक्रिया पर जनता के भरोसे को मजबूत करता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला वकील वी. वेंकटा सिवकुमार ने दायर किया था, जिसमें माँग की गई थी कि चुनाव आयोग को राहुल गाँधी की ओर से 7 अगस्त 2025 को पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन में उठाए गए आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया जाए।
राहुल गाँधी ने इस प्रेजेंटेशन में दावा किया था कि 2024 के लोकसभा चुनावों में वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हुई और इस बात को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी 13 अगस्त 2025 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोहराया था। याचिका में माँग की गई थी कि चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट का डेटा सार्वजनिक करना चाहिए और इस मामले की जाँच की स्थिति बतानी चाहिए।
लेकिन मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्रा मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने इस याचिका को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद करार दिया। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह से भ्रामक है और इसमें कोई ठोस सबूत या स्वतंत्र जाँच का आधार नहीं है। कोर्ट ने साफ कहा कि याचिका में सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की बातें हैं, जो कुछ प्लेटफॉर्म्स पर कही गईं, लेकिन इनके पीछे कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं।
मद्रास हाई कोर्ट का सख्त रुख
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस याचिका में कोई ठोस सामग्री या विस्तृत जानकारी नहीं है। यह एक अस्पष्ट और सामान्य शिकायत है, जिसमें कोर्ट से गहन जाँच की माँग की गई, जो उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि चुनाव आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का कोई आदेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह उसकी जिम्मेदारी है कि वह अपनी जाँच और फैसले खुद करे।
इसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जो तमिलनाडु स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को एक महीने के अंदर जमा करना होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले में मेरिट पर कोई राय नहीं दी गई है और चुनाव आयोग को अपने फैसले लेने की आजादी बरकरार रहेगी।
कॉन्ग्रेस का वोट चोरी प्रोपेगेंडा बेनकाब
यह फैसला कॉन्ग्रेस के ‘वोट चोरी’ के दावे पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट करके इस फैसले को कॉन्ग्रेस के झूठे प्रचार का पर्दाफाश बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी का पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन विदेश में तैयार किया गया था, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। अमित मालवीय ने कहा कि कोर्ट ने याचिका को भ्रामक, अस्पष्ट और सबूतों से खाली करार दिया है। साथ ही 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाकर कोर्ट ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक हितों के लिए चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
Another blow to Congress’s “Vote Chori” propaganda.
After it was revealed that Rahul Gandhi’s fake PowerPoint on “Vote Chori” was cobbled together in a foreign land, raising questions on stakeholders involved, here comes another setback ⬇️
अमित मालवीय ने आगे कहा कि यह फैसला 2024 के लोकसभा चुनावों की निष्पक्षता और बीजेपी की ऐतिहासिक जीत की वैधता को मजबूत करता है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी बेकार की कानूनी लड़ाइयों और प्रचार में समय बर्बाद कर रही है, जबकि बीजेपी शासन, स्थिरता और विकास पर ध्यान दे रही है।
मद्रास हाई कोर्ट के फैसले से कॉन्ग्रेस बेनकाब
मद्रास हाई कोर्ट के इस फैसले से कॉन्ग्रेस की किरकिरी हुई है। राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी ने जो प्रोपेगेंडा चलाया था, वह कोर्ट में टिक नहीं सका। हालाँकि राहुल गाँधी को चुनाव आयोग ने 7 दिनों का समय दिया था, लेकिन राहुल गाँधी की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही हलफनामा दाखिल किया।
मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला कॉन्ग्रेस के ‘वोट चोरी’ के दावों पर करारा प्रहार है। 1 लाख रुपए का जुर्माना और याचिका को खारिज करना साफ संकेत है कि बिना सबूत के राजनीतिक साजिशें नहीं चलेगी। यह फैसला न सिर्फ कॉन्ग्रेस के प्रचार को नेस्तनाबूद करता है, बल्कि भारत के लोकतंत्र की मजबूती को भी दिखाता है। अब सवाल यह है कि क्या कॉन्ग्रेस अपने झूठे अभियान को बंद करेगी, या फिर और बेबुनियाद दावों के साथ जनता को भ्रमित करने की कोशिश करेगी? समय ही इसका जवाब देगा।
हरियाणा के नूहं जिले में एक हिंदू महिला का धोखे से धर्म परिवर्तन करवाने और उसका शारीरिक व मानसिक शोषण करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में आजम नाम के मुस्लिम व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
यह गिरफ्तारी हरियाणा के नए कानून ‘गैरकानूनी धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम 2022’ के तहत की गई है। नूहं जिले में इस कानून के तहत यह पहली कार्रवाई है।
क्या है मामला?
पीड़िता का नाम शीला उर्फ कंचन है। वह उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के धनपुरा गाँव की रहने वाली है और पिछले कई सालों से अपने दो बच्चों के साथ हरियाणा के नूहं में रह रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2008 में शीला की शादी छुट्टन नाम के व्यक्ति से हुई थी, लेकिन छुट्टन की नशे की लत और आपराधिक गतिविधियों के चलते उसका शादीशुदा जीवन खराब हो गया।
छुट्टन एक हत्या के केस में जेल चला गया और शीला को बच्चों समेत अकेला छोड़ दिया। इसके बाद शीला मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करती रही। 2020 में शीला की मुलाकात नूहं में रहने वाले मुस्लिम व्यक्ति आजम से हुई। आजम ने मदद और बच्चों की देखभाल का भरोसा दिया।
आजम ने अपने प्रेमजाल में फँसाकर शीला का भरोसा जीता। फिर वह शीला और बच्चों को नोएडा, पानीपत और भिवाड़ी लेकर गया और किराए पर रखा। शीला ने आरोप लगाया कि आजम ने 2020 में मौलाना से जबरन धर्मांतरण कराया।
मौलाना ने उसे कलमा पढ़वाया और शीला नाम बदलकर ‘साईबा’ रख दिया। इसके बाद आजम ने जबरन निकाह भी किया। निकाह के बाद आजम हर रोज प्रताड़ित करता था। घर में रखी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ी और मारपीट भी की।
आजम ने बुर्का पहनने, नमाज पढ़ने और तबलीगी जमात में जाने का भी दबाव बनाया और जबरन मांस खिलाया। शीला को बाद में पता चला कि आजम पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे भी है।
जब शीला ने आजम के गाँव मालब जाकर उसके परिवार से बात करनी चाही तो वहाँ हमला कर दिया। किसी तरह से जान बचाकर शीला नूहं वापस आई, लेकिन आजम भी वहाँ आ गया और फिर उसके साथ रहने लगा।
पुलिस की कार्रवाई
शीला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित महिला का कहना है कि आजम उसकी मजदूरी की कमाई छीन लेता था और लगातार शारीरिक व मानसिक शोषण करता था। उसने बताया कि आजम के साले कल्लू और हक्कू उसे फोन पर अश्लील बातें करते और निकाह का दबाव डालते थे।
शिकायत के बाद नूहं के DSP और एसपी के निर्देश पर आजम को गिरफ्तार कर लिया गया है। SP राजेश कुमार ने बताया कि यह नूहं में धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत पहली गिरफ्तारी है और मामले की जाँच की जा रही है।
मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के नवानगर इलाके में पिछले 10 साल से धर्म परिवर्तन का नेटवर्क चल रहा था। मंगलवार (9 सितंबर 2025) की रात पुलिस ने छापा मारा और मौके से आपत्तिजनक ईसाई धर्म संबंधी और किताबें बरामद की। मामले में पुलिस ने नाथन नायक, मीणा नायक, अर्पित नायक, पिंकी सोनवानी और नंदन शाह को गिरफ्तार किया है। सभी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
यह पूरा मामला नवानगर की बसौर बस्ती से जुड़ा है, जहाँ नाथन नायक और उसका परिवार रह रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये लोग आसपास के गरीब, दुखी और जरूरतमंद लोगों को पढ़ाई, पैसे और इलाज जैसी चीजों का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर करते थे।
बस्ती वालों के अनुसार, हर रविवार, बुधवार और शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग वहाँ जमा होते थे। जैसे ही सब अंदर जाते, गेट बंद कर दिया जाता और अंदर क्या होता, किसी को पता नहीं चलता।
स्थानीय महिला रेणु देवी ने बताया कि उनके बेटे की मौत के बाद परिवार परेशान था, तभी ये लोग उनके पास आने लगे, हाल-चाल पूछने लगे और फिर यीशू की प्रार्थना में बुलाने लगे। उन्होंने साफ मना कर दिया, लेकिन कई दूसरे लोग लालच में आ गए और धर्म परिवर्तन कर लिया।
रेणु देवी ने कहा, “ये लोग मेरे ऊपर निगाह रख रहे थे। आते-जाते मुझसे हाल पूछते। कुछ दिन बाद मेरे पास बैठकर मन बहलाने की कोशिश करने लगे। हफ्ता भर ही हुआ होगा कि धर्म-कर्म की बातें करते। वो कहते- भगवान ने बहुत बड़ी नाइंसाफी कर दी। येशू मेरी मदद करेंगे। वे बहुत दयालु हैं। मुझसे इन लोगों ने प्रार्थना में आने के लिए कहा। बोलते थे कि हम पैसा-धेला सब से मदद करेंगे।”
नाथन पहले से ही ईसाई बन चुका था और सिंगरौली में आकर सिलाई की दुकान खोली थी। फिर धीरे-धीरे उसने ढाई हजार वर्ग फीट जमीन पर कब्जा कर चर्चनुमा बिल्डिंग बना ली। वहीं पर बैठकर वो और उसका परिवार धर्म परिवर्तन का काम करते थे। उसकी पत्नी मीणा महिलाओं को और बेटा अर्पित युवाओं को टारगेट करता था।
बस्ती के लोगों का कहना है कि करीब 200 से ज्यादा लोग ईसाई बन चुके हैं। यहाँ तक कि कोयला खदान में काम करने वाले कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी प्रार्थना सभा में शामिल होते थे।
पुलिस अब यह भी जाँच कर रही है कि क्या कॉलेजों में भी युवाओं को टारगेट किया गया और धर्म परिवर्तन के लिए पैसों का इस्तेमाल हुआ। इसलिए उनके बैंक अकाउंट्स की भी जाँच की जा रही है। फिलहाल घर और दुकान सील कर दी गई है और मामले की गहराई से जाँच चल रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, नवानगर थाना प्रभारी कपूर त्रिपाठी ने कहा,” सूचना मिली थी कि एक बस्ती में कुछ लोग स्थानीय लोगों को बरगलाकर अवैध रूप से उनका धर्मांतरण करा रहे हैं। इस सूचना पर तुरंत एक्शन लिया गया। मौके पर जाकर देखा तो करीब 100 लोग वहां इकट्ठा थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 5 लोगों को हिरासत में लिया। इन आरोपितों से पूछताछ जारी है।”
असम सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बुधवार (10 सितंबर) को कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई के कथित पाकिस्तान कनेक्शन की जाँच के बाद अपनी 96 पेज की रिपोर्ट मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को सौंपी।
रिपोर्ट लोक सेवा भवन में SIT के सदस्यों मुन्ना प्रसाद गुप्ता, रोजी कलिता, प्रणबज्योति गोस्वामी और मैत्रेयी देका की मौजूदगी में दी गई।
CM सरमा ने X पर एक पोस्ट में कहा कि असम कैबिनेट ने ‘भारत विरोधी गतिविधियों’ की जाँच के लिए SIT बनाई थी और ‘हैरान करने वाले तथ्य’ सामने आए हैं।
उन्होंने लिखा, “17 फरवरी 2025 को असम कैबिनेट ने एक पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और उसके साथियों की भारत विरोधी गतिविधियों की जाँच के लिए SIT बनाई थी। इस गहन जाँच के दौरान SIT ने ऐसे चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं जो देश की संप्रभुता को कमजोर करने की बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि जाँच में यह भी पता चला कि पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने असम के एक सांसद की पड़ोसी देश की यात्रा में मदद की।
उन्होंने लिखा, “SIT ने एक ब्रिटिश नागरिक की संलिप्तता भी पाई, जो एक भारतीय सांसद से शादीशुदा है, और वह अली तौकीर शेख की नापाक गतिविधियों में शामिल है। इसके अलावा जाँच में यह भी खुलासा हुआ कि पाकिस्तान सरकार के गृह मंत्रालय ने असम के एक माननीय सांसद की उनके देश की यात्रा में मदद की।”
On 17th February, 2025 the Assam Cabinet constituted a Special Investigation Team (SIT) to investigate the anti-India activities of one Pakistani national, Ali Tauqeer Sheikh, and his associates.
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य सरकार SIT की रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन करेगी। CM सरमा ने दावा किया कि गोगोई के परिवार के चार में से तीन लोग विदेशी नागरिकता रखते हैं।
SIT की रिपोर्ट के तथ्य जल्द ही क़ानूनी प्रक्रिया के तहत सार्वजनिक किए जाएंगे। उनके नेता सच के डर से घबराए हुए हैं, लेकिन सत्य की विजय होकर ही रहेगी।
उन्होंने X पर लिखा, “असम सरकार अब SIT की रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन करेगी और इसे राज्य कैबिनेट के सामने रखेगी। कैबिनेट में चर्चा के बाद जाँच में मिली जानकारी को सार्वजनिक किया जाएगा।”
इस बीच, कॉन्ग्रेस नेता गौरव गोगोई ने दावा किया कि CM सरमा के आरोप ‘बनावटी कहानी’ पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा, “वह (असम CM हिमंता बिस्वा सरमा) सोचते हैं कि असम के लोग इतने मूर्ख हैं कि उनके बेतुके आरोपों पर विश्वास कर लेंगे। वह असम के लोगों की बुद्धि और समझ का सम्मान नहीं करते। असम के लोग जानते हैं कि उन्होंने सिर्फ आरोपों के आधार पर एक बनावटी कहानी बनाई है ताकि अपनी सरकार के भ्रष्ट शासन को छिपा सकें और यह दिखा सकें कि उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी का इस्तेमाल अपने परिवार को अमीर बनाने, भारी संपत्ति और अवैध धन इकट्ठा करने के लिए किया।”
जैसा कि OpIndia ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में बताया था कि गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोल्बर्न दिल्ली के क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क (CDKN) में प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। हैरानी की बात है कि पाकिस्तानी मूल का अली तौकीर शेख CDKN के एशिया के लिए रीजनल डायरेक्टर हैं। वो भारत के खिलाफ खासकर अपने X अकाउंट के जरिए फेक न्यूज फैलाता रहा है। उसने दिल्ली दंगों का मुद्दा संसद में उठाने के लिए गोगोई का समर्थन भी किया था।
गौरतलब है कि हिमंता बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि कोलबर्न 2011-15 के बीच क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क (CDKN) और LEAD जैसे संगठनों के लिए काम करते हुए अधिकतर समय पाकिस्तान में रहीं। सरमा ने दावा किया कि कोलबर्न पाकिस्तान सरकार की एक टास्क फोर्स में शामिल थीं, जो कथित तौर पर ISI का मुखौटा थी।
सरमा ने बार-बार उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। सरमा ने इस साल फरवरी में दावा किया था, “ISI से संबंधों के आरोप, युवाओं को पाकिस्तान दूतावास में ले जाकर ब्रेनवॉश और कट्टरपंथी बनाने, पिछले 12 सालों से भारतीय नागरिकता न लेने, धर्म परिवर्तन के कार्टेल में हिस्सा लेने और जॉर्ज सोरोस जैसे बाहरी स्रोतों से राष्ट्रीय सुरक्षा को अस्थिर करने के लिए फंड लेने जैसे गंभीर सवालों का जवाब देना होगा। ये चिंताएँ नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं।”
सरमा ने कोलबर्न की ब्रिटिश नागरिकता और उनके सुपरवाइजर अली तौकीर शेख के भारत विरोधी प्रोपेगैंडा का भी जिक्र किया। सरमा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या गौरव गोगोई के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के कार्यकाल में ISI का असम के मुख्यमंत्री कार्यालय तक दखल था।
गृह मंत्री अमित शाह ने 29 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर पर संसदीय चर्चा के दौरान यही बात कही थी। उन्होंने गोगोई की ओर मुखातिब होते हुए कहा था, “आप कई बार पाकिस्तान गए हैं, लेकिन क्या कभी बॉर्डर वाले इलाकों में गए हैं। क्या आप समझते हैं कि हमारे सैनिक किस परिस्थितियों में काम करते हैं।”
कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार ने हिंदू कार्यकर्ता पुनीथ केरहल्ली को बिना किसी ताजा अपराध के सीधे जेल भेज दिया गया। पुलिस ने उन्हें 10 सितंबर 2025 को ‘आगे होने वाले अपराध रोकने’ के नाम पर गिरफ्तार किया। वहीं, मोहम्मद जुबैर ने इस गिरफ्तारी को ‘एहतियाती कार्रवाई’ बताया है।
इसके अलावा, बेंगलुरु पुलिस हिंदू कार्यकर्ता पुनीथ केरहल्ली से जबरन एक ऐसा बॉन्ड साइन करवा रही थी, जिसमें लिखा हो कि वे आगे किसी भी ‘आपराधिक गतिविधि’ नहीं करेंगे। लेकिन हिंदू कार्यकर्ता पुनीथ ने इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ बताते हुए साइन करने से मना कर दिया। फिर कोर्ट में पेश करके 7 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वहीं, हिंदू संगठनों और बीजेपी का आरोप है कि यह कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ‘हिंदू विरोधी’ नीति का हिस्सा है और सरकार जानबूझकर हिंदूवादी आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है। मोहम्मद जुबैर के ट्विट पर लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें लिखा कि क्या होगा अगर भाजपा तुझे किसी भी बड़े या छोटे आयोजन से पहले एहतियात के तौर पर गिरफ्तार करना शुरू कर दें?? तु भी एक कथित अपराधी हैं और आतंकियों से कनेक्शन भी है।
मोहम्मद जुबैर के ट्विट पर लोगों की प्रतिक्रिया
Karnataka: Hindu activist Puneeth Kerehalli has been arrested without any prior notice. Congressi trolls are shamelessly justifying it as "preventive measures"…
This is exactly how Congress silences pro-Hindu voices.
पुलिस की ‘एहतियात’ या कॉन्ग्रेस की हिंदू विरोधी चाल?
पुनीथ केरहल्ली पर पहले से कुछ केस दर्ज हैं, जो ज्यादातक गौ-तस्करी रोकने और हिंदू हितों की आवाज उठाने से जुड़े हैं। लेकिन इस बार कोई नई शिकायत नहीं थी। न कोई हिंसा हुई थी और ना ही कोई बयानबाजी। फिर भी उन्हें ‘BNS की धारा 127’ के तहत गिरफ्तार किया गया। यह धारा आमतौर पर तब लगाई जाती है जब किसी को समाज के लिए ‘खतरा’ माना जाए।
जब पुलिस ने पुनीथ को कोर्ट में पेश किया, तो उनसे कहा गया कि एक ‘अंडरटेकिंग‘ दें, जिसमें यह स्वीकार करें कि वे आगे से कोई आपराधिक काम नहीं करेंगे और शांति भंग नहीं करेंगे। पुनीथ ने कहा कि उन्होंने कोई अपराध किया ही नहीं, तो ऐसा बॉन्ड क्यों साइन करें। पुनीत ने इसे नकारा और उसी वजह से उन्हें सीधे जेल भेज दिया गया।
ये वही कॉन्ग्रेस सरकार है, जो खुलेआम हिंदू त्योहारों और भावनाओं पर रोक लगाने की कोशिश करती रही है। लेकिन अब वह एक कदम आगे बढ़ गई है, अगर कोई हिंदू आवाज उठाता है, तो उसे बिना अपराध किए भी जेल भेजा जा सकता है।
मुस्लिम नेता का भड़काऊ बयान, लेकिन सरकार खामोश
इसी दौरान एक और मामला सामने आया। बीजेपी नेता सीटी रवि ने एक गणेश विसर्जन कार्यक्रम में मंच से जोश में बयान दिया, जिस पर तुरंत FIR दर्ज हो गई। जबकि कई कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं के भड़काऊ बयान आज तक बिना एक्शन के लटक रहे हैं।
कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सरकार अब साफ तौर पर हिन्दू कार्यकर्ताओं को दबाने की नीति पर काम कर रही है। पुनीथ केरहल्ली का मामला उसी का ताजा उदाहरण है, न कोई नया केस, न वारंट। और जब कोई हिंदू सिर उठाकर बोलता है, तो उसे कॉन्ग्रेस सरकार ‘एहतियातन’ जेल भेज देती है।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा से कामरान कुरैशी उर्फ समर खान को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गुरुवार (11 सितंबर 2025) को गिरफ्तार किया। उसे एक पैन इंडिया टेरर मॉड्यूल (देशभर में फैले आतंकी नेटवर्क) से जुड़े होने के आरोप में पकड़ा गया है।
इस मामले में अब तक ISIS से जुड़े कुल पाँच आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि ये लोग किसी बड़े त्योहार से पहले भारत के किसी शहर में धमाका करने की साजिश रच रहे थे।
क्या है पूरा मामला
कामरान कुरैशी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह भगोड़े जाकिर नाइक और तारिक जमील, तारिक मसूद जैसे कट्टरपंथी मौलवियों के वीडियो देखकर प्रभावित हुआ। इन वीडियो और कट्टरपंथी कंटेंट के जरिए उसकी ब्रेनवॉशिंग हुई और वह आतंक की ओर बढ़ा। वह गजवा-ए-हिंद से जुड़ी विचारधारा का समर्थन करने वाले एक वॉटस्ऐप ग्रुप का हिस्सा था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कामरान की ऑनलाइन मुलाकात असरार दानिश नाम के एक युवक से हुई, जो झारखंड का रहने वाला है। असरार दानिश इस पूरे आतंकी मॉड्यूल का मास्टरमाइंड है और पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में रहता है।
असरार को ग्रुप में ‘सीईओ’ कहा जाता है। उसे बुधवार (10 सितंबर 2025) को रांची के लोअर बाजार थाना क्षेत्र के न्यू तबारक लॉज से गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले में एटीएस अब और सक्रिय हो गई है। असरार की गिरफ्तारी के बाद आधा दर्जन संदिग्ध व्यक्तियों का सत्यापन कर रही है। असरार ने ही कामरान को पैसे देकर और दूसरों को जोड़ने का काम सौंपा। वे खिलाफत (इस्लामी शासन) की सोच को बढ़ाने के लिए जमीन खरीदकर ट्रेनिंग कैंप शुरू करने की योजना बना रहे थे।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
बुधवार (10 सितंबर 2025) की सुबह 5:30 बजे दिल्ली पुलिस की टीम ने ब्यावरा की शहीद कॉलोनी में छापा मारा। कामरान को बिस्तर से उठाकर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उसका मोबाइल भी जब्त कर लिया गया।
पुलिस को वहाँ मजहबी किताबें भी मिली। कामरान के अब्बू अब्दुल रशीद का कहना है कि कामरान किसी गलत गतिविधि में शामिल नहीं था। उसके अब्बू ने कहा, “वह कभी मैकेनिक की दुकान में काम करता था, कभी वकील के यहाँ 4-5 हजार रुपये की नौकरी करता था। कामरान अगर आतंकी गतिविधियों में होता तो हमसे 100 रुपये की मदद क्यों माँगता?”
पुलिस को कामरान के मोबाइल फोन में संदिग्ध चैट और डेटा मिला है, जिसमें आतंक से जुड़ी बातचीत के सबूत हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, झारखंड से गिरफ्तार आतंकी आफताब नासिर कुरैशी से पूछताछ में कामरान का नाम सामने आया था।
असरार दानिश के जरिए पाकिस्तान से जुड़े लोगों की मदद से भारत में खिलाफत मॉड्यूल लागू करने की कोशिश हो रही थी। दिल्ली पुलिस के अनुसार, ये ग्रुप देश के युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर उन्हें आतंक की राह पर लाने की योजना बना रहा था। कामरान कुरैशी की गिरफ्तारी से दिल्ली पुलिस ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया है। मामले की जाँच जारी है।
जबलपुर की शिवराज बस्ती में पोस्टर लगे हैं, जिसमें लिखा है कि ‘यह मकान बिकाऊ है’। बस्ती के लोगों ने यह कदम कुछ अनजान और अवैध घुसपैठियों से परेशान होकर लगाया है। बस्ती के लोग इन्हें रोहिंग्या या संदिग्ध बता रहे हैं। इन लोगों पर गंदगी फैलाने, चोरी करने और अभद्र व्यवहार करने के आरोप हैं। हालाँकि, पुलिस की जाँच में कुछ और ही बात सामने आई है।
क्या है पूरा मामला?
दैनिक भास्कर की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिवराज बस्ती में रहने वाले कुछ परिवारों ने बताया है कि पिछले कुछ समय से करीब 50 लोग यहाँ आकर रह रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर खानाबदोश (जिनका कोई स्थायी निवास नहीं) हैं। कुछ लोग झोपड़ियाँ बनाकर रह रहे हैं और कुछ किराए पर कमरे लिए हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि ये लोग भीख माँगते हैं, गंदगी फैलाते हैं और उपद्रव कर माहौल को खराब करते हैं। जब कुछ लोगों ने इनका विरोध किया तो अवैध घुसपैठियों ने गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। इसी वजह से कई परिवार अपने घर छोड़कर चले गए हैं और घरों के बाहर लिखवा दिया है ‘मकान बेचना है’। यह मामला 5 सितंबर 2025 के आस-पास का बताया जा रहा है। इसका एक वीडियो यूट्यूब पर भी मिला है, जिसकी ग्राउंड रिपोर्टिंग देखी जा सकती है।
बस्ती में बने दो गुट
अवैध घुसपैठियों को लेकर शिवराज बस्ती के लोगों में भी दो गुट बन गए हैं। एक गुट इन्हें हटाना चाहता है और मानता है कि ये लोग बांग्लादेशी या रोहिंग्या हैं और इनसे खतरा है। वहीं, जिन लोगों ने घुसपैठियों को किराए पर कमरे दिए हैं, वे इनका समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये लोग अपना कमाते-खाते हैं और कोई परेशानी पैदा नहीं करते हैं। यह पूरा मामला अब पुलिस की जाँच के दायरे में आ गया है।
बस्ती में रहने वाली एक महिला ने बताया कि वो इस बस्ती में कई सालों से रह रही हैं। इसके अलावा आधार कार्ड बारिश में बह गया और लोग उन्हें चोरी करने वाला, गंदगी फैलाने वाला बताते हैं।
पुलिस की जाँच और विरोधाभासी बयान
इन पोस्टरों की जानकारी मिलने पर कुछ हिंदूवादी संगठनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जाँच शुरू की तो पता चला कि यहाँ रहने वाले लोग महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के हैं और खानाबदोश हैं। पुलिस ने बताया कि ये लोग कहीं से भगाए नहीं गए हैं, बल्कि अपनी मर्जी से यहाँ रह रहे हैं।
बिहार के दरभंगा में राहुल गाँधी की वोट अधिकार यात्रा के दौरान मंच से रिजवी उर्फ राजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ की गाली दी थी। मामले का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था। हालाँकि इतने से कॉन्ग्रेस को चैन नहीं मिल सका है। अब कॉन्ग्रेस पार्टी ने AI का इस्तेमाल कर एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ का अपमान किया है।
AI से बनी यह वीडियो बिहार कॉन्ग्रेस (Bihar Congress) के एक्स हैंडल से पोस्ट की गई है। वीडियो में पीएम मोदी का AI मॉडल कह रहा है, “आज की वोट चोरी डन हो गई, अब जाता हूँ सोने।”
इसके बाद सपने में उनकी माँ आकर कहती हैं, “अरे बेटा पहले तो तुमने मुझे नोटबंदी की लंबी लाइनों में खड़ा किया, तुमने मेरे पैर धोने का रील बनवाया और अब बिहार में मेरे नाम पर राजनीति कर रहे हो। तुम मेरे अपमान के बैनर-पोस्टर छपवा रहे हो, तुम फिर से बिहार में नौटंकी करने की कोशिश कर रहे हो। राजनीति के नाम पर कितना गिरोगे?”
कॉन्ग्रेस की ओछी हरकत के बाद इस वीडियो को लेकर भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ का अपमान कर रही है। यह अब गाँधी की कॉन्ग्रेस नहीं रही, यह ‘गालियों की कॉन्ग्रेस’ बन गई है।
Far from having remorse For abusing PM’s Mother
Congress not only justified Defended the accused with lies Tariq Anwar too defended
And now Bihar Congress crossed all limits with a disgusting video
This party has become GAALIWADI instead of Gandhiwadi
उन्होंने एक्स पर लिखा, “प्रधानमंत्री की माँ को गाली देने का कोई पछतावा नहीं। कॉन्ग्रेस ने न सिर्फ झूठ बोलकर आरोपित का बचाव किया, बल्कि तारिक अनवर का भी बचाव किया और अब बिहार कॉन्ग्रेस ने एक घिनौने वीडियो के साथ सारी हदें पार कर दीं। यह पार्टी गाँधीवादी की बजाय गालीवादी हो गई है। महिला और मातृ शक्ति का अपमान कॉन्ग्रेस की पहचान है।”
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस वीडियो की कड़ी निंदा की है। उन्होंने एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “राहुल गाँधी के इशारे पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने माननीय प्रधानमंत्री जी की दिवंगत माँ का मजाक उड़ाया है। कुछ दिन पहले कॉन्ग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माँ को गाली दी थी।”
On the instruction of Rahul Gandhi, Congress party has mocked Honorable PM @narendramodi Ji's late mother.
Few days back Congress had abused PM Narendra Modi's late mother.
Congress's "Shahi Parivar* is insulting mothers and sisters of Bharat.
उन्होंने आगे लिखा, “कॉन्ग्रेस का ‘शाही परिवार’ भारत की माताओं और बहनों का अपमान कर रहा है। यह न केवल असंवेदनशील है, बल्कि यह देखना भी घिनौना है कि एक पार्टी भारत के गरीबों से इतनी नफरत करती है। कॉन्ग्रेस महिला विरोधी है, कॉन्ग्रेस भारत के गरीबों से नफरत करती है।”
कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए ऐसी गिरी हुई हरकतें करना कोई बड़ी बात नहीं है और बार-बार पीएम मोदी की माँ का ही नहीं बल्कि देश की हर माँ का अपमान कर रही है।
दरभंगा में राहुल गाँधी की वोट अधिकार यात्रा के मंच से पीएम मोदी की माँ को गाली दिए जाने की घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कॉन्ग्रेस और राजद पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा था, “मेरी माँ अब इस दुनिया में नहीं हैं। राजनीति से कोई लेना-देना न होने के बावजूद मेरी माँ को कॉन्ग्रेस-राजद के मंच से घिनौनी गालियाँ दी गईं। यह बेहद दुखद, दर्दनाक और व्यथित करने वाला है।”
पार्टी की इस हरकत को बीते अब ही कुछ ही दिन हुआ था कि फिर यह साबित कर दिया गया कि कॉन्ग्रेस से देश की माँ-बेटियों का सम्मान करने की उम्मीद करना ही गलत है, क्योंकि यह इनकी पहचान बन चुकी है।