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अलीगढ़ की एक विधवा ने CM योगी आदित्यनाथ से माँगी सपरिवार इच्छामृत्यु: गाँव के दबंगों पर प्रताड़ित करने का आरोप, बेटे को अगवा कर मूत्र पीने को किया मजबूर

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की एक महिला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे परिवार के साथ इच्छामृत्यु की इजाजत देने की माँग की है। महिला का आरोप है कि गाँव के कुछ दबंग उसके परिवार को प्रताड़ित कर रहे हैं। उसके बेटे को चार महीने पहले अगवा कर बुरी तरह पीटा गया। उसे मूत्र पीने को मजबूर किया गया।

आरोप है कि पड़ोस के ही एक दलित दबंग परिवार ने निखिल शर्मा का अपहरण कर उसकी पिटाई की और मूत्र पीने को मजबूर किया। 21 साल का निखिल कथित तौर पर अगवा किए जाने के करीब 4 महीने बाद अपने घर से 20 किलोमीटर दूर दोनों मिला। उसके दोनों हाथ बँधे थे। पुलिस ने इस मामले में कुल 9 लोगों पर FIR दर्ज की है। एक की गिरफ्तारी हुई है।

पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक घटना 24 फरवरी 2022 की है। मामला हरदुआगंज थानाक्षेत्र के गाँव बरोठा की है। मामले में FIR 11 अप्रैल 2022 को दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता निखिल की माँ राजकुमारी शर्मा हैं, जो विधवा हैं। शिकायत में उन्होंने कहा है, “आरोपित पक्ष रास्ते में जानवर बाँधते थे। जिसका विरोध मेरे बेटे ने किया। एक दिन दोनों पक्षों को पुलिस पकड़ कर ले गई और थाने में ग्राम प्रधान के आगे समझौता हो गया। वहाँ से लौटकर आने के बाद विपक्षियों ने एकजुट होकर मेरे बेटों के साथ मुझे और मेरी बेटी को सरिया और डंडों से मारा और हमारे साथ अभद्रता भी की।”

उन्होंने आगे बताया है, “उसी दिन (24 फरवरी) से मेरा बेटा निखिल गायब है। मेरी शिकायत थाने पर नहीं लिखी गई और न ही हमारा मेडिकल करवाया गया। विपक्षियों में सुरेश नाम का व्यक्ति पुलिसकर्मी है।” पीड़िता ने अपने बेटे के साथ किसी अनहोनी की आशंका भी जताई थी।

पीड़िता द्वारा दी गई नई शिकायत के मुताबिक इस घटना के लगभग 4 माह 6 दिनों के बाद उनका बेटा 30 जून 2022 को घर से लगभग 20 किलोमीर दूर मिला। शिकायत पत्र में कहा गया है, “मेरे बेटे को कैद में रखने के दौरान प्रताड़ना दी गई। उसे नशे की गोलियाँ खिलाकर पेशाब पिलाई गई और मारपीट की गई। वह मंजूरगढ़ी हाइवे के नजदीक मरणासन्न हालत मे हाथ बँधे हुए मिला था।”

मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र

पीड़िता ने पुलिस पर समझौते का दबाव बनाने का आरोप लगते हुए न्याय न मिलने पर स्वतंत्रता दिवस के दिन परिवार के साथ मुख्यमंत्री आवास के पास जान देने के बात कही है। इस मामले में दर्ज एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है।

पुलिस ने इस घटना में IPC की धारा 147, 148, 323, 504, 506, 452, 364 व 354 (ख) के तहत 7 पुरुषों और 2 महिलाओं को आरोपित किया है। पीड़ित के मुताबिक आरोपितों में अभी तक सिर्फ बंटी नाम के व्यक्ति की गिरफ्तारी 15 जून को हुई थी। वह 30 जून को जमानत पर बाहर आया। इसी दिन निखिल भी मिला था। निखिल की बहन नम्रता ने ऑपइंडिया से बताया कि बाकी आरोपित अभी खुलेआम खूम रहे हैं। उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है।

नम्रता ने 4 माह बाद मिले अपने भाई का वीडियो भी ट्वीट किया है जिस पर अलीगढ़ पुलिस ने मामले को पुराना बताते हुए कानूनी कार्रवाई जारी होने की बात कही है।

ऑपइंडिया ने अपहृत निखिल से बात की। निखिल ने कहा, “मेरे अपहरण के पहले आरोपित मनोज नाम के एक व्यक्ति को पीट चुके थे। मैं तो उसकी उलाहना ले कर गया था। यही बात उन सभी को रास नहीं आई। मेरे अपहरण के समय गाँव का प्रधान भी मौके पर मौजूद था। मुझे आँखों पर पट्टी बाँध कर न जाने कहाँ ले जाया गया था। मेरी रखवाली में एक ऐसे व्यक्ति को रखा गया था जो भावनाशून्य था और मुझसे कोई बात नहीं करता था। मुझको खाने में पारले बिस्किट दिया जाता था। मुझे पेशाब सुरेश ने पिलाया था जो UP पुलिस में सब इंस्पेक्टर है। 4 महीने बाद मुझे अचेत हालत में वे मेरे घर से 20 किलोमीटर दूर मुझे छोड़ कर चले गए। पुलिस इस मामले में संतोषजनक जाँच नहीं कर रही है, क्योंकि दूसरी तरफ पैसे वाले लोग हैं। आरोपित के घर में सब इंस्पेक्टर के साथ रोडवेज विभाग में कर्मचारी, खाद के व्यापारी और बिजली विभाग से रिटायर्ड लोग हैं।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO हरदुआगंज राजेश कुमार ने कहा, “हम पूरी निष्पक्षता से जाँच और कार्रवाई कर रहे हैं। घटना से जुड़े सभी सबूत जमा किए जा रहे हैं। पीड़ित के फोन कॉल डिटेल से भी हमें कुछ सुराग मिले हैं जिनको हम सार्वजानिक नहीं कर सकते। जल्द ही हम अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचकर मामले का सबूतों के साथ खुलासा करेंगे।”

4 जगह, 30000 किलो ड्रग्स राख: ₹100 करोड़ के मादक पदार्थ NCB ने जलाए, गृह मंत्री अमित शाह ने खुद देखा लाइव

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने शनिवार (30 जुलाई 2022) को 30 हजार किलो से ज्यादा ड्रग्स नष्ट किए। जलाए गए ड्रग्स की कीमत करीब 100 करोड़ रुपए है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीडियो के जरिए मादक पदार्थों को नष्ट होते देखा।

शाह चंडीगढ़ में एनसीबी की ओर से नशीली दवाओं की तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुँचे थे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने ड्रग्स को आतंकवाद से भी अधिक खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि आतंकी घटनाओं का नुकसान सीमित होता है, लेकिन ड्रग्स हमारी पीढ़ियों को बर्बाद कर देती है।

शाह ने ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया। कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाए बिना समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में कठोर कानून के लिए राज्यों के साथ बातचीत भी चल रही है। ड्रग्स से जुड़े मामलों के तेजी से निपटारे के लिए आधुनिक फोरेंसिक लैब भी खोले गए हैं।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ड्रग्स के विरुद्ध लड़ाई को मजबूती से लड़ रहा है। मोदी सरकार न भारत में ड्रग बनने देगी, न बाहर से भारत की सीमा में आने देगी और न ही यहाँ से कहीं बाहर जाने देगी।” सम्मेलन में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल भी मौजूद थे।

केंद्रीय गृह मंत्री के सामने एनसीबी की टीम ने दिल्ली, चेन्नई, गुवाहाटी और कोलकाता में मादक पदार्थों को नष्ट किया। एडीजीपी हरमीत सिंह ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए बताया है कि इससे पहले कभी गृह मंत्री के सामने देश की चार जगहों पर एक साथ ड्रग्स नष्ट नहीं किए गए थे।

गौरतलब है कि एक जून 2022 से एनसीबी मादक पदार्थों को नष्ट करने का विशेष अभियान चला रही है। इसके तहत 29 जुलाई तक 11 राज्यों में 51,217 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ नष्ट किए जा चुके थे। शनिवार को एक साथ चार जगहों पर ड्रग्स के निपटान के बाद यह आँकड़ा बढ़कर 81686 किलोग्राम हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आजादी का अमृत महोत्सव मनाने को लेकर किए गए आह्वान को ध्यान में रखते हुए एनसीबी ने देश की स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने पर 75000 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट करने का संकल्प लिया था।

तीस्ता सीतलवाड़ को नहीं मिली बेल, रिटायरमेंट वाले दिन AAP नेता को भी झटका: गुजरात दंगों में मोदी को बदनाम करने की रची थी साजिश

गुजरात दंगों से जुड़े मामले में गिरफ्तार हुईं तीस्ता सीतलवाड़ की बेल याचिका को अहमदाबाद के सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया है। उनके साथ पूर्व डीजीपी व आम आदमी पार्टी नेता आरबी श्रीकुमार की जमानत याचिका भी उनकी रिटायरमेंट वाले दिन खारिज हुई। सत्र न्यायालय के जज डीडी ठक्कर के फैसले के बाद अब सीतलवाड़ और श्रीकुमार दोनों जेल में ही रहेंगे।

बता दें कि जाकिया जाफरी केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीतलवाड़, पूर्व डीजीपी श्रीकुमार और पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट की गिरफ्तारी हुई थी। कोर्ट ने इनको न्यायिक हिरासत में भेजा था। इन सबके ऊपर आरोप है कि इन्होंने गोधरा दंगा मामले में निर्दोष लोगों को दोषी दिखाने के लिए दस्तावेज गढ़े और उस समय के गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने का प्रयास भी किया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि तीस्ता ने अपने फायदे के लिए जाकिया जाफरी की भावनाओं का मजाक बनाया जबकि आरबी श्रीकुमार और संजीव भट्ट ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ फर्जी की गवाही दी। इस आदेश के बाद ही गुजरात पुलिस ने तीनों आरोपितों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 468, 471, 194, 211, 218, 120 बी के तहत केस दर्ज किया था।

केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने सीतलवाड़ और श्रीकुमार को पकड़ा जबकि भट्ट कुछ दिन पहले पहले गिरफ्तार हुए। इन लोगों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर में कहा गया कि आरोपितों ने गुजरात दंगों में फर्जी दावे करके चीजों को संवेदनशील बनाया जो कि एसआईटी जाँच में पूरी तरह उजागर हो गए हैं।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों एसआईटी ने अपने हलफनामे में खुलासा किया था कि कैसे कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल गुजरात दंगों की आड़ में भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश में गिराना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने तीस्ता सीतलवाड़ को 30 लाख रुपए भी दिए थे। इस संबंध में बीते दिनों तीस्ता के करीबी रईस पठान ने भी खुलासा किया था। रईस ने बताया था, “जो बात सामने आ रही 30 लाख रुपयों की वो बिलकुल दंगों के शुरुआती दिनों की बात है। तीस्ता बहुत पहले से अहमद पटेल को जानती थीं। लेकिन जब दंगे हुए उसके कुछ दिन बाद की मुलाकात जो है वो शाही बाग के सर्किट हाउस में हुई थी। वहाँ उनके साथ मैं भी गया था।”

तकिए से करो सेक्स, सहपाठी लड़कियों से दुर्व्यवहार: महात्मा गाँधी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग, एक-दूसरे को थप्पड़ मारने के लिए जूनियर्स को किया मजबूर

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित महात्मा गाँधी मेडिकल कॉलेज (MGM) में रैगिंग की घटना सामने आई है। फर्स्ट ईयर के छात्रों ने थर्ड ईयर के सीनियर्स पर रैगिंग और प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इन छात्रों को कथित तौर पर तकिए के साथ सेक्स करने के लिए कहा गया। सहपाठी लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार को मजबूर किया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक MGM के पीड़ित छात्रों ने इसकी शिकायत UGC की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन में की। UGC ने इसकी सूचना कॉलेज के डीन को दी। MGM मेडिकल कॉलेज के डीन संजय दीक्षित के मुताबिक, “एक लड़के ने UGC की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर कुछ दिनों पहले शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत का संज्ञान लेते हुए फ़ौरन ही एंटी रैगिंग टीम की मीटिंग करवाई गई। मीटिंग के बाद कमेटी ने घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। FIR संयोगिता गंज थाने में दर्ज हुई है।

SHO तहजीब काज़ी ने के मुताबिक 8-10 छात्रों के खिलाफ IPC की धारा 294, 323 और 506 के तहत FIR दर्ज की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने 700 छात्रों से पूछताछ की तैयारी की है। इनके बयानों को गोपनीय रखा जाएगा।

नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार एमजीएम मेडिकल कॉलेज के जूनियर्स को उनके सीनियर गीता भवन क्षेत्र के फ्लैटों पर बुलाते थे। वहीं उनकी रैगिंग की जाती थी। जूनियर छात्रों को समूह में बुलाया जाता था। घंटों खड़ा रखकर एक-दूसरे को थप्पड़ मारने के लिए मजबूर किया जाता। इस दौरान सीनियर धड़ल्ले से अपशब्दों का इस्तेमाल भी करते थे।

रतलाम में भी रैगिंग

इंदौर के अलावा रतलाम मेडिकल कॉलेज से भी रैगिंग की खबर आई है। यहाँ जूनियर छात्रों को थप्पड़ मारे गए। बताया जा रहा है कि रैगिंग की शिकायत मिलने पर जब वार्डन डॉ. अनुराग जैन हॉस्टल पहुँचे तब उनके ऊपर भी शराब की बोतलें फेंकी गई। घटना की शिकायत कॉलेज की अनुशासन समिति से की है। रैंगिंग करने वाले छात्रों की पहचान कर ली गई है।

मध्य प्रदेश के राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने 30 जुलाई 2022 (शनिवार) को इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए जाँच और कार्रवाई का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा, “नियमानुसार रैंगिंग पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके बावजूद हमें शिकायत मिली है। आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हम इस घटना की गहनता से जाँच कर रहे हैं। ऐसे मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

उद्धव सरकार के कारण बुलेट ट्रेन ही नहीं हुई लेट, देश को ₹52000 करोड़ का लगेगा चूनाः देरी से प्रोजेक्ट का खर्च ₹1.6 लाख करोड़ के पार जाने का अनुमान

महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बदलते ही मुंबई-अहमदाबाद (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project) के बीच प्रस्तावित भारत की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का टेंडर 22 जुलाई 2022 जारी कर किया। हालाँकि, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की केंद्र विरोधी रवैए एवं अन्य कारणों की वजह से इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत बढ़कर 1.6 लाख करोड़ रुपए हो गई है।

उद्धव ठाकरे की नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी की सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। राज्य में इसके लिए जरूरी भूमि अधिग्रहण का काम पूरा नहीं किया।

इस प्रोजेक्ट के लिए गुजरात में भूमि अधिग्रहण का काम 98.9% पूरा हो गया है, जबकि महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण का काम सिर्फ 73% ही पूरा हुआ है। इस कारण यह पूरा प्रोजेक्ट लटक गया है और इसकी देरी की मुख्य वजह बना।

इस परियोजना की समय सीमा 2022और शुरुआती लागत 1.08 लाख करोड़ रुपए थी, लेकिन ठाकरे सरकार ने राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण इस प्रोजेक्ट को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद उसे शुरू करने की समय सीमा 2027 तय की है। साल 2026 में इसके सारे ट्रायल पूरे हो जाएँगे।

हालाँकि, राज्य में एकनाथ शिंदे की सरकार आते ही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस रूट के लिए बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में भूमिगत स्टेशन बनाने के लिए जारी कर दिया।

इसके पहले NHSRCL ने नवंबर 2019 में ब्रांदा-कुर्ला कॉप्लेक्स में भूमिगत स्टेशन बनाने के लिए निकाली गई निविदाओं को इस साल की शुरुआत में रद्द कर दिया था। NHSRCL द्वारा 11 बार समय सीमा बढ़ाने के बाद भी राज्य सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा पाई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण में देरी के साथ-साथ बीती अवधि में जमीन, सीमेंट, लोहे, स्टील आदि के दामों में वृद्धि के कारण इस प्रोजेक्ट की लागत बढ़ गई है। हालाँकि, NHSRCL का कहना है कि प्रोजेक्ट की नई लागत की सही जानकारी अभी नहीं दी जा सकती। भूमि अधिग्रहण का काम और सभी कॉन्ट्रैक्ट्स पूरे होने के बाद ही इसकी घोषणा की जा सकेगी।

कभी पिता के लिए बेचा पान, अब CWG में भारत को दिलाया पहला मेडल: संकेत महादेव ने वेटलिफ्टिंग में जीती ‘चाँदी’, चोटिल होने के कारण ‘गोल्ड’ से चूके

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत के हिस्से पहला पदक आ गया है। भारत के संकेत महादेव सरगर ने 55kg की वेथ लिफ्टिंग में देश को रजत पदक दिलाया। बर्मिंघम में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टर संकेत ने पहले प्रयास में 113 किग्रा भार उठाया और दूसरे राउंड में 135 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया।

संकेत ने दूसरे राउंड में चोटिल होने के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की। इस राउंड में उन्होंने दो बार 139 किग्रा उठाने का प्रयास किया जिसकी वजह से उन्हें चोट लग गई।

उन्होंने दो राउंड के 6 प्रयासों में अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए कुल 248 किलोग्राम का वजन उठाया और सिल्वर पदक को अपने नाम किया। वहीं मलेशिया के अनीक कासदान ने 249 किलोग्राम का भार उठाकर स्वर्ण पदक को अपने नाम किया जबकि श्रीलंका के दिलांका कुमारा ने 225 किलोग्राम उठाकर कास्य पदक जीता। 

बता दें कि भारत के संकेत महादेव ने इससे पहले पिछले साल दिसंबर में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में नेशनल रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल को जीता था। इसके अलावा फरवरी में सिंगापुर वेटलिफ्टिंग इंटरनेशनल में 256 किलोग्राम उठाकर कॉमनवेल्थ और राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर जीता है। उनकी इस कामयाबी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुभकामनाएँ दी हैं।

उल्लेखनीय है कि संकेत महादेव सरगर महाराष्ट्र के सांगली के रहने वाले हैं। उनके पिता पान की दुकान चलाते हैं और खुद संकेत भी इसमें उनकी मदद करते हैं। संकेत ने हाल ही में कहा था कि अगर वह स्वर्ण जीतते हैं तो अपने पिता की मदद करेंगे। उन्होंने काफी दुख उठाए हैं। इसलिए संकेत उन्हें खुशियाँ देना चाहते हैं।

जिसके घरों से अब तक मिल चुका है ₹50 करोड़ कैश और 5 किलो सोना, जर्जर घर उसकी माँ का ठिकाना: अकेली रहती हैं अर्पिता मुखर्जी की जन्मदाता

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इन खुलासों के केंद्र में अर्पिता मुखर्जी भी हैं। वे ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री रहे पार्थ चटर्जी की करीबी हैं। अर्पिता के घरों पर छापेमारी में अब तक 50 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश और 5 किलो सोना मिलने की बात सामने आ चुकी है। लेकिन अर्पिता मुखर्जी का पुश्तैनी घर जर्जर हाल में है। इस घर में उनकी माँ मिनाती मुखर्जी अकेली रहती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, अर्पिता का पुश्तैनी घर उत्तर 24 परगना जिले के बलघेरिया के देवनपाड़ा इलाके में स्थित है। ये घर कई जगह से टूट रहा है। मकान करीब 50 साल पुराना है। अर्पिता की माँ की तबीयत खराब रहती है। उनकी छोटी बहन की शादी हो चुकी है। माँ की देखभाल के लिए अर्पिता ने दो लोगों को वहाँ पर रखा हुआ है। खुद भी कभी-कभार माँ से मिलने के लिए आया करती रही हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अर्पिता की माँ ने बताया कि वो आती है और दवाइयाँ दे देती है। लेकिन कभी भी पैसे नहीं देती थी। उन्होंने बताया कि कई साल पहले ही अर्पिता ने घर छोड़ दिया था। उसने पहले सीरियल और फिर फिल्मों में काम किया। लेकिन, अपने पास इतने पैसे होने का जिक्र उसने कभी भी माँ से नहीं किया।

अर्पिता की माँ कहती हैं, “अगर उसने मेरी बात मानी होती तो उसकी शादी करा देती। उसके पिता सरकारी नौकरी में थे। उनकी जगह उसे ये सर्विस भी मिल सकती थी। लेकिन उसकी इन सब में कोई दिलचस्पी नहीं थी।” अर्पिता के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा की जा रही कार्रवाइयों को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें इसके बारे में अखबारों के जरिए पता चला। मिनाती मुखर्जी ने इसे कानूनी मुद्दा बताते हुए पैसे की जानकारी होने से इनकार किया।

अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट से अब तक मिले 50 करोड़ रुपए

अर्पिता मुखर्जी के घरों पर छापे से अब तक तकरीबन 50 करोड़ नकदी और 5 किलो सोना बरामद होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही अर्पिता के बेलघरिया फ्लैट की तलाशी के दौरान अधिकारियों को दो सेक्स टॉय भी मिले थे। अर्पिता मुखर्जी का दावा है कि उनके फ्लैट से प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जो पैसा मिला है, वह पार्थ चटर्जी का ही है। ईडी से पूछताछ में एक्ट्रेस ने कहा कि चटर्जी के आदमी उनके यहाँ पैसे लाकर रखते थे। कभी-कभी चटर्जी खुद भी आते थे और कमरों में रखे पैसों की जाँच करते थे। अर्पिता का दावा है कि उन्हें उस कमरे में जाने की अनुमति नहीं थी, जहाँ पैसे रखे जाते थे।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार का खुमार उतरा, अब पुराने स्टाइल में ही बिकेगी शराबः नई एक्साइज पॉलिसी की CBI जाँच का LG ने दिया था आदेश

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार की नई आबकारी नीति 2021-22 की जगह अब पुरानी शराब नीति लागू होती है। दिल्ली सरकार ने यह फैसला लिया है। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार (30 जुलाई 2022) को कहा कि नई आबकारी नीति आने तक 1 अगस्त से केवल सरकार द्वारा संचालित शराब की दुकानों से ही शराब की बिक्री होगी।

पुरानी आबकारी व्यवस्था को लागू करने की घोषणा करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा, “हम भ्रष्टाचार को रोकने के लिए नई शराब नीति लाए। इससे पहले सरकार को 850 शराब की दुकानों से करीब 6,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता था। नई नीति के बाद हमारी सरकार को उन्हीं दुकानों से 9,000 करोड़ रुपए से अधिक मिले।”

मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “वे (भाजपा) दुकानदारों और अधिकारियों को ED और CBI की धमका रहे हैं। वे चाहते हैं कि दिल्ली में कानूनी शराब की दुकानें बंद हों और अवैध दुकानों से पैसा कमाया जाए। हमने नई शराब नीति को रोकने का फैसला किया है और सरकारी शराब की दुकानें खोलने का आदेश दिया है।”

उन्होंने कहा कि इस ट्रांजिशन के दौरान किसी तरह की अराजकता ना हो, इसके लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिया गा है। बता दें कि राजधानी में इस समय 468 निजी शराब की दुकानें हैं और इनके बंद होने के बाद राजधानी में शराब की उपलब्धता पर बड़ा संकट पैदा हो गया है।

उप-मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा गुजरात की तरह दिल्ली में भी दुकानदारों और अधिकारियों को धमकाकर नकली और ऑफ-ड्यूटी शराब की बिक्री को बढ़ावा देना चाहती है और उससे पैसे कमाना चाहती है, लेकिन वे ऐसा नहीं होने देंगे।

उन्होंने कहा कि नई नीति से पहले सरकारी दुकानों में शराब बेची जाती थीं, लेकिन निजी दुकानें भी थीं। इन निजी दुकानों के लाइसेंस अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को दे दिए जाते थे। इसमें खूब भ्रष्टाचार होता था। इस भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ही नई आबकारी नीति लागू की गई थी।

बता दें कि कुछ दिन पहले दिल्ली एलजी वीके सक्सेना ने नई शराब नीति में अनियमितताओं को लेकर सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे। दिल्ली सरकार ने इसके खिलाफ खूब हल्ला बोल किया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने अंतत: इसे वापस लेने का फैसला लिया है।

‘मुँह खोला तो तेरा रेप होगा’: संजय राउत का ऑडियो वायरल; महिला मराठी प्रोड्यूसर से गाली-गलौच का इल्जाम, हत्या की धमकी

शिवसेना नेता संजय राउत एक बार फिर से अपनी ‘अभद्र भाषा’ के चलते खबरों में आ गए हैं। कथिततौर पर मराठी फिल्मों की प्रोड्यूसर डॉ स्वप्ना पाटकर के साथ बातचीत की उनकी एक ऑडियो वायरल हुई है। इस ऑडियो में जो पुरुष है, उसकी ओर से महिला को गंदी-गंदी गाली दी जा रही है। ऑडियो में औरत से बात करते हुए “स%$ली, मादरच&^द और बहन&^%” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। 

इसके अलावा ऑडियो में आदमी कहता है, “इस कॉल को रिकॉर्ड कर, पुलिस को भेज या जो मन हो वो कर। बस तू देखती जा। प्रॉपर्टी या तो मेरे नाम कर या फिर सुजीत के नाम।”

मालूम हो कि डॉ स्वप्ना पाटकर वही महिला हैं जिन्होंने साल 2021 में संजय राउत के ऊपर गाली-गलौच करने का और उन्हें पिछले 8 साल से तंग करने का आरोप लगाया था। अब ऑपइंडिया इस ऑडियो को लेकर ये पुष्टि नहीं करता है कि जो आवाज इसमें है वो स्वप्ना पाटकर और संजय राउत की है या नहीं। लेकिन इस ऑडियो को टाइम्स नाऊ नवभारत ने भी शेयर किया है और बताया है कि 70 सेकेंड की इस ऑडियो में 27 बार गाली दी गई हैं।

ये लीक ऑडियो संजय राउत से बातचीत की है: डॉ स्वप्ना पाटकर

इसके अलावा इस ऑडियो को लेकर स्वप्ना पाटकर ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि ये उनके और संजय राउत के बीच हुई बातचीत की ऑडियो है। उन्होंने SSR वॉरियर नाम के चैनल पर अपलोड किए गए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें पिछले 18 महीनों में कई बार धमकियाँ मिली हैं और इन्हीं धमकियों के मद्देनजर उन्होंने अपनी शिकायत दी है। उन्होंने संजय राउत से जुड़े ‘पात्रा चॉल जमीन घोटाले’ मामले की जाँच में जुटे संबंधित अधिकारियों को इन धमकियों और ऑडियो क्लिप के बारे में बताया है। उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर को भी पत्र लिखा है और ईडी को भी धमकियों के बारे में बताया है।

स्वप्ना कहती हैं कि संजय की पत्नी वर्षा और उनके नाम अलीबाग में जमीन थी जिसे ईडी ने अपनी जाँच में अटैच किया। संपत्ति के दस्तावेज भी संजय राउत के करीबी सुजीत पाटकर के घर छापेमारी में मिले। लेकिन ईडी ने जब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ शुरू की तो उनको रेप और हत्या की धमकियाँ आने लगीं और उन पर दबाव बनने लगा कि वह संजय राउत का नाम वापस लें।

स्वप्ना को मिली धमकियों में भाजपा पर इल्जाम मढ़ने का बनाया जा रहा दबाव

मालूम हो कि स्वप्ना पाटकर को पिछले हफ्ते भी धमकी वाला एक पत्र मिला था जिसमें कहा गया था कि अगर उन्होंने ईडी के सामने कुछ भी कहा तो उनका रेप किया जाएगा। इस धमकी के बाद उन्होंने वकोला पुलिस में अपनी शिकायत दी थी। पत्र में स्वप्ना को कहा गया था कि वह मीडिया में बोलें कि ये सब उन्होंने भाजपा नेता किरीट सोमैय्या के कहने पर किया है।

स्वप्ना की इस शिकायत के बाद प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता किरीट सोमैय्या ने भी 30 जुलाई को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने बताया कि आज शाम 4 बजे धमकी, गाली-गलौच, ऑडियो क्लिप से जुड़ी शिकायतों के संबंध में वकोला थाने जाएँगे। उन्होंने अपने ट्वीट में पत्र शेयर किया है। इसमें लिखा है, “अगर मुँह खोला तो तेरा रेप करके थाना में खड़ी मिलेगी तू। ईडी के सामने बकबक करेगी तो मरेगी। मीडिया को बता कि सोमैय्या ने जबरदस्ती किया और आगे चुप बैठ वरना कोई नहीं बचा पाएगा।” 

स्वप्ना पाटकर और संजय राउत का विवाद

बता दें कि डॉ स्वप्ना पाटकर इससे पहले पिछले साल संजय राउत पर इल्जाम लगाने के बाद चर्चा में आई थीं। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर बताया था कि शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के सह-संपादक संजय राउत पिछले 8 वर्षों से अपनी पार्टी के रुतबे और सिस्टम पर पकड़ का इस्तेमाल कर न सिर्फ उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, बल्कि उनके परिवार और रिश्तेदारों को भी प्रताड़ित कर रहे हैं। पाटकर ने बताया था कि राउत के इशारे पर पुलिस ने उन पर ‘धंधा करने’ का आरोप भी लगाया था। उन्होंने कहा था कि 2017 में खुद संजय राउत ने फोन पर धमकी दी और 2018 में कॉन्ट्रैक्ट पर आदमी रख कर उनका पीछा कराया गया। बकौल स्वप्ना, उनके सोशल मीडिया हैंडल्स को हैक कर कभी सुसाइड नोट तो कभी अश्लील सामग्रियाँ डाली गईं, लेकिन पुलिस ने साफ़ कह दिया कि संजय राउत के खिलाफ वो FIR दर्ज नहीं कर सकते।

दिल्ली में ‘लोकतंत्र बचाओ’ के नाम पर जमावड़े की फिराक में था PFI, पुलिस ने नहीं दी अनुमतिः VHP ने भी जताई थी आपत्ति

दिल्ली पुलिस ने PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) की प्रस्तावित रैली को इजाजत देने से मना कर दिया है। इस रैली को लेकर विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने आपत्ति दर्ज करवाई थी। ‘लोकतंत्र बचाओ’ (Save the Republic) नाम की यह रैली शनिवार (30 जुलाई 2022) को झंडेवालान क्षेत्र के अम्बेडकर भवन में होने वाली थी।

दिल्ली पुलिस ने इस रैली की अनुमति 27 जुलाई को ही रद्द कर दी थी। सेंट्रल दिल्ली की DCP ने PFI के महासचिव मोहम्मद इलियास को पत्र भेज कर कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक अव्यवस्थित होने की आशंका जताते हुए इस सम्मेलन की अनुमति रद्द की थी। दिल्ली पुलिस के इस आदेश को PFI की दिल्ली शाखा ने ट्वीट किया है।

29 जुलाई 2022 को विश्व हिन्दू परिषद दिल्ली प्रदेश ने भी इस कार्यक्रम के विरोध में दिल्ली पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी भेजी थी। चिट्ठी में कहा था, “30 जुलाई 2022 को दोपहर 2.30 बजे अम्बेडकर भवन रानी झाँसी रोड, करोलबाग में पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह संगठन पूरे देश में संदिग्ध गतिविधियाँ चला रहा है। देश में हुई अनेक हिंसक घटनाओं के पीछे इसका हाथ होने की जाँच अनेक राज्यों में चल रही है। स्वतंत्रता दिवस से पहले राजधानी में इस प्रकार के कार्यक्रमों से वातावरण खराब हो सकता है। आपसे निवेदन है कि इसे तुरन्त रोकना चाहिए।”

VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए इस पत्र को शेयर किया था। उन्होंने इसे देश विरोधी हरकत बताया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 7 जुलाई को तेलंगाना भाजपा ने PFI को ‘चरमपंथी समूह’ बताते हुए इस पर बैन लगाने की माँग की थी। निज़ामाबाद क्षेत्र में PFI के 4 एजेंटों की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय गृहमंत्री को भेजे गए पत्र में तेलंगाना भाजपा ने PFI पर वर्षों से मुस्लिम युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया था। कर्नाटक के मंगलुरु में हुई भाजपा युवा मोर्चा नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या में भी PFI से जुड़े चरमपंथियों का हाथ होने की संभावना जताई जा रही है।