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‘मेरे केस की नहीं हो रही सही से जाँच’: तिहाड़ जेल में बंद आतंकी यासीन मलिक सरकार से खफा, शुरू की भूख हड़ताल, प्रशासन मनाने में जुटा

दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का आतंकी यासीन मलिक इन दिनों भूख हड़ताल पर गया हुआ है। उसकी शिकायत है कि उसके ऊपर जो मामले विचाराधीन चल रहे हैं उनकी सही से जाँच नहीं हो रही।

जानकारी के मुताबिक, यासीन मलिक ने बीते शुक्रवार (22 जुलाई 2022) को हड़ताल चालू की थी, जिसकी जानकारी होने पर जेल के वरिष्ठ अधिकारी भी उससे मिलने पहुँचे और भूख हड़ताल खत्म करने को कहा। हालाँकि यासीन ने इससे इनकार कर दिया।

यासीन मलिक की माँग

इससे पहले जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक ने 13 जुलाई 2022 सीबीआई कोर्ट से कहा था कि वह पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण से जुड़े केस में सामने पेश होकर गवाहों से खुद बहस करना चाहता है। जेकेएलएफ अध्यक्ष ने कहा था कि अगर उसे ये अनुमति नहीं दी गई तो वह हड़ताल करेगा।

उसने अपनी हड़ताल को शुरू करने से पहले समय सीमा दी थी। उसने कहा था कि वह 22 जुलाई तक सरकार के जवाब का इंतजार कर रहा है। अगर उसे अनुमति नहीं मिली तो वह अनिश्चितकाल काल तक अपनी हड़ताल करेगा।

रुबैया सईद ने की यासीन मलिक नाम की पुष्टि

बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का 8 दिसंबर 1989 को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) ने अपहरण कर लिया था। उस समय जेकेएलएफ का नेतृत्व यासीन मलिक कर रहा था। जेकेएलएफ ने अपने पाँच सदस्यों को जेल से रिहा कराने की माँग को लेकर बंदूक की नोक पर रूबैया का अपहरण कर लिया था। उस समय 23 वर्षीया रुबैया उस समय लाल डेड मेमोरियल महिला अस्पताल में बतौर मेडिकल इंटर्न कार्यरत थीं।

अब इसी मामले की सुनवाई में 15 जुलाई 2022 को सामने आया कि जम्मू-कश्मीर की टाडा अदालत में रुबैया सईद ने खुद 4 उन लोगों की पहचान कर ली है जिन्होंने उनका अपहरण किया था। इन अपहरणकर्ताओं में एक यासीन मलिक भी था। सुनवाई में भाग लेने वाले वकीलों ने पुष्टि की थी कि सईद ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने सीबीआई द्वारा जाँच के दौरान उन्हें उपलब्ध कराई गई तस्वीरों के आधार पर सभी की पहचान की।

25 को मिली थी यासीन मलिक को सजा

गौरतलब है कि यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार का आरोपित भी है। कुछ समय पहले उसे टेरर फंडिग केस में दोषी ठहराए जाने के बाद 25 मई सजा मुकर्रर की गई थी। यासीन मलिक को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 121, 121ए और यूएपीए की धारा 13 और 15 के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 17, 18, 20, 38 और 39 के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 17, 18, 20, 38 और 39 के तहत अपराधों का दोषी ठहराया गया था। NIA कोर्ट ने तमाम धाराओं के तहत टेरर फंडिंग केस में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था।

काँवड़ यात्रा करने वाले बाबू खान का मुस्लिमों ने किया बहिष्कार, मस्जिद से बाहर निकाला: रोज सुबह करते हैं शिव मंदिर की सफाई

मुस्लिमों में भी बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने अपने पुरखों और उनकी संस्कृति को आज तक नहीं भुलाया है। यही कारण है कि छठ जैसे महापर्व में और काँवड़ जैसी धार्मिक यात्रा में बड़ी संख्या में मुस्लिम शामिल होते हैं। हालाँकि, ऐसे लोगों को कट्टरपंथी मुस्लिमों की धमकियों का भी सामना करना पड़ता है।

उत्तर प्रदेश के बागपत के बाबू खान ऐसे ही व्यक्ति हैं, जो पिछले 5 सालों से सावन में काँवड़ यात्रा करते हैं। हालाँकि, इसको लेकर उन्हें कर तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। जब पहली बार 2018 में उन्होंने काँवड़ यात्रा की तो कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उन्हें मस्जिद से बाहर निकाल दिया। कट्टरपंथियों की इस करतूत के बावजूद वे अभी भी काँवड़ यात्रा पर जाते हैं।

बाबू खान ने दैनिक भास्कर को बताया, “जब मैं पहली बार काँवड़़ लेकर गया तो घर में खूब लड़ाइयाँ हुईं, लेकिन परिवार को किसी तरह समझा लिया। 2018 में पुरा महादेव मंदिर पर जलाभिषेक करने के बाद अगले दिन सुबह नमाज पढ़ने के लिए 5 बजे मैं मस्जिद तो वहाँ मेरा बहिष्कार कर दिया गया और मुझे मस्जिद से बाहर निकाल दिया गया।”

बाबू खान ने बताया कि इस घटना के बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत की। मस्जिद से बाहर निकालने पर कानूनी कार्रवाई करते हुए हुए उन्हें मस्जिद से बाहर निकालने वाले कई लोगों को जेल भी भेजा।

बाबू खान का कहना है कि वह सबसे पहले सुबह 5 बजे गाँव की मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं और फिर शिव मंदिर में जाकर उसकी सफाई करते हैं। बाबू खान का कहना है, “मैंने इस्लाम धर्म नहीं छोड़ा है, सिर्फ काँवड़ लाने में आस्था है। इसलिए हर साल काँवड़ लेने के लिए हरिद्वार आता हूँ।”

काँवड़ को लेकर अपनी शुरुआत को लेकर बाबू खान ने बताया कि साल 2018 में वह दिल्ली के आजादपुर मंडी से ट्रक लेकर जा रहे थे। जब यूपी में कैराना पुलिस चौकी के नजदीक पहुँचे तो वहाँ जाम लगा हुआ था। उन्होंने देखा कि हजारों काँवड़िए आगे चल रहे थे। उन्होंने बताया, “यहीं पर मेरे मन में ख्याल आया कि अगर मैं भी काँवड़िया होता तो इसी तरह काँवड़ लेकर आ रहा होता।”

ईसाई मिशनरी स्कूल सेंट फ्रांसिस ने सिख छात्रों को पगड़ी और कड़ा पहनने से रोका, बोला SGPC – हमने देश के लिए कुर्बानियाँ दी, हमारे साथ ही भेदभाव

हाल ही में उत्तर प्रदेश के बरेली में एक स्कूल में सिख छात्रों को पगड़ी, कृपाण और कड़ा पहनने से रोकने का मामला गरमा गया है। इस मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस मामले की कड़ी निंदा की है। एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने इसके खिलाफ आवाज उठाने की माँग की है।

उन्होंने एक बयान में कहा, “मैं देश भर में रहने वाले सिखों से अपील करता हूँ कि वे एक साथ आएँ और सिखों के खिलाफ भेदभाव करने वाले लोगों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाएँ और स्थानीय स्तर पर प्रशासन से कार्रवाई करने का आग्रह करें।” धामी ने कहा कि सिखों के साथ इस तरह के भेदभाव जानबूझकर किए जा रहे हैं। एसजीपीसी अध्यक्ष ने इस मामले में सरकार पर भी पारदर्शिता नहीं रखने का आरोप लगाया है।

देश के लिए सिखों के योगदान पर बात करते हुए धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक होने के बावजूद सिखों ने देश की आजादी के लिए 80 फीसदी से ज्यादा कुर्बानी दी। उन्होंने कहा कि सिखों की वजह से देश की संस्कृति बरकरार है। एसजीपीसी की ओर से जारी बयान में धामी के हवाले से कहा गया है, “लेकिन दुख की बात है कि देश (भारत) में सिखों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बरेली में ईसाई मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे ‘सेंट फ्रांसिस स्कूल’ में स्कूल प्रबंधन ने सिख छात्रों के स्कूल में पगड़ी, कृपाण और कड़ा पहनकर आने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन ने मनमानी करते हुए कहा था कि अगर किसी को ये सब पहनना है तो वो अपना नाम कटाकर जा सकता है।

उक्त स्कूल जिले के बारादरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। डेलापीर स्थित ये स्कूल 12वीं तक का है। ये मामला उस वक्त सामने आया, जब बुधवार को प्रार्थना सभा में स्कूल की एक शिक्षक ने सभी को समान ड्रेस कोड में आने को कह दिया था। शिक्षक ने ये भी कहा था कि जो पगड़ी, कृपाण और कड़ा पहनकर आते हैं वो भी ये सब बंद कर दें। इसकी जानकारी लगते ही सिख बच्चों के माता-पिता ने इसका विरोध शुरू कर दिया था।

‘टीका-मलखान की जोड़ी टूटी’: क्रिकेट खेलते-खेलते एक्टर का निधन, दोस्तों ने बताया- ग्राउंड पर नाक से निकला खून

पॉपुलर टीवी शो ‘भाभी जी घर पर हैं’ में मलखान सिंह का किरदार निभाने वाले दीपेश भान अब इस दुनिया में नहीं रहे। आज (23 जुलाई 2022) क्रिकेट खेलने के दौरान उनका निधन हुआ। बताया जा रहा है कि दीपेश जिम से लौटकर क्रिकेट खेलने गए थे। वहीं उनके नाक से खून निकलने लगा और फिर एकदम से जमीन पर गिर गए। उनके दोस्त उन्हें अस्पताल लेकर भागे लकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

दीपेश के निधन की पुष्टि उनके कई साथी कलाकारों ने की हैं। कविता कौशिक ने खबर पर हैरानी जताते हुए कहा, “मैं 41 साल की उम्र में दीपेश के इस तरह जाने से हैरान हूँ। वे एफआईआर में एक महत्वपूर्ण भूमिका में थे। वह बिलकुल फिट ते और कभी शराब-सिगरेट नहीं पीते थे या ऐसा कुछ नहीं करते थे जो उनकी सेहत को नुकसान पहुँचाए। अपने पीछे वह अपनी बीवी, एक साल के बच्चे और अपने माता-पिता को छोड़ गए हैं।”

शुभांगी अत्रे ने कहा, “मैं उसी बिल्डिंग में रहती हूँ जहाँ दीपेश रहते थे। पहले हमें बताया गया है कि ये हार्ट अटैक हैं लेकिन अब पता चला है कि उनका ब्रेन हैमरेज हुआ। वह अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने गए थे लेकिन फिर जमीन पर गिर पकड़े।” शुभांगी से जब पूछा गया कि क्या उन्हें कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या थी, तो इस पर शुभांगी ने कहा कि नहीं, वह बिलकुल ठीक थे। क्रिकेट खेलने ही वो आज सुबह ग्राउंड पर गए थे।”

बता दें कि उनके जाने की खबर सुनने के बाद ‘भाभी जी घर पर हैं’ शो के फैन्स ये सोचकर दुखी हैं कि अब उन्हें दोबारा टीका-मलखान जैसी जोड़ी पर्दे पर दोबारा देखने को नहीं मिलेगी। दीपेश को उनके काम के लिए सराहा जा रहा है। उनके साथी कलाकारों के अलावा सामान्य दर्शक भी उनकी एक्टिंग की तारीफ कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि 11 मई 1981 को जन्मे दीपेश का अचानक मात्र 41 साल की उम्र में दुनिया को छोड़ के जाना, उनके सभी फैन्स और जानने वालों के लिए हैरान करने वाला है। दीपेश लंबे समय से टीवी इंडस्ट्री में थे। कुछ सालों से वह ‘भाभी जी घर पर हैं’ शो में दिखाई देते थे। लेकिन उससे पहले उन्होंने ‘एफआईआर’ में काम किया था। वह कॉमेडी का किंग कौन, कॉमेडी क्लब, भूतवाला में भी नजर आए थे। उन्हें आमिर खान के साथ टी-20 वर्ल्ड कप के एड में भी देखा गया था।

‘NDTV के पत्रकार ने भरा जुबैर का बॉन्ड’: जिन्होंने किया खुलासा, ट्विटर ने उनका अकाउंट ब्लॉक किया

माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर (Twitter) का पक्षपातपूर्ण रवैया थमने का नाम नहीं ले रहा है। वो लगातार इस्लामिक तुष्टिकरण का खेल खेल रहा है। ये इस बात से स्पष्ट हो जाता है कि फैक्ट चेक के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाले ऑल्ट न्यूज के को फाउंडर मोहम्मद जुबैर को लेकर ट्वीट करने के मामले में एक्शन लेते हुए टेक दिग्गज ने स्तंभकार अभिजीत अय्यर मित्रा के अकाउंट को ही ब्लॉक कर दिया।

इस बात की जानकारी शेयर करते हुए लेखक आनंद रंगनाथन ने अय्यर के ब्लॉक किए गए अकाउंट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसके साथ ही उन्होंने लिखा, ये बहुत ही हास्यास्पद है कि ट्विटर ने अभिजीत अय्यर मित्रा को ट्विटर ने जुबैर को लेकर किए गए उनके ट्वीट को डिलीट करने के लिए मजबूर किया। इसमें उन्होंने सीधा सा लिखा था कि एनडीटीवी के एक पत्रकार ने जुबैर की जमीनत का बॉन्ड भरा था। लेकिन जब अभिजीत ने इसे दोबारा से ट्वीट कर दिया तो उन्होंने बिनी किसी स्पष्टीकरण के उनके अकाउंट को ब्लॉक कर दिया।”

हालाँकि, जब ऑपइंडिया ने अभिजीत अय्यर मित्रा के ट्विटर अकाउंट (@Iyervval) को खोला तो ये पहले की तरह से सुचारू रूप से चलता मिला। लेकिन इसके साथ ही उनके एक ट्वीट को हटाया हुआ जरूर दिखाया गया। इसमें लिखा गया है कि इस ट्वीट ने ट्विटर के नियमों को तोड़ा है।

अभिजीत अय्यर मित्रा के ट्विटर अकाउंट का स्क्रीनशॉट

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक को हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत दे दी थी। लेकिन ये सवाल किया जा रहा था कि आखिर उसकी जमानत कराई किसने? इसी का खुलासा करते हुए अभिजीत अय्यर मित्रा ने ट्वीट किया था कि एनडीटीवी के एंकर श्रीनिवासन जैन ने ‘करीबी मित्र’ मोहम्मद जुबैर की जमानत लिए बॉन्ड भरा है। इसमें श्रीनिवासन जैन ने इस बात की गारंटी ली है कि मोहम्मद जुबैर सक्षम अधिकारी के पास रोजाना हाजिरी लगाएगा।

‘सक्रिय राजनीति में आना चाहता था, लेकिन…’: CJI रमना ने ‘जजों पर हमलों’ को लेकर जताई चिंता, कहा – लोग करते हैं लंबित मामलों की शिकायत

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने शनिवार(23 जुलाई 2022) को अपने बारे में एक अहम खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वह सक्रिय राजनीति में शामिल होना चाहते थे, लेकिन उनकी नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।

उन्होंने कहा, “मैं सक्रिय राजनीति में शामिल होने का इच्छुक था, लेकिन मेरी नियतिमें कुछ और ही लिखा था। जिस चीज के लिए मैंने इतनी मेहनत की थी, उसे छोड़ने का फैसला बिल्कुल भी आसान नहीं था।” CJI ने कहा कि इन वर्षों में, उन्होंने अपना करियर और जीवन लोगों के इर्द-गिर्द रखा। लेकिन बेंच में शामिल होने के बाद अपने सामाजिक संबंधों को पीछे छोड़ना पड़ता है।

हालाँकि CJI ने यह भी कहा कि उन्हें जज होने का कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि जज के तौर पर काम करने अवसर काफी चुनौतियों के साथ आया लेकिन इसके लिए उन्हें एक दिन भी खेद नहीं हुआ। उनका कहना है कि यह केवल एक सेवा नहीं, बल्कि आह्वान है। उन्होंने नेशनल यूनिवर्सिटी आफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ, राँची द्वारा आयोजित ‘जस्टिस एस बी सिन्हा मेमोरियल लेक्चर’ पर ‘एक जज का जीवन’ पर उद्घाटन भाषण देते हुए यह बातें कही।

इस दौरान उन्होंने कहा कि इन दिनों न्यायाधीशों पर शारीरिक हमले बढ़ रहे हैं। बिना किसी सुरक्षा या सुरक्षा के आश्वासन के जजों को उसी समाज में रहना होगा, जिस समाज में उन्होंने लोगों को दोषी ठहराया है। सीजेआइ एनवी रमना बोले राजनेताओं, नौकरशाहों, पुलिस अधिकारियों और अन्य जन प्रतिनिधियों को अक्सर उनकी नौकरी की संवेदनशीलता के कारण सेवानिवृत्ति के बाद भी सुरक्षा प्रदान की जाती है। विडंबना यह है कि न्यायाधीशों को समान सुरक्षा नहीं दी जाती है। 

न्यायाधीश ने कहा कि कई मौकों पर, उन्होंने लंबित रहने वाले मुद्दों को उजागर किया है। वह जजों को उनकी पूरी क्षमता से काम करने में सक्षम बनाने के लिए भौतिक और व्यक्तिगत दोनों तरह के बुनियादी ढाँचे में सुधार की आवश्यकता की पुरजोर वकालत करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जजों के नेतृत्व वाले कथित आसान जीवन के बारे में झूठे नेरेटिव बनाए जाते हैं, जिसे सहन करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर भारतीय न्यायिक प्रणाली के सभी स्तरों पर लंबे समय से लंबित मामलों की शिकायत करते हैं। जज तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, लेकिन इसे कमजोरी या लाचारी न समझें। जब स्वतंत्रता का प्रयोग जिम्मेदारी से किया जाता है, तो उनके क्षेत्र में बाहरी प्रतिबंधों की कोई आवश्यकता नहीं होती।

‘गणित पढ़ने से आप मंदबुद्धि बन जाते हैं’: Algebra पर भी फूटा जाह्नवी कपूर का गुस्सा, लोग बोले – आपकी IQ चेक करने के लिए ही हुआ जीरो का अविष्कार

आप लोगों को याद होगा जब आलिया भट्ट से एक बार ‘कॉफी विद करण’ शो पर पूछा गया था कि भारत का राष्ट्रपति कौन है तो उन्होंने पृथ्वीराज चौहान का नाम लिया था। इसके बाद यह एक बड़ा विवाद बन गया था। इसी तरह अनन्या पांडे को अपने ‘स्ट्रगल’ वाले बयान के लिए बड़े पैमाने पर ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा था। इसी कड़ी में अब नया नाम जुड़ गया है- जाह्नवी कपूर का।

जाह्नवी कपूर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘गुडलक जेरी’ के प्रमोशन में बिजी हैं। हाल ही में वह “मैथ्स जस्ट मेक यू रिटार्डेड” यानी ‘गणित पढ़कर आप मंदबुद्धि हो जाते हैं’ कहने के लिए ट्रोल्स का निशाना बन गई हैं।

इंस्टाग्राम पेज philmyyy ने जाह्नवी का यह वीडियो पोस्ट किया है। इसमें जाह्नवी ने यह बात स्कूल में अपने पसंदीदा विषयों पर बात करते हुए कही। उन्होंने कहा, “मैंने केवल इतिहास और साहित्य की परवाह की, जिसमें मैंने वाकई में अच्छा प्रदर्शन किया।” 

यह पूछे जाने पर कि वह किस विषय से सबसे ज्यादा नफरत करती हैं, उन्होंने कहा, “मुझे बात समझ में नहीं आ रही है कि आज तक मैंने Algebra का इस्तेमाल किया ही नहीं है तो इसके लिए मैंने इतना क्यों सर फोड़ा? वहीं इतिहास और साहित्य आपको एक सुसंस्कृत इंसान बनाता है। गणित आपको मंदबुद्धि जैसा बनाता है।”

इस वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट किया, “आर्यभट्ट बी लाइक: तम्हारी आईक्यू चेक करने के लिए ही जीरो का आविष्कार किया था।” एक अन्य ने लिखा, “सुष्मिता सेन और शाहरुख खान के इंटरव्यू देखें, अनन्या और जाह्नवी कपूर से बचें।” तीसरे ने कमेंट किया, “औसत से कम अभिनेत्री। उसका नाम क्या है?” 

एक यूजर ने लिखा कि सब SSR (सुशांत सिंह राजपूत) नहीं होते। वहीं एक अन्य ने लिखा कि Algebra 9वीं कक्षा का गणति है। इसकी इतिहात भी कमजोर है। एक यूजर कहता है कि मैडम को लगता होगा कि Algebra क्लोविया में मिलता होगा। 

जाह्नवी कपूर हाल ही में करण जौहर के चैट शो ‘कॉफी विद करण’ में नजर आई थीं। इस शो में सारा अली खान की जगह जाह्नवी कपूर का पक्ष लेने के लिए करण जौहर की आलोचना भी की गई थी। दीपक डोबरियाल, मीता वशिष्ठ, नीरज सूद और सिद्धार्थ सेनगुप्ता निर्देशित फिल्म ‘गुडलक जेरी’ 29 जुलाई को रिलीज होने वाली है।

‘यादवों की बीवियों संग नाचते थे श्रीकृष्ण, बाद में सालियाँ भी दे दी’: UPSC वाले ‘ओझा सर’ छात्रों को यही पढ़ा रहे, इस्लाम को बताते हैं दुनिया की रोशनी

कोचिंग सेंटर्स में सिविल परीक्षाओं की तैयारी कराने के नाम पर इस्लाम का महिमामंडन करना और हिंदू धर्म पर तंज कसना कोई नई बात नहीं रह गई है। हाल में ओझा सर नाम से मशहूर अवध प्रताप ओझा का एक वीडियो वायरल होना शुरू हुआ है। वी़डियो में देख सकते हैं कि किस तरह से वो हिंदुओं के प्रभु भगवान श्री कृष्ण पर अलग-अलग ढंग से लांछन लगाते हैं और दावा करते हैं कि यादव लोग एक बार भगवान को मिलकर मारने वाले थे।

श्रीकृष्ण पर टिप्पणी वाले वीडियो के बाद पढ़ें ओझा सर की सफाई

वीडियो में ओझा को कहते सुना जा सकता है, “बलराम ने एक बार कहा कि यादव लोग तुम को पकड़कर मारने वाले हैं। कृष्ण ने पूछा ‘क्यों’। तो बलराम बोले तुम इनकी बीवियों के साथ नाचते हो, तो पीटेंगे नहीं। ये सुन श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम टेंशन मत लो हम संभाल लेंगे। इसके बाद एक दिन वृंदावन में बारिश होनी शुरू हुई तो कृष्ण ने जाकर पर्वत उठा लिया। अब सोच कर देखो उंगली पर अगर कोई पर्वत उठा ले तो ये क्या हुआ- शक्ति का प्रदर्शन। तब यादवों ने श्रीकृष्ण को हाथ जोड़ कर कहा कि तुम बीवी के साथ तो नाच ही रहे हो, साली के साथ भी नाचो। हमें कोई टेंशन नहीं।”

ओझा जिस प्रकार बच्चों को ‘शक्ति के प्रदर्शन’ का कॉन्सेप्ट समझा रहे हैं, वो कई लोगों को अपमानजनक लग रहा है। लोग याद दिला रहे हैं कि कैसे जब बात इस्लाम की आती है तो ओझा के हाव-भाव बदल जाते हैं और जब हिंदुत्व या ब्राह्मणों पर टिप्पणी करनी होती है तो यही ओझा आक्रमक दिखते हैं।

इस्लाम के प्रति अवध ओझा की राय

कुछ दिन पहले इन्हीं ओझा सर की इस्लाम की तारीफ करते वीडियो सामने आई थी। इसमें वह अंधेरे से भरी दुनिया में इस्लाम को रोशनी बता रहे थे। उन्हें कहते सुना गया था,

“इस्लाम जब पैदा हुआ तब पूरी दुनिया में अँधेरा छाया हुआ था। इस्लाम का इतिहास पढ़ो। यूरोप में विच हंट के नाम पर महिलाओं को जलाया जा रहा था। भारत में सती प्रथा थी। चीन में लड़कियों की हत्या की जा रही थी। चारों तरफ अँधेरा था, और अँधेरे के बीच मोहम्मद साहब हाथ में दीया लिए खड़े थे, इस्लाम…प्यार…संदेश।

आगे वीडियो में उन्हें कहते सुना जा सकता है,

“मोहम्मद एक रास्ते से हर रोज जाते थे। वहाँ एक महिला उनके ऊपर कूड़ा डालती थी। अगर कोई हमारे ऊपर कूड़ा डाले तो हम उसे गोली मार देंगे कि हमारे ऊपर किसी ने कूड़ा कैसे फेंका। वाजीराम के टीचर पर कूड़ा कैसे फेंका, इतनी औकात तुम्हारी। एक दिन उस महिला ने कूड़ा नहीं फेंका। मकान के अंदर गए। पूछा मोहतरमा कहाँ है। पता चला वो बीमार हैं। उनका हाल चाल पूछा कि मालिक से दुआ करूँगा आप जल्दी ठीक हो जाएँ।”

अवध प्रताप ओझा कैसे बने ‘ओझा सर’?

बता दें कि अपने शुरुआती जीवन में शराब-सिगरेट के आदि अवध प्रताप ओझा आज IQRA IAS में इतिहास के वरिष्ठ फैकल्टी हैं। वह पेशे से वकील हैं और पिछले 15 वर्षों से यूपीएससी के उम्मीदवारों को पढ़ा रहे हैं। कुछ दिन पहले दैनिक भास्कर में उनके जीवन पर एक कहानी प्रकाशित हुई थी। इसमें बताया गया था यूपी गोंडा में जन्मे अवध प्रताप ओझा ने इलाहाबाद में पढ़ाई के दौरान यूपीएससी करने की सोची, लेकिन जब अपने लास्ट प्रयास में भी यूपीएससी पार नहीं कर पाए, तब उनकी माँ ने कहा- ‘तुम्हारा खेल खत्म हो गया है अब तुम्हें मेरे सहारे जिंदा रहना होगा।’

अपने कोचिंग में 1 साल सिर्फ सद्दाम को दी शिक्षा

ओझा अपनी माँ की यह बात सुन लड़कर घर से निकले और 2007 तक घर से बाहर रहे। किसी ने उन्हें कोचिंग में हिस्ट्री पढ़ाने को कहा। शुरू में उन्हें समझ नहीं आया कि कैसे पढ़ाना है और फिर उन्होंने पढ़ाना शुरू किया। धीरे-धीरे बच्चों को उनका ढंग पसंद आया। 2005 में इलाहाबाद से दिल्ली आकर अपना कोचिंग सेंटर खोला। पैसे न होने की वजह से 7 महीने बारटेंडर की जॉब भी की। 2019 में जाकर उन्होंने IQRA IAS को शुरू किया। पहले साल इसमें सिर्फ सद्दाम हुसैन नाम के लड़के को पढ़ाया गया। हालाँकि अब यहाँ 1000 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। 20 ऐसे छात्रों को भी कोचिंग दी जाती है जो यूपीएससी निकलने के बाद पैसे देते हैं।

हिंदुत्व के अलावा ब्राह्मणों को देते हैं गाली, नेहरू के प्रशंसक

छात्रों के बीच अवध ओझा ओझा सर के नाम से मशहूर हैं। उनके पढ़ाने के तरीके की लोग अक्सर तारीफ करते हैं। लेकिन पिछले दिनों उनके लेक्चर की वीडियो वायरल होने के बाद उनकी मंशा पर सवाल उठने लगे। उन्होंने केवल एक बार श्रीकृष्ण का मजाक नहीं उड़ाया। उन्होंने ब्राह्मणों को लेकर भी कह रखा है कि ब्रिटिशों के समय में जूता खाते थे और अब सीना तानकर घूम रहे हैं। इसके अलावा वो मानते हैं कि जो कोई भी जवाहरलाल नेहरू को गलत कहता है उससे ज्यादा मूर्ख कोई नहीं है।

खुद को आग लगाने वाले संत का इलाज के दौरान निधन, राजस्थान खनन माफिया के खिलाफ उठाई थी आवाज़: गहलोत सरकार ने नहीं की सुनवाई

राजस्थान के भरतपुर जिले के पसोपा गाँव में अवैध खनन पर रोक लगाने में सरकार की नाकामी के विरोध में आत्मदाह करने वाले साधु बाबा विजयदास की दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई। उन्होंने 20 जुलाई को केरोसिन डालकर खुद के शरीर में आग लगा ली थी। 21 जुलाई को उसकी स्थिति स्थिर बताई गई, लेकिन शनिवार की सुबह उनकी मौत हो गई। उपमंडल अधिकारी संजय गोयल के अनुसार, “साधु विजयदास की अस्पताल में तड़के करीब 2:30 बजे मौत हो गई। उल्लेखनीय है कि आग लगाए जाने के बाद उनका इलाज चल रहा था। पोस्टमॉर्टम सुबह 9 बजे के लिए निर्धारित किया गया है।”

अवैध खनन के विरोध में लगातार प्रदर्शन कर रहे साधुओं की सुनवाई नहीं हो रही थी, जिसके बाद विरोध स्वरूप बाबा विजयदास ने आत्मदाह की कोशिश की। इस घटना के बाद राज्य सरकार हरकत में आई और अवैध खनन का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर हाई लाइट हो सका।

संतों ने राज्य सरकार को क्षेत्र में खनन पर रोक लगाने के लिए मनाने का हर संभव कोशिश की थी। हालाँकि, 500 से अधिक दिनों के इंतजार और कई खोखले वादों के बाद संतों ने मामले को आगे बढ़ाने का फैसला किया। बाबा हरिबोलदास ने करीब दस दिन पहले घोषणा की थी कि अगर सरकार ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया तो वह 19 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह कर लेंगे। लेकिन बाद में उनसे और समय की माँग कर अधिकारियों ने मामले को आगे बढ़ा दिया।

पहले तो संतों ने इंतजार किया, लेकिन 19 जुलाई तक जब सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं गई तो विरोध में बाबा नारायणदास पासोपा गाँव में स्थित एक मोबाइल टॉवर पर चढ़ गए। चारों ओर इसकी चर्चा शुरू होते ही आस पास के कई संतों ने बाबा नारायणदास साथ दिया। इस बीच पुलिस ने बाबा हरिबोलदास को आत्मदाह करने से रोकने के लिए हिरासत में ले लिया।

वहीं अधिकारियों ने बाबा नारायणदास को भी टावर से नीचे उतारने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन वो इसमें विफल रहे। टावर पर ही उन्हें ग्लूकोज और खाना दिया गया। अगले दिन भी वो टावर के ऊपर ही रहे। इधर बाबा विजयदास विरोध में केरोसीन डालकर आत्महत्या की कोशिश की। राधे राधे का जाप करते हुए उन्होंने खुद को आग लगा ली।

पुलिस और स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हालाँकि, जब तक आग बुझती तब तक वो बुरी तरह से झुलस गए थे। उन्हें इलाज के लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती किया गया। घटना के बाद जिलाधिकारी आलोक रंजन, आईजी गौरव श्रीवास्तव, एसपी श्याम सिंह, जोनल कमिश्नर सनवर्मल वर्मा समेत कई अन्य आला अधिकारी मौके पर पहुँचे।

ऑपइंडिया ने अवैध खनन और हिंदू संतों के विरोध के मुद्दे को रिपोर्ट किया था, जिसे यहाँ पढ़ा जा सकता है।

HR प्रोफेशनल से ममता बनर्जी के सबसे करीबी तक: TMC के ताकतवर मंत्रियों में से एक पार्थ चटर्जी की कहानी, करीबी महिला के घर मिला ₹20 करोड़ नकद

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) के लिए बुरा समय है। उनकी सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) को शिक्षा भर्ती घोटाले (Recruitment Scam) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (23 जुलाई 2022) को गिरफ्तार कर लिया।

पार्थ चटर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी हैं और उन्हें राज्य के ताकतवर मंत्रियों में शामिल किया जाता है। जब घोटाला हुआ था, उस समय पार्थ चटर्जी शिक्षा मंत्री थे। वह साल 2014 से 2021 तक शिक्षा मंत्री थे। इस समय पार्थ चटर्जी के पास वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अलावा संसदीय कार्य विभाग का प्रभार भी है।

सरकार के साथ-साथ पार्थ चटर्जी की संगठन में भी बड़ा पद है। इससे उनके कद का पता चलता है। चटर्जी पश्चिम बंगाल तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के महासचिव हैं। उन्होंने साल 2001 में अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत की थी। वह TMC के टिकट पर बेहाला पश्चिम सीट से जीतकर विधानसभा पहुँचे थे।

साल 2011 में TMC के बंगाल में सत्ता में आने से पहले वह साल 2006 से 2011 तक विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता थे। उस समय बंगाल में वामपंथी दल की सरकार थी और पार्थ चटर्जी दूसरी बार विधानसभा के लिए चुनकर आए थे।

पार्थ चटर्जी का जन्म 6 अक्टूबर 1952 को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नरेंद्रपुर के रामकृष्ण मिशन स्कूल से प्राप्त की। आशुतोष कॉलेज से उन्होंने अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने के बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय से MBA किया।

इसके बाद वर्षीय 70 पार्थ चटर्जी ने एंड्र्यू युले कंपनी में HR प्रोफेशनल के तौर पर नौकरी की। साल 2001 में बेहाला पश्चिम सीट राजनीतिक करियर शुरू करने के बाद पार्थ चटर्जी TMC की टिकट पर कोलकाता दक्षिण सीट से 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार पाँच बार विधायक चुने गए।

वह कोलकाता के प्रसिद्ध और बड़े दुर्गा पूजा समितियों में से एक नकटला उदयन दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष भी हैं। इस समिति के पोस्टर में उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी की तस्वीर सामने आ चुकी है।

बता दें कि पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार करने के बाद मेडिकल के लिए ले जाया गया। सुबह के वक्त पार्थ चटर्जी ने स्वास्थ्य खराब होने की बात कही थी। इसके बाद दो डॉक्टरों की टीम भी मौके पर पहुँची थी। दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर भर्ती घोटाले के आरोपित मंत्री पार्थ चटर्जी के घर पर अधिकारियों की टीम पहुँची थी। 

22 जुलाई को ED की टीम ने पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर पर छापेमारी की थी। इस दौरान उनके घर से 20 करोड़ रुपए नकद के साथ-साथ 20 कीमती मोबाइल फोन, सोना, विदेशी मुद्रा, जमीन के दस्तावेज बरामद बरामद हुए हैं। माना जा रहा है कि यह वही रकम है, जो शिक्षक भर्ती घोटाले में रिश्वत के रूप में ली गई थी।

बता दें कि साल 2020 में शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने कहा था कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ लगातार सरकार के खिलाफ बोलते हैं, इसलिए उन्हें कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में नहीं भी बुलाया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि विश्वविद्यालय एक स्वायत्त संस्था है और उसे अपना निर्णय लेने का अधिकार है।