Home Blog Page 2532

झारखंड में मंत्री के आदेश का भी नहीं मोल, शुक्रवार को खुले सरकारी स्कूल मुस्लिमों ने बंद करवाए: रिपोर्ट में दावा- गेट पर जड़ दिया ताला

झारखंड की स्थिति का अंदाजा वहाँ के सरकारी स्कूलों की हालत से लगाया जा सकता है। मुस्लिम बहुल इलाके में रविवार की जगह स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी होने लगी और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। कई सरकारी स्कूलों के नाम में उर्दू तक जोड़ दिए गए। जब चीजें मीडिया में सामने आई तो प्रशासन हरकत में आया। बावजूद कई जगहों पर प्रशासन के आदेश को स्थानीय मुस्लिम मानने को तैयार नहीं दिख रहे।

शिक्षा मंत्री के आदेश के बावजूद पलामू जिले में शुक्रवार को मुस्लिमों ने जबरदस्ती 5 सरकारी स्कूलों को बंद करवा दिया। समझाने के बाद भी वे नहीं माने और स्कूल में ताला जड़ दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ये स्कूल पलामू के नवाबाजार और विश्रामपुर में हैं। शुक्रवार (29 जुलाई 2022) को जब स्कूल खुले तो मुस्लिम समुदाय के लोग विश्रामपुर के चार स्कूलों में पहुँच गए और जबरन बंद करवा दिया। स्कूल के शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के आदेश का हवाला दिया। उच्चाधिकारियों से बात करवाई। फिर भी स्थानीय मुस्लिम समुदाय नहीं माने।

इसी तरह से नावाबाजार में भी एक स्कूल को बंद करवा दिया गया। डिहरिया में तो मुस्लिमों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ही ताला जड़ दिया और शिक्षकों को स्कूल के बाहर ही रोक दिया। बताया जाता है कि ये इलाके मुस्लिम बहुल हैं। यहाँ के मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि वे शुक्रवार को स्कूल को नहीं खोलने दिया जाएगा। प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मणि कुमार पांडेय ने कुछ स्कूलों को जबरन बंद करवाने की बात स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि स्कूलों में रविवार को ही छुट्टी रहेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक पलामू जिले में 20 उर्दू विद्यालय हैं। लेकिन इनके अलावा गुपचुप तरीके से 49 अन्य स्कूलों में भी उर्दू जोड़कर शुक्रवार को छुट्टी शुरू कर दी गई थी। मीडिया में यह खबर सामने आने के बाद पलामू के जिला शिक्षा पदाधिकारी उपेंद्र नारायण इन स्कूलों के नाम से उर्दू हटाने और इन्हें शुक्रवार को खोलने का आदेश जारी किया था।

हिंदुओं के लिए ‘चिकन की दुकान’ खोलने के कारण प्रवीण नेट्टारू को कुल्हाड़ी से काटा? दावा- खुन्नस में थे कट्टरपंथी, हत्या से पहले कई बार धमकी

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या के पीछे एक नया एंगल सामने आया है। अनुमान लग रहे हैं कि शायद कट्टरपंथियों ने प्रवीण को मौत के घाट इसीलिए उतारा क्योंकि उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वह लोग हिंदुओं की दुकान से मीट खरीदें।

प्रवीण की ‘अक्षय फार्म फ्रेश चिकन’ नाम से यह दुकान बेल्लारे में थी। उन्होंने 9 महीने पहले ही इसे शुरू किया था। लेकिन इतने कम समय में उन्होंने अपना काम ऐसा चलाया कि आसपास के मुस्लिम दुकानदारों की नजर में वह खटकने लगे।

उनके साले ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि प्रवीण चूँकि राष्ट्रवादी थे और धर्म से जुड़े तमाम पोस्ट भी शेयर करते थे तो उनको धमकियाँ आए दिन मिलती रहती थीं। उन्होंने इस बाबत पुलिस को सूचना भी दी थी लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। हत्या से पहले भी प्रवीण को धमकियाँ मिली थीं।

बता दें कि दक्षिण कर्नाटक में एक अभियान चला हुआ था कि मुस्लिम मीट विक्रेताओं का बहिष्कार किया जाए। कथिततौर पर इस अभियान का नेतृत्व प्रवीण ही कर रहे थे। उन्होंने हिंदुओं को जागरूक करना शुरू किया था कि चिकन अगर खरीदना है तो हिंदुओं से खरीदें। वह हिंदुओं को अपनी खुद की पोल्ट्री शॉप खोलने को भी प्रेरित करते थे।

प्रवीण के साले ने बताया, “बेल्लारे में चिकन मीट का बिजनेस अधर्मियों के पास था। प्रवीण ने चिकन मीट शॉप को शुरू किया और धमकियाँ आने लगीं। उन्हें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन फिर भी वो सफल हुए। उनके प्रेरणा लेकर कई अन्य हिंदुओं ने भी जिले के अन्य जगहों पर दुकानें खोलीं।”

अब इन्हीं सब बातों के मद्देनजर लोग अनुमान लगा रहे हैं कि हो सकता है प्रवीण को इसलिए मौत के घाट उतारा गया क्योंकि एक तो प्रवीण 9 माह के कम समय में पोल्ट्री शॉप को चलाने में कामयाब हो गए थे और दूसरा उन्होंने हिंदुओं को जागरूक कर दिया था कि वो हिंदू दुकानदार से ही सामान खरीदें। 

मालूम हो कि इससे पहले प्रवीण की हत्या के पीछे उनके सोशल मीडिया पोस्ट और एक मुस्लिम व्यक्ति की हत्या के बदले को कारण बताया जा रहा था। हालाँकि अब ये दुकान और बिजनेस से जुड़ा एंगल सामने आया है। सोशल मीडिया यूजर्स भी प्रवीण की दुकान के पोस्ट और हत्या की खबर शेयर करके यही कयास लगा रहे हैं कि हिंदुओं के लिए खोली गई मीट शॉप की वजह से ही प्रवीण को मौत के घाट उतारा गया।

प्रवीण की हत्या में 2 गिरफ्तारियाँ

उल्लेखनीय है प्रवीण नेट्टारू को 26 जुलाई को बेल्लारे में उनकी दुकान के पास बाइकसवारों ने तलवार-कुल्हाड़ी जैसे धार-धार हथियारों से मौत के घाट उतारा था। इस हत्या के आरोप में पुलिस जाकिर और शफीक नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इन दोनों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है। जाँच अभी चल रही है। इनके लिंक पीएफआई और एसडीपीआई से भी मिले हैं।  इसके अलावा ये भी पता चला है कि शफीक के अब्बा इब्राहिम तो प्रवीण की दुकान में काम भी करते थे। उन्होंने खुद बताया कि उनका बेटा और प्रवीण अच्छे दोस्त थे और दुकान पर बात भी करते थे।

जहाँ शकीना ग्राम प्रधान, वहाँ काँवड़ यात्रा नहीं आसान: मर्दों ने रोका रास्ता, औरतों ने छतों से फेंके पत्थर-गंदा पानी, बंद करवाया DJ

उत्तर प्रदेश के बरेली में कॉंवड़ियों का रास्ता रोके जाने, उन पर गंदा पानी फेंकने और पथराव की घटना सामने आई है। आरोप महिला ग्राम प्रधान शकीना के ससुर इश्तियाक और उसके सहयोगियों पर है। बताया जा रहा है कि काँवड़ियों पर DJ बंद करने का दबाव भी बनाया गया। पुलिस ने 6 लोगों को हिरासत में लिया है। घटना शुक्रवार (29 जुलाई 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कैंट थानाक्षेत्र के गाँव परगंवा का है। बगल के लखौरा गाँव के प्रधान राजेंद्र कुछ अन्य काँवड़ियों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली से गंगा नदी में जल लेने कछला नाम की जगह जा रहे थे। शाम को लगभग 5 बजे जब ये जत्था परगवां गाँव से गुजरा तो वहाँ की ग्राम प्रधान शकीना के ससुर इश्तियाक ने काँवड़ियों का रास्ता रोक दिया। उसने इसे गैर परम्परागत मार्ग बताते हुए काँवड़ियों से आगे नहीं जाने को कहा।

इश्तियाक ने काँवड़ियों पर DJ बंद करने का दबाव बनाया। जत्थे में चल रहे जेनरेटर को बंद कर दिया। फिर भी जब काँवड़िए आगे बढ़े तो कुछ लोगों ने उनकी पिटाई कर दी। इस दौरान छतों से महिलाओं द्वारा गंदे पानी और पत्थर फेंकने का भी आरोप है। इससे नाराज काँवड़ यात्रियों ने हंगामा कर दिया।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भारी दल बल के साथ मौके पर पहुँची। 6 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक विवाद का समाधान कर दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बरेली के ADM वी के सिंह के मुताबिक गाँव में सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और काँवड़ियों की सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं।

बिहार के स्कूलों में शुक्रवार की छुट्टी पर नीतीश सरकार ने माँगी रिपोर्ट, मुस्लिम बहुल इलाकों में ‘परंपरा’ की दुहाई दे रही थी JDU और HAM

मुस्लिम बहुल इलाकों के स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी दिए जाने की बात सामने आने के बाद बिहार सरकार ने रिपोर्ट तलब की है। सरकार में साझीदार भाजपा की माँग है कि पूरे बिहार में एक समान छुट्टी होनी चाहिए। इस माँग से NDA में शामिल JDU और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) सहमत नहीं हैं और वो ‘परम्परा और मिसाल’ नाम पर वर्तमान हालात बनाए रखने के पक्षधर हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बिहार के शिक्षा मंत्री और JDU नेता विजय कुमार चौधरी ने ऐसे स्कूलों की लिस्ट मँगाई है। मंत्री ने कहा कि हमें जानकारी मिलते ही हमने रिपोर्ट तलब की और अधिकारियों से जवाब माँगा है। विभाग के अधिकारियों ने भी इस बावत मौखिक आदेश मिलने की पुष्टि की है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बिहार के पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार और अररिया के लगभग 500 सरकारी स्कूलों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश होता है। ये जिले बिहार के मुस्लिम बहुल जिले माने जाते हैं।

खबरों के वायरल होने के बाद इसे बदलने की माँग उठ रही है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने भी कानून का शासन कायम रहने और संवैधानिक ढाँचे को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने की आशा जताई है। वहीं JDU नेता उपेंद्र कुशवाहा के मुताबिक यह एक ‘गैर जरूरी मुद्दा’ है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “ये एक बेवजह का विवाद खड़ा करने का प्रयास है। विरोध करने वाले जान लें कि संस्कृत विश्वविद्यालयों में हर महीने की प्रतिपदा और अष्टमी की छुट्टी होती है।”

अपने ट्वीट के साथ उपेंद्र कुशवाहा ने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय की छुट्टियों का एक कैलेंडर भी शेयर किया है। JDU के प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी शुक्रवार की छुट्टी वाली परम्परा को न छेड़ने की बात कही है। सरकार में शामिल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा, “नीतीश सरकार न्याय और विकास में यकीन करती है। स्कूलों को विवाद में घसीटना गलत है। किसी छात्र या उसके अभिभावक को जब इससे दिक्कत नहीं है तो इस पर कुछ लोगों द्वारा न जाने क्यों हंगामा खड़ा किया जा रहा है।”

गौरतलब है कि बिहार की कुल आबादी में मुस्लिम लगभग 17 % हैं। सबसे अधिक मुस्लिम आबादी किशनगंज जिले में है, जहाँ लगभग 67% मुस्लिम बताए जाते हैं। इसके बाद कटिहार, अररिया और पूर्णिया का नंबर आता है, जहाँ मुस्लिम आबादी 40 से 50% के बीच बताई जाती है। बिहार में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या लगभग 75,000 है। इसमें पूर्णिया में लगभग 200, अररिया में 229, कटिहार में 100 और किशनगंज के लगभग 37 स्कूलों में रविवार के बजाय शुक्रवार की छुट्टी होने की बात सामने आई है।

₹700 करोड़ से बने अस्पताल में 5000 चूहों का आतंकः मरीजों का ग्लूकोज तक पी जाते हैं, मारने के लिए ₹12 लाख होंगे खर्च

छत्तीसगढ़ के एक अस्पताल में चूहों का आतंक इस कदर है कि वे मरीजों का ग्लूकोज तक पी जा रहे हैं। इतना नहीं, वे आए दिन अस्पताल के मशीनों के तार काटते रहते हैं और मरीजों को भी परेशान करते रहते हैं। इन चूहों को मारने के लिए अस्पताल प्रशासन ने टेंडर जारी किया है।

ये हाल है बस्तर में 700 करोड़ रुपए की लागत से बने जगदलपुर मेडिकल कॉलेज का। इस अस्पताल में लगभग 5,000 चूहों ने आतंक मचा रखा है। बीते दिनों उन्होंने सीटी स्कैन मशीन का तार काट दिया, जिससे दो दिनों तक जाँ प्रभावित रहा।

अस्पताल प्रशासन ने इन चूहों को मारने के लिए 10 से 12 लाख रुपए का बजट रखा है। इसका टेंडर एक निजी कंपनी को दी गई है। इस कंपनी ने 6 लोगों की एक टीम को चूहों को मारने के लिए लगाया है। यहाँ प्रतिदिन लगभग 50 चूहों को मारकर दफनाया जा रहा है।

पिछले एक महीने में लगभग 1500 चूहों को मारकर दफनाया जा चुका है। हालाँकि, इसके बावजूद भी चूहों का आतंक कम नहीं हुआ है। कुछ दिन पहले एक चूहे द्वारा एक मरीज को चढ़ाया जा रहा ग्लूकोज पीने का वीडियो सामने आया था। इसे एक मरीज ने बनाया था।

वीडियो में एक बिस्तर पर लेटे एक मरीज को ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है, तभी ग्लूकोज बोतल के स्टैंड से एक चूहा नीचे उतरता है और मरीज के नस में लगी पाइप को दाँतों से कुतर देता है। इसके बाद एक और चूहा नीचे उतरकर उस पाइप से बहने वाले ग्लूकोज को पीने लगता है।

मरीजों का कहना है कि दिन हो या रात, वार्डों में चूहे सोने नहीं देते। कई मरीजों को तो इन चूहों ने काट भी लिया है। बस्तर के कलेक्टर चंदन कुमार का कहना है कि अस्पताल में चूहों की समस्या बढ़ी है और उसके समाधान पर काम किया जा रहा है।

PFI ने ईशनिंदा में काटा हाथ, पत्नी ने की आत्महत्या: बाएँ हाथ से लिख डाली आत्मकथा, प्रोफेसर को मिला केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार

केरल (Kerala) में जिस प्रोफेसर का दायाँ हाथ कट्टरपंथियों ने काट दिया था, उन्होंने बाएँ हाथ से अपनी आत्मकथा लिख कर इनाम जीता है। प्रोफेसर का नाम टी जे जोसेफ है। उनकी आत्मकथा को केरल साहित्य अकादमी द्वारा 2020 की बेस्ट बायोग्राफ़ी घोषित किया गया है। मलयालम में ‘अट्टूपोकथा ओरमाकल’ नाम से लिख गई अपनी आत्मकथा में प्रोफेसर ने हाथ काटे जाने के पहले के अपने जीवन की चर्चा की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के कट्टरपंथियों ने ईशनिंदा के कथित आरोप में प्रोफेसर का दायाँ हाथ 4 जुलाई 2010 को काट दिया था। तब प्रोफेसर जोसेफ लडुक्की जिले के थोडूपुझा क्षेत्र में आने वाले न्यूमैन कॉलेज में पढ़ाते थे। उन पर परीक्षा के लिए एक प्रश्न पत्र में इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के नाम का प्रयोग करने पर कट्टरपंथी नाराज हो गए थे।

वह प्रश्न पत्र एक पागल और भगवान के बीच हुई बातचीत को लेकर था। प्रश्न प्रसिद्ध लेखक पीटी कुंजू मोहम्मद की किताब से लिया गया था। विवाद बढ़ने पर प्रोफेसर जोसेफ ने सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि पेपर में पागल आदमी का कोई नाम नहीं था और मोहम्मद नाम किताब के लेखक पीटी कुंजू मोहम्मद के चलते आया था।

हालाँकि, उनकी सफाई का चरमपंथियों पर कोई असर नहीं पड़ा था। मुख्य हमलावर का नाम नजीब था। साल 2015 में इस केस में PFI के 13 सदस्यों को NIA कोर्ट ने सजा सुनाई थी।

जब प्रोफेसर जोसेफ पर हमला हुआ तब उनकी उम्र 52 साल की थी। हमले से हुए घाव से उन्हें उबरने में काफी समय लगा, लेकिन उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा और लम्बे समय तक बाएँ हाथ से लिखने की प्रैक्टिस करते रहे। आखिरकार लगभग 10 साल की मेहनत के बाद उन्होंने बाएँ हाथ से लिखकर अपनी बायोग्राफी प्रकाशित की।

अपनी इस बायोग्राफी में प्रोफेसर टी जे जोसेफ ने बताया है कि कैसे उस समय कॉलेज प्रशासन से लेकर उनके तमाम सहयोगियों और यहाँ तक कि चर्च ने भी उनका साथ छोड़ दिया था और उसी डिप्रेशन में उनकी पत्नी ने भी आत्महत्या कर ली थी। उ

उन्होंने बताया था, “कॉलेज के प्रिंसिपल और मैनेजमेंट ने शुरुआती समय में मेरा साथ दिया, लेकिन समय के साथ उनके मत बदल गए। ये जानने के बावजूद कि मैं निर्दोष हूँ, कॉलेज ने मुझ पर ईशनिंद का आरोप मढ़ा, मुझे सस्पेंड किया गया और बाद में नौकरी से निकाल दिया गया। चर्च ने मेरे परिवार को बहिष्कृत किया।”

जोसेफ़ की आत्मकथा को इंग्लिश में भी ‘ए थाउजेंड कट्स’ नाम से प्रकाशित किया गया है। प्रोफेसर जोसेफ ने ‘भ्रान्तनु स्तुति’ नाम से दूसरी किताब भी प्रकाशित की है। यह किताब उनके द्वारा तैयार किए गए प्रश्न पत्र में उसी पागल आदमी पर आधारित है। फिलहाल प्रोफसर विदेश दौरे पर बताए जा रहे हैं।

गाने पर नेहा कक्कड़ से तारीफ, शिव-भजन के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों से गाली-धमकी: मिलिए फ़रमानी नाज़ से, जिन्हें है जान का खतरा

सोशल मीडिया पर काफी चर्चित गायिका फ़रमानी नाज़ (Farmani Naaz) ने सावन के महीने में भगवान शिव पर एक भजन लॉन्च किया। यह भजन अब वायरल हो गया। इस गाने के बाद उनके सोशल मीडिया हैंडल पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा लगातार उल्टे-सीधे कमेंट किए जा रहे हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों की इन हरकतों के चलते फ़रमानी नाज़ ने अपने यूट्यूब का कॉमेंट सेक्शन भी बंद कर दिया है। यह गाना 16 जुलाई 2022 को रिलीज हुआ था, जिसका टाइटल है ‘घूमूंगी हरिद्वार (Gummu Gi Haridwar)’।

इस गाने के थंबनेल में महादेव शिव की फोटो लगी हुई है, जिसके बगल में फ़रमानी नाज़ खड़ी दिखाई दे रही हैं। गाने में फ़रमानी नाज़ ने अपने सहयोगी से खुद हरिद्वार जाने की जिद करते हुए शिव और काँवड़ यात्रा की काफी तारीफ की है।

फ़रमानी नाज़ ने 22 जुलाई 2022 को एक और गाना ‘हर हर शम्भू (Farmani Naaz Har Har Shambhu)’ रिलीज किया। इस गाने में वो शिव की स्तुति ‘कर्पूर गौरं करुणावतारम’ गाते हुए सुनाई दे रही हैं। उनके सहयोगी का नाम भूरा ढोलक है, जो गाने में उनका साथ दे रहा।

इस गाने पर मोहम्मद अमजद ने लिखा, “अरे शर्म करो फ़रमानी नाज़, अखिरियत का थोड़ा सा तो खौफ करो।”

मोहम्मद अमजद

निशा खान ने लिखा, “ये भी पगला गई।”

निशा

मोहम्मद निज़ाम ने लिखा, “ईमान खराब कर लिया।” मोहम्मद गुफरान ने कहा, “फ़रमानी नाज़ तू भी घंटा हिलाएगी।”

गुफरान

मोहम्मद जावेद खान ने लिखा, “पैसे के चक्कर में दीन को मत भूल जा।”

जावेद

सलाउद्दीन खान ने लिखा, “क्या बकवास है, आज से तेरे वीडियो देखना बंद।”

सलाउद्दीन

ज़मीर खान ने फ़रमानी नाज़ को लानत भेजी तो अयान पटेल ने लिखा, “अल्लाह तुमको कामयाब नहीं करेगा इंशाअल्लाह, आमीन।”

अयान पटेल

मोहम्मद शमी पठान ने बेहद गंदी गाली देते हुए लिखा, “अगर तुझे पैसे से इतना ही प्यार है तो फ़रमानी $%*& और देने लग।”

शमी पठान

वारिश आलम ने भी गंदी गाली देते हुए लिखा, “कितना आदमी से #**ती हो फ़रमानी नाज़, एक बार हमसे भी #*वा लो।”

वारिश आलम

राव नदीम ने लिखा, “&%* में हाथ दे कर बाहर निकाल लूँ।”

राव नदीम

इन धमकियों और गालियों पर फिलहाल फ़रमानी नाज़ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। बता दें कि फ़रमानी नाज़ साल 2020 में इंडियन आइडल (Farmani Naz in Indian Idol 2020) में भी भाग ले चुकी हैं। नेहा कक्कड़ ने इनके गानों की तारीफ भी की थी लेकिन अपने 2 साल के बेटे के ऑपरेशन के कारण फ़रमानी नाज़ को इंडियन आइडल बीच में ही छोड़ना पड़ा था।

फ़रमानी नाज़ (Farmani Naz) ने दिसंबर 2021 में अपने पति पर खुद को तीन तलाक देने और दूसरी शादी करने का आरोप लगाते हुए खुद को जान का खतरा बताया था। फ़रमानी नाज़ का भाई फरमान नाज़ भी गाने गाता है।

अपनी ही पार्टी की हार पर नाचने लगे कॉन्ग्रेसी… ‘दरी बिछाने और कुर्सी पकड़ने’ पर भिड़े कॉन्ग्रेस के टॉप लीडर

एक तरफ अपनी पार्टी की हार पर कॉन्ग्रेसी नाच रहे हैं तो दूसरी तरफ दरी बिछाने और कुर्सी देने के नाम पर शीर्ष नेताओं में तकरार चल रही है। राजस्थान कॉन्ग्रेस (Congress) के नेता और प्रदेश के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने एक बार फिर पार्टी में नेतृत्व को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि युवा सिर्फ दरी बिछाने के लिए नहीं है। उधर, मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव हारने के बाद कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया।

लगभग ढाई महीने पहले जयपुर में हुए कॉन्ग्रेस के चिंतन शिविर में जीत के लिए युवाओं को आगे लाने की बात कही गई थी। इसी बीच सचिन पायलट ने कहा कि युवा सिर्फ दरी बिछाने के लिए नहीं है, उन्हें लीडरशिप भी चाहिए। युवा नेता पायलट का यह बयान उनके पुराने दर्द को दिखाता है।

पायलट ने कहा, “जब तक हम ऊर्जावान और संघर्षशील युवाओं को लीडरशिप का मौका नहीं देंगे, तब तक हम उनके साथ न्याय नहीं कर रहे होते हैं।” उन्होंने कहा कि आज के युवाओं में लीडरशिप की क्षमता और गुण हैं। उनकी इस क्षमता का उपयोग करना चाहिए।

सचिन पायलट युवाओं को आगे करने के पक्षधर रहे हैं। जनवरी 2014 में जब उन्हें राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली थी, तब उन्होंने राजनीति में ऊर्जावान युवाओं की टीम तैयार की। उनकी वजह से कई युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ने का मौका मिला।

प्रदेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट की बीच सीएम पद को लेकर प्रतिस्पर्धा रही है। इस कारण दोनों के बीच अक्सर जुबानी जंग देखने को भी मिलते हैं। पहले उन्हें राज्य में सत्ता से बाहर रखा गया, लेकिन पायलट समर्थकों को दबाव में उन्हें उप-मुख्यमंत्री का पद दिया गया था।

सचिन पायलट का लक्ष्य राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार को फिर से सत्ता में लाना है और इसके लिए उन्होंने कॉन्ग्रेस हाईकमान को अपने सुझाव भी भेजे हैं। दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश के पंचायत चुनाव में हार के बाद वहाँ के कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं।

मध्य प्रदेश में धार जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव हुए थे, जिसमें दोनों पदों पर कॉन्ग्रेस की हार हुई। इसके बाद पूर्व वन मंत्री उमंग सिंघार और जिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बालमुकुंद सिंह गौतम ने कार्यकर्ताओं के साथ जमकर डांस किया और अपनी हार को प्रेरणा कहा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने इस दौरान ‘हार के बाद ही जीत है’ गाने पर जमकर डांस किया।

बच्ची से रेप की सुनवाई 1 दिन में; मौत की सजा 6 दिन में… हाईकोर्ट ने जज को किया सस्पेंड: मामला अब सुप्रीम कोर्ट में

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (29 जुलाई 2022) को अररिया जिले के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश शशिकांत राय की निलंबन वाली याचिका पर बिहार सरकार को नोटिस भेजा है। जज राय ने पॉक्सो एक्ट में चार दिन में ही सुनवाई पूरी कर आरोपित को मौत की सजा सुनाई थी।

इसके अलावा, ADJ शशिकांत राय ने जिला न्यायालयों में प्रोमोशन की नई प्रणाली पर सवाल उठाया था। इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इस निलंबन को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

जस्टिस यूयू ललित (Justice UU Lalit) और जस्टिस एस रवीन्द्र भट (Justice S Ravindra Bhat) की सुप्रीम कोर्ट वाली खंडपीठ ने अपने निर्देश में बिहार की नीतीश कुमार सरकार को अपना जवाब दो सप्ताह में दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इस मामले को सुनवाई के लिए उन्होंने सूचीबद्ध कर लिया है।

न्यायाधीश शशिकांत राय की याचिका में कहा गया है कि उन्हें पदोन्नति से वंचित कर दिया। इसको लेकर उन्होंने जिला न्यायपालिका में पदोन्नति के लिए नई मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाया था।

राय की तरफ से शीर्ष अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता विकास ने कहा, “माननीय उच्च न्यायालय केवल निर्णयों के मूल्यांकन की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए याचिकाकर्ता को सीधे कारण बताओ नोटिस जारी किया और बाद में बिना कोई कारण बताए उन्हें निलंबित कर दिया, जिससे न्यायिक अधिकारियों का मार्गदर्शन और सुरक्षा करने के अपने संवैधानिक दायित्व में विफल रहे।“

राय ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि उनके खिलाफ एक ‘संस्थागत पूर्वाग्रह’ है, क्योंकि उन्होंने छह साल की एक बच्ची से बलात्कार से जुड़े POCSO (बच्चों को यौन अपराध से संरक्षण कानून) के एक मामले में सुनवाई एक ही दिन में ही पूरी कर ली थी।

राय ने कहा कि उन्होंने एक अन्य मामले में एक आरोपित को चार दिन की सुनवाई में के बाद दोषी ठहराते हुए उसे मौत की सजा सुनाई थी। उन्होंने कहा किया कि उनके ये फैसले व्यापक रूप से सुर्खियों में छाए रहे। इसके लिए उन्हें सरकार तथा जनता से सराहना भी मिली।

अररिया के सत्र न्यायाधीश शशिकांत राय ने 6 साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार के मामले की सुनवाई एक दिन में पूरी कर ली थी। वहीं, एक अन्य मामले में उन्होंने छह दिन की सुनवाई में आरोपित को मौत की सजा सुनाई थी। जज राय के इस त्वरित निर्णय पर पटना हाईकोर्ट ने निलंबन का यह निर्णय लिया था।

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, आपने सुनवाई की और आरोपित को एक दिन में ही उम्रकैद की सजा सुना दी। इस तरह नहीं होना चाहिए। मामलों को लंबित होना एक मुद्दा है और मुद्दों के प्रति दृष्टिकोण एक अलग मुद्दा है।”

पीठ ने कहा, “शीर्ष अदालत के अनेक फैसले हैं जिनमें उसने कहा है कि सजा उसी दिन (सुनवाई पूरी करके) नहीं सुनाई जानी चाहिए। हमारे हिसाब से यह न्याय का उपहास होगा कि आप उस व्यक्ति को पर्याप्त नोटिस, पर्याप्त अवसर तक नहीं दे रहे जिसे अंतत: मौत की सजा मिलने वाली है।”

प्रवीण नेट्टारू की हत्या से लेकर प्रोफेसर का हाथ काटने तक: PFI और शरिया कोर्ट, इस्लामीकरण के विरोधी हिंदुओं के कत्लेआम का फरमान

अफगानिस्तान (Afghanistan) में सजा के तौर पर हाथ काटने, आँख निकालने, गला काटने, पत्थर मारकर मौत के घाट उतारने, सरेआम फाँसी देने और मृतक के शवों को सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम लटकाने जैसी घटनाओं के बारे में अक्सर हम पढ़ते और सुनते हैं। ये सजाएँ इस्लामी नियमों और कानूनों के तहत दी जाती हैं। इसका निर्धारण इस्लामी कोर्ट यानी शरिया अदालतें करती हैं, जिन्हें दारुल कजा (Darul Khada) कहा जाता है।

दारुल कजा का अर्थ होता है, न्याय का घर या अल्लाह का घर। यह वही दारुल कजा उर्फ शरिया कोर्ट है, जिसने साल 2010 में केरल के थोडुपुझा में स्थित न्यूमैन कॉलेज के ईसाई प्रोफेसर टीडी जोसेफ का हाथ काटने का आदेश दिया था। प्रोफेसर जोसेफ पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने इस्लाम के पैगंबर का अपमान किया है। दारुल कजा की भूमिका का खुलासा PFI के गिरफ्तार सदस्य अशरफ ने किया था।

कुछ दिन पहले कर्नाटक में भाजयुमो (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की जिस तरह से हत्या की गई है, उसमें ऐसे में PFI और दारुल कजा संदेह के घेरे में है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसावाराज बोम्मई ने कहा था कि हत्यारे केरल से आकर घटना को अंजाम दिए और वापस भाग गए, ऐसा संदेह है।

NIA ने कुछ साल पहले केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में PFI की आतंकी गतिविधियों और उसके मजबूत आधार पर एक रिपोर्ट दी थी। हाल के दिनों में कथित ईशनिंदा के नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों में दंगा करने और हत्या करने की घटनाओं के लिंक PFI से जुड़े हुए पाए गए हैं। इसमें में इसके कंगारू कोर्ट को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

देश भर में दारुल कजा, AIMPLB ने हर जिले के लिए की थी वकालत

देश के न्यायिक व्यवस्था के समानांतर ये दारुल कजा आज देश के तमाम राज्यों में अवैध रूप से चल रही हैं। साल 2018 में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इन शरिया अदालतों को बढ़ाकर देश के हर जिले में खोलने की वकालत की थी। हालाँकि, उस वक्त इसका काफी विरोध हुआ था, लेकिन यह काम रूका नहीं।

छह महीना पहले एदार-ए-शरिया झारखंड के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने कहा था कि राज्य के सभी जिलों में दारुल कजा या शरिया कोर्ट स्थापित किया जाएगा। मार्च 2022 तक राज्य के डाल्टनगंज, गोड्डा, मधुपुर और जामताड़ा में इसकी शाखाएँ खोलने का लक्ष्य रखा था।

उस दौरान रिजवी ने बताया था कि जमशेदपुर, राँची, धनबाद, दुमका, हजारीबाग, कोडरमा, लोहरदग्गा, राजमहल (साहिबगंज) और बोकारो में पहले से ही शरिया कोर्ट संचालित हैं। उन्होंने तर्क दिया था कि मुस्लिमों की माँग पर इसे खोला जा रहा है।

मुस्लिम स्कॉलर द्वारा आमतौर पर तर्क दिया जाता है कि दारुल कजा में मुस्लिमों के छोटे-मोटे और घरेलू मुकदमों को देखा जाता है और उनमें सुलह कराकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने से बचाया जाता है। इससे देश की न्यायिक व्यवस्था पर से भार कम होता है।

हालाँकि, देश में बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ और इन शरिया अदालतों के संबंध स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। कट्टरपंथी संगठनों ने भी शरिया कोर्ट स्थापित की है और मुस्लिमों को कोर्ट के बदले इन दारुल कजा में जाने के लिए प्रेरित किया है।

PFI ने साल 2009 में बनाई अपनी दारुल कजा

पिछले कुछ वर्षों से आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) और तालिबान की स्टाइल में लोगों को मारने के कारण चर्चा में आए चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने भी शरिया कोर्ट स्थापित की है।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को पता चला है कि ये अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में समानांतर न्याय-व्यवस्था चलाते हैं और मुस्लिमों से जुड़े मुद्दों को सुलझाती है। रिपोर्टों के अनुसार, PFI की राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ इंडिया (SDPI) के राष्ट्रीय प्रमुख और संस्थापक ई अबूबकर ने साल 2009 में अपनी शरिया कोर्ट यानी दारुल कजा की स्थापना केरल में की थी।

इसमें उसने मुस्लिम विद्वानों के साथ-साथ अधिवक्ताओं को शामिल किया था। हालाँकि, बाद के वर्षों में धर्मांतरण का विरोध करने वाले हिंदुओं और कई नेताओं की हत्याओं में इस शरिया कोर्ट की भूमिका पाई गई।

धर्मांतरण का विरोध करने वाले हिंदू नेताओं की ‘दावा’ टीम द्वारा हत्या

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह भी पता चला है कि PFI का दारुल कजा केरल में ना सिर्फ मुस्लिमों को न्यायालयों में जाने रोकता है, बल्कि ये उन हिंदू नेताओं की हत्या करने का भी निर्देश भी देता है, जो इन शरिया कोर्ट का विरोध करते हैं। इसके साथ ही यह मुस्लिमों से जुड़े मामलों में यह हिंदुओं की टारगेट किलिंग करने का निर्देश देता है।

कई हिंदू नेताओं की हत्या से जुड़े मामलों की जाँच के दौरान NIA को यह भी पता चला कि PFI ने हत्याओं के जरिए हिंदुओं में डर पैदा करने के लिए ‘दावा’ टीम का गठन किया है। इस टीम का मुख्य काम सामाजिक कार्य के नाम पर हिंदुओं का इस्लाम में धर्मांतरण है और जो इस धर्मांतरण का विरोध करे उसकी हत्या करना है।

PFI का सत्यसारणी केंद्र इसका प्रमुख उदाहरण है, जहाँ हिंदुओं लड़कियों को लव जिहाद में फँसाकर लाया जाता है और उनका ब्रेनवॉश कर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित किया जाता है। लव जिहाद के अलावा कई तरह के प्रलोभन और डर पैदा करके भी ये धर्मांतरण का काम करते हैं।

NIA ने साल 2017 में गृह मंत्रालय को सौंपे अपने डोजियर में कहा था कि केरल के मंजेरी स्थित सत्यसारणी इस्लामिक दावा इंस्टीट्यूट उर्फ मरकज-उल-हिदया धर्मांतरण केंद्र के रूप में काम करता है। इतना ही नहीं, यहाँ आने वाले लोगों को धर्मांतरण के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण दिया जाता है और उनका ब्रेनवॉश किया जाता है।

ईसाई प्रोफेसर का हाथ काटकर ‘ईशनिंदा’ की सजा

साल 2010 में केरल के थोडुपुझा स्थित न्यूमैन कॉलेज के ईसाई प्रोफेसर टीडी जोसेफ ने B.Com कक्षा के लिए एक प्रश्न-पत्र तैयार किया था। क्लास के मुस्लिम छात्रों ने हंगामा कर दिया कि इसमें इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया गया है।

इसके बाद PFI से जुड़े 8 मुस्लिमों के एक समूह ने प्रोफेसर जोसेफ का दाहिना हाथ काटकर उस समय अलग कर दिया, जब वे मुवत्तुपुझा के निर्मला चर्च में रविवार की प्रार्थना सभा से भाग लेकर अपनी माँ और बहन के साथ वापस घर लौट रहे थे।

इस मामले में गिरफ्तार अशरफ नाम के एक आरोपित ने बताया था कि शरिया कोर्ट उर्फ दारुल कजा ने ईशनिंदा के आरोप में प्रोफेसर जोसेफ का हाथ काटने की सजा सुनाई थी और ऐसा करने के लिए उसे निर्देश दिया गया था। उस दौरान केरल के शरिया कोर्ट का समन्वयक मौलवी ईसा था और उसी के अंतर्गत आने वाले कोर्ट ने यह सजा सुनाई थी।

धर्मांतरण का विरोध करने पर हुई थी रामालिंगम की हत्या

फरवरी 2019 में तमिलनाडु के तंजावूर में रामलिंगम की PFI के ‘दावा’ दल ने धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी थी। रामलिंगम ने PFI द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण का विरोध किया था। इसके बाद चरमपंथी संगठन ने उनकी हत्या कर दी थी।

NIA को पता चला कि PFI की विचारधारा से मेल खाने के कारण कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने भी उसकी मदद की। इसके बाद PFI ने केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में अपने आधार को खूब मजबूत किया। उसने बड़े पैमाने पर हथियार खरीदे और लोगों को प्रशिक्षित किया।

देश में हत्याओं का एक ही पैटर्न और PFI का जनाधार

आज प्रवीण नट्टारे ही नहीं, राजस्थान में कन्हैया लाल की हत्या, अमरावती में उमेश कोल्हे की हत्या, कानपुर में सांप्रदायिक दंगों का मुख्य आरोपित जफर हयात हाशमी और अजमेर के चिश्ती दरगाह के खादिम द्वारा PFI का सदस्य होने की स्वीकृति इसके फैलाव की ओर इशारा करती हैं।

हाल ही में बिहार के फुलवारी शरीफ में छापेमारी के बाद PFI की ‘विजन 2047’ दस्तावेज का खुलासा हुआ और उसके प्रशिक्षण स्थलों के बारे में जानकारी मिली। जाँच के दौरान यह बात भी खुल कर सामने आ रहा है कि बिहार में PFI के कैडर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। बिहार में इस संगठन ने 25 हजार से अधिक लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी है।

NIA ने अपनी रिपोर्ट में बताया था PFI को कट्टरपंथी संगठन

आतंकी गतिविधियों में शामिल होने को लेकर NIA ने PFI की जाँच की थी। साल 2017 में अपने डोजियर (रिपोर्ट) में NIA ने कहा था कि पीएफआई के आतंकी संपर्कों को लेकर उसके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं।

गृह मंत्रालय को सौंपे गए इस डोजियर में NIA ने PFI द्वारा प्रोफेसर जोसेफ का हाथ काटने से लेकर हथियार चलाने एवं देशी बम बनाने के लिए चलाए जा रहे शिविर तक का जिक्र किया था। इसके अलावा बंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता रुद्रेश की हत्या का भी जिक्र किया गया था।

NIA ने यह भी कहा था कि PFI अपने कैडरों को इस्लामी मूल्यों के रखवाले के रूप में संदर्भित करता है। इसलिए वह लोगों को कोर्ट में जाने के बजाए शरिया कोर्ट में जाने के लिए कहता है। उसने दारुल कजा की भी स्थापना की थी, जो मुस्लिमों के मामलों की सुनवाई करता था।

शरिया कोर्ट और सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट

देश में संवैधानिक न्यायिक व्यवस्था के समानांतर न्यायिक व्यवस्था चलाई जा रही है। यह खुलेआम हो रहा है। स्वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई करने वाले संविधान के रखवाले सुप्रीम कोर्ट ने शरिया कोर्ट और इसके फैसले अथवा फतवे को लेकर एक मामले की सुनवाई की थी।

विश्वलोचन मदन बनाम भारत संघ एवं अन्य (2014) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि शरिया अदालतों द्वारा दिए गए फतवे या इस्लामी आदेशों का ‘स्वतंत्र भारत में कोई स्थान नहीं है’ और इन्हें मासूमों को दंडित करने के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे यह भी कहा था कि इन अदालतों का सलाह मानना बाध्यकारी नहीं है और कोई भी पक्ष इसे स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है। हालाँकि, दारुल कजा को अवैध घोषित करने से सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट मना कर दिया था।

साल 2010 में जब केरल में प्रोफेस जोसेफ का हाथ काट दिया गया था, तब केरल के तत्कालीन गृहमंत्री कोडियेरी बालकृष्णन ने विधानसभा को बताया था कि सरकार शरिया अदालतों के कामकाज की जाँच करेगी। हालाँकि, वह जाँच हुई या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। हाँ, केरल सरकार की तुष्टिकरण की खबरें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।