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‘खेल और खिलौनों की दुनिया में भारत उभरती हुई ताकत’: PM मोदी ने उधम सिंह को दी श्रद्धांजलि, बताया – आयुर्वेदिक दवाओं की हो रही रिकॉर्ड बिक्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 31 जुलाई 2022 (रविवार) को 91 वीं बार ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) की है। इस बार मन की बात को उन्होंने 15 अगस्त को आने वाली आज़ादी की 75वीं वर्षगाँठ के चलते विशेष बताया है। मोदी ने अपने सम्बोधन की शुरुआत देश के लिए सब कुछ बलिदान कर देने वाले क्रांतिकारी उधम सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें याद कर के की।

प्रधानमंत्री मोदी ने रेल मंत्रालय के ‘आज़ादी की रेलगाड़ी’ नाम के अभियान की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत भारतीय रेल मंत्रालय स्वतंत्रता अभियान में रेलवे की भूमिका को लोगों तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा है। इसके उदाहरण के तौर पर उन्होंने अब नेताजी सुभाष जंक्शन के नाम से प्रसिद्ध झारखंड का गोमो स्टेशन बताया, जहाँ से नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजों को चकमा दे कर कालका मेल से कहीं और चले गए थे। इसी के साथ उन्होंने UP के काकोरी और तमिलनाडु के थुडुकुड़ी स्टेशनों के इतिहास की भी चर्चा की।

‘मन की बात’ में मोदी ने आगे आज़ादी के अमृत महोत्स्व में 13 से 15 अगस्त तक चलने वाले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने हर व्यक्ति से अपने घरों पर तिरंगा लगाने की भी अपील की। सम्बोधन में मोदी ने 2 अगस्त को राष्ट्रध्वज निर्माता पिंगली वेंकैया की जयंती के बारे में बताया।

मोदी ने दुनिया भर में बढ़ती आयुर्वेदिक दवाओं की माँग के बारे में भी बताया। उन्होंने आयुष उत्पादों की बिक्री में रिकॉर्ड बढ़त होने की जानकारी दी।

मोदी ने मधुमखी पालन और शहद उत्पादन को किसानों की आय में बढ़ोत्तरी करने वाला कदम बताया।

मोदी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित होने वाले मेलों में हर किसी से भाग लेने की भी अपील की। इस दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में होने वाले मेलों का जिक्र किया। मेलों को उन्होंने ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ अभियान में सहायक बताया।

मोदी ने खिलौनों के निर्यात में भारत को उभरती हुई शक्ति बताया और खिलाडियों के वैश्विक स्तर पर प्रदर्शन में सुधार पर ख़ुशी जताई।

चित्र साभार- @PMOIndia

इसके अलावा मोदी ने क्लास 10 और 12 की परीक्षा में सफल हुए सभी छात्रों को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामना भी दी है।

संजय राऊत के घर ED की छापेमारी, समन पर हाजिर ना होकर दी थी गिरफ्तारी की चुनौती: रेड के बाद बाला साहेब की खाई कसम, कहा- निर्दोष हूँ

पात्रा चॉल जमीन से संबंधित 1,034 करोड़ रुपए घोटाले (Patra Chawl Land Scam) मकी जाँच कर रही ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने रविवार (31 जुलाई 2022) को शिवसेना नेता संजय राऊत (Sanjay Raut) के मुंबई में भांडुप स्थित घर पर छापेमारी की।

छापेमारी और संजय राऊत से पूछताछ पिछले 4 घंटों से अधिक समय से जारी है। ED की कार्रवाई पर संजय राऊत ने कहा है कि वे मर सकते हैं, पर समर्पण नहीं करेंगे। उन्होंने बाला साहब ठाकरे की कसम खाते हुए खुद को निर्दोष बताया।

ED की टीम रविवार की सुबह ही संजय राऊत के आवास ‘मैत्री’ पर पहुँच गई। उनके साथ मुंबी पुलिस के साथ-साथ पैरामिलिट्री के जवान भी हैं। इस कार्रवाई के विरोध में शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के कई कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे और भाजपा तथा ED के खिलाफ नारेबाजी की।

राऊत ने कहा, “बाला साहेब की कसम मेरा इस मामले से कोई वास्ता नहीं है। हमने बाला साहेब ने लड़ना सिखाया है और हमारी लड़ाई जारी रहेगी। मैं शिवसेना नहीं छोड़ने वाला भले ही मेरे खिलाफ झूठे सबूतों के आधार पर झूठी कार्रवाई की जा रही है। भले मैं मर जाऊँ पर झुकने के लिए तैयार नहीं।” संजय राऊत ने अपनी लड़ाई शिवसेना और महाराष्ट्र के लिए बताई है।

बता दें कि 1 जुलाई 2022 को ED ने उन्हें पूछताछ के बुलाया था और उस दौरान लगभग 10 घंटे तक पूछताछ की थी। तब संजय राऊत ने कहा था, “मैंने पूरा सहयोग करते हुए उनके सभी सवालों का जवाब दिया। अगर वे मुझे बुलाएँगे तो मैं फिर जाऊँगा।”

चित्र साभार- @rautsanjay61

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवसेना के शिंदे गुट ने ED की इस कार्रवाई का समर्थन किया है। शिवसेना विधायक संजय शिरसाट ने कहा, “जो व्यक्ति गुवाहाटी से हमारी लाश लाने की बात करता था वो आज परेशान है। भगवान के घर देर है पर अंधेर नहीं। जैसी करनी, वैसी भरनी”

गौरतलब है कि पात्रा चॉल घोटाले में 5 अप्रैल 2022 को ED ने संजय राऊत और उनकी पत्नी वर्षा राऊत से जुड़ी 11 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पति कुर्क कर ली थी। ED ने उन्हें 28 जून को पेश होकर जवाब देने के लिए कहा गया था, पर वो उपस्थित नहीं हुए। तब उन्होंने खुद को गिरफ्तार करने की चुनौती भी दी थी। राऊत को सबसे हालिया समन 27 जुलाई को भेजा गय था।

पैसों की जानकारी पार्टी में सभी टॉप नेताओं को, जो बरामद हुआ… वह सिर्फ छोटा सा हिस्सा: पार्थ चटर्जी ने सब उगल दिया

पार्टी से सस्पेंड कर दिए गए TMC नेता पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) सुर्खियों में हैं। ममता सरकार में मंत्री रहे पार्थ की करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी में करोड़ों रुपए नकद और सोना बरामद किया। अब पार्थ चटर्जी का कहना है कि इन पैसों की जानकारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में सभी शीर्ष नेताओं को थी। आपको बता दें कि TMC की सबसे बड़ी नेता और सर्वेसर्वा ममता बनर्जी हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पूछताछ में अर्पिता मुखर्जी ने बताया था कि पार्थ उनके फ्लैटों को बैंक की तरह प्रयोग करते थे। फिलहाल पार्थ चटर्जी गिरफ्तार हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया है कि उनके द्वारा लिए जा रहे पैसों की जानकारी पार्टी में सभी शीर्ष नेताओं को थी।

पैसों के बारे में TMC के टॉप लीडर को सब पता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी से सस्पेंड होने और मंत्री पद से हटा दिए जाने के बाद पार्थ चटर्जी ने जाँचकर्ताओं को खुद ही सब कुछ बताना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा:

“स्कूल में अध्यापक बनाने के नाम पर कैंडिडेट्स से लिए जा रहे पैसों की जानकारी पार्टी में शीर्ष नेतृत्व सहित बाकी सबको थी। मैंने तो सिर्फ पैसों को अपने पास रखा था। न ही मैंने किसी कैंडिडेट से पैसे लिए और न ही माँगे। यह पार्टी का एक आदेश था, जिसे मैंने माना। पैसे कई अन्य नेताओं ने भी लिए, जो सब मुझे रखने को दे दिया गया था।”

जो मिला वो तो एक छोटा सा हिस्सा

पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) ने आगे कहा, “जो पैसे मेरे पास रखे हुए थे, उसमें से सैकड़ों करोड़ रुपए पार्टी ने प्रयोग कर डाले। मेरे पास जो बरामद हुआ, वह तो एक छोटा सा हिस्सा है। मेरे अलावा कई अन्य नेताओं ने अपने पैसे से अर्पिता मुखर्जी के नाम पर जमीनें खरीदी हैं। सबके पैसे मेरे पास रखने के लिए पार्टी ने लम्बा समय विचार करने में लिया था। अब पार्टी द्वारा मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया गया है।”

टीचरों के अलावा रेलवे में नौकरियों के लिए भी पैसे

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पार्थ चटर्जी ने जाँचकर्ताओं को जानकारी दी है कि न सिर्फ टीचरों बल्कि रेलवे की नौकरियों के लिए भी TMC नेताओं ने कैंडिडेट्स से पैसे लिए हैं। उन्होंने बताया, “मेरा काम दूसरे नेताओं द्वारा बनाए गए कागजातों पर साइन करने तक सीमित था। मजेरहाट इलाके में बाकायदा ऐसी डील करने के लिए ऑफिस खोले गए हैं। रेलवे की नौकरियों के नाम पर भी पैसे जमा किए गए हैं।”

पार्थ चटर्जी के अनुसार तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) जब सत्ता में नहीं थी, तब भी वो पैसे लेकर नौकरी लगा देने के खेल खेलती थी। तृणमूल को पैसे देकर रेलवे में कई लोगों ने नौकरी जॉइन की है। पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) की मानें तो शिक्षा और रेलवे के अलावा भी कई अन्य विभागों में पैसे लेकर नौकरी देने का भ्रष्टाचार तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने किया है।

अर्पिता को उसके पैरों पर खड़ा करना चाहता था

अपनी करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों में मिले करोड़ों रुपए को लेकर पार्थ चटर्जी ने अलग ही कहानी बयां की। पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) ने बताया:

“मैं अर्पिता को आत्मनिर्भर बनाना चाहता था। मैं चाहता था कि वो मॉडलिंग और फिल्म इंडस्ट्री में अपना खुद का मुकाम हासिल करे। पार्टी को अपने ढेर सारे पैसे छिपाने के लिए एक सेफ जगह की तलाश थी। इस काम के बदले अर्पिता को कमीशन देने का वादा किया गया था। कई बड़े अधिकारी अर्पिता के नाम पर लिए गए घरों का दौरा भी कर चुके हैं।”

पहली बार नहीं लगा पैसे के बदले नौकरी का आरोप

गौरतलब है कि नौकरी के बदले पैसे का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर पहली बार नहीं लगा है। अप्रैल 2022 में भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने TMC कार्यकर्ताओं पर मेडिकल कॉलेजों में ग्रुप बी, सी कैटेगरी में नौकरी दिलाने का झाँसा देकर पैसे लेने का आरोप लगाया था। भाजपा नेता के मुताबिक तब टीएमसी पार्षद ने लगभग 530 ऐसे लोगों को 50 हजार रुपए से 1 लाख रुपए के बीच में ठगा था, जो गरीब परिवारों से आते थे।

दुकान में काम करने वाली 2 दलित बहनों से शहाबुद्दीन ने की अश्लील हरकत, वीडियो से किया ब्लैकमेल, बात नहीं मानी तो कर दिया वायरल

उत्तर प्रदेश के मऊ (Mau, Uttar Pradesh) से दो दलित बहनों से सरेआम छेड़खानी और अश्लील हरकत करने का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो का संज्ञान लेते हुए यूपी पुलिस ने आरोपित मोहम्मद शहाबुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के आईमार्ट कॉम्पलेक्स का है। इस कॉम्प्लेक्स की एक दुकान में दो दलित बहनें काम करती थीं। एक दिन वे 9:30 बजे दुकान खुलने से थोड़ी देर पहले ही वहाँ पहुँच गईं और दुकान खुलने का इंतजार करते हुए गेट पर खड़ी हो गईं।

इसी दौरान बगल में ही जोया कलेक्शन नाम की दुकान चलाने वाला शहाबुद्दीन उन लड़कियों से छेड़छाड़ और अश्लील हरकत करने लगा। उसकी सारी हरकत कॉम्प्लेक्स के सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई। सीसीटीवी फुटेज में घटना की तारीख 20 जून 2022 दिख रही है।

इतना नहीं, नदवा सराय निवासी शहाबुद्दीन ने इस हरकत के बाद लड़कियों को धमकाया भी। शहाबुद्दीन ने उन दोनों युवतियों से यह भी कहा कि अगर इस बात उन्होंने किसी से बताई तो उनकी वीडियो वह वायरल कर देगा। इसके साथ ही उसने युवतियों के दुकान मालिक से शिकायत कर उन्हें नौकरी से निकलवाने की भी धमकी दी।

धमकी के बाद डरी-सहमी युवतियों ने इसके बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। इसके बाद शहाबुद्दीन ने उस वीडियो को दिखाकर उन्हें ब्लैकमेल करने का प्रयास करने लगा। जब लड़कियों ने उसकी बात नहीं मानी तो उसने वीडियो को वायरल कर दिया।

वीडियो जब युवतियों के कस्बे में भी सामने आया तो उन्होंने घटना के बारे में अपनी माँ को सारी बात बताई। इसके बाद वे भाजपा नेता एवं पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लालजी वर्मा को इसकी जानकारी दी। वर्मा युवतियों को लेकर थाने गए और मामला दर्ज करवाया।

इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरुवार (28 जुलाई 2022) की देर रात तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। अपर पुलिस अधीक्षक त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने बताया कि आरोपित को जेल भेजने की कार्रवाई की है।

‘बच्चों को नमाज पढ़ने के लिए छुट्टी क्यों नहीं देते हो’- झारखंड के हिंदू शिक्षक रमेंद्र दुबे को अकबर खान ने विद्यार्थियों के सामने मारा, मंत्री का है करीबी

झारखंड (Jharkhand) के मुस्लिम बहुल इलाकों के स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी करने के बाद अब नमाज पढ़ने के लिए छुट्टी नहीं देने पर एक शिक्षक को पीटने को मामला सामने आया है। सत्ताधारी पार्टी के एक नेता ने स्कूल में घुसकर बच्चों के सामने शिक्षक को पीट दिया।

मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा प्रखंड का बताया जा रहा है। यहाँ के सरकारी स्कूल के एक शिक्षक कहना है कि बच्चों को नमाज पढ़ने की छुट्टी नहीं देने का आरोप लगाकर उन्हें पीटा गया। शिक्षक की पिटाई करने वाला सीएम हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का स्थानीय नेता अकबर खान है।

पीड़ित शिक्षक रमेंद्र दुबे है। उनका कहना है कि जब वह मामले की शिकायत लेकर शुक्रवार (29 जुलाई) को गोइलकेरा थाना में गए तो सत्ताधारी पार्टी का नेता होने के कारण उनकी शिकायत नहीं ली गई। अगले दिन शनिवार (30 जुलाई) को उनसे शिकायत ली गई और 24 घंटे के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई।

कहा जा रहा है कि पुलिस ने FIR लिखने के लिए शिकायत दोबारा लिखवाई और उसमें से नमाज सहित अन्य बातों को हटवा दिया। शिक्षक दुबे ने झामुमो नेता अकबर खान से अपनी जान को भी खतरा बताया है और सुरक्षा की माँग की है। शिक्षक का कहना है कि अकबर राज्य के मंत्री जोबा मांझी का करीबी है।

पिटाई के बाद जब शिक्षक रमेंद्र दुबे ने अकबर से अपनी गलती पूछी तो उसने कहा कि बच्चों को 11.30 बजे नमाज पढ़ने के लिए छुट्टी क्यों नहीं देते हो। दुबे का कहना है कि उन्होंने बच्चों को नमाज पढ़ने से कभी नहीं रोका, लेकिन अकबर ने कहा कि बच्चों ने ऐसा कहा है।

उधर अकबर खान का कहना है कि मारपीट की कोई घटना नहीं हुई है। अगर 11.50 में छुट्टी होती है तो कोई बच्चा पूजा करने या नमाज पढ़ने या घर जाना चाहता है तो उसे जाने दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फँसाया जा रहा है।

बिंद्यारानी ने देश को दिलाया चौथा मेडल, गोल्ड जीत राष्ट्रगान पर हुईं भावुक मीराबाई: Commonwealth Games 2022 में भारत की धमाकेदार शुरुआत

Commonwealth Games 2022 में भारत को चौथा मेडल मिल गया है। भारोत्तोलक बिंद्यारानी देवी ने महिलाओं के 55 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक (Bindyarani Devi wins CWG 2022 Silver medal) जीता।

बिंद्यारानी देवी (Bindyarani Devi) ने सिल्वर मेडल के लिए कुल 202 किलोग्राम (86 किलोग्राम + 116 किलोग्राम) भार उठाया। क्लीन एंड जर्क लिफ्ट में 116 किलोग्राम बिंद्यारानी देवी का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा।

Commonwealth Games 2022 में महिलाओं के 55 किलोग्राम वर्ग में नाइजीरिया के ऐडिजैट एडेनिके ओलारिनोय (Adijat Adenike Olarinoye) ने गोल्ड मेडल जीता। जबकि फ्रायर मोरो (Fraer Morrow) तीसरे स्थान पर रह कर कांस्य पदक विजेता बनीं।

इससे पहले इंग्लैंड के बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ खेलों (Commonwealth Games 2022) में भारत की भारोत्तोलक मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने देश को पहला स्वर्ण पदक (Gold Medal) दिलाया है। चानू ने यह पदक 49 किलोग्राम वर्ग में जीता है। यह 2022 के कॉमनवेल्थ खेलों में भारत को तीसरा पदक है। मीराबाई ने यह पदक शनिवार (30 जुलाई 2022) को जीता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मीराबाई ने क्लीन एन्ड जर्क के अपने पहले ही प्रयास में 109 KG वजन उठाया। उनकी प्रतिद्वंद्वी मॉरीशस की मारी रानाइवोसोआ दूसरे और कनाडा की हानाह तीसरे नंबर पर रहीं। कॉमनवेल्थ खेलों में 27 साल की मीराबाई चानू का यह लगातार दूसरा स्वर्ण पदक है। पदक जीतने के बाद मीराबाई ने कहा, “मुझे ख़ुशी है कि मैंने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता। मेरी जीत के बाद बज रहे राष्ट्रगान ने मुझे भावुक कर दिया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मीराबाई चानू की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। उन्होंने लिखा, “हर भारतीय को आप पर गर्व है। आप कई लोगों, ख़ास कर खिलाड़ियों की प्रेरणा हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले भारत के 2 और खिलाड़ी बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में पदक जीत चुके हैं। भारत के लिए पदक की शुरुआत संकेत महादेव सरगर ने 55kg की वेट लिफ्टिंग में रजत पदक से की थी। यह पदक उन्होंने एक दिन पहले 30 जुलाई 2022 को जीता था। चोट लगने के कारण वो थोड़े से अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए थे।

भारत को दूसरा पदक भी वेटलिफ्टिंग में ही आया था। भारत के वेटलिफ्टर गुरुराज पुजारी ने पुरुषों के 61 किलोग्राम वर्ग के मुकाबले में कांस्य पदक जीता था। गुरुराज का भी लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ खेलों में दूसरा पदक है।

बंगाल में अब गाड़ी में कैश, धराए कॉन्ग्रेस के 3 MLA, एक ने कहा था – ‘देश खून से लथपथ हो जाएगा’: इंडिया टुडे कर रहा CM ममता के लिए बैटिंग

झारखंड कॉन्ग्रेस (Jharkhand Congress) के तीन विधायकों को भारी मात्रा में कैश के साथ पश्चिम बंगाल में पकड़ा गया है। पुलिस ने बताया कि विधायकों के पास इतनी रकम मिली है कि इसकी गिनती के लिए मशीन मँगवाया गया है। उधर, इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर जयंतो घोषाल बंगाल की ममता बनर्जी का लगातार बचाव कर रहे हैं। इसी काम के लिए उन्हें बंगाल सरकार द्वारा नियुक्त करने की जानकारी सामने आई है।

हावड़ा की एसपी स्वाती भंगालिया ने बताया कि जिन तीन विधायकों को पकड़ा गया है, वो हैं झारखंड के जामताड़ा से विधायक इरफान अंसारी, खिजरी से विधायक राजेश कच्छप और कोलेबिरा से विधायक नमन बिक्सल।

शनिवार (31 जुलाई 2022) की देर रात हावड़ा पुलिस को कैश से भरी गाड़ियों के जाने की सूचना मिली। हालाँकि, ये नहीं पता चला कि इनमें कौन लोग हैं। पुलिस ने तीनों विधायकों की गाड़ियों को रोका और उनकी तलाशी ली तो उसमें भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया और पता चला कि ये तीनों विधायक हैं। इसके बाद पुलिस ने ड्राइवर सहित कार में सवार पाँच लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।

बता दें कि झारखंड के जामताड़ा से कॉन्ग्रेस (Congress) के विधायक इरफान अंसारी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने अग्निपथ योजना का विरोध करते हुए कहा था कि ‘देश खून से लथपथ हो जाए, लेकिन अग्निपथ लागू नहीं होने देंगे।’

उन्होंने पैगंबर मुहम्मद को लेकर जुमे की नमाज के बाद राँची में हुए दंगे में मारे गए दंगाइयों का समर्थन भी किया था। इरफान अंसारी ने दंगाइयों पर गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों का विरोध करते हुए मृतक दंगाइयों के परिजनों को 50 लाख रुपए देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग थी। 

इस घटना के बाद झारखंड भाजपा के महासचिव आदित्य साहू ने कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “जब से उनकी सरकार सत्ता में आई है, भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। इससे पहले भी झारखंड में अधिकारियों के घरों में बड़ी मात्रा में नकदी पकड़ी गई थी। वे जनता की गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल दूसरे कामों में करते हैं। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और यह सामने आया।”

उधर, झारखंड कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, “जब तक जाँच नहीं हो जाती, तब तक इस बारे में बात करना मुनासिब नहीं होगा, लेकिन देश के हालात को देखते हुए… पकड़े गए विधायक मामले को बेहतर ढंग से समझा सकते हैं। बहरहाल घटना दुखद है। हम अपने आलाकमान को एक रिपोर्ट सौंपेंगे।”

इंडिया टुड़े के कंसल्टिंग एडिटर जयंतो घोषाल को साल 2020 में ममता बनर्जी की सरकार ने सूचना विभाग में लाइजनिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया था। घोषाल का काम केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के साथ राज्य सरकार के लिए लाइजनिंग करना है। इसके साथ ही राज्य के कार्यों और उसकी नजरिए को मीडिया के जरिए देश के सामने पेश करना है।

एक ट्विटर यूजर ने घोषाल बंगाल सरकार द्वारा घोषाल की की नियुक्ति का नोटिफिकेशन ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें कहा गया है घोषाल को इसके लिए हर महीने 1.5 लाख रुपए दिए जाएँगे और उनका कार्यालय दिल्ली में पश्चिम बंगाल के रेजिडेंट कमिश्नर के कार्यालय में होगा।

जयंतो घोषाल ने यह इंडिया टुडे के पैनल डिस्कशन में यह काम किया भी। बहस के दौरान घोषाल ने हाल में TMC नेता पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के यहाँ से भारी मात्रा में कैश और जेवरात की बरामदगी पर उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बचाव करने की कोशिश की।

डिबेट में घोषाल ने कहा कि उन्हें यकीन है कि सीएम एसएससी घोटाले और उसमें अपने मंत्री पार्थ चटर्जी एवं उनके सहयोगियों की मिलीभगत से बेखबर थीं। बता दें कि पार्थ चटर्जी को मंत्रालय और पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था, जब ईडी ने उनकी ‘करीबी’ अर्पिता मुखर्जी से सोने और आभूषणों के साथ 50 रुपये से अधिक नकद बरामद किया था, और यह माना जाता है कि अवैध धन शिक्षा में एसएससी भर्ती घोटाले की आय है। विभाग जब चटर्जी मंत्री थे।

इस मुद्दे पर एक पैनल चर्चा के दौरान इंडिया टुडे के एंकर राजदीप सरदेसाई से बात करते हुए सलाहकार संपादक जयंतो घोषाल ने कहा, “मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि इसके बारे में ममता बनर्जी को नहीं पता था।” अपने दावे को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा, “क्योंकि मैंने समझने की कोशिश की, मैं कल कलकत्ता में था, मैंने उनसे बात की। वह बहुत परेशान थीं और उन्होंने कार्रवाई करने में समय इसलिए लिया, क्योंकि वह पार्थ का समर्थन कर रही थी, बल्कि इसलिए कि वह समझने की कोशिश कर रही थी कि क्या हो रहा है।”

‘तिरंगे को ऊँचा देखना मेरा सपना था’ : संकेत के बाद अब गुरुराज ने भारत को दिलाया CWG में पदक, 1 दिन में दूसरी उपलब्धि

इंग्लैंड के बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के दूसरे दिन भारत के हिस्से दो पदक आ चुके हैं। ये दोनों पदक वेटलिफ्टिंग में आए हैं। आज (30 जुलाई 2022) सुबह जहाँ भारत के संकेत महादेव सरगर ने 55 किग्रा वेट उठाने में सिल्वर पदक जीता था। वहीं अब गुरुराज पुजारी ने 61 किग्रा के इवेंट में कास्य पद जीता है।

जानकारी के मुताबिक. गुरुराज ने स्नैच में 118 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 151 किग्रा का भार उठाया। उन्होंने 269 किलो का कुल भार उठाकर कास्य को जीता जबकि मलेशिया के अजनिल बिन ने 285 भारत उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं पापुआ न्यू गिनी के मोरिया बारू ने 273 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता।

बता दें कि भारत को दूसरा मेडल दिलाने वाले गुरुराज 29 साल के हैं। उनका जन्म 15 अगस्त 1992 को कुंडापुरा में हुआ था। वह कर्नाटक के उडुपी जिले के रहने वाले हैं। साल 2018 में भी उन्होंने गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ खेलों में 56 किलो वर्ग में भारत को सिल्वर पदक दिलाया था। अब दूसरी दफा ऐसा मौका है कि देश के नाम उन्होंने मेडल जोड़ा। उनकी इस उपलब्धि के बाद गृहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी ने भी उन्हें बधाई दी।

उन्होंने कहा, “मैं बहुत खुश हूँ। आज का दिन अच्छा था। संकेत ने सिल्वर जीता और मैंने ब्रॉन्ज। ये देश के लिए दूसरा मेडल है। मैं अच्छा कर सकता था। मैं हाल में बीमार हो गया था और रिकवर करके अब सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया। मैं अपना मेडल अपनी पत्नी और समर्थकों को समर्पित करता हूँ।” उन्होंने कहा, “मैं शब्दों में नहीं समझा सकता। तिरंगे को ऊँचा देखना मेरा सपना था।”

गुरुराज से पहले वेटलिफ्टर संकेत महादेव ने 55 किलो की वेट लिफ्टिंग में देश को रजत पदक दिलवाया था। बर्मिंघम में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टर संकेत ने पहले प्रयास में 113 किग्रा भार उठाया था और दूसरे राउंड में 135 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया था।

संकेत के कोहनी में चोट आने की वजह से वह गोल्ड लाते लाते चूक गए थे और केवल 248 किलोग्राम वजन उठा पाए थे। इस इवेंट में मलेशिया के अनीक कासदान ने 1 किलो ज्यादा उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। वहीं श्रीलंका के दिलांका कुमारा ने 225 किलोग्राम उठाकर कास्य पदक को जीता था।

दरगाहों से हिंदुओं ने मोड़ा मुँह तो गैर इस्लामी हुआ ‘सिर तन से जुदा’, उस PFI की कुर्बानी भी कबूल जो भारत को मुस्लिम मुल्क बनाने का हथियार

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) शनिवार (30 जुलाई 2022) को एक ऐसे मंच पर दिखे, जिस पर मजहबी नुमाइंदे मौजूद थे। मौका था अंतर धार्मिक सम्मेलन का। आयोजन अखिल भारतीय सूफी सज्जादनशीन परिषद ने किया था।

इस सम्मेलन के दौरान ‘सिर तन से जुदा’ का नारा गैर इस्लामी घोषित किया गया। कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगाने की माँग हुई। वैसे जो नारा काफिरों में दहशत पैदा करने के लिए, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के लिए इस्तेमाल होना सामान्य है, उसको लेकर यह बात न तो डोभाल ने कही और न ही किसी हिंदू ने। जिस कट्टरपंथी संगठन के जरिए मुस्लिम युवाओं को हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा, 2047 तक काफिरों को घुटने पर लाकर भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के मंसूबें हैं, उस पर प्रतिबंध की बात भी न तो डोभाल ने कही और न किसी हिंदू ने। यह बात सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कही जो इस सम्मेलन का आयोजन करने वाली परिषद के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा, “सर तन से जुदा हमारा नारा नहीं है। यह इस्लाम विरोधी नारा है।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि पीएफआई के खिलाफ सबूत हैं तो उस पर प्रतिबंध लगाया जाए।

इस दौरान डोभाल ने भी कहा कि कुछ ऐसे तत्व है जो माहौल खराब कर भारत की तरक्की को बाधित कर रहे हैं। वे धर्म और विचारधारा के नाम पर नफरत पैदा कर हिंसा चाहते हैं। देश के साथ विदेश में भी इसका असर दिख रहा है।

वैसे डोभाल चाहते तो इस मौके का इस्तेमाल यह बताने के लिए भी कर सकते थे कि कन्हैया लाल का गला काटने वाले कौन थे? किशन से लेकर प्रवीण नेट्टारू तक की हत्या करने वाले कौन हैं? फुलवारी शरीफ से भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश रचने वालों से लेकर मुस्लिम पट्टी बनाने तक के मंसूबे बाँधने वाले कौन हैं? नूपुर शर्मा के बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत कर इस्लामी मुल्कों तक ले जाने वाला कौन है? पर शायद एनएसए होना खुलकर उनके बोलने के आड़े आ गया होगा। वैसे डोभाल का एक अपना अलग ही प्रभाव है। उनके बिना बोले भी काफी कुछ हो जाता है। जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के तो यह डोभाल ही थे जिनके सड़क पर दिखने के बाद राजधानी का यह इलाका शांत हो गया था। उससे पहले इस इलाके में हिंदुओं को लक्षित कर हिंसा हुई और पुलिस असहाय दिख रही थी। इसी तरह वैश्विक कोरोना संक्रमण के दौरान जब मरकज का संकट खड़ा हुआ था तो ये डोभाल ही थे, जिनके मौलाना साद के साथ दिखने के बाद मरकज खाली हो गया था। इसलिए, आप यह मान सकते हैं कि उनकी मौजूदगी ने यह असर डाला होगा कि मजहबी नुमाइंदे सिर तन से जुदा से पल्ला झाड़ने लगे, पीएफआई को बैन करने की बात करने लगे।

डोभाल का उपस्थित होना मजहबी नुमाइंदों के सरेंडर की एक वजह हो सकती है। एकमात्र वजह कतई नहीं। दरअसल, यह हिंदुओं की उस बेरुखी का असर है जिससे मुस्लिमों के लिए भविष्य का संकट खड़ा होता दिख रहा है। मुस्लिमों के आर्थिक बहिष्कार की अरसे से बात हो रही है। यह पूरी तरह आज भी मुमकिन नहीं हो पाया है। लेकिन थोड़े से ही पैमाने पर अब इसका असर दिखने लगा है।

हाल ही में यह खबर आई थी कि अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सन्नाटा पसरा हुआ है, क्योंकि यहाँ आने वाले हिंदुओं की संख्या में भारी कमी आई है। यह तथ्य इस दरगाह के खादिमों की करतूतें सामने आने के बाद सामने आया था। वीडियो सामने आए थे जिसमें दरगाह के बाहर भड़काऊ नारे लगे थे। नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसाया गया था। पीएफआई से खादिमों का संपर्क सामने आया था। यह बात भी सामने आई थी कि उदयपुर में कन्हैया लाल का गला काटने के बाद मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद पनाह लेने के लिए अजमेर दरगाह के ही एक खादिम के पास आ रहे थे, लेकिन रास्ते में पकड़े गए।

ऐसा नहीं है कि यह असर केवल अजमेर तक ही सीमित है। ऑपइंडिया ने अपनी पड़ताल में पाया था कि दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर आने वाले हिंदू भी करीब 60 फीसदी तक कम हो चुके हैं। दरगाह के दीवान अली मूसा निजामी ने हमें बताया था, “पहले यहाँ खूब हिंदू आते थे। हर रोज। दोपहर के 2 बजे से रात के 11 बजे तक दरगाह पर आने वालों में खूब हिंदू होते थे। लेकिन अब इक्का.दुक्का हिंदू ही आते रहते हैं। उन्होंने बताया कि पहले यहाँ हिंदू भंडारे भी करते थे। करीब.करीब रोज। अन्न.पैसा बाँटते थे। लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं रही।”

इसी तरह के असर की रिपोर्टें देश के अन्य हिस्सों के दरगाहों और मजारों से भी आई है। इन जगहों की रौनक ही हिंदुओं से थी। हिंदुओं के पैसों से ही इनके घरों का चुल्हा जलता है। हिंदुओं के पैसों से ही वे काफिरों का सर तन से जुदा करने का संदेश फैलाते हैं। हिंदुओं के पैसों से ही वे हिंदुओं को घुटने पर लाकर भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने की साजिश पर काम करते हैं। उनके इस आर्थिक स्रोत पर मार केवल दरगाह की घटती कमाई से ही नहीं पड़ी है। कर्नाटक में जिस प्रवीण नेट्टारू को कुल्हाड़ी से काट डाला गया, उन्होंने हिंदुओं के लिए चिकन शॉप खोली थी। यह काफी लोकप्रिय हुआ जो कट्टरपंथियों को सुहा नहीं रहा था। ऐसे छोटे प्रयास भी इस्लामी कट्टरपंथ के आर्थिक स्रोत पर वार कर रहे हैं।

हालाँकि ऐसा नहीं है कि पूर्ण रूप से हिंदुओं ने इनका आर्थिक बहिष्कार कर दिया है। वह संभव भी नहीं है, क्योंकि इस देश में हिंदुओं की एक जमात ऐसी भी है जिसे सेकुलर कीड़े ने काट रखा है। हम इस लिबरल जमात से उम्मीद कर भी नहीं सकते। हम अजीत डोभाल से ही उम्मीद लगाकर नहीं बैठ सकते। हम इसी भरोसे नहीं बैठ सकते कि सरकार पीएफआई पर प्रतिबंध लगा देगी। वैसे भी प्रतिबंध यदि इनका इलाज होता तो सिमी के बाद पीएफआई नहीं आता। दुनिया भर के आतंकी संगठन खत्म हो गए होते। प्रतिबंध इनका इलाज है ही नही। आप प्रतिबंध लगाएँगे कल ये किसी और नाम से खड़े हो जाएँगे। फिर से हिंदुओं को काटेंगे। भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के अपने मिशन को आगे बढ़ाएँगे। इसलिए जरूरी है कि दरगाहों से हमारी यह बेरुखी बनी रहे। जरूरी है कि प्रवीण नेट्टारू की दुकान जैसे प्रयास हर गली-मोहल्ले में हो। छिटपुट प्रयासों ने उन्हें आज पीएफआई की कुर्बानी देने को मजबूर किया है। यह दबाव बना रहेगा तो वे कट्टरपंथ के हर उस अध्याय की कुर्बानी देने को मजबूर हो जाएँगे, जिसका प्रसार ये आसमानी किताब की रोशनी में करते हैं।

‘वो बार सिर्फ हमारा है, इसमें ईरानी परिवार का कोई अधिकार नहीं’ : कॉन्ग्रेस नेताओं के झूठ की खुली पोल, बार मालिकों ने आरोपों को बताया ‘निराधार’

गोवा ‘सिली सोल्स’ बार के मालिकाना अधिकार मामले में अब कॉन्ग्रेस के झूठ की पोल खुलने लगी है। कॉन्ग्रेस अब तक जहाँ दावे कर रही थी कि बार की मालकिन स्मृति ईरानी की बेटी जोएश ईरानी हैं। वहीं गोवा के स्थानीय डगामा परिवार ने दावा किया है कि वो बार उनका है और उस पर सिर्फ उनका अधिकार है। इसका ईरानी फैमिली से कोई लेना-देना नहीं है।

29 जुलाई 2022 को बार मालिक मर्लिन एंथनी डगामा और उनके बेटे डीन डगामा ने एक्साइज कमिश्नर नारायण एम गढ़ के शो कॉज नोटिस पर अपना ये जवाब दिया है। उन्होंने इसमें स्पष्ट कहा है कि उनके इस बिजनेस में उनके साथ कोई साथी नहीं है और उन्होंने किसी भी तरह एक्‍साइज ड्यूटी एक्‍ट 1964 के नियमों का कोई उल्‍लंघन नहीं किया है।

उन्होंने गोवा के एक्टिविस्ट आयरेज रॉड्रिगेज द्वारा की गई शिकायत को पूर्ण रूप से निराधार बताया। साथ ही जानकारी दी कि साल 2021 में एंथनी डगामा की मृत्यु के बाद बार का लाइसेंस कानूनी ढंग से उनके उत्तराधिकारी यानी कि डीन को दिया जाना था। ऐसे में जब इस वर्ष डीन एंथनी ने अपना लाइसेंस रीन्यू कराने को दिया तो उन्होंने साथ में एंथनी की मृत्यु का प्रमाण पत्र भी जमा करवाया। तभी, उनसे एक अंडरटेकिंग देने को कहा गया और ये बताया गया कि इसके बाद लाइसेंस 6 महीने में उनके नाम ट्रांस्फर हो जाएगा।

डगामा परिवार के मुताबिक, इसी मामले को लेकर गोवा एक्साइज कमिश्नर ने अपना नोटिस भेजा था, लेकिन गोवा के एक्टिविस्ट आयरेज ने इसे आधार बनाकर ईरानी परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा दिया।

वकील ने बताया,

“हम पुर्तगाली नागरिक संहिता के तहत शासित हैं। संहिता के तहत, संपत्ति का स्वामित्व संयुक्त रूप से पति और पत्नी के नाम पर अनुच्छेद 1117 (पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867 के) के अनुसार है। कानून की दृष्टि से प्रशासन हमेशा पति के नाम पर होता है। लेकिन जब किसी पति या पत्नी की मृत्यु हो जाती है तो प्रशासन स्वत: ही उसके जीवनसाथी को चला जाता है। तो, यहाँ पति या पत्नी स्वतः ही संपत्ति के प्रशासक बन जाते हैं। इसमें कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है।”

बता दें कि अब इस पूरे मामले में 22 अगस्त को अगली सुनवाई होगी। गोवा परिवार के वकील बेन्नी नजरेथ ने साफ किया कि रेस्टोरेंट से स्मृति ईरानी का कोई संबंध नहीं है। इसके मालिक केवल डगामा परिवार है।

कॉन्ग्रेस को दिल्ली HC का समन

29 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूचा को समन भेजा था। इसमें कॉन्ग्रेस नेताओं से उनके उन ट्विट्स को डिलीट करने को कहा गया था जिसमें उन लोगों ने स्मृति ईरानी की बेटी पर इल्जाम लगाए थे। दिल्ली कोर्ट ने कहा था कि अगर ये लोग ट्वीट डिलीट नहीं करते तो ट्विटर इनपर कार्रवाई करे।

स्मृति ईरानी ने मानहानि का किया केस

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी इन नेताओं को लीगल नोटिस भेजा था। उन्होंने 2 करोड़ रुपए की मानहानि केस दायर करते हुए आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने उनकी बेटी को जबरन इस पूरे केस में घसीटा और झूठी जानकारी देकर उन्हें व उनकी बेटी को बदनाम करने की कोशिश की। वह डगामा परिवार के बयान आने से पहले बार-बार दोहरा रही थीं कि उनकी बेटी कोई बार नहीं चलाती है और न ही एक्साइज डिपार्टमेंट से उन्हें कोई शो कॉज नोटिस आया है।