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देश विरोधी गतिविधियों के लिए एमनेस्टी ने भारत भेजे ₹51 करोड़: पंजाब चुनावों में 1984 दंगे का प्रचार भी शामिल, कश्मीर पर भी प्रोपगेंडा

केंद्रीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पाया है कि एमनेस्टी वर्ल्डवाइड यूके (Amnesty Worldwide UK) ने भारत में देशविरोधी गतिविधियों को हवा देने के लिए भारत की सहयोगी संस्था एमनेस्टी इंडिया को 51 करोड़ रुपए अवैध तरीके से भेजे थे।

यह पैसा ‘कश्मीर: एंट्री टू जस्टिस’ और ‘जस्टिस फॉर 1984 सिख ब्लडबाथ’ जैसे प्रोपेगेंडा को हवा देने के लिए भेजा गया था। इसके साथ ही इस रकम को अवैध तरीके से कंपनी को निर्यात के नाम पर भेजा गया था। ED ने इसकी जानकारी दिल्ली की एक विशेष अदालत को दी।

ED का कहना है कि मानवाधिकार रिपोर्ट तैयार करने और कुछ अन्य सेवाओं नाम पर एमनेस्टी इंटरनेशनल यूके से AIIPL को 36 करोड़ रुपए दिए, जिसमें 10 करोड़ रुपए FDI के जरिए निवेश भी शामिल है। इस तरह व्यवसायिक गतिविधियों के नाम पर FCRA कानून का उल्लंघन कर एनजीओ की गतिविधियों को संचालित किया गया।

ED ने कहा कि इन कार्यों के माध्यम से AIIPL को मीडिया के जरिए लोगों में उकसाना, आरटीआई के माध्यम से जनता की लामबंदी, राजनीतिक मामलों पर तनाव पैदा करने के लिए कैडर की मदद और मीडिया के माध्यम से प्रचार अभियान चलाकर जनता में आक्रोश उत्पन्न करने की कल्पना की गई थी।

इंडियन एक्स्प्रेस के मुताबिक, इसमें यह भी तय किया गया था कि 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान 1984 का सिख नरसंहार प्रमुख मुद्दा रहे। इसके अलावा कश्मीर मुद्दे पर कुछ ऐसे ही रिपोर्ट की बात ED ने कोर्ट को बताई।

इस मामले में ED ने 9 जुलाई को एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (AIIPL), इंडियंस फॉर एमनेस्टी वर्ल्डवाइड बिलीफ (IAIT) और AIIPL के पूर्व सीईओ जी अनंतपद्मनाभन और आकार पटेल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की आरोप पत्र दायर किया था।

ED ने अपनी चार्जशीट में कहा कि एमनेस्टी वर्ल्डवाइड ने भारत में अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए 1999 में एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट (AIIFT) स्थापित की थी। साल 2011-12 में जब ओवरसीज कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) लागू हुआ तो इसे केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय फंड प्राप्त करने के लिए अनुमति दी थी, लेकिन इसके बारे में हकीकत पता लगते ही इसे तुरंत रद्द कर दिया गया था।

ED ने यह भी बताया कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने साल 2012 में NGO के तौर पर IAIT को स्थापना किया। इसके बाद साल 2013 में एक लाभकारी इकाई यानी कंपनी के तौर पर AIIPL की स्थापना की। AIIPL को सोशल सेक्टर रिसर्च कंसल्टेंसी एंड सपोर्ट सर्विस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के तौर पर जाना जाता है।

IAIT का काम भारत में मानवाधिकार रिपोर्ट तैयार करना था, जबकि AIIPL सेवा देकर निर्यात के जरिए लाभ कमाती थी। सबसे बड़ी बात है कि दोनों कंपनियों का ऑफिस एक ही इमारत में अगल-बगल था और दोनों एमनेस्टी यूके द्वारा संचालित होती थीं। बाद में IAIT ने AIIPL में 98.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली।

बता देें कि ED ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (AIIPL) पर 51.72 रुपए और उसके पूर्व CEO आकार पटेल पर 10 करोड़ का जुर्माना लगाया था।

ईडी को जानकारी मिली थी कि एमनेस्टी इंटरनेशनल, यूके विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRN) से बचने के लिए FDI के रास्ते अपनी भारतीय संस्थाओं (गैर-एफसीआरए कंपनियों) को बड़ी मात्रा में विदेशी फंड भेज रहा था। इस बात की जैसे ही जाँच एजेंसी को पता चली, उसने एमनेस्टी पर निगाह रखनी शुरू कर दी।

इस नंगई से डरना नहीं है, इसको मारते रहिए भाला… ठीक वैसे ही जैसे लक्ष्य भेदते हैं नीरज चोपड़ा

नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने रविवार (24 जुलाई 2022) को देश को गौरव का एक और क्षण दिया। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप (World Athletics Championships) में उन्होंने जैवलिन थ्रो का सिल्वर पदक देश के लिए जीता। इसके बाद से वे ट्रेंड कर रहे हैं।

नीरज के छाने से पहले सोशल मीडिया में तमिल एक्टर विष्णु विशाल ने अपनी कुछ नंग-धड़ंग तस्वीरें शेयर की थी, जो कथित तौर पर उनकी पत्नी ज्वाला गुट्टा ने खींची है। दिमाग पर थोड़ा सा जोर डालेंगे तो याद आएगा कि ज्वाला भी एक खिलाड़ी रही हैं और बैडमिंटन की कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है।

दरअसल, विष्णु जिस नंगई से देश को परिचित कराना चाह रहे थे, कुछ दिनों पहले उसका सार्वजनिक प्रदर्शन कर बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह इंटरनेट पर छा गए थे। विष्णु हो या रणवीर ये उस दुनिया से आते हैं, जो हमारे ही पैसों से तिजोरी भर हिंदू घृणा का प्रसार करती है। हमारे नायकों, बिंबों को छोटा कर कथित सेकुलर प्रतिमान गढ़ती है ताकि हम खुद को भारतीय, हिंदू कहने पर हीन महसूस करे। हमारे युवा कलाकारों को ठिकाने लगाती है। भारत में इस्लामी आतंकवाद का जहर खोलने वाले पाकिस्तान के कलाकारों को हम पर थोपती है। जय श्रीराम को उन्माद का नारा बताती है…

जब कुकर्मों की वजह से इनकी फिल्मों का बायकॉट शुरू हुआ तो ये सीधे दबंगई पर उतर आए हैं। कहते हैं कि नंगे से नारायण भी डरते हैं। इसलिए इन्होंने सोचा होगा कि भक्तों की क्या औकात। लेकिन, ये शायद भूल गए कि इन्हीं भक्तों के दबाव ने इनके छिद्र-छिद्र इस तरह से खोले हैं कि अब वे उस स्तर पर पहुँच गए हैं, जहाँ अपना बचाव करने के लिए वे यह कहने को मजबूर हैं कि उन्हें हजारों की भीड़ के सामने भी नंगा होने में शर्म नहीं आएगी। वह दिन दूर नहीं जब इस दबाव के कारण ये सार्वजानिक रूप से एक-दूसरे को ही नोंचते दिखेंगे।

आखिर यह दबाव का ही असर है कि त्रिपुण्ड-शिखा वाला गुंडा दिखाने वाली ‘शमशेरा’ दर्शकों को तरस गई है। कपिल देव, मिताली राज, झूलन गोस्वामी से स्नेह करने वाला यह देश उनकी बॉयोपिक को नकार देता है, क्योंकि पर्दे पर उनके किरदार रचने वालों का मुखौटा उतर चुका है। ‘स्पेशल स्क्रीनिंग देखते हुए आमिर खान रो पड़े’ जैसी सहानुभूति पैदा करने वाली प्लान्ड स्टोरी के बावजूद देश ‘लाल सिंह चड्ढा’ को फ्लॉप कराने की प्रतीक्षा बेसब्री से करता नजर आ रहा है… संदेश साफ है कि देश को अब लूटेरों को महिमामंडित करने वालों में रूचि नहीं है। उनमें अब युवाओं को अपना रोल मॉडल नहीं दिखता जो हिंदुओं के पैसे से खजाना भर उन्हें ही नीचा दिखाते हैं।

नीरज चोपड़ा वाले भारत को रणवीर सिंह की जरूरत नहीं। हिंदू और भारत घृणा से ग्रसित भांडो पर लगातार प्रहार करते रहना जरूरी है। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हो, इनकी बैंड बजती रहनी चाहिए। जब वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नीरज अपना भाला लेकर दौड़ रहे थे तो हवा उनके साथ नहीं थी। तीसरे राउंड तक आते-आते पदक जीतने की उनकी उम्मीद धुँधली हो चुकी थी। लेकिन चौथे राउंड में वह करिश्मा हुआ, जिसने देश को गर्व का क्षण दिया।

इस नंगई के चिथड़े भी लगातार प्रहार से ही होंगे। ‘माय लाइफ, माय च्वाइस’ की थोथी दलीलों से इस सार्वजनिक नंगई का बचाव नहीं किया जा सकता। हमारे समय, प्रेम, पैसे से बनकर वे हमें ही दबंगई नहीं दिखा सकते। इनकी रस्सी जल चुकी है, बल भी जाएगा ही।

PM मोदी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को नहीं किया प्रणाम, कैमरे की ओर मोड़ लिया मुँह: वायरल वीडियो का पूरा सच

रामनाथ कोविंद देश के राष्ट्रपति हैं। इस पद पर अब उनके चंद घंटे बचे हैं। संसद भवन के सेंट्रल हॉल में कल यानी शनिवार (23 जुलाई 2022) को उनके सम्मान में विदाई समारोह था। पीएम मोदी से लेकर पूरी संसद ने उनको विदाई दी। विदाई भाषण में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नेताओं को दलगत राजनीति से ऊपर उठने को कहा। कॉन्ग्रेस, AAP और इनके जैसे टूटपूँजिए नेता शायद समझ नहीं पाए इस बात को। जिस इंसान को सम्मान के साथ विदा करना चाहिए था, उन्हीं के नाम पर राजनीति शुरू कर दी।

एक वीडियो के कटे हुए हिस्से को शेयर करके वायरल किया जा रहा है। यह संसद भवन के सेंट्रल हॉल में दिए गए विदाई समारोह का ही वीडियो है। अंतर बस इतना है कि वीडियो पूरा नहीं है। वीडियो इतना छोटा है, जितने से राजनीतिक गंदगी फैलाई जा सके। पहले वीडियो देखिए। साथ ही यह भी देखिए कि वीडियो को वायरल करने वाले कौन हैं, किस पार्टी से हैं।

वीडियो देख कर किसी भी आम इंसान को लगेगा कि PM मोदी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सही विदाई नहीं दी। प्रणाम का उत्तर प्रणाम से नहीं दिया। कॉन्ग्रेस, AAP और इनके जैसे टूटपूँजिए पार्टी के साथ-साथ इनके चमचे नेताओं ने जो चाहा, उसमें बहुत हद तक सफल भी हुए।

सच की गति धीमी हो सकती है लेकिन वो चलेगा झूठ से 2 कदम आगे ही। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की विदाई समारोह का अब पूरा वीडियो देखिए। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। समय कम हो तो 55 सेकेंड से आगे देखना शुरू कीजिए, इसके अगले 10-15 सेकेंड में ही पूरा मामला साफ हो जाएगा।

वीडियो में स्पष्ट देख सकते हैं कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अपने सामने आने के पहले से ही पीएम मोदी हाथ जोड़े खड़े रहते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति कोविंद पीएम मोदी के पीछे खड़ी एक महिला से कुछ पूछ रहे होते हैं, ठीक उसी वक्त प्रधानमंत्री का ध्यान अपनी दाईं ओर जाता है। इसी फ्रेम को वीडियो में वायरल किया गया।

राजनीति का जो पाठ (दलगत राजनीति से ऊपर उठना, राष्ट्रहित में काम करना) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पढ़ाना चाहे, उसको समझते हुए शायद ही कॉन्ग्रेसी राहुल गाँधी या उनकी मम्मी सोनिया गाँधी से लेकर AAP वाले केजरीवाल इस ओछी हरकत के लिए माफी माँगें। भाजपा या पीएम मोदी से घृणा करने की ऐसे लोगों की मानसिकता देश से घृणा करने के लेवल तक पहुँच गई है।

फैक्ट चेक

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को प्रधानमंत्री ने सम्मान के साथ प्रणाम किया। विदाई समारोह की गरिमा को समारोह में भी बरकरार रखा और उसके बाद भी। राष्ट्रपति के नाम पर अगर किसी ने सम्मान के बजाय कीचड़ उछाला है तो वो कॉन्ग्रेस, AAP और इनके जैसे टूटपूँजिए पार्टी के लोग हैं।

सैफ अली खान ने जिस ‘तानाजी’ को कहा झूठा, उसने अजय देवगन को बनाया बेस्ट एक्टरः तीन नेशनल अवॉर्ड, औरंगजेब के खलनायक दिखने से आहत था ‘उदयभान’

‘तानाजी (Tanhaji): द अनसंग वॉरियर’ एक बार फिर से चर्चा में है। फिल्म को तीन केटेगरी में नेशनल अवॉर्ड मिले हैं। तानाजी का किरदार निभाने वाले अजय देवगन बेस्ट एक्टर बने हैं। इसके अलावा बेस्ट पॉपुलर फिल्म और बेस्ट कॉस्ट्यूम के लिए भी अवॉर्ड मिला है।

इस फिल्म के डायरेक्टर ओम राउत ने एक इंटरव्यू में कहा है कि ये अवॉर्ड फिल्म के हर कास्ट और क्रू मेंबर को समर्पित है। साथ ही बताया है कि कैसे इस फिल्म को पर्दे पर उतारने में अजय देवगन और सैफ अली खान ने सहयोग किया। फिल्म में सैफ निगेटिव किरदार में थे। उन्होंने उदयभान राठौड़ का किरदार निभाया था।
इस फिल्म को सफलता मिलने के बाद एक इंटरव्यू में सैफ अली खान ने कहानी की वास्तविकता पर ही सवाल उठा दिए थे। औरंगजेब को खलनायक दिखाने से आहत सैफ ने इसे इतिहास का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया था।

अनुपमा चोपड़ा को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “इतिहास क्या है, मैं जानता हूँ। लेकिन अगर कोई कहे कि फिल्म में जो दिखाया गया है, वह इतिहास है तो मैं इसे नहीं मानता।” सैफ ने कहा था कि वे इस रोल को लेकर बेहद रोमांचित थे। लेकिन वे इसे वास्तविक नहीं मानते। बावजूद कोई स्टैंड नहीं ले पाने पर उन्होंने अफसोस जताया। साथ ही कहा कि भविष्य में वे ऐसा कर सकते हैं।

इस इंटरव्यू के दौरान सैफ ने सेक्युलरिज्म का भी रोना रोया था। कहा था, “फिलहाल देश में जो माहौल है, उसे देखकर दुख होता है। देश के लोग जो रवैया अपना रहे हैं, वह गलत है। ये रवैया हमें भाईचारे के रास्ते से दूर कर रहा है। मौजूदा हालात देखकर लगता है कि हम सेक्युलरिज्म से दूर जा रहे हैं और मुझे कोई भी इसके लिए लड़ता दिखाई नहीं दे रहा है।”

गौरतलब है कि यह फिल्म औरंगजेब के कब्जे से सिंहगढ़ किला छुड़ाने की कहानी पर केंद्रित है। उदयभान के नेतृत्व में 1800 पठान इस किले की सुरक्षा कर रहे थे। लेकिन तानाजी ने अपनी अदम्य वीरता के दम पर 300 मराठा के साथ इस किले को जीत लिया था। वे युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। यह पता चलते ही शिवाजी ने कहा था- सिंहगढ़ तो आ गया, लेकिन सिंह चला गया।

सपने में आए भोलेनाथ तो काँवड़ यात्रा पर निकल पड़े मुजफ्फरनगर के फैज मोहम्मद, नाम में भी जोड़ लिया शंकर

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar, Uttar Pradesh) से ताल्लुक रखने वाले मुस्लिम युवक फैज मोहम्मद काँवड़ यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। फैज का कहना है कि 5 साल पहले भोलेनाथ उन्हें सपने में दिखाई दिए, तब से वे उनके भक्त बन गए और हर साल काँवड़ यात्रा पर जाते हैं। उन्होंने अपना नाम फैज मोहम्मद उर्फ शंकर लिखना शुरू कर दिया।

मुजफ्फरनगर के गाँव कढ़़ली के रहने वाले फैज मोहम्मद एक कंपनी में लेबर का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि पाँच साल पहले एक रात सपने में उन्होंने भगवान शंकर को देखा। इसके बाद भगवान भोले में उनकी श्रद्धा जग गई।

फैज मोहम्मद का कहना है कि आस्था जाति और धर्म से बँधा हुआ नहीं है। उन्होंने इसे मन और प्रेम का तालमेल बताया। उन्होंने कहा कि उनके मन में भगवान शिव को लेकर गहरी श्रद्धा है और वो इस बार शिवरात्रि को पूरा महादेव पर जलाभिषेक करेंगे।

फैज मोहम्मद शुक्रवार (22 जुलाई 2022) को खतौली के गंगनहर पटरी पर स्थित त्रिवेणी शुगर मील के काँवड़ सेवा शिविर में पहुँचे तो इस भोले भक्त का लोगों के खुले दिल से स्वागत किया।

उन्होंने बताया कि वे अब तक पाँच बार काँवड़ ला चुके हैं। फैज मोहम्मद का कहना है कि वे पहले अकेला काँवड़ लाते थे, लेकिन इस साल से उन्हीं के गाँव के रहने वाले विशंभर भी उनके साथ हैं और दोनों मिलकर काँवड़ ला रहे हैं।

वे हरिद्वार से गंगाजल लाते हैं मेरठ के काली पलटन औघड़नाथ मंदिर में चढ़ाते हैं। इस साल वे 6ठी बार काँवड़ यात्रा पर हैं और शिवरात्रि के दिन बागपत के पुरा महादेव में वे गंगाजल चढ़ाएँगे।

फैज मोहम्मद का कहना है कि कुछ लोग राजनीति के लिए धर्म का बँटवारा करते हैं और नफरत फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे लोगों से कोई वास्ता नहीं है। वे अपनी आस्था और श्रद्धा के अनुसार काम कर रहे हैं।

बता दें कि फैज मोहम्मद की तरह बागपत के बाबू खान भी पिछले 5 सालों से सावन में काँवड़ यात्रा करते हैं। हालाँकि, इसको लेकर उन्हें कर तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। जब पहली बार 2018 में उन्होंने काँवड़ यात्रा की तो कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उन्हें मस्जिद से बाहर निकाल दिया। कट्टरपंथियों की इस करतूत के बावजूद वे अभी भी काँवड़ यात्रा पर जाते हैं।

बाबू खान ने बताया था, “जब मैं पहली बार काँवड़़ लेकर गया तो घर में खूब लड़ाइयाँ हुईं, लेकिन परिवार को किसी तरह समझा लिया। 2018 में पुरा महादेव मंदिर पर जलाभिषेक करने के बाद अगले दिन सुबह नमाज पढ़ने के लिए 5 बजे मैं मस्जिद तो वहाँ मेरा बहिष्कार कर दिया गया और मुझे मस्जिद से बाहर निकाल दिया गया।”

अब झाड़ू ही नहीं लगाती राधिका… 15 मिनट की डॉक्यूमेंट्री को नेशनल अवॉर्ड: कहानी उस 35-A/370 की जो दलितों को पैदा होते ही कश्मीर में बना देता था ‘सफाईकर्मी’

15 मिनट की डाॅक्यूमेंट्री ‘जस्टिस डिलेड बट डिलिवर्ड (Justice Delayed But Delivered)’ को इस साल नेशनल अवॉर्ड मिला है। यह सम्मान गैर फीचर फिल्म की बेस्ट सोशल इश्यू कैटेगरी में मिला है। यह डाॅक्यूमेंट्री जम्मू-कश्मीर में 370 और 35ए पर केंद्रित है। डाॅक्यूूमेंट्री एक दलित लड़की राधिका गिल की कहानी से शुरू होती है, जो 35ए के कारण अपने मन का नहीं कर सकती थी। जो सफाईकर्मी बनने को ही अभिशप्त थी। साथ ही रश्मि शर्मा की कहानी है, जिन्होंने एक ऐसे पुरुष से शादी की जो जम्मू-कश्मीर का नहीं था। फिर 370 के कारण उनके अधिकार छीन लिए गए।

यह डाॅक्यूमेंट्री बीते कल की ही बात नहीं करती। बताती है कि 370 और 35ए हटाए जाने के बाद कैसे इनके जीवन में बदलाव आया। कैसे अब राधिका जैसी लड़की के लिए अपने मन का करना आसान हो गया है। उल्लेखनीय है कि केंद्र की मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को 370 और 35ए को निरस्त कर दिया था। इस कदम ने एक तरह से जम्मू-कश्मीर को पूरी तरह से भारत में समाहित करने का काम किया। इससे वे सभी कानून जम्मू-कश्मीर में लागू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ जो देश के अन्य हिस्सों में लागू हैं। इसने दलित समुदाय के नागरिकों को एक समान अधिकार मिलने का रास्ता खोला।

इस डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह और प्रोड्यूसर मंदीप चौहान है। इस लिंक पर क्लिक कर आप इसे देख सकते हैं। डॉक्यूमेंट्री की कहानी जी राधिका गिल से शुरू होती है वह एक सफाईकर्मी की बेटी हैं। वह पढ़ना चाहती हैं। नौकरी करना चाहती हैं। लेकन Article 370 हटने से पहले उनसे कहा जाता था कि सफाईकर्मी का बच्चा सफाई ही करेगा। अनुच्छेद 35ए के राधिका जम्मू कश्मीर में केवल सफाई का काम ही कर सकती थीं।

राधिका ने अनुच्छेद 35ए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी थी। ऐसे में 5 अगस्त 2019 के केंद्र सरकार के फैसले ने उन जैसे दलितों की जिंदगी ही बदल दी। 5 अगस्त 2019 के बाद न सिर्फ राधिका गिल को बराबरी का अधिकार मिला, बल्कि जम्मू-कश्मीर की आधी आबादी को भी पुरूषों के समान बराबरी का अधिकार मिला।

निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह बताते हैं, “करीब 10 साल पहले मुझे जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 35A के पीड़ितों के बारे में पता चला। 2016 में मैंने इन पीड़ितों पर पहली डॉक्यूमेंट्री बनाई थी। उस समय मैं पहली बार राधिका गिल से मिला था। जब मेरी राधिका से बात हुई तो महसूस हुआ कि इस होनहार लड़की को कैसे 35A ने दोयम दर्जे का नागरिक बना रखा है। राधिका वाल्मिकी समाज से आती हैं, जिनको 1957 में जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन सरकार पंजाब से सफाई का काम कराने के लिए राज्य में बसाया गया था, इस वायदे के साथ कि उनको भी राज्य के अन्य स्थायी नागरिक की तरह पीआरसी दे दी जाएगी। लेकिन आर्टिकल 35A के चलते ये कभी संभव ही नहीं हो सका। भारत का नागरिक होने के बावजूद भी राधिका गिल बीएसएफ ज्वाइन नहीं कर पायीं, क्योंकि उसके पास जम्मू-कश्मीर का परमानेंट रेज़िडेंट सर्टिफिकेट यानि पीआरसी नहीं थी।”

पैदा होते ही तय कर देते थे इकलौता काम

4 मई 1954 को एक ऐसा संवैधानिक आदेश भारत के राष्ट्रपति द्वारा जम्मू-कश्मीर राज्य में लागू करवाया गया, जिसने भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद जोड़ दिया। इस अनुच्छेद को 35-A के नाम से जाना जाता था। इसी अनुच्छेद के कारण आज जम्मू-कश्मीर में वाल्मीकि समुदाय समेत कई समुदाय के लोग पीड़ित थे। अनुच्छेद 35-A जम्मू-कश्मीर राज्य को यह निर्णय लेने का अधिकार देता था कि राज्य के स्थायी निवासी कौन होंगे। अर्थात यह राज्य तय करता था कि स्थायी निवास प्रमाण-पत्र किसको देना है और किसे नहीं। जम्मू-कश्मीर राज्य को जब यह अधिकार दिया गया, तब तक राज्य का संविधान भी नहीं बना था। बाद में राज्य का संविधान बनते ही उसमें यह लिख दिया गया कि जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी का दर्ज़ा उन्हें ही दिया जाएगा जो 1944 या उसके पहले से राज्य में रह रहे हैं।

वाल्मीकि समाज के लोग 1957 में पंजाब से लाकर बसाए गए थे, इसलिए उन्हें जम्मू-कश्मीर का स्थायी निवासी नहीं माना गया और उन्हें स्थाई निवास प्रमाण पत्र- जिसे PRC कहा जाता है- नहीं दिया गया। राज्य सरकार ने वाल्मीकि समुदाय के लोगों को अपने यहाँ रोजगार देने के लिए नियमों में परिवर्तन कर यह लिख दिया कि इन्हें केवल ‘सफ़ाई कर्मचारी’ के रूप में ही अस्थायी रूप से रहने का अधिकार और नौकरी दी जाएगी। इस प्रकार जब इस समुदाय का कोई बच्चा जन्म लेता था तो उसके माथे पर वैधानिक रूप से ‘दलित’ लिखा होता था। वह बड़ा होकर चाहे कितनी भी पढ़ाई कर ले उसे जम्मू-कश्मीर राज्य में सफ़ाई कर्मचारी की नौकरी ही मिल सकती थी।

वाल्मीकि समुदाय के लोगों के पास स्थायी निवास प्रमाण-पत्र न होने से वे राज्य में स्थायी रूप से न तो बस सकते हैं न ही संपत्ति खरीद सकते थे। उनके बच्चों को राज्य सरकार द्वारा छात्रवृत्ति भी नहीं मिलती थी। यही नहीं PRC के अभाव में वाल्मीकि समुदाय के बच्चों को राज्य सरकार के इंजीनियरिंग, मेडिकल या किसी अन्य टेक्निकल कोर्स के कॉलेजों में दाख़िला भी नहीं दिया जाता था। वे वोट तक नहीं डाल सकते थे।

Justice Delayed But Delivered दलितों की इन्हीं पीड़ा पर प्रकाश डालती है। बताती है कि 370 और 35ए हटने के बाद कैसे उनकी जिंदगी बदली है।

रणबीर सिंह के बाद तमिल ऐक्टर विष्णु विशाल ने शेयर की सेमी न्यूड तस्वीरें: पत्नी ज्वाला गुट्टा को दिया क्रेडिट

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह (Bollywood Actor Ranveer Singh) ने हाल में ही पेपर मैगजीन के लिए न्यूड फोटोशूट (Nude Photoshoot) करवाया था, जिसकी खूब चर्चा हुई थी। अब इसी तरह का फोटोशूट तमिल ऐक्टर विष्णु विशाल (Tamil Actor Vishnu Vishal) का सामने आया है। विष्णु विशाल ने अपने कई सेमी-न्यूड फोटो अपने सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं। यह फोटोशूट उनकी बैडमिंटन प्लेयर पत्नी ज्वाला गुट्टा (Badminton Player Jwala Gutta) ने किया है।

विष्णु विशाल ने अपने ऑफिशियल ट्विटर पर सेमी न्यूड तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, “चलिए.. मैं भी ट्रेंड में शामिल हो गया।” ऐक्टर विशाल ने इन तस्वीरों का क्रेडिट अपनी पत्नी ज्वाला को दिया। उन्होंने कहा, “जब आपकी पत्नी फोटोग्राफर बन जाए।”

विष्णु विशाल तमिल फिल्मों के अभिनेता के साथ-साथ प्रोड्यूसर भी हैं। उन्होंने ‘वेलैनु वंधुट्टा वेल्लाइकरन’, ‘सिलुक्कुवारूपट्टी सिंगम’ और ‘रत्सासन’ जैसी फिल्में बनाई हैं। बतौर ऐक्टर विशाल की आखिरी तमिल फिल्म ‘एफआईआर रेडी’ थी। हालाँकि, उनकी अगली फिल्म ‘मोहनदास’ जल्द ही रिलीज होने वाली है, जिसमें वह मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे। बता दें कि विष्णु ने पैर में चोट लगने से पहले तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन के लिए क्रिकेट भी खेला है।

बता दें कि हाल में ही रणवीर सिंह ने न्यूड फोटोशूट करवाकर सनसनी मचा दी। इस पर उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “किसी भी इंसान के लिए शारीरिक रूप से नंगा होना बहुत आसान है और यह आत्मा के लिए मायने रखती है। मेरी आत्मा को लोग मेरे काम यानी फिल्मों के जरिए देख सकते हैं।”

रणबीर सिंह के इस फोटो को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ मिली थीं। हिमानी नाम के एक यूजर ने लिखा था, “आज हिंदुत्व के कारण Bollywood इतना कंगाल हो गया है। उनको पैसे कमाने के चक्कर में नग्न होना पड़ रहा है। आज पुरुष नग्न फोटोशूट करवा रहा है कल कतार लगेगी और हाँ याद आया अभी 119 करोड़ का घर जो लिया है रणवीर सिंह ने तो कुछ तो करना पड़ेगा भरपाई के लिए।”

एक यूजर ने लिखा, “रणवीर सिंह करण जौहर के ऑफिस में अपनी अगली फिल्म पर चर्चा करने पहुँचे।”

नीरज चोपड़ा को सिल्वर मेडल: 19 साल बाद भारत को वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक, 2.41 मीटर से रह गया गोल्ड

नीरज चोपड़ा ने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल कर इतिहास रच दिया। उन्होंने 88.13 मीटर भाला फेंक (बेस्ट ऑफ 6 में से) कर यह मेडल हासिल किया। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अभी तक किसी भी भारतीय पुरुष ने कोई भी पदक नहीं जीता था।

नीरज चोपड़ा ने जैसे ओलिंपिक के ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिला कर इतिहास रचा था, वैसा ही इतिहास आज भी रच दिया। आपको बता दें कि इससे पहले वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के लिए एकमात्र मेडल अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2003 में जीता था। उन्हें लॉन्ग जंप में ब्रॉन्ज मेडल मिला था। पुरुषों की प्रतियोगिता में आज से पहले भारत ने एक भी मेडल हासिल नहीं किया था।

अमेरिका में हो रही 18वीं वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के भाला फेंक प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल एंडरसन पीटर्स ने जीता। उन्होंने 90.54 मीटर भाला (बेस्ट ऑफ 6 में से) फेंका।

‘50% भी हिंदू जग गए तो मुस्लिम इतिहास बन जाएँगे, नमाज की जगह नहीं मिलेगी’: इस्लामी विद्वान ने मुस्लिमों को चेताया – छिपने की जगह नहीं मिलेगी

बीते कुछ दिनों में कट्टरपंथी नेताओं ने हिंदू विरोधी बयान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी बीच भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की और हिंदुओं से इस्लाम कबूल करवाने की साजिशों का भी पर्दाफाश हुआ। अब ऐसे ही माहौल सोशल मीडिया पर एक इस्लामी स्कॉलर डॉ सैयद रिजवान अहमद का पुराना वीडियो वायरल होना शुरू हुआ है।

ये वीडियो कब का है और किस संदर्भ में है, इसकी पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। लेकिन इस वायरल वीडियो में वह उन कट्टरपंथियों को जवाब देते सुनाई पड़ रहे हैं जो समझते हैं कि मुगलों ने हिंदुओं पर सदियों राज किया है और वो भी अब दोबारा से वैसा दौर ला सकते हैं।

फेस टू फेस नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाले डॉ सैयद अहमद इस वीडियो में किसी कट्टरपंथी को जवाब देते सुनाई पड़ते हैं। वह कहते हैं “तुझे अगर 800 साल की हुकूमत याद है और तू उसे फक्र से बोल रहा है तो जिस दिन इस देश के हिंदू को 800 साल के सारे गम, गुस्सा और जुल्म याद आ गए, तो तुझे हिंदुस्तान में छिपने की जगह नहीं मिलेगी और तेरे साथ हम भी पिटेंगे। तू और तेरे बच्चे दौड़ा-दौड़ा कर मारे जाएँगे और तेरे साथ हम भी पिटेंगे। हम भी दौड़ा-दौड़ा कर मारे जाएँगे।”

रिजवान कहते हैं, “शुक्र कर हिंदू को पूरा 800 साल अच्छी तरह से याद नहीं है। पहले तो वो 800 था नहीं। झूठ बोला जाता है। पूरे हिंदुस्तान पर कुल 175 साल मुसलमान ने हुकूमत की है। (वो भी अलग-अलग जगह)। खैर, चलो उसमें नहीं पड़ते। शुक्र कर हिंदू को वो पूरे 800 साल याद नहीं है। वो आज मथुरा काशी की बात कर रहा है। अगर हिंदू को 800 साल याद आ गए तो 30,000 मंदिरों की बात करेगा। मस्जिद नहीं बचेगी नमाज पढ़ने के लिए।”

पुरानी वीडियो की छोटी क्लिप में वह कहते सुनाई पड़ रहे हैं, “800 साल का भूल जा। 2020 में जो तू 800 साल की याद दिला रहा है वो तेरे अंदर का जहर दिखाता है और उस हिंदू को न जगा। अभी मुट्ठी भर जगा है तो ये हाल हो गया। 30-35% मुश्किल से जगा है वो भी संवैधानिक दृष्टि से, लोकतांत्रिक दृष्टि से, कोर्ट की दृष्टि से। कहीं खोपड़ी सनकी हिंदू की और 50 फीसद भी जाग गया, तीसरी आँख खुल गई तो जगह नहीं मिलेगी छिपने की। इतिहास बन जाएगा मुसलमान। समझा।”

₹5000 करोड़ की लूट पर खोली पोल, इसलिए की गई बेटी बदनाम: स्मृति ईरानी कॉन्ग्रेस पर भड़कीं, कोर्ट ले जाने की दी धमकी

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अपनी 18 साल की बेटी पर कॉन्ग्रेस द्वारा लगाए गए इल्जामों का प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मुँह तोड़ जवाब दिया। उन्होंने शनिवार (23 जुलाई 2022) को मीडिया से बात करते हुए कहा कि ये सब केवल कॉन्ग्रेस ने इसलिए किया है क्योंकि वह गाँधी परिवार के विरोध में मीडिया में बोलती हैं। उन्होंने इस तरह बेटी का खुलेआम ‘चरित्र हनन’ किए जाने पर कॉन्ग्रेस को चेतावनी दी कि अब वो ये मामला कोर्ट में देखेंगी।

उन्होंने कहा, “18 साल की कॉलेज जाने वाली जिस बच्ची का कॉन्ग्रेस नेता ने कॉन्ग्रेस हेडक्वार्टर में चरित्र हनन किया। उस लड़की का दोष यह है कि उस लड़की की माँ ने 2014 और 2019 में अमेठी से राहुल गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। उस लड़की का दोष यह है कि उसकी माँ ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी की 5,000 करोड़ की लूट के ऊपर प्रेसवार्ता की।”

उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस नेता ने मीडिया में हँस-हँस कर जो कागज दिखाते हुए दावा किया है क्या वो बता सकते हैं कि उनमें लिखा क्या हुआ था। उन्होंने पूछा कि एक आरटीआई के हवाले से ऐसे दावे हुए। क्या कॉन्ग्रेस नेता बता सकते हैं कि आरटीआई में उनकी 18 साल की बच्ची का नाम लिखा है?

वह कहती हैं, “मेरी बेटी कॉलेज स्टूडेंट है। वो कोई बार नहीं चलाती है। वह अपना साधारण जीवन जी रही है। पवन खेड़ा ने कहा कि मेरी बेटी को शो कॉज नोटिस दिया गया। मैं पूछना चाहती हूँ इन सब में मेरी बेटी का नाम कहाँ है। जयराम रमेश ने कहा कि वो RTI के आधार पर मेरी बेटी पर आरोप मढ़ रहे हैं। मैं जयराम रमेश से पूछती हूँ कि क्या RTI की उस एप्लीकेशन में मेरी बेटी का नाम है, क्या उसके जवाब में मेरी बेटी का नाम है?”

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने ये सब केवल और केवल उन्हें व उनकी बेटी को बदनाम करने के लिए किया है, जिसके पीछे की वजह ये है कि वो गाँधी परिवार, सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करती हैं। वह बोलीं, “हाँ, मैं सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करती हूँ और करती रहूँगी। मैं कॉन्ग्रेस के नेताओं से कोर्ट में जवाब माँगूँगी।”

ईरानी ने राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस की सरगना जिन्होंने मेरी बच्ची के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को कहा है… ये मेरा वादा है एक भाजपा कार्यकर्ता होने के नाते और एक माँ होने के नाते, मैं राहुल गाँधी को दोबारा 2024 में अमेठी से हराऊँगी। उन्हें धूल चटाकर वापस भेजूँगी।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि स्मृति ईरानी की 18 साल की बेटी गोवा में बार चलाती हैं। खेड़ा ने कहा था कि ईरानी जिस पार्टी से जुड़ी हैं, उस हिसाब से उनकी बेटी बहुत संस्कारी होनी चाहिए, लेकिन वो गोवा में बार चला रही है।