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छत्तीसगढ़ में 650 करोड़ के मेडिकल घोटाले पर ED की छापेमारी, 18 ठिकानों पर कार्रवाई: भूपेश बघेल की कॉन्ग्रेस सरकार ने ₹17 लाख में खदीरी थी ₹5 लाख की मशीन

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (30 जुलाई 2025) को छत्तीसगढ़ में मेडिकल सप्लाई घोटाले के मामले में 18 ठिकानों पर छापेमारी की। यह घोटाला 550 करोड़ (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 650 करोड़) से अधिक का है। यह कार्रवाई रायपुर, दुर्ग, भिलाई और आसपास के इलाकों में की गई।

मामला डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेस (DHS) और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़ा है। इनके साथ-साथ मोक्षित कॉर्पोरेशन (Mokshit Corporation) नाम की निजी कंपनी भी इसमें शामिल थी। यह घोटाला उस समय हुआ था, जब राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे।

छापेमारी उन लोगों के घर और कार्यालयों में हुई जो इस घोटाले से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े थे, जैसे सरकारी अधिकारी, मेडिकल सप्लायर, एजेंट और कुछ बिचौलिए। ED की टीम ने CGMSCL के पूर्व डिप्टी मैनेजर कमलकांत पाटनवार के घर पर भी छापा मारा। वह फिलहाल जेल में हैं।

आरोप के अनुसार, घोटाले में बिना आवश्यक्ता और जाँच के मेडिकल उपकरण और रसायन खरीदे गए थे। यह पूरा मामला तब सामने आया जब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने मोक्षित कॉर्पोरेशन से जुड़े दस्तावेज ED को सौंपे। इन दस्तावेजों में मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले, इसके बाद ED ने यह कार्रवाई शुरू की।

घोटाले की पृष्ठभूमि

छत्तीसगढ़ में एक बड़ा मेडिकल घोटाला सामने आया है। राज्य सरकार की संस्था छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) ने जनवरी 2022 से अक्टूबर 2023 तक करोड़ों रुपये का घपला किया था।

ACB और EOW की जाँच में पता चला कि CGMSCL ने मोक्षित कॉर्पोरेशन और उसकी एक शेल कंपनी के साथ मिलकर यह घोटाला किया। जाँच एजेंसियों ने अप्रैल में 18,000 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की, जिसके आधार पर ED  ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जाँच शुरू की है।

चार्जशीट में जिन 6 लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा, CGMSCL के अधिकारी बसंत कुमार कौशिक, छिरोड़ रौतिया, कमलकांत पाटनवार, डॉ. अनिल परसाई और दीपक कुमार बांधे शामिल हैं। इनमें से कौशिक उस समय CGMSCL में जनरल मैनेजर (इक्विपमेंट) और डिप्टी मैनेजर (पर्चेज) थे, वहीं बाकी लोग भी टेक्निकल या प्रशासनिक पदों पर थे।

22 जनवरी को ACB/EOW ने इनके खिलाफ केस दर्ज किया और साथ ही चार कंपनियों को भी आरोपित बनाया था। इनमें हरियाणा का रिकॉर्ड एंड मेडिकेयर सिस्टम (Records and Medicare System HSIIDC), मोक्षित कॉर्पोरेशन, CB कॉर्पोरेशन  और श्री शारदा इंडस्ट्रीज शामिल है।

ACB/EOW ने बताया कि इस घोटाले में सामान की कीमत को जानबूझकर कई गुना बढ़ा दिया गया। उदाहरण के तौर पर, एक EDTA ट्यूब, जो बाजार में 8.50 रुपए की मिलती है, CGMSCL ने मोक्षित कॉर्पोरेशन  से 2,352 रुपए प्रति ट्यूब के भाव पर खरीदी। वहीं, एक CBC मशीन, जिसकी मार्केट कीमत 5 लाख रुपए है, उसे 17 लाख रुपए में खरीदा गया।

इतना ही नहीं, मेडिकल उपकरण खरीदने की जो प्रक्रिया आमतौर पर कई महीनों में पूरी होती है, उसे महज 26 दिन में खत्म कर दिया गया।

यह मामला राज्य विधानसभा में भी उठा, जिसके बाद ED और EOW की छापेमारी तेज हुई। जाँच का मकसद है सरकारी अफसरों और निजी कंपनियों के बीच मिलीभगत के सबूत जुटाना, फर्जी दस्तावेजों की पहचान करना और यह जानना कि इस भ्रष्टाचार की जड़ें कहाँ तक फैली हैं।

इंदौर का कॉन्ग्रेसी पार्षद कश्मीर से गिरफ्तार, लव जिहाद में हिंदू लड़कियों को फाँसने के लिए देता था लाखों रुपए: बुर्का वाली महिलाओं ने समर्थन में किया प्रदर्शन

लव जिहाद के लिए फंडिंग करने वाला आरोपित कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जम्मू कश्मीर से गिरफ्तार किया गया है। कादरी पर आरोप है कि वह हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मुस्लिम युवकों को एक लाख और निकाह करने के लिए दो लाख रुपए देता था।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इससे पहले अनवर की बेटी आयशा को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उसकी खोज में पुलिस ने पहले दिल्ली में भी दबिश दी थी, लेकिन अनवर फरार हो गया था।

अनवर कादरी की बेटी आयशा से भी पुलिस को कई जानकारी मिली है। इसके बाद और गिरफ्तारियाँ होने की भी संभावना है। उसके अलावा इंदौर पुलिस ने साहिल शेख और अल्ताफ के खिलाफ भी दो युवतियों के साथ रेप और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का मामला दर्ज किया था।

इसके बाद जाँच के दौरान आरोपितों ने कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी का नाम लिया था। दोनों ने पुलिस को बताया था कि अनवर ने युवकों को एक हिंदू लड़की को फँसाने के लिए एक लाख रुपए और निकाह कराने पर दो लाख रुपए देने की बात कही थी।

उसके बाद मोबाइल जाँच में यह सामने आया कि वह ‘अर्जुन’ और ‘राज’ जैसे नामों का इस्तेमाल कर हिंदू लड़कियों से दोस्ती करता था और फिर उन्हें मिलने बुलाता था। इसके बाद उन पर निकाह और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता था। 2011 में कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी, उसका भाई और एक अन्य आरोपित जानलेवा हमले के मामले में भी एक-एक साल की सजा काट चुके है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही इंदौर के वार्ड 58 की मुस्लिम महिलाओं ने अनवर कादरी के समर्थन में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया है। बता दें कि मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए पहले 10 हजार का इनाम घोषित किया था लेकिन बाद में ये इनाम राशि बढ़ाकर 20 हजार रुपए कर दी गई थी।

बिहार विधानसभा चुनाव की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, ऑनलाइन जाँचें नाम: ECI ने मोबाइल से दी जाँच की सुविधा, पारदर्शिता को बताया अहम

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके अंतर्गत तैयार की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को निर्वाचन आयोग ने आज दोपहर 3 बजे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया।

साथ ही, यह सूची राज्य के 38 जिलों के माध्यम से सभी राजनीतिक दलों को भी दे दी गई है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बिहार के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों के 90,817 पोलिंग स्टेशनों का डेटा शामिल किया गया है। आम मतदाता अब ECI की वेबसाइट (https://eci.gov.in) पर जाकर यह जाँच सकते हैं कि उनका नाम इस नई सूची में शामिल है या नहीं।

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मतदाता अपना नाम जाँचने के लिए तीन तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। पहला विकल्प है EPIC नंबर के माध्यम से जाँच करना, जिसमें मतदाता को अपना ईपीिक नंबर, राज्य, भाषा और कैप्चा भरना होता है।

सही जानकारी भरने पर मतदाता की पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाती है। दूसरा विकल्प है, व्यक्तिगत विवरण के आधार पर नाम खोजना। इसमें नाम, जन्मतिथि, किसी रिश्तेदार का नाम, लिंग, जिला और निर्वाचन क्षेत्र जैसी जानकारी भरनी होती है।

तीसरा मोबाइल नंबर के माध्यम से जाँच करना। इसके तहत मोबाइल नंबर दर्ज कर कैप्चा भरना होता है, जिसके बाद मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाता है। ओटीपी लिखते ही यदि नाम सूची में होगा तो मतदाता का विवरण सामने आ जाएगा। चुनाव आयोग ने यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और अधिक से अधिक मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की है।

भारत की अर्थव्यवस्था मरी हुई नहीं है राहुल गाँधी, मरी हुई है आपकी आत्मा: पाकिस्तान-चीन के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप के पास कॉन्ग्रेस के युवराज ने गिरवी रखी जमीर

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ करार दे रहे हैं। कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ कहा था। उनके सुर में सुर मिलाते हुए राहुल गाँधी ने अपनी बात कही है। लेकिन उनकी पार्टी के कई बड़े नेता ऐसा नहीं मानते।

कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी, सांसद शशि थरूर, राजीव शुक्ला जैसे कई नेता भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत मानते हैं। कॉन्ग्रेस के ही सीनियर नेता भारतीय अर्थव्यवस्था को डेड कहने के राष्ट्रपति ट्रंप के बयान को गलत कहते हुए भारतीय इकोनॉमी को जीवंत बता रहे हैं, जबकि राहुल गाँधी अपनी ही पार्टी के नेताओं से सबक नहीं ले पा रहे।

भारत की अर्थव्यवस्था, एक ऐसी अर्थव्यवस्था जिसने हाल ही में जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का गौरव प्राप्त किया है। अनुमान है कि 2030 तक ये जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। ऐसे देश के नेता विपक्ष अर्थव्यवस्था को ही ‘डेड’ घोषित करने में तुले हुए हैं। जबकि राहुल गाँधी खुद की आर्थिक स्थिति का ही आँकलन कर लें तो देश की अर्थव्यवस्था के विकास का कुछ अंदाजा उन्हें लग जाएगा।

दरअसल भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था को डेड घोषित कर दिया। उनकी हाँ में हाँ मिलते हुए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने उन्हें शुक्रिया तक कह दिया। सरकार को घेरते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप सही कह रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को छोड़कर बाकी सब जानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था ‘डेड’ है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि भारत ने अडानी की मदद करने के लिए अर्थव्यवस्था को डेड कर दिया।

डोनाल्ड ट्रंप का तो समझा जा सकता है कि भारत के साथ व्यापार वार्ता सफल नहीं होने और भारत द्वारा F-35 फाइटर जेट जैसे रक्षा सौदों से साफ मना कर देने की वजह से उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को ही ‘डेड’ कह दिया। ये बयान भारत पर व्यापारिक दबाव बनाने के लिए ही दिया गया है। ट्रंप पाकिस्तान के साथ तेल सौदे की घोषणा कर भारत पर दबाव डाल रहे हैं, लेकिन वास्तव में भारत की विकास दर अमेरिका से कहीं ज्यादा है। इसलिए हमारी अर्थव्यवस्था ‘मृत’ नहीं बल्कि जीवंत है। लेकिन राहुल गाँधी भारत की अर्थव्यवस्था के विकास पर सवाल खड़े कर पूरे देश और दुनिया को क्या संदेश देना चाहते हैं? ऐसा तब है जब भारत की अर्थव्यवस्था न केवल बड़ी है, बल्कि स्वस्थ और गतिशील भी है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

सरकार से सवाल पूछना विपक्षी दलों का अधिकार है लेकिन मोदी सरकार की खिलाफत करते- करते देश के खिलाफ बयानबाजी नेता विपक्ष की मानसिकता को दर्शाता है। वे नोटबंदी, जीएसटी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाते हैं, लेकिन इसका राग वो वर्षों से गा रहे हैं।

राहुल गाँधी का यह रुख विपक्षी राजनीति का हिस्सा है, जहां वे हर सफलता पर नकारात्मकता ढूँढते हैं, जबकि आईएमएफ और दूसरी रिपोर्ट भारत को सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बता रही हैं।

कोरोना काल के बाद से भारत की ग्रोथ दुनिया में सबसे ज्यादा

भारत दुनिया में अभी सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। पीआईबी के अनुसार 2024-25 में 6.5% वृद्धि के साथ भारत सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था है। दुनिया के विकास में इसका योगदान 16 फीसदी है और दुनिया के पाँच सबसे बड़ी अर्थव्यस्थाओं में भारत शामिल है। पिछले एक दशक में भारत की स्थिति कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देश से ऊपर उठ कर दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों में शामिल होना ही मोदी सरकार में देश के विकास को दर्शाता है। माना जा रहा है कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाला बन जाएगा। यहाँ तक की कोरोना काल में जब दुनिया त्रासदी से कराह रही थी और भारत में भी महामारी का व्यापक असर था, भारत की ग्रोथ रेट दुनिया में सबसे ज्यादा रही।

भारत ने इस दौरान बड़ी आबादी को गरीबी से मुक्त दिलाने, अनाज मुफ्त में देने से लेकर हर घर नल, शौचालय की व्यवस्था करने और हर व्यक्ति का बैंक खाता खोलने जैसी सुविधाएँ देकर भारतीयों की सामाजिक आर्थिक स्थिति में सुधार किया।

मनमोहन सिंह के वक्त कैसी थी अर्थव्यवस्था?

2014 में यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार को करारी हार देने के बाद नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सत्ता पर काबिज हुई। कॉन्ग्रेस नेता मनमोहन सिंह के 2004 से 14 तक के 10 साल में महंगाई देश की बड़ी चुनौती थी। घोटालों से देश त्रस्त था। हर दिन नए घोटाले से देश दो-चार होता था।

मनमोहन सरकार के समय औसत वित्तीय घाटा 4.3 फीसदी रहा। जबकि मोदी सरकार में वित्तीय घाटे को कम करते हुए जीडीपी को दोगुना कर दिया है। विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर हैं और भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। मोदी के समय में संरचनात्मक सुधार हुए हैं जिसने अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला बनाया है। डेलॉयट की रिपोर्ट में FY2024-25 के लिए 6.5% से 6.8% वृद्धि का अनुमान है, जो घरेलू माँग और निवेश पर आधारित है।

मनमोहन सरकार के वक्त से अब व्यापार करने की ज्यादा सहुलियतें हैं। दुनिया भर में व्यापार सुगमता सूचकांक के में भारत का स्थान करीब 60 है जो मनमोहन काल में 132 के आसपास था।

पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में औसत जीडीपी विकास दर 7.7% रहा जबकि कोरोना के बाद दूसरे कार्यकाल में 6.8% रहा। कोरोना के बाद रिकवरी रेट 6.3-6.8% रहा। मुद्रास्फीति नियंत्रित रहा जिससे महंगाई से जनता को राहत मिली। जबकि मनमोहन सिंह के दस सालों में अर्थव्यवस्था में वैश्विक उछाल भी आया फिर भी जीडीपी प्रति व्यक्ति औसतन 6% से 4% रहा और असंतुलित विकास की वजह से महंगाई काफी बढ़ी।

मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से विदेशी निवेश दोगुना हुआ। जबकि मनमोहन सिंह के समय भ्रष्टाचार और घोटालों की वजह से निवेशकों का विश्वास कम हुआ और विदेशी निवेश कम हुए। | यही वजह है कि उस वक्त विदेशी मुद्रा भंडार 300 बिलियन डॉलर थे जो अब बढ़ कर 600 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गए हैं। भारत की अर्थव्यवस्था अब 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर है।

राहुल गाँधी की खुद की संपत्ति में हुआ जबरदस्त ग्रोथ

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के संपत्ति की बात की जाए तो उन्होंने मोदी सरकार में शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर भारी मुनाफा कमाया। 2014 में जहाँ राहुल गाँधी की शेयर की वैल्यू 83 लाख रुपए थी, वहीं 2024 में बढ़कर ये 8.3 करोड़ रुपए हो गई यानी 10 गुणा ज्यादा। वहीं म्यूचुअल फंड से उन्होंने पिछले 10 सालों में 6.6- 8.3 करोड़ रुपए कमाए जबकि मनमोहन सरकार के समय 60-80 लाख ही कमा पाए थे। ऐसा उन्होंने शेयर बाजार में रिस्क लेते हुए निवेश कर कमाया। ये रिस्क लेने की हिम्मत उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था पर विश्वास जताकर ही पाई होगी।

चीन और पाकिस्तान से राग मिलाते रहे हैं राहुल

राहुल गाँधी पर चीन से चंदा लेने और उनकी भाषा बोलने के आरोप लग चुके हैं। पिछले दिनों भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया था कि राहुल गाँधी ने चीन के उस दावे को सहमति दे दी, जिसमें उसने अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताया था। वहीं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सवाल खड़े कर उन्होंने पूछा कि कितने जेट गिरे? इतना ही नहीं सीजफायर पर पीएम मोदी और सेना के आधिकारिक बयान पर विश्वास न जता कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को सही मानते हुए सवाल करना भी उनके मंसूबे को बताता है।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने राहुल के बयान से किया किनारा

मोदी सरकार को घेरने के लिए राहुल गाँधी ने जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान को लपका, इससे कॉन्ग्रेसी भी हैरान हैं। कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी, शशि थरूर और राजीव शुक्ला ने राष्ट्रपति ट्रंप के बयान का खंडन करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मरी नहीं है बल्कि तेज गति से आगे बढ़ रही है। जो सुधार पीवी नरसिम्हा राव के समय में शुरू हुए मनमोहन काल में मजबूत हुए वो आज बिल्कुल भी कमजोर नहीं हुई है।

इसके बावजूद राहुल गाँधी भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ कह रहे हैं तो ये देश की छवि ही खराब कर रहे हैं। साथ ही उन निवेशकों को भी गुमराह कर रहे हैं जो भारत के विकास में योगदान दे रहे हैं। कुल मिलाकर, भारत की अर्थव्यवस्था न केवल सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है बल्कि सबसे अच्छी है। हर तरह की चुनौतियों के बावजूद मजबूती से ये आगे बढ़ रही है। ट्रंप और राहुल जैसे नेताओं के बयान अपने अपने हित साधने के लिए दिए गए हैं, जो तथ्यों पर आधारित नहीं। भारत 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, और यह उपलब्धि मोदी सरकार की नीतियों की सफलता को दर्शाती है।

भगवा आतंकवाद साबित करने की जिद में जुटे परमबीर सिंह पर कब होगी कार्रवाई? कॉन्ग्रेसियों के इशारे पर खेला था हिंदुओं को बदनाम करने का खेल: 26/11 पर ड्यूटी से भागा, फिर गायब किया था कसाब का फोन

मालेगाँव ब्लास्ट मामले की शुरुआती जाँच में शामिल रहे महाराष्ट्र ATS के रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्हें कुछ खास लोगों को गिरफ्तार करने के गुप्त आदेश दिए गए थे, जिनमें RSS प्रमुख मोहन भागवत का नाम भी शामिल था।

खास बात ये है कि ये आदेश देने वाले IPS का नाम है- परमबीर सिंह। इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि परमवीर सिंह ने ही उनसे कहा था कि ‘भगवा आतंकवाद’ की झूठी कहानी तैयार करो जबकि असल में उस समय जो कुछ हुआ वह गलत था। अंत में उन्होंने साफ कहा कि कोई ‘भगवा आतंकवाद’ नहीं था, यह सब कुछ फर्जी था।

मुजावर ने सवाल करते हुए ये भी कहा कि उन्हें अब तक समझ नहीं आया कि परमबीर को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है।

साध्वी प्रज्ञा ने बताई प्रताड़ना की कहानी

इस दावे के अलावा मालेगाँव ब्लास्ट में बाइज्जत बरी हुई साध्वी प्रज्ञा ने भी परमबीर सिंह पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रज्ञा ने कहा था कि मालेगाँव केस में उन्हें हिरासत में टॉर्चर किया गया, उन्हें बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उन्हें वेंटीलेटर तक पर जाना पड़ा।

प्रज्ञा ने आरोप लगाया कि उनकी रीढ़ की हड्डी भी टूट गई। उन्हें पोर्न दिखाकर भद्दे सवाल पूछे गए। साध्वी का दावा है कि परमबीर ने ‘भगवा आतंक’ का झूठा नैरेटिव बनाने के लिए ये सब किया।

IPS परमबीर सिंह पर लगाए गए आरोप और दावे पहली बार नहीं हैं। सिंह पर कई बार कानून को ताक पर रखने और हिंदुओं के खिलाफ साजिश करने के आरोप लग चुके हैं। परमबीर का नाम 26/11 के आतंकी हमलों समेत कई बड़े मामलों में आ चुका है, जहाँ उन पर कानूनी अनियमितताओं और हिंदुओं को फँसाने के गंभीर इल्जाम लगे हैं।

मालेगाँव में ‘हिंदू आतंक’ साबित करने की कोशिश

साल 2008 के मालेगाँव बम धमाके में जबरन गिरफ्तार की गईं साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह के कहने पर 3-4 पुलिसकर्मियों उन्हें बहुत अधिक प्रताड़ना देते थे। थी। उन्हें हिरासत में लेकर पुलिसकर्मी उन्हें घेर कर मारते थे। उन्हें पूरी रात बेल्ट से इस कदर पीटा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था।

परमबीर सिंह की देखरेख में ही साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को हिरासत के दौरान पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो दिखाया जाता था और भद्दे सवाल किए जाते थे। उन्होंने बताया था कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया, फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास किया गया।

मालेगाँव ब्लास्ट में ही कर्नल श्रीकांत पुरोहित पर भी आरोप लगाए गए। उन्हें पुलिस कस्टडी में रखा गया और प्रताड़ित किया गया था। कर्नल ने कोर्ट में बताया कि परमबीर सिंह और ATS के अफसरों ने उन्हें टॉर्चर किया।

उनके साथ मारपीट, गालियाँ और प्राइवेट पार्ट्स पर हमला किया गया, ताकि वो ‘भगवा आतंकवाद’ का नैरेटिव कबूल लें। कर्नल का कहना है कि परमबीर ने कॉन्ग्रेस की शह पर उन्हें फँसाया और उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी।

26/11 में ड्यूटी करने से किया मना

26/11 आतंकी हमलों के दौरान मुंबई के पुलिस कमिश्नर हसन गफूर थे। उन्होंने परमबीर सिंह पर आरोप लगाया था कि उन्होंने इस दौरान ड्यूटी करने से मना कर दिया था। गफूर ने कहा था कि कानून-व्यवस्था के संयुक्त आयुक्त केएल प्रसाद, अपराध शाखा के अतिरिक्त आयुक्त देवेन भारती, दक्षिणी क्षेत्र के अतिरिक्त आयुक्त के वेंकटेशम और आतंकरोधी दस्ते के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह मुंबई आतंकी हमले के दौरान अपनी ड्यूटी निभाने में विफल रहे थे।

कसाब के फोन को किया गायब जो कभी नहीं मिला

2008 में हुए इसी हमले को लेकर महाराष्ट्र के रिटायर्ड एसीपी शमशेर खान पठान ने भी परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। पठान ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में कहा कि 26/11 के बाद कसाब के पास से मिले फोन को परमबीर सिंह ने अपने पास रख लिया था। इसे उन्होंने कभी जाँच अधिकारियों को दिया ही नहीं।

कथित तौर पर इसी फोन पर कसाब को उसके आका पाकिस्तान से ऑर्डर दे रहे थे। पठान का दावा था कि इस फोन से पाकिस्तान और हिंदुस्तान के हैंडलर्स का पता चल सकता था।

पठान ने बताया था कि हमले वाले दिन वो पाईधूनी पुलिस स्टेशन में थे और उनके बैचमेट एनआर माली बतौर सीनियर इंस्पेक्टर डीबी मार्ग पुलिस थाने में कार्यरत थे। उन्होंने लिखा कि 26/11 के दिन अजमल आमिर कसाब को गिरगाँव चौपाटी इलाके में पकड़ा गया था। ऐसे में उन्होंने अपने साथी एनआर माली से फोन पर बात की।

इस दौरान उन्हें पता चला कि कसाब के पास एक फोन मिला है, जो पहले कॉन्स्टेबल कांबले के पास था और बाद में उससे परमबीर सिंह ने ले लिया।

पूर्व एसीपी के मुताबिक, इस मामले में उनकी माली से बातचीत आगे भी होती रही। उन्हें पता चला कि परमबीर सिंह ने जाँच अधिकारी को फोन नहीं दिया है। माली ने शमशेर को ये भी बताया था कि उन्होंने दक्षिण क्षेत्र के आयुक्त वेंकटेशम से मुलाकात की थी और उस फोन के बारे में बताया था।

हालाँकि इसके बावजूद उन पर कार्रवाई नहीं हुई। जब पूछने के लिए माली परमबीर के पास गए तो सिंह उन पर चिल्लाने लगे और कहा कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है।

कॉन्ग्रेस ने गढ़ा ‘सैफरन टेरर’ का नैरेटिव, उनके ही नेता ने खोली पोल

29 सितंबर 2008 को हुए मालेगाँव ब्लास्ट और 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले के दौरान केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। वहीं, महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस और NCP की गठबंधन सरकार थी। पी चिदंबरम उस समय केंद्रीय गृह मंत्री थे।

ये वही कॉन्ग्रेस सरकार है जिसने मालेगाँव ब्लास्ट के बाद से ही हिंदू समुदाय को बदनाम करने के लिए ‘हिंदू आतंकवादी’ या ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे शब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया था। चिदंबरम ने गृह मंत्री रहते हुए ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे और दिग्विजय सिंह ने इन शब्दों का इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से किया।

केंद्रीय गृह मंत्री के तौर पर कार्य करते हुए 25 अगस्त 2010 को पी चिदंबरम में कहा था,  “मैं आपको सावधान करना चाहता हूँ कि भारत में युवा पुरुषों एवं महिलाओं को कट्टरपंथी बनाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयी है। इसके अलावा हाल में ‘भगवा आतंकवाद’ सामने आया है, जो अतीत में कई बम विस्फोटों में पाया गया है..।”

फोटो साभार- X (@LeNonDuMonde)

सितंबर 2010 में दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ‘हिंदू आतंकवाद’ से देश को खतरा बता दिया था। विकीलीक्स खुलासे में ये बात सामने आई थी कि भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोशी रोमर को 2010 में राहुल गांधी ने कहा था कि भारत को पाकिस्तान से आने वाले इस्लामिक आतंकवाद से ज्यादा बड़ा खतरा हिंदू आतंकवाद से है।

इसके बाद गृह मंत्री रहते हुए सुशील कुमार शिंदे ने 20 जनवरी 2013 को जयपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बीजेपी और आरएसएस के कैंप में हिंदू आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। उनके बयान के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणि शंकर अय्यर ने उन्हें मुबारकबाद दी थी।

लगभग 11 वर्षों बाद पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री और कॉन्ग्रेस के राजनेता सुशील कुमार सिंह ने 2024 में भगवा आतंकवाद पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि शब्द को इस्तेमाल करने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी ने ही उन पर दबाव डाला था। एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा, “भगवा के पीछे आतंकवाद शब्द क्यों लगाया गया मुझे आज तक पता नहीं है। यह नहीं लगना चाहिए था, ये गलत था।”

कॉन्ग्रेस की माफी माँगने की उठी माँग

NIA कोर्ट ने मालेगाँव ब्लास्ट के सभी आरोपितों को बरी करते हुए कहा कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता और अभियोजन पक्ष उन पर आरोप साबित करने में भी नाकाम रहा। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चिदंबरम, सोनिया गांँधी और अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं से सनातन धर्म को बदनाम करने के लिए सार्वजनिक माफी की माँग उठने लगी है। साथ ही परमबीर सिंह और कॉन्ग्रेस के नेताओं की गिरफ्तारी की बात भी नेटिजन्स तेजी से सोशल मीडिया पर उठा रहे हैं।

सवाल ये उठता है कि ‘हिंदू आतंकवाद’ या ‘सैफरन टेरर’ का नैरेटिव गढ़ने और इसे हर हाल में साबित करने पर तुले परमबीर सिंह ने खुद ही ये पूरा खेल खेला? या फिर चिदंबरम और सोनिया गाँधी ने मिलकर इस नैरेटिव को धरातल पर लाने के लिए और हिंदुओं को बदनाम करने के लिए इस पूरी साजिश का कर्ताधर्ता परमबीर सिंह को बना दिया?

मालेगाँव ब्लास्ट केस में ATS अधिकारी शेखर बागड़े ने बनाए थे फर्जी सबूत, कोर्ट ने दिए जाँच के आदेश: NIA कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा-कर्नल पुरोहित समेत सभी को कर दिया था बरी

मालेगाँव विस्फोट केस में गुरुवार (31 जुलाई 2025) को मुंबई की एक विशेष NIA कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित सहित कुल 7 आरोपियों को बरी कर दिया है। वहीं अब विशेष जज एके लाहोटी ने आरोपितों को फँसाने के लिए झूठे सबूत पेश करने के आरोप में ATS के ACP शेखर बागड़े के खिलाफ जाँच के आदेश दिए हैं।

इस केस की शुरुआती जाँच महाराष्ट्र ATS ने की थी, लेकिन 2011 में मामला NIA को सौंपा गया। जाँच के दौरान दो सेना अधिकारियों ने बताया कि ATS के अधिकारी (अब ACP) शेखर बगड़े 3 नवंबर 2008 को आरोपित सुधाकर चतुर्वेदी की गैरमौजूदगी में उनके घर में घुसे थे। दोनों सैन्य अधिकारियों ने गवाही दी कि बगड़े ने वहाँ चुपचाप जाकर RDX जैसे विस्फोटक रखे, और उन्हें यह बात किसी को न बताने को कहा।

दो दिन बाद ATS की टीम ने उस घर पर छापा मारा और RDX मिलने का दावा किया। NIA की जाँच और कोर्ट में दी गई जानकारी से यह स्पष्ट हुआ कि बगड़े ने घर में जबरन घुसकर फर्जी सबूत रखे थे। कोर्ट ने कहा कि ATS की तरफ से इस मामले में कोई संतोषजनक सफाई नहीं दी गई और पूरे मामले में ‘सबूतों की प्लांटिंग’ की आशंका है।

इतना ही नहीं कोर्ट को यह भी पता चला कि विस्फोट के कथित घायलों के मेडिकल सर्टिफिकेट बिना मान्यता प्राप्त डॉक्टरों से बनवाए गए थे। कुछ सर्टिफिकेट जानबूझकर बदले भी गए थे। कोर्ट ने इस पर भी जाँच का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 2017 में कर्नल पुरोहित को जमानत देते हुए बगड़े की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि आर्मी की जाँच में भी अलग कहानी सामने आई थी और बगड़े का आरोपित के घर में जाना सवाल खड़ा करता है।

अब कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि ATS और NIA दोनों ही आरोपितों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं ला सके और पूरा मामला संदेह के घेरे में है। कोर्ट का 1000 पन्नों का यह फैसला महाराष्ट्र के DGP, ATS प्रमुख और NIA को भेजा गया है ताकि फर्जी सबूत और मेडिकल रिकॉर्ड की गहराई से जाँच हो सके।

ATS ने जाँच में कैसे की गड़बड़ी?

कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) किसी भी आरोपित के खिलाफ ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि ATS यह साबित नहीं कर पाई कि धमाके में इस्तेमाल की गई बाईक प्रज्ञा ठाकुर की थी।

कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि प्रज्ञा ठाकुर धमाके से कम से कम दो साल पहले ही साध्वी बन चुकी थीं और अभियोजन यह नहीं दिखा सका कि उनका धमाके की साजिश से कोई संबंध था। कर्नल पुरोहित के मामले में भी अदालत ने कहा कि कोई ऐसा सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि उनके घर में कभी विस्फोटक सामग्री रखी गई थी।

जाँच एजेंसी ने मूलभूत जाँच प्रक्रियाओं का भी पालन नहीं किया। उदाहरण के तौर पर, जिस कमरे में विस्फोटक रखने का दावा किया गया, उसकी स्केच तक नहीं बनाई गई और फॉरेंसिक सैंपल भी दूषित (contaminated) पाए गए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘अभिनव भारत’ नाम की जिस दक्षिणपंथी संस्था की बात की गई थी, जिसे प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित से जोड़ा गया था, उसके बारे में भी यह साबित नहीं हो सका कि वह किसी आतंकवादी गतिविधि में शामिल थी या उसके फंड का इस्तेमाल इस तरह के कामों के लिए हुआ था।

‘भगवा आतंकवाद’ गढ़ने के लिए मालेगाँव ब्लास्ट में मोहन भागवत को उठाने का दिया गया था आदेश: ATS जाँच से जुड़े अधिकारी का खुलासा, योगी आदित्यनाथ भी थे टारगेट

मालेगाँव ब्लास्ट मामले की शुरुआती जाँच में शामिल रहे महाराष्ट्र ATS के रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्हें कुछ खास लोगों को गिरफ्तार करने के गुप्त आदेश दिए गए थे, जिनमें RSS प्रमुख मोहन भागवत का नाम भी शामिल था।

मुजावर के अनुसार, इन निर्देशों का मकसद ‘भगवा आतंकवाद’ की झूठी कहानी गढ़ना था। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि उन्हें राम कालसंगरा, संदीप डांगे, दिलीप पाटीदार और मोहन भागवत को पकड़ने को कहा गया था।

हालाँकि उन्होंने यह आदेश मानने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि मोहन भागवत जैसी बड़ी शख्सियत को बिना किसी ठोस वजह के पकड़ना उनके बस की बात नहीं थी। आदेश न मानने के बाद, उनके ऊपर आईपीएस अधिकारी परमवीर सिंह ने एक झूठा केस डाल दिया जिससे उनकी 40 साल की पुलिस सेवा खत्म हो गई।

मुजावर ने यह भी आरोप लगाया कि पूरी जाँच एक ‘फर्जी अफसर’ के नेतृत्व में हुई थी और जाँच का पूरा ढाँचा ही झूठ पर आधारित था। उन्होंने कोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इससे यह साबित हो गया है कि उस समय जो कुछ हुआ वह गलत था। अंत में उन्होंने साफ कहा कि कोई ‘भगवा आतंकवाद’ नहीं था, यह सब कुछ फर्जी था।

बता दें कि इससे पहले भी एक ऐसा ही खुलासा हुआ था, जिसमें पता चला था कि महाराष्ट्र ATS  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को फँसाना चाहती थी। इसके लिए उसने मालेगाँव बम धमाकों के मामले में मुकदमे का सामना करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को भी प्रताड़ित किया था।

कर्नल पुरोहित ने मुंबई के एक कोर्ट को बताया था, “मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया जो किसी जानवर के साथ भी नहीं किया जाता। मेरे साथ युद्ध बंदी से भी बदतर व्यवहार किया गया। हेमंत करकरे, परमबीर सिंह और कर्नल श्रीवास्तव लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि मैं मालेगाँव बम धमाके के लिए खुद को जिम्मेदार बता दूँ। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं RSS, VHP के वरिष्ठ नेताओं और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम लूँ। उन्होंने मुझे 3 नवम्बर, 2008 तक यातनाएँ दी।”

गौरतलब है कि 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट मामले में NIA की विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी 7 आरोपितों को बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

अमेरिका से F-35 फाइटर जेट नहीं खरीदेगा भारत, ट्रंप ने PM मोदी को दिया था ऑफर: रूस से Su-57 का हो सकता है सौदा, देश में ही बनेंगे 60% पुर्जे

अमेरिका द्वारा लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से एफ -35 फाइटर जेट नहीं खरीदेगा। इसके बजाए भारत रूस का एसयू-57 फिफ्थ जनरेशन जेट खरीदने वाला है। अमेरिकी विमान खरीदने पर भारत को हर पुर्जे के लिए भी उस पर निर्भर रहना होगा। जबकि रूसी विमान भारत में ही बनेगा। इतना ही नहीं इसके तकनीक का भी हस्तांतरण होगा। विमान के करीब 60 फीसदी पुर्जे भी भारत में ही निर्मित होंगे । इसका फायदा रोजगार के क्षेत्र में मिलेगा साथ ही भविष्य में भारत इसका निर्माण भी कर पाएगा।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका से कुछ उत्पादों की खरीद बढ़ा सकता है, लेकिन रक्षा से जुड़े किसी भी उपकरण को अमेरिका से खरीदने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अमेरिका से प्राकृतिक गैस, संचार उपकरण और सोने की खरीद बढ़ाने पर विचार कर रहा है। लेकिन अमेरिकी रक्षा उपकरण, खासकर F-35 फाइटर जेट, खरीदने के लिए भारत सरकार इच्छुक नहीं है।

जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान भारत को F-35 स्टील्थ फाइटर जेट देने की पेशकश की थी। वहीं भारत सरकार चाहती है कि रक्षा उपकरणों का संयुक्त रूप से विकास और निर्माण भारत में ही हो।

हालाँकि ट्रंप भारत पर रूस से हथियार और तेल खरीदने पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने की धमकी दे चुके हैं, फिर भी भारत फिलहाल अमेरिका से नए रक्षा सौदे नहीं करना चाहता, खासकर तब जब पहले से ऑर्डर किए गए अमेरिकी उपकरणों की डिलीवरी में वर्षों की देरी हो रही है।

F-35 नहीं खरीदने के फैसले का मतलब है कि भारत लगभग 50-60 रूसी Su-57 फिफ्थ जनरेशन जेट खरीदेगा। भारतीय वायुसेना (IAF) को अगले कुछ वर्षों में चीन और पाकिस्तान की हवाई ताकत का मुकाबला करने के लिए करीब तीन स्क्वॉड्रन फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट्स की जरूरत है।

भारत अपने खुद के AMCA फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट पर भी काम कर रहा है, लेकिन इसके 2035 से पहले तैयार होने की संभावना नही है। इसलिए, जब तक स्वदेशी जेट तैयार नहीं होता, तब तक भारत को विदेशी विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इस समय केवल F-35 (अमेरिका) और Su-57 (रूस) ही ऐसे उपलब्ध विकल्प हैं।

बता दें कि अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर 25% टैक्स लगा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (30 जुलाई 2025) को इसकी घोषणा की थी। इस पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार (31 जुलाई) को लोकसभा में जवाब देते हुए कहा था कि भारत वैश्विक विकास में लगभग 16 फीसदी का योगदान दे रहा है।

उन्होंने कहा, “सरकार हमारे किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों, निर्यातकों, एमएसएमई और उद्योग के सभी वर्गों के कल्याण की रक्षा को सर्वोच्च महत्व देती है।” गोयल ने कहा, “हम किसानों और भारतीय कृषि के कल्याण के लिए लगातार काम कर रहे हैं ताकि समृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।”

अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ तो लगा दिया, पर भीतर ही भीतर काँप रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप: 7 दिन के लिए फैसला टाला, जानिए किन 70 देशों के लिए दरों का किया ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (31 जुलाई 2025) को दुनिया के 70 देशों पर 10 फीसदी से 41 फीसदी तक नए रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। 7 अगस्त से ये लागू होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे व्यापार असंतुलन को कम करने और अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।

व्हाइट हाउस की ओर से एक फैक्टशीट जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि इससे न सिर्फ आयात शुल्क दरों में बदलाव होगा बल्कि ये कब लागू होगा इसको भी बता दिया गया है। ट्रंप ने पहले टैरिफ के लिए 1 अगस्त का दिन तय किया था लेकिन अब जिन 70 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया है उन्हें 7 अगस्त से ये टैरिफ देना होगा। यानी अगर कोई सामान 7 अगस्त तक अमेरिका के लिए रवाना हो जाए तो उस पर नया टैरिफ लागू नहीं होगा।

नया रेसिप्रोकल टैरिफ क्या है?

व्हाइट हाउस ने गुरुवार को घोषणा की कि अमेरिका में आने वाले सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 10% ही रहेगा, जो 2 अप्रैल को लागू किया गया था। लेकिन यह 10% की दर केवल उन देशों के लिए है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार फायदे में है। यानी वे देश जिनके साथ अमेरिका आयात कम करता है और निर्यात ज्यादा।

15% टैरिफ उन देशों पर लागू होगा जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है। इसके अंतर्गत 40 देश हैं, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा तुलनात्मक रूप से थोड़ा कम है।

15 फीसदी से ज्यादा टैरिफ वाले कुल 26 देश हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक इन देशों का अमेरिका के साथ व्यापार घाटा ज्यादा है। भारत पर 25% टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि भारत उनके सामानों पर ज्यादा टैरिफ वसूलता है, इसलिए ये टैरिफ लगाया गया है।

15 फीसदी से ज्यादा टैरिफ वाले देश

  1. ब्राजील 50%
  2. म्यांमार 40%
  3. लाओस 40%
  4. कंबोडिया 36%
  5. थाईलैंड 36%
  6. बांग्लादेश 35%
  7. सर्बिया 35%
  8. कनाडा 35%
  9. मेक्सिको 30%
  10. दक्षिण अफ्रीका 30%
  11. बोस्निया और हर्जेगोविना 30 %
  12. श्रीलंका 30%
  13. अल्जीरिया 30%
  14. इराक 30%
  15. लीबिया  30%
  16. चीन 30%
  17. भारत 25%
  18. ब्रूनेई 25%
  19. मलेशिया 25%
  20. साउथ कोरिया 25%
  21. वियतनाम 20%
  22. इंडोनेशिया 19%
  23. फिलिपींस 19%

मेक्सिको और कनाडा को उन वस्तुओं पर ज्यादा टैरिफ देना होगा जो अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते के तहत छूट में शामिल नहीं हैं। ऐसे वस्तुओं पर 25 फीसदी टैरिफ देना होगा।

भारत पर उम्मीद से ज्यादा टैरिफ

भारत के साथ बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया था कि भारत पर टैरिफ 20 फीसदी से कम रह सकता है लेकिन 25 फीसदी टैरिफ का ऐलान काफी चौकाने वाला है। इससे भारत के निर्यात पर असर पड़ेगा। भारत को वियतनाम से कई प्रमुख सेक्टर्स में चुनौती मिलेगी जिनका सामान 20 फीसदी टैरिफ की वजह से अमेरिका में सस्ता होगा। इनमें कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, सी फूड शामिल हैं। इसी तरह इंडोनिशिया और फिलीपींस की स्थिति भी भारत की तुलना में मजबूत रहेगी जिनका कपड़ा, तेल , ज्वैलरी, पाम ऑयल का निर्यात अमेरिका से होता है।

भारत- अमेरिका वार्ता में क्यों नहीं बनी बात?

भारत के साथ व्यापार वार्ता के दौरान कृषि और डेयरी प्रोडक्ट पर अमेरिका की बात नहीं बन पाई है। हालाँकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अगस्त के पहले सप्ताह में नई दिल्ली आने वाले हैं जहाँ अगली बातचीत होगी। अमेरिका चाहता है कि मांस खाने वाले पशुओं के दूध और उसके प्रोडक्ट, जेनेटिकली मोडिफाइड फसलों के लिए भी भारत अपना बाजार पूरी तरह खोल दे, लेकिन भारत उसके लिए तैयार नहीं है।

भारत बातचीत से सुलझाएगा मसला

आज तक के मुताबिक भारत अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, बल्कि इस मामले में नेगोशिएशन टेबल पर बातचीत करेगा। गुरुवार को लोकसभा में केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत का दौर जारी है। टैरिफ को लेकर 10 से 15 फीसदी तक की बात हुई थी। देशहित में जो होगा, सरकार कदम उठाएगी।

ब्राजील ने दी अमेरिका को चेतावनी

सबसे ज्यादा टैरिफ ब्राजील पर लगाया गया है जिसको लेकर ब्राजील के वित्त मंत्री फर्नाडो हद्दाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि टैरिफ को लेकर अमेरिका से अगर उनकी वार्ता विफल हो जाती है तो वो अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में अपील दायर करेंगे।

तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था, वैश्विक विकास में 16% हिस्सेदारी… भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ कहने वाले ट्रंप को पीयूष गोयल ने दिखाया आईना, 25% टैरिफ पर बोले- राष्ट्रहित से समझौता नहीं

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 25 परसेंट टैरिफ लगाने के बाद और देश की अर्थव्यवस्था को डेड इकॉनॉमी बोलने के बाद विपक्ष इस मुद्दे को खूब भुनाने के प्रयास में है। ऐसे में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने विपक्ष के शोर के बीच देश को इस बात की जानकारी दी कि अमेरिका की ओर से भारत पर जो 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, उसपर सरकार गंभीरता से समीक्षा कर रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत-अमेरिका के बीच अब तक चार दौर की बात हो चुकी है। सरकार हर वो जरूरी कदम उठाएगी जिससे भारत के राष्ट्र हित सुरक्षित रहे। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि हम अपने किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों और निर्यातकों को और उद्योग जगत के कल्याण की रक्षा और संवर्धन को सर्वोच्च महत्व देते हैं और हम अपने राष्ट्र हितों को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएँगे।

पीयूष गोयल ने आगे देश की आत्मनिर्भरता पर बात करते हुए बताया, “हमारे निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। आज भारत टॉप 5 अर्थव्यवस्थाओं में से है। भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। भारत ने UAE, UK ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ पारस्परिक लाभकारी सौदे किए हैं। हम अन्य देशों के साथ भी ऐसे व्यापार समझौते करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि भारत इस समय वैश्विक विकास में 16% हिस्सेदारी दे रहा है।

उन्होंने सदन को यह भी बताया कि एक दशक से भी कम समय में 5 कमजोर अर्थव्यवस्थाओं से निकलकर भारत प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। उनका उम्मीद जताई कि भारत कुछ ही वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।