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मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य अतिथि बने PM मोदी, बोले- हमारे संबंध इतिहास से पुराने-समुद्र से गहरे: मुइज्जू सरकार के लिए ₹5000 करोड़ की व्यवस्था, डाक टिकट भी किया जारी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को मालदीव पहुँचे। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के आमंत्रण पर पीएम मोदी मालदीव गए हैं। वे मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।

पीएम मोदी की मालदीव की ये तीसरी यात्रा है। इससे पहले जून 2019 में उन्होंने मालदीव का दौरा किया था। मुइज्जू के सत्ता संभालने के बाद किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का ये पहला मालदीव दौरा है।

मोहम्मद मुइज्जूसरकार के कार्यकाल में पीएम मोदी की यह यात्रा इसलिए भी अहम है, क्योंकि दोनों देशों के संबंधों में तनाव के बाद पहली बार पीएम मोदी मालदीव पहुँचे हैं। इस दौरान भारत-मालदीव राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ पर संयुक्त स्मारक डाक टिकट जारी किया गया है।

इस अवसर पर पीएम मोदी ने मुइज्जू के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा, “मैं भारत की जनता की ओर से स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति और मालदीव की जनता को हार्दिक बधाई देता हूँ। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुझे मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए मैं राष्ट्रपति मुइज्जू का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। “

पीएम मोदी ने आगे कहा, “इस वर्ष भारत और मालदीव अपने राजनयिक संबंधों के 60 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। हमारे संबंधों की जड़ें इतिहास से भी पुरानी और समुद्र जितनी गहरी हैं। आज जारी किए गए स्मारक डाक टिकटों में दोनों देशों की पारंपरिक नौकाओं को प्रदर्शित किया गया है। यह दर्शाता है कि हम सिर्फ़ पड़ोसी ही नहीं, बल्कि सह-यात्री भी हैं।”
भारत मालदीव का सबसे करीबी पड़ोसी है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारे लिए दोस्ती हमेशा पहले आती है। भारत की पड़ोसी पहले नीति और महासागर विजन में मालदीव का अहम स्थान है। भारत को मालदीव का सबसे भरोसेमंद दोस्त होने पर गर्व है। चाहे संकट हो या महामारी, भारत हमेशा सबसे पहले उनके साथ खड़ा रहा है। इसके साथ ही चाहे आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता हो या कोविड के बाद अर्थव्यवस्था को संभालना हो, भारत ने हमेशा साथ मिलकर काम किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अक्तूबर 2024 में राष्ट्रपति मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान हमने व्यापक आर्थिक और समुद्री साझेदारी पर चर्चा की थी। अब यह एक वास्तविकता बन रहा है। भारत के सहयोग से निर्मित 4000 सामाजिक आवास इकाइयाँ मालदीव के कई परिवारों के लिए एक नई शुरुआत बनेंगी।

नौका प्रणाली से आसान होगा सफर

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा, “ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट, अड्डू रोड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और हनीमाधू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का पुनर्विकास अदि का पूरा क्षेत्र एक महत्वपूर्ण पारगमन और आर्थिक केंद्र के रूप में उभरेगा। जल्द ही नौका प्रणाली की शुरुआत के साथ विभिन्न द्वीपों के बीच आवागमन आसान हो जाएगा।”

पीएम मोदी ने ये भी जोड़ा कि साझा निवेश को गति देने के लिए हम जल्द ही द्विपक्षीय निवेश संधि को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत भी शुरू हो गई है।

उन्होंने कहा, “अब हमारा लक्ष्य कागज़ी कार्रवाई से समृद्धि की ओर है। स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली से हम रुपये और रूफिया के बीच सीधा व्यापार कर पाएँगे। मालदीव में UPI तेजी से गति पकड़ रहा है, उससे पर्यटन और खुदरा व्यापार मजबूत होगा।”

समुद्री सुरक्षा होगी मजबूत

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग, आपसी विश्वास का प्रतीक है। आज रक्षा मंत्रालय के भवन का उद्घाटन एक विश्वसनीय और ठोस इमारत की पहचान बन गया है। यह हमारी मजबूत साझेदारी का प्रतीक है।

पीएम ने कहा, “हमारी साझेदारी मौसम विज्ञान के क्षेत्र में भी रहेगी। मौसम कैसा भी हो, हमारी दोस्ती हमेशा उज्ज्वल और स्पष्ट रहेगी। मालदीव की रक्षा क्षमताओं के विकास में भारत निरंतर सहयोग करेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि हमारा साझा लक्ष्य है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन में हम मिलकर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेंगे। जलवायु परिवर्तन हम दोनों के लिए एक चुनौती है। हमने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इस क्षेत्र में भारत मालदीव के साथ अपने अनुभव साझा करेगा।


मुइज्जू बोले- FTA से मजबूत होगी साझेदारी

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भी प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि आज दोपहर में प्रधानमंत्री मोदी और मैंने व्यापक चर्चा की। दोनों देशों के बीच कई प्रमुख क्षेत्रों में चार समझौता ज्ञापनों और तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें 565 मिलियन डॉलर (5000 करोड़ रुपए) का एक ऋण समझौता भी शामिल है। इसका उपयोग प्रमुख क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।”

मुइज्जू ने आगे कहा, “मुझे भारत और मालदीव के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू होने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। यह ऐतिहासिक पहल हमारी आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

पीएम ने मालदीव को सौंपा भीष्म

मालदीव पहुँचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का माले के रिपब्लिक स्क्वायर में औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद भारत और मालदीव ने कई समझौतों पर बात की। भारत सरकार ने मालदीव के रक्षा मंत्रालय को 72 भारी वाहन उपलब्ध कराने पर डील की है।

इसके अलावा मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की ऋण सीमा (एलओसी) का विस्तार, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित एलओसी पर मालदीव के वार्षिक ऋण चुकौती दायित्वों में कमी, भारत-मालदीव मुक्त व्यापार समझौता (IMFTA) वार्ता की शुरुआत, भारत की क्रेता ऋण सुविधाओं के तहत हुलहुमाले में 3,300 सामाजिक आवास इकाइयों को सौंपने जैसे कई समझौतों पर भी दोनों देशों की सहमति बनी।

दौरे में पीएम मोदी और राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव के माले में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधे लगाए। साथ ही पीएम मोदी ने मालदीव को भीष्म (सहयोग हित और मैत्री के लिए भारत स्वास्थ्य पहल) क्यूब्स सौंपे।

सेक्स के लिए 18 साल से कम नहीं हो सकती उम्र, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने POCSO और BNS कानून का दिया हवाला: सरकार बोली- सुरक्षा और यौन शोषण से बचाने के लिए जरूरी है ये सीमा

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें यह माँग की गई कि यौन संबंधों के लिए सहमति की न्यूनतम उम्र को 18 साल से घटाकर 16 साल किया जाए। इस याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यौन संबंधों की सहमति की वैधानिक उम्र 18 साल से कम नहीं की जा सकती।

केंद्र ने अपने लिखित जवाब में कहा कि यह उम्र सीमा बच्चों की सुरक्षा के लिए और यौन शोषण से उन्हें बचाने के लिए जरूरी है।

सरकार का रुख

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत में ‘यौन सहमति’ की उम्र को 18 साल तय करना एक सावधानीपूर्वक लिया गया निर्णय है।

यह निर्णय भारत के संविधान में निहित बाल संरक्षण की भावना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार ने कहा कि यह एक ‘गैर-परक्राम्य’ (Non-negotiable) सुरक्षा ढाँचा है, जिसे कमजोर करना बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

POCSO और BNS कानूनों पर केंद्र की दलील

सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 और हाल ही में लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) इस सिद्धांत पर आधारित है कि 18 वर्ष से कम उम्र का बच्चा वैध और सूचित सहमति देने में सक्षम नहीं होता।

यदि इस सीमा में कोई छूट दी जाती है तो यह कानून का गलत इस्तेमाल करने वालों के लिए बचाव का रास्ता बन सकता है, खासतौर पर उनके लिए जो पीड़ित की भावनाओं का फायदा उठाते हैं।

सहमति की उम्र को लेकर समय-समय पर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों को कानूनी रूप से अधिक सुरक्षित बनाना है। पहले 1860 में सहमति की उम्र केवल 10 साल रखी गई थी। इसके बाद 1891 में इसे बढ़ाकर 12 साल कर दिया गया।

आगे चलकर 1925 और 1929 में इसे 14 साल किया गया। 1940 में एक और संशोधन करते हुए सहमति की उम्र को 16 साल कर दिया गया। फिर 1978 में इसे बढ़ाकर 18 साल कर दिया गया, जो अभी तक लागू है। इन सभी बदलावों का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें यौन शोषण से सुरक्षित रखना रहा है।

हालाँकि केंद्र सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि कोर्ट विशेष मामलों में न्यायिक विवेक का प्रयोग कर सकता है। खासकर उन मामलों में जहाँ दोनों पक्ष किशोर हों और उनकी उम्र 18 वर्ष के आसपास हो।

ऐसी स्थिति में ‘निकट-आयु अपवाद’ (close-in-age exception) का विचार किया जा सकता है, जिससे यह तय हो सके कि किशोर प्रेम संबंधों को अनावश्यक रूप से अपराध न बनाया जाए।

परिचितों द्वारा यौन अपराधों का खतरा

NCRB और अन्य बाल संरक्षण संगठनों के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि 50% से अधिक यौन अपराध, पीड़ित के परिचित लोगों, परिवार के सदस्यों, शिक्षक, पड़ोसी या रिश्तेदार द्वारा किए जाते हैं।

यदि सहमति की उम्र को कम किया गया तो ऐसे अपराधियों को यह कहने का अवसर मिल सकता है कि संबंध सहमति से बनाए गए थे, जिससे POCSO कानून के प्रभाव पर असर पड़ेगा।

सहमति की उम्र घटाना और उसका दुरुपयोग

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि जब यौन अपराध किसी परिवार के सदस्य द्वारा किया जाता है, तो पीड़ित बच्चा विरोध करने या शिकायत करने की स्थिति में नहीं होता। ऐसी स्थिति में सहमति की दलील देना बच्चे को ही दोषी ठहराने जैसा है, जो उसके अधिकारों और गरिमा के खिलाफ है।

केंद्र सरकार ने अपने विस्तृत हलफनामे में यह इस बात को बताया है कि सहमति की उम्र 18 साल से कम नहीं की जा सकती क्योंकि यह बच्चों के लिए एक मजबूत और अनिवार्य सुरक्षा तंत्र है।

हालाँकि, किशोरों के बीच रोमांटिक संबंधों के मामलों में न्यायिक विवेक का स्थान बना रहेगा। सरकार का मानना है कि सहमति की उम्र को घटाने से बाल यौन शोषण के खिलाफ वर्षों से बने कानूनी सिस्टम और संरक्षण की भावना को गंभीर नुकसान होगा।

झारखंड बनाने वाले का नाम मिटाने पर तुली हेमंत सरकार, ‘अटल क्लीनिक’ का नाम बदलकर रखा ‘मदर टेरेसा एडवांस क्लीनिक’: ‘भारत रत्न’ का हो रहा अपमान

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने अटल मोहल्ला क्लिनिक का नाम बदल दिया है। राज्य सरकार ने इसका नाम मदर टेरेसा एडवांस क्लीनिक कर दिया है जिसके बाद राज्य में सियासी बवाल शुरू हो गया है।

बीजेपी ने इसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अपमान बताया है। पार्टी का कहना है कि हेमंत सोरेन सरकार ने झारखंड की आत्मा का अपमान किया है। जनता ऐसे फैसलों के लिए कभी माफ नहीं करेगी। ये तुच्छ राजनीति का परिचायक है।

बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा है कि झारखंड को जिस व्यक्ति ने राज्य के रूप में नई पहचान दी। वे हैं अटल बिहारी वाजपेयी। आज उनका नाम मिटाया जा रहा है।

उनके नाम पर बने क्लिनिक का नाम मदर टेरेसा के नाम पर रखा जा रहा है। ये सरासर गलत है। झारखंड सरकार से उन्होंने सवाल किया है कि आखिर राष्ट्रीय शख्सियत से सरकार को इतनी नफरत क्यों है?

बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाह ने मदर टेरेसा की संस्था मिशनरी ऑफ चैरिटी को लेकर कहा है कि ब्रिटिश लेखक क्रिस्टोफर हिचेंस और अरूप चटर्जी ने अपने किताब में मदर टेरेसा की संस्था पर धर्मांतरण करने जैसे गंभीर आरोप लगाए।

2021 में संस्था की एफसीआरए लाइसेंस को रिन्यू नहीं किया गया। इसकी वजह धर्मांतरण में संलिप्त होना और संविधान विरोधी होना बताया गया।

झारखंड बीजेपी के नेता अजय साह ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार राज्य में विकास की हर सकारात्मक पहल को विवादित बना रही है।

आयुष्मान योजना और अटल मोहल्ला क्लिनिक जनता की फ्री स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के मकसद से शुरू किया गया था। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कॉन्ग्रेस की सरकार इसका नाम बदलकर राजनीति कर रही है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बिहार से अलग झारखंड राज्य का निर्माण किया। उनका नाम हटाने का विरोध जनता करेगी। अगर राज्य सरकार कोई नई स्वास्थ्य सेवा शुरू करना चाहती है तो वह किसी के भी नाम पर रख सकती है, लेकिन पुरानी योजना का नाम बदलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और जनविरोधी है।

ये पहली बार नहीं है जब झारखंड की कॉन्ग्रेस समर्थित सोरेन सरकार ने महापुरुषों को अपमानित किया है। इनलोगों ने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर दूसरे स्वतंत्रता सेनानी वीर बुधु भगत के नाम पर रख दी। ये दोनों महापुरुषों का ही अपमान था।

रांची में शुक्रवार (24 जुलाई 2025) को हेमंत कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें नाम बदलने के प्रस्ताव पर मुहर लगी।

कैबिनेट ने कई प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। नाम बदलने के मुद्दे पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का कहना है कि मेडिकल सुविधाओं को आधुनिक बनाने के बाद नाम बदला जा रहा है।

दुबई के 50+ ट्रिप, 30+ देशों का टूर, 10 विदेशी बैंक खाते: तुर्की की नागरिकता वाले अहसान अली के साथ मिल कर ठगी करता था गाजियाबाद का ‘नटवरलाल’, साथी भी करोड़ों का घोटालेबाज

गाजियाबाद फर्जी दूतावास मामले के आरोपित हर्षवर्धन जैन को लेकर अब एक नया खुलासा हुआ है। जाँच में सामने आया है कि हर्षवर्धन पिछले करीब 10 सालों में 53 बार दुबई जा चुका है। पूछताछ में पता चला है कि वह 30 से अधिक देशों की यात्रा कर चुका है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को हर्षवर्धन के पास से कई डिप्लोमैटिक पासपोर्ट बरामद हुए हैं। पुलिस ने बताया कि वह खुद को अलग-अलग देशों का राजदूत बताता था और अधिकारियों से अपना भौकाल बनाता था।

रिपोर्ट के मुताबिक उसने यूके, यूएई, मॉरीशस, फ्रांस, कैमरून, स्विट्ज़रलैंड, पोलैंड, श्रीलंका, बेल्जियम देशों की यात्रा की है। उसके पिता राजस्थान के प्रभावशाली कारोबारियों में से एक थे। उनकी मौत के बाद हर्षवर्धन से पिता का कारोबार नहीं संभल सका और नुकसान की भरपाई के लिए उसने फ्रॉड करना शुरू कर दिया।

अपनी आलीशान कोठी में फर्जी दूतावास खोलने के बाद वह खुद को वेस्ट आर्टिका और सेबोर्गा, पोल्बिया, लोडोनिया जैसे अज्ञात देशों का राजदूत कहता था। क्योंकि वह राजयनिक नंबर प्लेट लगी लग्जरी गाड़ियों से चलता था, इसलिए उसकी धोखाधड़ी का कोई सुराग भी नहीं मिल पाता था।

नई जानकारी के अनुसार, इस मामले में यूपी STF की तरफ से अब हर्षवर्धन के एक साथी एहसान अली का नाम शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को सामने आया है। उसने हर्षवर्धन के साथ मिलकर कई शेल कंपनियाँ बनाई और फिर लोन लेकर फरार हो गया था।

अब STF को पता चला है कि एहसान स्विट्जरलैंड के लेक ल्यूसर्न पर एक आलीशान फ्लैट का मालिक है। वह एक स्पैनिश फुटबॉल क्लब का भी हिस्सा है। हर्षवर्धन के साथ ही वह भी महँगी कारों का शौक रखता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एहसान अली सैयद पर एडवांस मनी के रूप में धोखाधड़ी के जरिए 2.5 करोड़ पाउंड हड़पने के बाद उसे फिजूल खर्च करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ कई देशो में धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं और वहाँ की एजेंसियाँ भी उसकी तलाश कर रही हैं।

हैदराबाद का एहसान टर्किश की नागरिकता लेकर लंदन में बैठ कर हर्षवर्धन के साथ मिला हुआ था। दोनों कई सालों से अलग-अलग देशों में शेल कंपनियों का नाम लेकर करोड़ों की ठगी कर रहे थे। STF को हर्षवर्धन जैन के विदेशों में 10 बैंक खातों की भी जानकारी मिली है। इसके तहत उनमें हुए ट्रांजेक्शन का ब्योरा बैंकों से माँगा जाएगा।

STF एसपी राजकुमार मिश्रा का कहना है कि दोनों की संलिप्तता और पूरे मामले की जाँच की जा रही है। जाँच के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

छांगुर पीर हो या फरहान, मोहम्मद कैफ हो या रहमान… सबका टारगेट सिर्फ हिंदू लड़कियों को कलमा पढ़वाना: 2 महीने में 6 धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़, कट्टरपंथियों को ₹100-100 करोड़ की होती थी फंडिंग

हिंदू लड़कियों को मुस्लिम बनने के लिए धर्म परिवर्तन कराने को लेकर धर्मांतरण के कई मामले हाल ही में सामने आए। महीने भर में भोपाल, बलरामपुर, आगरा, प्रयागराज, अलीगढ़ और कुशीनगर में बड़ी संख्या में लड़कियों को बरगलाकर या उन्हें प्रेम जाल में फाँस कर धर्मांतरण करने वाले गिरोहों का पर्दाफाश हुआ और साथ ही कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

हिंदू छात्राओं और परिवारों को निशाना बनाकर उन्हें मुस्लिम धर्म में जबरन परिवर्तित करने की न केवल कोशिश की गई बल्कि इन गिरोहों के सरगना भी देश- विदेश की फंडिंग से मालामाल हुए। इसके साथ ही इन गिरोहों के आतंकी संगठनों से भी तार जुड़े मिले।

भोपाल में कॉलेज की लड़कियाँ बनी शिकार

सबसे पहले धर्मांतरण के गिरोह का बड़ा मामला मध्यप्रदेश के भोपाल से आया। यहाँ कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों को फरहान नाम के युवक ने पहले अपनी दोस्ती के जाल में फँसाया। इसके बाद उनसे प्यार का नाटक कर रेप किया। इसकी वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू किया। पीड़िताओं को रेप का वीडियो दिखा कर ये धमकी भी दे कि उनके साथ भी वैसे ही होगा। एक के बाद एक, कई लड़कियों के साथ ये पूरी प्रक्रिया दोहराई गई।

हिम्मत करके 11 अप्रैल 2025 को भोपाल के बागसेवनिया थाना में कुछ छात्राओं ने शिकायत की कि उन्हें मुस्लिम लड़कों ने ब्लैकमेल किया, उनका वीडियो बनाया और धमकी देकर रेप किया गया। जाँच शुरू हुई तो और लड़कियाँ भी सामने आईं। साथ ही फरहान के साथ साथ साहिल खान, अली खान, साद, नबील और अबरार के साथ 11 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। मामले में SIT टीम गठित हुई और इस ‘मुस्लिम गैंग’ पर शिकंजा कसा गया।

छांगुर पीर ने बिछाया धर्मांतरण का जाल

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में धर्मांतरण का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया। इसका सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर गाँव गाँव जाकर नग और छोटी मोटी चीजें बेचता था। इसके बाद वह मुंबई पहुँचा और वहाँ पर मिले हिंदू परिवार नीतू और नवीन वोहरा के परिवार का सबसे पहले बरगलाकर धर्म परिवर्तन करवाया। इस परिवार की 158 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी को अपने हिसाब से खरीद फरोख्त की और उन्हें मुंबई से बलरामपुर के उतौरला में लाकर बसा दिया।

इसके बाद छांगुर ने धर्मांतरण को ही अपना धंधा बना लिया। इसके तहत उसने 1500 से भी अधिक हिंदू युवतियों का धर्मांतरण करवाया। 5 जुलाई 2025 को यूपी एटीएस ने छांगुर पीर और नीतू उर्फ नसरीन को लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया था।

छांगुर धर्म परिवर्तन के नाम पर आलीशान जीवन और पैसे का लालच देता था। इसके लिए उसे विदेशों से भी फंडिंग मिलती थी। उसके नाम पर 106 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी के साथ 40 से अधिक बैंक अकाउंट में 100+ करोड़ से अधिक की फंडिग मिली है।

छांगुर के धर्मांतरण गिरोह में धर्म परिवर्तन के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से एक फीस तय थी। ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए ₹15-16 लाख, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए ₹10-12 लाख और अन्य जातियों के लिए ₹8-10 लाख की रकम फिक्सड थी। इस मामले में ATS के साथ ED की जाँच भी जारी है।

आगरा में ‘अस्मिता’ ने खोला धर्म परिवर्तन का राज

यूपी पुलिस ने हाल ही में ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। इसमें एक बड़ा धर्मांतरण गिरोह पकड़ा गया। इस ऑपरेशन में 19 जुलाई 2025 को 6 राज्यों से 10 लोग गिरफ्तार हुए। पुलिस ने यूपी, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान में छापे मारे। इसी के जरिए आगरा में एक बड़े धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश हुआ।

आगरा का मामला सबसे पहले दो सगी बहनों के गायब होने की शिकायत से खुला। आगरा की दो सगी बहनों को कोलकाता तक पहुँचाया गया था। बताया गया कि दोनों बहनें घर से ₹25 हजार और कुछ गहने लेकर भागी थीं। दोनों बस से दिल्ली, मुजफ्फरनगर, समस्तीपुर होते हुए कोलकाता पहुँचीं। कोलकाता में ओसामा नाम के युवक ने बहनों को होटल दिलाया। फिर कोलकाता की मुस्लिम बस्ती ‘तपसिया’ में कमरा दिलाने में भी मदद की।

आगरा के मामले में सरगना अब्दुल रहमान पहले हिंदू था। उसका नाम महेंद्र पाल हुआ करता था। 1990 में वह ईसाई बन गया। फिर इस्लाम में धर्म परिवर्तन किया।बताया गया कि अब्दुल के पास से हरियाणा के रोहतक की हिंदू लड़की को भी बचाया गया है।

 आगरा का गिरोह केवल ‘बालिग’ युवतियों को निशाना बनाता था। इससे उन्हें अपने साथ ले जाने में परेशानी नहीं होती थी। इस धर्मांतरण गैंग में शामिल 10 लोगों में से 6 पहले हिंदू थे। आरोपितों में से अबू रहमान इस गैंग का सरगना है।

इन लोगों ने धर्म परिवर्तन कर अपने नाम भी बदल लिए। धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों का कोलकाता में वोटर आईडी और आधार कार्ड भी बनाए जाते थे। इन्हें वोट डालने का भी अधिकार मिल जाता था।

प्रयागराज में हुआ गिरोह का भंडाफोड़

प्रयागराज 28 जून 2025 को दलित लड़की की मां ने फूलपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया था कि उसकी बेटी को दरकशा बानो नाम की एक महिला ने ब्रेनवॉश किया है। मामले में पुलिस ने आगे जाँच की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। 15 वर्षीय बच्ची को दरकशा बानो इस्लाम अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया और हिन्दू धर्म के प्रति जहर भरती रही। दरकशा बानो ने मोहम्मद कैफ के साथ मिलकर दलित लड़की को पैसों का लालच दिया और झाँसे में लेकर दिल्ली से केरल चली गई।

केरल में लड़की को पैसों का लालच, फिर जबरन धर्मांतरण और ‘जिहाद’ में शामिल होने का दबाव डाला गया। लड़की ने केरल के एक रेलवे स्टेशन से भागकर स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने उसे सुरक्षित बरामद कर प्रयागराज वापस भेजा और वन स्टॉप सेंटर में रखा। मामले में पहले दरकशा बानो और मोहम्मद कैफ और इसके बाद मुख्य आरोपी मोहम्मद ताज को 14 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने तीन विशेष टीमें बनाईं और गिरोह के नेटवर्क की जाँच शुरू की।

गिरोह विशेष रूप से दलित नाबालिग लड़कियों को निशाना बना रहा था। जांच एजेंसियों को शक है कि यह एक मल्टी-स्टेट नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य धर्मांतरण के बाद आतंकी गतिविधियों में शामिल करना था।

अलीगढ़ में धर्म परिवर्तन कर गायब हुई हिंदू महिलाएँ

आगरा की तरह ही अलीगढ़ में अवैध धर्मांतरण के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इसके झाँसे में आईं करीब 97 महिलाओं का पता नहीं चल पा रहा है। ये महिलाएँ लापता बताई जा रही हैं। इसका सरगना उमर गौतम ही था जिसने पूरा नेटवर्क फैला रखा था।

इस मामले में भी उमर गौतम की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि 2018 में 33 महिलाओं का धर्मांतरण कराया गया था जिसमें 3 अलीगढ़ की थीं। लेकिन ये नेटवर्क धीरे-धीरे महिलाओं और युवतियों को अपने झाँसे में लेने लगा। यही वजह है कि जनवरी से अब तक 97 महिलाएँ लापता हैं जिनमें से 17 टीन एजर्स हैं।

कुशीनगर में मिला धर्मांतरण गैंग

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में सक्रिय धर्मांतरण गैंग का खुलासा हुआ है। रामकोला पुलिस ने गैंग की मास्टरमाइंड जैरुन्निशा और उसके साथी अरमान अली, अरबाद और इकरामुल को गिरफ्तार किया है। गैंग ने 3 हिंदू नाबालिग लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाया और फिर उन्हें मुंबई में जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया।

टेकुआटार टोला खैरटवा के प्रेम मधेशिया ने अपनी 15 साल की नाबालिग को शादी का झाँसा देकर भगाने के आरोप में गाँव के ही अरमान के खिलाफ शिकायत की थी। इससे पहले पीड़ित रामचरित प्रसाद ने भी अपनी दो बेटी और उसकी सहेली के अपहरण मामले में इसी प्रकार की शिकायत दर्ज कराई थी।

कोडवर्ड में होती थी बात

आगरा मामले में गिरफ्तार धर्मांतरण गिरोह ने धर्मांतरण का शिकार बन चुके लोगों के लिए कोडवर्ड बनाए था। जिन लोगों का धर्मांतरण यह गैंग कर लेता था, उन्हें ‘रिवर्ट’ नाम दे दिया जाता था। धर्मांतरण में आने वाले लोगों के लिए इसे ‘सेफ जोन’ कहा जाता था।

इसी तरह छांगुर पीर भी अपने गैरकानूनी कामों को छुपाने के लिए कुछ खास और गुप्त शब्दों (कोडवर्ड्स) का इस्तेमाल करता था। जब वो लड़कियों को अपने जाल में फँसाने की बात करता था तो उन्हें ‘प्रोजेक्ट’ कहता था।

किसी के धर्मांतरण की प्रक्रिया को वो ‘मिट्टी पलटना’ कहता था। छांगुर पीर से कोई मिलने आता था तो इसे ‘दीदार करना’ कहा जाता था। किसी का ब्रेनवॉश करने या उसे अपने विचारों में ढालने को ‘काजल करना’ कहा जाता था।

विदेशों से मिलती थी फंडिंग

आगरा, बलरामपुर, प्रयागराज और अलीगढ़ में मिले धर्मांतरण गिरोह के तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन्हें अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, यूएई से फंडिंग मिलती थी। पुलिस का मानना है कि यह तरीका ISIS जैसे आतंकी संगठन इस्तेमाल करते हैं।

इस तरह के धर्मांतरण गिरोह केवल कुछ शहरों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत में बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, हर जगह इनकी पकड़ तेज हो रही है। इनका सिर्फ एक मकसद है- हिंदुओं को अत्संख्यक बनाना और उनका प्रमाण भी भारत से मिटा देना।

अब जरूरत आन पड़ी है कि इन पर अंकुश लगाने के लिए सिर्फ जाँच एजेंसियों पर ही निर्भर न रहा जाए बल्कि अपने आसपास भी जागरूकता बढ़ाई जाए, सतर्कता बरती जाए और अपनी आगामी पीढ़ी को अपने धर्म, संस्कृति और पौराणिकता के बारे में जानकारी दी जाए। तभी इन जैसे गिरोहों को अपने ज्ञान और बुद्दि कौशल से समाज से खत्म किया जा सकता है।

आज की आवश्कता ये है कि आपस में जात-पात, ऊँच-नीच के बार में न लड़कर, समाज में बढ़ रही गंदगी के लिए एकजुट हुआ जाए और उसके खिलाफ लड़ा जाए।

‘आपातकाल’ मिलाकर भी इंदिरा गाँधी रह गईं पीछे, ‘लगातार सबसे ज्यादा दिन’ प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले दूसरे नेता बने PM मोदी, 4078 दिन का कार्यकाल पूरा, 6 चुनावों में मिली जीत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को पीछे छोड़ दिया है। शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को नरेन्द्र मोदी ने लगातार 4078 दिन कार्यभार संभाला। उनका कार्यकाल अभी जारी है। जबकि इंदिरा गाँधी ने लगातार 4077 दिन प्रधानमंत्री रहीं। हालाँकि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू अभी सबसे आगे हैं जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से लगातार 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री रहे यानी कुल 6130 दिन।

इंदिरा गाँधी से आगे निकले नरेन्द्र मोदी

इंदिरा गाँधी 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक लगातार 4077 दिनों तक प्रधानमंत्री रहीं। इस दौरान 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच 21 महीने का आपातकाल का दौर भी आया। 16 मार्च 1977 को लोकसभा चुनाव में इंदिरा गाँधी और कॉन्ग्रेस की करारी हार के बाद उन्हें सत्ता से बेदखल होना पड़ा।

लगातार 6 बार नरेन्द्र मोदी को मिला जनता का आशीर्वाद

प्रधानमंत्री मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वह अभी भी प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए गठबंधन को जीत दिलाई। इस मामले में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की बराबरी की है, जिनके नेतृत्व में कॉन्ग्रेस लगातार सत्तासीन रही।

राज्य और केंद्र मिलाकर बात करें तो नरेन्द्र मोदी के समान कोई दूसरा नेता भारत के इतिहास में नहीं है, जो 6 बार लगातार मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बने। एक निर्वाचित सरकार के मुखिया के तौर पर पीएम मोदी का कार्यकाल सबसे लंबे कार्यकालों में एक है।

गुजरात में 7 अक्टूबर 2001 से मुख्यमंत्री पद पर विराजमान नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2002, 2007 और 2012 का विधानसभा चुनाव बीजेपी ने लड़ा और जीत हासिल की।

मुख्यमंत्री रहते हुए उनके नेतृत्व में बीजेपी ने 2014 का चुनाव लड़ा और जबरदस्त जीत हासिल की। इसके बाद 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव भी एनडीए ने उनके नेतृत्व में लड़ा और सत्ता पर काबिज हुई।

आजाद भारत में पैदा होने वाले पहले पीएम

देश की आजादी के बाद पैदा होने वाले नरेन्द्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री होने के साथ साथ सबसे लंबे समय तक पीएम पद पर रहने वाले गैर कॉन्ग्रेसी नेता भी हैं, जो लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीत कर प्रधानमंत्री बने हैं।

उन्होंने दो लगातार बार 5 साल का कार्यकाल भी पूरा किया और तीसरा कार्यकाल चल रहा है।

हिंदू लड़कियों को ड्रग देना, सेक्स का धंधा करवाना और प्राइवेट पार्ट पर बेरहमी से मारना… ये था यासीन-शाहवर का काम: भोपाल में चाचा-भतीजा गिरफ्तार, फोन से मिले यौन शोषण के 22 वीडियो

भोपाल में डीजे काम करने वाले यासीन और उसके चाचा शाहवर हिंदू लड़कियों को ड्रग्स के नशे में डुबोते, फिर उनके साथ रेप करते और उसका वीडियो बना लेते। लड़कियों को ड्रग्स की लत लगने के बाद उन्हें अपनी ‘पूल पार्टियों’ में बुलाते और ग्राहकों के सामने परोस कर पैसे बनाते। वो अमीर घरों की हिंदू लड़कियों को अपना शिकार बनाते और उन्हें सेक्स स्लेव की तरह रखते। विरोध करने पर सेक्स वीडियो दिखाकर मुँह बंद कर देते। वो अपनी पार्टियों में ड्रग्स बेचकर खूब सारा पैसा बनाते।

भोपाल क्राइम ब्रांच ने जिन दो ड्रग तस्करों चाचा शाहवर और भतीजे यासीन को गिरफ्तार किया था, उनसे पूछताछ में गंभीर खुलासे हो रहे हैं। ये पूरा गैंग हिंदू लड़कियों और महिलाओं को शुरुआत में फ्री में ड्रग्स देता और फिर धीरे-धीरे अपनी सेक्स स्लेव बना लेता। फिर उसे जो भी काम कराना होता, वो कराता।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को जाँच के दौरान शाहवर और यासीन के मोबाइल से लड़कियों के साथ शारीरिक शोषण के 22 वीडियो मिले हैं। इनमें से कुछ वीडियो में दोनों लड़कों को बंद कर उनके साथ मारपीट करते भी दिखाई दे रहे हैं।

पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यासीन हबीबगंज के एक मॉल के क्लब में डीजे का काम करता है। पुलिस का कहना है कि वह क्लब में आने वाली महिलाओं और युवतियों को एमडी ड्रग देकर उनका शारीरिक शोषण करता था। वीडियो के जरिए पुलिस ने एक पीड़िता से भी संपर्क किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो में आरोपित अपने दोस्तों के सामने युवती से अश्लील हरकतें करता दिखाई दे रहा है। फिलहाल पुलिस उसकी काउंसलिंग कराना चाहती है और इसके बाद अगर वह तैयार होती है तो उसके बयान के आधार पर भी FIR दर्ज की जाएगी। इनमें से कुछ वीडियो में आरोपितों को युवतियों के प्राइवेट पार्ट्स पर बेरहमी से हमला करते भी देखा जा सकता है।

कुछ दिनों पहले ही भोपाल पुलिस ने सैफुद्दीन और शाहरुख नाम के दो ड्रग पेडलरों को पकड़ा था। दोनों जो शहर के क्लबों और पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई करते थे। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे पार्टी, क्लब और जिम के माध्यम से युवाओं को फिटनेस और पार्टी कल्चर के नाम पर ड्रग्स की लत लगाते थे।

दोनों ने पुलिस को बताया कि यहाँ संपन्न घरों की हिंदू लड़कियों को पहले फ्री में नशा करवा कर उनका शोषण किया जाता था। जब युवतियाँ नशे की गिरफ्त में आ जाती थीं, तब उन्हें ड्रग्स के बदले शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था। उनके वीडियो भी बनाए जाते थे और फिर उन्हें वायरल करने की धमकी देकर लगातार शोषण किया जाता था।

इन्हीं दोनों ड्रग पेडलरों ने पुलिस को शाहवर और यासीन के बारे में भी बताया था। इसके बाद पुलिस ने उन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने यासीन के पास से 1.05 ग्राम एमडी पाउडर (ड्रग्स), एक पिस्तौल और स्कॉर्पियो जब्त की है। वहीं, शाहवर के पास से 2.052 ग्राम ड्रग के साथ बीई 6 महिंद्रा गाड़ी जब्त की है।

मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने एक्स पर लिखा, “स्कूल कॉलेज में पढ़ने वाली हिंदू लड़कियों को टारगेट कर उनको पार्टियों के बहाने ड्रग्स की लत लगवाना, बलात्कार कर के वीडियो बनाना,वीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल कर सामूहिक यौन शोषण करना और फिर धर्मांतरण का दबाव बनाकर आजीवन के लिए सेक्स स्लेव बना कर रखना।”

उन्होंने लिखा, “हमारी जाँच की फाइंडिंग्स में हमने साफ साफ लिखा है कि पुलिस की जाँच अपर्याप्त है जाँच की दिशा अपराध के संरक्षकों की तरफ होना चाहिए अतः पुनः जाँच के लिए निर्देश दिए।”

दवाइयाँ, मशीनें, कार और शराब… ब्रिटेन से ट्रेड डील के बाद इंडिया में जानें क्या-क्या होगा सस्ता: भारत के किसानों को भी विदेश में मिलेगा नया बाजार,₹2.8 लाख करोड़ बढ़ेगा व्यापार

भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता हुआ है। इस समझौते से आने वाले र्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 2.8 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

गुरुवार (24 जुलाई 2025) को भारत और ब्रिटेन के बीच हुए इस ऐतिहासिक द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर के बाद भारत के लिए करीब करीब टैरिफ फ्री व्यापार के नए द्वार खुल गए। किसानों, व्यापारियों से लेकर युवाओं, छात्रों को भी इसने खुश कर दिया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंग्लैंड के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर की मौजूदगी में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश समकक्ष जोनाथन रेनॉल्ड्स ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से दोनों देशों में निवेश बढ़ेगा और रोजगार भी बढ़ेंगे। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

भारत- ब्रिटेन दोनों को फायदा

इस समझौते से यूके में बनने वाले सामान भारत में सस्ती हो जाएँगी वहीं भारत का सामान भी यूके में सस्ता हो जाएगा जिससे इसकी खपत बढ़ेगी। ब्रिटेन से आने वाली दवाईयाँ, मेडिकल उपकरण, ऑटोमोबाइल्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और फैशन- ब्यूटी प्रोडक्ट सस्ते हो जाएँगे। इन पर औसत ड्यूटी रेट घटकर 15 फीसदी से 3 फीसदी तक आ जाएगा।

भारत और यूके फ्री ट्रेड डील से भारत की 99 फीसदी एक्सपोर्ट प्रोडक्ट यूके में टैक्स फ्री होगा। वहीं भारत ब्रिटेन के आने वाले 90 फीसदी सामानों पर टैरिफ हटा देगा। अगले 10 वर्षों में इससे करीब 85 फीसदी उत्पाद टैरिफ फ्री हो जाएँगे।

वहीं ब्रिटेन के लिए भी ये समझौता काफी अहम है। अमेरिकी टैरिफ ने यूरोपीय यूनियन को परेशान कर रखा है। ब्रिटेन को भारत के रूप में बड़ा बाजार मिलने जा रहा है। ब्रिटेन के शराब, कार और मेडिकल उपकरण आदि से जुड़ी कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।

ब्रिटिश शराब होगी सस्ती

भारत-यूनाइटेड किंगडम मुक्त व्यापार समझौते से स्पिरिट पर टैरिफ कम हो जाएगा, जिससे प्रीमियम अंतर्राष्ट्रीय शराब ब्रांड का लुत्फ भारतीय कम कीमत देकर उठा पाएँगे। माना जा रहा है कि कीमतों में कटौती कम से कम ₹300 प्रति बोतल हो सकती है। दोनों सरकारों के बीच लंदन में हुए समझौते के मुताबिक ब्रिटेन की व्हिस्की पर टैरिफ 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत हो जाएगा। साथ ही अगले 10 वर्षों में ये 40 फीसदी रह जाएगा।

जगुआर, लैंड रोवर जैसे कार मिलेंगे सस्ते

समझौते की वजह से जगुआर, लैंड रोवर जैसी ब्रिटिश कारें भी भारतीयों के लिए किफायदी दरों पर उपलब्ध होंगी। क्योंकि इन कारों पर टैरिफ 100 फीसदी से घट कर 10 फीसदी हो जाएगा। वहीं इससे इन कंपनियों को भारत में अपना बाजार बनाना आसान हो जाएगा।

भारतीय डेयरी प्रोडक्ट, खाद्य तेल और सेब शामिल नहीं

समझौते का फायदा कृषि क्षेत्र को काफी होगा क्योंकि उन्हें टैरिफ कम होने से भारतीय कृषि उत्पाद ब्रिटेन में सस्ते हो जाएँगे। किसानों को उनके उत्पाद की अच्छी कीमत मिलेगी। भारतीय मुर्गे-मुर्गियाँ, मछलियाँ, अंडे जैसे फॉर्म प्रोडक्ट को नया बाजार मिलेगा।

भारत ने समझौते में डेयरी उत्पाद, खाद्य तेल और सेब को शामिल नहीं कर किसानों के हित में फैसला लिया। बाकि 95 फीसदी कृषि उत्पादों को इसमें शामिल किया है।

भारत की चाय-कॉफी और पारंपरिक मसालों जैसे हल्दी, कालीमिर्च, लॉग-इलायची की माँग तो पहले से ही ब्रिटेन में काफी है। इस समझौते से इन उत्पादों का व्यापार बढ़ जाएगा। भारतीय अचार, मधु, दालें, आम- नारंगी और दूसरे फल टैरिफ फ्री होने से ब्रिटिश बाजारों में आसानी से उपलब्ध होंगी। इससे न सिर्फ भारत का किसान संपन्न होगा बल्कि व्यापारी वर्ग भी लाभान्वित होगा। इससे लोगों को रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।

पीएम मोदी ने मुक्त व्यापार समझौते को लेकर कहा है कि इससे भारत के कृषि उत्पादों को एक बड़ा बाजार मिलेगा। भारतीय कपड़े , जूते, जेवरात और रत्न, इंजीनियरिंग के सामान, समुद्री फूड समेत कई उत्पादों को बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। पीएम ने कहा कि कई सालों की मेहनत के बाद एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनी।

सूरत-मुंबई जैसे व्यापारिक शहर और चमकेंगे

मुक्त व्यापार समझौते से भारत में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इससे ऐसी वस्तुएँ जिसका निर्यात बढ़ेगा, वहाँ मजदूरों की जरूरत बढ़ेगी। जैसे खिलौने, कपड़े, चमड़े के सामान, समुद्री फूड आदि।

इससे सूरत और मुंबई जैसे व्यापारिक शहरों को काफी फायदा होगा जहाँ से आभूषण और रत्नों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है।

ईसीजी-एक्स रे मशीनें होंगी सस्ती

टैरिफ करीब करीब हटने से मेडिसिन और मेडिकल उपकरण को मँगाना आसान हो जाएगा। ईसीजी-एक्सरे मशीन सस्ती हो जाएँगी। वहीं भारतीय आईटी सेक्टर, बेंकिंग और दूसरे वित्तीय संस्थानों, शिक्षा संस्थानों को भी काफी फायदा होगा।

5 ब्रिटिश यूनिवर्सिटी के भारत में खुलेंगे कैंपस

शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत को काफी फायदा होने वाला है, क्योंकि ब्रिटेन के मशहूर यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए अब भारतीय छात्रों को वहाँ जाना नहीं पड़ेगा। वहाँ की साउथेम्पटन यूनिवर्सिटी का कैंपस गुरुग्राम में खुल चुका है।

लिवरपुल यूनिवर्सिटी का कैंपस बेंगलुरु में खुलने वाला है। वहीं यॉर्क यूनिवर्सिटी, एबरडीन यूनिवर्सिटी और ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी का कैंपस मुंबई में खुलेगा।

पीएम मोदी ने कहा, “शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत-ब्रिटेन एक नया अध्याय लिख रहे हैं, ब्रिटेन की 6 यूनिवर्सिटी भारत में अपना कैंपस खोलने वाले हैं। पिछले हफ्ते ही साउथेम्पटन यूनिवर्सिटी ने गुरुग्राम में अपना परिसर खोला है।”

भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच रिश्ते को नया आयाम देगा। नए बाजार में सस्ता सामान बेचने का भरपूर फायदा भारत के बिजनेसमैन उठा पाएँगे।

वहीं किसानों को भी अपने उत्पाद कम कीमत पर विदेश भेजने और अच्छा मुनाफा कमाने का द्वार खोलेगा। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगी और गरीब बच्चों का सपना भी साकार होगा।

राहुल गाँधी ने कहा- ‘वोट चोरी के 100% सबूत हैं’, इलेक्शन कमीशन ने फैक्ट चेक में खोली पोल: कहा- आधारहीन और झूठी कहानियाँ न गढ़ें, कर्नाटक चुनाव में लगाया था गड़बड़ी का आरोप

चुनाव आयोग ने गुरुवार (24 जुलाई 2025) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के आरोप को निराधार बताया है। दरअसल राहुल गाँधी ने कर्नाटक में मतदाता सूची में गड़बड़ियों का चुनाव आयोग पर इल्जाम लगाते हुए धमकी दी थी।

चुनाव आयोग के साथ PIB  फैक्ट चेक ने भी तीखा पलटवार करते हुए कहा कि है उन्हें आधारहीन और झूठे आरोप लगाने से बचना चाहिए। आयोग का कहना है कि कर्नाटक लोकसभा चुनाव 2024 की जिस मतदाता सूची को लेकर पार्टी गड़बड़ी के आरोप लगा रही है, उसपर लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 24 के तहत मिले अधिकारों को उस समय इस्तेमाल क्यों नहीं किया? कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों को मतदाता सूची को गड़बड़ियों को लेकर जिला और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपील करनी चाहिए थी, क्योंकि यह एक वैध कानूनी उपाय था।

आयोग ने तथ्य रखते हुए स्पष्ट किया है कि लोकसभा चुनाव 2024 की प्रक्रिया को लेकर दायर 10 चुनाव याचिकाओं में से एक भी चुनाव याचिका किसी भी हारे हुए कॉन्ग्रेस उम्मीदवार द्वारा दायर नहीं की गई, जबकि यह RP अधिनियम 1951 की धारा 80 के तहत उपलब्ध एक कानूनी उपाय था।

रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गाँधी ने कहा था कि कर्नाटक के एक चुनाव क्षेत्र में चुनाव आयोग ने धोखाधड़ी की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा था, “चुनाव आयोग गलतफहमी में न रहे, वोट चोरी करने के आपके हथकंडों के 100 प्रतिशत पुख्ता सुबूत हैं हमारे पास। हम उन्हें सामने भी लाएँगे और आप इसके अंजाम से बच नहीं पाएँगे। लोकतंत्र और संविधान को बर्बाद करने की कोशिश करने वाले बक्शे नहीं जाएँगे।”

इसी बयान का फैक्ट आयोग द्वारा किया गया है।

मोहम्मद यूनुस के खिलाफ बोला कोई सरकारी कर्मचारी तो जाएगी नौकरी, अध्यादेश लाकर बांग्लादेश में लोकतंत्र का दबाया गला: पहले छात्रों के बोलने पर भी लगाई थी रोक

बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने बुधवार (23 जुलाई 2025) को एक नया अध्यादेश जारी किया है। मोहम्मद यूनुस की सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को का विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार इस अध्यादेश के जरिए खत्म कर दिया है।

इस अध्यादेश के तहत, अगर कोई सरकारी कर्मचारी हड़ताल करता है तो उसे नौकरी से जबरन सेवानिवृत्त किया जा सकता है और साथ ही पद या वेतन में भी कटौती की जा सकती है।

यह बदलाव 2018 के सरकारी सेवा कानून में संशोधन के रूप में किया गया है। मोहम्मद यूनुस की सरकार अब सरकारी कर्मचारियों को विरोध करने से रोक रही है, जो बांग्लादेश में लोकतंत्र के कमजोर होने का संकेत है।

मोहम्मद यूनुस की सरकार ने छात्रों की भी दबाई आवाज

बांग्लादेश के माध्यमिक और उच्च शिक्षा निदेशालय ने इस साल 2 जनवरी को एक नोटिस जारी किया था। इसमें साफ कहा गया कि मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के खिलाफ गलत खबरें फैलाने और दुष्प्रचार करने वाले छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निदेशालय ने सभी अधिकारियों को सतर्क रहने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि छात्र यूनुस सरकार के खिलाफ झूठी जानकारी, अफवाहें या दुष्प्रचार से वह प्रभावित न हों। साथ ही, छात्रों को भड़काऊ गतिविधियों में शामिल होने से रोकने के लिए भी आदेश दिया गया था।

माध्यमिक और उच्च शिक्षा निदेशालय ने साफ कहा था कि अगर कोई शैक्षणिक संस्थान या छात्र गलत जानकारी, दुष्प्रचार या अफवाहें फैलाते हैं तो उच्च अधिकारियों को तुरंत इसकी जानकारी दी जाए।

देखने में यह नोटिस गलत सूचना रोकने का कदम लग सकता है, लेकिन असल में यह आलोचनाओं को दबाने और उन छात्रों को डराने का तरीका है जो पहले शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन कर चुके हैं।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के खिलाफ किसी भी असहमति को आसानी से दुष्प्रचार माना जा सकता है और मुहम्मद यूनुस की आलोचना करने वाले छात्रों को अफवाह फैलाने के आरोप में निशाना बनाया जा सकता है। अगर शैक्षणिक संस्थानों को इन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की पूरी छूट मिल गई, तो उन्हें धमकाया जाएगा और मुंह बंद रखने को मजबूर किया जाएगा।