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फ्यूल कंट्रोल स्विच में नहीं गड़बड़, FAA-बोइंग ने एडवायजरी में बताया: कहा- पूरी तरह सेफ हैं, इसी के OFF होने से क्रैश हुआ था एअर इंडिया का 787

अहमदाबाद विमान दुर्घटना की जाँच के बीच बोइंग का कहना है कि उसके ईंधन स्विच लॉक सुरक्षित हैं। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफएए और विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि विमान के फ्यूल स्विच लॉक पूरी तरह सुरक्षित हैं।

एफएए ने 11 जुलाई को जारी अपने सर्कुलर में कहा कि फ्यूल कंट्रोल स्विच का डिजाइन और लॉकिंग फीचर्स दूसरे बोइंग विमान की तरह ही हैं। इसलिए बोइंग 787 समेत किसी विमान के लिए एयरवर्थिनेस डायरेक्टिव जारी करने की जरूरत नहीं है।

बोइंग ने एफएए की इस सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा है कि कंपनी किसी भी अतिरिक्त कार्रवाई की सिफारिश नहीं कर रही है। हालाँकि एफएए ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार किया है।

एएआईबी ने एफएए के एडवाइजरी का जिक्र किया

भारत में अहमदाबाद विमान हादसे की जाँच कर रहा एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट में 2018 के एफएए के एक एडवाइजरी दस्तावेज का उल्लेख है, जिसमें सिफारिश की गई थी कि बोइंग अपने 787 समेत तमाम मॉडल के फ्यूल कटऑफ स्विच की लॉकिंग की जाँच करवाए। हालाँकि ये अनिवार्य नहीं था।

एअर इंडिया ने कहा है कि उसने इस सिफारिश के मद्देनजर कोई जाँच अभी नहीं की है। जाँच में ये भी पाया गया है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान के थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल यानी टीसीएम को 2019 और 2023 में बदला गया था। टीसीएम में फ्यूल स्विच भी आता है।

एएआईबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान ने सभी जरूरी निर्देशों का पालन किया था। इसके बावजूद फ्यूल कैसे कटऑफ तक चला गया इसको लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

पायलटों की कोई गलती नहीं- पायलट संघ

भारतीय पायलट संघ यानी एएलपीए इंडिया ने जाँच को पारदर्शी और तथ्यपरक रखने की माँग की है। संघ ने विमान की दुर्घटना में पायलटों की गलती को सिरे से खारिज कर दिया है।

अमेरिका के दो सिक्योरिटी एक्सपर्टस ने भी पायलट संघ की माँग का समर्थन किया है। वहीं एयर इंडिया के प्रवक्ता ने भी कहा है कि कंपनी संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के प्रोटोकॉल का पालन कर रही है और उसे एएआईबी की जाँच पर पूरा भरोसा है।

अहमदाबाद एयरपोर्ट से 12 जून को एयर इंडिया का विमान टेकऑफ करते ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिससे 260 लोगों की मौत हो गयी थी।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में छांगुर पीर और उसके करीबियों से ED करेगी पूछताछ: 32 बैंक खातों – करोड़ों के ट्रांजेक्शन का खुलेगा राज, दुबई के रास्ते भी धर्मांतरण के लिए मिल रहा था पैसा

उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर धर्मांतरण की साजिश करने वाला सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर पर अब ईडी का शिकंजा कस गया है। छांगुर और उसके करीबियों के करीब 30 बैंक खतों की जानकारी ईडी को मिली है जिसमें पिछले 10 सालों में पैसे का लेन-देन हुआ है। ईडी ने संबंधित बैंक से पूरा स्टेटमेंट माँगा है।

ATS के बाद अब ED का शिकंजा

इससे पहले एटीएस ने जाँच में छांगुर उर्फ जलालुद्दीन के करीबियों के 40 से ज्यादा बैंक खातों का खुलासा किया था जिनसे 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के लेन-देन किए गए।

इन बैंक खातों में विदेश से पैसे आते थे। इनमें से सबसे ज्यादा पैसे दुबई से आए थे। इससे छांगुर ने धर्मांतरण के लिए और अपनी संपत्ति बनाने में किया। छांगुर के गिरोह ने जितनी भी संपत्तियाँ खरीदी हैं उसके लिए नसरीन उर्फ नीतू रोहरा के खातों का इस्तेमाल किया गया।

दुबई में नवीन रोहरा के ज्यादातर खाते हैं

दूसरी तरफ छांगुर के करीबी नवीन रोहरा के बैंक खाते ज्यादातर दुबई में हैं। इसकी जाँच के लिए विदेश मंत्रालय दुबई में भारतीय दूतावास से बात कर रहा है ताकि यूएई की सरकार से बात कर बैंक खातों का पूरा ब्योरा निकाला जा सके। इसमें वक्त लग सकता है क्योंकि जब तक यूएई की सरकार बैंक खातों की जानकारी नहीं देगी तब तक जाँच आगे नहीं बढ़ सकेगा।

छांगुर और नीतू फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं जिनसे धर्मांतरण को लेकर पूछताछ चल रही है। रिमांड खत्म होने के बाद ईडी दोनों को मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूछताछ के लिए कस्टडी में ले सकती है।

धर्मांतरण के लिए कई तरकीबें आजमाता था छांगुर पीर

हिंदुओं का ब्रेनवॉश करके उनका धर्म परिवर्तन करना और उनके नाम पर अवैध जमीन करने के साथ-साथ छांगुर अपने काम को अंजाम देने के लिए भी कई तरकीबें खोजता था।

इसके साथ ही वह सरकारी जमीनों पर कब्जा कर कागजों में हेर फेर भी करता था। जाँच में सामने आया है कि विदेशी फंडिंग के जरिए छांगुर ने करोड़ों की संपत्ति बनाई। इसके साथ ही उतरौला में कई महँगी प्रॉपर्टी का भी निर्माण करवाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छांगुर ने उतरौला में कई लोगों के नाम पर पहले जमीन खरीदी और फिर सरकारी जमीनों पर कब्जा जमा लिया। इसके लिए उन जमीनों पर गरीबों का नाम दिखा कर कागजों में हेर-फेर भी की।

उतरौला के पटेल नगर में एक सरकारी तालाब कुंडवा को भी छांगुर ने पटवा कर वहाँ पर लगभग 30,000 वर्ग फीट में अवैध प्लॉटिंग भी करवाई। इसके लिए गरीबों के नाम पर की गई जमीन को छांगुर ने नीतू उर्फ नसरीन के नाम पर 93 लाख में खरीद ली।

लाताब पाटने के लेकर उस समय के ADM बलरामपुर ने उतरौला की नगर पालिका को लिखित शिकायत भी की थी। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

स्कूल-इंटरनेट बंद, 2500+ पुलिसकर्मी तैनात… हरियाणा के नूहं में हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा से पहले के हालात: 2023 में इस्लामी कट्टरपंथियों ने यहीं नल्हड़ महादेव मंदिर पर किया था हमला, 6 की गई थी जान

हरियाणा के नूहं (मेवात) जिले में सोमवार (14 जुलाई 2025) को ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा से पहले माहौल तनावपूर्ण है। सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। इनमें इंटरनेट और एसएमएस सर्विस को 24 घंटे के लिए बंद करना और स्कूलों को बंद रखना शामिल है।

ऐसा साल 2023 की घटना के चलते किया गया है, क्योंकि तब इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं पर हमला कर दिया था। नल्हड़ महादेव मंदिर तक में हिंसा कई गई थी, जो बाद में बढ़ गई थी। हिंसा में 6 लोगों की मौत हुई थी, तो 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

नूहं में इंटरनेट और स्कूल बंद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा सरकार ने नूहं में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सर्विस को 13 जुलाई रात 9 बजे से 14 जुलाई रात 9 बजे तक बंद कर दिया है। हालाँकि बैंकिंग, मोबाइल रिचार्ज और वॉयस कॉल की सुविधा पहले की तरह चालू रहेगी। इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा के लिए सोमवार (14 जुलाई 2025) को जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल बंद हैं।

डिप्टी कमिश्नर विश्राम कुमार मीणा ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा, “बच्चों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है और सभी स्कूलों को इसका पालन करना होगा।” वहीं, पुलिस नूहं के संवेदनशील इलाकों में गश्ती कर रही है और पहाड़ी इलाकों में ड्रोन से नजर रखी जा रही है।

इस बार ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए 2500+ पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके लिए 14 डीएसपी अलग-अलग टीमों का नेतृत्व कर रहे हैं, तो 28 चेकपॉइंट्स लगाए गए हैं।

सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार ने ड्रोन, माइक्रोलाइट, हवाई जहाज, ग्लाइडर, हॉट एयर बैलून, पतंगबाजी, चाइनीज माइक्रोलाइट और आतिशबाजी पर भी रोक लगा दी है। बीते साल भी प्रशासन ने ऐसे निषेधात्मक कदम उठाए थे।

साल 2023 में हुआ था हिंदुओं पर हमला, गई थी 6 लोगों की जान

नूहं में ये सख्ती इसलिए की गई है, क्योंकि साल 2023 में ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान भयानक हिंसा हुई थी। उस वक्त विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की यात्रा पर एक भीड़ ने हमला कर दिया था। इस हमले में 6 लोगों की मौत हो गई, जिसमें दो होमगार्ड्स शामिल थे। इस हिंसा में करीब 200 लोग घायल हुए थे।

बता दें कि जुलाई 2023 में भी नूहँ में वीएचपी की ओर से ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा निकाली जा रही थी। तभी इस्लामी कट्टरपंथियों की एक बड़ी भीड़ ने यात्रा पर पत्थरबाजी और फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में कई गाड़ियों को आग लगा दी गई और नल्हड़ महादेव मंदिर में फँसे लोग भी सुरक्षित नहीं थे।

पीड़ित हिंदुओं का कहना है कि नल्हड़ शिव मंदिर पर करीब 150 कट्टरपंथियों की भीड़ फायरिंग कर रही थी। इस मंदिर में सैकड़ों की संख्या में लोग फँसे हुए थे, जिन्हें पुलिस-प्रशासन ने सोमवार की रात बाहर निकाला था। प्रत्यक्षद​र्शियों के अनुसार हिंदुओं को निशाना बनाने वाली भीड़ ‘अल्लाह-हू अकबर’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा रही थी।

मुस्लिम हमलावरों ने साइबर पुलिस स्टेशन को आग लगा दी, 150 से ज्यादा गाड़ियाँ जला दीं। हिंसा इतनी बढ़ गई कि गुरुग्राम तक फैल गई। बाद में पुलिस ने बड़े अभियान चलाकर दंगाइयों को पकड़ा, इसके लिए ड्रोन और पहाड़ियों पर कॉम्बिंग तक का सहारा लेना पड़ा। ये गिरफ्तारियाँ अगले कई दिनों तक होती रही थी।

काशी से लेकर देवघर तक, हरिद्वार से मुंबई में… हर जगह गूँजा ‘हर-हर महादेव’: वाराणसी में तो भक्तों पर फूल भी बरसे, ड्रोन से रखी जा रही चप्पे-चप्पे पर नजर

सावन के पहले सोमवार (14 जुलाई 2025) को देशभर के शिव मंदिरों में भोलेनाथ के भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ से लेकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ, हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव से मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर तक, हर जगह ‘हर-हर महादेव’ की गूँज सुनाई दे रही है।

सावन का महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय माना जाता है, और इस पवित्र दिन पर लाखों श्रद्धालु मंदिरों में जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और भक्ति में लीन हैं। मंदिरों को फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और दीयों से सजाया गया है और भजनों की मधुर धुनों से वातावरण भक्तिमय हो गया है। देश भर में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए हैं। ड्रोन से लेकर हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।

काशी विश्वनाथ में भक्ति का अनूठा संगम

वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के पहले सोमवार को सुबह मंगला आरती के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार प्रोटोकॉल दर्शन पर पूरी तरह रोक लगाई गई है, ताकि सभी भक्तों को समान रूप से दर्शन का मौका मिले। मंदिर के गर्भगृह में केवल 21 यादव बंधुओं को प्रवेश की अनुमति दी गई है।

सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं, और गंगा जल, बेलपत्र, दूध, और धतूरा चढ़ाकर भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने में जुटे हैं। मंदिर परिसर में सुरक्षा के लिए ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है, और पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। वहीं, प्रशासन ने शिवभक्तों पर फूल भी बरसाए।

हरिद्वार में भगवान शिव की ससुराल में भक्तों का उत्साह

हरिद्वार जिसे भगवान शिव की ससुराल कहा जाता है, में दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों का हुजूम उमड़ा। मान्यता है कि सावन माह में भगवान शिव दक्षेश्वर महादेव के रूप में यहीं निवास करते हैं।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने बताया कि सावन में गंगा जल से शिवलिंग का अभिषेक विशेष फलदायी होता है, क्योंकि माँ गंगा शिव की जटाओं से प्रकट हुई थीं। सुबह से ही भक्त गंगा जल, दूध, शहद और भाँग से जलाभिषेक कर रहे हैं।

हरिद्वार में काँवड़ यात्रा के लिए विशेष मार्ग बनाए गए हैं और प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को सुचारू करने के लिए रूट डायवर्जन और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।

देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दर पर भक्तों की भीड़

झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में सावन की पहली सोमवारी पर भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर में भी देर रात से ही श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुँच रहे हैं। मंदिर के पुजारी अभिषेक पाठक के अनुसार, करीब एक से डेढ़ लाख भक्तों ने जलाभिषेक किया, ये संख्या बढ़ती ही जा रही है।। इस बार मंदिर में अरघा प्रणाली की व्यवस्था की गई है, जिससे भक्त आसानी से जल चढ़ा सकें। पहलेजा से गंगा जल लेकर हजारों काँवड़िए यहाँ पहुँचे और मंदिर परिसर ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूँज उठा।

मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर में भक्ति की लहर

मुंबई के प्रसिद्ध बाबुलनाथ मंदिर में भी सावन के पहले सोमवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगीं। भक्तों ने शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर पूजा-अर्चना की। मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है और भजन मंडलियों ने वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना दिया। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की है, ताकि सभी को सुगमता से दर्शन मिल सकें।

दिल्ली के गौरी शंकर मंदिर में भक्तों का ताँता

पुरानी दिल्ली में लाल किले के सामने स्थित गौरी शंकर मंदिर में भी सुबह से ही शिव भक्तों की भीड़ जुट गई। भक्तों ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की और जलाभिषेक किया। मंदिर के बाहर कांवड़ियों के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं, जिसमें भोजन और पानी की सुविधा शामिल है।

दिल्ली के अन्य शिव मंदिरों जैसे नागेश्वर मंदिर और झंडेवालान मंदिर में भी रुद्राभिषेक और विशेष पूजा का आयोजन किया गया। मंदिर प्रशासन ने बताया कि स्फटिक शिवलिंग पर जलाभिषेक की विशेष व्यवस्था की गई है।

गुवाहाटी के शुक्रेश्वर मंदिर में भारी भीड़

असम के गुवाहाटी में शुक्रेश्वर मंदिर में भी सावन के पहले सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही भक्तों ने गंगा जल, दूध, और बेलपत्र के साथ शिवलिंग का अभिषेक किया। मंदिर परिसर में भजनों और कीर्तन की मधुर धुनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। स्थानीय प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए, ताकि भक्तों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

काँवड़ यात्रा और प्रशासन की तैयारियाँ

सावन के पहले सोमवार को काँवड़ यात्रा का उत्साह भी चरम पर है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में प्रशासन ने काँवड़ियों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश, मेरठ, मुरादाबाद और गाजियाबाद जैसे शहरों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है, और मंदिरों के प्रवेश द्वारों पर बैरियर लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा है।

गाजियाबाद पुलिस ने काँवड़ियों के लिए विशेष भोजन और पानी की व्यवस्था भी की है। प्रशासन का कहना है कि उनका लक्ष्य भक्तों की आस्था और सुरक्षा दोनों को सुनिश्चित करना है।

सावन का पहला सोमवार देशभर में भक्ति और आस्था का अनूठा संगम लेकर आया है। काशी विश्वनाथ, दक्षेश्वर महादेव, बाबा बैद्यनाथ, बाबुलनाथ, और गौरी शंकर जैसे मंदिरों में भक्तों की भीड़ और ‘हर-हर महादेव’ की गूँज ने पूरे देश को शिवमय बना दिया है। प्रशासन की चुस्त व्यवस्था और भक्तों का उत्साह इस पवित्र दिन को और भी खास बना रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सोमवार के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:11 से 4:52 बजे), अभिजित मुहूर्त (11:59 से 12:55 बजे) और विजय मुहूर्त (2:45 से 3:40 बजे) में जलाभिषेक करना विशेष फलदायी है।

जिन्होंने राम जन्मभूमि से लेकर काशी-मथुरा तक वामपंथियों के प्रोपेगेंडा की उड़ाई धज्जियाँ, उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया राज्यसभा के लिए नामित: जानिए – डॉ मीनाक्षी जैन के बारे में सबकुछ

प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले विद्वानों को मान्यता देते हुए, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार (12 जुलाई 2025) को राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मनोनीत किया। जिनका नाम उज्ज्वल निकम (प्रसिद्ध वकील), सी. सदानंदन मास्टे (समाजसेवी), हर्षवर्धन श्रृंगला (पूर्व विदेश सचिव) और डॉ मीनाक्षी जैन, जो इतिहास लेखन में भारतीय दृष्टिकोण की सशक्त आवाज मानी जाती हैं।

डॉ मीनाक्षी जैन का नाम आज देश की उन इतिहासकारों में शुमार होता है, जिन्होंने इतिहास लेखन के क्षेत्र में दशकों से जारी वामपंथी प्रभुत्व को चुनौती दी और भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक स्थलों से जुड़े तथ्यों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के साक्ष्य आधारित तरीके से प्रस्तुत किया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में इतिहास की प्रोफेसर रह चुकीं डॉ. जैन को वर्ष 2020 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। वर्तमान में वे भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) की वरिष्ठ फेलो हैं।

डॉ. मीनाक्षी जैन कौन हैं?

डॉ जैन एक प्रसिद्ध इतिहासकार, लेखिका और शिक्षाविद हैं, जो भारतीय इतिहास, संस्कृति, धर्म और मंदिर पर केंद्रित अपने शोध के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने लंबे समय तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन किया और युवाओं को भारतीय दृष्टिकोण से इतिहास देखने के लिए प्रेरित किया। उनका दृष्टिकोण यह रहा है कि भारतीय इतिहास को पश्चिमी या वामपंथी चश्मे से नहीं, बल्कि मूल भारतीय परंपरा और संस्कृति को आधार बनाकर समझा जाना चाहिए।

प्रमुख लेखन और योगदान

डॉ मीनाक्षी जैन ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें से कुछ को स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रमों में भी शामिल किया गया है। उनका लेखन मुख्य रूप से उन ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है, जिन्हें लंबे समय तक दबाया या नजरअंदाज किया गया।

‘राम और अयोध्या’ (2013)

‘राम के लिए युद्ध: अयोध्या में मंदिर का मामला’ (2017)

इन दोनों पुस्तकों में डॉ जैन ने ऐतिहासिक, पुरातात्विक और साहित्यिक प्रमाणों के आधार पर यह साबित किया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद एक भव्य राम मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1989 से पहले तक लगभग सभी ऐतिहासिक दस्तावेज इसी बात की ओर इशारा करते हैं।

अयोध्या मामले पर वामपंथियों के प्रोपेगेंडा की निकाली हवा

डॉ जैन ने अयोध्या मामले में वामपंथी इतिहासकारों जैसे इरफान हबीब, डीएन झा, रोमिला थापर और आरएस शर्मा की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कैसे इन इतिहासकारों ने ‘विष्णु हरि शिलालेख’ को फर्जी साबित करने का प्रयास किया, जिसे 1992 में बाबरी विध्वंस के दौरान मलबे से बरामद किया गया था।

यह शिलालेख साफ शब्दों में दर्शाता है कि 12वीं शताब्दी में उस स्थान पर एक विष्णु मंदिर था। जब इरफान हबीब ने दावा किया कि यह शिलालेख किसी ‘निजी संग्रह’ से वहाँ लाया गया, तो संस्कृत विद्वान और पूर्व IPS अधिकारी किशोर कुणाल ने लखनऊ संग्रहालय से ‘त्रेता के ठाकुर’ मंदिर का वास्तविक शिलालेख खोज निकाला। यह शिलालेख टूटे-फूटे और अपठनीय अवस्था में था, जबकि विष्णु हरि शिलालेख पूरी तरह से स्पष्ट और प्रामाणिक था। इससे वामपंथी दावे की पोल खुल गई।

रिकॉर्ड में हेराफेरी को भी किया उजागर

डॉ जैन ने ब्रिटिश काल के राजस्व रिकॉर्ड्स में की गई हेराफेरी को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि 1857 के बाद के ब्रिटिश दस्तावेजों में अयोध्या के विवादित स्थल को केवल ‘जन्मभूमि’ के रूप में दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में उसमें ‘और बाबरी मस्जिद’ जोड़ दिया गया, ताकि मुस्लिम पक्ष का दावा भी प्राचीन दिखे।

यह हेराफेरी वामपंथी सोच के संरक्षण में की गई ताकि सत्य को भ्रम में बदला जा सके। जिसके बाद डॉ. जैन ने भारतीय इतिहास में वामपंथी दृष्टिकोण के एकाधिकार को कठोरता से चुनौती दी है।

उन्होंने बार-बार यह कहा है कि वामपंथी इतिहासकारों ने अदालतों को अपनी राय को तथ्यों के रूप में प्रस्तुत किया और मुस्लिम पक्ष को झूठा आश्वासन दिया कि वे यह मुकदमा जीत सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ये इतिहासकार स्वयं अदालत में पेश नहीं हुए और अपने छात्रों को भेजते रहे, जबकि बाहर लेखों और पुस्तकों के माध्यम से भ्रम फैलाते रहे।

काशी और मथुरा पर डॉ. जैन के काम

अयोध्या के बाद डॉ जैन ने काशी और मथुरा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के इतिहास पर गहन अध्ययन शुरू किया। उनकी नवीनतम पुस्तक ‘विश्वनाथ: उदय और पुनरुत्थान’ (2024) काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास पर केंद्रित है।

इस पुस्तक में उन्होंने बताया कि मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा मंदिरों को बार-बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार हिंदू समाज ने उनका पुनर्निर्माण किया। उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर, मराठों और अन्य नायकों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। मथुरा पर उनका काम अभी शोध के स्तर पर है, लेकिन वे इस विषय पर भी आने वाले समय में पुस्तक प्रकाशित करने की योजना में हैं।

मुस्लिम सहेली ने हिंदू लड़की को पहले घर बुलाया, फिर हैदर से रेप करवाके बनाई Video: धमकी देकर कहा- इस्लाम कबूल कर करे निकाह, वरना करेंगे वायरल; रीमा बानो हरदोई से गिरफ्तार

सभी लड़कियाँ जो लव जिहाद को महज एक अफवाह मानकर दूसरे समुदाय के लोगों से दोस्ती करती हैं, उन्हें इस कहानी से सबक लेना चाहिए। ये कोई फिल्मी किस्सा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की एक सच्ची घटना है, जहाँ एक मासूम हिंदू लड़की अपनी ही सहेली के जाल में फँस गई और उसकी जिंदगी नर्क बन गई। ये कहानी बताती है कि कैसे दोस्ती के नाम पर धोखा दिया जाता है और फिर ब्लैकमेलिंग, रेप और धर्मांतरण का दबाव डालकर लड़की को तोड़ने की कोशिश की जाती है।

हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग में हमने पीड़िता के परिवार, पुलिस और लोकल लोगों से बात की और ये सारी डिटेल्स सामने आईं। माहौल ऐसा है कि इलाके की लड़कियाँ अब डर के साए में जी रही हैं, और माता-पिता अपनी बेटियों को कॉलेज भेजने से पहले दस बार सोच रहे हैं।

बात दिसंबर 2024 की है। पीड़िता (24 साल) एक हिंदू युवती है, जो हरदोई के आईटीआई कॉलेज में डिप्लोमा कर रही थी। वहाँ उसकी मुलाकात रीना बानो से हुई, जो उसी क्लास में पढ़ती थी। रीना बानो मुस्लिम समुदाय से थी, लेकिन दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। वे साथ पढ़तीं, बातें करतीं, और एक-दूसरे के साथ समय बितातीं।

पीड़िता को लगा कि रीना उसकी सच्ची सहेली है। लेकिन ये दोस्ती एक साजिश का हिस्सा थी। एक दिन रीना ने उसे अपने घर पर बुलाया, जो पिहानी थाना क्षेत्र के मोहल्ला लोहानी में है। पीड़िता बिना कुछ सोचे चली गई, क्योंकि उसे क्या पता था कि वहाँ कोई जिहादी जाल बिछा है।

घर पहुँचते ही रीना उसे एक कमरे में ले गई। वहाँ पहले से ही हैदर नाम का एक आदमी मौजूद था, जो प्रयागराज का रहने वाला है और रीना की ससुराल का रिश्तेदार है। हैदर इन दिनों अपनी ससुराल में आया हुआ था। जैसे ही पीड़िता कमरे में घुसी, रीना बाहर निकल गई और दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। पीड़िता घबरा गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

हैदर ने अपनी जेब से एक तमंचा (रिवॉल्वर) निकाला और उसे डराया-धमकाया। उसने कहा, “चुप रहो, वरना गोली मार दूँगा।” पीड़िता ने विरोध किया, चीखी-चिल्लाई, लेकिन कमरा बंद था और बाहर कोई सुनने वाला नहीं। हैदर ने तमंचे की नोक पर उसके साथ जबरदस्ती की, रेप किया। इतना ही नहीं, उसने पूरा वाकया अपने मोबाइल से रिकॉर्ड भी कर लिया। पीड़िता रोती-बिलखती रही, लेकिन हैदर ने उसे धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो वीडियो वायरल कर देगा और उसकी इज्जत मिट्टी में मिला देगा।

इसके बाद रीना कमरे में आई और दोनों ने मिलकर पीड़िता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। वे वीडियो दिखाकर कहते, “अब तू हमारी बात मान, वरना ये वीडियो तेरे परिवार और सोशल मीडिया पर डाल देंगे। तेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।” ये ब्लैकमेलिंग करीब सात महीने तक चली। हर हफ्ते-दो हफ्ते में वे उसे फोन करते, मिलने बुलाते, और और ज्यादा तस्वीरें या वीडियो बनाते।

हैदर ने तो हद पार कर दी। उसने पीड़िता पर दबाव डाला कि वो हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल कर ले और उसके साथ दूसरी बीवी बनकर निकाह कर ले। वो कहता, “तू मुसलमान बन जा, मेरी दूसरी औरत बन। वरना वीडियो सबको दिखा दूँगा।” पीड़िता ने कई बार विरोध किया, लेकिन ब्लैकमेलिंग के डर से चुप रहती। उसकी जिंदगी नर्क बन गई, रातों को नींद नहीं आती, कॉलेज जाना मुश्किल हो गया, परिवार से झूठ बोलना पड़ता। वो डिप्रेशन में चली गई, खाना-पीना छूट गया। परिवार वाले पूछते तो कहती कि पढ़ाई का टेंशन है। लेकिन अंदर ही अंदर वो टूट रही थी।

आखिरकार पीड़िता की हिम्मत टूट गई। 11 जुलाई 2025 को वो हरदोई के शाहाबाद थाने पहुँची और पूरी कहानी सुनाई। उसने एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें रेप, ब्लैकमेलिंग, अश्लील वीडियो बनाने और धर्मांतरण के दबाव की सारी डिटेल्स हैं।

पीड़िता ने अपने बयान में बताया, “मैं आईटीआई में पढ़ती हूं। रीना मेरी सहेली बनी। दिसंबर 2024 में वो मुझे अपने घर ले गई। वहाँ हैदर पहले से था। रीना ने कमरा बंद किया। हैदर ने तमंचा दिखाकर मेरे साथ गलत काम किया और वीडियो बनाया। फिर दोनों ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर मुझे प्रताड़ित किया। हैदर ने कहा कि मैं मुसलमान बनूँ और उसके साथ निकाह करूँ, क्योंकि वो पहले से शादीशुदा है। मैंने विरोध किया, लेकिन डर के मारे चुप रही। अब मैं तंग आ गई हूँ, न्याय चाहिए।”

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। सीओ शाहाबाद अनुज मिश्रा ने कन्फर्म किया कि केस यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धाराओं के तहत दर्ज हुआ है। पुलिस ने हफीजुल्ला की बेटी रीना बानो को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी टीम में उप-निरीक्षक सत्येंद्र कुमार, कांस्टेबल गोविंद कुमार और महिला कांस्टेबल सोनिका चौहान शामिल थे। लेकिन हैदर फरार है, पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है।

इलाके में इस घटना से हड़कंप मच गया। मोहल्ला लोहानी के लोग डरे हुए हैं, लड़कियाँ घर से बाहर निकलने से कतराती हैं। परिवार वाले कहते हैं, “दूसरे समुदाय की दोस्ती पर भरोसा मत करो, ये लव जिहाद का तरीका है।” पुलिस का कहना है कि जाँच तेज है और दोषियों को सजा मिलेगी। लेकिन सवाल ये है कि कितनी लड़कियाँ ऐसी साजिशों का शिकार हो रही हैं?

ये घटना एक चेतावनी है कि दोस्ती सोच-समझकर करो, क्योंकि कभी-कभी वो जिंदगी बर्बाद कर सकती है। अगर ऐसी कोई घटना हो, तो तुरंत पुलिस से मदद लो। लव जिहाद कोई मिथ नहीं, हकीकत है।

पायलटों पर फोड़ा विमान क्रैश का ठीकरा, पहले खुद कहा था- जाँच रिपोर्ट में कहीं उन्हें दोषी न बनाएँ: एअर इंडिया हादसे पर पूर्व कैप्टन मोहन रंगनाथन का अपनी थ्योरी से ही U-टर्न

एअर इंडिया विमान हादसे को लेकर शुरूआती जाँच रिपोर्ट सामने आ गई है। इसके बाद रिपोर्ट को लेकर हर तरह के विशेषज्ञ अपनी-अपनी थ्योरी दे रहे हैं। इन्हीं में एक विशेषज्ञ पूर्व पायलट भी है। उसने दावा किया है कि एअर इंडिया फ्लाइट AI-171 के पायलटों ने जानबूझ कर विमान क्रैश करवा दिया। यह थ्योरी उसने बिना किसी जाँच रिपोर्ट में यह बात कहे जाने के दी है। इसी विशेषज्ञ ने एक माह पहले इससे ठीक उल्टा दावा किया था।

यह थ्योरी देने वाले विशेषज्ञ का नाम कैप्टन मोहन रंगनाथन है। वह स्वयं पूर्व पायलट है। वह एअर इंडिया हादसे के बाद से लगातार टीवी चैनल और बाकी मीडिया में नई-नई थ्योरी दे रहा है। AAIB के प्रारम्भिक जाँच रिपोर्ट देने के बाद उसने NDTV से दावा किया है कि हादसे की वजह बने फ्यूल कंट्रोल स्विच को जानबूझ कर ऑफ किया गया था। उसने यह बात लाइव टीवी शो में कही है और पायलटों को कठघरे में खड़ा किया है।

कैप्टन मोहन रंगनाथन ने दावा किया कि दोनों में से एक पायलट ने यह जानते हुए फ्यूल कंट्रोल स्विच जानबूझकर ऑफ किया कि इससे विमान क्रैश हो जाएगा। विशेषज्ञ रंगनाथन ने इसे ‘आत्महत्या’ तक का केस बता डाला। इसके बाद रंगनाथन ने यहाँ तक दावा किया कि फ्यूल कंट्रोल स्विच गड़बड़ कर ही नहीं सकते और उन्हें इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि उन्हें पायलट ही बंद कर सकते हैं।

कैप्टन मोहन रंगनाथन ने कहा, “यह अपने आप या पॉवर फेलियर की वजह से नहीं हो सकता क्योंकि फ्यूल कंट्रोल स्विच स्लाइडिंग टाइप नहीं होता। वे एक स्लॉट में रहने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, और उन्हें ऊपर या नीचे ले जाने के लिए आपको उन्हें बाहर निकालना पड़ता है। इसलिए, अनजाने में उन्हें ‘बंद’ स्थिति में ले जाने की संभावना नहीं है। यह निश्चित रूप से जानबूझकर किया गया काम है ताकि फ्यूल कंट्रोल स्विच को चयन का मामला है ताकि इसे ‘बंद’ किया जा सके।”

काल कवलित हुए ड्रीमलाइनर विमान के फ्यूल स्विच कैसे होते हैं और उनको कैसे चलाया जा सकता है इस पर बात करना एक पायलट के लिए कोई विशेष मुद्दा नहीं है। लेकिन किसी पायलट का बिना जाँच में सामने आए यह कह देना कि उन्होंने आत्महत्या के लिए ऐसा किया है, काफी विचित्र बात है। यह तब और अजीब हो जाती है यह बात कहने वाला व्यक्ति ही एक माह पहले ही पायलटों के अधिकारों के लिए एकदम टाल ठोंक के खड़ा हो।

दरअसल, इन्हीं कथित विशेषज्ञ ने एक माह पहले इस बात की आशंका जताई थी कि हादसे की जाँच के अंत में किसी तरह पायलटों पर डाला जाएगा। द न्यूज मिनट से बात करते हुए मोहन रंगनाथन ने दावा किया था कि एयरपोर्ट के पास चिड़िया थीं और वह प्लेन टकराई थी। रंगनाथन ने कहा था, “मैं शर्त लगा सकता हूँ कि जाँचकर्ता या तो एअर इंडिया के मेंटेनेस या विमान को दोषी ठहराने की कोशिश करेंगे, और निश्चित रूप से पायलटों को दोषी ठहराएँगे। लेकिन वे यह स्वीकार नहीं करेंगे कि वहाँ चिड़िया थी।”

काफी हास्यास्पद है कि जो व्यक्ति एक माह पहले पायलटों को दोषी ठहराए जाने को लेकर शर्तें लगा रहा था आज वह खुद अपनी बात से पलट गया है। कैप्टन रंगनाथन ने यह सारे दावे तब किए हैं जब AAIB की जाँच रिपोर्ट में स्पष्ट तौर कहीं नहीं लिखा कि पायलटों की गलती से यह हादसा हुआ। रिपोर्ट में लिखा है कि विमान का टेकऑफ के बाद फ्यूल कंट्रोल स्विच ऑफ हुआ और एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया, जिसका जवाब दूसरे पायलट ने मना करके दिया।

लेकिन मोहन रंगनाथन का विवादों से नाता कोई नया नहीं है। वर्ष 1999 में मोहन रंगनाथन ने सिल्कएयर को लेकर दावा किया था। रंगनाथन का दावा था कि उन्होंने एक और पायलट के विमान को गड़बड़ तरीके से चलाने के चलते इस्तीफ़ा दिया था। दरअसल, जिस पायलट के बारे में रंगनाथन ने दावे किए थे वह दावे सेकुछ ही दिन पहले विमान सही हादसे का शिकार हुआ था और इस दुर्घटना में 104 यात्री मारे गए थे। इस मामले की जाँच में आत्महत्या का एंगल भी रखा गया था।

इसको लेकर चल रहीं चर्चाओं के बीच यह दावा रंगनाथन ने किया था, इसे एयरलाइन ने खारिज कर दिया था और कहा कि असल में उनके नौकरी छोड़ने का कारण कुछ और था। संभव है कि तब भी मोहन रंगनाथन सुर्ख़ियों में आने के लिए ऐसे दावे कर रहे हों, जैसे वह अब पायलटों को दोषी ठहरा के कर रहे हैं। हालाँकि, उनके दावे काफी अजीब और आधारहीन दिखाई पड़ते हैं।

इस्लामी भीड़ ने हिन्दू परिवार पर किया हमला, घर के दरवाजे को कुल्हाड़ी से तोड़ा… लाठी-डंडों से की पिटाई: यासीन शेख था सरगना, छत्तीसगढ़ के रायपुर की घटना

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में कचरा फेंकने से शुरू हुए विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया। यहाँ संजय चौधरी ने सड़क पर कचरा फेंका, तो पड़ोसी राजेश तिवारी ने इसका विरोध किया। मामले में हिस्ट्रीशीटर यासिन शेख उर्फ सोनू कूद पड़ा और 70 से 80 मुस्लिम भीड़ के साथ राजेश तिवारी और उनके परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना 07 जुलाई 2025 को भावना नगर क्षेत्र की है। यहाँ आए दिन संजय चौधरी सड़क पर कचरा फेंक देते थे। इसका विरोध पड़ोसी राजेश तिवारी ने किया। उस दिन भी यही हुआ, लेकिन बीच में यासिन शेख टपका और हिंसा शुरू कर दी। यासिन तिवारी ने मौके पर राजेश तिवारी को जान से मारने की धमकी दी।

इसके बाद यासिन शेख अपने साथियों संग राजेश तिवारी के घर में घुसने की कोशिश की। घर के दरवाजे को कुल्हाड़ी ठोककर तोड़ डाला। घर के भीतर दहशत में राजेश तिवारी और उनके बेटे छत की ओर भागे। बेटे ने बताया कि वहाँ भी पड़ोसियों की छत पर मुस्लिम भीड़ लाठी, डंडे, रॉड, चाकू और अन्य हथियार लेकर खड़ी थी।

मुस्लिम भीड़ ने राजेश तिवारी को बुरी तरह पीटा। साथ ही बेटे और उसके दोस्त पर वार किए। घटना में राजेश तिवारी का हाथ टूट गया और शरीर में कई घाव आए हैं। वहीं, बेटे के दोस्त का मुँह फोड़ दिया। इसके अलावा सिर, पेट और पीठ में भी गहरी चोटें आई हैं।

अस्पताल में भी पुलिस के सामने पीटा

घटना की जानकारी मिलने के काफी समय बाद पुलिस मौके पर पहुँची। फिर घायलों को अस्पताल ले जाया गया। लेकिन हमलवार फिर भी नहीं रुके। उन्होंने अस्पताल में पुलिस के सामने भी मारपीट चालू कर दी।

मामले में राजेश तिवारी ने पुलिस से FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने CCTV और चश्मदीदों के बयान के आधार पर मुख्य आरोपित संजय चौधरी, यासिन शेख समेत इरफान सिद्दीकी, अनस आतिफ और रयाज अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। अब भी दर्जनों हमलावर फरार हैं।

बजरंग दल का विरोध-प्रदर्शन

रायपुर की सांप्रदायिक हिंसा की घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसमें मुस्लिम भीड़ हिंदू परिवार पर जानलेवा हमला कर रही है। इसके बाद बजरंग दल ने घटना को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने पुलिस थाने और यासिन शेख के घर के बाहर खड़े रहकर सख्त कार्रवाई की माँग की।

वहीं, यासिन के परिवार ने गुनाह कबूल कर लिया है। लेकिन घटना को सांप्रदायिक हिंसा बताने से इनकार किया है। उधर, बजरंग दल ने पुलिस प्रशासन से आरोपितों को पकड़ने में देरी करने के लिए चेतावनी दी है। इसके बाद पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। लेकिन स्थानीय लोग अब भी दहशत में हैं।

असम सरकार ने गोलपाड़ा में 1000 बीघा+ जमीन पर से हटाया अतिक्रमण, ज्यादातर ‘मुस्लिमों’ का था कब्जा: 4 साल में खाली करवाई 25 हजार एकड़ भूमि, CM हिमंता ने कहा- जारी रहेगा अभियान

असम में इन दिनों हर तरफ बुलडोजर की आवाज सुनाई दे रही है। सरकार वन भूमि, सरकारी जमीन और आरक्षित इलाकों से अवैध कब्जा हटाने का जोरदार अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा कहते हैं कि ये बंगाली लोग हैं, जो बांग्लादेश से आकर यहाँ बस गए और असम की डेमोग्राफी बदलने की साजिश कर रहे हैं। लेकिन विपक्ष इसे गरीबों और मुसलमानों को निशाना बनाने का तरीका बता रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12 जुलाई 2025 को असम के गोलपाड़ा जिले में पैकन रिजर्व फॉरेस्ट में बड़ा बेदखली अभियान चला। यहाँ 140 हेक्टेयर (करीब 1,038 से 1,040 बीघा) वन भूमि पर अवैध कब्जा था।

गोलपाड़ा के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर तेजस मारिस्वामी ने बताया कि 1,080 परिवारों ने यहाँ घर बना रखे थे। इनमें से ज्यादातर बंगाली मूल के मुसलमान थे, जो पड़ोसी इलाकों या बांग्लादेश से आकर बसे हुए थे। अभियान में 36 बुलडोजर लगाए गए, इलाके को 6 ब्लॉकों में बाँटा गया। करीब 2,500 से 2,700 संरचनाएँ (घर, दुकानें) ढहाई गईं। सुरक्षा के लिए 1,000 से ज्यादा पुलिस और फॉरेस्ट गार्ड तैनात थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक दिन पहले ही 95% लोग खुद इलाका छोड़ चुके थे, अपना सामान रिश्तेदारों के यहाँ रख दिया। लेकिन अभियान के दौरान एक व्यक्ति फौजौल होक ने घर गिराने से पहले खुदकुशी की कोशिश की, उसे अस्पताल ले गए। लोग रोते-बिलखते रहे, लेकिन कोई बड़ा विरोध नहीं हुआ क्योंकि डर था। एक प्रभावित रोकीबुल हुसैन (28) ने कहा, “हमारा घर चंद मिनटों में मिट्टी हो गया। अब टारपॉलिन शीट तानकर सड़क पर सोएँगे, पानी-बिजली सब काट दिया। बच्चों का क्या होगा?”

शेख राजू अहमद ने बताया कि 18 जून से रोज लाउडस्पीकर पर ऐलान हो रहा था- 27 जून तक खाली करो। पिछले साल नवंबर-दिसंबर से नोटिस मिले थे, आखिरी वॉर्निंग 10 जुलाई की थी। शुक्रवार को जुमे की नमाज की वजह से अभियान टाला गया। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने वन भूमि खाली करने का ऑर्डर दिया था, ताकि हाथी-मानव संघर्ष कम हो।

इससे ठीक पहले, 8-9 जुलाई 2025 को धुबरी जिले में चरुवा बकरा, चिरकुटा और संतोषपुर गांवों से 3,500 बीघा (करीब 1,160 एकड़) जमीन खाली कराई गई। यहाँ 1,100 से 1,600 परिवार रहते थे, ज्यादातर बंगाली मूल के मुसलमान घुसपैठिए। ये जमीन 3,400 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट के लिए दी जानी है। सीएम हिमंता ने पिछले महीने साइट का दौरा किया था। अभियान में हिंसा हुई- लोगों ने एक्सकेवेटर मशीनों को नुकसान पहुँचाया, पुलिस पर हमला किया। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 11 जुलाई 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मई 2021 से अब तक 25,000 एकड़ (करीब 10,000 हेक्टेयर) से ज्यादा जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है। अगले हफ्ते पूरा डेटा जारी करेंगे।

सरमा ने कहा, “अभियान जारी रहेगा। हाईकोर्ट ने वन भूमि खाली करने को कहा है, सिर्फ बेदखल लोगों को पानी और जरूरी सामान दें। ये घुसपैठिए बंगाली हैं, जो 200-300 किमी दूर से आकर हिंदू या असमिया मुसलमान बहुल इलाकों में बस रहे। साजिश है असम की डेमोग्राफी बदलने की। अगर बीजेपी न होती, तो भूगोल बदल जाता।”

हिमंता ने अपनी बात को उदाहरण देते हुए समझाया कि लखीमपुर में साउथ सलमारा, करीमगंज से लोग आए। ग्वालपाड़ा, बारपेटा, धुबरी में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए, 10-12 हजार परिवार आकर स्थानीयों को विस्थापित कर रहे। पुनर्वास पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “सिर्फ भूमिहीन भारतीय नागरिकों को जमीन मिलेगी, अपने जिले में अप्लाई करके। घुसपैठियों के लिए कुछ नहीं।” सरमा ने कहा, “स्वदेशी लोगों की जमीन बचानी है। मैं असमिया बहुमत बनाए रखने के लिए लड़ूँगा, वरना हट जाऊँगा।”

कई बार अतिक्रमण विरोधी अभियान चला चुकी है बीजेपी सरकार

  • साल 2021 में हिमंता सीएम बने, तो पहला बड़ा अभियान 20 सितंबर 2021 को दरांग के ढालपुर में- 25 हजार एकड़ पर 3 हजार परिवार हटाए, हिंसा में 2 मौतें, 20 घायल।
  • दिसंबर 2022 में नागाँव के बटद्रवा में 1,200 बीघा खाली, 5 हजार लोग प्रभावित।
  • जनवरी 2023 में पावा रिजर्व फॉरेस्ट में 450 हेक्टेयर से 500 परिवार हटाए।
  • 2023 से गोलपाड़ा के चार रेंजों में 650 हेक्टेयर खाली- 200 हेक्टेयर पर घर, 450 पर खेती।
  • 2021-2022 से दिसंबर 2024 तक कुल 10,905 हेक्टेयर मुक्त।
  • काजीरंगा, बटाद्रबा थान जैसी जगहों से भी कब्जा हटाया।
  • बीजेपी का 2021 चुनावी वादा था- सरकारी जमीन मुक्त कराकर स्वदेशी भूमिहीनों को दें।

राज्य में कुल कितना अतिक्रमण?

  • साल 2024 तक असम की कुल फॉरेस्ट लैंड 17 लाख हेक्टेयर, जिसमें 3.62 लाख हेक्टेयर (22%) पर कब्जा।
  • 2021 तक कुल 43 लाख बीघा (करीब 6,652 वर्ग किमी) जमीन पर अतिक्रमण- गोवा जैसे राज्य के कुल क्षेत्रफल से भी दोगुना, जिसमें 3,172 वर्ग किमी वन भूमि।
  • सत्र भूमि (वैष्णव मठों की) पर भी- 11 जिलों में 15,288 बीघा (1,898 हेक्टेयर) जमीन पर भी अतिक्रमण
  • पड़ोसी राज्यों द्वारा अतिक्रमण- अरुणाचल 16 हजार हेक्टेयर, नागालैंड 59 हजार, मेघालय 3.4 हजार, मिजोरम 3.6 हजार। कुल 82 हजार हेक्टेयर।
  • असम में 323 रिजर्व फॉरेस्ट, 18 वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, 5 नेशनल पार्क

इस अभियान से सरकार को असमिया वोटरों में समर्थन मिल रहा है, जो मानते हैं कि बंगाली मुस्लिमों ने उनकी ज़मीन और पहचान छीनी है। लेकिन दूसरी ओर विपक्ष इस पर सरकार को ‘क्रूर’ और ‘एकतरफा’ बता रहा है। अगले साल 2026 में चुनाव हैं। उससे पहले यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से और ज़्यादा चर्चा में आ सकती है।

बिहार की वोटर लिस्ट में मिले घुसपैठियों के नाम, बांग्लादेश-नेपाल-म्यांमार से आकर बनाई फर्जी पहचान: EC सबको करेगा बाहर, राज्य में कुल 7.89 करोड़ वोटर

बिहार में चल रही विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) ने एक बड़ी खोज की है। उन्होंने चुनावी सूची में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए कई लोगों के नाम पाए हैं। चुनाव आयोग के सूत्रों ने रविवार (13 जुलाई 2025) को बताया कि जाँच के बाद इन नामों को अंतिम सूची से हटाया जा सकता है। यह खबर ऐसे समय आई है जब बिहार में मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने का काम जोरों पर है।

सूत्रों के मुताबिक, नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों के नाम 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित होने वाली अंतिम चुनावी सूची में शामिल नहीं किए जाएँगे। लेकिन यह फैसला 1 अगस्त 2025 के बाद ठीक से जाँच करने के बाद ही लिया जाएगा। अभी तक चुनाव आयोग ने ऐसे कितने मतदाताओं की संख्या नहीं बताई है।

यह पता चला है कि बीएलओ घर-घर जाकर लोगों से नामांकन फॉर्म बाँट रहे थे और इकट्ठा कर रहे थे। यह फॉर्म उन मतदाताओं के लिए हैं जो 24 जून 2025 तक वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हो चुके हैं। बिहार में कुल करीब 7.89 करोड़ वोटर हैं। यह पूरी प्रक्रिया मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए चलाई जा रही है।

एसआईआर के टाइमलाइन के अनुसार, लोग अपनी नागरिकता और जन्म तिथि साबित करने वाले दस्तावेज 25 जुलाई तक जमा कर सकते हैं। अगर कोई 25 जुलाई तक दस्तावेज नहीं दे पाता, तो उसके पास 30 अगस्त तक का समय है, जब दावे और आपत्तियाँ दाखिल करने की आखिरी तारीख है। 1 अगस्त को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होगी, जिसमें शामिल होने के लिए नामांकन फॉर्म जमा करना जरूरी है। अगर फॉर्म बिना दस्तावेज के जमा किया गया, तो 30 अगस्त तक दस्तावेज देकर अंतिम सूची में नाम शामिल करवाया जा सकता है।

इसके लिए इन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी-

  • मान्यता प्राप्त बोर्ड या विवि द्वारा निर्गत शैक्षिक प्रमाण पत्र
  • जाति प्रमाण पत्र
  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी)
  • पासपोर्ट
  • राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकार द्वारा तैयार पारिवारिक रजिस्टर
  • बैंक, डाकघर, एलआईसी आदि द्वारा 1 जुलाई 1987 के पूर्व निर्गत किया गया कोई भी प्रमाण पत्र
  • वन अधिकार प्रमाण पत्र
  • नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी कर्मियों का पहचान पत्र
  • स्थाई निवास प्रमाण पत्र
  • सरकार की कोई भी भूमि या मकान आवंटन का प्रमाण पत्र
  • सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत जन्म प्रमाण पत्र

विपक्षी पार्टियों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह अभियान गरीबों और प्रवासी मजदूरों को वोट से वंचित करने की साजिश है। वे दावा करते हैं कि कई गरीब लोग दस्तावेज जमा करने में मुश्किल महसूस करते हैं, जिससे उनका नाम सूची से कट सकता है। चुनाव आयोग ने कहा है कि यह सिर्फ सही मतदाताओं को सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि फर्जी नाम न रहें।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार जैसे बड़े राज्य में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहते हैं। नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोग अक्सर सीमा पार करके भारत में रहते हैं और काम करते हैं। लेकिन वोटर बनने के लिए भारतीय नागरिकता जरूरी है। अगर जाँच में साबित हो गया कि ये लोग विदेशी हैं, तो उनके नाम हटाए जाएँगे। चुनाव आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे समय पर दस्तावेज जमा करें, ताकि कोई समस्या न आए।