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आसिफ ने बीवी के सिर पर कुकर से मारा, नहीं मरी तो कैंची घोंपा, सिर को सिलेंडर से कुचला: अवैध संबंधों के शक में दी दर्दनाक मौत

दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके से एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। इस घटना को जो भी सुन रहा है वो सिहर जा रहा है। अवैध संबंधों के शक एक शौहर ने अपनी बीवी को दर्दनाक मौत दे दी। आसिफ खान ने पहले तो कुकर से अपनी बीवी शाहीन के सिर मारा। जब वह नहीं मरी तो उसने कैंची और चाकू से ताबड़तोड़ कई वार कर उसे मौत के नींद सुला दिया। इस हत्यारे का इससे भी जब मन नहीं भरा तो उसने बीवी के सिर को गैस सिलेंडर से कुचल दिया।

घटना गोविंदपुरी थाने के तुगलकाबाद एक्सटेंशन का है। 26 वर्षीय आरोपित आसिफ खान हत्या के बाद थाने पहुँचकर पुलिस के सामने पत्नी की हत्या की बात बताई और खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। उसने पुलिस को बताया कि उसकी 20 वर्षीय पत्नी शाहीन खान के सलमान नाम के एक युवक के साथ अवैध संबंध थे और इस बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे। उसने बताया कि गुरुवार (3 फरवरी 2022) की सुबह उसने अपनी बीवी की हत्या कर दी।

जानकारी मिले के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुँची तो बेड पर मृतका की लाश पड़ी थी। शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और आगे की कार्रवाई में जुट गई। घटनास्थल से हत्या में इस्तेमाल की गई कुकर और सिलेंडर को बरामद कर लिया गया है। आरोपित आसिफ के बयान को डीडी नंबर-14A के तहत गोविंदपुरी थाने में दर्ज किया गया है।

पी चिदंबरम को जेल की हवा खिलाने वाले ED के तेज तर्रार अधिकारी से राजनीति की पिच तक: कौन हैं राजेश्वर सिंह, जिन्हें BJP ने दिया टिकट

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की हाई प्रोफाइल सरोजिनी नगर विधानसभा सीट से भाजपा ने पूर्व पीपीएस अधिकारी, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और सुपरकॉप का टैग पाने वाले राजेश्वर सिंह को टिकट दिया है। इस सीट से भाजपा की विधायक मंत्री स्वाती सिंह थीं, लेकिन उनका टिकट काट दिया गया। राजेश्वर सिंह पुलिस अधिकारी रहते हुए INX मीडिया स्कैम, 2G स्कैम और एयरसेल-मैक्सिस डील में पी चिदंबरम को भी जेल की हवा खिला चुके हैं। बहरहाल उन्होंने लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।

वहीं अब नामांकन के बाद राजेश्वर नए कलेवर में सामने आए हैं। स्वैच्छिक सेवानिवृति लेकर वो सियासत के मैदान में हैं। वो राजनीति में आने से पहले लखनऊ प्रवर्तन निदेशालय में संयुक्त निदेशस के पद पर तैनात थे। करीब 24 साल की सरकारी सर्विस कर चुके राजेश्वर सिंह का अभी 11 साल का कार्यकला बचा हुआ था। वह राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी थे।

राजेश्वर सिंह का बैकग्राउंड

लखनऊ में ही जन्में राजेश्वर सिंह मूल रूप से यूपी के सुल्तानपुर के पखरौली को रहने वाले हैं। उन्होंने धनबाद IIT से इंडियन स्कूल ऑफ माइंस में बीटेक किया है। इसके अलावा उन्होंने एलएलबी, पीएचडी और मानव अधिकार में डिग्री ली है। उनके पिता स्वर्गीय रण बहादुर सिंह भी आईपीएस अधिकारी थे।

सिविल सर्वेंट से भरा है परिवार

राजेश्वर सिंह का पूरा परिवार ही सिविल सर्वेंट रहा है। उनकी पत्नी लक्ष्मी सिंह खुद भी एक आईपीएस ऑफिसर हैं और लखनऊ रेंज की आईजी हैं। भाई रामेश्वर सिंह इनकम टैक्स कमिश्नर हैं, बड़ी बहन आभा सिंह सुप्रीम कोर्ट की वकील हैं, इससे पहले वो इंडियन पोस्टल सर्विस में थीं। जबकि एक जीजा राजीव कृष्ण आगरा जोन के एडीजी हैं तो दूसरे जीजा वाईपी सिंह आईपीएस की नौकरी से वीआरएस ले चुके हैं।

कई बड़े घोटालों की जाँच कर चुके हैं राजेश्वर सिंह

पीपीएस अधिकारी रहे राजेश्वर सिंह जब लखनऊ में डिप्टी एसपी के रूप में तैनात थे उसी दौरान से उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर प्रसिद्धि मिली थी। उन्होंने 13 एनकाउंटर किए थे। 2009 में वो प्रतिनियुक्ति पर प्रवर्तन निदेशालय में गए थे। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थायी तौर पर ईडी में ही रख दिया गया था। ईडी में रहते हुए राजेश्वर सिंह ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला, अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील, एयरसेल मैक्सिस घोटाला, आम्रपाली घोटाला, नोएडा पोंजी स्कीम घोटाला, गोमती रिवर फ्रंट समेत कई बड़े मामलों की जाँच की। इसके अलावा 4000 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की।

जिस हत्या में ₹1000 जुर्माना देकर छूटे थे पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सिद्धू उस पर SC करेगा सुनवाई, CM उम्मीदवार के सर्वे में भी चन्नी से पीछे

पंजाब विधानसभा चुनावों (Punjab Assembly Election 2022) के काल मेंदौरान कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। उनका मुख्यमंत्री बनने का सपना, सपना ही रह जाएगा। इधर सुप्रीम कोर्ट रोड रेज से जुड़े उनके पुराने मामले पर पुनर्विचार करने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के सर्वे में प्रदेश के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (CharanJit Singh Channi) ने उन्हें पछाड़ दिया है।

1988 के रोड रेज के एक मामले में सिद्धू को दी गई सजा की पर पुनर्विचार करने के लिए गुरुवार (3 फरवरी 2022) को तैयार हो गया। पंजाब के अमृतसर पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं सिद्धू से जुड़ी इस विशेष याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर और संजय किशन कौल की विशेष पीठ विचार कर सकती है। इस घटना में एक वरिष्ठ नागरिक की जान चली गई थी और इस मामले में कोर्ट ने साल 2018 में सिद्धू पर सिर्फ 1,000 रुपए का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धू और उनके सहयोगी रूपिंदर सिंह संधू 27 दिसंबर 1988 को पटियाला में शेरनवाला गेट क्रॉसिंग के पास बीच रोड पर खड़ी एक जिप्सी में थे। वहीं, 65 वर्षीय गुरनाम सिंह दो लोगों के साथ बैंक जा रहे थे। आरोप है कि पीड़ित ने दोनों से अपनी कार को क्रॉसिंग से हटाने के लिए कहा, जिसके बाद दोनों के बीच कहा-सुनी हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिद्धू ने गुरुनाम सिंह को पीटा, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। वहीं, सिद्धू का दावा है कि गुरनाम सिंह की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई।

शुरू में निचली कोर्ट ने सिद्धू को हत्या के आरोप से बरी कर दिया। मामला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में पहुँचा तो हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को उलटते हुए दोनों को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और तीन साल की कैद की सजा सुनाई। मई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए IPC की धारा 323 के तहत बुजुर्ग को चोट पहुँचाने का मामूली अपराध करने का दोषी ठहराया। इस धारा के तहत अधिकतम सजा एक साल या 1,000 रुपया जुर्माना है। उनसे जुर्माना देने के कहा गया। इस बीच सबूत की कमी के आधार पर उनके सहयोगी संधू को बरी कर दिया गया।

इधर पंजाब में मुख्यमंत्री बनने के सिद्धू के सपने पर विराम लगता नजर रहा है। कॉन्ग्रेस ने चन्नी और सिद्धू के बीच जारी वाकयुद्ध को लेकर एक आंतरिक सर्वे कराया है। इसमें सीएम चन्नी सिद्धू से आगे निकलते नजर आ रहे हैं। इस सर्वे में सिर्फ इन दोनों के नामों को ही शामिल किया गया था। इस तरह सुनील जाखड़ के मुख्यमंत्री बनने के उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है। इस सर्वे में पार्टी उम्मीदवारों, कार्यकर्ताओं और सांसदों की राय ली जा रही है। इसके साथ ही ऑटोमेटेड कॉल के माध्यम से आम लोगों से भी इसके बारे में पूछा जा रहा है।

‘गोमूत्र पीकर आएँ’: TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने मोदी सरकार का मजाक उड़ाने के लिए बोली पुलवामा आतंकी की भाषा

अपने लोकसभा भाषण से पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार (3 फरवरी 2022) को ट्विटर पर मोदी सरकार पर तंज कसने के लिए ‘गोमूत्र’ का मजाक उड़ाया।

भाजपा को संबोधित करने के लिए गलत हैंडल को टैग करते हुए महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया, “मैं आज शाम को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में बोलने जा रही हूँ। मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूँ कि बीजेपी की हेकलर टीम खुद को तैयार रख ले। गोमूत्र के शॉट्स भी पीकर आएँ।”

गौरतलब है कि मोइत्रा ने कई मौकों पर गाली-गलौज का खुलकर इस्तेमाल करके एक बार नहीं बल्कि कई बार अपनी हिंदू नफरत का पर्दाफाश किया है। पिछले साल उन्होंने भारत को ‘सुसु पॉटी रिपब्लिक’ कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया था। तब भी उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला करने के लिए ‘गोमूत्र’ का इस्तेमाल किया था।

TMC MP Mahua Mitra’s 2021 Tweet

ट्वीट में मोइत्रा ने कहा था, “हमारे सुसु पॉटी रिपब्लिक में आपका स्वागत है! गोमूत्र पियो, गोबर छिड़को और शौचालय में कानून के शासन को फ्लश करो।” इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर खिंचाई की थी।

अपने विरोधियों पर अपमानजनक टिप्पणी करने और उपहास उड़ाने की उनकी पुरानी आदत है। पिछले साल जुलाई में झारखंड से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने मोइत्रा पर उन्हें तीन बार ‘बिहारी गुंडा’ कहने का आरोप लगाया था। दुबे ने ट्विटर पर मोइत्रा पर हिंदी भाषी लोगों और उत्तर भारतीयों के प्रति नफरत दिखाने का आरोप लगाया था। दुबे ने लिखा था, “तृणमूल कॉन्ग्रेस ने बिहारी गुंडा शब्द का इस्तेमाल करके बिहार के साथ-साथ पूरे हिंदी भाषी लोगों को गाली दी है।” इसी तरह, पिछले साल मार्च के महीने में, टीएमसी सांसद ने हिंदू देवताओं का अपमान किया था।

हिंदूफोबिक गोमूत्र शब्द आतंकियों की भाषा है

भारतीयों, विशेषकर हिंदुओं पर हमला करने से पहले इस्लामिक आतंकवादी अक्सर ‘गोमूत्र’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। 2019 में, एक आत्मघाती हमले में पाकिस्तान समर्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी ने कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के 40 जवानों को मार डाला था। हमले के बाद, एक वीडियो जारी किया गया था जिसमें आतंकवादी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह अल्लाह के नाम पर ‘गोमूत्र पीने वालों’ को दंडित करना और मारना चाहता है। आदिल अहमद डार उर्फ वकास के रूप में पहचाने गए आतंकवादी को यह स्वीकार करते हुए देखा गया कि वह एक साल पहले जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हुआ था। वीडियो में, उसने भारतीयों को “गाय का पेशाब पीने वाले” (गोमूत्र पीने वाले लोग) के रूप में संदर्भित किया था।

मुस्लिम युवक को मारा, जबरन बुलवाया ‘जय श्री राम’: 2 आरोपितों को कोर्ट ने दी जमानत, दलील में बताए आरोप निराधार

झारखंड में एक मुस्लिम व्यक्ति को मारने-पीटने के आरोप में पकड़े गए दो लोगों (भाजपा कार्यकर्ता) को धनबाद की सत्र अदालत ने जमानत दे दी है। युवकों पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने युवक से जबरन ‘जय श्रीराम’ बुलवाया। हालाँकि युवकों ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि उन्हें बेवजह फँसाया गया है। सारे आरोप बेबुनियाद हैं। उनके मुताबिक मुस्लिम व्यक्ति ने भगवान श्रीराम के बारे में अपशब्द बोले थे और बीजेपी नेताओं के खिलाफ़ गलत शब्दों का इस्तेमाल किया थे। वहीं मामले में दूसरे पक्ष की ओर से बताया गया कि पीड़ित युवक के साथ न केवल मारपीट हुई बल्कि उसे थूक चाटने को मजबूर किया गया।

मुस्लिम युवक के भाई ने कहा कि उसका बड़ा भाई गाँधी की मूर्ति के पास एक सड़क क्रॉस कर रहा था उसी समय आरोपितों ने उन्हें देखा और मारपीट की व उसे थूक चाटने को मजबूर किया गया और उससे जय श्रीराम के नारे लगवाए। इसी शिकायत को निराधार बताते हुए आरोपित पक्ष की ओर से इस मामले को ‘साजिश’ कहा गया। कोर्ट की सुनवाई के दौरान जानकारी दी गई कि शिकायतकर्ता की ओर से पहले भगवान श्रीराम को और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के लिए अपशब्द बोले गए थे।

आरोपितों की जमानत के लिए चल रही सुनवाई में बचाव पक्ष ने कोर्ट में बताया कि कैसे दोनों युवकों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 143, 323, 328, 307, 153ए , 149 के तहत कथित केस फाइल किया गया है। जमानत के लिए आरोपितों की ओर से दलील दी गई कि 153ए के तहत केस चलाने के लिए अनुमति की आवश्यकता होती है, लेकिन जाँच अधिकारियों ने इसे लागू नहीं किया। इसके अलावा धारा 328 लगाने पर भी बचाव पक्ष ने सवाल उठाए और दिखाया कि जो चोटे आई हैं वो ज्यादा गहरी नहीं हैं। फिर धारा 307 के तहत भी कहा गया कि किसी तरह मुकदमा नहीं बनता है। बचाव पक्ष ने गवाहों की विशवसनीयता पर भी सवाल उठाया और इस बात पर गौर कराया कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंदी हैं। कोर्ट में ये भी दिखाया गया कि दोनों पक्षों के बीच समझौता कर लिया गया था।  इसके बाद तथ्यों और परिस्थितियों पर किए गए निवेदनों पर विचार करते हुए कोर्ट ने आरोपितों को जमानत दे दी।

झारखंड से वीडियो हुई थी वायरल

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर कुछ दिन पहले एक वीडियो वायरल हुई थी। इस वीडियो को लेकर दावे हुए कि भाजपा कार्यकर्ता एक मुस्लिम शख्स को पीटकर उसे थूक चटवा रहे हैं। कथिततौर पर ये व्यक्ति मानसिक रूप से पीड़ित था। इस वीडियो में देख सकते हैं कि गुस्साई भीड़ बार बार उस युवक से पूछ रही है कि “तुमने क्यों बोला?” इस पर युवक कहता है कि गलती हो गई। इसके बाद लोग उससे खींचतान करते हैं और फिर उसे थूक चाटने को भी कहा जाता है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद हेमंत सोरेन ने जाँच के बाद आरोपितों पर कार्रवाई करने को कहा था, जिसके बाद पुलिस ने दो लोगों को पकड़कर अदालत में पेश किया था और उसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

यूपी क्रिकेट में परिवारवाद पर हाई कोर्ट में याचिका: कॉन्ग्रेस नेता राजीव शुक्ला और उनके PA अकरम सैफी के भाई सहित कई संघ के लाइफ मेंबर

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोशिएशन (UPCA) किसी न किसी कारण से चर्चा में लगातार बना हुआ है। हाल ही में UPCA के निदेशक पद से राजीव शुक्ला (Rajeev Shukla) के इस्तीफा देने की खबरों के बाद अब इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) में एक याचिका दायर की गई है। इसमें ये आरोप लगाया गया है कि प्रदेश क्रिकेट एसोशिएशन के अधिकारी अपने रिश्तेदारों को फेवर कर रहे हैं और ये सब यूपी क्रिकेट में अंपना कंट्रोल बनाए रखने के लिए किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, BCCI के वरिष्ठ अधिकारी राजीव शुक्ला के भाई, उनके PA रहे अकरम सैफी के परिवार के सदस्य, UPCA के निदेशक का बेटा, यूपीसीए एपेक्स काउंसिल के सदस्य का दामाद के अलावा कार्पोरेट का जगत यूपी में क्रिकेट से जुड़े हुए हैं। ये UPCA के कुछ लाइफ मेंबर हैं, जिनकी राज्य एसोशिएशन में शीर्ष पदों पर 13-15 फरवरी को होने वाले उपचुनावों की वोटिंग लिस्ट के परिणामस्वरूप UPCA के 19 उच्च काउंसिल सदस्यों में से सात ने एक रिट याचिका में औचित्य पर सवाल उठाया है। इसमें आरोप लगाया है कि क्रिकेट एसोशिएशन के अधिकारी देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य में टेंपरिंग करके क्रिकेट पर कंट्रोल बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के वकील गौतम दत्ता ने याचिका में आरोप लगाया कि राज्य के 75 जिलों में से 41 में राज्य संबद्धता है और उन्हें वोटिंग का अधिकार है। इसके अलावा 24 नए लाइफ मेंबर और पाँच कॉर्पोरेट सदस्यों को मतदान का अधिकार प्रदान करना क्रिकेट संघ की रणनीतिक योजना है कि वोटिंग लिस्ट के साथ क्रिकेट के फॉर्मेट को बदला जा सके।

वकील गौतम दत्ता ने कहा, “इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 10 जनवरी 2022 को बीसीसीआई, यूपीसीए और नए शामिल किए गए लाइफ सदस्यों और कॉर्पोरेट मेंबर को नोटिस जारी किया था। याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।”

UPCA एपेक्स काउंसिल के मेंबर और याचिकाकर्ताओं में से एक राकेश मिश्रा का कहना है कि कॉर्पोरेट के लोगों समेत नए सदस्यों को शामिल करने के लिए एपेक्स काउंसिल के सामने कोई एजेंडा नहीं रखा गया था। न ही कोई चर्चा हुई और न ही कोई स्वीकृति दी गई। UPCA के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के परिवार के लोगों को किस तरह से लाइफ मेंबर बनाया गया, इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। जबकि UPCA के अधिकारियों ने इसका बचाव करते हुए कहा है कि 2019 में अपने पिछले चुनावों से पहले स्टेट एसोशिएशन द्वारा आजीवन सदस्यों और उनके मतदान अधिकारों को मंजूरी दी गई थी।

खास बात ये है कि UPCA के नए लाइफ मेंबरों में खुद मिश्रा का दामाद भी शामिल है, हालाँकि, इस मामले में उनका कहना है कि जब उन्हें लाइफ मेंबर बनाया गया तो वो उनके परिवार का हिस्सा नहीं थे। वहीं UPCA के निदेशक युद्धवीर सिंह UPCA के निदेशक युद्धवीर सिंह ने अपने बेटे, शुक्ला और सैफी के भाइयों और UPCA के अन्य पदाधिकारियों को वोटिंग अधिकार वाले आजीवन सदस्य के रूप में शामिल करने की पुष्टि कर चुके हैं।

हाई कोर्ट में दायर याचिका में बताया गया है कि जेके सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड, यूफ्लेक्स ग्रुप, इकाना स्पोर्ट्ज़ सिटी, लोहिया कॉर्प लिमिटेड और मोंटेज एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड नए कॉर्पोरेट मेंबर बनाए गए हैं। वहीं जेके सीमेंट ग्रुप तो लंबे वक्त से यूपी में खेल के संरक्षक की भूमिका में रहा है। हितों के टकराव का आरोप बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और यूपीसीए के वरिष्ठ रहे राजीव शुक्ला पर है। शुक्ला कॉन्ग्रेस के नेता है। वो 2005 में UPCA के सचिव और डायरेक्टर बने थे।

पहले भी विवादों में रहे हैं राजीव शुक्ला (Rajeev Shukla)

राजीव शुक्ला पिछले साल नवंबर 2021 में अपने पीए अकरम सैफी के कारण विवादों में थे। सैफी पर उत्तर प्रदेश अंडर 23 क्रिकेट टीम में सलेक्शन के बदले ‘कॉल गर्ल और पैसे’ की डिमांड करने का आरोप लगा था। हालाँकि इस मामले में सैफी को बाद में क्लीनचिट मिल गई थी।

दिल्ली दंगों में किसने की कैसी प्लानिंग, जनता नहीं जान पाए? उमर खालिद और अन्य आरोपितों की वकील रेबेका जॉन का ‘स्क्रीनशॉट’ तर्क

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में आरोपित जेएनयू छात्रनेता उमर खालिद की वकील रेबेका जॉन ने आज कोर्ट में उन मीडिया संस्थानों पर नाराजगी जाहिर की जिन्होंने दंगों से जुड़े लोगों को खुलासा करने वाली व्हॉट्सएप चैट को सोशल मीडिया पर रिवील किया था। वरिष्ठ वकील ने कोर्ट में विशेषतौर पर ‘लॉबीट’ का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने जिस तरह व्हॉट्सएप मैसेज साझा किए ये बेहद घृणायुक्त था। इन स्क्रीनशॉट्स को हटाया जाना चाहिए और कोर्ट की कार्यवाही के स्क्रीनशॉट नहीं लिए जाने चाहिए। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सलाह दी गई कि अगर उन चैट को हटवाना है तो इसके लिए उपयुक्त आवेदन दायर हो सकता है। यह तरीका ज्यादा सही होगा।

उल्लेखनीय है कि उमर खालिद की जमानत याचिका के विरोध में चल रही सुनवाई के बीच स्पेशल पब्लिक प्रोसेक्यूटर अमित प्रसाद ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष खालिद के विरुद्ध कई सबूत पेश किए थे। अभियोजन पक्ष की ओर से बताया गया था कि कैसे गवाह ने बताया है कि विरोध प्रदर्शन के लिए डंडे, पत्थर, लाल मिर्च और तेजाब इकट्ठे किए गए। अमित प्रसाद ने सवाल किया था कि आखिरकार लाठी, डंडे और लाल मिर्च के साथ किया गया विरोध प्रदर्शन किस प्रकार से शांतिपूर्ण हो सकता है? 

इसी दौरान दिल्ली दंगों में उमर खालिद की भूमिका और साजिश की परतें खोलने के लिए अमित प्रसाद ने कड़कड़डूमा कोर्ट में कई वॉट्सऐप चैट, गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज भी पेश किए थे। इनमें साफ दिख रहा था कि उमर खालिद ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर दंगे भड़काने की सुनियोजित साजिश रची थी। इन्हीं तस्वीरों को लॉबीट ने अपने ट्वीट्स में साझा किया जिसके बाद आज दिल्ली दंगों में आरोपितों की वकील रेबेका जॉन भड़की दिखाई दीं और अपील करती दिखीं कि उन व्हॉट्सएप संदेशों को हटाया जाना चाहिए। बता दें कि जिन चैट्स को मीडिया में साझा होता देख रेबेका जॉन ने नाराजगी जाहिर की है वो मामले में दायर चार्जशीट का भी पार्ट हैं। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने बताया कि कैसे उन संदेशों में चक्का जाम और औरतों को सामने रखने की बातें स्पष्ट थीं।

योगी सरकार के मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह पर ब्लेड से हमले की कोशिश: जहर के साथ गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ में जुटी यूपी पुलिस

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह पर जानलेवा हमले की खबर है। मामला धूमनगंज इलाके का है। जानकारी के मुताबिक, सिद्धार्थ नाथ सिंह गुरुवार (3 फरवरी 2022) को अपना नामांकन पत्र दाखिल करने जा रहे थे। सिद्धार्थ सिंह मुंडेरा स्थित चुनाव कार्यालय पहुँचे थे। इसी दौरान एक शख्स ने उन पर हमले की कोशिश की। शख्स को वहाँ मौजूद सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं ने पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि युवक के पास से ब्लेड और जहर मिला है। फिलहाल पुलिस युवक से पूछताछ कर रही है।

बता दें कि हाल ही में यूपी सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने योगी आदित्यनाथ को बुलडोजर सीएम बताया। प्रयागराज की शहर पश्चिमी विधानसभा सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे सिद्धार्थ नाथ सिंह ने खुद को सीएम योगी आदित्यनाथ का एक्सपेरिमेंटल बॉय बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह शहर के पश्चिम में माफिया अतीक अहमद के अवैध कब्जे की जमीन को खाली कराकर उस पर योगी सरकार ने बुलडोजर चलाया है‌। वैसे ही 2022 में बीजेपी की दोबारा सरकार बनने पर पूरी फिल्म दिखाई जाएगी क्योंकि ये तो सिर्फ ट्रेलर था पूरी फिल्म अभी दिखाना बाकी है।

गौरतलब है कि 2017 में चुनाव जीतने के बाद सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक्सपेरिमेंटल बॉय के रूप में चुनाव लड़ा है। कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने साफ कहा कि उनकी लड़ाई किसी मुखौटे से नहीं है बल्कि माफिया अतीक अहमद से है। पिछले दिनों सिद्धार्थ नाथ सिंह ने शहर पश्चिमी में मुंडेरा मंडी के सामने अपने केंद्रीय चुनाव कार्यालय का उद्घाटन किया।

बता दें कि प्रदेश में सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 7 चरणों में होना है। 10 मार्च को नतीजे आएँगे जिसके साथ ही नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। चुनाव को देखते हुए राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।

₹1034 करोड़ के जमीन घोटाले में शिवसेना MP संजय राउत की बेटियाँ ED के रडार पर: शराब कंपनी में बिजनेस पार्टनर के घर छापेमारी

शिवसेना सांसद संजय राउत (Shiv Sena MP Sanjay Raut) का परिवार जमीन घोटाले के मामले में केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर आ गया है। लगभग 1,034 करोड़ रुपए के जमीन घोटाले के मामले में सुजीत पाटकर (Sujit Patkar) के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद संजय राउत की बेटियाँ ईडी के जाँच के दायरे में आ गई हैं। सुजीत पाटकर राउत की बेटियों के व्यवसायिक साझेदार हैं।

सुजीत पाटकर संजय राउत की दो बेटियों- पूर्वशी और विधिता के साथ उनकी वाइन कंपनी मैगपाई डीएफएस प्राइवेट लिमिटेड (Magpie DFS Pvt. Ltd) में पिछले 16 वर्षों से साझेदार हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाटकर की पत्नी और संजय राउत की पत्नी ने संयुक्त रूप से अलीबाग में जमीन खरीदी है।

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने प्रवीण राउत नाम के एक रियल स्टेट कारोबारी को बुधवार (2 फरवरी 2022) को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, वह पूछताछ में पुलिस का सहयोग नहीं कर रहा था। इसलिए उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के पूर्व निदेशक प्रवीण राउत को संजय राउत का करीबी बताया जाता है। मीडिया रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि संजय राउत की पत्नी के खाते में प्रवीण राउत की पत्नी ने पैसे भी हस्तांतरित किए थे। ED ने प्रवीण की 72 करोड़ रुपए की संपत्ति पहले ही कुर्क कर चुकी है।

कहा जा रहा है कि हाउसिंग डिवेलपमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Housing Development and Infrastructure Limited) की उप-कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके जमीन के फ्लोर स्पेस इंडेक्स में फेरबदल किया था। इस कंपनी को सिद्धार्थनगर इलाके में एक चॉल को विकसित करने का काम सौंपा गया था, लेकिन स्थानीय निवासियों को बिना फ्लैट दिए ही उनकी जमीन बेच दी गई। 

वहीं, हाउसिंग डिवेलपमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रमोटर राकेश वधावन और उनके बेटे सारंग वधावन भी जाँच के घेरे में हैं। दोनों गिरफ्तार पिता-पुत्र पर पंजाब ऐंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (Punjab and Maharashtra Cooperative Bank) के 6,118 करोड़ रुपये डुबाने सहित कई मामलों में जाँच चल रही है।

‘मरने के लिए पीते हैं लोग दारू, अच्छा है कम होगी जनसंख्या’: JDU विधायक गोपाल मंडल के विवादित बोल, तेजस में चड्ढी-बनियान में घूमकर बटोरी थी चर्चा

तेजस ट्रेन में चड्ढी-बनियान में घूम कर चर्चा में आए बिहार के जनता दल यूनाइटेड विधायक (JDU MLA) गोपाल मंडल ने एकबार फिर विवादित बयान दिया है। गोपाल मंडल ने कहा है कि शराब पीकर लोग अगर ऐसे ही मरते रहेंगे तो जनसंख्या कम होगी। 

गोपाल मंडल ने कहा, “जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बोल रहे हैं, मना कर रहे हैं तो फिर आप दारू क्यों पीते हैं? नीतीश कुमार ने पहले ही कहा है कि पीयोगे तो मरोगे। लोग पीते क्यों हैं, मरने ही के लिए, जगह भी तो खाली होनी चाहिए। अगर ऐसे ही मरते रहेंगे तो जनसंख्या घटेगी। बॉर्डर सील कर दिए गए हैं इसलिए कम शराब आ रही है। खेत के रास्ते शराब लाई जाती है। गरीब आदमी के लिए ही शराब बंद की गई, ऐसे में बनाई हुई शराब पीएगा कोई तो मरेगा ही।”

नहीं रुक रहा नकली शराब का कारोबार

गौरतलब है कि हाल में बिहार में जहरीली शराब से छपरा, नालंदा समेत कई जिलों में लोगों की मौत हो चुकी है। हाल में नालंदा में हुई घटना से आठ लोगों की मौत के बाद हड़कंप मच गया था। बिहार में शराब बिक्री पर पाबंदी है। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में नकली शराब यहाँ बिक रही है। यह शराब पीने से बहुत से लोगों की मौत भी हो रही है। करीब दो महीने पहले समस्तीपुर, बेतिया और गोपालगंज में जहरीली शराब से करीब 40 लोगों की मौत हो गई थी।

15 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर नालंदा के छोटी पहाड़ी गाँव में शराब पीने से 13 लोगों की मौत हो गई। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर बक्सर में भी जहरीली शराब से कई लोगों की मौत हुई है। यही नहीं राज्य में पिछले साल जहरीली शराब से करीब 66 लोगों की मौत हुई थी।

तेजस ट्रेन में अंडरवियर में घूमते मिले थे

शराब पर बयान देने वाले गोपाल मंडल वही विधायक हैं, जो राजेंद्र नगर (पटना) से नई दिल्ली जा रही तेजस राजधानी एक्सप्रेस में शराब पीकर अंडरवियर में घूमते नज़र आए थे। वह ट्रेन के कोच ए-1 में सफर कर रहे थे। ट्रेन जब पटना से चली तब तक तो सब कुछ ठीक था, लेकिन जैसे ही ट्रेन ने कोईलवर पार किया, विधायक अंडरवियर और बनियान में आ गए और इधर-उधर घूमने लगे। गोपाल मंडल के गंजी-जांघिया में देखकर कोच में मौजूद दूसरे पैसेंजर ने कड़ी आपत्ति जताई। जिसके बाद चलती ट्रेन में कोच के अंदर जमकर हंगामा हुआ। उन पर मारपीट और यात्रियों से गाली गलौज करने का भी आरोप लगा था और FIR तक दर्ज हुई थी।