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‘J&K में उर्दू की जगह हिंदी को बनाया गया राजभाषा’: गोमूत्र का मजाक बनाने वाली TMC सांसद महुआ मोइत्रा का दावा, जानिए सच्चाई

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा गुरुवार (3 फरवरी, 2022) को लोकसभा में दिए भाषण में बोले गए झूठ का लोगों ने पर्दाफाश कर दिया है। दरअसल महुआ ने लोकसभा में अपने भाषण के दौरान दावा किया कि जम्मू कश्मीर में अब पहली और आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी के साथ बदल दिया गया है।

लोकसभा में सदन को संबोधित करते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण कई मौकों पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को संदर्भित करता है। 1938 में कोमिला (अब बांग्लादेश) में सुभाष चंद्र बोस के एक भाषण का हवाला देते हुए मोइत्रा ने कहा, “सांप्रदायिकता ने अपना बदसूरत सिर फिर से अपना उठा दिया है।” उन्होंने कहा कि नेताजी की इंडियन नेशनल आर्मी (INA) का प्रतीक चिन्ह टीपू सुल्तान का बाघ था। वही टीपू सुल्तान जिनका जिक्र इस सरकार (मोदी सरकार) ने पाठ्यपुस्तकों से हटा दिया है। 

महुआ मोइत्रा ने आगे कहा, “आईएनए का आदर्श वाक्य तीन उर्दू शब्द थे – एतिहाद, एत्माद और कुर्बानी (एकता, विश्वास और बलिदान)। यह वही उर्दू भाषा है जिसे जम्मू-कश्मीर में अब पहली और आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी के साथ बदल दिया गया है और यह सरकार बहुत खुश है।” अपने इस भाषण के बाद वह सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गई। लोगों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया।

महुआ मोइत्रा का दावा क्यों है गलत?

साल 1957 से लेकर जम्मू और कश्मीर में दो आधिकारिक भाषाएँ थीं- उर्दू और अंग्रेजी। उर्दू को आधिकारिक भाषा का दर्ज़ा प्राप्त था और अंग्रेजी को आधिकारिक व्यवहार के लिए प्रयोग किया जाता था। अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा का दर्ज़ा, कानूनी और विधायी क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल के कारण ज़ारी रखा गया था।

सितंबर 2020 में मोदी सरकार ने जम्मू- कश्मीर के लोगों की वर्षों पुरानी माँग पूरी की। लोकसभा ने 22 सितंबर को जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक-2020 को मंजूरी प्रदान कर दी। जिसमें डोगरी, कश्मीरी और हिंदी को जम्मू- कश्मीर की आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का प्रावधान था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पारित होने को जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिन बताया। इसके मुताबिक पहले से ही आधिकारिक भाषा का दर्जा पाए हुए उर्दू और अंग्रेजी के साथ ही डोगरी, कश्मीरी एवं हिंदी भी वहाँ की आधिकारिक भाषा बनी।

यहाँ पर गौर करने वाली बात है कि डोगरी, कश्मीरी और हिंदी को भी आधिकारिक भाषा बनाया गया, लेकिन उर्दू को हटाया नहीं गया, जैसा कि महुआ मोइत्रा ने अपने भाषण में दावा किया था।

कश्मीरी पंडित पत्रकार आदित्य राज कौल ने सांसद पर तंज कसते हुए कहा, “महुआ मोइत्रा को पता होना चाहिए कि उर्दू जम्मू-कश्मीर की भाषा नहीं है। कश्मीरी और डोगरी हमारी भाषाएँ हैं और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में अधिकांश लोग हिंदी बोलते हैं। हिंदी थोपी नहीं जा रही है। उर्दू थोपी जा रही थी।” 

वहीं जम्मू कश्मीर से ताल्लुक रखने वाली राजनीतिक टिप्पणीकार एवं स्तंभकार सुनंदा वशिष्ट ने भी महुआ मोइत्रा को लताड़ा। उन्होंने भी कहा कि उर्दू उनकी भाषा नहीं है। उसे उनके ऊपर थोपा गया था। उन्होंने कहा, “मैं आपको बताती हूँ कि जम्मू-कश्मीर में वास्तव में क्या हुआ है। हिंदी को किसी भाषा से नहीं बदला गया है। बल्कि मेरी भाषा- ‘कश्मीरी भाषा’ को 7 दशकों के बाद पहली बार आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई है।”

इसके साथ ही उन्होंने सांसद को चुनौती देते हुए कहा, “मैं महुआ मोइत्रा को जम्मू-कश्मीर की 5 देशी भाषाओं के नाम बताने की चुनौती देती हूँ और मैं चाहूँगी कि वह मुझे बताएँ कि जम्मू-कश्मीर के लोगों पर उर्दू क्यों थोपी गई और कश्मीरी भाषा को 2020 तक आधिकारिक मान्यता क्यों नहीं दी गई?” इसके साथ ही उन्होंने झूठ फैलाने के लिए महुआ मोइत्रा से माफी की भी माँग की है।

इसके अलावा डोगरा संस्कृति और इतिहास के बारे में जानकारी रखने वाली जम्मू कश्मीर की मनु खजुरिया ने कहा, “डोगरी और कश्मीरी- डोगरा और कश्मीरी मुस्लिमों की भी मातृभाषा हैं। उन्होंने मामले को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की। उन्हें शर्म आनी चाहिए!”

गौरतलब है कि इससे पहले मोदी सरकार पर तंज कसने के लिए TMC सांसद ने ‘गोमूत्र’ का मजाक उड़ाया था। भाजपा को संबोधित करने के लिए गलत हैंडल को टैग करते हुए महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया था, “मैं आज शाम को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में बोलने जा रही हूँ। मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूँ कि बीजेपी की हेकलर टीम खुद को तैयार रख ले। गोमूत्र के शॉट्स भी पीकर आएँ।”

‘ता थैया नाचने वाला कमजोर सीएम चाहता है आलाकमान’: सिद्धू ने कॉन्ग्रेस से की खुली बगावत, चन्नी का भतीजा हनी गिरफ्तार

मीडिया में ये बात लगभग तय मानी जा रही है कि कॉन्ग्रेस पार्टी पंजाब में मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को ही सीएम उम्मीदवार घोषित करेगी और उनके चेहरे के साथ ही चुनाव लड़ेगी। लेकिन, इन अटकलों के बीच पंजाब में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने आलाकमान से खुली बगावत कर दी है। इससे पहले कि वायनाड के सांसद राहुल गाँधी मुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा करें, अपने समर्थकों के बीच पहुँचे सिद्धू ने अपनी ही पार्टी को घुड़की दी है।

नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि मुख्यमंत्री के ही हाथ में ये होता है, अगर नया पंजाब बनाना है। उन्होंने कहा कि इस बार जनता को मुख्यमंत्री चुनना है, लेकिन शीर्ष पर बैठे लोग चाहते हैं कि राज्य में एक कमजोर मुख्यमंत्री को बिठाया जाए। उन्होंने कहा कि आलाकमान अपने इशारों पर नाचने वाला सीएम चाहता है। उन्होंने अपने समर्थकों से पूछा कि क्या वो इस तरह का मुख्यमंत्री चाहते हैं? समर्थकों ने नारेबाजी कर के उनकी बात का समर्थन किया। माना जा रहा है कि उन्होंने अपनी ही पार्टी को औपचारिक ऐलान से पहले चेतावनी दी है।

राहुल गाँधी ऐलान कर चुके हैं कि उनकी पार्टी पंजाब में मुख्यमंत्री के चेहरे के साथ चुनाव लड़ेगी। अगली रैली में वो इसकी घोषणा भी करने वाले हैं। इसके लिए पार्टी द्वारा सर्वे कराने और कार्यकर्ताओं की राय लेने की बात भी कही गई है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी कह चुके हैं कि चन्नी को 4 महीने का ही समय मिल पाया है, ऐसे में उन्हें और समय मिलना चाहिए। सिद्धू हमेशा से खुद को सीएम पद का दावेदार मानते रहे हैं और अब जब सामने आ रहा है कि उनके नाम पर सहमति नहीं बन रही है, उन्होंने बगावती तेवर अपना लिए हैं।

हाल ही में वो चुनाव प्रचार बीच में ही छोड़ कर वैष्णो देवी मंदिर का दर्शन करने जम्मू निकल गए थे। उन्हें पार्टी ने अमृतसर ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है। ‘शिरोमणि अकाली दल (SAD)’ ने इस सीट से विक्रम सिंह मजीठिया को उतारा है। इससे पहले सिद्धू ने पार्टी हाईकमान को सर्वोपरि बताते हुए कहा था कि सीएम का चेहरा वही तय करेगी। सिद्धू ने अब कहा है कि ईमानदार मुख्यमंत्री बनाने पर ये ईमानदारी नीचे तक जाएगी, लेकिन जनता ने देखा है कि कैसे पिछले 25-30 वर्षों में दो मुख्यमंत्रियों ने पंजाब का बड़ा गर्क किया।

उन्होंने कहा, “ऊपर वाले तो चाहते हैं कि कोई कमजोर मुख्यमंत्री हो, जिसे वो ता थैया, ता थैया नचा सकें और कहें कि नाच मेरी बुलबुल तुझे पैसा मिलेगा। कहाँ कद्रदान फिर ऐसा मिलेगा?” उधर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 8 घंटे की पूछताछ के बाद सीएम चन्नी के भतीजे भूपिंदर सिंह हनी को ED ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें जालंधर से देर रात गिरफ्तार किया गया। उनके घर से छापेमारी में 7.9 करोड़ रुपए का कैश मिला था। बालू के अवैध खनन और फर्जी कंपनी बनाने से ये मामला जुड़ा है।

कुर्ता उठा कर ‘दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड’ पर डांस करते दिखे जदयू के ‘अंडरवियर वाले MLA’, बार डांसर के साथ भी लगा चुके हैं ठुमका

ट्रेन में अंडरवियर पहन कर घूमने के मामले से सुर्ख़ियों में आए जदयू विधायक गोपाल मंडल (Gopal Mandal) का अब ‘दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड’ (Dilli Wali Girlfriend) पर डांस (Dance) करते हुए वीडियो वायरल (Video Viral) हुआ है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक वैवाहिक कार्यक्रम में वो मंच पर चढ़ कर रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी (2013)’ के गाने ‘दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड’ पर जम कर नाच रहे हैं। अरिजीत सिंह और सुनिधि चौहान द्वारा गए गए इस गाने को संगीत निर्देशक प्रीतम चक्रवर्ती ने बनाया था।

वीडियो में देखा जा सकता है कि बिहार के भागलपुर स्थित गोपालपुर के विधायक हाथ-पाँव इधर-उधर और ऊपर-नीचे करते हुए जम कर नाच रहे हैं। लोग इस वीडियो पर उनके जम कर मजे भी ले रहे हैं। कुर्ता-पाजामा में डांस कर रहे विधायक ने इस वीडियो में ठंड से बचने के लिए टोपी और मफलर भी पहन रखा है। डांस करते हुए वो कुर्ता उठा कर लोगों को अपने पाजामे का नाड़ा दिखाते हुए भी नजर आ रहे हैं। इससे पहले वो एक बार डांसर के साथ भी नाचते हुए दिखे थे।

इस वीडियो में मंच पर विधायक के साथ उनके समर्थक भी दिखते हैं। जब 2021 में कोरोना संक्रमण अपने पूरे शबाब पर था, तब उन्हें लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया था। उन्होंने अपनी गाड़ी से बैरिकेडिंग तोड़ डाली थी। तब उन्होंने पेट खराब होने और बाथरूम लगने का बहाना देकर बैरिकेडिंग तोड़ने का कारण बताया था। वो गोपालपुर से लगातार चौथी बार विधायक हैं। पुलिस को गाली देने, जबरन जमीन कब्जाने और कई बयानों की वजह से वो अक्सर विवादों में रहते हैं।

इसी महीने गोपाल मंडल ने कहा था कि शराब पीकर लोग अगर ऐसे ही मरते रहेंगे तो जनसंख्या कम होगी। गोपाल मंडल ने कहा था, “जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बोल रहे हैं, मना कर रहे हैं तो फिर आप दारू क्यों पीते हैं? नीतीश कुमार ने पहले ही कहा है कि पीयोगे तो मरोगे। लोग पीते क्यों हैं, मरने ही के लिए, जगह भी तो खाली होनी चाहिए। अगर ऐसे ही मरते रहेंगे तो जनसंख्या घटेगी। बॉर्डर सील कर दिए गए हैं इसलिए कम शराब आ रही है। खेत के रास्ते शराब लाई जाती है। गरीब आदमी के लिए ही शराब बंद की गई, ऐसे में बनाई हुई शराब पीएगा कोई तो मरेगा ही।”

उससे पहले वो राजेंद्र नगर (पटना) से नई दिल्ली जा रही तेजस राजधानी एक्सप्रेस में शराब पीकर अंडरवियर में घूमते नज़र आए थे। वह ट्रेन के कोच ए-1 में सफर कर रहे थे। ट्रेन जब पटना से चली तब तक तो सब कुछ ठीक था, लेकिन जैसे ही ट्रेन ने कोईलवर पार किया, विधायक अंडरवियर और बनियान में आ गए और इधर-उधर घूमने लगे। गोपाल मंडल के गंजी-जांघिया में देखकर कोच में मौजूद दूसरे पैसेंजर ने कड़ी आपत्ति जताई। जिसके बाद चलती ट्रेन में कोच के अंदर जमकर हंगामा हुआ। उन पर मारपीट और यात्रियों से गाली गलौज करने का भी आरोप लगा था और FIR तक दर्ज हुई थी।

कॉन्ग्रेस के MLA और पार्षद के खात्मे (मार देने) के लिए काला जादू, वायरल ऑडियो में महिला कॉन्ग्रेसी नेता का ही नाम

गुजरात से महिला कॉन्ग्रेस नेता का एक ऑडियो वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस ऑडियो में अमदावाद नगर निगम (AMC) की कॉन्ग्रेस पार्षद जमनाबेन वेगडा अपनी ही पार्टी के पार्षद और विधायक को खत्म करने की बात कह रही हैं। जमनाबेन यह बात काला जादू करने वाली महिला हमीदा खत्री से कहती हैं। वह उससे कहती हैं कि उन्होंने दो फोटो भेजे हैं, दोनों को खत्म करना है।

जमनाबेन ने इन दोनों नेताओं की पहचान नगर निगम में विपक्ष के नेता शहजाद पठान और विधायक शैलेश परमार के तौर पर करवाई। जमना बेन, खत्री से उन दोनों को पहचान लेने और मार देने की बात कहती हैं। इसमें वह कहती हैं कि जिस सीट पर उन्हें होना चाहिए, उस पर अभी शहजाद पठान बैठे हुए हैं। आगे वह कहती हैं कि पठान ने पैसे देकर अमदावाद नगर निगम में विपक्ष के नेता के पद से उनका नाम कैंसिल करवा दिया।

हालाँकि जमनाबेन ने ऑडियो में खुद के होने की बात को नकार दिया है। उनका कहना है कि वह काला जादू में विश्वास नहीं करती हैं। किसी ने एडिटिंग करके ये ऑडियो बनाया है। उन्होंने आगे कहा कि जिसने भी ऐसा किया है. वह उनके खिलाफ कानूनी कदम उठाएँगी। 

इस मामले पर शैलेष परमार और शहजाद पठान का कहना है कि वह उन्हें पार्टी से सस्पेंड करने के लिए कहेंगे। शहजाद पठान ने कहा कि यह गंदी राजनीति है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। वह इस नेगेटिव पॉलिटिक्स के बारे में पार्टी हाई कमांड से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी को खत्म करने के लिए काला जादू का सहारा लेना बहुत ही गलत है। उल्लेखनीय है कि गुटबाजी और अंदरूनी कलह के चलते करीब एक साल से कॉन्ग्रेस पार्टी AMC में नेता प्रतिपक्ष उम्मीदवार पर फैसला नहीं ले पा रही है।

हंगामे में आगे, जाँच में पीछे… ‘पेगासस’ पर सुप्रीम कोर्ट को दिए गए सिर्फ 2 फोन, जाँच में आगे नहीं आ रहे हल्ला मचाने वाले

‘पेगासस’ स्पाईवेयर का नाम ले-ले कर मोदी सरकार को बदनाम करने वाले सुप्रीम कोर्ट की जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इजरायली कंपनी NSO के इस सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के आरोपों की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमिटी बनाई थी, लेकिन अब तक इस कमिटी के सामने मात्र 2 मोबाइल फोन्स ही सबमिट किए गए हैं, जबकि कई नेताओं और पत्रकारों ने खुद के ट्रैक किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा मचाया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (3 फरवरी, 2022) को इसकी समयसीमा 8 फरवरी तक बढ़ा दी है।

जिन लोगों को आशंका है कि उनके मोबाइल फोन को ‘पेगासस’ के जरिए निशाना बनाया गया है, उन्हें जाँच समिति के समक्ष पेश होने और अपना मोबाइल फोन सबमिट करने के लिए कहा गया है। लेकिन, जाँच में सहयोग को ये नेता-पत्रकार तैयार ही नहीं हैं। जाँच समिति इन उपकरणों के डिजिटल इमेज लेकर उसकी जाँच करेगी। इससे पहले इसी साल 2 जनवरी को नोटिस जारी कर के ऐसे लोगों को आगे आने के लिए कहा गया था। तकनीकी समिति के पास पेश हो कर इन लोगों को बताना था कि उन्हें ऐसा क्यों लगता है कि उनके फोन को निशाना बनाया गया है।

साथ ही उनसे ये भी पूछा जाना था कि क्या वो अपने डिवाइस की जाँच सुप्रीम कोर्ट की कमिटी को करने देंगे? तीन सदस्यीय कमिटी ने कहा था कि ज़रूरत पड़ने पर डिवाइस को सबमिट करने का निवेदन भी किया जाएगा। अब नए नोटिस में कहा गया है कि डिवाइस का ‘डिजिटल इमेज’ लिया जाएगा। जिस व्यक्ति का वो मोबाइल फोन होगा, उसके सामने ही ये प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही तुरंत ही उस मोबाइल फोन को उस व्यक्ति को लौटा भी दिया जाएगा।

इसके बाद उस ‘डिजिटल इमेज कॉपी’ की जाँच की जाएगी। 30 नवंबर, 2021 को भी समिति ने तकनीकी जाँच के लिए मोबाइल फोन्स दिखाने को कहा था। इस समिति के सदस्य नवीन कुमार चौधरी भी हैं, जो गुजरात के गाँधीनगर स्थित ‘नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी’ के डीन हैं। उनके अलावा केरल स्थित ‘स्मृता विश्व विद्यापीठ’ के प्रोफेसर डॉक्टर प्रभाकरन पी और IIT बॉम्बे के ‘इंस्टिट्यूट चेयर एसोसिएट प्रोफेसर’ डॉक्टर आश्विन अनिल गुमाश्ते भी इस कमिटी के सदस्य हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके समर्थकों ने तो यहाँ तक दावा किया था कि सिर्फ नेता, पत्रकार और एक्टिविस्ट्स ही नहीं, बल्कि कई केंद्रीय मंत्रियों के मोबाइल फोन्स पर भी ‘पेगासस’ के जरिए निगरानी रखी जा रही है। 27 अक्टूबर को CJI एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने जस्टिस रवीन्द्रन की निगरानी में इस कमिटी के गठन की घोषणा की थी। कमिटी को काम सौंपा गया कि वो मोबाइल फोन्स की जाँच कर के बताए कि क्या उनमें चैट्स को पढ़ने, सूचनाएँ इकट्ठा करने और डेटा लेने के लिए ‘पेगासस’ का इस्तेमाल किया गया था।

अंबानी-अडानी जकरबर्ग से ज्यादा अमीर, 24 घंटे में फेसबुक को ₹17 लाख करोड़ का घाटा: वामपंथी प्रोपेगेंडा को बढ़ाने का लगता रहा है आरोप

मार्क जुकरबर्ग ने भले ही अपनी कंपनी का नाम बदल कर ‘Meta’ रख लिए हो, लेकिन इससे शेयर बाजार में उन्हें कोई मदद मिलती नहीं दिख रही है। कंपनी के मुनाफे में भारी कमी आई है और शेयर बाजार से भी उसे तगड़ा धक्का लगा है। बुधवार (2 फरवरी, 2022) को ‘Meta’ की पहली सालाना रिपोर्ट जारी की गई, जिसके बाद कंपनी के भविष्य को लेकर निवेशकों में संशय के माहौल है। इसके अगले दिन कंपनी के शेयर्स 25% गिरने के साथ खुले। हाल के दिनों में फेसबुक पर वामपंथी प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाने के आरोप भी लगे हैं।

इस तरह से देखा जाए तो सोचिए नेटवर्किंग जायंट के मार्किट कैपिटलाइजेशन में 230 बिलियन डॉलर (17,17,377 करोड़ रुपए) की भारी कमी आ गई है। इसका असर कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग पर ये पड़ा है कि उनकी संपत्ति भी 23.34% घट गई है। उनका नेट वर्थ अब 87.7 (6,54,839 करोड़ रुपए) बिलियन डॉलर हो गया है। इसके साथ ही वो फोर्बस पत्रिका के रियल टाइम बिलियनेयर्स की सूची में 12वें पायदान पर फिसल गए। मुकेश अम्बानी और गौतम अडानी की संपत्ति उनसे ज्यादा है।

11वें नंबर पर 90 बिलियन डॉलर (6,71,985 करोड़ रुपए) की संपत्ति के साथ भारत की रिलायंस समूह के मुकेश अंबानी काबिज हैं। वहीं अडानी ग्रुप्स के संस्थापक और एक अन्य भारतीय कारोबारी गौतम अडानी 10 नंबर पर 90.1 बिलियन डॉलर (6,72,732 करोड़ रुपए) की संपत्ति के साथ उनसे एक पायदान आगे हैं। इन दोनों का ही नेट वर्थ फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग से ज्यादा है। ‘Meta’ को आशंका है कि उसका राजस्व और घट सकता है, क्योंकि लोग अब इसकी सेवाओं का कम उपयोग कर रहे हैं।

टिम कूक की ‘Apple’ ने विज्ञापन को ट्रैक करने सम्बंधित कुछ बदलाव किए हैं, जिससे ‘Meta’ को इस साल 10 बिलियन डॉलर (74,665 करोड़ रुपए) का घाटा हुआ है। ‘मेटा’ के लिए सबसे लाभकारी बाजार अमेरिका और कनाडा ही है, लेकिन इसकी सेवाओं का इस्तेमाल करने में यहीं के लोग अब पीछे हट रहे हैं। ‘मेटा’ ने दुनिया भर में इस साल रोज 10 लाख की औसत से यूजर्स को गँवाया। जुकरबर्ग अब वीआर हेडसेट्स, एआर ग्लासेज और वर्चुअल वर्ल्ड पर जोर दे रहे हैं, जहाँ यूजर्स को एक दूसरी दुनिया के अनुभव हों।

‘मेटा’ को उम्मीद है कि साल के पहले क्वार्टर और दूसरे क्वार्टर में उसे क्रमशः 27 बिलियन डॉलर और 29 बिलियन डॉलर का राजस्व प्राप्त होगा। इस हिसाब से उसे पिछले साल के मुकाबले क्रमशः 3% और 11% की वृद्धि प्राप्त तो होगी, लेकिन ये कंपनी के इतिहास में सबसे धीमा विकास है। युवाओं को आकर्षित करने के लिए मार्क जुकरबर्ग TikTok के प्रतिद्वंद्वी ‘Reels’ मर भारी निवेश कर रहे हैं। लेकिन, न्यूज़ फीड और स्टोरीज की तरह रील्स से कमाई नहीं हो रही है। एप्पल के नियमों में बदलाव के कारण मेटा अब लोगों की गतिविधियों को ट्रैक कर डिजिटल एड नहीं बेच पा रहा है।

फेसबुक और ट्विटर पर पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में तत्कालीन प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ काम करने के आरोप लगे थे। ट्रम्प ने इन कंपनियों सहित उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पर भी अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगाने और सेंशरशिप को लेकर केस किया था। भारत में नए आईटी नियमों को मानने को लेकर भी फेसबुक से सुस्ती दिखाई थी। बंगाल हिंसा से जुड़े डिटेल्स शेयर करने से भी फेसबुक लोगों को रोक रहा था। कई बार ऑपइंडिया के फेसबुक पेज की रीच घटाई गई।

ओवैसी पर फायरिंग के दो घंटे के भीतर एक संदिग्ध गिरफ्तार: UP पुलिस की 5 टीमें दूसरे आरोपित की कर रही तलाश, सामने आई CCTV फुटेज

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) में प्रचार कर दिल्ली लौट रहे ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) पर हमले के एक संदिग्ध को पुलिस ने हिरासत में लिया है। संदिग्ध की पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई है। ओवैसी ने बताया था कि उन पर दो लोगों ने चार राउंड फायरिंग की है।

हापुड़ के पुलिस अधीक्षक दीपक भुकर ने बताया, “असदुद्दीन ओवैसी की गाड़ी पर हमले के बाद पुलिस ने मौके पर तुरंत पहुंचकर मामले में संदिग्ध एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। हथियार भी बरामद किया गया है। उसका एक साथी भाग गया है, उसकी तलाश की जा रही है।”

इस गिरफ्तारी को लेकर मेरठ रेंज के आईजी प्रवीण कुमार ने कहा कि गिरफ्तारी सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई है। इस मामले में सभी साक्ष्यों को जुटाने के साथ-साथ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है।

वहीं, घटना को लेकर प्रदेश का पुलिस महकमा सतर्क नजर आया। उत्तर प्रदेश के एडीजी, लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा कि मामले की जाँच के लिए आईजी मेरठ रेंज स्वयं मौजूद हैं। 5 टीमें बनाई गई हैं, आवश्यकता पड़ने पर और टीमों का भी गठन किया जाएगा।

इस घटना पर ओवैसी ने कहा कि वे मोदी सरकार और राज्य सरकार, दोनों को कह रहे हैं कि इस मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए। ये कैसे हो सकता है कि एक सांसद पर 4 राउंड फायरिंग की जाए। उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र जाँच चुनाव आयोग से भी कराने की माँग की है। बता दें कि पिलखुआ टोल के पास ओवैसी के काफिले पर हमला किया गया था।

फुटेज में दिख रहा है कि संदिग्ध व्यक्ति टोल पर खड़ी ओवैसी की गाड़ी के पास लाल रंग का टी-शर्ट पहने एक लड़का हाथ में कुछ लेकर गुजरता है। हमला करके भागने के दौरान एक हमलावर का पैर गाड़ी से कुचल जाता है और वह गिर जाता है। इसके बाद सामने से सफेट शर्ट में एक युवक आता है और वह ओवैसी की गाड़ी पर फायरिंग करता है। सीसीटीवी फुटेज में उसका चेहरा स्पष्ट नजर आ रहा है।

जी न्यूज के अनुसार, हमलावर शख्स ओवैसी के भाषणों के नाराज था, इसलिए उसने उन पर हमला किया था। ओवैसी ने कहा कि उनके विरोधियों ने उन पर हमले कराएँ हैं। यह विचारधारा को लेकर हमला किया गया है। ओवैसी ने कहा कि वे इस मामले को संसद में भी उठाएँगे। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से भी इस मामले में जाँच कराने की माँग की है।

बता दें कि आज गुरुवार की शाम को ओवैसी पर अपने ऊपर हुए हमले को लेकर एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने कहा था, “कुछ देर पहले छिजारसी टोल गेट पर मेरी गाड़ी पर गोलियाँ चलाई गयी। 4 राउंड फ़ायर हुए। 3-4 लोग थे, सब के सब भाग गए और हथियार वहीं छोड़ गए। मेरी गाड़ी पंक्चर हो गयी, लेकिन मैं दूसरी गाड़ी में बैठ कर वहाँ से निकल गया। हम सब महफ़ूज़ हैं। अलहमदु’लिलाह।”

स्वीमिंग पूल के बाद ‘ओले-ओले’ गाने पर डांस का वीडियो वायरल: मौजूदा विधायक का टिकट काटकर सपा ने चंद्रावती वर्मा को बनाया उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) विधानसभा चुनाव (Assembly Election) के मद्देनजर हर पार्टी प्रचार पर फोकस कर रही है। इस बीच यूपी की रथ विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी की कैंडिडेट चंद्रावती वर्मा (Chandravati Verma) का डांस वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में चंद्रावती वर्मा दो अन्य लड़कियों के साथ बॉलीवुड गाने ‘ओले ओले’ पर डांस करती दिख रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रावती वर्मा को सपा ने हमीरपुर की रथ सीट से चुनावी मैदान में उतारा है। इस सीट पर पार्टी ने अपने मौजूदा विधायक गयादीन अनुरागी का टिकट काट दिया है। दरअसल, पहले सपा ने अनुरागी को ही टिकट देने का फैसला किया था, लेकिन चौबीस घंटे के भीतर उनसे टिकट वापस लेकर उसे चंद्रावती वर्मा को दे दिया गया।

बहरहाल, वर्मा के वायरल वीडियो को लेकर यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि आखिर ये वीडियो कब का है। कथित तौर पर यह उनका पुराना वीडियो माना जा रहा है। वीडियो के वर्टिकल फॉर्मेट को देखकर ये माना जा रहा है कि डांस का ये वीडियो एक वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म जैसे टिकटॉक या इंस्टाग्राम रील आदि के लिए बनाया गया था।

इससे पहले चंद्रावती वर्मा का एक अन्य वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो बिकनी में दिखी थीं, उनका वो वीडियो भी काफी वायरल हुआ था।

गौरतलब है कि गौहंद प्रखंड के इटौरा गाँव की रहने वाली चंद्रावती वर्मा धनीराम वर्मा की बेटी हैं। वो हैदराबाद में जिम ट्रेनर रह चुकी हैं। चंद्रावती ने प्रारंभिक स्कूली शिक्षा गौहंद में ही पूरी की और बाद में उरई के एक कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। स्पोर्ट्स के प्रति झुकाव रखने वाली चंद्रावती वर्मा ने जिम ट्रेनर की नौकरी की और बाद में उन्होंने अपनी खुद की कंपनी शुरू की।

अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाली चंद्रावती वर्मा ने हेमेंद्र सिंह राजपूत से 2020 में इंटरकास्ट मैरिज की थी, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। बहरहाल, चुनाव से ठीक पहले वो अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक्टिव हो गई हैं। बता दें कि उनके पति हेमेंद्र सिंह राजपूत जालौन जिले के गोरान गाँव के रहने वाले हैं।

गौरतलब है कि सपा की तरह ही पिछले महीने कॉन्ग्रेस ने हस्तिनापुर विधानसभा सीट से देश की पूर्व मिस बिकिनी अर्चना गौतम को टिकट दिया था, जिसके बाद उनकी तस्वीरें भी वायरल हुई थीं।

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री अर्णब को किसी तरह भेजना चाहते थे: TRP विवाद पर परमबीर सिंह, रिपब्लिक टीवी ने कहा- कुछ मीडिया घरानों की भी हो जाँच

विवादों में फँसे मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह (Mumbai Ex-CP Param Bir Singh) ने खुलासा किया है कि रिपब्लिक टीवी (Republic TV) के खिलाफ टीआरपी का आरोप राजनीतिक साजिश का एक हिस्सा था। उन्होंने कहा कि पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री एवं NCP नेता अनिल देशमुख के निर्देश पर काम करते थे।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिए अपने बयान परमबीर सिंह ने कहा कि जाँच को एक निश्चित दिशा देने के लिए वाजे को राजनीति निर्देश मिलते थे। वाजे सीधे तत्कालीन गृहमंत्री को सीधे ब्रीफिंग करते थे और उन्हीं से जाँच की दिशा तय करने के लिए निर्देश लेते थे। यह जाँच की प्रक्रिया का पूरी तरह उल्लंघन है।

इस संबंध में ED ने परमबीर सिंह ने प्रश्न नंबर 13 के अंतर्गत किया था, “जाँच की अवधि के दौरान यह सामने आया कि अनिल देशमुख सीधे सचिन वाजे को निर्देश देते थे। इसके बारे में बताएँ?” इस पर परमबीर सिंह ने कहा, जारी जाँच को लेकर अनिल देशमुख सचिन वाजे के साथ अक्सर मीटिंग करते थे और इस संबंध में उन्हें निर्देश देते थे। इनमें एक प्रमुख मामला TRP केस का भी है। इसके अलावा अनिल परब सहित अन्य मंत्री भी वाजे को निर्देश देेते थे।”

टीआरपी को लेकर यह दूसरा खुलासा है, जिसमें रिपब्लिक टीवी और उसके एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी के खिलाफ राजनीतिक साजिश का खुलासा हुआ है। इससे पहले सचिन वाजे ने पूछताछ में ED को बताया था कि अनिल देशमुख रिपब्लिक टीवी प्रमुख गोस्वामी को किसी भी तरह टीआरपी मामले में गिरफ्तार करना चाहते थे।

इस खुलासे के बाद रिपब्लिक टीवी ने एक प्रेस रिलीज जारी कर इस मामले में जुड़े सभी लोगों की जाँच की माँग की है। रिपब्लिक मीडिया ने कुछ मीडिया घरानों पर इस साजिश में शामिल होने के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ भी जाँच की माँग की है। रिपब्लिक मीडिया का कहना है कि व्यवसायिक हितों एवं अन्य कारणों की वजह से इस धोखाधड़ी को बढ़ावा दिया।

‘हिंदुओं को खत्म कर… मुस्लिमों के लिए अलग देश बनाना है’: उमर खालिद के खिलाफ सरकारी वकील ने पेश किए और सबूत, जमानत का किया विरोध

देश की राजधानी दिल्ली में साल 2020 में हुए हिंदू विरोधी दंगों (Delhi Anti Hindu Riots) के आरोपित और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद (Umar Khalid) समेत 6 अन्य आरोपितों की जमानत याचिका पर गुरुवार (3 फरवरी 2022) को भी दिल्ली (Delhi) की अदालत ने सुनवाई की। इस दौरान पब्लिक प्रॉसीक्यूटर अमित प्रसाद ने अदालत में मुस्लिमों का साजिश के बारे में बताया कि गवाहों ने गवाही दी है कि आरोपित मुस्लिमों के लिए एक अलग देश बनाना चाहते थे। इसी के चलते इन्होंने हिंसा भड़काने की साजिश रची थी।

अमित प्रसाद ने 3 फरवरी को जारी जमानत की सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशन जज अमिताभ रावत की पीठ को बताया कि उनके पास गवाहों के रिकॉर्ड हैं, जिसमें एक आरोपितों ने कहा था कि ‘मुस्लिमों के लिए अलग देश’ बनाना है। उनके पास रिकॉर्ड पर गवाह हैं कि आरोपित ने एक बयान दिया था जिसमें कहा गया था कि ‘मुसलमानों के लिए अलग राष्ट्र बनाना है’। एसएसपी ने कहा कि इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है।

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने डॉ अपूर्वानंद नाम के एक प्रोफेसर का एक और बयान पेश किया, जिसमें उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने कहा था कि दिल्ली दंगों के आरोपितों ने कथित तौर पर कहा था कि ‘सरकार को झुकाना और, हिंदू-मुसलमान करना है।’

इसके साथ ही प्रसाद ने विक्टर नाम के एक और गवाह के बयान को पेश किया। जिसमें लिखा था, “चाँद बाग में हिंदुओं को खत्म करना है के नारे लग रहे थे।” पब्लिक प्रॉसीक्यूटर ने इस ओर संकेत दिया कि अब आरोपितों के खिलाफ UAPA एक्ट और देशद्रोह के तहत कार्रवाई करने के पर्याप्त सबूत हैं।

एसपीपी अमित प्रसाद ने कहा, “सभी आरोपितों की साजिश के हर हिस्से में रोल प्ले करने की जरूरत नहीं होती। जब लोगों के बीच समझौता होता है तो वे एक-दूसरे के एजेंट बन जाते हैं।” उन्होंने अदालत में कहा कि कई लोग दंगे वाली जगहों से उमर खालिद को रिपोर्ट कर रहे थे।

इसके साथ ही अभियोजन पक्ष ने ये भी आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन इन्ही आरोपितों में से एक है। उस पर दिल्ली कि हिंदू विरोधी दंगे भड़काने के लिए व्हाइट मनी को ब्लैक करने के भी आरोप है।

गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को पब्लिक प्रॉसीक्यूटर अमित प्रसाद ने कहा था कि एक गवाह ने बताया, “विरोध प्रदर्शन के लिए डंडे, पत्थर, लाल मिर्च और तेजाब इकट्ठे किए गए।” अमित प्रसाद ने सवाल किया, आखिरकार लाठी, डंडे और लाल मिर्च के साथ किया गया विरोध प्रदर्शन किस प्रकार से शांतिपूर्ण हो सकता है?

हिंदू-विरोधी दंगों के लिए हुई थी टेरर फंडिंग

अमित प्रसाद ने कड़कड़डूमा कोर्ट को बताया, “आतंकवादी संगठनों से फंडिंग की गई थी। ताहिर हुसैन के पैसे को व्हाइट से ब्लैक करने के भी सबूत हैं। यह बहुत ही असामान्य सी बात है कि हमारे पास सबूतों की एक पूरी चेन है। पैसे को ब्लैक करने की क्यों जरूरत पड़ी? यह पैसा साइटों पर गया।”

इसके साथ ही उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने इस बात की पुष्टि की, “विरोध के लिए कुछ पैसे जामिया से आता था, कुछ आतंकवादी देते थे।” प्रसाद ने ये भी बताया कि दिल्ली दंगों की आरोपितों में जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट मीरान हैदर को एनजीओ ‘नई शिक्षा कल्याण संगठन’ से फंडिंग हुई थी। बहरहाल कोर्ट ने फैसला किया है कि वो इस मामले में अगले सप्ताह भी सुनवाई करेगा।

इसके साथ ही पब्लिक प्रॉसीक्यूटर ने उमर खालिद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कई अन्य सबूत भी पेश किए। पिछले साल उमर खालिद ने खुद अपने आरोपों को स्वीकार किया था कि उसने मुस्लिम संगठनों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई थी।