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हिन्दुओं ने मनाया मुहर्रम, क्योंकि गाँव में नहीं था कोई मुस्लिम… लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी ने ‘बुत’ तोड़ असलियत दिखाई: कर्नाटक में 7 दिनों के भीतर ही दिख गया ‘धर्म’ और ‘मजहब’ का फर्क

कर्नाटक में जुलाई के पहले सप्ताह में दो अलग-अलग तरह की खबरें सामने आई। यादगीर जिले के एक गाँव में हिंदुओं ने पूरे उत्साह के साथ मुहर्रम मनाया। खास बात ये है कि गाँव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता है। वहीं शिवमोग्गा में एक मुस्लिम व्यक्ति ने भगवान गणेश की मूर्ति का अपमान किया।

पहले बात करते हैं यादगीर जिले के तलावरगेरे गाँव की जहाँ एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता। बावजूद इसके वहाँ हिंदू समुदाय ने सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय देते हुए पूरे श्रद्धा और उत्साह से मुहर्रम मनाया। यह परंपरा साल 1925 से चली आ रही है। कहा जाता है कि उस समय एक सूफी संत ने गाँव में दर्शन दिए थे और वादा किया था कि अगर उन्हें गाँव में स्थापित किया जाए तो प्लेग और सूखे से मुक्ति मिलेगी। इसके बाद ग्रामीणों ने ऐसा ही किया। ग्रामीण उनके कहे मुताबिक मुहर्रम मनाते हैं। दशकों से चली आ रही ये परंपरा आज भी कायम है।

गाँववाले हर साल छह दिन तक चलने वाला मुहर्रम उत्सव मनाते हैं। इसमें हजारों की संख्या में हिंदू श्रद्धालु शामिल होते हैं, जुलूस निकालते हैं, गीत गाते हैं, और हसन, हुसैन के प्रतीक रूप में पारंपरिक अलाई के पुतले लेकर चलते हैं। गाँव के मजहबी स्थलों की रंगाई -पुताई की जाती है, प्रसाद बाँटा जाता है और आस-पास के गाँवों से भी लोग आकर संत से आशीर्वाद लेते हैं।

अब बात करते हैं शिवमोग्गा की जहाँ भगवान गणेश की प्रतिमा को मुस्लिम युवक ने तोड़ डाला और नागारा की प्रतिमा को नाले में फेंका गया।

शिवमोग्गा में मूर्तियों का अपमान, हिंदुओ में आक्रोश

3 जुलाई 2025 को शिवमोग्गा जिले के राघीगुड्डा के बंगरप्पा ले आउट में सैयद नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा भगवान गणेश की मूर्ति पर पैर रखने और नागारा की मूर्ति को नाले में फेंकने की घटना सामने आई। ये मूर्तियाँ सार्वजनिक पार्क में स्थानीय लोगों ने स्थापित की थी।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ। वीडियो में सैयद यह कहते हुए दिखाई दे रहा है “हम अपने घर के बाहर मंदिर क्यों देखें?” हालाँकि जानकारी के अनुसार बाद में उसने इसके लिए माफी माँगी।

पुलिस ने इस मामले में सैयद और उसके साथी रहमतुल्ला को हिरासत में ले लिया है। स्थानीय विधायक एस. एन. चन्नाबसप्पा और पूर्व उपमुख्यमंत्री के. एस. ईश्वरप्पा ने मौके पर जाकर घटना की निंदा की और सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस अधीक्षक (SP) मिथुन कुमार ने बताया कि जाँच चल रही है और आरोपितों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

जहाँ यादगीर जैसे गाँव साझा परंपराओं और विश्वास की मिसाल बन रहे हैं, वहीं शिवमोग्गा की घटना ने यह याद दिला दिया कि अगर नफरत को समय रहते रोका न जाए, तो वह समाज में जहर घोल सकती है।

मुहर्रम का चन्दा देने से किया मना तो इस्लामी भीड़ ने हिन्दू E-रिक्शा ड्राइवर को पीटा, सिर पर पत्थर मारा: पश्चिम बंगाल के बीरभूम की घटना, परिवार बोला – पुलिस नहीं कर रही कोई कार्रवाई

मुस्लिम भीड़ ने मुहर्रम से पहले दोबारा चंदा न देने पर एक हिंदू ई-रिक्शा चालक की बेरहमी से पिटाई की। शुक्रवार (4 जुलाई) की ये घटना पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सैंथिया कस्बे में हुई है।

दरअसल बेदन घोष नाम के ई-रिक्शा चालक से मुहर्रम से पहले चंदा के तौर पर 50 रुपए माँगे गए। उसने गुरुवार (3 जुलाई) को इसे दे दिया। बेदन घोष से दोबारा 50 रुपए चंदा माँगा गया। गुस्से में उसने पैसा देने से इनकार कर दिया। इसके बाद वहाँ मौजूद मुस्लिम भीड़ ने बेदन घोष को पीटा।

प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, “जब वे लोग उसे पीट रहे थे, तो उनमें से एक युवक ने उसके सिर पर पत्थर से हमला किया। इसमें वह घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन मरीज की स्थिति अभी कैसी है उसके बारे में नहीं पता।”

घटना के बाद गुस्साए लोग सड़कों पर आ गए और जाम लगा कर विरोध-प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, “घटना हुए एक घंटा बीत चुका है, लेकिन पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार नहीं किया है। हमने अब विरोध में इस सड़क को जाम कर दिया है। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।”

पीड़ित बेदन घोष के पिता तमाल घोष ने बताया, “मेरा बेटा यात्रियों को छोड़ने के लिए वहाँ गया था। उसने पिछले दिनों चंदा दिया था। आज जब वह वहाँ पहुँचा तो उन्होंने उससे फिर से चंदा माँगा। उसने उन्हें बताने की कोशिश की कि उसका आज का काम अभी शुरू हुआ है, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। मैं यह नहीं बता सकता कि उन्होंने मेरे बेटे को कितनी बेरहमी से पीटा। उसे कुछ स्थानीय लोगों ने बचाया।”

पीड़ित के पिता ने पुलिस पर मुस्लिम भीड़ के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है, “प्रशासन क्या कर रहा है? वे (मुस्लिम) हम पर बार-बार हमला करते हैं, हम पर अत्याचार कर रहे हैं।”

पीड़ित बेदन घोष से जब मीडिया ने बात की तो उसने बताया कि कैसे सैंथिया में मुस्लिम युवक मुहर्रम के चंदे के लिए हिंदुओं को परेशान कर रहे थे? उसने बताया “गुरुवार (3 जुलाई) को जब मैं अपने बेटे को स्कूल छोड़ने गया तो 8-10 मुस्लिम युवकों ने मुझे पकड़ लिया। उन्होंने मुझसे चंदा माँगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मैं तुरंत उन्हें पैसे दे दूँ।”

घोष को मारने-पीटने की धमकी दी गई। इस दौरान घोष ने आश्वासन दिया कि वह अपने बेटे को स्कूल छोड़ने के बाद चंदा देने के लिए वापस आएँगे। बाद में उन्होंने मुस्लिम युवकों से बचने के लिए अलग रास्ते से घर जाने लगा। लेकिन उसे फिर घेर लिया गया और मुस्लिम भीड़ ने उसे मारा पीटा।

पीड़ित की सरेआम बेरहमी से हुई पिटाई के विरोध में स्थानीय हिंदुओं ने विरोध प्रदर्शन किया और मुस्लिम अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए सड़क जाम किया। इसके बाद प्रशासन की नींद खुली और आरोपितों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया गया।

योगी सरकार ने चलाया ‘छांगुर पीर’ की कोठी पर बुलडोजर, धर्मांतरण गैंग के सरगना ने हिन्दू महिला के नाम करवाई थी रजिस्टर: CM योगी बोले- ऐसी सजा देंगे, जो उदाहरण बने

उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन का नेटवर्क चला रहे जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर की आलीशान कोठी पर बुलडोजर चलाया गया। कोठी को अवैध तरीके से बनाया गया था। इसी कोठी में छांगुर पीर अपने गैंग के साथ रहता था और यहीं से धर्मांतरण के काला कारनामे करता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोठी की जमीन नीतू नवीन रोहरा के नाम पर थी। इस कोठी में छांगुर पीर, नवीन रोहरा और नीतू रोहरा के साथ रहता था।

छांगुर पीर के धर्मांतरण गिरोह की जाँच करते हुए पुलिस को इस कोठी का पता लगा। मधुपुर गाँव स्थित आलीशान कोठी को सरकारी जमीन पर बनाया गया था। जिसके बाद अब बुलडोजर एक्शन की कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के दौरान SDM, CO समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

मंगलवार (08 जुलाई 2025) सुबह 9 बजे प्रशासन और पुलिस की टीम कोठी पर पहुँची। यहाँ करीब 10 बजे दो बुलडोजर चलाए गए। इसके बाद भी मकान का गेट नहीं खुला। पुलिस ने गेट काटने के लिए गैस कटर मंगवाया। फिर गेट का लॉक काटकर टीम और बुलडोजर घर के भीतर घुसे।

छांगुर के परिवार ने जताया विरोध

बुलडोजर एक्शन से एक दिन पहले सोमवार (07 जुलाई 2025) को पुलिस ने कोठी के बाहर गेट पर बेदखली का नोटिस चस्पा किया था। प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह ने बताया कि बेदखली के नोटिस के बाद मधुपुर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

वहीं, प्रशासन की कार्रवाई के बाद छांगुर की आलीशान कोठी में रह रहे लोगों ने आक्रोश जताया। छांगुर की बहू साबिरा पहली बार बाहर निकली और खूब बवाल मचाया। साबिरा ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई से बच्चे डरे हुए हैं। CO राघवेंद्र सिंह ने आरोपों को खारिज किया हैं।

CM योगी ने छांगुर पीर के खिलाफ दिया सख्त एक्शन का आश्वासन

बलरामपुर से धर्मांतरण नेटवर्क चला रहा जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर की गिरफ्तारी के बाद CM योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। सीएम ने कहा कि जलालुद्दीन की गतिविधियाँ ‘राष्ट्र विरोधी’ हैं। सीएम ने मामले में अपने अधिकारिक हैंडल पर ट्वीट किया है।

सीएम ने लिखा, “हमारी सरकार बहन-बेटियों की गरिमा और सुरक्षा के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपित जलालुद्दीन की गतिविधियाँ समाज विरोधी ही नहीं, बल्कि राष्ट्र विरोधी भी हैं।”

योगी आदित्यनाथ ने तीखे अंदाज में आगे कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी। आरोपित और उसके गिरोह से जुड़े सभी अपराधियों की संपत्तियाँ जब्त की जाएँगी और उन पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।”

पुणे में छांगुर पीर की करोड़ों की प्रॉपर्टी

STF ने खुलासा किया है कि छांगुर पीर ने पुणे में करोड़ों की प्रॉपर्टी बनाई थी। यह प्रॉपर्टी लोनावला में 16 करोड़ रुपए में खरीदी गई थी। ये प्रॉपर्टी छांगुर पीर के सहयोगी मोहम्मद अहमद खान के नाम पर रजिस्टर थी। छांगुर पीर के धर्मांतरण नेटवर्क पर जाँच करते हुए पहले ही साफ हो गया था कि उसे विदेशों से फंडिंग मिल रही थी।

छांगुर पीर का नेटवर्क UAE तक सक्रिय

UPATS अब छांगुर पीर के विदेशी फंडिग का नेटवर्क खंगाल रही है। इसके लिए छांगुर पीर की करीबी नीतू नवीन रोहरा के UAE की यात्रा की जानकारी मिली है। सातवीं कक्षा पास नीतू ने साल 2014 से 2019 तक 19 बार UAE की यात्रा की है। इसका कारण जाँच एजेंसियाँ तलाश करने में जुटी हैं।

वहीं, नवीन घनश्याम रोहरा ने भी 2016 से 2020 के बीच 19 बार UAE की यात्रा की। इसमें नीतू और नवीन साथ में केवल एक बार 08 अप्रैल 2017 में UAE गए थे। जबकि वापस अलग-अलग ही लौटे थे। ऐसे में जाँच एजेंसियों को कंफर्म हो गया है कि छांगुर पीर का नेटवर्क UAE में भी है।

विदेशी फंडिंग और संपत्तियाँ

ADGP (लॉ एंड ऑर्डर) ने बताया कि छांगुर पीर ने 40 से 50 बार इस्लामिक देशों की यात्रा की है। जाँच में पता चला है कि बलरामपुर में उसने कई संपत्तियाँ खरीदी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फंडिंग से जलालुद्दीन पीर ने लग्जरी गाड़ियाँ, बंगले और शोरूम की खरीदारी की है।

गिरोह के पास 40 से अधिक बैंक खाते हैं। इनमें ₹100 करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ है। यह पैसा कथित तौर पर धर्मांतरण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। खासकर खाड़ी देशों से फंडिंग आने की बात सामने आई है।

राज्य महिला आयोग ने की कड़ी कार्रवाई की माँग

छांगुर पीर पर हिंदू युवतियों को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण करने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने रोष जताया है। आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान ने छांगुर पीर को फाँसी की सजा दिलाए जाने की माँग की है।

उन्होंने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा, “हमारी बेटियाँ कोई प्रयोगशाला नहीं हैं, जहाँ धर्मांतरण की जहरीली सोच का टेस्ट हो। जो बेटियों को छलकर उनका धर्म छीनते हैं, वे समाज के दुश्मन हैं। ऐसे लोगों को फाँसी की सजा मिलनी चाहिए।”

बबिता चौहान ने आगे कहा, “सीएम योगी आदित्यनाथ ने धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाया है। अब समाज की जिम्मेदारी है कि वह चुप न रहे और इस मुद्दे पर आवाज उठाए। बेटियों को झूठ, लालच और धोखे से धर्म बदलने के लिए मजबूर करने वालों के लिए फाँसी ही एकमात्र सजा होनी चाहिए।”

उत्तर प्रदेश में 5000 सरकारी स्कूलों का होगा विलय, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी लगाई मुहर: जानिए क्यों हो रहा था विरोध, सरकार ने क्या बताए कारण

उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में हुए एक बड़े बदलाव को इलाहाबाद हाई कोर्ट की मंजूरी मिल गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में स्कूलों के विलय के फैसले को सही ठहराया है। हाई कोर्ट ने इसके विरुद्ध दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले को जहाँ सरकार ने छात्रों के हित में तो वहीं कई शिक्षक संगठनों ने विरोध में बताया है। उन्होंने और भी कई कारण इसके विरोध के पीछे बताए हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा?

7 जुलाई, 2025 को सीतापुर जिले के 51 छात्रों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया। हाई कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी और कहा कि राज्य सरकार की स्कूलों के विलय के पीछे मंशा सही है और इसे नहीं रोका जाएगा। 

हाई कोर्ट के इस फैसले से उत्तर प्रदेश में लगभग 5 हजार स्कूल प्रभावित हो रहे हैं। यह स्कूल प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल स्तर की शिक्षा देते हैं। इनके साथ ही इनमें पढ़ने वाले बच्चों का भी भविष्य अब इसी फैसले से तय होगा। योगी सरकार का यह फैसला बीते कुछ समय में चर्चा में रहा है। 

योगी सरकार के स्कूलों के विलय के फैसले पर राज्य के शिक्षकों के कई संगठन विरोध भी जता चुके हैं। समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को हाल ही के भुनाने का प्रयास किया था। इस फैसले के विरोध और पक्ष में लोगों के अपने अपने तर्क हैं। 

पहले जानिए क्या है योगी सरकार का फैसला?

उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 1.3 लाख से अधिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें कई लाख बच्चे पढ़ते हैं। वर्तमान में हर ग्राम सभा में एक प्राथमिक स्कूल है, इसको लेकर स्पष्ट तौर पर नियम भी बने हुए हैं। इन स्कूलों में 6 लाख से अधिक शिक्षक तैनात हैं। 

कई जगह ग्राम सभाओं में स्कूल ऐसे हैं जहाँ कुल जमा 20-30 बच्चे भी नहीं पढ़ते। लेकिन इन स्कूलों में बाकी स्कूलों की तरह सरकार को सभी सुविधाएँ देनी होती हैं। इनमें से कई स्कूल ऐसे हैं जहां मात्र 30 बच्चों पर 5-6 शिक्षक हैं।

वहीं दूसरी तरफ कई स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों की संख्या 100 के पार है लेकिन वहाँ शिक्षक की संख्या 3-4 है। ऐसे में इन स्कूलों में शिक्षक छात्र अनुपात बिगड़ा हुआ है। 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इसी समस्या को हल करने के लिए यह फैसला ले रही है। योगी सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जिन स्कूलों में 50 से कम बच्चे पढ़ते हैं, उन्हें पास के दूसरे विद्यालय में विलय कर दिया जाएगा। 

इन बच्चों को पास के ही दूसरे किसी प्राथमिक या जूनियर हाई स्कूल में स्थानांतरित किया जाएगा। योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को स्कूल जाने में कोई समस्या ना हो, इसके लिए भी दिशानिर्देश दिए गए हैं। 

योगी सरकार ने कहा है कि जिस भी स्कूल में विलय होना है, वह दूसरे स्कूल से … किलोमीटर दूर नहीं होना चाहिए। सरकार ने यह भी ध्यान रखने को कहा है कि यह विलय पड़ोस के गांव तक किया जाए। 

इसके अलावा यह भी कहा गया है कि बच्चों की सुविधा के लिए यह भी सुनिश्चित किया जाए कि दूसरे स्कूल के रास्ते में कोई प्राकृतिक बाधा कैसे नदी, पहाड़ या झरना आदि ना हो। यहां तक कि यदि दोनों स्कूल के बीच कोई ट्रेन पटरी भी है, तो उसे भी अवॉइड किया जाए। 

क्यों लिया योगी सरकार ने यह फैसला?

योगी सरकार ने इस फैसले के पीछे कई कारण दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं स्कूलों का विलय किया जा रहा है, जिनमें बच्चों की संख्या बहुत कम है। इन स्कूलों को चलाए रखना तार्किक नहीं है। 

सरकार का पक्ष है कि इन स्कूलों में शिक्षक तो कई हैं परंतु बच्चे ही नहीं हैं, ऐसे में शिक्षकों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा। इसके अलावा, कम बच्चे होने के बावजूद भी इन स्कूलों को खेल, इंफ्रा और बाकी चीजों से संबंधित बजट उतना ही जाता है, जितना किसी बड़े स्कूल को। 

यह भी सही से इस्तेमाल नहीं हो पाता जबकि बड़े स्कूलों में कहीं शिक्षकों की कमी है तो कहीं इंफ्रा नहीं है। यह समस्या यदि स्कूल आपस में विलय हो जाएं तो हल हो सकती है। इससे उन स्कूलों में शिक्षक पहुँच जाएंगे, जहाँ बच्चों की संख्या अधिक है और सरकार को भी बजट आवंटित करने में आसानी होगी। 

फैसले का विरोध क्यों?

इस फैसले का विरोध मुख्य तौर पर सरकारी शिक्षक कर रहे हैं। उनके इस विरोध में कई तर्क हैं। ऑपइंडिया ने इस मामले में शिक्षकों से बात भी की है। उनके विरोध का फोकस भर्ती कम होने, प्रमोशन घटने और कुछ हद तक बच्चों की समस्या से जुड़ा है। 

नाम ना बताने की शर्त पर एक शिक्षक ने हमें बताया कि हर स्कूल का अपना बजट होता है, वहाँ का एक प्रधानाचार्य होता है। यदि दो स्कूल आपस में विलय हो जाएंगे तो फिर प्रधानाचार्य तो एक ही रहेगा, ऐसे में जो शिक्षक आगे प्रमोशन का सोच रहे हैं, उन्हें अपने हित खतरे में लगते हैं। 

उत्तर प्रदेश विलय

इसके अलावा शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला उनका भविष्य भी अनिश्चितता की तरफ ले जाएगा। उनके अनुसार, वर्तमान में हर स्कूल पर यह फिक्स है कि कितने शिक्षक होंगे, लेकिन नई व्यवस्था में खत्म होने वाले स्कूलों से शिक्षक कहां जाएंगे, इस पर अनिश्चितता है। 

शिक्षकों का कहना है कि समस्या यहीं तक नहीं है। उनके अनुसार, अभी भले ही उन्हें दूसरे स्कूलों में अटैच किया जा रहा हो लेकिन आने वाले समय में सरकार स्क्रीनिंग कर के उन्हें हटा भी सकती है, ऐसे में उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। 

एक और मुद्दा नई भर्ती का है। शिक्षकों का दावा है कि स्कूलों की संख्या अगर कम की जाएगी तो इसका सीधा असर नई भर्ती की संख्या पर भी होगा। उनका कहना है कि इससे प्रदेश में नई शिक्षक भर्ती रुक जाएगी और रोजगार सृजन नहीं होगा। इसके अलावा बच्चों को दूर जाना पडेगा, यह भी एक कारण दिया जा रहा है।

हाई कोर्ट ने इन सब तर्कों ने नकार दिया है और अब विलय को हरी झंडी दिखा दी है।

 

‘शिव तांडव स्त्रोत’ और ‘सांबा रेगे’ से हुआ PM मोदी का स्वागत, राजकीय यात्रा पर पहुँचे ब्रासीलिया: द्विपक्षीय वार्ता में कई मुद्दों पर होगी चर्चा, BRICS में भारत ने रखा कड़ा रुख

रियो डि जेनेरियो से BRICS सम्मेलन में शिरकत करने के बाद मंगलवार (8 जुलाई 2025) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया पहुँचे। यहाँ पर उनके स्वागत में शिव तांडव स्त्रोतम और भारतीय शास्त्रीय नृत्यों से किया गया। उनके स्वागत में स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक ब्राजीलियाई सांबा रेगे का प्रदर्शन भी किया।

अपने इस दौरे में पीएम मोदी ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डि सिल्वा के साथ कई मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ता कर सकते हैं। इसके तहत ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी समेत कई मुद्दे शामिल होंगे।

पीएम मोदी 2 से 10 जुलाई 2025 तक 5 देशों की यात्रा पर हैं। इसके तहत वे घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो और अर्जेंटीना का दौरा कर ब्राजील पहुँच चुके हैं। इसके बाद पीएम मोदी नामीबिया जाएँगे।

पीएम मोदी ने सोमवार (7 जुलाई 2025) को ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में जलवायु सम्मेलन, पर्यावरण और वैश्विक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर बात की थी। इसके तहत उन्होंने कहा था कि कोरोना माहामारी से हमने सबक लिया है कि बीमारी पासपोर्ट की मोहताज नहीं होती। हमें पृथ्वी को स्वस्थ रखने के लिए मिलकर कोशिश करनी होगी।

BRICS सम्मेलन में विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने लगातार बढ़ते टैरिफ और नियमों के उल्लंघन पर चर्चा की। इसके बाद BRICS से जुड़ने की इच्छा रखने वाले देशों पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है। 2025 की शुरुआत में भी ट्रंप ने कहा था कि अगर BRICS देश डॉलर को कमजोर करने के प्रयास करते हैं तो अमेरिका की ओर से 100% टैरिफ लगाया जाएगा।

BRICS में पीएम मोदी ने किन मुद्दों पर की चर्चा

पीएम मोदी ने BRICS शिखर सम्मेलन में कई अहम बातों पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिहाज से BRICS रिसर्च सेंटर का प्रस्ताव देशों के सामने रखा ताकि सभी देश इस दिशा में बेहतर काम कर सकें।

इसके अलावा उन्होंने BRICS देशों की विविधता और सोच पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि BRICS देशों का एक दूसरे पर भरोसा करना ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। संसाधनों के दुरुपयोग पर उन्होंने कहा कि किसी भी देश को ये अधिकार नहीं है कि वो किसी भी संसाधन का उपयोग सिर्फ हथियार के तौर पर अपने फायदे के लिए उपयोग करें। इससे उनका सीधा इशारा चीन के रेयर अर्थ मेटल्स के ऊपर था।

इसके अलावा डिजिटल जानकारियों पर पीएम मोदी ने कहा कि हमें एक ऐसी प्रणाली स्थापित करनी चाहिए जिससे डिजिटली उपलब्ध जानकारियों की पुष्टि भी आसान हो और उनका दुरुपयोग भी न हो पाए। इसके तहत उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारत में एक बड़े सम्मेलन के आयोजित होने की की घोषणा भी की।

शांति के साथ आतंकवाद पर सख्ती की उठी माँग

जम्मू-कश्मीर का पहलगाम में हुए आतंकी हमलों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने आतंकवाद को मानवता के खिलाफ और दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को रोकने के लिए हरसमभव प्रयास किए जाने चाहिए। आतंकवाद के पीड़ितों और समर्थकों को एक समान व्यवहार नहीं मिलना चाहिए। राजनीतिक या व्यक्तिगत फायदे के लिए आतंकवाद को मौन समर्थन देना स्वीकार योग्य नहीं है।

छह दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली ब्रासीलिया यात्रा है। अपने दौरे के आखिरी चरण में पीएम मोदी 9 जुलाई 2025 को नामीबिया जाएँगे। वहाँ पीएम मोदी नामीबिया की संसद को भी संबोधित करेंगे।

ट्रंप ने 14 देशों पर बढ़ाया टैक्स, जवाबी कार्रवाई के लिए भी दे डाली धमकी : ग्लोबल टैरिफ से खुद को घाटे से उबारने की कोशिश में अमेरिका, 25 से 40% तक लागू कीं दरें

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 देशों के लिए टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की है। इनमें सबसे अधिक म्यांमार और लाओस पर 40% टैरिफ लगाई गई है। इसके अलावा जापान, कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, कजाकिस्तान और मलेशिया आदि देशों पर भी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ बढ़ाने के लिए 01 अगस्त 2025 का अल्टिमेटम भी दे दिया है।

सोमवार (07 जुलाई 2025) को डोनाल्ड ट्रंप ने इन सभी देशों को ट्रेड लेटर भेजा। इसकी जानकारी ट्रंप के एक्स हैंडल ट्रुथ सोशल पर भी दी गई। व्हाइट हाउस से जारी इस लेटर में डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाने को व्यापारिक संबंधों की मजबूती और प्रतिबद्धता करार दिया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले जापान और साउथ कोरिया पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया। इन दोनों देशों पर अब 25 % शुल्क लगेगा। सबसे ज्यादा टैरिफ म्यांमार और लाओस पर लगाई गई है। अमेरिका के साथ व्यापार करने के लिए इनको 40 % टैरिफ देनी होगी।

उधर, थाईलैंड और कंबोडिया पर 36% टैरिफ, बांग्लादेश और सर्बिया पर 35% टैरिफ, इंडोनेशिया पर 32% टैरिफ लगाई है। इसके साथ साउथ अफ्रीका और बोस्निया एंड हर्जेगोविना पर 30%टैरिफ का ऐलान किया है। अंत में मलेशिया, कजाकिस्तान और ट्यूनीशिया को सबसे कम 25% टैरिफ देना होगा।

टैरिफ की जवाबी कार्रवाई को लेकर दी चेतावनी

हर देश को भेजे गए पत्र में डोनाल्ड ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई को लेकर भी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा, “अगर किसी भी कारण से आप अपने टैरिफ बढ़ाने का फैसला करते हैं, तो आप उन्हें जितना बढ़ाएँगे, वह हमारे लगाए गए टैरिफ में जोड़ दिया जाएगा।”

ट्रंप ने आगे कहा, “कई सालों से चली आ रही टैरिफ और गैर-टैरिफ नीतियों और व्यापार बाधाओं को ठीक करने के लिए यह जरूरी था। इसकी वजह से ही अमेरिका को व्यापार में घाटा हुआ है। यह घाटा हमारी अर्थव्यवस्था और वास्तव में हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।”

भारत के साथ बेहतर व्यापार समझौता बेहद करीब

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 देशों के साथ टैरिफ बढ़ाने के ऐलान में भारत का नाम शामिल नहीं किया है। वहीं, भारत के साथ बेहतर व्यापार समझौते को बढ़ावा देने की बात कही है। ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर कहा, “हमने यूनाइटेड किंगडम के साथ डील की है, हमने चीन के साथ भी डील की है और अब हम भारत के साथ डील करने के बेहद करीब हैं।”

ट्रंप ने यह भी कहा, “हमने जिन देशों को टैरिफ लेटर भेजा है। उनके साथ भी मुलाकात की है और हमें नहीं लगता कि हम डील कर पाएँगे, इसीलिए उन्हें एक पत्र भेजा गया है। यही नहीं हम अन्य देशों को पत्र भेज रहे हैं, जिसमें उन्हें बताया जा रहा है कि उन्हें कितना टैरिफ देना होगा।”

ट्रंप ने 2 अप्रैल को किया था टैरिफ का ऐलान

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को दुनिया के अधिकतर देशों पर जवाबी टैरिफ लगाया था। इसमें भारत पर 26% टैरिफ लगाया गया था। हालाँकि, बाद में इसे 90 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया था ताकि सभी देश अमेरिका के साथ नए सिरे से समझौता कर सकें। ट्रंप ने 09 जुलाई 2025 आखिरी तारीख तय की थी, लेकिन अब नए टैरिफ ऐलान में इसे बढ़ाकर 01 अगस्त 2025 कर दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो की PM को दिया चाँदी का राम मंदिर, सरयू के पवित्र जल से भरा कलश: अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति को सूर्य की ऊर्जा से सराबोर मिथिला की मधुबनी पेंटिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 दिन की विदेश यात्रा पर हैं। इस दौरान पीएम पश्चिमी अफ्रीकी देश घाना, कैरिबियन देश त्रिनिदाद और टोबैगो, लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना और ब्राजील जा चुके हैं। आने वाले दिनों में अफ्रीकी देश नामीबिया का भी दौरा करेंगे। विदेश यात्रा पर पीएम देश के दिए तोहफे हमेशा चर्चा में रहते हैं।

इस बार भी प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की संस्कृति से जुडे़ खास तोहफे दिए हैं। इनमें अयोध्या राम मंदिर का सिल्वर प्रतिकृति, पवित्र जल से भरा कलश और मधुबनी कला को समर्पित पेंटिंग शामिल है। सभी तोहफों में भारत की संस्कृति की अद्भुत झलक है।

त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री को गिफ्ट किया चाँदी जड़ित राम मंदिर

पीएम मोदी ने विदेश दौरे में त्रिनिदाद और टोबैगो भी पहुँचे। यहाँ पीएम ने अभिवादन के तौर पर देश की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर को अयोध्या राम मंदिर का सिल्वर रेप्लिका गिफ्ट किया। साथ ही सरयू का पवित्र जल से भरा कलश भी भेंट किया।

यह रेप्लिका शुद्ध चाँदी से निर्मित है। जो कि मंदिर की पवित्रता, भक्ति और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। यह स्मृति सजाव से इतर अयोध्या की आध्यात्मिक विरासत और भारत की पवित्र परंपराओं का सम्मान करती है।

अर्जेंटीना की उप राष्ट्रपति को भेंट की मधुबनी पेंटिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्रा के दौरान अर्जेंटीना का भी दौरान किया। इस मौके पर पीएम ने अर्जेंटीना की उप राष्ट्रपति विक्टोरिया विलारुएल को मधुबनी पेंटिंग तोहफे में दी। पेंटिंग में सूर्य की कृति को उजागर करती है, जो ऊर्जा और जीवन का प्रतीक है।

मधुबनी पेंटिंग बिहार के मिथिला क्षेत्र की भारत के सबसे पुराने लोक कला परंपराओं में से एक खूबसूरती को प्रदर्शित करती है।

चलता रहेगा बुलडोजर, देवभूमि का स्वरुप नहीं बदलने देंगे: 4 साल पूरे होने पर ऑपइंडिया से बोले CM धामी, कहा- नहीं बदलने देंगे डेमोग्राफी

पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर 4 साल पूरे कर लिए हैं। उनकी सरकार मजारों, अवैध ढाँचों पर कार्रवाई, UCC जैसे कानून बनाने और डेमोग्राफी जिहाद की साजिशों पर कार्रवाई को लेकर चर्चा में रही है। इसके अलावा टूरिज्म प्रमोट करने, चारधाम यात्रा को सुगम बनाने से लेकर राज्य के स्थानीय लोगों के हितों को संरक्षित करने का भी काम धामी सरकार में हुआ है। ऑपइंडिया ने CM पुष्कर सिंह धामी से इन्हीं सब मुद्दों को लेकर विशेष बातचीत की है।

उत्तराखंड में 6500 एकड़ से अधिक जमीन को कब्जामुक्त करवाया जा चुका है और 500 से अधिक अवैध मजारें तोड़ी जा चुकी हैं। CM धामी ने ऑपइंडिया से कहा कि राज्य के भीतर अवैध ढाँचों पर इसी तरह बुलडोजर चलता रहेगा। CM धामी ने बताया कि सरकारी जमीन पर भी जो कब्जा था उसे हटा दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में अवैध ढाँचों पर हुई कार्रवाई को विधिसम्मत तरीके से किया गया है।

CM पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि उनके सारे काम सनातन को बढ़ावा देने वाले से ही जुड़े हैं। उत्तराखंड में डेमोग्राफी बदलाव पर भी उन्होंने स्पष्ट किया वह प्रदेश में यह बदलाव संभव नहीं होने देंगे। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में इस्लामी कट्टरपंथियों की घुसपैठ पर उन्होंने बताया कि अब लगातार उन्हें चिन्हित करने का प्रयास चल रहा है। CM धामी ने ऑपइंडिया को बताया कि लगातार ऐसे लोगों को पहचान कर उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड और बाकी कागज जब्त हो रहे हैं।

CM धामी ने यह भी बताया कि यह कार्रवाई सिर्फ चिन्हित कर घुसपैठियों को बाहर करने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो रही है, जिन्होंने यह कागज जारी किए। ऑपइंडिया से बातचीत में CM धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि जो उनके अतिक्रमण विरोधी अभियानों या फिर लैंड जिहाद आदि को रोकने का प्रयास कर रहे हैं वह बाधा डाल कर खुश रहने वाले हैं। उन्होंने बिना नाम लिए कॉन्ग्रेस पर हमला बोला और कहा कि उन्हें जनता लगातार जवाब दे रही है।

ऑपइंडिया से CM धामी ने राज्य में चल रहे विकास कार्यों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि आगामी अर्धकुम्भ के लिए उनकी सरकार ने अभी से तैयारी चालू कर दी है। उन्होंने बताया कि इस बार चारधाम में यात्रा करने वालों का आँकड़ा 38 लाख पहुँच गया है, लेकिन व्यवस्थाएँ और सुगम बनती रहें, इसके लिए लगातार इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है। कैंची धाम में लगने वाले जाम पर उन्होंने बताया कि बाईपास का काम तेजी से चल रहा है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

CM धामी ने महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर भी बात की और कहा कि सुरक्षा भी जरूरी है। उन्होंने बताया है कि उनकी सरकार आने वाले समय में इन विषयों पर और काम करने वाले हैं।

मजहब नहीं, भारत में ममदानी की ‘मूर्खता’ पर हो रही बात: लिबरल एजेंडे के लिए देश को बदनाम करना बंद करो निधि राजदान, मीरा नायर के बेटे के ‘इस्लाम’ से अमेरिका ही भयभीत

न्यूयॉर्क के मेयर चुनावों से चर्चा में आए जोहरान ममदानी को लिबरल और वामपंथी हर तरह से मीडिया में हीरो दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे लोगों में एक नाम निधि राजदान का भी है। निधि ने हाल में एक्स (पहले ट्विटर) पर जोहरान ममदानी के लिए लिखे एक विचार को शेयर किया। इसमें उन्होंने जोहरान ममदानी की प्रशंसा के बहाने भारत को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास किया।

यह वही निधि राजदान हैं जो कभी NDTV में काम करती थीं। फिर इन्होंने ऐलान किया था कि वह अब हार्वर्ड विश्वविद्यालय पढ़ाने जा रही हैं। बाद में पता चला था कि उन्हें इस संबंध में एक फर्जी मेल आया था और राजदान स्वयं एक फिशिंग अटैक का शिकार हो गईं थी। इससे उनकी काफी जगहंसाई हुई थी।

निधि राजदान ने क्या कहा?

पोस्ट में निधि राजदान ने गल्फ न्यूज पर लिखे अपने एक लेख को साझा किया। निधि राजदान ने इसमें कहा कि जोहरान ममदानी पर अमेरिका में चर्चा का कारण उनकी विचारधारा है जबकि भारत में ममदानी को लेकर होने वाली बात उनके मजहब तक केन्द्रित है। राजदान ने दावा किया कि कई लोग उसे पाकिस्तान से जोड़ रहे हैं।

राजदान ने लिखा है कि ममदानी से दक्षिणपंथी इसलिए इतनी नफरत करते हैं क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक हैं और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू की गाजा पर कार्रवाई का विरोध कर चुके हैं।

अपने लेख में उन्होंने ममदानी के वादों की तुलना आम आदमी पार्टी के वादों से की और ये दिखाया कि वो कितनी कल्याणकारी योजनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। आगे ममदानी ने कहा कि भारत में सिर्फ ममदानी का मजहब देखा जा रहा है, जबकि अमेरिका में उनके विचार क्रान्ति ला सकते हैं।

निधि राजदान ने यह दावा किया कि ममदानी की बढ़ती लोकप्रियता से उनके विरोधी रिपब्लिकन तो क्या, उनकी पार्टी के ही डेमोक्रेट भी डरे हुए हैं। निधि राजदान ने इसी को आधार बनाते हुए यह ज्ञान दिया कि भारतीयों को इसी तरह सीख लेनी चाहिए और ममदानी के मजहब पर बात नहीं होनी चाहिए।

अमेरिका में ममदानी का मजहब ही चर्चा में

दिलचस्प बात ये है कि भारत को कोसने के चक्कर में निधि राजदान ने अमेरिका से आने वाली जोहरान ममदानी से जुड़ी खबरों पर आँख मूँद ली है। चूँकि अगर गौर से देखती तो उन्हें ये पता चलता कि भारत से कहीं अधिक जोहरान ममदानी के मजहब को लेकर उतना नहीं उछाला गया जितना अमेरिका में इसे लेकर बातें हो रही हैं।

अमेरिकी खुलेआम उनके इस्लाम से जुड़ाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि 24 साल पहले मुस्लिमों के समूह ने 2753 लोगों को 9/11 पर मार गिराया था और अब एक मुस्लिम न्यूयॉर्क सिटी चलाएगा?

अमेरिका में उनके बयानों को देखते हुए उन्हें इस्लामिक समर्थक नेता के तौर पर माना जाने लगा है। लोग उन पर खुलेआम नस्लीय टिप्पणियाँ कर रहे हैं। नवंबर में न्यूयॉर्क का मेयर चुन लिया जाएगा। इसे देखते हुए ममदानी को अमेरिका में 9/11 घटना की याद दिलाई जा रही है। लोग कह रहे हैं कि आतंकियों ने 2753 लोगों को मार दिया था। अब ऐसा ही ‘मुस्लिम सोशलिस्ट’ न्यूयॉर्क का मेयर बनने की दौड़ में है। यहाँ तक कि डोनल्ड ट्रंप जूनियर भी कह रहे हैं कि ‘न्यूयॉर्क शहर ढह जाएगा।’

रिपब्लिकन सांसद एंडी ओगल्स ने यहाँ तक कह दी है कि जोहरान ममदानी की नागरिकता रद्द कर दी जानी चाहिए। ममदानी को ‘छोटा मुहम्मद’ कहकर संबोधित किया जा रहा है। उन्होंने एक्स पर लिखा है, ”जोहरान ‘लिटिल मुहम्मद’ ममदानी यहूदी विरोधी, समाजवादी और कम्युनिस्ट है, वह बेहतरीन सिटी न्यूयॉर्क को बर्बाद कर देगा। उसे वापस भेज देना चाहिए। इसीलिए मैं नागरिकता छीनने की प्रक्रिया शुरू करने की माँग कर रहा हूँ।”

लोग यहाँ तक कह रहे हैं कि अगर न्यूयॉर्क मेयर का चुनाव जोहरान ममदानी जीतते हैं तो न्यूयॉर्क को पहला ‘मुस्लिम मेयर’ मिल जाएगा। यहाँ तक कि खुद ममदानी से स्वीकार किया है कि अमेरिका में मुस्लिम होने की वजह से कई तरह के हमलों का उन्हें सामना करना पड़ा है।

अमेरिका में यहूदी विरोधी बयान को लेकर कई लोगों ने कहा है कि न्यूयॉर्क में यहूदी विरोध नहीं चलेगा। वहीं गाजा हमला, ईरान हमले को लेकर इजरायल की आलोचना करने के ममदानी के तरीके पर सवाल उठाए हैं।

ममदानी ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि अगर उन्हें न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का स्वागत करना पड़ा तो वे क्या करेंगे? इसके जवाब में ममदानी ने कहा था कि वो नेतन्याहू को गिरफ्तार कर लेंगे। ममदानी के बयानों की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ी आलोचना की थी और यहाँ तक कहा था कि अगर ममदानी यूयॉर्क के मेयर बनते हैं तो वे फंड रोक देंगे।

ममदानी का इतिहास भारत विरोध से भरा

अमेरिका में सोशल मीडिया इन सब खबरों से पटा पड़ा है। लेकिन भारत में सोशल मीडिया से लेकर ममदानी के बयानों पर बात हुई है। ममदानी के भारत विरोधी और पीएम मोदी के खिलाफ दिये गए बयानों की न सिर्फ भारत में आलोचना हुई, बल्कि उनके निर्वाचन क्षेत्र न्यूयॉर्क में रहने वाले भारतीय अमेरिकी समुदाय के करीब 2 लाख से अधिक लोगों ने ममदानी की आलोचना की थी।

ममरानी ने 2002 के गुजरात दंगों को लेकर पीएम मोदी को लगातार निशाना बनाया है। ममदानी ने पीएम मोदी को ‘युद्ध अपराधी’ और ‘मुसलमानों के नरसंहार’ करने वाला तक बताया है। इस दौरान सिर्फ पीएम मोदी पर हमला नहीं किया गया, बल्कि हिंदू धर्म और संस्कृति को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई है।

ममदानी ने एक फोरम में पीएम मोदी की तुलना इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से की और दोनों को ‘युद्ध अपराधी’ करार दे दिया था।

भारत में ममदानी की ‘सोच’ पर चल रही चर्चा

भारत में ममदानी को लेकर जब भी बात हुई है तो उसके विचारों और बयानों को ही आधार बनाया गया है ना कि उसके मजहब को निशाना बनाया गया है। फिल्ममेकर मीरा नायर के बेटे ममदानी के विचारों की आलोचना ऑपइंडिया ने भी की है। ऑपइंडिया ने पीएम मोदी को फासिस्ट कहने और और भारत विरोधी खासकर हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलने पर उसकी आलोचना की थी ना कि उसके मजहब को निशाना बनाया था।

भारत में ममदानी की आलोचना का केंद्र उसके वादे भी रहे हैं। ममदानी अपने चुनाव में न्यूयॉर्क के भीतर राशन की दुकानें खुलवाने, फ्री बस चलवाने, किराए बढ़ाने पर रोक लगाने और टैक्स बढ़ाने के वादे कर रहे हैं। भारत में आलोचना हो रही है कि यह आइडिया सालों पहले भारत में आजमाए जा चुके हैं और फेल भी हुए हैं। ममदानी लेकिन अब उन्हीं कथित समाजवादी आइडिया को अमेरिका भीतर नई पैकिंग में बेच रहे हैं। इसकी भारत में काफी आलोचना हुई थी।

भारतीयों नहीं, निधि राजदान की नीयत में खोट

बात दरअसल ये है कि निधि राजदान जैसे लिबरल पत्रकार किसी दूसरे लिबरल की आलोचना स्वीकार करने में सक्षम नहीं हैं। भले ही इसके लिए उन्हें भारत को ही नीचा क्यों ना दिखाना पड़े। निधि राजदान अगर असल बात पकड़ पातीं तो उन्हें पता चलता कि भारत में बिल्कुल पिन पॉइंट तरीके से ममदानी की आलोचना हुई है। यदि भारत में आलोचना का अकेला एक आधार किसी नेता का मुस्लिम होना होता तो भारतीय दिन रात फिर सऊदी अरब के प्रधानमंत्री या UAE के नेताओं की आलोचना करते रहते।

भारतीयों ने शायद ही कभी इन नेताओं की आलोचना की हो। यहाँ तक कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की भी आलोचना का केंद्र उसकी भारत विरोधी हरकतें और बयान होते हैं ना कि उसका मुस्लिम होना। ऐसे में यह कहना कि भारतीयों की आलोचना का दायरा सिर्फ मजहब तक रहता है एकदम आधारहीन और खुद की सतही सोच का नतीजा है। अच्छा होगा कि निधि राजदान थोड़ा असलियत को समझतीं और खुद आलोचना करते समय यह बौद्धिक जुगाली ना करके ढंग की बात कहतीं।

मुहर्रम जुलूस को भाइयों के साथ देख रहे थे अजय यादव, तलवार से काट कर मार डाला: BJP बोली- तेजस्वी यादव ने लगवाए ‘शहाबुद्दीन जिंदाबाद’ के नारे, अब हिंदुओं पर हो रहे हमले

बिहार के मोतिहारी में मुहर्रम जुलूस में विवाद के बाद हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। मृतक युवक की पहचान 22 वर्षीय अजय यादव के रूप में हुई है। इस्लामी कट्टरपंथियों ने अजय यादव पर तलवार से सिर पर वार किया। घटना में दो अन्य हिंदू युवक घायल हुए हैं। जबकि अजय की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना मोतिहारी जिले के मेहसी थाना क्षेत्र के कनकट्टी बाजार की है। पुरानी रंजिश को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों ने मुहर्रम जुलूस की आड़ में अजय यादव की हत्या की साजिश रची। रविवार (06 जुलाई 2025) शाम 7 बजे क्षेत्र में मुहर्रम के ताजिया का जुलूस निकाला जा रहा था।

जुलूस में शिया मुस्लिम की भीड़ लाठी-डंडे, तलवार और बरछी लेकर करतब दिखा रहे थे। वही देखने अमवा निवासी अजय यादव, भाई धनंजय यादव और चचेरे भाई नवल किशोर यादव पहुँचे थे। तभी जुलूस में शामिल करतब दिखाने वाले लोगों से अजय यादव की कहासुनी हो गई। तभी तलवार भांज रहे एक मुस्लिम ने अजय के गले पर तलवार से वार किया। अजय के साथियों से भी मारपीट की।

घटना में अजय यादव बुरी तरह घायल हो गया, जिसके बाद उसे और बाकी दोनों घायलों को मेहसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहाँ डॉक्टर हरेंद्र कुमार रवि ने अजय यादव को मृत घोषित कर दिया। वहीं, अजय के चचेरे भाई नवल किशोर को मुजफ्फरपुर SKMCH में बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।

वहीं, अजय के भाई धनंजय यादव ने घटना की पूरी जानकारी दी। धनंजय यादव ने कहा, “भैया पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। तलवार से सिर पर पीछे से मार दिया। गाँव का ही निजामुल आया और उन्हें गोद में उठा लिया। जब मना किया तो मुझे भी मारा।”

पुरानी रंजिश को लेकर मुहर्रम जुलूस की आड़ में रची हत्या की साजिश

घटना के बाद क्षेत्र में भारी सुरक्षाबल को तैनात किया गया है। मोतिहारी SP स्वर्ण प्रभात ने बताया कि मेहसी थाना क्षेत्र में घटना मोहर्रम जुलूस में हुई, लेकिन मोहर्रम से जुड़ी नहीं है। पुरानी रंजिश को दोनों पक्षों की आपस में मारपीट हो गई। 15 दिन पहले भी आपसी विवाद हुआ था। उस मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

वहीं, मृतक अजय यादव के भाई धनंजय यादव ने बताया कि पंचायत चुनाव में चचेरे भाई राजेश यादव प्रत्याशी थे। चुनाव के दौरान उनका निजामुद्दीन से विवाद हुआ था। तभी से मनमुटाव चल रहा है। अब निजामुद्दीन ने साजिश रचकर मुहर्रम जुलूस की आड़ में भाई अजय यादव की हत्या कर दी।

बता दें कि पुलिस ने मामले में शामिल 12 लोगों को हिरासत में लिया है। साथ ही इलाके में शांति का माहौल बनाए रखने की अपील की है।

BJP ने तेजस्वी यादव की चुप्पी पर किया सवाल

मोतिहारी में अजय यादव की हत्या पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने चुप्पी साधी हुई है। इस पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राजद को घेरा है। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने तेजस्वी यादव को यादव समाज का साथ न देने का आरोप लगाया है।

अमित मालवीय ने ट्वीट कर लिखा, “तेजस्वी यादव ने हाल ही में मंच से ‘शाहबुद्दीन ज़िंदाबाद’ के नारे लगवाए और उसके तुरंत बाद ही बिहार में अराजक तत्वों ने मुहर्रम के जुलूस की आड़ में हिंदू समाज पर हमले शुरू कर दिए।”

उन्होंने मोतिहारी में अजय यादव की हत्या का मामला बताते हुए कहा, “मोतिहारी में ऐसी ही एक घटना में अजय यादव की नृशंस हत्या कर दी गई। तेजस्वी यादव, जो स्वयं यादव समाज से आते हैं, ने अब तक इस हत्या पर एक शब्द नहीं बोला। क्या राजद की राजनीति में मुस्लिम तुष्टिकरण इतना हावी हो गया है कि यादव समाज की जान की कोई कीमत ही नहीं रह गई?”

तेजस्वी यादव के शहाबुद्दीन प्रेम को लेकर अमित मालवीय ने घेरते हुए कहा, “मुहर्रम के नाम पर हाल के दिनों में बिहार के कई जिलों में हुई हिंसा उसी शाहबुद्दीनवादी मानसिकता का परिणाम है, जिसे तेजस्वी यादव मंच से महिमामंडित कर रहे हैं।”

तेजस्वी यादव ने ‘शहाबुद्दीन जी अमर रहे’ के लगाए थे नारे

बता दें कि अमित मालवीय जिस शहाबुद्दीन की बात कर रहे हैं। वो वही शहाबुद्दीन है, जिसके अमर रहने के नारे तेजस्वी यादव ने राजद के स्थापना दिवस पर लगाए थे। और यह वही शहाबुद्दीन है, जिसका बिहार के सीवान जिले में राज चला करता था। गैंगस्टर के नाम पर शहाबुद्दीन ने कई मासूम लोगों की जान ली। इनमें चंदा बाबू के तीन बेटें भी शामिल हैं, जिनको तेजाब से नहला दिया गया था।

इसी शहाबुद्दीन के समर्थन में तेजस्वी यादव ने नारे लगाए। जबकि तेजस्वी यादव अपने ही समाज के युवक अजय यादव की इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा की गई हत्या पर खामोश हैं।