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पीएम मोदी को ब्राजील में मिला सर्वोच्च सम्मान, बोले- दोस्ती का है प्रतीक: दोनों देशों के बीच 2000 करोड़ रुपए का होगा व्यापार, वीजा की प्रक्रिया होगी आसान

पाँच देशों की यात्रा पर निकले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना के बाद ब्राजील में भी सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया है। मंगलवार (8 जुलाई 2025) को ब्राजील के राष्ट्रपति इनासियो लूला डि सिल्वा ने ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ से सम्मानित किया।

इससे पहले पीएम मोदी को 16 जून 2025 को साइप्रस देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस तृतीय’ से सम्मानित किया गया था। ब्राजील में पीएम मोदी मे रियो डि जेनेरियो में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसमें उन्होंने पर्यावरण, जलवायु सम्मेलन और स्वास्थ्य समेत कई वैश्विक मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। 2026 में BRICS शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित होगा।

इसके बाद पीएम मोदी राजकीय दौरे पर ब्राजील की राजधानी ब्रसीलिया पहुँचे। यहाँ पर ब्राजील के सर्वोच्च सम्मान मिलने के बाद पीएम मोदी ने इसे दोस्ती का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति लूला और ब्राजील के लोगों का भारतीयों के प्रति गहरा लगाव है। आने वाले समय में इस दोस्ती के साथ हम और अधिक ऊँचाइयों को छुएँगे और साथ मिलकर काम करेंगे।”

ब्रासीलिया पहुँचने पर प्रवासी भारतीयों ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी के स्वागत में शिव तांडव स्त्रोत और पारंपरिक ब्राजीलियाई सांबा रेगे का प्रदर्शन भी किया।

क्या है सर्वोच्च सम्मान का महत्व

पीएम मोदी को मिले सर्वोच्च सम्मान का मिलना वैश्विक स्तर पर काफी अहम बात है। ये सम्मान असल में उन व्यक्तियों को दिया जाता है जो दो देशों के बीच संबंधों को बेहतर करने के में अहम भूमिका निभा रहे हों। ब्राजील के इस सम्मान का महत्व दोनों देशों के बीच सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में मजबूती लाने के लिहाज से है।

ब्राजील का ‘नेशनल ऑर्डर ऑफ सदर्न क्रॉस’ सम्मान उनके देश का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है। 1822 में शुरू हुए इस सम्मान से ब्राजील अपने वैश्विक रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने की कोशिश और आभार व्यक्त करता है। ब्राजील ने इस सम्मान से दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला, अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी आइजनहावर और महारानी एलिजाबेथ द्वितीय आदि विश्व नेताओं को भी सम्मानित किया है।

पीएम मोदी ने क्या कहा

ब्राजील के परिपेक्ष्य में पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच खेती और पशुपालन का पुराना रिश्ता रहा है। इस कड़ी में अब हम आगे खाद्य प्रसंस्करण और कृषि अनुसंधान के लिए भी काम करेंगे। इसके अलावा दोनों देश मिलकर चिकित्सा और आयुर्वेद के लिए भी आगे काम करेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार को अगले 5 वर्षों में 2000 करोड़ रुपए (20 बिलियन डॉलर) तक ले जाने का प्रयास है।

ब्राजील के सम्मान में पीएम मोदी ने कहा कि हम चाहते हैं कि वीजा काउंटर की लंबी लाइन के साथ भारत और ब्रजील के संबंध बेहतर हों। दोनों देशों के बीच खेलों की रुचि के मिलने की बात पर उन्होंने कहा कि फुटबाल की जीत की तरह दोनों देशों के बीच भी जोश भरा रहे और ब्राजील के सांबा रेगे की तरह दिल जुड़ें। इसके लिए हम पर्यटकों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और खेल से जुड़े लोगों के लिए प्रक्रिया सरल करेंगे।

ब्राजील की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी नामीबिया के दौरे को लिए निकल गए हैं।

व्यापार में निष्पक्षता या अमेरिका को घाटे से बचाना: BRICS देशों पर 10% टैरिफ के बाद भारत पर कितना पड़ेगा असर, ग्लोबल ट्रेड वार में ट्रंप ने दिया अल्टीमेटम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 अगस्त 2025 से अपने व्यापारिक साझेदारों से सभी टैरिफ भुगतान शुरू करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि इस तारीख में कोई बदलाव या छूट नहीं होगी।

ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर यह चेतावनी साझा की है। यह घोषणा 14 देशों को निशाना बनाने वाले नए टैरिफ खतरों के बाद आई है, जो उनके प्रशासन के ग्लोबल ट्रेड वॉर में एक बड़ा कदम है।

BRICS देशों पर टैरिफ

ट्रम्प ने BRICS देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) पर जल्द ही 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। उनका आरोप है कि BRICS समूह अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है। भारत ने पहले ही एक ‘उचित प्रस्ताव’ पेश किया है, जिसकी समीक्षा अब अमेरिकी राष्ट्रपति करेंगे।

यह समझौता दोनों देशों के बीच 12878 करोड़ ($150 बिलियन) से 171711 करोड़ ($200 बिलियन) के सामान व्यापार को कवर कर सकता है। यदि भारत पर भी 10% टैरिफ लगता है तो कुल 26% टैरिफ भारत को देना पड़ सकता है।

कुछ देशों को अधिक टैरिफ

लाओस और म्यांमार को 40% के साथ उच्चतम टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। थाईलैंड और कंबोडिया पर 36% टैरिफ लगेगा, जबकि बांग्लादेश और सर्बिया पर 35%।

ट्रम्प ने कहा कि वे व्यापार में निष्पक्षता लाना चाहते हैं और अमेरिकी कंपनियों, फैक्ट्री और जॉब्स की रक्षा करना चाहते हैं। ट्रंप का मानना है कि पिछले कुछ सालों से अन्य देश अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं।

टैरिफ रेट और प्रभावित देश

कई देशों को अलग-अलग टैरिफ रेट का सामना करना पड़ेगा

  • 40% टैरिफ – लाओस और म्यांमार
  • 36% टैरिफ – थाईलैंड और कंबोडिया
  • 35% टैरिफ – बांग्लादेश और सर्बिया
  • 32% टैरिफ – इंडोनेशिया
  • 30% टैरिफ – दक्षिण अफ्रीका और बोस्निया और हर्ज़ेगोविना
  • 25% टैरिफ – मलेशिया, ट्यूनीशिया, जापान, दक्षिण कोरिया और कजाकिस्तान

जवाबी टैरिफ पर चेतावनी

डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई देश अमेरिकी टैरिफ के जवाब में अपने चार्ज बढ़ाता है तो उसे और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

ट्रंप ने जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को बताया है कि अगर वे ऐसा करते हैं तो अमेरिका उनके सामान पर लगने वाले नए चार्ज को और बढ़ा देगा।

बता दें कि तांबा पर 50% टैरिफ लगाने की बात कही गई है। फार्मास्युटिकल इमपोर्ट पर 200% तक ‘बहुत-बहुत हाई रेट’ का संकेत दिया गया है।

भारत के साथ व्यापार समझौता

भारत के साथ व्यापार समझौते पर अंतिम फैसला आना बाकी है। भारत ने एक अंतिम प्रस्ताव दिया है, जिसमें कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्र शामिल नहीं होंगे।

अमेरिका अपने मेडिकल डिवाइस एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स पर कम टैरिफ चाहता है, जबकि भारत टेक्सटाइल एक्सपोर्ट के लिए बेहतर अवसर चाहता है।

ट्रम्प ने कहा कि यह समझौता इस महीने या उनकी भारत यात्रा के दौरान हो सकता है।

वॉल स्ट्रीट की प्रतिक्रिया

ट्रम्प के टैरिफ पत्रों को साझा करने के बाद शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊँचाई से गिर गए और अमेरिकी डॉलर में वृद्धि हुई।

जापान, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों पर टैरिफ लगने से उनकी मुद्राओं में गिरावट आई।

कहीं रोकी ट्रेन, कहीं चक्का जाम… ‘बिहार बंद’ कर INDI गठबंधन ‘लोकतंत्र’ का बजा रहा गाना: गाँधी सेतु बंद-हाईवे पर रोकी गाड़ियाँ, राहुल गाँधी के ‘स्वागत’ में तेजस्वी कर रहे जनता को हलकान

विपक्षी INDI गठबंधन ने बुधवार (09 जुलाई 2025) को वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर बिहार बंद का ऐलान किया है। इसका असर सुबह से ही दिखने लग गया। बिहार के कई जिलों में कार्यकर्ता चक्का जाम कर रहे हैं। कई रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन को रोककर सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए।

पटना के मनेर में INDI गठबंधन कार्यकर्ताओं ने NH 30 को जाम कर आगजनी की। उधर, महात्मा गांधी सेतु पर कार्यकर्ता विरोध-प्रदर्शन किया, जिसके बाद सेतु को बंद कर दिया है।

उधर, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी भी दिल्ली से पटना के लिए रवाना हो गए है। यहाँ राष्ट्रीय लोकदल पार्टी (राजद) नेता तेजस्वी यादव के साथ वोटर लिस्ट का विरोध करेंगे। पटना में इनकम टैक्स गोलंबर से निर्वाचन कार्यालय तक मार्च करेंगे।

बिहार में रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन

बिहार बंद के तहत राजद कार्यकर्ताओं ने जहानाबाद में कोर्ट रेलवे स्टेशन पर पटना-गया पैसेंजर ट्रेन को रोकने की कोशिश की। यहाँ रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के सामने आकर प्रदर्शन किया। आरा में जगदीशपुर से राजद के पूर्व विधायक के भाई दिनेश ने कार्यकर्ताओं संग बिहिया स्टेशन पर श्रमजीवी एक्सप्रेस को रोककर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

इसके अलावा दरभंगा में जयनगर से पटना जाने वाली नमो भारत ट्रेन को स्टेशन पर रोका गया। राजद सहित महागठबंधन के कार्यकर्ता ट्रेन के आगे खड़े हो गए और सरकार के विरोध में नारे लगाए।

तेजस्वी यादव ने की लोगों से अपील

बिहार बंद के ऐलान के बाद बुधवार (09 जुलाई 2025) को तेजस्वी यादव ने लोगों से लोकतंत्र को बचाने तक की अपील कर दी। उन्होंने बीजेपी की साजिश बताते हुए बिहार के लोगों से बिहार बंद और चक्काजाम में शामिल होने की बात कही। उन्होंने इस संबंध में एक्स हैंडल पर ट्वीट किया।

तेजस्वी यादव ने कहा, “बिहार बंद और चक्काजाम में शामिल होइए और लोकतंत्र को बचाइए! गरीबों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को वोटर लिस्ट से बाहर करने की चुनाव आयोग और बीजेपी की साजिश को हम कामयाब नहीं होने देंगे! आज नहीं जागे तो कल वोट का अधिकार भी छिन जाएगा..!!”

तेजस्वी यादव ने ‘बिहार बंद’ का किया था ऐलान

राजद नेता तेजस्वी यादव ने 08 जुलाई 2025 को ‘संपूर्ण बिहार बंद’ का ऐलान किया था। इस संबंध में तेजस्वी यादव ने अपने अधिकारिक एक्स हैंडल पर ट्वीट किया था। उन्होंने बिहार बंद का ऐलान INDI गठबंधन के आह्वान पर किया था।

तेजस्वी यादव ने ट्वीट में लिखा, 09 जुलाई 2025 को INDI गठबंधन के आह्वान पर- संपूर्ण बिहार बंद! तेजस्वी यादव और राहुल गाँधी के नेतृत्व में हम लड़ेंगे।” उन्होंने यह भी कहा, जब गरीब की आवाज को वोटर लिस्ट से मिटाया जाए, तो सड़कों पर उतरना मजबूरी नहीं, जिम्मेदारी बन जाती है।”‘

क्यों कर रहे ‘बिहार बंद’ और चक्काजाम ?

INDI गठबंधन ने बिहार बंद और चक्काजाम का ऐलान किया। दरअसल, गठबंधन में शामिल पार्टियाँ वोटर लिस्ट रिवीजन पर तत्काल रोक लगाने की माँग कर रहा है। गठबंधन चाहता है कि वोटर लिस्ट रिवीजन बिहार विधानसभा चुनाव के बाद किया जाए।

उन्होंने कहा कि जिन 11 दस्तावेजों की माँग की जा रही है, वह गरीबों के पास नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि इससे करोड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से कट सकते हैं।

वैध मतदाता का नाम नहीं कटेगा

चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि वोटर लिस्ट रिवीजन का काम आर्टिकल-326 और लोक प्रतिनिधित्व कानून के दायरे में ही किया जा रहा है। इससे किसी वैध मतदाता का नाम नहीं कटेगा। बल्कि विदेशी घुसपैठियों सहित वोटर लिस्ट में गलत तरीके से नाम जुड़वाने वाले ही केवल बाहर होंगे।

जिस पुलवामा अटैक में बलिदान हुए 40 CRPF जवान, उसके लिए विस्फोटक Amazon से आया: FATF का खुलासा, बताया- गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाले आतंकी को PayPal से भेजे पैसे

दुनिया में टेरर फाइनेंस पर नजर रखने वाली संस्था FATF यानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि हथियारों की खरीदारी के लिए आतंकी संगठन अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन पेमेंट सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत में हुए दो आतंकी हमले का दिया उदाहरण

पुलवामा हमले के लिए अमेजन से एल्यूमिनियम मँगाया गया था जिससे विध्वंस करने की क्षमता बढ़ गई, वहीं गोरखनाथ मंदिर पर हुए हमले में आतंकियों को PayPal और VPN का उपयोग करके करीब 6.7 लाख रुपए का पेमेंट किया गया। FATF ने अपनी रिपोर्ट में इन दोनों आतंकी घटनाओं का जिक्र किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 10 सालों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन इतना सस्ता और तेज हो जाएगा कि आतंकी 3डी प्रिंटेड हथियार, कैमिकल और दूसरे सामान आसानी से दुनिया के किसी भी भाग में बैठ कर मँगा सकेंगे। इसके लिए फिनटेक और डिजिटल पेंमेंट्स करना काफी आसान हो जाएगा।

पुलवामा हमले के लिए अमेजन का इस्तेमाल

2019 में जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ के जवान बलिदान हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में मौजूद जैश ए मोहम्मद ने ली थी। FATF ने कहा कि सीआरपीएफ के काफिले पर हमला करने के लिए एल्यूमिनियम पाउडर ई कॉमर्स से अमेजन प्लेटफॉर्म से खरीदा गया था। इस पाउडर का इस्लेमाल विस्फोटक की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया गया। ये ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उदाहरण है।

गोरखनाथ मंदिर पर हमले के लिए इंटरनेशनल फंडिंग

अप्रैल 2022 में गोरखनाथ मंदिर पर हमला किया गया था। इसमें शामिल आतंकियों के संबंध इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से जुड़े थे। इस हमले में 6.69 लाख रुपए की इंटरनेशनल टेरर फंडिंग हुई थी। ये पैसा विदेशी खातों से आया था। इसके लिए पे पाल और वीपीएन का इस्तेमाल किया गया।

एफएटीएफ के मुताबिक ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म पर ट्रैकिंग करना आसान नहीं होता और इसके लिए नकली नाम पता से लेकर फर्जी अकाउंट तक का इस्तेमाल होता है। यहाँ तक कि कुछ सरकारें भी आतंकी संगठनों को मदद देती हैं।

भारत पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को इन आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार मानता है क्योंकि आतंकियों को सीमा पार से पाकिस्तान हर तरह से सपोर्ट करता रहा है। आतंकियों की फंडिंग, उन्हें पनाह देना और हथियार मुहैया करना सबकुछ पाकिस्तान करता रहा है।

FATF क्या है?

FATF यानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स एक इंटरनेशनल संगठन है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों की आर्थिक मदद करने वाले और उससे निपटने के लिए वैश्विक मानकों को निर्धारित करता है. यह 1989 में स्थापित किया गया था।

RJD के बिहार बंद का मतलब- गुंडई की छूट, क्या चुनाव से पहले राज्य को हिंसा की आग में झोंकना चाहते हैं राहुल गाँधी-तेजस्वी यादव? बोले राजनीतिक विश्लेषक- विपक्षी प्रोपेगेंडा का जमीन पर नहीं असर

बिहार में विपक्षी दलों ने बुधवार (9 जुलाई, 2025) को बंद का ऐलान किया है। इस बंद का ऐलान चुनाव आयोग के मतदाता सूची के निरीक्षण के फैसले के खिलाफ किया गया है। इस बिहार बंद में शामिल होने के लिए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी भी पहुँच रहे हैं। बताया गया है कि राहुल गाँधी एक मार्च का नेतृत्व करेंगे, जो राजधानी पटना में निकाला जाएगा। राजद नेता तेजस्वी यादव भी उनके साथ रहेंगे। चुनाव आयोग के फैसले पर हल्ला मचाने की कड़ी में विपक्ष का यह सबसे नया कदम है।

बिहार में चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया पर महागठबंधन पूरा माहौल तैयार करना चाहता है। चुनाव आयोग ने जबसे मतदाताओं की सूची का निरीक्षण करने का काम चालू किया है, तब से ही बयानों से लेकर कोर्ट तक इस मुद्दे को उछाला जा रहा है। राजद तो इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सामने भी पहुँच गई है। चुनाव आयोग ने लगातार इस मामले में इन सबके द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को लेकर स्पष्टीकरण दिए हैं, लेकिन यह पार्टियाँ इसे भुनाने के प्रयास में हैं।

इसको लेकर वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हर्षवर्धन त्रिपाठी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, जिस तरीके से चुनावों से पहले चुनाव सुधार की प्रक्रिया पर चुनाव आयोग बढ़ रहा है, मेरी समझ में बिहार में यह पहली बार हो रहा है। ये पहले से चुनाव आयोग को बदनाम करने की साजिश है और इससे पहले चुनावों के बाद दूसरे राज्यों में भी ऐसी ही चीजें हुई हैं।”

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में सबसे बड़ा मतदाता होता है, ऐसे में वोटरों की सूची को सही करने के प्रयास का, जिस तरीके से विरोध हो रहा है, उससे यह भी संदेह हो रहा है कि कहीं इन गडबडियों के पीछे विपक्ष और इन्हीं राजनीतिक दलों का हाथ तो नहीं था।”

चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी पार्टियों का दावा है कि यह मुस्लिम, यादव या फिर दलित वोटों को काटने का प्रयास है। एक तरह से यह पार्टियाँ यह बता रहीं हैं कि यह सारे वोट लिखित रूप से उनके हैं और कथित तौर पर इनके कट जाने से उन्हें नुकसान होगा। इन विपक्षी दलों को समझना चाहिए कि किसी भी वोटर को अपना पक्का वोटबैंक बताना ना केवल मतदाता के वोट का अपमान है बल्कि चुनावी प्रक्रिया पर भी बट्टा लगाने जैसी बात है।

वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने विपक्ष के दावों को नकारते हुए कहा,”ये मेरा मतदाता, वो तेरा मतदाता, ये आप लोकतंत्र में कैसे तय करेंगे। आज कहा जा रहा है कि प्रवासी मतदाता सत्यापन के लिए कैसे आएँगे, तो यह कैसे माना जाए कि वह मतदान के लिए भी आएँगे।”

इस रैली के पहले चुनाव आयोग ने एक आँकड़ा देते हुए बताया है कि राज्य में अब तक लगभग 3.5 करोड़ से अधिक फॉर्म इकट्ठा किए जा चुके हैं और यह प्रक्रिया लगभग 50% पूरी हो गई है जबकि इसकी अंतिम तारीख 25 जुलाई, 2025 को तय की गई है। चुनाव आयोग के इस आँकड़े की मानें तो बिहार में मतदाता अपने अधिकार के प्रति जागरूक हैं और लगातार इस प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं, भले ही विपक्षी पार्टियाँ कुछ भी दावे करती रहें।

वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने इस मुद्दे को लेकर कहा, “मेरी समझ में इसका (चुनाव आयोग की प्रक्रिया के विरोध का) कोई जमीनी असर बिहार में चुनाव पर नहीं दिखेगा। इसके विरोध में जो बंद बुलाया गया है, वो इन लोगों ने अपने काडर को चार्ज करने के लिए और सत्ता से लम्बे समय से बाहर है, इसलिए उनमें उत्साह भरने के लिए आयोजित किया गया है। यदि विपक्षी दल इससे कुछ फायदा पाते हैं तो यही उपलब्धि होगी।”

वहीं इस बिहार बंद पर सुरक्षा चिंताएँ भी कम नहीं हैं। लगातार चुनाव आयोग की सफाई के बावजूद अगर पार्टियाँ इस मसले को उठा रही हैं और इससे मुस्लिमों को भड़काने का प्रयास कर रही हैं तो यह हिंसा का रूप भी ले सकता है। संभव है कि कहीं किसी जगह चुनाव आयोग की टीम को निशाना बनाया जाए। यह भी संभव है कि चुनाव आयोग के विरोध के नाम पर बिहार में हिंसा फैलाई जाए। और यह कोई विचित्र बात नहीं है, इससे पहले भी राजद ने जब बंद बुलाया है तो हिंसा देखने को मिली है।

बंद के दौरान दिए गए बयान भी इस आग को भड़का सकते हैं। हाल ही में बिहार में वक्फ कानून के विरोध में एक रैली इन्हीं विपक्षी दलों ने आयोजित की थी। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम शामिल हुए। इसके दौरान कई भड़काऊ बयान दिए गए। इसके 10 दिन भी नहीं बीते और बिहार के कटिहार, भागलपुर, दरभंगा समेत कई शहर मुहर्रम पर हिंसा का शिकार हो गए। ऐसे में 9 जुलाई की रैली का ऐसा कोई परिणाम नहीं होगा, यह बात करना बेईमानी है।

विपक्षी पार्टियाँ चुनाव से पहले लगातार ऐसा माहौल बना रही हैं कि जैसे उनकी हार सुनिश्चित किए जाने को यह प्रक्रिया हो रही हो। इसकी टाइमिंग को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी के अनुसार,”जो लोग कहते हैं कि यह प्रक्रिया गलत समय पर शुरू की गई है, तो यदि यह प्रक्रिया 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले की जाती तो यही कहते कि 400+ के लिए यह किया जा रहा है।”

कॉन्ग्रेस का चुनावी प्रक्रिया को लेकर रोना कोई नई बात नहीं है। राहुल गाँधी अब जब यह जान चुके हैं कि वह चुनावी मैदान में नहीं भाजपा से नहीं लड़ सकते और उनकी पार्टी बिहार में उतना ही उछलकूद मचा सकती है जितना राजद अनुमति दे। ऐसे में नाकामी के डर से वह पहले ही चुनाव आयोग पर फलिम हो गए हैं। पहले वह चुनाव आयोग के बाद EVM पर रोया करते थे लेकिन महाराष्ट्र चुनाव के बाद उन्होंने यह नई रणनीति अपनाई है। हालाँकि, इसका कोई फायदा उन्हें नहीं होने वाला है।


छांगुर पीर ने नीतू को ब्रेनवॉश कर नसरीन बनाया, लखनऊ के होटल में 70 दिन उसके साथ रहा: यहीं से धर्मांतरण-लव जिहाद का रैकेट चला रहा था जलालुद्दीन

धर्म परिवर्तन का नेटवर्क चलाने वाला छांगुर पीर गर्लफ्रेंड नसरीन के साथ 70 दिन होटल में ठहरा। लखनऊ के इसी होटल से UP ATS ने दोनों को गिरफ्तार किया था। दोनों यहाँ पति-पत्नी बनकर रह रहे थे। होटल के कमरे से छांगुर पीर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन और लव जिहाद करवाते थे। नसरीन वही है, जिसका नाम अब तक नीतू नवीन रोहरा बताया गया था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, छांगुर पीर और नसरीन 16 अप्रैल 2025 से लखनऊ के विकास नगर स्थित स्टार रूम्स होटल में रुके हुए थे। पहले दोनों कमरा नंबर 102 में 4 दिन तक ठहरे। इसके बाद पाँचवे दिन कमरा नंबर 104 में बाकी दिन बिताए।

जाँच अधिकारियों ने बताया कि पहले 4 दिन उन्होंने होटल का माहौल भांपा और सुरक्षित पाने के बाद धर्मांतरण का नेटवर्क यहीं से चलाने का फैसला लिया। उधर, होटल के कर्मचारियों और UPATS के अधिकारियों ने बताया कि छांगुर पीर और नसरीन के बीच अवैध संबंध थे। दोनों कमरे से बहुत कम बाहर निकला करते थे। होटल से ही खाना ऑर्डर कर खाते थे।

नीतू का धर्म परिवर्तन कराया, नाम बदलकर नसरीन रखा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतू नवीन रोहरा और उसके पति नवीन रोहरा पहले सिंधी थे। उनका धर्मांतरण छांगुर पीर पहले ही करा चुके थे। साथ ही उनकी नाबालिग बेटी को भी इस्लाम में परवर्तित किया गया। नीतू नवीन रोहरा का नाम बदलकर नसरीन रख दिया। तीनों बलरामपुर में छांगुर पीर के पास ही रहते थे।

अब नसरीन और नवीन दोनों पति-पत्नी ही छांगुर पीर का नेटवर्क संभालते थे। जहाँ छांगुर पीर कीपैड मोबाइल फोन लेकर चलता था। वहीं, नसरीन के पास टच वाला फोन था, जिससे वह धर्मांतरण के खेल को अंजाम देती थी। नसरीन का पति नवीन छांगुर पीर और नसरीन को लग्जरी गाड़ियों में लेकर चलता था।

सामाजिक संगठन के नाम पर फंड ऐंठता था

छांगुर पीर ने धर्मांतरण का नेटवर्क बड़े स्तर पर फैलाया हुआ था। इसके लिए विदेशों से फंडिंग की जा रही थी। अब सामने आया है कि वह सामाजिंक संगठनों के नाम पर बैंक में खाता खुलवाता था। इसमें चंदा जुटाने और उसे विदेश भेजने के लिए इन संगठनों का इस्तेमाल करता था।

जानकारी के मुताबिक, छांगुर ने आस्वी इंटरप्राइजेज, आस्वी चैरिटेबल ट्रस्ट, आसिपिया हसनी हुसैनी कलेक्शन, बाबा ताजुद्दीन आस्वी बुटीक जैसी संस्थाओं पर कागज बनवाए। दो बैंकों में इन संस्थाओं के आठ खाते खुलवाए।

इनमें से एक बैंक खाते से विदेशी खाते में ₹6 लाख रुपए जमा किए। इसके अलावा NEFT के माध्यम से इस्लाम ₹10 लाख जमा किए। वहीं, छांगुर अपने नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के खातों से भी लेन-देन करता था।

‘शिजर-ए-तैयब्बा’ से ब्रेनवॉश करता था छांगुर पीर

छांगुर पीर ने शिजर-ए-तैयब्बा नाम की किताब प्रकाशित कराई थी। इस किताब से आसपास के लोगों से इस्लाम का प्रचार-प्रसार कराता था। इस किताब को पढ़कर लोगों का ब्रेनवॉश करता था। नीतू रोहरा को भी यही किताब देकर ब्रेनवॉश किया था। बाद में नीतू का धर्मांतरण कर नसरीन बना दिया।

UPATS ने छांगुर पीर के बेटे महबूब को पहले किया गिरफ्तार

छांगुर पीर की गिरफ्तारी की प्लानिंग UPATS काफी समय पहले ही कर चुकी थी। इसी डर से छांगुर पीर और नसरीन अंडरग्राउंड हो गए थे। तभी दोनों ने धर्मांतरण का नेटवर्क का अड्डा होटल में बनाया। इसी ठिकाने से हिंदूओं को धर्मांतरण और लव जिहाद में फँसाते थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, UPATS ने नवंबर 2024 में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर और उसके बेटे महबूब समेत 10 लोगों पर FIR दर्ज की थी। इसमें नसरीन के पति और छांगुर के सहयोगी नवीन रेहरा का नाम भी शामिल था।

FIR दर्ज होने के बाद ATS ने 08 अप्रैल 2024 को छांगुर के बेटे महबूब को गिरफ्तार कर लिया। तभी से छांगुर पीर को अपनी गिरफ्तारी का डर सताने लगा। इसके बाद छांगुर और नसरीन ने अंडरग्राउंड होने की योजना बनाई। फिर लखनऊ के एक होटल में जाकर ठहरे।

उधर, UPATS लगातार उनकी तलाश में छापेमारी कर रही थी। छांगुर पर ₹50 हजार का इनाम भी घोषित किया गया। इसके बाद शनिवार (08 जुलाई 2025) को छांगुर पीर और नसरीन को होटल से रंगे हाथों पकड़ लिया गया। दोनों यहाँ 70 दिन से रुके हुए थे।

छांगुर पीर और उसका नेटवर्क

जलालुद्दीन खुद को हाजी पीर जलालुद्दीन बताता था। वह अपने एजेंटों के जरिए हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए उकसाता था। जानकारी के अनुसार, इस काम के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से फीस तय थी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपए, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए 10-12 लाख रुपए और अन्य जातियों के लिए 8-10 लाख रुपए मिलते थे।

वक्फ का नाम लेकर तेजस्वी यादव ने भड़काया, मोतिहारी में ‘शांतिदूतों’ ने अजय यादव को काट डाला: गाँधी मैदान से विपक्ष ने लगाई थी हिंसा की जो आग, इस बार मुहर्रम पर बिहार उसी में जला

पटना के गाँधी मैदान में 29 जून 2025 को वक्फ कानून के विरोध में एक रैली आयोजित की गई। ‘वक्फ बचाओ, दस्तूर बचाओ’ रैली में तेजस्वी यादव, पप्पू यादव, AIMIM के अख्तरुल ईमान समेत विपक्ष के कई बड़े नेता इस रैली का हिस्सा बने।

इमारत-ए-शरिया नाम के एक मजहबी संगठन की ओर से आयोजित की गई इस रैली में बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ और लोग शामिल हुए। हालाँकि वक्फ से परे इस रैली का असली मकसद बिहार का विधानसभा चुनाव 2025 था।

बिहार में कुल 18 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। ये किसी भी पार्टी का खेल बनाने या बिगाड़ने में अपनी अहम भूमिका निभा स कती है। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 में 243 विधानसभा सीटों में लगभग 48 सीटों पर मुस्लिम वोटरों का बहुल है।

इन सीटों पर 20-40% या कुछ जगहों पर उससे भी अधिक मुस्लिम आबादी शामिल है। इसी के कारण RJD, कॉन्ग्रेस और AIMIM के नेता इस रैली में शामिल होकर मुस्लिम वोटर्स को अपने हक में करने की हर जुगत भिड़ाती दिखी।

रैली में BJP पर जमकर निशाना साधा गया। तेजस्वी यादव ने तो अपने वोटर्स को लुभाने के लिए गजब का नारा ही परोस दिया। उन्होंने कहा, “ये देश किसी के बाप का नहीं है। ये हम सबका हिंदुस्तान है।” अपने भाषण में तेजस्वी यादव ने जमकर जहर उगला। मुस्लिम वोटर्स को लुभाने के चक्कर में वह ये तक कह गए कि उनकी सरकार बनने पर वक्फ संशोधन अधिनियम को कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा।

बीजेपी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि BJP न सिर्फ वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है पर साथ ही मुस्लिमों, पिछड़ों और दलितों के वोट देने के अधिकार को भी छीनना चाहती है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में बदलाव कर 4.7 करोड़ गरीबों को वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है।

अपने भाषण में तेजस्वी ने ऐलान कर दिया कि बिहार में उनकी सरकार बनेगी तो वे इस वक्फ संशोधन कानून को लागू ही नहीं होने देंगे। रैली का हिस्सा कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान खा प्रतापगढ़ी भी रहे। उन्होंने वक्फ संसोधन बिल को बर्बादी कारण बता दिया और मुसलमानों के लिए इसे नामंजूर करार दे दिया।

इनके साथ AIMIM के नेता अख्तरुल ने कहा कि ये बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ साजिश है। ये वक्फ बोर्ड की आजादी छीनता है। बात इन दो-चार बयानों पर नहीं रुकी। सीपीआई माले के दीपंकर भट्टाचार्य ने बिल को हिंदुस्तान पर हमला बता दिया।

वहीं, राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी खुद ही अपने पक्ष में करार दे दिया। उन्होंने कहा कि वे उम्मीद कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इस बिल के खिलाफ फैसला उनके पक्ष में आएगा।

कुल मिलाकर रैली में भड़काऊ बयानबाजी चरम पर रही। शरिया, वक्फ और मुस्लिम अधिकारों की बातें उठाकर हर पार्टी के नेता मुस्लिम वोटों को अपने हक में लाने की भरसक कोशिश करते दिखे।

अपनी राजनीति और तुष्टिकरण में भले ही अलग अलग पार्टियाँ एक साथ आकर ये जताने की कोशिश कर रहीं थीं। लेकिन असल में इनमें से हर पार्टी का अपना अपना एजेंडा चल रहा था। इस राजनीति के चक्कर में बिहार में इन नेताओं ने हिंदू- मुस्लिम संघर्षों और सांप्रदायिक तलाव को किस कदर आग में झोंका इसका अंदाजा अब साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।

हिंसक संघर्षों में हुआ इजाफा

तेजस्वी यादव ने वक्फ बिल के विरोध में लोगों को सड़क पर उतरने तक की बात तक कह डाली थी। उन्होंने कहा कि RJD ने इस कानून का विरोध संसद में भी किया है। हम इस लड़ाई को हर जगह लड़ेंगे, चाहे वह सदन हो, सड़क हो या अदालत।

इस भड़काऊ बयान का असर इस कदर हुआ कि रैली के होने के 10 दिन के अंदर ही मजहबी हिंसा देखने को मिलने लगी। मोताहारी से लेकर कटिहार, भागलपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, अररिया समेत बिहार के कई क्षेत्रों में हिंदू-मुस्लिम संघर्ष और सांप्रदायिक तनाव अपने चरम पर पहुँच गए। कई जगहों पर तो हिंदुओं को अपनी जान तक गँवानी पड़ गई।

6 जुलाई 2025 को मोतिहारी के मेहसी थाना के तहत कनखट्टी बाजार में अजय यादव अपने भाइयों के साथ मुहर्रम का जुलूस देख रहे थे। इसी बीच मुहर्रम में करतब दिखा रहे कुछ लोगों से कहासुनी हो गई। इसके बाद हिंदुओं पर तलवार से हमला कर दिया गया। अजय यादव के गले पर तलवार से वार किया गया। इससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद 12 लोगों को हिरासत में लिया गया।

इसी दिन मुहर्रम के जुलूस के दौरान कटिहार में महावीर मंदिर पर पत्थरबाजी की गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म पर वायरल हुआ। इसमें मुस्लिम युवक मंदिर के साथ कई घरों और दुकानों पर पथराव करते दिखे। इसके बाद हिंदू समुदाय में आक्रोश देखा गया। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया।

दरभंगा में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक ASI को चाकू मार दिया गया। इसी में बिजली के तार की चपेट में आने से एक आदमी की मौत भी हो गई।

मुजफ्फरपुर के बरियापुर में भी हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच झड़प हुई। इसमें 2 लोग घायल हो गए। इसके बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया जिसके चलते भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

इसी तरह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक मुस्लिम व्यक्ति धमकी दे रहा है कि बिहार में मुस्लिम बहुल है। ऐसे में बिहार में वही होगा जैसा मुस्लिम समुदाय चाहेगा।

इसके साथ ही भागलपुर के लोदीपुर थाना क्षेत्र के उस्तू गाँव में अखाड़ा घुमाने को लेकर झड़प हुई। इसमें लाठी- डंडे चलने के साथ साथ फायरिंग भी हुई। इसके तहत 8 लोग घायल हुए। अररिया के फारबिसगंज में मुहर्रम जुलूस के दौरान दो गुटों के बीच पत्थरबाजी हुई और लाठियाँ चली। इसके बाद पुलिस को क्षेत्र में तैनात किया गया।

मुहर्रम जहाँ एक ओर मातम का संदेश देता है तो वहीं, मुजफ्फरपुर के मीनापुर थाना क्षेत्र से ताजिया जुलूस के दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जुलूस हैदरे अखाड़ा की ओर से निकला। पुरानी पेठिया क़र्बला जाने के दौरान रास्ते में फिलिस्तीन का झंडा और कई हथियार लहराए गए। मामले पर मीनापुर थाना की पुलिस जाँच कर रही है।

बिहार में चुनाव नजदीक है। ऐसे में इस तरह की बयानबाजी, रैली, संघर्ष और सांप्रदायिक तनाव लोगों के मन में भावनात्मक तौर पर घर कर रहे हैं। इससे भले ही राजनीतिक पार्टियाँ अपने वोट बैंक साध रही हों लेकिन लोगों के बीच सामाजिकता का अभाव बढ़ता जा रहा है। नतीजा ये होगा कि किसी विपदा के समय भी ये समाज चाहकर भी एकजुट नहीं हो पाएगा।

धर्मांतरण गिरोह की सम्पत्तियाँ जब्त करेगी UP सरकार, CM योगी ने किया ऐलान: जलालुद्दीन को बताया राष्ट्र का दुश्मन, बुलडोजर से कोठी ‘समतल’

यूपी में अवैध धर्मांतरण गिरोह चलाने वाले छांगुर पीर को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इस तरह की गतिविधियों में लिप्त पाए गये लोगों को ऐसी सजा दी जाएगी जो एक उदाहरण बने। उन्होंने छांगुर पीर को राष्ट्रविरोधी करार दिया।

राष्ट्र विरोधी है जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर- सीएम

सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यूपी सरकार बहन-बेटियों की गरिमा और सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपित जलालउद्दीन की गतिविधियाँ समाज विरोधी ही नहीं, बल्कि राष्ट्र विरोधी भी हैं।”

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी। आरोपित और उसके गिरोह से जुड़े सभी अपराधियों की संपत्तियाँ जब्त की जाएँगी और उन पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

सीएम के मुताबिक, “राज्य में शांति, सौहार्द और महिलाओं की सुरक्षा को भंग करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्हें कानून के अनुसार ऐसी सजा दी जाएगी, जो समाज के लिए एक उदाहरण बने।”

छांगुर पीर की कोठी पर चला बुलडोजर

सीएम योगी की प्रतिक्रिया से पहले बलरामपुर स्थित छांगुर पीर की महिला सहयोगी नीतू नवीन रोहरा के घर पर बुलडोजर चलवाया था। ये आलीशान घर अवैध तरीके से बनाया गया था और यहाँ से छांगुर पीर अपने गैंग के साथ रहता था और धर्मांतरण के काले कारनामे करता था।

शनिवार (5 जुलाई 2025) को यूपी एटीएस ने छांगुर पीर और उसकी गर्लफ्रैंड नीतू उर्फ नसरीन को लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया था। यह गिरोह बलरामपुर के उटरौला में लंबे समय से सक्रिय था। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क को विदेशों से ₹100+ करोड़ की फंडिंग मिली है।

छांगुर बाबा और उसका नेटवर्क

जमालुद्दीन खुद को हाजी पीर जलालुद्दीन बताता था। वह अपने एजेंटों के जरिए हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए उकसाता था। जानकारी के अनुसार, इस काम के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से फीस तय थी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपए, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए 10-12 लाख रुपए और अन्य जातियों के लिए 8-10 लाख रुपए मिलते थे।

मातम का मुहर्रम या हिंसा का मुहर्रम? कहीं मंदिर में तोड़फोड़ तो कहीं हिन्दू को चाकू से गोदा: बिहार, UP, MP, झारखंड… इस्लामी जुलूस की आड़ में हर जगह कट्टरपंथ का प्रदर्शन

इस्लामी कट्टरपंथियों ने साल 2025 का मुहर्रम में जमकर हिंसा की है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पूरे देशभर में कहीं इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं पर हमला किया। तो कहीं मंदिर पर पत्थर चलाए। कहीं रास्ते को लेकर तो कहीं झंडे को लेकर उत्पात मचाया। ऑपइंडिया ऐसी ही सारी घटनाओं को एक साथ संकलित कर रहा है।

मोतिहारी में अजय यादव की तलवार से गला रेतकर हत्या

बिहार के मोतिहारी जिले में मुहर्रम जुलूस के दौरान अजय यादव की तलवार से गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस्लामी कट्टरपंथियों ने अजय यादव के दो भाइयों पर भी हमला बोला। धनंजय यादव और नवल किशोर यादव बुरी तरह घायल हुए हैं। पुलिस मामले में 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

दरभंगा में ASI अमित कुमार पर चाकू से हमला

बिहार के दरभंगा में मुहर्रम जुलूस के दौरान मुस्लिम भीड़ ने बवाल मचाया। फिर शांत करने पहुँची पुलिस पर भी हमला किया। ASI अमित कुमार पर मोहम्मद रब्बानी ने चाकू से वार किया। ASI को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोपित मोहम्मद रब्बानी को गरिफ्तार कर लिया गया है।

बिहार के अररिया में इस्लामी कट्टरपंथियों ने थानेदार का सिर फोड़ दिया

बिहार के अररिया जिले में मुहर्रम जुलूस में शामिल मुस्लिम भीड़ ने पुलिस पर हमला किया। पुलिस बिना अनुमति निकाले जा रहे जुलूस को रोकने पहुँची थी। यहाँ हथियार से लैस इस्लामी कट्टरपंथियों ने वीडियोग्राफी कर रहे ड्रोन कैमरा के ऑपरेटर की पिटाई कर कैमरा और मोबाइल छीन लिया था। बीच-बचाव में लगी पुलिस से मारपीट की गई।

घटना में थानेदार मिथिलेश कुमार का सिर फट गया। वहीं, कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में हिंदू ई-रिक्शा चालक से मारपीट

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में मुहर्रम का चंदा न देने पर हिंदू ई-रिक्शा चालक बेदन घोष की बेरहमी से पिटाई की गई। दरअसल, एक दिन पहले बेदन घोष चंदा दे चुका था। लेकिन दोबारा चंदा देने पर उसने इनकार किया था। जिसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने बेदन घोष पर पत्थर से हमला कर दिया। बंगाल पुलिस ने आरोपितों की गिरफ्तारी का आश्वासन दे दिया।

रतलाम में ‘हिंदू राष्ट्र’ लिखे बैनर को जलाया

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में मुहर्रम जुलूस के दौरान मुस्लिमों ने मुँह में पेट्रोल डाल आग लगाकर ‘हिंदू राष्ट्र’ लिखा बैनर जलाया गया। वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठन ने विरोध जताते हुए हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया। पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

UP के सीतापुर में हिंदू दुकान मालिक से मारपीट

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में मुहर्रम पर ताजिया का जुलूस निकाल रही मुस्लिम भीड़ ने हिंदू दुकान मालिक बेचेलाल संग मारपीट की। विवाद ईंट हटाने को लेकर शुरू हुआ था। दरअसल, ताजिया जुलूस बेचेलाल की दुकान तक पहुँचा। मुस्लिम भीड़ने ईंट हटाने को कहा, बेचेलाल के इनकार करने पर लाठी-डंडे से हमला किया। मौके पर पुलिस पहुँचते ही इस्लामी भाग निकले।

हाजीपुर में मुस्लिम भीड़ ने बस में लगाई आग

बिहार के हाजीपुर जिले में मुहर्रम के ताजिया जुलूस में भीड़ को हटाने के लिए बस ने हॉर्न बजाया। तो इस्लामी कट्टरपंथी ने गुंडागर्दी पर उतर आए। बस में से सवारियाँ को उतारा और बस को आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है।

पुणे में मुहर्रम पर खामेनेई के लगे पोस्टर

महाराष्ट्र के पुणे के लोनी खलबोर गाँव में मुहर्रम पर ईरान के नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बैनर लगाए गए। हिंदू संगठन ने शिकायत पर पुलिस ने बैनर हटवाए। पुलिस ने बताया कि बिना अनुमति के बैनर लगाए गए थे, इसीलिए संबंध लोगों को नोटिस भेजा गया।

बरेली में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के लगाए नारे

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के फरीदपुर में ताजिया रखने के दौरान मुस्लिम भीड़ ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए। इस्लामी कट्टरपंथियों ने मोहल्ले के दुकानों को तोड़ने के साथ व्यापारियों को जान से मारने और लूटने की भी धमकी दी। मामले में पुलिस ने मोबीना, अनस और नाजिम को गिरफ्तार किया है।

बिहार के जमुई में पाकिस्तान और फिलिस्तान का झंडा फहराया

बिहार के जमुई जिले के पैरामटिहाना गाँव में मुहर्रम के ताजिया जुलूस में पाकिस्तान का झंडा लहराया। वहीं, जमुई के ही भछियार मोहल्ले में मुहर्रम जुलूस में फिलिस्तीन का झंडा फहराया गया। दोनों मामले की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसके बाद हिंदू संगठन ने विरोध-प्रदर्शन किया।

बिलासपुर में मंदिर की छत पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया ‘शेर नाच’

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मुहर्रम जुलूस के दौरान शेर की वेशभूषा में इस्लामी कट्टरपंथी ने मंदिर में उत्पात मचाया। मंदिर की छत पर चढ़कर नाचने लगे। वीडियो वायरल होने पर हिंदू संगठन ने विरोध जाहिर किया। इसके बाद पुलिस तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

बिहार के कटिहार में महावीर मंदिर पर हमला, हिंदू-पुलिस पर पथराव

बिहार के कटिहार जिले में मुहर्रम के जुलूस के दौरान नया टोला स्थित महावीर मंदिर पर पथराव किया। घटना का वीडियो भी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। वीडियो में इस्लामी कट्टरपंथी मंदिर पत्थर फेंक रहे हैं। एक अन्य वीडियो में कट्टरपंथी हिंदू घरों और सड़क किनारे खड़ी गाड़ी पर ईंट के बड़े-बड़े टुकड़े फेंके जा रहे हैं।

घटना के बाद तनाव के माहौल को देखते हुए इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। घटना में पुलिसकर्मी समेत 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

उज्जैन में मस्जिद के पास हंगामा

मध्य प्रदेश के उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान खजूर वाली मस्जिद के पास हंगामा हुआ। उपद्रवियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और प्रतिबंधित मार्ग पर घोड़ा ले जाने की जिद की। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो हमला किया गया। इसमें दो पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। जुलूस के आयोजक इरफान खान उर्फ लल्ला समते 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।

लखीमपुर खीरी में हिंदू घरों पर फेंका सफेद पाउडर, विरोध पर पथराव

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में मुहर्रम के ताजिया जुलूस में विवाद हो गया। जुलूस में शामिल मुस्लिम भीड़ ने हिंदू परिवार के घर पर सफेद पाउडर फेंक दिया। परिवार के लोगों ने इसका विरोध किया तो भीड़ ने हिंदू परिवार के बाकी घरों में पथराव किया।

पुलिस ने पीड़ित पंकज की तहरीर के आधार पर 4 लोग तालिब, जाहिद, सुलेमान और नूरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। ऑप इंडिया के पास इस FIR की कॉपी भी मौजूद है।

रायबरेली में मुस्लिम भीड़ ने की तोड़फोड़

उत्तर प्रदेश के रायबरेली के कुढ़ा गाँव में बिना अनुमति से निकाले गए मुहर्रम के जुलूस के दौरान जमकर विवाद हुआ था। जुलूस में शामिल लोगों ने आपत्तिजनक नारेबाजी की। लोगों ने विरोध किया तो मुस्लिम लोग उग्र हो गए और हिंसा शुरू कर दी।

उन्होंने लाठी-डंडों और हथियारों से हमला किया। उपद्रवियों ने 4 बाइक, एक ऑटो और एक ट्रैक्टर तोड़ डाले। पुलिस ने पूरे फाजिल गाँव निवासी साजिद अली, सोनू, फूलबाबू, अट्टू, अमरोज, शब्बीर समेत 150 लोगों के खिलाफ मारपीट, तोड़फोड़ करने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।

कोलकाता में सियालदह रेलवे स्टेशन पर खूनी संघर्ष

कोलकाता के सियालदह रेलवे स्टेशन पर मुहर्रम से पहले कई मुस्लिम युवक तलवारों से लैस होकर लोकल ट्रेन में चढ़ गए। उन्होंने हथियार लहराते हुए एक व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना के वीडियो में व्यक्ति को खून से लथपथ देखा जा सकता है। वहीं, रेलवे स्टेशन पर भी जगह-जगह खून पड़ा दिखा।

महाराजगंज में बीजेपी नेता से मारपीट

यूपी के महाराजगंज में मुहर्रम के जुलूस के दौरान बीजेपी नेता शिवभूषण चौबे से मारपीट की गई। घर लौटते समय जुलूस की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और गाली-गलौज कर हाथापाई की।

सूचना पर पहुँची पुलिस ने बीजेपी नेता को सुरक्षित निकाला और तीन लोगों को हिरासत में लिया है।

राहुल गाँधी-तेजस्वी यादव ने बिहार पर शुरू किया प्रोपेगेंडा, अब योगेंद्र यादव से लेकर ADR तक सारे ‘आंदोलनजीवी’ भी एक्टिव: जॉर्ज सोरोस के पैसों से चलता है ‘भारत को बदनाम करो’ का धंधा

बिहार में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं। इसके लिए चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियाँ चालू कर दी हैं। इसी कड़ी में चुनाव आयोग मतदाता सूची को सही कर रहा है। इस कदम का राहुल गाँधी, तेजस्वी यादव और पप्पू यादव समेत कई नेताओं ने विरोध करना चालू कर दिया है।

मतदाता सूची से अपात्र और अवैध लोगों को हटाने के फैसले को यह पूरा गुट ऐसे पेश कर रहा है जैसे यह उनके वोट काटने की साजिश हो। इस खेल में अब आंदोलनजीवी और चन्दाजीवी गैंग भी कूद गया है। उसने इस मामले को कोर्ट तक पहुँचा दिया है।

चुनावी प्रकिया को सुप्रीम कोर्ट में RJD, कॉन्ग्रेस, TMC की महुआ मोइत्रा और NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स(ADR), पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज और योगेन्द्र यादव जैसे आंदोलनजीवी लेकर पहुँचे हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को रोकने की माँग की है।

इस संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई 10 जुलाई, 2025 को होनी है। बिहार चुनाव से पहले मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने से जुड़ी इस प्रक्रिया को मुद्दा बनाने की शुरुआत राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव जैसे विपक्षी नेताओं ने की थी।

NRC-CAA जैसा प्रोपेगेंडा खड़ा करने का हो रहा प्रयास

विपक्षी नेताओं के प्रोपेगेंडा को आगे ले जाने का बीड़ा अब इन संस्थाओं ने उठाया है। इनमें NGO, आंदोलनजीवी और एक्टिविस्ट टाइप जमात शामिल है। यह सब तब हो रहा है जब चुनाव आयोग इस मामले पर सभी शंकाएँ दूर कर चुका है और प्रक्रिया अभी भी सुचारू ढंग से चल रही है।

चुनाव आयोग ने मतदाताओं को अपने दस्तावेज देने के लिए 25 जुलाई, 2025 तक का समय भी दे रखा है। इसके लिए मतदाताओं को जागरूक भी किया जा चुका है। चुनाव आयोग ने खुद बताया है कि वह अब तक 2.88 करोड़ से अधिक मतदाताओं का सत्यापन कर चुका है। यह बिहार में कुल मतदाताओं का 38% है।

इस सबके बावजूद भी पूरी प्रक्रिया को कोर्ट में ले जाना दिखा रहा है कि इस पर विपक्ष और NGO-आंदोलनजीवी गैंग NRC-CAA जैसा बवाल खड़ा करना चाहते हैं। इसे भी मुस्लिम विरोधी कदम करार दिए जाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि मजहबी आधार पर ध्रुवीकरण किया जा सके।

NGO-आंदोलनजीवी बस मुखौटा भर

इस काम के लिए यह NGO और आंदोलनजीवी गैंग मुखौटा बना है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका ले जाने वाले यह गैंग पहले भी चुनावी प्रक्रिया पर अड़ंगे लगाते रहे हैं और इनका इतिहास मोदी सरकार के विरोध का रहा है। इस मामले में याचिका लगाने वाला एक NGO तो जॉर्ज सोरोस से फंडिंग लेता है।

सुप्रीम कोर्ट में बिहार में चुनाव आयोग के कदमों के खिलाफ याचिका लगाने वाला ADR इससे पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी अड़ंगा लगा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए मोदी सरकार से कानून बनाने को कहा था, जब तक क़ानून ना बने, तब तक एक समिति बनाई थी, जिसमे प्रधानमंत्री और नेता विपक्ष को रखा था।

इस समिति में CJI भी रखे गए थे। यह व्यवस्था तब तक ही चलनी थी जब तक सरकार कानून ना बना दे। मोदी सरकार ने इस पर कानून बनाया था और CJI को इसमें नहीं रखा था। इसके खिलाफ ADR याचिका लेकर पहुँच गया था। गौरतलब है कि यह कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पूरी तरह से सरकार के पास थी।

इसकी मदद भी प्रशांत भूषण जैसे वकील करते आए हैं, जिनका काम ही एजेंडा चलाना है। प्रशांत भूषण पर दिल्ली दंगों से पहले हुई बैठक आयोजित करने का आरोप है। प्रशांत भूषण लगातार देश विरोध में खड़े देखे जाते हैं।

जॉर्ज सोरोस से है याचिका डालने वाले NGO का लिंक

बिहार में चुनाव आयोग की प्रक्रिया के खिलाफ याचिका डालने वाले NGO का लिंक जॉर्ज सोरोस से भी है। ADR असल में एक ऐसा NGO है जिसके पास FCRA लाइसेंस है। इसने लगातार मोदी सरकार को निशाने पर लिया है।

ADR को चुनावी और ‘राजनीतिक सुधार’ और ‘चुनावी निगरानी’ के लिए फोर्ड फाउंडेशन, गूगल, हिवोस और ओमदियार नेटवर्क से बड़ी मात्रा में धन प्राप्त होता है। हिवोस संगठन जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से जुड़ा हुआ है और विभिन्न सरकारों से पैसा पाता है।

HIVOS की 2018 की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह डच विदेश मंत्रालय, ग्लोबल फंड, स्वीडिश इंटरनेशनल डेवलपमेंट एड, मिलेनियम चैलेंज अकाउंट, द स्विस एजेंसी फॉर डेवलपमेंट एंड कोऑपरेशन, अमेरिकी विदेश मंत्रालय और बाकी जगहों से पैसा लेता है।

इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि कि उसकी कमाई के प्रमुख जरिए में फोर्ड फाउंडेशन भी था। ADR सीधे तौर पर फोर्ड फाउंडेशन और ओमदियार नेटवर्क से पैसे लेता रहा है। उसने
2016-2017 में फोर्ड फाउंडेशन से ₹70 लाख और और ओमदियार नेटवर्क से ₹2 करोड़ मिले हैं।

इसके अलावा वर्ष 2017-18 ने ADR को फोर्ड फाउंडेशन से ₹2 करोड़ मिले हैं। 2018-19 में भी ADR को फोर्ड फाउंडेशन से ₹60 लाख से अधिक मिला। वित्त वर्ष 2020-21 में भी ADR को ओमदियार नेटवर्क से ₹1.13 करोड़ मिले।

ADR को पैसा देने वाले उस द वायर को भी पैसा देते हैं जो फर्जी खबरें गढ़ता है। अब यही ADR बिहार चुनाव के मामले में कूद गया है और एक कहानी गढ़ना चाह रहा है। जॉर्ज सोरोस से जुड़े संगठन से पैसा लेता था। यही जॉर्ज सोरोस भारत में मोदी सरकार को कमजोर करने की बात कर रहा था।

जहाँ एक ओर ADR कोर्ट में इस मामले को फँसा रही है तो वहीं राहुल गाँधी 9 जुलाई, 2025 को चुनाव आयोग की प्रक्रिया के विरुद्ध बिहार जा रहे हैं।

भाजपा यह भी आरोप लगा चुका है कि सोनिया गाँधी का लिंक भी उस संस्थान से है जो जॉर्ज सोरोस से फंडिंग लेता है। जॉर्ज सोरोस का लम्बे समय से प्रयास भारत में अस्थिरता पैदा करने का रहा है। इस बार उसने यह दाँव बिहार चुनाव पर लगाया है। बिहार इसलिए क्योंकि यहाँ के चुनाव देश की राजनीति पर असर डालते हैं।

क्या बिहार में हार का विपक्ष ने खोज लिया बहाना?

बिहार में यदि NDA चुनाव हारती है तो इसका असर सीधे तौर पर केन्द्र सरकार पर पड़ेगा। केन्द्र सरकार में JDU बड़ी सहयोगी। चुनावी लिस्ट को लेकर हो रही हुआ-हुआ उससे ही संबधित दिखाई पड़ती है। ADR, योगेन्द्र यादव जैसे एक्टिविस्ट और राहुल गाँधी मतदाता लिस्ट का मुद्दा तब उठा रहे हैं जब चुनाव आयोग सब जानकारियाँ स्पष्ट कर चुका है।

राहुल गाँधी इससे पहले महाराष्ट्र चुनाव पर भी भ्रम की स्थिति बनाने का प्रयास कर चुके हैं। राहुल गाँधी ने यह प्रयास तब चालू किए हैं जब उनको विश्वास हो गया है कि मृतप्राय हो चुकी उनकी पार्टी सीधे तौर पर भाजपा से मुकाबला नहीं कर सकती। अब उन्होंने चुनाव और चुनावी प्रक्रिया को निशाना बनाना चालू किया है।

बिहार में वोटर लिस्ट का विरोध करना उसी कड़ी का हिस्सा है। पहले राहुल गाँधी का चुनावी रोना सिर्फ EVM मशीनों तक सीमित था, लेकिन अब यह बढ़ कर वोटर लिस्ट और कुछ दिनों में इससे भी आगे पहुँचेगा, ऐसा लगता है।