दिल्ली सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर पंजाब के नकोदर से एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में हाथ में धारदार हथियार लेकर खड़े एक शख्स को नए कृषि कानून का समर्थन करने वाले व्यक्ति को डराते और धमकाते हुए देखा जा सकता है। इंटरनेट पर वायरल एक वीडियो में लल्ली उर्फ अमित कुमार नाम का शख्स कुछ व्यक्तियों से घिरा हुआ है, जिसे तीन नए कृषि कानून का समर्थन करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
वहीं लल्ली उर्फ अमित कुमार को कार में बैठे पूरी घटना को रिकॉर्ड करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में तथाकथित किसानों के समर्थकों के एक झुंड द्वारा उस पर कृषि कानून का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए धमकी दी जा रही है।
झुंड में खड़ा एक कृषि कानून विरोधी गुंडा धमकी देते हुए कहता है, “यह लल्ली है। ये कृषि बिलों का समर्थन करता है और दावा करता है कि कृषि बिल सही हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि आपको कौन खिलाता है? बाहर आओ। बाहर आओ। हिम्मत है तो बाहर आकर दिखाओ। तुम हमारे द्वारा उगाए गए भोजन को खाने के बाद हमारे ही पीठ में छुरा भोंक रहे। तुम दावा करते हो कि मोदी सही हैं? यह सही है, ये देख रहे (एक तलवार को लहराते हुए) किसानों के खिलाफ झूठ बोलने के लिए मैं तुम्हें काट डालूँगा।” उक्त व्यक्ति एक कार डीलर सेंटर की ओर इशारा करते हुए धमकी देता है, “तुम ऐसे लोगों की कार क्यों रखते हो? यह मोदी का आदमी है, मैं तुम्हारी कारों को नष्ट कर दूँगा।”
पुलिस ने बताया कि अमित कुमार के खिलाफ कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारियों द्वारा शिकायत दर्ज की गई है। ऑपइंडिया से बात करते हुए, स्टेशन हाउस अधिकारी जतिंदर कुमार ने बताया कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुमार ने उन लोगों से बत्तमीजी और उन्हें गालियाँ दी थी। उन्होंने आगे कहा कि अमित ने अब तक मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं की है। बहरहाल, पुलिस ने धमकी देने वाले वीडियो का संज्ञान लिया है जोकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। साथ ही मामले की जाँच की जा रही है।
गौरतलब है कि कृषि बिल का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने कई बार नए कानूनों को रद्द करने के लिए सरकार को डराने धमकाने का काम किया है। इससे पहले खालिस्तानी समर्थकों द्वारा हाइजैक किए गए किसान प्रदर्शन में पीएम मोदी को इंदिरा गाँधी की ही तरह मारने की धमकी दी गई थी। ऐसे ही एक मौके पर AAP नेता अमानतुल्ला खान की मौजूदगी में भी पीएम मोदी के खिलाफ धमकी भरे बयान दिए गए थे।
मीडिया से बात करते हुए, ऐसे ही एक वीडियो में प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि दिसंबर 3 को मीटिंग है, अगर कोई हल निकला तो ठीक नहीं तो आप जानते नहीं… हमारे शहीद उधम सिंह ने गोरो को कनाडा में जाके ठोका… इंदिरा थोक दी गई… वैसे ही मोदी की छाती में…”
कट्टरपंथी मुस्लिम और हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद ने कथित तौर पर पुलिस के सामने कबूल किया है कि वह मुस्लिम समूहों को संगठित करने, उन्हें उकसाने और बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रचने में शामिल था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 की शुरुआत में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ बुधवार को चार्जशीट दाखिल की थी। 100 पन्नों की चार्जशीट में उमर खालिद पर दिल्ली की सड़कों पर दंगे भड़काने, दंगों की साजिश रचने, देश विरोधी भाषण देने और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।
खबरों के अनुसार, उमर खालिद ने खुद अपने आरोपों को स्वीकार किया है कि उसने मुस्लिम संगठनों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उमर खालिद ने दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में मुस्लिमों को नए कानून के खिलाफ भड़का कर हिंसा की साजिश रचने और महिलाओं व बच्चों का इस्तेमाल कर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने से संबंधी कई खुलासे किए हैं।
क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में दंगों के मास्टमाइंड को लेकर कहा है कि 8 जनवरी को शाहीन बाग में उमर खालिद, खालिद सैफी और ताहिर हुसैन ने मिलकर दिल्ली दंगों की प्लानिंग के लिए एक मीटिंग की थी। दंगों को पूरे देश में भड़काने के लिए उमर खालिद ने कई राज्यों का दौरा किया भी किया था। इस दौरान उसने भड़काऊ भाषण देकर नागरिकता कानून के खिलाफ लोगों को दंगे के लिए उकसाया था।
पुलिस को दिए बयान में उमर ने कबूला, “2019 में जिस तरह से संसद में भारत सरकार ने नागरिकता संसोधन बिल पेश किया। उसके बाद मैंने अपने साथी जो यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य थे, हम सब ने मिलकर एक मीटिंग की कि एंटी सीएए (CAA) बिल मुसलमानों के खिलाफ है। इसके लिए हमें आवाज उठानी चाहिए। मेरी बात पर यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य सहमत हो गए। तब हमने योजना बनाई की JNU और जामिया (Jamia) के मुस्लिम छात्र मिलकर इस बिल के खिलाफ आवाज उठाते है क्योंकि भारत सरकार बिना दबाव बनाए इस बिल को वापस नही लेगी। जिसके बाद हमने यूनाइटेड अगेंस्ट हेट, जेएनयू और जामिया के मुस्लिम छात्रों को इकट्ठा करने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें देखते ही देखते काफी लोग इकट्ठा हो गए।”
उमर ने आगे कहा, “फिर हमने जंतर-मंतर पर धरने प्रदर्शन किए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए। जिसके बाद मैंने अपने साथियों के साथ मीटिंग की और आंदोलन को अगले पड़ाव पर ले जाने की प्लानिंग बनाई। जिसके लिए हमने बच्चों और औरतों को आगे रखकर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने की योजना बनाई। इसके लिए बाकायदा एक और नया व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया ‘हम भारत के लोग’ नाम से। उधर तब तक एंटी CAA बिल लोकसभा में पास कर दिया गया था और यह एक कानून बन गया।”
उसने आगे बताया, “इसके बाद हमने योजना बनाई कि हमें और सख्त तरीक़े से चक्का जाम करने की जरूरत है। हमने 16 और 17 फरवरी की शाम एक मीटिंग में तय किया कि दंगा ही एक मात्र तरीका है जिससे भारत सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। फिर मैंने ही लोगों से कहा कि वो अपने पास पत्थर, तेजाब, पेट्रोल और हथियारों को इकट्ठा करके रखें और जब जरूरत पड़ेगी इसका इस्तेमाल करें।”
खालिद ने खुलासा किया कि, वह दिल्ली में करीब 23-24 जगह चल रहे एंटी CAA प्रदर्शनो में शामिल हुआ था। “मैं अमरावती और महाराष्ट्र भी प्रदर्शन में शामिल होने गया था। जहाँ मैंने कहा की हम सब डोनॉल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान 24 फरवरी को सड़कों पर आकर भारत सरकार पर दबाव बनाएँगें और हमारे लोगों ने अपनी योजना के मुताबिक डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान ही 24 तारीख को दिल्ली के अलग-अलग इलाको में चक्का जाम दंगे करवाना शुरू कर दिए। देखते ही देखते उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाको में दंगे फैल गए।”
गौरतलब है कि खालिद को पुलिस ने 14 सितंबर को भयावह पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जाँच के लिए उसे समन जारी किया था जिसके बाद वह गिरफ्तार कर लिया गया।
बता दें दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने हाल ही में दिल्ली दंगों के मामले में आरोपित 18 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मंजूरी दे दी थी, जिसमें हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता कट्टरपंथी उमर खालिद, शरजील इमाम, AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन और अन्य कई लोगों को देशद्रोह के आरोप में शामिल किया गया था।
इसके अलावा दिल्ली सरकार ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मामले में नताशा नरवाल, देवांगना कालिता, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ और 15 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। बता दें साल 2020 की शुरूआत में हुए इस दंगे में लगभग 50 लोगों ने अपनी जान गँवाई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (1 जनवरी, 2020) को साल 2022 तक देश के सभी बेघर परिवारों को पक्का आवास मुहैया कराने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अहम कदम उठाया है। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज इंडिया (जीएचटीसी इंडिया) के तहत 6 राज्यों में लाइट हाउस प्रोजेक्ट का उद्घाटन कर लोगों को नए साल का तोहफा दिया है।
लाइट हाउस प्रोजेक्ट के लिए त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु को चुना गया है। केंद्रीय शहरी मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना लाइट हाउस प्रोजेक्ट के तहत लोगों को स्थानीय जलवायु और इकोलॉजी का ध्यान रखते हुए टिकाऊ आवास प्रदान किए जाते हैं। परियोजना के तहत, केंद्र सरकार छह शहरों- इंदौर, चेन्नई, रांची, अगरतला, लखनऊ और राजकोट में 1,000-1000 से अधिक मकानों का निर्माण करेगी।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “ये 6 प्रोजेक्ट वाकई लाइट हाउस यानी प्रकाश स्तंभ की तरह हैं और जिंदगी में रौशनी लाने वाली आवास योजना है। ये 6 प्रोजेक्ट देश में हाउसिंग कंस्ट्रक्शन को नई दिशा दिखाएँगे। ये लाइट हाउस प्रोजेक्ट अब देश के काम करने के तौर-तरीकों का उत्तम उदाहरण है। हमें इसके पीछे बड़े विजन को भी समझना होगा। एक समय आवास योजनाएँ केंद्र सरकारों की प्राथमिकता में उतनी नहीं थी, जितनी होनी चाहिए। सरकार घर निर्माण की बारिकियों और क्वालिटी में नहीं जाती थी। ये प्रोजेक्ट आधुनिक तकनीक और इनोवेटिव प्रॉसेस से बनेंगे। इसमें कंस्ट्रक्शन का समय कम होगा और गरीबों के लिए ज्यादा सस्ती और आरामदायक घर तैयार होंगे।”
उन्होंने कहा, “शहर में रहने वाले गरीब हों या मध्यम वर्ग, इन सबका सबसे बड़ा सपना होता है, अपना घर। वो घर जिसमें उनकी खुशियाँ, सुख-दुख, बच्चों की परवरिश जुड़ी होती हैं, लेकिन बीते वर्षों में लोगों का अपने घर को लेकर भरोसा टूटता जा रहा था। पैसा दे देने पर भी मकान नहीं मिलता था। मकान खरीदने वाला पैसा चुका देता था और घर मिलने का इंतजार करता रहता था। मगर हमारी सरकार ने इस रवैये को बदल दिया है।”
पीएम मोदी ने कहा, “देश में ही आधुनिक हाउसिंग तकनीक से जुड़ी रिसर्च और स्टार्टअप्स को प्रमोट करने के लिए आशा इंडिया प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से भारत में ही 21वीं सदी के घरों के निर्माण की नई और सस्ती तकनीक विकसित की जाएगी। पीएम ने कहा कि घर की चाभी मिलना सिर्फ दरवाजा या दीवार का मालिकाना हक मिलना नहीं होता है। ये चाभी लोगों के विकास और उनकी प्रगति का द्वार खोल देती है। इससे लोगों के सपनों को पंख लग जाता है। इससे व्यक्ति को अपने समाज में सम्मान मिलता है।”
पीएम मोदी ने कहा, “ये परियोजनाएँ हमारे योजनाकारों, इंजीनियरों, वास्तुकारों और छात्रों से सीखने के लिए ऊर्जा का केंद्र हैं। वे नई तकनीक पर भी प्रयोग कर सकेंगे। गरीबों को मिलने वाले घर के साथ-साथ दूसरी योजना को भी एक पैकेज की तरह जोड़ा गया है। गरीब को जो घर मिल रहे हैं, उसमें पानी, बिजली, गैस, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं। सरकार के प्रयासों का बहुत बड़ा लाभ शहरों में रहने वाले मध्यम वर्ग को हो रहा है। मध्यम वर्ग को अपने घर के लिए एक तय राशि के होम लोन पर ब्याज में छूट दी जा रही है। कोरोना संकट के समय भी सरकार ने होम लोन पर ब्याज पर छूट की विशेष योजना शुरु की।”
वहीं इस कार्यक्रम को त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, झारखंड और गुजरात के मुख्यमंत्रियों ने भी संबोधित किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से शहरी गरीबों को टिकाऊ और आपदारोधी आवास उपलब्ध कराने में उत्तर प्रदेश सरकार को सफलता मिली है और इस दिशा में ‘लाइट हाउस प्रोजेक्ट’ मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने कहा कि सबके लिए आवास की इस योजना में शहरी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में अब तक 17 लाख 58 हजार परिवारों को आवास आवंटित किया गया है जिसमें छह लाख 15 हजार आवास पूर्ण होकर गरीब परिवारों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं और 10 लाख 80 हजार आवास निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड एक पिछड़ा राज्य है और लाइट हाउस प्रोजेक्ट के तहत, केंद्र और राज्य सरकार की मदद से यहाँ 1,008 घरों का निर्माण किया जाएगा। यहाँ रहने वाले लोगों की आय कम है क्योंकि उनमें से ज्यादातर मजदूर हैं। हमें रणनीति बनाना चाहिए कि हम उनके वित्तीय बोझ को कैसे कम कर सकते हैं।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी का संकल्प है कि 2022 तक हर गरीब के पास अपना मकान होगा। ये कहते हुए प्रसन्नता होती है कि शहरी क्षेत्र में 1 करोड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 3 करोड़ घरों के निर्माण का काम किया गया है।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2022 तक सभी के लिए आवास की परिकल्पना की थी, जिस साल देश की आजादी के 75 साल पूरे हो जाएँगे। यह कार्यक्रम आंध्र प्रदेश राज्य के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जो चक्रवात, बाढ़ आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से परेशान रहता है।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में 30 दिसंबर 2020 को कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ द्वारा हिन्दू मंदिर तहस-नहस किए गए जाने वाली घटना पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत ने इस घटना के प्रति कूटनीतिक माध्यमों से पाकिस्तान को नाराज़गी जाहिर की है।
India has lodged a formal protest with Pakistan via diplomatic channels against vandalisation of a Hindu temple there: Sources
भारत सरकार के अधिकारी के अनुसार, “पाकिस्तान में इस घटना पर आधिकारिक रूप से संज्ञान लिया जा चुका है और इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की गई है।”
पाकिस्तान में कट्टर इस्लामी भीड़ ने किया था मंदिर को ध्वस्त
इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर आए थे। जिसमें देखा जा सकता था कि उग्र इस्लामी भीड़ ने हथौड़े की मदद से हाल ही में निर्मित कृष्ण मंदिर की दीवार तोड़ दी थी। कट्टरपंथियों की भीड़ की अगुवाई स्थानीय मौलाना और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी (फज़ल रहमान ग्रुप) के समर्थकों ने की थी। यही भीड़ मौके पर अल्लाह हू अकबर का नारा लगाते हुए पहले मंदिर को आग के हवाले करती है और फिर उसे हथियारों से तहस-नहस कर देती है। सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि कट्टरपंथियों की भीड़ घंटों तक इस भयावह घटना को अंजाम देती है।
जिस दौरान यह घटना हुई उस वक्त जिला प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर ही मौजूद थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस मंदिर का निर्माण जुलाई 1919 में कराया गया था जब गुरु श्री परमहंस दयाल उस जगह पर विश्राम के लिए ठहरे थे। क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिम लोगों ने 1947 में विभाजन के बाद मंदिर बंद कर दिया था। 2015 में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आदेश जारी होने के बाद इस मंदिर का नवीनीकरण शुरू किया गया था।
अधिवक्ता और हिन्दू एक्टिविस्ट रोहित कुमार ने कहा स्थानीय लोगों ने मंदिर में तोड़ फोड़ करके समझौते का उल्लंघन किया है। 22 दिसंबर को हिन्दू और मुस्लिमों ने एक समझौते पर सहमति जताई थी कि मंदिर का नवीनीकरण एक तय क्षेत्र से बाहर नहीं जाएगा। जिसके बाद स्थानीय मुस्लिमों ने आरोप लगाया कि हिन्दू समुदाय के लोगों ने ग़ैरक़ानूनी रूप से मंदिर की इमारत का आकार बढ़ा दिया। इस मामले की शिकायत पुलिस से भी की गई थी।
मुस्लिमों का कहना था जब पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने क़ानून अपने हाथों में लेकर मंदिर ध्वस्त कर दिया।
पाकिस्तानी हिन्दुओं ने किया हिन्दू मंदिर पर हमले का विरोध
पाकिस्तान में मौजूद अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं का अपमान करते हुए अंजाम दी गई इस घटना की पाकिस्तान सहित दुनिया भर के तमाम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने निंदा की थी। इस घटना के एक दिन बाद पाकिस्तानी हिन्दुओं ने कराची में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था। पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल के मुखिया और नेशनल असेंबली के सदस्य रमेश कुमार वंकवानी ने भी इस घटना पर पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था, “इस तरह की घटना कभी नहीं हुई होती अगर प्रशासन ने 1997 के दौरान ऐसी ही कोशिश करने वाले कट्टरपंथियों को उचित दंड दिया होता।
हिन्दू मंदिर में तोड़-फोड़ और आगजनी की इस घटना के बाद अभी तक लगभग 30 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसमें ज़्यादातर कट्टरपंथी इस्लामी संगठन जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (नेता, रहमत सलमान) से जुड़े हुए हैं। प्रांत की पुलिस के मुखिया सनाउल्लाह अब्बासी ने बताया कि इस मामले में दर्ज की गई एफ़आईआर में कुल 350 लोगों का नाम शामिल है।
सितंबर 2020 में नौसेना अधिकारी पर शिव सेना के गुंडों द्वारा किए गए हमले का विवाद ख़त्म नहीं हुआ था कि महाराष्ट्र में ऐसी ही एक और घटना सामने आई है। मुंबई के वडाला इलाके में सेना के पूर्व अधिकारी ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में सेना के पूर्व अधिकारी का कहना है कि शिवसेना नेता उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और उनके साथ हिंसा की साज़िश रच रहे हैं। साथ ही उन्होंने इस मामले में मुंबई पुलिस के अधिकारियों द्वारा लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
पूर्व सेनाधिकारी सुदीप आप्टे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका (रिट पेटीशन) दायर की है। जिसमें उनका कहना है कि मुंबई पुलिस ने शिवसेना पार्षद एमी घोले पर एफ़आईआर दर्ज करने से मना कर दिया था। इस घटना से निराश पूर्व सेनाधिकारी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि कैसे उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्हें ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि मुंबई पुलिस इस मामले से जुड़े ताकतवर नेताओं के रवैये को लेकर असंवेदनशील और निष्क्रिय बनी हुई थी।
सुजीत आप्टे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में लिखा है कि मुंबई पुलिस पर स्थानीय नेताओं का दबाव है। पुलिस ने उन नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की जिसकी वजह से उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि उनकी और उनके परिवार की जान खतरे में है। पूर्व सेनाधिकारी ने निवेदन किया है कि बॉम्बे हाईकोर्ट इस मामले में दखल दे।
सुजीत आप्टे द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका
एमी घोले शिवसेना के प्रभावशाली नेता हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र मुख्यमंत्री के बेटे और महाराष्ट्र पर्यटन और पर्यावरण मंत्रालय आदित्य ठाकरे के करीबी हैं। उनके पास दो और अहम पद हैं, पहला युवा सेना का कोषाध्यक्ष और दूसरा बृहत्मुंबई म्यूनिसिपल कारपोरेशन (बीएमसी) की स्वास्थ्य समिति के मुखिया। ऑपइंडिया से मामले की जानकारी देते हुए सुजीत आप्टे ने बताया कि पूरा विवाद उनकी संपत्ति और उसके नज़दीक स्थित फुटपाथ पर बनाए गए अवैध साईं बाबा मंदिर से जुड़ा हुआ है।
आप्टे ने बताया कि परेशानी तब शुरू हुई जब नगरपालिका के अधिकारियों ने अवैध हिस्सा ढहा दिया। ढहाया गया मंदिर झुग्गी वाले इलाके के नज़दीक था और असामाजिक तत्व उसका इस्तेमाल हर तरह की गैरक़ानूनी गतिविधियों के लिए करते थे। इन लोगों को ताकतवर स्थानीय लोगों का समर्थन प्राप्त है जो नेता होने का दावा करते हैं। असामाजिक तत्व अवैध निर्माण वाले हिस्से में बैठ कर बिना किसी डर के शराब पीते थे और ड्रग्स का सेवन करते थे।
यहाँ अहम बात ये है कि 2017 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक आदेश दिया था। जिसके मुताबिक़ फुटपाथ पर मौजूद हर तरह का अतिक्रमण ख़त्म किया जाना चाहिए। इस आदेश को मद्देनज़र रखते हुए वडाला स्थित साईं बाबा का मंदिर पहले एक बार ध्वस्त किया गया था। लेकिन स्थानीय लोगों ने नगरपालिका की मदद से मंदिर का पुनर्निर्माण करा लिया था।
कोरोना वायरस महामारी फैलने और राज्य में लॉकडाउन लगाए जाने के पहले बीएमसी ने मंदिर के ट्रस्ट को नोटिस भेजा था, जिसमें मंदिर तोड़े जाने की बात कही गई थी। लॉकडाउन की वजह से बीएमसी यह कार्रवाई नहीं कर पाया था। इस बीच मंदिर एक बार फिर अराजक और ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों का अड्डा बन गया। सुजीत आप्टे का कहना था कि लोग मंदिर के भीतर बैठ कर तरह-तरह के नशे करने लगे। उन्होंने कई स्थानीय लोगों की सहमति से एक पीआईएल दायर की है जिसके आधार पर अदालत ने लॉकडाउन तक मंदिर परिसर को सील करने का आदेश दिया था। साथ ही यह कहा था कि लॉकडाउन हटने के तुरंत बाद मंदिर को ध्वस्त कर दिया जाए।
क्योंकि बीएमसी ने अदालत के आदेश (मंदिर को सील करना) का पालन नहीं किया था, एक और स्थानीय व्यक्ति ने बीएमसी के खिलाफ़ अवमानना की याचिका दायर की थी। अवमानना याचिका की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने की थी। उन्होंने इस मामले में आदेश दिया था कि बीएमसी तत्काल प्रभाव से अवैध निर्माण ध्वस्त करे और 15 दिसंबर तक उसकी रिपोर्ट जमा करे। हाईकोर्ट के आदेशानुसार नगरपालिका ने 11 दिसंबर 2020 को निर्माण ध्वस्त कर दिया था।
इस कार्रवाई के बाद शिवसेना पार्षद एमी घोले 13 दिसंबर 2020 को सुजीत आप्टे के घर आए। उस वक्त उनके साथ जूनियर इंजीनियर गुलेकर और इलाके के कुछ गुंडे भी मौजूद थे। अवैध निर्माण को गिराए जाने का ज़िम्मेदार सुजीत आप्टे को ठहराते हुए शिवसेना पार्षद ने सुजीत आप्टे को जान से मारने की धमकी तक दे डाली। एमी घोले ने धमकी देते हुआ कहा, “आपकी वजह से हमारा मंदिर टूटा है, ये मंदिर हमारे वोटर्स का मंदिर था। वो उस मंदिर को किसी भी काम के लिए इस्तेमाल करें, तुम कौन होते हो कुछ बोलने वाले। अब वोटर्स तुम्हारी संपत्ति पर कब्ज़ा करके फुटपाथ पर बैठेंगे और चरस-गाँजा जो मन होगा वो करेंगे।”
इसके बाद घोले ने सुजीत आप्टे को धमकाते हुए कहा कि उसने अपनी संपत्ति के पास जितनी भी सिक्यूरिटी लगाई है सब 16 दिसंबर 2020 हटा ले। क्योंकि स्थानीय लोग उस तारीख से साईं बाबा मंदिर को नए सिरे से बनाना शुरू करेंगे। आप्टे ने पूर्व सेनाधिकारी को इस बात की चेतावनी भी दे दी कि वह इस काम में बाधा नहीं बने अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
शिवसेना नेता की धमकी- ‘देखते हैं कौन रोकता है हमें’
आप्टे इस बात से हैरान थे कि रविवार को आखिर कैसे बीएमसी के अधिकारी शिवसेना पार्षद के साथ मौजूद थे। उन्होंने इस पर हैरानी जताते हुए कहा था, “रविवार को कौन सा बीएमसी अधिकारी काम करता है।”
पूर्व सेनाधिकारी को धमकी देने के बाद शिवसेना नेता ने अपने साथ आए गुंडों को कहा कि अब वह आप्टे के घर पर कुछ भी कर सकते हैं। चाहे शराब पीना हो या ड्रग्स लेना हो, इस बात पर चिल्लाते हुए शिवसेना पार्षद ने कहा, “देखते हैं कौन रोकता है हमें।”
वहीं सुजीत आप्टे के काउंसलर धृतिमान जोशी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि जैसे ही शिवसेना के गुंडे वापस गए पूर्व सेनाधिकारी ने स्थानीय पुलिस थाने में शिवसेना पार्षद और उनके साथ आए गुंडों की शिकायत की। उन्होंने अपनी शिकायत में इस बात का भी ज़िक्र किया था कि एमी घोले ने जान से मारने की धमकी दी थी। सुजीत आप्टे ने अपने दावों की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज भी जमा की है फिर भी उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
13 दिसंबर 2020 को शिवसेना नेता के साथ आए गुंडों में एक ने 17 और 18 दिसंबर को सुजीत आप्टे की संपत्ति पर अतिक्रमण किया था। मास्क पहने गुंडे के पास लोहे की रॉड थी, उसने आप्टे के घर में मौजूद सुरक्षाकर्मी को धमकी दी और सीसीटीवी कैमरा तोड़ दिए। उस गुंडे के आप्टे के घर में दाखिल होने से पहले पुलिस मौके पर पहुँच गई जिसके बाद वह मौके से भाग गया।
मुंबई पुलिस ने ठुकराई शिवसेना नेता पर एफ़आईआर दर्ज करने की माँग
इसके बाद सुजीत आप्टे रफ़ी अहमद किदवई मार्ग स्थित पुलिस थाने में एमी घोले और उनके गुंडों के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराने गए। लेकिन पुलिस ने ऐसा करने से साफ़ मना कर दिया। पुलिस ने आप्टे से कहा कि उन्हें कोई चोट नहीं लगी है इसलिए मामले में एफ़आईआर दर्ज नहीं की जा सकती है। बल्कि पुलिस ने आप्टे के सुरक्षा गार्ड पर NC (non cognizable) दर्ज कर ली।
सुजीत आप्टे द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका
जबकि NC शिकायत असंज्ञेय मामलों में दर्ज की जाती है। इस तरह के मामलों में पुलिस को शिकायत मिल सकती है और वह एफ़आईआर दर्ज कर सकती है। लेकिन मजिस्ट्रेट आदेश के बिना पुलिस इन मामलों की जाँच नहीं कर सकती है या वारंट के बिना गिरफ्तारी नहीं कर सकती है। यानी इस मामले में भी न्यायिक अनुमति के बिना एफ़आईआर नहीं दर्ज की जा सकती है। इस तरह की घटनाओं में अपराध छोटा होता है जैसे आम जनता के लिए बाधा बनना, शरारत या छोटी धोखाधड़ी।
सुजीत आप्टे ने बताया कि इस बीच वह कई बार पुलिस थाने गए और एफ़आईआर दर्ज करने का निवेदन किया जो कि इसका मुख्य साजिशकर्ता है। उन्होंने घोले को दोषी साबित करने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी जमा की लेकिन पुलिस ने फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की।
सुजीत आप्टे द्वारा पुलिस थाने में की गई शिकायत की प्रति सुजीत आप्टे द्वारा पुलिस थाने में की गई शिकायत की प्रति
इसके बाद आप्टे ने मामले की शिकायत पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से करने का प्रयास किया। जिसके बाद 20 दिसंबर 2020 को एफ़आईआर दर्ज की गई लेकिन वह भी एमी घोले के खिलाफ़ नहीं बल्कि किसी जगदीश शिंदे के खिलाफ। इस पर धृतिमान जोशी ने ऑपइंडिया को बताया कि एफ़आईआर दर्ज होने के कुछ ही समय बाद उसे जमानत पर रिहा भी कर दिया गया।
सुजीत आप्टे द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका
अधिकारियों ने पूर्व सेनाधिकारी को शिकायत करने से पीछे खींचा
अपनी याचिका में सुजीत आप्टे ने लिखा है कि जब उन्होंने जॉइंट म्यूनिसिपल कमिश्नर नरेन्द्र रामकृष्णा से संपर्क किया तब उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने से ही मना कर दिया। और पूर्व सेनाधिकारी से कहा कि वह एमी घोले से नहीं उलझें। जॉइंट कमिश्नर ने आप्टे को एक कॉल रिकॉर्डिंग सुनाई जिसमें शिवसेना नेता खुले तौर पर आप्टे को धमकी दे रहा था।
यहाँ याचिका उत्तरदाता संख्या 8 जॉइंट म्यूनिसिपल कमिश्नर नरेन्द्र रामकृष्णा से सम्बंधित है और याचिका उत्तरदाता संख्या 5 शिवसेना पार्षद से।
सुजीत आप्टे द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका
एमी घोले काफी प्रभावशाली है और उसकी शासन प्रशासन में काफी मज़बूत पकड़ भी है। वह केवल सत्ताधारी दल का पार्षद ही नहीं है बल्कि महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार का मज़बूत साझेदार भी है। आप्टे के मुताबिक़, शायद इन वजहों के चलते उसे क़ानून व्यवस्था का कोई डर नहीं है।
इन हालातों में सुजीत आप्टे के पास एक ही विकल्प बचा था। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 226 का सदुपयोग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने पुलिस से निवेदन किया है कि वो शिवसेना नेता, जूनियर इंजीनियर गुलेकर और वागमारे पर आईपीसी की धारा 120(B), 34, 425, 426, 441, 442, 445, 446, 447, 448, 450, 451, 452, 455, 456, 457, 458, 504, 506 और बॉम्बे पुलिस अधिनियम की धारा 110 और 117 के तहत एफ़आईआर दर्ज करें।
सुजीत आप्टे द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका
इसके अलावा आप्टे ने जिला समिति से भी गुहार लगाई है कि उनके मामले पर सुनवाई की जाए और जल्द से जल्द मामले की जाँच शुरू हो। बॉम्बे हाईकोर्ट 13 जनवरी 2021 को इस मामले की सुनवाई करेगी।
लोगों को उनके विचारों के लिए प्रताड़ित करने वाले महाराष्ट्र सरकार
यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है शिवसेना के गुंडों ने सत्ता की हनक दिखा कर आम नागरिकों के साथ इतना घटिया रवैया अपनाया हो। इसके पहले शिवसेना के गुंडों ने नौसेना के अधिकारी को उद्धव ठाकरे, शरद पवार और सोनिया गाँधी पर बनाया गया व्यंग्यात्मक कार्टून साझा करने के लिए बुरी तरह पीटा था। इस घटना की सीसी टीवी फुटेज भी सामने आई थी जिसमें शिवसेना के गुंडे नौसेना के अधिकारी को बुरी तरह पीट रहे थे। इसी तरह दिसंबर 2019 में शिवसेना के गुंडों ने वडाला के रहने वाले व्यक्ति को उद्धव ठाकरे की आलोचना करने के लिए गंजा कर दिया था। हाल ही महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने पर बीएमसी ने कंगना रनौत का मुंबई स्थित दफ्तर गिरा दिया था। इसके अलावा समित ठक्कर और सुनैना होले जैसे लोगों को भी महाराष्ट्र सरकार ने खूब प्रताड़ित किया।
भारत मे इस साल दिसंबर 2020 में जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) अब तक का सबसे ज्यादा रहा है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार (1 जनवरी, 2020) को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि दिसंबर 2020 में जीएसटी कलेक्शन 1,15,174 करोड़ रुपए रहा। 2017 में जीएसटी कानून लागू होने के बाद किसी भी महीने में अब तक का यह सबसे ज्यादा जीएसटी कलेक्शन है।
इस साल का आँकड़ा पिछले साल दिसंबर 2019 में एकत्र किए गए टैक्स से 12 फीसदी ज्यादा है। चालू वित्त वर्ष में यह लगातार तीसरा महीना है, जब जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपए के पार रहा है।
✅GST Revenue collection for December 2020 recorded all time high since implementation of GST ✅The gross GST revenue collected in the month of December 2020 is ₹ 1,15,174 crore
मंत्रालय ने बताया कि 1,15,174 करोड़ रुपए के कुल जीएसटी में से 21,365 करोड़ रुपए केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी), 27,804 करोड़ रुपए राज्य जीएसटी (SGST), 57,426 करोड़ रुपए IGST है। आईजीएसटी में 27,050 करोड़ रुपए वस्तुओं के आयात से प्राप्त हुआ है। जबकि, 8,579 करोड़ रुपए सेस के तौर पर आया है, जिसमें से अकेले 971 करोड़ रुपए वस्तुओं के आयात से आया है। अब तक का सबसे ज्यादा जीएसटी कलेक्शन अप्रैल 2019 में 1.14 करोड़ रुपए का था।
Breaking News: GST Revenue collection for December 2020 recorded all time high since implementation of GST. ₹ 1,15,174 crore gross GST revenue collected in December. Revenues for December 2020 are 12% higher than the GST revenues in the same month last year.
मंत्रालय ने अपने बयान में बताया, “जीएसटी लागू किए जाने के बाद से दिसंबर 2020 में जीएसटी कलेक्शन अब तक का सबसे ज्यादा है। पिछले साल दिसंबर महीने की तुलना में यह करीब 12 फीसदी ज्यादा है। दिसंबर महीने के दौरान, सामानों के आयात से रेवेन्यू 27 प्रतिशत अधिक था और घरेलू लेन-देन से रेवेन्यू पिछले साल के समान महीने से 8 फीसदी अधिक रहा है।”
कांगो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक के मध्य अफ्रीकी राष्ट्र में तैनात एक पाकिस्तानी सेना कर्नल को संयुक्त राष्ट्र मिशन के कर्मचारियों को इस्लाम धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश करते हुए पाया गया है। बता दें कि कांगो में अधिकांश आबादी ईसाई धर्म के विभिन्न संप्रदायों से जुड़ी हुई है,वहीं इस्लाम अल्पसंख्यक धर्म में आता हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांगो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक में यूनाइटेड नेशन ऑर्गनाइजेशन स्टेबिलाइजेशन मिशन (MONATCO) के पाकिस्तानी दल के एक डिप्टी कमांडर, कर्नल साकिब मुश्ताकी पर स्थानीय कर्मचारियों को इस्लाम में परिवर्तित कराने की कोशिश करने का आरोप लगा है। कथिततौर पर पाकिस्तानी सेना के कर्मियों ने कुछ ईसाई संयुक्त राष्ट्र मिशन के कर्मचारियों से संपर्क करते हुए उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया।
धर्मपरिवर्तन को लेकर लगे आरोपों के बाद पाकिस्तानी सेना के कर्नल के खिलाफ जाँच के आदेश दिए गए हैं। सामान्य मुख्यालय (जीएचक्यू) ने घटना के पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए एक आंतरिक जाँच-पड़ताल शुरू की है। हालाँकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मामले में दोषी पाएँ जाने के बाद पाकिस्तान सेना के अधिकारी के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब संयुक्त राष्ट्र मिशनों के लिए पाकिस्तानी सेना पर गलत काम करने का आरोप लगाया गया है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मिशन का एक हिस्सा रह चुके एक पाकिस्तानी सेना के अधिकारी पर पहले भी बड़े उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।
वर्ष 2012 में, दो पाकिस्तानी अधिकारियों पर 12 साल के मानसिक रूप से विक्षिप्त लड़के के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था। इस घटना ने इस्लामाबाद को अधिकारियों के खिलाफ अदालती कार्यवाही करने के लिए मजबूर किया था। नाबालिग लड़के का बलात्कार करने के आरोप में पाकिस्तानी ट्रिब्यूनल ने उन्हें एक साल जेल की सजा सुनाई थी।
उल्लेखनीय है कि इस खुलासे के दौरान यह भी पता चला कि पाकिस्तानी सेना 2005 से यौन शोषण की घटनाओं में शामिल है।
पिछले दिनों पाकिस्तान से एक वीडियो सामने आया था। इसमें खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाती मुस्लिमों की भीड़ हिंदू मंदिर को आग के हवाले करती नजर आ रही थी। अब एक खौफनाक तस्वीर सामने आई है जिससे पता चलता है कि वहाँ अल्पसंख्यकों को कितने भयावह तरीकों से प्रताड़ित किया जा रहा है।
ताजा मामले में सिंध प्रांत में एक पुलिस अधिकारी के कमरे में दो हिंदू फंदे से लटके मिले। आरोप है कि हत्या से पहले दोनों को टॉर्चर भी किया गया।
#Breaking | 2 girls found hanging inside a police officer’s room in Pakistan’s Sindh.
रिपोर्टों के अनुसार बबीता मेघवार और उसके रिश्तेदार डोंगार मेघवार की लाश सिंध के थारपारकर स्थित मिठी में एएसआई गुल मोहम्मद के कमरे में मिली। पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील राहत ऑस्टिन के अनुसार बबीता, डोंगार की साली थी और दोनों को हत्या से पहले बुरी तरह प्रताड़ित किया गया।
यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है जब एसोसिएटेड प्रेस ने एक रिपोर्ट में बताया था कि पाकिस्तान में इस्लाम के नाम पर हर साल 1000 से ज्यादा लड़कियों को अगवा कर उनका रेप किया जाता है। उनका धर्मांतरण कराया जाता है। इनमें से ज्यादातर लड़कियॉं हिंदू होती हैं। रिपोर्ट के अनुसार 12 से 25 साल की ईसाई, सिख और हिंदू महिलाओं का अपहरण, बलात्कार किया गया और उन्हें निकाह कर इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया गया। ऐसे पीड़ितों के परिवारों के सीमित आर्थिक साधनों के कारण कई मामले तो सामने ही नहीं आ पाते हैं और उनकी रिपोर्ट ही नहीं लिखवाई जाती।
लड़कियों को ज्यादातर उनके ही परिचितों और रिश्तेदारों द्वारा या बड़े पुरुषों द्वारा दुल्हन की तलाश में अपहरण किया जाता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि लड़कियों के माता-पिता जमींदारों या साहूकारों से ऋण लेते हैं, लेकिन उसे चुका नहीं पाते हैं, जिसके बाद जमींदार ऋण के भुगतान के रुप में जबरन उनकी लड़कियों को अपने कब्जे में ले लेता है।
पुलिस भी इस मामले में सताए हुए अल्पसंख्यकों की मदद न के बराबर ही करती है। पाकिस्तान के स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग के अनुसार, एक बार इस्लाम में परिवर्तित हो जाने के बाद, लड़कियों की शादी अक्सर उम्रदराज पुरुषों या उनके अपहरणकर्ताओं से जल्दी से कर दी जाती है।
पाकिस्तान के 220 मिलियन लोगों में से 3.6 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं, जो अक्सर भेदभाव का शिकार होते रहते हैं। उचित जाँच का अभाव, अभियुक्तों का अभियोजन और अगवा किए गए पीड़ितों को उनके अभिभावकों के साथ पुनर्मिलन के अधिकार से वंचित करना इस्लामी शिकारियों के लिए अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना और आसान बना देता है। ऐसे मामलों में प्रशासन से लेकर अदालतों तक का रवैया आरोपितों के पक्ष में झुका नजर आता है।
इसके अलावा अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को भी आए दिन निशाना बनाया जाता है। खैबर पख्तूनख्वा में मंदिर जलाए जाने से पहले भीमपुरा कराची में हिंदुओं के प्राचीन मंदिर पर हमला किया गया था। नवंबर की उस घटना में मंदिर के हिंदू देवी-देवताओं को निकाल कर बाहर फेंक दिया गया था। इसके साथ ही देवी-देवता से संबंधित सामानों को भी फेंक दिया गया था।