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देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी के बाद ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारूकी की पिटाई, फैमिली शो बताकर बेचे गए थे टिकट: रिपोर्ट

कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी हिंदू देवी-देवताओं पर अक्सर आपत्तिजनक टिप्पणी करता रहता है। भगवान राम से लेकर गोधरा में जिंदा जलाए गए कारसेवकों तक का वह मजाक उड़ा चुका है। लेकिन, मध्य प्रदेश के इंदौर में उसे यह भारी पड़ गयाजी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार एक दक्षिणपंथी संगठन के लोगों ने देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी के बाद उसकी पिटाई कर दी।

इंदौर के एक इवेंट में मुनव्वर ने देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। घटना की जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन के कई सदस्यों ने वहाँ पहुँच कर उसकी पिटाई कर दी। इसके बाद वे मुनव्वर फारूकी और आयोजक को थाने लेकर गए। 

घटना इंदौर के 56 दुकान स्थित मुनरो कैफे की है। शुक्रवार (1 जनवरी 2021) को शाम 6:30 बजे यह इवेंट आयोजित किया गया था। इस इवेंट के दौरान तथाकथित स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी की। इस बात की जानकारी मिलते हिन्द रक्षक संगठन के कई कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे और मुनव्वर फारूकी की पिटाई कर दी। पिटाई के बाद उसे तुकोगंज थाने लेकर गए।  

संगठन के कार्यकर्ता एकलव्य गौड़ ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि मुनव्वर फारूकी पहले भी देवी-देवताओं पर इस तरह की टिप्पणी कर चुका है। इसकी वजह से ही जयपुर में इसका एक कार्यक्रम रद्द हो चुका है। इस इवेंट की जानकारी मिलने पर संगठन के कार्यकर्ता टिकट लेकर इसमें शामिल हुए थे। इसके पहले भी मुनव्वर फारूकी मंचों से ऐसी विवादित और अपमानजनक बातें कर चुका है

वहीं कैफे संचालक का इस घटना पर कहना था कि इवेंट आयोजक (नलिन) ने फैमिली शो बता अनुमति ली थी। संचालक के मुताबिक़, “मुझे तो इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि इस शो के टिकट बेचे गए हैं। मैं भी अब पता कर रहा हूँ कि ये इवेंट किस तरह और क्यों किया गया।”

इस घटना पर तुकोगंज थाने के प्रभारी कमलेश शर्मा ने कहा कि हिन्द रक्षक संगठन के कार्यकर्ता उनके पास शिकायत लेकर आए थे। उनका आरोप था कि इवेंट में धार्मिक भावनाएँ भड़काने वाली बातों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हम इस शो की पूरी रिकॉर्डिंग देख रहे हैं। उसके आधार पर मामला दर्ज करके आगे की कार्रवाई करेंगे।   

इसके पहले माता सीता पर अभद्र टिप्पणी करते हुए मुनव्वर ने कहा था, “मेरा पिया घर आया ओ राम जी। राम जी डोंट गिव अ फ़*** अबाउट पिया। यह सुन राम जी कहते हैं मैं खुद चौदह साल से घर नहीं गया। अगर सीता ने सुन लिया, वो तो शक करेगी। सीता को तो माधुरी पे पहले से ही शक है। वो गाना है तेरा करूँ गिन-गिन इंतजार। उसे लग रहा है वनवास गिन रही है 14 पर आकर रुक गई।”

इस हरकत के बाद उस पर एफ़आईआर भी दर्ज की गई थी। इसके अलावा उसने गोधरा में जलाकर मार डाले गए 59 कारसेवकों का मजाक उड़ाया था। गोधरा कांड के लिए उसने अमित शाह और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया था। संज्ञान में यह वीडियो आने के बाद राष्ट्रीय सेवा संघ (RSS) ने उस पर कानूनी एक्शन लेने की बात कही थी।

कॉमेडियन अग्रिमा जोशुआ कौर खान ने श्रीनगर के शो में भारतीय सेना का उड़ाया मजाक, खुद को बताती है ‘आर्मी ब्रैट’

खुद को ‘आर्मी ब्रैट‌’ (जिसके पिता सेना में हों) बताने वाली कॉमेडियन अग्रिमा जोशुआ कौर ‘खान’ ने अब भारतीय सेना का ही मजाक बनाया है। हाल ही में उनके एक वीडियो से कश्मीरी अलगाववादी भी नाराज़ हो गए हैं। ये कार्यक्रम श्रीनगर में हुआ था। कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए अग्रिमा जोशुआ ने कश्मीरियों और उनके ‘संघर्ष’ को लेकर कुछ बातें कहीं, जिससे अलगाववादी नाराज़ हैं। हालाँकि, उन्होंने ये ‘चुटकुले’ भारतीय सेना के खिलाफ पेश किए थे, ताकि उन्हें भीड़ का समर्थन मिल सके।

एक तरह से कश्मीर का अलगाववादी गुट ही उनका टारगेट ऑडियंस था, लेकिन अब वो ही नाराज़ हो गए हैं। एक कश्मीरी अलगाववादी जहीर ने कॉमेडियन का वीडियो ट्विटर पर डालते हुए आरोप लगाया कि कश्मीरियों के ‘संघर्ष की कहानी’ को चुटकुलों में बदल दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि भारतीय सेना के खिलाफ घृणास्पद और भद्दी टिप्पणियाँ कर के अलगाववादियों का दिल जीतने निकलीं अग्रिम जोशुआ को लेकर अब उन्हीं अलगाववादियों में आक्रोश है

जहीर ने तो उन्हें ‘संवेदनहीन’ और ‘मूर्ख’ तक करार दिया। कार्यक्रम में अग्रिमा जोशुआ ने कहा कि कश्मीरी लोगों में काफी धैर्य है और उन्होंने उनके शो के लिए काफी इन्तजार किया, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने आज़ादी के लिए 70 वर्षों तक इन्तजार किया। इसके बाद अग्रिमा ने एक कश्मीरी युवक का जिक्र करते हुए कहा कि उसने उनसे बातचीत बंद कर दी है और वो यहाँ नहीं है, पता नहीं उसका क्या हुआ।

इसके आगे वो बोल बैठीं, “या तो उसने मेरे से सारे सम्पर्क तोड़ लिए, या फिर सेना उसे उठा कर ले गई। पता नहीं क्या बात है!” जहीर ने उनकी इस टिप्पणी का विरोध करते हुए लिखा कि भारतीय सेना के जवान लोगों को उठा कर ले जाते हैं और उनका फेक एनकाउंटर कर देते हैं, जबकि जोशुआ इस विपत्ति का मजाक बना रही हैं। अग्रिमा जोशुआ ने ये भी कहा कि उनके पिता भारतीय सेना में थे। जहीर ने उन लोगों पर भी आपत्ति जताई, जिन्होंने अग्रिमा जोशुआ की बातों पर ताली बजाई।

अग्रिमा जोशुआ के इस कार्यक्रम के बाद शो के आयोजक ‘जजीर टॉकीज’ ने उनके द्वारा की गई टिप्पणियों पर माफ़ी माँगी है। आयोजकों ने कहा कि वो गलती मानते हैं और स्थिति को बेहतर तरीके से निपटा जा सकता था। आयोजनों ने कहा कि कुछ लोग इससे छला हुआ महसूस कर रहे हैं, जिनसे वो माफ़ी माँगते हैं। साथ ही ये भी कहा कि कुछ लोगों के फीडबैक को गंभीरता से नहीं लिया गया और यहीं गलती हुई।

इससे पहले जुलाई 2020 में अरब सागर में छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक का अपमान करने वाली स्टैंड-अप ‘कॉमेडियन’ अग्रिमा जोशुआ के वीडियो के एक हिस्से के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर एक बड़ा विवाद हो गया था। वीडियो में शिव स्मारक और छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी, जिसकी घोषणा महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने की थी। आक्रोश के बाद कॉमेडियन ने शिवसेना से माफ़ी माँगी थी।

‘हिंदू राष्ट्र के लिए हम मरने को तैयार’: नेपाल में राजतंत्र के लिए काठमांडू की सड़कों पर मार्च

राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहे नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र की माँग जोर पकड़ रही है। इसके समर्थन में राजधानी काठमांडू की सड़कों पर मार्च निकाला गया। पूर्व उपप्रधानमंत्री कमल थापा ने संवैधानिक राजतंत्र (Constitutional Monarchy) बहाल करने और नेपाल को पुनः हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की है। उन्होंने माँग पूरी नहीं होने पर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।  

शुक्रवार (1 जनवरी 2020) को एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए कमल थापा ने कहा, “शुरुआत में यह सिर्फ हमारा एजेंडा था। लेकिन अब जनता भी इस मुद्दे पर आगे आई है। चाहे लोग इसकी बहाली चाहते हों या नहीं लेकिन वे इसकी बात ज़रूर कर रहे हैं। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए सभी राजनीतिक दलों को इस पर विमर्श करने के लिए बैठक करनी चाहिए।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कमल थापा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर नेपाल को पुनः हिन्दू राष्ट्र का दर्जा दिलाने के लिए वे और उनके कार्यकर्ता मरने और मारने को तैयार हैं। 

थापा ने कहा, “अन्य राजनीतिक दल संसद के भंग होने की गम्भीरता नहीं समझ कर देश को अंधकार की तरफ ले जा रहे हैं। हाल ही में भारत और चीन के तमाम दिग्गज अधिकारी सत्ताधारी दल में जारी समस्या का हल निकालने के लिए नेपाल आए थे। हम दूसरों को यह तय करने का मौक़ा नहीं दे सकते हैं कि हमें क्या करना चाहिए।”

नेपाल में राजतंत्र समर्थित आंदोलन 

नेपाल में दिसंबर 2020 की शुरुआत से ही हिन्दू राष्ट्र और राजतंत्र दोबारा स्थापित करने के लिए प्रदर्शन जारी है। इन प्रदर्शनों में “देश को बचाने के लिए राजतंत्र वापस लाना होगा”, “पार्टी से ऊपर देश” और “राजा, वापस आओ और देश को बचाओ” जैसे नारे लगाए गए थे। इन प्रदर्शनों को राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, राजशाही समूहों (royalist groups) और राजतंत्र समर्थक नागरिकों का समर्थन प्राप्त है। नेपाल के गृह मंत्रालय ने 77 जिलों को दिशा-निर्देश जारी कर ऐसे प्रदर्शनों को ख़त्म करने को कहा है भले इसके लिए बल का प्रयोग क्यों न करना पड़े।

मुकेश अम्बानी और रिलायंस पर SEBI ने लगाया ₹40 करोड़ का जुर्माना: 2007 में शेयरों में हेराफेरी का है मामला

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मुकेश अम्बानी और उनकी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज पर 40 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जहाँ रिलायंस इंडस्ट्रीज पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया, वहीं उसके चेयरमैन मुकेश अम्बानी पर 15 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया। आरोप रिलायंस पेट्रोलियम की शेयरों की हेराफेरी का है, जो नवंबर 2007 में हुआ था। इस पेनल्टी का जनवरी 1, 2021 से 45 दिनों के भीतर भुगतान करना पड़ेगा।

SEBI ने कहा है कि उसने जाँच के दौरान इस मामले के सारे तथ्यों और परिस्थितियों की समीक्षा के बाद ये निर्णय लिया है। साथ ही SEBI के नियम-कानून, मिले अधिकारों और इस मामले में प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का भी अध्ययन किया गया। रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (RIL) के शेयरों के कारोबार में गड़बड़ी का आरोप की जाँच के बाद ये कार्रवाई की गई। दो अन्य कंपनियों पर भी जुर्माना लगाया गया है।

नवी मुंबई सेज प्राइवेट लिमिटेड को 20 करोड़ रुपए और मुंबई सेज लिमिटेड को 10 करोड़ रुपए का जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया है। RIL ने मार्च 2007 में RPL में 4.1% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया था। SEBI के अधिकारी बीजे दिलीप ने 95 पन्नों के आदेश में जुर्माने का फैसला सुनाया। संस्था ने कहा कि शेयरों की मात्रा या कीमत में कोई भी गड़बड़ी हमेशा कारोबार में निवेशकों के विश्वास को चोट पहुँचाती है और वे ही बाजार में हुई हेराफरी में सबसे प्रभावित ज्यादा होते हैं।

एजेंसी ने कहा कि आम निवेशकों को इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था और उनके साथ धोखाधड़ी हुई। कंपनियों की शेयरों की कीमतों पर असर पड़ने के कारण इन निवेशकों को नुकसान हुआ। पूँजी बाजार में इन गड़बड़ियों को रोकने की ज़रूरत पर बल देते हुए SEBI ने कहा कि इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए। कारोबार में ऐसी गड़बड़ियाँ होने से निवेशकों को सही कीमत पता नहीं चलती। फ़िलहाल कंपनी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बता दें कि मीडिया का एक वर्ग और विपक्षी नेताओं का समूह लगातार मोदी सरकार पर अम्बानी-अडानी की मदद करने के आरोप लगाता रहता है। 2004 में रिलायंस के एक शेयर की कीमत जहाँ ₹84 थी, वहीं 2014 में ₹558 हो गई। मोदी के आने के बाद यह आँकड़ा अभी ₹1973 का है। यूपीए के दस सालों में रिलायंस 6.6 गुणा बढ़ा, और मोदी के समय में छः सालों में इसकी वृद्धि साढ़े तीन गुणा की है। हर साल का भी औसत निकालेंगे तो यूपीए के समय में रिलायंस ने बेहतर वृद्धि पाई है।

भारत विरोधी नहीं हो सकता हिंदू, देशभक्ति उसका मूल चरित्र: गाँधी पर किताब का विमोचन कर बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने शुक्रवार (1 जनवरी 2021) को महात्मा गाँधी पर लिखी गई एक पुस्तक का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने देशभक्ति पर महात्मा गाँधी के विचारों का ज़िक्र करते हुए कहा कि देशभक्ति धर्म से पनपती है। अगर कोई हिन्दू है तो वह देशभक्त होगा ही। यह उसका मूलभूत स्वभाव और चरित्र होगा। भागवत ने यह भी कहा कि गाँधी जी मानते थे कि जो स्वधर्म को नहीं समझता है, वह स्वराज को भी नहीं समझ सकता है। 

जेके बजाज और एमडी श्रीनिवास द्वारा लिखी गई किताब ‘मेकिंग ऑफ़ हिन्दू पेट्रियट: बैकग्राउंड ऑफ़ गाँधी हिन्द स्वराज’ के विमोचन पर संघ प्रमुख ने और भी कई बातें कहीं। उनके मुताबिक़, “इस तरह के कयासों का कोई मतलब नहीं है कि संघ महात्मा गाँधी को साधने का प्रयास कर रहा है। गाँधी जी जैसे महान व्यक्तियों को कोई नहीं साध सकता है। अगर कोई हिन्दू है तो वह अवश्य ही देशभक्त होगा। यह उसके स्वभाव और चरित्र का हिस्सा होगा। ऐसा हो सकता है कि उसकी राष्ट्रभक्ति को जागृत करने की आवश्यकता पड़े, लेकिन वह राष्ट्र विरोधी नहीं हो सकता है। देशभक्ति का मतलब सिर्फ ज़मीन से प्रेम नहीं। इसका मतलब लोगों, नदियों, संस्कृतियों, परम्पराओं इन सभी से प्रेम है।” 

किताब में किए गए शोध का हवाला देते हुए मोहन भागवत ने कहा, “धर्म और देशभक्ति अलग नहीं है, क्योंकि अपनी मातृभूमि के लिए प्रेम आध्यात्म से ही पनपता है। गाँधी जी खुद कहते थे कि धर्म राष्ट्रभक्ति का केंद्र है। गाँधी जी का कहना था कि हमारा धर्म सब धर्मों का धर्म है। भारत के सभी पंथों और सम्प्रदायों में एक ही सत्य छुपा है ‘एकता की विविधता’। गाँधी जी को इसका आभास था और वह इस पर चिंतित रहते थे कि अंग्रेज़ हिन्दू और मुसलमानों को कभी संगठित नहीं होने देंगे। इसलिए उन्होंने ऐसा कदम उठाया जिससे हिन्दू और मुसलमानों की मौजूदगी के बावजूद भारत एक राष्ट्र बना रहेगा।”  

संघ प्रमुख ने कहा, “महात्मा गाँधी यह समझते थे कि स्वतंत्रता की लड़ाई केवल राज्य में बैठे लोगों के लिए नहीं है। हम जैसे भारत का निर्माण करना चाहते हैं, वैसे जीवन जीने वाले लोग होने चाहिए। पाश्चात्य सभ्यता हमें दबा कर हमारा जीवन नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। गाँधी जी ने अहिंसा की बात ऐसे दौर में सोची जो आज भी अनुकरणीय है। हिन्दू धर्म में ऐसे हज़ारों उदाहरण हैं जब लोगों ने अपना बलिदान किया, लेकिन धर्म पर आँच नहीं आने दी। गाँधी जी ने कहा था कि वह अपने धर्म में बचे अंतिम व्यक्ति भी होंगे तब भी वह अपना धर्म नहीं छोड़ेंगे।” 

’19 महीने में मंदिरों पर 120 हमले’: आंध्र में अब भगवान की प्रतिमा के हाथ तोड़े, लोहे की रॉड का किया इस्तेमाल

आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब राजमुंद्री के विघ्नेश्वर मंदिर में भगवान सुब्रमण्येश्वर स्वामी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। शुक्रवार (जनवरी 1, 2021) को प्रतिमा क्षतिग्रस्त मिला था। इस मामले में केस रजिस्टर कर के पुलिस दोषियों को पकड़ने के लिए छापेमारी कर रही है। बताया जा रहा है कि नए साल की रात (दिसंबर 31- जनवरी 1) में इस घटना को अंजाम दिया गया।

भाजपा ने इस घटना को लेकर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि राज्य में इस तरह की घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री जगह मोहन रेड्डी की निष्क्रियता दिखाती है कि उनका दोषियों को पूर्ण समर्थन है। वहीं ‘जन सेना’ के मुखिया और तेलुगु अभिनेता पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश में पिछले 1.5 वर्षों से चल रही मंदिरों पर हमले, प्रतिमाओं-रथों को क्षतिग्रस्त करने की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार से माँग की है कि जाँच बिठाई जाए

उन्होंने इन मामलों की CBI जाँच की माँग की। पूर्व मुख्यमंत्री और TDP अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू के आँकड़ों के अनुसार, 19 महीने में आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हमले की 120 घटनाएँ हुई हैं और हाल ही में पीठपुरम में 6 प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त किया गया। बता दें कि राजमुंद्री का श्रीराम नगर ईस्ट गोदावरी जिले में पड़ता है। राजमुंद्री को आंध्र की सांस्कृतिक राजधानी भी कहते हैं, लेकिन लोगों का दावा है कि यहाँ ईसाई मिशनरियों का बोलबाला है।

इसके अलावा वंतालमामिडी के पड़ेरु घाट पर स्थानीय लोगों की इष्ट देवी कोमलम्मा की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ की गई। ये मंदिर विज़ाग एजेंसी में स्थित मोडकोंदम्मा पडालू मंदिर के सामने स्थित है। उधर राजमुंद्री III टाउन के इंस्पेक्टर के दुर्गा प्रसाद ने बताया कि कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों ने लोहे की रॉड का इस्तेमाल कर के भगवान सुब्रमण्येश्वर की प्रतिमा तोड़ी। टूटे हाथ मंदिर में ही गिरे मिले। ये लुटेरों की करतूत नहीं है, क्योंकि मंदिर में से एक भी कीमती सामान गायब नहीं है।

इस मंदिर को 2002 में निर्मित किया गया था और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। पुजारी मुरली जब सुबह पूजा करने गए, तब उन्होंने देखा कि भगवान सुब्रमण्येश्वर की मूर्ति क्षतिग्रस्त है और उनके हाथ गायब हैं। पुलिस का कहना है कि उसने स्थानीय CCTV कैमरों की फुटेज के निरीक्षण के बाद दोषियों की गिरफ़्तारी के लिए स्पेशल टीम बनाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नए साल का जश्न मनाने वालों ने इस घटना को अंजाम दिया है।

चंद्रबाबू नायडू ने अपने बयान में कहा, “जगन सरकार में भगवान तक सुरक्षित नहीं हैं। YSRCP सरकार जनता को सफाई दे। बेजवाड़ा कनक दुर्गा मंदिर में रथ के 3 शेरों की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त किया गया था। अमरावती मंदिर में रथ में आग लगा दी गई। कहीं भी दोषियों की गिरफ़्तारी नहीं हुई। सरकार ने समय पर कार्रवाई की होती तो अगली घटनाएँ होती ही नहीं।” सत्ताधारी पार्टी ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

इस घटना से 2 दिन पहले ही विजयनगरम जिले के नेल्लीमरला मंडल में एक पहाड़ी पर स्थित मंदिर में अज्ञात उपद्रवियों ने भगवान राम की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया था। मूर्ति रामतीर्थम गाँव के पास पहाड़ी की चोटी पर स्थित बोडिकोंडा कोदंडाराम मंदिर में विराजमान थी। उपद्रवी ताला तोड़ मंदिर के गर्भगृह में घुसे और और स्वामी कोदंडारामुडु का सिर काटकर अलग कर दिया। मुख्य मंदिर पहाड़ी की तलहटी में है।

संजय राउत की पत्नी के खाते में भेजे गए ₹67 लाख, कंस्ट्रक्शन कंपनी में भी हैं पार्टनर: ED ने प्रवीण राउत की ₹72 Cr की संपत्ति अटैच की

प्रवर्तन निदेशालय (ED) वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खिलाफ जाँच कर रहा है। आरोप है कि PMC बैंक के आरोपित प्रवीण राउत की पत्नी और एक अन्य कंपनी ने कुल मिला कर वर्षा के अकाउंट में 67 लाख रुपए भेजे थे। ED ने जानकारी दी है कि प्रवीण राउत ने हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (HDIL) के नाम पर अवैध लोन्स और अन्य मद में कुल 95 करोड़ रुपए की हेराफेरी की।

प्रवीण राउत को किए गए पेमेंट्स के कोई कागजात तक नहीं थे। HDIL के अकाउंट बुक से पता चला है कि प्रवीण राउत ने पालघर में घर लेने के लिए ये रुपए लिए थे। इस आपराधिक लेनदेन में प्रवीण ने अपनी पत्नी माधुरी के अकाउंट में भी 1.6 करोड़ रुपए भेजे थे। ED ने जानकारी दी है कि इस रकम में से 55 लाख रुपए इंटरेस्ट फ्री लोन के नाम पर वर्षा राउत को ट्रांसफर किए गए। इनमें से 50 लाख रुपए दिसंबर 23, 2010 को ट्रांसफर किए गए थे।

बाकी के 5 लाख रुपए मार्च 15, 2011 को भेजे गए थे। ED ने बताया कि इस रकम का इस्तेमाल मुंबई के दादर ईस्ट में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया गया। M/s अवनी कंस्ट्रक्शंस नामक कंपनी में वर्षा और माधुरी पार्टनर्स भी हैं। ओवरड्रॉन कैपिटल को लोन में बदल कर इस कंपनी के द्वारा भी वर्षा राउत को 12 लाख रुपए भेजे गए। मात्र 5625 रुपए के कंट्रीब्यूशन को आधार बना कर ये रकम वर्षा को भेजी गई।

वर्षा राउत को मंगलवार (जनवरी 5, 2020) को पेश होने के लिए ED ने समन भेजा है। इससे पहले राकेश कुमार वाधवान और उससे जुड़ी 293 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया गया और साथ ही 63 करोड़ रुपए की ज्वेलरी को भी जब्त किया गया। राकेश के अलावा सारंग वाधवान, वरयाम सिंह, जॉय थॉमस (PMC बैंक के चेयरमैन और एमडी) सहित अन्य के खिलाफ मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने 4355 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में FIR दर्ज की थी, जिसकी जाँच अब ED कर रही है

HDIL-PMC बैंक घोटाला मामले में ED ने शुक्रवार को ताज़ा कार्रवाई में प्रवीण राउत की 72 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया। वहीं संजय राउत ने हाल ही में कहा था कि उनसे ED ने कुछ कागजात माँगे हैं और जाँच में सहयोग करते हुए वो कागजात सबमिट कर दिए गए हैं। वर्षा राउत को इससे पहले दिसंबर 29 को जाँच एजेंसी के समक्ष पेश होना था, लेकिन उन्होंने तारीख आगे बढ़ाने की गुजारिश की थी।

संजय राउत की पत्नी से पूछताछ के संबंध में ED अब तक 4 बार समन जारी कर चुकी है। इससे पूर्व भी वो दो दफा स्वास्थ्य आधार पर जाँच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुईं थी। इस मामले को लेकर उनके पति व शिवसेना नेता संजय राउत ने आरोप लगाया था कि भाजपा महाराष्ट्र सरकार को गिराने के लिए जाँच एजेंसी का इस्तेमाल कर रही है। ED की नोटिस पर भड़के शिवसैनिकों ने मुंबई के कोलाबा में ईडी दफ्तर के सामने भाजपा प्रदेश कार्यालय का पोस्टर लगाया था और शिवसेना भवन के सामने मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की थी।

सुवेंदु अधिकारी के भाई ने भी थामा भाजपा का दामन: 14 टीएमसी पार्षद भी साथ में हुए शामिल, बंगाल में तेज हुई हलचल

ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को एक और बड़ा झटका लगा है। पश्चिम बंगाल में शुक्रवार को पूर्व मंत्री सुवेंदु अधिकारी के भाई सौमेंदु अधिकारी भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। उनके साथ कोंताई नगर पालिका के 14 अन्य टीएमसी पार्षद ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है। सौमेंदु अधिकारी नगर पालिका के अध्यक्ष थे, लेकिन अमित शाह की उपस्थिति में सुवेंदु अधिकारी के भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही टीएमसी सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने सुवेंदु को अपने पिता और भाइयों को टीएमसी से बीजेपी में शिफ्ट करने में नाकाम रहने के लिए ताना मारा था।

सुवेंदु अधिकारी के भाजपा में शामिल होने से बौखलाए ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार ने हालही में पश्चिम बंगाल में उनके भाई सौमेंदु अधिकारी को कोंताई नगर पालिका के अध्यक्ष पद से हटा दिया था और उनकी जगह सिद्धार्थ मैत्री को नियुक्त किया था। यह फैसला शहरी विकास और नगर मामलों के मंत्रालय ने फरहाद हकीम के नेतृत्व में लिया था, जो सीएम ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी हैं।

सुवेंदु ने हालिया एक बैठक में दावा किया था कि सौमेन्दु कुछ पार्षदों और तृणमूल कॉन्ग्रेस के 5,000 कार्यकर्ताओं के साथ दिन में भाजपा में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस जल्द ही ढह जाएगी।

भाजपा में सुवेंदु और सौमेंदु अधिकारी का शामिल होना निश्चित रूप से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए चिंता का विषय है, खासकर पार्टी से बागी होकर भाजपा में शामिल होने वाले दिग्गज नेताओं का 2021 विधानसभा चुनावों को मद्देनजर टीएमसी के संबंधित गढ़ों के लोगों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

इस बीच, गुरूवार को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के भाई सौमेंदु अधिकारी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की, जिसमें उन्हें पूर्व मेदिनीपुर जिले के कोंताई नगरपालिका के प्रशासक के पद से हटाने के निर्णय को चुनौती दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सौमेंदु अधिकारी ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार के नगर मामलों के विभाग द्वारा नागरिक निकाय के प्रशासक के पद से अवैध रूप से हटा दिया गया था।

गौरतलब है कि 17 दिसंबर को, सुवेंदु अधिकारी ने औपचारिक रूप से तृणमूल कॉन्ग्रेस से नाता तोड़ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गए थे। इस दौरान उन्होंने अपने फॉलोवर्स को संबोधित करते हुए पार्टी नेताओं को दरकिनार करने के लिए ममता बनर्जी को दोषी ठहराते हुए एक पत्र लिखा था और आरोप लगाया था कि ममता ने पार्टी के आदर्शों के साथ विश्वासघात किया है।

सुवेंदु अधिकारी के पिता और कांथी सांसद सिसिर कुमार अधिकारी और उनके भाई दिब्येंदु अधिकारी और तमलुक से सांसद अभी भी टीएमसी के नेता हैं। अभी इस बात को लेकर कोई खबर सामने नहीं आई है कि वे कब भाजपा में शामिल होंगे। ममता बनर्जी ने पिछले महीने सिसिर अधिकारी को उन पार्टी नेताओं से दूर रहने के लिए कहा था जो कथित रूप से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। बनर्जी ने सिसिर अधिकारी को टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी के साथ काम करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि नंदीग्राम, हल्दिया, कोंताई, नंदनकुमार और रामनगर जैसे स्थानों पर पार्टी के बागी नेताओं को लॉयल नेताओं से बदल दिया जाए।

फेक न्यूज़ में द वायर ने घुसाया जातिगत एंगल वहीं आरोपितों के मुस्लिम होने पर छिपाया उनका मज़हब और नाम: जानें क्या है मामला

वामपंथी प्रोपगेंडा पोर्टल द वायर कथित अपराधों में जाति का एंगल निकाल कर न केवल फेक न्यूज़ फैलाने बल्कि मुस्लिम आरोपितों की धार्मिक पहचान छिपाकर अपराध को धर्मनिरपेक्ष बनाने की भी पूरी कोशिश करता आया है। इसी कड़ी में द वायर ने उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में 26 साल के दलित आदमी की हत्या में भी लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया।

10 दिसंबर को ’द वायर’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित कर दावा किया था कि मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक 25 वर्षीय दलित युवक की इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि उसने पार्टी के दौरान उच्च जाति के लोगों की प्लेटों को छू लिया था। रिपोर्ट के अनुसार, किशनपुर गाँव के निवासी और अनुसूचित जाति समुदाय (कोरी) के देवराज अनुरागी को दो ‘सवर्ण’ मित्रों अपूर्व सोनी और संतोष पाल ने एक प्लेट को छूने की वजह से पीट-पीटकर मार डाला था।

गौरीहार पुलिस ने दोनों आरोपितों पर हत्या और दलितों के खिलाफ अत्याचार के आरोप में मामला दर्ज किया था, हालाँकि घटना के बाद वे फरार हो गए थे।

वहीं इस घटना को लेकर ‘द वायर ’जैसे लिबरल-धर्मनिरपेक्ष’ मीडिया हाउसों ने कथित जाति एंगल को मामले में जबरन घुसाने का प्रयास किया और यह बताने की कोशिश की छुआछूत के चलते इस क्रूर हत्या को अंजाम दिया गया। हालाँकि, सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत थी और मामला कथित हत्या का नहीं बल्कि महिला से छेड़छाड़ से संबंधित था।

देवराज अनुरागी के भाई हरिश्चंद्र ने भी घटना की पुष्टि करते हुए कहा था कि जिस दिन यह घटना घटी यानी 7 दिसंबर को उसका भाई पूरे दिन घर से बाहर नहीं गया था। उन्होंने कहा कि देवराज मानसिक रूप से अस्थिर था। इसके अलावा उन्होंने मामले में किसी भी प्रकार के जातिगत एंगल के दावे को भी नकार दिया था।

वहीं गाँववालों के बताया था कि आरोपितों में से एक संतोष पाल की बहन 7 दिसंबर को हरिश्चंद्र की मिठाई की दुकान पर गई थी, जहाँ देवराज अनुरागी ने कथित तौर पर उसके साथ छेड़छाड़ की और उसे उसके साथ बैठने के लिए मजबूर किया। पाल की बहन ने इस बात की शिकायत अपने भाई से की थी, जिसके बाद गुस्से में बौखलाए भाई ने अपने दोस्त भूरा सोनी के साथ मिलकर देवराज के घर में मारपीट की थी।

गौरतलब है कि इस मामले में प्रोपेगैंडा वेबसाइट द वायर ने हिंदू विरोधी खबर को अंजाम देने की जल्दबाजी में न केवल झूठी खबर को फैलाया, बल्कि अपराध को जातिगत एंगल देकर लोगों को भड़काने का भी काम किया।

इसके विपरीत द वायर ने मुस्लिम समूहों द्वारा किए गए अपराधों के मामले में लीपापोती कर उन्हें अक्सर बचाने की कोशिश की है। साथ ही ऐसी घटना में जिसमें आरोपित मुस्लिम समुदाय से जुड़ा हो, उसमें धर्म को छुपाने और आरोपित की पहचान को छुपा कर रिपोर्ट को प्रकाशित किया गया है। इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में दलित आदमी की हत्या को लेकर छापी गई रिपोर्ट में देखा जा सकता है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मलवां इलाके में रहने वाले 25 वर्षीय दलित युवक धर्मपाल दिवाकर ने आत्महत्या कर ली, जब दो आरोपितों ने उसे आम के पेड़ से पत्तियाँ चोरी करने पर जमकर पीटा था। धरमपाल के पिता रामपति दिवाकर ने आरोप लगाया था कि उनका बेटा मंगलवार को पत्ते तोड़ कर अपनी बकरियों को खिला रहा था। जिस वजह से आरोपितों ने उसे बेहरहमी से पीटा। इसे बाद में स्थानीय लोगों ने मामले में हस्तक्षेप कर इसे सुलझा दिया था।

वहीं अपमान झेलने के बाद दिवाकर ने घर लौट कर खुद को स्टोर रूम के खूँटी से लटका लिया। पुलिस ने मामले में आरोपित नूर मोहम्मद (27) और सलमान (22) को गिरफ्तार किया था।

हालाँकि, इस मामले में लिबरल सेक्युलर मीडिया द वायर ने अपनी खबर से मुस्लिम शब्द और आरोपितों का नाम ही गायब कर दिया। जानबूझकर हर घटना में जातिगत एंगल डालने वाले द वायर ने आरोपितों की पहचान छिपाने के लिए हेडलाइन में सिर्फ दलित शब्द का इस्तेमाल किया और मुस्लिम आरोपितों का जिक्र तक नहीं किया।

ऊपर दिए स्क्रीनशॉट में आप द वायर की हैडलाइन देख सकते है कि किस तरह इन्होंने आरोपितों के धर्म का कोई उल्लेख नहीं किया है, जो कि उनकी फेक समाचार रिपोर्टों में भी दर्शा दिया जाता है। लेकिन मुस्लिम समूह के आते ही ये अपनी खुद की सामान्य रणनीति को बदल देते है। जोकि यह स्पष्ट तौर पर दिखाता है कि द वायर किस प्रकार सवर्ण जाति समुदायों के खिलाफ नफ़रत के बीज बोने का काम करते है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में कई मीडिया संगठनों द्वारा मुस्लिम अपराधियों के नाम छुपाने का न केवल प्रयास किया गया हैं, बल्कि धर्मनिरपेक्ष खबर बनाने के लिए यह दिखाने की भी कोशिश की गई है कि मामले में आरोपित हिन्दू समुदाय से हैं, इसके लिए बाकायदा हिन्दू स्पिन दिया गया।

सीरम इंस्टिट्यूट की वैक्सीन ‘कोविशील्ड’ को भारत में मिली मंजूरी: कितनी डोज तैयार, क्या होगी कीमत; जानें- सबकुछ

दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन उत्पादक कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड को भारत में इमरजेंसी में इस्तेमाल की अनुमति दे दी गई है। इसी के साथ देश में कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन का इंतजार अब कुछ हद तक खत्म हो गया है। सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड वैक्सीन देश की ऐसी पहली वैक्सीन है, जिसे केंद्र सरकार ने अभी तक मंजूरी दी है और इसे जल्द ही लगाए जाने का रास्ता भी साफ़ हो गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पर फैसला ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया द्वारा बनाए गए विशेष पैनल ने लिया है। केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोविड-19 पर एक विशेषज्ञ समिति ऑक्सफोर्ड के कोरोना वायरस रोधी टीके कोविशील्ड के आपात इस्तेमाल की मंजूरी देने के लिए सिफारिश करने की है। बता दें कि सीरम इंस्टिट्यूट ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन में पार्टनर है और देश में इस वैक्सीन को कोविशील्ड के नाम से बेचा जाएगा।

गौरतलब है कि कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर बनाया है। इससे पहले, ब्रिटेन ने भी बुधवार को ही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अदार पूनावाला का सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) इसके भारत में ट्रायल्स कर रहा है। इसे ही एक्सपर्ट कमेटी ने सशर्त मंजूरी की सिफारिश की है। बताया जा रहा है कि भारत में सीरम इंस्टिट्यूट पहले ही इस वैक्सीन के 5 करोड़ डोज तैयार कर चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट में भारत के लिए कोविशील्ड वैक्सीन के ज्यादा फायदेमंद होने के कई कारण गिनाए जा रहे हैं। पहला तो ये कि Pfizer की वैक्सीन को -70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर फ्रीज करके रखना है जिसके लिए फ्रीजर की व्यवस्था करना भारत के लिए बड़ी चुनौती होगी। वहीं मॉडर्ना की वैक्सीन के लिए भी डीप फ्रीजर की आवश्यकता होगी, लेकिन ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन को सामान्य फ्रीज में आराम से रखा जा सकता है।

इस वैक्सीन का दूसरा सकारात्मक पहलू यह है कि भारत जैसे बड़े देश में टीकाकरण के लिए बहुत बड़े स्तर पर प्रॉडक्शन की आवश्यकता होगी। जिस वजह से दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक के रूप में सीरम इंस्टिट्यूट इसमें बेहद मददगार साबित हो सकता है। कंपनी का कहना है कि वह मार्च महीने तक तकरीबन दस करोड़ डोज तैयार कर लेगी। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि भारत में कोरोना के पहले फेज के वैक्सिनेशन में तकरीबन 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया जाना है।

गौरतलब है कि सीरम इंस्टिट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ये भी साफ कर चुके हैं कि वर्तमान में बने तकरीबन सभी डोज भारत में ही इस्तेमाल किए जाएँगे। वहीं इस वैक्सीन की तीसरी खासियत कीमत भी हैं। नवंबर में एक इंटरव्यू में पूनावाला कह चुके हैं कि वैक्सीन के दोनों डोज की कीमत एक हजार रुपए से कम रखी जाएगी।