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‘नाना पाटेकर का बहिष्कार और बलात्कारी अनुराग कश्यप को बढ़ावा… नरक भी ऐसे लोगों को रखने से मना कर देगा’

बॉलीवुड फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप पर पिछले साल यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पायल घोष ने इस बार बॉलीवुड के पाखंड पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा है कि आखिर बॉलीवुड में इतनी हिप्पोक्रेसी क्यों है कि नाना पाटेकर के ख़िलाफ़ सब खड़े हो गए और अनुराग कश्यप के मामले पर किसी ने उसका बहिष्कार नहीं किया।

पायल ने ट्वीट किया, “बॉलीवुड में इतनी हिप्पोक्रेसी क्यों है। क्यों बॉलीवुड ने नाना पाटेकर का बहिष्कार कर दिया और ये अनुराग कश्यप जैसे बलात्कारी को बढ़ावा दे रहे हैं। आखिर मरने के बाद ये लोग कहाँ जाएँगे। नरक भी ऐसे झूठे, ढोंगियों, अवरसवादी लोगों को रखने से मना कर देगा। मैं ऐसे जानवरों को ‘नरक में जाओ’ भी नहीं कह सकती।”

पायल घोष का हालिया ट्वीट

बता दें कि तनुश्री और नाना पाटेकर के मामले पर बॉलीवुड के लोगों ने खुल कर अभिनेत्री के समर्थन में और पाटेकर के विरोध में बयानबाजी की थी। कई कलाकारों ने केस में क्लीनचिट पा चुके पाटेकर के साथ काम करने से भी मना कर दिया था। लेकिन पिछले वर्ष जब अभिनेत्री पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का इल्जाम लगाया तो सबने चुप्पी साध ली और बहुत कम लोग उनके पक्ष में बोलते नजर आए। इसी बात से नाराज घोष ने उक्त ट्वीट किया।

याद दिला दें कि पिछले वर्ष घोष ने अनुराग के साथ हुई अपनी तीन मीटिंगों की एक-एक बात सोशल मीडिया के जरिए रखी थी। उन्होंने इस पर शिकायत भी दर्ज करवाई थी। हालाँकि बाद में पता चला कि कश्यप पर कोई खासी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते अभिनेत्री ने कहा कि यदि वह छत से लटकी हुई पाई गईं तो याद रखा जाए कि उन्होंने आत्महत्या नहीं की होगी।

पायल घोष का आरोप

पायल घोष ने अनुराग कश्यप के साथ तीसरी मुलाकात के बारे में बताया था,

“उस दिन लगभग 7:30 बजे मैं अपनी होंडा सिटी कार में अनुराग कश्यप के घर पहुँची। वह अंदर बैठकर स्मोक कर रहा था। घर से वाकई बहुत बदबू आ रही थी और जब मैंने उससे पूछा, तो उसने कहा कि वह मारिजुआना का सेवन कर रहा था। उसने मुझे भी स्मोक करने को कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया। वह मुझे अपने फिल्मों के संग्रह को दिखाने के लिए दूसरे कमरे में ले गया। अपनी पुरानी फिल्मों के कैसेट दिखाते हुए, उसने अचानक मुझे सोफे पर धकेल दिया। फिर उसने अपनी पैंट खोली और मुझसे जबरदस्ती करने लगा। मैंने बहुत चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन उसने मेरा मुँह दबा दिया और मेरा बलात्कार किया।”

अमेरिका में जो बाइडन के जीत पर लगी मोहर, ट्रंप ने कहा- असहमत होने के बावजूद 20 जनवरी को छोड़ दूँगा कुर्सी

अमेरिका में हिंसा के बीच कॉन्ग्रेस ने जो बाइडेन की जीत पर मुहर लगा दी है। वे 20 नंवबर को राष्ट्रपति पद संभालेंगे। उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने इलेक्‍टोरल कॉलेज के वोटों के आधार पर जो बाइडन के जीत का ऐलान कर दिया है। वहीं इस फैसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे चुनाव के नतीजों से पूरी तरह असहमत है। इसके बावजूद 20 जनवरी को कानून के मुताबिक जो बाइडेन को सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान देते हुए कहा कि 20 जनवरी को कानून के मुताबिक जो बाइडेन को सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा। वो चुनावी नतीजों का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन इसके बावजूद सत्ता को जो बाइडेन को सही तरीके से सौंपेंगे।

CNN के मुताबिक ट्रंप ने जारी बयान में कहा, “मैंने कहा था कि मैं हमेशा लीगल वोटिंग के प्रति लड़ाई को जारी रखूँगा और चुनावों में पारदर्शिता तय करेंगे। यह मेरे पहले और ऐतिहासिक राष्ट्रपति कार्यकाल का अंत है। ये अमेरिका को फिर से महान बनाने की हमारी लड़ाई की सिर्फ शुरुआत है। साथ ही ट्रंप ने फिर चुनावों की धाँधली से जुड़े अपने आरोपों को दोहराया।”

बता दें अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन को 306 इलेक्टोरल कॉलेज वोट मिले हैं, जो बहुमत से ज्यादा हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए 270 वोटों की जरूरत होती है। कॉन्ग्रेस की मंजूरी के बाद जो बाइडेन आधिकारिक तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति होंगे।

गौरतलब है कि अमेरिका के वाशिंगटन में हिंसक बवाल हुआ था। बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के हजारों समर्थक जबरन संसद के कैपिटल हिल बिल्डिंग में घुस गए और जमकर उत्पात मचाया। वहीं इस हिंसा में 4 लोगों के मरने की खबर है और कहा जा रहा है प्रदर्शनकारियों के पास से विस्‍फोटक भी बरामद हुआ है।

वहीं हिंसा के बाद ट्रंप ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने का निवेदन किया था। उन्होंने कहा, “प्रदर्शन के बीच हिंसा नहीं होनी चाहिए, याद रखें हम एक क़ानून और व्यवस्था की पार्टी हैं।” कैपिटल भवन में हिंसा के दौरान ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर एकाउंट भी ब्लॉक कर दिया। ट्विटर ने ‘नागरिक एकता और चेतावनी भरी हिंसात्मक नीतियों’ का हवाला देते हुए ट्रंप का एकाउंट 12 घंटे के लिए बंद किया था।

ट्रंप समर्थक ने कहा- कश्मीर के लिए किया कैपिटल हिल पर हमला, JNU में बना हीरो

हाल ही में, बकरी का मुखौटा और मास्क लगाए एक ट्रम्प समर्थक गेटी की तस्वीर पूरे अमेरिका में वायरल हुई थी, उसने अभी-अभी दावा किया है कि अमेरिका के फेडरल गवर्नमेंट बिल्डिंग (कैपिटल हिल) को निशाना बनाना दरअसल, कश्मीर के लिए न्याय की लड़ाई थी।

यकीन नहीं हो रहा है तो गेटी द्वारा किए गए इस ट्वीट को खुद पढ़िए, जिसे यह रिपोर्ट लिखे जाने तक 25 हजार से भी अधिक बार रीट्वीट किया जा चुका था, “यह कश्मीर के लिए था। यह पूँजीपतियों द्वारा गरीबों पर किए गए अत्याचार करने के लिए था। यह मोदी के लिए एक चेतावनी थी। यह ट्रम्प के लिए नहीं था।”

इतना ही नहीं गेटी ने बाद के कुछ ट्वीट्स में यह भी दावा किया कि ‘वे’ कश्मीर में भारत की नीतियों पर मोदी का समर्थन करने के लिए ट्रम्प से नाराज़ थे, और वास्तव में अमेरिका की राजधानी में उन्होंने इतना बवाल इसलिए काटा था कि ट्रम्प को उनके सुनहरे बालों से पकड़कर, घसीटते हुए बाहर निकाल सके, लेकिन कहीं न कहीं ट्रम्प समर्थक होने के कारण गच्चा खा गया।

“प्रूफ क्या है?” जैसे ही यह सवाल किसी ने गेटी की तरफ उछाला, गेटी ने भी बिना देर किए अपनी बात साबित करने के लिए ट्वीट कर कहा, “वह वही व्यक्ति था जो पूरे अमेरिकी बवाल में अकेला भारतीय झंडा लहरा रहा था, यह संकेत पर्याप्त है कि उसका विरोध भारत के विरुद्ध था न कि अमेरिका के।”

“ब्लैक लाइव्स मैटर, मुस्लिम लाइव्स मैटर, रेनबो मैटर्स, एग्रीकल्चर मैटर्स, डेथ टू रेसिस्ट्स, स्मैश ब्राह्मणवादी पितृसत्ता…” यह उस एकाउंट से पोस्ट किया गया आखिरी ट्वीट था, जिसके फॉलोवर्स की संख्या 2000 प्रति मिनट की दर से बढ़ रही थी।

गेटी, एक 21 साल का तेजतर्रार विद्रोही, जैसा कि उसका परिचय उसके ट्विटर बायो में ही लिखा है। जिसके लिए सर्वनाम ‘वे’ का प्रयोग ऊपर किया गया है, ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर द्वारा अपने 12 घंटे के लिए ‘ब्लॉक प्रमुख’ बनाए जाने अर्थात 12 घंटे का प्रतिबन्ध समाप्त होने पर ट्विटर पर जब अपना स्पष्टीकरण पोस्ट किया। तो वह ट्वीट ही वायरल हो गया और परिणाम में गेटी को मिला एक ब्लू टिक यानी अब उसके ट्विटर एकाउंट को सत्यापित कर दिया गया है।

मारे ख़ुशी के, अब उस 21 साल के विद्रोही ने अपनी प्रोफ़ाइल पिक्चर को अपडेट कर दिया था, जिसमें लाल रंग के पृष्ठभूमि में एक बंद मुट्ठी ताने एक नौजवान दिखाई दे रहा है, जबकि कवर तस्वीर में अफ़ज़ल गुरु सहित कई हस्तियों का एक कोलॉज था, वही अफजल गुरु, जिसने 2001 में भारतीय संसद पर आतंकी हमला किया था।

जैसे ही यह जानकारी वामपंथियों को हुई उन्होंने यह महसूस करते हुए कि गेटी ने एक महान कार्य किया है, जो कि 2001 में अफ़ज़ल गुरु द्वारा किए गए कार्यों से बिलकुल भी अलग नहीं है, और वह भी एक वाजिब उद्देश्य के लिए, कहा जा रहा है कि ऐसे ‘महान क्रांतिकारी’ गेटी के विभिन्न पोस्टरों से जेएनयू को पाट दिया गया है।

दिल्ली में लिबरलों के सुरक्षित आरामगाह जहाँ लिबरल्स के अलावा किसी भी अन्य नत्थू-खैरे को बोलने की अनुमति नहीं है, ऐसे जेएनयू यानी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्रों और प्रोफेसरों ने गेटी के समर्थन में न सिर्फ घंटों बतोलेबाजी अर्थात भाषण दिया बल्कि उनके जैसे अन्य संभावित प्रदर्शनकारियों ने कैपिटल हिल की घेराबंदी करने की भी कोशिश की, और उसका / उसकी / उसके अर्थात आपस में ही सबने एक दूसरे के कार्यों का जमकर स्वागत करते हुए, एक-दूसरे को तिसमारखान घोषित किया।

नव-अफ्रीकी फेयरनेस क्रीम अध्ययन के प्रोफेसर महमूद भास्कर ने ऑपइंडिया को फोन पर बताया, “हमें गेटी और अन्य ट्रम्प समर्थकों जैसे आम लोगों के बीच अंतर स्पष्ट करना होगा क्योंकि एक लोकतंत्र की रक्षा और दबे-कुचले लोगों के लिए आवाज उठाने की कोशिश कर रहा था, जबकि अन्य लोकतंत्र का गला घोटने, उसे खत्म करने और फासीवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।”

“गेटी हम शर्मिंदा हैं, तुझे जलील करने वाले ज़िन्दा हैं!” जैसे नारे बुलंद करते हुए एक छात्र नेता ने गेटी के समर्थन में कहा कि हमें उन सभी की कड़ी निंदा करनी चाहिए जिन्होंने 21 साल के वैश्विक विद्रोही को आगजनी करने वाला और अपराधी करार दिया था।

जेएनयू समुदाय, पूरे वैश्विक जागृत समुदाय के साथ, आश्वस्त है कि गेटी सच बोल रहा है और कश्मीर के लिए लड़ रहा था, क्योंकि वे ऐसा कहते हैं। जेएनयू के एक छात्र आनंद संघनॉट ने यह भी कहा, “भारतीय झंडे फहराना अपने-आप में इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है। तिरंगे लहराना और अफ़ज़ल गुरु का गुणगान करना, कहीं से गलत नहीं है- हमने शाहीन बाग और सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी ऐसा ही करते हुए देखा था।”

ऑपइंडिया के हाथ लगे खुफिया सूत्रों के अनुसार महत्वपूर्ण खबर यह है कि, जेएनयू इस बार गणतंत्र दिवस नहीं मनाएगा, इसके बजाय ‘वी आर ऑल गेटी’ डे मनाएगा।

नोट: ऑपइंडिया सीईओ राहुल रौशन द्वारा लिखे इस व्यंग्य को आप मूल रूप में अंग्रेजी में यहाँ पढ़ सकते हैं।

कहीं ‘किसान’ आंदोलन में न पैदा हो जाए ‘तबलीगी जमात’ जैसे हालात: सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना को लेकर जताई चिंता

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने लगभग एक महीने से अधिक समय से कृषि सुधार क़ानूनों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन पर चिंता जताई है। इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए सीजेआई एस ए बोबड़े ने कहा ‘किसान आंदोलन’ में निजामुद्दीन मरकज़ के तबलीगी जमात जैसी स्थित पैदा हो सकती है। 

मामले की सुनवाई करने वाली पीठ की अध्यक्षता करते हुए सीजेआई ने सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, क्या प्रदर्शनकारी किसानों के बीच कोरोना संबंधी एहतियात बरते जा रहे हैं? उन्होंने अपनी टिप्पणी में कहा, “किसानों के विरोध प्रदर्शन से भी समान समस्या जन्म ले सकती है। मुझे नहीं पता कि किसानों को कोविड-19 से सुरक्षित किया गया है।” 

तबलीगी जमात को अनुमति देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई एस ए बोबड़े ने सॉलीसिटर जनरल ने तुषार मेहता से पूछा, “क्या आपको जानकारी है कि किसान कोविड 19 से सुरक्षित हैं? क्या आपने अपने अनुभव से कुछ सीखा है (तबलीगी जमात की घटना का ज़िक्र करते हुए)?”

न्यायाधीश ए एस बोपन्ना और न्यायाधीश वी राम सुब्रमण्यम ने भी पूछा कि क्या दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारी कोरोना महामारी का प्रसार रोकने के लिए सावधानी बरत रहे हैं? 

मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि किसान आंदोलन में भी ठीक वैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, “मुझे नहीं पता कि किसानों को कोविड 19 से सुरक्षित किया गया है या नहीं।” इसके जवाब में तुषार मेहता ने कहा, “वह (प्रदर्शनकारी) सुरक्षित नहीं हैं।” 

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है कि प्रदर्शन स्थल पर महामारी का प्रसार रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। पीठ के मुताबिक़ वह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि राजधानी की सीमा पर जारी किसान आंदोलन में महामारी का प्रसार न हो। साथ ही केंद्र सरकार को इसकी पुष्टि करने के लिए कहा कि कोरोना सम्बंधित दिशा निर्देशों का पालन किया जाए।  

भारत में कोरोना फैलाने वाली तबलीगी जमात

निजामुद्दीन मरकज़ में मार्च के पहले-दूसरे हफ्ते के बीच इकट्ठा हुई तबलीगी जमात जिसने पूरे भारत में कोरोना वायरस फैलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी। फ़िलहाल कोरोना वायरस से प्रभावित लगभग 1 तिहाई मामले उससे जुड़े हुए हैं। मरकज़ में शामिल होने वाले जितने लोग अपने घरों की तरफ वापस गए और अन्य लोगों से मिले, उन्होंने देश के भीतर कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी की। 

निजामुद्दीन मरकज़ में इकट्ठा हुई तबलीगी जमात को लेकर पूरे देश में जम कर विरोध हुआ था। तबलीगी जमात ने उस दौरान देश में लगभग 30 फ़ीसदी कोरोना पॉजिटिव मामलों को जन्म दिया था। मरकज़ में सिर्फ भारतीय मुस्लिम ही नहीं बल्कि विदेशी मुस्लिम भी शामिल हुए थे। इस मुद्दे पर तभी कार्रवाई होनी चाहिए थी जब इस संगठन से संबंधित लोग इंडोनेशिया के नागरिक दिल्ली से करीमनगर की यात्रा (इज्तेमा) करने के बाद तेलंगाना में कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।

लेकिन तबलीगी जमात के लोगों का देश के कोरोना वायरस के मामलों में योगदान तब सामने आया जब दिल्ली की बंग्लेवाली मस्जिद में 300 जमातियों में कोरोना वायरस के लक्षण मिले। इसके बाद उन्हें भर्ती कराने पर आधे से अधिक कोरोना वायरस से प्रभावित पाए गए।         

दिल्ली बॉर्डर पर ट्रैक्टर मार्च, BKU वाले राकेश टिकैत ने कहा- 2024 से पहले आंदोलन खत्म नहीं करेंगे

तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त कराने की माँग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसान जल्द आंदोलन खत्म करने के इरादे में नहीं हैं। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार (7 दिसंबर,2021) को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वे वर्ष 2024 से पहले आंदोलन खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं।

जब एक पत्रकार ने राकेश टिकैत से पूछा कि उनका कब तक आंदोलन जारी रखने का इरादा है तो उन्होंने कहा, “तीन साल चलेगा यह आंदोलन, 2024 तक जारी रहेगा।”

बता दें सोमवार को सरकार और किसान नेताओं के बीच सातवें दौर की बातचीत के बाद भी कोई हल नहीं निकला था। सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने गुरुवार को ट्रैक्टर रैली निकाली। इस दौरान बीकेयू प्रमुख ने कहा कि आज का यह ‘ट्रैक्टर मार्च’ 26 जनवरी के ‘गणतंत्र दिवस परेड’ का ट्रेलर है।

न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि ट्रैक्टर रैली 26 जनवरी की तैयारी है। हमारा रूट यहाँ से डासना है, उसके बाद अलीगढ़ रोड पर हम रुकेंगे, फिर वहाँ से हम वापस गाज़ियाबाद आएँगे। केंद्र सरकार से हमारी अगली बातचीत कल (8 जनवरी, 2021) है।

गौरतलब है कि राकेश टिकैत ने पिछले सप्ताह विपक्षी दलों से विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने और सड़कों को ब्लॉक करने का आग्रह किया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर सरकार बातचीत के दौरान तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है तो किसान पूर्वी और पश्चिमी दोनों एक्सप्रेसवे को बंद कर देंगे।

बता दें यह दोनों एक्सप्रेसवे अब दिल्ली-एनसीआर से उत्तर भारत का एकमात्र मार्ग है, क्योंकि किसानों ने नेशनल हाइवे-44 पर सिंघु बॉर्डर को पहले से ब्लॉक कर रखा है जो कि पानीपत की ओर आने जाने का रास्ता है। साथ ही रोहतक, औचंदी, सफियाबाद, पियाओ मनियारी और सबोली की ओर जाने वाली एनएच-9 पर टिकरी बॉर्डर को भी प्रदर्शनकारियों ने ब्लॉक कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि इन कथित किसानों द्वारा अपनाए जा रहे तौर-तरीके एक दम वहीं हैं जो पिछले साल एंटी-सीएए प्रदर्शनकारियों द्वारा किया गया था। सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम को रद्द नहीं करने पर उन्होंने दिल्ली में चक्का जाम करने की चेतावनी दी थी।

‘ऑल्टन्यूज’ की सह-संस्थापक फेक न्यूज फैलाते पकड़ी गई, कैपिटल हिल के बवाल में PM मोदी को घसीटने की कोशिश

तथाकथित फैक्ट-चेकर (fact checker) और प्रोपेगेंडापरस्त वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ की सह संस्थापक सैम जावेद ने गुरुवार (7 जनवरी 2021) को एक बार फिर सोशल मीडिया पर फ़ेक न्यूज़ फैलाई। वामपंथी एजेंडाधारी ‘ऑल्ट न्यूज़’ की फैक्ट चेकर का कट्टरपंथी इस्लामियों के अपराधों को फ़ेक न्यूज़ की मदद से छुपाने का इतिहास पुराना है। उसने गुरुवार को ट्विटर पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कथित प्रचार को लेकर गलत जानकारी फैलाई। 

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाए जाने के बाद अमेरिका में जारी उग्र विरोध-प्रदर्शन के बीच, ‘ऑल्ट न्यूज़’ की सह संस्थापक ने सितंबर 2019 के दौरान टेक्सस के ह्यूस्टन में हुए मेगा इवेंट की एडिटेड क्लिप साझा की। पूरी बारीकी से एडिट किए गए वीडियो के इस हिस्से में प्रधानमंत्री मोदी को कहते हुए सुना जा सकता है,  “भारत के भीतर हम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बहुत अच्छे से जुड़े हुए हैं। उम्मीदवार ट्रंप के शब्द, अबकी बार ट्रंप सरकार।” इस पर सैम जावेद ने ट्वीट करते हुए लिखा, “कभी भूलिएगा मत (never forget)।”

सैम जावेद की तरफ से यह ट्वीट तब आया जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुखिया प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में राजनीतिक दलों और उसके समर्थकों को सुझाव दिया कि इस तरह का ‘ग़ैरक़ानूनी प्रदर्शन’ रोका जाना चाहिए। साथ ही नियमानुसार और शांतिपूर्ण तरीके से ही सत्ता स्थानांतरित की जानी चाहिए।

सैम जावेद के तथाकथित ‘फैक्ट चेकर्स’ की टीम अक्सर हिन्दुओं और देश की सरकार के लिए अपनी नफरत का नमूना पेश करती रहती है। उन्होंने इस सुनहरे मौके को भी भुनाने में देरी नहीं की। इस मौके का इस्तेमाल करते हुए ‘फैक्ट चेकर्स’ की टीम झूठा दावा करने में जुट गई कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020 के पहले ह्यूस्टन में हुए इवेंट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप का प्रचार किया।  

क्या पीएम मोदी ने वाकई किया था डोनाल्ड ट्रंप का प्रचार?

‘फैक्ट चेकर’ सैम जावेद द्वारा किए गए दावों से ठीक विपरीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न तो डोनाल्ड ट्रंप का प्रचार किया था और न ही अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया था। यानी सैम जावेद द्वारा किया गया दावा पूरी तरह भ्रामक है क्योंकि पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप की कैम्पेन टीम द्वारा चलाए गए 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान का ज़िक्र किया था।

टेक्सस के ह्यूस्टन में हुए मेगा इवेंट ‘हाउडी मोदी’ में पीएम मोदी ने वहाँ मौजूद जनता को याद दिलाया था कि 2016 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के दौरान भारतीय प्रवासियों के सामने बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, “अबकी बार ट्रंप सरकार।” ये पूरा वीडियो है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के ट्रंप के अभियान का ज़िक्र किया था।  

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “भारत में हम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बहुत अच्छे से जुड़े हुए हैं। उनके शब्द, ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ आज भी हमारे आस-पास गूँजते हैं।” साल 2016 में अक्टूबर महीने में अमेरिकी चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के भारतीय और हिन्दुओं के पास ह्वाइट हाउस में एक ‘दोस्त’ होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के प्रख्यात नारे (2014 आम चुनाव) ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का उपयोग करते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’।

अमेरिका में भारतीयों के सामने भाषण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया था कि कैसे इस नारे का इस्तेमाल डोनाल्ड ट्रंप ने किया था, जो कि ‘ऑल्ट न्यूज़’ द्वारा किए गए दावों से पूरी तरह अलग है कि पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में प्रचार किया था। ऑल्ट न्यूज़ जो कि खुद ‘फैक्ट चेकर’ होने का दावा करता है एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी को लेकर झूठ फैलाता हुआ पाया गया है। 

ऑल्ट न्यूज़ का फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने का इतिहास 

सैम जावेद की तरह उनकी बॉस निर्झरी सिन्हा, जिन्हें न तो फैक्ट्स की जानकारी है और न ही फैक्ट चेकिंग की, उन्होंने भी प्रधानमंत्री मोदी द्वारा डोनाल्ड ट्रंप का प्रचार किए जाने को लेकर झूठ फैलाया था। दरअसल कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत में जारी ‘किसान आंदोलन’ पर निराधार टिप्पणी की थी, जिसकी पूरे देश में जम कर आलोचना हुई थी। इसके बाद निर्झरी सिन्हा ने ट्विटर पर कनाडा के प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए कहा था कि पीएम मोदी ने किस आधार पर ह्यूस्टन में ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ का नारा लगाया था।

सिर्फ ऑल्ट न्यूज़ ही नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस और पूरे मीडिया गिरोह ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मिथ्या प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।  

भारतीय वैक्सीन को बेकार क्यों बता रहे हैं वामपंथी | Ajeet Bharti explains Left, Congress hate for Indian Covaxin

वामपंथियों की पूरी लॉबी विदेशी वैक्सीन बिकवाने के लिए भारत बायोटेक के बेहतर वैक्सीन को ले कर भ्रम फैला रही है कि सही तरीके से नहीं मिली अनुमति, जबकि सच कुछ और ही है

पूरा वीडियो यहाँ देखें

नागौर की हैवानियत पर चुप्पी, बदायूँ पर ‘जनाजा’: CM योगी के लिए बदजुबानी कर फँसी कॉन्ग्रेस

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपनी कुंठा व्यक्त करने के लिए कॉन्ग्रेस अब खुल कर जहर उगलने लगी है। पार्टी की यूथ विंग ने बदायूँ कांड पर सीएम योगी को घेरने के लिए ‘जनाजा’ शब्द का प्रयोग किया है।

यूथ कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन लिखा, “योगी जी, कुर्सी है ये तुम्हारा जनाजा तो नहीं, कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते।” यह ट्वीट यूथ कॉन्ग्रेस ने बदायूँ में घटी घटना पर सीएम योगी को जिम्मेदार ठहराने के लिए किया था। लेकिन इसमें इस्तेमाल की गई अमर्यादित भाषा ने इसे नैतिकता का मुद्दा बना दिया।

सबसे हैरानी की बात यह देखने को मिली जिस कॉन्ग्रेस ने बदायूँ पर योगी आदित्यनाथ के लिए ऐसी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, उसी पार्टी ने राजस्थान के नागौर में महिला के साथ हुई हैवानियत पर चुप्पी साधी रखी। इसे उजागर करते हुए यूजर्स ने कहा है कि पार्टी को इससे कोई तकलीफ नहीं है क्योंकि वहाँ मुख्यमंत्री योगी, नहीं बल्कि अशोक गहलोत हैं। 

बता दें कि राजस्थान के नागौर में हुई घटना में युवती के मुँह और हाथ-पैर को टेप से बाँधकर क्रूरता से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। बाद में उसकी कुल्हाड़ी मार कर हत्या कर दी गई। मगर, कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल पर आपको इस घटना का जिक्र नहीं मिलेगा।

मुख्यमंत्री योगी के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने के मामले में सीएम के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी लिखते हैं, “जिन्होंने पिता के निधन के बेहद कष्टकारी वक़्त भी पिता को आख़िरी बार देखने की बजाय UP की जनता को कोविड से बचाने के लिए अपना दफ़्तर चुना, ऐसे सच्चे संत के लिए राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी की कॉन्ग्रेस की भाषा देखिए, ये मानवता का अपमान है, इसका परिणाम आपको चुकाना ही पड़ेगा।”

प्रणय विक्रम सिंह लिखते हैं, “हत्याओं का अमानवीय खेल जिनका शौक-ए-सियासत हो उन कॉन्ग्रेस के लोगों के मुँह से किसी के लिए ‘जनाजा’ सम्बोधन सामान्य बात है। 1984 का सिखों का नरसंहार, 1975 में लोकतंत्र की हत्या सब तुम्हारी उपलब्धियाँ हैं ‘जनाजा’ प्रेमियों। आज लग रहा है कि एक ‘योगी’ से ‘लंकेश दल’ डर गया।”

सनातनी जिज्ञेश लिखते हैं, “राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा आप की पार्टी के लोग तमीज भूलकर बदतमीजी पर उतर चुके हैंl अब इन्हें आप लोगों ने कुछ नहीं कहा तो कॉन्ग्रेस का जनाजा भी निकलेगा और कब्र के लिए जगह भी ढूँढने आप को ही निकलना पड़ेगा। श्री राम आप को सद्बुद्धि दें, अगर आप उनको मानते हैं तो।”

कैपिटल हिल में बवाल के साथ 45% रिपिब्लकन, 69% ट्रंप को नहीं मानते दोषीः सर्वे ने बताया अमेरिका में राजनीतिक खाई कितनी गहरी

वाशिंगटन स्थित कैपिटल हिल में बुधवार (6 दिसंबर, 2021) को डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने जबरदस्त हंगामा किया। ये सब उस वक्‍त हुआ जब कैपिटल हिल में इलेक्टोरल कॉलेज की प्रक्रिया चल रही थी। इसके तहत नवंबर 2020, में हुई जो बाइडन की जीत पर मुहर लगनी थी। हालाँकि इस हंगामे को लेकर लोगों के मत काफी चौंकाने वाले सामने आए हैं। YouGov Polls के अनुसार, 45% रिपब्लिकन्स कैपिटल हिल में हुए बवाल का समर्थन करते हैं।

Yougov poll

पाँच मतदाताओं में से एक कैपिटल हिल में हुए हिंसक हंगामे का समर्थन करते हैं। वहीं 52% मतदाता प्रदर्शनकरियों को चरमपंथी मानते हैं और 49% मानते हैं कि वे लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। हालाँकि यह घटना राजनीतिक असमानता को मद्देनजर काफी हैरान करने वाली है।

डेमोक्रेट्स के 65% लोगों का मानना ​​है कि विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक था, वहीं केवल 12% रिपब्लिकन को ही ऐसा लगता है। वास्तव में रिपब्लिकन को विश्वास है कि प्रदर्शनकारी चरमपंथी, घरेलू आतंकवादी, अपराधी या लोकतांत्रिक विरोधी से अधिक देशभक्त हैं।

बता दें यह असमानता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को दोषी ठहराए जाने को लेकर भी देखी गई है। 69% रिपब्लिकन का मानना ​​है कि इस मामले में ट्रम्प को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। इसके विपरीत ऐसा मानने वाले डेमोक्रेट का आँकड़ा 96% है।

इसी तरह कैपिटल हिल के हंगामे को 93% डेमोक्रेट लोकतंत्र के लिए खतरा मानते हैं, जबकि 62% रिपब्लिकन इसे इस तरह नहीं देखते हैं। वहीं लगभग हर मामले में इंडिपेंडेंट का डेमोक्रेट्स के रुख के प्रति झुकाव देखा गया है। हालाँकि, बहुत कट्टरता से यह झुकाव नहीं है।

यह पोल्स साबित करते हैं कि वाशिंगटन में जो हुआ वह विश्वास करने योग्य तो नहीं है, लेकिन यह हंगामा अचानक से भी नहीं हुआ है। देश के भीतर चल रहे राजनीतिक मनमुटाव के चलते ऐसा हुआ। वहीं दोनों तरफ के लोग इस बात पर भी सहमत नहीं हो सकते हैं कि कैपिटल हिल हमला करने वाले लोग डेमोक्रेसी के लिए खतरा हैं या नहीं।

गौरतलब है कि वाशिंगटन डीसी में रिपब्लिकन नेशनल कमेटी मुख्यालय से पाइप बम बरामद किए गए और मीडिया पर भी हमला किया गया। हिंसक हंगामे के दौरान चार लोगों के मरने की भी खबर है।

इतना मारा कि फूट गई खोपड़ी… फिर पार्टी की, खाना खाया और सो गईः मुंबई में 19 साल की लड़की के मर्डर में नया खुलासा

नए साल के अवसर पर मुंबई के खार वेस्ट में हुई जाह्ववी कुकरेजा की हत्या मामले में पुलिस पड़ताल से नया खुलासा हुआ है। पुलिस ने जाँच के बाद बताया कि कुकरेजा की हत्या की उसकी सहेली दीया पडानकर उस रात घटना के बाद दोबारा से पार्टी होस्ट यश आहूजा के घर पर गई। वहाँ उसने रात का खाना खाया और जाकर सोई, लेकिन एक बार भी जाह्ववी की हालत पर एक शब्द भी नहीं कहा।

आहूजा ने बाद में नोटिस किया कि दीया के होंठों से खून निकल रहा है। जिसके कारण आहूजा ने उसकी मदद भी की। इसके बाद पडानकर ने अपने पिता को बुलाया। वह उसे हिंदूजा अस्पताल लेकर गए। तभी, किसी बिल्डिंग में रहने वाले किसी शख्स ने कुकरेजा के शव को देखा और यश को उसके बारे में बताया। यश ने फौरन पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मामला प्रकाश में आया।

पुलिस का कहना है कि उस रात कुकरेजा और पडानकर पूरे कार्यक्रम में रात के करीब 8:30 बजे आ गए थे। लेकिन बाद में वह वापस लौट गए और फिर सह आरोपित श्री जोगधनकर के साथ पार्टी में लौटे। उस पार्टी में अधिकतर लोगों ने नशा कर रखा था।

जैसे ही पार्टी शुरू हुई। तीनोंं ने एक अन्य लड़की के साथ एक अलग कोना पकड़ लिया। बीच में उस लड़की को उल्टियाँ शुरू हो गई और दीया उसे लेकर नीचे चली गई। जैसे ही वह वापस आई श्री ने उससे नजदीकियाँ बढ़ानी शुरू की। जिसे देख कुकरेजा गुस्सा हो गई और काफी चिल्लाई भी। पडानकर ने कथित तौर पर तब उसे झापड़ मारा और जोगधनकर के साथ उसका पीछा किया।

पुलिस का मानना है कि ये सारी झड़प पाँचवे माले पर हुई क्योंकि कुकरेजा की एक चप्पल और ईयरिंग वहीं बरामद हुए। वहीं दूसरे माले पर पुलिस को खून के निशान और मृतक के बाल मिले। पुलिस का कहना है कि सीढ़ियों पर बहुत कम लाइट थी और वहाँ कोई कैमरा भी नहीं था। डॉक्टरों का जाँच के बाद कहना है कि कुकरेजा की हत्या हुई थी न कि किसी दुर्घटना में उसकी जान गई।

पुलिस अनुमान लगा रही है कि कुकरेजा का सिर दीवार पर मार कर फोड़ा गया होगा, क्योंकि जोगधनकर का हाथ भी फ्रैक्चर है। अब पुलिस ये जानकारी जुटा रही है कि फ्रैक्चर कैसे हुआ होगा। अभी तक उनका यही मानना है कि वह झड़प के दौरान सीढ़ियों से गिरा होगा।

फोरेंसिक विशेषज्ञों ने सबके ब्लड सैंपल ले लिए हैं। अब उनका मिलान होगा। पडानकर जाँच अधिकारियों से बात कर रही है। मगर उसके बयान जोगधनकर के बयान से मिलाने आवश्यक हैं। इसलिए जोगधनकर के अस्पातल से डिस्चार्ज होने का इंतजार किया जा रहा है।

बता दें कि नए साल पर हुई जाह्ववी कुकरेजा की मौत के बाद इन दोनों आरोपितों के ख़िलाफ IPC की धारा 302 (हत्या) और 34 (जब एक आपराधिक कृत्य सभी व्यक्तियों ने सामान्य इरादे से किया हो) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले कुकरेजा के दोस्तों ने कहा था कि उसकी मौत अचानक गिरने से नहीं हुई।

उन्होंने बताया, “उसे पकड़ा गया था और पीटा गया था। उसके बालों को पकड़ कर उसे घसीटते हुए छत से दूसरी मंजिल की सीढ़ियों तक लाया गया था।” वहीं पुलिस ने बाल पकड़ कर सीढ़ियों पर घसीटे जाने की बात से इनकार किया था। पुलिस का कहना था कि श्री जोगाधनकर और दीया पडानकर ने मिल कर जाह्नवी कुकरेजा के सिर को पकड़ कर कई बार सीढ़ियों की रेलिंग पर पटका। इसके बाद जाह्नवी का सर पीछे और आगे से फूट गया, जिससे चारों तरफ खून पसर गया।

जाह्नवी की लाश अधनंगी अवस्था में मिली थी। उसके पूरे शरीर पर जगह-जगह खरोंचने के निशान थे। बताया जाता है कि जाह्नवी ने अपने बॉयफ्रेंड श्री और दीया को पार्टी में आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ भी लिया था।