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CM योगी ने बदायूँ गैंगरेप घटना पर ADG से माँगी रिपोर्ट: आरोपितों पर लगेगा NSA और STF करेगी जाँच

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में महिला के साथ गैंगरेप के बाद हत्या के मामले में योगी सरकार एक्शन में है। बदायूँ गैंगरेप मामले के मुख्य आरोपित को पकड़ने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने STF को आदेश दिया है। साथ ही घटना का संज्ञान लेते हुए इस संबंध में ADG से रिपोर्ट माँगी है। सीएम योगी ने आरोपितों पर NSA के तहत कार्रवाई का भी आदेश दिया।

उत्तर प्रदेश अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल ने कहा, “मुख्यमंत्री जी ने बदायूँ की घटना का संज्ञान लिया है, इस संबंध में ADG से रिपोर्ट माँगी है। निर्देश दिए गए हैं कि अगर एसटीएफ को भी लगाना पड़े तो उन्हें लगाकर जल्द घटना की जाँच की जाए और त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाई जाए।” इसके साथ ही सीएम योगी ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं पीड़ित परिवार की मदद का भी आदेश दिया गया है।

बदायूँ में हुए सामूहिक दुष्कर्म के बाद महिला की हत्या के मामले में एसएसपी संकल्प शर्मा ने उघैती एसएचओ राघवेंद्र प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया है। ADG प्रशांत कुमार ने घटना की जानकारी देते हुए कहा, “पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आते ही जैसे ही प्रकरण SP के संज्ञान में आया, तत्काल त्वरित कार्रवाई की गई। इंस्पेक्टर को भी निलंबित किया गया। 2 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया है, फरार अभियुक्त पर इनाम की घोषणा की गई है।”

इसके अलावा सीएम योगी ने मुरादनगर श्मशान घाट में हुए हादसे को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। बुधवार (जनवरी 06, 2020) को गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पहुँचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुरादनगर में श्मशान घाट की गैलरी हादसे के मामले की जाँच एसआइटी से कराने के निर्देश दिए हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले पर लिया संज्ञान

बदायूँ जिले में महिला से गैंगरेप की खबर पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी संज्ञान में लिया है। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने बताया कि उनकी तरफ से एक चिट‌्ठी लिखने के साथ-साथ बुधवार को ही एक सदस्य बदायूँ जा रही हैं। वे परिवार और पुलिस से मिलेंगी। देखेंगी कि महिला से गैंगरेप के मामले में कार्रवाई ठीक से हुई है या नहीं। अगर हुई है तो कितनी?

गौरतलब है कि यूपी के बदायूँ जिले के उघैती में पूजा करने गई 50 वर्षीय आंगनबाड़ी सहायिका की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम के मुताबिक महिला के साथ केवल गैंगरेप ही नहीं किया गया बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड डाली गई और उसके भीतर के अंगों (आंँतों) को भी फाड़ दिया गया।

उसकी बाईं पसली, बायाँ पैर और बायाँ फेफड़ा भी वजनदार प्रहार से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। शव का पोस्टमार्टम करते हुए स्वयं तीन महिला डॉक्टरों का पैनल हैरान हो गया। जाँच में उन्होंने पाया कि वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों ने पहले महिला के प्राइवेट पार्ट में रॉड घुसाई और जब खून तेजी से बहने लगा तो उसे रोकने के लिए उन्होंने गुप्तांग में कपड़े व रुई घुसा दी। घटनास्थल पर महिला के सारे कपड़े खून से सने मिले थे।

इस घटना को लेकर महिला के परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि वह सूचित किए जाने के बावजूद घटनास्थल पर समय से नहीं पहुँचे। और जब पहुँचे तब शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। वहीं घटना को लेकर पुलिस महकमे पर सवाल उठने लगे है। इस घटना से पुलिस महकमे की जमकर छीछालेदर हुई।

पंजाब के किसानों ने दिल्ली बॉर्डर पर किया अवैध पक्का निर्माण, भीतर में हुक्का गुड़गुड़ाने के कई वीडियो वायरल

दिल्ली के सीमावर्ती कैंप पर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने आंदोलन को लंबा खिंचता देख कर ईंंट-गारे से ‘पक्के’ ठिकाने बनाने शुरू कर दिए। टीकरी बॉर्डर पर कुछ किसान ईंट, बालू और सिमेंट लेकर पहुँचे। कंस्ट्रक्शन कर रहे किसानों ने बताया कि उन्हें यहाँ एक महीने से अधिक का समय हो गया है, सरकार उनकी माँगे नहीं मान रही है। ऐसे में वे भी अब यहाँ स्थाई मकान ही बना रहे हैं, ताकि बारिश और ठंड से बच सकें। किसानों का कहना है कि अब वे तभी यहाँ से जाएँगे, जब सरकार उनकी माँगे मान लेगी।

उन्होंने हाईवे के पास रसोईघर बनाया है और प्रतिकूल मौसमों से उसकी रक्षा के लिए दीवार खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में और भी निर्माण कार्य करेंगे। मजेदार बात यह है कि सीमेंट और ईंट की इन दीवारों के बीच लोगों को हुक्का का आनंद लेते हुए भी देखा जा रहा है। विभिन्न विरोध प्रदर्शन स्थलों से इस तरह के कई वीडियो सामने आ रहे हैं।

फ्री टेंट से लेकर फ्री डेंटल चेक-अप तक। किसानों को वहाँ रहने और विरोध प्रदर्शन करने के लिए मुफ्त में सभी सुविधाएँ दी जा रही हैं।

मुफ्त में वाटर-प्रूफ टेंट लगाना। आरोप लगाया गया है कि कुछ हस्तियाँ और कंपनियाँँ इन विरोधों को फ्री में फंडिंग कर रही हैं।

एलईडी स्क्रीन के साथ म्यूजिक सिस्टम, टेंट और मजबूत स्टेज।

राजमार्ग पर अवैध स्पोर्ट्स इवेंट का आयोजन किया गया।

राजमार्ग पर अवैध टेंट बनाया जा रहा है।

अवैध कॉफी स्टॉल लगाए जा रहे हैं।

एक गैर सरकारी संगठन (NGO) द्वारा अवैध रसोईघर का सेटअप किया गया।

एक और अवैध रसोईघर।

कॉन्ग्रेस ने किया अवैध रसोईघर का सेटअप।

सिंघू सीमा के पार इस तरह के हजारों अवैध टेंट खड़े किए गए हैं

हाईवे पर अवैध जिम का सेटअप किया गया।

दिल्ली के सीएम, जिन्होंने कोविड लॉकडाउन के दौरान यूपी और बिहार के प्रवासी श्रमिकों को दिल्ली छोड़ने के लिए मजबूर किया था, उन्होंने पंजाब विधानसभा में अपनी पार्टी के भविष्य के बहाने सिंघू सीमा पर भूमि कब्जाने वाले प्रदर्शनकारियों को मुफ्त वाई-फाई प्रदान किया।

राजमार्ग पर अवैध सेटअप की कुछ तस्वीरें

सिंघू सीमा पर क्या हो रहा है, यह इसकी सिर्फ एक झलक मात्र है।

गौरतलब है कि दिल्ली और इसके आस-पास चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के चलते बीते एक महीने से ज़्यादा समय में दिल्ली तथा उससे सटे राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब एवं राजस्थान को लगभग 27,000 करोड़ रुपए के व्यापार का नुकसान हुआ है। ट्रेडर्स बॉडी ने इसकी जानकारी दी। 

ट्रेडर्स बॉडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और उसके राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पंजाब और हरियाणा से दिल्ली आने वाले माल की आपूर्ति पर काफी फर्क पड़ा है। इन दोनों राज्यों से विभिन्न वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए काम किया जा रहा है। इसके लिए अन्य राज्यों से दिल्ली में सामान लेकर आने वाले वाहनों को राजमार्ग को छोड़कर अन्य वैकल्पिक मार्गों से काफी लंबा चक्कर लगा कर दिल्ली आना पड़ रहा है।

पेशावर में खुले में मिला हैंड ग्रेनेड, खेल-खेल में फटने से 2 बच्चों की मौत; 3 घायल: जाँच में जुटी पाकिस्तान पुलिस

पाकिस्तान में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ पर बुधवार (जनवरी 06, 2021) को हैंड ग्रेनेड के फटने से दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि तीन घायल हैं। पाकिस्तानी पुलिस ने यह जानकारी दी। 

स्थानीय पुलिस अधिकारी रियाज अहमद ने बताया कि बच्चों को उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर के एक खुले इलाके में हैंड ग्रेनेड मिला। वो लोग उसे उठाकर अपने घर ले आए औऱ घर में ही विस्फोट हो गया, जिससे यह घटना घटी। दो की मौत हो गई और तीनों घायल बच्चों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि उनकी हालत काफी गंभीर है। रियाज अहमद ने कहा कि पुलिस जाँच कर रही है। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों पाकिस्तान के पेशावर में स्थित एक मदरसे में हुए बम विस्फोट में 7 की मौत हो गई और 72 के घायल होने की सूचना है। पेशावर के दीर कॉलोनी में हुए इस बम विस्फोट में मृतकों व घायलों में अधिकतर बच्चे थे। इस बम विस्फोट के लिए 5 किलो IED का प्रयोग किया गया था। 

जब ये धमाका हुआ, तब मदरसे में कुरान की कक्षा चल रही थी। किसी ने विस्फोटक को ले जाकर मदरसे के भीतर रख दिया था। घायलों में शिक्षक भी थे। घटना से एक सप्ताह पहले बलूचिस्तान की सरकार ने क्वेटा में विपक्षी पार्टियों की शक्ति प्रदर्शन रैली के बीच बम विस्फोट की साजिश की सूचना के कारण अलर्ट जारी किया था।

पाकिस्तान का नाम आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए विश्व भर में कुख्यात है। पाकिस्तान लगातार ऐसे इस्लामी आतंक को पनाह देता आया है जिनके निशाने पर भारत, अफगानिस्तान और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका जैसे पश्चिमी देश हैं। 

जानकारी के मुताबिक पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर (35 मील) पूर्व में अकोरा खट्टक में दारुल उलूम हक्कानिया मदरसे का कैंपस बना हुआ है। यहाँ 4000 जिहादियों को पनाह दी जाती है। इन्हें मुफ्त में खाना, आश्रय और पहनने को कपड़े मिलते हैं। इनके भीतर तालीम के नाम पर उग्रवाद और कट्टरपंथ भरा जाता है। एएफपी की रिपोर्ट में इसे जिहाद यूनिवर्सिटी बताते हुए कहा गया है कि यही संगठन लोगों में इस्लामी जिहाद के बीज बोता है और बाद में उन्हें आतंकी संगठनों को मुहैया करवाकर उनकी मैनपावर बढ़ाता है।

जानिए ट्विटर पर क्यों ट्रेंड कर रहा है #HappyBirthdayKhalistaniKutte

पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ का आज (जनवरी 06, 2021) जन्मदिन है। दिलजीत दोसांझ इन दिनों किसान आंदोलन और एक्ट्रेस कंगना रनौत के साथ ट्विटर पर हो रहे बहस के चलते सुर्खियों में हैं। एक तरह जहाँ उनके जन्मदिन के मौके पर उनके फैंस उन्हें बधाईयाँ दे रहे, वहीं ट्विटर पर ‘#Happybirthdaykhalistanikutte’ (हैप्पी बर्डे खालिस्तानी कुत्ते) ट्रेंड कर रहा है।

हाल ही में दिलजीत ने बर्फ़ में खड़े हुए अपनी कुछ तस्वीरें ट्विटर पर शेयर की। इन तस्वीरों को रीट्वीट कर कंगना ने दिलजीत पर तंज कसा। उन्होंने लिखा, “वाह मेरे भाई! देश में आग लगाकर किसानों को सड़क पर बैठाकर लोकल क्रांतिकारी विदेश में ठंड का मज़ा ले रहे हैं। वाह! इसको कहते हैं लोकल क्रांति।”

वहीं आयकर विभाग ने कुछ दिन पहले एक्टर-सिंगर दिलजीत दोसांझ द्वारा कथित तौर पर भारत में चल रहे किसान विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए यूके/कनाडा से लिए गए फंड की जाँच शुरू की है। बता दें दिलजीत ने किसान आंदोलन में 1 करोड़ रुपए दान दिए थे। इसके अलावा उनके खालिस्तानी समर्थक होने का दावा भी किया जा रहा है।

उनके जन्मदिन के मौके पर लोग तमाम तरह के ट्वीट और मीम ट्विटर पर शेयर कर रहे है। जिनमें सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग पर ‘#Happybirthdaykhalistanikutte’ है। जिस पर लोगों की निगाहें गड़ चुकी है। सोशल मीडिया यूज़र्स जहाँ एक तरफ इस हैशटैग के साथ मीम्स और जोक बना कर उनके मजे ले रहे तो वहीं कुछ लोग इस ट्रेंड का विरोध भी कर रहे हैं। बता दें यह हैशटैग नंबर 1 पर ट्रेंडिंग है।

लॉस्ट गर्ल नाम से एक यूजर ने दिलजीत के एक मीम को शेयर करते हुए लिखा, “दिलजीत के साथ कुत्ते का नाम ट्रेंड कर रहा जो कि बहुत गलत है, कुत्ते काफी ईमानदार होते है। मैं इस ट्रेंड की कड़ी निंदा करती हूँ।”

वहीं tamid tigress नाम की एक यूजर ने लिखा, “एक धोखेबाज के साथ ऐसा ही होना चाहिए, कोई दया नहीं, राष्ट्र पहले।”

एक यूजर ने कंगना की फ़ोटो शेयर करते हुए लिखा, “इस ट्रेंड को देख कर सबसे ज्यादा खुश इंसान।”

एक यूजर ने तो यह तक लिख दिया कि इस ट्रेंड को देखकर कुत्ते मानहानि का मुकदमा दर्ज करवाएँगे।

ई आर गणेश नाम के यूजर ने लिखा कि कितने ही सिखों ने राष्ट्र के लिए लड़ा और बलिदानी दी, वहीं तुम जैसे लोग देश को तोड़ने में तुले हो। जो कि कभी मुमकिन नहीं है।

कुछ यूज़र्स ने इसका विरोध भी किया है।

अब महाराष्ट्र के ‘किसान नेता’ ने RSS मुख्यालय उड़ाने और मोहन भागवत को मारने की दी धमकी: देखें वीडियो

महाराष्ट्र राज्य किसान महासभा के सचिव अरुण बंकर ने धमकी दी है कि अगर मोदी सरकार ने प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ की माँगें नहीं मानीं तो वो न केवल नागपुर में आरएसएस के ऑफिस को उड़ा देंगे बल्कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को भी मार डालेंगे।

इंटरनेट पर वायरल हुए वीडियो में बैंकर ने कहा, “मोदी के सामने एक ही रास्ता है। या तो वो कानून पीछे ले, नहीं तो उसको आत्महत्या करना पड़ेगा। ये हमारी स्पष्ट राय है। अब मैं आपको बताता हूँ कि क्या वो गोली चलाएगा किसानों पर तो जवान विद्रोह कर देंगे। मैं नागपुर में रहता हूँ, आरएसएस का हेडक्वार्टर है, मोहन भागवत वहीं पर है। हमलोग छात्रावस्था से क्रांतिकारी हैं, उड़ा देंगे। धमकी दे रहे हैं हम कि अगर मोदी किसानों पर गोली चलवाएँगे तो मोहन भागवत को उड़ाएँगे हम, आरएसएस के हेडक्वार्टर को उड़ा देंगे।”

कथित तौर पर, मुलताई में किसानों का एक समूह ‘शहीद किसान स्तम्भ’ पर रुका था, जहाँ अरुण बैंकर ने मोहन भागवत को मौत की धमकी दी थी और यह भी दावा किया था कि महाराष्ट्र के किसान मोदी को सबक सिखाने के लिए दिल्ली जा रहे हैं।

कथित तौर पर, मुलताई में ‘शहीद किसान स्तम्भ’ पर किसानों का एक समूह रुक हुआ था, जहाँ अरुण बैंकर ने मोहन भागवत को जान से मारने की धमकी दी और यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र के किसान मोदी को सबक सिखाने के लिए दिल्ली जा रहे हैं।

मोदी सरकार के खिलाफ जहर उगलते हुए, किसान नेता ने सरकार को चुनौती देते हुए पूछा कि वो किसानों पर गोलियाँ क्यों चलाएँगे। उन्होंने कहा कि वह नागपुर में रहते हैं। अगर वह (पीएम मोदी) नहीं सुनेंगे तो कुछ भी करने में संकोच नहीं करेंगे।

डॉ. मोहन भागवत को मारने की धमकी देते हुए, अरुण बैंकर ने कहा, “मैं आरएसएस मुख्यालय और मोहन भागवत को उड़ाऊँगा। अब उन्हें ही एक कदम पीछे हटना होगा, हम नहीं रुकेंगे।”

उनके अभद्र भाषा के बाद बैतूल कोतवाली में अरुण बैंकर के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। भाजपा जिलाध्यक्ष बबला आदित्य शुक्ला की शिकायत के बाद धारा 505, 506 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

कोतवाली थाना प्रभारी संतोष पंद्रे ने कहा कि शुक्ला ने अरुण बैंकर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया कि बैंकर ने खुलेआम धमकी देते हुए कहा है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों पर पुलिस फायरिंग का आदेश दिया, तो वह आरएसएस मुख्यालय को बम से उड़ा देंगे और मोहन भागवत को मार देंगे।

प्रदर्शनकारियों ने पीएम मोदी को जान से मारने की धमकी दी

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए ऐतिहासिक कृषि कानूनों को लेकर कृषि विरोधी आंदोलन, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बर्बरता और हिंसा से लेकर मौत की धमकी तक, सब कुछ देखा गया है।

अभी कुछ दिन पहले, दिल्ली में विरोध स्थल पर एक महिला प्रदर्शनकारी को प्रधानमंत्री को चाकू से मारने की धमकी देते हुए पाया गया था। एक पत्रकार ने एक महिला प्रदर्शनकारी से संपर्क किया, जो अन्य प्रदर्शनकारियों के लिए लंगर तैयार करने में व्यस्त थी। जवाब में, महिला ने कहा, “मैं इस चाकू से मोदी के पेट में मारूँगी।” हालाँकि, पत्रकार ने महिला को फटकार लगाने के बजाय हँसी में उड़ा दिया। इतना ही नहीं उन्होंने महिला से उसे अपने बयान को दोहराने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में एक महिला को कहते हुए देखा गया, “मोदी मर जा तू, शिक्षा बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। रेल बेचकर खा गया रे मोदी, मर जा तू। देश बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। किसानों को धोखा दे गए रे मोदी, मर जा तू।” वहीं सामने बैठी महिला बार-बार ‘हाय-हाय मोदी मर जा तू’ दोहरा रही थी।

इसी तरह का एक और वीडियो सामने आया था जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता था कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे। वहीं एक वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘जय हिन्द’ बोलने से भी इनकार कर रहा था। जब ये सब चल रहा था, तब ओखला से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान वहीं पर मौजूद थे। 

वीडियो में एक प्रदर्शनकारी कह रहा था कि वो ‘जय हिन्द’ नहीं बोलेगा और न ही ‘भारत माता की जय’ बोलेगा, सिर्फ ‘जो बोले सो निहाल’ ही बोलेगा। साथ ही उसने कहा था कि वो ‘अस्सलाम वालेकुम’ भी बोलेगा। AAP विधायक अमानतुल्लाह खान की मौजूदगी में प्रदर्शनकारी ने धमकाया कि जैसे इंदिरा गाँधी को ‘सबक सिखाया गया’ था, वैसे ही पीएम मोदी को भी ‘सबक सिखाया जाएगा।’

चीन ने WHO की जाँच टीम को नहीं दी देश में एंट्री: कोरोना वायरस पर पोल खुलने का सता रहा डर

कोरोना वायरस आखिर कहाँ से आया? दुनिया भर में तबाही मचाने वाले इस घातक महामारी को लेकर अक्‍सर यह सवाल उठते रहे हैं। कई देश इसके लिए सीधे-सीधे चीन को जिम्‍मेदार ठहराते रहे हैं तो चीन ने इससे हमेशा इनकार किया है। इस बीच खबर आ रही है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) की एक टीम चीन के वुहान शहर में इस वायरस के उत्पत्ति की जाँच करने के लिए निकली थी लेकिन अब तक इन लोगों को चीन आने की परमिशन नहीं मिल पाई है।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ दल को चीन आने की अनुमति अब तक न दिए जाने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने चीनी अधिकारियों के रवैये पर निराशा जताई है। जेनेवा में एक प्रेस कांफ्रेस में डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि हमें यह जानकर बहुत धक्का लगा कि इस जाँच दल को चीन ने अब तक अपने यहाँ आने की इजाजत नहीं दी।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडहैनम घेब्रयेसिस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने चीन की आलोचना करते हुए कहा, “हमें पता चला कि चीनी अधिकारियों ने अभी तक टीम के चीन दौरे के लिए अंतिम रूप से अनुमति नहीं दी है। मैं इस खबर से बहुत निराश हूँ कि दो सदस्यों ने पहले ही अपनी यात्रा शुरू कर दी थी और अन्य को अंतिम मिनट तक अनुमति नहीं मिली।”

टेड्रोस ने कहा कि टीम चीन में कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जाँच करेगी और देश में प्रकोप के शुरुआती चरणों के दौरान क्या हुआ इसका पता लगाएगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने चीनी अधिकारियों से चीन में टीम के प्रवेश को सुनिश्चित करने का आग्रह किया है, ताकि मिशन जल्द से जल्द शुरू हो सके। उन्होंने कहा, “हम चीन के वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में हैं और हमने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि यह मिशन डब्ल्यूएचओ और अंतर्राष्ट्रीय टीम की प्राथमिकता में है।”

इससे पहले मंगलवार (जनवरी 5, 2021) को डब्लूएचओ के महानिदेशक ने कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत की सराहना की। महामारी को खत्म करने के लिए भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसलों की प्रशंसा करते हुए घेब्रयेसिस ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता के रूप में भारत ने कोविड-19 महामारी को समाप्त करने के अपने संकल्प को पूरा किया है।

कोरोना वायरस से निपटने को लेकर विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) पर भी सवाल उठते रहे हैं। डब्‍ल्‍यूएचओ से अमेरिका की नाराजगी इस कदर बढ़ी कि उसने इस वैश्विक संस्‍था से अपना नाता ही तोड़ लिया। अमेरिका, ब्राजील जैसे देशों ने विश्‍व स्वास्थ्य संगठन पर आरोप लगाया कि यह वैश्विक संस्‍था अब चीन के नियंत्रण में जा चुकी है। 

अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर कहा कि संगठन अपने उद्देश्यों की पूर्ति करने और उनमें सुधार करने में नाकाम रहा। इन आरोपों के बीच डब्‍ल्‍यूएचओ को इस जाँच की जिम्‍मेदारी सौंपी गई कि आखिर कोरोना वायरस संक्रमण की उत्‍पत्ति कहाँ से हुई, जिसके कारण दुनियाभर में करोड़ों लोगों ने अपनों को खोया और बीमार पड़े। लेकिन जाँच के लिए जा रहे डब्‍ल्‍यूएचओ के वैज्ञानिकों को चीन ने अपने यहाँ आने से रोक दिया है।

चीन के इस रवैये के बाद उसकी नीयत को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्‍या वास्‍तव में कोविड-19 को लेकर ऐसा कुछ है, जिसे वह छिपा रहा है? कोविड-19 की उत्पत्ति की जाँच के सिलसिले में जाने वालों को परेशान करने, उनका पीछा करने, उनका रास्‍ता रोकने और हाल के दिनों में चीन में कई छोटी प्रयोगशालाओं को बंद किए जाने की रिपोर्ट भी बीते कुछ समय में सामने आई है, जिसे देखते हुए चीन को लेकर आशंकाएँ बढ़ रही हैं।

‘समझौता कर लो, जो माँगोगी वो मिलेगा’: सपा नेता आजम खान के ‘रिश्तेदार’ ने दहेज के नाम पर सूफिया को किया प्रताड़ित, दिया तीन तलाक

उत्तर प्रदेश के बरेली में तीन तलाक के एक मामले में सपा नेता आजम खान का नाम उछला है। खबर है कि एक पीड़िता ने पुलिस अधिकारी पर यह आरोप लगाया कि उसे न्याय दिलाने की बजाय पुलिस ने उससे कहा कि वह समझौता कर ले, क्योंकि उसके ससुराल वाले आजम खान के समधी हैं और वो जो भी माँगेगी उसे वो सब मिलेगा। हालाँकि, पुलिस अधिकारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बता कर खारिज किया है।

पत्रिका की खबर के अनुसार, सूफिया खान नाम की महिला कांकरटोला की रहने वाली है। उसका निकाह 30 मई 2020 को फहाद अली से हुआ था। उसके मुताबिक फहाद के मामा सपा नेता आजम खान के समधी हैं इसलिए उनसे कहा जा रहा है कि वो समझौता कर ले। लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं है। वह बताती हैं कि निकाह के कुछ दिन बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और इसी बीच उसके पति ने उसे तीन तलाक देकर घर से भी निकाल दिया।

कोई रास्ता न दिखने पर महिला ने 1 नवंबर को बारादरी पुलिस में इस संबंध में शिकायत की और पुलिस ने उसके बयान के आधार पर उसके शौहर फहाद, सास जरीना, जेठानी रूबी और जेठ रिजवान व आमिर के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया। मगर दो माह बीत जाने के बाद भी जब इनके विरुद्ध पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया, तो महिला ने दोबारा आवाज उठाई।

इसके साथ ही पुलिस अधिकारी शितांशु शर्मा पर इल्जाम लगाकर कहा कि वह उस पर समझौते का दबाव बना रहे हैं, जबकि पुलिस इंस्पेक्टर का कहना है कि महिला के शौहर की ओर से पहले ही उसके व उसके परिजनों के विरुद्ध डकैती का केस दर्ज है। और इसीलिए वह इस मामले में अपनी जाँच कर रहे हैं। वहीं महिला का कहना है कि आरोपित शौहर ने उसके भाई व परिजनों के ख़िलाफ़ झूठे केस दर्ज करवाए हैं, जिसकी जाँच शितांशु शर्मा कर रहे हैं।

यहाँ बता दें कि तीन तलाक का एक अन्य मामला उत्तर प्रदेश के हरदोई से आया है। यहाँ बेटे की चाहत में एक शौहर ने अपनी बीवी को तीन तलाक दिया और ससुराल वाले उसे ताने दे देकर प्रताड़ित करते रहे। महिला की शिकायत पर शौहर समेत 7 के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ है।

पीड़िता ने बताया कि उसका निकाह साल 2015 में नजीफ से हुआ था। उसके तीन साल बाद उसने एक बेटी को जन्म दिया, जिसे देख पति, सास, ससुर सब मिलकर उसे प्रताड़ित करने लगे। जब महिला तंग होकर मायके गई तो एक माह पहले नजीफ वहाँ पहुँचा और उसे तीन तलाक देकर आ गया।

पुलिस ने इस संबंध में मुजीब, इस्लाम, गुलाम, मो इसहाक, नूरजहाँ व सकीना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है और उसी के आधार पर आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।

हाथरस CBI चार्जशीट में चौकाने वाले खुलासे: पॉलीग्राफ टेस्ट में संदीप ने अधिकतर दिए गलत जवाब, रिश्ते को लेकर…

हाथरस के बूलगड़ी गाँव में 14 सितंबर को दलित लड़की के साथ हुए कथित बलात्कार व उसके बाद इलाज के दौरान हुई उसकी मौत के बाद पूरे देश से आक्रोश की आवाज उठी थी। पीड़िता की मौत के बाद यूपी सरकार ने सीबीआई को इसकी जाँच सौंपी थी। वहीं अब घटना के मुख्य आरोपित को लेकर एक चौकाने वाली जानकारी सामने आई है कि पॉलीग्राफ टेस्ट में संदीप ने अधिकतर जवाब गलत दिए है।

दरअसल, घटना के बाद से ही संदीप अपनी मौजूदगी पिता के साथ घर के बाहर बता रहा था, जबकि पॉलीग्राफी टेस्ट में उसका घटनास्थल के आस-पास ही होना पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पॉलीग्राफी टेस्ट के दौरान संदीप से जो भी सवाल पूछ गए, उसका उसने सही तरीके से जवाब नहीं दिया था। जिस वजह उस पर संदेह बना हुआ है।

बता दें संदीप को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब के लिए आरोपितों का पॉलीग्राफी टेस्ट कराया गया था। पॉलीग्राफी टेस्ट की रिपोर्ट में संदीप का भी घटना स्थल के आसपास होना पाया गया है। इस टेस्ट के ज्यादातर सवाल पीड़िता से जुड़े हुए थे। पीड़िता पर हमले के समय वह कहाँ पर था? पीड़िता से उसका मेलजोल था या नहीं, उससे फोन पर बातचीत होती थी या नहीं, वह युवती की निगरानी करता था या नहीं? बाकी आरोपितों का कनेक्शन क्या है। ऐसे कई सवाल किए गए।

जाँच के दौरान जवाबों के साथ-साथ ही आरोपित संदीप के हाव-भाव का भी अध्ययन किया गया। पॉलीग्राफी टेस्ट रिपोर्ट के अनुसार संदीप के जब यह पूछा गया कि क्या घटना के दिन 14 सितंबर को वह उस खेत की निगरानी कर रहा था, जिस पर पीड़िता जा रही थी तो उसका जवाब नहीं था। टेस्ट रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि उसने यह झूठ बोला।

इसी तरह पॉलीग्राफ टेस्ट रिपोर्ट मे जब उससे यह पूछा गया कि क्या वह 14 सितंबर को पीड़िता पर खेत मे हुए जानलेवा हमले में शामिल था। तब भी उसने इस बात से इनकार कर दिया था। जोकि रिपोर्ट में झूठ निकला। वहीं जब उससे यह पूछा गया कि क्या घटना के दिन छोटू के खेत में उसने पीड़िता तो छुआ था तो इसका उत्तर भी उसने न में ही दिया।

पॉलीग्राफी टेस्ट के हिसाब से उसका यह उत्तर भी गलत था। इसी तरह उससे यह सवाल भी पूछे गए कि क्या उसे पीड़िता का दुपट्टे से गला दबाया था और क्‍या उसका पीड़ि‍ता से कोई संबंध था तो उसने इसका उत्‍तर भी न में दिया। पॉलीग्राफी टेस्ट के हिसाब से यह उत्तर भी उसके संशयपूर्ण ही थे। बता दें इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होनी है।

गौरतलब है कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 22 सितंबर को पीड़िता द्वारा दिए गए अंतिम बयान के आधार पर चार आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। सीबीआई ने विशेष न्यायालय में चारों आरोपितों संदीप, रवि, रामू और लवकुश के खिलाफ धारा 376, 376 ए,376 डी, 302 व 3(2)(5) एससी-एसटी एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

वहीं सीबीआई को दोनों की कॉल डिटेल चेक करने पर मालूम चला कि 17 अक्टूबर 2019 से 3 मार्च 2020 के बीच में दोनों ने एक-दूसरे को 105 बार कॉल किया था। मृतका भी संदीप को क़ॉल करती थी। दोनों की फोन पर बातें हुआ करती थीं। लेकिन एक समय के बाद लड़की से बातचीत बंद होने पर संदीप नाराज हो गया था।

कॉन्ग्रेस में बिखराव का बिगुल: 11 विधायकों की पार्टी छोड़ने की तैयारी, BJP ने कहा- तुष्टिकरण की राजनीति छोड़ने वालों का है स्वागत

कॉन्ग्रेस नेता भरत सिंह के दावे ने बिहार का सियासी पारा बढ़ा दिया है। उन्होंने दावा किया कि कॉन्ग्रेस के 19 में से 11 विधायक पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं। कॉन्ग्रेस नेता भरत सिंह ने इस बात का भी दावा किया कि यह ज्यादातर विधायक वहीं हैं जिन्होंने पैसे के बल पर टिकट हासिल किया था। इसके बाद यह चुनाव जीत गए। भरत सिंह ने साफ-साफ कहा कि पार्टी के 11 विधायक आने वाले दिनों में एनडीए में जा सकते हैं। भरत सिंह ने तो यह भी दावा कर दिया कि कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा भी ऐसे लोगों में शामिल हैं जो पार्टी को तोड़ना चाहते हैं।

सिंह की मानें तो मदन मोहन झा वही रास्ता अपना रहे हैं जो अशोक चौधरी ने अपनाया था। उन्होंने ये भी खुलासा किया कि कॉन्ग्रेस के 11 विधायकों ने पैसे देकर टिकट लिया और जीते। लेकिन अब ये ही 11 विधायक एनडीए में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

भरत सिंह ने तो यह भी कह दिया जो विधायक पार्टी छोड़ने को तैयार हैं उनका मार्गदर्शक प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष मदन मोहन झा, राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता सदानंद सिंह है। जेडीयू ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता के इस बयान पर प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा है कि भरत सिंह का यह बयान जाहिर करता है कि कॉन्ग्रेस में भगदड़ की स्थिति बनी हुई है। संभवतः इसी कारण शक्ति सिंह गोहिल ने प्रभारी पद से इस्तीफा भी दिया है।

बता दें कि एक दिन पहले ही बिहार कॉन्ग्रेस प्रभारी और सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने आलाकमान को अपने इस्तीफे की पेशकश की थी। उन्होंने एक ट्वीट के जरिए बताया था कि वह अपने स्वास्थ्य कारणों के कारण बिहार के प्रभार से मुक्त होना चाहते हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल के पद छोड़ने की इच्छा को सहमति दे दी है। गोहिल को बिहार प्रभारी की जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए भक्त चरण दास को यह दायित्व सौंप दिया गया है।

यही नहीं अपने दावे में भरत सिंह ने आरजेडी से कॉन्ग्रेस को अलग होने की सलाह भी दी है। आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव 2020 में खराब प्रदर्शन के बाद बिहार कॉन्ग्रेस में विवाद की स्थिति बनी हुई है। पार्टी नेताओं में आपसी मतभेद की चर्चाएँ लगातार बनी हुई हैं।

वहीं भरत सिंह का बयान सामने आने के बाद बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति छोड़ने वालों का स्वागत है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की राजनीति विचारधारा प्रेरित है, सत्ता प्रेरित नहीं है। हम किसी को तोड़ने-फोड़ने में विश्वास नहीं करते हैं। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी में टूट की खबर पार्टी के भीतर से ही आ रही है। इससे साबित होता है कि पार्टी में भयंकर असंतोष है और दिल्ली या बिहार के नेतृत्व पर लोगों को अब भरोसा नहीं रह गया है। राहुल गाँधी का मन देश से ज्यादा विदेश में लगता है और कॉन्ग्रेस पार्टी अब एड-हॉक या प्रॉक्सी तरीके से चलाई जा रही है।”

1 से सीधा 234 टेस्टिंग लैब, 51 लाख मजदूरों को रोजगार: ‘TIME’ मैगजीन में CM योगी के कोरोना नियंत्रण पर लेख

कोरोना काल में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए कार्यों की गूँज अब दुनिया भर में सुनाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय ‘Time’ मैगजीन में छपे एक लेख में इसकी चर्चा हुई है। ‘Time’ मैगजीन में छपे लेख में कहा गया है कि कोरोना से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए क़दमों से पूरी दुनिया प्रभावित है और WHO ने भी इसकी प्रशंसा की है। WHO ने कहा था कि यूपी सरकार ने कांटेक्ट ट्रेसिंग जो कदम उठाए, वो अनुकरणीय हैं।

पत्रिका मे लिखा गया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में 70,000 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने दिन-रात मेहनत की और इन फ्रंटलाइन वर्कर्स ने कोरोना मरीजों के हाई-रिस्क संपर्कों को ट्रेस किया। भारत में सबसे ज्यादा कोरोना टेस्टिंग करने के लिए उत्तर प्रदेश पहले ही रिकॉर्ड स्थापित कर चुका है। एक दिन में राज्य में 1.75 लाख टेस्ट्स किए जा रहे हैं। सीएम योगी के कामकाज को ‘विषम परिस्थितियों में निपुण प्रबंधन का अभूतपूर्व उदाहरण’ करार दिया। यह आलेख ‘उत्तर प्रदेश द्वारा प्रदान की गई सामग्री’ लिख कर छापा गया है।

‘Time’ के इस लेख में लिखा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तभी से सक्रियता दिखानी शुरू कर दी, जब कोरोना का पहला मामला आया। लिखा है कि उन्होंने कई राज्यों और यहाँ तक कि देश में सबसे पहले कदम उठाए और स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना शुरू कर दिया। कोरोना के फ्लो चार्ट, रोकथाम, सतर्कता, अन्य जागरूकता के लिए मेडिकल कर्मचारियों का ‘सीएम योगी के योग्य प्रशासन के अंतर्गत’ प्रशिक्षण हुआ।

मुख्यमंत्री ने 11 वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम बनाई, जिनमें सभी को कोरोना से निपटने के लिए होने वाली तैयारियों की लगातार समीक्षा का काम दिया गया। इस ‘टीम-11’ के सभी अधिकारियों को अलग-अलग काम सौंपे जाते थे। आलेख कहता है कि बाकी राज्यों ने भी इसका अनुकरण किया। आगे लिखा है कि सीएम योगी 3 दिन के लॉकडाउन का ऐलान करने वाले पहले सीएम थे और उन्होंने ज़रूरी सामाग्रियों की जनता तक पहुँच सुनिश्चित करने के बाद ही ये कदम उठाया।

Time’ मैगजीन में जिक्र किया गया है कि जब कोरोना की रोकथाम का एक ही मिशन था और वो था ‘टेस्टिंग’, तब यूपी में मात्र एक ही टेस्टिंग लैब हुआ करता था और मार्च 22, 2020 तक तो मात्र 60 टेस्ट्स की ही क्षमता थी। लेकिन, सरकारी संसाधनों और मशीनरी का ऐसा उपयोग किया गया कि आज राज्य में 234 टेस्टिंग लैब्स और इनमें से 131 सरकारी हैं। राज्य में अब तक 2.5 करोड़ कोरोना टेस्टिंग हो चुकी हैं।

साथ ही बताया गया है कि कैसे सभी जिलों में ‘इंटीग्रेटेड कण्ट्रोल एंड कमांड सेंटर्स (ICCC)’ की स्थापना की गई और टेस्टिंग, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, होम आइसोलेशन और मेडिकल टीम को लोगों के घर भेजने सहित कई मामलों में ये ICCC का बहुत बड़ा रोल साबित हुआ। लेकिन, पत्रिका ने सबसे कड़ा टास्क माना है 40 लाख प्रवासी मजदूरों के रहने-खाने की व्यवस्था करना। 1660 ट्रेनों के जरिए इन प्रवासी मजदूरों को घर वापस लाया गया।

पत्रिका में इसे मास्टरस्ट्रोक करार दिया है। मजदूरों को स्वच्छ भोजन और पानी देने, कम्युनिटी किचेंस की व्यवस्था और लॉकडाउन में उनके बीच 6.75 करोड़ फ़ूड पैकेट्स बाँटने जैसे क़दमों की प्रशंसा की गई है। विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 86.8 लाख लोगों को 2 महीने का एडवांस पेंशन दिया गया। अप्रैल से ही अनाज देने शुरू हो गए। 40 लाख मजदूरों की ‘स्किल मैपिंग’ हुई और सबके लिए MNREGS (मनरेगा) कार्ड बने।

‘Time’ मैगजीन के इस आलेख के अनुसार, 8 लाख MSME यूनिट्स को सक्रिय किया गया और लेबर एम्प्लॉयमेंट कमीशन का गठन किया गया। वहाँ 51 लाख मजदूरों को रोजगार मिला। ‘आत्मनिर्भर योजना’ के तहत 4.35 लाख इंडस्ट्री यूनिट्स को 10744 करोड़ रुपए बतौर लोन बाँटे गए। इन सबके अलावा 5.81 लाख नए इंडस्ट्री यूनिट्स की स्थापना हुई और उन्हें 15541 करोड़ रुपए लोन दिए गए। अकेले मई 14, 2020 को 98743 यूनिट्स को 2447 करोड़ रुपए के लोन बाँटे गए।

साथ ही इसका भी जिक्र किया गया है कि जिस तरह से युवाओं के बीच खुद का बिजनेस शुरू करने के उद्देश्य से नई स्टार्टअप नीति लाई गई, उससे 50000 लोगों को सीधे और 1 लाख को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा होगा। राज्य में कोरोना के कारण मृत्यु दर मात्र 1.3% है जबकि, रिकवरी दर 94% हो गया है। खुद पीएम मोदी ने कहा था कि यूपी सरकार की कड़ी तैयारियों से कम से कम 85,000 जानें बची हैं, जिसके बारे में 2017 से पहले सोचा भी नहीं जा सकता था।

बता दें कि  योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश की सरकार ने तो शुरू से केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर वुहान वायरस (कोविड 19) के खिलाफ लड़ाई जारी रखी हुई है। उन्होंने संवेदना के आधार पर एक-एक कर ऐसे अनेक निर्णय लिए जो गरीब, दिहाड़ी मज़दूर और कमज़ोर तबके के लोगों के लिए इस लॉकडाउन के दौरान अति आवश्यक हैं या होंगी। उन्होंने गरीबों के लिए स्वास्थ्य, खाद्यान्न, निश्चित धनराशि और अन्य मूलभूत सुविधाएँ प्रदान करने के लिए प्रबंध किया।

नोट: नए तथ्यों के आलोक में इस लेख को अपडेट किया गया है।