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कैसे होंगे एक साथ चुनाव, बीच में ही सरकार गिरने पर क्या होगा… जानिए सब कुछ: अमित शाह ने बताया क्यों जरूरी है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’, कैसे बाप-बेटी ने बर्बाद किया सिस्टम

वन नेशन वन इलेक्शन बिल को संसद में पेश करने को लेकर सरकार असमंजस में है। पहले रिपोर्ट आई कि सरकार की ओर से केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल सोमवार (16 दिसंबर) को इसे लोकसभा में पेश करेंगे। हालाँकि, सोमवार को लोकसभा की संशोधित कार्य सूची में इस विधेयक का नाम शामिल नहीं किया गया है, जबकि पहले इसे सूचीबद्ध किया गया था। वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसकी जरूरत क्यों है, वो बताया है।

अमित शाह ने ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ की वकालत की है। उन्होंने इससे संघीय ढाँचे को कमजोर करने के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “वन नेशन वन इलेक्शन कोई नई बात नहीं है। साल 1952 का चुनाव एक साथ हुए थे। 1957 में आठ राज्यों की विधानसभाएँ भंग कर दी गईं, ताकि अलग-अलग तारीख होने के बावजूद उनके एक साथ चुनाव कराए जा सकें। तीसरी बार भी यही प्रक्रिया अपनाई गई।”

आजतक के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा केरल में सीपीआई (एम) सरकार को गिराने के बाद इसे रोक दिया गया था। इसके बाद इंदिरा गाँधी ने बड़े पैमाने पर सरकार गिराने की प्रथा अपनाई। यहाँ तक ​​कि 1971 में सिर्फ चुनाव जीतने के लिए समय से पहले लोकसभा को भंग कर दिया गया था। यहीं से बेमेल शुरू हुआ और चुनाव अलग-अलग होने लगे।”

बिल को राष्ट्रपति चुनाव मॉडल बताने और इससे भाजपा को फायदा होने के आरोपों को अमित शाह ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “यह बिल्कुल गलत है। ओडिशा में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ कराए गए थे, लेकिन भाजपा हार गई। साल 2019 में हमें पूरे देश में भारी जनादेश मिला, लेकिन हम आंध्र प्रदेश में हार गए।” इस बिल को आधिकारिक रूप से संविधान (129वाँ संशोधन) विधेयक 2024 कहा जाता है।

बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विधेयक को मंजूरी दी है। इसे 16 दिसंबर को संसद में पेश करने की बातें सामने आ रही थीं। संसद का अंतिम सत्र 20 दिसंबर को चलेगा। हालाँकि, इस सत्र में अब इसके पेश किए जाने को लेकर असमंजस की स्थिति है। वहीं, विपक्षी दलों ने वन नेशन वन इलेक्शन विधेयक का विरोध किया है और इसे संघीय ढाँचे के खिलाफ बताया है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि इस कानून के बन जाने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह मौका मिल सकता है कि वह राज्यों और केंद्र की सरकारों को भंग कर दें और दोबारा चुनाव कराएँ। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी के जुमलों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। वहीं, कॉन्ग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने इसे देश के संघीय ढाँचे पर प्रहार बताया।

बिल में क्या हैं प्रावधान?

इस विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 82A (लोकसभा और सभी विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव) को शामिल करने और अनुच्छेद 83 (संसद के सदनों की अवधि), 172 (राज्य विधानसभाओं की अवधि) और 327 (विधानसभाओं के चुनावों के संबंध में प्रावधान करने की संसद की शक्ति) में संशोधन करने का प्रस्ताव है। इस बिल में निम्नलिखित प्रावधान हैं:

एक साथ चुनाव: विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 82A को शामिल किया गया है, जो ‘लोकसभा और सभी विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव’ की अनुमति देगा। इसमें एक साथ चुनाव को लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के गठन के लिए आयोजित आम चुनावों के रूप में परिभाषित किया गया है।

इस विधेयक में कहा गया है कि आम चुनाव के बाद लोकसभा की पहली बैठक की तारीख को जारी की गई ‘सार्वजनिक अधिसूचना’ द्वारा राष्ट्रपति इस अनुच्छेद के प्रावधानों को लागू करेंगे। अधिसूचना की तारीख को नियत तारीख कहा जाएगा। नियत तिथि (अधिसूचना की तिथि) के बाद और लोकसभा के कार्यकाल खत्म होने से पहले हुए गठित विधानसभाएँ लोकसभा के कार्यकाल के साथ ही खत्म हो जाएँगी।

विधेयक का अनुच्छेद 82A(3) विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसमें कहा गया है कि लोकसभा के पूर्ण कार्यकाल की समाप्ति से पहले, चुनाव आयोग लोकसभा और सभी विधानसभाओं के लिए ‘एक साथ’ आम चुनाव कराएगा। संविधान के भाग XV (चुनाव) के प्रावधान उन चुनावों पर जरूरी परिवर्तनों के साथ लागू होंगे, जो आवश्यक हो सकते हैं और जिन्हें चुनाव आयोग आदेश निर्देश दे सकता है।

जब विधानसभा के चुनाव स्थगित करने की आवश्यकता हो: विधेयक की धारा 82A(5) में कहा गया है कि जब चुनाव आयोग की यह ‘राय’ हो कि किसी विधानसभा के चुनाव लोकसभा के आम चुनावों के साथ नहीं कराए जा सकते तो वह राष्ट्रपति को ये आदेश देने की सिफारिश कर सकता है कि उस विधानसभा के चुनाव बाद की किसी तिथि में कराए जा सकते हैं।

विधानसभा का कार्यकाल लोकसभा के साथ ही समाप्त हो जाएगा, चाहे स्थगन हो या न हो: विधेयक में कहा गया है कि यदि विधानसभा का कार्यकाल स्थगित भी कर दिया जाता है तो संविधान के अनुच्छेद 172 में वर्णित किसी भी बात के बावजूद, पूर्ण कार्यकाल उसी तिथि को समाप्त होगा जिस तिथि को आम चुनावों में गठित लोकसभा का पूर्ण कार्यकाल समाप्त हुआ था।

मध्यावधि चुनाव: अनुच्छेद 83 में खंड 3 से 7 को सम्मिलित करने का प्रस्ताव है, जो ‘मध्यावधि चुनाव’ के बारे में बात करता है। इसमें कहा गया है कि जब लोकसभा 5 वर्ष की पूर्ण अवधि से पहले भंग हो जाता है तो विघटन की तिथि और पूर्ण अवधि की समाप्ति के बीच की अवधि एक पूर्ण अवधि (जो पूरी नहीं हुई हो) होगी।

बिल के अनुसार, विघटन के बाद मध्यावधि चुनाव होंगे और एक नई लोकसभा का गठन केवल अपूर्ण (पूर्ण अवधि के बीच बाकी बची) अवधि के लिए किया जाएगा। हालाँकि, गठित नई लोकसभा तत्काल पूर्ववर्ती लोकसभा की निरंतरता नहीं होगी। अनुच्छेद 172 में इन खंडों को सम्मिलित करके विधानसभाओं के लिए इसी तरह के मध्यावधि चुनाव प्रस्तावित हैं।

जो धर्म पर चले वो राम, जिसने धर्म को अपने हिसाब से चलाया वो रावण: अमित शाह ने वरुण धवन को समझाया मूल अंतर , एक्टर ने प्रभावित होकर कहा- आप ही हैं देश के हनुमान

इंडिया टुडे के ‘एजेंडा आजतक’ इवेंट में गृहमंत्री अमित शाह और बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन के बीच रामायण के चरित्रों को लेकर एक रोचक बाचतीच हुई। कार्यक्रम के दौरान वरुण धवन ने अमित शाह से पूछा कि उन्हें जानना है कि आखिर राम और रावण में अंतर क्या है?

इस पर गृहमंत्री अमित शाह ने सवाल का उत्तर देते हुए समझाया कि सारा फर्क धर्म से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के लिए धर्म के मुताबिक चलना उनकी जिम्मेदारी होती है, जबकि कुछ लोग अपने स्वार्थ के अनुसार धर्म को समझते हैं और उसपर चलते हैं। यही फर्क है राम और रावण में।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान राम ने धर्म की व्याख्या के अनुसार जीवन जीया, जबकि रावण ने धर्म को अपनी इच्छाओं के अनुसार बदलने का प्रयास किया।

उनके इस जवाब को सुन एक्टर वरुण धवन भी प्रभावित हुए। उन्होंने अमित शाह के उत्तर पर अपनी प्रतिक्रिया जोड़ते हुए कहा था, “रावण को ज्ञान का अहंकार था, जबकि भगवान राम को अहंकार का ज्ञान था।”

इस बातचीत में वरुण धवन ने अमित शाह की सराहना भी की। वरुण ने शाह को ‘देश का हनुमान’ कहा। उन्होंने कहा, “कुछ लोग आपको राजनीति में चाणक्य कहते हैं, लेकिन मैं कहूँगा कि आप हमारे देश के हनुमान हैं जो बिना किसी स्वार्थ के देश की सेवा कर रहे हैं।”

बता दें कि इस कार्यक्रम में अमित शाह ने अन्य कई सवालों के जवाब दिए। साथ ही कहा कि उनके लिए और पार्टी के लिए वोट बैंक महत्वपूर्ण नहीं है। देश की सुरक्षा सबसे आगे है। उन्होंने महाराष्ट्र की जीत को जनता का एकदम सही निर्णय बताया। उन्होंने मोदी अडानी एक होने वाले आरोप पर कहा कि भ्रष्टाचार उनकी पार्टी का कल्चर ही नहीं है।

वहीं बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन की बात करें तो वो जल्द ही बेबी जॉन फिल्म में दिखने वाले हैं। इसके अलावा वह तमिल फिल्म रीमेक ‘थेरी; में भी नजर आएँगे। उनकी फिल्म क्रिसमस के मौके पर रिलीज होगी।

मुस्लिमों ने कब्जा कर संभल की जिस शिव मंदिर को कर दिया था गायब, वहाँ 46 साल बाद घंटा-घड़ियाल की ध्वनि गूँजी: हनुमान जी की आरती, अतिक्रमण हटा जीर्णोद्धार की तैयारी

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 46 साल से बंद पड़ा शिव मंदिर आखिरकार प्रशासन की पहल से खुल गया। रविवार (15 दिसंबर 2024) सुबह मंदिर में पूजा-अर्चना और आरती की गई। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती रही। यह मंदिर मुस्लिम बहुल इलाके खग्गू सराय में स्थित है, जहाँ 1978 के दंगों के बाद हिंदू परिवारों के पलायन के चलते मंदिर में ताला लग गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (14 दिसंबर 2024) को संभल प्रशासन और पुलिस ने अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया, जिसके दौरान यह बंद मंदिर सामने आया। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी ने अपनी निगरानी में मंदिर के ताले खुलवाए। मंदिर की सफाई कराई गई और परिसर में बिजली व सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए। मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान एक पुराना कुआँ भी मिला, जिसे ढक दिया गया था।

इलाके के बुजुर्ग और नगर हिंदू सभा के संरक्षक विष्णु शरण रस्तोगी (82) ने बताया कि यह मंदिर उनके पुश्तैनी मकान के पास था। पहले उनके परिवार के लोग मंदिर की देखभाल करते थे, लेकिन दंगों के बाद मकान बेचकर वे यहाँ से चले गए। डीएम राजेंद्र पैंसिया ने कहा कि खग्गू सराय के इस मंदिर को दोबारा आबाद करना एक अहम कदम है। प्रशासन अब इलाके के अन्य प्राचीन तीर्थस्थलों और कूपों को भी संवारने की योजना बना रहा है।

46 साल बाद मंदिर में भजन

रविवार (15 दिसंबर 2024) को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुँचे और पूजा-अर्चना की। विधि-विधान के साथ पूजा और आरती संपन्न हुई। प्रशासन ने मंदिर परिसर की देखभाल के लिए नियमित इंतजाम करने का आश्वासन दिया है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर केवल एक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि इलाके का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है।

दंगे के बाद से बंद था मंदिर

1978 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान इस इलाके में रहने वाले हिंदू परिवारों ने अपने घर बेचकर पलायन कर लिया था। आखिरी हिंदू परिवार ने 2012 में यहाँ से विदा ली। मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति, शिवलिंग और नंदी विराजमान हैं। सपा सांसद जियाउररहमान बर्क के घर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित इस मंदिर को अब प्रशासन ने पुनर्जीवित किया है।

एडिशनल एसपी श्रीश चंद्र ने बताया कि कुछ लोगों ने मंदिर के पास मकान बनाकर अतिक्रमण कर लिया था। अब इन अतिक्रमणों को ध्वस्त कर दिया गया है और कब्जेदारों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि संभल में डीएम एसपी और एएसपी ने भारी पुलिस फोर्स और बिजली विभाग की अलग-अलग टीमों के साथ पूरे इलाके में कार्रवाई कर रहे हैं। इसी कार्रवाई के दौरान मंदिर का पता चला था। बीते कई सप्ताह से ये कार्रवाई जारी है।

‘सत्ता का सुख और सत्ता की भूख’ ही कॉन्ग्रेस का इतिहास और वर्तमान: PM मोदी ने लोकसभा में घेरा, विकसित भारत के लिए रखे 11 संकल्प, परिवार से संविधान तक का जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (14 दिसंबर 2024) को ‘संविधान के 75 वर्ष की गौरवशाली यात्रा’ पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए 11 संकल्प रखे। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत के उज्ज्वल भविष्य एवं विकसित भारत बनाने के लिए सरकार और लोगों को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की राजनीति परिवारवाद से मुक्त होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने भाषण के अंत में 11 संकल्प रखें, जो निम्नलिखित हैं:

  1. चाहे नागरिक हो या सरकार, सभी को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।
  2. विकास का लाभ समाज के हर क्षेत्र, हर वर्ग को मिलना चाहिए, यह ‘सबका साथ, सबका विकास’ होना चाहिए।
  3. भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस होनी चाहिए तथा भ्रष्ट लोगों को सामाजिक स्वीकृति नहीं मिलनी चाहिए।
  4. लोगों को देश के कानून, नियम, परंपरा का पालन करने में गर्व महसूस होना चाहिए।
  5. गुलामी की मानसिकता से मुक्ति होना चाहिए।
  6. लोगों को देश की विरासत पर गर्व होना चाहिए।
  7. देश को वंशवाद की राजनीति से मुक्त होना चाहिए, संविधान का सम्मान होना चाहिए और इसे राजनीतिक स्वार्थ का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए।
  8. संविधान के प्रति समर्पण दर्शाते हुए आरक्षण का लाभ उन लोगों से नहीं छीना जाना चाहिए, जिन्हें इसका लाभ मिल रहा है तथा धर्म के आधार पर आरक्षण देने के सभी प्रयास बंद किए जाने चाहिए।
  9. भारत को विश्व में महिला-नेतृत्व वाले विकास का उदाहरण बनना चाहिए।
  10. राज्यों के विकास के माध्यम से देश का विकास हमारा विकास मंत्र होना चाहिए।
  11. ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का लक्ष्य हर चीज से ऊपर होना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आइए हम अपने संविधान की मूल भावना ‘हम, देशवासी…’ के साथ आगे बढ़ें। विकसित भारत के निर्माण का सपना सभी 140 करोड़ नागरिकों का सपना है। याद रखें, जब कोई राष्ट्र दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ता है तो परिणाम निश्चित होते हैं। मुझे अपने साथी नागरिकों, उनकी क्षमताओं, युवाओं और भारत की नारी शक्ति पर बहुत भरोसा है। आइए हम संकल्प लें कि जब भारत 2047 में अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष मनाएगा तो उसे ‘विकसित भारत’ के रूप में मनाया और संजोया जाएगा।”

इससे पहले पीएम मोदी ने कहा कि साल 2014 में जब भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए को सरकार बनाने का मौका मिला तो लोकतंत्र और संविधान को मजबूती मिली। गरीबों को मुश्किलों से मुक्ति मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह हमारा बहुत बड़ा मिशन और संकल्प है। हमें गर्व है कि आज 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।”

इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस के लिए ‘सत्ता का सुख और सत्ता की भूख‘ यही एकमात्र इतिहास है, यही वर्तमान है। पीएम मोदी ने कहा, “हमने भी संविधान संशोधन किए हैं, लेकिन देश की एकता के लिए, देश की अखंडता के लिए, देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए और संविधान की भावना के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ किए हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर राजीव गाँधी तक कॉन्ग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने आरक्षण का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि इतिहास कहता है कि आरक्षण के विरोध में पंडित नेहरू ने उस समय के मुख्यमंत्रियों को लंबी-लंबी चिट्ठियाँ लिखी थीं। पीएम मोदी ने कहा कि इन लोगों ने सदन में आरक्षण के खिलाफ लंबे-लंबे भाषण दिए हैं।

मेरठ में महबूब ने सरेआम नाबालिग छात्रा से की छेड़छाड़, विरोध करने पर बेरहमी से पीटा: पुलिस ने पकड़ा तो चलाई गोली, मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के किठौर क्षेत्र में शुक्रवार (13 दिसंबर 2024) को एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जिसमें एक युवक ने स्कूल से लौट रही छात्रा के साथ सरेराह छेड़छाड़ और मारपीट की। आरोपित की पहचान महबूब, निवासी दरजियान के रूप में हुई है। छात्रा के चिल्लाने पर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक महबूब धमकी देकर फरार हो चुका था।

छात्रा को रोककर की छेड़छाड़ और मारपीट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रा स्थानीय स्कूल में कक्षा 9वीं में पढ़ती है। शुक्रवार (13 दिसंबर 2024) को स्कूल की छुट्टी के बाद वह घर लौट रही थी, जब महबूब ने उसे रास्ते में रोक लिया। छात्रा ने विरोध किया तो उसने बाल पकड़कर पीटना शुरू कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। छात्रा के चिल्लाने पर आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े, जिसके बाद महबूब वहाँ से भाग गया। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें महबूब को छात्रा के साथ मारपीट करते देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस सक्रिय हो गई। छात्रा के पिता ने किठौर थाने में महबूब के खिलाफ तहरीर दी, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया। रात करीब 10 बजे पुलिस ने कस्बे के बाहर महबूब को घेर लिया।

जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद पुलिस जब महबूब को मेडिकल जाँच के लिए ले जा रही थी, तो उसने एक हेड कांस्टेबल की सरकारी पिस्टल छीन ली और फरार होने की कोशिश की। वह मोटरसाइकिल से कूदकर नहर पटरी की झाड़ियों में छिप गया। पुलिस ने तुरंत इलाके को घेर लिया और टॉर्च की मदद से सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान महबूब ने पुलिस पर गोली चलाई, लेकिन पुलिस ने जवाबी फायरिंग कर उसे घायल कर दिया। पुलिस अधीक्षक (एसपी) देहात डॉ. राकेश कुमार मिश्र ने बताया कि आरोपित महबूब को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और शनिवार (14 दिसंबर 2024) को उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा।

इस घटना के बाद छात्रा बुरी तरह सहमी हुई है और उसने स्कूल जाने से इनकार कर दिया है। उसने बताया कि महबूब पिछले कई दिनों से उसका पीछा कर रहा था और बीच-बीच में रोकने की कोशिश करता था। उसने यह भी बताया कि उसे अंदाजा नहीं था कि महबूब इतनी हद तक जा सकता है।

घटना के बाद स्थानीय लोग काफी गुस्से में हैं। उनका कहना है कि ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि महबूब ने किस तरह छात्रा को रोककर उसे सरेआम पीटा। लोगों का मानना है कि पुलिस को इस तरह के मामलों में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि समाज में डर का माहौल बने।

एसपी देहात राकेश कुमार मिश्र ने बताया कि आरोपित के खिलाफ सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा, “हमने वीडियो का संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई की और महबूब को गिरफ्तार कर लिया। आगे की विधिक प्रक्रिया जारी है।”

पुलिस ने बताया कि महबूब को शनिवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। आरोपी पर छेड़छाड़, मारपीट, धमकी और पुलिस पर फायरिंग जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने यह भी कहा कि आगे जाँच के आधार पर अन्य धाराओं को जोड़ा जा सकता है।

कॉन्ग्रेस ने दिया श्रीलंका को ‘कच्चातिवु द्वीप’, ‘सियाचीन’ PAK को देने की फिराक में थे: संसद में विपक्षियों पर बरसे BJP सांसद तेजस्वी सूर्या, कहा- ये लोग भारत को अपनी जागीर समझते थे

बेंगलुरु से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने शनिवार (14 दिसंबर) को कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने संविधान पर हमले किए उन्हें चैम्पियन बताया जा रहा है। लोकसभा में संविधान पर चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की सरकारों ने भारत को अपनी जागीर समझकर रखा, जबकि भाजपा ने हमेशा लोकतंत्र और संविधान की रक्षा में अपनी भूमिका निभाई।

सूर्या ने दावा किया कि भारत के सांस्कृतिक मूल्यों को संविधान में समाहित किया गया और संविधान निर्माताओं ने भारत की प्राचीन सभ्यता के महत्व पर जोर दिया था। तेजस्वी सूर्या ने द्रमुक के नेताओं को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि द्रमुक के नेता सनातन धर्म को खत्म करने की बात करते हैं, जबकि उनके सांसद संसद में धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक नैतिकता का ज्ञान दे रहे हैं।

कॉन्ग्रेस के तानाशाही रवैये पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी सूर्या ने कहा कि कॉन्ग्रेस की सरकारों ने भारत को जागीर समझा और कच्चातिवु द्वीप तथा अक्साई चिन को दूसरे देशों को दे दिया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण कच्चातिवु द्वीप को श्रीलंका के हवाले कर दिया। इसमें किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और यह सिर्फ राजनीतिक कारणों से किया गया था।

तेजस्वी सूर्या ने आगे कहा कि कॉन्ग्रेस के शासनकाल में अक्साई चिन को चीन के हवाले कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हाल ही में पता चला कि कॉन्ग्रेस की सरकार सियाचीन को पाकिस्तान को देने के लिए तैयार थी। भाजपा को लोकतंत्र की रक्षक बताते हुए उन्होंने कहा, “भाजपा संविधान और क्षेत्रीय अखंडता की संरक्षक है। वहीं, विपक्षी दल भारत को राज्यों का संघ मानते हैं।”

दक्षिण बेंगलुरु संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद सूर्या ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस की सरकारों में संविधान की आत्मा पर हमला किया गया। उन्होंने दावा किया कि संविधान में ‘समाजवादी और पंथनिरपेक्षता‘ को जोड़ने का मकसद सिर्फ परिवारवादी एकाधिकार स्थापित करना था। सूर्या ने कहा कि कॉन्ग्रेस की सरकारों में सरकार के समाजवादी रुख के कारण देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी।

कर्नाटक से लोकसभा सांसद तेजस्वी सूर्या ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस की सरकारों ने देशवासियों से कभी न्याय नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद देश के गरीबों को आर्थिक न्याय मिला है। उन्होंने कहा, “जो लोग संविधान पर हमला करने वाले थे, उन्हें संविधान का चैम्पियन बताया गया। इस पाखंड को बेनकाब किया जाना चाहिए।”

अतुल सुभाष के बाद अब बेंगलुरु का हेड कॉन्स्टेबल बना पत्नी और ससुर की प्रताड़ना का शिकार: वर्दी में ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में लिखा- धमकाते थे

AI इंजीनियर अतुल सुभाष मोदी की आत्महत्या के बीच बेंगलुरु पुलिस के एक कॉन्स्टेबल ने पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली है। कॉन्स्टेबल ने अपने सुसाइड नोट में अपनी पत्नी और ससुराल वालों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। मृतक की पहचान 34 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल थिप्पन्ना अलुगुर के रूप में हुई है। उन्होंने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी।

थिप्पन्ना बेंगलुरु के हुलीमावु ट्रैफिक पुलिस स्टेशन में हेड कॉन्स्टेबल थे। वह विजयपुरा जिले के सिंधगी कस्बे के पास हंडिगनुरु गाँव के रहने वाले थे। शुक्रवार (13 दिसंबर) की रात को हीलालिगे रेलवे स्टेशन और कार्मेलराम हुसगुरु रेलवे गेट के बीच रेलवे ट्रैक पर उनका शव मिला। शव को अस्पताल के शवगृह में रखा गया है। फिलहाल बयप्पनहल्ली रेलवे पुलिस मामला दर्ज करके जाँच कर रही है।

सुसाइड से पहले कॉन्स्टेबल ने एक नोट भी छोड़ा है। उस नोट में कॉन्स्टेबल ने अपनी पत्नी और ससुर को आत्महत्या का कदम उठाने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। सुसाइड नोट में थिप्पन्ना ने कहा है कि वह अपनी पत्नी और ससुर यमुनाप्पा की यातनाओं से ‘बहुत दुखी’ होने के बाद यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।

उन्होंने लिखा, “12 दिसंबर को उसने मुझे शाम 7.26 बजे फोन किया, 14 मिनट तक बात की और मुझे धमकाया।” थिप्पन्ना ने कहा कि जब वह अगली सुबह अपने ससुर से बात करने के लिए पहुँचे तो ससुर ने कॉन्स्टेबल से दुर्व्यवहार किया और मर जाने के लिए कहा। ससुर ने पुलिसकर्मी से कहा कि उसके मर जाने से उसकी बेटी बढ़िया से रहेगी।

सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108, 351(3) और 352 के तहत मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। पुलिस ने मृतक के परिजनों से भी संपर्क करने किया है। थिप्पन्ना ने जिस समय आत्महत्या की, उस समय वह वर्दी में थे।

बता दें कि बेंगलुरु में ही बिहार के रहने वाले AI इंजीनियर अतुल सुभाष मोदी ने आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने 24 पन्ने का एक सुसाइड नोट लिखा और 1.20 घंटे का एक वीडियो बनाया था। वीडियो और सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी पत्नी और सास तथा साले पर उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। और फिर अपनी जान दे दी थी। इसके बाद देश भर हंगामा मच गया था।

संभल के मुस्लिम बहुल इलाके में 46 साल बाद प्रशासन ने खुलवाया शिव मंदिर, पुलिस ने मूर्तियों से धूल हटाई: कब्जा करने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के संभल के नखासा थाना क्षेत्र में 46 साल से बंद पड़ा हिंदू मंदिर दोबारा खोला गया है। ये मंदिर मुस्लिम इलाके में था। आसपास दूसरे समुदाय के लोग ज्यादा होने की वजह से मंदिर पर ध्यान नहीं दिया गया और इसकी हालत जर्जर हो गई। हाल में बिजली चोरी नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के दौरान इस मंदिर का पता चला। जिलाधिकारी ने इस संबंध में जानकारी लेकर दोबारा से मंदिर के पट खुलवाए। बताया जा रहा है ये मंदिर 400 साल पुराना है।

मामला मोहल्ला दीपा सराय से सटे खग्गू सराय का है। यहाँ पुलिस टीम को बिजली चोरों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एक पुराना शिव मंदिर मिला। खोलकर देखा गया तो अंदर हनुमान मूर्ति और शिवलिंग दोनों स्थापित थे और उनपर धूल जमी थी। वहीं मंदिर के आसपास इलाके में मुस्लिम आबादी का अवैध कब्जा था। प्रशासन ने मंदिर को लेकर जानकारी जुटाई।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस मंदिर को लेकर नगर हिंदू सभा के संरक्षक विष्णु सरन रस्तौगी ने बताया कि पहले यहाँ हिंदू आबादी रहती थी, लेकिन 1978 में सांप्रदायिक दंगे हुए और मुस्लिमों ने कई हिंदुओं के घरों में आग लगा दी। डर से हिंदू पलायन कर गए और जगह सुनसान हो गई। वरना पहले इसी मंदिर में भजन कीर्तन होता था। उन्होंने ये भी जानकारी दी कि मंदिर के पास एक कुआँ भी था, लेकिन अकील अहमद ने उसे पटवा दिया।

इसके बाद जिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया ने आश्वासन दिया कि मंदिर को पुराने में स्वरूप में वापस लौटाया जाएगा। उन्होंने फौरन नगर पालिका को आदेश दिया कि मंदिर के आसपास से अवैध कब्जा हटवाया जाए। इसके बाद एसएसपी और सीओ ने मिलकर मंदिर का द्वार खोला और उसके भीतर सफाई की।

जिलाधिकारी ने नगर पालिका से वो कुआँ खुलवाने को भी कहा जिसे पाटा जा चुका था। वहीं मंदिर पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। एएसपी श्रीश चंद्र ने भी पुष्टि की कि मंदिर को साफ किया गया है और अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है।

बता दें कि इस प्राचीन मंदिर के बारे में पुलिस टीम को तब पता चला जब बिजली चोरी मामले में प्रशासन और पुलिस संयुक्त कार्रवाई करने इलाके में पहुँची। इस दौरान अधिकारियों ने अवैध कनेक्शन मिलने पर सख्त रुख अपनाया है।

कोलकाता में डॉक्टर के रेप-मर्डर केस में पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और पुलिस अधिकारी अभिजीत मंडल को मिली बेल: पीड़ित परिवार सिस्टम से निराश, जूनियर डॉक्टर फिर प्रदर्शन की तैयारी में

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की जूनियर डॉक्टर के साथ हुई दिल दहलाने वाली घटना को लेकर पूरे पश्चिम बंगाल में आक्रोश है। इस मामले में सीबीआई द्वारा पूर्व आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संदीप घोष और पुलिस अधिकारी अभिजीत मंडल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने में देरी से पीड़ित परिवार और जूनियर डॉक्टर बेहद निराश हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट ने शुक्रवार (13 दिसंबर 2024) को दोनों आरोपितों को जमानत दे दी, जिसके बाद पीड़ित डॉक्टर की माँ ने कहा, “हमने सोचा था कि सीबीआई तेजी से जाँच करेगी और दोषियों को सजा दिलाएगी। लेकिन अब जब आरोपितों को जमानत मिल गई है, ऐसा लग रहा है कि हमारे ज्यूडिशियरी सिस्टम ने हमारा साथ छोड़ दिया।”

इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले से जुड़े पीड़ितों से बात की है। पीड़िता के पिता ने भावुक होकर कहा, “हर दिन हम यही सोचते हैं कि कहीं यह भी एक ऐसा मामला न बन जाए, जिसमें ताकतवर लोग बिना सजा के छूट जाएँ। हम टूट चुके हैं। हमने सीबीआई पर भरोसा किया था कि वे हमें न्याय दिलाएँगे, लेकिन अब लग रहा है कि हमें शायद कभी न्याय नहीं मिलेगा।” बता दें कि उस दुखद घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षित माहौल की माँग करते हुए कई सप्ताह तक प्रदर्शन किया था। आरोपितों को जमानत मिलने के बाद, उन्होंने सीबीआई पर सवाल खड़े किए और कहा कि इस मामले में लापरवाही हुई है।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज में प्रेस कॉन्फ्रेंस में जूनियर डॉक्टर अनिकेत महतो ने कहा, “सीबीआई को अपनी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उनकी विफलता ने आम जनता और डॉक्टरों को बहुत आहत किया है।” एक अन्य जूनियर डॉक्टर असफाकुल्लाह नय्या ने कहा, “इतने आंदोलन के बाद यह आदेश निराशाजनक है। यह सिर्फ डॉक्टरों के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए है, जो आरजी कर की घटना के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे।”

मेडिकल सर्विस सेंटर के डॉक्टर नील रतन नय्या ने इस मामले को लेकर एक बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि सीबीआई ने राज्य सरकार के साथ मिलकर साजिश रची है। उन्होंने चार्जशीट दाखिल नहीं की ताकि आरजी कर पीड़िता के असली गुनहगार बिना सजा के बच सकें।” उन्होंने यह भी कहा, “अगर इस तरह की साजिशें अब नहीं रोकी गईं, तो भविष्य में और भी पीड़ित न्याय माँगने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। हमें न्याय छीनना होगा और इसके लिए हमें एकजुट रहना होगा।”

जूनियर डॉक्टरों के संगठन ने कहा कि वे इस मामले में अगली रणनीति तय करने के लिए एक जनरल बॉडी मीटिंग आयोजित करेंगे। उन्होंने बयान जारी कर कहा, “हम धर्मतला में प्रदर्शन करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और सीबीआई निदेशक के पुतले जलाकर अपनी नाराज़गी जताएँगे।” जूनियर डॉक्टरों ने अपनी ‘तात्कालिक माँगों’ की सूची भी जारी की। उनका कहना है कि “सीबीआई को तुरंत एक पूरक चार्जशीट दाखिल करनी चाहिए ताकि न्याय में और देरी न हो।” मेडिकल सर्विस यूनिटी ने करुणामयी से सॉल्ट लेक स्थित सीबीआई कार्यालय तक मार्च निकालने की घोषणा की है। डॉक्टर नील रतन ने कहा, “अगर हमें न्याय चाहिए, तो हमें अपनी लड़ाई तेज करनी होगी।”

यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज में गहराते असुरक्षा के माहौल और न्याय प्रणाली की धीमी प्रक्रिया को लेकर लोगों के गुस्से को भी उजागर करती है। डॉक्टरों का कहना है कि यह मामला न केवल उनके समुदाय बल्कि पूरे समाज के लिए चिंताजनक है। एक जूनियर डॉक्टर ने कहा, “हम चाहते हैं कि दोषियों को सजा मिले ताकि भविष्य में कोई इस तरह की घटना को अंजाम देने की हिम्मत न करे।”

इस मामले में सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल करने में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि सीबीआई की यह लापरवाही पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है। उन्होंने कहा, “हमने सोचा था कि सीबीआई निष्पक्ष और तेज़ जाँच करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।” ऐसे में जूनियर डॉक्टरों और पीड़ित परिवार ने यह साफ कर दिया है कि वे इस मामले को यूँ ही नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे न्याय के लिए हर संभव कदम उठाएँगे और जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती, तब तक लड़ाई जारी रहेगी।

कच्छ में फर्जी ED टीम बनाकर जिस गिरोह ने की लूटपाट, उसका सरगना निकला AAP नेता अब्दुल सत्तार: गुजरात के गृह राज्यमंत्री ने साझा की पुलिस कस्टडी की तस्वीर

पिछले सप्ताह गुजरात के कच्छ में पकड़े गए 12 फर्जी ED अधिकारियों का सरगना आम आदमी पार्टी (AAP) का महासचिव अब्दुल सत्तार मंजोथी निकला है। इस फर्जी ED टीम ने 2 दिसंबर 2024 को गाँधीधाम के राधिका ज्वैलर्स में फर्जी छापेमारी करके दुकान से 22.25 लाख रुपए के आभूषण और नकदी चुरा लिए थे। इस दौरान ग्रुप में शामिल लोगों ने खुद को ED अधिकारी बताया था।

गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का एक और कारनामा सामने आया है! गुजरात में पार्टी के नेता ने ईडी की नकली टीम बनाई और उसके कैप्टन बनकर लोगों को लूटा! कच्छ में पकड़ी गई ईडी की नकली टीम का कमांडर गुजरात आम आदमी पार्टी का नेता निकला! यह है केजरीवाल के चेलों की करतूत के असली सबूत!”

हर्ष संघवी ने AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के साथ गुजरात आम आदमी पार्टी के नेता इसुदान गढ़वी के साथ अब्दुल सत्तार की तस्वीरें भी साझा की हैं। मंत्री ने एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें पुलिस फर्जी ईडी टीम को गाड़ी से उतार कर सामने ला रही है। इसमें अब्दुल सत्तार भी साथ में दिख रहा है। वह अन्य आरोपितों के साथ लंगड़ाकर चलते हुए दिखाई दे रहा है।

ज्वैलरी शॉप में फर्जी छापेमारी के दौरान अपराधियों ने ED अधिकारी होने का फर्जी आई कार्ड भी दिखाया। इनमें से एक ने ED अधिकारी अंकित तिवारी के नाम का आईडी कार्ड दिखाया। फर्जी रेड के दौरान शातिर अपराधियों ने 25.25 लाख रुपए के गहने और नकदी ले गए। अपराधियों ने इसे जब्ती दिखाकर अपने साथ लेकर चले गए थे। उन्होंने व्यवसायी के घर की भी तलाशी ली थी।

व्यवसायी को उनकी हरकतों से संदेह हुआ और उसने स्थानीय थाने में इसकी शिकायत दी। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई। शुरुआत में पुलिस ने दो आरोपितों को पकड़ा था। हालाँकि, पूछताछ के बाद पता चला कि इसमें और लोग भी शामिल हैं। आखिरकार पुलिस इस मामले में 12 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, एक आरोपित विपिन शर्मा अभी भी फरार है।

पुलिस ने इस गिरोह के पास से तीन कारें जब्त की हैं। इसके साथ ही इनके पास से 22.27 लाख रुपए की कीमत के सोने के गहने भी बरामद किए हैं। गिरफ्तार लोगों में अब्दुल सत्तार मंजोथी, भरत मोरवाडिया, देवायत खाचर, हितेश ठक्कर, विनोद चूडासमा, यूजीन डेविड, आशीष मिश्रा, चंद्रराज नायर, अजय दुबे, अमित मेहता, उनकी पत्नी निशा मेहता और शैलेंद्र देसाई शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि गिरोह में अहमदाबाद, गाँधीधाम और भुज के लोग शामिल हैं और वे प्रमुख व्यवसायियों को निशाना बना रहे थे। अहमदाबाद और भुज में व्यवसायियों को लूटने के बाद इस गिरोह ने गाँधीधाम में खुदरा विक्रेताओं को ठगने का फैसला किया। गिरोह के सदस्य ED अधिकारी की पोशाक पहनकर आभूषण की दुकान में गए वहाँ छापे मारे। उन्होंने व्यवसायी के घर की भी तलाशी ली।

हर्ष संघवी के आरोपों पर AAP ने सफाई दी है। AAP नेता गोपाल इटालिया ने कहा, “हमारी पार्टी ने मंजोथी की गतिविधियों के बारे में जानने के बाद पहले ही उनका इस्तीफा ले लिया था, लेकिन मुझे आश्चर्य है कि गृह मंत्री को गिरफ्तारी के दस दिन बाद आरोपित व्यक्ति की राजनीतिक संबद्धता के बारे में पता चला। इससे स्पष्ट है कि एक अपराध का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडे के लिए किया जा रहा है।”