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जनसंख्या 13.8 लाख, आधार कार्ड बने 14.53 लाख… बांग्लादेशियों की घुसपैठ के लिए बदनाम झारखंड में एक और ‘कमाल’, रिपोर्ट में दावा- 5 जिलों में सामने आई गड़बड़ी

झारखंड के संथाल परगना समेत बाकी इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठ के संकेत लगातार मिल रहे हैं। एक रिपोर्ट में सामने आया है कि झारखंड के कई जिलों में जनसंख्या से कहीं अधिक आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसका आँकड़ा भी मौजूद है। इससे पहले वोटरों की संख्या में असामान्य बढ़ोतरी की बात भी सामने आई थी।

जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के संथाल परगना के हिस्से साहिबगंज और पाकुड़ में अनुमानित जनसंख्या से कहीं अधिक आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं। रिपोर्ट में आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी UIDAI और अनुमानित जनसंख्या के आँकड़ों की तुलना की गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि साहिबगंज की अक्टूबर, 2024 तक अनुमानित जनसंख्या 13.8 लाख थी जबकि यहाँ 14.53 लाख आधार कार्ड बन चुके हैं। इसी तरह पाकुड़ में भी अनुमानित जनसंख्या 10.89 लाख है लेकिन यहाँ 11.36 लाख आधार कार्ड बन चुके हैं। यानि इन दोनों जिलों में जनसंख्या किए मुकाबले 104% आधार कार्ड बने हैं।

इसी तरह का मामला लोहरदगा से भी सामने आया है। यहाँ 5.58 लाख की जनसंख्या पर 6.08 लाख आधार कार्ड बन चुके हैं। यानी यहाँ जनसंख्या के मुकाबले 108% आधार बने हैं। कमोबेश यही मामला कुछ और जिलों में हैं। इन आँकड़ों पर अब चिंता जताई गई है।

यह भी प्रश्न उठे हैं कि जब इन जिलों की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा खुद बाहर काम करने के लिए रहता है तो यहाँ आधार कार्ड में कैसे बढ़ोतरी हो गई। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सीधी सुई बांग्लादेशी घुसपैठियों की तरफ जा रही है। साहिबगंज और पाकुड़ जैसे इलाके पश्चिम बंगाल से सटे हुए हैं और यहाँ से बांग्लादेश भी दूर नहीं है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार ने खुफिया एजेंसियों की एक टीम को संथाल परगना के जिलों में हाल ही में कुछ दिन के लिए भेजा था। यह टीम यहाँ से बांग्लादेशी घुसपैठ के सबूत लेकर लौटी है। इसने साहिबगंज के कई इलाकों का दौरा भी किया है।

यह पहला मामला नहीं है जब सरकारी आँकड़ों में असामान्य वृद्धि हुई हो। इससे पहले वोटर लिस्ट में भी असामान्य वृद्धि की बात कही गई थी। भाजपा ने इसको लेकर एक रिपोर्ट भी पेश की थी। भाजपा ने पाया था कि झारखंड की 10 विधानसभा सीटों के कुछ बूथ पर (विशेष कर मुस्लिम आबादी वाले बूथ) पर वोटरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि पाँच वर्षों में हुई है।

भाजपा की रिपोर्ट में सामने आया था कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में वोटरों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़त 20% से 123% तक की है। यह बढ़त इन 10 विधानसभा के कुल 1467 बूथ पर हुई है। भाजपा ने कहा है कि सामान्यतः पाँच वर्षों में 15% से 17% की वृद्धि होती है, इसीलिए यह वृद्धि असामान्य है। भाजपा ने हिन्दू बूथों पर आबादी घटने की बात भी कही थी।

झारखंड में होने वाली अवैध घुसपैठ को लेकर हाई कोर्ट में एक मामला भी चल रहा है। दान्याल दानिश की याचिका पर हाई कोर्ट राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों के सर्वे और उनको बाहर निकले जाने के निर्देश तक दे चुका है। हालाँकि, राज्य की हेमंत सोरेन सरकार किसी भी प्रकार की घुसपैठ से इनकार करती आई है।

हेमंत सोरेन की सरकार ने इसको लेकर लीपापोती का प्रयास किया है। हाल ही में हाई कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान पूरे राज्य में सत्यापन का आदेश दिया था। सोरेन सरकार ने आनन-फानन में इस संबंध में समितियाँ बनाई और कुछ ही दिनों के भीतर हलफनामा दायर कर दिया कि राज्य कोई घुसपैठिया नहीं है।

केरल के सरकारी स्कूल में मन रहा था क्रिसमस, हिंदू कार्यकर्ताओं ने पूछा- जन्माष्टमी क्यों नहीं मनाते: टीचरों ने लगाया अभद्रता का आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार

केरल के एक सरकारी स्कूल में ईसाई त्यौहार क्रिसमस मनाए जाने के दौरान कुछ हिन्दू कार्यकर्ता पहुँचे। उन्होंने सरकारी संस्थान में क्रिसमस मनाए जाने को लेकर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर स्कूल में जन्माष्टमी क्यों नहीं मनाई जाती। इसके बाद उन्हें अभद्रता के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल के पलक्कड़ जिले के नल्लेपिल्ली में स्थित एक सरकारी स्कूल में शिक्षक और बच्चे शुक्रवार (20 दिसम्बर, 2024) को क्रिसमस मना रहे थे। यहाँ बच्चों ने क्रिसमस के लिए विशेष कपड़े पहन रखे थे और सजावट भी की गई थी।

इसी दौरान यहाँ बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े तीन कार्यकर्ता पहुँच गए। उन्होंने यहाँ कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों से पूछताछ की। उन्होंने महिला प्रधानाचार्य से भी कुछ प्रश्न पूछे। उन्होंने कहा कि आखिर क्रिसमस का ही त्यौहार स्कूल में क्यों मनाया जा रहा है और इसी तरह हिन्दू त्यौहार क्यों नहीं मनाए जाते।

उन्होंने पूछा कि स्कूल में कृष्ण जन्माष्टमी क्यों नहीं मनाई जाती। कथित तौर पर इस दौरान उनकी यहाँ के शिक्षकों से बहस भी हुई। हालाँकि, यह मामला यहीं नहीं थमा। उनके खिलाफ इसके बाद मामला दर्ज कर लिया गया। उनके ऊपर आरोप लगाया गया कि उन्होंने शिक्षकों को अभद्र बातें बच्चों के सामने बोली।

रविवार (22 दिसम्बर, 2024) को तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया, जिसने उन्हें 14 दिन की रिमांड पर भेज दिया। उन पर सरकारी कामकाज में बाधा डालने और धमकियाँ देने का आरोप लगाया गया है। पुलिस उनसे पूछताछ करके मामले की आगे जाँच कर रही है।

गिरफ्तार किए गए तीनों हिन्दू कार्यकर्ताओं का नाम K अनिलकुमार, मनमकुझी सुशासनन और थेक्कुमुरी वेलायुधन है। इनमें से अनिलकुमार पलक्कड़ जिले में विश्व हिन्दू परिषद के सचिव हैं जबकि सुशासनन बजरंग दल के जिला संयोजक हैं। वेलायुधन भी विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता हैं।

जिन 3 खालिस्तानी आतंकियों ने गुरदासपुर पुलिस चौकी पर फेंके थे ग्रेनेड, उनका UP के पीलीभीत में एनकाउंटर: 2 एके-47 के साथ ग्रोक पिस्टल और कारतूस बरामद

यूपी के पीलीभीत जिले में सोमवार (23 दिसंबर 2024) को खालिस्तानी कमांडो फोर्स के तीन आतंकियों को पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया। ये आतंकी कुछ समय पहले पंजाब के गुरदासपुर पुलिस चौकी पर ग्रेनेड से हमला करने में शामिल थे। इस ऑपरेशन को यूपी और पंजाब पुलिस की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। मारे गए आतंकियों की पहचान गुरविंदर सिंह, वीरेंद्र सिंह उर्फ रवि और जसप्रीत सिंह उर्फ प्रताप सिंह के रूप में हुई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनकाउंटर पीलीभीत के पूरनपुर इलाके में देर रात हुआ। पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि ये आतंकी इलाके में छिपे हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर उन्हें आत्मसमर्पण के लिए कहा, लेकिन उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी घायल हो गए। उन्हें तुरंत पूरनपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने आतंकियों के पास से दो एके-47 राइफल, दो ग्लॉक पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं। डीजीपी प्रशांत कुमार ने इस ऑपरेशन को बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि यह दो राज्यों की पुलिस के बीच बेहतरीन तालमेल का परिणाम है। ऑपरेशन की अगुवाई पीलीभीत के एसपी अविनाश पांडेय ने की।

पुलिस के मुताबिक, मारे गए तीनों आतंकी गुरुदासपुर के रहने वाले थे। उनकी उम्र 18 से 25 साल के बीच थी। ये लोग खालिस्तानी कमांडो फोर्स के सदस्य थे और उत्तर प्रदेश के तराई इलाके में छिपे हुए थे।

इस ऑपरेशन में यूपी पुलिस की एसओजी और सर्विलांस टीम के साथ पंजाब पुलिस की टीम भी शामिल थी। डीजीपी ने कहा कि एनकाउंटर अपराधियों के लिए सख्त संदेश है कि कानून से बच पाना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि रविवार (22 दिसंबर 2024) की देर रात यूपी पुलिस और पंजाब पुलिस की टीम के साथ एनकाउंटर में तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया गया।

किसी का पूरा शरीर खाक, किसी की हड्डियों से हुई पहचान: जयपुर LPG टैंकर ब्लास्ट देख चश्मदीदों की रूह काँपी, जली चमड़ी के साथ पीड़ित चिल्लाते हुए सड़कों पर भागे

राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार (20 दिसंबर 2024) को एलपीजी टैंकर में ब्लास्ट हुआ था। इस हादसे में अब तक 13 मौतें हो चुकी हैं। मृतकों में एक रिटायर्ड IAS भी शामिल हैं। लगभग 30 लोग बुरी तरह से झुलस गए हैं जिनका इलाज चल रहा है। अब इस हादसे के चश्मदीदों की आँखों देखी आपबीती सामने आ रही हैं। कई लोग तो ऐसे भी थे जो जान बचाने के लिए जलते हुए 2 किलोमीटर तक भागते रहे।

शुक्रवार की सुबह जयपुर के भांककोटा इलाके में एलपीजी गैस से भरे टैंकर को ट्रक ने टक्कर मार दी थी। इस टक्कर से लगभग 18 टन ज्वलनशील गैस सड़क सहित आसपास के पूरे इलाके में जोरदार धमाके से फ़ैल गई थी। धमाका इतना तेज था कि टैंकर से लगभग 300 मीटर दूर तक आग फ़ैल गई। इन परिधि में तमाम बस, ट्रक और बाइक के साथ खेतों में मौजूद किसान और आसपास के मकानों में रहने वाले लोग भी आ गए।

कई लोगों दिखे देवदूत की भूमिका में

TOI के मुताबिक सड़क पर जब आग फ़ैल गई थी तो टैंकर के आसपास मौजूद कई वाहनों से लोग उतर कर खेतों की तरफ भागे। इसमें कई लोग ऐसे भी थे जिनके कपड़े और खाल जल चुकी थी। हालाँकि जान बचाने के लिए वो मदद की आस में बदहवास हो कर भागते रहे। काफी दूर चल कर उन्हें एक फार्म हाउस में शरण मिली। फार्म हाउस के मालिक भंवर लाल ने भी हादसे में शिकार लोगों को लहूलुहान हालत में अपने दरवाजे पर देखा। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। भंवर लाल ने उनकी यथासंभव मदद भी की।

जिस जगह टैंकर में ब्लास्ट हुआ वहाँ पास ही कंडोई अस्पताल है। इस अस्पताल की तरफ खेतों की दिशा से भाग रहे कई लोग अंत में यहाँ की चारदीवारी के पास आ कर रुक गए। ये सभी जल्द से जल्द अस्पताल में घुसना चाह रहे थे लेकिन लगभग झुलसी अवस्था में लगभग 8 फ़ीट ऊँची चारदीवारी को फाँद पाना उनके लिए सम्भव नहीं था। इसी दौरान पास ही के एक किसान राकेश सैनी ने पीड़ितों के लिए सीढ़ी का इंतजाम किया। इसी सीढ़ी से तमाम घायल अस्पताल कैम्पस में पहुँच पाए। खुद राकेश ने उन्हें सहारा दिया।

कंडोई अस्पताल डॉ रमन का है। वो मौके पर मौजूद मिले। डॉ रमन के मुताबिक लगभग 30 लोग बुरी तरह से झुलसे हुए थे जो दर्द से कराह रहे थे। इन सभी को तत्काल उपलब्ध संसाधनों से इलाज दिया गया। ज्यादा गंभीर घायलों को SMS (सवाई मान सिंह) अस्पताल में शिफ्ट करवाया गया।

मंजर याद कर के सिहर रहे हैं पीड़ित

जिस ट्रक से टैंकर में टक्कर हुई उसे मैनपुरी UP के संजेश यादव चला रहे थे। संजेश यादव के अंतिम संस्कार के लिए उनके भाई को पोटली में बँधी कुछ हड्डियाँ मिल पाईं। उनका पूरा शरीर जल गया। हड्डियाँ पाने के लिए भी संजेश के भाई इंद्रजीत को अपना DNA सैम्पल देना पड़ा था। वहीं घटनास्थल से गुजर रही एक बस में सवार नरेश कुमार मीणा ने भास्कर को बताया कि उनको पहले एलपीजी की तेज गंध आई। कोई कुछ समझ पता इसे से पहले जोरदार धमाका हुआ और हर तरफ आग ही आग फ़ैल गई।

नरेश कुमार मीणा ने बताया कि आग लगते ही भगदड़ और चीख पुकार मच गई। जिसे जिधर भी जगह दिखी वो उसी तरफ भगा। जिस स्लीपर बस में नरेश सवार थे वो आग का गोला बन गई। लगभग आधे दर्जन झुलसे साथियों के साथ नरेश कुमार अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं। घटनास्थल से अपनी पिकअप ले कर गुजर रहे गजराज सिंह तंवर ने बताया कि उनको चारों तरफ धूल का गुबार नजर आया था। तभी आग लग गई। लगभग 400 मीटर भाग कर गजराज सिंह ने अपनी जान बचाई।

गजराज की दोनों जाँघें बुरी तरह से झुलस गई हैं। उनके पीछे लगभग 1 दर्ज लोग जान बचाने के लिए चिल्लाते हुए दौड़ रहे थे। हालाँकि उनमें से कुछ दीवाल तक नहीं पहुँच पाए। एक अन्य चश्मदीद दीवान सिंह ने बताया कि धमाके के समय वो एक स्लीपर बस में सवार थे। कुछ ही देर में बस के अंदर धुँआ ही धुँआ हो गया। अंदर दम घुटने लगा तो दीवान सिंह ने बस का काँच तोड़ दिया और बाहर निकल गए। अफरातरफरी में कई कई लोग ऐसे भी रहे तो तमाम कोशिशों के बावजूद बस से बाहर नहीं आ पाए।

बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस आई एक्शन में, अब तक 175 की हुई पहचान: LG ऑफिस के आदेश के बाद कार्रवाई, जल्द सब भेजे जाएँगे अपने मुल्क

दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाते हुए 175 संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की है। अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ ये अभियान शनिवार (21 दिसंबर 2024) की शाम 6 बजे से बाहरी दिल्ली क्षेत्र में शुरू हुआ और लगातार 12 घंटे तक चला। पुलिस का यह कदम दिल्ली में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश के बाद आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान के लिए यह अभियान 11 दिसंबर को शुरू किया गया था। इससे ठीक एक दिन पहले उपराज्यपाल सचिवालय ने इन व्यक्तियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पुलिस ने बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंता जाहिर करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।

बाहरी जिले के पुलिस अधिकारी ने बताया कि स्थानीय थानों, विशेष इकाइयों और जिला विदेशी प्रकोष्ठ के अधिकारियों की विशेष टीमों को गठित किया गया है। इन टीमों को घर-घर जाकर जाँच करने और संदिग्ध प्रवासियों की जानकारी जुटाने का निर्देश दिया गया है। अभियान के दौरान 175 लोगों की पहचान की गई, जो बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे थे।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि जिन व्यक्तियों की पहचान की गई है, उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। उनके दस्तावेजों की जाँच की जा रही है और उनके स्थानीय संपर्कों के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है। इन जाँचों के परिणामों के आधार पर कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने यह भी कहा कि दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों की संख्या में इजाफा हो रहा है, जिससे सुरक्षा को खतरा हो सकता है। बाहरी जिला पुलिस ने इन व्यक्तियों को हिरासत में लेने और उन्हें उनके मूल स्थान पर वापस भेजने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अवैध प्रवासियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी चलता रहेगा, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

PM मोदी को मिला कुवैत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ : जानें अब तक और कितने देश प्रधानमंत्री को दे चुके हैं अवार्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुवैत दौरे के दूसरे दिन देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ से नवाजा गया। यह सम्मान कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह ने प्रदान किया। यह पुरस्कार भारत और कुवैत के बीच मजबूत होते संबंधों और पीएम मोदी के योगदान को मान्यता देने के लिए दिया गया। यह पीएम मोदी को किसी देश द्वारा दिया गया 20वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।

‘ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ कुवैत का प्रतिष्ठित नाइटहुड पुरस्कार है, जो राष्ट्राध्यक्षों और विदेशी शाही परिवारों के सदस्यों को दिया जाता है। इससे पहले यह सम्मान बिल क्लिंटन, प्रिंस चार्ल्स और जॉर्ज बुश जैसी प्रमुख हस्तियों को भी दिया जा चुका है। इस सम्मान की स्थापना 1974 में की गई थी। यह कुवैत के ऐतिहासिक नेता मुबारक अल-सबाह की स्मृति में दिया जाता है, जिन्होंने 1897 में कुवैत को ओटोमन साम्राज्य से अलग एक स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित किया था।

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह से शानदार मुलाकात हुई। हमने फार्मास्युटिकल्स, आईटी, फिनटेक, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। हमारे देशों के घनिष्ठ संबंधों को और मजबूत करते हुए इसे रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुँचाया है। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में हमारी दोस्ती और भी प्रगाढ़ होगी।”

कुवैत यात्रा पर पीएम मोदी, दौरा बेहद अहम

पीएम मोदी कुवैत के दो दिवसीय दौरे पर हैं। यह यात्रा कुवैत के अमीर के निमंत्रण पर हो रही है। कुवैत की राजधानी में उन्होंने भारतीय प्रवासियों के साथ मुलाकात की और एक भारतीय श्रमिक शिविर का दौरा भी किया। पीएम मोदी ने कुवैत के साथ व्यापार, निवेश और ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की।

भारत और कुवैत के संबंध बेहद खास

कुवैत भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और वहाँ भारतीय समुदाय सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। भारत और कुवैत के बीच वित्त वर्ष 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 10.47 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। कुवैत भारत का छठा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों का लगभग तीन प्रतिशत पूरा करता है।

पीएम मोदी को मिल चुके हैं 20 से ज्यादा देशों के शीर्ष सम्मान

कुवैत से पहले पीएम मोदी को कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है। हाल ही में उन्हें गुयाना, डोमिनिका और बारबाडोस ने भी सम्मानित किया। अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में शामिल हैं:

अफगानिस्तान: स्टेट ऑर्डर ऑफ गाजी अमीर अमानुल्लाह खान (2016)
फिलिस्तीन: ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन (2018)
यूएई: ऑर्डर ऑफ जायद (2019)
फ्रांस: लीजन ऑफ ऑनर (2023)
रूस: ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू एपोस्टल (2023)
मिस्र: ऑर्डर ऑफ द नाइल (2023)

पीएम मोदी की यह यात्रा भारत और कुवैत के बीच राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जिस संभल में हिंदुओं को बना दिया अल्पसंख्यक, वहाँ की जमीन उगल रही इतिहास: मंदिर-प्राचीन कुओं के बाद मिली ‘रानी की बावड़ी’, दफन थी प्राचीन इमारत-सुरंग

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में बंद पड़े मंदिरों के अलावा खुदाई के दौरान एक अन्य ऐतिहासिक धरोहर निकल कर सामने आई है। इसी जिले के चंदौसी क्षेत्र में राजस्व विभाग ने एक प्राचीन बावड़ी को भी खोज निकाला है। काफी बड़ी संरचना वाली इस बावड़ी को मिट्टी से दफन कर दिया गया था। फ़िलहाल प्रशसन द्वारा खुदाई का काम जारी है। माना जा रहा है कि अभी यहाँ पर सुरंग भी मिल सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुदाई का ये काम चंदौसी के लक्ष्मणगंज इलाके में हो रहा है। साल 1857 तक ये क्षेत्र हिन्दू बहुल हुआ करता था। यहाँ सैनी बहुतायत हुआ करते थे। वर्तमान में यह जगह मुस्लिम बहुल हो चुकी है। इस जगह की खुदाई की माँग को लेकर संभल के जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र मिला था। प्रार्थना पत्र में लक्ष्मणगंज के अंदर रानी बिलारी की प्रचीन बावड़ी होने का दावा किया गया था। इसी शिकायत का संज्ञान लेकर राजस्व विभाग की टीम लक्ष्मण गंज पहुँची थी।

बस्ती के बीच में एक जगह चिन्हित कर के खुदाई शुरू हुई। कुछ ही देर बाद जमीन के नीचे प्राचीन इमारतें मिलनी शुरू हो गईं। मीडिया से बात करते हुए राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नीचे 2 मंजिला इमारत दबी हुई है। यहाँ मौजूद बावड़ी और विशाल कुआँ सरकारी अभिलेखों में भी दर्ज है। बावड़ी की गहराई लगभग 250 फ़ीट बताई जा रही है। प्रशासन के पास नक्शा भी मौजूद है। आगे की खुदाई नक्शे के आधार पर की जाएगी। खुदाई का काम अभी भी जारी है। इसके विजुअल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

इस बीच भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) की टीम संभल पहुँच कर काम पर लग गई है। टीम ने यहाँ कल्कि मंदिर से अपनी जाँच पड़ताल शुरू की। इसके अलावा ASI 5 अलग-अलग जगहों पर भी सर्वे के लिए पहुँची। इन जगहों में 5 तीर्थ और 19 कुएँ शामिल हैं। इन कुओं में कल्कि मंदिर में मौजूद अति प्राचीन कृष्ण कूप भी शामिल है। शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए ASI के इस दौरे को हर संभव गुप्त ही रखने की कोशिश की गई थी।

गौरतलब है कि संभल में दंगों का पुराना इतिहास रहा है। इन्हीं दंगों के बल पर संभल नगरपालिका क्षेत्र से धीरे-धीरे हिंदुओं को मिटाया गया। देश की स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी जो आज घटकर 15-20% रह गई है। उस समय मुस्लिम 55% थे। आज वे बढ़कर 80-85 प्रतिशत हो गए हैं।

8 दिन पीछा कर पुलिस ने चोर अब्दुल और सादिक को पकड़ा, कोर्ट ने 15 दिन बाद दे दी जमानत: बाहर आने के बाद जज के घर से ही चुराए नकदी और जेवर

राजस्थान के जोधपुर में पुलिस ने शनिवार (21 दिसंबर 2024) को दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया। इनका नाम मोहम्मद सादिक और अब्दुल्ला है। दोनों पर आरोप है कि ये पहले मकानों की रेकी करते थे और मौका देखकर वहाँ चोरी करते थे। हाल ही में इन्होंने एक जज के घर से लाखों के गहने और नकदी पर हाथ साफ किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सादिक और अब्दुल्ला जोधपुर के बकरा मंडी इलाके में रहते हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों शातिर नकबजन हैं और इनके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं। सादिक पर तीन और अब्दुल्ला पर सात केस दर्ज हैं। इन्होंने 3 नवंबर 2024 को पाली जिले की इंद्रा कॉलोनी में एक बंद मकान को निशाना बनाया था, जहाँ से करीब 20 लाख रुपये के गहने चोरी किए थे। घटना के समय मकान मालिक पूरे परिवार सहित एक मंदिर में दर्शन करने चित्तौड़गढ़ गए थे।

पुलिस ने उस मामले में कड़ी मेहनत करते हुए 400 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले और 11 नवंबर को दोनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में चोरी के कुछ गहने बरामद हुए। इसके बाद पुलिस के सामने उन्होंने सुधरने का वादा किया और 14 नवंबर को जेल भेज दिए गए, लेकिन 29 नवंबर को उन्हें अदालत से जमानत मिल गई।

जेल से छूटने के बाद दोनों ने फिर से चोरी शुरू कर दी। 13 दिसंबर 2024 को उन्होंने चित्तौड़गढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ सांधु के बंद मकान को निशाना बनाया। यहाँ से लाखों के गहने और नकदी चुराकर फरार हो गए।

मजिस्ट्रेट के घर चोरी होने से पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और 50 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। इसके बाद चोरों की पहचान सादिक और अब्दुल्ला के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों की तलाश में दबिश डालनी शुरू की। आखिरकार शनिवार (21 दिसंबर) को इन्हे जोधपुर से दबोच लिया गया है।

पुलिस की जाँच में पता चला कि सादिक और अब्दुल्ला महँगे शौक और जुआ-सट्टा खेलने के आदी हैं। ये बंद मकानों की रेकी करते और रात में वहाँ चोरी को अंजाम देते। चोरी करते वक्त एक व्यक्ति घर के अंदर होता और दूसरा बाहर निगरानी करता। खतरा होने पर बाहर खड़ा व्यक्ति अंदर वाले को अलर्ट कर देता, जिससे वे भाग जाते थे। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच और कानूनी कार्रवाई कर रही है।

बाल उखाड़े, चाकू घोंपा, कपड़े फाड़ सड़क पर घुमाया: बंगाल में मुस्लिम भीड़ ने TMC की महिला कार्यकर्ता को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, पीड़िता ने BJP से लगाई मदद की गुहार

पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले में एक महिला के साथ मुस्लिम भीड़ द्वारा बर्बरता किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की कार्यकर्ता है जिसकी पिटाई के बाद सड़क पर घुमाया गया है। इस कांड का खुलासा भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार (21 दिसंबर 2024) को किया है।

यह मामला मेदनीपुर के नंदकुमार थानाक्षेत्र में आने वाले गाँव श्यामसुंदर पुर का है। शुक्रवार (20 दिसंबर) को यहाँ 42 वर्षीया हिन्दू महिला ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में महिला ने बताया कि उनके 23 वर्षीय बेटे का लम्बे समय से प्रेम संबंध एक 19 साल की मुस्लिम लड़की से था। इसी बीच 19 नवंबर को प्रेमी जोड़ा एक साथ अपना-अपना घर छोड़ कर कहीं चला गया। अब दोनों ने शादी कर ली है। इसी बात से मुस्लिम पक्ष नाराज था।

पीड़िता किराने की दुकान चला कर अपने परिवार का गुजारा करती है। इसी दुकान पर शुक्रवार (20 दिसंबर) को सुबह लगभग 8:15 पर एक भीड़ ने हमला कर दिया। हमलावरों के पास डंडे, लोहे की रॉड, चाकू, कैंची आदि बताए जा रहे हैं। हमलावर भीड़ ने महिला को पहले गंदी-गंदी गालियाँ दीं और 2 CCTV कैमरे तोड़ डाले। खुद को बचाने के लिए महिला ने दुकान का शटर बंद कर लिया। तब हिंसक भीड़ ने महिला के घर और दुकान में तोड़फोड़ शुरू कर दी।

आखिरकार भीड़ महिला के घरों के दरवाजे तोड़ कर अंदर घुसने में कामयाब रही। पीड़िता को बेरहमी से पीटा गया। महिला का घुटना बुरी तरह से घायल हो गया। महिला के एक पैर पर चाकू घोंप दिए गए। पुरुष हमलावरों ने पीड़िता के बालों को उखाड़ लिया। पीड़िता के कपड़े फाड़ कर उसे सड़क पर घुमाया गया। हमलावरों ने अपनी इन करतूतों के वीडियो भी बनाए। इसी दौरान पीड़िता की दुकान से किराने का सामान और कैश लूट लिया गया। महिला की चीखें सुन कर आपसस के लोग जमा हुए। उन्होंने जैसे-तैसे पीड़िता को बचाया।

हमलावरों को आपराधिक सोच और जमीन हड़पने वाला बताकर पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाई है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुवेंदु अधिकारी का दावा है कि पीड़िता तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेत्री है। उन्होंने आगे लिखा कि हमलावर भीड़ तृणमूल कॉन्ग्रेस की वोटबैंक है जिसकी वजह से उन पर पुलिस ने भी कोई एक्शन नहीं लिया है। अब पीड़िता की मदद विश्व हिन्दू परिषद जैसे संगठन कर रहे हैं। सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस में मौजूद हिन्दुओं से कहा है कि केवल बीजेपी ही उनकी रक्षा कर सकती है।

बताते चलें कि इसी साल जून में भी उत्तरी दिनाजपुर में तृणमूल कॉन्ग्रेस समर्थकों ने एक महिला को तालिबानी अंदाज में पीटा था। तब इस घटना का वीडियो वामपंथी पार्टी (CPI- M) के नेता मोहम्मद सलीम ने शेयर किया था। उन्होंने बाहुबली माने जाने वाले एक स्थानीय TMC नेता तजेमुल को इस घटना का गुनहगार बताया था। तजेमुल को लोग JCB कह कर बुलाते हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी क्षेत्र के फुलबारी में एक महिला ने सार्वजानिक पिटाई के सदमे में आत्महत्या कर लिया था।

जिस कॉपर प्लांट को बंद करवाने के लिए विदेशों से आया पैसा, अब उसे शुरू करने के लिए तमिलनाडु में लोग कर रहे प्रदर्शन: जानिए कैसे भारत को हुआ नुकसान, चीन को फायदा

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता के स्टरलाइट कॉपर प्लांट को फिर से खोलने की माँग को लेकर स्थानीय लोगों ने शुक्रवार (20 दिसंबर 2024) को विरोध-प्रदर्शन किया। यह प्लांट 2018 में तमिलनाडु सरकार के आदेश पर बंद कर दिया गया था। ऐसा ही आदेश कोर्ट ने भी दिया था। भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कॉन्ग्रेस (INTUC) ने इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उनकी माँग है कि कॉपर प्लांट और अन्य बंद उद्योगों को दोबारा शुरू किया जाए ताकि क्षेत्र में बेरोजगारी कम हो सके।

स्टरलाइट कॉपर प्लांट के बंद होने से 1,500 प्रत्यक्ष और 40,000 अप्रत्यक्ष नौकरियाँ चली गईं। इससे न केवल स्थानीय लोगों पर असर पड़ा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा प्रभाव हुआ। प्लांट बंद होने के बाद, भारत, जो पहले तांबे का निर्यातक था, अब आयातक बन गया। 2017-18 में भारत शीर्ष पाँच तांबा कैथोड निर्यातकों में शामिल था। लेकिन प्लांट के बंद होने के बाद 2018-19 से भारत तांबे का शुद्ध आयातक बन गया।

स्टरलाइट कॉपर देश की 38% तांबे की जरूरत पूरी करता था और हर साल लगभग 4 लाख टन तांबे का उत्पादन करता था। प्लांट के बंद होने का सबसे बड़ा फायदा चीन को हुआ, जो तांबे का मुख्य उत्पादक और निर्यातक है। यह भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि तांबा ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए आवश्यक धातु है।

भविष्य में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। तांबे की माँग तेजी से बढ़ रही है। साल 2030 तक, भारत को हर साल 2.5-3.5 मिलियन मीट्रिक टन तांबे की जरूरत होगी। यह माँग मुख्य रूप से अक्षय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, शहरीकरण और पावर ग्रिड विस्तार जैसे क्षेत्रों से आएगी।

भारत सरकार के सोलर एनर्जी अभियान के तहत, 2030 तक सोलर और विंड एनर्जी के लिए 1.5 मिलियन टन तांबे की जरूरत होगी। बिजली उत्पादन और वितरण उपकरण, जैसे अल्टरनेटर और ट्रांसफॉर्मर में तांबे का उपयोग होता है। इसके अलावा, सोलर पैनलों में भी तांबा अहम भूमिका निभाता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती माँग के चलते तांबे की आवश्यकता और बढ़ेगी। एक इलेक्ट्रिक कार में औसतन 83 किलोग्राम तांबा और एक इलेक्ट्रिक बस में 224 किलोग्राम तांबा लगता है। भारत सरकार ने 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य रखा है, जिससे तांबे की मांग में भारी वृद्धि होगी।

तेजी से हो रहे शहरीकरण और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के तहत भी बिजली और तांबे की मांग बढ़ेगी। भारत 2030 तक अपने पावर ग्रिड को 20% तक बढ़ाने की योजना बना रहा है। बिजली के कुशल ट्रांसमिशन में तांबे की भूमिका महत्वपूर्ण है।

भारत में प्रति व्यक्ति तांबे की खपत अभी 1 किलोग्राम है, जो 2047 तक बढ़कर 3.2 किलोग्राम हो सकती है। अनुमान है कि भारत को हर 4 साल में एक नया कॉपर स्मेल्टर चाहिए। स्टरलाइट जैसे प्लांट्स को फिर से शुरू करना बहुत जरूरी है।

प्लांट के बंद होने से भारत का तांबा उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ। 2018-19 में तांबा निर्यात 90% गिर गया। 2017-18 में 3.78 लाख टन निर्यात होता था, जो 2018-19 में घटकर मात्र 48,000 टन रह गया।

CUTS इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट के बंद होने से भारत को ₹14,749 करोड़ का नुकसान हुआ, जिससे न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि तांबे की आपूर्ति पर भी असर पड़ा।

स्टरलाइट कॉपर प्लांट के बंद होने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। कॉपर उत्पादन एक उच्च लाभ वाला निवेश है, जिसमें लगभग 400% तक का रिटर्न मिलता है। अगर देश में कॉपर का उत्पादन जारी रहता, तो यह आर्थिक विकास में बड़ा योगदान देता। लेकिन प्लांट के बंद होने से भारत को कॉपर आयात करना पड़ रहा है, जिससे अन्य देशों को लाभ हो रहा है।

चीन, पाकिस्तान और अन्य देशों को लाभ

भारत में कॉपर की माँग को पूरा करने के लिए अब बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ रहा है। इसमें सबसे अधिक आयात चीन से हो रहा है। 2023 में चीन से भारत के कॉपर आयात की कीमत $340.12 मिलियन थी। 2023-24 में भारत ने 363,000 टन परिष्कृत कॉपर आयात किया, जो पिछले दो वर्षों में 13% की वृद्धि दर्शाता है।
भारत के निर्यात से बाहर होने से वैश्विक कॉपर आपूर्ति कम हो गई, जिसका फायदा चीनी कंपनियों ने उठाया। चीन ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के जरिए बेहतर कीमत और शर्तें हासिल कीं।

इस बीच, पाकिस्तान जैसे देशों ने भारत की जगह ले ली। 2023 में पाकिस्तान का चीन को कॉपर निर्यात लगभग $752 मिलियन का था। इसके अलावा, सऊदी अरब भी बड़ा लाभार्थी बना, क्योंकि वेदांता समूह ने वहाँ $2 बिलियन का निवेश करने का फैसला किया है। यह निवेश 400 केटीपीए ग्रीनफील्ड कॉपर स्मेल्टर और रिफाइनरी तथा 300 केटीपीए कॉपर रॉड प्रोजेक्ट पर किया जाएगा।

विदेशी षड्यंत्र की आशंका

स्टरलाइट प्लांट विरोध प्रदर्शन के पीछे विदेशी फंडिंग का आरोप लगा है। तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने पिछले साल इन प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताया था। कहा जाता है कि चीनी कंपनियों ने जिनका भारतीय कॉपर आयात में आर्थिक हित था, इन विरोध प्रदर्शनों को प्रोत्साहित और वित्त पोषित किया।

वेदांता ने मद्रास हाईकोर्ट में बताया कि चीनी कंपनियों ने इन प्रदर्शनों का समर्थन किया। इसके अलावा कई एनजीओ पर भी विदेशी धन के नियमों का उल्लंघन कर फंड लेने का आरोप लगा। इसमें चर्च समूह, टुटिकोरिन डायोसिस एसोसिएशन और मोहन सी. लाजरस जैसे ईसाई मिशनरी शामिल हैं। इनका एफसीआरए पंजीकरण 2015 में खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर रद्द कर दिया गया था, लेकिन कहा जाता है कि इसके बाद भी उन्होंने विदेशी धन प्राप्त किया।