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कच्छ में फर्जी ED टीम बनाकर जिस गिरोह ने की लूटपाट, उसका सरगना निकला AAP नेता अब्दुल सत्तार: गुजरात के गृह राज्यमंत्री ने साझा की पुलिस कस्टडी की तस्वीर

पिछले सप्ताह गुजरात के कच्छ में पकड़े गए 12 फर्जी ED अधिकारियों का सरगना आम आदमी पार्टी (AAP) का महासचिव अब्दुल सत्तार मंजोथी निकला है। इस फर्जी ED टीम ने 2 दिसंबर 2024 को गाँधीधाम के राधिका ज्वैलर्स में फर्जी छापेमारी करके दुकान से 22.25 लाख रुपए के आभूषण और नकदी चुरा लिए थे। इस दौरान ग्रुप में शामिल लोगों ने खुद को ED अधिकारी बताया था।

गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का एक और कारनामा सामने आया है! गुजरात में पार्टी के नेता ने ईडी की नकली टीम बनाई और उसके कैप्टन बनकर लोगों को लूटा! कच्छ में पकड़ी गई ईडी की नकली टीम का कमांडर गुजरात आम आदमी पार्टी का नेता निकला! यह है केजरीवाल के चेलों की करतूत के असली सबूत!”

हर्ष संघवी ने AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के साथ गुजरात आम आदमी पार्टी के नेता इसुदान गढ़वी के साथ अब्दुल सत्तार की तस्वीरें भी साझा की हैं। मंत्री ने एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें पुलिस फर्जी ईडी टीम को गाड़ी से उतार कर सामने ला रही है। इसमें अब्दुल सत्तार भी साथ में दिख रहा है। वह अन्य आरोपितों के साथ लंगड़ाकर चलते हुए दिखाई दे रहा है।

ज्वैलरी शॉप में फर्जी छापेमारी के दौरान अपराधियों ने ED अधिकारी होने का फर्जी आई कार्ड भी दिखाया। इनमें से एक ने ED अधिकारी अंकित तिवारी के नाम का आईडी कार्ड दिखाया। फर्जी रेड के दौरान शातिर अपराधियों ने 25.25 लाख रुपए के गहने और नकदी ले गए। अपराधियों ने इसे जब्ती दिखाकर अपने साथ लेकर चले गए थे। उन्होंने व्यवसायी के घर की भी तलाशी ली थी।

व्यवसायी को उनकी हरकतों से संदेह हुआ और उसने स्थानीय थाने में इसकी शिकायत दी। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई। शुरुआत में पुलिस ने दो आरोपितों को पकड़ा था। हालाँकि, पूछताछ के बाद पता चला कि इसमें और लोग भी शामिल हैं। आखिरकार पुलिस इस मामले में 12 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, एक आरोपित विपिन शर्मा अभी भी फरार है।

पुलिस ने इस गिरोह के पास से तीन कारें जब्त की हैं। इसके साथ ही इनके पास से 22.27 लाख रुपए की कीमत के सोने के गहने भी बरामद किए हैं। गिरफ्तार लोगों में अब्दुल सत्तार मंजोथी, भरत मोरवाडिया, देवायत खाचर, हितेश ठक्कर, विनोद चूडासमा, यूजीन डेविड, आशीष मिश्रा, चंद्रराज नायर, अजय दुबे, अमित मेहता, उनकी पत्नी निशा मेहता और शैलेंद्र देसाई शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि गिरोह में अहमदाबाद, गाँधीधाम और भुज के लोग शामिल हैं और वे प्रमुख व्यवसायियों को निशाना बना रहे थे। अहमदाबाद और भुज में व्यवसायियों को लूटने के बाद इस गिरोह ने गाँधीधाम में खुदरा विक्रेताओं को ठगने का फैसला किया। गिरोह के सदस्य ED अधिकारी की पोशाक पहनकर आभूषण की दुकान में गए वहाँ छापे मारे। उन्होंने व्यवसायी के घर की भी तलाशी ली।

हर्ष संघवी के आरोपों पर AAP ने सफाई दी है। AAP नेता गोपाल इटालिया ने कहा, “हमारी पार्टी ने मंजोथी की गतिविधियों के बारे में जानने के बाद पहले ही उनका इस्तीफा ले लिया था, लेकिन मुझे आश्चर्य है कि गृह मंत्री को गिरफ्तारी के दस दिन बाद आरोपित व्यक्ति की राजनीतिक संबद्धता के बारे में पता चला। इससे स्पष्ट है कि एक अपराध का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडे के लिए किया जा रहा है।”

‘हमारे बच्चे अल्लाह के सेवक, उनमें जलने की भी क्षमता’ : दिल्ली के स्कूलों को 1 हफ्ते में तीसरी बार बम ब्लास्ट की धमकी, जानें ईमेल में क्या-क्या लिखा

राजधानी दिल्ली में स्कूलों को निशाना बनाकर बम धमकी देने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते सप्ताह में तीसरी बार स्कूलों को धमकी भरे ईमेल मिलने से छात्रों, अभिभावकों और स्कूल प्रशासन में तनाव और दहशत का माहौल है। शनिवार (14 दिसंबर 2024) सुबह 6:12 बजे फिर से डीपीएस आरकेपुरम, रेयान इंटरनेशनल स्कूल वसंत कुंज और अन्य स्कूलों को धमकी भरा ईमेल मिला।

पुलिस के अनुसार, शनिवार सुबह 6:12 बजे स्कूलों को एक ग्रुप मेल मिला। दिल्ली पुलिस ने कहा, “आज (शनिवार) सुबह 6:12 बजे स्कूल को बैरी अल्लाह के नाम से ‘चिल्ड्रन ऑफ अल्लाह’ ([email protected]) से एक ग्रुप मेल मिला।” बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल मिलने के बाद स्कूलों ने तुरंत दिल्ली पुलिस को इस बारे में सूचना दी। अधिकारियों ने कहा कि सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस, बम डिटेक्शन टीम और फायर डिपार्टमेंट के अधिकारी मौके पर पहुँचे, लेकिन अभी तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।

बम की धमकी वाले ईमेल में लिखा है, “अल्लाह सजा का विरोध करने के वालों के प्रयासों को देख रहा है। ऐसा करने वालों के ये प्रयास व्यर्थ है, क्योंकि कोई भी शख्स अल्लाह के न्याय से बच नहीं सकता।” ईमेल में लिखा है, “पैगंबर मुहम्मद ने अपने बच्चों को अल्लाह की पवित्र लौ में जलने की क्षमता दी है।” ईमेल में आगे कहा गया है, “शनिवार को जब छात्र वहाँ (स्कूल) में मौजूद नहीं होंगे, तब स्कूल की इमारतों को गिरा दिया जाएगा। हमारे बम जैकेट को पैगंबर मुहम्मद के ताकत मिली है। वे अपने लक्ष्य में विफल नहीं होंगे। हमारे बच्चे अल्लाह के बहादुर सेवक हैं। वे अपना काम पूरा करेंगे।”

दिल्ली पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत स्कूलों को खाली कराया और बम निरोधक दस्ते के साथ तलाशी अभियान शुरू किया। हालाँकि, किसी भी स्कूल परिसर से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। दिल्ली पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट ने जाँच में पाया कि ये ईमेल देश के बाहर से भेजे गए थे। दिल्ली पुलिस ने कहा, “आपकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” पुलिस ने आश्वासन दिया कि मामले की गहनता से जाँच जारी है।

बता दें कि पिछले सप्ताह 30,000 अमेरिकी डॉलर की फिरौती माँगते हुए भी 44 स्कूलों को इसी तरह के ईमेल भेजे गए थे। यह ईमेल रात 11:38 बजे “[email protected]” से भेजा गया था। इन घटनाओं ने सुरक्षा के मौजूदा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले ही दिल्ली सरकार और पुलिस को इस तरह की आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) बनाने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने आठ सप्ताह के भीतर एक व्यापक ऐक्शन प्लान तैयार करने को कहा है। हालाँकि दिल्ली पुलिस ने फर्जी धमकियों का पता लगाकर लोगों को आश्वस्त किया है, लेकिन यह घटनाएँ सुरक्षा की खामियों और स्कूलों में मजबूत प्रोटोकॉल की कमी को उजागर करती हैं। यह मामला न केवल सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता की परीक्षा है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी है कि बच्चों और उनके परिवारों को किसी तरह का मानसिक आघात न पहुँचे।

OpenAI पर सवाल उठाने वाले सुचीर बालाजी की सैन फ्रांसिसकों में मौत, फ्लैट में मिला शव: पुलिस ने कहा- आत्महत्या, लोगों ने उठाए सवाल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी OpenAI पर सवाल उठाने वाले सुचीर बालाजी को उनके फ्लैट में मृत पाया गया है। सैन फ्रांसिसको पुलिस को उनका शव 26 नवंबर को उनके फ्लैट में ही मिला। विदेशी रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से माना जा रहा है कि ये आत्महत्या है लेकिन कुछ लोग इस मौत मामले में गड़बड़ी होने के संकेत कर रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि उन्हें किसी गड़बड़ी के कोई संकेत नहीं मिले हैं।

जानकारी के अनुसार, मौत से पहले सुचीर बालाजी की उनके दोस्तों से भी कोई बातचीत नहीं होती थी। ऐसे में उनके करीबी उनकी सेहत को लेकर चिंतित हुए और उन्होंने पुलिस को इस संबंध में जानकारी दी। सैन फ्रांसिसको पुलिस ने अपनी जाँच की तो 26 नवंबर को दोपहर के 1 बजे फ्लैट में सुचीर का शव मिला। इसके बाद उसका मेडिकल परीक्षण करवाया गया जिसकी रिपोर्ट में सामने आया कि कोई गड़बड़ी के संकेत नहीं मिले हैं।

बता दें कि सुचीर बालाजी ने लगभग तीन महीने पहले चैटजीपीटी को बनाने वाली ओपनएआई पर खुलेआम सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि ओपनएआई ने सार्वजनिक रूप से कॉपीराइट कानून का उल्लंघन किया। इसके अलावा कथिततौर पर उनके पास ऐसी जानकारी थी जो OpenAI के खिलाफ़ मुकदमे में अहम भूमिका निभाने वाली थी।

इस वर्ष 23 अक्तूबर को सुचिर ने कहा था कि OpenAI चैटजीपीटी को ट्रेन्ड करने के लिए उनके डेटा को चुराकर व्यवसायों और उद्यमियों को नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने कहा था, “अगर आप मेरी बात पर विश्वास करते हैं, तो आपको बस कंपनी छोड़ देनी चाहिए। यह पूरे इंटरनेट पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक अच्छा मॉडल नहीं है।”

न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार के दौरान, सुचिर ने खुलासा किया था कि उन्हें शुरू में लगा था कि एआई समाज को लाभ पहुँचा सकता है, जिसमें बीमारियों को ठीक करने और बुढ़ापे को रोकने की क्षमता भी शामिल है। हालाँकि, OpenAI में शोधकर्ता के तौर पर शामिल होने के दो साल बाद यानी 2022 में एआई के बारे में उनके विचार बदलने लगे। उन्होंने चैटजीपीटी द्वारा इंटरनेट से डेटा इकट्ठा करने के अपने काम के बारे में चिंता व्यक्त की, जिसमें प्रोग्राम को प्रशिक्षित करने के लिए लगभग पूरे इंटरनेट से टेक्स्ट का विश्लेषण किया जा रहा था।

बंगाल में बनेगा अयोध्या जैसा भव्य राम मंदिर, 22 जनवरी से ही होगी शुरुआत: ₹10 करोड़ का शुरुआती फंड तैयार, भाजपा ने की घोषणा

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुर्शिदाबाद जिले के बरहामपुर में भाजपा ने 10 करोड़ रुपये की लागत से भव्य राम मंदिर बनाने की घोषणा की है। भाजपा ने ऐलान किया है कि यह मंदिर अयोध्या के राम मंदिर के उद्घाटन की पहली वर्षगाँठ पर 22 जनवरी 2025 को शिलान्यास के साथ बनना शुरू होगा।

भाजपा के बरहामपुर संगठनात्मक जिला अध्यक्ष शाखाराव सरकार ने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए जमीन पहले ही चिन्हित कर ली गई है। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से भाजपा की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाएगा और क्षेत्र में हिंदू समुदाय की भावनाओं का सम्मान करेगा।

भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर बनाने का फैसला तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के विधायक हुमायूँ कबीर के बाबरी मस्जिद निर्माण की घोषणा से जुड़ा नहीं है। उन्होंने कहा, “राम मंदिर हिंदुओं की आस्था और हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। मस्जिद बनाए जाने की बात से इसे जोड़ना गलत होगा। लेकिन हुमायूं कबीर जैसे नेता पहले भी हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान दे चुके हैं।”

भाजपा नेता शंकर घोष ने कहा, “राम मंदिर हमारी संस्कृति की पहचान है। यह एक सकारात्मक संदेश देगा। हमें अपने धर्म और आस्था पर गर्व होना चाहिए। यह किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज के संतुलन और विकास का कदम है।” मुर्शिदाबाद में भाजपा इस कदम को हिंदू समुदाय के समर्थन को मजबूत करने के रूप में देख रही है। भाजपा का कहना है कि राम मंदिर का निर्माण समाज में सकारात्मकता और सांस्कृतिक गर्व लाने का प्रयास है।

राम मंदिर निर्माण की घोषणा से पश्चिम बंगाल में भाजपा ने एक बड़ा संदेश दिया है। यह फैसला भाजपा के सांस्कृतिक एजेंडे का विस्तार करता है और चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

बता दें कि कुछ समय पहले टीएमसी के विधायक हुमायूँ कबीर ने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान किया था। हालाँकि टीएमसी ने इस विचार को हुमायूँ का निजी विचार बताया था।

पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ मुँह खोलना एकदम मना… 150 पत्रकारों और व्लॉगर्स पर PECA का केस: PTI समर्थक खास निशाने पर, फेक न्यूज की आड़ में कार्रवाई

पाकिस्तान में राजनीतिक विरोधियों और स्वतंत्र पत्रकारिता पर सरकार के हमले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी (FIA) ने हाल ही में 150 से अधिक पत्रकारों, व्लॉगर्स और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें निशाना बनाया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने 26 नवंबर को इस्लामाबाद में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) समर्थकों पर हुई कार्रवाई के खिलाफ कथित तौर पर ‘झूठा नैरेटिव’ फैलाकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, FIA ने अब तक 20 से अधिक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स को गिरफ्तार किया है। इनमें सिख पत्रकार हरमीत सिंह, अहमद नूरानी और कई अन्य पत्रकार शामिल हैं, जिन्हें सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम (Peca) में झूठे आरोपों के तहत फंसाया है। यह कार्रवाई सिर्फ उन आवाज़ों को दबाने का प्रयास है, जो सरकार की नीतियों के खिलाफ बोल रही हैं।

बता दें कि 26 नवंबर को PTI समर्थकों ने अपने नेता और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई के लिए इस्लामाबाद के D-चौक पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और बल प्रयोग किया। PTI ने दावा किया कि इस कार्रवाई में उनके 12 समर्थकों की मौत हुई। हालाँकि, सरकार ने इस दावे को झूठा बताया और उल्टा प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने प्रदर्शन के दौरान हुई मौतों और ‘फेक न्यूज’ फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाई। इसके बाद FIA ने पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए। यह स्पष्ट है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को निशाना बना रही है।

अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले हरमीत सिंह जैसे पत्रकारों और अन्य व्लॉगर्स पर आरोप लगाकर सरकार ने दिखा दिया है कि वह किसी भी विरोध को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। FIA ने इन्हें इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम (Peca) की विभिन्न धाराओं के तहत फंसाया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने सोशल मीडिया पर झूठी कहानियां फैलाकर सुरक्षा एजेंसियों को बदनाम किया।

सरकार का दावा है कि यह कार्रवाई ‘फेक न्यूज’ फैलाने वालों के खिलाफ है। लेकिन यह सवाल उठता है कि जिन प्रदर्शनकारियों की मौतें हुईं, उनकी जाँच क्यों नहीं हो रही? PTI ने सीधे-सीधे आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी को इन मौतों का जिम्मेदार ठहराया है। सरकार ने इन आरोपों को नकारते हुए जवाब देने के बजाय उल्टा आलोचकों को चुप कराने की मुहिम शुरू कर दी है।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एमनेस्टी ने कहा, “पाकिस्तान में प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के खिलाफ घातक दमन सरकार की असहिष्णुता को दर्शाता है। हमें इस कार्रवाई की निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच चाहिए।”

पाकिस्तानी सरकार का यह रवैया लोकतंत्र के लिए खतरा है। राजनीतिक विरोधियों और स्वतंत्र मीडिया को कुचलने की कोशिश से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अपनी असफलताओं से ध्यान भटकाना चाहती है। पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स को गिरफ्तार करना न सिर्फ स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि यह दिखाता है कि सरकार अपनी साख बचाने के लिए कितनी हद तक जा सकती है।

‘लाल किला हमारा, इसका मालिकाना हक हमें दो’: बहादुर शाह जफर-II की वंशज सुल्ताना बेगम डिमांड लेकर पहुँचीं दिल्ली हाई कोर्ट, अदालत ने याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (13 दिसंबर 2024) को मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर-II की वंशज सुल्ताना बेगम द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। सुल्ताना बेगम ने लाल किले पर मालिकाना हक और 1857 से अब तक मुआवजे की माँग की थी। वह बहादुर शाह जफर-II के परपोते की विधवा हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुल्ताना बेगम ने 2021 के हाईकोर्ट के एकल बेंच के फैसले के खिलाफ यह याचिका दायर की थी, जिसमें उनकी याचिका देरी के आधार पर खारिज कर दी गई थी। अब कार्यवाहक चीफ जस्टिस विभू बखरू और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने भी इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि 2021 के फैसले के खिलाफ अपील में ढाई साल की देरी हुई है।

सुल्ताना बेगम ने दावा किया था कि 1857 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने जबरन लाल किले का कब्जा छीन लिया था। उनका कहना था कि यह किला उनके पूर्वज बहादुर शाह जफर-II से उन्हें विरासत में मिला है। बेगम ने वकील विवेक मोरे के माध्यम से दायर याचिका में यह भी तर्क दिया कि भारत सरकार लाल किले पर अवैध कब्जा किए हुए है। उन्होंने केंद्र सरकार से माँग की थी कि या तो लाल किला उन्हें लौटाया जाए या 1857 से अब तक का मुआवजा दिया जाए।

बता दें कि लाल कोट यानी लाल किला का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने किया था। शाहजहाँ ने आगरा से दिल्ली राजधानी स्थानांतरित करने के बाद इसे बनवाया। पहले यह लाल और सफेद संगमरमर का भव्य महल था। 1747 में नादिर शाह के आक्रमण के दौरान लाल किले की कला और बहुमूल्य गहने लूट लिए गए, जिनमें प्रसिद्ध मयूर सिंहासन भी शामिल था। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद ब्रिटिशों ने किले का लगभग 80% हिस्सा नष्ट कर दिया, संगमरमर की संरचनाएँ हटा दीं और सेना के लिए पत्थर की बैरकें बना लीं।

आजादी के बाद लाल किले का इस्तेमाल भी सैन्य बेस के रूप में किया गया। 2003 में वाजपेयी सरकार ने इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंप दिया, जो अब इसके संरक्षण और देखरेख का कार्य करता है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सुल्ताना बेगम की याचिका पर कोई कानूनी राहत मिलने की संभावना नहीं है।

2 शादीशुदा महिलाओं ने की आत्महत्या, एक ने लगाया रेप का आरोप: तीनों पति कोर्ट से बाइज्जत बरी, वैवाहिक रिश्तों में समझिए कानूनी उलझन

बेंगलुरु के अतुल सुभाष की आत्महत्या का मामला इन दिनों ताजा है इसलिए शायद लोग वैवाहिक जीवन में उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर बात कर रहे हैं। कुछ दिन बाद ये घटना पुरानी हो जाएगी और दोबारा से मुद्दा सबको व्यर्थ का लगने लगेगा। ठीक वैसे, जैसे अब तक होता आया है। हकीकत में फिर वैवाहिक जीवन में पैदा होने वाली जटिलताओं और उन्हें लेकर होने वाले कानूनी फैसलों पर कोई विचार नहीं होगा, किसी का ध्यान ऐसे केसों पर नहीं जाएगा, कोई इन्हें गंभीरता से नहीं लेगा…।

उदाहरण एकदम ताजा हैं, अतुल सुभाष के सुसाइड मामले के बाद तीन खबरें मीडिया में और आई हैं। दो में महिलाओं के परिजनों ने बताया कि उन्होंने तंग आकर सुसाइड कर ली और तीसरी ने एक ने रेप का केस दर्ज कराया। तीनों केसों में आरोपितों को बाइज्जत रिहाई मिल चुकी है। एक मामले में तो कोर्ट ने ये भी कहा है कि जितनी प्रताड़ना का उल्लेख किया गया है सुसाइड के उकसावे के लिए काफी नहीं लगती।

प्रताड़ना, सुसाइड के लिए उकसाने के लिए काफी नहीं

  • पहला मामले में फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एक महिला ने शादी के 12 साल बाद आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद उसके पिता ने पति और सास-ससुर पर प्रताड़ना देने के आरोप लगाए थे। बाद में इसी मामले में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए अपनी टिप्पणी की।

    उन्होंने कहा आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला तब होता जब यह साबित होता कि आरोपित की गतिविधियाँ इतनी गंभीर थीं कि पीड़ित को अपनी जान लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। न्यायालय ने ये भी कहा कि उत्पीड़न की घटनाएँ आत्महत्या मामले से बहुत पहले हुई थीं और उन घटनाओं से ऐसा कुछ नहीं पता चलता कि लगे कि पति ने जानबूझकर पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया था

सबूत नहीं, केस खारिज

  • इसी तरह एक अन्य मामला फिर कोलकाता हाईकोर्ट का है। हाल में वहाँ जस्टिस अजॉय कुमार मुखर्जी ने एक केस पर सुनवाई करते हुए एक शख्स के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि उसने अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया।

    कोर्ट ने याचिका खारिज करने के दौरान ये कहा कि चूँकि प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से पता नहीं चल रहा कि सुसाइड के लिए महिला को पति ने उकसाया इसलिए ये केस खारिज किया जाता है। इस मामले में शिकायत लड़की के परिजनों ने साफ कहा था कि उनकी बेटी को उत्पीड़ित किया गया और दहेज के नाम पर इतना प्रताड़ित किया गया कि उसने आत्महत्या कर ली। हालाँकि जाँच के बाद कोर्ट को यही फैसला ठीक लगा कि वो आरोपित के खिलाफ दायर केस को रद्द कर दें तो उन्होंने ऐसा किया

रेप का आरोप या प्रतिशोध की भावना

  • तीसरा मामला मध्यप्रदेश से जुड़ा है। एक महिला ने अपने पति और उसके परिजनों के खिलाफ बलात्कार और दहेज के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई। लेकिन जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की अदालत ने इस केस को ये कहकर खारिज कर दिया कि ये मामले प्रतिशोध की भावना से किया गया लगता है।

    महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि उसे दहेज लाने के लिए परेशान किया गया। इसके अलावा उसके साथ अप्राकृतिक संभोग किया गया, उसके देवर ने उसके साथ संबंध बनाए, उसके संग दुर्व्यवहार और मारपीट भी हुई। इसके अतिरिक्त पति ने उसकी निजी वीडियो बनाईं, उसे धमकियाँ दी गईं।
    मामला गंभीर था इसलिए पुलिस ने इस केस में एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन पति कोर्ट गया, दलील दी गई, अपने सुशिक्षित होने की बात बताई और न्यायालय ने सोच विचार करके उसकी याचिका को खारिज कर दिया।

इन तीनों ही मामलों में न्यायिक जाँच में क्या सामने आया, क्या नहीं, ये जाँच अधिकारी बेहतर बताएँगे और कोर्ट ने अपने निर्णय किन सबूतों को देखकर दिए ये कोर्ट बता पाएगा… लेकिन इन दोनों चरणों तक पहुँचने से पहले क्या सामाजिक और मानवता के स्तर पर ये सवाल नहीं खड़े होते कि ऐसे मामले में जहाँ पति-पत्नी में से कोई भी अपने साथी से त्रस्त होकर आत्महत्या को गले लगा रहा है तो गलती कहाँ है। ऐसा भी तो संभव है कि आत्महत्या से ठीक पहले शायद वो घटनाएँ न घटी हों कि किसी ने इतना बड़ा कदम उठाया बल्कि ये कदम उन छोटी-छोटी घटनाओं का नतीजा हो जो जीवन में लंबे समय से चली आ रही हैं। हमें ये समझने की जरूरत है कि लोग आत्महत्या जैसा बड़ा कदम अपने जीवन में घटी घटनाओं का हालिया क्रम देखकर नहीं उठाते। कई बार कुछ पुरानी घटनाएँ उनकी मनोस्थिति पर ऐसा असर डालती है कि उनके लिए उस परिस्थिति से निकलना भारी होता है और कानून भी दलीलों और सबूतों के आधार पर असली पीड़ित की पहचान नहीं कर पाता।

‘विरासत के साथ विकास पर ध्यान, धार्मिक शहरों को भव्य और दिव्य स्वरूप देने का अभियान’: प्रयागराज में बोले PM मोदी

प्रयागराज में मकर संक्रांति से शुरू हो रहे विश्व प्रसिद्ध महाकुँभ मेले की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। इस बीच, पीएम मोदी प्रयागराज पहुँचे। उन्होंने तैयारियों का जायजा लिया और लोगों को संबोधित भी किया। हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ करने पहुँचे पीएम ने ये भी कहा कि हम देश के धार्मिक शहरों को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के अभियान में जुटे हैं। प्रयागराज में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने विरासत के साथ-साथ विकास पर भी ध्यान दिया है।

पीएम मोदी ने कहा, “प्रयागराज में संगम की इस पावन भूमि को मैं श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ। महाकुंभ में पधार रहे सभी साधु-संतों को भी नमन करता हूँ। महाकुंभ को सफल बनाने के लिए दिनरात परिश्रम कर रहे कर्मचारियों का, श्रमिकों और सफाईकर्मियों का मैं विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “ये एकता का ऐसा महायज्ञ होगा, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में होगी। मैं इस आयोजन की भव्य और दिव्य सफलता की आप सभी को शुभकामनाएँ देता हूँ।” उन्होंने कहा, “विश्व का इतना बड़ा आयोजन, हर रोज लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत और सेवा की तैयारी, लगातार 45 दिनों तक चलने वाला महायज्ञ, एक नया नगर बसाने के महा अभियान के माध्यम से प्रयागराज की इस धरती पर एक नया इतिहास रचा जा रहा है।”

पीएम मोदी ने मंच से कहा, “हमारा भारत पवित्र स्थलों और तीर्थों का देश है। ये गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी और नर्मदा जैसी अनगिनत पवित्र नदियों का देश है। इन नदियों के प्रवाह की जो पवित्रता है, इन अनेकानेक तीर्थों का जो महत्व है, जो महात्म्य है, उनका संगम, उनका समुच्चय, उनका योग, उनका संयोग, उनका प्रभाव, उनका प्रताप ये प्रयाग है। प्रयाग वो है, जहाँ पग-पग पर पवित्र स्थान हैं, जहाँ पग-पग पर पुण्य क्षेत्र हैं।”

पीएम मोदी ने प्रयागराज की महिमा का बखान करते हुए कहा, “ये केवल तीन पवित्र नदियों का ही संगम नहीं है। प्रयाग के बारे में कहा गया है : ‘माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई।।’ अर्थात जब सूर्य मकर में प्रवेश करते हैं, सभी दैवीय शक्तियाँ, सभी तीर्थ, सभी ऋषि, महाऋषि प्रयाग में आ जाते हैं। ये वो स्थान जिसके प्रभाव के बिना पुराण पूरे नहीं होते। प्रयागराज वो स्थान है, जिसकी प्रशंसा वेद की ऋचाओं में की गई है।”

पीएम मोदी ने कहा कि महाकुंभ हजारों वर्ष पहले से चली आ रही हमारे देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक यात्रा का पुण्य और जीवंत प्रतीक है। एक ऐसा आयोजन है जहां हर बार धर्म, ज्ञान, भक्ति और कला का दिव्य समागम होता है। उन्होंने कहा, “किसी बाहरी व्यवस्था के बजाय कुंभ, मनुष्य के अंतर्मन की चेतना का नाम है। ये चेतना स्वतः जागृत होती है। यही चेतना भारत के कोने-कोने से लोगों को संगम के तट तक खींच लाती है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “गाँवों, कस्बों, शहरों से लोग प्रयागराज की ओर निकल पड़ते हैं। सामुहिकता की ऐसी शक्ति, ऐसा समागम शायद ही कहीं ओर देखने को मिले। यहाँ आकर संत-महंत, ऋषि-मुनि, ज्ञानी-विद्वान, सामान्य मानवी सब एक हो जाते हैं, सब एक साथ त्रिवेणी में डुबकी लगाते हैं। यहां जातियों का भेद खत्म हो जाता है, सम्प्रदायों का टकराव मिट जाता है। करोड़ों लोग एक ध्येय, एक विचार से जुड़ जाते हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, “कुंभ जैसे भव्य और दिव्य आयोजन को सफल बनाने में स्वच्छता की बहुत बड़ी भूमिका है। महाकुंभ की तैयारियों के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया गया है, प्रयागराज शहर के सैनिटेशन और वेस्ट मैनेजमेंट पर फोकस किया गया है। लोगों को जागरूक करने के लिए गंगादूत, गंगा प्रहरी और गंगा मित्रों की नियुक्ति की गई है। इस बार 15 हजार से ज्यादा मेरे सफाईकर्मी भाई-बहन कुंभ की स्वच्छता को संभालने वाले हैं। मैं आज कुंभ की तैयारी में जुटे अपने सफाईकर्मी भाई-बहनों का अग्रिम आभार भी व्यक्त करता हूँ।”

इस दौरान पीएम मोदी ने प्रयागराज में लेटे हुए हनुमान जी के भी दर्शन किए। पीएम मोदी ने यहाँ महाकुंभ मेला की तैयारियों का जायजा लेने के साथ ही हनुमान कॉरिडोर और अक्षयवट कॉरिडोर के विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान पीएम मोदी ने प्रयागराज में 5,500 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात भी दी।

बेटी का जिसने किया यौन शोषण, उसको जान से मारने हवाई जहाज से आया… आंध्र प्रदेश में मर्डर करके फिर वापस लौट गया

आंध्र प्रदेश के अन्नामैय्या जिले में एक शख्स ने अपनी बेटी के यौन शोषण का बदला लेने के लिए कुवैत से आकर अपने एक रिश्तेदार की हत्या कर दी। वह हत्या करके उसी दिन वापस लौट भी गया। इसके बाद उसने यूट्यूब पर वीडियो बना कर इस हत्या की जानकारी भी दी। पुलिस ने इस मामले में अब FIR दर्ज करके उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास चालू कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अन्नामैय्या का मूल निवासी आंजनेय प्रसाद बीते 15 वर्ष से कुवैत में रहता है। यहाँ उसकी बीवी भी उसके साथ ही रहती है। उनकी एक बेटी भी है। उन्होंने कुछ दिन बेटी को अपने साथ रखा लेकिन बाद में उसकी मौसी के घर वापस अन्नामैय्या भेज दिया।

अन्नामैय्या में उसकी बेटी मौसी और मौसा के साथ रहने लगी। अपनी बेटी के लिए समय-समय पर वह कुवैत से पैसा भी भेजता था। हालाँकि, बाद में बच्ची के मौसा ने ही उसका यौन शोषण करना चालू कर दिया। बच्ची को एक बार उसने दबोच लिया लेकिन चिल्लाने की वजह से उसकी मौसी उसे बचाने आई।

इसके बाद जब अच्छी कुवैत पहुँची तो उसने अपनी कहानी अपनी माँ से बताई। बच्ची की माँ भारत में पुलिस के पास इस संबंध में शिकायत लेकर पहुँची। पुलिस ने आरोपित पर कार्रवाई करने के बजाय उसे डांट-डपट कर छोड़ दिया। इससे आंजनेय गुस्सा हो गया। उसने इसके बच्ची के मौसा खुद ही सबक सिखाने की सोची।

वह 7 दिसम्बर, 2024 को कुवैत से फ्लाईट पकड़ भारत आया और रात में घर के बाहर सो रहे बच्ची के मौसा पी आंजनेयुलू के सर पर रॉड मार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद आंजनेय उसी दिन वापस फ्लाईट पकड़ कर वापस कुवैत चला गया। उसने पूरी कहानी इसके बाद अपने यूट्यूब चैनल पर सुनाई। उसने आत्मसमर्पण करने की इच्छा भी जताई है।

वहीं पुलिस ने इस मामले में आंजनेय के दावों का खंडन किया है और कहा कि उन्हें लड़की के यौन शोषण मामले में कोई शिकायत नहीं मिली थी। उन्होंने हत्या के पीछे बड़ी साजिश की बात कही है। उन्होंने कहा हा कि जल्द ही वह इस हत्या में शामिल बाकी लोगों को भी पकड़ लेंगे।

सबरीमाला मंदिर में किसी को नहीं मिले VIP ट्रिटमेंट, हीरो दिलीप के दौरे में तीर्थयात्रियों को रोकने से उनके पूजा का अधिकार हुआ बाधित: केरल हाई कोर्ट

केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार (12 दिसंबर 2024) को कहा कि सबरीमाला मंदिर के सोपानम में तीर्थयात्रियों की बेरोक-टोक की आवाजाही के उसके निर्देश का अभिनेता दिलीप के दौरे में खुला उल्लंघन किया गया। कोर्ट ने कहा कि दिलीप के कारण अन्य तीर्थयात्रियों को 7 मिनट से अधिक समय तक भगवान का दर्शन नहीं हो पाया। इससे तीर्थयात्रियों के पूजा करने के अधिकार पर असर पड़ा।

न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस की खंडपीठ ने कहा कि तीर्थयात्रियों में कम उम्र के बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और विकलांग व्यक्ति भी शामिल थे। खंडपीठ ने इसे बेहद गंभीर मुद्दा बताते हुए सबरीमाला के मुख्य पुलिस समन्वयक को निर्देश दिया कि किसी भी तीर्थयात्री को अभिनेता के मामले की तरह लंबे समय तक सोपानम के सामने खड़े रहने की अनुमति न दी जाए, जिससे दूसरों को परेशानी हो।

खुली अदालत में जजों ने इस दौरान के सीसीटीवी फुटेज को देखते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी की, “हमने वह वीडियो देखा है। बहुत बहुत बहुत बहुत गंभीर है। तीर्थयात्रियों को लगभग रोक दिया गया है। यह दो मिनट का सवाल नहीं है… वह व्यक्ति (दिलीप) सामने है… आप देख सकते हैं कि यह गार्ड रोकने के लिए अपना हाथ रख रहा है।”

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “सोपानम के सामने पहली पंक्ति से तीर्थयात्रियों की आवाजाही को ड्यूटी पर तैनात देवस्वोम गार्ड ने रात 10:58:10 बजे दक्षिणी तरफ से रोक दिया था। सिने अभिनेता दिलीप ने रात 10:58:24 बजे दक्षिणी तरफ से सोपानम की अगली पंक्ति में प्रवेश किया और वह रात 11:05:45 बजे तक वहीं रहे।”

कोर्ट ने कहा, “तीसरे वीडियो में दिख रहा है कि उत्तरी तरफ से पहली पंक्ति से तीर्थयात्रियों की आवाजाही को दूसरे देवस्वोम गार्ड ने रात 10:51:38 बजे रोक दिया था। सिने अभिनेता के चले जाने तक पहली पंक्ति में खड़े किसी भी तीर्थयात्री को सोपानम के दक्षिणी तरफ जाने की अनुमति नहीं थी।” जस्टिस नरेन्द्रन ने कहा कि ऐसे विशेषाधिकार उन लोगों को भी नहीं दिए जाते, जिन्हें वीआईपी दर्शन की अनुमति है।

खंडपीठ ने कहा, “यहाँ तक ​​कि जिन अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत (वीआईपी दर्शन की) अनुमति दी गई है, वे भी वहाँ काफी समय तक रुके रहते हैं। इससे अन्य लोगों के दर्शन में बाधा उत्पन्न होती है।” कोर्ट ने संबंधित पुलिस और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ दोबारा नहीं होनी चाहिए।

दरअसल, दिलीप ने 5 दिसंबर को सबरीमाला मंदिर में दर्शन किया था। इस दौरान अन्य तीर्थयात्रियों को रोक दिया गया था। इसके अगले दिन खबरें आईं कि फिल्म अभिनेता को दिए गए ‘VIP’ ट्रीटमेंट से मंदिर में अन्य तीर्थयात्रियों को काफी असुविधा हुई। इसके बाद 6 दिसंबर को कोर्ट ने TDB को अभिनेता की यात्रा के सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट माँगी।

उस समय न्यायालय ने टीडीबी को यह भी चेतावनी दी थी कि वह इस बात पर विचार करेगा कि अभिनेता को वीआईपी सुविधा देने के कारण तीर्थयात्रियों की पूजा में बाधा डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए या नहीं। हालाँकि, बाद में केरल पुलिस ने कहा कि अभिनेता को किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं दी गई थी।