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OpenAI पर सवाल उठाने वाले सुचीर बालाजी की सैन फ्रांसिसकों में मौत, फ्लैट में मिला शव: पुलिस ने कहा- आत्महत्या, लोगों ने उठाए सवाल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी OpenAI पर सवाल उठाने वाले सुचीर बालाजी को उनके फ्लैट में मृत पाया गया है। सैन फ्रांसिसको पुलिस को उनका शव 26 नवंबर को उनके फ्लैट में ही मिला। विदेशी रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से माना जा रहा है कि ये आत्महत्या है लेकिन कुछ लोग इस मौत मामले में गड़बड़ी होने के संकेत कर रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि उन्हें किसी गड़बड़ी के कोई संकेत नहीं मिले हैं।

जानकारी के अनुसार, मौत से पहले सुचीर बालाजी की उनके दोस्तों से भी कोई बातचीत नहीं होती थी। ऐसे में उनके करीबी उनकी सेहत को लेकर चिंतित हुए और उन्होंने पुलिस को इस संबंध में जानकारी दी। सैन फ्रांसिसको पुलिस ने अपनी जाँच की तो 26 नवंबर को दोपहर के 1 बजे फ्लैट में सुचीर का शव मिला। इसके बाद उसका मेडिकल परीक्षण करवाया गया जिसकी रिपोर्ट में सामने आया कि कोई गड़बड़ी के संकेत नहीं मिले हैं।

बता दें कि सुचीर बालाजी ने लगभग तीन महीने पहले चैटजीपीटी को बनाने वाली ओपनएआई पर खुलेआम सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि ओपनएआई ने सार्वजनिक रूप से कॉपीराइट कानून का उल्लंघन किया। इसके अलावा कथिततौर पर उनके पास ऐसी जानकारी थी जो OpenAI के खिलाफ़ मुकदमे में अहम भूमिका निभाने वाली थी।

इस वर्ष 23 अक्तूबर को सुचिर ने कहा था कि OpenAI चैटजीपीटी को ट्रेन्ड करने के लिए उनके डेटा को चुराकर व्यवसायों और उद्यमियों को नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने कहा था, “अगर आप मेरी बात पर विश्वास करते हैं, तो आपको बस कंपनी छोड़ देनी चाहिए। यह पूरे इंटरनेट पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक अच्छा मॉडल नहीं है।”

न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार के दौरान, सुचिर ने खुलासा किया था कि उन्हें शुरू में लगा था कि एआई समाज को लाभ पहुँचा सकता है, जिसमें बीमारियों को ठीक करने और बुढ़ापे को रोकने की क्षमता भी शामिल है। हालाँकि, OpenAI में शोधकर्ता के तौर पर शामिल होने के दो साल बाद यानी 2022 में एआई के बारे में उनके विचार बदलने लगे। उन्होंने चैटजीपीटी द्वारा इंटरनेट से डेटा इकट्ठा करने के अपने काम के बारे में चिंता व्यक्त की, जिसमें प्रोग्राम को प्रशिक्षित करने के लिए लगभग पूरे इंटरनेट से टेक्स्ट का विश्लेषण किया जा रहा था।

बंगाल में बनेगा अयोध्या जैसा भव्य राम मंदिर, 22 जनवरी से ही होगी शुरुआत: ₹10 करोड़ का शुरुआती फंड तैयार, भाजपा ने की घोषणा

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुर्शिदाबाद जिले के बरहामपुर में भाजपा ने 10 करोड़ रुपये की लागत से भव्य राम मंदिर बनाने की घोषणा की है। भाजपा ने ऐलान किया है कि यह मंदिर अयोध्या के राम मंदिर के उद्घाटन की पहली वर्षगाँठ पर 22 जनवरी 2025 को शिलान्यास के साथ बनना शुरू होगा।

भाजपा के बरहामपुर संगठनात्मक जिला अध्यक्ष शाखाराव सरकार ने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए जमीन पहले ही चिन्हित कर ली गई है। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से भाजपा की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाएगा और क्षेत्र में हिंदू समुदाय की भावनाओं का सम्मान करेगा।

भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर बनाने का फैसला तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के विधायक हुमायूँ कबीर के बाबरी मस्जिद निर्माण की घोषणा से जुड़ा नहीं है। उन्होंने कहा, “राम मंदिर हिंदुओं की आस्था और हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। मस्जिद बनाए जाने की बात से इसे जोड़ना गलत होगा। लेकिन हुमायूं कबीर जैसे नेता पहले भी हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान दे चुके हैं।”

भाजपा नेता शंकर घोष ने कहा, “राम मंदिर हमारी संस्कृति की पहचान है। यह एक सकारात्मक संदेश देगा। हमें अपने धर्म और आस्था पर गर्व होना चाहिए। यह किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज के संतुलन और विकास का कदम है।” मुर्शिदाबाद में भाजपा इस कदम को हिंदू समुदाय के समर्थन को मजबूत करने के रूप में देख रही है। भाजपा का कहना है कि राम मंदिर का निर्माण समाज में सकारात्मकता और सांस्कृतिक गर्व लाने का प्रयास है।

राम मंदिर निर्माण की घोषणा से पश्चिम बंगाल में भाजपा ने एक बड़ा संदेश दिया है। यह फैसला भाजपा के सांस्कृतिक एजेंडे का विस्तार करता है और चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

बता दें कि कुछ समय पहले टीएमसी के विधायक हुमायूँ कबीर ने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान किया था। हालाँकि टीएमसी ने इस विचार को हुमायूँ का निजी विचार बताया था।

पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ मुँह खोलना एकदम मना… 150 पत्रकारों और व्लॉगर्स पर PECA का केस: PTI समर्थक खास निशाने पर, फेक न्यूज की आड़ में कार्रवाई

पाकिस्तान में राजनीतिक विरोधियों और स्वतंत्र पत्रकारिता पर सरकार के हमले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी (FIA) ने हाल ही में 150 से अधिक पत्रकारों, व्लॉगर्स और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें निशाना बनाया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने 26 नवंबर को इस्लामाबाद में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) समर्थकों पर हुई कार्रवाई के खिलाफ कथित तौर पर ‘झूठा नैरेटिव’ फैलाकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, FIA ने अब तक 20 से अधिक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स को गिरफ्तार किया है। इनमें सिख पत्रकार हरमीत सिंह, अहमद नूरानी और कई अन्य पत्रकार शामिल हैं, जिन्हें सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम (Peca) में झूठे आरोपों के तहत फंसाया है। यह कार्रवाई सिर्फ उन आवाज़ों को दबाने का प्रयास है, जो सरकार की नीतियों के खिलाफ बोल रही हैं।

बता दें कि 26 नवंबर को PTI समर्थकों ने अपने नेता और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई के लिए इस्लामाबाद के D-चौक पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और बल प्रयोग किया। PTI ने दावा किया कि इस कार्रवाई में उनके 12 समर्थकों की मौत हुई। हालाँकि, सरकार ने इस दावे को झूठा बताया और उल्टा प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने प्रदर्शन के दौरान हुई मौतों और ‘फेक न्यूज’ फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाई। इसके बाद FIA ने पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए। यह स्पष्ट है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को निशाना बना रही है।

अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले हरमीत सिंह जैसे पत्रकारों और अन्य व्लॉगर्स पर आरोप लगाकर सरकार ने दिखा दिया है कि वह किसी भी विरोध को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। FIA ने इन्हें इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम (Peca) की विभिन्न धाराओं के तहत फंसाया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने सोशल मीडिया पर झूठी कहानियां फैलाकर सुरक्षा एजेंसियों को बदनाम किया।

सरकार का दावा है कि यह कार्रवाई ‘फेक न्यूज’ फैलाने वालों के खिलाफ है। लेकिन यह सवाल उठता है कि जिन प्रदर्शनकारियों की मौतें हुईं, उनकी जाँच क्यों नहीं हो रही? PTI ने सीधे-सीधे आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी को इन मौतों का जिम्मेदार ठहराया है। सरकार ने इन आरोपों को नकारते हुए जवाब देने के बजाय उल्टा आलोचकों को चुप कराने की मुहिम शुरू कर दी है।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एमनेस्टी ने कहा, “पाकिस्तान में प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के खिलाफ घातक दमन सरकार की असहिष्णुता को दर्शाता है। हमें इस कार्रवाई की निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच चाहिए।”

पाकिस्तानी सरकार का यह रवैया लोकतंत्र के लिए खतरा है। राजनीतिक विरोधियों और स्वतंत्र मीडिया को कुचलने की कोशिश से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अपनी असफलताओं से ध्यान भटकाना चाहती है। पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स को गिरफ्तार करना न सिर्फ स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि यह दिखाता है कि सरकार अपनी साख बचाने के लिए कितनी हद तक जा सकती है।

‘लाल किला हमारा, इसका मालिकाना हक हमें दो’: बहादुर शाह जफर-II की वंशज सुल्ताना बेगम डिमांड लेकर पहुँचीं दिल्ली हाई कोर्ट, अदालत ने याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (13 दिसंबर 2024) को मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर-II की वंशज सुल्ताना बेगम द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। सुल्ताना बेगम ने लाल किले पर मालिकाना हक और 1857 से अब तक मुआवजे की माँग की थी। वह बहादुर शाह जफर-II के परपोते की विधवा हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुल्ताना बेगम ने 2021 के हाईकोर्ट के एकल बेंच के फैसले के खिलाफ यह याचिका दायर की थी, जिसमें उनकी याचिका देरी के आधार पर खारिज कर दी गई थी। अब कार्यवाहक चीफ जस्टिस विभू बखरू और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने भी इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि 2021 के फैसले के खिलाफ अपील में ढाई साल की देरी हुई है।

सुल्ताना बेगम ने दावा किया था कि 1857 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने जबरन लाल किले का कब्जा छीन लिया था। उनका कहना था कि यह किला उनके पूर्वज बहादुर शाह जफर-II से उन्हें विरासत में मिला है। बेगम ने वकील विवेक मोरे के माध्यम से दायर याचिका में यह भी तर्क दिया कि भारत सरकार लाल किले पर अवैध कब्जा किए हुए है। उन्होंने केंद्र सरकार से माँग की थी कि या तो लाल किला उन्हें लौटाया जाए या 1857 से अब तक का मुआवजा दिया जाए।

बता दें कि लाल कोट यानी लाल किला का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने किया था। शाहजहाँ ने आगरा से दिल्ली राजधानी स्थानांतरित करने के बाद इसे बनवाया। पहले यह लाल और सफेद संगमरमर का भव्य महल था। 1747 में नादिर शाह के आक्रमण के दौरान लाल किले की कला और बहुमूल्य गहने लूट लिए गए, जिनमें प्रसिद्ध मयूर सिंहासन भी शामिल था। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद ब्रिटिशों ने किले का लगभग 80% हिस्सा नष्ट कर दिया, संगमरमर की संरचनाएँ हटा दीं और सेना के लिए पत्थर की बैरकें बना लीं।

आजादी के बाद लाल किले का इस्तेमाल भी सैन्य बेस के रूप में किया गया। 2003 में वाजपेयी सरकार ने इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंप दिया, जो अब इसके संरक्षण और देखरेख का कार्य करता है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सुल्ताना बेगम की याचिका पर कोई कानूनी राहत मिलने की संभावना नहीं है।

2 शादीशुदा महिलाओं ने की आत्महत्या, एक ने लगाया रेप का आरोप: तीनों पति कोर्ट से बाइज्जत बरी, वैवाहिक रिश्तों में समझिए कानूनी उलझन

बेंगलुरु के अतुल सुभाष की आत्महत्या का मामला इन दिनों ताजा है इसलिए शायद लोग वैवाहिक जीवन में उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर बात कर रहे हैं। कुछ दिन बाद ये घटना पुरानी हो जाएगी और दोबारा से मुद्दा सबको व्यर्थ का लगने लगेगा। ठीक वैसे, जैसे अब तक होता आया है। हकीकत में फिर वैवाहिक जीवन में पैदा होने वाली जटिलताओं और उन्हें लेकर होने वाले कानूनी फैसलों पर कोई विचार नहीं होगा, किसी का ध्यान ऐसे केसों पर नहीं जाएगा, कोई इन्हें गंभीरता से नहीं लेगा…।

उदाहरण एकदम ताजा हैं, अतुल सुभाष के सुसाइड मामले के बाद तीन खबरें मीडिया में और आई हैं। दो में महिलाओं के परिजनों ने बताया कि उन्होंने तंग आकर सुसाइड कर ली और तीसरी ने एक ने रेप का केस दर्ज कराया। तीनों केसों में आरोपितों को बाइज्जत रिहाई मिल चुकी है। एक मामले में तो कोर्ट ने ये भी कहा है कि जितनी प्रताड़ना का उल्लेख किया गया है सुसाइड के उकसावे के लिए काफी नहीं लगती।

प्रताड़ना, सुसाइड के लिए उकसाने के लिए काफी नहीं

  • पहला मामले में फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एक महिला ने शादी के 12 साल बाद आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद उसके पिता ने पति और सास-ससुर पर प्रताड़ना देने के आरोप लगाए थे। बाद में इसी मामले में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए अपनी टिप्पणी की।

    उन्होंने कहा आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला तब होता जब यह साबित होता कि आरोपित की गतिविधियाँ इतनी गंभीर थीं कि पीड़ित को अपनी जान लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। न्यायालय ने ये भी कहा कि उत्पीड़न की घटनाएँ आत्महत्या मामले से बहुत पहले हुई थीं और उन घटनाओं से ऐसा कुछ नहीं पता चलता कि लगे कि पति ने जानबूझकर पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया था
    ।

सबूत नहीं, केस खारिज

  • इसी तरह एक अन्य मामला फिर कोलकाता हाईकोर्ट का है। हाल में वहाँ जस्टिस अजॉय कुमार मुखर्जी ने एक केस पर सुनवाई करते हुए एक शख्स के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि उसने अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया।

    कोर्ट ने याचिका खारिज करने के दौरान ये कहा कि चूँकि प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से पता नहीं चल रहा कि सुसाइड के लिए महिला को पति ने उकसाया इसलिए ये केस खारिज किया जाता है। इस मामले में शिकायत लड़की के परिजनों ने साफ कहा था कि उनकी बेटी को उत्पीड़ित किया गया और दहेज के नाम पर इतना प्रताड़ित किया गया कि उसने आत्महत्या कर ली। हालाँकि जाँच के बाद कोर्ट को यही फैसला ठीक लगा कि वो आरोपित के खिलाफ दायर केस को रद्द कर दें तो उन्होंने ऐसा किया
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रेप का आरोप या प्रतिशोध की भावना

  • तीसरा मामला मध्यप्रदेश से जुड़ा है। एक महिला ने अपने पति और उसके परिजनों के खिलाफ बलात्कार और दहेज के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई। लेकिन जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की अदालत ने इस केस को ये कहकर खारिज कर दिया कि ये मामले प्रतिशोध की भावना से किया गया लगता है।

    महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि उसे दहेज लाने के लिए परेशान किया गया। इसके अलावा उसके साथ अप्राकृतिक संभोग किया गया, उसके देवर ने उसके साथ संबंध बनाए, उसके संग दुर्व्यवहार और मारपीट भी हुई। इसके अतिरिक्त पति ने उसकी निजी वीडियो बनाईं, उसे धमकियाँ दी गईं।
    मामला गंभीर था इसलिए पुलिस ने इस केस में एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन पति कोर्ट गया, दलील दी गई, अपने सुशिक्षित होने की बात बताई और न्यायालय ने सोच विचार करके उसकी याचिका को खारिज कर दिया।

इन तीनों ही मामलों में न्यायिक जाँच में क्या सामने आया, क्या नहीं, ये जाँच अधिकारी बेहतर बताएँगे और कोर्ट ने अपने निर्णय किन सबूतों को देखकर दिए ये कोर्ट बता पाएगा… लेकिन इन दोनों चरणों तक पहुँचने से पहले क्या सामाजिक और मानवता के स्तर पर ये सवाल नहीं खड़े होते कि ऐसे मामले में जहाँ पति-पत्नी में से कोई भी अपने साथी से त्रस्त होकर आत्महत्या को गले लगा रहा है तो गलती कहाँ है। ऐसा भी तो संभव है कि आत्महत्या से ठीक पहले शायद वो घटनाएँ न घटी हों कि किसी ने इतना बड़ा कदम उठाया बल्कि ये कदम उन छोटी-छोटी घटनाओं का नतीजा हो जो जीवन में लंबे समय से चली आ रही हैं। हमें ये समझने की जरूरत है कि लोग आत्महत्या जैसा बड़ा कदम अपने जीवन में घटी घटनाओं का हालिया क्रम देखकर नहीं उठाते। कई बार कुछ पुरानी घटनाएँ उनकी मनोस्थिति पर ऐसा असर डालती है कि उनके लिए उस परिस्थिति से निकलना भारी होता है और कानून भी दलीलों और सबूतों के आधार पर असली पीड़ित की पहचान नहीं कर पाता।

‘विरासत के साथ विकास पर ध्यान, धार्मिक शहरों को भव्य और दिव्य स्वरूप देने का अभियान’: प्रयागराज में बोले PM मोदी

प्रयागराज में मकर संक्रांति से शुरू हो रहे विश्व प्रसिद्ध महाकुँभ मेले की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। इस बीच, पीएम मोदी प्रयागराज पहुँचे। उन्होंने तैयारियों का जायजा लिया और लोगों को संबोधित भी किया। हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ करने पहुँचे पीएम ने ये भी कहा कि हम देश के धार्मिक शहरों को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के अभियान में जुटे हैं। प्रयागराज में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने विरासत के साथ-साथ विकास पर भी ध्यान दिया है।

पीएम मोदी ने कहा, “प्रयागराज में संगम की इस पावन भूमि को मैं श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ। महाकुंभ में पधार रहे सभी साधु-संतों को भी नमन करता हूँ। महाकुंभ को सफल बनाने के लिए दिनरात परिश्रम कर रहे कर्मचारियों का, श्रमिकों और सफाईकर्मियों का मैं विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “ये एकता का ऐसा महायज्ञ होगा, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में होगी। मैं इस आयोजन की भव्य और दिव्य सफलता की आप सभी को शुभकामनाएँ देता हूँ।” उन्होंने कहा, “विश्व का इतना बड़ा आयोजन, हर रोज लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत और सेवा की तैयारी, लगातार 45 दिनों तक चलने वाला महायज्ञ, एक नया नगर बसाने के महा अभियान के माध्यम से प्रयागराज की इस धरती पर एक नया इतिहास रचा जा रहा है।”

पीएम मोदी ने मंच से कहा, “हमारा भारत पवित्र स्थलों और तीर्थों का देश है। ये गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी और नर्मदा जैसी अनगिनत पवित्र नदियों का देश है। इन नदियों के प्रवाह की जो पवित्रता है, इन अनेकानेक तीर्थों का जो महत्व है, जो महात्म्य है, उनका संगम, उनका समुच्चय, उनका योग, उनका संयोग, उनका प्रभाव, उनका प्रताप ये प्रयाग है। प्रयाग वो है, जहाँ पग-पग पर पवित्र स्थान हैं, जहाँ पग-पग पर पुण्य क्षेत्र हैं।”

पीएम मोदी ने प्रयागराज की महिमा का बखान करते हुए कहा, “ये केवल तीन पवित्र नदियों का ही संगम नहीं है। प्रयाग के बारे में कहा गया है : ‘माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई।।’ अर्थात जब सूर्य मकर में प्रवेश करते हैं, सभी दैवीय शक्तियाँ, सभी तीर्थ, सभी ऋषि, महाऋषि प्रयाग में आ जाते हैं। ये वो स्थान जिसके प्रभाव के बिना पुराण पूरे नहीं होते। प्रयागराज वो स्थान है, जिसकी प्रशंसा वेद की ऋचाओं में की गई है।”

पीएम मोदी ने कहा कि महाकुंभ हजारों वर्ष पहले से चली आ रही हमारे देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक यात्रा का पुण्य और जीवंत प्रतीक है। एक ऐसा आयोजन है जहां हर बार धर्म, ज्ञान, भक्ति और कला का दिव्य समागम होता है। उन्होंने कहा, “किसी बाहरी व्यवस्था के बजाय कुंभ, मनुष्य के अंतर्मन की चेतना का नाम है। ये चेतना स्वतः जागृत होती है। यही चेतना भारत के कोने-कोने से लोगों को संगम के तट तक खींच लाती है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “गाँवों, कस्बों, शहरों से लोग प्रयागराज की ओर निकल पड़ते हैं। सामुहिकता की ऐसी शक्ति, ऐसा समागम शायद ही कहीं ओर देखने को मिले। यहाँ आकर संत-महंत, ऋषि-मुनि, ज्ञानी-विद्वान, सामान्य मानवी सब एक हो जाते हैं, सब एक साथ त्रिवेणी में डुबकी लगाते हैं। यहां जातियों का भेद खत्म हो जाता है, सम्प्रदायों का टकराव मिट जाता है। करोड़ों लोग एक ध्येय, एक विचार से जुड़ जाते हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, “कुंभ जैसे भव्य और दिव्य आयोजन को सफल बनाने में स्वच्छता की बहुत बड़ी भूमिका है। महाकुंभ की तैयारियों के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया गया है, प्रयागराज शहर के सैनिटेशन और वेस्ट मैनेजमेंट पर फोकस किया गया है। लोगों को जागरूक करने के लिए गंगादूत, गंगा प्रहरी और गंगा मित्रों की नियुक्ति की गई है। इस बार 15 हजार से ज्यादा मेरे सफाईकर्मी भाई-बहन कुंभ की स्वच्छता को संभालने वाले हैं। मैं आज कुंभ की तैयारी में जुटे अपने सफाईकर्मी भाई-बहनों का अग्रिम आभार भी व्यक्त करता हूँ।”

इस दौरान पीएम मोदी ने प्रयागराज में लेटे हुए हनुमान जी के भी दर्शन किए। पीएम मोदी ने यहाँ महाकुंभ मेला की तैयारियों का जायजा लेने के साथ ही हनुमान कॉरिडोर और अक्षयवट कॉरिडोर के विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान पीएम मोदी ने प्रयागराज में 5,500 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात भी दी।

बेटी का जिसने किया यौन शोषण, उसको जान से मारने हवाई जहाज से आया… आंध्र प्रदेश में मर्डर करके फिर वापस लौट गया

आंध्र प्रदेश के अन्नामैय्या जिले में एक शख्स ने अपनी बेटी के यौन शोषण का बदला लेने के लिए कुवैत से आकर अपने एक रिश्तेदार की हत्या कर दी। वह हत्या करके उसी दिन वापस लौट भी गया। इसके बाद उसने यूट्यूब पर वीडियो बना कर इस हत्या की जानकारी भी दी। पुलिस ने इस मामले में अब FIR दर्ज करके उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास चालू कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अन्नामैय्या का मूल निवासी आंजनेय प्रसाद बीते 15 वर्ष से कुवैत में रहता है। यहाँ उसकी बीवी भी उसके साथ ही रहती है। उनकी एक बेटी भी है। उन्होंने कुछ दिन बेटी को अपने साथ रखा लेकिन बाद में उसकी मौसी के घर वापस अन्नामैय्या भेज दिया।

अन्नामैय्या में उसकी बेटी मौसी और मौसा के साथ रहने लगी। अपनी बेटी के लिए समय-समय पर वह कुवैत से पैसा भी भेजता था। हालाँकि, बाद में बच्ची के मौसा ने ही उसका यौन शोषण करना चालू कर दिया। बच्ची को एक बार उसने दबोच लिया लेकिन चिल्लाने की वजह से उसकी मौसी उसे बचाने आई।

इसके बाद जब अच्छी कुवैत पहुँची तो उसने अपनी कहानी अपनी माँ से बताई। बच्ची की माँ भारत में पुलिस के पास इस संबंध में शिकायत लेकर पहुँची। पुलिस ने आरोपित पर कार्रवाई करने के बजाय उसे डांट-डपट कर छोड़ दिया। इससे आंजनेय गुस्सा हो गया। उसने इसके बच्ची के मौसा खुद ही सबक सिखाने की सोची।

वह 7 दिसम्बर, 2024 को कुवैत से फ्लाईट पकड़ भारत आया और रात में घर के बाहर सो रहे बच्ची के मौसा पी आंजनेयुलू के सर पर रॉड मार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद आंजनेय उसी दिन वापस फ्लाईट पकड़ कर वापस कुवैत चला गया। उसने पूरी कहानी इसके बाद अपने यूट्यूब चैनल पर सुनाई। उसने आत्मसमर्पण करने की इच्छा भी जताई है।

वहीं पुलिस ने इस मामले में आंजनेय के दावों का खंडन किया है और कहा कि उन्हें लड़की के यौन शोषण मामले में कोई शिकायत नहीं मिली थी। उन्होंने हत्या के पीछे बड़ी साजिश की बात कही है। उन्होंने कहा हा कि जल्द ही वह इस हत्या में शामिल बाकी लोगों को भी पकड़ लेंगे।

सबरीमाला मंदिर में किसी को नहीं मिले VIP ट्रिटमेंट, हीरो दिलीप के दौरे में तीर्थयात्रियों को रोकने से उनके पूजा का अधिकार हुआ बाधित: केरल हाई कोर्ट

केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार (12 दिसंबर 2024) को कहा कि सबरीमाला मंदिर के सोपानम में तीर्थयात्रियों की बेरोक-टोक की आवाजाही के उसके निर्देश का अभिनेता दिलीप के दौरे में खुला उल्लंघन किया गया। कोर्ट ने कहा कि दिलीप के कारण अन्य तीर्थयात्रियों को 7 मिनट से अधिक समय तक भगवान का दर्शन नहीं हो पाया। इससे तीर्थयात्रियों के पूजा करने के अधिकार पर असर पड़ा।

न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस की खंडपीठ ने कहा कि तीर्थयात्रियों में कम उम्र के बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और विकलांग व्यक्ति भी शामिल थे। खंडपीठ ने इसे बेहद गंभीर मुद्दा बताते हुए सबरीमाला के मुख्य पुलिस समन्वयक को निर्देश दिया कि किसी भी तीर्थयात्री को अभिनेता के मामले की तरह लंबे समय तक सोपानम के सामने खड़े रहने की अनुमति न दी जाए, जिससे दूसरों को परेशानी हो।

खुली अदालत में जजों ने इस दौरान के सीसीटीवी फुटेज को देखते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी की, “हमने वह वीडियो देखा है। बहुत बहुत बहुत बहुत गंभीर है। तीर्थयात्रियों को लगभग रोक दिया गया है। यह दो मिनट का सवाल नहीं है… वह व्यक्ति (दिलीप) सामने है… आप देख सकते हैं कि यह गार्ड रोकने के लिए अपना हाथ रख रहा है।”

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “सोपानम के सामने पहली पंक्ति से तीर्थयात्रियों की आवाजाही को ड्यूटी पर तैनात देवस्वोम गार्ड ने रात 10:58:10 बजे दक्षिणी तरफ से रोक दिया था। सिने अभिनेता दिलीप ने रात 10:58:24 बजे दक्षिणी तरफ से सोपानम की अगली पंक्ति में प्रवेश किया और वह रात 11:05:45 बजे तक वहीं रहे।”

कोर्ट ने कहा, “तीसरे वीडियो में दिख रहा है कि उत्तरी तरफ से पहली पंक्ति से तीर्थयात्रियों की आवाजाही को दूसरे देवस्वोम गार्ड ने रात 10:51:38 बजे रोक दिया था। सिने अभिनेता के चले जाने तक पहली पंक्ति में खड़े किसी भी तीर्थयात्री को सोपानम के दक्षिणी तरफ जाने की अनुमति नहीं थी।” जस्टिस नरेन्द्रन ने कहा कि ऐसे विशेषाधिकार उन लोगों को भी नहीं दिए जाते, जिन्हें वीआईपी दर्शन की अनुमति है।

खंडपीठ ने कहा, “यहाँ तक ​​कि जिन अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत (वीआईपी दर्शन की) अनुमति दी गई है, वे भी वहाँ काफी समय तक रुके रहते हैं। इससे अन्य लोगों के दर्शन में बाधा उत्पन्न होती है।” कोर्ट ने संबंधित पुलिस और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ दोबारा नहीं होनी चाहिए।

दरअसल, दिलीप ने 5 दिसंबर को सबरीमाला मंदिर में दर्शन किया था। इस दौरान अन्य तीर्थयात्रियों को रोक दिया गया था। इसके अगले दिन खबरें आईं कि फिल्म अभिनेता को दिए गए ‘VIP’ ट्रीटमेंट से मंदिर में अन्य तीर्थयात्रियों को काफी असुविधा हुई। इसके बाद 6 दिसंबर को कोर्ट ने TDB को अभिनेता की यात्रा के सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट माँगी।

उस समय न्यायालय ने टीडीबी को यह भी चेतावनी दी थी कि वह इस बात पर विचार करेगा कि अभिनेता को वीआईपी सुविधा देने के कारण तीर्थयात्रियों की पूजा में बाधा डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए या नहीं। हालाँकि, बाद में केरल पुलिस ने कहा कि अभिनेता को किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं दी गई थी।

स्कूल में छात्र बोला ‘राधे-राधे’ तो मुस्लिम टीचर हबीब शाह खान ने की पिटाई: परिजनों की शिकायत पर मिशनरी स्कूल के मैनेजमेंट ने करा दिया समझौता, पुलिस बोली- संज्ञेय अपराध नहीं

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में सातवीं कक्षा के छात्र की टीचर हबीब शाह खान ने सिर्फ इसलिए पिटाई कर दी, क्योंकि छात्र ने बस से उतरते समय अभिवादन में ‘राधे-राधे’ बोला था। छात्र के राधे-राधे बोलते ही टीचर हबीब शाह खान गुस्से में भर गया और कहा, ‘अभी निकालता हूँ तेरा राधे-राधे।’ इसके बाद उसने छात्र की पिटाई कर दी। इस मामले की शिकायत परिजनों ने स्कूल मैनेजमेंट से की, तो मिशनरी स्कूल के मैनेजमेंट ने भी मामले को टरका दिया। इसके बाद पीड़ित छात्र के पिता ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर, एमपी और जिला शिक्षा अधिकारी से भी की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला नरसिंहपुर जिले के क्रिश्चियन मिशनरी द्वारा संचालित चावरा देवी विद्यापीठ स्कूल का है। यहाँ मंगलवार (10 दिसंबर 2024) को बच्चों की परीक्षा थी। सातवीं कक्षा का पीड़ित छात्र भी स्कूल बस से स्कूल पहुँचा और बस से नीचे उतरते समय उसे धक्का लग गया। हड़बड़ी में बच्चे ने टीचर हबीब शाह खान को सामने देख ‘राधे-राधे’ बोल दिया। बस, फिर क्या था? उसकी शामत आ गई। टीचर ने उसकी पिटाई की और ‘अभी निकालता हूँ तेरा राधे-राधे’ कह कर उसे काफी अपमानित भी किया। बच्चे ने किसी तरह से परीक्षा दी और घर पर आकर शिकायत की।

बच्चे के परिजन अगले दिन यानी बुधवार (11 दिसंबर 2024) को स्कूल पहुँचे। उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट से टीचर की शिकायत की, लेकिन स्कूल मैनेजमेंट ने उन्हें टरका दिया। इस मामले में परिजनों ने अब कलेक्टर, एमपी और जिला शिक्षा अधिकारी से भी शिकायत की है।

मीडिया ने स्कूल के प्रिंसिपल से जब संपर्क किया, तो प्रिंसिपल बाबू जोन ने बताया कि मामले की जानकारी होते ही उन्होंने छात्र के परिजन और टीचर को बुलाकर दोनों की बात सुनीं। इसके बाद उन्होंने दोनों पक्षों के बीच में आपसी समझौता कराया। प्रिंसिपल की समझाइश के बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। प्रिसिंपल के मुताबिक, मामले में सुलह हो गई है। दोनों पक्षों की ओर से अब किसी तरह की शिकायत नहीं है। वहीं छात्रों के परिजनों द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराने पर स्कूल प्रबंधन ने कहा कि वह उसे वापस ले लेंगे।

वहीं, नरसिंहपुर जिले की एसपी मृगाकी डेका ने कहा है कि ये मामला गैर संज्ञेय अपराध में आता है। ये आपसी विवाद है, जिसे सुलझा लिया गया है। हालाँकि रिपब्लिक भारत ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आरोपित टीचर हबीब शाह खान को स्कूल मैनेजमेंट ने 5 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया है और आगे जाँच के बाद कार्रवाई की बात कही है।

बता दें कि चावरा देवी विद्यापीठ का संचालन भोपाल स्थित सीएमआई सेंट पॉल सोसायटी यानी मिशनरी मिशन द्वारा किया जाता है। इस स्कूल के प्रिंसिपल का नाम बाबू जॉन है। हालाँकि मिशनरी स्कूल में मुस्लिम टीचर द्वारा इस हरकत को लेकर स्थानीय लोगों में भी गुस्सा है।

इस्लामी आतंक के लिए मदरसा और मौलाना: जैश-ए-मोहम्मद की टेरर फंडिंग मामले में कश्मीर से बंगाल तक 19 ठिकानों पर छापेमारी, NIA ने कई मौलानाओं को दबोचा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने जैश-ए-मोहम्मद की आतंकी साजिश और फंडिंग के मामले में राजस्थान, असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में 19 जगहों पर छापेमारी की। एजेंसी ने बताया कि छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, पेन ड्राइव, सीडी और हार्ड डिस्क समेत कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।

NIA के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकी शेख सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी के करीबी सहयोगियों के परिसरों पर यह छापेमारी की गई है। अयूबी को उसकी आतंकी भूमिका के कारण गिरफ्तार किया गया था। अयूबी को इस साल अक्टूबर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी जमात संगठन में भर्ती करने एवं उन्हें कट्टरपंथी बनाने के आरोप में हिरासत में लिया था।

एजेंसी ने बताया कि छापेमारी असम के ग्वालपाड़ा, महाराष्ट्र के औरंगाबाद, मुंबई और अमरावती, उत्तर प्रदेश के झाँसी, बरेली, देवबंद और सहारनपुर, बिहार के सीतामढ़ी, पश्चिम बंगाल के हुगली, जम्मू-कश्मीर के बारामूला, रियासी, बडगाम और अनंतनाग, राजस्थान के डूंगरपुर और गुजरात के मेहसाणा में की गई है। इस दौरान कुछ जरूरी दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जाँच की जा रही है।

इस मामले में राजस्थान के डूंगरपुर स्थित मोहम्मद सलमान नाम के एक मौलाना के घर में छापेमारी की है। इस दौरान एजेंसी ने मौलाना से करीब 7 घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद उसे अपने साथ ले गई। एजेंसी को आतंकी साजिश के बारे में इनपुट मिली थी। मौलाना सलमान गुजरात के हिलोन का रहने वाला है। वह गलियाकोट में एक दरगाह के मदरसे में पढ़ाता है।

डूंगरपुर की एसपी मोनिका सेन ने बताया कि NIA की टीम गुरुवार (12 दिसंबर 2024) की सुबह करीब 4 बजे डूंगरपुर आई। इसके बाद चितरी थाना क्षेत्र में गलियाकोट स्थित मौलाना सलमान के घर पहुँचकर छापेमारी की। छापेमारी के साथ ही मौलाना से पूछताछ भी शुरू की गई। इसके बाद टीम मौलाना को साथ लेकर चितरी थाने पहुँची और उससे पूछताछ की।

वहीं, महाराष्ट्र में छापेमारी के दौरान NIA ने अमरावती, भिवंडी और संभाजीनगर से एक-एक शख्स को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। ये तीनों आतंकी संगठनों और पाकिस्तानी एजेंसियों के संपर्क में थे। NIA पता करेगी कि उनके संपर्क में होने का इनका मकसद क्या था। उनके संपर्क में और कितने लोग हैं, इसकी भी जानकारी जुटाएगी।

NIA ने बिहार के सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी थाना क्षेत्र के बाजपट्टी गोट में छापेमारी की। यहाँ से भी एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। उसके यहाँ टीम ने लंबे समय तक सर्च ऑपरेशन चलाया है और उससे लगभग 5 घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान बिहार पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

उधर, उत्तर प्रदेश के झाँसी में मदरसा टीचर मुफ्ती खालिद के घर पर छापेमारी की गई। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। जब टीम ने मुफ्ती खालिद को ले जाने की कोशिश की तो स्थानीय मुस्लिमों ने एजेंसी की टीम को घेर लिया। टीम के साथ धक्का-मुक्की करके मौलाना छुड़ा लिया और उसे नजदीक के फातिमा मस्जिद में ले जाकर छिपा दिया।

इसके बाद NIA ने आसपास के इलाकों से भारी पुलिस बल को बुलाया और फिर मौलाना को अपने साथ ले गई। मौलाना को वहाँ से लेकर जाने में पुलिस, यूपी एटीएस और एनआईए की टीम को 3 घंटे का समय लग गया। कहा जाता है कि इस दौरान पुलिस और एआईए की टीम पर 200 लोगों की भीड़ ने हमला भी किया।

वहीं, खालिद को छुड़ाने के लिए उसके समर्थकों द्वारा पुलिस के साथ की गई धक्का-मुक्की के मामले में पुलिस ने 110 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन सभी पर पुलिस टीम पर हमला करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में महिलाओं को भी आरोपित बनाया गया है। मुफ्ती खालिद शहर काजी साबिर अंसारी का भतीजा है।