बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों की जारी हिंसा के बीच राजधानी ढाका के नमहट्टा इलाके में स्थित इस्कॉन मंदिर पर हमले का मामला सामने आया है। शुक्रवार (6 दिसंबर 2024) की देर रात इस मंदिर में आग लगा दी गई, जिससे श्री लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति और अन्य धार्मिक वस्त्र पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
इस्लामी कट्टरपंथियों ने मंदिर पर हमला कर की आगजनी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई, जब आधी रात के बाद 2 से 3 बजे के बीच मंदिर के पीछे के टिन के छत को उठाकर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। इस मंदिर का संचालन करने वाले इस्कॉन पर बैन की माँग को ढाका हाई कोर्ट ने ठुकरा दिया था, जिसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने इस मंदिर को जबरन बंद करवा दिया था। इस मंदिर पर हमले से पहले भी हिंदू प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा चुका है।
This temple was being managed by ISKCON Namahatta Mandir. Last night, the temple was attacked, vandalized, and the deities set on fire in Dhaka. Brazen Hindumisia on display and free run for rabid Islamists. So called Human Rights Watchers and keepers of Religious Freedom seem… pic.twitter.com/4DiWVkQlga
इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “श्री लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति और मंदिर की सभी वस्तुएँ पूरी तरह जलकर नष्ट हो गईं। यह हमला बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति को दर्शाता है।” उन्होंने भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
Another ISKCON Namhatta Centre burned down in Bangladesh. The Deities of Sri Sri Laxmi Narayan and all items inside the temple, were burned down completely ?. The center is located in Dhaka. Early morning today, between 2-3 AM, miscreants set fire to the Shri Shri Radha Krishna… pic.twitter.com/kDPilLBWHK
ताजे मामले से पहले इस मंदिर को जबरन बंद करा दिया गया था और अब इसे जला दिया गया। इस्कॉन के कोलकाता शाखा के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उपद्रवियों को मंदिर का बोर्ड हटाते देखा जा सकता है।
Breaking News: *ISKCON Namhatta center in Shibchar Bangladesh forcefully Closed Down by Muslims*.
The army arrived and took away the ISKCON devotees in a vehicle. A viral video on social media shows extremists removing the board of the ISKCON temple, which features a picture of… pic.twitter.com/qJlka16tmU
हाल ही में ढाका हाई कोर्ट ने इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की माँग को ठुकरा दिया था। अदालत ने कहा कि सरकार की ओर से मामले में उचित कार्रवाई की जा रही है। कट्टरपंथी संगठनों ने इस्कॉन पर ईशनिंदा और देशद्रोह के आरोप लगाकर प्रतिबंध की माँग की थी। इसी कड़ी में इस्कॉन के पुजारी चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और बढ़ गई। कट्टरपंथियों ने कई हिंदू घरों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। स्थानीय हिंदुओं का आरोप है कि पुलिस और सेना भी कट्टरपंथियों के पक्ष में खड़ी नजर आती है।
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा नई बात नहीं है। कट्टरपंथी ताकतें लगातार धार्मिक स्थलों को निशाना बना रही हैं। सरकार की निष्क्रियता और पुलिस प्रशासन की अनदेखी के कारण स्थिति और भी भयावह हो गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत सरकार को इन घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए और बांग्लादेश सरकार पर दबाव डालकर हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
देश-विदेश में हिंदुओं के खिलाफ घृणा अपराधों की घटनाओं को एकत्र कर उनके दस्तावेजीकरण करने के लिए ‘हिंदूफोबिया ट्रैकर’ लॉन्च किया गया है। हिंदू विरोधी हेट ट्रैकर को ‘गविष्टि फाउंडेशन‘ नामक एक एनजीओ द्वारा लॉन्च किया गया है। इस NGO के प्रमुख राहुल रौशन और नूपुर जे शर्मा हैं। बता दें कि राहुल रौशन ऑपइंडिया के भी CEO हैं, जबकि नुपूर जे शर्मा ऑपइंडिया की प्रधान संपादक हैं।
हिंदूफोबिया ट्रैकर का लक्ष्य हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराधों का दस्तावेजीकरण करना, हिंदुओं के उत्पीड़न के बारे में जागरूकता पैदा करना, शोधपत्र जारी करना और हिंदुओं के मानवाधिकारों की वकालत करना है। इसमें हिंदुओं के खिलाफ घृणा अपराधों को पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड किया जाएगा, ताकि हिंदुओं के उत्पीड़न को प्रभावी ढंग से दर्शाकर जागरूकता बढ़ाई जा सके।
दरअसल, हिंदूफोबिया ट्रैकर ने हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराधों का एक डेटाबेस प्रकाशित किया है। इस डेटाबेस में प्रत्येक मामले के लिए एक स्पष्टीकरण दिया गया है कि किस तरह से संबंधित मामला धार्मिक दुश्मनी से प्रेरित घृणा अपराध है। ट्रैकर ने इन अपराधों को 8 प्राथमिक श्रेणियों में विभाजित किया है।
रिलेशनशिप में रहने वाले महिला के साथ घृणा अपराध एवं यौन अपराध
ऐसा हमला जिसमें मौत नहीं हुई
हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर हमला
हिंदू प्रथाओं पर रोक/प्रतिबंध
हिंदुओं के खिलाफ हेट स्पीच
जबरन धर्मांतरण
गैर-हिंदू महिलाओं के साथ संबंध रखने के कारण हिंदू पुरुषों पर हमला
ऐसे हमले जिनमें मौत हो गई
ऊपर दिए गए इन सभी कैटेगरी को अंतर्राष्ट्रीय नियमों और मानकों तथा निर्धारित मापदंडों का उपयोग करते हुए सावधानीपूर्वक परिभाषित किया गया है। इसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक श्रेणी के अंतर्गत आने वाले अपराधों का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाएगा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मामला धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराध है या नहीं।
हिंदूफोबिया शब्द पिछले कुछ सालों में विकसित हुआ है। इसमें हिंदुओं के खिलाफ उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर नकारात्मक भावनाओं, दृष्टिकोणों और कार्यों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करना शामिल है, जिसके कारण हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराध भी हुए हैं। हिंदूफोबिया ट्रैकर ने हिंदूफोबिया शब्द की एक कार्यशील परिभाषा जारी की है।
हिंदूफोबिया कोई भी ऐसी कार्रवाई और/या भाषण, लिखित या मौखिक (शैक्षणिक, संस्थागत, राजनीतिक और/या यादृच्छिक), हिंसा और/या भेदभावपूर्ण कार्रवाई/रवैया है, जो हिंदुओं (सनातन धर्म और/या हिंदुओं के विभिन्न संप्रदायों और/या धार्मिक पंथ के तहत विभिन्न पंथों का पालन करने वाले लोग), व्यक्तियों, लोगों के समूह, उनके विश्वास (हिंदू धर्म), उनकी संस्कृतियों, परंपराओं, पूजा के रूपों और विधियों, धर्मग्रंथों, सिद्धांतों और सभ्यतागत मूल्यों और विश्वासों के खिलाफ नफरत, भय, पूर्वाग्रह, दुश्मनी, शत्रुता और/या पूर्वाग्रह से पैदा होता है।
हिंदूफोबिया व्यक्तियों और/या उनकी संपत्ति के प्रति, समग्र रूप से हिंदू समुदाय के प्रति, हिंदू संस्थाओं, हिंदू धार्मिक सुविधाओं (मंदिरों और अस्थायी धार्मिक संरचनाओं सहित), हिंदू आस्था के प्रतीकों, हिंदुओं की मूल और सभ्यतागत भूमि के प्रति निर्देशित हो सकता है, जिसे धार्मिक पूर्वाग्रह, शत्रुता और घृणा के कारण हो सकता है।
हिंदूफोबिया में भाषण, लेखन या व्यवहार में किसी भी प्रकार का संचार शामिल है जो हिंदुओं, हिंदू धर्म, हिंदुओं की धार्मिक पहचान के तत्वों के संदर्भ में व्यक्तिगत रूप से या धार्मिक, जातीय समूह के रूप में अपमानजनक, भेदभावपूर्ण या हिंसक भाषा का प्रयोग करता है, जो पूर्वाग्रह, पक्षपात और/या धार्मिक और/या सांस्कृतिक दुश्मनी से उपजा है, जो अमानवीयकरण, कलंक, बलि का बकरा बनाने, रूढ़िबद्धता, हिंसा के लिए आह्वान और कई मामलों में हिंसा को जन्म देता है।
हिंदुओं के खिलाफ अभद्र भाषा में अक्सर ऐतिहासिक और/या चल रहे उत्पीड़न का खंडन और/या मजाक उड़ाना, धर्मग्रंथों को तोड़ना, प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष हिंसा को बढ़ावा देना और/या आह्वान करना, लक्षित और निर्देशित हिंसा का समर्थन, वैचारिक व्यंजना का उपयोग करके हिंदुओं के वर्गों के उन्मूलन का आह्वान करना, हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक रूप से लक्षित घृणा अपराधों के अपराधियों का महिमामंडन करना, हिंदुओं के व्यक्तियों या समूहों के खिलाफ डॉग-व्हिसलिंग, धार्मिक पहचान और/या विचारों के आधार पर डोक्सिंग, हिंदुओं के समूहों और/या संप्रदायों का व्यंग्यात्मक चित्रण करना ताकि उनके कलंक/अमानवीयकरण/बड़ी हिंसा को वैध बनाया जा सके, प्रतीकों और/या आस्था के प्रतिनिधियों का मजाक उड़ाना और/या उन्हें बदनाम करनाशामिल हैं।
अपने रिलीज के दौरान हिंदूफोबिया ट्रैकर ने डेटाबेस में 1 जनवरी 2023 से हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक रूप से प्रेरित 1,314 घृणा अपराधों को शामिल किया है। ट्रैकर ने 191 ‘अनिर्धारित मामलों’ (ऐसे अपराध जिनके बारे में संदेह है कि वे घृणा अपराध हैं, लेकिन धार्मिक कोण साबित नहीं हुई है) का भी दस्तावेजीकरण किया है। इसके अलावा, 589 मामलों को लंबित समीक्षा के रूप में टैग किया है।
यह डेटाबेस पूर्ण नहीं है और इस पर लगातार काम चल रहा है। इसका उद्देश्य है कि जहाँ तक संभव हो सके इसमें अधिक-से-अधिक धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराधों का दस्तावेजीकरण किया जाए, ताकि यह जमीनी हकीकत का सटीक प्रतिनिधित्व कर सके। यह डेटाबेस सार्वजनिक जाँच के लिए उपलब्ध है, जिसमें लोगों के लिए विवाद उठाने और डेटाबेस में जोड़ने के लिए घृणा अपराध भेजेने का प्रावधान है।
यहाँ बताया गया है कि इस पोर्टल का उपयोग डेटाबेस तक पहुँचने के लिए कैसे किया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि हिंदुओं के खिलाफ घृणा अपराधों को डेसाबेस में शामिल कराने के लिए यहाँ कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति कोई भी अपराध हेट क्राइम है या नहीं, इसकी भी जाँच के लिए लोग हमारी टीम को भेज सकते हैं।
वेबसाइट के होमपेज पर एक हेट क्राइम मैप है, जहाँ डेटाबेस में दर्ज प्रत्येक अपराध को एक एम्बेडेड गूगल मैप पर अपराध के स्थान पर चिह्नित किया गया है। अपराध की श्रेणी के आधार पर विभिन्न प्रतीकों द्वारा मानचित्र पर हेट क्राइम को दर्शाया गया है। प्रत्येक प्रतीक एक बटन जैसा है, जिसे क्लिक करने पर मानचित्र के बाईं ओर अपराध का सारांश खुलता है। यहाँ अपराध से संबंधित लिंक खुलता है।
मैप पर भारत के नक्शा को फोकस किया गया है, जहाँ घृणा अपराधों को अंजाम दिया गया है। हालाँकि, इस मैप को जूम इन और जूम आउट करने पर दुनिया के अन्य कोनों में हिंदुओं के प्रति हुए घृणा अपराधों को देखा जा सकता है। इसका विवरण जानने के लिए पूर्व की ही भाँति बटन पर क्लिक करना होगा, जहाँ उसका विवरण एवं घटना के से संबंधित डिटेल के बारे में लिंक को देखा जा सकता है।
वेबसाइट के होमपेज को नीचे स्क्रॉल करने पर डेटाबेस में दर्ज किए गए घृणा अपराधों के बारे में बुनियादी आँकड़े देखे जा सकते हैं। इसे चार्ट के रूप में डेटा का विजुअल प्रतिनिधित्व शामिल किया गया है। उसके नीचे होमपेज पर हिंदूफोबिया ट्रैकर और घृणा अपराध डेटाबेस के बारे में विभिन्न महत्वपूर्ण लेखों के लिंक दिए गए हैं।
हिंदूफोबिया डेटाबेस को वेबसाइट के सबसे ऊपर बने नेविगेशन बार पर ‘हेट क्राइम डेटाबेस’ पर क्लिक करके एक्सेस किया जा सकता है। यह विभिन्न श्रेणियों के तहत दर्ज अपराधों की लाइव संख्या प्रदर्शित करता है। इसके अलावा, यहाँ डेटाबेस में दर्ज हर अपराध को सूचीबद्ध करने वाला एक टेबल भी दिखाई देता है।
यूजर ड्रॉप-डाउन लिस्ट में से उस कैटेगरी को सेलेक्ट करके उससे संबंधित हेट क्राइम को देख सकते हैं। पेज पर दिए गए सर्च बॉक्स में कीवर्ड टाइप करके हिंदू विरोधी घृणा अपराधों को भी खोजा जा सकता है। इसके अलावा, किसी विशेष अवधि के दौरान हुए अपराधों को तारीख से भी चुनकर पढ़ा जा सकता है।
नीचे फ़िल्टर करके घृणा अपराधों को को प्रदर्शित करती है। इस टेबल की प्रत्येक पंक्ति पर क्लिक करके किसी विशेष अपराध का पूरा विवरण देखा जा सकता है। यह विवरण ब्राउज़र में एक नए टैब पर खुलता है, जो केस के सारांश को दिखाता है। इसमें यह भी बताया गया रहता है कि इस केस को घृणा अपराध के रूप में क्यों सूचीबद्ध किया गया है।
प्रत्येक पृष्ठ पर एक विकल्प होता है जो यूजर को अपराध से संबंधित अतिरिक्त जानकारी प्रस्तुत करने या उसके बारे में विवाद उठाने की अनुमति देता है। इस उद्देश्य के लिए कोई भी व्यक्ति ‘अतिरिक्त जानकारी सबमिट करें/विवाद उठाएँ’ लिखे बटन पर क्लिक कर सकता है। इसे दबाने पर एक नया पेज खुलता है और वहाँ सहायक दस्तावेजों के साथ आवश्यक जानकारी पेश की जा सकती है।
इस डेटाबेस में मौजूद हर मामले को एक विशिष्ट केस आईडी दी गई है, जो पेज के सबसे ऊपर दिखाई देती है। इसके अलावा, अतिरिक्त जानकारी या विवाद प्रस्तुत करते समय इस केस आईडी को प्रस्तुत करना आवश्यक है। इसके अलावा, मेन पेज के टॉप पर ‘अनडिसाइडेड केसेज’ को क्लिक करने पर घृणा अपराध डेटाबेस जैसा ही एक पेज खुलता है।
अनडिसाइडेड केसेज में दर्ज अपराधों को देखने और अतिरिक्त जानकारी या विवाद प्रस्तुत करने के लिए ठीक वैसा ही विकल्प है, जो पहले बताया जा चुका है। इन मामलों को घृणा अपराध के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है, क्योंकि इससे संबंधित आवश्यक जानकारी- जैसे कि हमलावरों की पहचान, हमले का मकसद आदि उपलब्ध नहीं है।
यूजर सबसे ऊपर दिए गए ‘रिपोर्ट हेट क्राइम’ ऑप्शन पर क्लिक करके हेट क्राइम से जुड़े ऐसे मामलों को हमें भेज सकते हैं, जो हिंदूफोबिया ट्रैकर के डेटाबेस में अब तक शामिल नहीं हुए हैं। इस विकल्प पर क्लिक करने से एक फ़ॉर्म खुलता है, जहाँ अपराध का विवरण प्रस्तुत किया जा सकता है, सहायक दस्तावेज़ अपलोड किए जा सकते हैं और अपराध के लिए प्रासंगिक श्रेणियों का चयन किया जा सकता है।
रिपोर्ट किए जा रहे अपराध के लिए सहायक साक्ष्य के रूप में अख़बार की कतरनें, टीवी न्यूज़ रिपोर्ट की वीडियो क्लिप, एफ़आईआर कॉपी आदि जैसी अधिक जानकारी वाले फोटो, वीडियो या पीडीएफ़ फ़ाइल अपलोड की जा सकती हैं। नए हिंदू हेट क्राइम को भेजते समय यूजर्स को अपना नाम और ईमेल आईडी देना आवश्यक है।
ऐसे मामले सबमिट किए जाने के बाद हिंदूफ़ोबिया ट्रैकर की टीम मामले की समीक्षा करेगी और बताए गए मापदंडों के आधार पर वह हेट क्राइम में शामिल किए जाने योग्य होने पर डेटाबेस में जोड़ेगी। फिलहाल, ट्रैकर जनवरी 2023 या उसके बाद के मामलों का दस्तावेजीकरण कर रहा है। हालाँकि, जल्द ही डेटाबेस का विस्तार किया जाएगा।
असम के श्रीभूमि जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बांग्लादेशी सीमा रक्षक बल (बीजीबी) के जवानों द्वारा एक हिंदू मंदिर के जीर्णोद्धार को रोकने की घटना ने गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना ने न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया, बल्कि इस्लामी कट्टरपंथ की जड़ें और बांग्लादेशी मानसिकता की हिंदू-विरोधी प्रवृत्ति को भी उजागर किया।
बांग्लादेशियों ने मंदिर को बताया इस्लाम के लिए ‘हराम’
कुशियारा नदी के किनारे स्थित हिंदू समुदाय के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मनसा मंदिर को असम सरकार द्वारा 3 लाख रुपये की धनराशि से पुनर्निर्मित किया जा रहा था। गुरुवार (5 दिसंबर 2024) को बीजीबी के जवान ज़ाकिंगंज सीमा चौकी से तेज़ स्पीडबोट के जरिए भारतीय क्षेत्र में घुस आए और मंदिर निर्माण कार्य को रोकने की धमकी दी। उनका तर्क था कि मंदिर की उपस्थिति बांग्लादेशी मुसलमानों को ‘आहत’ कर सकती है और इससे वहाँ हिंसा भड़क सकती है।
बीजीबी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि मस्जिद से नमाज के बाद मंदिर दिखना ‘हराम’ है और उनके मजहब के खिलाफ है। उन्होंने स्थानीय हिंदुओं और मजदूरों को डरा-धमकाकर काम बंद करने को कहा।
बीएसएफ की सख्ती से वापस लौटे बांग्लादेशी फौजी
घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) मौके पर पहुँचा और स्थिति को संभाला। बीएसएफ ने बीजीबी को सख्ती से जवाब देते हुए कहा कि उन्हें भारतीय क्षेत्र में घुसने और भारतीय नागरिकों को धमकाने का कोई अधिकार नहीं है। बीएसएफ ने स्पष्ट किया कि मंदिर का पुनर्निर्माण जारी रहेगा और यह पूरी तरह भारतीय क्षेत्र में हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और बीएसएफ की मजबूती के चलते बीजीबी के जवान पीछे हट गए।
बांग्लादेश ने किया अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन
बीजीबी का भारतीय सीमा में प्रवेश और हथियार लेकर धमकी देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सीमा प्रोटोकॉल का घोर उल्लंघन है। इन प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी सीमा रक्षक बल को दूसरे देश की सीमा में प्रवेश करने से पहले अनुमति लेनी होती है, और वे हथियार नहीं ले जा सकते।
घटना के बाद स्थानीय हिंदुओं ने विरोध प्रदर्शन किया और ‘बांग्लादेश मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। उन्होंने बीजीबी की इस हरकत को भारतीय आत्मसम्मान और हिंदू संस्कृति पर हमला बताया। बीएसएफ ने मंदिर निर्माण कार्य को सुरक्षा प्रदान की और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
इस घटना से साफ हो गया है कि बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरता सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि वहाँ की सरकारी एजेंसियाँ और सुरक्षा बल भी इससे प्रभावित हो चुके हैं। बांग्लादेशी मुस्लिमों की भावनाओं को हिंदू धर्मस्थलों के खिलाफ हथियार बनाना, वहाँ की कट्टर मानसिकता की गंभीरता को दर्शाता है। यह भारत के लिए एक चेतावनी भी है कि सीमा पार से कट्टरपंथी मानसिकता के हमले सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेंगे। भारत को अपने सीमा क्षेत्रों और हिंदू धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
बिहार के दरभंगा जिले में राम विवाह की झाँकी पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने पथराव कर दिया है। झाँकी जैसे ही एक मस्जिद के पास पहुँची, उसके बाद शोभायात्रा में शामिल लोगों पर ईंट और पत्थर फेंकने जाने लगे। इससे अफतरा-तफरी मच गई। इस घटना में कई लोगों को चोटें आई हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थिति देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
दरअसल, विवाह पंचमी के मौके पर नगर थाना क्षेत्र के बाजितपुर एवं तरौनी गाँव में हर साल की भाँति इस बार भी भगवान राम के विवाह की झाँकी निकाली जा रही थी। यह झाँकी तरौनी गाँव से बाजितपुर की तरफ जा रही है। झाँकी बाजितपुर जाने के दौरान एक मस्जिद के पास पहुँची तो कट्टरपंथी मुस्लिमों ने इस पर आपत्ति जताई और झाँकी में शामिल लोगों से बहस करने लगे।
Big Breaking… राम-जानकी विवाह पंचमी यात्रा पर पथराव..
दरभंगा के तरौनी में देर रात पथराव…पथराव के बाद तनाव…मौके पर भरी पुलिस बल तैनात
कुछ ही देर में मस्जिद और आसपास से पथराव शुरू हो गया। कुछ दंगाई लाठी और डंडे लेकर आए और झाँकी में शामिल लोगों पर हमला कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही सदर एसडीओ, सिटी एसपी, डीएसपी आदि अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और हालात को किसी तरह सँभाला। बता दें कि तरौनी प्रसिद्ध कवि नागार्जुन का गाँव है।
कहा जा रहा है कि दरभंगा के बाजितपुर में जिस जगह विवाह पंचमी के जुलूस को रोककर लोगों के साथ मारपीट की गई है, वह कोई नई परंपरा नहीं है। लोगों का कहना है कि पिछले बीस साल से भी अधिक समय से राम विवाह की बारात इस रास्ते से निकाली जा रही है। लोगों का कहना है कि इससे पहले ऐसा उपद्रव कभी नहीं हुआ। इस बार मस्जिद के पास जुलूस पहुँचते ही पथराव कर दिया गया।
इस घटना को लेकर सिटी एसपी अशोक कुमार ने कहा कि इस बात की जानकारी जुटाई जा रही है कि किस मकसद से हालात को बिगाड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि घटना की जाँच की जा रही है। उसके बाद इसमें शामिल लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस घटना में शामिल लोगों की पहचान के लिए इलाके की सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है।
केरल के कासरगोड में खुद को जिन्न बताने वाली शमीमा नाम की महिला ने 4 किलो सोने के लिए एक NRI व्यापारी की हत्या कर दी थी। उसका गैंग लोगों को काले जादू के नाम पर ठगता था। पुलिस ने लगभग 20 महीने के बाद NRI की हत्या का खुलासा किया है। पुलिस ने शमीमा समेत 4 को इस हत्याकांड में अब गिरफ्तार किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कासरगोड के पोचक्क्ड में रहने वाले NRI गफूर की 13 अप्रैल, 2023 को मौत हो गई थी। इसके बाद अगले दिन उनकी लाश घर के भीतर मिली थी। परिजनों ने इसे प्राकृतिक मौत माना था और गफूर को दफना दिया था। मृतक गफूर एक NRI था और उसके UAE में 4 सुपर मार्केट हैं।
गफूर की मौत को परिजनों ने रमजान में होने के कारण और भी शक नहीं जताया। गफूर के परिजनों को इसके बाद याद आया था कि उन्होंने बेटियों समेत सभी परिजनों से सोना उधार लिया था। यह सोना घरवालों ने ढूँढा तो नहीं मिला। इसके बाद परिजनों को शक हुआ और उन्होंने अपने ही गाँव में रहने वाली जिन्न शमीमा पर चोरी का शक जताया।
इसके बाद उन्होंने हत्या का अंदेशा जताते हुए FIR करवाई। पुलिस ने इसके बाद कब्र से लाश निकलवा कर गफूर का पोस्टमार्टम करवाया तो उनके कान के पीछे एक चोट निशान मिला। इसके बाद पक्का हुआ कि उनकी हत्या हुई थी। गफूर के घर वालों का पूरा शक शमीमा की तरफ ही था लेकिन पुलिस इस मामले में सबूत नहीं ढूँढ पा रही थी।
इसके लगभग एक वर्ष बाद एक पुलिस अफसर ने इस मामले में गंभीरता से जाँच चालू की। पुलिस ने शमीमा और उसके गैंग के बारे में पता किया। पुलिस को मालूम हुआ कि शमीमा गैंग ने कासरगोड के अलग-अलग हिस्सों में सोना बेचा था। उन्होंने गफूर और शमीमा की व्हाट्सएप चैट भी देखी।
इसमें पता चला कि गफूर ने शमीमा को ₹10 लाख और सोना दोनों दिए थे। इसके बाद पुलिस ने और भी जाँच की तो पता चला कि शमीमा ने गफूर को उसका सोना दोगुना करने का लालच दिया था। शमीमा ने बताया था कि वह काले जादू से ऐसा कर सकती है।
गफूर ने उसको सभी परिजनों से सोना माँग कर दे दिया था। इसके बाद जब गफूर ने अपना सोना वापस माँगा तो शमीमा ने उसकी हत्या करने की ठान ली। शमीमा ने अपने गैंग के उबैस, असनीफा और आयशा के साथ मिलकर एक रात को काला जादू करने का ढोंग किया और दीवाल में सर लड़ा कर गफूर की हत्या कर दी।
शमीमा इसके बाद सुबह उनके घर भी मौजूद रही। पुलिस ने अब इन चारों को हत्या और सबूत मिटाने समेत बाकी मामले का मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया है। यह पहले भी कुछ अपराधों में पकड़ी जा चुकी है। शमीमा से उसके गाँव के लोग भी काफी डरते हैं।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में 15 वर्षीय दलित किशोर का धर्म परिवर्तन कर उसे मुस्लिम बनाने का मामला सामने आया है। आरोपितों ने किशोर की मजबूरी और अनाथ होने का फायदा उठाकर इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर दो आरोपितों मुर्शिद और रियासत अली को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि रेस्टोरेंट का मालिक अभी फरार है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले किशोर को मुर्शिद और उसके अब्बू रियासत अली बाराबंकी लेकर आए। उन्होंने उसे नौकरी देने का वादा किया और अपने साथ रखकर बाराबंकी के अफीका रेस्टोरेंट में काम पर लगवा दिया। रेस्टोरेंट के मालिक ने जब जाना कि लड़का अनाथ है, तो उसका ऑपरेशन (खतना) करवाकर नाम बदलकर ‘नूर मोहम्मद’ रख दिया।
घटना का खुलासा तब हुआ जब बजरंग दल के जिला संयोजक विनय सिंह राजपूत को इसकी जानकारी मिली। विनय सिंह ने किशोर से रेस्टोरेंट में बातचीत की और धर्म परिवर्तन की पुष्टि होने पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मुर्शिद, रियासत अली और रेस्टोरेंट मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
किशोर ने पुलिस को सुनाई आपबीती
पीड़ित किशोर ने बताया कि वह मूलरूप से आजमगढ़ के अतरौलिया का रहने वाला है। उसके पिता ने माँ को छोड़कर मुस्लिम महिला से विवाह कर लिया था। उसके पिता की हत्या हो गई और सौतेली माँ ने सारी संपत्ति हड़प कर उसे भगा दिया। आजमगढ़ में उसे देवा का रहने वाला कबाड़ का काम करने वाला मुर्शिद मिला, जिसने कई साल तक अपने साथ रखा फिर उसे देवा स्थित घर ले आया। बाद में उसे रेस्टोरेंट में काम पर लगा दिया गया और जबरन धर्म परिवर्तन कराया।
शहर कोतवाल आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि यह मामला हिंदू किशोर के खतना और धर्मांतरण का है। बजरंग दल की शिकायत पर धर्मांतरण अधिनियम और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब फरार आरोपितों की तलाश में है और मामले की गहराई से जाँच कर रही है। श्रम विभाग ने भी बाल श्रम अधिनियम के तहत जाँच शुरू कर दी है।
यह मामला समाज को झकझोर देने वाला है, जहाँ एक अनाथ दलित किशोर को मजबूरी का शिकार बनाया गया। रेस्टोरेंट मालिक और अन्य आरोपितों की हरकत ने न केवल कानून को चुनौती दी, बल्कि समाज की संवेदनाओं को भी ठेस पहुँचाई है।
महाराष्ट्र में महायुति की नई सरकार ने शपथ ले ली है। देवेन्द्र फडणवीस राज्य 5 वर्षों के बाद राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर फिर लौटे हैं। देवेन्द्र फडणवीस अब तक महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री थे। उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके सफ़र को लेकर कई सारी कहानियाँ सामने आई हैं। इन कहानियों में एक कहानी ऐसी भी है जो उनके बचपन की है।
देवेन्द्र फडणवीस के विषय में बताया जाता है कि उन्होंने 6 वर्ष की ही उम्र में विद्रोही स्वभाव दिखाना चालू कर दिया था। देवेन्द्र फडणवीस 1975 में इंदिरा कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते थे। वह तब मात्र 6 वर्ष के थे। उनके पिता गंगाधर फडणवीस तब जनसंघ के नेता थे।
1975 में ही देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने आपातकाल लागू कर दिया था। इस आपातकाल में कॉन्ग्रेस के अलावा सभी पार्टियों के नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा था। इसी कड़ी में जनसंघ के भी काफी नेताओं को गिरफ्तार किया गया था।
देवेन्द्र फडणवीस के पिता गंगाधर राव को भी तब गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था। उन्हें तब गिरफ्तार किया गया जब वह आपातकाल विरोधी एक रैली का नेतृत्व कर रहे थे। इस बात से बालक देवेन्द्र को काफी गुस्सा आया था। उन्होंने तब अपने स्कूल जाने से मना कर दिया था।
उन्होंने इसका कारण बताया था कि उस स्कूल के नाम में इंदिरा है। देवेन्द्र ने बताया था कि उस व्यक्ति के नाम के ऊपर रखे गए स्कूल में नहीं जा सकते जिसने उनके पिता को जेल में डाला। बताया जाता है कि इसके बाद उन्हें सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाया गया था। देवेन्द्र के पिता महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य भी रहे थे।
देवेन्द्र फडनवीस राम मंदिर आन्दोलन में भी शामिल रहे थे। उन्होंने वकालत की पढ़ाई की है। उन्होंने MBA भी किया है। वह आगे की पढ़ाई करने के लिए जर्मनी गए थे। वह नागपुर के सबसे युवा मेयर भी बने थे। इसके बाद वह मात्र 44 वर्ष की आयु में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए थे। 2019 में भी उनके नेतृत्व में NDA ने दुबारा जीत हासिल की थी।
तब शिवसेना के अलग होने की वजह से भाजपा की सरकार नहीं बन पाई थी। 2022 में इसके बाद शिवसेना टूटने के बाद वह सरकार में उपमुख्यमंत्री बन गए। 2024 में उनके नेतृत्व में पार्टी फिर जीती और वह अब मुख्यमंत्री बने हैं।
पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर किसानों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार (6 दिसंबर 2024) को दिल्ली कूच के लिए निकले किसानों का पहला जत्था पुलिस द्वारा रोके जाने पर आक्रोशित हो उठा। किसानों ने बैरिकेड तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके जवाब में हरियाणा पुलिस ने आँसू गैस के 21 गोले दागे। इसके अलावा प्लास्टिक की गोलियों का भी इस्तेमाल किया गया, जिसमें छह किसान घायल हो गए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी से शंभू बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और अन्य माँगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों ने ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन के तहत पैदल मार्च की घोषणा की थी। इस बार 101 किसानों का पहला जत्था बिना ट्रैक्टर-ट्रॉली के दिल्ली की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स, कंटीले तार और लोहे की कीलें लगाई थीं।
#WATCH | Protesting farmers remove the barricades as they try to cross over the Haryana-Punjab Shambhu border. pic.twitter.com/QJdpsfYKCj
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोपहर करीब एक बजे किसान आगे बढ़ने लगे और बैरिकेड्स को तोड़ दिया। इस पर पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े और प्लास्टिक की गोलियाँ दागी। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना पड़ा। मौके पर तैनात अर्धसैनिक बल और ड्रोन से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
#WATCH | Police use tear gas to disperse protesting farmers at the Haryana-Punjab Shambhu Border.
The farmers have announced to march towards the National Capital-Delhi over their various demands. pic.twitter.com/TQyigtUF6K
अब तक छह किसान घायल हुए हैं, जिनमें दो को आँसू गैस के गोले और चार को प्लास्टिक की गोलियों से चोटें आई हैं। एक प्रदर्शनकारी को पुलिस ने हिरासत में लिया है। शंभू बॉर्डर और आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएँ 9 दिसंबर तक के लिए बंद कर दी गई हैं। प्रशासन का कहना है कि इससे अफवाहों पर लगाम लगेगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखना आसान होगा।
#WATCH | Drone visuals from the Haryana-Punjab Shambhu Border where the farmers protesting over various demands have been stopped from heading towards Delhi pic.twitter.com/LlTOFmnhtL
किसान नेताओं ने इसे शांतिपूर्ण मार्च बताया और हरियाणा प्रशासन द्वारा उन्हें रोकने की निंदा की। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा, “हम अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन हमें जानबूझकर भड़काने की कोशिश की जा रही है।”
वहीं, हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा, “किसानों को दिल्ली जाने की अनुमति नहीं दी गई है। बिना अनुमति के उन्हें आगे बढ़ने देना कानून का उल्लंघन है।” अंबाला प्रशासन ने धारा 144 लागू कर पाँच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी है।
#WATCH | Ambala: On farmers' protest, Haryana Minister Anil Vij says, " Have they taken the permission? How can they be allowed to go (to Delhi) without permission? If they get permission, they will be allowed…you are going there for a programme if you have to sit there, you… pic.twitter.com/7etrWLyM7Y
किसान अन्य माँगों के अलावा फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी के लिए दबाव बना रहे हैं। उनकी माँगों की सूची में बिजली दरों में बढ़ोतरी पर रोक, 2021 लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय और किसानों और मजदूरों की आजीविका में सुधार के लिए अतिरिक्त सुधार भी शामिल हैं। किसान संगठन 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने की भी माँग कर रहे हैं।
राज्यसभा में कृषि मंत्री का बड़ा ऐलान
दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि पीएम मोदी सरकार सभी कृषि उपजों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदेगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री चौहान ने प्रश्नकाल के दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे पर पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह आश्वासन दिया है। इसके पहले शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि ढाई गुना और 3 गुना एमएसपी बढ़ाया है तो नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने बढ़ाया है और जब उधर (विपक्ष) की सरकार थी तो ये खरीदते नहीं थे, केवल एमएसपी घोषित करते थे।
इस बीच, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा, “किसानों के लिए अपने मुद्दों पर बातचीत करने के लिए दरवाजे खुले हैं। मैं भी उनका भाई हूँ और अगर वे आना चाहते हैं तो दरवाजे खुले हैं, अगर वे चाहते हैं कि हम उनके पास जाएँ तो हम उनके बीच जाकर बातचीत करेंगे।”
#WATCH | Delhi | MoS for Agriculture and Farmers Welfare, Bhagirath Choudhary says, "Doors are open for the farmers to come and have dialogue regarding their issues. I am also their brother and if they want to come, doors are open, if they want us to go there we will go in… pic.twitter.com/vByRuCRdpo
शंभू बॉर्डर पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस लगातार वीडियोग्राफी कर रही है और किसानों को शांत रहने की अपील कर रही है। हालाँकि, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अंबाला के कई इलाकों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर यातायात बाधित है। किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन लंबा चलेगा और वे अपनी माँगें पूरी करवाकर ही वापस लौटेंगे। किसानों का आंदोलन और दिल्ली कूच की कोशिश ने शंभू बॉर्डर पर हालात को जटिल बना दिया है।
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य नागालैंड के मशहूर पारंपरिक ‘हॉर्नबिल महोत्सव’ के 25वें संस्करण की शुरुआत हो चुकी है। ये उत्सव न केवल नागालैंड की अद्वितीय संस्कृति का अनुभव देता है बल्कि इसके जरिए नागालैंड की विभिन्न जनजातियों के रीति-रिवाजों, भोजन, गीतों और नृत्यों के बारे में भी लोगों को जानने का मौका मिलता है।
10+ दिवसीय चलने वाले इस महोत्सव में देश-विदेश से लाखों लोग पहुँचते हैं और यह राज्य का सबसे बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम भी माना जाता है। पूरे प्रदेश में इस महोत्सव को लेकर उत्साह रहता है लेकिन इस बार ये आयोजन कुछ ईसाई ताकतों के कारण काफी विवादों में हैं। ऐसा क्यों आइए बताएँ…
Meet Mr. Wenlao Konyak and Mr. Hokon Konyak, two remarkable men from ChenLoisho Wangto village in Mon district, both aged 85, and the last surviving tattooed headhunters of the Konyak tribe.
दरअसल, नागालैंड की संस्कृति में और हॉर्नबिल महोत्सव में ‘राइस बियर’ एक महत्वपूर्ण पेय पदार्थ माना जाता है। इसे नागालैंड के लोग पारंपरिक शराब के रूप में समारोहों में वितरित करते हैं। ये समारोह फिर चाहे सामाजिक हो या सांस्कृतिक, हर जगह ‘राइस बियर’ का महत्व होता है। कहीं इसे बांस से बने ग्लास में दिया जाता है तो कहीं किसी व्यंजन के साथ मिश्रित करके इसका सेवन होता है।
नागालैंड की जनजातियों में और यहाँ बाहर से आने वाले लोगों में चूँकि इस पेय पदार्थ का क्रेज सबसे अधिक है। इसकी महत्वता को देखते हुए नागालैंड सरकार ने इस पर निर्णय लिया कि वो राज्य में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित शराब के सख्त कानूनों में थोड़ी रियायत देंगे और इस महोत्सव में भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) की बिक्री की अनुमति होगी। इस संबंध में पर्यटन मंत्री तेम्जेन इम्ना अलोंग ने भी बयान दिया कि यह कदम पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए उठाया गया है।
रंगों में रची हमारी परंपरा, त्योहारों में बसी हमारी संस्कृति!
The Hornbill Festival is back, grander than ever, with a celebration like no other! This 25th edition is not just a festival; it's a vibrant jubilee of tradition, culture, and unity.
अब ये भली-भाँति जानते हुए कि राज्य में ये छूट केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं दी गई बल्कि जनजातीयों की संस्कृति को देखते हुए दी गई है, चर्चों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इस पूरी छूट को इस एंगल से बयान दिया कि सुनने वालों को लगे कि सरकार तो राज्य में शराब को बढ़ावा दे रही है। जबकि हकीकत यह है कि राइस बियर जैसे चीजें नागा संस्कृति का हिस्सा रही है इसलिए इसपर विचार किया जा रहा है और वहीं चर्च इस पर आपत्ति इसलिए जता रहा है क्योंकि उनके मुताबिक जनजातीयों का पारंपरिक पेय जल का सेवन सामाजिक और नैतिक रूप से गलत है।
रिपोर्ट्स के अनुसार नागालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल (NBCC) ने कहा कि पर्यटक नागालैंड आने का मुख्य कारण उसकी संस्कृति और विरासत का अनुभव करना है, न कि शराब पीना। NBCC ने जनजातीय समुदाय के इस महोत्सव में पारंपरिक शराब का विरोध करने के क्रम में ये कहकर भी डराया है कि यदि राज्य में शराब की बिक्री को बढ़ावा दिया गया तो इसके दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।
"The Hornbill Festival is a vibrant celebration of Nagaland’s rich heritage, showcasing the North East’s unparalleled culture, traditions, and unity. It’s a testament to the spirit of #EkBharatShreshthaBharat, bringing together the essence of India’s diversity.
गौरतलब है कि नागालैंड में बहुसंख्य आबादी ईसाइयों की इसलिए ईसाई ताकतें चाहती हैं कि हर नियम उनके अनुसार बनें और अन्य जातियाँ भी उन्हीं के बनाए नियमों के अनुरूप रहें। इन्हीं ईसाई ताकतों के दबावों में करीबन 35 साल पहले राज्य में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था और आज भी वो ताकतें किसी तरह के बदलावों के लिए तैयार नहीं है। नागालैंड में चर्चों का आज भी यही सोचना है कि अन्य जनजातियाँ उनके हिसाब से चलें। भले ही इस दबाव में उनकी अपनी संस्कृति हमेशा के लिए खत्म कर दें मगर सुनें उनकी हीं।
Zutho – traditionally brewed rice beer of Naga's plays an integral role in the day-to-day life of the #Angami Nagas people and several other communities in the region. – The rice beer with lot many medicinal & therapeutic properties. #beer#ricebeer#naga#zutho#tribe#liquorpic.twitter.com/472p6mtJ1i
184 साल पहले आए अमेरिका से हुई थी बैप्टिस्टों की नागालैंड में एंट्री
केवल जानकारी के लिए बता दें कि भले ही चर्चा और महिला संगठनों के दबाव में आधिकारिक तौर पर राज्य में पूर्ण शराबबंदी 1989 में की गई थी। लेकिन नागालैंड में ईसाई ताकतों की घुसपैठ 1870 से शुरू हो गई थी। रिपोर्ट बनाती हैं कि 1870 में जब नागालैंड में अमेरिकी बैप्टिस्ट आए तो उन्होंने शराब को पाप बताया और धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए सख्त दंड का प्रवाधान किया। इसके बाद जो कोई भी ऐसा करता वहाँ पकड़ा जाता था उसे समुदाय से निकालकर सजा दी जाती थी। आज उसी प्रभाव का नतीजा है कि राज्य की आबादी 87% ईसाई है।
वाराणसी में स्थित उदय प्रताप कॉलेज के बाहर छात्रों के बड़े समूह ने अवैध रूप से मस्जिद के खिलाफ प्रदर्शन किया है। यूपी कॉलेज की जमीन पर बनी इस मस्जिद पर वक्फ बोर्ड अपना दावा ठोंक रहा था। कॉलेज कैम्पस के बाहर छात्र इसके खिलाफ जुटे और वह मस्जिद को हटाए जाने की माँग कर रहे हैं।
शुक्रवार (6 दिसम्बर, 2024) को सैकड़ों छात्रों ने यूपी कॉलेज के बाहर भगवा झंडे लेकर प्रदर्शन किया। इन्होने माँग की कि यहाँ जुमे की नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा हुआ नमाजियों को रोका जाए। छात्रों ने कहा कि अगर नमाजी यहाँ पर नमाज अदा करेंगे तो वह भी हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।
इन छात्रो में बड़े छात्र नेता भी शामिल हैं। उन्होंने भगवा झंडों के साथ यूपी कॉलेज के बाहर प्रदर्शन किया। छात्रों ने कहा कि मस्जिद कमिटी के पास यूपी कॉलेज की जमीन का कोई भी मालिकाना हक़ नहीं है, इसके बाद भी वह यहाँ नमाज पढ़ने पर अड़े हुए हैं। गुस्साए छात्रों ने इस कॉलेज के बाहर लगाई गई पुलिस की बैरीकेडिंग तोड़ दी।
इससे पहले भी मंगलवार (3 दिसम्बर, 2024) को भी यूपी कॉलेज के भीतर छात्रों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया था। तब भी छात्रों की पुलिस से झड़प हुई थी। कई छात्रों को इस दौरान पुलिस हिरासत में लिया था। वहीं पुलिस ने मस्जिद को लेकर भड़काऊ बयान पर मुख्तार अहमद, गुलाम रसूल समेत 12 लोगों पर FIR दर्ज की है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड ने यूपी कॉलेज की जमीन पर अपना दावा ठोंका था। यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सहायक सचिव आले अतीक ने वक्फ एक्ट 1995 के तहत 2018 में कॉलेज प्रबंधक को नोटिस भेजा।
नोटिस में वसीम अहमद निवासी भोजूबीर तहसील सदर, वाराणसी ने कहा है कि ग्राम छोटी मस्जिद नवाब टोक मजारात हुजरा उदय प्रताप कॉलेज भाेजूबीर की संपत्ति कॉलेज के नियंत्रण में है। इसे सुन्नी बोर्ड कार्यालय में पंजीकृत कराया जाए। नोटिस में आगे कहा गया कि 15 दिनों में जवाब दें। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की बात नहीं सुनी जाएगी।
इसका जवाब देते हुए उदय प्रताप शिक्षा समिति के तत्कालीन सचिव यूएन सिन्हा ने कहा था कि यूपी कॉलेज की स्थापना 1909 में हुई है। कॉलेज की जमीन इंडाउमेंट ट्रस्ट की है और चैरिटेबल इंडाउमेंट एक्ट के तहत आधार वर्ष के बाद ट्रस्ट की जमीन पर किसी का मालिकाना हक खुद समाप्त हो जाता है। हालाँकि, वक्फ बोर्ड ने इस सम्पत्ति पर से अपना दावा छोड़ दिया है।
राजा उदय प्रताप सिंह जूदेव ने 115 साल पहले किया था स्थापित
यूपी कॉलेज करीब 500 एकड़ में फैला है। इसके द्वारा प्रदेश में डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज, रानी मुरार बालिका स्कूल, राजर्षि शिशु विहार, राजर्षि पब्लिक स्कूल संचालित किया जाता है। इन सबमें करीब 20,000 विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। उदय प्रताप कॉलेज की स्थापना लगभग 115 साल पहले सन 1909 में भिनगा (बहराइच, उत्तर प्रदेश) के राजा उदय प्रताप सिंह जूदेव ने की थी।
प्रिंसिपल के रूप में 1 नवंबर,2001 को कार्यभार सँभालने वाले डॉक्टर डीके सिंह ने कहा कि इस मामले का उन्होंने संज्ञान लिया था। उन्होंने कहा, “कार्यभार सँभालने के बाद हमारे छात्रों ने बताया किया कि कुछ लोग मस्जिद में निर्माण कार्य कर रहे है। वे लोग निर्माण करने के लिए रात में बालू और सीमेंट जबरदस्ती ला रहे थे। हालाँकि, सुरक्षाकर्मियों ने इसका विरोध किया था।”
प्रिंसिपल ने आगे बताया कि उन्होंने इसकी सूचना तुरंत पुलिस-प्रशासन को दी और निर्माण सामग्री को मस्जिद से बाहर निकाला गया। उन्होंने बताया कि इसके कुछ दिनों के बाद सूचना मिली कि कॉलेज की बिजली लाइन से मस्जिद में बिजली का इस्तेमाल हो रहा है। इसका बिजली बिल कॉलेज को देना पड़ता था।
प्रिंसिपल ने बताया, “लगभग एक साल पहले हमने मस्जिद का बिजली कनेक्शन कटवा दिया।” रिपोर्ट के मुताबिक, उदय प्रताप कॉलेज परिसर में मस्जिद और मज़ार का निर्माण समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार की शह पर किया गया था। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि ये निर्माण पूरी तरह अवैध है।