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₹79 में खरीदा ‘फेयर एंड हैंडसम’, 3 हफ्ते तक रगड़ा पर नहीं हुआ गोरा: ‘इमामी’ पर ठोका मुकदमा, उपभोक्ता फोरम ने लगाया ₹15 लाख जुर्माना

उपभोक्ता फोरम ने ‘फेयर एंड हैंडसम’ क्रीम बनाने वाली कंपनी इमामी पर ₹15 लाख का जुर्माना ठोंका है। यह जुर्माना गलत प्रचार पर ठोंका गया है। इस कंपनी के खिलाफ एक ग्राहक ने मामला दायर किया था। ग्राहक इस बात से नाराज था कि कंपनी के दावे के अनुसार वह क्रीम लगाने से तीन सप्ताह के भीतर गोरा क्यों नहीं हुआ।

फोरम ने आदेश दिया है कि इमामी कंपनी शिकायत करने वाले ग्राहक को ₹50 हजार का हर्जाना दे और साथ ही में ₹14.5 लाख की धनराशि दिल्ली के उपभोक्ता कल्याण विभाग में जमा करवाए। फोरम ने इमामी को यह भी आदेश दिया है कि वह शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति को ₹10 हजार अलग से दे। यह धनराशि मुकदमे में हुए खर्चे के लिए दी गई है। फोरम ने पाया कि इमामी क्रीम को लेकर जो दावा कर रही थी, वह भ्रामक था और विज्ञापन में किए गए दावे भी सही नहीं थे।

क्या था मामला?

दिल्ली रहने वाले निखिल जैन ने ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने वाली कम्पनी इमामी के खिलाफ यह मामला फरवरी, 2013 में दायर किया था। निखिल जैन ने आरोप लगाया कि उन्होंने अक्टूबर, 2012 में ₹79 की फेयर एंड हैंडसैम मेंस क्रीम खरीदी थी। इसको लेकर इमामी का दावा था कि यदि यह दिन में दो बार लगातार तीन सप्ताह तक लगाई जाए तो इससे वह गोरे हो जाएँगे।

निखिल जैन ने बताया कि इमामी ने इस क्रीम पर लिखा, “तेजी से चमकते गोरेपन के लिए चेहरे और गर्दन पर दिन में दो बार साफ करने के बाद लगाएँ। अच्छे परिणामों के लिए नियमित उपयोग की सलाह दी जाती है।” निखिल जैन ने आरोप लगाया कि जैसा कम्पनी ने क्रीम के पैक पर जैसा बताया गया था, वैसा ही उन्होंने किया।

निखिल जैन ने आरोप लगाया कि इसके बाद भी उनको ऐसा कोई फायदा नहीं हुआ, जैसा कंपनी का दावा था। निखिल जैन ने बताया कि दावे के अनुसार, उन्हें 3 सप्ताह में कोई भी संतोषजनक परिणाम हासिल नहीं हुआ। निखिल जैन ने आरोप लगाया कि यह झूठे दावे उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हैं।

उन्होंने कहा कि ना सिर्फ क्रीम पर बल्कि ऐसे ही दावे क्रीम को लेकर वेबसाईट और टीवी पर भी किए। निखिल जैन ने आरोप लगाया कि इस मामले में परिणाम ना पाने के बाद उन्होंने इमामी कम्पनी को तमाम इमेल लिखे लेकिन कोई भी जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद बाद उन्होंने कम्पनी पर केस कर दिया।

निखिल जैन ने इमामी पर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाते हुए ₹20 लाख के हर्जाने की माँग की थी। निखिल जैन का यह मामला 2013 से ही से ही चल रहा था। निखिल जैन ने इस मामले में अपनी तरफ से फेयर एंड हैंडसम क्रीम के प्रचार की सीडी समेत बाकी सबूत भी रखे।

इमामी ने क्या कहा?

इमामी ने फोरम में दावा किया कि निखिल जैन का क्रीम खरीदने का दावा झूठा है। इमामी के वकील ने कहा कि निखिल जैन यह नहीं सिद्ध कर सके कि उन्होंने खुद ही यह क्रीम खरीदी क्योंकि बिल पर कोई सीरियल नंबर नहीं है। इमामी ने कहा कि दुनिया में किसी भी क्रीम का परिणाम कई कारकों पर निर्भर करता है।

इमामी ने कहा कि सही परिणाम पाने के लिए क्रीम का उचित उपयोग और पौष्टिक आहार, व्यायाम, स्वस्थ आदतें, स्वच्छ रहने की स्थिति आदि कारक भी जरूरी हैं। इमामी ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि निखिल जैन ने अपनी त्वचा की स्थिति के लिए नियमित रूप से क्रीम का इस्तेमाल किया या इससे कोई सुधार नहीं हुआ।

इमामी ने कहा कि निखिल जैन का दावा त्वचा विशेषज्ञ से उचित मेडिकल सलाह के बिना किया गया है। इमामी ने कहा कि निखिल जैन ने अपनी जीवनशैली के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। ऐसे में यह शिकायत ठीक नहीं है। इमामी ने यह भी दलील दी कि यह मुकदमा कंपनी की छवि बिगाड़ने के लिए दायर किया गया है।

क्या बोला उपभोक्ता फोरम?

उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में सुनवाई के बाद 9 दिसम्बर, 2024 को फैसला दिया। फोरम ने कहा कि इमामी फेयर एंड हैंडसम क्रीम की पैकेजिंग और लेबलिंग पर थोड़े से निर्देशों के साथ यह कह रही है कि इसके तीन सप्ताह तक नियमित उपयोग से किसी पुरुष की त्वचा में गोरापन आ जाएगा, यह जानते हुए भी कि इस पर दिए गए निर्देश अधूरे हैं।

फोरम ने कहा कि अगर क्रीम खरीदने वाला बाकी चीजों का पालन नहीं करता, तो वह गोरा नहीं हो पाएगा, इसके बाद भी कोई निर्देश नहीं दिया गया। फोरम ने कहा कि ऐसे में कोई भी सामान्य बुद्धि वाला व्यक्ति यही मानेगा कि यदि वह तीन सप्ताह तक क्रीम लगाए तो गोरा हो जाएगा। फोरम ने कहा कि यह भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यवहार है।

फोरम ने कहा कि इमामी ने ऐसा प्रचार अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए अपनाई थी। फोरम ने गलत प्रचार करने के चलते इमामी पर ₹15 लाख का जुर्माना ठोंका। इसमें से ₹14.5 लाख की धनराशि राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष दिल्ली और बाकी ₹50 हजार शिकायतकर्ता निखिल जैन को देने का आदेश दिया गया है। फोरम ने कहा है कि यह पैसा 45 दिन के भीतर देना होगा। निखिल जैन को इसके साथ ही ₹10 हजार भी मिलेंगे। यह धनराशि मुकदमे में खर्च की भरपाई के रूप में दी जाएगी।

झारखंड में INDI गठबंधन की सरकार बनते ही देवघर के बाबा मंदिर में शिवलिंग का बदल दिया रूप, बीजेपी MP ने साझा की तस्वीर: विवाद के बाद DC ने मंदिर समिति के मुख्य प्रबंधक से छीने अधिकार

झारखंड में INDI गठबंधन की सरकार बनते ही देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिवलिंग और अरघा का स्वरूप बदलने की कोशिश की गई। शिवलिंग और अरघे पर सीमेंट जैसा कुछ लेप लगाने के बाद विवाद हो गया है। इसके बाद देवघर के कलेक्टर ने एक्शन लेते लेते हुए मंदिर के मुख्य प्रबंधक रमेश परिहस्त के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार छीन लिए हैं। वहीं, मंदिर के कर्मचारी हरिलाल पांडे को निलंबित कर दिया है।

गोड्डा से भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने शिवलिंग की तस्वीर को साझा करते हुए सोशल मीडिया X पर लिखा, “द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ तथा 51 शक्तिपीठों में से एक ह्रदय पीठ देवघर में झारखंड सरकार का यह अनर्थ, शिवलिंग पर सीमेंट धार्मिक आस्था पर कॉन्ग्रेस सरकार का सीधा प्रहार है। भगवान शिव के घर में अनर्थ। बाबा न्याय करेंगे।”

घटना का संज्ञान लेते हुए देवघर के उपायुक्त ने रविवार (8 दिसंबर 2024) को मंदिर प्रभारी देवघर के एसडीओ को जाँच करके 24 घंटे में रिपोर्ट देने के लिए कहा था। एसडीओ ने सोमवार (9 दिसंबर 2024) को मंदिर पहुँचकर जाँच की। इस दौरान उन्होंने गर्भगृह में हुए कार्य का सीसीटीवी फुटेज देखा। इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार करके जिलाधिकारी को सौंप दिया।

देवघर के जिलाधिकारी ने कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया X पर किए गए अपने पोस्ट में लिखा, “सोशल मीडिया के माध्यम से बाबा मंदिर के गर्भगृह में किए गए कार्यों से जुड़े मामले को संज्ञान लेते हुए मंदिर प्रभारी को जाँच कर प्रतिवेदन समर्पित करने का निर्देश दिया है। साथ ही अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरतने वालो कर्मियों पर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।”

दरअसल, शनिवार (7 दिसंबर 2024) को मंदिर के गर्भगृह में विशेष सफाई की बात कहकर दोपहर तीन बजे मंदिर का पट बंद कर दिया गया था। उसके बाद मंदिर का पट श्रृंगार पूजा के दौरान खोला गया और पूजा की गई। जब दोबारा रविवार को मंदिर का पट खोला गया तो शिवलिंग के ऊपर सीमेंट जैसी चीज लगी थी।

आरोप है कि बैजनाथ धाम मंदिर के गर्भगृह को सफाई के नाम पर बंद करके शिवलिंग पर ‘सीमेंट’ जैसी चीज का लेप लगाया। इसके साथ ही गर्भगृह में टूटे हुए टाइल्स को बदला गया था। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि कोर्ट के निर्देश पर मंदिरों के गर्भगृह में किसी तरह का काम करने से पहले मंदिर प्रशासन को पुरोहित समाज तथा सरदार पंडा की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। हालाँकि, उनसे स्वीकृति नहीं ली गई।

तेलंगाना में 4 बार MLA रहे BRS नेता चेनमानेनी रमेश की भारतीय नागरिकता हाई कोर्ट ने रद्द की, ₹30 लाख का जुर्माना भी: जर्मन सिटीजन होने की बात छिपाई थी

तेलंगाना हाई कोर्ट ने 9 दिसंबर 2024 को एक ऐतिहासिक फैसले में पूर्व बीआरएस विधायक चेनमानेनी रमेश की भारतीय नागरिकता रद्द कर उन्हें जर्मन नागरिक घोषित किया। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने पाया कि रमेश ने अपनी जर्मन नागरिकता छुपाकर न्यायपालिका और जनता को गुमराह किया। यह पहली बार है जब किसी पूर्व विधायक की भारतीय नागरिकता रद्द की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी ने अपने फैसले में कहा कि चेनमानेनी रमेश 2009 से भारतीय नागरिक होने का दावा करते हुए चुनाव लड़ते रहे, जबकि वे जर्मन नागरिक थे। गृह मंत्रालय पहले ही उनकी भारतीय नागरिकता रद्द कर चुका था। हाई कोर्ट ने मंत्रालय के इस फैसले को सही ठहराया।

चेनमानेनी रमेश ने 1990 के दशक में जर्मनी की नागरिकता ली थी। उन्होंने वहाँ नौकरी की, शादी की और परिवार बसाया। 2008 में उन्होंने भारतीय नागरिकता हासिल करने का दावा किया, लेकिन गृह मंत्रालय की जाँच में पाया गया कि रमेश ने अपनी जर्मन नागरिकता छोड़ी ही नहीं थी। उनका जर्मन पासपोर्ट 2023 तक वैध था।

रमेश ने 2009 में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) से पहली बार विधायक का चुनाव जीता। बाद में वे बीआरएस (तत्कालीन टीआरएस) में शामिल हो गए और 2010, 2014, और 2019 में विधायक चुने गए।

कॉन्ग्रेस नेता और वर्तमान विधायक आदी श्रीनिवास ने चेनमानेनी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी। कोर्ट ने रमेश पर लगाए गए 30 लाख रुपये के जुर्माने में से 25 लाख रुपये आदी श्रीनिवास को देने का आदेश दिया, जबकि बाकी 5 लाख रुपये तेलंगाना स्टेट लीगल सर्विसेस अथॉरिटी को दिए जाएँगे।

आदी श्रीनिवास ने 2009 से चेनमानेनी रमेश की नागरिकता को लेकर सवाल उठाए थे। श्रीनिवास का कहना था कि रमेश ने गलत जानकारी देकर भारतीय नागरिकता हासिल की और चुनाव लड़ा। रमेश ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा उनकी नागरिकता रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी। लेकिन कोर्ट ने पाया कि रमेश ने जर्मन नागरिकता छोड़ने का कोई सबूत पेश नहीं किया।

इस फैसले से तेलंगाना की राजनीति में हलचल मच गई है। कॉन्ग्रेस के टिकट पर साल 2023 में विधायकी जीते आदी श्रीनिवास ने इसे न्याय की जीत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह फैसला उन लोगों के लिए संदेश है जो झूठे दावे कर चुनाव लड़ते हैं।”

चेनमानेनी रमेश के लिए यह फैसला राजनीतिक और कानूनी तौर पर एक बड़ा झटका है। भारतीय संविधान और जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत, गैर-भारतीय नागरिक चुनाव लड़ने या वोट देने के पात्र नहीं होते।

40 टन RDX, 2000 टैंक शेल, 40000 तोप के गोले… भारत के खिलाफ ‘जिहाद’ की तैयारी कर रहा है बांग्लादेश, पाकिस्तानी विशेषज्ञ का खुलासा: पहले भी इस बॉर्डर का इस्तेमाल कर चुके हैं आतंकी

शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख बने मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि भारत के साथ उसके रिश्ते मजबूत और बेहद नजदीकी हैं। यूनुस ने यह बात भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से ढाका में मुलाकात के बाद कही। हालाँकि, वहाँ पर अल्पसंख्यक हिंदुओं का नरसंहार जारी है। दूसरी तरफ बांग्लादेश की सरकार भारत के दुश्मन पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ा रहा है और हथियार खरीद रहा है।

एक तरफ बांग्लादेश अपने पड़ोसी भारत के साथ नजदीकी रिश्ते की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के सहयोग से भारत में आतंक फैलाने की योजना बना रखी है। बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमले इसके उदाहरण हैं। अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के व्यवसायी एवं पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ साजिद तरार ने भारत को सतर्क रहने की सलाह दी है।

साजिद तरार ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बॉर्डर के पास ‘अल-जिहाद… अल-जिहाद‘ के नारे लग रहे हैं। यह भारत के बेहद गंभीर चिंता की बात है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार डॉक्टर मोहम्मद यूनुस ने न सिर्फ पाकिस्तान को 25,000 टन चीनी का ऑर्डर दिया है, बल्कि बड़े पैमाने पर हथियारों के लिए भी ऑर्डर दिया है।

उन्होंने कहा कि भारत को पूरी तरह तैयार रहना होगा और आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कड़े ऐक्शन लेंगे होंगे, क्योंकि भारत की सीमा के दोनों तरफ जिहाद के नारे लग रहे हैं। तरार ने कहा, “बांग्लादेश ने पाकिस्तान से 40 टन आरडीएक्स, 28 हजार उच्च तीव्रता वाले प्रोजेक्टाइल, 2 हजार टैंक शेल और 40 हजार राउंड आर्टिलरी की आपूर्ति माँगी है।”

आशंका जताते हुए तरार ने कहा कि मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तानियोें के लिए बांग्लादेश के लोगों के लिए वीजा के नियमों में भी छूट दी है। इससे पहले किसी भी पाकिस्तानी को वीजा हासिल करने के लिए NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लगाना पड़ता था। अब इस नियम को खत्म कर दिया गया है। इससे इस्लामी आतंकी आसानी से बांग्लादेश में घुस सकेंगे और फिर बॉर्डर पाकर भारत में घुस सकते हैं।

साजिद तरार ने कहा कि भारत में कुछ लोग पिछले अनुभवों को याद करके बेहद परेशान हैं। इन लोगों का मानना ​​है कि बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) के पिछले कार्यकाल के दौरान लश्कर-ए-तैयबा, मसूद अजहर और सज्जाद अफगानी जैसे आतंकवादी बांग्लादेशी सीमा के जरिए ही भारत में घुसे थे और मुंबई हमलों को अंजाम दिया था।

साजिद तरार ने कहा कि बीएनपी 1991 से 1996 तक और फिर 2001 से 2005 तक बांग्लादेश की सत्ता में थी। उस समय मसूद अजहर और सज्जाद अफगानी, दोनों ही बांग्लादेश की सीमा से आए थे। उन्होंने कहा कि डेविड हेडली और तहव्वुर राणा, जो अमेरिकी और कनाडाई थे, उनके भी बांग्लादेश से गंभीर संबंध थे। डेविड हेडली और तहव्वुर राणा ने मुंबई हमलों के लिए रेकी की थी।

साजिद तरार ने कहा, “कुछ लोग कहते हैं कि लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी बांग्लादेश में खुलेआम घूम रहे थे। इस समय भारत के अंदर भी कुछ लोग परेशान हैं और वे कहते हैं कि वे अब बांग्लादेश की तरफ से कश्मीर का समर्थन करना शुरू कर देंगे।” उन्होंने कहा कि इन सब चीजों के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है।

जहाँ बसे हैं 600+ ईसाई-हिंदू परिवार, वो जमीन वक्फ की ही: मुस्लिम लीग ने सहयोगी कॉन्ग्रेस के स्टैंड का किया विरोध, केरल के मुनम्बम में समंदर किनारे की 400 एकड़ जमीन पर बोर्ड कर रहा दावा

केरल में कॉन्ग्रेस की गठबंधन वाली पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने मुनम्बम जमीन का मालिक वक्फ बोर्ड को बताया है। मुस्लिम लीग ने कहा है कि सारे कागज इस बात की पुष्टि करते हैं। वहीं कॉन्ग्रेस लगातार इस जमीन पर वक्फ के कब्जे का विरोध कर रही है। मुस्लिम लीग के जड़ता के रवैये के चलते अब कॉन्ग्रेस पर विश्वसनीयता का संकट पैदा हो गया है।

मुस्लिम लीग के नेता KM शाजी ने कहा, “मुनम्बम एक गंभीर मुद्दा है। नेता प्रतिपक्ष (कॉन्ग्रेस नेता सतीशन) ने कहा कि यह वक्फ की जमीन नहीं है। मुस्लिम लीग इस राय से इत्तेफाक नहीं रखती। हम यह नहीं कह सकते कि मुनम्बम वक्फ की संपत्ति नहीं है। फारूक कॉलेज ने कहा है कि यह वक्फ की जमीन नहीं है। उन्हें यह कहने का कोई अधिकार नहीं है।”

मुस्लिम लीग के ही नेता MK मुनीर ने कहा कि उनकी पार्टी ने मुनम्बम के वक्फ जमीन ना होने का दावा कभी नहीं किया है। वहीं मलप्पुरम से मुस्लिम लीग के सांसद ET मुहम्मद बशीर ने भी इस मुद्दे पर वक्फ बोर्ड का ही समर्थन किया है। उन्होंने मुस्लिम लीग का स्टैंड दिल्ली में आकर स्पष्ट किया है।

ET मुहम्मद बशीर ने कहा, “कुछ लोग कह रहे हैं कि यह वक्फ की जमीन नहीं है। मैं पहली बार इस पर जवाब दे रहा हूँ, यह वक्फ की ही जमीन है। इसके वक्फ की जमीन ना होने के तर्क गलत हैं। इसको सिद्ध करने के लिए कागजी सबूत मौजूद हैं।”

मुस्लिम लीग का मुनम्बम जमीन मुद्दे पर यह रवैया अब कॉन्ग्रेस के लिए मुश्किल बन रहा है। केरल में कॉन्ग्रेस के बड़े नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन ने हाल ही में मुनम्बम में वक्फ के कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों से मुलाक़ात की थी। सतीशन ने तब स्पष्ट किया था कि मुनम्बम में जमीन पर वक्फ का मालिकाना हक़ नहीं हो सकता।

2 दिसम्बर, 2024 को मुनम्बम में प्रदर्शनकारियों से मिलने के बाद सतीशन ने कहा, “उन्होंने कहा, “राज्य सरकार का वक्फ बोर्ड ही सिर्फ दावा कर रहा है कि जमीन वक्फ की है। जिस जमीन पर लोग रह रहे हैं, इस पर कई शर्तें लागू होती हैं। इस जमीन को बेचे जाने के बाद वक्फ सम्पत्ति नहीं बताया जा सकता। ऐसे में, मुनाम्बम की जमीन वक्फ के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है।”

सतीशन ने कहा था कि इस जमीन पर यहाँ के रहने वालों का पूरा हक़ है। उनके इस स्टैंड का ही बाद में मुस्लिम लीग ने विरोध कर दिया। मुस्लिम लीग ने साफ़ कर दिया कि वह इस जमीन पर वक्फ का ही मालिकाना हक़ मानते हैं और कॉन्ग्रेस के रवैये से ताल्लुक नहीं रखते। बीते कुछ माह से मुनम्बम में 600 परिवारों की जमीन पर वक्फ के दावे को लेकर विवाद चल रहा है।

साल 1902 तक जाती है विवाद की जड़

1341 ईस्वी में केरल में भयानक बाढ़ आई थी। इस दौरान वाइपिन आईलैंड के ऊतरी हिस्से पर मुनम्बम बना। साल 1503 में पुर्तगालियों ने यहाँ हमला किया और 1663 में डचों ने इस पर कब्जा कर लिया। यह डचों के अधिकार में लंबे समय तक रहा। इसके बाद 1789 ईस्वी में डचों ने मुनम्बम को त्रावणकोर के महाराजा को बेच दिया। इसके बाद विवाद की शुरुआत होती है।

साल 1902 में त्रावणकोर के महाराजा ने गुजरात से आए एक किसान अब्दुल सत्तार मूसा हाजी सैत को यहाँ की 404 एकड़ जमीन और 60 एकड़ जल क्षेत्र पट्टे पर दिया था। उस समय, यह जमीन मछुआरों के लिए अलग रखी गई थी, जो वहाँ कई वर्षों से रह रहे थे। 1948 में सेठ के उत्तराधिकारी एवं दामाद सिद्दीक सैत ने यह जमीन अपने नाम पर पंजीकृत करवा ली।

इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा समुद्री कटाव के कारण खो गया और साल 1934 की भारी बारिश ने पांडरा समुद्र किनारे की जमीन को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। हालाँकि, सिद्दीक सैत द्वारा पंजीकृत जमीन में मछुआरों के रहने वाले इलाके भी शामिल हो गए। साल 1950 में सिद्दीक सैत ने यह जमीन फारूक कॉलेज को उपहार में दे दी, जो मुस्लिमों को शिक्षित करने के लिए 1948 में बनाया गया था।

इसके साथ ही सिद्दीकी सैत ने शर्त रखी थी। शर्त यह थी कि कॉलेज केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए ही इसका उपयोग करेगा। अगर कभी कॉलेज बंद हो जाता है तो जमीन वापस सिद्दीकी सैत के वंशजों को लौटा दी जाएगी। हालाँकि, दस्तावेजों में गलती से या जानबूझकर ‘वक्फ’ शब्द लिख दिया गया, जिससे अब यह विवाद खड़ा हो गया है। कहा जाता है कि 1 नवंबर 1950 को कोच्चि के एडापल्ली में उप-पंजीयक कार्यालय में एक वक्फ पंजीकृत किया गया था। इसमें सैत ने फारूक कॉलेज के अध्यक्ष के पक्ष में पंजीकृत कराया था।

विवाद की शुरुआत और आयोग का गठन

फारूख कॉलेज के प्रबंधन को करीब एक दशक बाद जमीन का मालिकाना हक मिल गया। साल 1960 के दशक के आखिर में जमीन पर कब्जा करने वालों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। कॉलेज प्रबंधन यहाँ रहने वाले लोगों को बेदखल करना चाहता था। कैथोलिक ईसाई और दलित हिंदू समुदाय के ये लोग पीढ़ियों से वहाँ रह रहे थे, लेकिन उनके पास स्वामित्व साबित करने के लिए कानूनी दस्तावेज नहीं थे।

आखिरकार, अदालत के बाहर समझौते में कॉलेज प्रबंधन ने बाजार दर पर जमीन को अपने कब्जेदारों को बेचने का फैसला किया। दस्तावेजों से पता चलता है कि बिक्री के कामों में कॉलेज प्रबंधन ने यह उल्लेख नहीं किया कि विचाराधीन भूमि वक्फ संपत्ति थी, जिसे शिक्षा के उद्देश्य से कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष को दिया गया था। इसके बजाय उन्होंने कहा कि यह संपत्ति 1950 में गिफ्ट डीड में मिली थी।

निसार आयोग और नया विवाद: केरल राज्य वक्फ बोर्ड के खिलाफ कई शिकायतों मिलने के बाद वीएस अच्युतानंदन के नेतृत्व वाली सीपीआई (एम) सरकार ने 2008 में एक आयोग गठित किया। यह आयोग सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश एमए निसार के नेतृत्व में नियुक्त किया गया। आयोग का काम बोर्ड द्वारा परिसंपत्तियों के नुकसान के लिए जिम्मेदारी तय करना था।

इसके अलावा, अयोग को इन परिसंपत्तियों की वसूली के लिए कार्रवाई की सिफारिश करना भी शामिल था। आयोग ने साल 2009 में अपनी रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट में आयोग ने मुनम्बम में जमीन को वक्फ संपत्ति माना और कहा कि कॉलेज प्रबंधन ने बोर्ड की सहमति के बिना इसकी बिक्री को मंजूरी दे दी थी। इसने इसकी वसूली के लिए कार्रवाई की सिफारिश की थी।

वक्फ बोर्ड ने घोषित कर दी वक्फ संपत्ति: इसके बाद साल 2019 में वक्फ बोर्ड ने खुद ही मुनम्बम भूमि को वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 40 और 41 के अनुसार वक्फ संपत्ति घोषित कर दी। बोर्ड ने राजस्व विभाग को निर्देश दिया कि वह भूमि के वर्तमान कब्जेदारों (जो कई वर्षों से कर का भुगतान कर रहे थे) से भूमि कर स्वीकार ना करे।

राजस्व विभाग को दिए गए इस निर्देश को राज्य सरकार ने साल 2022 में खारिज कर दिया। इसके बाद बोर्ड ने राज्य सरकार के फैसले को केरल हाई कोर्ट में उसी साल चुनौती दी। न्यायालय ने फिलहाल राज्य सरकार के फैसलों पर रोक लगा दी है। वर्तमान में, इस विवाद को लेकर भूमि के कब्जेदारों के साथ-साथ वक्फ संरक्षण समिति की ओर से एक दर्जन से अधिक अपीलें न्यायालय में लंबित हैं।

हालात को लेकर असमंजस में लोग

मुनम्बम में 610 परिवारों रहते हैं, जिनमें 510 कैथोलिक ईसाई और 100 हिंदू परिवार हैं। इन लोगों कहना है कि इन लोगों ने फारूक कॉलेज के मैनेजमेंट से यह जमीन खरीदी थी। इसको लेकर वे पिछले 60 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं, साल 2019 में वक्फ ने इसे अपनी संपत्ति घोषित कर दी।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, मुनम्बम में रहने वाले समर समिति (एक्शन काउंसिल) के संयोजक जोसेफ बेनी ने बताया कि यहाँ पर अधिकतर मछुआरा समुदाय के लोग रहते हैं। वे पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हैं और सालों से टैक्स भर रहे हैं। बेनी का कहना है कि साल 2022 में उन्हें बताया गया था कि वे टैक्स नहीं भर पाएँगे और ना ही जमीन बेच या गिरवी रख सकते हैं।

लगभग 68 साल की ओमाना यायी का कहना है कि वह पिछले 50 साल से मुनम्बम में रह रही हैं। उनकी शादी यहीं से हुई थी। उन्होंने कहा कि जब कॉलेज वालों से जमीन खरीदी गई थी, तब यहाँ पानी भरा हुआ था। उन्होंने कहा, “हम आधी रात को मछली पकड़ने जाते थे और लौटते समय सिर पर रेत लेकर आते थे। रेत भर-भरकर जमीन ऊँचा किया, तब यह जमीन रहने लायक हुई। इसमें वक्फ कहाँ से आ गया?”

‘वे सिर्फ आँख सेंकने जा रहे हैं’: नीतीश कुमार की ‘महिला संवाद यात्रा’ पर लालू यादव के बिगड़े बोल, ममता को INDI गठबंधन का नेता बनवाकर क्या करना चाहते हैं RJD सुप्रीमो?

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। लालू ने कहा कि नीतीश कुमार ‘महिला संवाद यात्रा’ के नाम पर नयन सुख लेने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पहले अपनी आँख सेंके, फिर बिहार विधानसभा चुनावों में 225 सीट लेने की बात करेंगे। लालू ने INDI गठबंधन को लेकर कॉन्ग्रेस को भी झटका दिया है।

दरअसल, बिहार की महिलाओं से संवाद स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही ‘महिला संवाद यात्रा’ निकलने जा रहे हैं। वे अलग जिलों में जाकर महिलाओं से बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं एवं सरकारी योजनाओं को लेकर उनके विचार सुनेंगे। इसको लेकर विपक्षी दल राजद के तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार यात्रा के नाम पर पैसे की बर्बादी कर रहे हैं।

महिला यात्रा को लेकर जब संवाददाताओं ने लालू यादव से सवाल किए तो उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार नयन सेंकने जा रहे हैं।” नीतीश कुमार द्वारा बिहार में NDA को 225 सीटें मिलने के सवाल पर लालू यादव ने कहा, “अरे, पहले वो आँख सेंके ना अपना। जा रहे हैं आँख सेंकने।” लालू यादव के बयान पर जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि लालू की बुद्धि आज भी चरवाहा विद्यालय वाली ही है।

INDI गठबंधन की कमान ममता को दी जाए: लालू

लालू यादव ने बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस दावे का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने INDI गठबंधन की कमान सँभालने की बात कही थी। लालू ने कहा कि INDI गठबंधन की कमान ममता बनर्जी की दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के विरोध का कोई मतलब नहीं है। ममता को ही नेता बनाया जाना चाहिए।

इससे पहले लालू यादव के बेटे एवं राजद के नेता तेजस्वी यादव ने कहा था कि ममता बनर्जी समेत इंडिया ब्लॉक के किसी भी वरिष्ठ नेता द्वारा गठबंधन का नेतृत्व करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा था कि इस निर्णय पर आम सहमति से पहुँचा जाना चाहिए। बता दें कि राजद ने दावा किया था कि INDI गठबंधन के असली आर्किटेक्ट लालू हैं।

दरअसल, महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में INDI गठबंधन की करारी हार के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने गठबंधन को संभालने की इच्छा दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि वह INDI गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। हालाँकि, ममता बनर्जी के बयान का कॉन्ग्रेस ने विरोध किया था। वहीं, जबकि समाजवादी पार्टी और उद्धव ठाकरे गुट ने समर्थन किया था।

एक इंटरव्यू में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा था कि उन्होंने ने ही INDI गठबंधन को बनाया है। अगर इस गठबंधन का इसका नेतृत्व करने वाले इसे ठीक से नहीं चला सकते तो उन्हें (ममता को) मौका दें। ममता ने कहा था कि वह बंगाल से इस गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। बता दें कि गठबंधन का नेतृत्व फिलहाल कॉन्ग्रेस कर रही है।

सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के मोहल्ले में संभल पुलिस की रेड, महबर और ताजवर के घर से मिले तमंचे: मुल्ला के घर से स्मैक बरामद, 36 बाइकों का भी चालान

संभल में 24 नवंबर 2024 को मुस्लिमों की भीड़ द्वारा पुलिस पर किए गए हमले के बाद दंगाइयों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई जारी है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने सोमवार (9 दिसंबर) को सांसद जियाउर्रहमान के मोहल्ले में दबिश दी। दबिश के दौरान अवैध हथियारों के साथ नशीले पदार्थों की भी खेप बरामद हुई है। इस दौरान 36 बाइकों का चालान किया गया और 4 को सीज कर दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल हिंसा में कार्रवाई के तहत पुलिस ने नखासा थाना क्षेत्र के तिमरदास सराय इलाके में सोमवार को करीब 3 बजे छापेमारी की। इस दौरान 13 घरों की सघन तलाशी ली गई। इनमें से मुल्ला आसिफ के घर से स्मैक की 93 पुड़िया बरामद हुईं। वहीं, ताजवर और महबर के घरों से 315 बोर के तमंचे बरामद किए गए। पुलिस ने महबर को हिरासत में लिया, जो 1999 में हत्या के एक मामले में जेल की सजा काट चुका है।

पुलिस का दावा है कि 315 बोर की गोलियाँ हिंसा के दौरान मारे गए उपद्रवियों के शवों से भी बरामद हुई थीं। फ़िलहाल महबर, मुल्ला आसिफ और ताजवर के घरों में मिले लोगों को पुलिस थाने ले कर गई। पूरे मामले की न्यायिक जाँच जारी है, और प्रशासन दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कह रहा है।

सपा सांसद जियाउर्रहमान के घर के आगे भी पुलिस ने दो बार पैदल मार्च किया। जिले भर में वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। सोमवार को ही कुल 36 बाइकों का चालान किया गया। इसमें से 4 को सीज कर दिया गया है।

संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि तलाशी अभियान जनपद में बाहरी लोगों की मौजूदगी की सूचना पर चलाया जा रहा है। बाहर से कौन लोग किस वजह से आए हैं इसकी तस्दीक करवाई जा रही है। बकौल SP तलाशी अभियान आगे भी जारी रहेगा। बरामद सामान सील कर जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

बताते चलें कि 24 नवंबर को संभल की जामा मस्जिद का सर्वे करने के लिए न्यायालय के आदेश पर एक टीम पहुँची थी। इस टीम को मुस्लिम भीड़ घेरने लगी। पुलिस ने भीड़ को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उपद्रवियों ने पत्थरबाजी कर दी। हिंसा में डिप्टी कलेक्टर, DSP और लगभग 2 दर्जन अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने बल प्रयोग कर के भीड़ को तितर-बितर किया था। पूरे मामले की न्यायिक जाँच जारी है।

शहजाद अजमेरी और जहीर सोलंकी ने कराई अविवाहित हिंदू युवक की नसबंदी, लालच देकर पूरा किया ‘टारगेट’: विहिप ने लगाया हिंदुओं को निशाना बनाने का आरोप

गुजरात के मेहसाणा जिले में नसबंदी कांड ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मियों शहजाद अजमेरी और जहीर सोलंकी ने अपने टारगेट पूरा करने के लिए दो युवकों की बिना सहमति के नसबंदी कर दी। पीड़ितों में से एक युवक की शादी एक महीने बाद शादी होने वाली थी। इस घटना के बाद लड़की वालों ने रिश्ता तोड़ दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वास्थ्यकर्मी शहजाद अजमेरी ने नवी शेधावी गाँव निवासी 31 साल के अविवाहित गोविंद धनतरी को काम का लालच देकर झाँसा दिया। शहजाद ने गोविंद से कहा कि उसे खेतों में मजदूरी के लिए ले जाया जाएगा। लेकिन इसके बजाय उसे एडालज अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुँचने के बाद गोविंद को शराब पिलाई गई और नसबंदी के लिए सहमति पत्र पर उसके अंगूठे का निशान ले लिया गया। कागजों में उसे विवाहित दिखाया गया, ताकि नियमों का उल्लंघन छुपाया जा सके।

इस घटना में मुख्य आरोपित शहजाद अजमेरी और जहीर सोलंकी हैं। शहजाद का एक ऑपरेशन का टारगेट बाकी था, जिसे पूरा करने के लिए उसने जहीर के साथ मिलकर गोविंद की नसबंदी की। दोनों स्वास्थ्यकर्मी अब निलंबित हैं। शहजाद ने दावा किया कि वह निर्दोष है और जहीर ने ही युवक को लाकर ऑपरेशन कराया।

इस घटना ने विभाग में टारगेट आधारित नसबंदी अभियान की पोल खोल दी है। स्वास्थ्य अधिकारी जी.बी. गढ़वी ने स्वीकार किया कि सबरकांठा में 375 ऑपरेशनों को टारगेट बेस पर अंजाम दिया गया। हालाँकि, स्वास्थ्य मंत्री रिषिकेश पटेल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नसबंदी पूरी तरह स्वैच्छिक है।

बहरलहाल, घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए धनाली स्वास्थ्य केंद्र के मल्टीपर्पज स्वास्थ्यकर्मी शहजाद अजमेरी को निलंबित कर दिया। उन्हें मेहसाणा से खेरालु स्वास्थ्य केंद्र स्थानांतरित किया गया। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने 8 अन्य कर्मचारियों को नोटिस जारी किया और मामले की विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं। इस कांड के बाद विभाग ने एडालज अस्पताल में 22 नवंबप 2024 को हुए सभी 28 नसबंदी ऑपरेशनों की जाँच शुरू कर दी है।

विहिप ने लगाया हिंदुओं को टारगेट करने का आरोप

विश्व हिंदू परिषद ने इस मामले को हिंदू युवकों को टारगेट करने की साजिश बताया है। यह कांड न केवल स्वास्थ्य विभाग की खामियों को उजागर करता है, बल्कि लोगों के विश्वास को भी गहरा आघात पहुँचाता है। पीड़ितों को न्याय और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

माथे पर तिलक और हाथ में त्रिशूल, हिंदू-गोरक्षक बनने का नाटक कर उमर गैंग करता था गोतस्करी-गोहत्या: UP पुलिस ने पैर में गोली मार कर पकड़ा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में पुलिस ने 7 गोतस्कर को मुठभेड़ के बाद पकड़ा है। यह सभी हिन्दू गोरक्षक बन कर गायों की तस्करी करते थे। गायों को काटने के लिए ले जाने के दौरान यह भगवा गमछा गले में डाल लेते थे और माथे पर तिलक लगा कर चलते थे। इनके खिलाफ पहले से भी कई मामले दर्ज हैं।

पुलिस ने बताया कि 8 दिसम्बर, 2024 को उसे रात में सतरिख थाना क्षेत्र में गोतस्करों के होने की सूचना मिली थी। पुलिस को पता चला था कि यहाँ कुछ लोग एक जंगल में घूम रहे हैं और उनके पास दो तीन गाड़ियाँ भी हैं। इनके पास एक गाय भी बंधी हुई थी।

इसके बाद जब पुलिस टीम मौके पर पहुँची तो इन गोतस्करों ने फायरिंग कर दी। पुलिस ने इसका जवाब दिया। इस फायरिंग में सरवर और गुफरान पैर में गोली लगने के कारण घायल हो गए। पुलिस ने उनके साथ अंकुल, उमर, नवीजान, इरफ़ान और अजीज को पकड़ा है। यह सभी गोतस्कर बाराबंकी और सीतापुर के रहने वाले हैं।

पुलिस ने इनके पास से 2 तमंचे और गाय काटने वाला चापड़ बरामद किया है। इनके पास से एक इको गाड़ी और एक मोटरसाइकिल भी बरामद हुई है। एक गाय भी इनके पास से बरामद हुई है। आशंका थी कि यह आसपास से गाय पकड़ कर लाते हैं और फिर उनको काट कर हिन्दू बन कर तस्करी करते हैं।

पुलिस ने खुलासा किया है कि इनका सरगना उमर गोतस्करी करने के लिए गोरक्षक बन कर गायों को ले जाता था। वह गायों की तस्करी वाली गाड़ी में आगे गमछा डाल कर बैठता था। साथ ही माथे पर तिलक लगाता था और हाथ में त्रिशूल तक रखता था। कोई अगर उसे पूछता था तो खुद को गोरक्षक बताता था।

यह ट्रिक उसने पहले गोतस्करी के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद अपनाई थी। पुलिस ने बताया है कि इन गोतस्करों पर पहले से 14 मामले दर्ज हैं। इनमें से अधिकांश मामले गौहत्या सम्बन्धी ही हैं। पुलिस ने इन सभी गोतस्करों के खिलाफ नए मुकदमे भी दर्ज किए हैं और जाँच कर रही है कि कि इन्होने कितनी गायों की तस्करी की है। पुलिस इनके खिलाफ पुराने मुकदमे भी खोल रही है और उन सभी थानों से जानकारी मँगवा रही है।

कंपनी ने वर्क स्ट्रेस को लेकर कराया सर्वे, कर्मचारियों को दे दी नई टेंशन: 100 लोगों को नौकरी से निकाला, नेटिजन्स बोले- गरीब की आँख फोड़ दो ताकि वो गरीबी न देख सके

सोशल मीडिया में नोएडा की एक कंपनी यस मैडम (Yes Madam) चर्चा में है। डोरस्टेप ब्यूटी सर्विस देने वाली इस कंपनी को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसने करीब 100 कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाल दिया है। एक वायरल ई-मेल की माने तो ऐसा कंपनी के भीतर वर्क स्ट्रेस जानने को लेकर किए गए सर्वे के बाद किया गया है।

लिंक्डइन पर अनुष्का दत्ता ने यह मेल शेयर किया है। अनुष्का ने बॉयो में खुद को यस मैडम में ‘यूएक्स कॉपीराइटर’ बताया है। अपने पोस्ट में लिखा है, “यस मैडम में क्या हो रहा है? पहले कंपनी एक रैंडम सर्वे करते हैं और फिर रातोंरात हमें नौकरी से निकाल दिया गया, क्योंकि हम तनाव महसूस कर रहे? ऐसा मेरे ही साथ नहीं हुआ है। 100 अन्य लोगों को भी नौकरी से निकाला गया है।”

अनुष्का ने इस पोस्ट के साथ एक ई मेल का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। कथित तौर पर नौकरी से निकाले गए लोगों को कंपनी की एचआर की तरफ से यह मेल भेजा गया है। इसमें लिखा है;

हाल में हमने काम पर तनाव के बारे में आपकी भावनाओं को समझने के लिए एक सर्वे किया। आपमें से कई ने अपनी चिंताएँ साझा की। इसे हम काफी महत्व देते हैं और सम्मान करते हैं। हेल्दी और सपोर्टिव वर्क एनवायरनमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध कंपनी के तौर पर हमने इस फीडबैक पर काफी विचार किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी काम पर तनावग्रस्त न रहे, हमने ऐसे कर्मचारियों को कंपनी से अलग करने का कठिन निर्णय लिया है। यह निर्णय तत्काल प्रभावी है। प्रभावित कर्मचारियों को अधिक जानकारी अलग से दी जाएगी। आपके योगदानों के लिए धन्यवाद।

इस पोस्ट पर लोगों की अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ इसे पीआर स्टंट बता रहे हैं तो कुछ कंपनी के इस रवैए की आलोचना कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, “गरीब की आँख फोड़ दो ताकि वो गरीबी न देख सके।” यस मैडम से की गई कथित छँटनी के दावों की हम पुष्टि नहीं कर पाए हैं। इस संबंध में कोई भी जानकारी मिलते ही हम खबर को अपडेट करेंगे।

वैसे अजीब तरीके से छँटनी को लेकर कोई कंपनी पहली बार चर्चा में नहीं है। 2021 में Better.com ने एक साथ 900 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। कंपनी के सीईओ विशाल गर्ग ने जूम पर कॉन्फ्रेंस मीटिंग के दौरान ऐलान किया था कि जो कर्मचारी इस मीटिंग में जुड़ा है उसे तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट किया जाता है। इसी तरह अमेरिकी कंपनी फ्रंटडेस्क ने दो मिनट के गूगल मीट कॉल में 200 से अधिक कर्मचारियों को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया था।