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ISIS को आतंकी न कहा जाए: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, दायर करने वाला खुद है आतंकवादी, मुंबई बम धमाकों का है दोषी

मुंबई में साल 2002-3 के सीरियल बम विस्फोटों के सूत्रधार साकिब नाचन ने कुख्यात आतंकी संगठन ISIS (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) को आतंकी संगठन घोषित करने के खिलाने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ISIS का भारत प्रमुख रहा नाचन ने इस्लामिक स्टेट और अन्य समूहों को आतंकवादी संगठन घोषित करने वाली सरकारी अधिसूचना को रद्द करने की माँग की है।

सु्प्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत और उज्जल भुयान की पीठ ने उसकी याचिका पर सुनवाई की। तिहाड़ जेल में बंद नाचन कोर्ट में वर्चुअली उपस्थित हुआ। पीठ ने कहा, “हमने आपको पहले भी सलाह दी थी कि आप एमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) के जरिए अपनी बात रखिए। आप सुनवाई में मौजूद रह सकते हैं और जहाँ जरूरी लगे, वहाँ बोल भी सकते हैं।”

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने देश में संचालित ISIS के मॉड्यूल का खुलासा किया था। इस मामले में जाँच एजेंसी ने साकिब नाचन सहित कई लोगों को गिरफ्तार करते हुए नाचन को मुख्य आरोपित बनाया था। नाचन देश में ISIS के मॉड्यूल का संचालन करता था और युवाओं को इसमें शामिल होने के लिए बहकाता था और ISIS के प्रति निष्ठा की कसम खिलाता था।

आरोपितों ने महाराष्ट्र के ठाणे के एक गाँव को ‘अल शाम’ यानी इस्लामिक शासन वाला आजाद क्षेत्र घोषित कर दिया था। ये भारत में शरिया के तहत इस्लाम का शासन स्थापित और आतंकी हमलों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। NIA ने नाचन के अलावा हसीब जुबेर मुल्ला, काशिफ अब्दुल सत्तार बालेरे, सैफ अतीक नचन, रेहान अशफाक सुस, शगफ साफीक दिवकर, फिरोज दास्तगीर कुआरी को पकड़ा था।

ISIS का इंडिया प्रमुख बनने से पहले साकित प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI)‘ का पदाधिकारी था। वह मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन विले पार्ले और मुलुंड बम धमाकों के मामलों में सजायाफ्ता रह चुका है। यह सजा उसे साल 2016 में सुनाई गई थी। वह दो साल से भी कम समय तक जेल में रहा। उसे जेल में अनुशासित रहने के कारण नवंबर 2017 में रिहा कर दिया गया।

जेल से बाहर आते ही वह एक बार फिर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से जुड़ गया। उसे भारत मॉड्यूल का मुखिया बनाया गया था। नाचन साल 1991 से ही आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त रहा है। उस पर अफगान में जिहाद के दौरान मुजाहिद्दीनों के साथ लड़ने और भारतीय मुस्लिमों को पाकिस्तान में आतंकवादी प्रशिक्षण के लिए भेजने का भी आरोप है।

‘मेरे भाई की मौत हो गई है… 1 घंटे से जाम में फँसा हूँ’: गाजीपुर बॉर्डर पर लगे ‘राहुल गाँधी मुर्दाबाद’ के नारे, कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को पब्लिक ने पीटा

संभल में मुस्लिम भीड़ की हिंसा के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। प्रशासन ने बाहरी लोगों के प्रवेश पर पांबदी लगा रखी है। बावजूद कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने 4 दिसंबर 2024 को संभल जाने की कोशिश की। प्रशासन ने रास्ते से ही उनके काफिले को लौटा दिया। इसके कारण दिल्ली-उत्तर प्रदेश के गाजीपुर बॉर्डर पर भारी जाम लग गई। कई किलोमीटर तक वाहन फँसे रहे।

राहुल गाँधी के इस सियासी ड्रामे से आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। कुछ मजबूर होकर रोने लगे। एसपी त्यागी नाम के 80 साल के बुजुर्ग ने न्यूज 18 को बताया, “मेरे भाई की मौत हो गई है। मुझे अंतिम संस्‍कार में जाना है। यहाँ एक घंटे से जाम लगा हुआ है। मैं फँसा हूँ।” इन्हीं मजबूरियों और परेशानियों के कारण आखिर में लोगों का सब्र जवाब दे गया और उन्होंने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की पिटाई भी कर दी। राहुल गाँधी मुर्दाबाद के लगाए नारे।

आज तक ने अपनी रिपोर्ट में एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताया है जिसे अपने पिता के अंतिम संस्कार में जाना था। लेकिन जाम के कारण वह अंत्येष्टि में शामिल नहीं हो सका। वहीं नरेंद्र सिंह ने बताया कि वह अपनी बेटी को परीक्षा दिलाने के लिए मेरठ लेकर जा रहे थे, लेकिन जाम में फँस गए। उन्होंने पूछा कि सड़कों पर लोगों को परेशान क्यों किया जा रहा है?

एयरपोर्ट से घर लौट रहे ओमप्रकाश भी घंटों जाम में फँसे रहे। उन्होंने पूछा कि राहुल गाँधी के कारण सड़क को क्यों जाम किया गया? वहीं कैलाश नाम शख्स ने कहा, “हम जाम में फँसे हुए हैं। इनको अपनी राजनीति की रोटी सेंकनी है। इनकी राजनीति की वजह से जनता परेशान होती है।” लंबे जाम के कारण परेशानी झेलने वालों में छात्र और कर्मचारी भी थे जो समय से अपने काम पर नहीं पहुँच पाए।

संभल जाने में असफल रहे राहुल गाँधी ने एक्स/ट्विटर पर एक पोस्ट में कहा है, “पुलिस ने हमें संभल जाने से रोक दिया। विपक्ष के नेता होने के नाते यह मेरा अधिकार और कर्तव्य है कि मैं वहाँ जाऊँ। फिर भी मुझे रोका गया। मैं अकेला जाने को भी तैयार हूँ, लेकिन वे इसके लिए भी नहीं माने। यह संविधान के खिलाफ है।”

वहीं संभल के एसपी केके बिश्नोई ने बताया है कि जिले में अब स्थिति शांतिपूर्ण है। प्रशासन हालात सामान्य बनाए रखने का हरसंभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि 10 दिसंबर तक बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा हुआ है। हम सभी जन प्रतिनिधियों से सहयोग की अपील करते हैं। साथ ही बताया कि 10 दिसंबर के बाद हालात को देखते हुए इस संबंध में आगे फैसला लिया जाएगा।

केरल के जिस मंदिर में नहीं कोई गर्भ गृह या मूर्ति, उसके संरक्षण के लिए चिंतित हुआ सुप्रीम कोर्ट: कहा- ये अद्वितीय, इन्हें बचाना जरूरी

सुप्रीम कोर्ट में CJI संजीव खन्ना की बेंच ने कहा है कि मंदिरों और उनसे जुड़ी संपत्तियों का सावधानी से संरक्षण करना जरूरी है। उन्होंने यह टिप्पणी केरल के एक मंदिर में प्रबन्धन को लेकर चल रहे विवाद की सुनवाई के दौरान दी। CJI संजीव खन्ना की बेंच ने मंदिर के कुशल प्रशासन और चुनाव के लिए एक रिटायर्ड जज की प्रशासक के तौर पर नियुक्ति भी कर दी।

मंगलवार (3 दिसम्बर, 2024) को इस मामले की सुनवाई CJI संजीव खन्ना, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस संजय कुमार वाली बेंच ने की। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबन्धन करने वाली कमिटी के चुनाव के लिए केरल हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज को प्रशासक नियुक्त किया।

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पुराने और अद्वितीय होने के तथ्य को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा, “मंदिर और उसकी संपत्तियों को अत्यंत सावधानी से संरक्षित और सुरक्षित करना जरूरी है।” सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में 4 माह के भीतर चुनाव करवाने को भी कहा है।

क्या है मामला?

यह पूरा मामला केरल के ओअचिरा मंदिर से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर केरल के कोल्लम जिले में स्थित है। यह देश में अकेला अपनी तरह का मंदिर है। इसमें ना ही कोई गर्भगृह है और ना ही कोई मूर्ति। इस मंदिर में परमब्रह्म की पूजा होती है। मंदिर के अंतर्गत कई अस्पताल और कॉलेज चलते हैं।

इसी मंदिर के प्रबन्धन को लेकर विवाद है। मंदिर के नियमों के तहत इसे तीन स्तर पर अलग-अलग कमेटियाँ नियंत्रित करती हैं। मंदिर के प्रबन्धन को लकर 2006 में निचली अदालत में एक केस दायर किया गया था। निचली अदालत ने कहा था कि सभी पक्ष मंदिर प्रबन्धन के लिए एक योजना प्रस्तुत करें और जब तक ऐसा ना हो तब पुराने नियम से मंदिर चले।

निचली अदालत के इस फैसले के विरुद्ध मंदिर के वंशानुगत सदस्य हाई कोर्ट पहुँच गए। उन्होंने हाई कोर्ट से माँग की कि उनके रोल और अधिकार तय किए जाएँ। इसके बाद हाई कोर्ट ने 2010 में एक प्रशासक की नियुक्ति कर दी थी, हालाँकि उसे कोई अधिकार नहीं दिए गए थे।

हाई कोर्ट ने इसके बाद निचली अदालत को मंदिर प्रबन्धन के लिए योजना बनाने का आदेश दिया था और केरल हाई कोर्ट के ही एक रिटायर्ड जज को मंदिर के प्रशासक के तौर पर नियुक्त कर दिया था। मंदिर की तीनों समितियों को उनकी अनुमति से ही काम करना था।

इसके बाद 2017 में इस मंदिर का रोजमर्रा का काम संभालने वाली समिति का चुनाव हुआ था। इस समिति को हाई कोर्ट ने ही एक आदेश के जरिए 2022 में भंग कर दिया था और दूसरी समिति बना दी थी। इसके लिए चुनाव प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ था। इसके खिलाफ चुने हुए दो प्रतिनिधि सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए।

सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद पूरा मामला सुना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासक और कथित कार्यकारी समिति द्वारा मंदिर और उससे जुड़े संस्थानों के प्रशासन और प्रबंधन पर गंभीर विवाद है।” सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के अद्वितीय होने को देखते हुए केरल हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज K रामाकृष्णन को नया प्रशासक नियुक्त कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि प्रशासक रामाकृष्णन 4 महीने के भीतर चुनाव करवाएँगे और मंदिर का प्रशासन निष्पक्ष तरीके से करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 2 लोगों की नियुक्ति देने का भी अधिकार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि मंदिर से जुड़े सभी लोग नए प्रशासक की सहायता करें।

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह ढाँचा केस में गलत रिपोर्टिंग ‘कोर्ट की अवमानना’: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मीडिया को दी सख्त चेतावनी, कहा- कोर्ट की पवित्रता बनाए रखें

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं शाही ईदगाह ढाँचा विवाद मामले में सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया को चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि अदालती कार्यवाही की गैर-जिम्मेदाराना या किसी भी तरह की गलत रिपोर्टिंग कोर्ट की अवमानना है। कोर्ट ने मामले की रिपोर्टिंग करते समय मीडिया से संयम बरतने के लिए कहा।

मामले की सुनवाई कर रहे जज राममनोहर नारायण मिश्रा ने कहा कि इस मामले में किसी भी आदेश या कार्यवाही की कोई भी गैर-जिम्मेदाराना या गलत रिपोर्टिंग न्यायालय की अवमानना ​​मानी जाएगी। जज मिश्रा ने कहा, “न्यायालय उम्मीद करता है कि मीडियाकर्मी इस मामले की कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय उचित संयम बरतेंगे और इस संबंध में न्यायालय के आदेशों की गरिमा और पवित्रता बनाए रखेंगे।”

दरअसल, केस नंबर 18 से जुड़े एक वकील ने कोर्ट में आवेदन देकर इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया द्वारा गलत रिपोर्टिंग का आरोप लगाया था। इसके साथ ही कोर्ट से इसको निर्देश देने की माँग की गई थी। अन्य पक्षों ने भी इस मामले पर चिंता जताई थी। बता दें कि इस केस से जुड़े कई मामलों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

इससे संबंधित मूल मुकदमे में मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को हटाकर इसकी जमीन को श्रीकृष्ण जन्मभूमि भूमि को लौटाने की माँग की गई है। मूल मुकदमे में कहा गया है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को तोड़कर उस जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद को बनाया गया है। यह मामला मथुरा के सिविल कोर्ट में लंबित था, लेकिन साल मई 2023 में हाई कोर्ट ने इस मामले को अपने हाथों में ले लिया।

इस साल जनवरी में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले से जुड़े 15 मुकदमों को एक साथ जोड़कर उनकी सुनवाई शुरू की थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इन सभी मुकदमों को एक साथ सुनवाई करने का विरोध किया था। इस साल अक्टूबर में हाई कोर्ट ने मुकदमों को एकीकृत करने के अपने निर्देश को वापस लेने से इनकार कर दिया था।

रात का शो नहीं, 3डी के लिए इंतजार, सेंसर बोर्ड ने कई सीन उड़ाए… फिर भी रिलीज से पहले ही फायर है ‘पुष्पा 2’, एडवांस बुकिंग से एक शेयर की भी मौज

पुष्पा नाम सुनकर फ्लावर समझा क्या, फ्लावर नहीं फायर है मैं…

साल 2021 में आई ‘पुष्पा’ फिल्म के इस डायलॉग का खुमार आज भी दर्शकों के जेहन से नहीं उतरा है। अब ‘पुष्पा 2’ रिलीज से पहले ही कमाई की सुनामी आने के संकेत दे रही है।

रिपोर्टों के अनुसार फिल्म की एडवांस बुकिंग का आँकड़ा 125 करोड़ के करीब पहुँच चुका है। करीब 23 लाख टिकटों की बिक्री हो चुकी है। पहले ही दिन वर्ल्डवाइड 250 से 275 करोड़ रुपए के कलेक्शन का अनुमान है। इस फिल्म का बजट करीब 500 करोड़ है। इस तरह से देखें तो पहले ही दिन यह फिल्म अपनी आधी लागत से अधिक निकाल लेगी।

अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना की ‘पुष्पा 2’ यदि अनुमानों के हिसाब से पहले दिन कमाई करती है तो यह नया रिकॉर्ड होगा। इससे पहले एसएस राजामौली की 2022 में रिलीज हुई ‘RRR’ ने पहले दिन वर्ल्डवाइड 223 करोड़ रुपए कमाए थे।

‘पुष्पा 2’ 5 दिसंबर 2024 को रिलीज होनी है। उससे एक दिन पहले यानी 4 दिसंबर को अमेरिका में इसका प्रीमियर हुआ है। 5 भाषाओं में यह फिल्म रिलीज की जाएगी। ये हैं- तेलुगु, हिंदी, तमिल, कन्नड़, बंगाली और मलयालम।

‘पुष्पा 2: द रूल’ को लेकर रिलीज से पहले यह दीवानगी तब दिख रही है जब फिल्म बनने के दौरान अल्लू अर्जुन और निर्देशक के बीच मतभेदों की खबर आई थी। इतना ही नहीं मेकर्स ने इस फिल्म के शुरुआती दिनों में नाइट शो भी रद्द कर दिया है। फिल्म के 3डी वर्जन के लिए प्रशंसकों को इंतजार करना होगा। फिलहाल फिल्म 2डी में रिलीज होगी।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने कुछ बदलावों के साथ इस फिल्म के हिंदी वर्जन को भी पास कर दिया है। मसलन ‘रामावतार’ शब्द को ‘भगवान’ से बदल दिया गया है। जिस सीन में कटे हुए पैर को उड़ते दिखाया गया था, उसे हटा दिया गया है। धूम्रपान के सीन के साथ इससे जुड़ी चेतावनी जोड़ने को कहा गया है। फिल्म के तेलुगु संस्करण को 28 नवंबर को ही पास कर दिया गया था। इस संस्करण में भी मेकर्स को कुछ बदलाव करने पड़े हैं।

एडवांस बुकिंग से साफ है कि यह फिल्म पहले दिन ही 300 करोड़ी क्लब में शामिल हो सकती है। 2021 में पुष्पा ने 267 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इस फिल्म के लिए अल्लू अर्जुन को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।

‘पुष्पा 2’ की बंपर एडवांस बुकिंग का असर पीवीआर के शेयर पर भी दिख रहा है। पिछले 5 दिनों से इसमें तेजी है और यह 1600 रुपए के स्तर पर कारोबार कर रहा है। ब्रोकरेज हाउस यूबीएस की माने तो इस फिल्म के कारण स्टॉक का भाव 2000 रुपए के लेवल को छू सकता है।

दिल्ली की जामा मस्जिद का भी हो सर्वे: सीढ़ियों में दबे हैं सैकड़ों मंदिरों के अवशेष एवं मूर्तियाँ, हिंदू संगठन ने ASI के डायरेक्टर जनरल को लिखी चिट्ठी

दिल्ली स्थित जामा मस्जिद की सर्वे कराने की माँग करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के डायरेक्टर जनरल को चिट्ठी लिखी गई है। इसमें कहा गया है कि मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने जोधपुर और उदयपुर के कृष्ण मंदिर को तोड़कर उसके देव प्रतिमा को दिल्ली की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवाए थे। इसके पीछे औरंगजेब पर साकी मुस्तक खान की पुस्तक मसीर-ई-आलमगीरी को आधार बनाया गया है।

ASI के डायरेक्टर को चिट्ठी हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्त ने लिखी है। इससे पहले हिंदू सेना प्रमुख ने राजस्थान के अजमेर स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को संकटमोचन महादेव मंदिर बताते हुए कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय, ASI और दरगाह कमिटी को नोटिस देकर 20 दिसंबर तक जवाब माँगा है।

विष्णु गुप्ता ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि जोधपुर और उदयपुर के सैकड़ों मंदिरों को तोड़कर औरंगजेब ने हिंदुओं को अपमानित करने के लिए उनके अवशेषों को दिल्ली की जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर लगवा दिया। जामा मस्जिद ASI के नियंत्रण में है और वह इसके पीछे की सच्चाई पता लगाने के लिए उसका सर्वे कराए। मस्जिदों की सीढ़ियों के नीचे दबे मंदिरों के अवशेषों से हिंदुओं की भावना आहत होती है।

विष्णु गुप्ता ने कहा कि मसीर-ई-आलमगीरी में लिखा है कि 24-25 मई 1689 को रविवार का दिन था। उस दिन खान जहाँ बहादुर जोधपुर से मंदिरों को तबाह करके लौटा। खान जहाँ बहादुर द्वारा मंदिरों को लूटने, प्रतिमाओं को खंडित करने और फिर उन्हें ध्वस्त कर के बाद बैल गाड़ियों से टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष को दिल्ली रवाना कर दिया। इससे औरंगजेब बहुत खुश हुआ था।

विष्णु गुप्ता का कहना है कि हिंदू सेना चाहती है कि दिल्ली स्थित जामा मस्जिद का ASI सर्वे कराए और उन मूर्तियों को बाहर निकाल कर फिर से मंदिरों में स्थापित किया जाए। इस सर्वे से मुगल आक्रांता औरंगजेब की क्रूरता और मंदिर तोड़ने की सच्चाई भी दुनिया के सामने आ सकेगी। विष्णु गुप्ता द्वारा ASI को लिखी गई चिट्ठी की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

बता दें कि अजमेर के मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का सर्वे कराने की माँग को लेकर भी उन्होंने एक याचिका दी है। इसके बाद कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय और ASI से जवाब माँगा है। इस याचिका के बाद विष्णु गुप्ता को जान से मारने की धमकी भी मिली है। तीन दिन पहले उन्हें कनाडा से के एक नंबर से धमकी भरा कॉल आया था।

विष्णु गुप्ता को फोन करने वाले कॉल करने वाले कॉलर ने उन्हें ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी थी। विष्णु गुप्ता ने बताया था कि धमकी देने वाले ने कहा था, “तेरा सिर कलम कर दिया जाएगा, गर्दन काट दी जाएगी। तुमने अजमेर दरगाह का केस फाइल करके बहुत बड़ी गलती कर दी है। अब तू नहीं बचेगा।”

इधर सचिन का हाथ नहीं छोड़ रहे थे कांबली, उधर 22 साल की उम्र में ही संन्यास लेने वाले एक क्रिकेटर की कमाई में हाथ नहीं पकड़ सकते तेंदुलकर: ‘महाराजा’ अजय जाडेजा भी औकात में नहीं टिकते

सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल है। इसमें बीते जमाने के दो ऐसे क्रिकेटर दिख रहे हैं जो कभी गहरे दोस्त थे। एक ही गुरु (रमाकांत आचरेकर) के शिष्य थे। दोनों को भारतीय क्रिकेट टीम में जगह भी मिली। फेम भी। लेकिन दोनों की यात्रा की कहानी अलग-अलग है।

एक (सचिन तेंदुलकर) ने क्रिकेट को अपने तरीके से परिभाषित किया और ‘मास्टर ब्लास्टर’ और ‘गॉड ऑफ क्रिकेट’ जैसा तमगे हासिल किए। दूसरे (विनोद कांबली) की यात्रा बताती है कि एक खिलाड़ी को अपने जीवन में क्या-क्या नहीं करना चाहिए।

वायरल वीडियो उसी शिवाजी पार्क का है जहाँ कभी सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली घंटों पसीने बहा कर अपने क्रिकेटिंग कौशल को निखारते थे। कार्यक्रम उसी कोच आचरेकर के स्मारक के अनावरण का था जो इन दोनों को तराश रहे थे। वीडियो में आप देख सकते हैं कि सचिन मंच पर बैठने के लिए आगे बढ़ने से पहले विनोद कांबली से मिलते हैं। दोनों में कुछ देर बातचीत होती है। फिर सचिन आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। लेकिन कांबली उनका हाथ नहीं छोड़ते। इधर मंच उद्घोषक बार-बार सचिन से अपनी जगह पर बैठने की अपील करते रहते है। इसी इवेंट के एक और वायरल वीडियो में कांबली को सचिन का सिर सहलाते देखा जा सकता है।

कांबली को एक ऐसे क्रिकेटर के तौर पर याद किया जाता है जो अपनी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर पाए। मैदान में वो सफलता हासिल नहीं कर पाए जो उन्हें करना चाहिए था। इसके लिए विलेन भी खुद कांबली ही माने जाते हैं। शायद यही कारण है कि बाद के सालों में सचिन के साथ उनकी दोस्ती में भी पुरानी गर्मजोशी नहीं रही। ऐसे में यह वीडियो ऐसा है जिसमें मानव जीवन के हर भाव एक साथ स्पष्ट नजर आते हैं। खुशी, दर्द, पाश्चाताप… यही इस वीडियो की यूएसपी भी है और सबक भी।

क्रिकेट के मैदान पर सचिन तेंदुलकर ने जो सफलता, जो सम्मान हासिल किया है, उसका दूसरा उदाहरण विरले ही मिलता है। जब उन्होंने खेल के मैदान को छोड़ने का फैसला किया तो बल्लेबाजी के ज्यादातर रिकॉर्ड उनके ही नाम थे। इनमें से बहुतेरे के करीब आज भी कोई नहीं पहुँच पाया है।

लेकिन एक रिकॉर्ड ऐसा भी है जिसमें 22 साल की उम्र में ही संन्यास लेने वाले एक क्रिकेटर के आगे सचिन कहीं नहीं टिकते। विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी भी नहीं। जामनगर के ‘महाराजा’ बनने के बाद भी पूर्व क्रिकेटर अजय जाडेजा इस मामले में पीछे ही हैं।

हम बात कर रहे हैं कमाई की और 22 साल की उम्र में ही संन्यास लेकर सबको चौंका देने वाले क्रिकेटर आर्यमान बिड़ला की। कभी आईपीएल की राजस्थान रॉयल्स टीम का हिस्सा रहे बिड़ला भारत के सबसे अमीर क्रिकेटर हैं। उनकी कुल संपत्ति 70 हजार करोड़ रुपए के करीब है। 2017-18 में मध्य प्रदेश की तरफ से उन्होंने रणजी ट्रॉफी में पर्दापण किया था। 2018 में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें ₹30 लाख में खरीदा था।

राजस्थान रॉयल्स के साथ दो सीजन बिताने के बाद भी उन्हें आईपीएल में कोई मैच खेलने का मौका नहीं मिला। ईएसपीएन क्रिक इन्फो पर उपलब्ध आँकड़े बताते हैं कि आर्यमान बिड़ला ने प्रथम श्रेणी के 9 मैच खेले हैं। इनमें कुल 414 रन बनाए। इसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल है। घरेलू मैचों में अच्छी शुरुआत के बावजूद आर्यमान बिड़ला ने निजी कारणों से 2019 में पेशवर क्रिकेट को अलविदा कह दिया।

जाहिर है कि आर्यमान ने इतनी अकूत संपत्ति क्रिकेट के जरिए हासिल नहीं की है। दरअसल वे कुमार मंगलम बिड़ला के बेटे हैं। कुमार मंगलम भारत के प्रमुख औद्योगिक घरानों में से एक आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन हैं।

वहीं ​सचिन तेंदुलकर का नेटवर्थ 1250 करोड़ रुपए है। महेंद्र सिंह धोनी की 1040 करोड़ रुपए और विराट कोहली की 1020 करोड़ रुपए की है। जामनगर का महाराजा बनने के बाद इस मोर्चे पर अजय जाडेजा भी आगे निकल गए हैं। पहले उनकी कुल संपत्ति करीब 140 करोड़ रुपए की थी। लेकिन ‘महाराजा’ बनते ही विरासत में जो संपत्ति मिली है, उससे उनका नेटवर्थ बढ़कर करीब 1450 करोड़ रुपए हो गया है।

अजमेर दरगाह नहीं, हिंदू मंदिर: वो परिवार, जिनके यहाँ से जाता था चंदन का लेप, 113 साल पहले जज की किताब में भी ब्राह्मण दंपती और पूजा-पाठ का जिक्र

राजस्थान के अजमेर स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के शिव मंदिर होने का दावा करते हुए एक हिंदू संगठन ने सर्वे कराने की माँग अदालत से की है। हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता ने अपनी याचिका में पूर्व जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों को आधार बनाकर दावा किया है। कोर्ट ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय एवं ASI के साथ दरगाह कमिटि से 20 दिसंबर तक जवाब माँगा है।

अल्पसंख्यक मंत्रालय के संयुक्त सचिव और कार्यवाहक नाजिम नदीम अहमद और ASI मुख्यालय इसका जवाब तैयार कर रहा है। हिंदू पक्ष द्वारा दायर वाद में मोइनुद्दीन चिश्ती की मौजूदा दरगाह परिसर में शिव मंदिर, पूजा-अर्चना स्थल और जैन मंदिर होना बताया गया है। इसके साथ ही पूर्व जज हरबिलास शारदा की किताब पर दावा किया गया है कि यहाँ पर एक ब्राह्मण दंपती पूजा-पाठ करता था।

जज रहे हरबिलास शारदा ने साल 1911 में ‘अजमेर: हिस्टॉरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव’ नाम की एक किताब लिखी है। इस किताब के पेज नंबर 97 पर कहा गया है कि अजमेर दरगाह के नीचे एक तहखाना है और उस तहखाने के अंदर मंदिर में महादेव की छवि है। इस पर हर दिन एक ब्राह्मण परिवार चंदन चढ़ाता था और पूजा करता था। इस जगह को अब दरगाह के घड़ियाली (घंटी बजाने वाला) के रूप में जाना जाता है।

जिस परिवार का जिक्र शारदा ने अपनी किताब में की है, उसे खोज निकालने का दावा मीडिया संस्थान भास्कर ने किया है। मीडिया हाउस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि परिवार का कहना है कि उसके यहाँ से चंदन का लेप जाता था। हालाँकि, परिवार का यह भी दावा है कि यह लेप मंदिर नहीं, दरगाह की मजार पर होता था। करीब 52 साल से परिवार ने वहाँ चंदन नहीं भेजवाया है।

अजमेर दरगाह से सटे होली धड़ा एरिया में कभी शहर के नामचीन वकील रहे केशरीमल बीजावत की ‘कल्याण भवन’ हवेली है। इन्हीं के परिवार से यह चंदन जाता था। केशरीमल बीजावत के बेटे सुशील विजयवर्गीय ने बताया कि उनके घर से चंदन जाता था। उन्होंने बताया कि इसका मासिक भुगतान भी उनके परिवार को मिलता था, लेकिन साल 1972 के बाद से उनका परिवार चंदन नहीं भेजता है।

सुशील ने बताया कि उनके पिताजी इस काम को इसलिए करते थे, क्योंकि ये पीढ़ियों से चला आ रहा था। उन्होंने कहा, “हमारे घर से तैयार होकर चंदन दिन में करीब एक डेढ़ बजे के आसपास दरगाह पर भेजा जाता था। इसके बाद शायद दोपहर की नमाज के बाद चंदन का लेप होता था।” उन्होंने कहा कि उन्हें यही जानकारी है कि वो चंदन मजार लेप किया जाता था।

अजमेर दरगाह के प्रमुख जैनुअल आबेदीन के बेटे सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने भी स्वीकार किया कि हिंदू परिवार से यह चंदन आता था। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले तक दरगाह में हिंदू परिवार के घर से चंदन आता था। सन 1947 से पहले एक परिवार था, जो चंदन भेजा करता था। उन्होंने कहा, “हम सबने पढ़ा है। गरीब नवाज की दरगाह में आज भी सुबह-शाम चंदन पेश होता है।”

इस तरह, जज हरबिलास शारदा की किताब में लिखा यह तथ्य कि ब्राह्मण परिवार यहाँ पूजा-अर्चना करता था, सत्य साबित होता है। आमतौर पर दरगाह या मजार पर चंदन का लेप नहीं होता है। वहाँ पर इत्र (बनाया हुआ सुगंधित द्रव्य) और लोहबान (धूप की तरह का सामान) ही जलाया जाता है। चंदन का लेप आमतौर पर मंदिरों एवं देव-देवताओं के विग्रह पर ही होता है।

हरबिलास शारदा ने 168 पन्नों की अपनी किताब में ‘दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती’ नाम से एक पूरा चैप्टर लिखा है। इसके पेज नंबर 93 पर लिखा है कि दरगाह के ‘बुलंद दरवाजे’ की उत्तरी तरफ तीसरी मंजिल पर छतरी है। वह किसी हिंदू इमारत के हिस्से से बनी है। दरवाजे पर बनी छतरी की सतह पर खूबसूरत नक्काशी को चूने और रंग पुताई से भर दिया गया।

इसी चैप्टर के पेज नंबर 94 पर लिखा है कि छतरी में लगा लाल रंग का बलुआ पत्थर, वह किसी जैन मंदिर का है। पेज नंबर 96 पर लिखा है कि बुलंद दरवाजे और अंदर के आँगन के नीचे पुराने हिंदू मंदिर के तहखाने हैं। इसी किताब के पेज नंबर 97 पर लिखा है कि तहखाने में हिंदू परंपरा के मुताबिक मंदिर में महादेव की छवि है।

किताब में दावा है कि इस पर हर दिन एक ब्राह्मण परिवार चंदन चढ़ाता था। इस जगह को अब दरगाह के घड़ियाली (घंटी बजाने वाला) के रूप में जाना जाता है। इस दरगाह के तहखाने में कई कमरे अभी भी वैसे ही हैं। किताब में दावा किया गया है कि इन सब बनावट को देखकर लगता है कि मुस्लिम शासकों ने किसी पुराने मंदिर की जगह पर दरगाह बनाया है।

सुखबीर सिंह बादल पर गोली चलाने वाला खालिस्तानी आतंकी नारायण सिंह: पाकिस्तान में लिया ट्रेनिंग, CM बेअंत सिंह के हत्यारों को जेल से भगाया, पुलिस पर ही ठोकता है मुकदमा

अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में तनखैया की सजा काट रहे अकाली दल के नेता और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ। इस फायरिंग में बादल बाल-बाल बचे। फायरिंग करने वाले शख्स नारायण सिंह चौरा को बदल के साथ मौजूद लोगों ने पकड़ लिया।

इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। वहीं हमलावर नारायण सिंह चौरा के बारे में पता चला है कि वह एक खालिस्तानी आतंकी है और जेल से आतंकियों को भगाने समेत हथियारों की सप्लाई तक के मामले में जुड़ा रहा है।

नारायण सिंह चौरा ने यह हमला तब किया जब सुखबीर सिंह बादल स्वर्ण मंदिर के गेट पर पहरेदार की ड्यूटी कर रहे थे। यह सेवा उन्हें अकाल तख़्त ने करने का आदेश दिया है। अकाल तख़्त ने सुखबीर बादल को ‘तनखैया’ (धार्मिक मामलों में लापरवाही का दोषी) पाया है। उनके साथ ही पंजाब में अकाली सरकार में मंत्री रहे सभी लोगों को सजाएँ दी गई हैं।

नारायण सिंह चौरा ने इसी ड्यूटी के दौरान कमर से अपनी अपनी पिस्टल निकाली और बदल पर फायरिंग करने की कोशिश की। हालाँकि, उसे यहाँ मौजूद लोगों ने पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया। हमलावर नारायण सिंह चौरा पुराना आतंकी है।

वह 1984 में पाकिस्तान ट्रेनिंग के लिए जा चुका है। वह बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ा रहा है। वह हथियारों की तस्करी में भी जुड़ा था। उसने एक किताब भी लिखी है। वह 2004 में बुडैल जेल से CM बेअंत सिंह के हत्यारे खालिस्तानी आतंकियों को भगाने का आरोपित भी है।

उस पर आरोप है कि उसने बुडैल जेल की बिजली सप्लाई बाधित कर जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भ्योरा और जगतार सिंह हवारा को भगाया था। इनके साथ एक और आतंकी देवी सिंह भी भाग गया था। नारायण सिंह इन आतंकियों से जेल में आकर मिलता भी था और और उन्हें खाना, कपड़े और पगड़ी समेत तमाम चीजें दे जाता था।

बाद में वह जेल से भागने की प्लानिंग में शामिल हो गया। बताया गया कि परमजीत सिंह के कहने पर उसने जेल के पीछे के हिस्से में पहुँच कर कंटीली तारों पर एक चेन डाली जिससे बिजली गुल हो गई और मौके का फायदा उठा कर यह चारों आतंकी एक गुफा के सहारे जेल से भाग गए।

पंजाब पुलिस ने इस मामले में उसे 2013 में गिरफ्तार किया था। इससे पहले उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। चौरा को 2018 में जमानत मिली थी। नारायण सिंह चौरा के खिलाफ UAPA का केस दर्ज किया गया था। उसने इसके खिलाफ पुलिस पर ही मुकदमा दायर कर दिया था।

उसने कहा था कि पुलिस द्वारा उसके फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए। उसने 2015 में एक पत्र भी लिखा था, जिसे सिखों के एक आयोजन में पढ़ा गया था। इसमें खालिस्तान की बात की गई थी। नारायण सिंह चौरा सुखबीर सिंह बादल पर हमले के बाद अब पंजाब पुलिस की गिरफ्त में है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होंगे BJP के देवेंद्र फडणवीस, कुछ शर्तों के साथ एकनाथ शिंदे डिप्टी सीएम के लिए हुए तैयार: 5 दिसंबर को मुंबई के आजाद मैदान में होगा शपथ ग्रहण समारोह

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी गतिरोध लगभग खत्म हो गया है। नई सरकार का शपथ ग्रहण गुरुवार (5 दिसंबर 2024) को होगा। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार (3 दिसंबर 2024) को राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री एवं शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। इसके बाद शिंदे उपमुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हो गए हैं। फडणवीस मुख्यमंत्री होंगे।

मुख्यमंत्री ने नाम का ऐलान करने के लिए बुधवार (4 दिसंबर 2024) को भाजपा नेतृत्व वाली महायुति गबठबंधन के विधायक दलों की बैठक होगी। इसमें मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जाएगी। देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने की बात सामने आ रही है। दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में लगभग 30 विधायक भी कैबिनेट मंत्री की शपथ लेेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विभागों के बँटवारा सरकार बनने के बाद किया जाएगा। महायुति में शामिल के कोटे से मुख्यमंत्री होगा और शिवसेना और नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) से एक-एक उपमुख्यमंत्री बनाए जाएँगे। एकनाथ शिंदे शिवसेना और अजित पवार एनसीपी कोटे से डिप्टी सीएम बनाए जाएँगे। इसको लेकर वरिष्ठ स्तर पर बातचीत जारी है।

कहा जा रहा है कि डिप्टी सीएम पद के बनने के लिए एकनाथ शिंदे ने गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष पद की माँग की है। इसके अलावा भी कुछ महत्वपूर्ण विभागों पर शिवसेना ने दावा किया है। हालाँकि, विधानसभा अध्यक्ष और गृहमंत्रालय भाजपा अपने पास रखना चाहती है और इसको लेकर आगे बातचीत जारी रह सकती है।

भाजपा ने संकेत दिया है कि शिवसेना के 11-12 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जबकि एनसीपी के 9-10 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि एनसीपी ने 7 कैबिनेट मंत्री और 4 राज्यमंत्री पद की माँग की है। इसके अलावा, केंद्र सरकार में एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्यपाल पद की भी माँग की है। हालाँकि, इसको लेकर अभी पुष्टिकरण सामने नहीं आया है।

दरअसल, भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री पद अपने पास रखने की खबरों के बीच एकनाथ शिंदे अपने गाँव चले गए थे। दो दिन बाद वे वहाँ लौटे गले में संक्रमण की बात कहकर अस्पताल में चले गए। वे बैठक से दूर रहे। इसके बाद मंगलवार को देवेंद्र फडणवीस उनके आवास पर जाकर मुलाकात की। यह मुलाकात लगभग 30 मिनट तक चली। इसके बाद सहमति बनती नजर आई है।

बता दें कि 23 नवंबर को आए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों में महायुति गठबंधन को भारी बहुमत मिला है। विधानसभा की कुल 288 सीटों में भाजपा को सबसे अधिक 132 सीटें मिली हैं। वहीं, शिवसेना के 57 और एनसीपी ने 41 विधायक बने हैं। भाजपा ने इस बार चुनाव में कुल 149 उम्मीदवार उतारे थे। वहीं, शिवसेना ने 81 और एनसीपी ने 59 प्रत्याशियों को टिकट दिया था।