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उमर अब्दुल्ला-कॉन्ग्रेस की सरकार ने कश्मीरी पंडितों की दुकानों पर चलाया बुलडोजर, पीड़ित बोले- ‘हम सब कुछ खो चुके, अब कहाँ जाएँ?’

जम्मू में कश्मीरी पंडित प्रवासियों की दुकानों पर जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) का बुलडोज़र चलने से बवाल खड़ा हो गया। बुधवार (20 नवंबर 2024) को JDA ने मुठी इलाके में करीब एक दर्जन दुकानों को ध्वस्त कर दिया। ये दुकानें उन कश्मीरी पंडित परिवारों की थीं जिन्हें तीन दशक पहले तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार ने यहाँ बसाया था।

दुकानदारों का कहना है कि उन्हें बिना कोई पूर्व सूचना दिए कार्रवाई की गई, जबकि JDA ने इस दावे को खारिज किया है। JDA के उपाध्यक्ष पंकज शर्मा का कहना है कि प्रभावित लोगों को 20 जनवरी को नोटिस दिया गया था और उन्होंने फरवरी के अंत तक जगह खाली करने का वादा किया था। लेकिन चुनावी आचार संहिता और अन्य बाधाओं के कारण समय पर कार्रवाई नहीं हो सकी।

शर्मा ने बताया कि मुठी इलाके में 25 कनाल ज़मीन थी, जहाँ कश्मीरी पंडित प्रवासियों को शुरू में एक कमरे वाले गुंबदनुमा घरों में बसाया गया था, और बाद में उन्हें पुरखू और जगती में दो कमरों वाले फ्लैटों में बसाया गया। उन्होंने कहा कि इस कदम के बाद भी कई लोगों ने शुरुआती बस्तियों को खाली नहीं किया है। चूँकि यहाँ 208 गरीबों के लिए घरों का निर्माण कराया जाना है, जिसका टेंडर भी जारी हो चुका है। ऐसे में हमें जमीन खाली करानी ही है। इसके बावजूद प्रशासन ने 10 दुकानों का इंतजाम इन लोगों के लिए किया है।

इस घटना के बाद कई राजनीतिक दलों और कश्मीरी पंडित संगठनों ने सरकार की आलोचना की। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक बुजुर्ग व्यक्ति वीडियो में रोते हुए कहते हैं, “हम सब कुछ खो चुके हैं। अब कहाँ जाएँ?”

महबूबा मुफ्ती (PDP प्रमुख) ने इसे “कश्मीरी पंडितों की दशकों की तकलीफों पर एक और चोट” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, “पहले आदिवासी समुदाय को निशाना बनाया गया, और अब कश्मीरी पंडितों को। यह उन्हें और अलग-थलग करने का काम करेगा।”

J-K अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने कहा, “अगर विध्वंस जरूरी था तो पहले उनकी आजीविका का इंतजाम किया जाना चाहिए था। इस तरह की कार्रवाई जनता के हितों के खिलाफ है।”

बीजेपी प्रवक्ता जी.एल. रैना ने इसे NC-कॉन्ग्रेस गठबंधन सरकार की “बदले की कार्रवाई” बताया। उन्होंने प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था देने की माँग की।

JDA का कहना है कि मुठी कैंप की यह जमीन अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 208 फ्लैट्स के निर्माण के लिए आवंटित की गई है। हालाँकि, राहत आयुक्त अरविंद करवानी ने आश्वासन दिया कि प्रभावित दुकानदारों के लिए नई दुकानें जल्द बनाई जाएँगी। इन लोगों के लिए 10 दुकानें लगभग तैयार हैं, जो कैंप-2 में हैं। जेडीए ने कहा कि सिर्फ 1-2 लोग दिक्कत पैदा कर रहे हैं।

इस घटना को लेकर बीजेपी ने सीधे तौर पर NC-कॉन्ग्रेस गठबंधन की सरकार पर निशाना साधा। लोगों का मानना है कि सरकार बदलने के बाद कश्मीरी पंडित समुदाय पर ऐसी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा हो सकती है। बता दें कि हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस की सरकार बनी है, जिसका घाटी की तरफ झुकाव ज्यादा रहा है।

सालों तक मर्जी से रिश्ते में रही लड़की, नहीं बनता रेप का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की FIR: कहा- सिर्फ ब्रेक अप हो गया इसलिए नहीं बन जाएगा आपराधिक मुकदमा

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में शादी के झूठे वादे के आधार पर किए गए रेप के मुकदमे को खारिज कर दिया और एक व्यक्ति को राहत दे दी। व्यक्ति पर उसकी पूर्व गर्लफ्रेंड ने आरोप लगाए थे उसने जबरदस्ती उसके साथ कई बार संबंध बनाए और उसके भाई को भी जान से मारने की धमकी दी। सुप्रीम कोर्ट ने महिला के दावों को सही नहीं पाया और FIR को रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। बुधवार (20 नवम्बर, 2024) मामले की सुवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “एक दूसरे के साथ सहमति से रिश्ते में रहे किसी कपल का आपस में रिश्ता टूटने के आधार पर ही आपराधिक कार्रवाई चालू नहीं की जा सकती। अगर किसी रिश्ते में शुरुआत में लड़का और लड़की आपस में अपनी मर्जी से जुड़े थे, और बाद में उनका रिश्ता वैवाहिक जीवन में तब्दील नहीं हो सका, ऐसे में इस आधार पर बाद में इसे आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता।”

क्या था मामला?

यह पूरा मामला 2019 में दिल्ली के रोहिणी में हुई एक FIR से जुड़ा है। इस FIR में एक महिला ने बताया था कि वह दिल्ली में अपने भाई के साथ रहते हुए वोडाफोन के कॉल सेंटर में काम करती थी। महिला ने बताया कि वह एक कॉल के जरिए युवक प्रशांत के सम्पर्क में आई। महिला ने बताया कि नवम्बर,2017 और अप्रैल, 2018 में दोनों के बीच मुलाक़ात भी हुई।

महिला ने आरोप लगाया कि 2019 में प्रशांत को उसके घर का पता लग गया। इसके बाद प्रशांत ने उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाए। महिला ने आरोप लगाया कि इसके बाद कई बार डरा धमका कर उसके साथ रेप किया गया। प्रशांत ने इसके बाद महिला से विवाह करने से भी मना कर दिया।

महिला का यह भी आरोप था कि प्रशांत उसे छतरपुर में अपने कमरे पर ले जाकर उसके साथ संबंध बनाता था। महिला की इस शिकायत का युवक प्रशांत ने विरोध किया। उसने दिल्ली हाई कोर्ट में इस FIR को रद्द करने के लिए याचिका लगाई लेकिन उसे हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली।

इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट को प्रशांत के वकील ने बताया कि आरोप लगाने वाली महिला के पुलिस को दिए गए बयान और उसकी मेडिकल रिपोर्ट से कुछ भी आपराधिक साबित नहीं होता। प्रशांत ने दलील दी कि महिला और युवक, दोनों का प्रेम संबंध था और उन्होंने सहमति से संबंध बनाए थे।

प्रशांत के पक्ष ने कहा कि केवल निजी दुश्मनी के आधार पर यह मुकदमा किया गया है। यह दलील भी दी गई कि महिला ने मेडिकल रिपोर्ट में एक सप्ताह पहले रेप होने की जबकि FIR में जनवरी, 2019 में रेप होने की बात कही है, जो आपस में मेल नहीं खाती। दलील दी गई कि महिला के बयानों में कोई भी समानता नहीं है। इसका सरकारी वकील ने विरोध किया।

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि महिला ने जहाँ एक तरफ जबरदस्ती संबंध बनाने का दावा किया है वहीं वह 2017 और 2019 में लगातार उससे मिलती भी रही। कोर्ट ने कहा कि ना उसने इस दौरान मुलाक़ात बंद की और ना ही कोई शिकायत दर्ज करवाई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बात मानने योग्य नहीं लगती कि महिला जबरदस्ती संबंध बनाए जाने के बाद भी आरोपित से सहमति से मिलती रही। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपित प्रशांत के महिला का पता ढूंढ लेने की दलील भी नहीं स्वीकारी और कहा कि यह संभवतः उसने खुद ही दिया होगा। कोर्ट ने यह भी पाया कि एक समय पर दोनों शादी का इरादा रखते थे लेकिन यह नहीं हो सका।

कोर्ट ने कहा, “शिकायत करने वाली महिला और आरोपित पुरुष आपस में सहमति से रिश्ते में थे। वे दोनों पढ़े लिखे वयस्क लोग हैं। महिला ने आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज करवाने के बाद वर्ष 2020 में किसी अन्य व्यक्ति से विवाह कर लिया। इसी तरह आरोपित की भी वर्ष 2019 में शादी हुई थी। संभवतः वर्ष 2019 में आरोपित की शादी ने ही महिला को उसके खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए प्रेरित किया है क्योंकि तब तक वे सहमति से रिश्ते में थे।” कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में रेप का मामला नहीं बनता।

कोर्ट ने सारे सबूत देखने के बाद पाया कि दोनों के बीच सहमति से ही संबंध बने थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद कहा कि एक दूसरे के साथ सहमति से रिश्ते में रहे किसी कपल का आपस में रिश्ता टूटने के आधार पर ही आपराधिक कार्रवाई चालू नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इस मामले में FIR रद्द कर दिया।

AAP ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए निकाली पहली लिस्ट, आधे से ज्यादा बाहरी नाम, 3 दिन पहले वाले को भी टिकट: 2 पर कस चुका ED का शिंकजा

आम आदमी पार्टी (AAP) ने आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव के ऐलान से काफी दिन पहले ही उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल फरवरी, 2025 में पूरा हो रहा है। AAP की पहली लिस्ट में 11 उम्मीदवारों का नाम दिया गया है। इस लिस्ट में शामिल कई उम्मीदवार पार्टी में बाहर से आए हैं। कुछ को प्रवर्तन निदेशालय ED) के एक्शन का भी सामना करना पड़ा है। पार्टी की पहली लिस्ट में भाजपा और कॉन्ग्रेस, दोनों ही पार्टियों से आने वालों को टिकट थमाया गया है।

गुरुवार (21 नवम्बर, 2024) को जारी की गई AAP की लिस्ट में छतरपुर से ब्रह्म सिंह तंवर, बदरपुर से राम सिंह नेताजी, लक्ष्मी नगर से बीबी त्यागी, सीलमपुर से जुबैर अहमद, सीमापुरी से वीर सिंह धींगन, रोहतास नगर से सरिता सिंह, घोंडा से गौरव शर्मा, विश्वासनगर से दीपक सिंगला, करावल नगर से मनोज त्यागी, किराड़ी से अनिल झा जबकि मटियाला से सुमेश शौक़ीन को आम आदमी पार्टी ने अपना उम्मीदवार घोषित किया गया है।

AAP द्वारा घोषित किए गए 11 उम्मीदवारों में से 6 कॉन्ग्रेस या भाजपा से आए हुए नेता हैं। उन्होंने हाल ही में AAP की सदस्यता ली है। छतरपुर से उम्मीदवार बनाए गए ब्रह्म सिंह तंवर ने 1 नवम्बर, 2024 को ही AAP की सदस्यता ली थी। वह इससे पहले तीन बार भाजपा के विधायक रह चुके थे। वह 1993, 1998 और 2013 में भाजपा के टिकट से चुनाव जीते थे। उनकी सीट के AAP विधायक करतार सिंह तंवर ने भाजपा की सदस्यता ले ली थी। इसके बाद उन्होंने भाजपा छोड़ कर AAP की सदस्यता ले ली। वह 2015 और 2020 में करतार सिंह से हार चुके हैं।

वहीं करतार के अलावा पार्टी ने किराड़ी से अनिल झा को टिकट थमाया है। अनिल झा भी भाजपा से ही 2008 और 2013 में विधायक बने थे। उन्होंने 17 नवम्बर को ही पार्टी की सदस्यता ली थी। उन्हें केजरीवाल ने पूर्वांचल के समाज का बड़ा नेता करार दिया था। वह 2015 और 2020 का चुनाव किराड़ी विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर लड़े थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें AAP के ही ऋतुराज झा ने हराया था। ऋतुराज झा का भी टिकट काट कर अब अनिल झा को टिकट दिया गया है।

इन दोनों के अलावा कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक सोमेश शौक़ीन को भी मटियाला से उतारा गया है। सोमेश शौक़ीन ने 18 नवम्बर, 2024 को ही पार्टी की सदस्यता ली थी। उन्हें केजरीवाल ने ही पार्टी में शामिल करवाया था। सोमेश शौक़ीन 2008 में मटियाला से कॉन्ग्रेस से विधायक बने थे। इसके बाद 2013, 2015 और 2020 का चुनाव वह हार गए थे। उनके AAP की सदस्यता लेते ही टिकट मिल गया है। इस सीट से पार्टी ने अपने विधायक का टिकट काट दिया है।

AAP ने सीलमपुर विधानसभा से जुबैर अहमद को टिकट दिया है। वह भी सीलमपुर से 5 बार कॉन्ग्रेस के विधायक रहे मतीन अहमद के बेटे हैं। उन्होंने एक माह पहले ही AAP का दामन थामा था। उनकी पत्नी शगुफ्ता चौधरी कॉन्ग्रेस से ही पार्षद थीं। वह भी AAP में शामिल हुई थीं। इनके अलावा वीर सिंह धींगान को सीमापुरी से टिकट दिया गया है। वीर सिंह धींगन को सीमापुरी से उम्मीदवार बनाया गया है। धींगन कॉन्ग्रेस से 1998 से 2013 तक कॉन्ग्रेस से इस सीट से विधायक रहे हैं। वह 2013, 2015 और 2020 का चुनाव हारे थे। वह भी ED के घेरे में आ चुके हैं।

वहीं लक्ष्मी नगर से उम्मीदवार बनाए गए बीबी त्यागी भी नवम्बर, 2024 में ही भाजपा छोड़ कर AAP में शामिल हुए थे। बीबी त्यागी लक्ष्मी नगर क्षेत्र से दो बार पार्षद रहे हैं। बीबी त्यागी को अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने पार्टी में शामिल करवाया था। AAP इन सभी बाहरी पार्टी से आए उम्मीदवारों को टिकट देकर निशाने पर आ गई है।

इन सबके अलावा पार्टी ने रोहतास नगर से सरिता सिंह को टिकट दिया है। वह छात्र संगठन की प्रमुख हैं। वह 2015 में AAP से चुनाव जीती थीं लेकिन 2020 में इसी सीट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उनके साथ ही दीपक सिंगला को भी टिकट दिया गया है। दीपक सिंगला 2020 में चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे। सिंगला पर मार्च 2024 में ED का छापा भी पड़ा था। वह गोवा के इंचार्ज भी हैं। ED शराब घोटाले में गोवा के पदाधिकरियों की जाँच कर रही है।

AAP ने बदरपुर से राम सिंह नेताजी को टिकट दिया है। 2015 और 2020 में वह चुनाव जीत चुके हैं। घोंडा से AAP ने गौरव शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। 2020 में यह सीट पार्टी नहीं जीत पाई थी। मनोज त्यागी को पार्टी ने करावल नगर सीट से टिकट दिया है। यह सीट भी 2020 में पार्टी के हाथ नहीं लगी थी। AAP की इस चुनावी तैयारी से भाजपा और कॉन्ग्रेस पर अब चुनावी तैयारी तेज करने का दबाव पड़ेगा।

इस देश में अजमल कसाब को भी फेयर ट्रायल मिला: सुप्रीम कोर्ट ने यासीन मलिक मामले में की टिप्पणी, अपहरण कांड में जम्मू कोर्ट में पेश होने का CBI ने किया विरोध

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (21 नवंबर 2024) को वायुसेना के 4 अधिकारियों के अपहरण के मामले में जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक की सुनवाई के लिए तिहाड़ जेल में एक अदालत कक्ष स्थापित करने का संकेत दिया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि यहाँ तक ​​कि मुंबई हमले का आतंकी अजमल कसाब को भी देश में निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया गया था।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने जम्मू ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे यासीन मलिक को शारीरिक रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। यह पेशी वायुसेना अधिकारियों के अपहरण और मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण से जुड़े मामले में गवाहों से क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए था।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, “जिरह ऑनलाइन कैसे की जाएगी? जम्मू में शायद ही कोई कनेक्टिविटी है… हमारे देश में अजमल कसाब पर भी निष्पक्ष सुनवाई हुई और उसे उच्च न्यायालय में कानूनी सहायता दी गई।” इस पर मेहता ने कहा कि मलिक ‘सिर्फ एक और आतंकवादी’ नहीं है। इसने हाफिज सईद से मिलने के लिए कई बार पाकिस्तान की यात्रा की है।

उन्होंने कोर्ट को आतंकवादी हाफिज सईद के साथ मंच साझा करते हुए यासीन मलिक की एक तस्वीर भी दिखाई। उन्होंने इशारा किया कि यह आतंकी कितना खतरनाक है। मेहता ने सुरक्षा चिंताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि यासीन मलिक को मुकदमे के लिए जम्मू नहीं ले जाया जा सकता। उन्होंने कहा कि यासीन मलिक कोई सामान्य अपराधी नहीं है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह न्यायाधीश को कार्यवाही के लिए राष्ट्रीय राजधानी आने के अलावा जेल के अंदर मुकदमा चलाने का आदेश दे सकती है। हालाँकि, पीठ ने यह भी कहा कि आदेश पारित करने से पहले इस मामले के सभी आरोपित व्यक्तियों को सुना जाना चाहिए। इस मामले में अगली सुनवाई अब 28 नवंबर को होगी।

बता दें कि रुबैया को 8 दिसंबर 1989 को श्रीनगर के लाल डेड अस्पताल के पास से अपहरण कर लिया गया था। उस समय केंद्र में भाजपा समर्थित वीपी सिंह की सरकार थी और रुबैया के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद केंद्रीय गृहमंत्री थे। रूबैया की रिहाई के लिए केंद्र सरकार ने पाँच आतंकवादियों को रिहा किया था। इसके बाद पाँच दिन बाद रूबैया को रिहा कर दिया गया था।

रूबैया मुफ्ती फिलहाल तमिलनाडु में रहती हैं। वह सीबीआई के अभियोजन पक्ष के गवाह हैं। इस अपहरण कांड की जाँच सीबीआई ने 1990 के दशक में अपने हाथ में ली थी। रूबैया का अपहरण जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकियों ने ही की थी। यासीन मलिक इस आतंकी संस्था का मुखिया है। यासीन टेरर फंडिंग मामले में NIA कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा दी है। तब से वह तिहाड़ में है।

अनजान लोगों से करवाता था पत्नी का रेप, रिकॉर्ड किए 20000+ फोटो-वीडियो: बेटे ने कहा – मेरे बाप को मिले कठोर सजा, कोई माफी नहीं

यूरोपीय देश फ्रांस में डोमिनिक पेलिकॉट नाम के एक व्यक्ति द्वारा लगभग 72 अजनबी लोगों से अपनी पत्नी का रेप और सामूहिक बलात्कार कराने का मामला सामने आया है। आरोपित डोमिनिक के बेटों ने 18 नवंबर को अदालत से अपने पिता को कड़ी सजा देने का आग्रह किया। पीड़िता के बेटों ने कहा कि वे अपने पिता को कभी माफ नहीं कर पाएँगे।

डोमिनिक ने अदालत के समक्ष पहले अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने स्वीकार किया है कि 10 साल की अवधि में उसने दर्जनों अजनबियों को अपनी पत्नी के साथ बलात्कार करने के लिए अपने घर बुलाया था। इस दौरान वह अपनी पत्नी को नशीला पदार्थ पिलाता है। इस मामले में 50 अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। डोमिनिक की पत्नी अब 71 साल की है।

आरोपित डोमिनिक के बेटों में से एक 50 वर्षीय डेविड पेलिकॉट ने अदालत के समक्ष कहा, “हमारा परिवार नष्ट हो गया है। मैं इस मुकदमे से उम्मीद करता हूँ कि इन लोगों को (आरोपितों) और कटघरे में मौजूद उस व्यक्ति (उसके पिता) को मेरी माँ पर किए गए अत्याचार के लिए कठोर रूप से दंडित किया जाएगा।” अपने आरोपित पिता डोमिनिक की माफी को भी डेविड ने पूरी तरह नकार दिया।

डेविड ने यह भी कहा कि उसने और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने अपने पिता की सारी तस्वीरें नष्ट कर दी है, ताकि घर में आरोपित का कोई नामो-निशान ना बचे। डेविड ने कहा कि यह मुकदमा अन्य महिलाओं को रेप के बारे में बोलने के लिए प्रोत्साहित करेगा। डेविड की माँ ने इस मुकदमे को सार्वजनिक रूप से आयोजित करने के लिए कहा था, ताकि दूसरी महिलाओं को हिम्मत मिले।

डेविड के 38 वर्षीय भाई फ्लोरियन ने अदालत को बताया कि चार साल पहले उनकी माँ के साथ हुई दरिंदगी की जानकारी से परेशान हो गए थे। फ्लोरियन ने कहा कि उसके पिता उसके लिए मर चुके हैं। उन्होंने कभी-कभी रोते हुए अदालत से कहा, “मुझे अपने पिता को खोए हुए चार साल हो गए हैं। हमारा परिवार अलग हो गया है।” फ्लोरियन ने कठोरतम सजा की माँग की है कि ताकि पीड़ित को डर ना लगे।

फ्रांसीसी कानून के तहत पीड़िता अपनी पहचान गुप्त रख सकती थी और मुकदमा बंद कमरे में चल सकता था। इस मामले के सामने आने के बाद पीड़िता गिसेले पेलिकॉट के समर्थन में पूरे फ्रांस में विरोध प्रदर्शन शुरू कर हो गए थे। वहीं, गिसेले की बेटी कैरोलिन डेरियन ने अदालत को बताया कि उसका मानना ​​​​है कि उसके पिता ने उसके साथ भी दुर्व्यवहार किया था।

कैरोलिन ने कहा, “मेरे और मेरी माँ के बीच एकमात्र अंतर यह है कि (उनकी माँ के साथ हुए दुर्व्यवहार के) सबूत हैं।” कैरोलिन इस केस में सबसे पहली गवाह बनी थीं। अब सभी पक्षों को सुनने के बाद बाद अदालत का फैसला और सजा का ऐलान 20 दिसंबर 2024 के आसपास आने की उम्मीद है।

पीड़िता गिसेले पेलिकॉट ने दक्षिणी शहर एविग्नन की अदालत को बताया था कि उसके 71 वर्षीय पति डोमिनिक पेलिकॉट उसे खाने और शराब में दवा मिलाकर बेहोश कर देता था। उसके बाद लोगों को बुलाकर उसी हालत में उनसे अपनी पत्नी का रेप करवाता था। जाँचकर्ताओं ने पाया कि पीड़िता के साथ लगभग एक दशक में 100 से अधिक बार रेप हुआ। रेप के दौरान आरोपित डोमिनिक रिकॉर्डिंग करता था।

उसके कब्जे से हजारों फोटो और वीडियो बरामद हुए थे। पीड़िता ने अदालत को बताया था कि एचआईवी से पीड़ित एक व्यक्ति ने उसके साथ कम-से-कम छह बार बलात्कार किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी जान को खतरा था, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। गिसेले पेलिकॉट ने अपनी गवाही में कहा था, “पुलिस ने मिस्टर पेलिकॉट के कंप्यूटर की जाँच करके मेरी जान बचाई।”

बता दें कि आरोपित डोमिनिक पेलिकॉट को नवंबर 2020 में एक सुरक्षा गार्ड ने सुपरमार्केट में महिलाओं की स्कर्ट का वीडियो बनाते हुए पकड़ा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले की जाँच के दौरान फ्रांसीसी पुलिस ने डोमिनिक के कंप्यूटर से जुड़े यूएसबी ड्राइव पर ‘दुर्व्यवहार’ लेबल वाली एक फ़ाइल बरामद की। जब पुलिस ने ड्राइव खोली तो उसमें से लगभग 20,000 तस्वीरें और फिल्में मिलीं थीं।

इनमें पाया गया कि एक महिला के साथ लगभग 100 बार से अधिक बलात्कार किया गया था। पुलिस ने जाँच की तो पता चला कि यह उसकी पत्नी है। इसके बाद पुलिस ने उसकी पत्नी का बयान दर्ज किया और डोमिनिक के बेटों और बेटी को इसकी जानकारी मिली। इसके बाद पीड़िता ने इस केस की सुनवाई सार्वजनिक रूप से करने की माँग की।

नाबालिग हिन्दू छात्रा को गणित पढ़ाने वाले शाहिद ने दिया ₹1 लाख का ऑफर, मुस्लिम बन निकाह करने का डाला दबाव: UP पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक मुस्लिम शिक्षक ने इंटर कॉलेज के भीतर एक हिन्दू नाबालिग छात्रा पर निकाह करने का दबाव डाला। जाहिद ने उसका धर्मांतरण करवाने की बात कही। उसका हाथ पकड़ कर छेड़खानी की और नाबालिग को ₹1 लाख का ऑफर दिया। मुस्लिम शिक्षक ने निकाह की बात ना मानने पर फेल करने की धमकी भी दी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरोहा के मंडी धनौरा इलाके में राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में गणित पढ़ाने वाले मोहम्मद शाहिद ने नाबालिग हिन्दू छात्रा से छेड़छाड़ की। अश्लील हरकत करने के बाद शाहिद ने छात्रा से निकाह करने की बात कही। उसने अपने से कई साल छोटी छात्रा से प्रेम की बात कही। शाहिद संभल जिले का रहने वाला है और कक्षा 9 का क्लास टीचर भी है।

शाहिद की इस हरकत को लेकर हिन्दू छात्रा ने घर में शिकायत की। शाहिद के इस कृत्य की शिकायत हिन्दू छात्रा ने अपने घर पर की। परिजनों ने इसके बाद कॉलेज के प्रधानाध्यापक को इससे अवगत करवाया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे शाहिद इसके बाद और भी बदतमीजी पर उतर आया।

शाहिद ने इसके कुछ दिनों के बाद कक्षा के भीतर ही हिन्दू छात्रा से दोबारा अश्लील हरकत की। इस बार उसने ₹1 लाख का ऑफर दिया और निकाह करने का दबाव बनाया। उसने हिन्दू छात्रा का धर्मांतरण करवाने की कोशिश की। शाहिद ने छात्रा को डराया भी। उसने धमकी दी कि अगर हिन्दू छात्रा उसकी बात नहीं मानती तो उसे वह फेल कर देगा।

डरी सहमी हिन्दू छात्रा ने यह पूरी घटना अपने घर जाकर बताई। इसके बाद हिन्दू छात्रा के परिजन साथ पुलिस के पास पहुँचे। उन्होंने कॉलेज में भी विरोध प्रदर्शन किया। शाहिद ने कॉलेज से भागने का प्रयास किया। हिन्दू छात्रा के धर्म परिवर्तन की बात सुनकर बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता भी कॉलेज पहुँचे और शाहिद के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शाहिद को गिरफ्तार कर लिया है। शाहिद के खिलाफ POCSO समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे कॉलेज प्रबन्धन ने भी निलंबित कर दिया है।

हजूर पाक-ईशनिंदा-गुस्ताख पर मुल्लों जैसे चिल्लाना, तालिबानी मौलाना संग फोटो… शौहर और मुस्लिम वोट के लिए स्वरा बन गई ‘कट्टर’, ओढ़ रखा प्रोग्रेसिव का चोगा

सोशल मीडिया पर पिछले दिनों अपनी एक तस्वीर की वजह से चर्चा में रहीं स्वरा भास्कर ने आज एक ट्वीट किया है। उन्होंने ट्वीट में कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि लोग उन कपड़ों को राष्ट्रीय बहस क्यों बना रहे हैं जो वो अपनी शादी के बाद पहन रही हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी कुछ वेस्टर्न कपड़ों में तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि संघी शादी के बाद की इन फोटोज को भी देखें और समझ लें कि फहाद जिरार अहमद ऐसा शौहर नहीं है जैसा उनके मुताबिक एक पिछड़ा मुसलमान शौहर होता है।

स्वरा ने बिन कुछ सोचे अपने ट्वीट में ट्रोलर्स को ‘संघी’ करार दे दिया जबकि ये मालूम हो कि स्वरा की तस्वीर देखने के बाद तमाम यूट्यूब चैनल, तमाम मीम पेज और तमाम सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी। वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वो एक एक्ट्रेस रही हैं और फहाद से निकाह से पहले उनका पब्लिक प्लेस में रंग-ढंग अलग दिखता था जबकि वायरल तस्वीर में सब एकदम अलग था।

लोग जैसे अन्य मुद्दों पर चर्चा शुरू करते हैं वैसे ही इस पर भी हुई। पहले और अब की तस्वीरों में सामने आए फर्क पर गौर कराया गया। उसी में कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने इस तस्वीर को इस एंगल से देखा कि एक मुस्लिम से शादी से पहले स्वरा कैसी थीं और अब कैसी हो गई हैं।

स्वरा भास्कर को बस यही बात नहीं पसंद आई और उन्होंने एक तरफ आँख मूँदकर उन्हें ट्रोल करने वाले हर शख्स को ऐसे तंज भरे अंदाज में संघी लिखा जैसे संघी कोई अपशब्द हो और दूसरी तरफ अपने शौहर का बचाव किया कि वो कोई रूढ़िवादी मुसलमान नहीं है। अपनी मॉर्डन ड्रेस दिखाकर ये साबित करने की कोशिश की कि उनका शौहर तो एक प्रोग्रेसिव मुसलमान है जो उन्हें बैकलेस, नेकलेस, स्लीवलेस ड्रेस पहनने देता है।

अब फहाद क्या है, कैसे हैं… बहस का मुद्दा ये नहीं है। असल चर्चा ये हैं कि आखिर स्वरा भास्कर क्या हो गई हैं। स्वरा एक तरफ तो अपने शौहर के प्रोग्रेसिव होने के दावे अपनी वेस्टर्न ड्रेस में फोटो दिखाकर कर रही हैं और दूसरी तरफ वो अपने शौहर के लिए इस्लामी मौलानाओं से भेंट कर रही हैं और फिर मुस्लिम भीड़ के बीच जाकर मुस्लिमों से मजहब के नाम पर न सिर्फ वोट माँग रही हैं बल्कि उनको उकसाने का काम भी कर रही हैं।

स्वरा की एक वीडियो वायरल है। देख सकते हैं कि ये चुनावी रैली की है। इसमें वो उसी सुर और शब्दों में बात कर रही हैं जो इस्लामी कट्टरपंथियों की रैली में होता है। स्वरा अपने भाषण में मुस्लिमों को समझाती हैं कि वो गलती से भी उन ‘गुस्ताखों’ को समर्थन न दें जिन्होंने कभी ईशनिंदा की हो।

विकास के मुद्दों को साइड में रखकर अपने भाषण में वो दीन, ईमान की बातें करके भीड़ को इंप्रेस करती हैं और कहती हैं कि वो हिंदू घर में जन्मी, मुस्लिम लड़की से शादी की, लेकिन उन्हें बस कहना ये है कि ‘हजूर पाक’ केै प्रति मन में इज्जत होने के लिए जरूरी नहीं कि इंसान किस जाति में पैदा हुआ हो। उनका इस्लामी शब्दावलियों से भरा ये भाषण सुन सारे मुस्लिम इतने खुश हुए कि स्वरा का उत्साह तालियाँ बजाकर बढ़ाते रहे और स्वरा बोलती रहीं।

वीडियो देखने के बाद आपको कहीं से भी नहीं लगेगा कि स्वरा एक सेकुलर हैं या कभी एक हिंदू रहीं होगीं। उनका इस्लाम के प्रति गहरा झुकाव उनके लहजे से साफ दिखता है। इसके अलावा उनकी एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वो मौलाना सज्जाद नोमानी के साथ दिख रही है। इस तस्वीर को देख भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक समय में देश के संविधान की बात करके मुस्लिमों के लिए अधिकार माँगने वाली स्वरा पूरी करह इस्लामी ताकतों के आगे सरेंडर कर चुकी हैं।उन्हें इस बात से भी कोई मतलब नहीं है कि जिस व्यक्ति से वो मिल रही हैं उसके विचार क्या हैं।

उन्होंने कोई लेना-देना नहीं है कि सज्जाद नोमानी तो वही मौलाना है जो खुलेआम तालिबानी शासन का समर्थन करते है, तालिबानियों को सलाम भेजते हैं, लड़कियों को स्कूल-कॉलेज न भेजने की वकालत करते हैं, मुस्लिमों को हिंदुओं के खिलाफ भड़काते हैं, भगवा लव ट्रैप जैसा प्रोपगेंडा बनाकर RSS को बदनाम करते हैं और भाजपा का हुक्का-पानी बंद करने की बात करते हैं।

स्वरा को मतलब है जो सिर्फ मुस्लिम वोटों से, शौहर के करियर को चमकाने से और इस्लाम को केंद्र में रखकर राजनीति करने से। वो न अब सोशल मीडिया पर खुद को फेमिनिस्ट दिखा पा रही हैं, न सेकुलर, और न हिंदू। वो खुलकर सिर्फ ये बता रही हैं उनके लिए अब इस्लाम ही सब कुछ है और उसका बचाव करना ही उनका उद्देश्य। उनकी इस जद्दोजहद में भले ही फहाद एक कट्टर-मुस्लिम न लग रहे हों, लेकिन वो कट्टर इस्लाम समर्थक होने की छवि जरूर बना रही है। सोशल मीडिया ट्रोलर्स भी उनका यही रूप देखकर उनके पहले के रूप में और अब में तुलना कर रहे हैं।

अमेरिका में अडानी पर लगे आरोप, विपक्ष ने दोहराए, भाजपा ने दिया जवाब: कहा- अभी दोष सिद्ध नहीं, विपक्षी राज्यों में ही रिश्वत लेने की है बात

भारतीय कारोबारी समूह अडानी ग्रुप पर अमेरिका के न्याय न्यायिक विभाग और सिक्युरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार, अडानी समूह ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी और इसके जरिए पेश की गई झूठी तस्वीर से समूह ने अमेरिका में निवेशकों से पैसा लिया।

अमेरिकी एजेंसियों ने अडानी समूह के मुखिया गौतम अडानी समेत 7 लोगों को इस मामले में आरोपित बनाया है। इस मामले में कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारत सरकार को घेरा है। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने मुकदमे के कागजों के सहारे ही उनके तथ्यों की बखिया उधेड़ी है और कहा है कि इतनी जल्दी अंतिम निष्कर्ष पर ना पहुँचा जाए।

विपक्ष ने अडानी-भारत सरकार पर क्या कहा?

अडानी पर बुधवार (20 नवम्बर, 2024) को लगाए गए आरोपों के बाद कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और मीडिया प्रमुख जयराम रमेश ने मोर्चा संभाला। जयराम रमेश ने गुरुवार (22 नवम्बर, 2024) को एक्स (पहले ट्विटर) के माध्यम से अडानी समूह और सरकार को घेरा।

जयराम रमेश ने लिखा, “गौतम अडानी, सागर अडानी और अन्य के खिलाफ अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय, ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ न्यूयॉर्क द्वारा चालू किए गए मुकदमे में अडानी की आपराधिक गतिविधियों के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 2020 से 2024 के बीच भारत के सरकारी अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर (₹2100 करोड़) से अधिक की रिश्वत दी गई।”

जयराम रमेश ने आगे लिखा, “मुकदमे में कहा गया है कि रिश्वत ‘भारत सरकार के साथ सोलर एनर्जी सप्लाई करने का टेंडर लेने के लिए दी गई थी। इस टेंडर के मिलने से 2 बिलियन डॉलर (₹16,800 करोड़) से अधिक का मुनाफ़ा होने होता। इसी मुकदमे में कहा गया है कि कई मौकों पर गौतम अडानी ने अपनी रिश्वत की योजना को और आगे बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत रूप से एक सरकारी अधिकारी से मुलाकात की, जिसका इलेक्ट्रॉनिक और फोन सबूत होने का दावा किया गया है।”

अडानी पर हमला करते हुए जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि उन्हें मोदी सरकार संरक्षण दे रही है। उन्होंने माँग की कि भारत में भी अडानी समूह के ऑपरेशन की जाँच करने के लिए नए SEBI मुखिया की नियुक्ति की जाए और साथ ही एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया जाए।

भाजपा ने दिया जवाब, कॉन्ग्रेस को ही लपेटा

जयराम रमेश के इन आरोपों का जवाब भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने दिया। अमित मालवीय ने अमेरिकी कोर्ट के कागजों के हवाले से लिखा, “इसलिए कहते हैं कि जवाबा देने से पहले पढ़ लेना चाहिए। आपने जिन कागजों हवाला दिया है। उन्हीं में लिखा है, “मुकदमे में लगाए गए आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं और जब तक आरोपित दोषी साबित न हो जाएँ, तब तक उन्हें निर्दोष करार माना जाता है।” इसके बाद मालवीय ने इस मुकदमे के कागजों के सहारे कॉन्ग्रेस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।

अमित मालवीय ने बताया, “लेकिन जैसा भी हो, पूरा मामला ये है कि अमेरिकी और भारतीय कंपनियों ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) को 12 GW बिजली सप्लाई करने पर सहमति जताई थी। यह समझौता तब होता जब SECI, राज्यों की बिजली कम्पनियों (SDC) के साथ बिजली खरीदने का समझौता (PPA) करने पर आधारित था। अडानी ग्रीन एनर्जी और अमेरिकी कम्पनी एज़्योर पावर के बीच समझौता था, इसके तहत सरकार को बेची जाने वाली बिजली में से एज़्योर 4 GW जबकि अडानी ग्रीन एनर्जी को 8 GW देना था।”

अमित मालवीय ने बताया कि इन कम्पनियों द्वारा बनाई गई बिजली महँगी थी, इसलिए राज्यों की बिजली कम्पनियाँ इन्हें खरीद नहीं रही थीं। ऐसे में यह आगे SECI के पास भी नहीं जाती। अमित मालवीय ने बताया कि मुकदमे के अनुसार, इस स्थिति से निपटने के लिए अडानी ने अमेरिकी फर्म एज़्योर पावर के साथ मिलकर जुलाई 2021 से फरवरी 2022 के बीच ओडिशा (तब BJD शासित), तमिलनाडु (DMK), छत्तीसगढ़ (तब कॉन्ग्रेस शासित) और आंध्र प्रदेश (तब YSRCP) में स्थित SDC को US $265 मिलियन पैसा दिया।

अमित मालवीय ने जयराम रमेश से पूछा कि अगर मुकदमे में बताए गए सभी राज्य तब विपक्ष की पार्टियों द्वारा शासित थे तो सबसे पहले तो उन्हें जवाब देना चाहिए कि क्या उन्होंने रिश्वत ली। मालवीय ने कहा कि जयराम रमेश केंद्र सरकार को लेकर धर्मोपदेश दे रहे हैं, बजाय अपनी सरकारों पर सवाल उठाने के। अमित मालवीय ने इस पूरे मुकदमे के पीछे जॉर्ज सोरोस का हाथ होने की तरफ इशारा किया और आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस उसकी कठपुतली बनी हुई है।

अमेरिकी एजेंसियों के क्या हैं आरोप?

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस और SEC ने अडानी समूह पर आरोप लगाया कि 2020 से 2024 के बीच अडानी समूह के रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा ​​और रूपेश अग्रवाल ने बिजली सप्लाई के टेंडर हासिल करने के लिए लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश रची। उन्होंने अपने हिसाब से फैसले करवाने के लिए पैसा दिया, इसके लिए शेल कम्पनियों का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा अमेरिकी एजेंसियों ने कहा कि इन गलत सूचना के सहारे अमेरिका में अडानी समूह के लोगों ने बॉन्ड जारी किए और निवेश हासिल किए।

अडानी समूह के लोगों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने सबूत मिटाने की कोशिश की और न्याय के रास्ते में रोड़ा बने। यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने जाँचकर्ताओं को झूठे बयान दिए और रिश्वत की बातें छुपाई। अमेरिकी एजेंसियों ने कुल 5 आरोप अडानी पर तय किए हैं। अब इसको लेकर मुकदमा चलेगा। वहीं अडानी समूह ने एक बयान जारी करके अमेरिका में होने वाली अपनी अगली बॉन्ड की बिक्री रोक दी है। अडानी समूह ने कहा कि यह बॉन्ड इश्यु तीन गुना सबस्क्राइब हुआ था।

जिसे देखो वही पत्रकार मुस्लिम, UP मुरादाबाद (कुंदरकी) चुनाव की रिपोर्टिंग: भाजपा नेता शलभमणि त्रिपाठी ने बताया ‘मीडिया जिहाद’, जारी की नामों वाली सूची

उत्तर प्रदेश भाजपा के नेता और देवरिया से विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने मुरादाबाद में सक्रिय पत्रकारों की एक सूची जारी की है। इस सूची में विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम कर रहे पत्रकारों के नाम लिखे गए हैं। खास बात ये है कि ये सभी पत्रकार मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। त्रिपाठी ने इस ‘मीडिया जिहाद’ के रूप में साझा किया है। इससे पहले उन्होंने बहराइच के पत्रकारों की सूची साझा की थी।

शलभमणि त्रिपाठी ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर इस सूची को जारी करते हुए लिखा, “कंटे छंटे वीडियो व तस्वीरों के जरिए यूपी उपचुनाव में जिस मुरादाबाद से सर्वाधिक झूठ फैलाया गया, वहाँ कवरेज कर रहे पत्रकारों की सूची भर देख लीजिए !! #मीडियाजिहाद।”

इस सूची में न्यूज 18, रिपब्लिक भारत जैसे मेनस्ट्रीम मीडिया से लेकर लोकल न्यूज पेपर एवं चैनलों के नाम दिए गए हैं। इसके अलावा, PTI और IANS जैसे न्यूज एजेंसी में भी एक समुदाय के पत्रकार हैं। इस सूची में कुल 32 पत्रकारों के नाम दिए गए हैं, जो सभी मुस्लिम समुदाय से हैं। इसके अलावा, इसमें ये भी कहा गया है कि मुरादाबाद में 100 से अधिक मुस्लिम यूट्यूबर सक्रिय हैं।

इससे पहले त्रिपाठी ने बहराइच के मुस्लिम पत्रकारों की सूची जारी की थी। इस सूची में भी मेनस्ट्रीम मीडिया से लेकर छोटे स्तर के मीडिया संस्थान में सभी मुस्लिम पत्रकार ही थे। यह सूच उन्होंने तब जारी की थी, जब बहराइच में दुर्गा पूजा के उपरांत प्रतिमा के विसर्जन के दौरान हमला कर दिया गया था। इसके बाद दंगे भड़क उठे थे।

इस सूची को साझा करते हुए शलभ ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था, “बहराइच से ख़बरें भेज रहे पत्रकारों के नाम भर पढ़ लीजिये, समझ आ जाएगा कि ख़बरें कितनी निष्पक्ष व सच्ची हैं, यूट्यूबरों की जमात अलग से जुटी है, पूरा सिस्टम ही भिड़ा है दंगाइयों को बचाने में, झूठ फैलाने में !!”

इस दंगे में गोपाल मिश्रा नाम के एक शख्स की हत्या होने के बाद शलभ ने आगे लिखा था, “गोपाल मिश्रा का हरा झंडा उतारने का वीडियो तो सामने आया, परंतु उससे ठीक पहले उसी घर से दुर्गा प्रतिमा पर हमले, फ़ायरिंग, पथराव और फिर गोपाल मिश्रा की नृशंस हत्या का वीडियो क्यों ग़ायब कर दिया गया, इसका जवाब बहराइच के पत्रकारों की इस लिस्ट में छुपा है !!”

बहराइच वाली सूची में इंडिया टीवी से लेकर पीटीआई और ANI तक के पत्रकार मुस्लिम समुदाय से हैं। इस सूची में उन्होंने 13 प्रमुख पत्रकारों के नाम जारी किए थे। शलभ ने यह भी दावा किया था कि सूची के वायरल होने के बाद बहराइच के सूचना अधिकारी वारिस अली को शंट कर दिया गया था।

पुलिस करे मस्जिद का नियंत्रण, कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: मस्जिद में ही लड़ गए थे नमाजी, 1 की मौत + 8 घायल, डिमांड थी अलग-अलग नमाज टाइमिंग की

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि वह पूर्वी मिदनापुर की एक मस्जिद पर नियंत्रण कर ले। पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह मस्जिद में आने-जाने वाले नमाजियों पर नजर रखे और इसे नियमित करे। यह आदेश नमाजियों के दो गुटों के बीच में हुई लड़ाई के बाद दिया गया है। इस लड़ाई में एक की मौत हो गई थी।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार (20 नवम्बर, 2024) को यह आदेश दिया। हाई कोर्ट ने यह आदेश एक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में कहा गया था कि कि उसके पुराने आदेश की अवहेलना की गई है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 7 नवम्बर, 2024 को आदेश दिया था कि पूर्वी मिदनापुर के एगरा में स्थित एक मस्जिद में दो अलग-अलग नमाजियों के गुटों को अलग-अलग समय पर नमाज पढ़वाई जाए। हालाँकि, कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ। इसके बाद 13 नवम्बर, 2024 को दोनों गुटों के बीच भारी हिंसा हुई।

इस हिंसा में एक नमाजी की मौत हो गई जबकि 8 गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हिंसा के बाद पुलिस ने 3 FIR दर्ज की हैं। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हिंसा के बाद अदालत पहुँचे नमाजियों की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा पुलिस को मस्जिद में नियंत्रण का आदेश दिया।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा, “मस्जिद को पुलिस नियंत्रण में ले और यहाँ किसी की भी एंट्री एगरा पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक की मंजूरी के बगैर नहीं होगी।” कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि उसने यह निर्णय बड़ा सोच समझ कर लिया है।

हाई कोर्ट ने नमाजियों को चेतावनी दी है कि अगर फिर से हिंसा हुई और कोई मरा तो वह मस्जिद में किसी के भी नमाज पढ़ने पर रोक लगा देंगे। कोर्ट ने कहा कि ‘मजहबी मामले’ के कारण किसी की भी मौत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से एक मीटिंग करने को भी कहा है।