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जेब में ब्रा-पैंटी, स्कूटी पर घूम-घूम महिलाओं को छेड़ता था इजहार खान, पुलिस ने किया गिरफ्तार: भोपाल का मामला

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस ने मंगलवार (26 नवंबर, 2024) को लड़कियों से छेड़खानी करने वाले इजहार खान को गिरफ्तार किया है। इजहार खान पिछले एक महीने से शहर में कई महिलाओं को छेड़ चुका था। पुलिस ने इजहार खान की स्कूटी को भी सीज कर दिया है। स्कूटी की डिग्गी और इजहार की जेब से महिलाओं के कई अंडरगारमेंट्स बरामद हुए हैं। अब पुलिस अंडरगारमेंट्स इकट्ठा करने की वजह की पड़ताल कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला भोपाल के चूनाभट्टी इलाके का है। यहाँ के यशोदा विहार में रहने वाली कई महिलाएँ एक स्कूटी वाले की छेड़खानी से काफी दिनों से परेशान थीं। सोमवार (25 नवंबर) को 2 महिलाओं ने इस संबंध पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई थीं।

इसी दिन शाम को एक और महिला ने अपने साथ हुई छेड़खानी पर शोर मचाया था। तब लोगों ने दौड़ा कर स्कूटी सवार एक व्यक्ति को पकड़ लिया था। बाद में उसको पुलिस के हवाले कर दिया गया। पूछताछ में आरोपित ने अपना नाम इजहार खान बताया।

इजहार खान के अम्मी-अब्बा टीचर है। अम्मी-अब्बा ने दावा किया है कि उन्हें अपने बेटे की करतूत के बारे में कुछ पता ही नहीं था। इजहार ने अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने अपनी एक्टिवा स्कूटी के नंबर प्लेट पर कागज चिपका रखा था। स्कूटी की जाँच की गई तो उसकी डिग्गी के अंदर महिलाओं के कई अंडरगारमेंट्स (ब्रा-पैंटी) बरामद हुई।

इजहार खान ने पुलिस के आगे सोमवार को हुई दोनों छेड़खानी की वारदातों में अपने ही होने की बात कबूल कर ली। पुलिस उसके द्वारा की गई अन्य हरकतों की भी जाँच में जुटी है। पता चला है कि इजहार खान पीड़िताओं को धमकाता भी था। प्रथम दृष्टया पुलिस ने इजहार को साइको अपराधी माना है। वह पूछे जा रहे सवालों के भी उलटे-सीधे जवाब दे रहा है।

पत्थरबाजी, नारा-ए-तकबीर, अदालत पर अविश्वास, इबादत के नाम पर उन्माद… साल 712 की तरह दोबारा न हारे हिंदुस्तान, इसलिए समाधान जरूरी

इतिहास अलमारी में सजाने की चीज नहीं। उससे सबक़ लेकर वर्तमान में वह सब करने की सीख देने का विषय है ताकि भविष्य में अगली आने वाली पीढ़ी को निष्कंटक जीवन की परिस्थितियाँ उपलब्ध करवायी जा सकें! इतिहास सबक़ लेने का विषय है ताकि वह भूल न दोहरायी जाएँ जिनके कारण कष्ट, उत्पीड़न और हिक़ारत झेलनी पड़ी हो!

इतिहास की दो किताबें जिनका अवलोकन मैंने किया है, वह है रामधारी सिंह दिनकर की ‘संस्कृति के चार अध्याय’ और कन्हैया लाल मुंशी की ‘जय सोमनाथ’। वैसे सोमनाथ नामक उपन्यास विधा की किताब आचार्य चतुरसेन ने भी लिखी है, उसकी विषयवस्तु और आधार मुंशी की किताब ही है, वह भी पढ़ी है।

दिनकर जी लिखते हैं कि सिंध पर जब बिन क़ासिम ने 712 ई. में इस्लामी आक्रमण किया, तब उस समय राजा दाहिर वहाँ पर शासन कर रहा था और यह भारत पर पहला इस्लामी आक्रमण था। इस आक्रमण में राजा दाहिर मारा गया। इसके बाद क्या हुआ? क़ासिम दाहिर की बेटियों को भोगदासी बनाकर और लूटपाट कर वापस लौट गया।

बाबर मात्र 12000 घुड़सवारों के साथ आता है और जीतकर सत्ता स्थापित कर लेता है। ख़िलजी 250 आततायियों के साथ बिहार को रौंद डालता है। महमूद गजनवी हमारे मानबिंदु भगवान सोमनाथ के मंदिर को तहस-नहस कर चला जाता है और हम देखते रह गए।

इस्लामी आक्रमण और बिखरता भारत: कारण क्या था?

दिनकर लिखते हैं कि हर्षवर्धन के बाद इस देश में कोई सम्राट ऐसा नहीं हुआ, जो केन्द्रीय सत्ता को सलामत रख रखे। हमारी केन्द्रीय सत्ता टूट जाने से अनेक क्षेत्रीय छत्रपों में बिखर गया यह राष्ट्र, उसकी राजनीतिक चेतना खो गई। जिसका दुष्परिणाम यह हुआ कि कुछ सिरफिरे आए और हमें लूटकर चले गए। मुग़ल आए और हम पर क़ाबिज़ हो गए। अंग्रेज आए और सत्ता स्थापित कर हमारा भरपूर शोषण किया। हमें हज़ार वर्ष की ग़ुलामी को झेलना पड़ा कुल मिलाकर।

कन्हैया लाल मुंशी ‘जय सोमनाथ’ में लिखते हैं कि जब गजनी का अमीर आया तो झालौर में वाक्पतिराज शासन कर रहे थे। वल्लभी के राजा भीमदेव गजनवी से लड़ने के लिए तैयारी कर रहे थे, लेकिन जब उन्होंने झालौर संदेश भेजा सहयोग के लिए तो वाक्पतिराज ने यह कह कर मना कर दिया कि यह तुम्हारा मामला है, तुम जानो। 

परिणाम यह हुआ कि गजनी का अमीर आया और सोमनाथ का विध्वंस करने में सफल हो सका। कारण हम क्षेत्रीय क्षत्रपों में बँट कर अपने-अपने स्वार्थ की लड़ाई लड़ रहे थे। हम आसन्न बाहरी ख़तरे से बेख़बर अपना स्वार्थ देख रहे थे बस। जिसके दुष्परिणाम में राष्ट्र को हिक़ारत, शोषण और ध्वंस झेलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

वर्तमान का भारत, हिंदू और बिखराव की साजिश

चुनाव अब गुजर चुका है, इसलिए इस बात को चुनाव की दृष्टि से न देखा जाए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का वह बयान जिस पर विपक्ष ने बिना समझे बवाल किया, गौर करेंगे तो इसके आयाम बड़े हैं! यह बात इस देश के 1300 वर्ष पूर्व के इतिहास को वर्तमान से जोड़ते हुए भविष्य तक जाती है। अगर सियासत को एक कोने में रखकर कोई भी व्यक्ति विचार करे इस वाक्य पर तो कोई भी इस कटु सत्य से इनकार नहीं कर सकता।

चार उदाहरण से समझते हैं इसे:

  1. जिस तरह से तुष्टिकरण पर जरा सा सवाल खड़ा करने पर पत्थरबाज़ी होती है।
  2. नारा-ए-तकबीर के साथ जिस तरह भय फैलाने का प्रयास किया जाता है।
  3. अनुकूल निर्णय न आने पर अदालत पर अविश्वास जताया जाता है।
  4. इबादत के नाम पर जिस तरह का उन्माद फैलाने का प्रयास होता है।

ऊपर के चारों उदाहरण हर आए दिन दिख जाता है समाज में। यह वह मानसिकता है, जो बार-बार अपने इरादे उजागर करती है। इन सब बातों/घटनाओं को सामान्य नहीं कहा जा सकता है। यह वैसी ही घटनाएँ हैं, जो 1947 में घट रही थी, जिसके परिणाम बताने की आवश्यकता नहीं है।

अकेले भारत ही नहीं, दुनिया का कोई भी देश इस विचारधारा से सुरक्षित नहीं है। शान्ति के पैग़ाम के नाम पर जिस तरह की अशान्ति का सुनियोजित प्रयास होता है, छिपा नहीं है किसी से।

हम उस विचारधारा से आने वाले लोग हैं जो सर्वे भवन्तु सुखिनः में विश्वास रखते हैं। लेकिन बार-बार जब हमारे अधिकारों का अतिक्रमण कर आतंक फैलाने का प्रयास किया जाए तो मामला गंभीर और विचारणीय हो जाता है।

इसलिए विचार करिए और समाधान की तरफ़ बढ़िए, यही वक्त की माँग है!

संंभल में पुलिस से लूटे 50 कारतूस, 29 टियर गैस के गोले, था पुलिसकर्मियों की हत्या का प्लान: इंस्पेक्टर की FIR से जानिए मुस्लिम दंगाइयों के इरादे

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रविवार (24 नवंबर, 2024) को मुस्लिम भीड़ के दंगे में 2 दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस को किस तरह से दंगा कर रही भीड़ ने निशाना बनाया, इसका खुलासा इस घटना की FIR से हुआ है।

जहाँ एक ओर दंगाई भीड़ से जुड़े लोग विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं, वहीं FIR कुछ और कहानी बयाँ कर रही हैं। ऐसी ही एक FIR में बताया गया है कि दंगाई भीड़ ने पहले पुलिसकर्मियों को गंदी-गंदी गालियाँ दी फिर उनको घेर कर उनके हथियार छीन लिए। नुकसान से बचने के लिए पुलिस वालों को आत्मरक्षा में पीछे हटना पड़ा था।

यह FIR संभल के कोतवाली नगर में तैनात एक सब इंस्पेक्टर ने दर्ज करवाई है। FIR में सब इंस्पेक्टर ने बताया कि रविवार को वो अपने साथी सिपाहियों के साथ विवादित जामा मस्जिद के पास तैनात थे। सुबह 8:45 के आसपास मस्जिद से लगभग 100 मीटर दूरी पर 700-800 मुस्लिमों की भीड़ जमा हो गई।

इस भीड़ ने पहले नारेबाजी शुरू की फिर यह उग्र हो गए। भीड़ में शामिल मुस्लिम लड़कों ने पत्थरबाजी चालू कर दी। इसका निशाना पुलिस बनी। शिकायतकर्ता के मुताबिक दंगाई भीड़ विवादित मस्जिद का सर्वे करने आई टीम को बाहर खदेड़ने पर आमादा थी।

सब इंस्पेक्टर के अनुसार जिले में 5 से अधिक लोगों के जमा होने पर रोक लगाई गई थी। इसी के तहत पुलिस बार-बार लोगों को घर जाने की नसीहत दे रही थी। पुलिस की नसीहत का दंगाई भीड़ पर कोई असर नहीं पड़ा। वह पुलिसकर्मियों को अनुसना करते हुए धक्का देती आगे बढ़ती रही।

इस दौरान भीड़ में शामिल लोग पुलिसकर्मियों को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए पत्थर मारते रहे। सब इंस्पेक्टर ने शिकायत में बताया है कि इस भीड़ में शामिल लोग एक साजिश के तहत पुलिस को निशाना बना रहे थे।

पत्थरबाजी के बाद भीड़ में से 40-50 लोगों ने पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए इन दंगाइयों को उकसाया। भीड़ में कुछ लोगों ने शिकायतकर्ता सब इंस्पेक्टर की सरकारी पिस्टल छीनने की कोशिश की। पिस्टल न छीन पाने पर हमलावरों ने सब इंस्पेक्टर से 9mm के 10 कारतूस लूट लिए।

भीड़ से से कुछ अन्य लोगों ने कॉन्स्टेबल कपिल कुमार को घेर कर कंधे पर टंगा बैग छीन लिया। इस बैग में टियर गैस के 29 गोले थे। यह उपद्रवी अपने साथ ले गए। इतने पर भी हिंसक भीड़ नहीं रुकी, उसने इसके बाद तीसरे पुलिस्कारी पुलिसकर्मी को निशाना बनाया।

इसके बाद दंगाइयों का निशाना कॉन्स्टेबल पंकज कुमार बने। उनके कंधे पर टंगा बैग लूट लिया गया। इस बैग में 25 ब्लैंक कारतूस और इतने ही रबर बुलेट थे जो भीड़ अपने साथ ले गई। भीड़ ने यहीं तैनात कॉन्स्टेबल राजपाल को निशाना बनाया। उनसे भी 15 कारतूस छीने गए।

इसके बाद दंगाई भीड़ ने उनकी हत्या करने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए थाने की तरफ भागना पड़ा। भीड़ एलान कर रही थी कि वो किसी भी हाल में जामा मस्जिद का सर्वे नहीं होने देगी। अतिरिक्त फ़ोर्स आने के बाद ही यहाँ तैनात पुलिसकर्मियों की जान बच पाई। हिंसा में कई पुलिसकर्मियों को चोटें आईं हैं जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।

पुलिस को गोली मार के लूँगा बदला

इस बीच संभल में मरे एक उपद्रवी के अब्बा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में वो अपने बेटे की मौत का बदला पुलिस से लेने की चुनौती देता दिख रहा है। उसने मीडिया के आगे खुलेआम कहा, “माँग कुछ नहीं है मेरी। बदला ये है कि जिसने मारा है उसको गोली मारूँगा।” जब पत्रकार ने पूछा कि किसने मारा है तब सामने से जवाब आया, “पुलिस ने तो मारी है गोली।”

यूनुस सरकार के वकील ने ISKCON को बताया ‘कट्टरपंथी संगठन’, बैन करने की बनाई है योजना: संत को किया है गिरफ्तार

बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने हाई कोर्ट में हिन्दुओं के संगठन ISKCON को ‘कट्टरपंथी’ बताया है। उन्होंने कोर्ट में बताया है कि ISKCON को बैन करने की कार्रवाई पहले से चल रही है। यूनुस सरकार ने यह बातें ISKCON के एक संत की गिरफ्तारी के बाद कही हैं। हाई कोर्ट में एक मुस्लिम वकील ने ISKCON को बैन करने की माँग को लेकर याचिका लगाई है।

बांग्लादेश हाई कोर्ट में वकील ने याचिका दायर करके कहा है कि ISKCON को बैन कर दिया जाए क्योंकि यह देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त है। वकील ने इस मामले में हाई कोर्ट में ISKCON को लेकर कथित मीडिया रिपोर्ट्स दी हैं।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने देश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्ज्माँ से जवाब माँगा। असदुज्ज्माँ ने कोर्ट को बताया कि सरकार इस ‘कट्टरपंथी’ संगठन पर कार्रवाई को लेकर पहले ही विचार कर रही है। असदुज्ज्माँ ने बताया कि इसको बैन करने को लेकर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि ISKCON की जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि ISKCON के संत चिन्मय कृष्ण दास को बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियों ने सोमवार (25 नवम्बर, 2024) को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद मंगलवार को उन्हें जमानत भी देने से इनकार कर दिया गया। जज काजी नजरुल इस्लाम ने इस दौरान उन्हें देशद्रोह का प्रथम दृष्टया दोषी पाया।

चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद चटगाँव कोर्ट परिसर में हंगामा हुआ। हिन्दुओं ने यहाँ प्रदर्शन किया और चिन्मय कृष्ण दास को छोड़ने की माँग की। इन हिन्दुओं पर बांग्लादेश की पुलिस और इस्लामी कट्टरपंथियों ने ईंट और पत्थर बरसाए और लाठियाँ चलाई। इस दौरान गोली चलाने की बात भी सामने आई।

प्रदर्शन के दौरान हुए हमले में एक सरकारी वकील की मौत हो गई। बांग्लादेश की पुलिस ने इस हत्या का दोष पीड़ित हिन्दुओं पर ही मढ़ दिया है। हालाँकि, बांग्लादेश की सम्मिलित हिन्दू जागरण जोत समिति ने स्पष्ट किया है कि हिन्दू इस घटना में शामिल नहीं थे बल्कि दूसरी तरफ मस्जिद से हमला हुआ था।

वकील की हत्या के मामले में पुलिस ने बुधवार (27 नवम्बर, 2024) को 33 लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें से 6 को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। इनकी पहचान घटनास्थल के CCTV कैमरे से की गई है। यह नहीं स्पष्ट है कि यह लोग कौन है।

संभल हिंसा में मुस्लिम महिलाओं के 3 प्लान: (i) दंगाइयों की रक्षा (ii) पुलिस को निष्क्रिय करना (iii) पत्थर-बोतलें फेंकना – रुकैया, फरमाना, नजराना ने खोले राज

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रविवार (23 नवंबर) को भड़की हिंसा के बाद इसकी साजिश की परतें धीरे-धीरे उधड़ रहीं हैं। पकड़े गए पत्थरबाजों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि दंगाइयों को बैकअप देने के लिए कई मुस्लिम महिलाओं को भी तैयार रखा गया था। इस बीच प्रदेश सरकार ने हिंसा में हुए नुकसान की वसूली उपद्रवियों से करने का एलान किया है। उधर जमीयत उलेमा ए हिन्द ने भविष्य में किसी भी मस्जिद का सर्वे रोकने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पकड़े गए पत्थरबाजों और गिरफ्तार हुई खातूनों से पूछताछ में सामने आया है कि संभल हिंसा के दौरान बैकअप के लिए मुस्लिम महिलाओं को तैयार रखा गया था। पहले से ही साजिश के तहत काँच की बोतलें और पत्थर जमा कर लिए गए थे। इसके बाद उपद्रवियों ने पुलिस पर हमला किया। अंत में औरतों को इस बात के लिए रेडी रखा गया था कि अगर पुलिस दंगाइयों का पीछा करे तो वो सामने आकर खड़ी हो जाएँ।

बताया ये भी गया है कि मुस्लिम महिलाओं पर कई जिम्मेदारी डाली गई थी। पहली जिम्मेदारी में पुलिस के आगे खड़े होकर दंगाइयों को कवर देना था। वहीं दूसरे काम में उनको खुद भी पत्थरबाजी और सुरक्षा बलों पर बोतलें आदि फेंकने का जिम्मा मिला था। हिंसा में शामिल रुकैया, फरमाना और नजराना ने भी इसी तरह की साजिश रचे जाने की पुष्टि की है। इन महिला अरोपितों को आमने-सामने बिठा कर भी पूछताछ की गई है।

जो किया, वही भरेगा

इस बीच उत्तर प्रदेश शासन ने दंगाइयों से ही हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई की वसूली की तैयारी कर ली है। पुलिस विभाग सहित अन्य डिपार्टमेंट नुकसान का आंकलन करने में जुटा हुआ है। दंगाइयों की सम्पत्तियों की भी खोजबीन शुरू कर दी गई है। बताते चलें कि हिंसा के बाद अब तक कुल 27 दंगाई गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसमें 3 महिलाओं के साथ इतने ही नाबालिग भी शामिल हैं। 74 पत्थरबाजों को चिन्हित किया जा चुका है। बाकी की पड़ताल की जा रही है। जिले में कहीं भी खुले में पेट्रोल बेचने पर पाबन्दी लगा दी गई है।

दंगाइयों के साथ खड़ी जमीयत बंद करवाना चाहती है सर्वे

इस पूरे मामले में अब जमीयत उलेमा ए हिन्द की एंट्री हुई है। जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र जारी करते हुए माँग की है कि आगे से किसी भी मस्जिद का सर्वे न करवाया जाए। सर्वे से सामाजिक एकता को खतरा बताते हुए जमीयत ने यह भी आवाज उठाई है कि हिन्दू पक्षकार ‘द ‘प्लेसेज ऑफ़ वर्शिप एक्ट’ का पालन करें। मौलाना महमूद मदनी ने मंगलवार (26 नवंबर) को यह पत्र जमीयत के सचिव नूर अहमद फारुकी के जरिए से जारी किया है।

इसी के साथ जमीयत उलेमा ए हिन्द संभल हिंसा में खुल कर दंगे के आरोपितों के पक्ष में खड़ी हो गई है। जमीयत की तरफ से शासन से SDM और डिप्टी एसपी को सस्पेंड करने की भी माँग उठाई गई है। जमीयत उलेमा ने संभल हिंसा में हुई मौतों का जिम्मेदार भी प्रशासन को ठहरा दिया है।

पैदा हुई ईसाई, रिजर्वेशन वाली नौकरी के लिए बन गई दलित: सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा- सिर्फ ‘आरक्षण’ के लिए खुद को हिन्दू बताना संविधान के साथ धोखा

पुद्दुचेरी की एक ईसाई महिला ने दलित होने का दावा करते हुए आरक्षण की माँग कर दी। महिला ने दावा किया कि वह पैदा जरूर ईसाई हुई थी लेकिन हिन्दू धर्म में विश्वास रखती अहि और दलित है, इसलिए आरक्षण दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने उसके दावे को नकार दिया।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस आर महादेवन ने कहा कि महिला केवल नौकरी लेने को ही दलित हिन्दू होने की बात कह रही है जबकि सबूत दिखाते हैं कि वह ईसाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ लेने के लिए ही खुद को दलित हिदू बताना और इसमें विश्वास ना करना संविधान के साथ विश्वासघात है। सुप्रीम कोर्ट ने उसे दलित होने का जाति प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया है।

क्या है मामला?

यह मामला पुद्दुचेरी की एक ईसाई महिला से जुड़ा हुआ है। सी सेल्वारानी नाम की एक महिला ने कोर्ट में दावा किया कि वह हिन्दू पैदा हुई थी और उसके माँ और बाप वल्लुवन जाति के हैं। ऐसे में वह भी इसी जाति की है और अपने जीवन भर हिन्दू धर्म में विश्वास रखते आई है। उसने यह भी बताया कि उसने अपनी पूरी शिक्षा भी दलित होने के फायदे लेते हुए की है।

महिला सेल्वारानी ने कहा कि उसने 2015 में एक नौकरी के लिए आवेदन किया था। इसमें वह पास भी हो गई थी। इसके नौकरी के लिए दस्तावेज के सत्यापन के दौरान उससे जाति प्रमाण पत्र माँगा गया था। उसने इसके लिए आवेदन दिया था लेकिन इसे रद्द कर दिया गया क्योंकि प्रारम्भिक जाँच में सामने आया कि वह ईसाई है और उसका बाप्तिसमा भी हुआ है।

दलित ना होने का जाति प्रमाण पत्र आवेदन रद्द किए जाने के बाद सेल्वारानी मद्रास हाई कोर्ट पहुँच गई। इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले में जाँच करके फैसला लेने को जिला प्रशासन से कहा। जिला प्रशासन ने इसके बाद जाँच की और फिर से उसके दलित होने के दावे को खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि ना ही वह हिन्दू है और ना ही बौद्ध या सिख।

इसके बाद सेल्वारानी केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) पहुँच गई। यहाँ से उसने एक जिस नौकरी में आवेदन किया था, उसके लिए एक पद खाली रखवा लिया। वह हाई कोर्ट दोबारा पहुँची लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद दलित होने का प्रमाण पत्र लेने की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट आ गई।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट में सेल्वारानी ने दावा किया कि वह हिन्दू पैदा हुई थी और तब से हिन्दू धर्म में विश्वास रखती है। उसने दावा किया कि वह मंदिरों में भी जाती है और हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा करती है। उसने यह दावा किया कि उसकी माँ एक ईसाई थी और पिता हिन्दू थे। उसने दावा किया उसकी माँ शादी के बाद हिन्दू बन गई थी।

इसके अलावा उसने अपने परिजनों के जाति प्रमाण पत्र भी दिखा दिए। उसने यह भी दावा किया कि उसका बाप्तिसमा तब हुआ था जब वह 3 महीने की थी इसलिए वह ईसाई नहीं बन जाती। उसने साथ ही में यह भी बताया गया कि अपनी पूरी शिक्षा भी उसने दलित होने के आरक्षण का लाभ लेते हुए पूरी की है, इसलिए अब नौकरी में भी उसे आरक्षण मिलना चाहिए।

वहीं इस मामले में जाति प्रमाण पत्र देने का विरोध कर रहे जिला प्रशासन ने बताया कि सेल्वारानी के आवेदन के बाद की गई जाँच में सामने आया था कि उसका पिटा एक धर्मांतरित ईसाई है। इसके अलावा जन्म के तीन महीने बाद ही सेल्वारानी का भी ईसाइयत में बाप्तिसमा करवा दिया गया था। इसका रिकॉर्ड भी है।

इस मामले में गाँव वालों से भी जानकारी माँगी गई। सेल्वारानी के ही गाँव के एक व्यक्ति ने अबूत के साथ बताया कि सेल्वारानी ईसाई है और उसके माता-पिता की शादी भी चर्च में हुई थी। इस बात की तस्दीक सेल्वारानी के गाँव के और भी चार लोगों ने की। जिला प्रशासन ने कहा कि ऐसे में सेल्वारानी को जाति प्रमाण पत्र ना दिया जाना ठीक था।

फैसले में कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि रिकॉर्ड दिखाते हैं कि भले ही सेल्वारानी ने खुद के ईसाई ना होने और हिन्दू धर्म मानने का दावा किया हो लेकिन अगर ऐसा होता तो वह मात्र बयान नहीं देती बल्कि कुछ सही में करती।

कोर्ट ने कहा, ” वह सिर्फ यह दावा नहीं कर सकती कि उसके पिता ने पुनः धर्म परिवर्तन कर लिया है और उसने और उसकी माँ ने भी धर्म परिवर्तन कर लिया है। सेल्वारानी और उसके परिवार ने यदि सही में धर्म परिवर्तन करने का इरादा किया था, तो उन्हें हिंदू धर्म में मानने के लिए दिखावा करने के बजाय इसे सही दर्शाने के लिए कुछ पक्का काम करना चाहिए था।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि मान लिया जाए कि सेल्वारानी की माँ हिन्दू बन गई थी तो फिर उसने अपने बच्चों का बाप्तिसमा क्यों करवाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “इस मामले में, सेल्वारानी जन्म से ईसाई थी और उसे किसी भी जाति से नहीं जोड़ा जा सकता। किसी भी मामले में, ईसाई धर्म में धर्मांतरण करने पर, व्यक्ति अपनी जाति खो देता है।”

कोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर कहा, “कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म में तभी धर्मांतरित होता है, जब वह वास्तव में उसके सिद्धांतों और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित होता है। हालाँकि, यदि धर्मांतरण का उद्देश्य केवल आरक्षण का फायदा लेना है। लेकिन अगर दूसरे धर्म में कोई विश्वास सही में नहीं है, तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा फायदा दिया गया तो आरक्षण के पूरे उद्देश्य को ही खत्म कर देगा। कोर्ट ने कहा कि सबूत साफ़ तौर पर दिखाते हैं कि सेल्वारानी ईसाई धर्म को मानती है और नियमित रूप से चर्च में जाकर इस धर्म का सक्रिय रूप से पालन करती है। कोर्ट ने कहा कि इसके बावजूद वह हिंदू होने का दावा करती है और रोजगार के उद्देश्य से अनुसूचित जाति समुदाय का प्रमाण पत्र चाहती है। कोर्ट ने कहा कि यदि उसे आरक्षण का फायदा दिया गया तो यह संविधान के साथ धोखाधड़ी होगी।

मस्जिद-कब्रिस्तान की जमीन भले ही प्रयोग में नहीं, लेकिन वो रहेगी हमेशा मुस्लिमों की: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, वक्फ के खिलाफ दायर याचिका खारिज

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि सरकारी अभिलेखों में दर्ज किसी भी कब्रिस्तान अथवा मस्जिद का संरक्षण किया जाना चाहिए भले ही वो जगह लम्बे समय से प्रयोग में न आ रही हो। गुरुवार (21 नवंबर 2024) को उच्च न्यायालय ने यह फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल के निर्णय को चुनौती देती एक याचिका पर दिया है।

लाइव लॉ के मुताबिक यह मामला पंजाब प्रदेश में कपूरथला के गाँव बुधो पंधेर का है। यहाँ की ग्राम पंचायत ने पंजाब वक्फ बोर्ड के एक निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में बताया गया था कि गाँव की एक जमीन को वक्फ बोर्ड द्वारा अपनी सम्पत्ति घोषित कर दिया गया है और कब्ज़ा लेने का प्रयास किया जा रहा है। याचिका में वक्फ बोर्ड का आदेश रद्द करने की माँग की गई थी।

जिस विवादित जमीन के खिलाफ यह मुकदमेबाजी हुई, वह साल 1922 में महाराजा कपूरथला (जगतजीत सिंह) द्वारा सूबे शाह के बेटों निक्के और सलामत को दान की गई थी। निक्के और सलामत ने इस जमीन को तकिया, कब्रिस्तान और मस्जिद की जगह घोषित कर दी थी। साल 1947 में हुए विभाजन के बाद निक्के और सलामत पाकिस्तान चले गए। इसके बाद यह जमीन ग्राम पंचायत के नाम पर दर्ज कर दी गई थी। साल 1966 में इस जमीन का फिर से सर्वे हुआ था। तब इस जमीन को मस्जिद, कब्रिस्तान और तकिया के रूप में दिखाया गया था।

इस याचिका के जवाब में वक्फ बोर्ड ने अपना तर्क कोर्ट में रखा। वक्फ के मुताबिक जमीन राजस्व अभिलेखों में कब्रिस्तान के तौर पर दर्ज है भले ही उसका प्रयोग मुस्लिम समुदाय द्वारा लम्बे समय से नहीं किया गया है। ग्राम पंचायत की तरफ से अधिवक्ता सतिंदर खन्ना ने दलीलें पेश कीं जबकि वक्फ बोर्ड का पक्ष सीनियर एडवोकेट जी एन मलिक ने रखा। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें और सबूत पेश किए, जिस पर उच्च न्यायालय ने 6 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मामले की सुनवाई जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा की अदालत में हुई। 21 नवंबर को बेंच ने अपना फैसला सुनाया। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज मस्जिद, तकिया या कब्रिस्तान का संरक्षण होना चाहिए भले ही मुस्लिम समुदाय द्वारा वो कितने भी समय से प्रयोग में न लाई गई हो। अदालत के मुताबिक ऐसी जगहों का वक्फ के रूप में संरक्षण होना चाहिए। इसी के साथ वक्फ के फैसले के खिलाफ ग्राम पंचायत द्वारा दाखिल की गई याचिका ख़ारिज कर दी गई।

अमेरिकी मुकदमे में गौतम अडानी और सागर अडानी पर रिश्वत देने के आरोप नहीं, मीडिया ने ‘लापरवाही’ में की रिपोर्टिंग: कारोबारी समूह बोला- इससे हुआ बड़ा नुकसान

भारतीय कारोबारी समूह अडानी ग्रुप में सपष्ट किया है कि अमेरिका में उनके खिलाफ दायर किए गए किसी भी मुकदमे में गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी पर सीधे तौर पर रिश्वतखोरी में शामिल होने का आरोप नहीं लगा है। अडानी समूह ने बताया है कि रिश्वत देने के मामले में कोई प्रमाण भी नहीं दिए गए हैं और यह सिर्फ कुछ लोगों के बयान पर आधारित हैं। अडानी समूह ने कहा है कि भारतीय और विदेशी मीडिया ने इस मामले के तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया, जिससे निवेशकों और समूह को बड़ा नुकसान हुआ है।

अडानी समूह के अनुसार, गौतम अडानी, सागर अडानी और विनीत जैन पर अमेरिका में दायर मुकदमे में रिश्वत लेने या देने सम्बन्धी कोई आरोप नहीं लगा है। उन्होंने कहा कि यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने उन्हें भ्रष्ट आचरण से जुड़े आरोपों से बाहर रखा है। समूह ने बताया है कि मुकदमे में सिर्फ एज्युर और CDPQ के अधिकारियों पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया गया है। गौरतलब है कि CDPQ एक कनाडाई निवेशक समूह है और एज्युर अमेरिकी एनर्जी कंपनी है। यह दोनों अडानी समूह के साथ काम करती आई हैं।

अडानी समूह की ग्रीन एनर्जी पर काम करने वाली कंपनी, अडानी ग्रीन एनर्जी ने स्टॉक एक्सचेंज में दी गई एक जानकारी में इस पूरे मामले से सम्बन्धित तथ्य रखे हैं। अडानी ग्रीन एनर्जी ने कहा है कि अडानी समूह के लोगो पर केवल सिक्यूरिटीज में धोखाधड़ी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए गड़बड़ी का आरोप है ना कि रिश्वतखोरी का। उन्होंने साथ ही में यह भी कहा है कि इस बात के कोई सबूत भी नहीं हैं कि अडानी समूह से जुड़े लोगों ने भारत में सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी।

अडानी समूह के अनुसार, पूरा मुकदमा इस सिर्फ बात पर दायर किया गया है कि रिश्वत देने से सम्बन्धित बात की गई थी या उसका वादा किया गया था। यह रिश्वत देने के दावे भी मुकदमे में CDPQ और एज्युर के अधिकारियों के बयान पर आधारित हैं। समूह ने कहा है कि इन सब कारण से उनके खिलाफ दायर किया गया मुकदमा अदालत में काफी कमजोर होगा ही, वह नैतिक रूप से भी मजबूत नहीं है। समूह ने इस मुकदमाबाजी के परिणामों को लेकर चिंता जताई है।

अडानी समूह द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि अमेरिका की बिना किसी मजबूत आधार के की गई कार्रवाई और फिर मीडिया में लापरवाह रिपोर्टिंग के कारण उनको अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं का रद्द होना, उनके वित्तीय बाजार पर असर और रणनीतिक साझेदारों, निवेशकों और जनता द्वारा अचानक जाँच-पड़ताल जैसे बड़े नुकसान उठाने पड़े हैं।

अडानी समूह ने कहा है कि वह कई बाजारों में सीधे तौर पर चीन और अमेरिका से प्रतियोगिता में है और इस मुकदमाबाजी के कारण उसकी शेयर बाजार में सूचीबद्ध 11 कम्पनियों में 55 बिलियन डॉलर (लगभग ₹5 लाख करोड़) का नुकसान झेलना पड़ा है।

गौरतलब है कि अमेरिका में हाल ही में दायर किए गए दो मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि भारत में निवेश की गलत जानकारी के आधार पर अमेरिका से अडानी समूह ने पैसे जुटाए। इस मुकदमे में कुछ आरोपों में गौतम अडानी और सागर अडानी समेत बाक़ी का नाम भी है।

नमाज के बाद भड़काऊ बातें, फिर जिस DSP को हटाने का वीडियो वायरल… उन्हीं को जान से मारने के लिए दागी गोली: संभल हिंसा में FIR से सामने आई जानकारी

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रविवार (24 नवंबर 2024) को मुस्लिम भीड़ ने पुलिस पर हमला बोल दिया था। यह हमला तब किया गया, जब वहाँ की जामा मस्जिद में कोर्ट के आदेश पर सर्वे चल रहा था। घटना के बाद विपक्षी दलों द्वारा सुरक्षा बलों के बजाय दंगाइयों को समर्थन मिला। हालाँकि इस हिंसा की FIR सामने आने के बाद कहानी कुछ और ही निकल कर आ रही है। सामने आई एक और FIR में खुलासा हुआ है कि दंगाइयों ने उसी डिप्टी एसपी को टारगेट कर के गोली मारी थी, जिनके खिलाफ भीड़ लगातार बयानबाजी कर रही थी। कई दुकानों को भी भीड़ ने निशाना बनाया और आगजनी की।

ऑपइंडिया को मिली एक अन्य FIR में सब इंस्पेक्टर दीपक राठी शिकायतकर्ता के तौर पर दर्ज हैं। दीपक राठी संभल शहर में बतौर चौकी इंचार्ज तैनात हैं। रविवार को उन्होंने थाना कोतवाली संभल में तहरीर दी है। तहरीर में दीपक ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर चल रहे सर्वे की टीम को सुरक्षा प्रदान करने के लिए वो जामा मस्जिद पर ही अपनी टीम के साथ तैनात थे। सुबह लगभग 9 बजे 700 से 800 लोगों की भीड़ जामा मस्जिद के पास पहुँच गई।

दीपक राठी ने आगे बताया कि भीड़ के पास घातक हथियार मौजूद थे। इनका मकसद सर्वे के काम में बाधा डालना था। FIR में 2 दिन पहले शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषण का भी जिक्र है। इस भाषण को पुलिस ने राजनैतिक स्वार्थ की सिद्धि के लिए दिया गया बयान बताया है, जिससे भीड़ उग्र हुई थी। इसी तहरीर में आगे सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इक़बाल द्वारा भीड़ को जियाउर्रहमान के नाम पर उकसाने की बातें भी लिखी गई हैं।

सब इंस्पेक्टर राठी ने आगे बताया है कि उग्र हो रही भीड़ को उनके और DSP अनुज चौधरी द्वारा समझाने की बहुत कोशिश की गई। पुलिस की अपील का भीड़ पर कोई असर नहीं पड़ा। वह नारेबाजी करते हुए सरकारी काम में बाधा डालने लगी। थोड़ी ही देर में भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। पुलिस के वाहनों सहित सार्वजनिक सम्पत्तियों और कुछ दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया गया।

तहरीर के अनुसार इसी भीड़ में से किसी उपद्रवी ने डिप्टी एसपी संभल को निशाना बना कर गोली मारी। गोली चलाने वाले का मकसद पुलिस अधिकारी की जान लेना था। यह गोली DSP अनुज चौधरी के पैर में लगी, जिससे वो घायल हो गए। दीपक राठी की तहरीर पर सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और समाजवादी पार्टी के MLA इक़बाल महमूद के बेटे सुहैल इक़बाल सहित 700 से 800 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। इन सभी पर हत्या के प्रयास, तोड़फोड़ और आगजनी आदि की धाराएँ लगाई गई हैं।

भीड़ के टारगेट पर पहले से DSP चौधरी

मुस्लिम भीड़ ने अपनी हिंसा में जिन डिप्टी एसपी अनुज चौधरी को निशाना बनाया, वो पहले से ही दंगाइयों के टारगेट पर थे। हिंसा के दिन भीड़ से बयानबाजी कर रहे एक व्यक्ति का वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दिख रहा व्यक्ति भीड़ को शांत और DSP संभल को ही गलत बता रहा है। बयानबाज के मुताबिक DSP संभल ने भीड़ से बदतमीजी की है। उसने अपील भी की थी कि डिप्टी एसपी संभल को हटाया जाए।

DSP संभल को न सिर्फ गोली मारी गई बल्कि भीड़ ने बाकायदा टारगेट करके उनकी सरकारी गाड़ी पर भी हमला किया। ऑपइंडिया को मिली एक तस्वीर में CO लिखी गाडी पर हुई पत्थरबाजी के निशान साफ देखे जा सकते हैं। इस पथराव से DSP अनुज चौधरी की गाड़ी का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया है। साथ ही गाड़ी को अन्य हिस्सों में भी काफी नुकसान पहुँचा है।

मुस्लिम भीड़ की हिंसा में घायल DSP अनुज चौधरी का वीडियो सामने आया है। वीडियो में उनके पैरों में प्लास्टर बंधा दिखा रहा है। उन्होंने एक बयान में यह भी बताया कि हजारों की भीड़ पुलिसकर्मियों की जान लेने पर आमादा थी। आत्मरक्षा में पुलिस ने संतुलित कार्रवाई की। दंगाइयों के पक्ष में सवाल पूछ रहे पत्रकार से DSP संभल ने उलटे सवाल कर लिया। उन्होंने पूछा कि अगर भीड़ शांत थी तो आपने (पत्रकार) ने उसमें घुस कर वीडियोग्राफी क्यों नहीं की? इसी बयान में उन्होंने कहा, “इन जाहिलों के हाथों मरने के लिए पुलिस में भर्ती हुए हैं क्या?”

एक-एक कर हिन्दू पकड़ो, सबका रेत दो गला: बांग्लादेश में लगे नारे, काली मंदिर पर भी हमला, संत को जमानत ना देने पर युनुस सरकार ने दिखाई बेशर्मी

बांग्लादेश में ISKCON संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट ने जमानत देने से भी मना कर दिया। बांग्लादेश ने इसके बाद बड़ी बेशर्मी से हिन्दू संत की गिरफ्तारी को सही ठहराने की भी कोशिश की। इसके अलावा बांग्लादेश के चटगाँव में हिन्दुओं को ढूँढ-ढूँढ कर उन्हें जिबाह करने के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ निकली और नारे लगाए। बांग्लादेश के किशोरगंज में भी 4 हिन्दुओं की लाशें मिली हैं। एक वकील की भी मौत हुई है। एक काली मंदिर पर हमला भी हुआ है।

संत को जमानत नहीं, वकील की मौत

सोमवार (25 नवम्बर, 2024) को बांग्लादेश के ढाका में गिरफ्तार किए गए हिन्दू संत चिन्मय कृष्ण दास को मंगलवार को चटगाँव के कोर्ट में जमानत नहीं मिली। जज काजी नजरुल इस्लाम ने कथित देशद्रोह के मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया। उन पर बांग्लादेश के झंडे का अपमान करने का आरोप बनाया गया है।

असल में युनुस सरकार ने यह आवा हिन्दुओं की आवाज दबाने के लिए की है। संत चिन्मय कृष्ण दास लगातार बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दुओं के उत्पीड़न पर बोल रहे थे। चटगाँव में इसी दौरान हुए बवाल में एक वकील की मौत हो गई। बताया गया कि यह वकील चिन्मय कृष्ण दास की जमानत का विरोध कर रहा था।

वकील को उसके चैम्बर से खींच कर मारा गया। इसके बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई। वकील की हत्या का आरोप कोर्ट में बवाल करने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों पर लगा है। पुलिस भी इस मामले में कुछ नहीं बता पा रही है।

चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के दौरान प्रदर्शन करने वाले हिन्दुओं को चटगाँव में पुलिस ने बेरहमी से मारा। उन पर लाठियाँ और गोलियाँ चलाई गईं। कई हिन्दू इस पुलिसिया कार्रवाई में घायल हो गए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाए गए हैं। इसकी फोटो भी सोशल मीडिया पर सामने आई हैं।

हिन्दुओं को ढूँढ-ढूँढ कर मारने का ऐलान

बांग्लादेश के चटगाँव में ही हिन्दुओं को प्रताड़ित किए जाने के बाद उन्हें मारने के लिए भी इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक रैली निकाली और नारे लगाए। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में इस्लामी कट्टरपंथियों की एक भीड़ रोड पर जा रही है। इस वीडियो में वह बोलते हुए सुने जा सकते हैं, “एक-एक इस्कॉन (हिन्दू) वाले को ढूंढो, उनको जिबाह करो।”

चटगाँव के ही हजारी गली में हिन्दुओं पर हमला हुआ। यहाँ स्थित काली मंदिर में भी तोड़फोड़ की गई। इस गली में हिन्दू रहते हैं। यहाँ इससे पहले बांग्लादेश की सेना ने भी हिन्दुओं को प्राआदित किया था। इसका एक वीडियो भो सोशल मीडिया पर वायरल है।

किशोरगंज में 4 की हत्या

बांग्लादेश के किशोरगंज में भी 4 हिन्दुओं की लाशें मिली हैं। इनके नाम जॉनी बिस्वास, रूपा रानी बिस्वास, ध्रुब बिस्वास और कोथा रानी बिस्वास हैं। उनकी एक किराए के घर से लाशें बरामद की गई हैं। उनकी मौत कैसे हुई, यह स्पष्ट नहीं है। जॉनी की लाश लटकी हुई बरामद हुई जबकि बाकी तीनों का गला रेता हुआ था।

पुलिस ने शव बरामद करके पोस्टमार्टम के लिए भेजे हैं। मौत का कारण साफ़ नहीं हुआ है। उनकी मौतें आत्महत्या थी या फिर किसी ने उनके मार कर इसे आत्महत्या की तरह दिखाया, इसकी पुलिस जाँच कर रही है। पुलिस ने कहा है कि वह पोस्टमार्टम के बाद ही कुछ साफ़ बता सकेगी।

बांग्लादेश के हिन्दुओं ने जारी किया बयान

बांग्लादेश के हिन्दुओं के लिए काम करने वाली सनातनी जागरण जोत बांग्लादेश ने एक बयान जारी करके चटगाँव की घटना की जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि चिन्मय दास की गिरफ्तारी का विरोध करने के समय उन पर पुलिस और इस्लामी कट्टरपंथियों ने ईंट फेंकी और डंडे बरसाए।

उन्होंने उन आरोपों को भी नकार दिया जिनमें वकील की हत्या का आरोप हिन्दू प्रदर्शनकारियों पर लगाया गया था। सनातनी जागरण जोत ने बताया है कि इस्लामी कट्टरपंथियों ने मस्जिद से यह पत्थरबाजी की थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद एक कॉलोनी में आगजनी की गई और एक मंदिर को भी निशाना बनाया गया।

भारत ने चिंता जताई, बांग्लादेश ने बेशर्मी दिखाई

भारत ने संत चिन्मय दास की गिरफ्तारी और हिन्दुओं की प्रताड़ना को लेकर मंगलवार को लेकर चिंता जताई थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि सरकार हिन्दुओं पर हमला करने वाले कट्टरपंथियों की बजाय संतों को पकड़ रही है। भारत ने हिन्दुओं की सुरक्षा की अपील युनुस सरकार से की थी।

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इसके जवाब में इसे आंतरिक मामला बता दिया। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि चिन्मय दास की गिरफ्तारी पर भारत का बोलना सही नहीं है और यह तथियों को गलत तरीके से पेश करता है। युनुस सरकार ने इस बीच प्रताड़ना को सही ठहराने की कोशिश की।