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कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने दिखानी चाही PM और गौतम अडानी की तस्वीर, दिखा दी अडानी और रॉबर्ट वाड्रा की फोटो: पैनलिस्ट ने कहा, ये ‘जीजा जी’ के साथ

अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी पर लगाए गए आरोपों ने विपक्षी पार्टियों को मोदी सरकार पर निशाना साधने का मौका दिया है। हालाँकि, अडानी को भ्रष्ट साबित करने और पीएम मोदी को इस मामले से जोड़ने के प्रयास में कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अजय वर्मा ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर अपनी पार्टी के लिए शर्मिंदगी का कारण बना दिया।

21 नवंबर को दूरदर्शन न्यूज़ के एक डिबेट शो में अडानी पर लगे आरोपों को लेकर चर्चा हो रही थी। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अजय वर्मा ने विपक्ष की इस धारणा को आगे बढ़ाने की कोशिश की कि पीएम मोदी और गौतम अडानी बहुत करीबी हैं। इसे साबित करने के लिए वर्मा ने अपने मोबाइल पर एक तस्वीर दिखाई, जिसे उन्होंने पीएम मोदी और गौतम अडानी की तस्वीर समझा। लेकिन, बहस के दौरान पैनलिस्ट हंस पड़े क्योंकि वह तस्वीर कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा और अडानी की थी। शो में शामिल OnlyFact India के संस्थापक विजय पटेल ने मजाक में कहा, “यह फोटो मोदी जी के साथ नहीं, जीजा जी (राहुल गाँधी के बहनोई) के साथ है।”

यह तस्वीर 2009 की थी, जब रॉबर्ट वाड्रा ने यूपीए सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद अडानी के मुंद्रा स्थित पोर्ट और SEZ का दौरा किया था। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, वाड्रा की यह यात्रा एक केंद्रीय मंत्री द्वारा आयोजित की गई थी, जो अडानी समूह के करीबी थे।

अमेरिका के आरोप और उनकी सच्चाई

गौतम अडानी और उनके सात अधिकारियों पर अमेरिकी न्याय विभाग ने भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और अज्योर पावर ग्लोबल लिमिटेड को सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष शर्तों पर ठेके देने के बदले 250 मिलियन डॉलर (2100 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी गई।

हालाँकि कॉन्ग्रेस और वामपंथी विचारधारा वाले ग्रुप अमेरिकी न्याय विभाग के इन आरोपों को सत्य मानते हुए प्रचारित कर रहे हैं, पर आरोपों के अनुसार रिश्वत 2021 से 2022 के बीच दी गई थी। इस दौरान जिन राज्यों का नाम सामने आया है, उनमें से एक भी राज्य भाजपा शासित नहीं था। इन राज्यों में तमिलनाडु (जहाँ डीएमके सत्ता में है), ओडिशा (बीजेडी सरकार), छत्तीसगढ़ (कॉन्ग्रेस सरकार), और आंध्र प्रदेश (वाईएसआर कॉन्ग्रेस सरकार) शामिल हैं।

बता दें कि गौतम अडानी पर राहुल गाँधी का खास फोकस है। शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो जब राहुल गाँधी अडानी पर टिप्पणी न करें और पीएम मोदी पर पक्षपात का आरोप न लगाएँ। उन्होंने ‘मोदानी’ जैसे शब्द गढ़े और दावा किया कि पीएम मोदी अडानी के “कर्मचारी” हैं।

लेकिन यह विडंबना है कि कॉन्ग्रेस पार्टी जो अडानी को भ्रष्ट साबित करने की कोशिश करती है, उसी पार्टी की तेलंगाना सरकार हाल ही में 2024 के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (दावोस, स्विट्जरलैंड) के दौरान अडानी समूह के साथ 12,400 करोड़ रुपये के चार समझौतों पर हस्ताक्षर करती है।

‘ये चेहरे पर चेहरा लगाओगी कब तक…’: महाराष्ट्र में वोटिंग खत्म होते ही बेगम स्वरा भास्कर हुईं वोक, चुनावों में पैगंबर मुहम्मद के नाम पर माँग रही थीं वोट

‘जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग… जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग…एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग…’। फिल्म दाग में लता मंगेशकर का गाया हुआ यह गाना आपने जरूर सुना होगा। अगर नहीं सुना है तो जरूर सुनिए और बॉलीवुड की फ्लॉप अभिनेत्री स्वरा भास्कर को याद कीजिए। ऐसा लगता है कि यह गाना स्वरा भास्कर को ही ध्यान में रखकर लिखा गया था, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में अपने चेहरे पर कई नकाब ओढ़े और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की।

स्वरा भास्कर ने 21 नवंबर को सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर एक अपनी फोटो की क्लोज शेयर की। इसमें उन्होंने कई परिधानों में अपनी तस्वीरें शेयर कीं। यह नॉर्मल है। लेकिन, स्वरा ने इस फोटो के साथ जो पोस्ट शेयर किया, वह ध्यान देने वाला है। उन्होंने लिखा, “मुझे इस बात का एहसास नहीं था कि शादी के बाद मेरे परिधानों का चुनाव एक राष्ट्रीय साइबर बहस (विचित्र!) है।”

उन्होंने आगे लिखा, “यहाँ शादी के बाद की मेरी और तस्वीरें हैं, ताकि संघी कीड़ों को उनके गोबर के लिए और अधिक बकवास मिल सके ?. मुझे खेद है फहाद ज़िरार अहमद (उनके राजनेता शौहर) एक रूढ़िवादी मुस्लिम पति की आपकी छवि में फिट नहीं बैठता।” इस पोस्ट में स्वरा में खुद को और अपने शौहर को आधुनिक सोच वाला एवं प्रगतिशील दिखाने की कोशिश की।

इसके साथ ही उन्होंने ‘संघी कीड़े’ कहकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों को एक तरह से गाली देने का काम किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में भाजपा समर्थकों को रूढ़िवादी और पिछड़ा दिखाने की कोशिश की है। स्वरा का इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल एक वर्ग के प्रति उनकी घृणा को दर्शाता है और ये बताता है कि किस हद तक वह भाजपा से नफरत करती हैं।

हालाँकि, इस तस्वीर को शेयर करने के कुछ देर बाद ही उन्होंने एक दूसरी तस्वीर पर शेयर की और अपना असली स्वरूप दिखा दिया। इस तस्वीर में वह सिर पर चुन्नी ओढ़े और हाथ में बिरयानी जैसी दिख रही खाद्य पदार्थ का प्लेट लेकर मुस्कुराते हुए दिख रही हैं। यह उनके पहले वाली पोस्ट से ठीक उलट है। या फिर कह सकते हैं कि मुस्लिम परिधान में दूसरी तस्वीर डालकर उन्होंने ‘किसी को’ चिढ़ाने की कोशिश की।

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के खत्म होते ही स्वरा भास्कर तस्वीरों की कोलाज डालकर खुद को प्रगतिशील और आधुनिक दिखाने की कोशिश की है। हालाँकि, उनके वास्तविक चेहरे को देखने के लिए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के प्रचार को ध्यान देना होगा। स्वरा ने फहाद अहमद नाम के एक मुस्लिम से शादी की है। फहाद ने इस बार सपा की साइकिल छोड़कर शरद पवार की राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी का हाथ थामा है।

शरद पवार ने फहाद को मुंबई की अणुशक्ति नगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। इस दौरान स्वरा भास्कर ने फहद का जमकर चुनाव प्रचार किया। मु्स्लिम इलाकों में गईं और अल्लाह और पैगंबर मुहम्मद के नाम पर वोट माँगे। पूरे चुनाव वह उन्होंने खुद को एक मुस्लिम के रूप में प्रस्तुत किया। इस्लाम की जमकर तारीफ की और हिंदुओं को जमकर कोसा।

खैर लौटते हैं महाराष्ट्र चुनाव में स्वरा के किरदार की ओर। स्वरा भास्कर ने अपने शौहर के पक्ष में मुस्लिम वोटों को पोलराइज करने के लिए महिला-विरोध के लिए कुख्यात मौलाना सज्जाद नोमानी के मिलने फहाद अहमद के साथ गईं। इस दौरान उन्होंने मुस्लिम पहनावे का विशेष तौर पर ध्यान रखा। इसकी तस्वीर भी उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट की।

मौलाना सज्जाद नोमानी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने अप्रैल 2023 में मुस्लिमों को भड़काते हुए कहा था कि रमजान के वक्त लड़कियों को स्कूल/कॉलेज अकेले नहीं भेजना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना इस्लाम में हराम है। वीडियो में नोमानी ने कहा था, “पाक रमजान की रात में उन लोगों पर लानत भेजता हूँ, जो अपनी बच्चियों को अकेले कोचिंग सेंटर या स्कूल-कॉलेज भेजते हैं। अल्लाह उन्हें जहन्नुम में भेजेगा।”

इसके ठीक दो दिन बाद अणुशक्ति नगर में चुनाव प्रचार करने का एक वीडियो सामने आया। इस रैली में वो उसी सुर और शब्दों में बात कर रही हैं, जो इस्लामी कट्टरपंथियों की रैली में होता है। स्वरा भास्कर अपने भाषण में मुस्लिमों को समझाती हैं कि वो गलती से भी उन ‘गुस्ताखों’ को समर्थन न दें, जिन्होंने कभी ईशनिंदा की हो। वह दीन-ईमान की बातें करके मुस्लिमों को इंप्रेस करती हैं।

रैली में स्वरा भास्कर कहती हैं कि वह हिंदू घर में जन्मी और मुस्लिम लड़के से शादी की, लेकिन उन्हें बस कहना ये है कि ‘हजूर पाक’ केे प्रति मन में इज्जत होने के लिए जरूरी नहीं कि इंसान किस जाति में पैदा हुआ हो। उनका इस्लामी शब्दावलियों से भरा ये भाषण सुन सारे मुस्लिम इतने खुश हुए कि स्वरा का उत्साह तालियाँ बजाकर बढ़ाते रहे और स्वरा बोलती रहीं।

वीडियो में स्वरा भास्कर इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का नाम लेने से पहले ‘सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम’ जोड़ना नहीं भूलती हैं। उनकी बातें और शब्द सुनकर कहीं से नहीं लगता है कि वह प्रगतिशील, आधुनिक और धर्मनिरपेक्षता से उनका दूर-दूर तक कोई नाता है। यह तो कतई नहीं लगता है कि उनकी परवरिश कभी हिंदू की तरह भी हुई होगी। इस्लाम के प्रति गहरा झुकाव एवं कठमुल्लों की सोच उनके पूर्वाग्रह को दर्शाता है।

ये वही, हिंदू हैं जिन्होंने एक साधारण सी दिखने वाली एक लड़की को अभिनेत्री बनाया और बॉलीवुड में कुछ दिनों तक ही सही, टिकाए रखा। हालाँकि, अपने व्यवहार और बयान से बहुसंख्यक लोगों के मन-मस्तिष्क से उतरती चली गईं। जब लोगों ने CAA से लेकर तमाम मुद्दों पर स्वरा भास्कर का बयान देखा और पढ़ा तो उन्हें बेहद अफसोस हुआ।

फिल्म जख्मी में किशोर कुमार का गाया और शत्रुघ्न सिन्हा पर फिल्माया गया गाना ‘तुझे सब प्यार करते हैं, सभी ने तुझको पूजा है… मगर ऐ प्यार की देवी, ये मैं जानूँ की तू क्या है… ये चेहरे पर चेहरा लगाओगी कब तक, जमाने से खुद को छुपाओगी कब तक’ स्वरा पर सटीक बैठता है। लोगों ने उनके वास्तविक चेहरे को पहचान लिया है।

उनके शौहर का चुनाव खत्म खत्म तो स्वरा भास्कर फिर से प्रगितशीलता का नकाब ओढ़ने लगी हैं, लेकिन हिंदी में एक कहावत है कि ‘काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती’। अब वह प्रगतिशीलता, आधुनिकता और स्वतंत्र सोच की प्रतीक नहीं, बल्कि रूढ़ीवादी एवं नफरत करने वाले व्यक्ति के सोच की प्रतीक बन गई हैं। यही उनका असली चेहरा है।

हालाँकि, हिन्दुस्तान जैसी मीडिया हाउस स्वरा भास्कर जैसी प्रगतिशीलता की चतुर चैंपियन के बहकावे में आ जाते हैं और उनकी तस्वीरों को खबर के रूप में परोस करके ना चाहते हुए भी उसका PR कर बैठते हैं। हिंदुस्तान ने स्वरा की विभिन्न परिधानों में शेयर की गई तस्वीरों को उनकी उनकी बोल्डनेस और प्रगतिशीलता से जोड़ा है और उनके घृणास्पद बयान को ‘ट्रॉल्स को करारा जवाब‘ बताया है।

मुगलों ने खुद लिखा, अंग्रेजों के इतिहास में भी दर्ज, सरकारी दस्तावेज भी… फिर भी संभल में कैसे मंदिर पर बन गई मस्जिद

उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित जामा मस्जिद का हाल ही में एक टीम ने सर्वे किया। यह सर्वे 19 नवम्बर, 2024 को किया गया। इस दौरान मस्जिद परिसर की वीडियोग्राफी की गई। यह सर्वे स्थानीय कोर्ट के आदेश के बाद किया गया। सर्वे को लेकर हिन्दुओं ने याचिका लगाई थी। हिन्दू पक्ष का कहना है कि जहाँ आज जामा मस्जिद खड़ी है, वहाँ कभी उनके आराध्य विष्णु का मंदिर हुआ करता था। हिन्दुओं ने कहा है कि इस मंदिर को इस्लामी आक्रान्ता बाबर के शासनकाल में तोड़ा गया था।

हिन्दुओं ने मंदिर के अपने दावे को पुख्ता करने के लिए कई ऐतिहासिक प्रमाण भी दिए हैं। यहाँ तक कि उन्होंने बाबर का खुद का लिखा कागज भी रख दिया है। इसके अलावा उन्होंने अकबर और अंग्रेजों के शासनकाल से भी साक्ष्य कोर्ट के सामने रखे हैं।

सबसे पहले समझिए मामले की डिटेल

संभल के जिला न्यायालय में एक याचिका लगाई गई है। याचिका में कहा गया है कि संभल में स्थित जामा मस्जिद का निर्माण सदियों पुराने श्री हरि हर मंदिर पर किया गया था, जो भगवान कल्कि को समर्पित था और जिसे बाबर ने नष्ट कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि यह स्थल हिंदुओं के लिए धार्मिक महत्व रखता है और इसे मुगल काल के दौरान इसे जबरन मस्जिद में बदल दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में यह संरक्षित स्मारक है।

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील और एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के पिता हरि शंकर जैन, नोएडा के पार्थ यादव साथ अन्य याचिकार्ताओं ने लगाई है। याचिका लगाने वालों में और भी लोग शामिल हैं। उन्होंने कोर्ट से कहा है कि भगवान विष्णु और भगवान शिव के भक्त होने के नाते, उन्हें पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में जाने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि मस्जिद प्रबंधन ने पूजा करने के अधिकार को छीन लिया है। इसके अलावा, उन्होंने ASI पर इस जगह तक सार्वजनिक पहुँच के अधिकार को सुनिश्चित ना करने का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि अभी की स्थिति उनके धर्म का पालन करने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करती है।

हिन्दू पक्ष ने किस आधार पर कही मंदिर की बात

हिन्दू पक्ष ने याचिका में श्री हरि हर मंदिर के प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा है कि यह स्थल हिन्दू धर्मग्रंथों में पूजनीय है और इसकी भविष्यवाणी कल्कि अवतार से जुड़ी है। गौरतलब है कि भगवान कल्कि को भगवान विष्णु का दसवाँ और अंतिम अवतार माना जाता है। मान्यता के अनुसार, कलयुग का अंत करने और सतयुग की शुरुआत करने के लिए कल्कि संभल में प्रकट होंगे। संभल के अलग-अलग युग में अलग-अलग नाम रहे हैं। इसे सतयुग में संभलेश्वर, त्रेता युग में महादगिरि, द्वापर युग में पिंगला और कलयुग में संभल बताया गया है।

हिन्दू पक्ष ने याचिका में कहा है कि भगवान कल्कि को समर्पित श्री हरि हर मंदिर के बारे में माना जाता है कि इसका निर्माण सृष्टि के आरंभ में भगवान विश्वकर्मा ने किया था। भगवान विश्वकर्मा देवताओं के वास्तुकार हैं। हिन्दू धर्मशास्त्रों में इस मंदिर का विशेष महत्व है। शास्त्रों में इसे भगवान विष्णु और भगवान शिव की एकता का प्रतीक बताया गया है। हिन्दू ग्रंथों में लिखा है, ““यथा शिवस्तथा विष्णु, यथा विष्णुस्तथा शिवः” जिसका अर्थ है ‘जैसे शिव हैं, वैसे ही विष्णु हैं; जैसे विष्णु हैं, वैसे ही शिव हैं।’

हिन्दू पक्ष ने कहा है कि यह मंदिर मुग़ल काल में तोड़ दिया गया था और यहं पर जबरदस्ती एक मस्जिद तामीर कर दी गई थी। इसको लेकर हिन्दू पक्ष ने बाबर और अकबर समेत अंग्रेजों के समय से तीन ऐतिहासिक तथ्य निकाल कर कोर्ट के सामने पेश किए हैं।

सबूत नम्बर 1: बाबर का कबूलनामा

बाबर के सेनापति हिन्दू बेग ने कथित तौर पर मंदिर को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया और 1527-28 में इसे मस्जिद में बदल दिया। यह काम बाबर के निर्देश पर इस्लामी वर्चस्व स्थापित करने और स्थानीय हिन्दू आबादी को डराने के लिए किया गया था। हिन्दू पक्ष ने इस घटना के सबूत के तौर बाबर की डायरी यानी बाबरनामा को रखा है।

संभल मस्जिद हिन्दू मंदिर

बाबरनामा के अनुसार, “हिन्दू बेग कुचिन 932 हिजरी (इस्लामी साल) में हुमायूँ के चेले थे और उन्होंने उनके लिए संभल पर कब्ज़ा किया था। इसलिए, ऐसा लगता है कि उन्हें काबुल से महिलाओं को ले जाते समय संभल जाने का आदेश दिया गया था… यहाँ यह वाली बात है कि 933 हिजरी में संभल में उन्होंने एक हिन्दू मंदिर को मस्जिद में बदल दिया था। यह बाबर के आदेश पर किया गया था और मस्जिद पर आज भी मौजूद एक शिलालेख में इसका जिक्र है। लगता नहीं है कि बाबर ने खुद ये लिखवाया है, क्योंकि इसमें तारीफ की गई है।”

सबूत नम्बर 2: आइन-ए-अकबरी

हिन्दू पक्ष ने बाबरनामा के साथ ही उसके बेटे अकबर के शासनकाल में लिखा गया आइन-ए-अकबरी का भी संदर्भ दिया गया है। आईन-ए-अकबरी में इसको लेकर लिखा गया, “संबल (संभल) इलाके में बहुत सारे शिकार हैं। यहाँ गैंडा भी मिलता है। यह एक छोटा हाथी जैसा जानवर है, इसके सूंड नहीं होती और इसकी थूथन पर एक सींग होता है जिससे यह जानवरों पर हमला करता है। इसकी खाल से ढालें ​​बनाई जाती हैं और सींग से धनुष की डोरी से उंगली बचाने वाले दस्ताने और बाकी इसी तरह की अन्य चीजें बनाई जाती हैं।”

आगे आइन-ए-अकबरी में लिखा है, “संभल शहर में हरिमंडल (विष्णु का मंदिर) नाम का एक मंदिर है जो एक ब्राह्मण का है, उसके वंशजों में से दसवाँ अवतार इस स्थान पर प्रकट होगा। हांसी एक प्राचीन स्थान है, जो शेख फरीद-ए-शकर गंज के उत्तराधिकारी जमाल की समाधि है।” हिन्दू पक्ष ने मुगलों के अलावा अंग्रेजों के समय का ब्यौरा भी दिया है।

सबूत नम्बर 3: अंग्रेज अफसर की रिपोर्ट

याचिका में एक अंग्रेज अफसर द्वारा किए गए सर्वे का ब्यौरा भी दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि 1874-76 के दौरान मेजर-जनरल ए. कनिंघम द्वारा संभल में कई पुरातात्विक सर्वेक्षण किए गए थे, वह उस समय ASI के मुखिया थे। उन्होंने ‘मध्य दोआब और गोरखपुर में भ्रमण’ शीर्षक से एक रिपोर्ट लिखी थी। इसमें मंदिर के वास्तुशिल्प की भी बात की गई थी। यह मंदिर के वह हिस्से थे जो मस्जिद बनाने के दौरान बच गए थे और कनिंघम के सर्वे के दौरान भी मौजूद थे।

संभल पर लिखी गई एक पुस्तक के कुछ हिस्सों में लिखा है, “संभल में मुख्य इमारत जामी मस्जिद है, इसके बारे में हिन्दू दावा करते हैं कि यह मूल रूप से हरि मंदिर था। इसमें 20 फीट वर्ग का एक केंद्रीय गुंबददार कमरा है, जिसमें गैर बराबर लंबाई के दो हिस्से हैं। एक हिस्सा उत्तर की ओर 500 फीट 6 इंच है, जबकि दक्षिण की तरफ केवल 38 फीट 1½ इंच है। दोनों हिस्सों मेंतीन मेहराबदार दरवाजे हैं। जो सभी अलग-अलग चौड़ाई के हैं, जो 7 फीट से 8 फीट तक अलग-अलग हैं।”

संभल मस्जिद हिन्दू मंदिर

किताब में आगे लिखा गया है, “मुसलमानों का मानना ​​है कि इस इमारत का निर्माण बादशाह बाबर के समय में हुआ था और वे मस्जिद के अंदर एक शिलालेख की ओर इशारा करते हैं। इस शिलालेख में जिसमें निश्चित रूप से बाबर का नाम है, लेकिन हिन्दू कहते हैं कि यह फर्जी तौर पर बनाई गई है। हिन्दुओं के अनुसार, इस स्लैब के पीछे मंदिर से संबंधित मूल हिंदू शिलालेख है। संभल के कई मुसलमानों ने मेरे सामने कबूल किया कि बाबर के नाम वाला शिलालेख जाली है।”

कनिंघम की किताब के अनुसार, “मुसलमानों को इमारत पर 1857 के विद्रोह या उससे लगभग 25 साल पहले तक भी इस इमारत पर कब्जा नहीं हासिल हुआ था। उन्होंने इमारत पर बलपूर्वक कब्ज़ा किया और फिर जिला जज के सामने एक मुकदमा चला और मुसलमानों ने मुख्य रूप से फर्जी शिलालेख और सभी मुसलमानों के एक साथ मिलकर हिंदुओं के खिलाफ झूठी गवाही देने के कारण मामला जीता। इस दौरान हिन्दू यहाँ अल्पसंख्यक थे।”

ASI को भी लिया घेरे में

याचिका में विवादित मस्जिद के ASI नियंत्रण को लेकर भी बात की गई है। मस्जिद को 22 दिसंबर, 1920 को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था। हिन्दू पक्ष ने तर्क दिया कि तब से ही स्थल को ASI की देखरेख और नियंत्रण में रखा गया है। ASI के नियमों के अनुसार, उसे इसका संरक्षण करने के साथ ही यहाँ जनता के आने-जाने के लिए अनुमति देनी चाहिए। हिन्दू पक्ष ने तर्क दिया कि ASI जनता को यहाँ पहुँच प्रदान करने के अपने वैधानिक कर्तव्य में फेल रहा है।

अब हिन्दू पक्ष की क्या माँग?

हिन्दू पक्ष ने मस्जिद में प्रवेश और इसके प्रबन्धन को ASI को सौंपे जाने की माँग की है। उन्होंने कहा कि कोर्ट इस संबंध में आदेश जारी कर दे। इसके अलावा, उन्होंने ASI और गृह मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय सहित संबंधित सरकारी अधिकारियों को मस्जिद में पहुँच देने के लिए नियम बनाने की माँग की है। उनकी सर्वे की माँग पूरी हो चुकी है। इसके अलावा हिन्दू पक्ष ने कहा है कि मस्जिद कमिटी लोगों के आने जाने को रोक ना पाए, इसको लेकर भी आदेश जारी किया जाए।

जिन कपिल मुनि के कारण गंगा धरती पर आईं, मकर संक्रांति के दिन हिंदुओं को मिलता है मोक्ष… खतरे में उनका मंदिर, सो रही बंगाल सरकार

पश्चिम बंगाल के गंगासागर में स्थित विश्व प्रसिद्ध कपिल मुनि मंदिर पर समुद्र के बढ़ते पानी का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह मंदिर हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है, जहाँ हर साल मकर संक्रांति पर लाखों श्रद्धालु गंगासागर मेले में आते हैं। लेकिन अगले 2 सालों में ये प्रसिद्ध मंदिर समंदर में समा सकता है, क्योंकि आध्यात्मिक आस्था के इस प्रसिद्ध केंद्र को बचाने के लिए राज्य सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में आए चक्रवात ‘दाना’ ने मिट्टी के कटाव को तेज कर दिया है। अब समुद्र और मंदिर के बीच सिर्फ एक किलोमीटर का फासला रह गया है। इससे पहले भी गंगासागर तट पर तीन मंदिर समुद्र में समा चुके हैं। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अगले दो साल में यह मंदिर भी जलसमाधि ले सकता है।

हालाँकि, अब इस समस्या को हल करने के लिए बंगाल सरकार ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास और नीदरलैंड के विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। विश्व बैंक भी इस प्रयास में आर्थिक सहयोग करेगा। जल्द ही विशेषज्ञों की टीम गंगासागर का दौरा कर मिट्टी कटाव रोकने के प्रभावी उपाय सुझाएगी। राज्य के सिंचाई मंत्री मानस भुइयां ने इस गंभीर स्थिति पर अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई। मिट्टी कटाव रोकने के लिए बनाए गए बैरियर पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। चक्रवात “यास” और “दाना” से तट को भारी नुकसान हुआ है।

गंगासागर का कपिल मुनि मंदिर: आस्था और महत्व

कपिल मुनि मंदिर का इतिहास भी बेहद रोचक है। गंगासागर, जो बंगाल की खाड़ी में स्थित एक द्वीप है, हिंदुओं के लिए धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि इसका पहला निर्माण रानी सत्यभामा ने 430 ईस्वी में करवाया था। आधुनिक मंदिर 1974 में बनाया गया, लेकिन समुद्र के बढ़ते जलस्तर और चक्रवातों के कारण इसे लगातार खतरा बना हुआ है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह पर्यावरणीय संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। सरकार और विशेषज्ञों के प्रयासों के जरिए मंदिर को बचाने की कोशिश की जा रही है ताकि यह स्थल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहे।

हिंदू ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु ने कपिल मुनि के रूप में इस स्थान पर अवतार लिया और तपस्या की। इसी दौरान, राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया और उनके यज्ञ का अश्व इंद्र ने चुराकर कपिल मुनि के आश्रम के पास छोड़ दिया। राजा सगर के 60,000 पुत्रों ने कपिल मुनि पर घोड़े की चोरी का आरोप लगाया, क्योंकि देवराज इंद्र ने ये घोड़ा यहाँ बाँधा था, आरोप कपिल मुनि पर आया। ऐसे में झूठे आरोपों से क्रोधित होकर कपिल मुनि ने राजा सगर के सभी पुत्रों को भस्म कर दिया।

जब राजा सगर ने क्षमा माँगी, तो कपिल मुनि ने सुझाव दिया कि गंगा को धरती पर लाने से उनके पुत्रों को मोक्ष मिलेगा। राजा भगीरथ ने घोर तपस्या कर गंगा को धरती पर लाने में सफलता पाई। गंगा के स्पर्श से राजा सागर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ।

गंगा नदी यहीं बंगाल की खाड़ी में मिलती है। मकर संक्रांति के दिन यहाँ स्नान करने का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक माना जाता है। लाखों श्रद्धालु इस दिन पवित्र स्नान कर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार, इस दिन पवित्र स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कपिल मुनि मंदिर इस ऐतिहासिक और पौराणिक घटना का प्रतीक है। माना जाता है कि यहीं पर उन्होंने तपस्या की थी। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1974 में बना था, लेकिन समुद्र के बढ़ते जलस्तर और मिट्टी के कटाव के कारण इसे खतरा बना हुआ है। गंगासागर हिंदू तीर्थस्थलों में विशेष स्थान रखता है और कुम्भ मेले के बाद दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक मेला यहीं लगता है। श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और पौराणिक महत्व इसे एक विशिष्ट तीर्थस्थल बनाते हैं।

पश्चिम बंगाल का राजभवन वक्फ का, देश का सबसे बड़ा ‘कलकत्ता गोल्फ कोर्स’ भी उसी का: बवाल होने पर बंगाल वक्फ बोर्ड ने पल्ला झाड़ा… तो कौन ले रहा ₹147 किराया?

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल का राजभवन वक्फ संपत्ति है। जब पोस्ट वायरल हुआ तो पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड ने उस दावे के खारिज कर दिया। बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष साहिदुल मुंशी ने कहा कि बोर्ड के पास इस बात की कोई तथ्यात्मक जानकारी नहीं है कि बंगाल राजभवन वक्फ संपत्ति है। उन्होंने कहा कि राज्य में 80,000 वक्फ संपत्तियाँ हैं।

मुंशी ने कहा कि बंगाल का राजभवन वक्फ संपत्ति के तहत पंजीकृत नहीं है। साहिदुल मुंशी ने कहा, “हम वक्फ रजिस्टर रखते हैं और जो हमारी संपत्तियाँ हैं उनका हम उसमें जिलेवार नामांकन हैं। बंगाल में वक्फ की करीब 8,000 नामांकित संपत्तियाँ हैं, जबकि कुल संपत्ति करीब 80,000 हैं।” उन्होंने कहा कि कोई भी RTI डालकर इसकी जानकारी हासिल कर सकता है।

बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष साहिदुल मुंशी ने भले ही बंगाल राजभवन को वक्फ संपत्ति मानने से इनकार कर दिया, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने यह दावा किया था। बंगाल में सामूहिक शिक्षा मंत्री चौधरी ने 16 नवंबर 2024 को जी मीडिया से बात करते हुए दावा किया था कि धर्मतल्ला से लेकर कॉलिन स्ट्रीट तक वक्फ संपत्ति है।

हालाँकि, राजभवन के वक्फ संपत्ति होने को लेकर इंडियन एक्सप्रेस एवं प्रभात खबर जैसे अंग्रेजी एवं हिंदी के प्रसिद्ध अखबारों ने एक विस्तृत रिपोर्ट छापी। इंडियन एक्सप्रेस ने 11 सितंबर 2013 को अपने वेब पोर्टल की रिपोर्ट में कहा कि 12 इमामों सहित 22 मुस्लिम संगठनों ने माँग की थी कि मुअज्जिन और इमामों को वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को किराए पर देने से उत्पन्न राजस्व से मासिक वजीफा दिया जाए।

ऑल बंगाल इमाम और मुअज्जिन समिति के अध्यक्ष एटीएम रफीकुल हसन ने कहा था, “हम भिखारी नहीं हैं। हम अपना अधिकार माँग रहे हैं। राज्य भर में 29,000 से अधिक वक्फ संपत्तियाँ हैं। कोलकाता में ही गवर्नर हाउस, राज्य विधानसभा और आकाशवाणी भवन जैसे कई प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान वक्फ संपत्ति पर बने हैं। हमारी माँग है कि वक्फ बोर्ड को मौजूदा बाजार दर के अनुसार किराया दिया जाए।”

ऑल बंगाल माइनॉरिटी यूथ फेडरेशन के महासचिव एमडी कमरुज्जमां ने कहा था कि पुलिस-प्रशासन को अतिक्रमणकारियों से वक्फ संपत्तियों को खाली कराना चाहिए और उन्हें व्यावसायिक उपयोग में लाना चाहिए। इस संबंध में इमामों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वक्फ बोर्ड को एक ज्ञापन भी सौंपा था। तब वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने भी राज्य में फैले वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण की बात स्वीकार की।

पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष मोहम्मद अब्दुल गनी ने कहा था 356 बीघे में फैले गवर्नर हाउस से वक्फ बोर्ड को प्रति माह केवल 27.25 रुपए किराया मिलता है, जो नाकाफी है। उन्होंने कहा था कि कोलकाता में ही करीब 1,273 एकड़ जमीन वक्फ की है। ये नामांकित संपत्तियों में से हैं। उन्होंने कहा था कि कई संपत्तियाँ ऐसी हैं, जिनका नामांकन किया जाना बाकी है।

इसी तरह, हिंदी अखबार प्रभात खबर ने अपने पोर्टल पर 24 जनवरी 2014 के लेख में कहा है कि कोलकाता में 27 एकड़ में फैले राजभवन का किराया केवल 147 रुपया है। राजभवन वक्फ की संपत्ति है और अब्दुल मतीन एवं मोहम्मद अयूब इस वक्फ संपत्ति के मोतवल्ली (केयर टेकर) हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1797 ईस्वी में इस संपत्ति को वक्फ किया गया था। हालाँकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि इस संपत्ति को किसने दान की थी।

तब पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष मोहम्मद अब्दुल गनी ने कहा था, “यह मामला राज्यपाल के निवास स्थान का है। इसलिए हम लोग कोई कानूनी कार्रवाई करने से पहले इस मुद्दे पर राज्य सरकार से बात करेंगे।” उन्होंने कहा था कि कोलकाता में राजभवन के अलावा और भी कई बड़ी संपत्तियाँ वक्फ की हैं। इन संपत्तियों के किराए के नाम पर ‘भीख’ दी जाती है।

इसी रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 20+ बीघा जमीन पर फैले देश का सबसे बड़ा गोल्फ कोर्स ‘रॉयल कलकत्ता गोल्फ कोर्स’ भी वक्फ की संपत्ति है। प्रिंस अनवर शाह चौराहे पर बनी टीपू सुल्तान मस्जिद के नाम यह वक्फ संपत्ति है। किराए के मुद्दे पर काफी विवाद के बाद गोल्फ कोर्स प्रबंधन ने कुछ वर्ष पहले एक लाख रुपए मासिक किराया देना मंजूर किया था।

इसके अलावा, बैंकशाल कोर्ट के सामने बनी बहुमंजिली ‘शॉ वालिस बिल्डिंग’ को भी वक्फ संपत्ति बताया गया है। इस इमारत का किराया 32,000 रुपए दिया जाता और काफी तूल के बाद इसका वक्फ बोर्ड को छह लाख रुपए मिलता है। हालाँकि, इस किराए से भी वक्फ बोर्ड संतुष्ट नहीं है। इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा, आकाशवाणी भवन, इडेन गार्डेस को भी वक्फ की संपत्ति बताया गया था।

अब सवाल है कि वर्तमान बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सहिदुल मुंशी कह रहे हैं कि राजभवन के वक्फ बोर्ड होने की जानकारी नहीं है, तो पहले के अध्यक्षों ने इस तरह का दावा क्यों किया। इसके अलावा, राजभवन की जमीन के लिए 147 रुपए का किराया किसे दिया जाता है और किस आधार पर दिया जाता है। क्या वर्तमान वक्फ बोर्ड ने इस किराया को लेने से यह कहकर कभी इनकार किया कि राजभवन की संपत्ति वक्फ है इसका प्रमाण उसके पास नहीं है और इसलिए वह इसका किराया नहीं ले सकता।

संभवत: पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के किसी भी अधिकारी या अध्यक्ष या किसी मुस्लिम संगठन ने ऐसा नहीं कहा। ऐसे में मुंशी का हालिया बयान संदेह उत्पन्न करने वाला है। तो क्या वर्तमान वक्फ कानून को ध्यान में रखते हुए मुंशी कह रहे हैं कि राजभवन वक्फ संपत्ति नहीं है, क्योंकि बंगाल की कई संपत्तियाँ जाँच के दायरे में आ जाएँगी, जिन पर मुस्लिम संगठन एवं वक्फ बोर्ड पहले से दावा करते रहे हैं?

बता दें कि देश के विभिन्न हिस्सों में वक्फ बोर्डों द्वारा हजारों साल पुराने मंदिरों से लेकर हिंदुओं के गाँव के गाँव पर वक्फ संपत्ति होने का दावा ठोका जा रहा है। कर्नाटक, तमिलनाडु सहित कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से ऐसे मामले सामने आए हैं। इस बीच मोदी सरकार वक्फ संशोधन बिल शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर वक्फ बोर्ड में हाहाकार मचा हुआ है।

रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद वक्फ बोर्ड भारत की तीसरी सबसे अधिक संपत्ति वाली संस्था है। दिसंबर 2022 तक वक्फ बोर्ड के पास कुल 8,65,646 अचल संपत्ति थीं, जिसकी कीमत 9.4 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक है। वहीं, साल 2009 तक वक्फ के पास चार लाख एकड़ ज़मीन पर 3 लाख पंजीकृत संपत्तियाँ थीं। पिछले 13 सालों में वक्फ की संपत्ति दोगुनी हो गई है।

धीरेंद्र शास्त्री की हिंदू एकता यात्रा में शामिल हुए दिग्विजय सिंह के कॉन्ग्रेसी MLA बेटे जयवर्धन सिंह, बोले- ‘हिंदुओं में एकता जरूरी, भारत है हिंदू राष्ट्र’

मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गुरुवार (21 नवंबर 2024) में ‘हिंदू एकता यात्रा’ शुरू की, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म की एकता को बढ़ावा देना और जात-पात की दीवारें गिराना है। इस यात्रा में राजनीतिक हलचल तब तेज हो गई जब कॉन्ग्रेस विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह ने इसमें शिरकत की। जयवर्धन ने यात्रा में हिस्सा लेकर सनातन धर्म और हिंदू एकता के प्रति अपना समर्थन जताया।

धर्म के लिए एकजुटता जरूरी: जयवर्धन सिंह

जयवर्धन सिंह ने यात्रा के दौरान कहा, “यह यात्रा किसी पार्टी की नहीं बल्कि सनातन धर्म की है। जात-पात को खत्म कर समाज को एकजुट करना जरूरी है। संत अगर सनातन बोर्ड बनाने की बात करते हैं, तो यह विचार सही दिशा में है। हम सनातन के भक्त हैं और हमेशा रहेंगे।” उन्होंने कहा कि यह यात्रा हिंदुओं को एकजुट करने का प्रयास है, जिसमें सभी समाजों को समान सम्मान दिया जाना चाहिए। जयवर्धन ने हिंदू धर्म को भारत की आत्मा बताते हुए कहा, “हर धर्म की शुरुआत किसी न किसी स्थान से हुई है, और हिंदू धर्म की शुरुआत भारत से हुई है। इसलिए भारत स्वाभाविक रूप से हिंदू राष्ट्र है।”

जहाँ जयवर्धन सिंह सनातन धर्म की बात कर रहे हैं, वहीं उनके पिता दिग्विजय सिंह का भगवा आतंकवाद पर बयान अक्सर चर्चा में रहा है। जयवर्धन की इस यात्रा में भागीदारी को उनके पिता से अलग विचारधारा के तौर पर देखा जा रहा है। जयवर्धन ने जाति आधारित भेदभाव पर सवाल उठाते हुए कहा, “हमारे कर्म सबसे अहम हैं। भगवान कृष्ण ने भी यही कहा है कि कर्मों के जरिए समाज का कल्याण होगा। अगर जात-पात की सीमाओं को खत्म करेंगे, तो समाज और देश दोनों आगे बढ़ेंगे।”

धीरेंद्र शास्त्री ने 21 नवंबर को इस यात्रा की शुरुआत बागेश्वर धाम से की, जो 160 किलोमीटर की दूरी तय करके 29 नवंबर को ओरछा में समाप्त होगी। उन्होंने कहा, “यह यात्रा सनातन धर्म के प्रचार और हिंदुओं को एकजुट करने के लिए है। जात-पात, बोली और भाषा के विभाजन को मिटाने के लिए हमें एकता के मार्ग पर चलना होगा।” शास्त्री ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म को बचाने और भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने के लिए यह जरूरी है। उन्होंने सभी धर्मों और समुदायों को इस यात्रा का हिस्सा बनने का न्योता दिया।

धीरेंद्र शास्त्री और जयवर्धन सिंह के बयानों ने हिंदू एकता और जातिवाद के खिलाफ खड़े होने के संदेश को एक नया आयाम दिया है। यह यात्रा धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, खासकर कॉन्ग्रेस के भीतर।

दलित लेखराज की बच्ची का नाम सकीना… राजस्थान के मदरसों में 3000+ गैर मुस्लिम बच्चे, RTI में खुलासा: बजरंग दल का आरोप- इस्लामी शिक्षा से हो रहा धर्मांतरण

राजस्थान के मदरसों में दलित हिन्दू बच्चों को मुस्लिम बनाने की साजिश रची जा रही है, उनका धीमे-धीमे इस्लामी शिक्षा में माध्यम से धर्मांतरण करवाने का प्रयास किया जा रहा है। यह आरोप एक RTI के सामने आने के बाद बजरंग दल के लोगों और RTI एक्टिविस्ट ने लगाए हैं।

बजरंग दल ने बताया है कि हाल ही में एक हिन्दू दलित बच्ची का नाम मदरसे में सकीना दर्ज किया गया था। उसके पिता का नाम अभी भी हिन्दू ही है। बजरंग दल एक ही मदरसे में 6 हिन्दू छात्रों के धर्मांतरण का आरोप लगाया था। इस मामले के बाद अब सामने आई एक RTI से चिंताएँ और बढ़ गई हैं।

RTI में सामने आया है कि राजस्थान के मदरसों में 3000 से अधिक गैर मुस्लिम बच्चे तालीम ले रहे हैं। इन बच्चों में अधिकांश संख्या हिन्दू बच्चों की बताई जा रही है। सरकारी या निजी स्कूलों में ना जाकर मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों में लगभग 50% लड़कियाँ हैं।

इसी RTI में सामने आया है कि इन मदरसों में गैर मुस्लिम बच्चों की संख्या तो सैकड़ों में है लेकिन गैर मुस्लिम शिक्षक ना के बराबर हैं। इस मामले में RTI कार्यकर्ता और बजरंग दल के लोगों ने धर्मांतरण और इस्लामी तौर तरीकों में ढालने की बड़ी साजिश की तरफ इशारा किया है।

कैसे सामने आई जानकारी?

राजस्थान हाई कोर्ट के वकील सुजीत स्वामी ने राजस्थान मदरसा बोर्ड को एक RTI लगाई थी। इसमें उन्होंने पूछा था कि राजस्थान के भीतर सभी जिलों के मदरसों में कितने गैर मुस्लिम छात्र-छात्राएँ पढ़ रही हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी जानकारी माँगी थी कि राजस्थान में मदरसों में कितने गैर मुस्लिम शिक्षक-शिक्षिकाएँ हैं। मदरसा बोर्ड ने यह जानकारी सुजीत स्वामी को जिलेवार दी है। इसमें कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह RTI ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इस जानकारी के सामने आने के बाद बजरंग दल और सुजीत स्वामी ने प्रश्न खड़े किए हैं।

क्या जानकारी सामने आई?

राजस्थान मदरसा बोर्ड ने बताया है कि राज्य के मदरसों में शिक्षा सत्र 2024-25 में कुल 3056 गैर मुस्लिम छात्र-छात्राएँ तालीम हासिल कर रहे हैं। इनमें से 1600 छात्र हैं जबकि 1456 छात्राएँ हैं। मदरसों में पढ़ने वाले गैर मुस्लिम छात्र-छात्राओं की सबसे बड़ी संख्या कोटा जिले में हैं। कोटा में 184 छात्राएँ जबकि 156 छात्र पढ़ रहे हैं। इसके बाद टोंक जिले में गैर मुस्लिम 161 छात्र और 147 छात्राएँ मदरसों में पढ़ रहे हैं। चित्तौड़गढ़ में 115 गैर मुस्लिम छात्र और 98 छात्राएँ पढ़ रहे हैं।

राजस्थान गैर मुस्लिम

गैर मुस्लिम छात्र मंजूर, लेकिन शिक्षक नहीं?

इस RTI में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि मदरसों में पढ़ने वाले गैर-मुस्लिम छात्र-छात्राओं की संख्या भले ही हजारों में है लेकिन गैर मुस्लिम शिक्षक लगभग नदारद हैं। RTI में बताया गया है कि जिस कोटा में सबसे ज्यादा गैर मुस्लिम छात्र-छात्राएँ मदरसों में हैं, वहाँ मदरसों में पढ़ाने वाला मात्र एक शिक्षक ही गैर मुस्लिम है। RTI में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि राजस्थान के 33 जिलो में से 15 जिलों में मदरसों में गैर मुस्लिम शिक्षिकाओं की सँख्या शून्य है।

वहीं बाकी के 10 जिलों में गैर मुस्लिम शिक्षकाओं की संख्या मात्र 1 है। इसी तरह जिले ऐसे हैं जहाँ गैर मुस्लिम पुरुष शिक्षक या तो 0 हैं या फिर 1 ही हैं। गैर मुस्लिम छात्र-छात्राओं की संख्या हजारों में शिक्षकों की संख्या दहाई में भी ना होना कई प्रश्न खड़े कर रहा है। पूरे राजस्थान भर में कुल 261 गैर मुस्लिम शिक्षक-शिक्षिकाएँ मदरसों में पढ़ा रहे हैं। इन गैर मुस्लिम पुरुष शिक्षकों में भी 170 शिक्षक मात्र 10 जिलों में ही हैं।

राजस्थान के मदरसों में गैर मुस्लिम शिक्षक

सुजीत स्वामी ने इसको लेकर ऑपइंडिया से बताया, “मदरसों में गैर मुस्लिम छात्रों का पढ़ना असामान्य बात है क्योंकि अधिकांश जगह पर सरकारी स्कूल भी मौजूद हैं। जिन मदरसों में यह छात्र-छात्राएँ पढ़ रहे हैं, उनमें से कई मस्जिदों में चल रहे हैं। इनमें नमाज भी पढ़ी जाती है। भले ही मदरसा चलाने वाले दावा करें कि गैर मुस्लिम बच्चों को इस्लामी तालीम नहीं दी जाती लेकिन आप उनके अलग-अलग क्लास तो नहीं बना रहे? ऐसे में क्या गारंटी है कि उनका ब्रेनवॉश ना हो। फिर यदि ऐसा ही है तो गैर मुस्लिम शिक्षक कम क्यों हैं?”

छात्रा का नाम सकीना, पिता का नाम लेखराज, मामला क्या?

बजरंग दल ने बताया कि कोटा के अनंतपुरा में मदरसा दारूल उलूम तहरीक-ए-हिन्द में पढ़ने वाली एक दलित छात्रा का नाम सकीना पाया गया था। इस मामले में बजरंग दल के योगेश रेनेवाल ने बताया, “सकीना बैरवा समाज से आती है, जो कि दलित हैं। सकीना का परिवार भी गरीब है, उसके पिता लेखराज मेहनत मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं। उनको इस मदरसा और यहाँ की गतिवधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सकीना पहले भी एक मुस्लिम द्वारा संचालित स्कूल में पढ़ती थी। उसे बाद में मदरसे में दाखिल कर दिया गया।”

राजस्थान गैर मुस्लिम

योगेश रेनेवाल ने आरोप लगाया, “सकीना का मामला अकेला नहीं है, इसी मदरसे में 6 छात्र-छात्राएँ ऐसे हैं। हमारी माँग है कि इनकी गंभीर जाँच हो। बच्ची का परिवार गरीब है और हमें शक है कि उसे या तो वित्तीय मदद के बहाने के या अच्छी शिक्षा के बहाने स्कूल में भेजने को लेकर भरोसे में लिया गया है। ज्यादातर निशाने पर दलित और गरीब तबके के परिवार ही आते हैं। हमने इस मामले में जिला प्रशासन से भी शिकायत की थी लेकिन तब इन मदरसा वालों ने फोन तक नहीं उठाया। इनको जिला प्रशासन के कुछ अधिकारी भी संरक्षण दे रहे हैं।”

अनंतपुरा मदरसे के ही एक कागज को देख कर पता चलता है कि इसी मदरसे के भीतर दो बच्चे ऐसे पढ़ रहे हैं जिनका खुद का नाम इस्लामी है लेकिन उनके पिता का नाम अभिषेक खान है। योगेश रेनेवाल ने बताया कि यह अपने आप ही प्रश्न खड़े कर देता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अगर निष्पक्ष जाँच करवाई जाए तो कई गड़बड़ियाँ सामने आएँगी। सुजीत स्वामी ने माँग की है कि कोटा को लेकर विशेष जाँच करवाई जाए क्योंकि यहीं सबसे बड़ी संख्या गैर मुस्लिम बच्चों की है।

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पर भी लगाए आरोप

योगेश रेनेवाल ने कोटा को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नाहिदा खान पर भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जब भी मदरसों में अनियमितता की बात आती है, तो नाहिदा उन्हें बचाती हैं। गौरतलब है कि नाहिदा खान ने अक्टूबर, 2023 में ही इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर स्टेटस लगाए थे।

नाहिदा खान ने अपने सोशल मीडिया पर गाजा के लिए दुआ माँगने, कई कम्पनियों का बहिष्कार करने और साथ ही सपोर्ट करने और दान माँगने को लेकर स्टेटस लगाया था। इसको लेकर उनकी शिकायत की गई थी। उन्होंने सफाई दी थी कि यह स्टेटस उनके 8 साल के बेटे ने लगाए हैं। इस मामले में उन्हें नोटिस भी भेजा गया था।

NCPCR ने पहले भी उठाए मामले

ऐसा पहली बार नहीं है कि मदरसों में गैर मुस्लिम छात्रों को पढ़ने को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग इन मदरसों में दी जाने वाली इस्लामी शिक्षा और उसके गैर मुस्लिम बच्चों को लेकर मामला उठाते रहा है। ऐसे ही एक मामले में NCPCR मुखिया प्रियंका कानूनगो ने बताया था सहारनपुर के मदरसे में एक हिन्दू बच्चे का खतना करवाया गया था। इसके पहले और भी मदरसों के पाठ्यक्रम को लेकर भी उन्होंने प्रश्न उठाए थे, इस पाठ्क्रम में हिन्दुओं को ‘मुशरिक’ और ‘काफिर’ करार दिया गया था।

ऑपइंडिया ने राजस्थान में मदरसों में गैर मुस्लिम बच्चों के पढ़ने और फिर उन पर इस शिक्षा के असर को लेकर कोटा के विधायक और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से सम्पर्क करने का प्रयास किया। हालाँकि, उनकी व्यस्तता के चलते बात नहीं हो पाई। ऑपइंडिया ने बैरवा समाज से आने वाले राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा से भी सम्पर्क करने की कोशिश की, लेकिन यह भी संभव नहीं हो पाया। मामले में शिक्षा मंत्री या उपमुख्यमंत्री का जवाब आने पर रिपोर्ट अपडेट कर दी जाएगी।

गोरखपुर में कोका-कोला से लेकर बिसलेरी तक, 45 कंपनियाँ खोल रही अपनी फैक्ट्री-ऑफिस: CM योगी सौंपेंगे आवंटन पत्र

गोरखपुर में गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए 30 नवंबर और 1 दिसंबर को भव्य आयोजन किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1068 करोड़ रुपये के निवेश से संबंधित परियोजनाओं के लिए 45 उद्यमियों को आवंटन पत्र सौंपेंगे। इसके साथ ही 209 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।

कोका-कोला और बिसलेरी लगा रहे बॉटलिंग प्लांट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोरखपुर में कोका-कोला 350 करोड़ रुपये की लागत से 17 एकड़ में बॉटलिंग प्लांट लगाएगा, जिससे 500 से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलेगा। बिसलेरी कंपनी प्लास्टिक पार्क में 7 एकड़ में 70 करोड़ रुपये की लागत से मिनरल वॉटर प्लांट स्थापित करेगी। इससे 250 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, देश की एक प्रतिष्ठित डिस्टिलरी कंपनी 5 एकड़ में 50 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

गीडा प्रशासन बनाएगा ट्रीटमेंट प्लांट

दो दिवसीय कार्यक्रम में 150 स्टॉल लगाए जाएँगे, जिनमें से 100 स्थानीय उत्पादों और 50 प्रदेश के अन्य जिलों के होंगे। ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट) को प्राथमिकता दी जाएगी। 30 नवंबर को बायर-सेलर मीट का आयोजन भी किया जाएगा। गीडा ने प्रदूषण रोकने के लिए 4 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ़्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) स्थापित करने की योजना बनाई है। यह प्लांट तीन दशक से लंबित था, जिसे अब गीडा प्रशासन स्वयं स्थापित करेगा।

गुरुवार (21 नवंबर 2024) को मंडलायुक्त अनिल ढींगरा की अध्यक्षता में हुई बैठक में गीडा की सीईओ अनुज मलिक ने उद्योगों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बिजली की समस्या, जिला पंचायत शुल्क, और शासकीय योजनाओं के लंबित मामलों पर सकारात्मक आश्वासन दिए गए।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और ओडीओपी वित्त पोषण योजना के तहत अब तक 819 और 193 आवेदन बैंक को भेजे गए हैं। निवेश मित्र पोर्टल पर गोरखपुर के 13 मामलों का समय पर निपटारा करने का निर्देश दिया गया। यह आयोजन गोरखपुर को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

औकात में आया कनाडा: जस्टिन ट्रूडो के सलाहकार ने कहा- निज्जर की हत्या में PM मोदी और अजीत डोवाल को जोड़ना निराधार, इसके कोई सबूत नहीं

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार बैकफुट पर आ गई है। कनाडा सरकार ने कहा कि भारत में वांछित निज्जर की हत्या में भारत के होने का उसके पास कोई सबूत नहीं है। ट्रूडो सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल पर कभी कोई आरोप नहीं लगाया।

प्रिवी काउंसिल के डिप्टी क्लर्क और प्रधानमंत्री ट्रूडो के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नथाली जी ड्रौइन ने कहा, “सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण और जारी खतरे के कारण RCMP (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) और अधिकारियों ने 14 अक्टूबर को कनाडा में भारत सरकार के एजेंटों द्वारा की गई गंभीर आपराधिक गतिविधि के सार्वजनिक आरोप लगाने का असाधारण कदम उठाया।”

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने आगे कहा, “कनाडा सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर या NSA डोवाल को कनाडा के भीतर गंभीर आपराधिक गतिविधि से जोड़ने के बारे में कभी नहीं कहा है और ना ही इससे जुड़े सबूतों की उसे जानकारी है। इसके विपरीत, कोई भी सुझाव काल्पनिक और ग़लत दोनों है।”

ट्रूडो सरकार का ये स्पष्टीकरण कनाडा के एक अखबार ‘द ग्लोब एंड मेल’ में छपी रिपोर्ट के बाद आया है। उस अखबार में भारत पर आरोप लगाते हुए कहा गया था कि खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या की साजिश केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रची थी। इसमें यह भी कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल को इस योजना की जानकारी थी।

अखबार में यह रिपोर्ट एक अनाम कनाडाई अधिकारी के हवाले से छापी गई थी। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इसको लेकर कनाडा के पास प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इस मीडिया रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय ने 20 नवंबर को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस तरह के बेतुके बयानों को खारिज कर देना चाहिए।

इससे पहले 14 अक्टूबर 2024 को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर अपमानजनक आरोप लगाए थे और कनाडा की धरती पर हत्याओं को अंजाम देने का दावा किया था। RCMP के हवाले से उन्होंने कनाडा में दक्षिण एशियाई समुदाय, खालिस्तान समर्थक आंदोलन से जुड़े लोगों को निशाना बनाने वाले हिंसक खतरों की एक श्रृंखला खोज निकालने का दावा किया था।

इन खतरों में हत्याएँ और जबरन वसूली शामिल हैं, जो कनाडाई कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रयासों के बावजूद जारी हैं। आरसीएमपी ने कहा कि उसने कनाडा की धरती पर भारत सरकार के एजेंटों द्वारा ‘संचालित’ आपराधिक गतिविधियों की जाँच के लिए फरवरी 2024 में एक टीम बनाई थी। जस्टिन ट्रूडो ने दावा किया था कि कनाडा के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं।

इस बयान में ‘भारत सरकार’ का 10 बार जिक्र किया गया है, जबकि भारत का 13 बार। पीएम ट्रूडो ने पिछले साल कनाडा की संसद में बोलते हुए भी निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था। इसके बाद दोनों देश के बीच तनाव बढ़ गया था। भारत ने ट्रूडो और उनकी पार्टी पर खालिस्तानियों को लुभाने के लिए वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया था।

पिछले साल जून में कनाडा के सर्रे शहर में स्थित एक गुरुद्वारे के बाहर निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। निज्जर अलगाववादी खालिस्तानी आतंकी था। वह आतंकी संगठन ‘खालिस्तान टाइगर फोर्स’ का प्रमुख था। भारत में वांछित निज्जर पिछले कई वर्षों से कनाडा में रह रहा था और लोगों को भारत सरकार के खिलाफ उकसा रहा था। NIA ने उस पर 10 लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया था।

उमर अब्दुल्ला-कॉन्ग्रेस की सरकार ने कश्मीरी पंडितों की दुकानों पर चलाया बुलडोजर, पीड़ित बोले- ‘हम सब कुछ खो चुके, अब कहाँ जाएँ?’

जम्मू में कश्मीरी पंडित प्रवासियों की दुकानों पर जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) का बुलडोज़र चलने से बवाल खड़ा हो गया। बुधवार (20 नवंबर 2024) को JDA ने मुठी इलाके में करीब एक दर्जन दुकानों को ध्वस्त कर दिया। ये दुकानें उन कश्मीरी पंडित परिवारों की थीं जिन्हें तीन दशक पहले तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार ने यहाँ बसाया था।

दुकानदारों का कहना है कि उन्हें बिना कोई पूर्व सूचना दिए कार्रवाई की गई, जबकि JDA ने इस दावे को खारिज किया है। JDA के उपाध्यक्ष पंकज शर्मा का कहना है कि प्रभावित लोगों को 20 जनवरी को नोटिस दिया गया था और उन्होंने फरवरी के अंत तक जगह खाली करने का वादा किया था। लेकिन चुनावी आचार संहिता और अन्य बाधाओं के कारण समय पर कार्रवाई नहीं हो सकी।

शर्मा ने बताया कि मुठी इलाके में 25 कनाल ज़मीन थी, जहाँ कश्मीरी पंडित प्रवासियों को शुरू में एक कमरे वाले गुंबदनुमा घरों में बसाया गया था, और बाद में उन्हें पुरखू और जगती में दो कमरों वाले फ्लैटों में बसाया गया। उन्होंने कहा कि इस कदम के बाद भी कई लोगों ने शुरुआती बस्तियों को खाली नहीं किया है। चूँकि यहाँ 208 गरीबों के लिए घरों का निर्माण कराया जाना है, जिसका टेंडर भी जारी हो चुका है। ऐसे में हमें जमीन खाली करानी ही है। इसके बावजूद प्रशासन ने 10 दुकानों का इंतजाम इन लोगों के लिए किया है।

इस घटना के बाद कई राजनीतिक दलों और कश्मीरी पंडित संगठनों ने सरकार की आलोचना की। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक बुजुर्ग व्यक्ति वीडियो में रोते हुए कहते हैं, “हम सब कुछ खो चुके हैं। अब कहाँ जाएँ?”

महबूबा मुफ्ती (PDP प्रमुख) ने इसे “कश्मीरी पंडितों की दशकों की तकलीफों पर एक और चोट” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, “पहले आदिवासी समुदाय को निशाना बनाया गया, और अब कश्मीरी पंडितों को। यह उन्हें और अलग-थलग करने का काम करेगा।”

J-K अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने कहा, “अगर विध्वंस जरूरी था तो पहले उनकी आजीविका का इंतजाम किया जाना चाहिए था। इस तरह की कार्रवाई जनता के हितों के खिलाफ है।”

बीजेपी प्रवक्ता जी.एल. रैना ने इसे NC-कॉन्ग्रेस गठबंधन सरकार की “बदले की कार्रवाई” बताया। उन्होंने प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था देने की माँग की।

JDA का कहना है कि मुठी कैंप की यह जमीन अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 208 फ्लैट्स के निर्माण के लिए आवंटित की गई है। हालाँकि, राहत आयुक्त अरविंद करवानी ने आश्वासन दिया कि प्रभावित दुकानदारों के लिए नई दुकानें जल्द बनाई जाएँगी। इन लोगों के लिए 10 दुकानें लगभग तैयार हैं, जो कैंप-2 में हैं। जेडीए ने कहा कि सिर्फ 1-2 लोग दिक्कत पैदा कर रहे हैं।

इस घटना को लेकर बीजेपी ने सीधे तौर पर NC-कॉन्ग्रेस गठबंधन की सरकार पर निशाना साधा। लोगों का मानना है कि सरकार बदलने के बाद कश्मीरी पंडित समुदाय पर ऐसी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा हो सकती है। बता दें कि हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस की सरकार बनी है, जिसका घाटी की तरफ झुकाव ज्यादा रहा है।