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कौन हैं ब्राजील के आचार्य जोनास मैसेट्टी, जिनसे पीएम मोदी ने G20 में की मुलाकात: कैसे रियो की पहाड़ियों में पढ़ाने लगे वेदान्त और योग

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनेरियो की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान वैश्विक नेताओं के साथ मुलाक़ात की। इन नेताओं के अलावा पीएम मोदी एक ऐसे व्यक्ति से मिले, जिनका जन्म तो ब्राजील में हुआ लेकिन अब वह भारतीय संस्कृति को दुनिया तक पहुँचा रहे हैं। पीएम मोदी ने रियो में आचार्य जोनास मैसेट्टी से मुलाक़ात की। आचार्य मैसेट्टी का जिक्र पीएम मोदी इससे पहले एक बार मन की बात में भी कर चुके हैं। आचार्य मैसेट्टी योग और गीता से दुनिया को परिचित करवा रहे हैं।

पीएम मोदी ने जोनास मैसेट्टी से मिल कर लिखा, “जोनास मैसेट्टी और उनकी टीम से मुलाकात हुई। मैंने मन की बात कार्यक्रम के दौरान वेदान्त और गीता के प्रति उनकी श्रृद्धा का जिक्र किया था। उनकी टीम ने संस्कृत में रामायण की झलकियाँ प्रस्तुत कीं। यह सराहनीय है कि कैसे भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया में प्रभाव डाल रही है।”

कौन हैं जोनास मैसेट्टी?

जोनास मैसेट्टी मूल रूप से ब्राजील के रहने वाले हैं। उन्होंने ब्राजील में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह योग और वेदों की तरफ आने से पहले स्टॉक मार्केट में काम करते थे। जोनास मैसेट्टी भारत आने से पहले काफी समृद्ध थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पास पश्चिमी देशों में हर आदमी को जिन चीजों की जरूरत होती है, वह सब कुछ उनके पास था। जोनास मैसेट्टी अपने इस जीवन से खुश नहीं थे। वह कुछ सालों पहले भारत आ गए थे, इसके बाद से वह सनातन से प्रभावित हो गए।

क्यों चुना सनातन का रास्ता?

जोनस मैसेट्टी ने जागरण को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि वह पश्चिमी देशों के जीवन से प्रसन्न नहीं थे और उनका मन नहीं लगता था। ऐसे में वह वेदान्त की तरफ मुड़ गए। वह भारत आए और तमिलनाडु के कोयम्बटूर में आचार्य दयानंद सरस्वती के आश्रम में वेदान्त पढ़ने लगे। यहाँ मैसेट्टी को आचार्य का दर्जा मिला। सनातन से प्रभावित होने के बाद विश्व विद्या नाम का एक संस्थान खोला और सनातन का प्रचार करने लगे। इसकी स्थापना उन्होंने ब्राजील की राजधानी रियो के पास के स्थान में की थी।

अब कर रहे संस्कृति का प्रचार

जोनास मैसेट्टी भारतीय संस्कृति में ढलने के बाद आचार्य विश्वनाथ हो गए हैं। मैसेट्टी अब वेदान्त की शिक्षा विदेशों में देते हैं। वह विदेशी छात्रों को योग और गीता पढ़ाते हैं। वह रामायण आदि की कहानियाँ भी लोगों को बताते हैं। उन्हें आयुर्वेद के बारे में भी समझाते हैं। मैसेट्टी ब्राजीम में अपने आश्रम में कई छात्रों को सनातन की धार्मिक शिक्षा देते हैं। वह और उनके साथी रामायण का मंचन भी करते हैं और झांकियों के जरिए लोगों को हिन्दू धर्म के विषय में समझाते हैं।

पीएम मोदी ने भी मैसेट्टी का किया था जिक्र

पीएम मोदी ने जोनास मैसेट्टी का जिक्र 2020 में मन की बात में किया था। पीएम मोदी ने जोनास मैसेट्टी जैसे लोगों को ‘भारत का सांस्कृतिक राजदूत’ करार दिया था। पीएम मोदी ने उनको लेकर कहा,”भारत की संस्कृति और शास्त्र, हमेशा से ही पूरी दुनिया के लिए आकर्षण के केंद्र रहे हैं। कई लोग तो इनकी खोज में भारत आए और हमेशा के लिए यहीं के होकर रह गए, तो कई लोग वापस अपने देश जाकर इस संस्कृति के संवाहक बन गए। मुझे ‘जोनास मैसेट्टी’ के काम के बारे में जानने का मौका मिला, जिन्हें ‘विश्वनाथ’ के नाम से भी जाना जाता है।”

पीएम मोदी ने आगे बताया, “जोनास ब्राजील में लोगों को वेदांत और गीता सिखाते हैं। वे विश्वविद्या नाम की एक संस्था चलाते हैं, जो रियो डी जेनेरियो से घंटे भर की दूरी पर पेट्रोपोलिस के पहाड़ों में स्थित है। जोनास ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद, स्टॉक मार्केट में अपनी कंपनी में काम किया, बाद में उनका रुझान भारतीय संस्कृति और खासकर वेदान्त की तरफ हो गया। स्टॉक से लेकर के धार्मिकता तक वास्तव में उनकी एक लंबी यात्रा है।”

कोर्ट के आदेश के बाद देर शाम को हुआ संभल के जामा मस्जिद का सर्वे, भारी संख्या में तैनात रही पुलिस: हिंदू पक्ष का दावा- बाबर ने हरिहर मंदिर को तोड़कर बनवाई थी मस्जिद

उत्तर प्रदेश के संभल स्थित जामा मस्जिद का मंगलवार (19 नवंबर 2024) की शाम को कलेक्टर की उपस्थिति में सर्वे हुआ। इस दौरान भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में वीडियोग्राफी भी की गई। दरअसल, जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए हिंदू पक्ष ने कोर्ट में एक वाद दायर किया था। इसके बाद कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर को नियुक्त करते हुए पूरे परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया।

कोर्ट का आदेश मिलते ही एवोकेट कमिश्नर रमेश राघव की निगरानी में डीएम डॉक्टर राजेंद्र पैंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई पुलिस फोर्स के साथ पहुँचे। एडवोकेट कमिश्नर रमेश राघव ने बताया कि मंगलवार को मुख्य हॉल और अन्य हॉल की वीडियोग्राफी कराई गई है। बाकी हिस्सों की भी वीडियोग्राफी कराई जा सकती है। यह रिपोर्ट 29 नवंबर 2024 तक कोर्ट में पेश किया जाएगा।

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर शाही जामा मस्जिद में सर्वे किया गया है। अभी आगे भी होना है। उन्होंने कहा कि मस्जिद के अंदर सिर्फ फोटोग्राफर और कैमरामैन ही गए थे। इस दौरान दोनों पक्षों के लोग मौजूद रहे। वहीं, मुस्लिम पक्ष के लोग आसपास की छतों पर आ गए और हालात तनावपूर्ण हो गया। हालात को संभालने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

इस दौरान मंदिर का दावा करने वाले कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज को मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद में घुसने से रोक दिया। बाद में प्रशासन ने महंत को वहाँ से हटा दिया। इस मस्जिद का सर्वे करने का आदेश सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह की कोर्ट ने दोपहर में दिया था और शाम को सर्वे का काम शुरू कर दिया गया। सर्वे लगभग दो घंटे तक हुआ। चार महीने पहले ASI ने भी यहाँ सर्वे किया था।

हिंदू पक्ष द्वारा 95 पेज के वाद में दावा किया गया है कि हरिहर मंदिर को तोड़कर जामा मस्जिद बनवाया गया है और मस्जिद समिति इसका अनाधिकृत उपयोग कर रही है। हिंदू पक्ष का दावा है कि आक्रमणकारी बाबर ने 1529 में इस मंदिर को तोड़कर मस्जिद में परिवर्तित कर दिया था। विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उन्होंने ऐतिहासिक साक्ष्यों और हिन्दू आस्था के आधार पर यह याचिका दाखिल की है।

विष्णु शंकर जैन ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार, पुरातत्व विभाग (ASI), संभल के जिलाधिकारी और जामा मस्जिद कमेटी को पक्षकार बनाया है। उन्होंने कहा कि यह विवादित ढाँचा ASI द्वारा संरक्षित स्थल है। उन्होंने दावा किया है कि हरिहर मंदिर को वर्तमान समय में गलत ढंग से मस्जिद के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

 

जामा मस्जिद का होगा सर्वे, विष्णु शंकर जैन की याचिका पर कोर्ट का आदेश: दावा- यह हरिहर मंदिर, यहाँ कल्कि भगवान लेंगे अवतार

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की जामा मस्जिद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन द्वारा दाखिल एक याचिका में दावा किया गया है कि वर्तमान में जामा मस्जिद के नाम से पहचाने जाने वाला यह स्थल पहले एक हिन्दू मंदिर था, जिसे आक्रमणकारी बाबर ने 1529 में तोड़कर मस्जिद में परिवर्तित कर दिया था। इस याचिका में कोर्ट से मस्जिद का सर्वेक्षण कराए जाने की माँग की गई थी, जिसे मंगलवार (19 नवंबर 2024) को संभल की जिला अदालत ने स्वीकार कर लिया और एडवोकेट कमिश्नर द्वारा सर्वे के आदेश दिए।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर कोर्ट के फैसले को साझा करते हुए बताया कि उनके द्वारा दायर याचिका पर अदालत ने सर्वेक्षण का आदेश जारी किया है। याचिका में उन्होंने दावा किया है कि यह स्थल प्राचीन काल में हरिहर मंदिर के नाम से जाना जाता था। विष्णु शंकर ने कहा कि साल 1529 में बाबर ने उस स्थान को तोड़ कर मस्जिद बनवाई थी। इसी पोस्ट में उन्होंने हिन्दुओं की आस्था का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मान्यता है कि उस स्थान पर भविष्य में कल्कि भगवान अवतार लेंगे।

मीडिया से बातचीत में विष्णु शंकर जैन ने बाबर को एक क्रूर आक्रमणकारी बताते हुए कहा कि उन्होंने ऐतिहासिक साक्ष्यों और हिन्दू आस्थाओं के आधार पर यह याचिका दाखिल की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार, पुरातत्व विभाग (ASI), संभल के जिलाधिकारी और जामा मस्जिद कमेटी को इस मामले में पक्षकार बनाया है। याचिकाकर्ता ने मस्जिद के तौर पर इस स्थान के उपयोग पर आपत्ति जताई है, क्योंकि यह ASI द्वारा संरक्षित स्थल है। उनका दावा है कि हरिहर मंदिर को वर्तमान समय में गलत ढंग से मस्जिद के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

याचिका में उन्होंने कोर्ट से माँग की कि भारतीय सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 26 के नियम 9 और 10 के तहत एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर विवादित स्थल का सर्वे कराया जाए। कोर्ट ने उनकी इस माँग को स्वीकार करते हुए सर्वेक्षण के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर दिया है।

विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वह अदालत के इस आदेश का जल्द से जल्द पालन सुनिश्चित करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाएँगे। उन्होंने याचिका में यह भी आग्रह किया है कि विवादित स्थल को मस्जिद के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यह स्थल हिन्दू आस्था और इतिहास से जुड़ा हुआ है और इसका उपयोग किसी धार्मिक विवाद का कारण नहीं बनना चाहिए।

इस फैसले के बाद से यह मामला न केवल कानूनी, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। अब सर्वेक्षण की प्रक्रिया और इसके परिणाम इस विवाद को आगे किस दिशा में ले जाएँगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

1971 में पैदा हुआ बांग्लादेश, पहली बार पाकिस्तान से डायरेक्ट आया कार्गो जहाज: जानिए समंदर के रास्ते का यह कारोबार भारत के लिए कैसा सौदा?

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद युनुस सरकार पाकिस्तान से रिश्ते मजबूत करने की कवायद कर रही है। इसी कड़ी में 1971 बाद पहली बार कोई जहाज सामान लेकर पाकिस्तान के किसी बंदरगाह से सीधा बांग्लादेश पहुँचा है। इस घटना से भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश रिश्तों में नए आयाम उभर आए हैं। पाकिस्तान से सीधा पहुँचने वाले सामानों ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। भारत को शक है कि अब पाकिस्तान इस रास्ते से बांग्लादेश में हथियार या ड्रग्स पहुँचाने की कोशिश कर सकता है।

कब पहुँचा जहाज, क्या लेकर आया?

दुबई की फीडर लाइंस DMCC कंपनी का जहाज युआन जियाँग फा झान कराची से सामान लेकर चला और 11 नवंबर को बांग्लादेश के चटगाँव बंदरगाह पहुँचा। चटगाँव बंदरगाह पर आए इस जहाज ने 370 कंटेनर उतारे। इनमें से 297 कंटेनर पाकिस्तान से आए थे जबकि बाक़ी दुबई से आए हुए थे।

पाकिस्तान से आए इस जहाज में 115 कंटेनर में सोडा एश, 46 कंटेनर में डोलोमाइट, 35 कंटेनर में लाइमस्टोन, 24 कंटेनर में केमिकल और 42 कंटेनर में प्याज था। इसके अलावा बाकी सामान भी इस जहाज पर लोड था, जिसे चटगाँव में उतार दिया गया। इसके बाद यह जहाज 12 नवंबर को रवाना ही इंडोनेशिया के लिए रवाना हो गया।

पाकिस्तान से जहाज का बांग्लादेश पहुँचना बड़ी घटना क्यों?

1971 के बाद पहली बार कोई जहाज कराची से सामान लेकर बिना रास्ते में कहीं रुके बांग्लादेश के बंदरगाह पहुँचा। इससे पहले पाकिस्तान से जहाज चल कर सीधा बांग्लादेश नहीं जाते थे। पाकिस्तान से बांग्लादेश जाने वाला सामान या तो पहले सिंगापुर या फिर श्रीलंका के कोलम्बो बंदरगाह पर जाता था। इसके बाद इसे दूसरे जहाजों में डाल कर बांग्लादेश ले जाया जाता था।

दोनों देशों के बीच समुद्री रूट नहीं होने के पीछे 1971 के पहले का इतिहास है। बांग्लादेश के आजाद होने के पहले पाकिस्तान ने बंगालियों पर काफी अत्याचार किया था। पाक फ़ौज ने हजारों महिलाओं का रेप किया था और पुरुषों को मार दिया था। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में खटास के चलते ही समुद्री लिंक नहीं स्थापित हुआ था।

बांग्लादेश में स्थित पाकिस्तान के हाई कमीशन ने इसे एक बड़ा कदम बताया है। पाकिस्तानी हाई कमिश्नर ने कहा है कि आगे इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा जो सहयोग में सहायक होगा। बांग्लादेश में पाकिस्तानी सामान पहुँचने की यह घटना एक हालिया फैसले के बाद हुई है।

बांग्लादेश की युनुस सरकार ने हाल ही में पाकिस्तान से आने वाले सामानों की अनिवार्य चेकिंग की शर्त हटा ली थी। यह रोक शेख हसीना के कार्यकाल में लगाई गई थी ताकि पाकिस्तान से कोई भी ड्रग या हथियार जैसा सामान बांग्लादेश के भीतर ना पहुँच पाए।

वर्तमान में पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच व्यापार $1 बिलियन से भी कम है। यह समुद्री लिंक बनने से दोनों के बीच व्यापार बढ़ने के कयास हैं। हालाँकि, इस व्यापार में बांग्लादेश का ही पलड़ा भारी रहने वाला है।

पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच समुद्री लिंक चिंता का कारण क्यों?

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधा समुद्री लिंक बनने के बाद भारत कई कारणों से चिंतित है। पहला कारण तो यह है कि यह दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकी को दिखाता है। यह भारत के हित में नहीं है। पाकिस्तान हमेशा से ही बांग्लादेश के सहारे भारत को घेरने की योजना बनाता रहा है।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी बांग्लादेश के भीतर कट्टरपंथ फैलाने और फिर यहाँ से आतंकी भारत में भेजने की योजना भी बनाती रही है, ऐसे में भारत की सुरक्षा चिंताएँ भी बढ़ती हैं। इसके अलावा दूसरी चिंता ड्रग्स और हथियारों को लेकर है।

बांग्लादेश के चटगाँव बंदरगाह का इस्तेमाल पाकिस्तान ड्रग्स और हथियार भेजने में कर सकता है। पाकिस्तान लगातार सीमापार और समुद्री रास्ते से भारत में हथियार और ड्रग्स भेजने की कोशिश करता रहा है। हालाँकि, इसमें उसको अधिक सफलता नहीं मिली है।

वह बांग्लादेश की भारत के साथ खुली सीमा का इस्तेमाल इस काम के लिए कर सकता है। ऐसे में भारत की चिंताएँ और बढ़ गई हैं। इसके अलावा पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों को भी बांग्लादेश में लंगर डालने का मौका अब मिल सकता है। यह भारत की सामरिक चुनौतियों को कई गुना बढ़ा देगा।

गुजरात में BJP के पूर्व पार्षद के बेटे की हत्या, बाबर पठान ने साथियों संग धारदार हथियार से किया हमला: आक्रोशित लोगों का थाने पर प्रदर्शन

गुजरात के वडोदरा में सोमवार (18 नवंबर 2024) को एक दलित युवक तपन परमार की बेरहमी से हत्या कर दी गई।मृतक भारतीय जनता पार्टी के पूर्व पार्षद रमेश परमार का 27 वर्षीय बेटा था। यह घटना वडोदरा के सर सयाजीराव जनरल अस्पताल (SSG अस्पताल) में हुई। दावा किया जा रहा है कि हत्या के वक्त पुलिस मौके पर मौजूद थी। इस मामले में मुख्य आरोपित बाबर पठान और उसके साथियों महबूब, वसीम, और अन्य पर हत्या का आरोप है। हमले में तपन के एक साथी मितेश राजपूत भी घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना वडोदरा के मेहतावाड़ी क्षेत्र में हुई। सोमवार को तपन परमार अपने दोस्त मितेश राजपूत के साथ SSG अस्पताल गए थे, जहाँ उनके साथी विक्रम का इलाज चल रहा था। विक्रम की मेडिकल जाँच के बाद तपन और मितेश कैंटीन में बैठे थे। उसी समय इलाके के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर बाबर पठान अपने साथियों के साथ वहाँ पहुँचा। बाबर ने तपन और मितेश से बहस शुरू कर दी, जो जल्दी ही हिंसक झगड़े में बदल गई।

बताया जा रहा है कि नोकझोंक के दौरान बाबर पठान के 2 साथियों ने मितेश राजपूत को पकड़ लिया। इसी दौरान बाबर ने धारदार हथियार निकालकर तपन पर हमला किया। मितेश किसी तरह खुद को छुड़ाकर भागने में सफल हुआ, लेकिन जब वह लौटा तो तपन खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। तपन को तुरंत इलाज के लिए भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हमलावर वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए।

हत्या की खबर से इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग मेहतावाड़ी पुलिस थाने के बाहर जमा होकर प्रदर्शन करने लगे। मृतक के पिता रमेश परमार ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में मारा गया और आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने मृतक के परिजनों की तहरीर पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। मौके पर तमाम उच्चाधिकारी भी पहुँचे और नाराज लोगों को समझा-बुझाकर शाँत किया।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जाँच शुरू की। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें बाबर पठान और अन्य आरोपितों की पहचान हुई। फुटेज में एक महिला, शबनम मंसूरी भी नजर आई, जो आरोपित वसीम की बीवी है। घटनास्थल पर बाबर के हाथ में धारदार हथियार साफ देखा गया। पुलिस ने मुख्य आरोपित बाबर पठान सहित पाँच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, घटना की पृष्ठभूमि नागरवाड़ा इलाके में हिन्दू और मुस्लिम युवकों के बीच हुए झगड़े से जुड़ी है। इस झगड़े में एक पक्ष से वसीम और दूसरे पक्ष से धर्मेश व विक्रम घायल हुए थे। विवाद के बाद दोनों पक्षों को मेडिकल जाँच के लिए SSG अस्पताल लाया गया था। तपन इस विवाद का हिस्सा नहीं था, वह केवल अपने दोस्त के साथ अस्पताल आया था। इसी दौरान बाबर ने उस पर हमला कर दिया।

गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इस हत्याकांड के बाद पुलिस न बाबर पठान सहित कुल 5 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मुख्य आरोपित बाबर पठान पहले भी असामाजिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम (PASA) के तहत जेल जा चुका है।

उमर अब्दुल्ला के खिलाफ लड़ा चुनाव, AAP ने बनाया स्टार प्रचारक: देवबंद में पुलिस पर ग्रेनेड फेंकने वाला आतंकी 30 साल तक देता रहा चकमा

1993 में उत्तर प्रदेश के देवबंद में पुलिस पर ग्रेनेड अटैक हुआ। कुछ महीनों बाद इस मामले में एक आतंकी की गिरफ्तारी हुई। 1994 में इस आतंकी को जमानत भी मिल गई। इसके बाद 17 नवंबर 2024 को श्रीनगर से जब यह आतंकी फिर पकड़ा गया तो पता चला कि नाम, वेशभूषा और जगह बदलकर वह करीब 30 साल से सबको चकमा दे रहा था।

यह कहानी है आतंकी नजीर अहमद उर्फ मुस्तफा बानी उर्फ जावेद इकबाल की। फरारी के दौरान ही उसने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव भी लड़ लिया। आम आदमी पार्टी (AAP) की स्टार प्रचारकों की सूची में भी शामिल हो गया। एक रिपोर्ट की माने तो हाल ही में संपन्न हुए जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में वह आप का उम्मीदवार बनते-बनते रह गया था।

नजीर अहमद ने लगातार बदले नाम

ऑपइंडिया की पड़ताल में सामने आया है कि नजीर अहमद वानी लगातार अपना नाम बदलता रहा है। देवबंद में दर्ज मुकदमे में उसका नाम नजीर अहमद है। लेकिन वह सहारनपुर में मुश्ताक अहमद के नाम से रहता था। ग्रेनेड अटैक उसने फरारी मुस्तफा नाम से काटी थी। इसी मामले में जमानत मिलते ही वह कश्मीर वापस लौट गया। फिर अपना नाम जावेद इकबाल वानी रख लिया।

नाम के साथ उसने अपने पते भी बदले। पहले नजीर अहमद का पता जम्मू-कश्मीर के बड़गाम जिले में पड़ने वाले इंजक शरीफाबाद हुआ करता था। यह पता पारिमपुरा थाना क्षेत्र में पड़ता है। जमानत के बाद कश्मीर लौट कर वह बड़गाम जिले के ही सोईबुध कस्बे के पास गाँव हाकर मुल्ला में रहने लगा। पुलिस सूत्र बताते हैं कि जिस थाना क्षेत्र का नजीर अहमद वानी निवासी है, वहाँ से लगभग 50 एक्टिव आतंकी अलग-अलग समय में निकल चुके हैं।

देवबंद अटैक में जमानत के बाद निकाह

देवबंद में UP पुलिस पर ग्रेनेड अटैक के समय नजीर अहमद की उम्र 20 वर्ष थी। वह अविवाहित था। जमानत के बाद कश्मीर लौटते ही उसने सबरीना नाजिर से निकाह कर लिया। उसके 3 बच्चे हैं। इनके नाम मकीत, सादात और सुगरा हैं। साल 2019 में उसने वैगन आर कार खरीदी थी। सरकारी दस्तावेजों में वह खुद को और अपनी बीवी को कारोबारी बताता था।

उमर अब्दुल्ला के खिलाफ लड़ा चुनाव

नजीर अहमद वानी ने 2024 का जम्मू कश्मीर का विधानसभा चुनाव भी लड़ा है। उसने बड़गाम सीट से उमर अब्दुल्ला के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसे विधानसभा चुनाव में केवल 1583 वोट मिले थे। इसी सीट पर NOTA को 1757 वोट मिले हैं। इससे पहले उसने नगर पालिका का भी चुनाव लड़ा था। लेकिन इसमें भी उसे हार मिली थी।

स्क्रीनशॉट -चुनाव आयोग की वेबसाइट

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उसने AAP से विधानसभा चुनाव के लिए टिकट माँगा था। लेकिन अंतिम समय में पार्टी को उसके आतंकवादी होने का पता चल गया, जिसके कारण टिकट नहीं मिला। इस दावे की पुष्टि के लिए हमने आप की जम्मू-कश्मीर ईकाई के नेताओं से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका।

इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि नजीर ने साल 1989 से 1991 के बीच पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) और अफगानिस्तान में आतंकवाद की ट्रेनिंग ली थी। ट्रेनिंग पूरा होने के बाद वह 1991 में देवबंद आया और पहचान छिपाकर रहने लगा। इस दौरान उसने टोपी बेचने का धंधा भी किया।

चुनावी हलफनामे में नहीं दी देवबंद अटैक की जानकारी

विधानसभा चुनाव के लिए नजीर अहमद ने जो हलफनामा दाखिल किया है उसमें देवबंद के ग्रेनेड अटैक को लेकर जानकारी नहीं दी है। केवल एक केस का जिक्र किया है जो उसके खिलाफ जनवरी 2023 में बड़गाम जिले में दर्ज हुआ था। केस में IPC की धारा 341 और 506 के तहत कार्रवाई की गई थी।

केस डिटेल

बताते चलें कि साल 1993 में नजीर अहमद वानी पर पुलिसकर्मियों सहित आम नागरिकों पर ग्रेनेड फेंकने की घटना पर IPC की धारा 307 व विस्फोटक अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था। 1994 में उसकी गिरफ्तारी के बाद उस पर फर्जी दस्तावेज प्रयोग करने के अपराध में IPC की धारा 467, 468 व 471 के तहत एक और FIR दर्ज हुई थी। इन दोनों मुकदमों में नजीर अहमद करीब 30 वर्षों से पेश नहीं हो रहा था।

दैनिक जागरण ने बड़गाम के जिला एसएसपी निखिल बोरकार के हवाले से बताया है कि नजीर अहमद के खिलाफ कश्मीर के किसी हिस्से में कोई आतंकी मामला दर्ज नहीं है। उसके खिलाफ एक आपराधिक मामला है।

AAP ने बनाया स्टार प्रचारक

नजीर अहमद फेसबुक पर वानी जावेद इकबाल के नाम से सक्रिय है। इस प्रोफाइल को खंगालने पर आम आदमी पार्टी से उसके जुड़ाव की पुष्टि होती है। आप के दिल्ली मुख्यालय से जारी एक आधिकारिक पत्र में उसका नाम कश्मीर विधानसभा चुनावों के लिए शीर्ष 40 स्टार प्रचारकों की सूची में दर्ज है। यह पत्र 24 अगस्त 2024 को आप के नोडल पर्सन बिपुल डे ने जारी किया था। इसमें 38वें नंबर पर जावेद इकबाल नाम का जिक्र है।

पत्र की प्रतियाँ नई दिल्ली और जम्मू कश्मीर चुनाव आयोग को भी प्रेषित की गई थी। नजीर ने इसे फेसबुक पर शेयर करते हुए पार्टी को धन्यवाद भी दिया है। इस पत्र और जावेद इकबाल की पहचान सुनिश्चित करने के लिए भी हमने AAP की जम्मू-कश्मीर ईकाई से संपर्क करने के कई प्रयास किए हैं। उनका पक्ष आने पर हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।

नजीर अहमद के खिलाफ 20 मई 2024 को सहारनपुर की एक अदालत ने स्थायी वारंट जारी किया। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। 17 नवंबर 2024 को यूपी एटीएस ने उसे श्रीनगर से दबोच लिया। एक रिपोर्ट में सहारनपुर के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सागर जैन के हवाले से बताया गया है कि नजीर अपनी पहचान बदलकर इतने समय तक बचता रहा था।

पश्चिम बंगाल के बेलडांगा में हिंदुओं पर हमले के बाद से हालात तनावपूर्ण, इंटरनेट बंद: राज्यपाल ने ममता सरकार से माँगी रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। शनिवार (16 नवंबर) को कथित ‘ईशनिंदा’ का आरोप लगाते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदू घरों पर हमले किए, जिससे इलाके में तनाव फैल गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने बड़े पैमाने पर हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की। बेलडांगा के एक व्यक्ति पहचान न बताने की शर्त पर बताया कि घटनास्थल पर देसी बम फेंके गए और 20 से अधिक हिंदू घायल हुए। हालाँकि मीडिया द्वारा जारी आँकड़ों में सिर्फ 6 लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है। पुलिस का दावा है कि इस हिंसा में कोई जान नहीं गई।

घटनास्थल पर अब तक 17 गिरफ्तारियाँ हुई हैं, जिनमें से 8 आरोपितों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया है।

स्थानीय प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 167 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है, जिससे पाँच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाई गई है। इंटरनेट सेवाएँ अभी भी निलंबित हैं।

तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) सरकार के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि बेलडांगा में स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन स्थानीय सूत्रों ने इस दावे को खारिज किया है।

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने सोमवार (18 नवंबर 2024) को कहा, “बेलडांगा में एक भड़काऊ घटना के कारण हिंसा हुई। हालाँकि, अब वहाँ शांति है। कुछ ‘दुष्ट ताकतें’ लोगों को भड़काने की कोशिश कर रही हैं।” उन्होंने दावा किया कि यही दुष्ट ताकतें भ्रम फैला रही हैं और हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इंटरनेट सेवाएँ बंद होने की वजह से हिंसा के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर नहीं पहुँच पा रही हैं, जिससे घटना की पूरी सच्चाई बाहर नहीं आ रही।

इसी बीच, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने ममता बनर्जी से इस घटना पर ‘कार्रवाई रिपोर्ट’ माँगी है। पीटीआई से बातचीत में एक अधिकारी ने बताया कि “राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से तुरंत कार्रवाई रिपोर्ट माँगी है। वह इस घटना से बेहद आहत हैं और अपनी नाराजगी जाहिर की है। यदि आवश्यकता पड़ी, तो राज्यपाल बेलडांगा का दौरा कर सकते हैं।”

राज्यपाल सीवी आनंद बोस इस मामले पर राजभवन से नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने अपनी बाकी सभी व्यस्तताएँ रद्द कर दी हैं ताकि बेलडांगा की स्थिति का पूरा जायजा लिया जा सके।

‘बीफ वाले लड्डू’ के बाद तिरुपति मंदिर में ‘स्वच्छता अभियान’: गैर हिंदू कर्मचारियों से TTD ने कहा- VRS लो या ट्रांसफर, दर्शन के बाद राजनीति पर भी रोक

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में अब गैर-हिन्दू काम नहीं कर सकेंगे। उन्हें या तो स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति होगी या फिर उनको आंध्र प्रदेश के किसी दूसरे विभाग में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। यह फैसला हाल के दिनों में तिरुपति प्रसाद में ‘पशु चर्बी’ की मिलावट वाले विवाद के बाद हुआ है। यह फैसला मंदिर का प्रबंधन करने वाले तिरुपति तिरुमला देवस्थानम (TTD) ने लिया है।

सोमवार (18 नवंबर, 2024) को TTD के नए चेयरमैन बी आर नायडू की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक में गैर हिन्दुओं को तिरुपति की सेवा में लगाने के अलावा भी कई फैसले हुए हैं। यह बैठक तिरुपति के अन्नामैया भवन में हुई। इसमें TTD के चेयरमैन बी आर नायडू के अलावा बाकी सदस्य भी शामिल हुए।

TTD ने फैसला लिया है कि उसके लिए काम करने वाले गैर हिन्दू कर्मचारियों को आंध्र प्रदेश सरकार के किसी अन्य विभाग में भेजा जाएगा या फिर उन्हें सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। TTD ने कहा कि वह आगामी दिनों में गैर-हिन्दू कर्मचारियों की संख्या को लेकर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद वह एक्शन लेगी।

अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में TTD के लिए काम करने वालों की सलग संख्या बताई गई है। हिंदुस्तान टाइम्स में एक हवाले से इनकी संख्या 44 जबकि टाइम्स ऑफ़ इंडिया में इनकी संख्या 300 से अधिक बताई गई है। हालाँकि, TTD की कर्मचारी यूनियनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि यह कानूनन सही है।

TTD ने यह भी फैसला लिया है कि वह मंदिर में दर्शन के बाद नेताओं के राजनीतिक बयान देने पर भी रोक लगाएगा। TTD ने कहा है कि दर्शन के बाद राजनीतिक बयानबाजी करने वाले नेताओं पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। TTD ने यह भी कहा है कि इसका उल्लंघन करने वालों पर विधिक कार्रवाई की जाएगी चाहे वह किसी भी पार्टी का सदस्य हो।

बोर्ड बैठक में इसके अलावा कई प्रशासनिक निर्णय भी लिए गए हैं। इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि बोर्ड का पैसा अब निजी बैंकों में नहीं रखा जाएगा। TTD अब पैसा रखने के लिए सरकारी बैंकों में खाते खुलवाएगा। बोर्ड दर्शन का समय कम करने के लिए भी काम करेगा।

TTD ने कुछ दिनों पहले लड्डू प्रसादम में उपयोग किए जाने वाले घी पर हुए विवाद के बाद शुद्धता को लेकर भी फैसले लिए हैं। TTD ने कहा है कि अच्छी गुणवत्ता का घी लेने के लिए वह फिर से टेंडर जारी करेंगे। गौरतलब है कि हालिया रिपोर्ट्स में लड्डू में चर्बी की बात सामने आई थी।

रेप केस में मलायलम एक्टर सिद्दीकी को सुप्रीम कोर्ट ने दी अग्रिम जमानत, 8 साल बाद शिकायत बनी आधार: पीड़िता से पूछा- फेसबुक पोस्ट करने की हिम्मत थी, लेकिन पुलिस स्टेशन जाने की नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (19 नवंबर 2024) को मलयालम अभिनेता सिद्दीकी को एक रेप मामले में अग्रिम जमानत दे दी। यह मामला 2016 के एक कथित घटना से जुड़ा है, जिसमें एक युवा अभिनेत्री ने सिद्दीकी पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने सिद्दीकी को दी गई 30 सितंबर की अंतरिम जमानत को स्थाई कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित को ही लगाई डाँट

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, “शिकायतकर्ता ने घटना के लगभग आठ साल बाद 2024 में एफआईआर दर्ज की। इसके अलावा, 2018 में फेसबुक पर 14 लोगों के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाते हुए पोस्ट किया गया था। फिर भी वह केरल सरकार द्वारा गठित हेमा समिति के पास अपनी शिकायत लेकर नहीं गई।” जस्टिस त्रिवेदी ने कहा, “आपने फेसबुक पर पोस्ट डालने की हिम्मत दिखाई, लेकिन पुलिस के पास जाने की नहीं?”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता के पुलिस में देर से शिकायत दर्ज करने और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए यह जमानत दी जा रही है। हालाँकि, जमानत की शर्तों के तहत सिद्दीकी को अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करना होगा और जाँच में पूरा सहयोग करना होगा।

सिद्दीकी के वकील का दावा-प्रतिष्ठा खराब करने की कोशिश

सिद्दीकी की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में दलील दी कि घटना 2016 की है, जबकि शिकायत 2024 में की गई। उन्होंने कहा, “शिकायतकर्ता ने फेसबुक पर कई लोगों पर इसी तरह के आरोप लगाए हैं। यह मेरी प्रतिष्ठा को खराब करने की कोशिश है।”

रोहतगी ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने घटना के आठ साल बाद एफआईआर दर्ज की, जबकि वह फेसबुक पर 2018 से पोस्ट कर रही थीं। उन्होंने यह भी बताया कि सिद्दीकी ने 26 अगस्त 2024 को शिकायतकर्ता के खिलाफ पहले ही शिकायत दर्ज की थी।

शिकायतकर्ता की वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में कहा कि अभिनेत्री ने 2018 से सोशल मीडिया पर इस घटना के बारे में बोलना शुरू किया, लेकिन इंडस्ट्री में एक “सुपरस्टार” के खिलाफ जाने में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ग्रोवर ने कहा, “हेमा समिति की रिपोर्ट के बाद, और जब अदालत ने महिलाओं के खिलाफ यौन शोषण के मामलों पर ध्यान देना शुरू किया, तो उन्हें अपनी शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत मिली।” उन्होंने यह भी दावा किया कि सिद्दीकी ने 2016 में अभिनेत्री को फिल्म प्रीव्यू के बहाने एक होटल में बुलाया और वहाँ उनका यौन शोषण किया।

राज्य सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील ने रखा पक्ष

केरल सरकार के वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि शिकायतकर्ता ने उस समय केवल एक उभरती हुई अभिनेत्री होने के बावजूद फिल्म प्रीव्यू में शामिल होने का निमंत्रण क्यों स्वीकार किया। उन्होंने सिद्दीकी पर सबूत नष्ट करने और जाँच में सहयोग न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “सिद्दीकी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स डिलीट कर दिए और जाँच में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। उनके खिलाफ आरोप गंभीर हैं और उनके प्रभाव के कारण गवाहों पर दबाव डाला जा सकता है।”

इससे पहले, केरल हाई कोर्ट ने 24 सितंबर को सिद्दीकी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि देरी के बावजूद शिकायतकर्ता के आरोप गंभीर हैं और उनका निपटारा ट्रायल के दौरान होना चाहिए। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर को सिद्दीकी को अंतरिम जमानत दी थी।

हेमा कमेटी की रिपोर्ट में भी दर्ज है ये मामला

इस मामले का उल्लेख केरल की हेमा समिति की रिपोर्ट में भी किया गया है, जिसने मलयालम फिल्म उद्योग में यौन शोषण और लैंगिक भेदभाव के मामलों को उजागर किया। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद, कई महिलाओं ने इंडस्ट्री के कई बड़े नामों के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए सिद्दीकी को अग्रिम जमानत दी कि जाँच प्रक्रिया जारी रहेगी और ट्रायल कोर्ट अन्य शर्तें तय कर सकता है। शिकायतकर्ता की ओर से लगाई गई देरी और परिस्थितियों को जाँच के दौरान पूरी तरह से ध्यान में रखा जाएगा।

हेमंत सोरेन की बीवी के लिए पप्पू यादव ने माँगा आशीर्वाद (वोट), महिला ने कहा- JMM ने कुछ नहीं किया, हमलोग BJP को देंगे: Video वायरल

बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव को झारखंड में महिलाओं ने सामने से सुना दिया। पप्पू यादव CM हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के लिए ‘स्टार प्रचारक’ बन कर पहुँचे थे। कल्पना सोरेन के लिए वोट देने से महिलाओं ने मना कर दिया। महिलाओं ने कहा कि वह भाजपा को वोट देंगी। इस बातचीत का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है।

पप्पू यादव झारखंड विधानसभा चुनाव में गांडेय सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) उम्मीदवार कल्पना सोरेन के लिए वोट माँगने सोमवार (18 नवम्बर, 2024) को पहुँचे थे। यहाँ वह इस दौरान गाड़ी की छत पर बैठक पर लोगों से वोट माँग रहे थे। उन्होंने इसी दौरान कुछ महिलाओं के समूह से JMM के लिए वोट माँगे।

उन्होंने कहा, “यहाँ से बिहार से, देश से चल के आए हैं, और अपने ख़ून से हम आशीर्वाद लेने आए हैं… दीजिएगा ना आशीर्वाद… बेटी दीजिएगा ना आशीर्वाद, ओ बिटिया दीजिएगा ना।” इसी दौरान उनमें से एक महिला ने JMM को वोट देने से मना कर दिया।

महिला ने पप्पू यादव की वोट देने की अपील पर कहा, “नहीं देंगे वोट, हम लोग भाजपा में वोट देंगे, इतना दिन JMM क्या किया। पाँच साल JMM ने कुछ नहीं किया।”

इसके बाद पप्पू यादव ने वापस सवाल पूछा, उन्होंने कहा, “20 साल भाजपा रही, उसने क्या किया, तुम्हारे कहने से कुछ नहीं होगा।”

महिला तब भी भाजपा को वोट देने के रुख पर अड़ी रहीं। उन्होंने कहा, “बहुत कुछ हुआ है, मंदिर बनाया है भाजपा ने। आप जाकर देखिए रोड में किस तरह लगता है।

लगभग 1 मिनट की वोटरों और पप्पू यादव के बीच की यह बातचीत सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस बातचीत के बाद भाजपा नेता कह रहे हैं कि झारखंड मोदीमय हो चुका है।भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया है।

वहीं पप्पू यादव ने इस चुनाव प्रचार के बाद एक्स (पहले ट्विटर) पर कपना सोरेन के जीतने की बात कही है।

कल्पना सोरेन का यह दूसरा चुनाव है। इससे पहले उन्होंने 2024 में इसी विधानसभा सीट पर हुआ उपचुनाव जीता था। JMM हेमंत सोरेन के जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्हें चेहरा बना रही है। हाल ही में उनकी महँगी अंगूठी और बैग को लेकर भी विवाद हुआ था।

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण की वोटिंग बुधवार (20 नवम्बर, 2024) को होनी है। इसके लिए झामुमो-कॉन्ग्रेस गठबंधन और भाजपा, दोनों ने अपने संसाधन झोंक दिए हैं। झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 नवम्बर, 2024 को आएँगे।

पप्पू यादव के साथ पहली बार ऐसी झेंपने वाली स्थिति नहीं हुई है। इससे पहले पप्पू यादव ने विश्नोई गैंग को खत्म करने की बात कही थी। फिर उन्होंने दावा किया कि विश्नोई गैंग उन्हें धमका रहा है और बाद में इस मामले से वह किनारे हो गए। उन्होंने कहा कि हमें विश्नोई गैंग मामले से कोई लेना देना नहीं है।