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पत्नी-बेटी और 2 बेटे को वाराणसी के करोड़पति कारोबारी ने मार डाला, घर से 10 KM दूर खुद की भी लाश मिली: अब परिवार में बची केवल वृद्ध माँ जो ठीक से बोल-चल भी नहीं सकतीं

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और 3 बच्चों की हत्या के बाद खुद को भी गोली मारकर सुसाइड ली है। घटना सोमवार (4 अक्टूबर 2024) की है। माँ छोड़कर पूरे परिवार सहित खुद को को खत्म कर देने वाला राजेंद्र गुप्ता एक कारोबारी था। उसके परिवार में पहले भी पिता और भाई सहित 5 हत्याएँ हो चुकी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में इसे पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है हालाँकि, कुछ रिपोर्ट में तांत्रिक के इशारे पर की गई हरकत बताया जा रहा है। फ़िलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है। घटना वाराणसी के थाना क्षेत्र भेलूपुर की है। यहाँ के भदैनी इलाके में 45 वर्षीय राजेंद्र गुप्ता अपने परिवार के साथ रहता था।

उसके परिवार में 42 वर्षीया पत्नी नीलू और 16 साल की बेटी गौरांगी के अलावा 20 और 15 साल के 2 बेटे नवेंद्र और सुवेंद्र थे। मंगलवार (5 नवंबर) की सुबह घर की नौकरानी रेनू काम के लिए वहाँ गई। उसने काफी देर तक बेल बजाया, फिर भी किसी ने दरवाजा नहीं खोला। रेनू ने धक्का देकर गेट खोला तो अंदर खून फैला हुआ था और नीलू, गौरांगी, नवेंद्र और सुवेंद्र की लाश पड़ी थी।

रेनू इस घर में पिछले 5 साल से काम कर रही थी। सोमवार की शाम 6:30 पर वह खाना बनाकर राजेंद्र के घर से लौटी थी, तब उसे सब कुछ सामान्य लगा था। रेनू ने इसकी सूचना पड़ोसियों को दी। सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुँची। मृतकों को गोली मारी गई थी। काफी खोजबीन के बाद राजेंद्र गुप्ता का कहीं पता नहीं चला।

इसी घर से मिला था राजेंद्र गुप्ता का शव

पुलिस ने राजेंद्र गुप्ता का पता लगाने के लिए उसकी मोबाइल को ट्रेस करना शुरू कर दिया। मोबाइल के लोकेश के आधार पर पुलिस 10 किलोमीटर दूर वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र स्थित एक गाँव मीरपुर लठिया के एक निर्माणाधीन मकान में पहुँची। वहाँ राजेंद्र गुप्ता की लाश पड़ी हुई थी। लाश के पास पिस्टल भी मिला।

अभी तक यही माना जा रहा है कि राजेंद्र ने अपनी कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर लिया है। फ़िलहाल सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इधर पुलिस हत्या के कारणों की पड़ताल में जुट गई है। वहीं, घर में राजेंद्र गुप्ता की माँ जिंदा बची है। वह काफी वृद्ध हैं। उम्र अधिक होने की वजह से वे हिल-डुल पाने में असमर्थ हैं। 

तांत्रिक पर शक

इस सामूहिक नरसंहार को लेकर अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अमर उजाला सहित कई मीडिया संस्थानों में इसे किसी तांत्रिक के कहने पर राजेंद्र द्वारा किया या नरसंहार बताया जा रहा है। दावा किया गया है कि किसी तांत्रिक ने राजेंद्र को बताया था कि उसकी पत्नी नीलू गुप्ता उनके कारोबार में बाधा है।

कहा जा रहा है कि तांत्रिक की बात सुनकर राजेंद्र गुप्ता दूसरी शादी के चक्कर में पड़ गया था। इस बात को लेकर पति-पत्नी के बीच आए दिन झगड़ा होता रहता था। फ़िलहाल पुलिस इसकी सत्यता की पुष्टि में जुटी है। साथ ही उस तांत्रिक की भी तलाश कर रही है, जिसके इशारे पर इतने बडे़ नरसंहार को अंजाम दिया गया।

बेहद समृद्ध था राजेंद्र गुप्ता का परिवार

राजेंद्र गुप्ता का परिवार काफी समृद्ध था। राजेंद्र के पास वाराणसी में कुल 4 घर हैं, जिनमें 2 घर तो ऐसे हैं, जिसमें कमरों की संख्या लगभग 50 है। राजेंद्र ने इन कमरों को किराए पर दे रखा था, जिसका मासिक किराया लाखों रुपयों में आता था। इसके अलावा राजेंद्र के पास 100 से ज्यादा रिक्शे हैं। इन रिक्शों से उसे लाखों रुपए महीने में आमदनी होती थी।

इन सभी के अतिरिक्त राजेंद्र गुप्ता के पास देशी शराब के ठेके हैं। इन ठेकों पर बिक्री भी काफी अच्छी है, जिसे से प्रतिदिन हजारों रुपयों की कमाई होती है। राजेंद्र का बेटा नवेंद्र बेंगलुरु में एक मल्टीनेशनल कम्पनी में जॉब करता था। वह दीपावली की छुट्टी पर घर आया था। गौरांगी और सुवेंद्र वाराणसी के प्रतिष्ठित स्कूल डीपीएस में पढ़ते थे। घर में छठ मनाने की तैयारियाँ चल रही थीं।

घर में पहले भी हो चुकी हैं 5 हत्याएँ, राजेंद्र था आरोपित

नीलू गुप्ता राजेंद्र की दूसरी बीवी थी। राजेंद्र के परिवार में पहले भी 5 कत्ल हो चुके हैं। ये कत्ल राजेंद्र के पिता, भाई, पहली पत्नी और 2 गार्ड के हुए थे। 20 साल पहले एक गार्ड की हत्या में राजेंद्र जेल भी गया था। माना यह भी जा रहा है कि भाई, पिता और पहली पत्नी की हत्या में भी राजेंद्र का हाथ था। फ़िलहाल पुलिस उसके पुराने आपराधिक जीवन की भी पड़ताल कर रही है।

जिस ईमान खलीफ का मुक्का खाकर रोने लगी थी महिला बॉक्सर, वह मेडिकल जाँच में निकली ‘मर्द’: मानने को तैयार नहीं थी ओलंपिक कमेटी, जीता था गोल्ड

पेरिस ओलंपिक 2024 के दौरान अपने जेंडर को लेकर खबरों में आया अल्जीरिया का ट्रांस बॉक्सर ईमान खलीफ फिर चर्चा में है। कथिततौर पर उससे जुड़ी एक रिपोर्ट लीक हुई है जिसका ड्राफ्ट क्रेमलिन-बाइसिट्र अस्पताल के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है।

बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट में दावा है कि ईमान असल में अब भी पुरुष ही है। ये मेडिकल रिपोर्ट खुलासा करती है कि इमान के शरीर में महिलाओं के अंग (जैसे यूटरस) गायब और पुरुषों वाले कई अंग पाए गए हैं, जिसमें आंतरिक अंडकोष और XY गुणसूत्र शामिल हैं।

कहा जा रहा है कि यह स्थिति 5-अल्फा रिडक्टेस अपर्याप्तता नामक विकार से संबंधित हो सकती है, जो यौन विकास का एक विकार है और आमतौर पर जैविक पुरुषों में पाया जाता है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर माँग उठ रही है कि ईमान से उसका ओलंपिक पदक वापस लिया जाए। भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी इस संबंध में ट्वीट ईमान से गोल्ड वापस लेने की माँग की है। उनके अलावा अन्य यूजर्स भी ईमान की तमाम वीडियो शेयर करके सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कोई बताए कि ईमान कहाँ से महिला लगता है।

गौरतलब है कि पेरिस ओलंपिक के वक्त इटली की महिला बॉक्सर एंजेला कैरिनी से ईमान के मैच के बाद उसकी ताकत देखते हुए उसके जेंडर पर सवाल खड़े हुए थे। हालाँकि ओलंपिक कमेटी इस मुद्दे पर विचार करने को तैयार नहीं थी। 46 सेकेंड में खत्म हुए मैच के बाद एंजेला ने बताया था कि ईमान ने उन्हें इतनी तेज मुक्का मारा कि उन्हें कभी किसी महिला से ऐसा मुक्का नहीं पड़ा।

दिल्ली के सिंहासन पर बैठे अंतिम हिंदू सम्राट, जिन्होंने गोहत्या पर लगा दिया था प्रतिबंध: सरकारी कागजों में जहाँ उनका समाधि-स्थल, वहाँ दरगाह का कब्जा

भारत की धरती वीरों की जननी है। इन्हीं में से एक महावीर थे हेमू। इन्हें हेमचंद्र विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है। विक्रमादित्य एक उपाधि है, जिसे देश के हिंदू शासक धारण करते आए हैं। हेमू दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाले अंतिम हिन्दू सम्राट थे। वे अद्वितीय योद्धा एवं कुशल रणनीतिकार थे। उन्हें मध्ययुग का नेपोलियन कहा जाता है। आज 5 नवंबर को उनकी पुण्यतिथि है।

हेमू का जन्म 1501 ईस्वी में राजस्थान के अलवर क्षेत्र में राजगढ़ के निकट माछेरी ग्राम में के एक साधारण परिवार में हुआ था। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि हेमू बिहार के सासाराम के रहने वाले थे। साधारण परिवार में जन्म लेकर एक व्यापारी से वजीर (प्रधानमंत्री) और सेनापति होते हुए उन्होंने दिल्ली के ताज तक का सफर उन्होंने अपने पराक्रम से हासिल किया।

हेमू ने अपने जीवन में 22 लड़ाइयाँ लड़ीं और विजयी रहे। आगे चलकर उन्होंने ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि धारण की। हेमू का उद्भव ऐसे समय में हुआ, जब हिंदुस्तान में मुगल एवं अफगान दिल्ली की सत्ता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। वे दिल्ली की सत्ता हासिल करने में सफल रहे, लेकिन यह अधिक समय तक कायम नहीं रही। भारतीय इतिहास की यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

हेमू की कहानी शुरू होती है व्यापार से। उनका परिवार किराने का काम करता था। हेमू जब बड़े हुए तो वे भी अपने परिवार के व्यवसाय शामिल हो गए। अकबर के जीवनीकार अबुल फ़ज़ल ने उन्हें फेरीवाला कहा है, जो रेवाड़ी की गलियों में नमक बेचा करते थे। उन दिनों ईरान-इराक से दिल्ली के मार्ग पर रिवाड़ी महत्वपूर्ण नगर था। उन्होंने शेरशाह की सेना को रसद और जरूरी सामग्री पहुँचानी शुरू कर दी थी।

हेमू में युद्ध में काम आने वाले शोरा भी बेचने लगे थे। इसके कारण वे शेरशाह सूरी के बेटे इस्लाम शाह की नजर में आ गए। आगे चलकर वे शेरशाह के विश्वासपात्र बन गए। शेरशाह की 22 मई 1545 को मौत हो गई। उसके बाद इस्लाम शाह ने हेमू को शानाये मण्डी, दरोगा-ए-डाक चौकी तथा प्रमुख सेनापति के साथ-साथ अपना सलाहकार बना दिया। यह स्थान ब्रह्मजीत गौड़ नाम के एक ब्राह्मण को हासिल था।

सन 1552 में इस्लाम शाह की मौत हो गई। इस्लाम शाह की मौत के बाद उसके दो साल के बेटे फिरोज खान को शासक बनाया गया, लेकिन उसके मामा मुबारक शाह उर्फ आदिल शाह ने उसकी हत्या कर दी। भोग-विलास में डूबे आदिल शाह के समय हर तरफ अराजकता फैल गई। इसके बाद आदिल शाह ने हेमू को प्रधानमंत्री तथा अफगान सेना का मुख्य सेनापति बना दिया।

इस बीच बाबर का बेटा हुमायूँ 1555 में भारत लौटा और दिल्ली पर हमला कर दिया। आदिल शाह ने हेमू को लड़ाई के लिए भेजा और खुद चुनार भाग गया। अब सूरी वंश का चार भागों में बँट गया था, जिसका एक हिस्सा आदिल शाह के अंतर्गत था। 26 जनवरी 1556 को हुमायूँ की मौत हो गई और अकबर को गद्दी मिली। उस समय अकबर की उम्र 13 साल थी। बैरम खाँ को उसका अभिभावक नियुक्त किया गया।

हेमू ने इसे एक महत्वपूर्ण मौका माना। उन्होंने आगरा के मुगल गवर्नर इसकंदर खाँ उजबेग को पराजित किया शहर को कब्जे में ले लिया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली का रूख किया। दिल्ली का मुगल गवर्नर तारीफ बेग खाँ अत्यधिक घबराकर बैरम खाँ से सेना भेजने का आग्रह किया। सेनापति पीर मोहम्मद शेरवानी के नेतृत्व में आई मुगल सेना को हेमू ने 6 अक्तूबर 1556 को तुगलकाबाद में बुरी तरह परास्त किया।

इस तरह 7 अक्तूबर 1556 को हेमू ने दिल्ली सिंहासन पर कब्जा कर लिया। इस तरह से एक भारत के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। उनका दिल्ली के पुराने किले, जिसे पांडव निर्मित किला कहा जाता है, में राज्याभिषेक हुआ। दिल्ली की गद्दी बैठते ही उन्होंने कई घोषणाएँ कीं, जिनमें से एक गोहत्या पर प्रतिबंध भी था।

सम्राट के रूप में हेमचंद्र ने घोषणा की कि उनके राज्य में गोहत्या पर प्रतिबंध होगा और जो इस आज्ञा का पालन नहीं करेगा, उसका सिर काट लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने दूसरी घोषणा भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों को हटाने की की। उन्होंने शासन प्रशासन से लेकर वाणिज्य तक, हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए। अब हेमू का अगला लक्ष्य मुगलों और अफगानों को भारत से खदेड़ने का था। उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी।

दिल्ली में हार का समाचार सुनकर बैरम खाँ बौखला गया। उस समय पंजाब के जालंधर में बैरम ख़ाँ अकबर के साथ था। अकबर वापस काबुल जाना चाहता था, लेकिन बैरम खाँ इस हार को पचा नहीं पा रहा था। हार की जानकारी देने टारडी ख़ाँ दिल्ली से भाग कर अकबर के ख़ेमें में गया तो बैरम खाँ ने उसका सिर काट दिया। बैरम खाँ ने कहा कि इससे लोगों को सबक मिलेगा कि युद्ध से भागने का क्या अंजाम होता है।

उधर हेमू को पता चला कि बैरम खाँ हमले की योजना बना है तो उन्होंने अपनी तोपें पानीपत की तरफ भेज दीं। बैरम ख़ाँ ने भी अली क़ुली शैबानी के नेतृत्व में 10,000 सेना पानीपत की भेज दिया। हेमू की सेना में 30,000 अनुभवी घुड़सवार और 500 से 1500 के बीच हाथी थे। हाथियों की सूढ़ों में तलवारें और बरछे बँधे हुए थे और उनकी पीठ पर युद्ध कौशल में पारंगत तीरंदाज़ सवार थे।

6 नवंबर 1556 की पानीपत की दूसरी लड़ाई के नाम से मशहूर इस लड़ाई में सिर में कोई कवच नहीं पहना था। वे हाथी पर बैठकर सेना का लगातार जोश बढ़ा रहे थे। यह लड़ाई बहुत भयंकर थी। क्षत्रियों के नेतृत्व में यह हेमू के हमले से मुगल सेना बिखर गई थी। बदायूँनी ने अपनी किताब ‘मुंतख़ब-उत-त्वारीख़’ में इसका जिक्र किया था। हेमू अपनी जीत के करीब थे।

इस बीच क़ुली शैबानी के सैनिक हेमू की सेना पर लगातार तीरों की बौछार कर रहे थे। इन्हीं में से एक तीर उनकी आँख में जा धँसा। हरबंस मुखिया अपनी किताब ‘द मुग़ल्स ऑफ़ इंडिया’ में मोहम्मद क़ासिम फ़ेरिश्ता के हवाले से लिखते हैं कि तीर लगने पर भी हेमू ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी आँख तीर निकाला और रूमाल से ढ़क कर लड़ना जारी रखा।

हालाँकि, अत्यधिक खून बहने के कारण हेमू बेहोश होकर अपनी हाथी के हौदे में गिर गए। इस बीच क़ुली शैबानी ने बिना महावत के एक हाथी को घूमते हुए देखा तो उसने एक व्यक्ति को उस पर चढ़कर देखने के लिए कहा। जब वह व्यक्ति हाथी पर चढ़कर देखा तो उसमें एक व्यक्ति बेहोश दिखा। वह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि हेमू थे। इसके बाद शैबानी उस हाथी को हाँक कर अकबर के पास ले गया।

इसकी जानकरी मिलते ही हेमू की सेना के हताशा छा गई और मुगल सेना खुशियाँ मनाने लगी। उधर, हेमू को जंजीरों से बाँधकर अकबर के सामने पेश किया। बैरम खाँ ने अपनी तलवार से हेमू का सिर काट दिया। उनका सिर काबुल भेजा गया और धड़ को दिल्ली दरवाजे पर लटका दिया गया। हेमू के पुराने घर माछेरी पर आक्रमण कर लूटमार की गई। उनके 80 वर्षीय पिता पूरनदास के साथ-साथ कई रिश्तेदारों को इस्लाम में धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा गया।

जब सम्राट हेमचंद्र के परिजन और रिश्तेदार नहीं माने तो उनका कत्ल कर दिया गया। इससे एक मीनार बनाई गई। इस मीनार की पेंटिंग अकबरनामा में भी है। इस तरह हेमू एक शूरवीर की तरह युद्ध क्षेत्र में वीरगति को प्राप्त हो गए और 29 दिन के उनके शासन का अंत हो गया। विन्सेंट ए स्मिथ अकबर की जीवनी में लिखते हैं, “क्षत्रिय (राजपूत) नहीं होने के बावजूद हेमू ने युद्ध के मैदान पर आखिरी साँस ली।”

सम्राट हेमचंद्र की समाधि वक्फ बोर्ड के पास

हरियाणा के पानीपत में जहाँ हेमू का सिर काटा गया था, वहाँ एक समाधि बना दी गई। सौदापुर गाँव में स्थित हेमू की यह समाधि सदियों तक उपेक्षित रही। इस बीच प्रवासी मुस्लिमों ने वहाँ एक दरगाह बना दिया। सन 1990 तक यह जगह भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) के पास थी। सन 1990 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने समाधि वक्फ बोर्ड को दे दिया।  

जिस जगह सम्राट हेमू की समाधि है, वह पूरा क्षेत्र 10 एकड़ का है। चौटाला ने उन सारी जमीनों को वक्फ को दे दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय हरियाणा वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मेवात क्षेत्र के एक मुस्लिम विधायक थे। उस विधायक पर कुछ लोगों से पैसे लेकर सम्राट हेमचंद्र की समाधि पर अतिक्रमण की अनुमति देने के आरोप लगे थे। इसको लेकर दोनों समुदायों में विवाद चल रहा है।

CTET की परीक्षा में 60% भी नहीं नंबर, फिर भी बने सरकारी मास्टर: बिहार में शिक्षकों की बहाली में घोटाला, 4000 फर्जी मिले… 24 हजार की नौकरी पर खतरा

बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के ऐसे वीडियो आए दिन वायरल होते रहते हैं जो उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं। अब शिक्षा विभाग की जाँच से जो तथ्य उभरकर सामने आए हैं, उससे लगता है कि ये शिक्षक फर्जीवाड़े के उस्ताद हैं। इस जाँच में करीब 4000 शिक्षक फर्जी पाए गए हैं।

लगभग 24000 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनके कई प्रमाण-पत्र पहली जाँच में फर्जी पाए गए हैं। इनके दस्तावेजों की दोबारा से जाँच होगी। वैसे जाँच के दायरे में करीब 42 हजार वे शिक्षक हैं जिनकी काउंसलिंग नहीं हो पाई है।

रिपोर्टों के अनुसार जो 4000 शिक्षक फर्जी पाए गए हैं, उनमें से करीब 80 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने CTET की परीक्षा में तय मापदंड से कम नंबर पाने के बावजूद नौकरी हासिल कर ली थी। CTET की परीक्षा में कम से कम 60% नंबर हासिल करना अनिवार्य था।

इसके अलावा 20% ने दिव्यांगता, जाति, निवास, खेल सहित अन्य प्रमाण पत्र फर्जी पेश किए थे। अब इन शिक्षकों के खिलाफ सरकार कार्रवाई की तैयारी कर रही है। इनसे दिए गए वेतन की वसूली भी की जाएगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 से 13 सितंबर के बीच सक्षमता परीक्षा पास कर चुके कुल 1, 87,000 अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग होनी थी। लेकिन 42000 शिक्षकों की काउंसिलिंग नहीं हो पाई। इनमें से 3000 काउंसिलिंग के दौरान गैर हाजिर थे। 10,000 शिक्षकों का बायोमैट्रिक सत्यापन नहीं हो पाया था। अब इन सभी की काउंसिलिंग छठ के बाद होगी।

जिन 24 हजार शिक्षकों की नौकरी पर खतरा बताया जा रहा है, शुरुआती जाँच में उनके दस्तावेजों में भी विसंगतियाँ मिली हैं। इनके प्रमाण पत्रों की दोबारा जाँच की जाएगी। इस दौरान फर्जीवाड़ा मिलने पर इन्हें बर्खास्त कर इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक योगेंद्र सिंह ने बताया है कि सभी शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जाँच के बाद सभी रिकॉर्ड सर्विस बुक में दर्ज किए जाएँगे। फिर डिजिटल सर्विस बुक बनाकर इसे ऑनलाइन कर दिया जाएगा।

इसके अलावा सीतामढ़ी जिले में जाँच के दौरान 7 शिक्षक फर्जी पाए गए हैं। इन शिक्षकों पर जालसाजी करने और सबूत मिटाने जैसे आरोपों के तहत केस दर्ज किया गया है। जाँच के दौरान इन शिक्षकों द्वारा लगाए गए प्रमाण पत्रों में गंभीर खामियाँ मिली थी। सत्यापन के लिए अधिकारियों ने इन्हे कई बार नोटिस दे कर अपने ओरिजनल प्रमाण पत्रों को जमा करने के लिए कहा था। लेकिन बार-बार रिमाइंडर के बावजूद इन शिक्षकों ने अपने कागजात जमा नहीं किए थे।

इंजीनियरों को सैलरी के नाम पर ‘चूरन’, करोड़ों में CEO का पैकेज: जो IT कंपनी कुछ महीने पहले तक थी मीम मेटेरियल, वहाँ 13000 पुराने कर्मचारी वापस लौटे

ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब आईटी कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) सोशल मीडिया में मीम मेटेरियल बनी हुई थी। कैंपस हायरिंग में इंजीनियरों को महज 2.5 लाख सालाना पैकेज ऑफर करने के बाद उस पर चुटकुले बन रहे थे। वहीं कंपनी के सीईओ करोड़ों का पैकेज ले रहे थे। लेकिन अब लगता है कि इस कंपनी के दिन बदल चुके हैं।

13000 पुराने कर्मचारियों ने पिछले कुछ महीनों में कॉग्निजेंट में वापसी की है। सीईओ रवि कुमार की प्रशंसा हो रही है। कंपनी में ग्रोथ देखने को मिल रही है। ऐसा लगता है कि चुनौतियों से पार पाकर वह स्थिरता की ओर लौट गई है। 3800 कर्मचारियों को तो कंपनी ने तीसरी तिमाही में ही जोड़ा है।

कंपनी के तीसरी तिमाही में बेहतर होते परिणामों को देख रवि कहते हैं, “हमारी आस-पास चर्चा बहुत अधिक है… आप लिंक्डइन ट्रैफिक भी देख सकते हैं जो कंपनी के बारे में बात कर रहे हैं। कंपनी का जादू वापस चल गया है। जो पहले कॉग्निजेंट में काम कर चुके हैं और अब वापस आना चाहते हैं, हम अगले साल से बड़े पैमाने पर कैंपस में भी जा रहे हैं।”

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी जतिन दलाल ने कहा कि कंपनी अपनी भर्ती जारी रखने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप इस तिमाही में वॉल्यूम वृद्धि को देखें तो यह निरंतर वृद्धि में 3.5 फीसदी है। अगर हम हर तिमाही में रेवेन्यू में वृद्धि दर्ज कर रहे हैं तो हमें बाजार से शीर्ष प्रतिभाओं तक पहुंचने और उन्हें नियुक्त करने की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद लेकर खुद को बेहतर बनाने में प्रयासरत है। जब कंपनी के सीईओ से पूछा गया कि एआई कैसे उनके बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट परअसर डालता है तो उन्होंने बताया कि चूँकि एआई एक अनूठी प्रोद्योगिकी है इसलिए ये अलग-अलग सेगमेंट में कार्यों को प्रभावित करती है।

जानकारी के अनुसार कॉग्निजेंट में प्रतिवर्ष 2 मिलियन लाइन का कोड एआई एल्गोरिदम और प्लेटफॉर्म द्वारा लिखा जाता है। कुमार ने यह बताते हुए माना कि भविष्य एआई का असर कुछ नौकरियों पर पड़ सकता है, लेकिन उनके अनुसार इससे और अवसर पैदा होंगे क्योंकि हर प्रक्रिया में एआई एजेंट होंगे, और जब वे एजेंट मानवीय प्रयासों को स्वचालित करेंगे, तो नौकरियाँ पैदा होंगी।

बता दें कि कंपनी ने पिछले साल के अंत में AI और GenAI में बिलियन डॉलर से अधिक निवेश की घोषण की थी और उसके बाद पता चला था कि उनके पास 225 प्रोजेक्ट काम करने को थे। अब कंपनी ने तीसरी तिमाही में 5 बिलियन डॉलर का राजस्व दर्ज किया जो कि पिछले साल की तुलना में 3% ज्यादा है।

छिंदवाड़ा के गणेश मंदिर में घुस मूर्तियों को तोड़ने लगा मोहम्मद तौफीक, रोकने पर महिला को दी जान से मारने की धमकी: हैदराबाद के मंदिर में भी तोड़फोड़

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और हैदराबाद से मंदिरों में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। दोनों ही मामलों में पुलिस ने जाँच कर रही है। छिंदवाड़ा में मोहम्मद तौफीक को पकड़ा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव वार्ड नंबर 7-8 में मौजूद भगवान गणेश का मंदिर आसपास के हिन्दुओं की श्रद्धा का केंद्र है। रविवार (3 नवंबर 2024) को मोहम्मद तौफीक इस मंदिर में घुस गया। उसने मूर्तियों को तोडना शुरू कर दिया। घटना की चश्मदीद एक बुजुर्ग महिला ने जब तौफीक को रोका तो उन्हें जान से मार डालने की धमकी दी। इसके बाद महिला ने शोर मचा कर मोहल्ले वालों को जमा किया।

बुजुर्ग महिला की आवाज सुन आसपास के लोग जमा हुए। उन्होंने मोहम्मद तौफीक को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। हिन्दू संगठनों ने घटना में एक अन्य युवक के शामिल होने का आरोप लगाया है। तौफीक का चालान कर दिया गया है। दूसरे आरोपित की संलिप्तता के आरोपों की जाँच चल रही है। विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल ने इस घटना पर आक्रोश जताते हुए सोमवार (4 नवंबर) को बंद रखा। स्थानीय व्यापारियों ने इसका समर्थन करते हुए दुकानें बंद रखी।

हैदरबाद में भी मंदिर बना निशाना

छिंदवाड़ा की ही तरह हैदराबाद में भी एक हिन्दू मंदिर को निशाना बनाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना शमशाबाद के एयरपोर्ट कॉलोनी की है। मंगलवार (5 नवंबर) की सुबह जब श्रद्धालु पूजा-पाठ करने पहुँचे तो उन्होंने मंदिर को क्षतिग्रस्त हालात में पाया। मूर्तियों को तोड़ कर बिखेर दिया गया था। इस घटना से स्थानीय हिन्दुओं में रोष फ़ैल गया। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस फ़ौरन मौके पर पहुँची। स्थानीय लोगों को समझाबुझा कर शांत किया। अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आंध्र प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष विष्णु वर्धन रेड्डी ने इस घटना को शर्मनाक बताते हुए कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जिस देश में हिन्दू बहुसंख्यक हैं, वहाँ कॉन्ग्रेस शासित राज्य में ऐसी घटनाएँ हो रही हैं।

ऑपइंडिया के डोजियर के बाद Wikipedia को भारत सरकार का नोटिस, ‘राजनीतिक पूर्वाग्रह’ से ग्रसित बताया: हाई कोर्ट ने खुद को ‘इनसाइक्लोपीडिया’ कहने पर प्लेटफार्म से पूछे सवाल

ऑपइंडिया द्वारा विकिपीडिया के भारत विरोधी रुख पर विस्तृत डोजियर जारी करने के कुछ दिनों बाद भारत सरकार ने इस विदेशी प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने ANI को सरकार का प्रोपेगेंडा टूल बताने के मामले में विकिपीडिया को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि उसे खुद को विश्वकोश नहीं कहना चाहिए।

सरकार द्वारा जारी नोटिस में विकिपीडिया पर प्रदर्शित बड़े पैमाने पर अशुद्धियों और पूर्वाग्रह के कई उदाहरणों को उजागर किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि लोगों के एक छोटे समूह के पास प्लेटफॉर्म के कंटेंट का संपादकीय नियंत्रण है। सरकार ने पूछा कि विकिपीडिया को मध्यस्थ के बजाय प्रकाशक के रूप में क्यों नहीं माना जाना चाहिए।

ऑपइंडिया ने विकिपीडिया द्वारा गलत सूचना परोसने और भारत के खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित पूर्वाग्रह पर एक विस्तृत डोजियर जारी किया है। इस इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है। ऑपइंडिया के शोध में पता चला है कि विकिपीडिया ने मुट्ठी भर लोगों को असीमित शक्तियाँ दे रखी हैं, जिन्हें ‘प्रशासक’ कहा जाता है।

पूरी दुनिया में विकिपीडिया के केवल 435 सक्रिय प्रशासक हैं। इन प्रशासकों के पास संपादकों पर प्रतिबंध लगाने, स्रोतों को ब्लैकलिस्ट करने, योगदानकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाने और लेखों पर किए जाने वाले संपादनों को वापस लेने का निर्णय लेने की शक्ति है।

ऑपइंडिया द्वारा डोजियर जारी करने के तुरंत बाद एक अन्य वामपंथी प्लेटफॉर्म फेसबुक ने डोजियर को प्रतिबंधित कर दिया, ताकि इसके दर्शकों की संख्या सीमित हो सके। फेसबुक पर अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप करने और एक खास विचारधारा के राजनीतिक हित को आगे बढ़ाने के कई आरोप हैं।

ANI को ‘सरकार का प्रोपेंगेडा टूल’ बताने पर कोर्ट में विकिपीडिया

वहीं, भारतीय मीडिया एजेंसी ANI को विकिपीडिया की वेबसाइट पर सरकार का प्रोपेगेंडा टूल बताने के मामले में कोर्ट में सुनवाई चल रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (1 नवंबर) को एएनआई के बारे में विकी पेज पर किए गए अपमानजनक संपादनों को हटाने की माँग में बाधा डालने के लिए आड़े आने पर कड़ी फटकार लगाई।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि विकिपीडिया को अपमानजनक संपादनों का बचाव करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि वह केवल मध्यस्थ होने का दावा करता है। जज ने कहा, “यदि आप मध्यस्थ हैं तो आपको क्यों परेशानी हो रही है? यदि किसी और ने संपादन किया है और वह बिना किसी आधार के है तो उसे हटा दिया जाता है।”

कोर्ट ने आगे कहा, “यदि आप केवल एक प्लेटफॉर्म हैं और किसी और ने उन पर चीजें लिखी हैं, लेकिन वे अदालत में आने के लिए तैयार नहीं हैं तो मुझे आपकी बात क्यों सुननी चाहिए। मैं केवल यह देखूँगा कि आपके विश्वकोश में दी गई राय सही तस्वीर पेश नहीं करती है, क्योंकि लेख (हाइपरलिंक स्रोत) का सही प्रतिनिधित्व नहीं है।”

कोर्ट ने कहा कि यह ‘परेशान करने वाला’ है कि विकिपीडिया खुद को एक विश्वकोश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि वह दावा करता है कि वह इस मंच पर लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। जज ने एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका जैसे प्रकाशन का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्वकोश आमतौर पर प्रामाणिकता के साथ आते हैं।

कोर्ट ने पूछा, “विश्वकोश कहने के बाद क्या आप यह कह सकते हैं कि आप एक्स-वाई द्वारा मेरे विश्वकोश पर कही गई बातों का बिना इसकी सामग्री की पुष्टि किए मैं इसका समर्थन नहीं करता। ‘विकिपीडिया, मुक्त विश्वकोश’ यह आपका पहला वाक्य है, इससे आपका क्या मतलब है?”

आगरा के जिस पार्क से ताजमहल को निहारते थे सैलानी, उसकी 6 बीघा जमीन एक किसान ने ट्रैक्टर से जोत दी; बाड़ लगा प्रवेश किया प्रतिबंधित: जानिए क्यों

आगरा के ताजमहल के पास स्थित 11 सीढ़ी पार्क विवादों के घेरे में है। इस जगह से सैलानी सूर्यास्त के समय ताजमहल को निहारा करते हैं। एक स्थानीय किसान ने इस पार्क के एक बड़े हिस्से को निजी जमीन बताते हुए ट्रैक्टर से जोत दिया है। साथ ही बाड़ लगाकर सैलानियों का प्रवेश भी प्रतिबंधित कर दिया है।

इस किसान का नाम मुन्ना लाल है। उनका कहना है कि पार्क के अंदर 6 बीघा जमीन उनकी निजी भूमि है। इसको लेकर वे लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने और इस पर अधिकार हासिल करने का भी दावा कर रहे हैं। आगरा की कमिश्नर ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 11 सीढ़ी पार्क की जमीन पर दावा करने वाले किसान मुन्ना लाल, कछपुरा के नगला देवजीत गाँव के मूल निवासी हैं। कथित तौर पर इस पार्क की करीब 6 बीघा जमीन पर कभी मुन्ना लाल के चाचा और पिता खेती किया करते थे। जमीन के कागजातों पर भी उन्ही के नाम हैं। साल 1976 की सीलिंग में यह जमीन मुन्ना लाल के परिवार के हाथ से निकल गई। इसके बाद जमीन वापस पाने के लिए मुन्ना लाल ने 40 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी।

मुन्ना लाल का कहना है कि साल 1998 और 2020 के जिला न्यायालय के दस्तावेजों में इस जमीन का ट्रांसफर ऑफ ओनरशिप उनके पक्ष में दर्ज हुआ। साल 2020 में SDM ने भी इस जमीन पर मुन्ना लाल के स्वामित्व की पुष्टि की थी। साथ ही यह जमीन रेवेन्यू रिकॉर्ड में भी अपने नाम पर दर्ज होने का वे दावा कर रहे हैं।

मुन्ना लाल का कहना है कि इस जमीन पर उनके स्वामित्व का अदालती आदेश है। उन्होंने ट्रैक्टर से पार्क में अपने कथित हिस्से को न सिर्फ जुतवा डाला है, बल्कि उसकी घेराबंदी भी कर दी है। इस क्षेत्र में अब आम लोगों का आना-जाना प्रतिबंधित है। आगरा की कमिश्नर ऋतु माहेश्वरी का कहना है कि जमीन आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) के अधीन आती है। इस पार्क की देखरेख का भी जिम्मा ADA का है। उन्होंने मुन्ना लाल के दावों की जाँच के आदेश जारी किए हैं। बताते चलें कि साल इसी पार्क में साल 2023 में ताज महोत्सव का आयोजन हुआ था। यहीं 1997 में ग्रीक संगीतकार यन्नी का कॉन्सर्ट भी हुआ था।

हर निजी संपत्ति ‘सामुदायिक संसाधन’ नहीं, सरकार भी नहीं ले सकती: प्राइवेट प्रॉपर्टी पर सुप्रीम कोर्ट ने खींची नई लक्ष्मण रेखा, जानिए अनुच्छेद 39(B) की अपनी ही व्याख्या क्यों बदली

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मंगलवार (5 नवंबर 2024) को कहा कि अनुच्छेद 39(B) के तहत सभी निजी संपत्तियों को ‘सामुदायिक संसाधन’ नहीं माना जा सकता, जिसे सरकार जब चाहे ‘सामान्य भलाई’ के लिए ले ले। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक संसाधन के लिए किसी निजी संपत्ति को सार्वजनिक उपयोग योग्य बनाने के लिए पहले उसे कुछ परीक्षणों को पूरा करना होगा।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस हृषिकेश रॉय, बीवी नागरत्ना, सुधांशु धूलिया, जेबी पारदीवाला, मनोज मिश्रा, राजेश बिंदल, सतीश चंद्र शर्मा और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह वाली संविधान पीठ ने इस पर फैसला सुनाया। इस मामले में कुल तीन फैसले लिखे गए हैं, जिसमें CJI चंद्रचूड़ ने 6 अन्य न्यायाधीशों के साथ बहुमत से यह फैसला सुनाया।

वहीं, न्यायमूर्ति नागरत्ना ने बहुमत से आंशिक रूप से सहमति व्यक्त की और जस्टिस धूलिया ने इस पर अपनी असहमति जताई। CJI चंद्रचूड़ की बहुमत वाली पीठ पीठ ने कहा, “हम मानते हैं कि किसी व्यक्ति के स्वामित्व वाले प्रत्येक संसाधन को केवल इसलिए समुदायिक संसाधन नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह भौतिक आवश्यकताओं की शर्त को पूरा करता है।”

कोर्ट ने कहा, “अनुच्छेद 39(बी) के अंतर्गत आने वाले संसाधन के बारे में जाँच विवाद-विशिष्ट होनी चाहिए और संसाधन की प्रकृति, विशेषताओं, समुदाय की भलाई पर संसाधन के प्रभाव, संसाधन की कमी और निजी खिलाड़ियों के हाथों में ऐसे संसाधन के केंद्रित होने के परिणामों जैसे कारकों की एक गैर-संपूर्ण सूची होनी चाहिए। इस न्यायालय द्वारा विकसित सार्वजनिक ट्रस्ट सिद्धांत भी उन संसाधनों की पहचान करने में मदद कर सकता है, जो समुदाय के भौतिक संसाधन के दायरे में आते हैं।”

वहीं, अपना फैसला पढ़ते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि उन्होंने कुछ मुद्दों पर सीजेआई के नेतृत्व वाले बहुमत से सहमति जताई थी और जस्टिस धूलिया के फैसले के जवाब में कुछ राय लिखी। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “निजी स्वामित्व वाले भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण वाले संसाधनों को सामुदायिक संसाधनों में किस तरह बदला जाए, जिससे आम लोगों की भलाई के लिए सर्वोत्तम तरीके से किया जा सके, यही मेरे फैसले का सार है।”

फैसले पर असहमति जताते हुए जस्टिस धूलिया ने कहा कि भौतिक संसाधनों को कैसे नियंत्रित एवं वितरित किया जाए, यह देखना संसद का विशेषाधिकार है। बता दें कि 9 सदस्यीय संविधान पीठ ने 2 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दरअसल, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए दो विरोधी विचारों के संदर्भ में उत्पन्न हुआ।

क्या है मामला?

इस मामले में मुख्य याचिका मुंबई स्थित संपत्ति स्वामियों के संघ (POA) द्वारा 1992 में दायर की गई थी। पीओए ने महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) अधिनियम के अध्याय VIII-A का विरोध किया था। यह कानून सरकार को उन भवनों और जमीन, जिस पर वे निर्मित हैं, उसे अधिग्रहित करने का अधिकार देता है, यदि उसमें रहने वाले 70% लोग जीर्णोद्धार के लिए ऐसा अनुरोध करते हैं।

अध्याय VIIIA में सरकार को संबंधित परिसर के लिए मासिक किराए के सौ गुना के बराबर दर पर भुगतान की आवश्यकता होती है। अधिनियम की धारा 1A में कहा गया है कि इसे संविधान के अनुच्छेद 39(बी) को लागू करने के लिए बनाया गया है। अधिनियम। की धारा 1A को 1986 के संशोधन के माध्यम से शामिल किया गया है। इसमें पूरा संदर्भ संविधान के अनुच्छेद 39(बी) की व्याख्या से संंबंधित था।

कर्नाटक राज्य बनाम रंगनाथ रेड्डी एवं अन्य (1978) में दो निर्णय दिए गए थे। न्यायमूर्ति कृष्ण अय्यर द्वारा दिए गए निर्णय में कहा गया था कि समुदाय के भौतिक संसाधनों में सभी संसाधन शामिल हैं – प्राकृतिक और मानव निर्मित, सार्वजनिक और निजी स्वामित्व वाले। न्यायमूर्ति उंटवालिया द्वारा दिए गए दूसरे निर्णय में अनुच्छेद 39(बी) के संबंध में कोई राय व्यक्त करना आवश्यक नहीं समझा गया।

हालाँकि, निर्णय में कहा गया कि अधिकांश जज न्यायमूर्ति अय्यर द्वारा अनुच्छेद 39(बी) के संबंध में लिए गए दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं। न्यायमूर्ति अय्यर द्वारा लिए गए दृष्टिकोण की पुष्टि संजीव कोक मैन्युफैक्चरिंग बनाम भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (1982) के मामले में संविधान पीठ ने की थी। मफतलाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनाम भारत संघ के मामले में एक निर्णय द्वारा भी इसकी पुष्टि की गई थी।

वर्तमान मामले में सात न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 39(बी) की इस व्याख्या पर इसे नौ जजों की पीठ के पास पुनर्विचार किए भेज दिया। पीठ ने कहा- “हमें इस व्यापक दृष्टिकोण को साझा करने में कुछ कठिनाई है कि अनुच्छेद 39(बी) के तहत समुदाय के भौतिक संसाधन निजी स्वामित्व वाली चीज़ों को कवर करते हैं।” तदनुसार, मामले को 2002 में नौ न्यायाधीशों की पीठ को भेजा गया था।

अपीलकर्ताओं का तर्क

अपीलकर्ताओं का तर्क यह था कि अनुच्छेद 39(बी) के तहत ‘भौतिक संसाधन’ शब्द की व्याख्या किसी भी ऐसे संसाधन के रूप में की जानी चाहिए जो समुदाय की व्यापक भलाई के लिए वस्तुओं या सेवाओं के माध्यम से धन पैदा करने में सक्षम हो। यदि कानून का उद्देश्य ‘भौतिक संसाधनों’ के अर्थ में निजी संसाधनों को शामिल करना था तो मसौदा तैयार करने वाले ने भविष्य में किसी भी संभावित गलत व्याख्या से बचने के लिए ऐसा किया होता।

वहीं, भारत सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि अनुच्छेद 39(बी) की व्याख्या निरंतर विस्तारित हो रहे संवैधानिक सिद्धांतों के दृष्टिकोण से होनी चाहिए, न कि किसी विचारधारा से। संसाधन को समझने के संदर्भ में केंद्र सरकार ने आग्रह किया कि यह समुदाय की गतिशील क्रिया है, जो ‘भौतिक संसाधन’ के अर्थ को आकार देती हैं।

केंद्र ने कहा कि एक समुदाय में अलग-अलग व्यक्तियों के बीच अलग-अलग अंतःक्रियाएँ और व्यापारिक लेन-देन होते हैं। यह एक समुदाय की कुल संपत्ति का योग बनाता है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपने आर्थिक अंतःक्रियाओं के माध्यम से योगदान देता है। इस प्रकार अनुच्छेद 39बी के तहत ‘संसाधन’ का अर्थ एक सामान्य आर्थिक आधार है।

संविधान के अनुच्छेद 39(B) को लेकर असमंजस

इससे संबंधित याचिकाएँ सबसे पहले 1992 में आई थीं। इसके बाद साल 2002 में इसे नौ जजों की पीठ के पास भेज दिया गया था। लगभग 22 साल बाद इस पर फैसला आया है। इसमें तय किया जाने वाला मुख्य प्रश्न यह है कि क्या अनुच्छेद 39(बी) (राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में से एक) में कही गई बातों को लेकर है।

राज्य के नीति निर्देश सिद्धांतों से जुड़ी संविधान के अनुच्छेद 39 (बी) में कहा गया है कि सरकार को सामुदायिक संसाधनों को सामान्य हित यानी सार्वजनिक हित के लिए निष्पक्ष रूप से साझा करने के लिए नीतियाँ बनानी चाहिए। इसमें इस पर सवाल था कि समुदाय के भौतिक संसाधन में निजी स्वामित्व वाले संसाधन शामिल हैं और क्या सरकार किसी भी निजी संपत्ति को सार्वजनिक हित के नाम पर ले सकती है?

अनुच्छेद 39(बी) में इस प्रकार लिखा है: “राज्य, विशेष रूप से, अपनी नीति को इस प्रकार निर्देशित करेगा कि – (बी) समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार वितरित किया जाए कि यह सामान्य भलाई के लिए सर्वोत्तम हो।”

सीरियल ब्लास्ट की साजिश, कोल्लम कलेक्ट्रेट में खड़ी जीप को टिफिन बम से उड़ाया… अब्बास, करीम और दाऊद को केरल की अदालत ने ठहराया दोषी

केरल के कोल्लम में 2016 में हुए एक आईईडी ब्लास्ट में तीन लोग दोषी ठहराए गए हैं। इनके नाम हैं अब्बास अली, शमसून करीम राजा और दाऊद सुलेमान। एक अन्य को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।

कोल्लम की जिला अदालत ने सोमवार (4 नवंबर 2024) को यह फैसला सुनाया। इन सभी को मंगलवार (5 नवंबर) को सजा सुनाई जाएगी। इस घटना में कोल्लम कलेक्ट्रेट में खड़ी एक जीप को उड़ा दिया गया था। जांच से यह बात भी सामने आई थी कि पूरे राज्य में सिलसिलेवार धमाकों की साजिश रची गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धमाका 15 जून 2016 को किया गया था। टिफिन बॉक्स में आईईडी बम को छिपाकर कलेक्ट्रेट परिसर में खड़ी जीप में रखा गया था। घटनास्थल के पास ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का कोर्ट भी था। सुबह 10:45 पर हुए इस धमाके की वजह से अदालत आया एक 61 वर्षीय बुजुर्ग घायल हो गया। पुलिस ने ब्लास्ट वाली जगह से 15 बैटरी, 17 फ्यूज, तार और एक बैग बरामद किया था।

जाँच के बाद पुलिस ने कुल 5 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। इनमें दोषी करार दिए गए तीन लोगों के अलावा मोहम्मद अयूब और शमशुद्दीन भी थे। इनके आतंकी संगठन अल कायदा से जुड़े होने की बात भी सामने आई थी। आरोपितों के खिलाफ UAPA एक्ट, विस्फोटक अधिनियम व हत्या के प्रयास की धाराओं सहित अन्य सेक्शनों में कार्रवाई की गई थी। बाद में मोहम्मद अयूब सरकारी गवाह बन गया था।

दोषी करार दिए गए सभी लोग तमिलनाडु में मदुरै के निवासी हैं। पूछताछ में यह भी पता चला था कि केरल में सीरियल ब्लास्ट की साजिश रची जा रही थी। पुलिस ने साल 2019 में इस मामले में कोर्ट में चार्जशीट लगाई। साल 2023 में इस केस पर सुनवाई शुरू हुई। इस सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 63 गवाह पेश किए। इसके अलावा कोर्ट में 119 अलग-अलग कागजात व 24 अन्य सबूत भी रखे गए।

इस मामले की सुनवाई प्रधान सत्र न्यायाधीश जी गोपकुमार की अदालत में हुई। बचाव पक्ष ने भी दलीलें पेश की। इसके बाद सोमवार को अदालत ने 31 वर्षीय अब्बास अली, 33 साल के शमशुन करीम राजा और 27 साल के दाऊद सुलेमान को दोषी करार दिया। शमशुद्दीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।