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बधाई मेरे दोस्त… अमेरिका ने 132 साल बाद दोहराया इतिहास, राष्ट्रपति चुनाव जीतते ही एलन मस्क से लेकर आतंकवाद तक पर डोनाल्ड ट्रंप ने की मन की बात

अमेरिका का 47वाँ राष्ट्रपति चुने जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र ने बधाई संदेश दिया। ट्रंप के साथ अपनी पुरानी 4 तस्वीरें साझा करते हुए पीएम मोदी ने ट्रंप को अपना दोस्त बताया और कामना की कि वे लोग मिलकर भविष्य में भी काम करेंगे।

उन्होंने अपने संदेश में कहा, “मेरे मित्र डोनाल्ड ट्रंप को ऐतिहासिक चुनावी जीत पर हार्दिक बधाई। जैसा कि आप अपने पिछले कार्यकाल की सफलताओं को आगे बढ़ा रहे हैं, मैं भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए हमारे सहयोग को नवीनीकृत करने के लिए तत्पर हूँ। आइए हम सब मिलकर अपने लोगों की बेहतरी के लिए और वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए काम करें।”

डोनाल्ड ट्रंप की इस जीत के साथ ही सोशल मीडिया पर काफी मीम भी बनाकर शेयर किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक मीम कंगना रनौत ने अपने साझा किया है। मीम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह ट्रंप का चेहरा लगा है और सीएम योगी की जगह एलन मस्क का चेहरा लगा है। इस मीम को साझा करते हुए कंगना ने कहा कि ये मीम इंटरनेट पर सबसे बेस्ट है। वहीं अन्य यूजर्स भी इसी तरह के मीम शेयर करके लिबरलों की चुटकी ले रहे हैं।

बता दें कि ट्रंप की जीत से डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक जहाँ दुख में है वहीं ट्रंप ने जीत के बाद अपने समर्थकों में जोश भरा है। चुनाव जीतने के बाद ट्रंप की पहली स्पीच में उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने अमेरिका की जनता को धन्यवाद दिया और कहा कि वो अपनी बहर सांस तक अमेरिका के लोगों और उनके परिवार के लिए लड़ेंगे।

समर्थकों से अपने ऊपर हुए हमले को याद दिलाते हुए कहा- “भगवान ने मेरी जिंदगी किसी वजह से बचाई। और यह वजह है कि अपने देश को बचाना और अमेरिका को फिर से महान बनाना।” उन्होंने आश्वासन दिया कि वो अब सब ठीक कर देंगे और कहीं कोई युद्ध नहीं होगा। उन्होंने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी बात की और आतंकवाद को खत्म करने के वादे को भी याद रखा।

ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान एलन मस्क का भी जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि एलन मस्क को बहुत प्रेम करते हैं और उनके समर्थन के लिए आभार जताते हैं। उन्होंने कहा कि अब राष्ट्रपति बनकर वो अपने देश की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए काम करेंगे। उन्होंने अवैध माइग्रेशन को बंद करने और अमेरिकियों को अच्छी नौकरी देने के अपने वादे पर प्रतिबद्धता दिखाई।

गौरतलब है कि अमेरिकी के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने 270 का आँकड़ा पार करते हुए कमला हैरिस को मात दी और एक बार फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति पद को संभाला। ये अमेरिका के 132 साल के इतिहास में दूसरी बार हुआ है। उनसे पहले ग्रोवर क्लीवलैंड दो लगातार कार्यकाल वाले अमेरिकी राष्ट्रपति थे। वे पहली बार 1884 और फिर 1892 में राष्ट्रपति बने थे। मालूम हो कि ट्रंप की पार्टी के लिए इस जीत के साथ अमेरिका के उच्च सदन से भी खुशखबरी सामने आई है जहाँ पार्टी ने चार साल बाद सीनेट में अपनी संख्या बहुमत के पार कर ली है। इसी के साथ अब सदन में रिपब्लिकन पार्टी के 51 और डेमोक्रेट पार्टी के 49 सांसद हो गए हैं।

A (अर्नब) से Z (जुबैर) को बेल, दबाव गैंग से मुक्ति, जजों पर भरोसा… न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मतलब क्या, CJI चंद्रचूड़ ने प्वाइंट टू प्वाइंट समझाया

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने न्यायपालिका की असल आजादी क्या होती है, इसका मतलब हाल ही में समझा दिया। उन्होंने वापमंथी उमर खालिद को बेल ना मिलने पर उठने वाले सवालों का भी जवाब दे दिया। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी साफ़ कर दिया कि किसी जज के नेता के साथ दिखने से डील की बात करना गलत है और ऐसा नहीं होता।

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह सारी बातें अपनी सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के एक कायर्क्रम में कहीं। उन्होंने यहाँ न्यायपालिका की आजादी, उसके दिए फैसलों पर लोगों के सवाल और साथ ही कोलेजियम को लेकर भी बात की है।

क्या होती है न्यायपालिका की आजादी?

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने समझाया कि न्यायपालिका की असल आजादी का मतलब सिर्फ सरकार के दखल से ही बल्कि उन लोगों से भी है जो सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सहारे अपने नैरेटिव के अनुसार निर्णय न्यायपालिका से चाहते हैं। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “अब आप कई समूह ऐसे पाते हैं जिनका कहना है कि अगर आप मेरे पक्ष में निर्णय दोगे तब तो आप स्वतंत्र हैं और अगर आप मेरे पक्ष में निर्णय नहीं करते तो हम नहीं मानेंगे कि आप निष्पक्ष हो।”

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने बताया कि असल आजादी का मतलब यह है कि जज वह निर्णय देने में स्वतंत्र हो जो उसकी अंतरात्मा की आवाज उन्हें बताती है। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने इसका उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा, “जब हमने इलेक्टोरल बॉन्ड पर फैसला दिया तो कहा गया कि न्यायपालिका स्वतंत्र है लेकिन अगर कोई फैसला सरकार के पक्ष में जाए तो अप स्वतंत्र नहीं हो, ऐसा कहा जाता है। ये मेरी आजादी की परिभाषा नहीं है।”

गौरतलब है कि वामपंथी और लिबरल गैंग लगातार EVM और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर उनके मन मुताबिक़ फैसला ना देने पर चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ पर हमला बोलते रहे हैं। वह सुप्रीम कोर्ट पर भी प्रश्न उठाते रहे हैं। यही रुख इस गैंग ने राम मंदिर पर दिए गए निर्णय में भी अपनाया है। इस गैंग में पत्रकार, लेखक, फिल्मकार और वामपंथी नेता शामिल हैं। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने एक बयान से इस गैंग का ‘कैंसिल कल्चर’ का नैरेटिव ध्वस्त कर दिया है।

अर्नब से लेकर जुबैर को दी जमानत

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस दौरान जमानत को लेकर उठने वाले सवालों को भी शांत कर दिया। जब चीफ जस्टिस से पूछा गया कि जमानत मिलने को लेकर उनके क्या विचार हैं तो उन्होंने कहा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है, इसका निचली अदालतों अभी पूरी तरीके से पालन नहीं कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि मैंने A से लेकर Z तक सबको जमानत दी है। A से उनका मतलब पत्रकार अर्नब गोस्वामी जबकि Z से मतलब मोहम्मद जुबैर से था, जो कि लगातार फैक्टचेक के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाता रहता है। उन्होंने कहा कि यही उनकी सोच है।

उन्होंने कुछ आँकड़े भी बताए। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस दौरान बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान 21000 से अधिक जमानत के मामले निपटाए जा चुके हैं। उन्होंने यहाँ पर दिल्ली दंगों में अपनी भूमिका के कारण जेल में बंद उमर खालिद की जमानत पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि जमानत देते टाइम केस कितना लंबा चलेगा, आरोपित छूटने के बाद कहीं सबूतों से छेड़छाड़ तो नहीं करेगा और बाकी चीजें देखी जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी के पास पैसे और अच्छे वकील हैं इसका मतलब यह नहीं है कि मामला व्यवस्था से इतर जाएगा, हम इसी लिए मामलों को वापस निचली अदालत में भेज देते हैं।

हर बैठक डील नहीं होती: चंद्रचूड़

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने उनकी हाल की प्रधानमंत्री मोदी के साथ फोटो और उनकी अयोध्या में राम मंदिर जाने को लेकर हो रही आलोचना को शांत कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का उनके घर गणपति के मौके पर आना कुछ गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि जजों और नेताओं के बीच ऐसी मुलाकातें होती रहती हैं।

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जजों के काम को उनके द्वारा लिखे गए निर्णयों से तोला जाना चाहिए ना कि वह क्या कहते हैं और किसके साथ दिखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के अलावा उस फोटो में वह कोई नेता अथवा जज रखने का समर्थन इसलिए नहीं करते क्योंकि यह कोई CBI डायरेक्टर के चुनाव की मीटिंग नहीं थी।

उन्होंने साफ़ किया कि ऐसी बैठकों में कोई डील नहीं होती और लोगों को जजों पर विश्वास रखना चाहिए। गौरतलब है कि इससे पहले भी एक कॉलेज में एक संबोधन के दौरान उन्होंने यही बात कही थी। उनके इस जवाब से उनकी पीएम मोदी के साथ पूजा वाली फोटो पर प्रश्न उठाने वालों का मुंह बंद हो गया है।

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ आगामी 10 नवम्बर, 2024 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनकी जगह पर जस्टिस संजीव खन्ना देश के नए चीफ जस्टिस होंगे।

हिंदू लड़का, मुस्लिम लड़की… इश्क नहीं कर रहे थे कबूल, अपने-अपने घरों में फाँसी लगा झूल गए: युवक को जेल भी भिजवा चुका था युवती का परिवार

18 साल की मुस्लिम लड़की। 21 साल का हिंदू लड़का। दोनों इश्क में थे। शादी करना चाहते थे। लेकिन लड़की के परिजनों को यह कबूल न था। कुछ महीने पहले उन्होंने लड़की को अगवा करने का आरोप लगाते हुए लड़के को जेल भी भिजवा दिया था। आखिरकार लड़का और लड़की दोनों ने अपने अपने घरों में फाँसी लगा ली।

अंतरधार्मिक जोड़े की इस प्रेम कहानी का दुखद अंत उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के साहनपुर गाँव में हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार दोनों का घर आसपास ही था। दोनों की दोस्ती बचपन से थी। लड़की ने रविवार (3 नवंबर 2024) की रात अपने घर में पंखे में फंदा लगाकर जान दे दी। अगली सुबह लड़के को इसकी खबर लगी। सोमवार की दोपहर उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया और बाद में उसका शव भी पंखे से लटकते हुए मिला।

बुलंदशहर के एसपी सिटी ने बताया कि पुलिस को दोनों के शवों के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। लड़का और लड़की दोनों के परिजनों ने एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस दोनों शिकायतों की जाँच कर रही है। जाँच में आए निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मृत युवक के एक परिजन ने मीडिया को बताया कि लड़की और लड़का एक-दूसरे के साथ जीवन बिताना चाहते थे लेकिन दोनों के परिजन इसके लिए तैयार नहीं थे।

लड़की के अपहरण में जेल गया था प्रेमी

गौरतलब है कि जिस युवक ने आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है, उस पर पहले अपनी प्रेमिका के अपहरण का केस दर्ज हुआ था। यह केस 1 जून 2024 को लड़की की अम्मी ने स्याना थाने में दर्ज करवाया था। तब मृतका की अम्मी ने बताया था कि 31 मई को कुश उनकी नाबालिग बेटी को अपने 2 अज्ञात साथियों की मदद से बलपूर्वक कहीं भगा ले गया गया।

कुश और उसके साथियों को शातिर अपराधी बताते हुए तब मृतका की अम्मी ने कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने यह FIR IPC की धारा 363 के तहत दर्ज कर के लड़की को बरामद कर लिया था। पीड़िता को उसके परिजनों के सुपुर्द कर कुश को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जेल में लगभग 1 माह रहने के बाद कुश को जमानत मिली थी।

भले कानून देता है चार निकाह की इजाजत, पर पहली बीवी के साथ ‘मानसिक क्रूरता’ है मुस्लिमों का दूसरा निकाह: हाई कोर्ट, मुआवजा नहीं दे रहा था शौहर

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने एक हालिया निर्णय में कहा है कि एक मुस्लिम मर्द का दूसरा निकाह करना अपनी पहली बीवी से ‘मानसिक क्रूरता’ जैसा है। हालाँकि मुस्लिम पसर्नल लॉ के कारण अदालत ने माना कि उसे दूसरा निकाह करने से रोका नहीं जा सकता। इसी मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने शरिया काउंसिल को कानूनी अधिकार नहीं होने की बात कहते हुए कहा था कि वह तलाक का प्रमाण-पत्र जारी नहीं कर सकती है।

इस मामले में शौहर ने ही हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। उसने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे पहली बीवी को गुजारा-भत्ता देने का आदेश दिया गया था। शौहर का कहना था कि दूसरे निकाह से पहले ही उसका पहला निकाह टूट गया था।

इसे साबित करने के लिए उसने शरिया काउंसिल द्वारा तलाक का जारी किया गया सर्टिफिकेट भी लगाया था। लेकिन हाई कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि जब तक अदालत आदेश नहीं देती पहला निकाह भी मान्य रहेगा। इसी आधार पर उसे पहली बीवी को 5 लाख रुपया मुआवजा और नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण के लिए हर महीने 25 हजार रुपए देने का आदेश दिया है।

फैसला सुनाते हुए जस्टिस न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने कहा कि शौहर के दोबारा निकाह के कारण पहली बीवी को भावनात्मक तौर पर बेहद दुख और दर्द हुआ है। उन्होंने कहा, “मुस्लिम होने के नाते याचिकाकर्ता दूसरा निकाह करने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन उसे इसका भुगतान करना होगा। उसके दूसरे निकाह से पहली बीवी को काफी दुख हुआ होगा। लिहाजा यह मानसिक क्रूरता है।”

निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट ने माना कि मुस्लिमों को कानूनी तौर पर चार निकाह करने की इजाजत है। लेकिन यह कानूनी अधिकार या स्वतंत्रता उसकी बीवी के अधिकारों को सीमित नहीं करती। भले बीवी उसे दूसरा निकाह करने से नहीं रोक सकती, लेकिन भरण-पोषण का खर्च माँगना उसका अधिकार है। इसे देने से शौहर इनकार नहीं कर सकता।

अब जम्मू-कश्मीर में भी बुलडोजर एक्शन की तैयारी: बोले LG मनोज सिन्हा- आतंकियों को पनाह दी तो मिट्टी में मिला देंगे घर, नहीं दिखाएँगे रहम

जम्मू कश्मीर में भी अब आतंक के मददगारों पर बुलडोजर एक्शन होने वाला है। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने चेतावनी दी है कि जो लोग आतंकियों को शरण देंगे, उनका घर जमींदोज कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा है कि इस कार्रवाई पर कोई समझौता नहीं होगा। LG मनोज सिन्हा ने राज्य की जनता से अपील की है कि वह आतंक के मददगारों के खिलाफ हो जाएँ।

मंगलवार (5 नवम्बर, 2024) को श्रीनगर में राब्ता-ए-आवाम नाम के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में LG मनोज सिन्हा ने यह बात कही। उन्होंने कहा, “आतंक को पहचानना सिर्फ प्रशासन या सुरक्षाबलों का नहीं है। आवाम का भी यह काम है और अगर तीनों एक साथ तय कर लें तो इसे (आतंक) खत्म होने में एक साल से ज्यादा समय नहीं लगेगा।”

LG मनोज सिन्हा ने इसके बाद कहा, “हमारे देश में आतंक को प्रश्रय देने वाले लोग हैं और फिर कहते हैं कि हमारे ऊपर अन्याय हो रहा है। यह उचित बात नहीं है। 40000-50000 लोगों की जान जा चुकी है। कितनी महिलाएँ विधवा हो चुकी हैं, कितनी बहनों के भाई चले गए बावजूद इसके अगर जनता इन लोगों के खड़ी नहीं होती तो ये कश्मीर कभी नहीं बदलेगा।”

LG मनोज सिन्हा ने इसके बाद आतंक के मददगारों को चेताया। उन्होंने कहा, “मैं एक बार फिर कह रहा हूँ, बेगुनाह को छेड़ो मत, गुनाहगार को छोड़ो मत। अगर कोई आतंकवादी को शरण देगा तो उसका घर जमींदोज किया जाएगा। ये मैं कहना चाहता हूँ, इसमें कोई समझौता नहीं होगा।”

आतंकियों को शरण देने के खिलाफ यह बयान ऐसे समय में आया है जब बीते कुछ दिनों में लगातार सुरक्षाबलों ने कई आतंकियों को रिहायशी इलाके में मार गिराया है। हाल ही में श्रीनगर में सेना एक घर में छुपे 3 आतंकियों को मार गिराया था। सेना ने इस घर को भी जमींदोज कर दिया था।

श्रीनगर के अलावा बाकी इलाकों में भी सुरक्षाबलों ने कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में अपने ऑपरेशन तेज कर दिए हैं। बीते एक सप्ताह में लगभग 4-5 जगह ऑपरेशन हो चुके हैं। इनमें स्थानीय और पाकिस्तानी, दोनों तरह के आतंकी मार गिराए गए हैं।

LG मनोज सिन्हा ने अपने बयान में जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिए जाने को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने की बात उतनी ही पक्की है जितना सूर्य का पूरब से निकलना। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य की नई सरकार कोशिश करेगी।

होम डिलीवरी का पोस्टर, हैप्पी दीवाली का मैसेज… 39 मौतों का सोशल मीडिया में मोहम्मद आमिर ने बनाया मजाक, अल्मोड़ा में खाई में गिर गई थी बस

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में 4 नवंबर 2024 को 45 सवारियों से भरी एक बस खाई में गिर गई थी। हादसे में 39 लोगों की मौत हो गई थी। उत्तराखंड के ही गढ़वाल निवासी मोहम्मद आमिर को इन मौतों का सोशल मीडिया में मजाक उड़ाने पर गिरफ्तार किया गया है।

उसने इस हादसे को लेकर फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट की थी। इस करतूत से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने 5 नवंबर को उसके खिलाफ पुलिस से शिकायत की थी।

पौड़ी गढ़वाल की धुनाकोट कोतवाली में उसके खिलाफ तहरीर दी गई। इसमें बताया गया था कि हादसे में मारे गए लोग उनके सगे-संबंधी और परिचित हैं। हादसे से पूरा इलाका दुःखी है। ऐसे मौके पर मोहम्मद आमिर ने अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल पर मज़ाकिया अंदाज में लाशों का चित्र शेयर किया है।

पोस्ट में मोहम्मद आमिर ने दुर्घटना की तस्वीर पर ‘होम डिलिवरी’ का पोस्टर लगाते हुए ‘हैप्पी दीवाली’ लिखा था। उसने अपने फेसबुक की स्टोरी स्टेट्स में इसे साझा किया था। कुछ ही देर में स्टेट्स वायरल हो गया और लोगों में आक्रोश फैल गया।

शिकायकर्ताओं ने मोहम्मद आमिर की करतूत को उत्तराखंड में सौहार्द बिगाड़ने का इस तरह का पहला मामला बताया है। शिकायत में चेतावनी दी गई है कि अगर आरोपित पर कड़ी कार्रवाई न हुई तो हिन्दू समाज मोहम्मद आमिर से खुद निबटने पर मजबूर होगा।

स्थानीय लोगों की तहरीर में यह भी बताया गया है कि मोहम्मद आमिर की बैजरो विकासखंड के बीरोखाल में अवैध प्रॉपर्टी भी है। इस प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चलाने की भी माँग की गई है। इस शिकायत कॉपी को शेयर करने वाले अभिषेक सेमवाल का दावा है कि मोहम्मद आमिर कभी गढ़वाल में मजदूरी करने आया था, लेकिन अब कई डंपर खरीदकर ठेकेदार बन चुका है। उन्होंने मोहम्मद आमिर की मानसिकता को जिहादी सोच वाला बताया है।

अल्मोड़ा पुलिस के डिप्टी एसपी सदर अनुज कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मोहम्मद आमिर को गिरफ्तार कर आगे की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मोहम्मद आमिर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

ट्रंप जीता तो सरेआम करूँगा गोलीबारी: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बीच हमलों की धमकी देने वाला गिरफ्तार, वह भी पकड़ा गया जो शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ डाल घूम रहा था

अमेरिका में हो रहे राष्ट्रपति चुनावों के बीच पुलिस ने आईजैक सिसेल नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आईजैक सिसेल ने धमकी दी थी कि अगर राष्ट्रपति चुनावों में ट्रंप जीते तो वह सरेआम गोलीबारी करेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उसने यह धमकी एफबीआई नेशनल हेडक्वार्टर को भेजी थी। धमकी में उसने कहा था कि उसके पास हमला करने के लिए हथियार भी है। वो इंतजार बस ट्रंप के जीतने का करना है।

वेस्ट वर्जिनिया के एफबीआई हेडक्वार्टर में भेजे गए धमकी वाले संदेश में लिखा गया, “अगर ट्रंप जीते तो मैं रुढिवादी ईसाई गंदगी पर हमला करूँगा। मेरे पास एक चुराई हुई एआर15 है और इसके निशाने पर कौन है इसका नाम मैं नहीं बता रहा ताकि मैं अपने प्लान पर काम कर सकूँ…एफबीआई तब तक कुछ नहीं कर सकती जब तक मैं हमले को अंजाम नहीं दे देता।”

बता दें एक तरफ जहाँ मास शूटिंग की धमकी देने पर आईजैक को गिरफ्तार गया है तो वहीं अमेरिका में अलग-अलग जगहों पर पुलिस को अराजक तत्वों से धमकियाँ मिलने की बात सामने आई है। कहीं बम धमाकों की बात कही जा रही है तो कहीं किसी और हमले की।

मतगणना चालू रहने के बीच वाशिंगटन डीसी से भी एक मामला सामने आया है जहाँ एक युवक को पुलिस ने इसलिए अरेस्ट किया क्योंकि उसका बदन से ज्वलनशील पदार्थ डालने जाने की गंध आ रही थी। पुलिस ने फौरन उसे अपनी हिरासत में लिया।

गौरतलब है कि इस बार अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के आसार दिख रहे हैं। द एसोसिएटिड प्रेस के आँकड़ों के अनुसार, ट्रंप को अब तक 247 इलेक्टोरल वोट मिले हैं और कमला हैरिस को 210 वोट मिले हैं।

मुस्लिम व्यापारी ने किया सनातन का अपमान, बांग्लादेश के हिंदुओं ने किया विरोध तो जिहादी बन गए पुलिस-फौजी: खोज-खोजकर पीटा, घरों में घुसकर हमला

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों के बाद अब पुलिस और सेना भी हिन्दू समुदाय पर अत्याचार में जुट गई है। हिन्दुओं और उनके आराध्यों पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले पर कार्रवाई के बजाय पुलिस उन्हें ही निशाना बना रही है। बांग्लादेश के चटगाँव में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहाँ हिन्दुओं पर पुलिस का कहर बरपा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार (5 नवंबर, 2024) को बांग्लादेश के चटगाँव के हज़ारी गोली में हिंदू समुदाय पर पुलिस और सेना समेत बाक़ी सुरक्षा एजेंसियों ने हमला बोल दिया। यहाँ हिन्दुओं को ढूंढ ढूंढ कर मारा पीटा गया और उनके साथ बर्बरता हुई। कई हिन्दुओ को पुलिस पकड़ ले गई।

हिन्दुओं पर यह कार्रवाई इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने चटगाँव के एक मुस्लिम दुकानदार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस मुस्लिम दुकानदार उस्मान मुल्ला ने ISKCON सनातन धर्म पर अपमानजनक टिप्पणियाँ की थी। हिन्दुओं ने उसकी दुकान के बाहर प्रदर्शन किया और उस पर कार्रवाई की माँग की।

इसके बाद पुलिस और बाकी सुरक्षा एजेंसियों ने उस्मान पर कार्रवाई करने के बजाय हिन्दुओं को निशाना बनाना चालू कर दिया। वह उस्मान को दिखावे के लिए एक सुरक्षित जगह लेकर चले गए और हिन्दुओं की तलाश चालू कर दी। पुलिस के हमले में 5 हिन्दुओं को गंभीर चोटें आई हैं।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ दावा कर रही हैं कि हिन्दुओं ने उन पर हमला किया था जिसके बाद यह कार्रवाई हुई। चटगाँव से आई वीडियो दिखाती हैं कि कैसे एक तंग इलाके में पुलिस हिन्दुओं की धरपकड़ कर रही है। पुलिस द्वारा CCTV तोड़े जाने के वीडियो भी सामने आए हैं। इस वीडियो में लाठी डंडे के साथ पुलिस वाले एक घर के भीतर दिखाई पड़ते हैं।

चटगाँव में पुलिस ने 30 हिन्दुओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान सेना की टीमें भी साथ थी, उन्होंने भी हिन्दुओं पर हमले किए। चटगाँव में इससे पहले भी हिन्दू लगातार उत्पीड़न के विरुद्ध लगातार प्रदर्शन करते आए हैं।

बांग्लादेश की पुलिस ने हाल ही में उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने पर हिन्दुओं के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया था। इस मामले में दो हिन्दुओं को गिरफ्तार कर लिया गया था और 19 के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। इसको लेकर काफी बवाल हुआ था।

ST समाज का ‘प्रार्थना घर’ के नाम पर चर्च का उद्धाटन, बिशप के साथ कॉन्ग्रेस MLA भी थे: हिंदू संगठनों ने किया हनुमान चालीसा पाठ तो भागे

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक चर्च का उद्धाटन कार्यक्रम हिंदू संगठनों के विरोध के बाद रद्द करना पड़ा है। कथित तौर पर जनजातीय समाज (ST) के लिए प्रार्थना घर बनाने के नाम पर चर्च का उद्घाटन किया जा रहा था। इसके अलावा राज्य के रायगढ़ में भी ईसाई धर्मांतरण को लेकर बवाल हुआ। यहाँ प्रार्थना सभा के नाम पर महिलाओं का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बिलासपुर के रतनपुर स्थित जनजातीय बहुल गाँव बंगलाभाठा में मंगलवार (6 नवंबर 2024) को प्रार्थना घर के उद्घाटन नाम पर लोगों का जमावड़ा किया गया। इसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। कार्यक्रम में बिशप डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ के सुषमा कुमार के साथ कॉन्ग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित थे।

जब हिन्दू संगठनों को चर्च के उद्धाटन की जानकारी मिली तो वे भी मौके पर पहुँच गए। उद्घाटन का विरोध करते हुए उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया। बवाल के बाद आयोजकों को कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। भाजपा नेता प्रबल प्रताप जूदेव ने कॉन्ग्रेस नेता पर धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

हिंदू संगठनों के विरोध का नेतृत्व जूदेव ही कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस विधायक प्रार्थना सभा के नाम पर माता महामाई की धर्मनगरी को धर्मान्तरण नगरी बनाने पर तुले हुए हैं। उन्होंने प्रशासन पर भी जनजातीय समुदाय के धर्मान्तरण की साजिशों की अनदेखी का आरोप लगाया है।

इस हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले की सूचना मिलते ही फ़ौरन ही मौके पर पुलिस बल पहुँचा। पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया। हालत तनावपूर्ण होता देख कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। वहीं रायगढ़ में धर्मांतरण पर हुए बवाल के बाद कॉन्ग्रेस के जिलाध्यक्ष अनिल शुक्ला ने कहा है कि राज्य में जब से बीजेपी की सत्ता आई है, धर्म परिवर्तन जैसे मामलों में इजाफा हुआ है।

माता सीता, द्रौपदी, राजा प्रियवद… छठी मैया की उपासना की पौराणिक कथाओं के बारे में जानिए: जीवन में संयम, शुद्धता और आत्म-नियंत्रण की भावना भी जागृत करता है लोकपर्व

भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में एक ऐसा पर्व है जो न केवल आस्था और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि सामुदायिक एकता और सामाजिक समरसता का भी अद्वितीय उदाहरण है। यह पर्व है – छठ पूजा। भोजपुरी क्षेत्र में इस पर्व की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इसे ‘लोक आस्था का पर्व’ कहा जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मईया की आराधना के रूप में मनाया जाता है और 15 करोड़ से अधिक विश्व भर में फैले मैथली, मगध, बंगाली, भोजपुरी, भारतीय प्रवासी और नेपाली समाज के लिए यह आस्था का मुख्य केंद्र है।

छठ पर्व, जिसे छठी पूजा या षष्ठी पूजा भी कहा जाता है, कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू पर्व है। सूर्य की आराधना के इस अनोखे लोकपर्व का विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में व्यापक आयोजन होता है। इनके अलावा भारत के विभिन्न क्षेत्रों में और नेपाल, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, साउथ अफ़्रीका और फ़िजी जैसे देशों में भी मनाया जाता है।

यह पर्व एकमात्र ऐसा त्योहार है जो वैदिक काल से निरंतर प्रचलित है और अब यह बिहार की संस्कृति का अभिन्न अंग बन चुका है। यह पर्व बिहार की वैदिक आर्य संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है और ऋग्वेद में वर्णित सूर्य एवं उषा पूजन की आर्य परंपरा के अनुरूप मनाया जाता है। छठ पूजा सूर्य देवता, प्रकृति, जल, वायु और उनकी बहन छठी मईया को समर्पित है, जिन्हें देवी पार्वती के छठे रूप और भगवान सूर्य की बहन के रूप में पूजा जाता है।

पर्यावरणविदों का भी मानना है कि अन्य कई सनातनी त्योहारों पर पर्यावरण विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन छठ पर्व सबसे अधिक पर्यावरण-अनुकूल हिंदू त्योहारों में से एक है। जहाँ आज अधिकांश त्योहारों का व्यवसायीकरण हो चुका है, वहीं छठ पर्व में मौसमी फलों और घर पर बनी मिठाइयों, विशेष रूप से ठेकुआ, का प्रयोग होता है, न कि मिष्ठान भंडार की मिठाइयों या चॉकलेट का।

छठ पूजा का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

छठ पूजा की जड़ें प्राचीन वैदिक काल से जुड़ी हुई हैं। सूर्य उपासना का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है, जिसमें सूर्य को जीवनदायिनी ऊर्जा का स्रोत माना गया है। कहते हैं कि इस पूजा की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। एक कथा के अनुसार, जब पांडवों ने अपना राज्य खो दिया था, तब द्रौपदी ने सूर्य देव की उपासना की थी ताकि उनके परिवार को कठिनाइयों से मुक्ति मिले। इसके परिणामस्वरूप पांडवों को समृद्धि और विजय प्राप्त हुई।

पुराणों की कथा: एक कथा के अनुसार, राजा प्रियवद संतान सुख से वंचित थे। महर्षि कश्यप ने उनकी यह व्यथा सुनकर पुत्र प्राप्ति के लिए एक यज्ञ करवाया और यज्ञ की आहुति से प्राप्त खीर राजा की पत्नी मालिनी को दी। खीर के प्रभाव से उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ, लेकिन वह मृत जन्मा। पुत्र के वियोग में दुखी होकर राजा प्रियवद श्मशान में अपने प्राण त्यागने का संकल्प लेने लगे। तभी ब्रह्माजी की मानस कन्या, देवी देवसेना, प्रकट हुईं और उन्होंने कहा, “हे राजन्, मैं सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूं, इसलिए मुझे षष्ठी कहा जाता है। आप मेरी पूजा करें और अन्य लोगों को भी इस पूजा के लिए प्रेरित करें।” राजा ने पुत्र प्राप्ति की कामना से देवी षष्ठी का व्रत किया, जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन संपन्न हुई थी।

राम-सीता की कथा: एक और प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब भगवान राम और माता सीता 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे, तब उन्होंने कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन सूर्य देव और छठी मईया की पूजा की। इस पूजा के परिणामस्वरूप अयोध्या के लोग सुखी और समृद्ध हुए। यह परंपरा तब से आज तक चली आ रही है।

कर्ण की कथा: महाभारत के महान योद्धा कर्ण, जिन्हें सूर्य पुत्र के रूप में जाना जाता था, अपनी शक्ति और पराक्रम के लिए प्रतिदिन सूर्य देव की आराधना करते थे। उनका यह तप और सूर्य के प्रति समर्पण छठ पूजा के महत्व को और भी गहराई से दर्शाता है।

भोजपुरी समाज में छठ पूजा का महत्व

भोजपुरी भाषी समाज के लिए छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। भारत के बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, और झारखंड के साथ-साथ नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी इस पर्व की धूम रहती है। यही नहीं, विश्व के विभिन्न हिस्सों में बसे भोजपुरिया समुदाय – चाहे वह अमेरिका हो, ब्रिटेन हो, या खाड़ी देश – अपने परंपरागत ढंग से इस पर्व को उसी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं।

छठ पूजा के दौरान समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ आकर इस पर्व को मनाते हैं। इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की धार्मिक असमानता नहीं होती। सभी एक समान श्रद्धा के साथ गंगा, कोसी, गंडक, या अन्य किसी नदी या जलाशय के किनारे एकत्र होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

छठ पूजा के अनुष्ठान और विधियाँ

छठ पूजा चार दिनों का पर्व है, जिसमें व्रती (व्रत रखने वाले व्यक्ति) अत्यंत कठोर नियमों का पालन करते हैं। प्रत्येक अनुष्ठान का अपना एक विशेष महत्व होता है और ये सभी अनुष्ठान आत्मशुद्धि, संयम और तपस्या का प्रतीक माने जाते हैं।

पहला दिन – नहाय-खाय: छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय-खाय से होती है। व्रती इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं और शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं। इस भोजन में आमतौर पर कद्दू-भात और चने की दाल होती है, जिसे मिट्टी के चूल्हे पर पकाया जाता है।

दूसरा दिन – खरना: पंचमी के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को पूजा कर प्रसाद के रूप में गुड़ की खीर, रोटी और फल ग्रहण करते हैं। खरना का प्रसाद व्रती के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है।

तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य: छठ के तीसरे दिन, यानी षष्ठी के दिन, व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। व्रती अपने परिवार और समुदाय के लोगों के साथ जल में खड़े होकर सूर्य को प्रसाद और अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस समय घाटों पर छठ के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं, जो इस पूजा के सौंदर्य को और भी बढ़ा देते हैं।

चौथा दिन – उषा अर्घ्य: छठ पूजा के अंतिम दिन सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह अर्घ्य जीवन में नए सवेरे, आशा और नई ऊर्जा का प्रतीक है। अर्घ्य देने के बाद व्रती अपना उपवास तोड़ते हैं और प्रसाद का वितरण करते हैं।

सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान

छठ पूजा का महत्व सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अतुलनीय है। यह पर्व समाज में सामूहिकता और एकता का प्रतीक है। घाटों की सफाई, प्रसाद का वितरण और पूरी पूजा प्रक्रिया में सामूहिक सहयोग समाज के हर वर्ग को एक साथ जोड़ता है। छठ पूजा के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक गीत भोजपुरी संस्कृति के धरोहर हैं। ये गीत न केवल भक्ति भावना को जागृत करते हैं, बल्कि छठ पूजा के महत्व और मूल्यों को भी दर्शाते हैं।

छठ पूजा और आधुनिकता

समय के साथ आधुनिकता ने हमारे जीवन में प्रवेश किया है, परंतु छठ पूजा की पवित्रता और परंपराओं में कोई कमी नहीं आई है। आज भी शहरों में, चाहे वह दिल्ली हो, मुंबई हो या कोई अन्य महानगर, छठ पूजा उसी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। लोग कृत्रिम तालाब और जलाशयों का निर्माण करते हैं ताकि शहरों में भी इस पूजा का आयोजन हो सके।

छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा एक ऐसा पर्व है जो जीवन में संयम, शुद्धता, और आत्म-नियंत्रण की भावना को जागृत करता है। यह हमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने का संदेश देता है। यह पर्व भोजपुरिया समाज की सांस्कृतिक समृद्धि और गौरव का प्रतीक है।

छठ पूजा सूर्य देवता, प्रकृति, जल, वायु और उनकी बहन छठी मईया को समर्पित है, जिन्हें देवी पार्वती के छठे रूप और भगवान सूर्य की बहन के रूप में पूजा जाता है। पर्यावरणविदों का भी मानना है कि अन्य कई सनातनी त्योहारों पर पर्यावरण विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन छठ पर्व सबसे अधिक पर्यावरण-अनुकूल हिंदू त्योहारों में से एक है। जहां आज अधिकांश त्योहारों का व्यवसायीकरण हो चुका है, वहीं छठ पर्व में मौसमी फलों और घर पर बनी मिठाइयों, विशेष रूप से ठेकुआ, का प्रयोग होता है, न कि मिष्ठान भंडार की मिठाइयों या चॉकलेट का।

आइए, हम इस पर्व की महिमा को सहेजें और इसे पूरे विश्व में फैलाकर मानवता के कल्याण के लिए प्रेरणा स्रोत बनाएं। छठ पूजा हमें यह सिखाती है कि सामूहिकता और श्रद्धा में एक अद्वितीय शक्ति होती है, जो हमारे जीवन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करती है।