Home Blog Page 5847

ग्रीन कार्ड और वीजा नीति में बड़ा बदलाव: ट्रंप के इस प्रस्ताव से पहुँचेगा कुशल कर्मियों को फायदा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने योग्यता पर आधारित आव्रजन प्रणाली पेश की है। ट्रंप की इस पेशकश से ग्रीन कार्ड और स्थायी वैध निवास का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय समेत विदेशी पेशेवरों एवं कुशल श्रमिकों को लाभ पहुँचेगा।

इस पेशकश के अनुसार परिवार के बजाए योग्यता को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि इस प्रस्ताव को कानूनी मंजूरी मिल जाती है तो योग्य लोगों के लिए अमेरिका का वीजा प्राप्त करना बेहद आसान हो जाएगा। ट्रंप के प्रस्ताव के मुताबिक शिक्षित, किसी भी कौशल (स्किल) के साथ अंग्रेजी बोलने में माहिर, जॉब ऑफर और अमेरिकी संस्कृति अपनाने वालों को तरजीह दी जाएगी।

ट्रंप ने कहा है कि अभी अमेरिकी आव्रजन कानून प्रतिभाशाली लोगों के साथ भेदभाव करता है, क्योंकि अधिकतर ग्रीन कार्ड कम प्रतिभाशाली लोगों को मिलता है जो कम पैसे लेते हैं।

बता दें अमेरिका हर वर्ष 10 लाख से ज्यादा ग्रीन कार्ड जारी करता है जो विदेशियों को कानूनी रूप से स्थाई निवास का अधिकार है। इसमें 1, 40,000 ग्रीन कार्ड रोजगार पर दिए जाते हैं, बाकी पारिवारिक रिश्ते, शरणार्थी और लॉटरी के आधार पर दिए जाते हैं।

ट्रंप के नए प्रस्ताव से पिछले आँकड़े पूरी तरह पलट जाएँगे। इस प्रस्ताव में कुशल कर्मियों के लिए आरक्षण को करीब 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 57 प्रतिशत करने की बात की गई है। ट्रंप का कहना है कि उनका ये कदम अमेरिका को दूसरे देशों के साथ खड़ा करेगा और वैश्विक रूप से प्रतिद्वंदी बनाएगा।

https://platform.twitter.com/widgets.js

मैं वीरभद्र जी से गले मिलता हूँ क्योंकि उन्हें एक्सपीरियंस है: राहुल गाँधी

लोकसभा चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने हिमाचल प्रदेश के सोलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नोटबंदी से लेकर तमाम मुद्दों पर घेरा। 2019 लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के तहत 19 मई को मतदान होना है। जिसके चलते नेताओं के बयानों का सिलसिला भी आखिरी चरण पर और तेज होता जा रहा है।

राहुल ने पीएम मोदी पर नोटबंदी के फैसले में किसी को साथ न लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री ने अपनी कैबिनेट को ताले में बंद कर दिया था। राहुल गाँधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनको समझ ही नहीं है, वायुसेना के लोगों को वह अपना ज्ञान दे रहे हैं। राहुल गाँधी ने कहा कि यदि केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार आती है, तो अभी 22 लाख सरकारी नौकरियाँ खाली हैं, वह लोगों के हवाले हो जाएँगी।

‘मैंने अपना कुर्ता काट दिया, सूटकेस में कम जगह थी, नया आइडिया आया और कुर्ता काट दिया’

राहुल ने पीएम मोदी के गैर-राजनीतिक इंटरव्यू पर तंज कसते हुए कहा, “नरेंद्र मोदी का टीवी पर इंटरव्यू होता है, उन्हें सवाल दिए जाते हैं, पढ़कर जवाब देते हैं। लोग कहते हैं कि बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है लेकिन नरेंद्र मोदी कहते हैं कि मैं आम के पेड़ पर चढ़कर खाता हूँ। मैंने अपना कुर्ता काट दिया, सूटकेस में कम जगह थी, नया आइडिया आया और कुर्ता काट दिया। कौन सी दुनिया में हैं पीएम मोदी?”

‘चीन का सेब खाओ, हिमाचल में पकौड़े तलो’

राहुल गाँधी ने आरोप लगाया कि हिमाचल में चीन से सेब लाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “क्या हिंदुस्तान का सेब मेड इन इंडिया नहीं है, मेड इन चाइना है क्या, जो सेब उगाते हैं उनका नरेंद्र मोदी ने कितना कर्जा माफ किया? वह तो कहते हैं कि चाइना का सेब खाओ, हिमाचल में पकौड़े तलो।”

‘मोदी जी ने अपनी कैबिनेट को ताले में बंद कर दिया था, मुझे SPG ने बताया’

राहुल गाँधी ने कहा, “आरबीआई ने देश की अर्थव्यवस्था को रास्ता दिखाया, 70 साल से देश को चला रहा है। उनसे नहीं पूछा लेकिन पीएम मोदी ने नोटबंदी कर दी। पता नहीं आपको मालूम है या नहीं, नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट को नोटबंदी के समय रेसकोर्स रोड में ताले में बंद कर दिया था। सच्चाई है, एसपीजी वाले मेरी भी सिक्योरिटी करते हैं, इन्होंने मुझे बताया।”

‘वीरभद्र जी को एक्सपीरियंस है’

अनुभव के विषय पर राहुल गाँधी ने कहा कि सुषमा स्वराज जी, अरुण जेटली जी से वो लड़ते हैं क्योंकि उन्हें अनुभव है। इसके बाद उन्होंने मंच पर बैठे हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा कि वो वीरभद्र सिंह के भी गले मिलते हैं, चाहे तो आप उनसे पूछ सकते हैं। ऐसा करने के पीछे उन्होंने कारण बताते हुए कहा, “क्योंकि वीरभद्र जी को अनुभव (Experience) है, इसलिए मैं उनसे गले मिलता हूँ।”

गाँधी या गोडसे पर बयान देने वालों को मैं मन से माफ़ नहीं कर पाऊँगा: PM मोदी

महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान के बाद भोपाल सीट से बीजेपी की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर विवादों में घिरती जा रही हैं। उनके इस बयान पर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से नाराज़ नज़र आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साध्वी के इस बयान पर कड़ी निंदा व्यक्त की। उन्होंने सख़्त लहज़े का इस्तेमाल करते हुए कहा, “गाँधी जी या गोडसे के बारे में जो बयान दिए गए वो बहुत वह ख़राब हैं।” इसके आगे उन्होंने कहा, “ये अलग बात है कि उन्होंने माफ़ी माँग ली, लेकिन मैं उन्हें मन से कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगा।”

बता दें कि पीएम मोदी ने भोपाल सीट से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की उम्मीदवारी को अपना समर्थन दिया था। लेकिन साध्वी के बयान के चलते बीजेपी को बैकफुट पर आना पड़ा। वहीं, विपक्ष ने इस मामले पर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब भोपाल सीट पर चुनाव हो जाने के बाद दु:ख व्यक्त करने से क्या लाभ, इसके लिए उन्हें पहले सोचना चाहिए था।

इससे पहले, रविवार (मई 19, 2019) को होने वाले आखिरी चरण के मतदान से पहले भाजपा नेताओं की तरफ से गोडसे पर दिए गए बयान से पार्टी ने किनारा कर लिया है और साथ ही नोटिस भी भेजा है। इन नेताओं में भोपाल संसदीय सीट से प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा, केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े और सांसद नलीन कतील का नाम शामिल है। इन तीनों नेताओं ने गोडसे को लेकर विवादित बयान दिया था।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद अपने ट्विटर हैंडल से ये जानकारी दी है कि नेताओं के बयानों को अनुशासन समिति के पास भेजा गया और उन्हें दस दिन दिनों के भीतर जवाब देना है। इस मामले में उन्होंने शुक्रवार (मई 17, 2019) को तीन ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा कि विगत 2 दिनों में अनंतकुमार हेगड़े, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और नलीन कटील के जो बयान आए हैं, वो उनके निजी बयान हैं, उन बयानों से भारतीय जनता पार्टी का कोई संबंध नहीं है।

अमित शाह ने दूसरे ट्वीट में लिखा कि इन लोगों ने अपने बयान वापस लिए हैं और माफी भी माँगी है। फिर भी सार्वजनिक जीवन तथा भारतीय जनता पार्टी की गरिमा और विचारधारा के विपरीत इन बयानों को पार्टी ने गंभीरता से लेकर तीनों बयानों को अनुशासन समिति को भेजने का निर्णय किया है।

अपने तीसरे ट्वीट में शाह ने लिखा है कि अनुशासन समिति तीनों नेताओं से जवाब माँगकर उसकी एक रिपोर्ट 10 दिन के अंदर पार्टी को दे, इस तरह की सूचना दी गई है।

दरअसल, प्रज्ञा ठाकुर ने विवादित बयान देते हुए महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त करार दिया था। उन्होंने कहा था कि वो देशभक्त थे, देशभक्त हैं और देशभक्त रहेंगे। हालाँकि प्रज्ञा ने अपने इस बयान के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी माँग ली है। वहीं, अनंत हेगड़ ने भी अपने ट्वीट के लिए माफी माँगते हुए कहा कि उनका ट्विटर अकाउंट हैक हो गया था। उन्होंने कहा कि गाँधी के हत्यारे के लिए कोई सहानुभूति नहीं हो सकती।

बता दें कि, इससे पहले हेगड़े के ट्विटर अकाउंट से ट्वीट हुआ था कि गोडसे के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है और माफी माँगने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही नलिन कतील ने भी अपने के लिए माफी माँगी है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की तुलना गोडसे से करते हुए ट्वीट किया था, “गोडसे ने एक को मारा, कसाब ने 72 को मारा लेकिन राजीव गाँधी ने 17000 को मारा। अब आप खुद तय कर लो कि कौन ज्यादा क्रूर है।” नेताओं के माफी माँगने के बाद भी पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया है। गौरतलब है कि कमल के हासन के द्वारा गोडसे को पहला हिन्दू आतंकवादी बताने के बाद से ही इस पर सियासी बवाल मचा हुआ है।

मालेगाँव ब्लास्ट के आरोपितों को कोर्ट में उपस्थित होना अनिवार्य, NIA कोर्ट ने दिया आदेश

मुंबई की विशेष एनआईए कोर्ट ने मालेगाँव ब्लास्ट के आरोपियों के ख़िलाफ़ नाराज़गी जताई है। दरअसल, कोर्ट की यह नाराज़गी आरोपितों के कोर्ट में उपस्थित न होने के लिए थी। पिछले काफ़ी समय से आरोपित कोर्ट में लगातार अनुपस्थित रहे हैं इसलिए कोर्ट ने सभी आरोपितों को सुनवाई के दौरान सप्ताह में एक बार कोर्ट रूम में हाज़िरी लगाने का निर्देश दिया है। इनमें साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ़्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित के अलावा अन्य मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी के नाम शामिल हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 20 मई को होगी।

ख़बर के अनुसार, पिछले साल सितंबर में कर्नल पुरोहित पर आरोप तय करने पर स्टे की माँग ख़ारिज कर दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की बेंच ने मालेगाँव ब्लास्ट मामले की SIT से जाँच कराने की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि वो अपनी इस याचिका को ट्रायल कोर्ट में ही दाखिल करें।

जानकारी के अनुसार, इससे पहले साध्वी प्रज्ञा ठाकुर द्वारा चुनाव लड़ने के ख़िलाफ़ भी एनआईए कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने संबंधी याचिका को ख़ारिज कर दिया था। इस याचिका पर कोर्ट ने फ़ैसला लिया था कि वर्तमान में किसी के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की ताक़त हमारे पास नहीं है। किसे चुनाव लड़ना है और किसे नहीं, इस बात का निर्णय निर्वाचन आयोग करेगा। ऐसी सूरत में मालेगाँव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई जा सकती, इसलिए कोर्ट इस याचिका को ख़ारिज करती है।

बता दें कि 29 सितंबर 2008 में मालेगाँव की एक मस्जिद में एक मोटरसाइकल में धमाका हुआ था। इस दौरान क़रीब 6 लोगों ने अपनी जान गँवाई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे।

अमेरीका ने 52 पाकिस्तानियों को देश से निकाल फेंका, 3 अफसरों का वीसा भी कैंसिल

अमेरिका में ट्रंप सरकार ने उन लोगों के ख़िलाफ़ मुहिम शुरू की है जो लोग वीजा अवधि खत्म होने के बावजूद अमेरिका में रह रहे हैं। इसके तहत 52 पाकिस्तानी नागरिकों को उनके देश वापस भेजा गया है जो निर्धारित अवधि से ज्यादा समय से वहाँ रह रहे थे। अमेरिका ने 52 पाकिस्तानी प्रवासियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस्लामाबाद पहुँचा दिया है। मीडिया खबरों के अनुसार 53 पाकिस्तानी नागरिकों को देश वापस आना था, लेकिन बुधवार (मई 15, 2019) को सिर्फ़ 52 नागरिक ही देश पहुँचे क्योंकि एक शख्स एयरपोर्ट पर ही बीमार हो गया था।

पाकिस्तानी नागरिक जब इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे तब उनकी सुरक्षा में अमेरिकी सुरक्षा अधिकारी तैनात थे। विमान से उतरते ही नागरिकों को पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया गया। इससे पहले मंगलवार (मई 14, 2019) को पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की विदेश मामले संबंधी स्थाई समिति को सूचित किया था कि अमेरिकी अधिकारियों ने आव्रजन कानूनों के उल्लंघन, आपराधिक आचरण और अन्य गंभीर आरोपों के आधार पर पाकिस्तानी नागरिकों को हिरासत लेकर मुकदमा चलाया है।

पाक विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानियों को उनके देश भेजने को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद हुआ। इसके कारण अमेरिका ने तीन वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारियों को वीसा देने से मना कर दिया है। इनमें एक अतिरिक्त सचिव, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव और पासपोर्ट महानिदेशक भी शामिल हैं।

’23 मई को कॉन्ग्रेस की शोक सभा’, सोनिया गाँधी को ‘272’ जुगाड़ता देख बॉलीवुड प्रोड्यूसर ने किया कटाक्ष

पूरे देश में इस समय लोकसभा चुनाव जारी हैं। अब तक 6 चरणों में मतदान हो चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के विपक्ष में खड़ी पार्टियों ने एकजुट होना शुरू कर दिया है। अभी सातवें चरण के मतदान 19 मई को होने बाकी हैं, लेकिन बीजेपी के विरोध में उतरी पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने ‘मिशन 272’ के लिए गठबंधन की दिशा में काम करना शुरू भी कर दिया है।

23 मई को चुनाव के नतीजे आ जाएँगे। इस बीच एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर फिल्म के को-प्रोड्यूसर अशोक पंडित ने सोनिया गाँधी को लेकर ट्विटर पर तंज कसा है।

बॉलीवुड प्रोड्यूसर अशोक पंडित ने एक समाचार पत्र की रिपोर्ट को रीट्वीट करते हुए कटाक्ष किया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सोनिया गाँधी ने लोकसभा में बहुमत के लिए जरूरी 272 के आँकड़े के लिए काम करना शुरू कर दिया है। अशोक पंडित ने इसे लेकर ट्वीट किया है, “23 मई को महाठगबंधन की शोक सभा का आयोजन किया जाएगा।”

यही नहीं, एक अन्य ट्वीट में अशोक पंडित ने सोनिया गाँधी की जोड़तोड़ की इस कवायद को ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने‘ भी बताया है।


मोदी PM पद के लिए अनफिट हैं, मैं बनूँगी प्रधानमंत्री: बसपा सुप्रीमो मायावती

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण और नतीजों की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे देश के अगले प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए दावेदारी भी तेज होती जा रही है। इसी क्रम में अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जाहिर की है। मायावती ने एक बयान देते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री पद का सपना देख रही मायावती ने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए अनफिट बताया।

मायावती ने एक बयान देते हुए कहा था कि जहाँ तक विकास की बात है, बहुजन समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश का चेहरा बदल दिया है और लखनऊ का भी सुंदरीकरण हुआ है। इसके आधार पर कहा जा सकता है कि लोगों के कल्याण और देश की विकास को देखते हुए बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रधानमंत्री बनने के लिए फिट है, जबकि नरेंद्र मोदी अनफिट हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपनी उपलब्धियों का बखान किया और कहा कि 4 बार मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी छवि काफी साफ-सुथरी रही है। मायावती का कहना है कि उन्होंने कानून व्यवस्था बनाते हुए लोगों के हित के लिए काम किया है।

बता दें कि, मायावती के प्रधानमंत्री पद के दावेदार रुप में एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने समर्थन किया था, तो वहीं प्रधानमंत्री बनने की प्रबल इच्छा रखने वाली मायावती को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस पद के लिए अयोग्य बताया। वैसे, मायावती ने पीएम बनने वाली इच्छा का संकेत उसी समय दे दिया था, जब वो गठबंधन प्रत्याशी रितेश पांडेय के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने के लिए अंबेडकरनगर पहुँची थी। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री बनने का मौका मिलता है, तो वो उत्तर प्रदेश की अंबेडकरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं।

वहीं, पिछले दिनों तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) अध्यक्ष केसीआर राव ने विपक्ष से कहा कि अगर लोकसभा चुनाव में किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, तो वो ग़ैर-बीजेपी गठबंधन की सरकार को अपना समर्थन देने के लिए तैयार हैं, मगर साथ ही उन्होंने एक शर्त भी रख दी है। केसीआर राव ने विपक्ष के सामने यह शर्त रखी है कि अगर वो उन्हें सरकार में उप-प्रधानमंत्री बनाएँगे, तभी वो उनका समर्थन करेंगे। उन्होंने इस बात को भी स्पष्ट किया है कि वो 21 मई को विपक्ष की पार्टी मीटिंग में तभी शामिल होंगे, जब उन्हें इस बात का पूरा भरोसा दिलाया जाएगा कि गठबंधन सरकार में उन्हें उप-प्रधानमंत्री का पद दिया जाएगा।

ममता के क़रीबी राजीव कुमार पर गिरफ्तारी की तलवार, SC ने दी 7 दिन की मोहलत

शारदा चिटफंड घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के क़रीबी राजीव कुमार को तगड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने राजीव कुमार को गिरफ़्तार करने और हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर रोक संबंधी प्रोटेक्शन को वापस ले लिया है। शीर्ष अदालत ने उन्हें अग्रिम ज़मानत के लिए कोलकाता हाईकोर्ट का रुख़ करने के लिए सात दिन का समय दिया है। अगर वे इन सात दिनों में हाईकोर्ट का रुख़ नहीं करते और उन्हें वहाँ से अग्रिम ज़मानत नहीं मिलती है, तो सीबीआई सात दिन बाद उन्हें गिरफ़्तार कर सकती है।


ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने (30 अप्रैल) सीबीआई को कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ पर पहले दी गई छूट को हटाने के लिए संतोषजनक सबूत पेश करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सीबीआई को अदालत में वे सभी सबूत पेश करने होंगे जिससे इस घोटाले में राजीव कुमार की भूमिका साबित हो सके। साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को राजीव कुमार की संलिप्तता ख़ासकर लैपटॉप के डेटा, मोबाइल फोन या डायरियों से जुड़े सबूत पेश के निर्देश भी दिए थे, जिसमें कथित रूप से सबूतों को नष्ट करने के लिए प्रभावशाली लोगों के भुगतान की जानकारी शामिल थी।

बता दें कि शारदा चिटफंड घोटाले में सीबीआई के अधिकारी जब राजीव कुमार से पूछताछ करने पहुँचे थे, तो कोलकाता पुलिस ने उनको हिरासत में ले लिया था। इसके बाद राजीव कुमाार ने सीबीआई की गिरफ़्तारी से राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया था।

सीबीआई ने अब तक राजीव कुमार के ख़िलाफ़ कोई FIR दर्ज नहीं की है। लेकिन, राजीव कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए सीबीआई को इस मामले में FIR दर्ज करनी पड़ेगी। वहीं, राजीव कुमार की लीगल टीम ने इस मामले में अग्रिम ज़मानत के लिए कोलकाता हाईकोर्ट जाने का फ़ैसला लिया है। लीगल टीम ने यह भी कहना है कि अगर सीबीआई राजीव कुमार के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करेगी तो उसे रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दाखिल की जाएगी।

ज्ञात हो कि पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पर जब सीबीआई ने छापेमारी की थी, तो इस बात से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी काफ़ी ख़फ़ा हो गई थीं और केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ धरने पर बैठ गईं थी। काफ़ी हो-हल्ला के बाद जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था तब जाकर मामला शांत हुआ था। इसके बाद राजीव कुमार को कमिश्नर पद से हटा कर उन्हें सीआईडी में नियुक्त कर दिया गया था। लेकिन चुनाव आयोग ने उन्हें सीआईडी पद से हटाकर उन्हें वापस गृह मंत्रालय भेज दिया था।

Siddhu ने अपनी घरवाली का किया बचाव: मेरी पत्नी कभी झूठ नहीं बोलती

अमृतसर संसदीय सीट से टिकट न मिलने पर कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी (नवजोत कौर) ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के ख़िलाफ़ खुलकर नाराज़गी जताई है। इसके बाद सिद्धू ने भी अपनी पत्नी का बचाव करते हुए कहा कि उनकी पत्नी कभी झूठ नहीं बोलेगी।

गौरतलब है सिद्धू की पत्नी ने कल (मई 16, 2019) स्पष्ट कहा था कि नवजोत सिंह सिद्धू से पंजाब में इसलिए प्रचार नहीं कराया जा रहा है क्योंकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ऐसा नहीं चाहते हैं। बता दें मीडिया में खबर यह आई थी कि सिद्धू के गले में समस्या है, जिसका इलाज चल रहा है, इसलिए वह प्रचार से दूर हैं। जबकि नवजोत कौर ने अपने बयान में कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी को सिद्धू की जरूरत ही नहीं है, इसीलिए उनसे पंजाब में प्रचार नहीं कराया जा रहा है।

हालाँकि पंजाब के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू से जब उनकी पत्नी के आरोपों के बारे में गुरुवार (मई 16, 2019) को सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “मेरी पत्नी नैतिक रूप से इतनी मजबूत हैं कि वह कभी झूठ नहीं बोलेंगी। यही मेरा जवाब है।”

सिद्धू की पत्नी ने अमृतसर की लोकसभा सीट के लिए दावा किया था लेकिन पार्टी ने इस सीट पर पूर्व रेल मंत्री पवन कुमार बंसल को उम्मीदवार बनाया। चंडीगढ़ से बंसल 4 बार सांसद रह चुके हैं। नवजोत ने मीडिया से हुई बातचीत खुद को टिकट न मिलने की वजह को भी बताया।

उन्होंने कहा, “कैप्टन साहब और आशा कुमारी सोचती हैं कि मैडम सिद्धू संसदीय सीट का टिकट पाने की हकदार नहीं हैं। मुझे अमृतसर से टिकट बीते साल अमृतसर में हुए दशहरा रेल हादसे के कारण नहीं दिया गया, क्योंकि उन्हें लगता है मैं जीत नहीं पाऊँगी।” एएनआई के हालिया ट्वीट के मुताबिक उन्होंने कहा है कि अमृतसर उनकी होम सीट है। ये उनके साथ नाइंसाफ़ी है कि उन्हें भटिंडा जाने के लिए कहा जाए। उनका कहना है कि वो वहाँ पर किसी को भी नहीं जानती हैं।

चुनाव परिणाम में हो सकती है देरी, अधिकारी नहीं कर सकेंगे Wi-Fi का प्रयोग

मतगणना के लिए निर्वाचन आयोग कई तरह की सावधानियाँ बरतेगा। किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो इसके लिए कई बंदोबस्त किए जा रहे हैं। मतगणना के लिए अधिकारी जन वाई-फाई के माध्यम से इंटरनेट का प्रयोग नहीं करेंगे। इसके अलावा ईवीएम के वोट और VVPAT (वोटर वेरिफिकेशन पेपर ऑडिट ट्रेल) की पर्चियों की गिनती करने के लिए दो अलग-अलग टीम बनाई गई हैं। इन्हीं कारणों से चुनावी नतीजों के लिए थोड़ा इंतज़ार करना पड़ सकता है।

ख़बर के अनुसार, दिल्ली की सात लोकसभा सीटों की मतगणना के लिए सात मतगणना स्थल उसी लोकसभा क्षेत्र में बनाए गए हैं। वोटिंग के बाद स्ट्रांग रूम में बंद ईवीएम को त्रिस्तरीय सुरक्षा में रखा गया है। इसके अलावा पूरे परिसर पर सीसीटीवी के ज़रिए नज़र रखी जा रही है। किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने पाए इसके लिए दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रशिक्षण के दौरान अपने मतगणना कर्मियों समेत चुनाव अधिकारियों को कई दिशानिर्देश जारी किए हैं।

निर्देशानुसार, चुनाव अधिकारी आधिकारिक कार्यों के लिए जो भी इंटरनेट सेवा लेंगे, वो वाई-फाई से कनेक्टेड नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें तार के ज़रिए इंटरनेट कनेक्शन लेना होगा। चुनाव अधिकारी ने इस बात की भी जानकारी दी कि मतगणना के दौरान अगर एक पोलिंग स्टेशन के ईवीएम में डाले गए वोट और VVPAT में मिली पर्चियों की संख्या में भिन्नता पाई गई तो वो घबराने वाली बात नहीं होगी, क्योंकि मतगणना कर्मियों को बता दिया गया है कि उन्हें पहले मतों के अंतर का पता लगाना है। ऐसा इसलिए क्योंकि मतदान से पहले हमेशा ईवीएम की जाँच के लिए पीठासीन अधिकारी मॉक पोल करते हैं, इसके तहत 50 वोट डाले जाते हैं। उस वक़्त भी ईवीएम में वोटों की गिनती की जाती है।

दिल्ली की सात लोकसभा सीट से प्रत्येक के 50 पोलिंग स्टेशनों के वीवीपीएटी की पर्चियों का मिलान ईवीएम में डाले गए मतों से किया जाएगा। बता दें कि दिल्ली में लोकसभा की सात सीट हैं, एक लोकसभा सीट में 10 विधानसभा सीट हैं। हर विधानसभा सीट से 5 पोलिंग स्टेशन के वीवीपीएटी की पर्चियों की संख्या का मिलान वहाँ ईवीएम में डाले गए मतों से किया जाएगा। इस प्रकार, पूरी दिल्ली में कुल 350 पोलिंग स्टेशन के वीवीपीएटी की पर्चियों की गिनती की जाएगी। इस प्रक्रिया के चलते चुनाव के परिणाम में देरी हो सकती है।