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राहुल ने स्वीकारा कि कुछ पत्रकार ‘उनके साइड के हैं’ जो मोदी से कड़े सवाल पूछते हैं

वैसे तो तमाम पत्रकारों ने खुद ही अपने व्यवहार से अपनी ‘पक्षकारिता’ साबित की है लेकिन आज राहुल गाँधी की स्वीकृति ने उस पर मुहर भी लगा दी। राहुल गाँधी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वयं स्वीकार किया कि कुछ पत्रकार उनके साइड के हैं जो विरोधियों से कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से कठिन सवाल पूछने का काम करते हैं।

आज एक तरफ जहाँ बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी तो ठीक उसी समय राहुल गाँधी भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। उसी समय राहुल ने कहा, “मैंने अभी सुरजेवाला जी से कहा, उधर मोदी जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही है तो जरा कुछ अपने पत्रकार भी भेज दीजिए जो हमारी तरफ से भी 1-2 सवाल पूछ लें, तो सुरजेवाला ने बताया कि दरवाजे वहाँ बंद कर दिए गए हैं।”

संभवतः यहाँ उन्ही पत्रकारों की बात हो रही है जो खुलेआम ‘पक्षकार’ होने के बाद भी ‘न्यूट्रल’ पत्रकार बने हुए हैं। ऐसे पक्षकार लगातार कॉन्ग्रेस की तरफ से पैडलिंग करते पाए जाते हैं जिन्हें राहुल गाँधी ने आज खुलेआम स्वीकार कर इस हकीकत को मान्यता प्रदान कर दी।

राहुल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई कि देखिए कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी खुद स्वीकार रहे हैं कि पार्टी के ‘पाले हुए’ कुछ पत्रकार है जो कॉन्ग्रेस के लिए काम करते हैं।

हमने पहले भी कई बार रिपोर्ट किया गया है कि कैसे कुछ कॉन्ग्रेसी ‘पक्षकार’ फेक न्यूज़ फैलाते, कॉन्सिपिरेसी थ्योरीज़ गढ़ते और यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस के इलेक्शन कैम्पेन से लेकर स्ट्रैटजी प्लानिंग में भी खुलेआम अपने चवन्नी छाप विचार रखकर भी ‘निष्पक्ष’ बने हुए हैं।

मोदी ने राहुल का नाम लेकर कहा, ‘दया मत दिखाओ, मेरे माता-पिता की जो भी खबर है, ले आओ’

अक्सर देखने को मिलता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी कभी संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गले पड़ रहे होते हैं, तो कभी वो रैलियों में उनके नाम की माला जपते देखे जाते हैं। जबकि, इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शायद ही कभी राहुल गाँधी का नाम अपनी जुबान से लेते हैं। एक ओर राहुल गाँधी की मीडिया वार्तालाप से लेकर जनसभाएँ भी जहाँ नरेंद्र मोदी के नाम से शुरू होती हैं, वहीं नरेंद्र मोदी नामदार को लेकर बेखबर ही नजर आते हैं।

हाल ही में राहुल गाँधी ने एक बेहद भावुक भाषण में अपना दुःख व्यक्त करते हुए कहा, “मैं मर जाऊँगा, लेकिन नरेन्द्र मोदी के माँ-बाप के बारे में कभी बात नहीं करूंगा।” हालाँकि, इस पर उन्हें जनता ने सोशल मीडिया जवाब देते हुए कहा था कि बोफोर्स घोटाले में नरेंद्र मोदी के माता-पिता नहीं, बल्कि राजीव गाँधी ही मुख्य आरोपित थे, तो ऐसे में वो नरेंद्र मोदी के माँ-बाप पर आखिर कौन-सी टिप्पणी करना चाहते हैं?

आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘न्यूज़ 24’ समाचार चैनल को इंटरव्यू देते हुए पहली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का नाम लिया। पीएम मोदी ने कहा, “मैं राहुल गाँधी से आग्रह करता हूँ, अगर मेरे माता-पिता ने कुछ गलत किया हो तो आकर बताइये। मुझ पर दया करने की कोई ज़रूरत नहीं।” उन्होंने ने कहा, “मैं चुनाव आयोग से आग्रह करूँगा की राहुल जी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने दी जाए, जहाँ वो मेरे माता-पिता के बारे में जो भी बोलना चाहते हैं, वो आकर कहें।”

‘मुझ पर दया करने की कोई ज़रूरत नहीं है’

समाचार चैनल को इंटरव्यू देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “श्रीमान राहुल गाँधी जी, आप कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं, आपको 4-5 पीढ़ी का सार्वजनिक राजनीतिक जीवन का अनुभव है। मैं आज सार्वजनिक रूप से आप से हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि मेरे माता-पिता ने कुछ गलत किया हो, व्यक्तिगत जीवन में गलत किया हो, सामाजिक जीवन में गलत किया हो, तो खुलकर बाहर आकर बताइये। मुझ पर दया करने की कोई ज़रूरत नहीं है। आपके माता-पिता पर न मुझे कुछ कहने का अधिकार है और न इस देश के नागरिक का अधिकार है। लेकिन इस देश के पूर्व प्रधानमंत्री के संबंध में, इस देश के राज परिवार के संबंध में, सार्वजनिक जीवन जीने वाले लोगों को देश में चर्चा करने का हक है।”

इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने कठोर शब्दों में कहा, “मैं नहीं चाहूँगा कि मेरे देश में मेरे माता-पिता ने कुछ गलत किया हो और माफ़ कर दे। दया जैसे शब्द बोलकर आप मेरे संस्कार और जमीर को चोट पहुँचा रहे हो। हाँ, उन्होंने मुझे जन्म दिया, ये अगर उन्होंने गलत किया तो आपको खुलकर कहने का अधिकार है।”

‘कॉन्ग्रेस के सामने बस नामदार को बचाने की समस्या है’

प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि बीजेपी यह चुनाव पिछले बार से बड़े बहुमत के साथ जीतेगी। इस इंटरव्यू में विपक्ष पर कड़ा हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के सामने यह समस्या है कि चुनाव की मार के बाद वो नामदार को कैसे बचाएँगे। मेरे दिमाग में चुनाव नतीजे के बाद देश को किस दिशा में ले जाना और कितनी तेजी से ले जाना है, बस यही चलता रहता है, इसके अतिरिक्त मैं कुछ नहीं सोचता।”

फ़ैक्ट-चेक के नाम पर विद्यासागर कॉलेज की हिंसा पर AltNews ने फैलाया झूठ

मंगलवार (14 मई) को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली में हिंसा की ख़बरों के बाद कोलकाता में हड़कंप का माहौल बन गया। इस हिंसा में विद्यासागर कॉलेज में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की एक मूर्ति को तोड़ दिया गया। जैसे-जैसे यह मुद्दा बढ़ता गया, वैसे-वैसे इस मामले को लेकर सियासी-खेल भी परवान चढ़ता गया।

जहाँ एक तरफ़, ममता बनर्जी ने बंगाली क्षेत्रीय अराजकतावाद का आह्वान किया, वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तृणमूल पर हिंसा का आरोप लगाने और मूर्ति तोड़ने के सबूत पेश किए। AltNews ने इसी ख़बर का फ़ैक्ट-चेक करने का दावा किया।

अपने फ़ैक्ट-चेक में, AltNews ने एक ऐसे वीडियो को दिखाया गया जिसमें केवल भाजपा कार्याकर्ता कॉलेज परिसर के अंदर पत्थर फेंकते दिखे। जबकि सच्चाई यह है कि इस हमले की शुरूआत तृणमूल कॉन्ग्रेस ने की थी। इस वीडियो के माध्यम से AltNews ने यह दावा किया कि कॉलेज के अंदर से कोई पत्थर बाहर नहीं फेंका गया।

वहीं, फ़ैक्ट-चेक करने वाली वेबसाइट फ़ैक्ट हंट द्वारा उसी वीडियो को दिखाया गया जिसमें यह स्पष्ट है कि कॉलेज के अंदर से भी पत्थर बाहर फेंके जा रहे थे, यानी कि हमले की शुरूआत कॉलेज के अंदर से की गई थी। फ़ैक्ट हंट का यह वीडियो लगभग 1 मिनट 12 सेकंड का था, जबकि AltNews ने जिस वीडियो को दिखाकर फ़ैक्ट-चेक किया, असल में वो पूरा वीडियो न होकर मात्र 36 सेकंड का था। इसमें AltNews ने बड़ी आसानी से सच्चाई को नज़रअंदाज़ किया और फ़ैक्ट-न्यूज़ के नाम पर बीजेपी को दोषी ठहराने का भरसक प्रयास किया।

सच्चाई सामने आने पर AltNews को ग़लती स्वीकारते हुए अपने लेख को अपडेट करना पड़ा और यह लिखना पड़ा कि पत्थरबाजी कॉलेज के अंदर से भी हुई थी। AltNews ने इस पत्थरबाजी को ‘प्रतिशोध’ का नाम दिया और ऐसा प्रचारित किया कि पथराव की शुरूआत भाजपा के कार्यकर्ताओं ने की थी।


AltNews ने अपने पूरे फ़ैक्ट-चेक में यही सिद्ध करने की कोशिश की कि विद्यासागर कॉलेज में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा को तोड़ने वाले लोग केवल बीजेपी के ही कार्यकर्ता थे।

यह बड़ी हैरानी वाली बात है कि AltNews के इस फ़ैक्ट-चेक का आधार केवल भगवा वस्त्र है। उनके लिए भगवा पहनने वाले सभी लोग केवल भाजपा कार्यकर्ता ही हो सकते हैं। AltNews के पास इतना दिमाग नहीं है कि वो यह भी सोच सकें कि लोगों को बेवकूफ़ बनाने के लिए तृणमूल के गुंडे भी भगवा पहनकर अराजकता फैला सकते हैं।

इस मामले में कौन दोषी है, कौन दोषी नहीं है, यह पता करना पुलिस का काम है, न कि किसी तथाकथित फ़ैक्ट-चेक कंपनी का। AltNews के फ़ैक्ट चेक को देखकर लगता है कि वो टीवी पर आने वाले CID सीरियल को बहुत देखते हैं जहाँ वो ACP प्रद्युम्न और उनकी टीम से काफ़ी प्रेरित हैं। AltNews के संस्थापक और उसकी टीम को गंभीर होकर यह सोचना चाहिए कि यह कोई जासूसी सीरियल नहीं है, बल्कि असल घटना है जिसका दुष्प्रचार कतई नहीं किया जाना चाहिए।

AltNews के सह-संस्थापकों को प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ घृणा फैलाने जैसे अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए झूठी ख़बरे फैलाने के लिए जाना जाता है। हाल ही में, प्रतीक सिन्हा ने नरेंद्र मोदी के दोषी सांसदों और विधायकों को जेल भेजने के चुनावी वादे के बारे में झूठ बोला था।

इससे पहले AltNews ने पत्रकार बरखा दत्त के फ़ैक्ट-चेक के क्लिप्ड वीडियो की माँग की। लेकिन दिलचस्प रूप से, उन बिंदुओं को छोड़ दिया, जहाँ वास्तव में घाटी में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का संदर्भ था। AltNews ने आर्मी से सेवानिवृत्त प्रमुख का भी फैक्ट चेक किया, लेकिन बिना सोचे-समझे आर्मी चीफ़ के पक्ष को नज़रअंदाज़ कर दिया। इसके बाद AltNews ने एक फ़ेक इमेज का फैक्ट चेक करके उसे प्रसारित किया, वो भी बिना सही जानकारी दिए। AltNews के सह-संस्थापक बड़ी आसानी से झूठ फैला कर अपना मंतव्य सिद्ध कर लेते हैं। ऐसा ही उन्होंने कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा की एक फ़ेक इमेज साझा करके की थी।

कई युवाओं द्वारा भारत-विरोधी नारे लगाने की ख़बरों को ख़ारिज करने के लिए वेबसाइट ने कुछ अजीबो-गरीब विश्लेषण किया। जबकि बिहार के डीजीपी ने AltNews के दावों को एक सिरे से ख़ारिज कर दिया। हैरान कर देने वाली बात यह है कि AltNews के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा के चेहरे पर एक शिकन भी देखने को नहीं मिलती जब वो अपने फै़क्ट-चेक के फ़र्ज़ी होने के तथ्य से अवगत हो जाते हैं। AltNews और इसके सहयोगियों ने अतीत में भी बिना किसी सबूत के एक प्रत्यक्षदर्शी की बातों को ख़ारिज कर दिया क्योंकि यह उनके कथन के अनुकूल था। उनके द्वारा खुदरा FDI पर बीजेपी के रुख़ के बारे में और ख़ुद OpIndia.com के बारे में भी झूठ फैलाया गया।

80 भाजपा कार्यकर्ता की हत्या हुई, आपने कोई सवाल नहीं उठाया: अमित शाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी मुख्यालय में आज (मई 17, 2019) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान अमित शाह ने दावा किया कि देश में एक बार फिर से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी 300 से ज्यादा सीटें जीतेगी और केंद्र में एनडीए की सरकार बनेगी। इसके साथ ही अमित शाह ने दावा किया कि 2014 में जिन 120 सीटों पर उनकी पार्टी नहीं जीती थी, उनमें से 80 सीटों पर इस बार जीत होगी। उन्होंने कहा कि इस बार पार्टी इन 80 सीटों पर पूरी मजबूती से लड़ी है।

अमित शाह ने कहा कि लोगों के जीवन स्तर को उठाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सराहनीय प्रयास किए और इसमें बड़ी सफलता पाई है। अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रयोग को दुनिया ने भी स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने 133 नई योजनाएँ लागू की और उसे जमीनी स्तर तक पहुँचाने का प्रयास किया। किसानों, दलितों , आदिवासियों और महिलाओं के लिए नई योजनाएँ लाई गईं और इन वर्गों के भीतर आत्मविश्वास जगा है।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जनता ने नई सरकार बनना तय कर लिया है। पाँच साल बाद एक बार फिर से पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनकर आएगी। पीएम ने कहा कि काफी लंबे अरसे बाद ऐसा होगा, जब देश में लगातार दूसरी बार कोई पूर्ण बहुमत वाली सरकार आएगी। उन्होंने कहा कि देशवासियों ने पाँच साल में जो उन्हें आशीर्वाद दिया है, वो उसके लिए धन्यवाद देने के लिए आए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि साल 2014 में आईपीएल बाहर कराना पड़ा था। मगर इस बार ऐसा नहीं है। जब सरकार सक्षम होता है, तो देश में रमजान भी होता है, आईपील भी चलता है और बच्चों का एग्जाम भी होता है।

वहीं, राजनीति के स्तर को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि भाजपा की ओर से कभी भी राजनीति को गंदा करने का काम नहीं किया गया। उन्होंने पूछा कि ममता बनर्जी के राज बंगाल में ही क्यों हिंसा होती है? मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए अमित शाह ने कहा कि उन्हें ममता से ज़्यादा दुःख मीडिया की चुप्पी पर है जो भाजपा के 80 कार्यकर्ताओं की हत्या पर भी ममता से सवाल नहीं पूछते। कहीं और हिंसा क्यों नहीं हो रही है? पिछले चुनाव में हमारे पर 9 करोड़ कार्यकर्ता थे, अब 11 करोड़ हैं।

राफेल के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि अगर राहुल गाँधी के पास पुख्ता सबूत थे, तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में क्यों नहीं दिए? राहुल को सभी तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करना चाहिए था। इस पर पीएम ही जवाब दें, ये जरूरी नहीं है। कॉन्ग्रेस पर भी कई आरोप लगे हैं, तो क्या उन्होंने जवाब दिया? इसके साथ ही उन्होंने साध्‍वी प्रज्ञा को उम्‍मीदवार बनाने जाने पर कहा कि यह भगवा आतंकवाद की मुहिम चलाने वालों के खिलाफ एक सत्‍याग्रह है।

बनारस के लोगों ने राजदीप का मुँह किया बंद, कहा, ‘कॉन्ग्रेस का कोई एक काम बता दो’

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का चुनाव प्रचार जारी है। इस चरण में प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी वाली वाराणसी पर भी 19 मई को चुनाव होना है। ऐसे में कई पत्रकार बनारस में डेरा डाले हुए हैं। इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई वाराणसी में प्रियंका गाँधी का रोड शो कवर करने गए थे, ऐसे में उन्होंने जब बनारस की नब्ज़ टटोली तो माहौल ‘मोदीमय’ दिखा। हालाँकि, उन्होंने अपने तरीके से कई जगह ट्विस्ट देने की कोशिश की, पर घूम-फिरकर माहौल ‘आएगा तो मोदी ही’ टाइप रहा।

वाराणसी से ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान, राजदीप दशाश्वमेध घाट, काशी की राजनीतिक धुरी अस्सी पर पप्पू चाय के पॉपुलर अड्डे से लेकर बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के विश्वनाथ मंदिर पहुँचते हैं। बनारस के लोगों को कई बार अपनी तरफ से याद दिलाने की कोशिश करते हैं कि कभी बनारस कॉन्ग्रेस का गढ़ हुआ करता था। क्या आप चाहते हैं कि प्रियंका यहाँ से चुनाव लड़े जबकि उन्हें ठीक से पता है न वह लड़ेंगी और न ही अब संभव है। यहाँ तक कि यह भी पूछ लिया कि क्या आप उसे वोट देना चाहेंगे जो पार्टी और नेता रोजगार देने के ‘वादे’ कर रही है। लगभग एक ही सवाल बार-बार दोहराया गया कि आखिर मोदी ने ऐसा क्या कर दिया बनारस में? कितना बदला है बनारस? अपनी मस्ती और हाज़िरजवाबी के लिए जाना जाने वाले बनारस ने भी जम कर उनकी फिरकी ली और अपना मन भी उड़ेल कर रख दिया जो उनके लिए और कॉन्ग्रेस के लिए अच्छी ख़बर नहीं है, पर जो है सो है।

सबसे मजेदार वाकया अस्सी पर पप्पू की चाय के दुकान का है। शायद राजदीप ने वहाँ इंट्री यह सोचकर की थी कि यहाँ उन्हें मोदी विरोध की लहर दिखाई दे जाए, पर मामला उल्टा हो गया। राजदीप ने जैसे ही पूछा कि आखिर पिछले पाँच सालों में बनारस में ऐसा क्या हुआ? क्या मोदी राज में बनारस में कोई डेवलपमेंट हुआ? लोगों ने BHU से लेकर बुद्ध की प्रथम प्रवचन स्थली सारनाथ तक शानदार रोड के साथ, हेरिटेज लाइट, तारों के जंजाल से मुक्ति, रामनगर-सामने घाट पुल से लेकर, महात्मा गाँधी और मालवीय जी ने कभी कहा था कि जहाँ स्वयं काशी विश्वनाथ विराजमान है उस गली में भी इतना कूड़ा-करकट की याद दिलाते हुए विश्वनाथ हेरिटेज कॉरिडोर से लेकर बनारस की गली और घाटों तक की बढ़िया सफाई व्यवस्था की चर्चा कर डाली। राजदीप को बता दिया कि बनारस में अब महामना को समर्पित अपना विश्वस्तरीय कैंसर हॉस्पिटल भी मरीजों की सेवा के लिए तैयार है।

फिर भी राजदीप ने उनकी तरफ गूगली फेंकी कि जितना काम नहीं हो रहा है उससे ज़्यादा प्रचार हो रहा है। जैसे अभी जो कुछ गिनाया गया वह काम नहीं बल्कि कुछ और हो क्योंकि अभी तक कहीं भी किसी ने कॉन्ग्रेस का नाम तक नहीं लिया था। ‘कमलापति त्रिपाठी के समय कॉन्ग्रेस का गढ़ रहा है बनारस’ कि जैसे ही उन्होंने याद दिलाकर इन उपलब्धियों को कमतर साबित करने की कोशिश की तो किसी ने उन्हीं से पूछ लिया कि आप तो वरिष्ठ पत्रकार हैं आप ही बता दीजिए कोई एक काम जो बनारस में कॉन्ग्रेस ने किया हो? थोड़ी देर के लिए राजदीप गच्चा खा गए कि अब करे तो करें क्या! आगे इस पर डिटेल में बात होगी।

वैसे ऐसे पत्रकारों की समस्या और एकमात्र उपलब्धि यही रही है कि मोदी विरोध से ही ये तथाकथित बड़े पत्रकार बने हैं और ऊपर से ‘पक्षकार’ होने के बावजूद भी ‘निष्पक्षता’ का चोला ओढ़ लिया। खैर, अब इन्हें ठीक से पता है कि कॉन्ग्रेस सत्ता में वापस आ नहीं रही तो ये जाएँ तो जाएँ कहाँ? यहाँ मामला उल्टा पड़ता देख बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के छात्रों से बीजेपी विरोध का माहौल बनाना चाहा, शुरूआती स्तर पर बात बनती नज़र आई तो आँखों में चमक दिखी लेकिन जल्द ही सब अरमान बनारसी झोंके में बह गए, जब वहाँ के छात्रों ने न सिर्फ बनारस बल्कि सम्पूर्ण पूर्वांचल के विकास की तस्वीर साझा कर दी। वहाँ किसी को राहुल और प्रियंका से कोई उम्मीद नज़र नहीं आई। शुरूआती थोड़े से असंतोष के साथ मेजोरिटी में छात्र भी मोदी मय ही नज़र आए तो राजदीप ने वहाँ भी ट्विस्ट देना चाहा कि क्या देश में मोदी के नाम पर ध्रुवीकरण नहीं हो रहा है?

छात्रों ने उनके इस सवाल को मोदी-मोदी के नारों के साथ हवा में उड़ा दिया और ये साफ बता दिया कि वर्तमान में जहाँ एक तरफ परिवारवाद हावी है और राहुल के बाद उनका भांजा अगला पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए तैयार किया जा रहा है, वहाँ बीजेपी एक बढ़िया विकल्प है। परिवर्तन की बात करने वाले राहुल पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया या किसी अन्य को पार्टी अध्यक्ष बना के दिखाएँ, फिर देश की बात करें। राजदीप का मामला BHU में भी नहीं जमा। सारा एजेंडा धरा का धरा रह गया।

चलिए वापस लौटते हैं पप्पू की दुकान पर, बनारस में ग्राउंड रिपोर्टिंग करते वक़्त राजदीप ने जो अभी तक मोदी के खिलाफ न जाने कितने नेगेटिव कमेंट कर खुद को सुर्ख़ियों में रखा। बनारस में भी बार-बार कॉन्ग्रेस से तुलना कर मोदी के खिलाफ नेगेटिव कमेंट करवाने की पुरजोर कोशिश की, पर बनारस ने बता दिया कि कैसे मोदी ने मात्र पाँच सालों में कॉन्ग्रेस के पचास सालों से ज़्यादा बनारस में विकास किया। चाहे वह मामला साफ-सफाई का हो, चौड़ी सड़कों का, अंडरग्राउंड पावर केबल का, गंगा की साफ-सफाई का हो, जाम से मुक्ति के लिए फ्लाईओवर के जाल का या बेहतर और ज़्यादा उन्नत हॉस्पिटल का…. लेकिन सरदेसाई ने इन सबको नकारते हुए उन्हें प्रोवोक किया ताकि कोई तो मोदी के खिलाफ नेगेटिव कमेंट करे जिसे ये मोदी विरोधी लहर के रूप में काशी का मूड बताकर प्रोजेक्ट कर सकें।

देसाई ने आखिरी पैतरें के रूप में अभी तक कही हर बात को नकारते हुए फिर बड़ी धूर्तता के साथ पूछा यह सब तो ठीक है पर जितना विकास होना चाहिए था उतना नहीं हुआ। प्रचार पर ध्यान ज़्यादा रहा मोदी जी का, जमीन पर कम। क्या आप चाहते हैं कि मोदी प्रचार कम और काम ज़्यादा करें? इस पर पप्पू की दुकान पर ही एक व्यक्ति ने बहुत झन्नाटेदार जवाब दिया कि आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे सचिन ने अपने जीवन में 100 सेंचुरी ही मारा तो आगे क्या? छोड़िए, राजदीप जी आप बड़े पत्रकार हैं पहले भी कई बार बनारस आ चुके हैं। मैं तो बनारस में मोदी जी का 50 काम गिना दूँगा। आप बताइए कि कॉन्ग्रेस ने क्या किया है बनारस के लिए कोई एक उपलब्धि बता दीजिए।

सरदेसाई पर इस तरह से सीधा अटैक करने के बाद, कॉन्ग्रेस के लिए तमाम तरह से जीवन भर पैडलिंग करने के बावजूद, राजदीप के पास ऐसा एक भी काम नहीं था कॉन्ग्रेस का जिसे वो बनारस की जनता को गिना सकें। वहाँ बैठे बनारसियों ने उन्हें पानी पीला दिया और दुकान पर बैठे लोगों ने इस सन्नाटे को चीरने के लिए माहौल मोदी मय कर दिया। साथ ही यह भी बता दिया कि बनारस किसी के भड़कावे में नहीं आने वाला, वह विकास के साथ है, मोदी के साथ है। इस जवाब के साथ मामला बनता न देख सरदेसाई का काफिला कहीं और निकल लिया मोदी विरोध की संजीवनी तलाश करने।

BJP नेता ने गाँधी को कहा ‘पाकिस्तान का राष्ट्रपिता’, पार्टी ने किया सस्पेंड

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को पाकिस्तान का राष्ट्रपिता बताने पर भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश के प्रवक्ता और मीडिया सेल के प्रमुख अनिल सौमित्र को सभी पदों से सस्पेंड कर दिया है और साथ ही उन्हें सात दिनों के अंदर जवाब देने के लिए भी कहा है। दरअसल, सौमित्र ने अपने फेसबुक पोस्ट में विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था, “महात्मा गाँधी राष्ट्रपिता थे, लेकिन पाकिस्तान राष्ट्र के। भारत राष्ट्र में तो उनके जैसे करोड़ों पुत्र हुए। कुछ लायक तो कुछ नालायक।”

इसके साथ ही अनिल सौमित्र अपने पोस्ट में लिखते हैं कि कॉन्ग्रेस ने महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता बताया। राष्ट्र का कोई पिता नहीं होता, पुत्र होता है। चर्च में फादर होते हैं, कॉन्ग्रेस ने उसका हिंदी रुपांतरण कर पिता कर दिया। सौमित्र ने आगे लिखा कि हम गाँधी जी के विचारों को बढ़ाने वाले लोग हैं। संघ के स्वयंसेवक के रुप में हम प्रतिदिन उनका नाम लेते हैं।

बता दें कि, इससे पहले भोपाल से बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा, केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े और सांसद नलीन कतील ने गोडसे को लेकर विवादित बयान दिया था। इस बयान से उपजे विवाद पर अमित शाह ने कहा कि इस तरह के बयान से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से ये भी कहा कि हालाँकि इन तीनों नेताओं ने बयान वापस लेते हुए माफी माँग ली है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने इसे गंभीरता से लेते हुए तीनों नेताओं को नोटिस भेजकर 10 दिनों के अंदर जवाब माँगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कड़े शब्दों में प्रज्ञा के बयान की निंदा की है। पीएम मोदी ने सख्त लहजे में कहा कि भले ही प्रज्ञा ने माफी माँग ली है, लेकिन वो कभी उन्हें दिल से माफ नहीं कर पाएँगे।

BJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पत्रकारिता के ‘नाराज फूफा’ गायब

आम चुनाव के नतीजों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मीडिया के सामने आए हैं। शुक्रवार (17 मई, 2019) को नई दिल्ली स्थित (भारतीय जनता पार्टी) मुख्यायल में पार्टी चीफ अमित शाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में अमित शाह ने कहा कि संगठन के आकार पर हमने मोदी जी के कामों को नीचे तक पहुँचाने का लगातार प्रयास किया। 2006 में हमारे पास छह सरकारें थीं, पर आज 19 सरकारें हैं। शाह ने यह भी बताया कि मोदी सरकार पाँच साल में लगभग 133 योजनाएँ लेकर आई।

नाराज फूफा कहीं नजर नहीं आ रहे

देखने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने की प्रबल इच्छा रखकर महागठबंधन की रैली से लेकर चार्टर प्लेन में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ घूमने वाले NDTV के वरिष्ठ पत्रकार कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। विगत 4-5 सालों में देखने को मिला है कि अक्सर यह पत्रकार, शादी-बरात में नाराज फूफा की तरह ही मीडिया और प्राइम टाइम में नजर आते रहे हैं।

यह भी संभव है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय वो किसी ट्रांसलेटर से अपने किसी फेसबुक पोस्ट का अनुवाद करवाने में व्यस्त हों या फिर किसी आम वाले के पास बैठकर आम की विभिन्न किस्मों पर चर्चा कर रहे हों। आखिरी बार पत्रकारिता का यह नाराज फूफा बेगूसराय में कम्युनिस्ट कामरेड कन्हैया कुमार से एक कठिन सवाल पूछते देखे गए थे। यह कठिन सवाल था, “आप शादी कब करेंगे?”

खुद को ज़रूरत से ज़्यादा गंभीरता से लेने वाले गिरोह विशेष के पत्रकार को ऐसा तो नहीं लगा कि BJP कार्यालय में जाना उनके आदर्शों के खिलाफ है और अब यह कसम खा रखी हो कि जब तक मोदी रेंगते हुए उनके निजी आवास पर नहीं आएँगे वो कठिन सवाल पूछेंगे ही नहीं।

ग्रीन कार्ड और वीजा नीति में बड़ा बदलाव: ट्रंप के इस प्रस्ताव से पहुँचेगा कुशल कर्मियों को फायदा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने योग्यता पर आधारित आव्रजन प्रणाली पेश की है। ट्रंप की इस पेशकश से ग्रीन कार्ड और स्थायी वैध निवास का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय समेत विदेशी पेशेवरों एवं कुशल श्रमिकों को लाभ पहुँचेगा।

इस पेशकश के अनुसार परिवार के बजाए योग्यता को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि इस प्रस्ताव को कानूनी मंजूरी मिल जाती है तो योग्य लोगों के लिए अमेरिका का वीजा प्राप्त करना बेहद आसान हो जाएगा। ट्रंप के प्रस्ताव के मुताबिक शिक्षित, किसी भी कौशल (स्किल) के साथ अंग्रेजी बोलने में माहिर, जॉब ऑफर और अमेरिकी संस्कृति अपनाने वालों को तरजीह दी जाएगी।

ट्रंप ने कहा है कि अभी अमेरिकी आव्रजन कानून प्रतिभाशाली लोगों के साथ भेदभाव करता है, क्योंकि अधिकतर ग्रीन कार्ड कम प्रतिभाशाली लोगों को मिलता है जो कम पैसे लेते हैं।

बता दें अमेरिका हर वर्ष 10 लाख से ज्यादा ग्रीन कार्ड जारी करता है जो विदेशियों को कानूनी रूप से स्थाई निवास का अधिकार है। इसमें 1, 40,000 ग्रीन कार्ड रोजगार पर दिए जाते हैं, बाकी पारिवारिक रिश्ते, शरणार्थी और लॉटरी के आधार पर दिए जाते हैं।

ट्रंप के नए प्रस्ताव से पिछले आँकड़े पूरी तरह पलट जाएँगे। इस प्रस्ताव में कुशल कर्मियों के लिए आरक्षण को करीब 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 57 प्रतिशत करने की बात की गई है। ट्रंप का कहना है कि उनका ये कदम अमेरिका को दूसरे देशों के साथ खड़ा करेगा और वैश्विक रूप से प्रतिद्वंदी बनाएगा।

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मैं वीरभद्र जी से गले मिलता हूँ क्योंकि उन्हें एक्सपीरियंस है: राहुल गाँधी

लोकसभा चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने हिमाचल प्रदेश के सोलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नोटबंदी से लेकर तमाम मुद्दों पर घेरा। 2019 लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के तहत 19 मई को मतदान होना है। जिसके चलते नेताओं के बयानों का सिलसिला भी आखिरी चरण पर और तेज होता जा रहा है।

राहुल ने पीएम मोदी पर नोटबंदी के फैसले में किसी को साथ न लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री ने अपनी कैबिनेट को ताले में बंद कर दिया था। राहुल गाँधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनको समझ ही नहीं है, वायुसेना के लोगों को वह अपना ज्ञान दे रहे हैं। राहुल गाँधी ने कहा कि यदि केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार आती है, तो अभी 22 लाख सरकारी नौकरियाँ खाली हैं, वह लोगों के हवाले हो जाएँगी।

‘मैंने अपना कुर्ता काट दिया, सूटकेस में कम जगह थी, नया आइडिया आया और कुर्ता काट दिया’

राहुल ने पीएम मोदी के गैर-राजनीतिक इंटरव्यू पर तंज कसते हुए कहा, “नरेंद्र मोदी का टीवी पर इंटरव्यू होता है, उन्हें सवाल दिए जाते हैं, पढ़कर जवाब देते हैं। लोग कहते हैं कि बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है लेकिन नरेंद्र मोदी कहते हैं कि मैं आम के पेड़ पर चढ़कर खाता हूँ। मैंने अपना कुर्ता काट दिया, सूटकेस में कम जगह थी, नया आइडिया आया और कुर्ता काट दिया। कौन सी दुनिया में हैं पीएम मोदी?”

‘चीन का सेब खाओ, हिमाचल में पकौड़े तलो’

राहुल गाँधी ने आरोप लगाया कि हिमाचल में चीन से सेब लाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “क्या हिंदुस्तान का सेब मेड इन इंडिया नहीं है, मेड इन चाइना है क्या, जो सेब उगाते हैं उनका नरेंद्र मोदी ने कितना कर्जा माफ किया? वह तो कहते हैं कि चाइना का सेब खाओ, हिमाचल में पकौड़े तलो।”

‘मोदी जी ने अपनी कैबिनेट को ताले में बंद कर दिया था, मुझे SPG ने बताया’

राहुल गाँधी ने कहा, “आरबीआई ने देश की अर्थव्यवस्था को रास्ता दिखाया, 70 साल से देश को चला रहा है। उनसे नहीं पूछा लेकिन पीएम मोदी ने नोटबंदी कर दी। पता नहीं आपको मालूम है या नहीं, नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट को नोटबंदी के समय रेसकोर्स रोड में ताले में बंद कर दिया था। सच्चाई है, एसपीजी वाले मेरी भी सिक्योरिटी करते हैं, इन्होंने मुझे बताया।”

‘वीरभद्र जी को एक्सपीरियंस है’

अनुभव के विषय पर राहुल गाँधी ने कहा कि सुषमा स्वराज जी, अरुण जेटली जी से वो लड़ते हैं क्योंकि उन्हें अनुभव है। इसके बाद उन्होंने मंच पर बैठे हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा कि वो वीरभद्र सिंह के भी गले मिलते हैं, चाहे तो आप उनसे पूछ सकते हैं। ऐसा करने के पीछे उन्होंने कारण बताते हुए कहा, “क्योंकि वीरभद्र जी को अनुभव (Experience) है, इसलिए मैं उनसे गले मिलता हूँ।”

गाँधी या गोडसे पर बयान देने वालों को मैं मन से माफ़ नहीं कर पाऊँगा: PM मोदी

महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान के बाद भोपाल सीट से बीजेपी की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर विवादों में घिरती जा रही हैं। उनके इस बयान पर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से नाराज़ नज़र आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साध्वी के इस बयान पर कड़ी निंदा व्यक्त की। उन्होंने सख़्त लहज़े का इस्तेमाल करते हुए कहा, “गाँधी जी या गोडसे के बारे में जो बयान दिए गए वो बहुत वह ख़राब हैं।” इसके आगे उन्होंने कहा, “ये अलग बात है कि उन्होंने माफ़ी माँग ली, लेकिन मैं उन्हें मन से कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगा।”

बता दें कि पीएम मोदी ने भोपाल सीट से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की उम्मीदवारी को अपना समर्थन दिया था। लेकिन साध्वी के बयान के चलते बीजेपी को बैकफुट पर आना पड़ा। वहीं, विपक्ष ने इस मामले पर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब भोपाल सीट पर चुनाव हो जाने के बाद दु:ख व्यक्त करने से क्या लाभ, इसके लिए उन्हें पहले सोचना चाहिए था।

इससे पहले, रविवार (मई 19, 2019) को होने वाले आखिरी चरण के मतदान से पहले भाजपा नेताओं की तरफ से गोडसे पर दिए गए बयान से पार्टी ने किनारा कर लिया है और साथ ही नोटिस भी भेजा है। इन नेताओं में भोपाल संसदीय सीट से प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा, केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े और सांसद नलीन कतील का नाम शामिल है। इन तीनों नेताओं ने गोडसे को लेकर विवादित बयान दिया था।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद अपने ट्विटर हैंडल से ये जानकारी दी है कि नेताओं के बयानों को अनुशासन समिति के पास भेजा गया और उन्हें दस दिन दिनों के भीतर जवाब देना है। इस मामले में उन्होंने शुक्रवार (मई 17, 2019) को तीन ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा कि विगत 2 दिनों में अनंतकुमार हेगड़े, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और नलीन कटील के जो बयान आए हैं, वो उनके निजी बयान हैं, उन बयानों से भारतीय जनता पार्टी का कोई संबंध नहीं है।

अमित शाह ने दूसरे ट्वीट में लिखा कि इन लोगों ने अपने बयान वापस लिए हैं और माफी भी माँगी है। फिर भी सार्वजनिक जीवन तथा भारतीय जनता पार्टी की गरिमा और विचारधारा के विपरीत इन बयानों को पार्टी ने गंभीरता से लेकर तीनों बयानों को अनुशासन समिति को भेजने का निर्णय किया है।

अपने तीसरे ट्वीट में शाह ने लिखा है कि अनुशासन समिति तीनों नेताओं से जवाब माँगकर उसकी एक रिपोर्ट 10 दिन के अंदर पार्टी को दे, इस तरह की सूचना दी गई है।

दरअसल, प्रज्ञा ठाकुर ने विवादित बयान देते हुए महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त करार दिया था। उन्होंने कहा था कि वो देशभक्त थे, देशभक्त हैं और देशभक्त रहेंगे। हालाँकि प्रज्ञा ने अपने इस बयान के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी माँग ली है। वहीं, अनंत हेगड़ ने भी अपने ट्वीट के लिए माफी माँगते हुए कहा कि उनका ट्विटर अकाउंट हैक हो गया था। उन्होंने कहा कि गाँधी के हत्यारे के लिए कोई सहानुभूति नहीं हो सकती।

बता दें कि, इससे पहले हेगड़े के ट्विटर अकाउंट से ट्वीट हुआ था कि गोडसे के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है और माफी माँगने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही नलिन कतील ने भी अपने के लिए माफी माँगी है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की तुलना गोडसे से करते हुए ट्वीट किया था, “गोडसे ने एक को मारा, कसाब ने 72 को मारा लेकिन राजीव गाँधी ने 17000 को मारा। अब आप खुद तय कर लो कि कौन ज्यादा क्रूर है।” नेताओं के माफी माँगने के बाद भी पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया है। गौरतलब है कि कमल के हासन के द्वारा गोडसे को पहला हिन्दू आतंकवादी बताने के बाद से ही इस पर सियासी बवाल मचा हुआ है।