Home Blog Page 5848

सैटलाइट इमेज से ख़ुलासा: चीन ने ढाह दी 36 मस्जिदें, शिनजियांग में रोज़ा रखने पर भी प्रतिबन्ध

चीन में मुस्लिमों पर की जा रही कार्रवाई रमजान महीने में थमने का नाम नहीं ले रही है। इस्लाम के इस पवित्र महीने में चीन स्थित टकलामकान रेगिस्तान में हज़ारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग आया करते थे। यहाँ कुछ ऐसी मस्जिदें स्थित थीं, जहाँ 8 वीं शताब्दी के एक इस्लामिक योद्धा की याद में लोग नमाज़ पढ़ते थे। लेकिन, इस साल यह स्थल खाली पड़ा हुआ है। ‘द गार्डियन’ के एक ख़ुलासे के अनुसार, चीनी मुसलामानों के लिए हज की तरह महत्व रखने वाला ये स्थल आज खाली इसीलिए पड़ा हुआ है क्योंकि इसे ढाह दिया गया है। चीन ने इमाम आसीन दरगाह के गुम्बद को छोड़ कर इसके बाकी हिस्से को मिट्टी में मिला दिया है। यहाँ लगे झंडे और चढ़ावे गायब हो गए हैं।

2010 में कुछ यूँ गुलजार था ईमान वसीम दरगाह (साभार: द गार्डियन)

2016 से अब तक अकेले शिनजियांग प्रांत में ही 25 से अधिक मस्जिदों को तोड़-फोड़ दिया गया है। ‘द गार्डियन’ ने कुछ अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर चीन की 100 मस्जिदों को ट्रैक किया। इसमें उसने पाया कि 91 में से 31 मस्जिदों को बड़ी क्षति पहुँचाई गई है, वो भी 3 वर्षों के भीतर। इनमें से 15 मस्जिदों को तो गायब ही कर दिया गया, वहीं कुछ के गुम्बद गायब हैं तो कुछ की मीनारों का अता-पता नहीं है। कुछ मस्जिदों से उनका गेटहाउस ही गायब है। इसके अलावा 9 अन्य छोटे-मोटे मस्जिदों को भी ख़ासा नुकसान पहुँचाया गया है। चीन ने चुन-चुन कर उन मस्जिदों को ज्यादा तबाही पहुँचाई है, जहाँ उइगर मुसलमान भारी संख्या में जाया करते थे।

करगिलिक मस्जिद की पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें (साभार: द गार्डियन)

रेगिस्तान में जाफरी सदैव नामक इस्लामिक शख़्सियत की याद में एक मस्जिद था। यहाँ आने के लिए मुस्लिम 70 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक दुर्गम यात्रा किया करते थे। कहा जाता है कि उन्होंने ही इस प्रान्त में आकर इस्लाम धर्म को फैलाया था, इसका प्रचार-प्रसार किया था। न सिर्फ़ यहाँ स्थित मस्जिद और दरगाह, बल्कि मुस्लिम आगुन्तकों के लिए ठहरने वाले स्थल को भी तोड़ डाला गया है। दक्षिण शिनजियांग में करगिलिक मस्जिद इस क्षेत्र का सबसे बड़ा मस्जिद था। यहाँ हर सप्ताह मुस्लिम नमाज़ पढ़ने के लिए जमा होते थे। अब इसका कोई अता-पता नहीं है। ऐसा लगता है, जैसे यहाँ कुछ रहा ही न हो।

होतन के पास युटियन एटिका (Yutian Aitika) नामक एक मस्जिद था, जिसका इतिहास काफ़ी पुराना है। ये पिछले 800 वर्षों से यहाँ स्थित था। ये भी अपने इलाक़े का सबसे बड़ा मस्जिद था। अब इसी जगह बस कुछ खँडहर बचा है। चीन का मानना है कि वह सभी धर्मों के क्रियाकलापों को पूरी स्वतन्त्रता देता है लेकिन लोगों का कहना है कि चीन इस्लाम का चीनीकरण करने के लिए एक अभियान चला रहा है, जिसके तहत मस्जिदें तोड़ी जा रही हैं और उइगर मुस्लिमों को गिरफ़्तार कर प्रताड़ित किया जा रहा है। राहिले दावुत, जो चीन में स्थित मस्जिदों एवं दरगाहों के बारे में लिख रहे थे, वो अचानक से गायब हो गए।

राहिले का कहना था कि जिस तरह से चीन की नीतियाँ चल रही हैं, उससे लगता है कि कुछ दिनों बाद उइगर मुस्लिमों को अपने इतिहास एवं संस्कृति का ज्ञान ही नहीं रहेगा। उधर चीन ने शिनजियांग में रमजान महीना शुरू होते ही सरकारी अधिकारियों, छात्रों और बच्चों के रोज़ा रखने पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। इन सब ख़बरों के बीच पाकिस्तान भी चुप है और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ऐसे सवालों को टाल जाते हैं या गोलमोल जवाब देकर चलते बनते हैं।

BJP जीतेगी 300 सीटें, भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिर्विज्ञान के प्रोफेसर मध्य प्रदेश में निलंबित

उज्जैन स्थित विक्रम विश्वविद्यालय में कार्यरत ज्योतिर्विज्ञान अध्ययनशाला के प्रमुख को आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने ताज़ा लोकसभा चुनाव में भाजपा के 300 सीटें जीतने की घोषणा की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रोफेसर ने कहा था कि भाजपा अकेले अपने दम पर 300 सीटें जीतेगी, वहीं पूरे राजग गठबंधन के खाते में 300 से अधिक सीटें आएँगी। विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डीके बग्गा ने बुधवार (मई 8, 2019) को कहा, “सोशल मीडिया पर राजनीतिक पोस्ट डालकर आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन पर इस संस्थान की ज्योर्तिविज्ञान अध्ययनशाला के अध्यक्ष राजेश्वर शास्त्री मुसलगाँवकर को निलंबित कर दिया गया है।

मुसलगाँवकर पर जिस फेसबुक पोस्ट को लेकर कार्रवाई की है, उसे उन्होंने 28 अप्रैल को लिखा था। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा था, “अभी भाजपा 300 के पास और राजग 300 के पार।” हालाँकि, अगले ही दिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगने के बाद इस पोस्ट को हटा भी लिया था। इसके अगले दिन 29 अप्रैल को शेयर किए गए फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा “मेरे द्वारा आकलित ज्योतिषीय आकलन मात्र शास्त्रीय प्रचार की दृष्टि किया गया था, यदि मेरे प्रयोग से किसी की भावना आहत होती है तो मैं क्षमा चाहता हूँ।” पुलवामा हमले के बाद हुई एयर स्ट्राइक के बाद भी प्रोफेसर शास्त्री ने मृत आतंकियों की गिनती पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लिया था।

प्रोफसर शास्त्री के निलंबन आदेश का पत्र

भाजपा ने प्रोफेसर शास्त्री के निलंबन का विरोध किया है। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता उमेश शर्मा ने इस पर पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा, “विभिन्न विषयों पर ज्योतिषीय आकलन जाहिर करना ज्योतिर्विज्ञान के प्राध्यापकों के अध्ययन-अध्यापन का अनिवार्य अंग होता है। ऐसे में मुसलगाँवकर जैसे विद्वान ज्योतिषाचार्य पर निलंबन की कार्रवाई सरासर अनुचित है। उनके निलंबन आदेश को शीघ्र रद्द किया जाना चाहिए।” भाजपा ने प्रोफेसर शास्त्री के बचाव में उनका निलंबन रद्द करने की माँग की।

बकलोल गालीबाज ट्रोल स्वाति का मोदी-शाह प्रेम और ‘द वायर’ की नई कलाकारी

स्वाति चतुर्वेदी यूँ तो स्वयं को पत्रकार बताती हैं लेकिन इंटरनेट पर गाली देने, ट्रोलिंग और फेक न्यूज फैलाने में वो अपनी पीढ़ी और विचारधारा में अग्रगण्य मानी जाती हैं। इनकी विचारधारा का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनके लेख ‘द वायर’ जैसे प्रोपेगेंडा पोर्टल पर लगातार छपते हैं।

ख़ैर, कुछ लोग वैसे होते हैं जिन्हें अचानक से दो शब्द याद आते हैं और वो सोचते हैं कि अब इन पर एक लेख लिख दिया जाए। जैसे कि सप्ताह भर पहले ‘बैंजल’ नाम के हैंडल से ट्विटर पर कुख्यात तथाकथित पत्रकार को ‘डॉग व्हिसल’ और ‘वल्चर पोलिटिक्स’ जैसे वाक्यांशों का कहीं इस्तेमाल करने की इच्छा जगी होगी तो उन्होंने दिन रात एलईडी लाइट में ईश्वरचन्द्र विद्यासागर टाइप मेहनत करके कुछ लेख जैसा लिखा, जिसे यूँ तो एक शब्द में वाहियात कहा जा सकता है, लेकिन इन छद्म-लिबरलों की क्षीण मेधा को सबके सामने लाना भी मानवता के लिए आवश्यक है, इसलिए मैं पूरा लेख लिखूँगा।

बकलोल ट्रोल दीदी ने पहले ही पैराग्राफ़ में यह साबित कर दिया कि हेडलाइन में भी वो शब्द होने चाहिए, शुरुआती पैराग्राफ़ में भी और जब लोगों को लगने लगे कि ये क्या चल रहा है लेख में, तो अंत में भी वही चार शब्द घुसा दिए जाएँ।

न तो इस ट्रोल को लोकतंत्र के कॉनसेप्ट से कोई लेना-देना है, न ही ‘द वायर’ को, क्योंकि इनके फ़ंडामेंटल्स हिले हुए हैं। लोकतंत्र में बहुमत से जब कोई चुन कर आता है, तो इसका सीधा मतलब है कि उसे ज़्यादा लोग चाहते हैं। इसलिए उसकी राजनीति पर कमेंट करना आपका हक़ है, लेकिन उसे इस तरह से दिखाना कि बाकी दुनिया ही पागल है, ये आपका अहंकार है।

बैंजल नामक ट्रोल ने प्रोपेगेंडा पोर्टल की सफ़ेद पिक्सलों को काला करते हुए लिखा है कि मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में नेहरू को भला-बुरा कहने से शुरू किया और दूसरे कार्यकाल के लिए राजीव गाँधी को, जिनकी हत्या 21 साल पहले हो गई, ‘भ्रष्टाचारी नंबर एक’ कहा है।

इसमें मोदी ने गलत क्या कहा, यह कहने की ज़रूरत ‘द वायर’ या उसके ट्रोल ने नहीं उठाई। इन्हें लगता है कि ये जो लिखते हैं वो ब्रह्मवाक्य है। पीएम मोदी ने नेहरू को भला बुरा नहीं कहा बल्कि उसकी गलत नीतियों से देश को हुए नुकसान से अवगत कराया जिसे इरफ़ान हबीब से लेकर गुहा और रोमिला थापर जैसे कहानीकारों, यानी फ़िक्शन रायटर्स, ने इतिहास के नाम पर महिमामंडन करके हीरो की तरह दिखाया। नेहरू को ऐसे पढ़ाया गया जैसे उसके लम्बे कार्यकाल में कोई गलती थी ही नहीं।

वैसे ही, राजीव गाँधी की मृत्यु उन्हें बाकी के अपराधों से मुक्ति नहीं दे देती। इस ट्रोल ने, या इस प्रोपेगेंडा पोर्टल ने यह तो कभी नहीं लिखा ‘चौकीदार चोर है’ का नारा कैट व्हिसल पोलिटिक्स है या फिर नकली गाँधी परिवार के संस्कारों की अभिव्यक्ति। जिस व्यक्ति पर कोई आरोप तक कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया हो, उसे हर रैली में राफेल से लेकर जीएसटी और नोटबंदी जैसी बातों पर हत्यारा, लुटेरा और पता नहीं क्या-क्या कहा गया। तब तो मर्यादा और तथ्यों की बात इस ट्रोल और ‘द वायर’ पर नहीं दिखी!

राहुल गाँधी के जवाब को ग्रेसफुल कहने वाली ट्रोल भूल गई कि ‘चौकीदार चोर है’ में जो ग्रेस है, वो दिन में तीस बार सबको सुनाई देता है। लेकिन फिर याद आता है कि चाटुकारिता भी तो एक गुण है जो सबके पास स्वाति चतुर्वेदी वाली सहजता से नहीं आता।

इस बकलोल ने आगे लिखा है कि मोदी ने राहुल के ग्रेसफुल रिप्लाय के बाद अपना ज़हर और तेज कर दिया और राजीव गाँधी से जुड़ी बातों को लगातार उठाया। अरे ट्रोल पत्रकार मैडम, ये तो बताओ कि मोदी ने जो आरोप लगाए वो सही हैं कि गलत? ये तो बताओ कि उस पर कोर्ट का फ़ैसला और जन सामान्य में किस तरह की चर्चा है या फिर उसे बैलेंस करती रहोगी?

बैलेंस करने में भी फिर वही घमंड कि हमने जो लिख दिया वही तथ्य है। मोदी कार्यकाल के पाँच सालों को ट्रोल ने लिखा है कि वो ‘एबिसमल’ थे। उसके बाद लिखा है कि मोदी ने अपनी असफलताओं को नेहरू के नाम कर दिया। लेकिन मोदी की असफलताएँ क्या हैं, इस पर पूरे लेख में कुछ नहीं है।

मोदी की सफलताएँ इसलिए ज्यादा उभर कर सामने आती हैं क्योंकि सच में पिछली सरकारों ने सामान्य जनजीवन को खेल समझ रखा था और ग़रीबों को सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल किया। सड़कें और ढाँचे तो खराब होते और बनते रहते हैं, लेकिन पिछली सरकारों ने बिजली, पानी, आवास, शौचालय, जैसे मुद्दों पर क्या किया था कि आज करोड़ों लोगों के लिए मोदी को इनकी व्यवस्था में लगना पड़ा?

आखिर किस तरह की नीतियाँ रही थीं पिछली सरकारों की कि असम और बंगाल में बंग्लादेशी भरे पड़े हैं? आखिर क्या मजबूरियाँ थी पिछली सरकारों की कि जन धन के माध्यम से फायनेंशियल इन्क्लूजन के लिए खाते खोलने की ज़िम्मेदारी मोदी ने उठाई। क्योंकि खाते में पैसे जाने से चोरों को फायदा नहीं मिलता। इनकी पार्टियों के फ़ंड सूख जाते। इसलिए, इन्होंने बेशक योजनाएँ बनाईं लेकिन उन्हें वृहद् स्तर पर लागू नहीं किया।

इसलिए, ये चम्पक लेफ़्ट-लिबरल ईकोसिस्टम जितना चिल्ला ले कि मोदी ने तो कॉन्ग्रेस की योजनाओं का नाम बदल दिया, लेकिन सत्य यही है कि योजना का सिर्फ नाम ही नहीं बदला, उस पर काम भी किया, और करोड़ों ज़िंदगियों को उन छोटी सुविधाओं से छुआ, बेहतरी दी, जो साउथ और नॉर्थ ब्लॉक में बैठे लोगों के लिए नगण्य या इन्सिग्निफिकेंट थीं। आपके और हमारे लिए बिजली, पानी, छत, शौचालय सुविधा की तरह नहीं दिखती, लेकिन जिनके पास एक्सेस नहीं है, उनके लिए ये फ़र्क़ ज़मीन-आसमान का है। इसलिए मोदी तो नेहरू को भी कोसेगा, मनमोहन को भी और सोनिया को भी।

आगे बकलोल ट्रोल और ‘द लायर’ ने सफ़ेद पिक्सलों को गंदा करते हुए कहा है कि आखिर मोदी अपनी नोटबंदी की सफलताओं और गुड गवर्नेन्स की बातों पर क्यों नहीं चुनाव लड़ रहा। फिर वही बात कि आपको मोदी की स्पीच सुन कर हृदयाघात पहुँचता है, तो उसका क़तई मतलब नहीं कि मोदी विकास की बातें नही कर रहा रैलियों में। हर रैली में मोदी अपनी योजनाओं, उनसे होने वाले फ़ायदों, नोटबंदी, जीएसटी, वन रैंक वन पेंशन राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार के रुख़ की ही बातें करता है। यही कारण है कि लोगों को यह सब दिखता है, लायर जैसे प्रोपेगेंडाबाजों को नहीं।

जब मोदी की बात हो तो ऐसे ट्रोल पत्रकार 2002 की बातें कैसे नहीं करेंगे! वो तो आएगा ही। वर्तमान की बातें नहीं होंगी। बॉगी में बैठे कारसेवकों को बेरहमी से जला देने वाली भीड़ का नाम नहीं लिखा जाएगा, पुलवामा के बलिदानियों को लिए ‘मारे गए’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल होगा। बताया जाएगा कि उनकी लाशों की राजनीति हुई है। अरे बकलोल, पहले खुद तो वीरगति को प्राप्त हुए जवानों के लिए थोड़ी संवेदना तो दिखा दो। मैं जानता हूँ कि ये लोग ऐसे शब्द जानबूझकर लिखते हैं, क्योंकि आदत से मजबूर हैं। जितना राजनीतिकरण इन लोगों ने पुलवामा का यह कह कर किया है कि वो हमला हुआ ही कैसे, उतनी बार तो मोदी ने इस पर रैलियों में बात भी नहीं की होगी।

इन लिबरलों की कितनी सुलगी हुई है मोदी और योगी से उसका उदाहरण आगे बैंजल ने दिया है कि योगी जैसे एक्सट्रेमिस्ट साधु को मुख्यमंत्री बना दिया। हालाँकि, सिवाय अफ़वाहों के योगी पर एक भी केस साबित नहीं हुआ, लेकिन इस ट्रोल ने ऐसा लिखा है, और वायर ने पिक्सल आवंटित कर रखे हैं गंदे करने को लिए, तो लिखा जा रहा है, पढ़ा जा रहा है।

आगे प्रज्ञा ठाकुर को खींच लाई, जो कि एक नेचुरल प्रोग्रेशन है- मोदी से योगी, योगी से प्रज्ञा। बकलोल ट्रोल दुःखी हो गई कि ये कितनी गलत बात है कि आतंक के आरोपित को इन्होंने उम्मीदवार बनाया है। हालाँकि आरोपितों की बात करते हुए वीआईपी क्षेत्रों के ज़मानती सांसदों और ख़ानदानी घोटालेबाज़ों के नाम लेना स्वाति जी भूल गईं। ऐसे समयों पर वामपंथी पत्रकारों से स्मृतिदोष हो ही जाता है। ये मानसिक डिफॉर्मिटी है, जो छद्म लिबरलों में नेचुरली दिखता है।

योगी आदित्यनाथ द्वारा मोदी की सेना पर बयान जारी करने के बाद भी उसे ऐसे दिखाना कि भारतीय सेना मोदी की बपौती सेना थी, योगी ने वही बोला था, दिखाता है कि जब पहले से ही मन बना लिया हो कि क्या साबित करना है, फिर QED पन्ने के नीचे में लिख कर, नीचे से ऊपर की ओर बढ़ा जाता है।

और अंत में, जब इतनी बातें हो गईं तो स्वाति जी के गुप्त सूत्रों ने उन्हें एक ग़ज़ब की जानकारी दे दी, जो शायद मोदी और शाह को भी न पता हो। स्वाति जी लिखती हैं कि मोदी और शाह ने RSS को कह दिया है कि जब भाजपा सत्ता में वापसी करेगी तो संविधान में बदलाव किए जाएँगे ताकि भारतीय बहुसंख्यक आबादी के भावों को प्रधानता मिले और ‘सेकुलरिज्म’ पर टैक्स लगाया जाएगा।

कुछ दिनों पहले ऐसे ही इनके ईकोसिस्टम ने यह बात फैलाई थी कि मोदी चुनाव ही बंद करवा देगा। वो फर्जीवाड़ा चल नहीं पाया। हर दिन आपातकाल लाने वाले इस गिरोह और पत्रकारिता ताकि समुदाय विशेष, पाक अकुपाइड पत्रकारों का नया प्रपंच है कि संविधान को ही बदल दिया जाएगा। ये इनका पुराना हथियार है कि लोगों में डर फैलाओ यह कह कर कि मोदी डर फैला रहा है। वस्तुतः, लोगों को हर रात डराने का काम इनका गैंग करता रहा है।

लोग हैं कि राज्यों में भाजपा की सरकार को चुनते जा रहे हैं। फिर, आने वाले दिनों में आप इस तरह की हेडलाइन पढ़ेंगे जिसमें भारतीय जनता को ही ये लोग गरियाते मिलेंगे कि ये लोग कितने मूर्ख हैं जिन्होंने मोदी को दोबारा सत्ता दे दी।

जो बकलोल है, जो ट्रोल है, उसकी बातों को तो गंभीरता से नहीं लेना चाहिए, लेकिन ‘द वायर’ के प्रोपेगेंडा पर लगाम ज़रूरी है। मुझे अच्छा लगा कि इस गालीबाज ट्रोल बैंजल को कहीं न कहीं यह आशा तो है कि मोदी वापस आएगा, और अगर इसे राजनीति का थोड़ा भी ज्ञान है तो यह भी पता होगा कि संविधान में बदलाव के लिए कितनी संख्या चाहिए। इस कारण से फ़िलहाल तो इनके मुँह में घी-शक्कर।

रवीश का रूहअफजा – ठन्डे शरबत का गरम मामला

महागठबन्धन के मंच पर न्यूट्रल गियर वाले पत्रकार जी की तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर पर रवीश कुमार जी ने सफाई देते हुए कहा है कि वे तो रूहअफजा पिलाने गए थे, तभी उनकी फोटो खींच ली गई। प्राइम टाइम पर भाव न मिलने के कारण उन्होंने रैलियों में शरबत पिलाने का ठेका लिया है।

रवीश जी ने बताया कि भाजपा की रैली में आमरस और गठबंधन की रैली में रूहअफजा की माँग रहती है। कॉन्ग्रेस की रैली में सप्लाई राहुल जी स्वयं करते हैं। एक बार जब आम के बागों में बहार आई, तो वे चुन-चुन कर आम लाए और बीजेपी की रैली में आमरस का ठेला लगाया लेकिन राष्ट्रवादियों ने उन्हें ही ठेल दिया। उनकी शक्ल भी आम की गुठली जैसी हो गई, लेकिन मोदी जी ने न उनके आम पर ध्यान दिया न रस पर। रवीश को जानकर भारी झटका लगा कि मोदीजी तो केवल ख़ास आमों का रस पीते हैं। इसलिए बचा हुआ आमरस लेकर उन्हें बेगूसराय जाना पड़ा।

उसके बाद से वे केवल रूहअफजा की सप्लाई ही करते हैं, क्योंकि उसका रंग लाल होता है, और जब हर ग्लास में रूहअफजा भरते हुए लाल सलाम कहते हैं तो उनकी आत्मा को ठंडक मिलती है।

जादू जी ने कहा है कि उनकी सरकार बनने पर रूहअफ़ज़ा की सप्लाई हर टोंटी में की जाएगी। जब किस्मत के तारे करवट लेंगे, हम हर टोंटी में शरबत देंगे। इस पर महागठबंधन की सुपर कमांडर ने पर्ची में से पढ़ कर बताया कि टोंटी वालों को अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है। वे गर्मी का मौसम निकलने के बाद रूहअफजा की सप्लाई करेंगी। वो इसके लिए एक लाख मूर्तियों का ऑर्डर देंगी और हर मूर्ती के पैरों में रूहअफजा का फव्वारा लगाया जाएगा।

सबसे बड़ी देवी ने बताया कि उन्होंने देश का सबसे बड़ा तबेला चलाया है, ये समझिए एक पूरे राज्य को अपने तबेले से कम नहीं समझा। जब उनके पति जेल में नहीं थे तो भैंस के दूध में डालकर रूहअफ़ज़ा पीते थे। तबेले में सब कितना खुश रहते थे, उनकी भैंसें भी बिना रूहअफजा के पानी न पीती थीं। अब तो सब बदला निकाला जा रहा है।

कुमारस्वामी से रूहअफजा के विषय में पूछने पर वे फफक-फफक कर रो पड़े और कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

उधर पश्चिम बंगाल की सुल्ताना ने रूहअफ़ज़ा को बैनर्जी की एनर्जी बताते हुए कहा है हम चुनाव में सब बीजेपी वालों का सर फोड़-फोड़ कर चेक कर रहे हैं कि उन्होंने शरीर में रूहअफ़ज़ा तो नहीं छुपा रखा। जिस पर चुनाव आयोग ने चुप रहने का साहसिक फैसला किया है।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ने गरीबों का अगड़म बगड़म करोड़ बोतल रूहअफजा अम्बानी की जेब में डाल दिया है। घबराइए मत, वो हमदर्द बनेंगे और आप सबकी जेब में रूहअफजा डालेंगे। पंचवर्षीय प्रदर्शनी जी ने कहा है कि अगर पार्टी चाहेगी तो वो रूहअफजा भी पी लेंगी।

झाड़ू गैंग ने आम को बस कुछ ही दिनों का फल कहते हुए कहा है कि लोग आमरस पीकर अपने पैसे बर्बाद न करें। रूहअफजा को राष्ट्रीय शरबत बनाना चाहते हैं तो उन्हें चंदा दें, वे मोहल्ला शरबत केंद्र खोलकर सबको मुफ्त शरबत देंगे। उसमें वैज्ञानिक कारणों से थोड़ा कीचड़ भी मिलाएँगे।

विख्यात बुद्धिजीवी शरबती लाल का मानना है कि बाज़ार से रूहअफजा गायब होने में केंद्र सरकार का हाथ हो सकता है। बनाना शेक का ठेला चलाने वाले शेक-हर ने रूहअफजा न मिलने को देश पर भारी संकट बताते हुए इसे केंद्र सरकार की बड़ी नाकामी बताई है। जिसके जवाब में राममाधव ने कहा कि इसमें हमारी केवल उँगलियाँ हैं। जो काम उँगलियों के इशारे पर हो सकता है, उसमें पूरा हाथ नहीं डालते।

देश के इकलौते विश्वसनीय पोल बाबू ने बिना पोल के ही रूहअफजा को शरबतों का शरबत कहते हुए इसे राष्ट्रीय समस्यायों में बड़ी समस्या घोषित कर दिया है। उन्होंने बताया कि आचार संहिता लगी होने के कारण वे अभी आँकंड़े नहीं बता रहे हैं।

लेखक: अजय चंदेल

‘भोला’ बनकर 2 साल तक शोषण करता रहा शफीक अहमद, FIR होने पर किया लड़की को किडनैप

अपना नाम और धर्म छुपाकर दूसरे धर्म की लड़कियों को शादी का वादा देकर उन्हें धोखा देने की घटनाएँ रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसा ही एक ताजा प्रकरण उत्तर प्रदेश के मथुरा में देखने को मिला है। यहाँ लड़की को प्रेम के जाल में फँसाने के लिए ‘भोला’ ने कई तरीके अपनाए। लड़की को यह भी झाँसा दिया कि वो उससे किसी भी कीमत पर विवाह करेगा। लड़की इस धूर्त ‘भोला’ की चाल को समझ नहीं सकी और उसके चंगुल में फँसती चली गई। अंजाम यह हुआ कि शादी का झाँसा देकर उस युवक ने इस लड़की से शारीरीक संबंध बनाए और बाद मे भेद खुलने पर उसे यातनाएँ भी दीं।

ट्रेन में हुई थी ‘भोला’ से मुलाकात

पुलिस अब इस लड़के की तलाश कर रही है। हाथरस की रहने वाली एक लड़की मथुरा में नौकरी करती थी और वो हर रोज हाथरस से ट्रेन पकड़ कर मथुरा आती थी। एक दिन ट्रेन में उसकी मुलाकात एक शख्स से हुई। इसके बाद ट्रेन में अक्सर इस लड़की की मुलाकात इस युवक से होने लगी। इस युवक ने मौका देखकर लड़की से पहचान बढ़ाने की कोशिश की और लड़की को अपना नाम भोला बताकर उससे दोस्ती भी कर ली। ट्रेन में रोज होने वाली मुलाकात पहले दोस्ती में बदली और फिर यह नजदीकी इतनी बढ़ गई कि दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। भोला ने लड़की से वादा किया कि वो उससे शादी करेगा। शादी का वादा कर भोला ने कई बार लड़की से शारीरीक संबंध भी बनाए।

शफीक अहमद निकला ‘भोला’

रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों के बीच मुलाकात और संबंधों का सिलसिला जारी था। इस बीच बीते अप्रैल 25, 2019 को अचानक लड़की को पता चला कि उसके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। लड़की को पता चला कि जिसे वो ‘भोला’ समझ रही थी या भोला के नाम से जानती थी, दरअसल उसका असली नाम शफीक अहमद है। शफीक मथुरा के राया, मोहल्ला पठानपाड़ा का रहने वाला है। यह बात पता चलते ही युवती के पैरों तले जमीन खिसक गई। प्यार में धोखा खाने के बाद इस लड़की ने शफीक से सारे रिश्ते तोड़ दिए और उसने फैसला किया कि वो अब उसे सजा जरूर दिलवाएगी।

शफीक ने अपने भाई और पिता के साथ मिलकर किया पीड़िता का अपहरण

विगत मई 01, 2019 को यह लड़की शफीक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए घर से निकली। लेकिन रास्ते में शफीक ने अपने भाई और पिता के साथ मिलकर उसका अपहरण कर लिया। करीब 5 दिनों तक यह युवती किडनैपरों के चंगुल में रही और उनकी यातनाएँ सहती रही। लेकिन एक दिन अचानक मौका पाकर युवती किडनैपर्स के चंगुल से बचकर निकल गई। मंगलवार (मई 07, 2019) को इस लड़की ने मथुरा के राया थाने में जाकर शफीक और उसके घरवालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रोहन लाल ने कहा है कि पुलिस अब इस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है। इस मामले में पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी।

बालाकोट: 170 आतंकी मारे गए, मदरसा अभी भी Pak सेना के कब्जे में, विदेशी पत्रकार फ्रांसेस्का का दावा

भारत द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में किए गए एयर स्ट्राइक पर नया खुलासा हुआ है जो भारतीय दावों को और भी पुष्ट करता है। भारतीय वायु सेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक पर विदेशी जर्नलिस्ट ने दावा किया है कि इस स्ट्राइक में जैश-ए-मोहम्मद के 130 से 170 आतंकियों के मारे गए हैं।

पत्रकार फ्रांसेस्का मैरिनो ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि स्थानीय सूत्रों का कहना है कि शिविर में अभी भी लगभग 45 आतंकियों का इलाज चल रहा है। ये भी दवा किया गया है कि लगभग 20 लोगों की मौत इलाज के दौरान हुई। हालाँकि, उस क्षेत्र को पाकिस्तानी सेना ने अभी भी सील किया हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि घायलों का अभी भी अस्पताल में इलाज नहीं हो रहा है। उन्हें एक अस्थायी सुविधा में रखा गया है।

पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायु सेना द्वारा 26 फरवरी 2019 को किए गए एयर स्ट्राइक पर भारत में राजनीतिक बहस जारी है। पहले भी भारतीय सेना ने इससे जुड़े कई सबूत मीडिया के सामने रखे थे। और अब एक विदेशी पत्रकार की पुष्टि ने भारतीय वायु सेना की कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) आतंकवादी समूह के आतंकियों के मारे जाने का खुलासा किया है। हालाँकि, विदेशी पत्रकार ने 170 आतंकवादियों के मारे जाने को रिपोर्ट किया है।

बता दें कि बालाकोट में IAF के हवाई हमले जम्मू-कश्मीर में घातक पुलवामा आत्मघाती हमले के कुछ दिनों बाद हुए, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 40 जवान बलिदान हो गए थे। JeM ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति द्वारा जेइएम चीफ मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध किए जाने के कुछ ही दिन बाद फ्रांसेस्का मैरिनो की यह रिपोर्ट आई है।

‘मोदी-मोदी’ नारे लगाकर दिग्विजय सिंह का रोड शो ‘हैक’ करने वालों पर दर्ज हुई FIR

2019 के आम चुनाव में मीडिया और विपक्ष, मोदी लहर को नकारने का प्रयास करता जा रहा है। लेकिन, जमीनी हकीकत ये है कि मोदी लहर सबसे ज्यादा कॉन्ग्रेस की रैलियों में ही हर दूसरे दिन देखने को मिल रही है। लहर के कारण 8 मई को भोपाल में कॉन्ग्रेस के विवादित नेता दिग्विजय सिंह के रोड शो में मोदी-मोदी के नारे लगाने वालों पर FIR दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि 4 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। दिग्विजय भोपाल से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार हैं और उनके सामने भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को उतारा है।

भोपाल में बढ़ती सियासी सरगर्मी के बीच कॉन्ग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने कंप्यूटर बाबा के साथ शहर में रोड शो किया। इससे पहले मंगलवार (मई 07, 2019) को दिग्विजय सिंह की जीत के लिए कंप्यूटर बाबा की अगुवाई में साधु-संत समाज हठ योग पर बैठे थे।

दिग्विजय की रैली में छा गया ‘भगवा’

दिग्विजय सिंह की इस रैली में पूरा माहौल भगवा रंग में रंगा नजर आया। रैली में शामिल लोगों ने भगवा झंडा लिया हुआ था और गले में भगवा पट्टे भी ओढ़े हुए थे। इस दौरान मध्य प्रदेश पुलिस के जवान भी सादी वर्दी पहने गले में भगवा रंग का पटका डाले नजर आए। शायद इसी से बौखलाकर जब टाइम्स नाउ ग्रुप के रिपोर्टर दिग्विजय सिंह के पास पहुँचे, तो उन्होंने उसे ‘रिपब्लिक TV’ रिपोर्टर बताकर ‘पक्षपाती’ (Biased) कहकर भगा दिया और जवाब देने से मना कर दिया।

राहुल गाँधी के रोड शो में भी लगे ‘मोदी जिंदाबाद’ के नारे

धनबाद में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के रोड शो के दौरान पीएम मोदी जिंदाबाद के नारे लगे। दरअसल, रोड शो के दौरान जब कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ‘चौकीदार चोर है’ के नारे लगा रहे थे, तो सड़क के किनारे और घरों की छत पर खड़े लोग नरेन्द्र मोदी जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। लोगों को यहाँ तक भी कहते सुना गया कि हमारा ‘चौकीदार प्योर है, उनका आना श्‍योर है।’ हालाँकि, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी इस ओर ध्यान दिए बिना रोड शो करते आगे बढ़ते चले गए।

राबड़ी ने PM मोदी को बताया ‘जल्लाद’, कहा ‘वो जजों और पत्रकारों को मरवाते हैं’

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में विवादित टिप्पणी की है। राबड़ी ने चुनाव प्रचार को बदरंग रूप देते हुए पीएम मोदी को जल्लाद कहा। इससे पहले राहुल गाँधी भी सुप्रीम कोर्ट के हवाले से ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दे चुके हैं, जिस पर उन्हें कोर्ट में माफ़ी माँगने को मज़बूर होना पड़ा। लोकसभा चुनाव के 5 चरणों का मतदान संपन्न हो चुका है और बिहार में सभी 7 चरणों में चुनाव होने हैं। ऐसे में, बिहार का सियासी पारा अंतिम चरण के मतदान तक गर्म ही रहने की उम्मीद है। राबड़ी देवी ने प्रियंका गाँधी द्वारा पीएम मोदी को दुर्योधन कहे जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “प्रियंका ने नरेंद्र मोदी को दुर्योधन बोल कर ग़लत किया, वो सब तो जल्लाद हैं, जल्लाद।” पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि रोज़ जजों और पत्रकारों को मरवाने वाले लोगों का विचार खूँखार होता है।

राबड़ी देवी के पति व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भ्रष्टाचार के आरोपों में राँची के बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। राजद सुप्रीमो पर जेल से ही बिहार चुनाव को प्रभावित करने का आरोप है। ये ख़ुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगाए थे, जिसके बाद उनके सेल की गहन तलाशी ली गई थी। उनकी अनुपस्थिति में राबड़ी देवी व तेजस्वी यादव राजद के चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे हैं। हरियाणा के अम्बाला में चुनाव प्रचार करते हुए कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने पीएम मोदी को दुर्योधन कहा था, जिस पर टिप्पणी करते हुए राबड़ी एक क़दम और आगे बढ़ गईं और मोदी को जल्लाद बता दिया। प्रियंका ने कहा था कि पीएम मोदी जैसा अहंकार और घमंड दुर्योधन में ही था। प्रियंका ने कहा था कि इस देश ने कभी ऐसे अहंकार और घमंड को माफ़ नहीं किया है।

कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम ने पीएम मोदी को औरंगज़ेब बताया था। अभी हाल ही में परेश रावल ने ऐसे नेताओं की सूची जारी की थी, जिन्होंने पीएम मोदी पर भद्दी टिप्पणियाँ की हैं। अभिनेता रावल ने ऐसे सभी नेताओं व पीएम मोदी के बारे में दिए गए उनके बयानों की इस सूची को सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के सामने रखा था।राजद नेता व लालू-राबड़ी की बेटी मीसा भारती ने कहा कि भाजपा नागपुरिया क़ानून और विचार को लेकर आगे बढ़ रही है। राबड़ी इससे पहले भी विवादित बयान दे चुकी हैं। उन्होंने अभिनेता परेश रावल को कहा कि वह रील नहीं बल्कि रियल लाइफ में भी जोकर ही हैं। उन्होंने जदयू नेताओं को भी कीड़ा बताया।

अभी यादव परिवार में अंदर ही घमासान मचा हुआ है। लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव बाग़ी हो चुके हैं और अपने ही ससुर चन्द्रिका यादव के ख़िलाफ़ चुनाव प्रचार कर रहे हैं। राबड़ी देवी ने मीडिया के माध्यम से भी उनसे घर लौट आने की अपील की थी। तेज प्रताप का आरोप है कि उनके खेमे के लोगों को टिकट नहीं दिया गया। तेजस्वी को अर्जुन मानने वाले तेज प्रताप का कहना है कि उनके भाई पार्टी में काफ़ी ग़लत लोगों से घिरे हुए हैं। इस चुनाव में राजद ने कॉन्ग्रेस, हम, वीआईपी और रालोसपा से गठबंधन किया है।

मोदी-शाह स्पीच पर कॉन्ग्रेस सांसद की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने कहा बेमतलब

सुप्रीम कोर्ट ने कॉन्ग्रेस सांसद सुष्मिता देव द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ चुनाव अभियान के दौरान की गई टिप्पणी के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया है। असम के सांसद ने भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारत के चुनाव आयोग को निर्देश जारी करने के लिए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी।


बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को ‘भ्रष्टाचारी नंबर 1’ कहने के मामले में कॉन्ग्रेसी सांसद सुष्‍मिता देव ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में मोदी की इस टिप्पणी के खिलाफ अपील दायर की है। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस ने चुनाव आयोग को भी नहीं बख्शा। देव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने इस मामले में मोदी को जो क्लीन चिट दी है वह पक्षपाती है। देव ने अपनी शिकायत में कहा है कि चुनाव आयोग ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 की धारा 123ए का उल्लंघन किया है। देव ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी ऐसे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति को करना शोभा नहीं देता। देव की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (मई 8, 2019) को सुनवाई के दौरान इसे पॉइंटलेस बताते हुए ख़ारिज कर दिया।

कॉन्ग्रेस ने याचिका में चुनाव आयोग द्वारा भाजपा नेताओं को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के खिलाफ क्लीन चिट देने पर आपत्ति जताई थी, और कहा था कि SC को EC को अपने फैसले को संशोधित करने का आदेश देना चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देना चाहता है, तो एक अलग स्वतंत्र याचिका दायर करनी होगी।

इसके बाद, चुनाव आयोग ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ प्राप्त शिकायतों में से अधिकांश में कहा कि वे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में, सुष्मिता देव ने SC में मामले में एक अतिरिक्त हलफनामा दायर कर चुनाव आयोग के फैसलों को संशोधित करने की माँग की थी।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि मूल याचिका मोदी और शाह के खिलाफ शिकायतों के निपटान के लिए थी, और चुनाव आयोग पहले ही निर्णय दे चुका है।

‘शहंशाह’ वाड्रा को चौकीदार जेल के गेट तक ले आया, अब अंदर पहुँचा कर रहूँगा: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर निशाना साधा है। उन्होंने रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ चल रहे तमाम जाँचों का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्हें जेल के दरवाज़े तक खींच कर लाया गया है और जल्द ही अंदर भी पहुँचाया जाएगा। हरियाणा स्थित फतेहाबाद की रैली में पीएम मोदी ने एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए हिसार और सिरसा में जीत का दावा किया।

हिसार और सिरसा, ये दोनों ही सीटें हरियाणा राज्य से आती हैं। हिसार से भाजपा ने बृजेन्द्र सिंह को मौक़ा दिया है, वहीं सिरसा से सुनीत दुग्गल भाजपा प्रत्याशी हैं। बृजेन्द्र सिंह केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं। बृजेन्द्र हरियाणा कैडर के 1998 बैच के आईएएस हैं। बीरेंद्र ने अपने बेटे को टिकट दिए जाने के बाद मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।

पीएम मोदी ने वाड्रा को ‘शहंशाह’ बताते हुए कहा कि चौकीदार उसे जेल के दरवाज़े तक ले आया है और अब जेल भी पहुँचाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फतेहपुर रैली को सम्बोधित करते हुए कहा:

“कॉन्ग्रेस को न तो जवानों के सम्मान की फिक्र कभी रही है और न ही किसानों के सम्मान की। इन्होंने तो किसानों की ज़मीन पर भी भ्रष्टाचार की खेती ही की है। हरियाणा और दिल्ली में जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी, तब कैसे कौड़ियों के भाव पर किसानों की जमीन हथियाने का खेल खेला गया, आप सभी जानते हैं। कॉन्ग्रेस ने आपसे वादा किया था कि वो वन रैंक वन पेंशन लागू करेगी। ये वादा करते-करते उसने चार दशक निकाल दिए। जब आपने दबाव बनाया तो 2013-14 में चुनाव के पहले सिर्फ़ 500 करोड़ रुपए रखकर, कॉन्ग्रेस ने झूठ बोला कि वन रैंक वन पेंशन लागू कर दी गई है।”

“ये आपसे कितना बड़ा धोखा था। ‘भारत माता की जय’ बोलने पर ऐतराज जताने वाली कॉन्ग्रेस अब देशद्रोह का क़ानून हटाने की भी बात कह रही है। कॉन्ग्रेस पार्टी चाहती है कि टुकड़े-टुकड़े गैंग को, भारत को गाली देने वालों को, तिरंगे का अपमान करने वालों, नक्सलवादियों के समर्थकों को खुली छूट मिले। कॉन्ग्रेस कह रही है कि अगर दिल्ली में उसकी सरकार बनी तो जम्मू कश्मीर समेत जो हिंसा वाले इलाक़े हैं, वहाँ तैनात सैनिकों से उनका विशेष अधिकार छीन लिया जाएगा। यानी जो पत्थरबाज है, जो आतंकवाद के समर्थक हैं, कॉन्ग्रेस उनको खुली छूट देने की बात सार्वजनिक रूप से बोल रही है।

रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप है कि वाड्रा ने बीकानेर जिले के कोलायत में 79 लाख रुपए में 270 बीघा जमीन खरीदकर तीन साल बाद उसे 5.15 करोड़ रुपए में बेच दी थी। रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ कई राज्यों में जमीन खरीद में अनियमितता बरतने के केस चल रहे हैं। एक अन्य मामले उन पर हरियाणा के अमीपुर गाँव में अवैध रूप से पचास एकड़ ज़मीन ख़रीदने का मामला चल रहा है। उस समय हरियाणा में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इस मामले की जाँच सीबीआई द्वारा की जा रही है। पिछले साल अगस्त में ही वाड्रा के खिलाफ सीबीआई ने राजस्थान में जमीन आवंटन से जुड़े अठारह मामलों में केस दर्ज किया था।