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‘ये वामपंथी प्रोपेगेंडा प्लेटफॉर्म बन गया है, डोनेशन न दें’: एलन मस्क ने विकिपीडिया को घेरा, इजरायल-भारत विरोधी प्रचार में था शामिल

टेक इंडस्ट्री के दिग्गज और एक्स (पूर्व में ट्विटर) के मालिक एलन मस्क ने एक बार फिर विकिपीडिया पर हमला बोला है। मस्क का आरोप है कि विकिपीडिया अब कट्टर वामपंथियों के प्रभाव में है, जिससे यह एक स्वतंत्र जानकारी के मंच के बजाय एक प्रोपेगेंडा प्लेटफार्म बन गया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग इसे डोनेशन देना बंद करें।

यह विवाद तब और बढ़ गया, जब ‘पाइरेट वायर्स’ की एक रिपोर्ट ने दावा किया कि विकिपीडिया के लगभग 40 संपादकों ने ‘प्रो-हमास’ विचारधारा का समर्थन करने वाले अभियान को आगे बढ़ाया और इजरायल को ‘अवैध’ दिखाने का प्रयास किया। मस्क के इस बयान के बाद बहुत सारे लोगों ने सोशल मीडिया पर उनका समर्थन किया। कुछ लोगों ने मस्क का समर्थन करते हुए कहा कि विकिपीडिया का झुकाव वामपंथी विचारधारा की ओर बढ़ रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब मस्क ने विकिपीडिया पर हमला बोला है। पिछले साल भी मस्क ने इसके संस्थापक जिमी वेल्स से तकरार के समय हुए इसे ‘डिकिपीडिया’ नाम देकर तंज भी कसा और कहा कि अगर वो नाम बदल देते हैं, तो वो विकिपीडिया को 1 अरब डॉलर का दान देंगे।

विकिपीडिया के भारतीय संदर्भ में भी विवाद बढ़ रहे हैं, खासकर जब दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे भारतीय कानूनों का पालन न करने पर चेतावनी दी है। हाई कोर्ट का कहना था कि अगर विकिपीडिया भारत में अपनी नीतियों का पालन नहीं कर सकता, तो उसे यहाँ अपना संचालन बंद कर देना चाहिए।

ऑपइंडिया की एक स्पेशल रिपोर्ट में भी विकिपीडिया पर ‘कट्टर वामपंथी’ पूर्वाग्रह का आरोप साबित हुआ है। इस रिपोर्ट के अनुसार, विकिपीडिया का कंटेंट भारत और हिंदू विरोधी रुझानों को बढ़ावा दे रहा है और इसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से वित्तीय सहायता मिलती है। ऑपइंडिया की रिपोर्ट में 186 पन्नों का डोजियर भी शामिल है, जिसमें दावा किया गया है कि विकिपीडिया का झुकाव वामपंथी विचारधारा की ओर है, जो भारत के हितों के खिलाफ काम करता है।

इस डोजियर में पाया गया है कि विकिपीडिया के कई संपादक और प्रशासक वामपंथी संगठनों से जुड़े हैं। वे अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए दक्षिणपंथी स्रोतों को ब्लैकलिस्ट करते हैं और भारत के विरुद्ध पूर्वाग्रह से ग्रसित सामग्री को प्रमोट करते हैं। विकिपीडिया के सह-संस्थापक लैरी सेंगर ने भी इस पर अपनी चिंताओं को व्यक्त करते हुए कहा है कि विकिपीडिया में वामपंथी पूर्वाग्रह है। विकिमीडिया फाउंडेशन को Open Society Foundation और Rockefeller Foundation जैसी संस्थाओं से वित्तीय सहायता मिलती है, जो वामपंथी एजेंडे को बढ़ावा देते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि फेसबुक भी ऑपइंडिया के इस डोजियर को साझा करने से रोक रहा है। ऑपइंडिया के पाठकों ने शिकायत की है कि जब वे फेसबुक पर लिंक शेयर करते हैं, तो उसे हटा दिया जाता है। ऑपइंडिया का कहना है कि फेसबुक इस रिपोर्ट को साझा करने की अनुमति नहीं दे रहा है क्योंकि यह वामपंथी प्रभावों के खिलाफ सबूत पेश करती है। ऐसे में ये साफ है कि फेसबुक और विकिपीडिया जैसे प्लेटफार्म वामपंथी एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

बहरहाल, भारत में चल रहे कोर्ट केसों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत में विकिपीडिया और इसके संपादकों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और क्या इसे भारतीय कानूनों का पालन करने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

3 साल की उम्र से जिसे पढ़ाता था अब्दुल हाफिज, उसी से बनाने लगा यौन संबंध: गर्भवती होने पर निकाह से मुकरा, पीड़िता से बोला- किसी को कुछ बताया तो कुरान भूल जाओगी

बिहार के सुपौल में 16 साल की नाबालिग को गाँव के ही इमाम ने 6 माह की गर्भवती कर दिया। लड़की 3 साल की उम्र से उसके पास पढ़ने के लिए जाती थी, लेकिन वो पिछले कई महीनों से उसका यौन शोषण करने लगा था। आरोपित इमाम का नाम अब्दुल हाफिज है। उसने लड़की से निकाह का वादा भी किया था, लेकिन गर्भवती होने के बाद मुकर गया। यही नहीं, वो लड़की को डराया था कि अगर उसने ये बात किसी को बताई, तो वो कुरान भूल जाएगी। अब उसकी सास साजदा खातून और साला मोहम्मद शाहिद पीड़िता और उसके परिवार को धमका रहे हैं कि वो निकाह की बात भूल ही जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र की इस घटना में पीड़िता की माँ ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता 3 साल की उम्र से ही आरोपित इमाम अब्दुल हाफीज के पास पढ़ती रही है। वो घर भी आता-जाता रहा है। 19 अप्रैल 2024 को अब्दुल हाफिज ने पीड़िता को उसके ही घर में बहला-फुसला कर संबंध बनाया। उसे परीक्षा पास कराने का भी लाचत दिया। इसके बाद से वो लगातार पीड़िता के साथ संबंध बनाने लगा। अब पीड़िता 6 माह की गर्भवती है।

गर्भवती होने पर खुला मामला

इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीड़िता के गर्भवती होने की बात सामने आई, जिससे परिवार को पता चला कि उनकी बच्ची के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। आरोपित इमाम पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। पीड़िता की माँ ने कहा कि अब्दुल हाफिज उनकी बेटी को निकाह का झांसा देता रहा, लेकिन गर्भवती होने के बाद उसने निकाह करने से मना कर दिया।

किसी को बताया तो भूल जाओगी कुरान, होगी बदनामी

पीड़िता के पिता ने बताया कि इमाम अब्दुल हाफिज ने निकाह का झांसा देने के साथ ही लड़की को बदनामी से बचने के लिए किसी को भी घटना की जानकारी नहीं देने का दवाब बनाया। साथ ही कहा कि अगर वह इसके बारे में किसी को भी जानकारी देती है तो कुरान भूल जाएगी। पिता ने आशंका जताई है कि आरोपित इमाम उसके परिवार के साथ कभी भी किसी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकता है।

साला और सास भी दे रहे अंजाम भुगतने की धमकी

पीड़िता की माँ का आरोप है कि इमाम का साला मोहम्मद शाहिद और सास साजदा खातून बदमाश प्रवृत्ति के हैं। दोनों खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि अगर इमाम पर पीड़िता से शादी का दवाब बनाया तो इसका अंजाम भुगतना होगा। पीड़िता के माता-पिता ने मामले की जाँच और कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस मामले में एफआईआर 431/24 दर्ज जाँच की जा रही है।

त्रिवेणीगंज के थानाध्यक्ष रामसेवक रावत ने कहा कि पीड़िता की माँ की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल जाँच करवाया और उसका बयान भी कोर्ट में दर्ज कराया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद इमाम अब्दुल हाफिज फरार हो गया और अब पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

‘कु#त्ते जैसी है मीडिया’: CPM नेता कृष्णदास के विवादित बयान पर मचा बवाल, विपक्षियों ने घेरा, अपनी पार्टी के नेता भी झाड़ रहे पल्ला

सीपीएम के केरल राज्य समिति के सदस्य एनएन कृष्णदास ने मीडिया को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की है। उन्होंने पत्रकारों की तुलना कुत्ते और गिद्धों से की। कृष्णदास ने कहा कि मीडिया वाले ऐसे घूम रहे हैं, जैसे कसाई की दुकान के बाहर कुत्ते घूमते हैं। वे गिद्धों की तरह माइक लेकर आते हैं। इसको लेकर उनकी तीखी आलोचना हो रही है। हालाँकि, उन्होंने माफी माँगने से इनकार कर दिया।

कृष्णदास ने कहा, “मीडिया सुबह से ही कसाई की दुकान के बाहर घूमने वाले कुत्तों की तरह घूम रहा है। अगर वे गिद्धों की तरह माइक लेकर आएँ तो मैं जवाब नहीं दे सकता।” उनके इस बयान पर विपक्ष से लेकर मीडिया तक में उनकी आलोचना हो रही है। हालाँकि, तमाम आलोचना के बावजूद कृष्णदास अपनी बात पर अड़े हैं और कहा कि उन्होंने जो भी कहा, वो सोच-समझकर कहा।

अपने बचाव में कृष्णदास ने कहा, “मैंने सोच-समझकर और अच्छे इरादे से बात की। (अब्दुल) शुक्कूर के घर पर बड़ी भीड़ जमा हो गई थी, जिससे असुविधा हो रही थी। मीडिया का उद्देश्य रिपोर्ट करना नहीं था, बल्कि कहानी को दक्षिणपंथी पक्ष की ओर मोड़ना था। मैं अच्छे इरादे से कही गई अपनी बात पर कायम हूँ।” मीडिया को दक्षिणपंथी बताते हुए उन्होंने माफी माँगने से इनकार कर दिया।

वहीं, सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य ए विजयराघवन ने कहा कि पार्टी को मीडिया से कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने कहा कि मीडिया समाज में एक लोकतांत्रिक संस्था के रूप में कार्य करता है। हालाँकि, बचाव में उन्होंने यह भी कहा कि वामपंथ की आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन जब गलतियाँ सामने आती हैं तो प्रतिक्रिया देना भी स्वाभाविक है।

वहीं, कृष्णदास के बयान के बाद सीपीएम बैकफुट पर आती दिख रही है। इस विवाद के बाद सीपीएम के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि रचनात्मक आलोचना उचित भाषा का इस्तेमाल करके की जानी चाहिए। गोविंदन ने कहा कि कड़ी आलोचना को भी अच्छी भाषा में ही व्यक्त किया जाना चाहिए।

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल के लिए कृष्णदास की आलोचना की। कॉन्ग्रेस नेता सतीशन ने कहा, “कृष्णदास की टिप्पणी सीपीएम की भाषा को दर्शाती है। मीडिया केवल अपना काम कर रहा था।” पलक्कड़ यूडीएफ उम्मीदवार राहुल ममकूटथिल ने कहा कि पत्रकारों की तुलना कसाई के दुकानों के बाहर घूमने वाले कुत्तों से करना ठीक नहीं है।

दरअसल, केरल के पलक्कड़ के पूर्व क्षेत्र समिति सदस्य अब्दुल शुक्कूर ने सीपीएम छोड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद मीडिया उनके बयान को लेकर उनके बयान दर्ज करना चाहती थी। इस बीच शुक्कूर सीपीएम राज्य समिति के सदस्य एनएन कृष्णदास के साथ एलडीएफ सम्मेलन स्थल पर आए और मीडिया को लेकर उन्होंने यह बयान दे दिया।

‘पत्र में हिंदी में मत लिखो, ये नहीं समझ आती’: DMK सांसद अब्दुल्ला ने केंद्रीय मंत्री को तमिल में दिया जवाब, पहले CM स्टालिन दे चुके हैं देश की अखंडता को नुकसान पहुँचने की धमकी

डीएमके नेता और पुदुक्कोट्टई से राज्यसभा सांसद एमएम अब्दुल्ला ने शुक्रवार (25 अक्टूबर 2024) को केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के पत्र का तमिल में जवाब दिया। अब्दुल्ला ने कहा कि हिंदी में लिखी गई चिट्ठी का एक शब्द भी उनकी समझ में नहीं आया। उन्होंने अनुरोध किया कि आधिकारिक पत्र अंग्रेजी में भेजे जाएँ।

मंत्री रवनीत सिंह ने यह पत्र अब्दुल्ला द्वारा ट्रेनों में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता से संबंधित द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में भेजा था। अब्दुल्ला ने मंत्री की चिट्ठी और अपना जवाब सोशल मीडिया पर साझा करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्रीय राज्यमंत्री के कार्यालय में तैनात अधिकारियों को उन्होंने कई बार याद दिलाया है कि वे हिंदी नहीं बोल सकते।

अब्दुल्ला ने कहा कि इसके बावजूद अधिकारी अभी भी उन्हें हिंदी भाषा में भेजे जा रहे हैं। डीएमके सांसद अब्दुल्ला ने तमिल में भेजे गए अपने पत्र में मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से अनुरोध किया है कि अब से उन्हें पत्र-व्यवहार अंग्रेजी में किया जाए। इससे पहले साल 2022 में डीएमके ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया था।

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि हिंदी को स्थानीय भाषाओं के बजाय अंग्रेजी के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा था कि इससे देश की अखंडता को नुकसान पहुँचेगा।

हाल ही में तमिलनाडु के सीएम स्टालिन और तमिलाडु के राज्यपाल आरएन रवि के बीच हिंदी माह के समापन समारोह और चेन्नई दूरदर्शन के स्वर्ण जयंती समारोह को लेकर तीखी नोक-झोंक हुई थी। स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी-केंद्रित कार्यक्रम आयोजित करने के केंद्र के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।

स्टालिन ने तर्क दिया था कि इस तरह की पहल अलग-अलग भाषाई पहचान वाले क्षेत्रों के बीच संबंधों को खराब कर सकती है। स्टालिन ने पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा था, “अगर केंद्र सरकार इन आयोजनों को आगे बढ़ाना चाहती है तो मेरा सुझाव है कि प्रत्येक राज्य में स्थानीय भाषा के समारोहों को समान महत्व दिया जाए।”

मुरादाबाद की लाइब्रेरी में हिंदू छात्राओं का ब्रेनवॉश कर ‘लव जिहाद’ कराता था आसिफ हसन, सस्पेंशन की जगह मिली पुरानी जगह पोस्टिंग: बच्चों की शिकायत से उठा मामला, DM कराएँगे जाँच

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में शिक्षा विभाग की लाइब्रेरी में हिंदू छात्राओं का ब्रेनवाश करने का मामला सामने आया है। आरोपित वरिष्ठ सहायक आसिफ हसन पर आरोप है कि वह छात्राओं को मुस्लिम युवकों से बातचीत करने के लिए प्रेरित करता था और इस्लाम से संबंधित बातें करता था। पिछले छह माह से लाइब्रेरियन का कार्यभार संभाल रहे आसिफ हसन पर यह आरोप लगाया गया है कि वह छात्राओं को मुस्लिम लड़कों से दोस्ती करने के लिए प्रेरित करते थे और बाहरी मुस्लिम युवकों का लाइब्रेरी में आना-जाना भी बना रहता था। शिकायत के बाद उसे लाइब्रेरी से हटा दिया गया है।

छात्राओं का आरोप है कि आसिफ हसन लाइब्रेरी में इस्लामी मजहब का प्रचार करता है और मुस्लिम युवकों से बातचीत करने का मौका देता है। परेशान होकर कुछ छात्राओं ने इस बारे में डीएम को लिखित शिकायत दी। संयुक्त शिक्षा निदेशक मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस मामले की जाँच के लिए दो सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जिसमें एक प्रवक्ता और एक प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटी आरोपों की जाँच करेगी और छात्राओं से भी बातचीत करेगी।

इस मामले की मीडिया रिपोर्टिंग होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है। उसे उसकी पुरानी पोस्टिंग पर भेज दिया गया। हालाँकि प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जिलाधिकारी अनुज सिंह ने शिकायत मिलने के बाद आरोपित को सस्पेंड करने की बजाय उसे सिर्फ पुरानी पोस्टिंग पर भेजा गया है। डीएम ने बस उसे लाइब्रेरी से हटाने का आदेश दिया, जबकि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए निलंबन किया जा सकता था। ऑपइंडिया आसिफ हसन की कारस्तानियों पर एक रिपोर्ट प्रकाशित कर चुका है।

साइब्रेरी में बतौर वरिष्ठ सहायक काम करने वाले आसिफ हसन ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि वह खुद एक बेटी का पिता है। आसिफ हसन ने कहा कि लाइब्रेरी में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, और जो भी दोषी होगा, उसे सजा मिलेगी। डीएम अनुज सिंह का कहना है कि शिकायत मिली है और जाँच की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएँगे, उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

आसिफ हसन के कमरे में मिला था असलहा

आसिफ हसन पहले भी विवादों में रह चुका है। लगभग 13-14 साल पहले बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालय में उसके कमरे में असलहा मिलने की सूचना पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने छापा मारा था, लेकिन आसिफ हसन वहाँ से भाग निकला था।

कभी भगवान का किया अपमान, कभी PM के लिए उगला जहर: ‘थप्पड़ कांड’ के बाद फरार कॉन्ग्रेस नेत्री रोशनी जायसवाल की संपत्तियाँ होंगी कुर्क, कोर्ट के आदेश के बाद रोते हुए Video आया सामने

वाराणसी में कॉन्ग्रेस नेत्री रोशनी कुशल जायसवाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली रोशनी जायसवाल पर गंभीर आरोप हैं। अब वाराणसी की अदालत ने उनके खिलाफ कुर्की का आदेश जारी कर दिया है। वहीं, उन्होंने एक वीडियो जारी कर माफी माँगी है।

रोशनी जायसवाल सोशल मीडिया पर चर्चित चेहरा हैं। वह अपनी राजनीतिक और निजी जिंदगी से जुड़े कंटेंट सोशल मीडिया पर साझा करती रही हैं। हाल ही में स्थानीय युवक के साथ हुए विवाद में उन्होंने युवक पर रेप और हत्या की धमकी देने का आरोप लगाया था। अदालत में यह मामला टिक नहीं सका, और उनके पति कुशल जायसवाल समेत पाँच लोग इस केस में 40 दिनों से जेल में बंद हैं। वहीं, रोशनी खुद फरार चल रही हैं। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने न तो कोर्ट में पेश होने की कोशिश की और न ही किसी प्रकार का स्टे ऑर्डर प्राप्त किया। यानी खुद को कानून से ऊपर मानकर चलती रही है।

इस घटनाक्रम के बाद अदालत ने अब उनके खिलाफ कुर्की का आदेश जारी किया है। हालाँकि कुर्की आदेश जारी होते ही रोशनी कुशल जायसवाल एक बार फिर से विक्टिम कार्ड खेलने के मूड में आ गई। रोशनी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा किया, जिसमें वह माफी माँगते और मदद की गुहार लगाते नजर आईं। वीडियो में रोशनी ने कहा, “एक थप्पड़ की वजह से मेरी पूरी जिंदगी तबाह हो चुकी है। मुझे माफ कर दीजिए, मेरी मदद करिए।”

ये वही रोशनी जायसवाल हैं, जो खुलेआप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर भी अभद्र टिप्पणियाँ करती रही हैं। अब लोग रोशनी के पुराने वीडियो भी शेयर कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने स्थानीय युवक को थप्पड़ मारने का वीडियो 15 सितंबर को शेयर करते हुए रोशनी की जमकर हौसलाअफजाई की थी और लिखा था, “हम सभी किसी भी प्रकार की हिंसा के खिलाफ हैं। हमारी कॉन्ग्रेस की नेता को खुलेआम बलात्कार की धमकी देना, वो भी कई बार, ये सबसे बड़ी हिंसा है। वो हिंसा इस से भी बड़ी हिंसा है, जो रोशनी अपने परिवार के साथ इस लिखित बलात्कारी के साथ कर रही हैं।” हालाँकि रोशनी ने जो कुछ किया, वो मामला कोर्ट में है और फिलहाल वो फरारी काट रही हैं, लेकिन उनके पुराने पाप भी सामने आ रहे हैं।

शिव शर्मा नाम के एक्स यूजर ने उसके दूसरे ही दिन सुरेंद्र राजपूत से पूछा था कि जिस तरह से रोशनी कॉन्ग्रेस के पक्ष में बोलती हैं और अभद्र टिप्पणियाँ करती हैं, क्या वो इनके संस्कार हैं?

ये रोशनी जायसवाल कई बार भारत सरकार, सेना पर उंगली उठा चुकी हैं। उनका एक पुराना ट्वीट भी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भारत माता को बेहद गलत तरीके से दिखाया था। उन्होंने कथित तौर पर पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को भी इस तस्वीर में दिखाया था और मणिपुर को लेकर ये पोस्ट किया था। हालाँकि ये पोस्ट कथित तौर पर अब डिलीट किया जा चुका है।

रोशनी जायसवाल के इंटाग्राम प्रोफाइल के मुताबिक, वो साल 2018 में मिसेज इंडिया इंटरनेशनल रह चुकी हैं। वो मिसेज इंडिया ग्लैमरस 2028 भी रह चुकी हैं और गरीब सहायक एनजीओ की प्रेसीडेंट भी हैं। उन्होंने अपनी प्रोफाइल में खुद को कॉन्ग्रेस का प्रवक्ता भी बताया है।

रोशनी का इंटाग्राम प्रोफाइल

बहरहाल, सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम रोशनी के बचाव में उतर चुका है, लेकिन कानून अपना काम कर रहा है। अदालत का कुर्की आदेश स्पष्ट संकेत है कि कानून के नजर में सभी बराबर हैं। देखना ये है कि रोशनी कानून का सम्मान करते हुए आत्मसमर्पण करती हैं, या फिर सिस्टम को ठेंगा दिखाते हुए फरारी काटती रहेंगी। वैसे, कॉन्ग्रेस ने इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कॉन्ग्रेस और रोशनी जायसवाल इस मामले को कैसे संभालते हैं और कानून इस पर क्या रुख अपनाता है।

कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने किसानों की 1200 एकड़ भूमि पर ठोका दावा… कॉन्ग्रेस सरकार खाली कराने में जुटी, 41 किसानों को नोटिस भेजे: BJP ने कहा- ये तुष्टिकरण के अलावा कुछ नहीं

तमिलनाडु के बाद अब कर्नाटक के एक गाँव पर वक्फ बोर्ड ने अपना दावा ठोक दिया है। यहाँ की 1200 एकड़ (लगभग 2000 बीघा) जमीन पर शाह अमीनुद्दीन दरगाह ने अपना हक जताया है। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने किसानों को नोटिस भेजा है। विजयपुरा जिले के टिकोटा तालुक स्थित होनवाड़ा गाँव के किसानों ने गुरुवार (24 अक्टूबर) को इसकी शिकायत मंत्री एमबी पाटिल से की।

किसानों ने मंत्री को बताया कि उन्हें नोटिस मिला है, जिसमें कहा गया है कि उनकी ज़मीनें वक्फ बोर्ड की हैं। किसानों का दावा है कि अधिकारी इस क्षेत्र को शाह अमीनुद्दीन दरगाह से जुड़ी मुस्लिमों की मजहबी संस्था के रूप में नामित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह नोटिस तहसीलदार द्वारा भेजी गई है। उसमें पुराने सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए ज़मीनें वक्फ बोर्ड की बताई गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, आवास, वक्फ और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री जमीर अहमद खान ने इस महीने की शुरुआत में वक्फ अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में वक्फ भूमि पर ‘अतिक्रमण’ को लेकर चर्चा की गई थी। इन चर्चाओं के बाद अधिकारियों ने ‘अवैध अतिक्रमण’ को हटाने का प्रयास किया और इसके तहत यह विवादास्पद नोटिस भेजा गया है।

होनवाड़ा ग्राम पंचायत के उपाध्यक्ष सुनील शंकरप्पा तुडीगल ने कहा, “नोटिस में कहा गया है कि यह ज़मीन शाह अमीनुद्दीन दरगाह की है, लेकिन यह दरगाह सदियों से अस्तित्व में नहीं है, जबकि पीढ़ियों से हमारे परिवार इन ज़मीनों के मालिक हैं। लगभग 41 किसानों को नोटिस मिले हैं। उनसे स्वामित्व का कागजात देने के लिए कहा गया है। अगर सरकार नोटिस वापस नहीं लेती है तो हम विरोध प्रदर्शन करेंगे।”

वक्फ बोर्ड का दावा किया कि ये नोटिस 1974 के गजट की घोषणा पर आधारित है। विजयपुरा वक्फ बोर्ड की अधिकारी तबस्सुम ने कहा, “भूमि को राज्य सरकार द्वारा वक्फ संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया था और इसे गजट में दर्ज किया गया था। हालाँकि, कुछ नोटिस गलती से किसानों को भेज दिए गए थे। अगर उनके पास वैध भूमि रिकॉर्ड हैं तो वक्फ बोर्ड उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा।”

नोटिस मिलने के बाद किसानों की नींद हराम हो गई है। वे तनाव में आ गए हैं और अब उनके सामने जीवन-यापन की समस्या खड़ी हो गई है। इसको देखते हुए उन्होंने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। होनवाड़ा के किसानों ने घोषणा की है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने न्याय मिलने तक अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है।

एक अन्य चिंतित किसान ने कहा, “हमें अभी तक कोई न्याय नहीं मिला है। जिला प्रशासन चुपचाप हमारी जमीन छीनने का काम कर रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमारे पास विरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। हमारी जमीन हमारी आजीविका है और हम इसे किसी भी हालत में किसी को छीनने नहीं देंगे।”

बढ़ते असंतोष को देखते कर्नाटक के जिला प्रभारी मंत्री एमबी पाटिल ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को संबोधित करते हुए किसानों को आश्वासन दिया कि वक्फ से संबंधित कोई भी निजी भूमि या संपत्ति प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी भूमि को गलत तरीके से वक्फ संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया है तो इसे ठीक करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँगे।

पाटिल ने कहा, “मैंने पहले ही जिला प्रशासन के साथ इस पर चर्चा की है। किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक बैठक आयोजित की जाएगी।” पाटिल ने किसानों से शांत रहने का आग्रह किया और वादा किया कि उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी। इन आश्वासनों के बावजूद किसानों में इस मुद्दे को लेकर तनाव बना हुआ है।

कर्नाटक भाजपा ने राज्य सरकार पर वक्फ बोर्ड की कार्रवाई का समर्थन करने का आरोप लगाया है। भाजपा ने अपने पोस्ट में कहा, “कॉन्ग्रेस सरकार के प्रोत्साहन पर वक्फ बोर्ड अब किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रहा है। यह तुष्टिकरण की राजनीति के अलावा और कुछ नहीं है।” पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वक्फ अधिनियम में बदलाव करना चाहते हैं, जिसका कॉन्ग्रेस ने विरोध किया है।

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कॉन्ग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “वैध दस्तावेजों के साथ उनकी 1,500 एकड़ से अधिक पुश्तैनी कृषि भूमि पर वक्फ बोर्ड ने एकतरफा दावा किया है, जिससे इन किसानों की आजीविका और पीढ़ियों से चली आ रही संपत्ति के अधिकार खतरे में पड़ गए हैं।”

उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस सरकार ने वक्फ बोर्ड को देश भर में भूमि पर दावा करने की बेलगाम शक्ति दी है। 1995 और 2013 में कॉन्ग्रेस सरकारों ने वक्फ बोर्ड को त्वरित जाँच के बाद किसी भी भूमि को वक्फ घोषित करने, अंतिम अधिकार के साथ अपने स्वयं के न्यायाधिकरण के माध्यम से फैसला करने और धारा 54 के तहत अतिक्रमण हटाने के लिए अनियंत्रित शक्तियाँ दी थीं।”

तेजस्वी सूर्या ने कहा, “मोदी 3.0 सरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर जेपीसी के माध्यम से सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम न्याय और स्थायी समाधान के लिए ऐसे मामलों को समिति के ध्यान में ला रहे हैं। किसानों के हित की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी अपनी जमीन से वंचित न हो, मामलों को उच्च न्यायालय में लड़ेंगे। अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

इस बीच एमबी पाटिल ने कहा, “अगर किसानों के पास वैध स्वामित्व रिकॉर्ड हैं तो उनकी ज़मीन प्रभावित नहीं होगी।” बढ़ते विवाद ने वक्फ संपत्ति प्रबंधन में अधिक खुलेपन और भूमि मालिकों के अधिकारों की रक्षा को रेखांकित किया है। सरकार को किसानों के अधिकारों की रक्षा करने और वक्फ भूमि के प्रबंधन के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी रणनीति प्रदान करने के लिए जल्दी से कार्रवाई करनी चाहिए।

हिंदुओं के पूरे गाँव को ही वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था

यह पहली बार नहीं कि वक्फ बोर्ड ने इस तरह का दावा किया है। इससे पहले सितंबर 2022 में तमिलनाडु में वक्फ बोर्ड ने हिंदुओं के पूरे गाँव और 1100 साल पुराने मंदिर पर दावा ठोक दिया था। तमिलनाडु में वक्फ बोर्ड ने त्रिची के नजदीक स्थित तिरुचेंथुरई गाँव को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था। जब राजगोपाल नाम के व्यक्ति ने अपनी जमीन बेचने का प्रयास किया तो यह मामला समाने आया था।

राजगोपाल जब अपनी जमीन बेचने के लिए रजिस्ट्रार ऑफिस पहुँचे तो उन्हें पता चला कि जिस जमीन को बेचने के बारे में वह सोच रहे हैं वह उनकी है ही नहीं बल्कि, जमीन वक्फ हो चुकी है और अब उसका मालिक वक्फ बोर्ड है। इतना ही नहीं, सारे गाँव वालों की जमीन ही वक्फ संपत्ति घोषित हो चुकी थी। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय सुर्खी बनी थी।

वक्फ बोर्ड ने 5 स्टार होटल पर ठोक दिया दावा

इसी तरह का मामला अप्रैल 2024 में हैदराबाद से आया था। तेलंगाना वक्फ बोर्ड ने राजधानी के एक नामी 5 स्टार होटल मैरियट को ही अपनी जागीर घोषित कर दिया था। हालाँकि, हाई कोर्ट ने उसके इस मंसूबे को धाराशायी कर दिया था। दरअसल, साल 1964 में अब्दुल गफूर नाम के एक व्यक्ति ने तब वायसराय नाम से चर्चित इस होटल पर अपना हक जताते हुए मुकदमा कर दिया था।

मुकदमे में वक्फ अधिनियम 1954 का हवाला दिया गया था, जिसकी वजह से होटल मैरियट की सम्पत्ति विवादित घोषित हो गई थी। लगभग 50 वर्षों तक वक्फ बोर्ड ने यह मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझाए रखा। साल 2014 में एक बार फिर से तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड होटल मैरियट के खिलाफ सक्रिय हुआ। मामला हाईकोर्ट में पहुँचा तो अंतिम फैसला होटल मैरियट के पक्ष में आया।

कॉन्ग्रेस ने वक्फ को दिए असीमित अधिकार

यहाँ बताना जरूरी है कि साल 1954 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार के समय वक्फ अधिनियम पारित किया गया। इसके बाद इसका केंद्रीकरण हुआ। वक्फ एक्ट 1954 वक्फ की संपत्तियों के रखरखाव का काम करता था। इसके बाद से इसमें कई बार संशोधन हुआ। साल 2013 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने बेसिक वक्फ़ एक्ट में संशोधन करके वक्फ बोर्डों को और अधिकार दिए थे।

दरअसल, वक्फ अरबी भाषा का शब्द है और इसका अर्थ संपत्ति को जन-कल्याण के लिए समर्पित करना है। इस्लाम में में वक्फ उस संपत्ति को कहते हैं, जो इस्लाम को मानने वाले लोगों द्वारा जकात के रूप में दान की जाती है। ये धन-संपत्ति सिर्फ मुस्लिमों के हित या इस्लाम के प्रसार-प्रसार के लिए काम में लाया जा सकता है। ये दौलत वक्फ बोर्ड के तहत आती है।

वक्फ के पास 9.4 लाख एकड़ संपत्ति

सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम बुद्धिजीवियों, महिलाओं और शिया एवं बोहरा जैसे विभिन्न फिरकों की ओर से मौजूदा कानून में बदलाव की माँग की गई थी। संशोधन लाने की तैयारी 2024 के लोकसभा चुनावों से काफी पहले ही शुरू हो गई थी। सूत्र ने यह भी कहा कि ओमान, सऊदी अरब जैसे किसी भी इस्लामी देश में इस तरह की इकाई को इतने अधिकार नहीं दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न राज्यों के वक्फ़ बोर्डों के पास इस समय करीब 8.7 लाख संपत्तियाँ हैं। इन संपत्तियों का क्षेत्रफल करीब 9.4 लाख एकड़ है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्य में वक्फ बोर्डों की इस शक्ति के दुरुपयोग का संज्ञान लिया था। वक्फ बोर्डों द्वारा किसी भी संपत्ति पर दावा करने पर अधिकांश राज्यों में इन संपत्ति के सर्वे में देरी होती थी।

इसके बाद केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों की निगरानी में जिला मजिस्ट्रेटों को शामिल करने की संभावना पर भी विचार किया था। वक्फ बोर्ड के किसी भी फैसले के खिलाफ अपील सिर्फ कोर्ट के पास हो सकती है। ऐसी अपीलों पर फैसले के लिए कोई समय-सीमा नहीं होती है। कोर्ट का निर्णय अंतिम होता है। वहीं हाईकोर्ट में PIL के अलावा अपील का कोई प्रावधान नहीं है।

लाठीचार्ज, पत्थरबाजी, गोली… सबका हिंदू बने निशाना, मुस्लिमों को खरोंच भी नहीं: बहराइच हिंसा के एक और चश्मदीद का दावा- ‘हमले के लिए मस्जिद से आया था फरमान

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में रविवार (13 अक्टूबर 2024) को मुस्लिम भीड़ ने रामगोपाल मिश्रा की हत्या कर दी थी। इसी भीड़ ने विसर्जन के लिए जा रही माँ दुर्गा की प्रतिमाओं को भी तोड़ा था जिसका विरोध करते हुए कई श्रद्धालु घायल हो गए थे। इस हिन्दू विरोधी हिंसा के बाद हिंसक भीड़ ने विक्टिम कार्ड को आगे किया और वामपंथी वर्ग ने मुस्लिम समुदाय को ही पीड़ित साबित करना शुरू कर दिया। ऑपइंडिया की पड़ताल में सामने आया कि हिंसा का असल पीड़ित हिन्दू है। दावा यह भी किया गया कि श्रद्धालुओं पर हमले के लिए मस्जिद से उकसाया गया। हालाँकि बहराइच प्रशासन कई चश्मदीदों के इस दावे को नकारता रहा।

यह हिंसा बहराइच के हरदी थानाक्षेत्र में पड़ने वाले महराजगंज बाजार में हुई थी। इसी हिंसा के एक चश्मदीद मारुति नंदन त्रिपाठी ने ऑपइंडिया से बात की। मारुति ने बताया कि जब हिंसा की शुरुआत हुई तब वो घटनास्थल से लगभग 1 किलोमीटर दूर विसर्जन स्थल पर लगा मेला देख रहे थे। फोन पर हमले की सूचना मिलते ही वो महराजगंज बाजार पहुँचे। तब आक्रोशित हिन्दू पुलिस प्रशासन से मूर्ति पर पथराव करने और जबरन DJ बंद करवाने वालों पर कार्रवाई की माँग कर रहे थे।

मारुति नंदन बताते हैं कि श्रद्धालुओं की शिकायत पर प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा था जिससे तनाव बढ़ता जा रहा था। धरने के दौरान हिन्दुओं पर पुलिस की मौजूदगी में फिर पथराव हुआ जिससे कुछ लोगों ने अब्दुल हमीद के घर के टिन शेड को पीटना शुरू कर दिया। तभी रामगोपाल मिश्रा को गुस्सा आया और वो अब्दुल हमीद की छत पर चला गया। यहाँ हरा झंडा निकालने के दौरान उनकी गोली मार कर हत्या कर दी गई।

पहले मुस्लिमों ने उखाड़ा था हिन्दुओं का झंडा

मारुति नंदन त्रिपाठी दावा करते हैं कि पत्थरबाजी और दुर्गा प्रतिमाओं पर हमले के अलावा मुस्लिमों ने रास्ते में लगे हिन्दुओं के ध्वजों को उखाड़ा था। कुछ लोग रामगोपाल का अचेत शरीर लेकर नीचे आ रहे थे तब फिर गोलियाँ चलाई गईं जिसका वीडियो भी मौजूद है। घायल रामगोपाल को अस्पताल ले जाने के लिए भी कोई गाड़ी नहीं मिली। एक ई रिक्शा से उनको कुछ लोग लेकर जा रहे थे तभी आधे रास्ते में उसकी बैट्री खत्म हो गई। यहाँ से बचा रास्ता बाइक से तय किया गया। अस्पताल में रामगोपाल को मृत घोषित कर दिया गया।

ज्यादातर श्रद्धालु मूर्ति छोड़ कर रामगोपाल मिश्रा के साथ अस्पताल चले गए। बचे-खुचे हिन्दुओं पर प्रशासन ने लाठीचार्ज कर दिया। इस लाठीचार्ज से मची भगदड़ का फायदा मुस्लिम भीड़ ने उठाया। मारुति नंदन आगे बताते हैं कि कई मुस्लिमों ने अपने घरों से बाहर निकल कर मार्ग में खड़ी प्रतिमाओं को तोड़ डाला। वहीं कई लोगों ने झुंड बनाकर श्रद्धालुओं पर हमला किया। पुलिस के ही लाठीचार्ज का फायदा उठा कर एक मुस्लिम भीड़ ने श्रद्धालुओं कर काफी दूर तक दौड़ाया।

मस्जिद से मिला था हमले का फरमान

घटनास्थल पर मौजूद मस्जिद को लेकर मारुति नंदन त्रिपाठी का भी आरोप बहराइच पुलिस के दावों के ठीक विपरीत है। मारुति नंदन बताते हैं कि माँ दुर्गा के भक्तों पर हमले के लिए मस्जिद से उकसाया गया था। मारुति नंदन के मुताबिक जब रामगोपाल अब्दुल हमीद की छत पर चढ़े तब तब मस्जिद के माइक से बोला गया, “सब लोग इकट्ठा हो जाओ। जाने नहीं देना है। मारो।” इसके बाद निकली हिंसक भीड़ में बच्चों से ले कर बूढ़े तक शामिल थे।

चश्मदीद मारुति नंदन हमें आगे बताते हैं कि उन्होंने मुस्लिमों की ज्यादातर भीड़ छतों पर भी देखी। वो पत्थर और बोतलें चला रहे थे। जिस भी मुस्लिम के दरवाजे पर विसर्जन यात्रा में जा रही कोई भी गाड़ी खड़ी थी उसको उन्होंने घरों से निकल कर तोड़ डाला। ऐसे घरों कोई कार्रवाई के लिए नोटिस मिलना उचित मानते हुए मारुति नंदन ने इसे डेढ़ साल पहले की पेंडिंग कार्रवाई बताया है। मारुति नंदन मानते हैं कि क्षेत्र के विकास के लिए सड़क चौड़ी होना जरूरी है।

हमें नहीं पता कि हमारी प्रतिमाओं का क्या हुआ

हमसे बात करते हुए मारुति नंदन त्रिपाठी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्हें पता ही नहीं है कि अपनी आराध्या माँ दुर्गा की जिन प्रतिमाओं को वो भक्ति भाव से विसर्जित करने जा रहे थे, हमले के बाद उनका हुआ क्या। वह दावा करते हैं कि ऐसी आधे दर्जन से अधिक मूर्तियाँ थीं जो मुस्लिम भीड़ के हमले की वजह से बीच रास्ते में ही फँस गई थी। तब पुलिस के लाठीचार्ज की वजह से श्रद्धालु वहाँ से भाग निकले थे। बाद में उन प्रतिमाओं का क्या हुआ इसकी जानकारी मारुति नंदन को नहीं है।

अपने इसी बयान में मारुति नंदन आगे बताते हैं कि उनको सुनाई दिया था कि बाद में प्रशासन ने माँ दुर्गा की प्रतिमाओं को विसर्जित करवाया था। हालाँकि अपनी धार्मिक भावनाओं पर इस प्रकार के आघात से मारुति नंदन काफी आहत थे। उन्होंने 2 आरोपितों के एनकाउंटर में पैर पर गोली लगने की कार्रवाई पर भी असंतोष जताया और उसे घटना के हिसाब से नाकाफी बताया। मारुति नंदन ने सरकार से माँग की है कि वो रामगोपाल मिश्रा के परिवार पर ध्यान दे।

दुकान बस दिखावा, असल काम सीमा पार तस्करी

महराजगंज हिंसा का मुख्य आरोपित अब्दुल हमीद और उनका परिवार है। अब्दुल हमीद दिखावे के तौर पर सर्राफे का काम करता है लेकिन मारुति नंदन इसे महज हाथी का दिखाने वाला दाँत मानते हैं। मारुति नंदन का दावा है कि अब्दुल हमीद का परिवार नेपाल सीमा से तस्करी जैसे अपराधों में लम्बे समय से संलिप्त है। उसके बड़े बेटे पिंटू का जिक्र करते हुए मारुति नंदन बताते हैं कि उसे पकड़ने के लिए नेपाल से कई बार पुलिस आ चुकी है।

मारुति नंदन आगे बताते हैं कि रामगोपाल को गोली मारने वाला सरफराज भी महराजगंज व आसपास अक्सर गुंडागर्दी किया करता था। नेपाल सीमा से इस पूरे परिवार पर मूल रूप से हथियारों की तस्करी का आरोप है। मारुति नंदन का दावा है कि सर्राफे की दुकान से वो सिस्टम नहीं बन सकता जो अब्दुल हमीद ने बना रखा है।

हिन्दू ने ही खाई लाठी और गोली, उधर से किसी को खरोंच भी नहीं

रविवार (13 अक्टूबर) की घटना को मारुति नंदन त्रिपाठी पूरी तरह से एकतरफा बताते हैं। उनका दावा है कि हिंसा के दौरान मुस्लिम भीड़ और पुलिस बल दोनों ने मिल कर श्रद्धालुओं पर हमला किया। पुलिस जहाँ लाठियाँ बरसा रही थी तो मुस्लिम भीड़ पत्थर, बोतलें और गोलियाँ। हिंसा की वजह से आधे दर्जन से अधिक घायल व एक मृतक भी हिन्दू समुदाय से ही होने की बात हमें मारुति नंदन ने बताई। उनका दावा है कि किसी एक मुस्लिम को खरोंच भी नहीं आई क्योंकि पुलिस ने सारा जोर केवल श्रद्धालुओं पर दिखाया।

ऑपइंडिया ने मारुति नंदन के इन दावों की पड़ताल का फैसला किया। हम 13 अक्टूबर की ही हिंसा से प्रभावित एक अन्य गाँव नथुआपुर पहुँचे जो महराजगंज से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ पर हमें हिन्दू बहुल गाँव में मौजूद मुस्लिम परिवार अपने घरों के बाहर आराम से बैठ कर बातचीत करता दिखा। इसी दौरान हमें मोहम्मद कलीम मिले जिन्होंने अवधी भाषा में बताया, “हमका तो कोई परेशानी नाहीं है। मारिस-पीटिस कोई नाहीं।” (हमको कोई दिक्कत नहीं है। किसी ने मुझे नहीं मारा-पीटा)।

इजरायल ने अब ईरान के सैन्य ठिकानों पर किया हमला, ड्रोन और मिसाइल बनाने वाले सेंटर बर्बाद: चेतावनी में कहा- दोबारा हमें नुकसान पहुँचाया तो छोड़ेंगे नहीं

इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, और इस तनाव का जवाब देते हुए इजरायल ने शनिवार, 26 अक्टूबर 2024 को ईरान के विभिन्न शहरों में सटीक हमले किए। पिछले महीने 1 अक्टूबर को ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल हमले के बाद से ही इस पलटवार की संभावना जताई जा रही थी। इस पलटवार में इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों को प्रमुखता से निशाना बनाया।

इजरायल ने इस मिशन को ‘Days of Repentance’ नाम दिया था। इस अभियान के दौरान इजरायल ने ईरान के अलावा इराक और सीरिया में भी हमले किए। हमलों के बाद इजरायल, ईरान और इराक ने अपनी हवाई सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी है। इजरायल के इस हमले में दर्जनों फाइटर जेट शामिल हुए, जिसमें एफ-15 और एफ-35 भी थे। इन फाइटर जेट्स का जवाब ईरान जैसे देशों के पास नहीं है।

तीन स्टेज में इजरायल ने बरसाई ईरान पर आफत

अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, ईरान पर ये हमले तीन चरणों में किए गए। पहले चरण में इजरायल ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट किया, जिससे ईरान की रक्षा क्षमता कमजोर हो गई। इसके बाद, दूसरे और तीसरे चरण में इजरायली सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन प्रोडक्शन सेंटर पर निशाना साधा। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था ताकि भविष्य में इजरायल पर होने वाले हमलों की संभावना को कम किया जा सके।

इजरायली सेना ने इस हमले के कई वीडियो भी जारी किए हैं। एक वीडियो में दिखाया गया कि इजरायल एयरफोर्स के कमांड सेंटर में कैसे अधिकारियों ने ईरान पर हमले का निर्देश दिया। इस वीडियो में इजरायली चीफ ऑफ जनरल स्टाफ हर्ज़ी हलेवी को कैंप राबिन स्थित अंडरग्राउंड सेंटर से इस अभियान की निगरानी करते हुए दिखाया गया है। इस कमांड सेंटर में बैठकर उन्होंने पूरे हमले की प्लानिंग और रणनीति तय की।

IDF का बयान, ईरान ने फिर से हिमाकत की, तो हम तैयार

हमले के बाद इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के प्रवक्ता रियर एडमिरल डैनियल हैगरी ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, “हमने ईरान के खिलाफ हमले पूरे कर लिए हैं। इजरायल की सुरक्षा के लिए तत्काल खतरों को खत्म कर दिया गया है। अगर ईरान आगे बढ़ने की गलती करता है, तो हम एक बार फिर जवाब देने के लिए तैयार हैं।”

उन्होंने कहा, “आज हमने ईरान और पूरी दुनिया को बता दिया कि इजरायल में कितनी ताकत है। हमारा संदेश साफ है कि जो भी हमारे देश को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेगा, उसे उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।” हैगरी ने आगे कहा कि इजरायल ने यह दिखा दिया है कि वह अपने देश और अपने लोगों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, चाहे वह आक्रामक हो या रक्षात्मक रणनीति हो।

अमेरिका को पहले से पता थी हमले की योजना

हमले से पहले इजरायल ने अमेरिका को इसकी जानकारी दी थी। अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता सीन सावेट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इजरायल का यह कदम आत्म-रक्षा के अधिकार का प्रयोग है। हालांकि अमेरिका ने पहले इजरायल से यह अनुरोध किया था कि वह ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला न करे। इजरायल ने इसका सम्मान करते हुए केवल सैन्य ठिकानों पर हमले किए और आम नागरिकों को नुकसान से बचाने का पूरा प्रयास किया।

हमलों के बाद ईरान और इराक दोनों देशों ने अपनी हवाई सेवाएँ अस्थायी रूप से रोक दी हैं। ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन के प्रवक्ता ने बताया कि फिलहाल सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। वहीं, इराक ने भी सभी उड़ानों को निलंबित करने की घोषणा की है। इस कदम के पीछे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने को मुख्य कारण बताया जा रहा है। इजरायल के इस कदम से क्षेत्र में खलबली मच गई है और कई देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।

इजरायल ने अपने इस हमले से एक बार फिर दिखा दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। ईरान पर तीन चरणों में हमले करके इजरायल ने न केवल अपनी सुरक्षा को मजबूत किया है बल्कि यह भी संकेत दिया है कि वह अपने दुश्मनों को करारा जवाब देने के लिए हमेशा तैयार है। अब देखना यह है कि इस हमले के बाद ईरान और अन्य संबंधित देश क्या रुख अपनाते हैं।

‘मोहल्ला खाली करके भागो’: अजरुद्दीन सहित 40-50 कट्टरपंथियों ने BJP पार्षद के पति को घोंपा चाकू, पथराव भी; पुलिस ने 4 को गिरफ्तार कर निकाला जुलूस

राजस्थान के भीलवाड़ा में पटाखा फोड़ने पर भाजपा नेता देवेंद्र सिंह हाड़ा को कट्टरपंथी मुस्लिमों के एक समूह ने चाकू मार दिया। इस हमले में देवेंद्र और उनका भतीजा योगेश हाड़ा उर्फ बबलू सहित तीन लोग घायल हो गए हैं। हमलावरों ने पथराव किया और तीन कारों को भी आग लगा दी। पुलिस ने FIR दर्ज करके चार आरोपितों को पकड़ लिया है और बाजार में उनका जुलूस निकाला।

पुलिस ने बताया कि हिंदू पक्ष के कुछ लोग पटाखे छोड़ रहे थे। इसको लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने आपत्ति जताई और उन पर पथराव और फिर हमला कर दिया। इस हमले में देवेंद्र सिंह हाड़ा को चोटें भी आई हैं। पुलिस ने बताया कि इस मामले में 25 लोगों को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

घटना भीलवाड़ा शहर के भीमगंज थाना क्षेत्र की है। वहाँ भाजपा पार्षद मंजू देवी के पति देवेंद्र सिंह हाड़ा भीमगंज थाने के पास चाय की दुकान चलाते हैं। गुरुवार (24 अक्टूबर 2024) की देर शाम वे कुछ युवकों के साथ अपनी दुकान के बाहर पटाखे फोड़ रहे थे। इसी दौरान एक समुदाय विशेष के करीब 40-50 लोग मौके पर पहुँचे और पटाखे फोड़ने पर आपत्ति जताई।

देवेंद्र हाड़ा ने बताया कि दिवाली का माहौल है, इसलिए वे पटाखे जला रहे हैं। यह सुनकर अजहरुद्दीन नाम के एक मुस्लिम युवक ने चाकू निकाल लिया और उन पर हमला कर दिया। उसने चाकू देवेंद्र के पेट में घोंप दिया। जब हिंदू पक्ष के अन्य लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उन पर भी हमला कर दिया गया। देवेंद्र और योगेश के अलावा आनंद शर्मा भी घायल हो गए।

कहा जा रहा है कि हमलावरों ने देवेंद्र सिंह हाड़ा को 3-4 बार चाकू घोंपा। वहीं, एंबुलेंस चालक अमित शर्मा और एक छात्र आदि शर्मा के साथ मारपीट की गई। घटना की जानकारी मिलते ही अन्य हिंदू और पुलिस वहाँ पहुँची तो हमलावर भाग गए। इसके बाद पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुँचाया। बड़ी संख्या में हिंदू अस्पताल पहुँचे और आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर जमकर हंगामा किया।

हमला और आगजनी के मामले में पुलिस ने चार रिपोर्ट दर्ज की है। देवेन्द्र सिंह हाड़ा ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह अपनी चाय की दुकान पर दो लोगों के साथ पटाखे फोड़ रहे थे। उसी दौरान गुलजार नगर निवासी अजहरुद्दीन लोहार, उसका भाई शाहिद, फैजान, फरदीन, खालिक लोहार सहित 30-40 लोग आए और चाकू व अन्य हथियारों से हमला कर दिया।

इसी तरह पार्षद मंजू देवी हाड़ा ने भी रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि मंगला चौक में जुनैद, जावेद, मोनू, युनूस, इमरान, जफर, ओमान, जुनैद, नोमान, फिरदौस, टीना, जरीना, मुमताज, बिलकिस आदि ने सरिये-डंडे और पत्थर लेकर उनके घरों पर हमला कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये लोग मोहल्ला खाली करने की भी धमकियाँ दे रहे थे।

वहीं, मंगला चौक नागौरी मोहल्ला निवासी विनोद सोनी ने पुलिस को दी गई रिपोर्ट में कहा है कि रात करीब 11 बजे सलीम अंसारी, मोनू अंसारी, युनूस, इमरान, खालिद, बिलाल सहित कई मुस्लिम महिलाओं ने अपने घरों से पथराव किया। यह पथराव मंगला चौक के कई इलाकों में की गई है। वहीं, असलम शेख ने अपनी कार में आग लगाने की शिकायत दी है।

इस घटना को लेकर हिंदू संगठनों एवं भाजपा से जुड़े लोगों ने शुक्रवार (25 अक्टूबर) को शहर में विरोध प्रदर्शन किया। महापौर राकेश पाठक के नेतृत्व में भाजपा और निर्दलीय पार्षद एसपी धर्मेंद्र सिंह से मिले। उन्हें ज्ञापन देकर आरोपितों को जल्द गिरफ्तार करने की माँग की। नेताओं ने कहा कि पिछले कुछ समय से शहर में विशेषकर हिंदू त्योहारों पर सुनियोजित रुप से लगातार हमले हो रहे हैं।

हालात को देखते हुए पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें चाकू मारने वाला अजरुद्दीन भी शामिल है। आरोपितों को लेकर पुलिस ने बाजार में जुलूस भी निकाला। इसके बाद किसी घटना को रोकने के लिए शहर में जगह-जगह पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई है।