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हिरोइन को पहले प्यार में फाँसा, फिर ब्रेनवॉश कर बना दिया मुस्लिम: कहा- मैं भटक गई थी, भाग्यशाली हूँ कि सनातन में वापसी हो गई

एक्ट्रेस चाहत खन्ना ने एक इंटरव्यू में बताया है कि उन्हें इस्लाम की तरफ ले जाने के लिए ब्रेनवाश किया गया था। चाहत ने यह भी बताया कि वह अपने सनातन धर्म में वापसी करके काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें उनके धर्म का हर पहलू गलत बताया जाता था। यह सारी बातें चाहत खन्ना ने एक इंटरव्यू में बताई हैं।

चाहत खन्ना ने टेलीटॉकइंडिया नाम के एक चैनल को दिए गए 43 मिनट लम्बे इंटरव्यू में यह सारे खुलासे किए। चाहत खन्ना ने फरहान मिर्जा से निकाह के बाद इस्लाम कबूल करने और उसके बाद वापस सनातन में आने को लेकर अपना पक्ष रखा।

चाहत खन्ना ने बताया, “मैं काली भक्त हूँ, कृष्ण भक्त हूँ। मुझे मेरे तलाक के बाद वापस अपने मूल धर्म में आने में काफी वक्त लगा। मुझे लगभग 4-5 साल लग गए क्योंकि मुझे इस्लाम में विश्वास था, मुझे इस्लाम की कुछ चीजे अब भी पसंद हैं। लेकिन फिर भी मैं अपनी जड़ों की ओर वापस लौटी, और मैं अपने आप को भाग्यशाली मानती हूँ कि मैं वापस लौटी।”

चाहत खन्ना ने इसके बाद बताया, “मैं भटक गई थी। क्योंकि जब आप बच्चे होते हैं और साथ ही जल्द ही प्रभावित किए जा सकते हैं तब आपको बताया जाता है कि आप जो कर रहे हैं वह गलत है, तो आपस शर्तिया भटक ही जाएँगे… ऐसा कुछ मेरे साथ हुआ। लेकिन मैं सनातन में वापस आ गई, इसमें कुछ समय लगा।”

चाहत खन्ना से अब इसके बाद पूछा गया कि क्या वह इस्लाम में जाने को ब्रेनवाश का नाम देंगी तो उन्होंने कहा, “मुझे नहीं मालूम क्या था, लेकिन ऐसा कह सकते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ब्रेनवाशिंग हो ही जाती है और यह काफी बढ़ी है। चाहत खन्ना ने इसके बाद फिर से एक बार सनातन में वापसी पर ख़ुशी जताई। आप यह पूरी बातचीत नीचे लगे वीडियो में 26:00 से लेकर 29:00 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

38 साल की चाहत खन्ना सोनी टीवी के पॉपुलर शो ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ और जी टीवी के हो कुबूल है में काम कर चुकी हैं। उन्होंने कुछ फिल्मों में भी काम किया है। चाहत खन्ना एक मॉडल भी हैं। खन्ना ने 2006 में एक कारोबारी भरत नरसिंहानी से शादी की थी। हालाँकि, उनसे चाहत का तलाक हो गया था।

चाहत ने इसके बाद फरहान मिर्जा से निकाह किया था। फरहान भी बॉलीवुड से जुड़े हुए हैं। फरहान से निकाह के बाद चाहत ने इस्लाम में धर्मांतरण कर लिया था। दोनों के 2 बेटियाँ हैं। फरहान से भी चाहत का 2018 में तलाक हो गया था। इसके बाद चाहत ने सनातन में वापसी कर ली है और अब इस्लाम कबूल करने के बारे में खुलासा किया है।

पुणे के एक गाँव को बांग्लादेशियों ने बना रखा था ठिकाना, फर्जी दस्तावेजों के साथ 21 गिरफ्तार: त्रिपुरा में 3 रोहिंग्या पकड़े गए, जा रहे थे हैदराबाद

महाराष्ट्र के पुणे स्थित रंजनगाँव में अवैध रूप से रह रहे 21 बांग्लादेशी नागरिकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, त्रिपुरा पुलिस ने 3 रोहिंग्या मुस्लिम और 2 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुणे पुलिस ने 10 अवैध घुसपैठियों को कोर्ट में पेश किया, जहाँ अदालत ने उन्हें 24 अक्तूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इनके पास से पैन-वोटर कार्ड सहित कई फर्जी दस्तावेज मिले हैं।

पुणे ग्रामीण एसपी पंकज देशमुख ने कहा, “कल रंजनगाँव एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में हमने एक अपराध दर्ज किया। पूछताछ के बाद हमें पता चला कि वे रंजनगाँव इलाके में अवैध रूप से रह रहे थे। इसलिए हमने एक अपराध दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें कोर्ट ले जाया गया है। कोर्ट ने 24 अक्टूबर तक 10 ऐसे आरोपियों की पुलिस हिरासत मंजूर की है।”

उन्होंने कहा, “हम पता लगा रहे हैं कि वे कितने समय से भारत में हैं। प्रारंभिक जाँच से पता चलता है कि वे 6 महीने से लेकर 10 साल से ये देश में रहे हैं। हम पता लगा रहे हैं कि इस देश में रहने का उनका मकसद क्या है। उनमें से कई लोग श्रम गतिविधि में लिप्त हैं और उन्हें मजदूरी कर रहे हैं। इसलिए, उनकी वास्तविक स्थिति पर टिप्पणी करना अभी बहुत प्रारंभिक है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने उनके पास से मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा, कई लोगों के पास से अवैध रूप से रह रहे लोगों के बारे में भी जानकारी मिली है। हम इस पहलू की भी जाँच कर रहे हैं कि क्या कोई संगठित रैकेट या एजेंट है, जो बांग्लादेशी नागरिकों को हमारे देश में लाकर स्थापित कर रहा है।”

कहा जा रहा है कि आरोपितों में 15 पुरुष, 4 महिलाएँ और 2 ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल हैं। इन आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 336(2), 336(3), 338, 340(2) और भारतीय पासपोर्ट अधिनियम 1920 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जाँच जारी है।

दरअसल, खुफिया सूचना के आधार पर पुणे पुलिस ने रजनगाँव में सोमवार (21 अक्टूबर 2024) को सर्च ऑपरेशन चलाया था और इन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस अधीक्षक पंकज देशमुख ने कहा, “उनमें से नौ के पास फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड थे और उनमें से एक के पास वोटर आईडी कार्ड भी था। बांग्लादेशी नागरिक के पास वोटर आईडी कार्ड था, उसने इसे गुजरात से हासिल किया था।”

एसपी ने कहा कि ये सभी या तो पैदल चलकर सीमा पार करते हुए पश्चिम बंगाल में यहाँ आए या फिर नावों से समुद्री मार्ग से अवैध रूप से यहाँ पहुँचे। उन्होंने कहा, “इनमें से कुछ के बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र तीन साल से पाँच साल के बीच है। भारत में घुसने के बाद ये गुजरात और मुंबई चले गए। कुछ दिन पहले ये पुणे आए हैं।” उन्होंने कहा कि जाँच चल रही है और 2-3 दिन में यह बात स्पष्ट हो जाएगी।

जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा है, उनके नाम हैं- अजमुल शरत खान उर्फ ​​हासिफ खान (50) मोहम्मद अकबर अजीज अकबर सरदार (32) शफीकुल अलीमिया शेख (20) हुसैन मुखिद शेख (30) तारिकुल अतियार शेख (38) मोहम्मद उमर फारूक बाबू उर्फ ​​बाबू बुख्तियार शेख (32) शाहीन शाहजान शेख ( 44) मोहम्मद हुसैन शेख (32) रऊफ अकबर दफादार (35) इब्राहिम काजोल शेख (35) फरीद अब्बास शेख (48) मोहम्मद सद्दाम अब्दुल सखावती (35) मोहम्मद अब्दुल हबीब रहमान सरदार (32) आलिमिया तोहकील शेख (60) मोहम्मद इसराइल फकीर (35) फ़िरोज़ा मुताक़ीन शेख़ (20) लिपिया हसमुख मुल्ला (32) सलमा मलिक रोशन मलिक (23) हिना मुल्ला जुल्फिकार मुल्ला (40) सोनदीप उर्फ ​​काजोल बासुदीप विशेष (30) येनूर शाहदता मुल्ला (25).

त्रिपुरा में बांग्लादेशी और रोहिंग्या गिरफ्तार

वहीं, त्रिपुरा की राजधानी अगरतला रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा एजेंसियों ने मंगलवार (22 अक्टूबर 2024) की सुबह तीन रोहिंग्या मुस्लिम और दो बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के प्रभारी अधिकारी तपस दास ने कहा कि उन्हें सूचना मिली कि कुछ रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक त्रिपुरा से बाहर जाने के लिए अगरतला रेलवे स्टेशन पर आएँगे।

दास ने कहा, “सूचना के आधार पर जीआरपी, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और बीएसएफ के जवान सादे कपड़ों में स्टेशन पर इंतजार कर रहे थे। जब वे लोग पहुँचे तो हमने उनमें से पाँच को हिरासत में लिया। शुरू में उन्होंने भारतीय नागरिक होने का दावा किया, लेकिन पूछताछ के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि उनमें से तीन रोहिंग्या और दो बांग्लादेशी हैं। वे अवैध रूप से राज्य में घुसे थे।”

तपस दास ने आगे बताया कि पूछताछ में पता चला कि रोहिंग्या नागरिक हैदराबाद जाने वाले थे, जबकि बांग्लादेशी नागरिक मुंबई जाने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा, “हमने उनके पास से बांग्लादेशी मुद्रा, दस्तावेज और कुछ मोबाइल फोन जब्त किए हैं। हम उन्हें अदालत में पेश करके आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड माँगेंगे।”

मुजफ्फरनगर दंगा में AIMIM के 3 नेताओं सहित 19 गिरफ्तार, मुस्लिम भीड़ ने की थी पत्थरबाजी: अखिल त्यागी के विरोध में लगाए थे ‘सर तन से जुदा’ के नारे

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में सड़क पर दंगा-पत्थरबाजी करने वाली इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ पर पुलिस ने कार्रवाई करना चालू कर दिया है। पुलिस ने कथित ईशनिंदा के मामले में दंगा करने वाले AIMIM के पदाधिकारियों समेत 19 लोगों को पकड़ा है। पुलिस बाकी दंगाइयों को पकड़ने के लिए दबिश दे रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुजफ्फरनगर पुलिस ने बुढ़ाना विधानसभा AIMIM अध्यक्ष आजम, हसनैन और राहिल को पकड़ा गया है। AIMIM के दो अन्य पदाधिकारी रमीज और तारिक फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

मुजफ्फरनगर के SSP अभिषेक सिंह ने बताया है कि AIMIM के इन पाँचों पदाधिकारियों ने मुस्लिम भीड़ को इकट्ठा किया था। इसके लिए उन्होंने व्हाट्सएप पर मैसेज किए थे और ऑडियो भी भेजे थे और खुद बुलाने तक गए थे। इसके अलावा इन लोगों ने कथित ईशनिंदा के कथित आरोपित अखिल के घर पर पथराव के लिए भी उकसाया था।

SSP अभिषेक सिंह ने बताया कि इनके अलावा 16 लोग और गिरफ्तार किए गए हैं। बाकी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश डाल रही है। पुलिस ने इस मामले में 700 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले में सबूत भी जुटाया जा रहे हैं।

जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके खिलाफ बलवा और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इस घटना के दौरान मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए हंगामे के वीडियो और CCTV फुटेज भी जुटा रही है। पुलिस ने लोगों से इस विषय सूचना देने को कहा है।

गौरतलब है कि शनिवार (20 अक्टूबर, 2024) को मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में शाम को इस्लामी कट्टर पंथियों की एक भीड़ इकट्ठा हुई थी। इस भीड़ में शामिल लोगों को कहना था कि अखिल त्यागी नाम के एक स्थानीय युवक ने उनके मजहब के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की है।

इस भीड़ को इस बात पर उकसाया गया था कि अखिल त्यागी को पुलिस ने पकड़ने के 20 मिनट के बाद ही छोड़ दिया था। भीड़ ने बुढ़ाना में कई घंटे तक बवाल काटा था और रोड जाम कर दिया था। भीड़ ने अखिल त्यागी के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ वाले नारे भी लगाए थे।

इसके बाद अखिल त्यागी की दुकान और घर पर भी इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पथराव किया था। इस्लामी कट्टरपंथियों के इस बवाल के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इस्लामी कट्टरपथियों की भीड़ हिंसक होने के बाद पुलिस ने यहाँ लाठीचार्ज करके मामला शांत किया था। इसके बाद दंगाइयों पर कार्रवाई चालू की गई थी।


‘पैसा क्या चीज है, यीशु की पूजा करो सब मिलेगा’: नेटवर्क मार्केटिंग की तरह पति-पत्नी चला रहे थे धर्मांतरण रैकेट, जिसे बनाते ईसाई उसे ही नए हिंदू को फँसाने का देते थे टास्क

उत्तर प्रदेश के मेरठ में ईसाई में धर्मांतरण का खुलासा किया है। पुलिस की छापेमारी में एक मकान के भीतर 40 से ज्यादा महिलाएँ और बच्चे मौजूद मिले। धर्मांतरण के लिए लोगों को लड़का-लड़की की शादी कराने के लिए चर्च द्वारा खर्च उठाने, नकद पैसे देने और बीमारी दूर करने का लालच देकर ब्रेनवॉश किया जा रहा था। यह सब नेटवर्क मार्केटिंग की तरह अंजाम दिया जा रहा था।

कंकरखेड़ा थाना इलाके की विकास एन्क्लेव कॉलोनी में केरल का बिज्जू मैथ्यू दो महीने पहले किराए का मकान लेकर अपने परिवार के साथ यहाँ रहता है। यहाँ वह हर रविवार को प्रार्थना सभा का आयोजन करता था। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सुबह से लेकर शाम तक इस मकान में आते रहते थे। इसको देखकर स्थानीय लोगों को संदेह हुआ और उन्होंने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस और हिंदू संगठनों को दे दी।

रविवार (20 अक्टूबर 2024) को पुलिस और हिंदू संगठन के लोग वहाँ पहुँचे तो महिलाएँ और बच्चे जमीन पर बैठे हुए थे। वहीं, बिज्जू और उसकी पत्नी कुर्सी पर बैठकर हिंदू धर्म के खिलाफ लोगों को भड़का रहे थे। बिज्जू कह रहा था, “जो तुमसे प्यार करे उसको प्यार करो। आज करवाचौथ का दिन है लेकिन परिवार तुमसे प्यार नहीं करता, परमेश्वर करता है इसलिए परमेश्वर की शरण में आओ।”

वह लोगों से कह रहा था, “तुम्हें यीशु की पूजा करनी है। पैसा क्या चीज है? जो तुम चाहोगे, वह सब मिलेगा। तुम्हारे देवता क्या दे पाए आज तक? समाज में तुम्हें इज्जत तक नहीं मिलती। यीशु की शरण में चले आओ। यहाँ सब कुछ मिलेगा तुम्हें।” उसके हिंदू विरोधी प्रवचन को सुनकर हिंदू संगठनों के साथ-साथ स्थानीय लोग भड़क गए। इस दौरान भाजपा के पूर्व पार्षद ऋषिपाल सिंह भी मौजूद थे।

इसके बाद पुलिस ने बिज्जू और उसकी पत्नी के साथ-साथ एक व्यक्ति को लेकर थाने आ गई। एक व्यक्ति की तहरीर पर पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ मामला दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया। भाजपा नेता अनमोल ने दावा किया कि पूछताछ में उन्हें पता चला है कि ये पति-पत्नी अब तक 300 लोगों का धर्मांतरण करा चुके हैं। दरअसल, बिज्जू पादरी के रूप में काम करता है।

भास्कर की टीम ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पाया कि धर्मांतरण का यह खेल बहुत सुनियोजित तरीके से खेला जा रहा था। यह बिल्कुल नेटवर्क मार्केटिंग की तरह काम करता है। यहाँ जिस व्यक्ति का धर्मांतरण किया जाता है, उसे दो अन्य लोगों को लाना होता है और उन्हें धर्मांतरण कराना होता है। इसके बदले में उन्हें तमाम तरह के लालच दिए जाते हैं।

ईसाई में धर्मांतरण के लिए बिज्जू तीन लालच देता था। पहला, धर्मांतरण करने वाले परिवार के लड़का या लड़की की शादी करवाएगी और इसका खर्च चर्च के लोग उठाएँगे। दूसरा, धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति या परिवार को खुद का रोजगार करने के लिए 2 से 5 लाख रुपए तक की मदद देने का वादा करता था। तीसरा, बीमारियाँ ठीक करने के लिए पवित्र जल और झाड़-फूँक का वादा करते थे।।

भाजपा नेता अनमोल ने कहा कि करीब डेढ़ महीने से बिज्जू के आवास वाले मकान में महिलाओं एवं बच्चों का लगातार आना-जाना लगा था। बाद में पता चला कि वे ईसाई धर्म का प्रचार कर रहे हैं। अनमोल का दावा है कि बिज्जू और उसकी पत्नी पिछले 15 साल से मेरठ के अलग-अलग इलाके में किराए पर मकान लेते हैं और वहाँ पर प्रार्थना सभा आयोजित करके लोगों। को ईसाई में धर्मांतरण करवाते हैं।

अनमोल के अनुसार, यहाँ आने वाली एक महिला ने बताया कि हमसे कहा जाता था कि जो कुछ हम सीखते हैं, उसको आगे भी 2 लोगों को बताना और सिखाना है। उन्हें परमेश्वर की कृपा और उसके चमत्कारों के बारे में बताना है। इस तरह से यह नेटवर्क बनता चला जाता था। एक आदमी का धर्म बदलता तो वो दूसरे आदमी को धर्मांतरण के लिए तैयार करता। उनका फोकस गरीब और महिलाओं पर होता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि धर्मांतरण के इस गिरोह का नेटवर्क बहुत मजबूत है। आम जनता के बीच में इनके लोग मौजूद हैं। इनमें मिशनरी स्कूलों के शिक्षक भी शामिल हैं। ये शिक्षक शहर के नामी स्कूलों में बच्चों का नामांकन कराने का लालच देते हैं। ये गरीब और महिलाओं को अनाज एवं दवाएँ देकर झाँसे में लेते और फिर उनका ब्रेनवॉश करते थे।

इस मामले पर एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि धर्मांतरण का आरोप है और इसकी जाँच सीओ दौराला शुचिता सिंह को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जाँच के बाद जो भी तथ्य सामने आएँगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसपी आयुष विक्रम सिंह ने कहा कि यदि धर्मांतरण की बात सच निकलती है तो आरोपितों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

जामिया में दीपोत्सव मना रहे छात्रों पर इस्लामी कट्टरपंथियों का हमला, लगे अल्लाह-हू-अकबर और फिलिस्तीन जिंदाबाद के नारे: पीड़ित बोले- मेवात स्टूडेंट यूनियन ने किया उपद्रव, छात्राओं से कहा हिजाब पहनो

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में इस्लामी कट्टरपंथियों ने दीवाली मना रहे हिन्दू छात्रों पर हमला बोल दिया। इस्लामी कट्टरपंथियों ने बदतमीजी की और मारपीट की। उन्होंने अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारे लगाए। इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले के कारण कई छात्रों को अस्पताल ले जाना पड़ा।

जामिया में यह घटना मंगलवार (22 अक्टूबर, 2024) को हुई। यहाँ हर साल की तरह जामिया में गेट नम्बर 7 पर गुलिस्ताँ-ए-ग़ालिब के पास दीपोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया रहा था। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय कला मंच कर रहा था। इसके अंतर्गत एक रंगोली प्रतियोगिता भी करवाई गई थी।

शाम लगभग 7:00-7:30 बजे के आसपास इस कार्यक्रम पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने धावा बोल दिया। उन्होंने यहाँ पैरों से दीए तोड़ डाले और रंगोलियों को बर्बाद कर दिया। उन्होंने यहाँ मौजूद छात्राओं से भी बदतमीजी की। छात्रों के साथ धक्कामुक्की करते हुए इस्लामी कट्टरपंथी अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाने लगे। यहाँ कट्टरपंथियों ने फिलिस्तीन जिंदाबाद के नारे भी लगाए।

हिन्दू छात्रों पर हमला करने और दीपोत्सव में हंगामा करने का आरोप मेवात स्टूडेंट यूनियन नाम के एक इस्लामी छात्र संगठन पर लगा है। पीड़ितों का आरोप है कि इन लोगों ने बाहर भी लोगों को बुलाया और उसके बाद भीड़ के रूप में हमला बोला।

इस घटना के कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं जिनमें यह कट्टरपंथी यह नारे लगाते हुए सुने जा सकते हैं। इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले में 2 छात्रों के चोट आने की भी सूचना है, जिनको अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। कुछ छात्रों को इस वजह से चक्कर भी आ गए।

इस कार्यक्रम में शामिल जामिया के BA मास मीडिया पाठ्यक्रम के छात्र प्रियांशु कुमार ने ऑपइंडिया को बताया, “हर साल की तरह इस बार भी आयोजन को किया जा रहा था। इस आयोजन में बड़ी संख्या में मुस्लिम लडकियाँ भी शामिल थीं। इसी बीच जामिया की ही मेवात स्टूडेंट यूनियन के कुछ कट्टरपंथी आए और हंगामा करने लगे।”

प्रियांशु ने ऑपइंडिया को बताया, “मेवात स्टूडेंट यूनियन के इस्लामी कट्टरपंथियों ने यहाँ हाथापाई चालू कर दी। उन्होंने लड़कियों को हिजाब पहनने को लेकर धमकी दी। इसके बाद वह अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर चिल्लाने लगे। हिन्दू छात्रों को यहाँ से बड़ी मुश्किल से निकाला गया।”

प्रियांशु ने यह भी बताया कि मेवात स्टूडेंट यूनियन के गुंडों ने यहाँ जबरदस्ती सबके पहचान पत्र चेक करने की कोशिश की, उन्होंने यहाँ चोटिल हुए छात्रों को इलाज के लिए ले जाए जाने के दौरान बाधाएँ खड़ी की। प्रियांशु ने बताया कि यह इस्लामी कट्टरपंथी लगभग बड़ी संख्या में हमला करने की तैयारी करके आए थे।”

जामिया में हँगामे की सूचना के बाद भारी पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया। अभी हंगामा करने वालों की पहचान नहीं हो पाई है। इस बीच ABVP ने जामिया प्रशासन और दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने माँग की है कि इन दंगाइयों की पहचान करने के बाद उनको गिरफ्तार किया जाए।

दिल्ली पुलिस ने इस घटना पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ” यह घटना शाम 7:30-8 बजे गेट 7 के पास हुई। ABVP से जुड़े छात्रों का एक समूह दिवाली के लिए दीये और रंगोली बना रहा था, जिससे छात्रों का एक अन्य समूह भड़क गया। दूसरे समूह ने इस सजावट पर हमला कर दिया, इसके बाद हाथापाई हुई। दोनों पक्षों ने नारेबाजी की। शांति बनाए रखने के लिए पुलिस को तैनात किया गया था, छात्रों को तितर-बितर होने का आदेश दिया गया और रात 9 बजे तक भीड़ यहाँ से चली गई।”

BRICS की बैठक से पहले कजान में मिले PM मोदी-राष्ट्रपति पुतिन, यूक्रेन युद्ध पर बोला भारत- हम हर रोल निभाने को तैयार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मंगलवार (22 अक्टूबर, 2024) को कजान शहर में द्विपक्षीय वार्ता हुई है। पीएम मोदी कजान में 2024 के BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस गए हैं। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस के संबधों की गहराई को लेकर बात की। पीएम मोदी ने इस दौरान यूक्रेन-रूस संघर्ष का जिक्र भी किया।

पीएम मोदी ने आगे कहा, “पिछले तीन महीनों में मेरा दो बार रूस आना हमारी करीबी को दिखाता है। जुलाई में मास्को में हुई हमारी वार्षिक बैठक से हर क्षेत्र में हमारे सहयोग को बल मिला है। पिछले एक वर्ष में BRICS की सफल अध्यक्षता के लिए आपको मैं बधाई देता हूँ। अब विश्व के अनेक देश इससे जुड़ना चाहते हैं।”

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से कहा, “रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर हम सम्पर्क में रहे हैं। हमारा मानना है कि समस्याओं का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से ही होना चाहिए। शांति और स्थिरता की जल्द बहाली का हम समर्थन करते हैं। हमारे प्रयास मानवता को प्रमुखता देते हैं।”

पीएम मोदी ने अपने स्वागत सत्कार के लिए राष्ट्रपति पुतिन को धन्यवाद दिया। पीएम मोदी ने बात पर ख़ुशी जताई कि कजान को BRICS बैठक के लिए चुना गया है। उन्होंने इस दौरान कजान में नए भारतीय दूतावास का जिक्र किया और कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती मिलेगी। पीएम मोदी ने शांति प्रयासों में अपनी पूरी सहभागिता का वादा भी किया।

वहीं राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को कजान आने का निमंत्रण स्वीकारने के लिए धन्यवाद दिया। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि BRICS समिट के दौरान सभी नेता महत्वपूर्ण नेता बातचीत करेंगे। राष्ट्रपति पुतिन ने इस दौरान उनकी पीएम मोदी से जुलाई में मुलाकात और टेलीफोन की बातचीत का जिक्र किया।

राष्ट्रपति पुतिन ने इस दौरान मजाकिया अंदाज में कहा कि उनके और पीएम मोदी के रिश्ते इतने गहरे हैं कि पीएम मोदी उनकी बात बिना अनुवाद के समझ जाएँगे। पीएम मोदी राष्ट्रपति पुतिन की इस बात पर हंस पड़े। दोनों नेताओं के बीच इस दौरान अन्य कई मुद्दों पर बातचीत भी हुई।

पीएम मोदी मंगलवार (22 अक्टूबर, 2024) को ही कजान पहुँचे थे। वह बुधवार को BRICS शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। BRICS की शिखर बैठक के लिए पीएम मोदी के अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी पहुँचे हैं। हाल ही में लद्दाख में भारत और चीन के बीच हुए सझौटे के बाद आशा जताई जा रही है कि यहाँ दोंनो नेताओं की मुलाक़ात भी होगी।

हिंदू विरोधी बयान पर माफी माँगने से तमिलनाडु के डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन ने किया इनकार, कहा था- सनातन डेंगू-मलेरिया की तरह, इसे खत्म करना होगा

तमिलनाडु के डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने अपने बयान पर माफी माँगने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म को “समाप्त” करने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि उनके बयान का उद्देश्य महिलाओं के प्रति कथित दमनकारी प्रथाओं पर सवाल उठाना था। डीएमके नेता का कहना है कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे सितंबर 2023 में विवाद खड़ा हुआ था।

सोमवार (21 अक्टूबर 2024) को एक कार्यक्रम में बोलते हुए उदयनिधि ने कहा कि उन्होंने पेरियार, पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई और एम. करुणानिधि जैसे द्रविड़ नेताओं के विचारों को दोहराया है। उन्होंने कहा, “महिलाओं को पढ़ने की अनुमति नहीं थी। उन्हें घर से बाहर जाने की आजादी नहीं थी और अगर उनके पति का निधन हो जाता था, तो उन्हें भी मरना पड़ता था। थंथाई पेरियार ने इन सबके खिलाफ आवाज उठाई थी। मैंने वही कहा जो पेरियार, अन्ना और कलाईनार ने कहा था।”

सितंबर 2023 में, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने तब विवाद खड़ा कर दिया जब उन्होंने सनातन धर्म की तुलना “डेंगू” और “मलेरिया” से की और कहा कि इसे सिर्फ विरोध नहीं करना चाहिए, बल्कि “समाप्त” कर देना चाहिए। एक ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ में, उन्होंने तर्क दिया कि सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है। उनके इस बयान पर खासकर बीजेपी और हिंदू संगठनों ने तीखा विरोध जताया और उनके खिलाफ कई कानूनी मामले दर्ज किए गए।

उदयनिधि का कहना है, “मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। न केवल तमिलनाडु में, बल्कि मेरे खिलाफ पूरे भारत में कई अदालतों में मामले दर्ज किए गए। मुझसे माफी माँगने को कहा गया, लेकिन मैं अपने बयान पर कायम हूँ। मैं कलाईनार का पोता हूँ और माफी नहीं माँगूगा।” उन्होंने कहा कि वे सभी कानूनी मामलों का सामना करेंगे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में तमिलनाडु के राज्य गीत में कुछ शब्दों को जानबूझकर हटाया गया है, जिससे विवाद पैदा हुआ है। उदयनिधि ने कहा, “मैं नवविवाहितों से अनुरोध करता हूँ कि वे अपने बच्चे के लिए एक सुंदर तमिल नाम रखें। क्योंकि कई लोग तमिलनाडु में हिंदी थोपने की कोशिश कर रहे हैं। वे इसे सीधे तौर पर नहीं कर पाए, इसलिए तमिल थाई वाजथु (राज्य गीत) से कुछ शब्द हटा रहे हैं। वे नई शिक्षा नीति के जरिए हिंदी थोपने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे असफल हो रहे हैं।”

गौरतलब है कि 46 वर्षीय उदयनिधि पहले तमिलनाडु के खेल मंत्री थे, उन्हें 30 सितंबर 2024 को डिप्टी सीएम बनाया गया था। कहा जा रहा है कि सनातन धर्म विवाद के चलते उन्हें डिप्टी सीएम बनाने में देरी की गई, ताकि मामला शांत हो जाए।

‘अए हिन्दुओं, यहाँ से भाग जाओ वरना गोलियों से भून दूँगा’: मस्जिद से ऐलान के जिस दावे को ‘भ्रामक’ बता रही बहराइच पुलिस, अब उसे दिव्यांग चश्मदीद ने दोहराया

13 अक्टूबर 2024 को बहराइच के महाराजगंज में दुर्गा विसर्जन जुलूस पर हमला हुआ था। राम गोपाल मिश्रा की हत्या कर दी गई थी। 70 वर्षीय बुजुर्ग विनोद मिश्रा और दिव्यांग सत्यवान मिश्रा उन पीड़ितों में हैं, जिन्हें इस हमले में गंभीर चोटें आई थी।

इस हमले के चश्मदीद रहे विनोद मिश्रा ने दावा किया था कि मस्जिद से उकसाए जाने के बाद मुस्लिम भीड़ ने हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला किया था। बहराइच पुलिस ने सोशल मीडिया पर उनके दावे को ‘भ्रामक‘ करार दिया था। अब इसी तरह का दावा दिव्यांग सत्यवान ने किया है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उस दिन मस्जिद से ऐलान किया गया था, “जो हिन्दू जहाँ मिले, वहीं उसको काट दो।” उन्होंने बताया है कि इसी ऐलान के बाद मुस्लिमों की भीड़ ने अब्दुल हमीद के घर के आगे मौजूद हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला किया था। उनका यह भी कहना है कि कट्टरपंथी भीड़ में शामिल लोग कह रहे थे, “अए हिन्दुओं, यहाँ से भाग जाओ वरना गोलियों से भून दूँगा।”

दिव्यांग सत्यवान पर भी टूट पड़ी थी इस्लामी भीड़

सत्यवान मिश्रा शारीरिक तौर पर जन्म से ही 80% से अधिक दिव्यांग हैं। ऑपइंडिया ने सत्यवान मिश्रा के घर पहुँच कर उनसे बातचीत की। बचपन से ही सत्यवान दोनों पैर व एक हाथ से दिव्यांग हैं। वो व्हील चेयर पर चलते हैं। व्हील चेयर भी वो बहुत दूर तक नहीं चला पाते क्योंकि उसे चलाने के लिए काम कर रहा एकमात्र हाथ जल्द ही थक जाता है। घटना के दिन सत्यवान मिश्रा माँ दुर्गा के जुलूस में उसी प्रतिमा के पास ट्राली में बैठे थे, जो दंगाइयों की पत्थरबाजी का शिकार बनी थी। वो श्रद्धालुओं को एक हाथ से प्रसाद बाँट कर तिलक लगा रहे थे।

अभी भी डर से काँप रहे हैं सत्यवान

जब ऑपइंडिया की टीम लगभग 50 वर्षीय सत्यवान के गाँव पहुँची, तब वो घर के बाहर ही चारपाई पर लेटे मिले। आजीवन अविवाहित सत्यवान मिश्रा के चेहरे पर गहरे घाव थे। उनका शरीर काँप रहा था। आँखों में डर साफ़ देखा जा सकता था। होंठो के नीचे धारदार हाथियार से चोटिल किए गए सत्यवान तक से बोल नहीं पा रहे थे। घटना को याद करते हुए वो रो पड़े। उन्होंने अपनी पीठ हमें दिखाई जो काली पड़ चुकी थी।

थोड़ी देर बाद खुद को संभालते हुए सत्यवान ने हमें बताया कि वो पिछले 25 वर्षों से माँ दुर्गा की विसर्जन यात्रा में श्रद्धालुओं को प्रसाद बाँटते हैं और तिलक लगाते हैं। उनका दावा है कि घटना के दिन उनकी ट्राली के साथ चल रहे DJ को अब्दुल हमीद के घर पर रोक लिया गया था। अब्दुल का बेटा सरफराज सबको गालियाँ देते हुए DJ बंद करने पर तुला हुआ था। जब श्रद्धालुओं ने इंकार किया तब सरफराज ने DJ का तार नोच दिया। जैसे ही हिन्दुओं ने इसका विरोध किया, तब अब्दुल के घर से पत्थर चलने लगे।

बेटे की गलती मान लेता अब्दुल को न होता विवाद

सत्यवान मिश्रा हमें आगे बताते हैं कि पत्थरबाजी में माँ दुर्गा की प्रतिमा का हाथ टूट गया। इसके बाद हिन्दू समाज के लोग धरने पर बैठ कर सरफराज के खिलाफ कार्रवाई की माँग करने लगे। इस आपाधापी में अब्दुल हमीद भी बाहर आया था। श्रद्धालुओं में बड़े-बुजुर्ग यह माँग कर रहे थे कि अब्दुल हमीद अपने बेटे की गलती को मान कर उसे डाँट-डपट दें। हालाँकि अब्दुल हमीद इस पर तैयार नहीं हुआ। उलटे को अपने बेटे की करतूत को सही ठहरता रहा।

सत्यवान हमें आगे बताते हैं कि जब अब्दुल ने प्रतिमा पर हमले को सही ठहराया तब माँ दुर्गा के भक्त सड़क पर धरना दे कर पुलिस से सरफराज को गिरफ्तार करने की माँग करने लगे। इस पर पुलिस का रवैया भी ठीक नहीं रहा और वो सरफराज को पकड़ कर माफ़ी भी मंगवाने के लिए तैयार नहीं हुई। इसी बात पर विसर्जन यात्रा में शामिल कुछ श्रद्धालु उग्र हुए जिसमें रामगोपाल मिश्रा भी शामिल थे। वो अब्दुल हमीद की छत पर पहुँच गए और हरा झंडा निकाल कर भगवा लहरा दिया।

पुलिस ने सिर्फ हिन्दुओं को पीटा

बुरी तरह से घायल सत्यवान हमें बताते हैं कि दोनों तरफ से तनातनी होने के बाद पुलिस ने अपना सारा जोर सिर्फ हिन्दुओं पर दिखाया। माँ दुर्गा के भक्तों पर पुलिस ने लाठियाँ बरसानी शुरू कर दीं और उनको दौड़ाते हुए दूर ले गए। पुलिस के लाठीचार्ज से तितर-बितर हो चुके हिन्दुओं को हिंसक भीड़ ने बेरहमी से मारा। सत्यवान का यह भी आरोप है कि बहराइच पुलिस की सभी लाठियाँ हिन्दुओं पर ही गिरीं और इन्ही खाकी वालों ने हमलावर मुस्लिम भीड़ को पूरी तरह से नजरअंदाज किया।

दोनों पैर दिव्यांग, भाग भी न पाए सत्यवान

सत्यवान आगे बताते हैं कि मुस्लिमों की भीड़ उनकी ट्राली पर पहुँच गई। तब तक ट्राली में मौजूद उनके तमाम साथी भाग चुके थे। सत्यवान के दोनों पैर और एक हाथ बचपन से ही नाकाम हैं। वो घिसट-घिसट कर ट्रॉली में ही इधर-उधर चलते रहे। तभी ट्रॉली में चढ़ कर लगभग आधे दर्जन हमलावरों ने लाठी-डंडों से उनको बुरी तरह से मारा। चोटें सत्यवान के सिर और पीठ पर लगीं। इसी दौरान एक धारदार हथियार से सत्यवान के मुँह पर वार हुआ। हमले में सत्यवान का चेहरा लहूलुहान हो गया।

सत्यवान के मुताबिक उनको काफी खून निकला और धीरे-धीरे वो बेहोश हो गए। उन पर हमला करने वालों में कल्लू के बेटे लल्लू और मुन्ना कबाड़ी आदि शामिल थे। हमलावरों के हाथों में तलवारें, चाकू और तमंचे आदि होने का दावा किया गया। तब से सत्यवान को यह नहीं पता चल पाया कि घटनास्थल से उनको उठा कर अस्पताल किसने और कब पहुँचाया। अस्पताल में उनकी हालत काफी गंभीर थी। आखिरकार लखनऊ रेफर करने के बाद वहाँ ट्रामा सेंटर में जैसे-तैसे सत्यवान की जान बची। सत्यवान ने अंत में कहा, “हम हिन्दू हैं। हमें हिन्दू होने के नाते मारा गया।”

ऑपइंडिया के पास वो वीडियो मौजूद है जिसमें सत्यवान मिश्रा को एक सरकारी एम्बुलेंस में लाद कर अस्पताल ले जाया जा रहा है। वीडियो में सत्यवान का चेहरा खून से सना हुआ है। उनके होंठों के नीचे कटे का बड़ा निशान मौजूद है। सत्यवान ने उत्तर प्रदेश सरकार से उम्मीद जताई है कि वो न सिर्फ हमलावर इस्लामी कट्टरपंथियों बल्कि दोषी पुलिसकर्मियों पर भी कठोर कार्रवाई करेगी।

हैदराबाद में लगे ‘सर तन से जुदा’ के नारे, इन्स्टाग्राम पर पोस्ट को लेकर इकट्ठा हुई मुस्लिम भीड़ ने रात भर काटा बवाल

तेलंगाना के हैदराबाद में मुस्लिम भीड़ ने एक बार फिर बवाल काटा। यह मुस्लिम भीड़ सोशल मीडिया पर इस्लाम के खिलाफ कथित तौर पर एक पोस्ट के विरोध में इकट्ठा हुई थी। भीड़ ने रात भर हैदराबाद में भड़काऊ नारे लगाए और सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले को गिरफ्तार करने की माँग की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हैदराबाद के रेईन बाजार इलाके में सोमवार (21 अक्टूबर, 2024) को बड़ी संख्या में मुस्लिम इकट्ठा हो गए। मुस्लिम भीड़ ने यहाँ प्रदर्शन करना चालू कर दिया। मुस्लिम भीड़ ने कहा कि सोशल मीडिया पर एक युवक ने इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की है।

मुस्लिम भीड़ में शामिल लोगों ने लब्बैक-लब्बैक और ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि यह भीड़ एक घर के बाहर पहुँच कर उनको धमकाने भी लगी थी। यह घर उसी का बताया जा रहा है जिसने कथित तौर पर पैगम्बर मुहम्मद का अपमान किया था।

यह परिवार याकूतपुरा के ब्राह्मणवाड़ी में रहता है। भीड़ के नारे लगाने और हंगामा करने के कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं। इसमें पुलिस भी मौके पर बड़ी बड़ी संख्या में मौजूद दिखाई देती है। भीड़ में कई टोपी लगाए युवा भी दिखाई पड़ते हैं।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि यह मुस्लिम एक युवक के इन्स्टाग्राम पर एक पोस्ट से आहत हुई थी। यह युवक रेईन बाजार इलाके में एक होटल में काम करता है। इस पोस्ट को कुछ मुस्लिम युवकों ने देखा और इसके बाद उन्होंने बाकी को बताया। फिर भीड़ इकट्ठा हो गई।

यह हंगामा रात भर चलता रहा। पुलिस ने भीड़ को देखते हुए एक्शन लेने का आश्वासन दिया है। सुबह जाकर यह हंगामा खत्म हुआ। भड़काऊ नारे लगाने वाले युवकों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों ने भीड़ के सामने पुलिस के मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया है।

अहमदाबाद में मॉरिस सैमुअल क्रिश्चियन चला रहा था फर्जी कोर्ट, खुद बनता था जज… अपने लोगों को बनाता था वकील-गवाह: 100 एकड़ सरकारी जमीन पर भी कब्जा कर बैठा था

अहमदाबाद में नकली अदालत स्थापित कर सरकारी जमीन हड़पने का मामला सामने आया है। आरोपित मॉरिस सैमुअल क्रिश्चियन ने खुद को एक मध्यस्थ जज (अर्बिट्रेटर) के रूप में पेश किया और एक फर्जी अदालत की स्थापना की। इस अदालत में उसने नकली वकील और कर्मचारी भी रखे, ताकि यह एक वास्तविक कोर्ट जैसा दिखे। मॉरिस पर आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेजों और फैसलों के आधार पर अहमदाबाद के पालदी क्षेत्र की 100 एकड़ सरकारी जमीन हड़प ली।

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब अहमदाबाद सिटी सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार हार्दिक सागर देसाई ने आरोपित मॉरिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत कारंज पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई, जिसके आधार पर पुलिस ने मॉरिस को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 170, 419, 420, 465, 467, 471 और 120B के तहत मामला दर्ज किया गया, जिनमें धोखाधड़ी, फर्जी पहचान, सरकारी अधिकारी की नकल, और साजिश रचने जैसी गंभीर आरोप हैं। इस मामले की FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास भी उपलब्ध है।

पुलिस के अनुसार, मॉरिस ने पालदी के निवासी बाबूजी छनाजी ठाकोर के मामले में फर्जी मध्यस्थ बनकर सरकार के खिलाफ दावा किया। बाबूजी कई वर्षों से पालदी में जमीन को लेकर सरकार के साथ विवाद में थे। इस दौरान मॉरिस ने खुद को मध्यस्थ घोषित करते हुए बाबूजी के पक्ष में फैसला सुना दिया। इस पूरे मामले में मॉरिस के पास न तो मध्यस्थता का कोई वैध अनुबंध था और न ही वह कानूनी रूप से मध्यस्थता करने का अधिकारी था। इसके बावजूद उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कर बाबूजी के पक्ष में 200 करोड़ की जमीन के स्वामित्व का दावा किया।

मॉरिस के फैसले को अदालत में प्रस्तुत किए जाने के बाद उसकी असलियत सामने आई। जब अहमदाबाद सिटी सिविल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई, तो न्यायाधीश जेएल चोवटिया ने पाया कि यह पूरी प्रक्रिया फर्जी है और मॉरिस ने धोखे से सरकारी जमीन हथियाने की कोशिश की है। इसके बाद न्यायाधीश ने कोर्ट के रजिस्ट्रार को मॉरिस के खिलाफ कानूनी शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया, जिससे पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

मॉरिस ने न सिर्फ खुद को जज के रूप में पेश किया, बल्कि उसने अदालत जैसा माहौल बनाने के लिए नकली वकील, क्लर्क और अन्य कर्मचारी भी नियुक्त किए। उसकी योजना थी कि वह फर्जी अदालतों के जरिए लोगों को झूठे फैसले दिलाकर उनसे पैसे ऐंठे। मॉरिस ने कई बार अपनी अदालत में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निर्णय सुनाए और फिर उन फैसलों को असली अदालत में पेश किया।

पहले भी फर्जीवाड़ा कर चुका था मॉरिस

मॉरिस का यह पहला अपराध नहीं था। इससे पहले भी उस पर इसी तरह के फर्जीवाड़े के आरोप लग चुके हैं। 2015 में भी उसके खिलाफ मणिनगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था, और गुजरात हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला चलाया था। उसने बाबूजी के नाम पर 7/12 उतार में सरकार का नाम हटाकर खुद को जमीन का कब्जेदार घोषित कर दिया था, जबकि इसके लिए कोई कानूनी आधार नहीं था।

सरकारी वकील ने सिटी सिविल कोर्ट में तर्क दिया कि बाबूजी ने मॉरिस को कानूनी रूप से मध्यस्थ नियुक्त नहीं किया था और कोर्ट ने भी मॉरिस को मध्यस्थता के लिए मंजूरी नहीं दी थी। मॉरिस ने एकतरफा फैसले लिए और इन्हें लागू कराने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। सरकारी वकील ने सवाल उठाया कि अगर कोई मध्यस्थता अनुबंध नहीं था, तो मॉरिस ने सरकारी अधिकारियों को नोटिस कैसे भेजा और सरकार ने जवाब क्यों नहीं दिया।

कोर्ट ने बाबूजी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और मॉरिस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए। जाँच में यह भी पता चला है कि मॉरिस ने ऐसे 10 अन्य मामलों में भी फर्जी फैसले सुनाए हैं। पुलिस अब इन सभी मामलों की भी जाँच कर रही है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल, मॉरिस सैमुअल क्रिश्चियन का यह फर्जीवाड़ा अब पूरी तरह उजागर हो चुका है, और पुलिस उसकी गतिविधियों की गहन जाँच कर रही है ताकि इस बड़े घोटाले का पूरा सच सामने आ सके।

मूल समाचार ऑपइंडिया गुजराती पर प्रकाशित है। पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें