इंडोनेशिया के आचे प्रांत के तट पर 140 रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों का एक समूह पहुँचा, लेकिन स्थानीय मछुआरा समुदाय के लोगों ने उन्हें जमीन पर कदम रखने ही नहीं दिया। इस घटना की वजह से तनाव की स्थिति बनी, रोहिंग्या मुस्लिमों का यह समूह, जिनमें ज्यादातर महिलाएँ और बच्चे शामिल थे, मलेशिया की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा था। स्थानीय समुदाय ने सुरक्षा और शांति के नाम पर उनका विरोध किया और उन्हें नाव से उतरने नहीं दिया।
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना इंडोनेशिया के उत्तरी प्रांत आचे के दक्षिणी हिस्से में लाबुहान हाजी के पास की है। 140 भूखे और थके हुए रोहिंग्या मुस्लिमों ने लकड़ी की नाव में सवार होकर बांग्लादेश के कॉक्स बाजार से लगभग दो हफ्ते की समुद्री यात्रा की थी। इस दौरान तीन लोगों की मौत हो गई थी। जब यह नाव आचे के तट से लगभग 0.60 किलोमीटर दूर पहुँची, तो स्थानीय मछुआरों और निवासियों ने उनका विरोध किया।
स्थानीय मछुआरा समुदाय के मुखिया मोहम्मद जबल ने साफ तौर पर कहा कि उनका समुदाय इन्हें उतरने की अनुमति इसलिए नहीं देगा क्योंकि पहले के अनुभवों के अनुसार, रोहिंग्या मुस्लिम जहाँ भी गए हैं, वहाँ स्थानीय लोगों के साथ संघर्ष और अशांति फैलाने की स्थिति उत्पन्न हुई है। जबल ने कहा, “हमने उन्हें खाना दिया, लेकिन हम यह नहीं चाहते कि यहाँ वही समस्या हो, जो अन्य स्थानों पर हुई है।”
अपने विरोध को जताने के लिए मछुआरों ने समुद्र के किनारे बड़ा बैनर लगाया है, जिसमें लिखा है, “साउथ आचे रीजेंसी के लोग इस क्षेत्र में रोहिंग्या शरणार्थियों के आगमन को अस्वीकार करते हैं।” स्थानीय लोगों का विरोध इसलिए भी है कि जहाँ-जहाँ रोहिंग्या मुस्लिम पहुँचे हैं, वहाँ संघर्ष और अशांति फैली है।
आचे पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, रोहिंग्या मुस्लिमों का यह समूह 9 अक्टूबर को बांग्लादेश के कॉक्स बाजार से रवाना हुआ था और उनका मूल लक्ष्य मलेशिया पहुँचना था। इस यात्रा के दौरान, नाव पर सवार कुछ यात्रियों ने कथित तौर पर दूसरे देशों में पहुँचने के लिए पैसे भी दिए थे। हालाँकि, जब नाव इंडोनेशिया पहुंची, तब तक नाव पर कुल 216 लोग सवार थे, जिनमें से 50 लोग इंडोनेशिया के रियाउ प्रांत में उतर चुके थे। स्थानीय निवासियों ने हालाँकि घुसपैठियों को खाना दिया और संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी मामलों के उच्चायुक्त ने भी भोजन सामग्री प्रदान की, लेकिन उन्हें जमीन पर कदम रखने की अनुमति नहीं दी गई।
सरकारी अधिकारियों द्वारा 11 रोहिंग्या मुस्लिमों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, क्योंकि उनकी तबियत बिगड़ चुकी थी। ये लोग लम्बी यात्रा के कारण कमजोर हो चुके थे, जिसमें अधिकतर महिलाएँ और बच्चे शामिल थे। हालाँकि, स्थानीय मछुआरों और पुलिस के विरोध के कारण बाकी घुसपैठियों को वापस नाव पर ही रहना पड़ा। आचे पुलिस ने मानव तस्करी के संदेह में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह आरोप लगाया जा रहा है कि इन तीनों ने रोहिंग्या मुस्लिमों से पैसा लेकर उन्हें दूसरे देशों में पहुँचाने का वादा किया था।
रोहिंग्या मुस्लिमों का म्यांमार से पलायन पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। म्यांमार के सुरक्षा बलों द्वारा 2017 में किए गए क्रूर आतंकवाद विरोधी अभियानों के बाद, करीब 740,000 रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार से भागकर बांग्लादेश में शरण लिए हुए हैं। म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों को लंबे समय से व्यापक भेदभाव और अत्याचार का सामना करना पड़ा है, और वहाँ की सरकार ने उन्हें नागरिकता देने से भी इनकार कर दिया है।
बता दें कि इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया जैसे अन्य देशों की तरह संयुक्त राष्ट्र के 1951 शरणार्थी सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, इसलिए इन्हें शरणार्थियों को स्वीकार करने की बाध्यता नहीं है। इंडोनेशिया की आबादी में 87% लोग मुस्लिम मजहब से हैं, लेकिन वो लगातार रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेजता रहा है।
बीते साल नवंबर 2023 में 250 लोगों से भरी नाव को भी वापस समंदर में लौटा दिया गया था, जिसके बारे में बात में आशंकाएँ जताई कि गई वो नाव दुर्घटना का शिकार हो गई। वहीं, मार्च 2024 में भी इंडोनेशिया के अधिकारियों और स्थानीय मछुआरों ने आचे के तट पर एक नाव से 75 लोगों को बचाया था, क्योंकि वो विरोध प्रदर्शन की वजह से वो नाव तट पर नहीं आ सकी थी और दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, उस घटना में नाव पलटने से 67 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें से कई महिलाएँ और बच्चे थे।
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के महराजगंज में 13 अक्टूबर 2024 को माँ दुर्गा की विसर्जन यात्रा पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमले में राम गोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कई लोग घायल भी हुए थे। घायलों में संतोष तिवारी भी हैं। वे हमले के मास्टरमाइंड अब्दुल हमीद के पड़ोसी हैं। उन्हें इतना मारा गया कि इलाज के लिए लखनऊ जाना पड़ा। हिंसक भीड़ ने उनकी बाइक को भी आग लगा दी थी।
इस घटना को लेकर संतोष तिवारी ने ऑपइंडिया से बातचीत की। संतोष तिवारी और हमलावर अब्दुल हमीद की छत आपस में सटी हुई है। उनका त्रिपाठी डिजिटल सेवा केंद्र नाम से ऑनलाइन सर्विसेज की एक दुकान है। यहाँ वो खसरा-खतौनी आदि के प्रिंटआउट और टाइपिंग आदि करके अपने परिवार का गुजारा करते हैं। घर में पत्नी और एक नाबालिग बेटी है। संतोष ने अपने घर की छत पर भगवा ध्वज लगा रखा है।
बाँट रहे थे प्रसाद, फूँक दी गई बाइक
लगभग 45 साल के संतोष ने बताया कि उनका पूरा परिवार 9 दिनों तक नवरात्रि का व्रत रखता है। घटना के दिन माँ दुर्गा की विसर्जन यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को वो प्रसाद बाँट रहे थे। उन्होंने बताया कि उसी दौरान शोरगुल हुआ और मारपीट होने लगी। मारपीट होता देखकर वे अपने घर में घुस गए और अंदर से गेट बंद कर दिया। तभी किसी ने चिल्लाकर बताया कि उनकी बाइक को आग लगा दी गई है।
संतोष बताते हैं कि इस बात की जाँच करने के लिए वे घर से बाहर निकले तो देखा कि उनकी बाइक धू-धू करके जल रही है। अपनी जलती बाइक को बचाने के लिए वे जैसे आगे बढ़े, मुस्लिम भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उन पर हमला शुरू कर दिया गया। हमलावरों के हाथों में लाठी-डंडे और धारदार हथियार थे। वो अपने घर की तरफ भागे, लेकिन हिंसक भीड़ ने उनको घसीट लिया और बेरहमी से पीटने लगी।
नारा ए तकबीर चिल्ला रही थी भीड़
संतोष तिवारी आगे बताते हैं कि उन्हें पीट रही भीड़ में शामिल किसी भी व्यक्ति से उनकी ना ही कोई दुश्मनी थी और ना ही जान-पहचान। बकौल संतोष, उन्हें पीटने वाली भीड़ ‘नारा ए तकबीर…’ के नारे लगा रही थी। इस दौरान छतों से पथराव भी हो रहा था। संतोष ने बताया कि पिटाई के बाद वे बेहोश हो गए। संतोष तिवारी का मानना है कि मुस्लिमों की भीड़ ने उन्हें मरा समझकर छोड़ दिया था।
आखिरकार संतोष के परिजनों ने उन्हें घर के अंदर खींच लिया। थोड़ी देर बाद घटनास्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल पहुँचा। इसके बाद एम्बुलेंस को बुलाया गया। उनके सिर सहित कई जगह पर चोट लगी थी। घायल अवस्था में हिन्दू उन्हें स्थानीय अस्पताल ले गया, जहाँ से जिले के मेडिकल कॉलेज में भेज दिया गया। यहाँ के डॉक्टरों ने भी उनकी हालत को देखते हुए लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
घायल संतोष तिवारी को अस्पताल ले जाती एम्बुलेंस
मस्जिद के सामने ही है संतोष तिवारी का घर
संतोष तिवारी हमें बताते हैं कि अगर लखनऊ पहुँचने में देर हो जाती तो उनकी जान चली जाती। इलाज के दौरान यह भी पता चला कि उन्हें सिर में चोट है। संतोष तिवारी ने इलाज के दौरान उनकी खींचीं गई कई तस्वीरों को ऑपइंडिया के साथ साझा किया। इनमें से एक तस्वीर में संतोष तिवारी के मुँह पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ है। इलाज के बाद संतोष फिलहाल घर वापस लौट आए हैं।
बहराइच में मस्जिद के आगे भीड़, भीड़ के आगे आग में जल रहा सामान… और आत्मरक्षा के लिए चिल्लाते हिंदू, वीडियो में बंदूक लिए पुलिस वाले भी
बहराइच में 'मस्जिद से हमला' की मीडिया रिपोर्ट को नकार रही वहाँ की पुलिस… इस नए वीडियो के आने के बाद क्या दोबारा जाँच करेगी UP पुलिस? pic.twitter.com/x1ZkLuMOfw
संतोष तिवारी घर तो लौट आए हैं, लेकिन अब भी काफी डरे-सहमे हैं। वे अपने परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। संतोष का घर उस मस्जिद के ठीक सामने है, जहाँ से मुस्लिमों को उकसाने का आरोप कई पीड़ित हिन्दू लगा चुके हैं। वायरल हो रहे एक वीडियो में मस्जिद के आगे कुछ जलता हुआ दिख रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का दावा है कि यह संतोष तिवारी की बाइक हो सकती है।
जामिया मिलिया इस्लामिया में दीवाली मनाने इकट्ठा हुए हिंदू छात्रों पर कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि बुधवार (23 अक्टूबर 2024) को करीबन आधा दर्ज छात्रों को हिरासत में लिया। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्होंने छात्रों को इसलिए पकड़ा है क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने दीवाली कार्यक्रम मनाने की अनुमति नहीं दी थी।
जानकारी के मुताबिक, जामिया, जवाहरलाल नेहरू, दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के 30-40 छात्र बुधवार को दीपोत्सव के लिए एकत्रित हुए थे। हालाँकि गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें त्योहार मनाने देने की बजाय, सबको वहाँ से वापस जाने को कहा और जब छात्रों ने उनकी नहीं सुनी तो पुलिस ने बल का प्रयोग किया और फिर छात्रों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई और ये भी कहा गया कि पूरी गहमागहमी के बाद सिर्फ 10 मिनट के लिए दीए जलाने की अनुमति दी गई।
Now Hindus can’t even celebrate their festivals? Radicals in Jamia Milia Islamia Attacked Hindu students students because they were preparing for Diwali Celebration ? pic.twitter.com/7Eyafaf1Yd
बता दें कि इस घटना से पहले मंगलवार (22 अक्टूबर 2024) की रात को जामिया में दीपोत्सव मनाते टाइम जमकर बवाल हुआ था। पता चला था कि जामिया में हर साल की तरह हिंदू छात्र दीवाली मनाने जब जुटे तभी कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारे लगाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की थी और पैरों से दीए तोड़ रंगोलियाँ बर्बाद की। बाद में दोनों गुटों में झड़प की खबर भी आई थी और कई घायल छात्रों को अस्पताल भी ले जाया गया था।
इस घटना के बाद ही हिंदू छात्र बुधवार को दोबारा से दीवाली मनाने के लिए इकट्ठा हुए, मगर पुलिस ने उन्हें एंट्री ही नहीं दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अधिकारी ने घटना के संबंध में बताया कि विश्वविद्यालय के अंदर तनाव की सूचना मिलने के बाद एहतियात के तौर पर गेट के बाहर और परिसर के आसपास पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्थानीय पुलिस को परिसर के आसपास निगरानी बढ़ाने को कहा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के कजान शहर में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन को संबोधित किया है। पीएम मोदी ने रूस में BRICS के मंच से आतंक और यूक्रेन-रूस युद्ध पर भी बात की। पीएम मोदी ने BRICS के मंच से कहा है कि आतंक पर दोहरे मानक नहीं रखे जाने चाहिए। पीएम मोदी ने यहाँ UN जैसे संस्थानों में बदलाव की बात भी उठाई। पीएम मोदी ने BRICS बैठक को संबोधित करने के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता में हिस्सा लिया।
पीएम मोदी ने कहा, “आतंकवाद और टेरर फंडिंग से निपटने के लिए हम सभी को एक मत हो कर दृढ़ता से सहयोग देना होगा। ऐसे गंभीर विषय पर दोहरे मापदंड के लिए कोई स्थान नहीं है। हमारे देशों के युवाओं में कट्टरपंथ को रोकने के लिए हमें सक्रिय रूप से कदम उठाने चाहिए।”
#WATCH | 16th BRICS Summit in Kazan, Russia | Prime Minister Narendra Modi says "I want to thank President Putin for the successful organisation of the 16th BRICS Summit. I once again heartily welcome the new colleagues associated with BRICS. In its new form, BRICS represents 40%… pic.twitter.com/ixaZtQWGIe
पीएम मोदी ने इस दौरान यूक्रेन-रूस संघर्ष को लेकर कहा, “हम युद्ध नहीं, डायलॉग और डिप्लोमेसी का समर्थन करते हैं। और, जिस तरह हमने मिलकर कोविड जैसी चुनौती को परास्त किया, उसी तरह हम भावी पीढ़ी के सुरक्षित, सशक्त और समृद्ध भविष्य के लिए नए अवसर पैदा करने में पूरी तरह सक्षम हैं।”
BRICS में पीएम मोदी ने UN में बदलाव को लेकर कहा “हमें UNSC, WTO जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधारों के आगे बढ़ना चाहिए। हमें ध्यान रखना चाहिए कि इस संगठन की छवि ऐसी न बने कि हम वैश्विक संस्थानों में सुधार नहीं करना चाहते बल्कि उन्हें बदलना चाहते हैं।”
पीएम मोदी ने BRICS में नए सदस्यों को शामिल करने को लेकर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि BRICS में सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए और इसके संस्थापक सदस्यों की राय का भी इन निर्णयों में ध्यान रखा जाना चाहिए।
BRICS में पीएम मोदी ने इस दौरान वैश्विक चुनौतियों को लेकर कहा, “हमारी बैठक एक ऐसे समय में हो रही है जब विश्व युद्धों, संघर्षों, आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद जैसी अनेक चुनौतियों से घिरा हुआ है। विश्व में नार्थ-साउथ और पूर्व-पश्चिम विभाजन की बात हो रही है।”
पीएम मोदी ने कजान में साइबर सुरक्षा और AI को लेकर आने वाली चुनौतियों और उन पर काम करने की बात भी की। पीएम मोदी ने कहा कि BRICS में मुद्दे लोगों के हितों के होने चाहिए और यह संगठन विभाजनकारी नहीं बल्कि जनहितकारी है।
पीएम मोदी ने BRICS की शिखर सम्मेलन बैठक को संबोधित करने के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात भी की। यह चीन और भारत के शीर्ष नेताओं के बीच 5 साल के बाद पहली मुलाक़ात है। दोनों देशों के रिश्ते जून, 2020 में चीन के सैनिकों के गलवान पर हमले के बाद खराब हो गए थे। हाल ही में दोनों देशों में सीमा विवाद को लेकर समझौता हुआ है।
बहराइच के महाराजगंज में 13 अक्टूबर 2024 को दुर्गा विसर्जन जुलूस पर हमला हुआ था। इसमें राम गोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कई अन्य हिंदू भी घायल हुए थे। इन पीड़ित हिंदुओं का दावा है कि मस्जिद से उकसाए जाने के बाद मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। लेकिन बहराइच पुलिस सोशल मीडिया पर इन दावों को ‘भ्रामक’ बता चुकी है। जब इस निष्कर्ष का आधार जानने के लिए हमने बहराइच पुलिस से संपर्क किया तो वे इसका ठोस उत्तर नहीं दे पाए।
70 साल के विनोद मिश्रा इस हमले में घायल हुए हिंदुओं में से एक हैं। उन्होंने कई मीडिया संस्थानों से बातचीत में मस्जिद से उकसाए जाने का दावा किया है। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया था, “पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो हिंदू तितर-बितर हो गए। तब, मस्जिद से अल्लाह-हू-अकबर बोला गया और उसके बाद आवाज आई कि जो जहाँ मिले उसे मार दो काट दो।”
विनोद मिश्रा के इस बयान का ऑपइंडिया ने वीडियो भी जारी किया था। इसमें आप साफ तौर पर सुन सकते हैं कि इस दावे को लेकर हमारे रिपोर्टर राहुल पाण्डेय ने उनसे पूछा- क्या आपने ये खुद सुना? जवाब में भी विनोद मिश्रा कहते हैं, “हाँ, बिल्कुल सुना।”
#Watch: "There were announcements from two mosques, 'Jo jahan mile, use wahin maar do, kaat do.' 200-300 Muslims came with weapons and attacked Hindus. I thought they knew me, so they wouldn't attack me, but they did. They cut the tyres of bikes and burnt the vehicles of Hindus."… pic.twitter.com/iaitlWvHDj
ऑपइंडिया की X पोस्ट पर जवाब देते हुए बहराइच पुलिस ने लिखा, “ऐसे भ्रामक तथ्य जिनके सम्बन्ध में अभी कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं हुआ है, उन्हें बिना जानकारी के प्रसारित न करें। इससे जनपद की कानून व्यवस्था बिगड़ने की प्रबल सम्भावना है जिस पर विधिक कार्यवाही अमल पर लायी जाएगी।”
ऐसे भ्रामक तथ्य जिनके सम्बन्ध में अभी कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं हुआ है, उन्हें बिना जानकारी के प्रसारित न करें । इससे जनपद की कानून व्यवस्था बिगड़ने की प्रबल सम्भावना है जिस पर विधिक कार्यवाही अमल पर लायी जाएगी ।
विनोद मिश्रा के बाद कुछ अन्य हिंदू पीड़ितों ने भी मस्जिद से उकसाए जाने का दावा किया है। इनमें दिव्यांग सत्यवान मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि उस दिन मस्जिद से ऐलान हुआ था, “जो हिन्दू जहाँ मिले, उसको काट दो।” उन्होंने बताया है कि इसी ऐलान के बाद मुस्लिमों की भीड़ ने अब्दुल हमीद के घर के आगे मौजूद हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला किया था। कट्टरपंथी भीड़ कह रही थी, “ऐ हिन्दुओं, यहाँ से भाग जाओ वरना गोलियों से भून दूँगा।”
इतना ही नहीं, पद्माकर दीक्षित नाम के एक अन्य पीड़ित ने भी इसी तरह का दावा किया है। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे लोग मूर्ति के साथ आगे बढ़ रहे थे, तभी एक पत्थर आकर लगा। इससे माँ दुर्गा की प्रतिमा का हाथ टूट गया। इस बीच मस्जिद से ऐलान हुआ, “अल्लाह हु अकबर। जो मिले उनको काट दो।” पद्माकर के अनुसार, मुस्लिम भीड़ कह रही थी कि जितना हिंदू मारेंगे, उतना सवाब मिलेगा।
विनोद मिश्रा के जिस दावे को बहराइच पुलिस ने भ्रामक और तथ्यहीन बता रही, उसे कई मीडिया संस्थानों ने छापा है। दैनिक जागरण की इस खबर पर बहराइच पुलिस ने कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी।
ऑपइंडिया ने पूछे 3 सवाल, बहराइच पुलिस का गोलमोल जवाब
हिंदू पीड़ितों के दावों को भ्रामक बताने की वजह जानने के लिए ऑपइंडिया ने बहराइच पुलिस से संपर्क किया। उनसे क्या सवाल किए और उन्होंने किस तरह गोलमोल जवाब दिए यह आप नीचे पढ़ सकते हैं;
प्रश्न 1. क्या विनोद मिश्रा हिंसा के पीड़ित, चश्मदीद हैं? क्या पुलिस ने उनका बयान दर्ज किया है? उत्तर: बहराइच (महसी) के डिप्टी एसपी रवि खोखर ने बताया कि विनोद मिश्रा ने अभी तक पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई है। जब वो शिकायत दर्ज करवाएँगे, उसके बाद उस पर जाँच होगी।
प्रश्न 2. क्या मस्जिद से उकसाने को लेकर उन्होंने जो दावे किए हैं, उसकी पुलिस ने जाँच की है? यदि की है तो उसका निष्कर्ष क्या निकला है? नहीं की है तो क्या उनके दावों को जाँच में शामिल किया है? उत्तर: बहराइच की एसपी वृंदा शुक्ला के आधिकारिक फोन नंबर पर ऑपइंडिया ने कॉल किया तो फोन उठाने वाले PRO ने कहा कि मस्जिद से हमले वाली बात गलत है। यह आरोप भ्रमित करने वाला है।
प्रश्न 3. मस्जिद से हमले वाली मीडिया रिपोर्ट्स को बहराइच पुलिस सोशल मीडिया पर भ्रामक बता रही है, इसका आधार क्या है? उत्तर: बहराइच की एसपी वृंदा शुक्ला के आधिकारिक नंबर पर की गई कॉल को उठाने वाले PRO ने कहा कि इस मामले को लेकर उनका स्टैंड पहले जैसा है।
चश्मदीद के बयान को लेकर क्या कहता है कानून
किसी घटना के पीड़ित/चश्मदीद के बयान पर मीडिया रिपोर्टिंग की जा सकती है या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह का कहना है कि मीडिया किसी भी पीड़ित या चश्मदीद का बयान ले सकती है जब तक कि कानूनी या प्रशासनिक रूप से किसी आदेश के अंतर्गत ऐसे बयान या मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक ना लगी हो।
चश्मदीद को लेकर भारत में कानून भी है। इसको लेकर हमारा कानून क्या कहता है, इस पर रीना सिंह कहती हैं कि मीडिया में दिए गए बयान की कानूनी अहमियत सीमित होती है और अदालत में दिए गए शपथ-पत्रीय बयान को ही मुख्य साक्ष्य माना जाता है। गवाहों की सुरक्षा के लिए गवाह संरक्षण योजना और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी गवाहों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
रीना सिंह कहती हैं कि संविधान के अनुच्छेद 20(3) के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को साक्ष्य प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसका मतलब ये है कि किसी आरोपित के ख़िलाफ़ गवाह बनने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता, जो उसे दोषी ठहरा सके। भारतीय कानूनों में चश्मदीद गवाह का बयान बहुत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन उसकी वैधता और विश्वसनीयता अदालत में दी गई गवाही और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ी होती है।
इस अधिनियम के अनुसार, गवाह का बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। यदि गवाह का बयान सुसंगत और विश्वसनीय है तो उसे निर्णायक साक्ष्य माना जा सकता है। अदालत गवाह से उसकी गवाही लेने के लिए उसे समन भेज सकती है। गवाह के बयान को दोनों पक्षों द्वारा जाँचा और परखा जाता है। यह प्रक्रिया गवाह की विश्वसनीयता की पुष्टि करती है और यदि बयान में विरोधाभास है तो उसका खुलासा करती है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 186 (गवाहों के बयान) के अनुसार, पुलिस जाँच के दौरान गवाहों का बयान दर्ज कर सकती है। पुलिस गवाह को उसके निवास स्थान पर जाकर भी बयान दर्ज कर सकती है और ये जरूरी नहीं है कि गवाह थाने आकर ही बयान दे। दरअसल, BNSS (भारतीय न्याय संहिता) में गवाहों की सुरक्षा, गवाही देने की प्रक्रिया हैं।
वहीं, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 179 (गवाह को समन) में कहा गया है कि पुलिस गवाह को नोटिस या समन देकर थाने बुला सकती है। हालाँकि, महिला गवाहों के लिए विशेष प्रावधान है कि उन्हें उनके निवास स्थान पर ही बयान देने की अनुमति होती है और उन्हें थाने आने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
इसी तरह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 183 (न्यायिक बयान) के अनुसार, मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान को न्यायिक बयान के रूप में दर्ज किया जाता है। यह बयान बाद में जाँच के दौरान और अदालती कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह विशेषकर तब आवश्यक होता है जब बयान के बाद गवाह की जान को खतरा हो या गवाह पर दबाव हो।
रीना सिंह कहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में गवाहों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया है। कोर्ट ने गवाहों को धमकाने या प्रभावित करने के मामलों में सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है, ताकि गवाह बिना किसी डर के न्यायालय में बयान दे सकें। भारतीय कानून गवाहों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा पर जोर देता है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम और बीएनएसएस जैसे कानूनों के तहत गवाहों के कुछ अधिकार हैं।
गोपनीयता का अधिकार: गवाह को धमकी मिलने पर उसकी पहचान को गुप्त रखा जा सकता है। सुरक्षा का अधिकार: अगर गवाह को बयान देने के बाद खतरा हो तो उसे पुलिस या राज्य द्वारा सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। स्वतंत्र बयान देने का अधिकार: गवाह को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से बयान देने का अधिकार है और उसे किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी से बचाने का प्रावधान है।
अब जबकि, बहराइच पुलिस ने ऑपइंडिया की खबर को भ्रामक बता दिया तो हमने रीना सिंह से चश्मदीद के मीडिया में दिए गए बयान के बारे में भी उनसे जानना चाहा। उन्होंने कहा कि चश्मदीद का पुलिस के समक्ष दिया गया बयान जाँच का विषय है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 398 में कहा गया है कि प्रत्येक राज्य सरकार गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृष्टि से राज्य के लिए एक गवाह संरक्षण योजना/डब्ल्यूपीएस तैयार और अधिसूचित करेगी। कानून की नजर में चश्मदीद (Eyewitness) के मीडिया में दिए गए बयान की बहुत सीमित और अक्सर अप्रत्यक्ष अहमियत होती है।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (बीएनएसएस) के अनुसार, मीडिया में दिया गया बयान कुछ स्थितियों में संदर्भ या संकेत के रूप में उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह न्यायालय के लिए स्वीकार्य साक्ष्य (admissible evidence) नहीं माना जाता। यह न्यायालय में मान्य साक्ष्य के रूप में तब तक स्वीकार्य नहीं होता, जब तक कि उसे पुलिस द्वारा या अदालत के समक्ष विधिवत दर्ज नहीं किया जाता।
रीना सिंह कहती हैं कि मीडिया में दिया गया बयान बाहरी प्रभाव में हो सकता है, इसलिए उसे न्यायालय की निष्पक्ष प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जाता। गवाह पर दबाव, डर या पक्षपात के चलते ऐसे बयान दिए जा सकते हैं। मीडिया में दिया गया बयान संकेतक (indicator) या प्राथमिक जानकारी के रूप में पुलिस या अदालत के ध्यान में लाया जा सकता है।
बकौल रीना सिंह, “अगर यह बयान मामले की जाँच या अदालत में महत्वपूर्ण हो सकता है तो पुलिस या अदालत उस गवाह को समन भेजकर उसका बयान दर्ज कर सकती है। अदालत में दिए गए बयान के दौरान गवाह के बयान को प्रतिपरीक्षण के माध्यम से सत्यापित किया जा सकता है। मीडिया में दिए गए बयानों को प्रतिपरीक्षण का मौका नहीं मिलता, इसलिए इसे पूर्ण रूप से सत्य नहीं माना जा सकता।”
मीडिया में दिए गए बयान को अक्सर गैर-स्वीकृत साक्ष्य (hearsay evidence) के रूप में माना जाता है, क्योंकि यह अदालत में दिए गए साक्ष्य से प्रमाणित नहीं होता है। न्यायालय में मान्य गवाही वही होती है जो अदालत के सामने, शपथ के तहत दी गई हो और जिसका प्रतिपरीक्षण (cross-examination) किया जा सके।
अगर कोई पीड़ित या चश्मदीद मीडिया में इस तरह का बयान देता है तो पुलिस को खुद उस तक पहुँचना चाहिए या फिर उसके थाने आने का इंतजार करना चाहिए? इस सवाल पर रीना सिंह कहती हैं, “भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 181 के तहत पुलिस गवाहों का बयान दर्ज कर सकती है। इस प्रक्रिया में पुलिस गवाह से मिलने उसके निवास स्थान पर जा सकती है और वहीं पर उसका बयान दर्ज कर सकती है।”
रीना सिंह कहती हैं कि गवाह को थाने आने की आवश्यकता नहीं होती है, जब तक कि पुलिस द्वारा उसे समन या नोटिस न भेजा गया हो। पुलिस गवाह को जाँच में सहयोग देने के लिए थाने आने का नोटिस या समन भेज सकती है। यह केवल तब किया जाता है जब पुलिस को उसकी मौजूदगी आवश्यक लगे। वर्तमान में भारतीय कानून के तहत पुलिस का यह उत्तरदायित्व है कि वह गवाह तक पहुँचे और उसका बयान ले, न कि थाने आने का इंतजार करे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूस के कजान शहर में BRICS के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने गए हुए हैं। यहाँ वह BRICS बैठक के साथ चीन समेत अन्य कई देशों के प्रमुखों से मुलाकर कर रहे हैं। BRICS की यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इस बैठक में इसके सदस्य देशों के अलावा अन्य कई देश भी शामिल हो रहे हैं।
पीएम मोदी ने BRICS की शिखर बैठक में आतंक समेत तमाम मुद्दों की बात की। उन्होंने यहाँ कहा कि दुनिया में आंतक को लेकर कोई दोहरे मानक नहीं होने चाहिए। उन्होंने यहाँ संयुक्त राष्ट्र (UN) समेत तमाम बहुराष्ट्रीय संगठनों में सुधार किए जाने की माँग की है। पीएम मोदी ने इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की।
BRICS की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय पर हो रही है, जब इसके तीन प्रमुख सदस्य चीन, भारत और रूस तथा पश्चिमी देशों के बीच दूरियाँ बढ़ रही हैं। बांग्लादेश में हुई हालिया घटनाओं और अमेरिका के खालिस्तानी पन्नू की हत्या साजिश मामले में भारत पर दबाव बनाना भी उसे चीन तथा रूस के निकट ले जा रहा है।
क्या है BRICS?
BRICS दुनिया के महत्वपूर्ण 9 देशों का एक संगठन है। इसमें भारत, रूस, ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, UAE और ईरान सदस्य हैं। यह संगठन पश्चिमी देशों के संगठन G-7 का प्रभाव कम करने और विश्व की बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को साथ लाने के उद्देश्य से बनाया गया था। इसकी स्थापना 2009 में हुई थी।
2009 में इसकी स्थापना के समय इसमें भारत, रूस, चीन और ब्राजील ही सदस्य थे लेकिन इसके बाद इसमें दक्षिण अफ्रीका जुड़ गया और यहीं से इसका BRICS हो गया। 2024 में इस संगठन में नए 6 सदस्य जोड़ लिए गए। सऊदी अरब को छोड़ कर बाकी देश अब इसमें आधिकारिक रूप से हिस्सा ले चुके हैं।
BRICS की बैठकें हर साल होती हैं। रूस के कजान शहर में इसका 16वाँ शिखर सम्मेलन हो रहा है। हर साल इसके सदस्य देशों के नेता इसकी मेजबानी वाले देश में इकट्ठा होते हैं। इन बैठकों में आर्थिक-सामाजिक सहयोग समेत वैश्विक मुद्दों पर निर्णय लिए जाते हैं।
BRICS की मेजबानी हर साल इसके सदस्य देशों को दी जाती रहती है। 2023 में यह मेजबानी दक्षिण अफ्रीका ने की थी। 2024 की मेजबानी रूस को मिली है। रूस ने इसका आयोजन कजान शहर में किया है। कजान में 28 देश इस BRICS बैठक में शामिल हुए हैं। BRICS में जुड़ने के लिए लगभग 40 देश अपनी रूचि दिखा चुके हैं।
कितना महत्वपूर्ण है BRICS?
वैश्विक लिहाज से BRICS काफी महत्वपूर्ण संगठन है। विश्व की लगभग 44% जनसंख्या इसके सदस्य देशों में निवास करती है। इसके अलावा BRICS में शामिल देश विश्व की अर्थव्यवस्था में 28% की हिस्सेदारी रखते हैं। यह देश विश्व के लगभग 30% भूभाग पर फैले हुए हैं।
इसके अलावा, BRICS में भारत और चीन के रूप में बड़े बाजार और सबसे तेजी से बढ़ने वाली दो अर्थव्यवस्थाएँ हैं। साथ ही इसके सभी सदस्यों में तीन परमाणु हथियार वाले देश हैं। विश्व की पाँच बड़ी सेनाओं में तीन बड़ी सेनाओं वाले देश BRICS में हैं। BRICS का विस्तार भी विश्व के सभी महाद्वीपों में है, ऐसे में प्रतिनिधित्व की चिंताएँ नहीं है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो BRICS, पश्चिमी देशों के समानांतर सबसे बड़ा समूह है और उतना ही प्रभावशाली भी है। इसके अलावा इसका लगातार विस्तार हो रहा है, इस कारण से यह और शक्तिशाली होता जा रहा है। BRICS में ग्लोबल साउथ की माँगों को भी बल मिला है। जैसे-जैसे BRICS के सदस्य देश आर्थिक रूप से मजबूत बनते जाएँगे, इसका प्रभाव और बढ़ेगा।
BRICS करेंसी क्या है?
पश्चिमी देशों की दादागिरी को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया यह समूह अब सहयोग के नए तरीके तलाश रहा है। वर्तमान में रूस को छोड़ कर BRICS में शामिल देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए SWIFT सिस्टम इस्तेमाल करते हैं। यह सिस्टम पश्चिमी देशों के नियंत्रण में है।
अपनी मनमानी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने और दबाव डालने की नीति से पश्चिमी देश SWIFT और ऐसी व्यवस्थाओं का उपयोग करने से रोक सकते हैं। वर्तमान में पश्चिमी देशों ने रूस के अरबों डॉलर इसी इन्हीं देशों ने दबा रखे हैं। ऐसे में BRICS देश अपनी एक समानांतर व्यवस्था बनाने पर भी विचार कर रहे हैं।
ब्राजील और रूस इन देशों के बीच एक कॉमन करेंसी के उपयोग की बात कर चुके हैं। भारत और चीन, रूस से पहले ही अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार कर रहे हैं। भारत और रूस आपस में तेल का व्यापार इसी तरीके से हो रहा है। इस तरीके से व्यापार ककरे इन देशों ने पश्चिमी देशों की व्यवस्थाओं को दरकिनार किया है।
पीएम मोदी ने 2024 कजान समिट में इसका समर्थन भी किया है। ऐसे में यदि सभी देश किसी एक करेंसी में व्यापार करने को राजी होते हैं तो यह पश्चिमी देशों के लिए बड़ा झटका होगी। ऐसे में यह देश डॉलर के एकाधिकार को भी चुनौती दे सकेंगे।
मदरसा शिक्षा प्रणाली के खिलाफ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) द्वारा अपनाए गए रुख को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (22 अक्टूबर) को सवाल उठाया। शीर्ष न्यायालय ने NCPCR से पूछा कि क्या उसने अन्य धर्मों के ऐसी ही संस्थानों के खिलाफ यही रुख अपनाया है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि मदरसा शिक्षा बोर्ड खत्म नहीं करना चाहिए था।
मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की बेंच ने की। ऐसे अन्य संस्थान भी हैं, जहाँ अन्य धर्मों के बच्चे को धार्मिक शिक्षा और पुरोहित का प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इसकी ओर इशारा करते हुए कोर्ट ने पूछा, “NCPCR को केवल मदरसों की ही चिंता क्यों है। क्या वह सभी समुदाय के साथ समान व्यवहार करता है।”
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पारदीवाला ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा, “क्या NCPCR ने मदरसा पाठ्यक्रम का अध्ययन किया है? क्या उस पाठ्यक्रम में धार्मिक शिक्षा के बारे में बात की गई है? धार्मिक शिक्षा क्या है? आपने क्या समझा है? ऐसा लगता है कि आप सभी ‘धार्मिक निर्देश’ शब्द से मंत्रमुग्ध हैं और इसीलिए आप इससे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।”
इसी दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा, “क्या एनसीपीसीआर ने अन्य समुदायों में धार्मिक शिक्षाओं पर प्रतिबंध लगाया है?” उन्होंने आगे कहा, “NCPCR इस तथ्य से अवगत है कि पूरे भारत में छोटे बच्चों को उनके समुदाय की संस्थाओं द्वारा धार्मिक शिक्षा दी जाती है। क्या NCPCR ने उन सभी पर यही रुख अपनाया कि यह मौलिक संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है?”
जब NCPCR ने जवाब दिया कि ,धार्मिक शिक्षा को अनिवार्य शिक्षा के रूप में प्रतिस्थापित नहीं किया जाना चाहिए’, इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने फिर पूछा, “हमें बताएँ कि क्या NCPCR ने पूरे देश में कोई निर्देश जारी किया है कि बच्चों को मठों, पाठशालाओं में न भेजा जाए… या क्या उसने कोई निर्देश जारी किया है कि जो बच्चे इन संस्थानों में जाते हैं, उन्हें विज्ञान, गणित आदि अवश्य पढ़ाया जाना चाहिए?”
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की यह बेंच इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को असंवैधानिक करार दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। वहीं, यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई।
सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने कहा कि उन प्रावधानों को खत्म किया जाना चाहिए, जो उल्लंघनकारी हों। यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराजन ने कहा कि राज्य सरकार ‘उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004’ को खत्म करने के पक्ष में नहीं है। पूरे मदरसा अधिनियम को खत्म नहीं करना चाहिए था।
इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए NCPCR ने एक रिपोर्ट दायर की है, जिसमें मदरसा प्रणाली पर विभिन्न आपत्तियाँ उठाई गई हैं। जिसमें कहा गया है कि मानक शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के अनुरूप नहीं हैं। बता दें कि हाई कोर्ट द्वारा मदरसा बोर्ड खत्म करने के बाद 13,364 मदरसों में पढ़ाई कर रहे 12 लाख बच्चों को राज्य मान्यता प्राप्त बोर्ड में भर्ती करने का आदेश दिया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी।
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में 13 अक्टूबर 2024 को माँ दुर्गा की मूर्ति विसर्जन के दौरान मुस्लिम भीड़ ने श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया था। इस हमले में राम गोपाल मिश्रा की हत्या कर दी गई थी, जबकि कई अन्य श्रद्धालु घायल हो गए थे। घायलों में पद्माकर दीक्षित भी शामिल हैं। बहराइच पुलिस के दावों के विपरीत पद्माकर दीक्षित ने भी खुद को भुक्तभोगी और चश्मदीद बताते हुए कहा कि विसर्जन यात्रा पर हमले का ऐलान मस्जिद से किया गया था।
पद्माकर दीक्षित मूर्ति विसर्जन जुलूस में माँ दुर्गा की प्रतिमा पकड़ कर चल रहे थे। हमले में घायल होने के बाद उन्हें इलाज के बाद घर भेज दिया गया। पीड़ित पद्माकर दीक्षित मूल रूप से महराजगंज के पास ही स्थित सिपहिया प्यूली गाँव के निवासी हैं। वे थोड़ी-सी खेती-बाड़ी के साथ दूध आदि बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन वो 9 दिन का नवरात्रि व्रत पर थे और पूरे श्रद्धा भाव से विसर्जन यात्रा लेकर अन्य हिंदुओं के साथ निकले थे। पद्माकर दीक्षित ट्रैक्टर ट्रॉली पर जा रही माँ दुर्गा की मूर्ति को पकड़ रखा था। मार्ग में वह अन्य श्रद्धालुओं की भाँति ‘जय माता दी’ के नारे भी लगा रहे थे। इसी दौैरान पथराव हो गया।
पथराव में मूर्ति तोड़ी, फिर मस्जिद से हमले का ऐलान
पद्माकर दीक्षित ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा कि वे लोग मूर्ति के साथ आगे बढ़ रहे थे, तभी एक पत्थर आकर लगा। इससे माँ दुर्गा की प्रतिमा का हाथ टूट गया। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले दूसरा पत्थर आ गिरा। इससे प्रतिमा की गर्दन क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद प्रतिमा और श्रद्धालुओं पर पत्थरों की बरसात हो गई।
पथराव के बीच हिंदू खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। सामने मुस्लिमों की भीड़ आती देखकर पद्माकर दीक्षित भी अपनी जान बचाकर भागने लगे। उन्होंने बताया कि भगदड़ के दौरान उन्होंने मस्जिदों से एनाउंस होते सुना। इसमें कहा जा रहा था, “अल्लाह हु अकबर। जो मिले उनको काट दो।” पद्माकर के अनुसार, मुस्लिम भीड़ का कहना था कि जितना हिंदू को मारोगे उतना ही सवाब मिलेगा।
मुस्लिम भीड़ के हिंसक रूप को देखकर वहाँ अफरा-तफरी का और अधिक माहौल बन गया। श्रद्धालुओं में छोटे-छोटे बच्चे भी थे। इनकी सुरक्षा को लेकर लोग और ज्यादा चिंतित हो उठे। पद्माकर दावा करते हैं कि कई नाबालिग बच्चे भी मुस्लिम भीड़ के हमले में चोटिल हुए हैं, लेकिन उनके परिजन डर से उनका नाम सामने नहीं लाना चाहते।
मुस्लिम महिलाओं ने भी चलाए पत्थर
पद्माकर दीक्षित ने हमें आगे बताया कि जान बचाकर भागने के दौरान उन्होंने देखा हमलावर भीड़ में कुछ मुस्लिम महिलाएँ भी शामिल थीं। वो छतों से श्रद्धालुओं पर पत्थर बरसा रही थीं। इसके अलावा हथियार लेकर सड़कों पर उतरी कट्टरपंथियों की भीड़ में बच्चों से लेकर बूढ़े तक शामिल थे। इनके पास लाठी-डंडों और धारदार हथियार भी थे। पद्माकर का दावा है कि हिन्दुओं की तरफ से कई बुजुर्ग शांति की अपील कर रहे थे, लेकिन मुस्लिमों की ओर से कोई भी ऐसा करता नहीं दिखा।
कहाँ से आईं इतनी काँच की बोतलें
पीड़ित को इस बात की भी हैरानी है कि हमलावरों के पास इतनी काँच की बोतलें कहाँ से आईं। उन्होंने बताया कि महराजगंज बाजार में कोई कोल्डड्रिंक आदि का डिस्ट्रीब्यूटर भी नहीं है। ऐसे में इतनी बोतलें पहले से कैसे जमा थीं? बकौल पद्माकर, अचानक इतने पत्थर बरसना और हथियारों का निकल आना इस बात का संकेत है कि अब्दुल हमीद और उसके साथियों ने हमले की तैयारी पहले से कर रखी थी।
पद्माकर दावा करते हैं कि जब हिंदुओं ने पुलिस ने हिन्दुओं की मदद करने के बजाय उन्हें ही दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया। इसके कारण पद्माकर सहित कई लोगों को काफी चोटें आईं। हमले में किसी का हाथ टूटा तो किसी का मुँह फट गया। आखिरकार पद्माकर अपनी जान बचाकर खेतों के रास्ते से घर की ओर भागे। रास्ते में वो बेहोश होकर गिर पड़े।
पद्माकर के अनुसार, उनके साथियों ने पानी का छींटा मार कर उन्हें उठाया और घर पहुँचाया। उनके पैरों में चोट आई थी। घर पहुँचने पर उनके परिजन इलाज के लिए महसी स्थित अस्पताल ले गए। पैरों पर चोट के निशान अभी भी देखे जा सकते हैं, जिसका इलाज चल रहा है। पद्माकर दीक्षित ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हमलावरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की है।
अपने बचाव में झूठे आरोप लगा रहा मुस्लिम पक्ष
जब हमने पद्माकर दीक्षित से मुस्लिम पक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बारे में पूछा तो उन्होंने इसे सच्चाई नहीं, बल्कि साजिश बताया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष आरोप इसलिए लगा रहा है, ताकि वो बच जाए और दोष हिन्दुओं पर मढ़ दी जाए। हिन्दू को पीड़ित बताते हुए पद्माकर ने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने ही हिन्दुओं और मूर्तियों पर हमले किए थे। उन्होंने सरफराज और तालिब के एनकाउंटर पर असंतोष जताया।
पद्माकर दीक्षित ने कहा कि दोनों आरोपितों के पैर के बजाय सीने पर गोली लगनी चाहिए थी। अब तक की पुलिस कार्रवाई को नाकाफी बताते हुए पद्माकर ने कहा कि इससे हमलावरों का मनोबल और बढ़ा है। उन्होंने आशंका जाहिर की कि इस बार उन्होंने एक को मारा है, लेकिन अगली बार वे चार को मारेंगे। पद्माकर को आशंका है कि राम गोपाल मिश्रा के हत्यारे जल्द ही छूट सकते हैं।
भारतीय महिला क्रिकेटर जेमिमा रोड्रिगेज का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो 2015 का बताया जा रहा है। वीडियो में जेमिमा और उनके पिता एक ईसाई कार्यक्रम में शामिल दिखाई पड़ते हैं। वीडियो जेमिमा की मुंबई के खार जिमखाना क्लब सदस्यता खत्म किए जाने पर हो रहे विवाद के बाद आया है।
इस वीडियो में दिखता है कि काफी कम उम्र की जेमिमा रोड्रिगेज एक बड़ी सभा को संबोधित कर रही हैं। वह इस वीडियो में बताती हैं कि उन्होंने 37 गेंदों पर 25 रन नाबाद बनाए, इसके लिए जेमिमा ईश्वर का धन्यवाद करती हैं। इसके बाद जैसे ही होस्ट उनके पास जाता है, वह ऐसा अभिनय करती है जैसे कि उन पर भूत सवार हो और फिर वह जमीन पर गिर जाती है।
Both Jemimah and her father were involved with Bro Manuel Ministries. This video of her is from 2015, when she was playing at junior level. Ivan Rodrigues is still a part time coach and full time evangelist ? pic.twitter.com/4sIK17yveG
इस वीडियो को एक एक्स यूजर ने सोशल मीडिया पर साझा किया। यूजर ने यह भी दावा किया कि जेमिमा और उनके पिता इवान पिता दोनों ही ब्रदर मैनुअल मिनिस्ट्रीज से जुड़े थे। ब्रो मैनुएल मिनस्ट्री यूट्यूब पेज पर दिए गए विवरण के अनुसार यह ईसाई मिशनरी संगठन है।
and here is a screenshot of their YouTube Page which shows that these events were being held in Khar Gymkhana ✝️ pic.twitter.com/Vye3aCNO62
एक विचित्र बात यह है कि ‘ब्रो मैनुअल मिनिस्ट्रीज’ के यूट्यूब पेज पर बताया गया है कि खार जिमखाना क्लब में उनका महीने में दो बार रविवार को एक दिवसीय कार्यक्रम होता है। यह वीडियो खार जिमखाना क्लब से उनकी सदस्यता खत्म करने को चल रहे विवाद के बाद सामने आया है।
जेमिमा रोड्रिगेज की सदस्यता खत्म करने के पीछे उनके पिता इवान का रोल बताया जा रहा है। आरोप है कि इवान जेमिमा की सदस्यता के आधार पर जिमखाना को बार-बार अपने को ‘ईसाई धर्मांतरण बैठक’ के लिए बुक करते थे। महिला क्रिकेटर जेमिमा रोड्रिग्स पिछले साल मार्च इस क्लब की सदस्यता पाई थीं। वह क्लब में सदस्य बनने वाली पहली महिला क्रिकेटर थीं।
खार जिमखाना की कमिटी के सदस्य शिव मल्होत्रा ने इस मामले पर कहा है कि जेमिमा के पिता इस सदस्यता का दुरूपयोग कर रहे थे और क्लब के बाकी सदस्यों को अपनी बैठकों के लिए हॉल नहीं मिल रहा था। खार जिमखाना क्लब के अध्यक्ष ने इन बातों से इनकार किया है।
बताया गया है कि इवान ने यह कार्यक्रम मार्च 2023 और नवंबर 2024 के बीच ब्रदर मैनुअल मिनिस्ट्रीज नामक एक ईसाई मिशनरी समूह के कहने पर किए। खार जिमखाना के नियमों के अनुसार, इसके भीतर कोई भी धार्मिक गतिविधियाँ नहीं की जा सकती हैं।
एक्ट्रेस चाहत खन्ना ने एक इंटरव्यू में बताया है कि उन्हें इस्लाम की तरफ ले जाने के लिए ब्रेनवाश किया गया था। चाहत ने यह भी बताया कि वह अपने सनातन धर्म में वापसी करके काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें उनके धर्म का हर पहलू गलत बताया जाता था। यह सारी बातें चाहत खन्ना ने एक इंटरव्यू में बताई हैं।
चाहत खन्ना ने टेलीटॉकइंडिया नाम के एक चैनल को दिए गए 43 मिनट लम्बे इंटरव्यू में यह सारे खुलासे किए। चाहत खन्ना ने फरहान मिर्जा से निकाह के बाद इस्लाम कबूल करने और उसके बाद वापस सनातन में आने को लेकर अपना पक्ष रखा।
चाहत खन्ना ने बताया, “मैं काली भक्त हूँ, कृष्ण भक्त हूँ। मुझे मेरे तलाक के बाद वापस अपने मूल धर्म में आने में काफी वक्त लगा। मुझे लगभग 4-5 साल लग गए क्योंकि मुझे इस्लाम में विश्वास था, मुझे इस्लाम की कुछ चीजे अब भी पसंद हैं। लेकिन फिर भी मैं अपनी जड़ों की ओर वापस लौटी, और मैं अपने आप को भाग्यशाली मानती हूँ कि मैं वापस लौटी।”
चाहत खन्ना ने इसके बाद बताया, “मैं भटक गई थी। क्योंकि जब आप बच्चे होते हैं और साथ ही जल्द ही प्रभावित किए जा सकते हैं तब आपको बताया जाता है कि आप जो कर रहे हैं वह गलत है, तो आपस शर्तिया भटक ही जाएँगे… ऐसा कुछ मेरे साथ हुआ। लेकिन मैं सनातन में वापस आ गई, इसमें कुछ समय लगा।”
चाहत खन्ना से अब इसके बाद पूछा गया कि क्या वह इस्लाम में जाने को ब्रेनवाश का नाम देंगी तो उन्होंने कहा, “मुझे नहीं मालूम क्या था, लेकिन ऐसा कह सकते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ब्रेनवाशिंग हो ही जाती है और यह काफी बढ़ी है। चाहत खन्ना ने इसके बाद फिर से एक बार सनातन में वापसी पर ख़ुशी जताई। आप यह पूरी बातचीत नीचे लगे वीडियो में 26:00 से लेकर 29:00 मिनट के बीच सुन सकते हैं।
38 साल की चाहत खन्ना सोनी टीवी के पॉपुलर शो ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ और जी टीवी के हो कुबूल है में काम कर चुकी हैं। उन्होंने कुछ फिल्मों में भी काम किया है। चाहत खन्ना एक मॉडल भी हैं। खन्ना ने 2006 में एक कारोबारी भरत नरसिंहानी से शादी की थी। हालाँकि, उनसे चाहत का तलाक हो गया था।
चाहत ने इसके बाद फरहान मिर्जा से निकाह किया था। फरहान भी बॉलीवुड से जुड़े हुए हैं। फरहान से निकाह के बाद चाहत ने इस्लाम में धर्मांतरण कर लिया था। दोनों के 2 बेटियाँ हैं। फरहान से भी चाहत का 2018 में तलाक हो गया था। इसके बाद चाहत ने सनातन में वापसी कर ली है और अब इस्लाम कबूल करने के बारे में खुलासा किया है।