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जयशंकर ने घर में घुस कर पाकिस्तान को रगड़ा, कहा- आतंकवाद और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते: SCO के मंच से चीन को भी CPEC पर लताड़ा

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भाग लेने इस्लामाबाद पहुँचे भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्य जयशंकर ने पाकिस्तान और चीन को धोकर रख दिया है। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने पाकिस्तान-चीन के चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रोजेक्ट के कारण भारतीय संप्रभुता के उल्लंघन का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते।

चीन या पाकिस्तान का नाम लिए बिना विदेश मंत्री ने कहा कि सभी देशों को एक दूसरे की सीमाओं का सम्मान करने की जरूरत है। इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने SCO बैठक की शुरुआत करते हुए कहा कि पाकिस्तान शांति, सुरक्षा और सामाजिक, आर्थिक तरक्की चाहता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के साथ व्यापार नहीं हो सकता। सीमा का सम्मान करना ही होगा।

पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आपसी विश्वास में कमी आई है या फिर पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है… अगर दोस्ती में गिरावट आई है और अच्छे पड़ोसी की कमी महसूस हो रही है तो इसके पीछे के कारणों का विश्लेषण करना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान-चीन के CPEC प्रोजेक्ट की वजह से भारतीय संप्रभुता के उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया।

जयशंकर ने कहा ने कहा कि SCO का मकसद पूरा करने के लिए आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से लड़ना जरूरी है। इसके लिए एक-दूसरे पर भरोसा और ईमानदारी की जरूरत है। उन्होंने कहा, “इसके लिए ईमानदार बातचीत, विश्वास, अच्छे पड़ोसी और एससीओ चार्टर के प्रति प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। एससीओ को ‘तीन बुराइयों’ का मुकाबला करने में दृढ़ और अडिग रहने की आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण और पुनर्संतुलन आज की वास्तविकताएँ हैं। SCO देशों को इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। सहयोग आपसी सम्मान और संप्रभु समानता पर आधारित होना चाहिए, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को मान्यता देनी चाहिए और एकतरफा एजेंडे पर नहीं, बल्कि वास्तविक साझेदारी पर आधारित होना चाहिए।

विदेश मंत्री ने कहा, “हम वैश्विक प्रथाओं, खासकर व्यापार और पारगमन को ही चुनेंगे तो SCO प्रगति नहीं कर सकता। SCO औद्योगिक सहयोग प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सकता है और श्रम बाजारों का विस्तार कर सकता है। MSME सहयोग, संपर्क, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई संभव रास्ते हैं। चाहे स्वास्थ्य हो, भोजन हो या ऊर्जा सुरक्षा, हम स्पष्ट रूप से एक साथ काम करके बेहतर हैं।”

बता दें कि SCO की इस बैठक में आठ सदस्य देशों के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। वहीं, भारत की ओर से विदेश मंत्री और ईरान के व्यापार मंत्री बैठक में शामिल हो रहे हैं। बैठक में पहले ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आसिफ शामिल होने वाले थे, लेकिन आखिरी वक्त में उनका पाकिस्तान आने का प्रोग्राम टल गया।

रिपोर्ट में दावा- रामगोपाल मिश्रा को किया टॉर्चर, बिजली के भी दिए झटके: बहराइच पुलिस ने नकारा

बहराइच में रविवार (13 अक्टूबर, 2024) को इस्लामी कट्टरपंथियों ने दुर्गा पूजा के जुलूस पर हमला किया था। यहाँ इस्लामी कट्टरपंथियों ने रामगोपाल मिश्रा की हत्या कर दी थी। रामगोपाल मिश्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि वह उन्हें करेंट लगाया गया था और उनके नाखून उखाड़ कर बर्बरता की गई थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि अब्दुल हमीद और उसके साथ के मुस्लिमों ने रामगोपाल मिश्रा को गोली मारने के बाद करेंट लगाया था और प्रताड़ित किया था। उनके पैर के नाखून उखाड़े गए और साथ ही में धारदार हथियारों से हमला किया गया। आँखों के पास नुकीली चीज मारी गई थी।

करेंट लगाने के कारण रामगोपाल मिश्रा को ब्रेन हैमरेज हो गया था। बर्बरता की वजह से उनका खून भी बहा था और ज्यादा इन्हीं दोनों कारणों से रामगोपाल मिश्रा की मौत हुई। इस प्रताड़ना की बात रामगोपाल मिश्रा की पत्नी ने भी बताई थी।

अमर उजाला की रिपोर्ट में बताया गया है कि रामगोपाल को अब्दुल हमीद की लाइसेंसी बंदूक से गोली मारी गई थी। इससे उनके शरीर में छर्रे फ़ैल गए थे। इस बंदूक का लाइसेंस निरस्त करने के लिए पुलिस ने रिपोर्ट भेजी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि अब्दुल हमीद के घर की छत पर खून के धब्बे भी मिले हैं। यहाँ कांच की बोतलों के टुकड़े भी मिले हैं। संभवतः रामगोपाल मिश्रा पर काँच की बोतलों से वार किया गया था। यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि रामगोपाल को काँच की बोतलें लगीं जिसके कारण वह पहले घायल हुए।

रामगोपाल मिश्रा शव के साथ बर्बरता करने के बाद भी जब अब्दुल हमीद और उसके साथ के मुस्लिमों का मन नहीं भरा तो उन्होंने शव को लेने आए लोगों पर भी हमला बोला। रामगोपाल के भाई और दोस्त जब शव निकालने लगे तो उन पर फायरिंग और पथराव हुआ।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अब्दुल हमीद और उसका परिवार भाग कर अब नेपाल चला गया है। ऑपइंडिया ने इससे पहले बताया था कि अब्दुल हमीद का एक बेटा नेपाल में रहता है और अपराधी है। सूचना मिली है कि अब्दुल हमीद और उसका परिवार नेपाल के रिश्तेदार के यहाँ शरण लेकर बैठा हुआ है।

यह भी सामने आया है कि रामगोपाल मिश्रा ने भगवा झंडा मुस्लिमों के हमले के बाद लगाया था। पहले दुर्गा पूजा पर पथराव किया गया था, इसमें देवी प्रतिमा पर पत्थर लगा था और उसे नुकसान पहुँचा था। इसके बाद हिन्दू शांतिपूर्ण रूप से प्रदर्शन कर रहे थे। एक और घायल ने बताया है कि पहले मस्जिद ने निकल कर लोगों ने उन पर हमला किया था।

बहराइच में हुए दंगे के बाद अब यहाँ पुलिस की भारी तैनाती है। फरार दंगाइयों को गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। रामगोपाल मिश्रा का परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला है। उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

अपडेट: बहराइच पुलिस ने रामगोपाल मिश्रा के साथ बर्बरता के दावों को नकार दिया है। तलवार से मारने, करंट देने, नाखून उखाड़ने की खबरों का खंडन किया है। पुलिस का कहना है कि मिश्रा की मौत गोली लगने से हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यही वजह बताई गई है। पुलिस के बयान के आधार पर रिपोर्ट की हेडलाइन में बदलाव किए गए हैं।

परमाणु बम जैसा खतरनाक डेमोग्राफी चेंज, वे हुए बहुसंख्यक तो रौंद डालेंगे… जानिए उपराष्ट्रपति को क्यों कहना पड़ा देश के कई इलाकों में चुनाव-लोकतंत्र हुआ बेमानी

देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देश में हो रहे डेमोग्राफिक बदलावों को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने मंगलवार (15 अक्टूबर 2024) को कहा कि देश के कुछ इलाकों में जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ है और अब राजनीतिक किला बन गए हैं। उन्होंने कहा कि इन जगहों पर चुनाव और लोकतंत्र का कोई मतलब नहीं रह गया है, क्योंकि वहाँ परिणाम पहले से तय हैं।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन दुनिया में एक चुनौती बन रहा है। उन्होंने कहा कि देश के कुछ क्षेत्रों में जनसांख्यिकी परिवर्तन बहुत अधिक हुआ है। उन्होंने कहा, ऐसे क्षेत्रों में चुनाव का कोई मतलब ही नहीं रह जाता। कौन चुनेगा यह तो तय बात हो गई है।”

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है और एक इस खतरे को देशवासियों को महसूस करना चाहिए। धनखड़ ने कहा, “हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के प्रति ऋणी हैं। यह सभ्यता जिसमें 5000 साल का लोकाचार है, इसका सार है, इसकी महानता है, इसकी आध्यात्मिकता है, इसकी धार्मिकता है, उसे हमारी आँखों के सामने नष्ट नहीं होने दिया जा सकता।”

धनखड़ ने हिंदू बहुलता को लेकर कहा, “हम बहुसंख्यक के रूप में सभी को गले लगाने वाले, सहिष्णु और एक सुखदायक पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं।” डेमोग्राफी बदलाव के बाद मुस्लिमों की बढ़ती की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “दूसरी तरह का बहुसंख्यक अपने कामकाज में क्रूर, निर्दयी और लापरवाह है, जो दूसरे पक्ष के सभी मूल्यों को रौंदने में विश्वास करता है। यह चिंताजनक है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम सभी को जुनून के साथ, एक मिशनरी मोड में काम करना होगा। हमें एक संगठित समाज का निर्माण करना होगा, जो आवश्यक शर्तों पर सोचता हो। जो जाति, पंथ, रंग, संस्कृति, विश्वास और खान-पान के आधार पर गुटों से विभाजित न हो। हमारी साझा संस्कृति पर कुठाराघात हो रहा है। उसको हमारी कमजोरी बताने का प्रयास हो रहा है।”

उपराष्ट्रपति ने कहा, “उसके तहत देश को ध्वंस करने की योजना बनी हुई है। ऐसी ताकतों पर वैचारिक और मानसिक प्रतिघात होना चाहिए। हमें संकीर्ण विभाजनों को पीछे छोड़ना होगा। राष्ट्रवादी दृष्टिकोण वाले नागरिक को विविधता अपनाने में कोई कठिनाई नहीं होगी। वह अपनी आस्था की परवाह किए बिना इस देश के गौरवशाली अतीत का जश्न मनाता है, क्योंकि वह हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत है।”

आने वाले खतरे को लेकर आगाह करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आगे कहा, “भारत की सभ्यतागत प्रकृति को विभाजनकारी खतरों से बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। स्थिर और समृद्ध राष्ट्र सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक एकता को संरक्षित किया जाना चाहिए।”

धनखड़ ने कहा, “जैविक, प्राकृतिक, जनसांख्यिकीय परिवर्तन कभी भी परेशान करने वाला नहीं होता है। लेकिन, किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रणनीतिक तरीके से किया गया जनसांख्यिकीय परिवर्तन भयावह दृश्य प्रस्तुत करता है। यदि इससे व्यवस्थित तरीके से नहीं निपटा गया तो यह अस्तित्व के लिए चुनौती बन जाएगा। दुनिया में ऐसा पहले भी हो चुका है।”

उन्होंने जनसांख्यिकीय बदलाव के परिणाम परमाणु बम से भी कम गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस जनसांख्यिकीय विकार, जनसांख्यिकीय भूकंप के कारण कई देशों ने अपनी पहचान खो दी है। भारत के लोगों को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ राजनेताओं को अख़बार की हेडलाइन के लिए राष्ट्रीय हित का त्याग करने या कुछ छोटे-मोटे पक्षपातपूर्ण हितों की पूर्ति करने में कोई परेशानी नहीं होती।

बता दें कि डेमोग्राफी बदलाव भारत के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। देश भर के शहरों और इलाकों में इस तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जिसके कारण कई इलाकों में तो हिंदुओं को पलायन करने के लिए भी मजबूर होना पड़ा है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश के कई इलाके इससे गंभीर रूप से पीड़ित हैं। इसके परिणाम भी अब दिखने लगे हैं।

बाबा सिद्दीकी के घर कई बार गए थे शूटर, YouTube से सीखा गोली चलाना: गौतम को शादियों में फायरिंग का था अनुभव, इसलिए हत्या के लिए उसे चुना

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दरअसल, हत्या करने से पहले शूटरों ने पहले बाबा सिद्दीकी के घर पर जाकर वहाँ की कई बार रेकी की थी। इतना ही नहीं, शूटर गुरमेल सिंह और धर्मराज कश्यप ने यूट्यूब वीडियो देखकर गोली चलाना सीखा था। इसकी प्लानिंग तीन महीना पहले से की जा रही थी।

मुंबई पुलिस ने बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, वहीं जबकि तीन अन्य फरार हैं। फरार आरोपितों की तलाश के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। पुलिस ने बताया कि मुंबई पुलिस की अपराध शाखा मामले की जाँच कर रही है। क्राइम ब्रांच ने एक काला बैग बरामद किया है, जिसमें 7.62 MM की बंदूक मिली।

मुंबई पुलिस के हवाले से ANI ने बताया, “आरोपितों को बाबा सिद्दीकी की पहचान के लिए उनकी तस्वीर दी गई थीं। शूटरों ने घटना से 25 दिन पहले उनके घर और दफ़्तर का मुआयना किया था। गुरमेल सिंह और धर्मराज कश्यप ने यूट्यूब से शूटिंग सीखी और मुंबई में बिना मैगज़ीन के शूटिंग का अभ्यास किया।” शूटरों ने प्रैक्टिस के लिए कुर्ला में किराए पर एक घर लिया था।

यह घर तीसरे आरोपित ने लिया था, जो फिलहाल फरार है। उन्हें बिना गोली के निशाना साधने का अभ्यास करने के लिए सिद्दीकी का बैनर फोटो दिया गया। बाबा सिद्दीकी की हत्या की पूरी प्लानिंग पुणे में की गई थी। वहीं, चौथे संदिग्ध 23 वर्षीय हरीश कुमार बालकराम निषाद को उत्तर प्रदेश के बहराइच से गिरफ्तार किया गया है। उस पर वित्तीय सहायता देने और रसद समन्वय करने का आरोप है।

निषाद ने शूटरों को 2 लाख रुपए और हथियार दिए थे। बालकराम निषाद पुणे में कबाड़ का काम करता था और वह इस साजिश का हिस्सा था। तीन आरोपित में से दो- धर्मराज और शिव प्रसाद गौतम उसकी कबाड़ की दुकान में काम करते थे। पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिए गए एक अन्य आरोपित प्रवीण लोनकर और उसके फरार भाई शुभम लोनकर ने गुरमेल और धर्मराज को 2 लाख रुपए दिए।

यह पैसा हरीशकुमार बालकराम निषाद ने शूटरों तक पहुँचाया था। मुंबई पुलिस ने बताया कि पिछले नौ सालों से पुणे में रहने वाले हरीशकुमार ने आरोपित शूटरों को दो मोबाइल फोन भी दिए थे। जाँच में यह भी पता चला है कि आरोपितों ने आपस में बातचीत करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया था। मैसेज भेजने के लिए स्नैपचैट और कॉल करने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते थे।

पुलिस का कहना है कि शुभम लोनकर को मैसेजिंग ऐप्स का ज्ञान है और उसने सिद्दीकी हत्या की साजिश में शामिल सभी सदस्यों को निगरानी से बचने के लिए इंस्टाग्राम के जरिए बात करने और स्नैपचैट के जरिए चैट करने के लिए कहा था। ये पिछले तीन महीने से बाबा सिद्दीकी की हत्या की प्लानिंग कर रहे थे। ये सिद्दीकी के घर बिना हथियार के कई बार जा चुके थे।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने अब तक 15 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें घटना के समय मौजूद कई चश्मदीद गवाह भी शामिल हैं। वहीं, सिद्दी के घर की रेकी के लिए इस्तेमाल किए गए मोटरसाइकल को भी पुलिस ने जब्त कर लिया है। हमलावरों ने दावा किया कि वे लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े हैं। लॉरेंस गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। हत्या के लिए ये सब मुंबई सिर्फ डेढ़ महीना पहले ही आए थे।

बता दें कि मुंबई के निर्मल नगर इलाके में शनिवार (12 अक्टूबर 2024) की रात 66 वर्षीय बाबा सिद्दीकी को उनके विधायक बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर तीन लोगों ने घेर लिया और गोली मारकर हत्या कर दी। उन्हें तुरंत लीलावती अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

फरार शिकुमार गौतम और जीशान अख्तर की तलाश

मुंबई क्राइम ब्रांच ने फरार तीसरे शूटर शिवकुमार गौतम और आरोपित मोहम्मद जीशान अख्तर सहित अन्य आरोपितों को पकड़ने के लिए कई टीमें बनाई हैं। प्रवीण का भाई शुभम एक और मुख्य आरोपित हो सकता है, क्योंकि उसके लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से संबंध होने का संदेह है। अधिकारियों ने बताया कि गौतम को सिद्दीकी को गोली मारने के लिए इसलिए रखा गया था।

गौतम को उत्तर प्रदेश में शादी के जुलूसों में ‘जश्न मनाने के लिए फायरिंग करने का अनुभव‘ था। वह बहराइच जिले के गंडारा गाँव का रहने वाला है। वहाँ के स्थानीय लोगों और पुलिस ने बताया कि गौतम का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह पुणे में कबाड़ की दुकान पर काम करने गया था। उनका कहना है कि हाल के महीनों में उसने कुछ ऑनलाइन सामग्री पोस्ट की थी, जिसमें उसने अपने ‘गैंगस्टर’ होने का दिखावा किया था।

पुलिस ने बताया कि प्रवीण लोनकर पर सिद्दीकी पर गोली चलाने वाले तीन शूटरों में से दो को ‘सहयोगी’ बनाने का आरोप है। इसका भाई शुभम जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ा है और वह भी साजिश का हिस्सा है। पुलिस ने बताया कि लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के कथित सदस्य शुभम लोनकर ​​के सोशल मीडिया पोस्ट की जाँच की जा रही है, जिसमें सिद्दीकी की हत्या की बात कही गई है।

पुलिस को संदेह है कि शुभम ने इसे पोस्ट किया था। उसने फेसबुक और इंस्टाग्राम को पत्र लिखकर पोस्ट के बारे में जानकारी माँगी है। शुभम सितंबर के आखिरी हफ्ते तक पुलिस की निगरानी में था, लेकिन बाद में वह गायब हो गया। उसे जनवरी में महाराष्ट्र के अकोला जिले के अकोट पुलिस स्टेशन में दर्ज आर्म्स एक्ट के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, बाद में उसे जमानत मिल गई थी।

पुलिस ने उस मामले में 10 से अधिक हथियार बरामद किए थे। इस साल अप्रैल में सलमान खान के आवास के बाहर गोलीबारी की घटना के बाद जून में भी उसे पूछताछ के लिए उठाया गया था। उस पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की संलिप्तता का संदेह था। हालाँकि, सबूत नहीं मिलने पर उसे छोड़ दिया गया था। उस पर निगरानी थी, लेकिन 24 सितंबर से उसका पता नहीं चला।

मस्जिद से आए हमलावर, सर पर धारदार हथियार से किया वार: सुधाकर तिवारी से सुनिए बहराइच में दुर्गा विसर्जन जुलूस पर कैसे हुआ हमला, अस्पताल में चल रहा है इलाज

उत्तर प्रदेश के बहराइच में इस्लामी कट्टरपंथियों ने दुर्गा पूजा जुलूस में शामिल एक हिन्दू युवक रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले में अन्य कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हमले में गंभीर रूप से घायल हुए एक युवक ने बताया है कि मस्जिद के भीतर से लोगों ने आकर हिन्दुओं पर हमला चालू किया था।

रामगोपाल मिश्रा की जहाँ इस हमले मौत हुई वहीं सुधाकर तिवारी, राजन और अखिलेश बाजपेयी गंभीर रूप से घायल हैं। सुधाकर तिवारी का लखनऊ में अब इलाज चल रहा है। उन्होंने एक मीडिया चैनल को घटना की सच्चाई और मस्जिद से हुए हमले का ब्यौरा दिया है।

सुधाकर तिवारी ने नियोपोलिटिको को बताया, “मस्जिद से वो लोग (मुस्लिम) निकल कर आए और हम पर हमला किया। इसके बाद मैं जमीन पर गिर गया। मुस्लिमों ने इसके बाद सर पर धारदार चीज से वार किया जिससे मैं घायल हो गया। इसके बाद पुलिस वहाँ से मुझे लेकर आई और अस्पताल में भर्ती करवाया।”

सुधाकर तिवारी को हमले में काफी चोट लगी थी। उनके सर पर पट्टी बंधी है। सुधाकर की एक आँख भी काफी चोटिल है। उनके हाथ-पैर और बाकी अंगों में भी भारी चोट लगी है। सुधाकर तिवारी की हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें बहराइच से लखनऊ ले जाना पड़ा। यहाँ उनका अब इलाज चल रहा है। सुधाकर तिवारी की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

इस हमले के बारे में और भी जानकारियाँ निकल कर आई हैं। पत्रकार शुभम शर्मा ने बताया है कि हमला करने वाली भीड़ ने संभवतः पत्थर इकट्ठा कर रखे थे। एक और रिपोर्ट में बताया गया है कि हत्यारे अब्दुल हमीद के घर सामने जब हिन्दू जुलूस पहुँचा तो अब्दुल के घरवालों ने डीजे बंद करवा दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल हमीद के घर वालों ने नारे लगाए औए पत्थरबाजी की। इसके बाद हिन्दुओं को घरों में खींचा जाने लगा। उनके ऊपर हमले किए गए। इसी दौरान रामगोपाल मिश्रा को भी अब्दुल हमीद के घर में खींच लिया गया और उसे गोली मार दी गई और चाकू घोंपा गया।

जिन लोगों पर हमला हुआ है वह सभी युवा हैं। बहराइच में स्थिति अब भी नहीं सुधरी है। पुलिस ने अब्दुल हमीद समेत 10 लोगों को हत्या में आरोपित बनाया है। कई दंगाई फरार हैं। पुलिस सबको पकड़ने के लिए दबिश दे रही है। उधर मृतक रामगोपाल मिश्रा की पत्नी ने बताया है कि उनके पति के साथ मुस्लिमों ने हत्या के बाद भी बर्बरता की।

रामगोपाल मिश्रा के परिवार से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुलाक़ात की है और कार्रवाई का भरोसा दिया है। रामगोपाल का परिवार काफी गरीब है और किसी तरह मेहनत-मजदूरी करके अपना पेट पालता है। रामगोपाल की मौत से उन्हें और बड़ा झटका लगा है।

मस्जिद में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने से आहत नहीं होती मजहबी भावनाएँ: हाई कोर्ट ने हिंदुओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रद्द की, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने किया विरोध

कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि मस्जिद के अंदर ‘जय श्रीराम’ कहने से किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं की ठेस नहीं पहुँचती। इसके बाद हाई कोर्ट के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने पिछले महीने धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने के दो आरोपितों- कीर्तन कुमार और सचिन कुमार के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

दरअसल, दक्षिण कन्नड़ जिले की पुलिस ने कीर्तन कुमार और सचिन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A, 447 और 506 सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। शिकायत में कहा गया था कि पिछले साल सितंबर (सितंबर 2023) में एक रात दोनों स्थानीय मस्जिद में घुसे और ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए।

अपने फैसले में हाई कोर्ट ने कहा, “धारा 295A किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करने से संबंधित है। यह समझ से परे है कि अगर कोई ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाता है तो इससे किसी वर्ग की धार्मिक भावना कैसे आहत होगी।”

हाई कोर्ट ने कहा कि जब शिकायतकर्ता खुद कहता है कि इलाके में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द्र के साथ रह रहे हैं तो इस घटना का किसी भी तरह से कोई मतलब नहीं निकाला जा सकता है। दोनों याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि मस्जिद एक सार्वजनिक स्थान है। इसलिए इसमें आपराधिक अतिक्रमण का कोई मामला नहीं बनता। ‘जय श्रीराम’ का नारा IPC की धारा 295A के तहत परिभाषित अपराध भी नहीं है।

वहीं, राज्य सरकार की ओर पेश से वकील सौम्या आर ने इस याचिका का विरोध किया और कहा कि मामले में आगे की जाँच की आवश्यकता है। हालाँकि, अदालत ने माना कि वर्तमान मामले में कथित अपराध का सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। इस हाई कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का मानना ​​है कि हर कार्य IPC की धारा 295A के तहत अपराध नहीं बनता है।

महेंद्र सिंह धोनी बनाम येरागुंटला श्यामसुंदर (2017) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा, “जिन कार्यों का शांति या सार्वजनिक व्यवस्था को नष्ट करने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, उन्हें आईपीसी की धारा 295A के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। इन कथित अपराधों में से किसी भी अपराध के कोई तत्व नहीं पाए जाने पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आगे की कार्यवाही की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और न्याय की विफलता होगी।”

बच्चे के सामने सेक्स करना POCSO का अपराध, नंगा होना माना जाएगा यौन उत्पीड़न के बराबर: केरल हाई कोर्ट का फैसला, जानिए क्या है मामला

केरल हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी नाबालिग के सामने नग्न होकर सेक्स करना POCSO के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। हाई कोर्ट ने कहा है कि इस अपराध में सजा भी दी जा सकती है। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई करते हुए की है जहाँ नाबालिग ने अपनी माँ और एक अन्य व्यक्ति को सेक्स करते हुए देख लिया था।

इस मामले की सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट के जस्टिस ए बदरुद्दीन ने POCSO एक्ट की धारा 11(i) और 12 का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “स्पष्ट रूप से कहें तो, जब कोई व्यक्ति बच्चे को नग्न शरीर दिखाता है, तो यह बच्चे का यौन उत्पीड़न करने के इरादे से किया गया काम है और इसलिए यह POCSO की धारा 11(i) के साथ 12 के तहत दंडनीय अपराध होगा।”

कोर्ट ने आगे कहा, “इस मामले में आरोप है कि आरोपितों ने कमरे को बंद किए बिना ही नग्न होकर संबंध बनाए और नाबालिग को कमरे में घुसने दिया ताकि वह यह सब देख पाए। ऐसे में प्रथम दृष्टया, इस मामले में POCSO अधिनियम की धारा 11(i) के साथ धारा 12 के तहत दंडनीय अपराध करने का आरोप बनता है।”

केरल हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आरोपित पुरुष को नाबालिग के साथ मारपीट का आरोपित माना लेकिन उसे किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं में छूट दे दी। नाबालिग के साथ दुर्व्यवहार वाले इस मामले में नाबालिग की माँ को हाई कोर्ट ने आरोपित माना है। नाबालिग की माँ के विरुद्ध POCSO के अलावा इस धारा में भी मामला चलाया जाएगा।

क्या था मामला?

मामले में महिला और उसके साथी पुरुष पर आरोप है कि उन्होंने 8 अगस्त, 2021 को तिरुवनंतपुरम के एक लॉज में नग्न हो कर किया और इस दौरान दरवाजा खुला रहने दिया जिसे महिला के 16 वर्षीय बेटे ने देख लिया। महिला ने अपने बेटे को इससे पहले कुछ सामान लेने भेज दिया था।

जब वह वापस आया तो उसने माँ को व्यक्ति के साथ नग्न आपत्तिजनक हालत में देखा। उसने जब इस संबंध में प्रश्न खड़े किए तो महिला के पुरुष साथी ने नाबालिग को धमकाया और उसको पीटा भी। महिला के साथी ने उसके बेटे को थप्पड़ मारा, गर्दन से पकड़ा और लात भी मारी। इससे नाबालिग की माँ ने भी नहीं रोका।

इस घटना के चलते महिला और उसके पुरुष मित्र पर POCSO, किशोर न्याय अधिनियम समेत IPC की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। यह मामला तिरुवनंतपुरम के ईस्ट फोर्ट थाने में दर्ज हुआ था। कार्रवाई से बचने के लिए पुरुष आरोपित ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी।

आरोपित पुरुष ने माँग की थी कि हाई कोर्ट इस मामले में सारी कार्रवाई को रद्द कर दे। हालाँकि, कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपित पुरुष को पूरी राहत देने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने आरोपित पुरुष के खिलाफ IPC 294(बB), 341 के और 34 के साथ किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत कार्रवाई को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने आरोपित पुरुष के खिलाफ IPC 323 के साथ 34 और POCSO के तहत मामला चलाने का आदेश दिया है।

दलित युवती को फँसाने के लिए आसिफ बन गया आशीष, वीडियो वायरल करने की धमकी दे इस्लामी धर्मांतरण का डाला दबाव: मोहसिन भी देता था साथ

सहारनपुर जिले के नकुड़ क्षेत्र में लव जिहाद का एक संगीन मामला सामने आया है, जिसमें एक दलित युवती ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद आसिफ नामक युवक ने अपना नाम छिपाकर पहले उसे प्रेमजाल में फंसाया और फिर जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला। इस मामले में पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, आसिफ ने खुद को “आशीष” बताकर युवती से संबंध बनाए और फिर आपत्तिजनक वीडियो व फोटो के आधार पर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

युवती की शिकायत के अनुसार, आसिफ सहारनपुर जिले के नकुड़ कस्बे में आने वाले मोहल्ला जोगियान का रहने वाला है। उसने आठ महीने पहले युवती से संपर्क साधा और उसे धोखे से अपने प्रेमजाल में फंसा लिया। युवती को बताया कि उसका नाम आशीष है, जबकि उसका असली नाम आसिफ था। इस दौरान आसिफ ने युवती के साथ कई आपत्तिजनक वीडियो और फोटो खींच ली। जब युवती को उसके असली नाम का पता चला, तो उसने तुरंत उससे संबंध खत्म कर लिया।

इससे नाराज आसिफ ने अपने साथी मोहसिन के साथ मिलकर युवती पर धर्मांतरण का दबाव बनाना शुरू कर दिया। युवती का आरोप है कि आसिफ और मोहसिन ने उसे जान से मारने और उसकी वीडियो वायरल करने की धमकी दी। युवती ने यह भी बताया कि दोनों आरोपितों ने उसके साथ मारपीट की और उसे मलिक कंप्यूटर सेंटर में जबरन घसीट कर ले गए। युवती ने अपनी तहरीर में बताया कि जब वह किसी काम से कंप्यूटर सेंटर के पास से गुजर रही थी, तो मोहसिन और आसिफ ने उसे वहाँ बुलाकर मारपीट की और धमकाया कि अगर उसने इस्लाम नहीं अपनाया तो वे उसकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे।

पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया है कि दोनों आरोपितों ने उसे जातिसूचक गालियाँ भी दी और कहा कि “हराम*** चमा***, तुझे नहीं छोड़ेंगे।” यही नहीं, कई बार उसने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उसे अपमानित किया। पीड़ित द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

युवती ने यह भी आरोप लगाया कि मोहसिन, जो मलिक कंप्यूटर सेंटर चलाता है, आसिफ के साथ मिलकर कई अन्य लड़कियों को भी इसी तरह से फंसाता है। युवती का कहना है कि कंप्यूटर सेंटर पर आने वाली अन्य लड़कियों को भी निशाना बनाया जाता है और उनके नंबर मुस्लिम लड़कों को दिए जाते हैं, जो उन्हें लव जिहाद का शिकार बनाते हैं।

पुलिस ने युवती की शिकायत दर्ज कर ली है और आसिफ व मोहसिन के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। इस केस की जाँच की जिम्मेदारी नकुड़ कोतवाली के सीओ द्वारा की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी की बात कही है।

कार में बैठ गरबा सुन रहे थे RSS कार्यकर्ता, इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने घेर कर किया हमला: पीड़ित ने ऑपइंडिया को सुनाई आपबीती

गुजरात के द्वारका जिले में आरएसएस स्वयंसेवक पर हमला हुआ, जिसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि वह अपनी कार में गरबा सुन रहा था। यह घटना जामखंभालिया के मदीना मस्जिद चौक की है, जहाँ पीड़ित को लाला शेख और रुस्तम समेत इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने घेर लिया। पीड़ित ने ऑपइंडिया को अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि कैसे उसे धमकाया गया और कार से बाहर निकालकर मारपीट की गई। पुलिस ने इस घटना पर कार्रवाई करते हुए 2 लोगों समेत 30 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

ये मामला सोमवार (14 अक्टूबर 2024), सोमवार का है। जब जामखंभालिया के मदीना मस्जिद चौक के पास से पीड़ित युवक अपने एक मित्र को उसके घर छोड़ने के लिए जा रहा था। मदीना मस्जिद चौक पर मुस्लिम समुदाय का मजलिस कार्यक्रम चल रहा था। जैसे ही पीड़ित वहाँ पहुँचा, 25-30 लोगों की भीड़ ने उसे घेर लिया। उन्होंने पीड़ित को उसकी कार से बाहर निकाला, उसके कॉलर को पकड़ा और उसे धमकियाँ दीं। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने लाला शेख और रुस्तम समेत इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की।

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित ने बताया कि घटना उस रात हुई जब वह अपने दोस्त को घर छोड़ने जा रहा था। कार में गरबा बज रहा था, और जैसे ही वह मदीना मस्जिद चौक पहुँचा, उसने देखा कि वहाँ मजलिस का कार्यक्रम चल रहा था। इस दौरान उसे भीड़ ने घेर लिया। उसने बताया कि कुछ लोगों ने उसे इशारा किया कि वह वहाँ से निकल सकता है, लेकिन जब वह वापस लौटा, तो भीड़ ने उसकी कार को घेर लिया और उसे बाहर बुलाया।

पीड़ित ने कहा कि भीड़ ने उसकी कार को रोककर उसे बाहर निकाला। लाला शेख और रुस्तम समेत 25-30 लोग उसे गालियाँ देने लगे और धमकियाँ दीं कि अगर वह फिर कभी वहाँ से गुजरेगा, तो उसे जान से मार दिया जाएगा। वह किसी तरह भीड़ से निकलकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुँचा और शिकायत दर्ज कराई।

इस पूरी घटना के बाद जामखंभालिया की पुलिस भी तुरंत हरकत में आई। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे और पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई। पुलिस ने लाला शेख और रुस्तम समेत 30 लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 352, 351 (3), 198 (2), 190, और 191 (2) के तहत एफआईआर दर्ज की है। ऑपइंडिया के पास इस एफआईआर की एक प्रति उपलब्ध है।

घटना के बाद की कार्रवाई पर जानकारी देने के लिए ऑपइंडिया ने जामखंभालिया पुलिस स्टेशन के पीआई भूपेंद्रसिंह सरवैया से संपर्क किया। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “यह घटना कल (सोमवार – 14 अक्टूबर 2024) के रात की है। जैसे ही शिकायतकर्ता हमारे पास पहुँचा, हमने तुरंत उसकी शिकायत दर्ज की और कार्रवाई शुरू कर दी। हमने इस मामले में दंगे का अपराध दर्ज किया है। वहाँ मुस्लिम समुदाय का मजलिस कार्यक्रम चल रहा था, इसलिए पुलिस पहले से तैनात थी। अब जो नामजद आरोपित हैं, उन्हें पकड़ने की कार्रवाई की जाएगी।”

पीआई सरवैया ने आगे बताया, “जो भी सबूत जुटाए जाने थे, उन्हें इकट्ठा करने का काम शुरू कर दिया गया है। चूँकि शिकायतकर्ता को सिर्फ दो व्यक्तियों के नाम ज्ञात थे, अन्य लोगों की पहचान अभी बाकी है। इसके लिए हम आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जाँच करेंगे और उनमें से अन्य लोगों की पहचान करके उनके खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे। जो नामजद आरोपित हैं, उनकी जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता को किसी प्रकार का डर न हो, इसीलिए उनके घर के पास सुरक्षा तैनात कर दी गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और आगे की कार्रवाई जारी है।”

गौरतलब है कि इस घटना को लेकर जामखंभालिया क्षेत्र में फिलहाल शांति बनी हुई है, लेकिन तनाव बना हुआ है। पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए काम कर रही है और पूरे क्षेत्र पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

यह रिपोर्ट मूल रूप से गुजराती भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कनाडा में जब पिता बने आतंक की ढाल तो विमान में हुआ ब्लास्ट, 329 लोगों की हुई मौत… अब बेटा उसी बारूद से खेल रहा

भारत और कनाडा की बीच राजनीतिक तनातनी चरम सीमा पर पहुँच गई है। कनाडा के लगातार आतंकियों का समर्थन करने के चलते भारत ने अपने हाई कमिश्नर को कनाडा से वापस बुला लिया है और कनाडा के 6 राजनयिकों को देश से निकलने को कहा है। इस तनातनी का कारण कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का खालिस्तानी आतंकियों से प्रेम है।

जस्टिन ट्रूडो स्थानीय राजनीति चमकाने के लिए लगातार भारत विरोधी रवैया अपना रहे हैं। चाहे खालिस्तानियों को अपनी सरकार में जगह देना हो या फिर उन्हें अपने देश में शरण देना, वह लगातार भारत विरोधियों की सहायता कर रहे हैं। कनाडा में भारत विरोधी जलसे और रैलियाँ हो रही हैं।

जस्टिन ट्रूडो और उनकी पुलिस इस बीच हास्यास्पद दावे भी कर रही है। कनाडा की पुलिस ने इस बीच यह स्वीकार कर लिया है कि उनके यहाँ खालिस्तान समर्थक खुला घूम रहे हैं। उन्होंने यह बात स्वीकारी है कि कनाडा भारत विरोधी गतिविधियाँ करने वालों के लिए काफी सुरक्षित जगह है।

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में अभी तक कोई सबूत ना पेश कर पाने वाला कनाडा अब गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई को भी इस मामले में संलिप्त बता रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चेहरा बचाने और घरेलू राजनीति में वोट बढ़ाने के लिए ट्रूडो एकदम मूर्खता पर उतर आए हैं।

39 सालों में भी कनिष्क विमान बम धमाके की जाँच को अंजाम तक ना पहुँचा पाने वाली कनाडा सरकार भारत को घेरने का विफल प्रयास कर रही है। हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब कनाडा ने भारत विरोधी रवैया अपनाया हो। इससे पहले जस्टिन ट्रूडो के पिता और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री पियरे ट्रूडो ने भी ऐसा ही कारनामा किया था।

जस्टिन ट्रूडो के पिता पियरे ट्रूडो ने भी खालिस्तानी आतंकियों का पक्ष लिया था। इसकी कनाडा को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। जस्टिन के पिता पियरे वर्ष 1968 से लेकर 1979 और 1980 से 1984 के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री रहे थे। इस दौरान भारत में खालिस्तान का आतंक चरम पर था और खालिस्तानी आतंकी भारत से भागकर कनाडा में शरण ले लेते थे।

भारत ने बढ़ते हुए आतंकवाद को रोकने के लिए कनाडा से इन तत्वों पर कार्रवाई की माँग की थी। पियरे ट्रूडो की सरकार ने इस दौरान भारत का सहयोग करने से इनकार कर दिया था। पियरे ट्रूडो की सरकार ने इस दौरान ना ही कनाडा में संचालित भारत विरोधी गतिविधियों को रोका और ना ही उन आतंकियों को भारत वापस भेजा जो कि लगातार कनाडा में बैठकर भारत को तोड़ने की साजिश कर रहे थे।

इसी कड़ी में भारत ने खालिस्तानी आतंकी तलविंदर सिंह परमार को प्रत्यर्पित करने को कहा था, जो उस समय कनाडा में रहता था। परमार ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ का पहला मुखिया था। वह 1970 में कनाडा भाग गया था और वहीं से खालिस्तानी गतिविधियों को संचालित करता था।

तलविंदर पर वर्ष 1981 में पंजाब पुलिस के 2 जवानों की हत्या का आरोप भी है, जिसके लिए उसे 1983 में जर्मनी में गिरफ्तार किया गया था। तलविंदर परमार ने पंजाब के बड़े नेता लाला जगत नारायण की भी वर्ष 1981 में हत्या कर दी थी।

तलविंदर इसके अतिरिक्त अन्य कई हत्याओं में भी शामिल रहा था। तलविंदर ने 1985 में एयर इंडिया के एक बोईंग 747 विमान जिसका नाम ‘कनिष्क’ था, उसे बम से उड़ा दिया था। यह विमान कनाडा के शहर मॉन्ट्रियल से लंदन के रास्ते भारत आ रहा था।

इस विमान में तलविंदर ने इन्दरजीत सिंह रैयत तथा अन्य कुछ आरोपितों के साथ मिलकर बम रखा था जो कि विमान की उड़ान के बीच प्रशांत महासागर में फट गया था और इस हादसे में 329 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। इस हादसे में मरने वाले 268 व्यक्ति कनाडाई नागरिक ही थे।

उसने इसी दिन एक और विमान को बम से उड़ाने के लिए एक बैग में बम रखा था, लेकिन वो इसे विमान के भीतर नहीं डाल पाया और टोक्यो में ही फट गया। तलविंदर ने यह बम एयर इंडिया के टोक्यो से बैंकाक जाने वाले विमान में रखने का प्लान बनाया था।

इसके लिए उसने वैंकुवर से उड़े एक विमान में रखे एक बैग में बम रखा था जो कि आगे जाकर टोक्यो में एयर इंडिया के विमान में हस्तांतरित किया जाना था। टोक्यो के एयरपोर्ट में यह बैग इस विमान से निकाले जाने और एयर इंडिया के विमान में रखे जाने से पहले ही स्टोरेज क्षेत्र में फट गया जिसमें 2 जापानी एयरपोर्ट कर्मियों की मृत्यु हो गई थी।

इस हादसे की जाँच भी आगे कहीं नहीं पहुँच सकी क्योंकि कनाडा की सरकार ने इसमें काफी ढील बरती और मात्र इंदरजीत सिंह रैयत ही मात्र आरोपी ठहराया जा सका। इंदरजीत को भी जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने 2017 में छोड़ दिया था और सामान्य जीवन बिताने को कह दिया था।

यह भी दावा किया जाता है कि कनाडा की पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों को इस बात की जानकारी थी कि तलविंदर सिंह ऐसा कोई बड़ा काण्ड करने वाला है लेकिन तब भी उन्होंने इसको गंभीरता से नहीं लिया और इसके कारण इतना बड़ा हमला हुआ।

तलविंदर सिंह परमार को कॉमनवेल्थ नियमों का हवाला देकर भारत को नहीं सौंपा गया था। नियमों के अनुसार, 2 कॉमनवेल्थ देशों के बीच अपराधियों के प्रत्यर्पण के लिए अलग से संधि नहीं करनीं पड़ती है।

इसी आधार पर इंदिरा गाँधी की सरकार ने परमार को भारत वापस भेजने को कहा था लेकिन पियरे ट्रूडो की सरकार ने यह कारण दिया कि भारत कॉमनवेल्थ का सदस्य तो है लेकिन वह ब्रिटेन की रानी को अपना राष्ट्राध्यक्ष नहीं मानता, इसलिए परमिंदर को भारत नहीं भेजा जा सकता।

परमिंदर को भारत ना भेजने और खालिस्तानियों पर ढील बरतने के कारण कनाडा में उस समय खालिस्तानी आतंकवादियों के हौसले खूब बढ़ गए थे, उन्होंने ऐसे सिखों को निशाना बनाना चालू कर दिया था जो कि अलग देश की माँग का विरोध करते थे।

इसी कड़ी में वर्ष 1998 में इंडो-कैनेडियन अखबार के सम्पादक तारा सिंह हायेर को मार दिया गया था। तारा सिंह को 18 नवम्बर, 1998 में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। वह सिख आतंकवाद के विरोधी थे और इस बारे में लिखते रहते थे। उन्होंने 1988 में एयर इंडिया विस्फोट के बारे में लिखते हुए बताया था कि इसमें तलविंदर का हाथ हो सकता है।

तलविंदर सिंह परमार बाद में भारत में एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था। वह एयर इंडिया के इस विमान में बम धमाका करने के बाद भारत लौट आया था और यहाँ पर अपनी आतंकी गतिविधियों में लिप्त था। उसे वर्ष 1992 में पंजाब पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया था।

जस्टिन के पिता पियरे ट्रूडो की एक गलती के कारण 329 निर्दोष व्यक्तियों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी और लोग हवाई यात्रा करने से भी डरने लगे थे। जस्टिन यही गलती फिर दोहरा रहे हैं। गौरतलब है कि उनकी सरकार पिछले कुछ सालों से ऐसे कृत्यों पर एकदम शांत है जिनमें भारत को सीधे सीधे धमकी दी गई है।

जस्टिन ट्रूडो लगातार ऐसे तत्वों के साथ नजर आते रहे हैं जो कि भारत को तोड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं। जस्टिन, जसपाल अटवाल के साथ नजर आते रहे हैं जो कि एक खालिस्तानी आतंकवादी है। कनाडा में गुरवन्तपंत सिंह पन्नू पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वह दिन भर भारत के विरुद्ध जहर उगलता है।

कनाडा सरकार के इस रवैये से भारत में सुरक्षा खतरों के साथ ही कनाडा में रहने वाले हिन्दुओं तथा खालिस्तान का विरोध करने वाले सिखों का जीवन खतरे में पड़ गया है। जस्टिन ने अपने पिता की गलितयों से नहीं सीख कर स्थितियों को और जटिल बना दिया है। भारत का सहयोग ना करने के बजाय अपनी राजनीति चमकाने का निर्णय जस्टिन ट्रूडो को भारी पड़ने वाला है।