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जिस सलीम ने हैदराबाद के मंदिर में देवी प्रतिमा को मारी लात, उसने मुंबई के गणेश पंडाल में भी किया था हमला: जाकिर नाइक के वीडियो देख कट्टरपंथी बना कंप्यूटर इंजीनियर

हैदराबाद के मुत्यालम्मा मंदिर में देवी की प्रतिमा को खंडित करने वाला 30 वर्षीय कंप्यूटर इंजीनियर सलीम सलमान इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक का वीडियो देखा करता था। वह सोशल मीडिया पर इस्लामी तकरीरें देख-सुनकर कट्टरपंथी बना था। हैदराबाद की मंदिर में देवी की प्रतिमा को खंडित करने से पहले वह मुंबई में भी गणेश पूजा पंडाल में तोड़फोड़ कर चुका है।

मंगलवार (15 अक्टूबर 2024) को गिरफ्तार सलीम सलमान ने पूछताछ में हैदराबाद पुलिस को बताया कि वह मुंबई का मूल निवासी है। वह इस्लामी कट्टरपंथियों की वीडियो देखा करता था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “वह स्वयं कट्टरपंथी बन गया और मूर्तिपूजा जैसे अन्य धर्मों की प्रथाओं के प्रति कट्टरपंथी मानसिकता और घृणा विकसित कर ली।”

आरोपित सलमान साल 2022 में मुंबई में भी इसी तरह की तोड़फोड़ की घटनाओं में शामिल था। वह जूते पहनकर गणेश पूजा पंडाल में घुस गया था और स्थानीय लोगों पर हमला कर दिया था। पुलिस ने बताया कि आरोपित सलमान एक महीने के पर्सनालिटी डेवलपमेंट पाठ्यक्रम के लिए हैदराबाद आया था।

दरअसल, सलीम सलमान मस्जिद जाते समय मंदिर को निशाना बनाया था। आरोपित ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह सिकंदराबाद के ‘सिने पुलिस होटल’ में ठहरा हुआ था। आरोपित की जानकारी के आधार पर पुलिस ने 50 कमरों वाले होटल पर छापा मारा, जहाँ पता चला कि यह होटल ज्यादातर चोरों द्वारा किराए पर लिया जाता था।

पुलिस ने आगे बताया कि सलीम सलमान के साथ और भी असामाजिक तत्व मंदिर पर हमला कर रहे थे, लेकिन बाकी सभी भाग गए। बता दें कि सोमवार (14 सितंबर 2024) को तेलंगाना के कुर्मागुड़ा क्षेत्र में मुत्यालम्मा मंदिर की मूर्ति तोड़े जाने के बाद सिकंदराबाद में तनाव पैदा हो गया, जिससे स्थानीय हिंदू निवासियों में गुस्सा और विरोध भड़क गया।

यह घटना पास के पासपोर्ट कार्यालय के पास की है। घटना के दौरान लोगों ने इस कट्टरपंथी को स्थानीय लोगों ने तुरंत पकड़ लिया। बाद में उसे मार्केट पुलिस स्टेशन की हद में पुलिस को सौंप दिया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। घटना के बाद अधिकारियों ने सुरक्षा कड़ी कर दी और शांति बहाल करने के प्रयास कर रहे हैं।

इस बीच, स्थानीय लोगों ने मंदिर के पास प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। प्रदर्शन में बीजेपी नेता भी शामिल हुए। इस प्रदर्शन के दौरान हैदराबाद लोकसभा सीट से बीजेपी की उम्मीदवार माधवी लता समेत कई बीजेपी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी कर लिया गया। वहीं, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी भी मंदिर पहुँचे थे।।

उन्होंने इस घटना को ‘शर्मनाक‘ करार दिया और कुछ लोगों पर जानबूझकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया। इस बीच, घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें एक युवक सफेद कुर्ता और काली इस्लामिक टोपी पहने देवी की मूर्ति पर लात मारते हुए दिख रहा है। उसने मूर्ति को बेरहमी से तोड़ा और उसके टुकड़े ज़मीन पर फेंक दिए।

निज्जर पर पकड़ा गया कनाडा का झूठ, भारत बोला- रिश्तों को खराब करने के लिए ट्रूडो इकलौते जिम्मेदार: PM पद से हटाने के लिए खुद की पार्टी के सांसदों ने शुरू किया अभियान

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पोल खुद ही खोल दी है। ट्रूडो ने माना है कि कनाडा के पास भारत सरकार के निज्जर की हत्या में शामिल होने के कोई स्पष्ट सबूत नहीं हैं। भारत ने इस कबूलनामे पर कहा है कि कनाडा और भारत के रिश्ते खराब करने के जिम्मेदार अकेले ट्रूडो ही होंगे।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो बुधवार (16 अक्टूबर, 2024) को कनाडा में विदेशी दखल की जाँच करने वाली कमिटी के सामने पेश हुए थे। यहाँ उन्होंने कनाडा में हो रही जासूसी और दखल को लेकर अपना बयान दर्ज करवाया। उन्होंने इस दौरान भारत के कनाडा के भीतर दखल का पुराना राग छेड़ा।

अपने बयान में ट्रूडो ने निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया। उन्होंने कमिटी को बताया कि कनाडा ने भारत को इस संबंध में जानकारी दी थी। लेकिन जब सबूतों की बात आई तो ट्रूडो ने खुद स्वीकारा कि उन्होंने भारत को कोई मजबूत सबूत नहीं उपलब्ध करवाए हैं।

ट्रूडो ने क्या कहा?

ट्रूडो ने बताया, “हमारे पास मौक़ा था कि हम यह जानकारी (निज्जर की हत्या) को G-20 से पहले सार्वजनिक कर देते, इससे भारत काफी मुश्किल परिस्थिति में पड़ता। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। हम परदे के पीछे से भारत से इस मुद्दे को सहयोग करने को कहते रहे। भारत ने हमसे पूछा कि आप आखिर क्या जानते हैं, हमें वो सबूत दीजिए जो आपके पास है। हमने (कनाडा) ने कहा कि यह आपकी (भारत) की एजेंसी हैं, आपको इसमें जाँच करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने हमसे कहा कि आप सबूत दिखाइए।”

ट्रूडो ने आगे कहा, “उस समय यह केवल ख़ुफ़िया जानकारी ही थी और हमारे पास कोई पक्का सबूत नहीं था। ऐसे में हमने कहा कि आपकी सुरक्षा एजेंसियों की जाँच करें और सच सामने लाएँ। उन्होंने (भारत) ने कहा कि नहीं हमें सबूत दिखाइए। मैंने पीएम मोदी से इस बारे में G20 के बाद बात की। उन्होंने कहा कि कनाडा में लोग भारत के खिलाफ काम कर रहे है और हम उनके खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं। हालाँकि, हमने उन्हें बोलने की आजादी का हवाला दिया।”

भारत ने दिया जवाब

कैमरे के सामने ट्रूडो ने अपनी ही पोल खोल दी है। इससे भारत की स्थिति और मजबूत हो गई है। भारत लगातार कहता आया है कि कनाडा ने उसे निज्जर की हत्या के संबंध में कोई भी सबूत नहीं दिया है। यही बात ट्रूडो ने खुद ही दोहरा दी। ट्रूडो के इस कबूलनामे के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपना बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और कनाडा के रिश्ते खराब करने के जिम्मेदार ट्रूडो ही हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, “आज हमने जो सुना है, उससे वही बात पुष्ट होती है जो हम लगातार पहले से कहते आ रहे हैं। कनाडा ने भारत और भारतीय राजनयिकों के विरुद्ध लगाए गए गंभीर आरोपों के लिए में हमें कोई भी सबूत नहीं दिया है। इस लापरवाह रवैये के कारण भारत-कनाडा संबंधों को जो नुकसान पहुँचा है, उसकी जिम्मेदारी अकेले प्रधानमंत्री ट्रूडो की है।”

गौरतलब है कि भारत ट्रूडो के आरोपों पर सबूतों की माँग करता आया है। भारत ने लगातार यह कहा है कि कनाडा ने उसे रत्ती भर भी सबूत नहीं उपलब्ध करवाए हैं। वहीं कनाडा पहले दिन से एक ही जैसे आरोप दोहरा रहा है। उसका एक ही राग है कि भारत ने कनाडा में निज्जर को मरवाया और इसमें भारतीय अधिकारी शामिल थे। कनाडा की सरकार और पुलिस ने आज तक कोई भी सबूत इस संबंध में सामने नहीं रखे हैं। वह इस मामले में सिर्फ जानकारी को लेकर बात कर रहे हैं।

अपने ही देश में फंसे ट्रूडो

जस्टिन ट्रूडो भारत पर आरोप लगाते-लगाते अपने ही देश में घिर गए हैं। कनाडा के नेता प्रतिपक्ष पिएरे पोलिवर ने ट्रूडो पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रूडो ने इसी कमिटी के सामने कुछ सांसदों के चीन से मिले होने की बात कही थी। अब पियरे पोलिवर ने जस्टिन ट्रूडो को उन सांसदों के नाम सार्वजनिक करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा आरोप लगाया है कि जस्टिन ट्रूडो अपनी कुर्सी बचाने को लेकर ऐसे आरोप लगाए हैं और वह नाम कभी सार्वजनिक नहीं करेंगे।

दूसरी तरफ ट्रूडो की पार्टी के भीतर से भी असंतोष बढ़ रहा है। उनकी लिबरल पार्टी के ही कुछ सांसद उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी से उतारने के लिए काम कर रहे हैं। कई सांसदों ने ट्रूडो सरकार की नाकामियों के चलते जस्टिन ट्रूडो से प्रधानमंत्री पद छोड़ने को कहा है। कई सांसद मुखर होकर यह बात उठा रहे हैं। कनाडाई मीडिया बता रहा है कि लिबरल पार्टी के सांसद एक साथ आकर ट्रूडो पर दबाव बना रहे है कि वह आगामी चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद छोड़ दें। उन पर यह दबाव हालिया टोरंटो उपचुनाव में हार के बाद और बढ़ा है।

CBC की एक रिपोर्ट बताती है कि सांसद सीन केसी ने जस्टिन ट्रूडो से खुले तौर पर पद छोड़ने को कहा है। इसके अलावा बाकी सांसद संख्याबल जुटा रहे हैं ताकि वह ट्रूडो को किनारे लगा सकें। ट्रूडो के विरोधी सांसद तब तक इस पूरी प्रक्रिया को चुपचाप कर रहे हैं। कई सांसदों से एक ऐसे कागज पर दस्तखत करने को कहा जा रहा है जिसमें ट्रूडो को हटाने की बात कही गई है। ट्रूडो को हटाने की यह कोशिश अकारण ही नहीं हो रही है। कनाडा में 2025 में आम चुनाव होने हैं।

चुनाव से पहले जस्टिन ट्रूडो की जनता में लोकप्रियता रसातल को चली गई है। जनता की पसंद-नापसंद बताने वाली अप्रूवल रेटिंग में भारी गिरावट हुई है। सितम्बर, 2024 में ट्रूडो की अप्रूवल रेटिंग मात्र 30% थी। यानी 100 में से 70 लोग ट्रूडो को पसंद नहीं करते। जब ट्रूडो प्रधानमंत्री बने थे, तब उनको पसंद करने वालों का आँकड़ा 60% के पार था। युवा वर्ग और पुरुषों में तो ट्रूडो की रेटिंग 25% पर पहुँच गई है। उनकी लोकप्रियता घटने का सबसे बड़ा कारण कनाडा में बढती महंगाई और बेरोजगारी है।

रामगोपाल मिश्रा की हत्या में पहली गिरफ्तारी मोहम्मद दानिश की, नेपाल भागते हुए UP पुलिस ने दबोचा: लाठीचार्ज करवाने वाला CO सस्पेंड, बहराइच हिंसा में अब तक 55 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बहराइच में राम गोपाल मिश्रा की हत्या मामले में पहली गिरफ्तारी हो गई है। आरोपित की पहचान राजा उर्फ मोहम्मद दानिश उर्फ जहीर/सहीर खान के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि जहीर नेपाल जाने की फिराक में था, लेकिन उसे माहसी खंड में राजी क्रॉसिंग पर गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब जहीर से इस मामले में पूछताछ कर रही है। वहीं सरफराज समेत 5 अन्य आरोपितों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है।

मालूम हो कि बहराइच हिंसा मामले में अब तक 11 एफआईआर दर्ज हुई हैं इसमें 6 नामजद और 1304 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। वहीं राम गोपाल की हत्या मामले में 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। ​मोहम्मद दानिश उर्फ ​​साहिर/जहीर खान इन्हीं आरोपितों में से एक था। उसके अलावा अब्दुल हामिद, सरफराज, फहीम भी इस मामले में आरोपित हैं।

गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा मामले में अब तक 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई है। इसके अलावा प्रशासन ने इस मामले पर एक्शन लेते हुए महसी सीओ रूपेंद्र गौड़ा को निलंबित कर दिया है। उनकी जगह रामपुर में तैनात रहे रवि खोखर को सीओ महसी पद पर नियुक्त किया गया है।

आरोप है कि रूपेंद्र गौड़ ने यात्रा में शामिल लोगों पर लाठियाँ चलवाई थीं जिसके बाद भीड़ उग्र हो गई और हिंसा की घटना देखने को मिली। फिलहाल डीजीपी प्रशांत कुमार का कहना है कि अब बहराइच में पूरी तरह से शांति है। डीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने बहराइच की स्थिति देखने के बाद डीजीपी को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रूपेंद्र गौड़ा के अलावा माना जा रहा है कि अभी उन पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने घटना वाले दिन स्थानीय स्तर पर लापरवाही की थी।

पाकिस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान मुर्दाबाद… फैजान ने लगाया नारा, हाई कोर्ट ने कहा- मंगलवार को राष्ट्रीय ध्वज को 21 बार सलामी दो, भारत माता की जय बोलो

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ चिल्लाने वाले एक शख्स को इस शर्त पर बेल दी कि वो पुलिस थाने में लगे राष्ट्रीय ध्वज को महीने में दो बार आकर 21 दफा सलाम करेगा वो भी ‘भारत माता की जय’ नारे के साथ।

कोर्ट ने कहा कि आरोपित को ऐसा हर माह के पहले और चौथे मंगलवार को सुबह 10 से 12 बजे के बीच आकर करना होगा। इसके अलावा आरोपित पर 50000 रुपए का बॉन्ड प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।

ये फैसला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की एकल पीठ ने दिया। उन्होंने फैजान उर्फ फैजल नाम के आरोपित के केस पर सुनवाई करते हुए अपना यह निर्णय दिया ताकि उसमें उस देश के प्रति सम्मान जगे जहाँ वो पैदा हुआ और रह रहा है।

फैजान को पुलिस ने आईपीसी की धारा 153 सी के तहत हिरासत में लिया था। बाद में उसने कोर्ट से बेल माँगी ये कहकर कि उसपर फर्जी मामला दायर हुआ है। हालाँकि जब अभियोजन पक्ष ने वीडियो दिखाई जो झूठ पकड़ा गया और कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया है।

बता दें कि इस मामले में 17 मई 2024 को भोपाल के मिसरौद पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जाँच के बाद ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दायर की गई थी। इस दौरान वीडियो क्लिप को आधार बनाया गया जिसमें आरोपित स्पष्ट रूप से नारेबाजी कर रहा था। जाँच में पुलिस ने पाया कि आरोपित पर पहले से 14 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।

देवरिया में दुर्गा विसर्जन जुलूस में युवक को मारा चाकू, अंगूर आलम गिरफ्तार: पुलिस ने बताया- आपसी रंजिश

उत्तर प्रदेश के देवरिया में दुर्गा मूर्ति के विसर्जन जुलूस पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला किया। हमले में दो हिन्दू युवकों को चाकू घोंप दिया गया। एक युवक को अधिक चोट आई है। चाकू घोंपने के बाद अंगूर आलम नाम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इसे आपसी रंजिश का मामला बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देवरिया के सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के मझौलीराज में बुधवार (16 अक्टूबर, 2024) को हिन्दू दुर्गा मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाल रहे थे। यह जुलूस गंडक नदी के तट तक जाना था। इसमें बड़ी संख्या में युवक शामिल थे। जब यह जुलूस मझौलीराज के शाही चौराहे पर पहुँचा तो इसमें कुछ मुस्लिम युवक भी घुस आए।

इन्होने हिन्दू युवकों से विवाद करना चालू कर दिया। हिन्दुओं ने इसका विरोध किया तो यह हिंसा पर उतर आए। उन्होंने राजन पटेल (19) पर चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में राजन गंभीर रूप से घायल हो गया। उसको बचाने आए युवक जितेश सिंह को भी चाकू लगा। वह भी घायल है।

विसर्जन जुलूस में चाकूबाजी करने के बाद यह सभी भाग गए। हिन्दुओं ने यहाँ इसके बाद प्रदर्शन करना चालू किया और आरोपित की गिरफ्तारी की माँग की। हिन्दुओं ने अंगूर आलम नाम के एक व्यक्ति पर हिंसा करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

इस घटना में घायल हुए युवक राजन पटेल ने बताया, “मेरा नाम राजन पटेल है, मैं यहीं का रहना वाला हूँ। विवाद इसलिए हुआ क्योंकि विसर्जन जुलूस में मुस्लिम पक्ष आकर नाचने लगे और इसके बाद मारपीट चालू हो गई। हमने हटने को कहा तो नहीं हटे। वो लोग मुझे मिलकर मारने लगे। मेरे अलावा एक और युवक घायल हुआ है।”

देवरिया के एसपी और डीएम भी मौके पर पहुँचे थे। देवरिया की डीएम दिव्या मित्तल ने बताया, “देवरिया के मझौली राज में आज एक दुर्गा मूर्ति विसर्जन था। इस विर्सजन जुलूस में कुछ लड़के बाहर से घुस आए, इसके बाद आपसी विवाद हुआ और लड़ाई झगड़ा हुआ। इस लड़ाई में राजन नाम का एक युवक घायल हो गया। उसका इलाज CHC सलेमपुर में करवाया गया। उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर मुख्य अभियुक्त अंगूर आलम को गिरफ्तार कर लिया गया है।”

देवरिया के एसपी संकल्प शर्मा ने बताया, “देवरिया जनपद के सलेमपुर थाना में विसर्जन जुलूस के दौरान कुछ युवकों में झगड़ा हुआ, इसमें एक युवक को चोटें आई हैं। परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर एक मुकदमा कायम कर लिया गया है। मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी कर ली गई है। विसर्जन भी सम्पन्न हो गया है।”

हिन्दुओं पर हमले के मामले में सलेमपुर की विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “मेरे विधानसभा क्षेत्र सलेमपुर के मझौली राज में मूर्ति विसर्जन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं पर विभिन्न आताताइयों द्वारा घुसकर धारदार हथियार से किए वार से अत्यंत दुखी एवं निशब्द हूँ। सभी घायल श्रद्धालुओं के उपचार हेतु निजी व जिला अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया है।”

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के ही बहराइच में दुर्गा मूर्ति विसर्जन जुलूस में शामिल रामगोपाल मिश्रा नाम के एक युवक की मुस्लिमो ने हत्या कर दी थी। उन्होंने रामगोपाल मिश्रा को गोली मार दी थी और विसर्जन जुलूस पर पथराव किया था। इस मामले में अब्दुल हमीद का परिवार आरोपित है।

तलवार से मारा, करंट लगाया, नाखून उखाड़े… मीडिया ने ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट’ से किए जो दावे, उनको बहराइच पुलिस ने नकारा: कहा- गोली लगने से रामगोपाल मिश्रा की मौत

बहराइच के महाराजगंज में राम गोपाल मिश्रा की हत्या मामले में सामने आ रही ‘प्रताड़ना देने’ की जानकारी को बहराइच पुलिस ने नकारा है। उन्होंने अपील जारी करते हुए बताया कि गोपाल मिश्रा की मौत गोली लगने से हुई थी। पुलिस के अनुसार, गोपाल मिश्रा को करंट देने, तलवार से मारने और नाखून उखाड़ने की बातें केवल अफवाह है। पुलिस ने बयान में ये भी कहा कि घटना में अतिरिक्त किसी अन्य की मृत्यु नहीं हुई है। उन्होंने अपील की है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के प्रयास न किए जाएँ, न अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं को प्रसारित किया जाए।

बता दें कि यूपी पुलिस की ये अपील उन मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आई जिसमें पोस्टमार्टम रिपोर्टों का हवाला देकर कहा जा रहा था कि राम गोपाल मिश्रा के शरीर पर 35 छर्रे मिले हैं। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि इस्लामी भीड़ ने गोपाल को प्रताड़ित करने के लिए उनके नाखून उखाड़े, उन्हें करंट लगाया और तलवार इस्तेमाल हुई। इस तरह की खबरों के बीच बहराइच पुलिस का ये बयान सामने आया है।

मीडिया में प्रकाशित खबरों की हेडलाइन

इसके अलावा सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल है जिसमें सीएमओ डॉक्टर संजय सिंह बताते दिख रहे हैं कि जो पोस्टमार्टम हुआ उसमें पता चला कि 25-30 छर्रे छाती, गले और चेहरे पर लगे थे। इन छर्रों के कारण ज्यादा खून बहा और फिर मौत हुई। इसके अलावा वो ये भी कह रहे हैं कि पैर के अंगूठों का जो मध्यभाग है वो डैमेज है वो किसी चोट से ही हुआ है।

गौरतलब है कि 13 अक्तूबर को दुर्गा पूजा के मूर्ति विसर्जन के दौरान गाना बजाने को लेकर महाराजगंज में हिंसा भड़की थी। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने 23 साल के राम गोपाल मिश्रा के घर में घुस उनकी निर्ममता से हत्या कर दी। बाद में वीडियो सामने आया था जिसमें उनका शव ले जाते लोग दिख रहे थे। वहीं उनकी पत्नी, जिनसे उनकी शादी 2 महीने पहले हुई थी वो लिपट कर रो रही थी। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश के हिंदू गोपाल मिश्रा के लिए न्याय माँगने में जुट गए। वहीं परिवार ने सीएम योगी के मुलाकात करके न्याय की माँग की और सीएम ने उनकी पीड़ा समझते हुए न केवल आर्थिक मदद की बात कही, बल्कि अपराधियों को सख्त से सख्त सजा देने का आश्वासन दिया।

नोट: राम गोपाल मिश्रा के साथ हुई बर्बरता की जो खबरें हमने पूर्व में प्रकाशित की थी उसे भी बहराइच पुलिस के बयान के साथ अपडेट कर दिया गया है।

बलदेव मान, दर्शन सिंह, सत्यपाल डांग… यूँ ही नहीं कनाडा पर मोदी सरकार के सुर में सुर मिला रही CPI(M), पंजाब में खालिस्तानी आतंकियों ने खोदी थी वामपंथियों की कब्र

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) या CPM ने मंगलवार (15 अक्टूबर 2024) को एक बयान जारी करके भारत-कनाडा विवाद में भारत सरकार को अपना समर्थन दिया है। अपने बयान में CPI(M) ने कनाडा में सक्रिय भारत विरोधी खालिस्तानी तत्वों को ‘गंभीर चिंता’ का विषय बताया और कहा कि भारत सरकार राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए बाध्य है।

दरअसल, हाल ही में कनाडा ने भारत के खिलाफ आरोप लगाते हुए कहा था कि भारतीय एजेंट और अधिकारी कनाडा की धरती पर खालिस्तान समर्थक सिखों को निशाना बनाने के लिए एक आपराधिक सिंडिकेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके पहले सितंबर 2023 में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत का हाथ है।

CPI(M) के बयान में कहा गया है, “कनाडा में सक्रिय भारत विरोधी खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियाँ गंभीर चिंता का विषय रही हैं और इनका राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है। भारत सरकार राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए बाध्य है, जिसके लिए उसे भारत में सभी राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है।”

इस वामपंथी दल ने आगे कहा, “कनाडा सरकार के विभिन्न अधिकारियों द्वारा भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों को भारत सरकार ने खारिज कर दिया है। उम्मीद है कि भारत सरकार लॉरेंस बिश्नोई के आपराधिक गिरोह की भूमिका के बारे में लगाए गए आरोपों सहित इन सभी मुद्दों पर विपक्षी दलों को विश्वास में लेगी।”

पंजाब में उग्रवाद के दौरान वामपंथी नेताओं को बनाया गया निशाना

हालाँकि, CPI(M) द्वारा केंद्र सरकार का समर्थन करने वाला बयान कई लोगों को आश्चर्यचकित कर सकता है, क्योंकि अन्य विपक्षी पार्टी के नेता कनाडा के आरोपों को लेकर भारत सरकार पर निशाना साध रहे हैं। यहाँ ध्यान देना जरूरी है कि पंजाब में उग्रवाद के दौरान खालिस्तानी आतंकवादियों द्वारा मारे गए लोगों में कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भी शामिल थे।

सन 1980 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी के नेता खालिस्तानी आंदोलन के सबसे मुखर विरोधियों में से एक थे। इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। इंडिया टुडे ने 1986 में एक रिपोर्ट में बताया था कि वामपंथी नेता और कार्यकर्ता, खासतौर पर CPI के, हिंसा और अलगाववाद की मुखर निंदा करने के कारण खालिस्तानी आतंकवादियों के निशाने पर आ गए।

दर्शन सिंह कैनेडियन की हत्या

सन 1984 से 1986 के बीच खालिस्तानी आतंकवादियों ने कम-से-कम 17 वामपंथी नेताओं की हत्या कर दी थी, जिनमें दर्शन सिंह संघा उर्फ ​​’कैनेडियन’, CPI के पूर्व राज्य सचिव एवं नक्सली नेता बलदेव सिंह मान जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल थे। उन्हें पंजाब के ग्रामीण इलाकों में खालिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ़ प्रतिरोध करने के कारण निशाना बनाया गया था।

दर्शन सिंह कैनेडियन खालिस्तानी आतंकवादियों की आँखों में खटकते थे। 1986 में उनके गाँव में साइकिल चलाते समय गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। हत्यारे आतंकवादियों ने एक नोट छोड़ा था, जिसमें लिखा था, “हम खालिस्तान के विरोध में इस आवाज़ को दबा रहे हैं। यह दूसरों के लिए एक सबक है।” यह इस बात की झलक थी कि उस समय आतंकवादी वैचारिक प्रतिरोध से कैसे निपटते थे।

बलदेव सिंह मान की हत्या

बलदेव सिंह मान CPI (ML) चंद्रपुल्ला रेड्डी समूह के अमृतसर जिला सचिव और पार्टी पत्रिका ‘हिरावल दस्ता’ के संपादक थे। वह खालिस्तानी आतंकवाद को चुनौती देने वाले कम्युनिस्ट खेमे का हिस्सा थे। मान का जन्म 9 जुलाई 1952 को हुआ था और उन्होंने अपना अधिकांश जीवन अमृतसर के अजनाला तहसील के बग्गा कलाँ गाँव में बिताया था।

अमृतसर के खालसा कॉलेज में अपने छात्र जीवन के दौरान वह चंद्रपुल्ला रेड्डी-एसएन सिंह की CPI (ML) के संपर्क में आए। उन्होंने अपने गाँव में ‘नौजवान भारत सभा’ नामक वामपंथी संगठन को पुनर्जीवित किया, जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बेहद लोकप्रिय था। उग्रवाद के दौरान उन्होंने कई सार्वजनिक रैलियों का नेतृत्व किया था।

खालिस्तानी आतंकवाद का विरोध करते हुए बलदेव सिंह मान ने राज्य में जगह-जगह बैठकें कीं और जागरूकता अभियान चलाया। उन्होंने लोगों से सांप्रदायिक सद्भाव का आह्वान किया और आतंकवादियों का प्रतिरोध करने का आह्वान किया। 26 सितंबर 1986 को उनके पैतृक गाँव में आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी। मान के परिवार में उनकी पत्नी और एक सप्ताह की बेटी बची थी।

वामपंथियों का लचीलापन और व्यापक राजनीतिक संदर्भ

जब वामपंथी नेताओं को क्रूर तरीके से मौत के घाट उतारा जा रहा था, तब CPI और CPI(M) के नेताओं ने इन घटनाओं का इस्तेमाल राज्य में चरमपंथ से लड़ने के अपने दृढ़ संकल्प को मजबूत करने के लिए किया। कनाडाई की विधवा बलबीर कौर ने उनके अंतिम संस्कार में घोषणा की, “हम न तो हिंदू हैं और न ही सिख, बल्कि हम भारतीय हैं। आतंकवाद का खात्मा हो। भारत अमर रहे।”

कनाडाई, सत्यपाल डांग और गुरशरण सिंह जैसे नेताओं ने आतंकवादियों द्वारा मिली धमकियों के बावजूद अपनी सार्वजनिक रैलियाँ जारी रखी थीं। उन्होंने अपने भाषणों में खालिस्तानी आतंकवादियों की आतंकी रणनीति के खिलाफ़ जमकर हमला बोला। हालाँकि, यह ‘बहादुरी’ ज़्यादा दिन तक नहीं चली, क्योंकि उन्हें व्यवस्थित तरीके से खत्म कर दिया गया।

इस ऐतिहासिक संदर्भ को देखते हुए कनाडा में खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ भारत सरकार के समर्थन में CPI(M) की वर्तमान स्थिति कोई अपवाद नहीं है। वामपंथियों ने अतीत में खालिस्तानी हिंसा का खामियाजा भुगता है, क्योंकि उन्होंने अलगाववाद और उग्रवाद का विरोध किया था। वामपंथी इस रूख को बनाए हुए है।

एक समर्थन से पिछले ‘अपराध’ मिट नहीं जाते

CPI(M) द्वारा भारत सरकार को समर्थन देना वामपंथी नेताओं के खिलाफ खालिस्तानी हिंसा की ऐतिहासिक यादों से जुड़ा है। इसके बारे में वर्तमान पीढ़ी अनजान है। हालाँकि, इससे उनके ‘अपराधों’ को नहीं मिटाता है, जो वामपंथी भारत में करते आ रहे हैं। नक्सल आंदोलन को उनका समर्थन, चीन का पक्ष लेना और विभिन्न मुद्दों पर भारत सरकार पर हमले करना अनदेखा नहीं किया जा सकता।

ये कोई नहीं भूल सकता कि CPI(M) ने चीन के सबसे बड़े सामूहिक हत्यारे माओत्से तुंग की 130वीं जयंती के अवसर पर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया था। इसमें संकेत दिया था कि वह सबसे महान क्रांतिकारी थे, जिन्होंने लोगों को लोकतांत्रिक क्रांति करने में मदद की। CPI नेता सीताराम येचुरी ने उइगर मुस्लिमों पर चीन द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

इतना ही नहीं, दिवंगत सीताराम येचुरी ने तो चीन के तानाशाह शी जिनपिंग एवं निकोले चाउसेस्कु की जमकर प्रशंसा तक की थी। अब, जबकि सीपीआई (एम) ने इस एक मुद्दे पर भारत सरकार को समर्थन दिया है तो यह उम्मीद की जाती है कि एक विपक्षी दल के रूप में वह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से संबंधित अन्य मामलों पर भी अपना बेहतर रुख सामने रखेंगे।

(यह आर्टिकल मूलत: अंग्रेजी में लिखा गया है। उसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

चीन-पाकिस्तान का दखल, कमजोर राजनीतिक जमीन, घटती लोकप्रियता… MS वोट बैंक के लिए हिंदुओं-भारत से रिश्ते बिगाड़ रहे जस्टिन ट्रूडो?

खालिस्तानियों से हमदर्दी दिखाने और भारत से कूटनीतिक रिश्ते खराब करने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो घरेलू राजनीति में भी अलग-थलग पड़ गए हैं। कनाडा की राजनीतिक और पत्रकार बिरादरी भी ट्रूडो की नीतियों ने कतई सहमत नहीं है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत विरोध का यह झंडा ट्रूडो ने अपने वोटबैंक को ठीक करने के लिए उठाया है। यह भी कहा जा रहा है कि कनाडा के चुनावों में चीन के हस्तक्षेप से लोगों का ध्यान भटकाने को लेकर ट्रूडो भारत का नाम उछाल रहे हैं।

अपनी ही पार्टी के निशाने पर ट्रूडो

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपनी ही पार्टी में अलग-थलग पड़ गए हैं। उनकी लिबरल पार्टी के कई सांसदों ने ट्रूडो सरकार की नाकामियों के चलते जस्टिन ट्रूडो से प्रधानमंत्री पद छोड़ने को कहा है। कई सांसद मुखर होकर यह बात उठा रहे हैं। कनाडाई मीडिया बता रहा है कि लिबरल पार्टी के सांसद एक साथ आकर ट्रूडो पर दबाव बना रहे है कि वह आगामी चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद छोड़ दें। उन पर यह दबाव हालिया टोरंटो उपचुनाव में हार के बाद और बढ़ा है।

CBC की एक रिपोर्ट बताती है कि सांसद सीन केसी ने जस्टिन ट्रूडो से खुले तौर पर पद छोड़ने को कहा है। इसके अलावा बाकी सांसद संख्याबल जुटा रहे हैं ताकि वह ट्रूडो को किनारे लगा सकें। ट्रूडो के विरोधी सांसद तब तक इस पूरी प्रक्रिया को चुपचाप कर रहे हैं। कई सांसदों से एक ऐसे कागज पर दस्तखत करने को कहा जा रहा है जिसमें ट्रूडो को हटाने की बात कही गई है। ट्रूडो को हटाने की यह कोशिश अकारण ही नहीं हो रही है। कनाडा में 2025 में आम चुनाव होने हैं।

चुनाव से पहले जस्टिन ट्रूडो की जनता में लोकप्रियता रसातल को चली गई है। जनता की पसंद-नापसंद बताने वाली अप्रूवल रेटिंग में भारी गिरावट हुई है। सितम्बर, 2024 में ट्रूडो की अप्रूवल रेटिंग मात्र 30% थी। यानी 100 में से 70 लोग ट्रूडो को पसंद नहीं करते। जब ट्रूडो प्रधानमंत्री बने थे, तब उनको पसंद करने वालों का आँकड़ा 60% के पार था। युवा वर्ग और पुरुषों में तो ट्रूडो की रेटिंग 25% पर पहुँच गई है। उनकी लोकप्रियता घटने का सबसे बड़ा कारण कनाडा में बढती महंगाई और बेरोजगारी है।

अपनी पार्टी के विरोध से बचने को ट्रूडो भारत विरोध का पैंतरा अपना रहे हैं। उन्हें लगता है कि राजनयिक बखेड़ा खड़ा करने से कुछ समय के लिए उनकी कुर्सी बच जाएगी। वह अपनी पार्टी को देश के संकट में फंसे होने का बहाना दे सकेंगे। हालाँकि, उनकी कुर्सी बचाने की यह तरकीब कनाडा को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में भारी पड़ने वाली है।

मुस्लिम-सिख वोटबैंक भी है कारण

जस्टिन ट्रूडो के खुले भारत विरोध का एक कारण वोटबैंक भी है। वह यूँ ही खालिस्तानियों का समर्थन नहीं कर रहे हैं। दरअसल, सिख कनाडा की आबादी का लगभग 2% हैं। उनके वोट ब्रैम्पटन जैसे इलाकों में निर्णायक हैं। कनाडा में सिखों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकांश नेता भी खालिस्तान के समर्थक हैं। जगमीत सिंह इसका एक उदाहरण हैं। कई बड़े गुरुद्वारों में भी खालिस्तानियों का प्रभाव है। इन सब परिस्तिथियों में सिख वोट ट्रूडो के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

वह खालिस्तानियों को खुश करके सिख समुदाय का वोट चाहते हैं। इसके अलावा कनाडा में हिन्दू वोट भी 2.3% है। ट्रूडो जानते हैं कि भारत का विरोध करने से उनको हिन्दू वोट का नुकसान होगा। हालाँकि, वह इस वोट का नुकसान करने को तैयार हैं और इसकी भरपाई वह सिख-मुस्लिम वोट मिलाकर करना चाहते हैं। कनाडा की आबादी में लगभग 5% हिस्सा मुस्लिमों का है। इनमें से भी बड़ा हिस्सा उन मुस्लिमों का है, जो पाकिस्तानी हैं।

इस मुस्लिम वोटबैंक को साधने के लिए ट्रूडो ने कनाडा के भीतर पाकिस्तान की गतिविधियों को खुला छूट दे दी है। सितम्बर, 2024 में ही कनाडा की खुफिया और सुरक्षा एजेंसी CSIS प्रमुख वनेसा लॉयड ने स्पष्ट तौर पर विदेशी दखल की जाँच करने वाली कमिटी को बताया था कि पाकिस्तान कनाडा के भीतर दखल दे रहा है। उन्होंने बताया था कि पाकिस्तान कनाडा के भीतर खालिस्तान समर्थकों को मदद करता है और साथ ही चुनावों में भी दखल देता है। पाकिस्तान यहाँ लोगों को दबाता भी है।

जस्टिन ट्रूडो ने इस खुलासे के ऊपर आँखे मूँद रखी हैं। उन्होंने पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी के ऊपर एक भी शब्द बोलने से इनकार कर दिया है। कनाडा के भीतर खालिस्तानियों को पाकिस्तान के साथ मिल कर भारत तोड़ने की साजिश रचने की पूरी छूट दी जा रही है। यह सब इसलिए ताकि ट्रूडो लगभग 7%-8% वोटबैंक बढ़ा सकें। चुनावी फायदे के लिए ट्रूडो ने अपने देश के रिश्तों को ताक पर रख दिया है। वह कनाडा की शिक्षा व्यवस्था का भी इससे बड़ा नुकसान करने वाले हैं।

चीन का दखल छुपाने का भी प्रयास

जस्टिन ट्रूडो का भारत विरोधी रवैये का एक और कारण है। यह कारण चीन का कनाडा की राजनीति और उसके चुनाव में दखल है। चीन के प्रभाव कनाडा में प्रभाव को ट्रूडो छुपाना चाहते हैं। कनाडाई चुनाव में दखल को लेकर एक जाँच चल रही है। जून, 2024 में आई एक रिपोर्ट बताती है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक कुछ चीनी नागरिक, कनाडा के शासन और अर्थव्यवस्था में घुसपैठ करने और उसे प्रभावित करने के प्रयासों में लगे हुए हैं और लगे हुए हैं।

इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कनाडा के चुनावों में दखल के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा है। एक रिपोर्ट में तो यहाँ तक बताया गया था कि चीन ने कनाडा के भीतर अपने पुलिस स्टेशन तक बना लिए हैं। कनाडा में 7 चीनी पुलिस स्टेशन होने की बात कही गई थी। यह भी सामने आया था कि चीन ने कनाडा में कंजर्वेटिव पार्टी के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया। चीन ने कनाडा में सांसदों और कई नेताओं को धमकाने तक को लेकर प्रयास किए हैं। यहाँ तक कि जस्टिन ट्रूडो को जिताने में भी चीन का योगदान बताया जाता है।

चीन का कनाडा में दखल यहाँ राजनीति में बड़ा मुद्दा है। इसे दबाने को लेकर भी जस्टिन ट्रूडो भारत को निशाने पर ले रहे हैं। भारत लगातार कनाडा से खालिस्तानियों पर कार्रवाई की माँग करता आया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत की चिंताओं को लगातार नजरअंदाज करते आए हैं और साथ ही भारत विरोधियों को प्रश्रय देते रहे हैं। स्थानीय राजनीति चमकाने के लिए आतंकियों को बसाना कभी भी फायदे का सौदा नहीं होता है, जस्टिन ट्रूडो जितनी जल्दी यह समझेंगे, उतना ही कनाडा का नुकसान कम होगा।

ST कल्याण का पैसा कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव में लगाया, 7 लाख वोटरों को बाँटे पैसे: ED चार्जशीट से खुलासा, जानिए क्या है कर्नाटक का वाल्मीकि फंड घोटाला

कर्नाटक में वाल्मीकि घोटाला का पैसा कॉन्ग्रेस को जिताने के लिए उपयोग किया गया। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रहे बी नागेन्द्र ने सरकारी फंड से निजी खर्चे किए और बेल्लारी लोकसभा चुनाव में भी इस पैसे से रिश्वत बाँटी। यह सारे खुलासे ED ने अपनी चार्जशीट में किए हैं।

ED ने इस मामले में दायर चार्जशीट में बताया है कि बेल्लारी लोकसभा में लगभग 7 लाख वोटरों को इस फंड में घोटाले के पैसे से रिश्वत दी गई। यह रिश्वत उन्हें कॉन्ग्रेस को वोट देने के लिए दी गई। यह पैसा बी नागेन्द्र ने महर्षि वाल्मीकि जनजातीय विकास निगम में घोटाला करके जुटाया था।

बेल्लारी में ₹14 करोड़ की रिश्वत

ED ने बताया है कि बेल्लारी में 7 लाख वोटरों को लगभग ₹200 की रिश्वत दी गई। ED ने कहा है कि घोटाले के पैसे से चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की गई। ED ने यह खुलासा बी नागेन्द्र के पूर्व निजी सचिव विजय गौड़ा के फोन की जाँच के बाद किया है। उसमें बेल्लारी में पैसा खर्च होने के सबूत मिले हैं। विजय गौड़ा ने भी संबंध में जानकारी दी है।

ED ने आरोप लगाया है कि बी नागेन्द्र के पास इस घोटाले का अधिकांश पैसा आया। ED को विजय गौड़ा ने बताया है कि उसने घोटाले का यह पैसा नागेन्द्र के कहने पर कई लोगों में बाँटा जो कॉन्ग्रेस से जुड़े हुए थे। यहाँ कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार ई तुकाराम के लिए घोटाले का पैसा उपयोग किया गया।

यह भी आरोप ED ने लगाया है कि बूथ पर काम करने वाले कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को ₹10000 इस घोटाले के पैसे से दिए गए। नागेन्द्र के घोटाले का यह पैसा बंटवाने में कॉन्ग्रेस के विधायकों ने भी सक्रिय रोल निभाया, यह भी ED ने बताया है। जाँच एजेंसी बताया है कि घोटाले में से लगभग ₹15 करोड़ का इस्तेमाल चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया गया।

ED के पास पैसे से लेनदेन की फोटो भी मौजूद हैं। चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि बी नागेन्द्र ने इन आरोपों पर कोई साफ़ जवाब नहीं दिया है। बी नागेन्द्र ने बचने के लिए तीन आईफोन तोड़े हैं। ED ने यह भी आरोप लगाए हैं कि बी नागेन्द्र ने जब पैसों की गड़बड़ी की तो इसे वित्त विभाग ने भी नहीं चेक किया।

कर्नाटक सरकार में मंत्री रहे बी नागेन्द्र को हाल ही में बेंगलुरु की एक अदालत ने जमानत दे दी है। उन्हें इस मामले में ED ने गिरफ्तार किया था। भाजपा ने भी इन सवालों पर कॉन्ग्रेस से जवाब माँगा है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कर्नाटक में बड़े घोटालों का आरोप लगाया है।

क्या है वाल्मीकि फंड घोटाला?

कर्नाटक सरकार KMVSTDC प्रदेश की जनजातीय जनता के कल्याण के लिए चलाती है। इसके अंतर्गत जनजातीय जनसंख्या के लिए रोजगार समेत विशेष योजनाएँ लाई जाती हैं। कर्नाटक सरकार इसके लिए अलग से बजट देती है। इसी महर्षि वाल्मीकि फंड में घोटाले की बात सामने आई है।

यह पूरा मामला एक आत्महत्या से चालू हुआ था। मई, 2024 में इसी निगम से जुड़े एक 48 वर्षीय कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के बाद एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें उसने आरोप लगाया था कि उसके उच्चाधिकारियों ने उस पर इस बात के लिए दबाव बनाया था कि वह निगम के खातों से पैसा ट्रांसफर करे।

उसने आरोप लगाया था कि यह काम निगम का पैसा हड़पने के लिए किया गया था। उसका आरोप था कि यह काम एक मंत्री के मौखिक आदेशों के आधार पर किया गया था। उसने अपने विभाग के अलावा यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के कर्मचारियों पर भी आरोप लगाए थे। इसके बाद पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया था।

आत्महत्या करने वाले कर्मचारी चंद्रशेखर ने सुसाइड नोट में बताया था कि उसे उच्चाधिकारियों ने इस बात के लिए निर्देशित किया था कि वह निगम के एक खाते से दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए पत्र लिखे। यह पैसा यूनियन बैंक के वसंत नगर ब्रांच से एमजी रोड ब्रांच में डाला जाना था।

इसी के तहत वाल्मीकि निगम के खातों से निकाला गया पैसा इसके बाद अन्य खातों में भेज दिया गया। इस पूरे खेल में ₹187 करोड़ का लेनदेन हुआ। इसमें से लगभग ₹88 करोड़ अवैध खातों में भेजा गया। जब यह मामला खुला तो चंद्रशेखर डर गया और उसने आत्महत्या कर ली।

यह पूरा मामला सामने आने के बाद कई बैंक कर्मचारियों समेत KMVSTDC के कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। भाजपा ने इस मामले में बी नागेन्द्र का इस्तीफा मांगा था। इसके बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था। इस मामले में अब ED जाँच चल रही है। इस मामले में 25 लोगों को आरोपित बनाया गया है।

जयशंकर ने घर में घुस कर पाकिस्तान को रगड़ा, कहा- आतंकवाद और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते: SCO के मंच से चीन को भी CPEC पर लताड़ा

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भाग लेने इस्लामाबाद पहुँचे भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्य जयशंकर ने पाकिस्तान और चीन को धोकर रख दिया है। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने पाकिस्तान-चीन के चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रोजेक्ट के कारण भारतीय संप्रभुता के उल्लंघन का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते।

चीन या पाकिस्तान का नाम लिए बिना विदेश मंत्री ने कहा कि सभी देशों को एक दूसरे की सीमाओं का सम्मान करने की जरूरत है। इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने SCO बैठक की शुरुआत करते हुए कहा कि पाकिस्तान शांति, सुरक्षा और सामाजिक, आर्थिक तरक्की चाहता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के साथ व्यापार नहीं हो सकता। सीमा का सम्मान करना ही होगा।

पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आपसी विश्वास में कमी आई है या फिर पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है… अगर दोस्ती में गिरावट आई है और अच्छे पड़ोसी की कमी महसूस हो रही है तो इसके पीछे के कारणों का विश्लेषण करना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान-चीन के CPEC प्रोजेक्ट की वजह से भारतीय संप्रभुता के उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया।

जयशंकर ने कहा ने कहा कि SCO का मकसद पूरा करने के लिए आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से लड़ना जरूरी है। इसके लिए एक-दूसरे पर भरोसा और ईमानदारी की जरूरत है। उन्होंने कहा, “इसके लिए ईमानदार बातचीत, विश्वास, अच्छे पड़ोसी और एससीओ चार्टर के प्रति प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। एससीओ को ‘तीन बुराइयों’ का मुकाबला करने में दृढ़ और अडिग रहने की आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण और पुनर्संतुलन आज की वास्तविकताएँ हैं। SCO देशों को इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। सहयोग आपसी सम्मान और संप्रभु समानता पर आधारित होना चाहिए, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को मान्यता देनी चाहिए और एकतरफा एजेंडे पर नहीं, बल्कि वास्तविक साझेदारी पर आधारित होना चाहिए।

विदेश मंत्री ने कहा, “हम वैश्विक प्रथाओं, खासकर व्यापार और पारगमन को ही चुनेंगे तो SCO प्रगति नहीं कर सकता। SCO औद्योगिक सहयोग प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सकता है और श्रम बाजारों का विस्तार कर सकता है। MSME सहयोग, संपर्क, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई संभव रास्ते हैं। चाहे स्वास्थ्य हो, भोजन हो या ऊर्जा सुरक्षा, हम स्पष्ट रूप से एक साथ काम करके बेहतर हैं।”

बता दें कि SCO की इस बैठक में आठ सदस्य देशों के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। वहीं, भारत की ओर से विदेश मंत्री और ईरान के व्यापार मंत्री बैठक में शामिल हो रहे हैं। बैठक में पहले ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आसिफ शामिल होने वाले थे, लेकिन आखिरी वक्त में उनका पाकिस्तान आने का प्रोग्राम टल गया।