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ठप कर देंगे सारी मेडिकल सेवा… RG Kar रेप-मर्डर मामले में न्याय माँग रहे डॉक्टर आमरण अनशन पर, 1 प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ने पर दी ममता सरकार को चेतावनी

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला ट्रेनी डॉक्टर की रेप के बाद हत्या के विरोध में डॉक्टरों का आमरण अनशन जारी है। अनशन पर बैठे डॉक्टरों में से एक की हालत बिगड़ गई है। उसे गुरुवार (10 अक्टूबर 2024) की रात अस्पताल में भर्ती कराया गया। उस डॉक्टर की हालत गंभीर हो गई है। इसके बाद इन डॉक्टरों के समर्थन में मेडिकल एसोसिएशन भी आ गए हैं।

भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) ने जूनियर डॉक्टरों के आमरण अनशन के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से स्थिति बिगड़ने से पहले हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। इसके अलावा, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों को कोई नुकसान पहुँचा तो वह देश भर में चिकित्सा सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर देगा। 

IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरवी अशोकन ने प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों से मुलाकात की और उनकी चिंताओं को सुना। अशोकन ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से ‘बिना समय बर्बाद किए’ स्थिति को तुरंत संभालने का आह्वान किया। उहोंने कहा कि जूनियर डॉक्टरों ने अपना अनशन समाप्त करने पर चर्चा नहीं की। वे अपनी माँगों पर केंद्रित रहे और अपने दिवंगत सहयोगी के लिए न्याय को लेकर आश्वस्त रहे।

अशोकन ने कहा कि जूनियर डॉक्टर अपने मारे गए सहयोगी के लिए न्याय के साथ-साथ सुरक्षित कामकाजी माहौल उपलब्ध कराने और राज्य के स्वास्थ्य सचिव एनएस निगम को तत्काल हटाने की माँग कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों के प्रति प्रशंसा भाव से अशोकन ने कहा, “मैं इस बात से अभिभूत हूँ कि ये बच्चे अपने लिए नहीं, बल्कि लोगों की हित के लिए लड़ रहे हैं। वे असली नायक हैं और हमें उन पर गर्व है।”

शनिवार (5 अक्टूबर 2024) की रात से सात जूनियर डॉक्टर आमरण अनशन पर हैं। इनमें आरजी कर के अनिकेत महतो, कोलकाता मेडिकल कॉलेज की स्निग्धा हाजरा, तनया पांजा और अनुस्तुप मुखोपाध्याय, एसएसकेएम अस्पताल के अर्नब मुखोपाध्याय, एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पुलस्थ आचार्य और केपीसी मेडिकल कॉलेज की सायंतनी घोष हाजरा शामिल हैं।

अनशन के कारण हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती जूनियर डॉक्टर अनिकेत महतो की हालत गंभीर, लेकिन स्थिर बताई जा रही है। क्रिटिकल केयर यूनिट में उनकी निगरानी कर रही पाँच डॉक्टरों की टीम के एक सदस्य के अनुसार, उन पर उपचार का असर होने लगा है। उन्हें गुरुवार रात को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

IMA ने गुरुवार को सीएम ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया है कि सुरक्षित कामकाजी माहौल एक विलासिता नहीं, बल्कि एक शर्त है। युवा डॉक्टरों को भूख हड़ताल शुरू किए हुए लगभग एक सप्ताह हो गया है और उन पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए। IMA ने कहा कि मानव जीवन से ज्यादा कीमती कुछ भी नहीं है। राज्य का कर्तव्य है कि वह उचित माँगों को स्वीकार करे।

नाबालिग दलित बच्चों की पहले की पिटाई… फिर सिर छिलाकर-कालिख पोतकर गाँव में जुलूस निकाला: बहराइच में केस दर्ज; नाजिम, कासिम और इनायत गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में दलित उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यहाँ नाबालिग बच्चों को मारपीट करके बाजार में घुमाया गया है। इन बच्चों के बाल छील दिए गए और चेहरे पर कालिख पोत दी गई। इस अमानवीय करतूत का आरोप नाज़िम, कासिम, इनायत और शानू खाँ पर लगा है। इन सभी ने बच्चों और उनके परिवार का नरसंहार करने की भी धमकी दी है। पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। चौथे आरोपित शानू खाँ की संलिप्तता की जाँच करवाई जा रही है। घटना मंगलवार (8 अक्टूबर 2024) की है।

यह घटना बहराइच जिले के नानपारा थानाक्षेत्र की है। यहाँ ताजपुर टेड़िया गाँव के रहने वाले राजित राम पासवान ने 8 अक्टूबर को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनके गाँव में शाहिद खाँ के बेटे नाज़िम का मुर्गी फार्म है। इस मुर्गी फार्म पर नाज़िम राजित राम के बेटे अमन के साथ उनके पड़ोसी अनूप व रोहित को जबरन काम करवाने ले जाता था। काम करवाने एक बाद वह बच्चों को 10-20 रुपए थमा दिया करता था।

मंगलवार (8 अक्टूबर) की दोपहर लगभग 1 बजे नाज़िम अपने बेटे कासिम व एक अन्य सहयोगी इनायत के साथ राजित राम के घर पहुँचा। वह अमन, अनूप और रोहित पर अपने मुर्गी फार्म से 5 किलो गेहूं चोरी का आरोप लगाने लगा। यहीं पर नाज़िम ने अपने साथियों सहित तीनों पीड़ितों को पीटना शुरू किया। वह तीनों को पीटते हुए अपने मुर्गी फार्म पर ले गया। यहाँ पर उसने तीनों नाबालिगों का गला दबा कर मार डालने की भी कोशिश की।

बेरहमी से हुई पिटाई के बाद नाज़िम, कासिम और इनायत ने तीनों बच्चों के चेहरे पर कालिख पोत दिया। उनके सिर के बाल छील कर उस पर पेंट से चोर लिख डाला गया। इसके बाद भीड़ जुटा कर रोहित, अनूप और अमन को पूरे इलाके में घुमाया गया। नाबालिगों का जुलूस निकाले जाने के दौरान आरोपितों ने ठहाके लगाए। इस दौरान बच्चों की पिटाई भी होती रही। लगभग 3 घंटे घुमाने के बाद तीनों बच्चों को उनके घर के पास 4 बजे छोड़ दिया गया।

राजित राम का आरोप है कि इतना सब कुछ घट जाने के बाद गाँव के पूर्व प्रधान शानू खाँ भी वहाँ पहुँचा। उसने पीड़ितों की मदद के बजाय आरोपितों का ही पक्ष लेना शुरू कर दिया। शानू से राजित राम सहित अन्य बच्चों को कहीं भी मुँह खोलने या किसी से शिकायत करने पर जान से मार डालने की भी धमकी दी। इसी दौरान पीड़ित को जातिसूचक शब्द बोले गए और गंदी-गंदी गालियाँ भी दी गईं। रोते बिलखते बच्चों ने अपने परिजनों को सारी बात बताई। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

अपने बच्चे व उसके साथियों के साथ हुए अत्याचार को सुनकर राजित राम ने पुलिस में तहरीर दी। उन्होंने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है। पुलिस ने इस तहरीर पर नाज़िम, कासिम, इनायत और शानू खाँ को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (2), 352, 351 (3) और 109 (1) के साथ SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। नाज़िम, कासिम और इनायत को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

140 यात्रियों की बची जान, 3 घंटे बाद खराब विमान लैंड हुआ: उड़ान भरते ही फ्लाइट के हाइड्रोलिक सिस्टम में आई थी खराबी, नीचे खड़ी थी 20+ एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली हवाई अड्डे से शारजाह के लिए उड़ान भरने वाली वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट का हाइड्रोलिक होने के बाद इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। दरअसल, शुक्रवार (11 अक्टूबर 2024) की शाम को उड़ान भरने के थोड़ी ही देर बाद ही विमान का हाइड्रोलिक गियर खराब हो गया। इसके बाद आपात स्थिति में इसकी लैंडिंग हुई। इस विमान में कुल 141 यात्री सवार थे। 

हाइड्रोलिक में खराबी का पता चलते ही फ्लाइट की आपातकालीन लैंडिंग कराने की कोशिश की गई। इसके लिए ईंधन को कम करना जरूरी था। इस कारण विमान करीब 2 घंटे तक शहर का गोल-गोल चक्कर काटता रहा। ईंधन कम होने के बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग करवाई गई। इसको लेकर एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बयान भी जारी किया है।

एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने बयान में कहा कि वह तिरुचिरापल्ली-शारजाह मार्ग पर संचालित होने वाली उड़ान से संबंधित मीडिया रिपोर्टों से अवगत हैं। उसने कहा कि विमान के ऑपरेटिंग क्रू द्वारा किसी इमरजेंसी की घोषणा नहीं की गई थी। विमानन कंपनी ने यह भी बताया है कि विमान को बार-बार चक्कर क्यों लगवाया गया था।

कंपनी ने बताया कि सुरक्षित लैंडिंग से पहले विमान ने एक निर्दिष्ट क्षेत्र में कई बार चक्कर लगाए। ऐसा रनवे की लंबाई को ध्यान में रखते हुए विमान के ईंधन और वजन को कम करने के लिए किया गया। कंपनी ने कहा कि इस घटना या गड़बड़ी के कारणों की विस्तृत जाँच की जाएगी। वहीं, यात्रियों के लिए वैकल्पिक विमान की व्यवस्था करने की बात भी कही।

त्रिची के कलेक्टर ने कहा कि इससे पहले विमान को हल्का करने के लिए ईंधन गिराने पर विचार किया जा रहा था। हालाँकि, ऐसा नहीं किया गया क्योंकि विमान आवासीय क्षेत्रों के ऊपर चक्कर लगा रहा था। जिला कलेक्टर ने कहा, “एहतियाती उपाय के तौर पर हमने एम्बुलेंस और बचाव दल को स्टैंडबाय पर रखा है।”

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) हाइड्रोलिक विफलता के कारण का पता लगाने के लिए उस विमान की जाँच करेगा। बता दें कि उड़ान में हाइड्रोलिक फेल तब होती है जब लैंडिंग गियर, ब्रेक और फ्लैप जैसे महत्वपूर्ण भागों को नियंत्रित करने के लिए दबावयुक्त तरल पदार्थ का उपयोग करने वाली प्रणाली ठीक से काम करना बंद कर देती है।

घटना के वक्त इस विमान में कुल 141 यात्री सवार थे। इमरजेंसी लैंडिंग से पहले विमान ने कुल 21 चक्कर काटे। यात्रियों को इसकी वजह नहीं बताई गई। विमान के कैप्टन ने सिर्फ इतना अनाउंस किया कि विमान में तकनीकी खराबी है और कुछ देर में दुबारा लैंडिंग करेंगे। विमान से उतरने के बाद यात्रियों को पता चला कि फ्लाइट की हाइड्रोलिक गियर खराब हो गया था।

कहीं तोड़ी माँ की मूर्ति, कहीं पंडाल में फेंके पेट्रोल बम: भारत से बांग्लादेश तक दुर्गा पूजा में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदू आस्था पर किया हमला, पढ़ें 10 घटनाएँ

दुर्गा पूजा, जो हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, हर साल भारत और बांग्लादेश दोनों में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। लेकिन इस साल, पूजा के दौरान दोनों देशों में कई ऐसी घटनाएँ सामने आईं, जहाँ इस्लामी कट्टरपंथियों ने त्योहार के उत्सव को विघ्नित करने की कोशिश की। इन घटनाओं ने न केवल पूजा के धार्मिक महत्व को ठेस पहुँचाई, बल्कि हिंदू समुदाय के मनोबल पर भी गहरा असर डाला।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान बमबाजी और मूर्तियों के विखंडन जैसी 35 सांप्रदायिक घटनाएँ हुईं, जिससे हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल बन गया है। पुलिस महानिरीक्षक (IGP) ने कहा कि इन घटनाओं में शामिल 17 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। कट्टरपंथियों द्वारा लगातार हो रहे हमलों ने हिंदू समुदाय को एकजुट होने और अपनी रक्षा के लिए आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।

भारत में भी इस्लामी कट्टरपंथियों ने दुर्गा पूजा के आयोजनों में विघ्न डालने की कोशिश की, जिसमें कई स्थानों पर विवाद और हिंसा की घटनाएँ सामने आईं। ये घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि धार्मिक असहिष्णुता का खतरा दोनों देशों में बढ़ रहा है, और इस पर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। आइए इन घटनाओं को विस्तार से समझते हैं:

ढाका में पेट्रोल बम हमला

11 अक्टूबर 2024 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में दुर्गा पूजा पंडाल पर पेट्रोल बम से हमला हुआ। यह घटना टाटी बाजार इलाके में घटी, जहाँ इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा स्थल पर बम फेंक दिया, जिससे भगदड़ मच गई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। आरोपित मोहम्मद और उसके साथी इस घटना के पीछे थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने गिरफ्तार किया। यह हमला बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ते खतरे का प्रतीक है, जिसने देश के हिंदू समुदाय को झकझोर कर रख दिया।

पुलिस ने इस मामले में सक्रियता दिखाई और हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया। घटना के बाद कई संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस्लामी कट्टरपंथियों के इस हमले ने बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय में डर और असुरक्षा की भावना को और बढ़ा दिया है।

चटगाँव में दुर्गा पूजा के मंच पर कब्जा कर गाए इस्लामी गाने

9 अक्टूबर 2024 को बांग्लादेश के चटगाँव में दुर्गा पूजा मंडप पर एक और घटना घटी, जब कुछ मुस्लिम युवकों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान इस्लामी गाने गाने शुरू कर दिए। आरोपियों में से छह युवकों को बाद में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने पहले आयोजकों से देशभक्ति के गाने गाने की अनुमति माँगी थी, लेकिन मंच पर कब्जा कर इस्लामी क्रांति का प्रचार करने लगे। उनकी इस हरकत ने पूजा में आए श्रद्धालुओं को स्तब्ध कर दिया और वहाँ तनाव का माहौल बना दिया।

चटगाँव में इस घटना ने सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दिया, क्योंकि यह बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपितों को गिरफ्तार किया और मामले की जाँच शुरू की। यह घटना दिखाती है कि किस तरह से कट्टरपंथी ताकतें धार्मिक समारोहों को विघ्नित करने की कोशिश कर रही हैं।

दुर्गा पूजा के दौरान मूर्तियों पर हमला और तोड़फोड़

चटगाँव में ही दुर्गा पूजा के दौरान एक और गंभीर घटना घटी, जब कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक मंदिर पर हमला किया और दुर्गा मूर्तियों को तोड़ दिया। यह घटना पूजा के मुख्य कार्यक्रम के दौरान हुई, जब स्थानीय हिंदू समुदाय पूजा में व्यस्त था। हमलावरों ने मूर्तियों को नुकसान पहुँचाया और पूजा स्थल पर तोड़फोड़ की, जिससे पूजा स्थल में अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस ने इस घटना पर भी तेजी से कार्रवाई की, लेकिन अधिकांश आरोपी फरार हो गए। इस तरह के हमलों ने बांग्लादेश में धार्मिक असहिष्णुता की स्थिति को और बढ़ा दिया है। हिंदू समुदाय के नेताओं ने सरकार से ऐसे कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

बौद्ध समुदाय पर कट्टरपंथियों का दबाव: त्योहार रद्द

बांग्लादेश में सिर्फ हिंदू ही नहीं, बल्कि बौद्ध समुदाय भी इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गया। इस साल, बौद्ध समुदाय को अपने प्रमुख त्योहार ‘कथिन चीवर दान’ को रद्द करना पड़ा। इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को दुर्गा पूजा और मूर्ति विसर्जन से रोकने की धमकी दी थी, और साथ ही बौद्ध समुदाय को भी अपने त्योहार न मनाने की चेतावनी दी।

धमकियों के चलते, स्थानीय बौद्ध समुदाय ने अपना त्योहार रद्द कर दिया, ताकि सांप्रदायिक हिंसा से बचा जा सके। यह घटना बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ते खतरे का प्रतीक है, जहां कट्टरपंथी ताकतें अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए डर और धमकियों का सहारा ले रही हैं।

बांग्लादेश के IGP का बयान: 35 घटनाओं में 17 गिरफ्तार

बांग्लादेश के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने बयान में कहा है कि इस साल दुर्गा पूजा के दौरान कुल 35 हमलों की घटनाएँ हुई हैं, जिनमें पूजा पंडालों पर हमले और सांप्रदायिक हिंसा शामिल है। अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हैरानी की बात ये है कि बांग्लादेश के आईजीपी मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं को कमतर बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ मुस्लिमों के त्योहार के समय भी होती है।

मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने कहा, “पूरे बांग्लादेश में 32000 मंडप लगे हैं। ऐसी घटनाएँ हिंदुओं ही नहीं, मुस्लिमों के त्योहार के समय भी होती हैं।” रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में ज्यादातर हमलावर इस्लामिक कट्टरपंथी थे, जो हिंदू धार्मिक स्थलों और त्योहारों को निशाना बना रहे थे। इन घटनाओं से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जो अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में दुर्गा पूजा पंडाल पर हमला

भारत में भी दुर्गा पूजा के दौरान मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा हिंसा की घटनाएँ दर्ज की गईं। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में दुर्गा पूजा के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पंडाल में घुसकर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया। आरोपितों में कलीम, अरबाज़, इमरान और मुख़्तार शामिल हैं, जिन्होंने महिला श्रद्धालुओं से अभद्रता की और पंडाल में लगे भगवा ध्वज को नोचकर नाली में फेंक दिया। महिलाओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना दुर्गा पूजा के शांतिपूर्ण उत्सव में बाधा डालने का एक स्पष्ट उदाहरण है। हिंदू संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और आरोपितों को कड़ी सजा देने की माँग की। पुलिस ने भी मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

गोंडा में दुर्गा पूजा के दौरान पथराव

उत्तर प्रदेश के गोंडा में दुर्गा पूजा के दौरान आतिशबाजी को लेकर विवाद हुआ। असलम पुत्र लल्लन, सुल्तान पुत्र अजात, मुन्ना पुत्र इदरीश की अगुवाई में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आतिशबाजी पर आपत्ति जताई और फिर पूजा स्थल पर पथराव शुरू कर दिया। यह घटना सांप्रदायिक तनाव का परिणाम थी, जिसमें दोनों पक्षों के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने पथराव में शामिल आरोपितों में से कई को गिरफ्तार किया। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी और पुलिस गश्त तेज कर दी। हालाँकि, इस प्रकार की घटनाओं ने क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द को खतरे में डाल दिया है।

कोलकाता में माइक की आवाज पर विवाद

कोलकाता में एक दुर्गा पूजा पंडाल में मुस्लिमों ने माइक की आवाज को लेकर विवाद खड़ा किया। अजान के दौरान माइक की आवाज को बंद करने की माँग करते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा समारोह को बाधित किया। आयोजकों ने उसकी बात मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हंगामा शुरू कर दिया।

शिकायत में कहा गया है कि 11 अक्तूबर की सुबह न्यू बंगाल स्पोर्टिंग क्लब द्वारा जब अष्टमी और नवमी के अनुष्ठान किए जा रहा था, तब आज दोपहर 1.13 बजे लगभग 50-60 उपद्रवी लोग आए और उन्होंने पूजा को रोकने को कहा और पूजा को भंग करने का प्रयास किया। उन्होंने धमकी दी कि अगर पूजा नहीं रोकी गई तो वो मां दुर्गा की प्रतिमा को तोड़ देंगे। इस दौरान उन्होंने धक्का-मुक्की की और हमारी महिला सदस्यों के खिलाफ गलत शब्दों का भी इस्तेमाल किया।

कुशीनगर में दुर्गा मूर्ति पर पथराव

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक और गंभीर घटना सामने आई, जब दुर्गा पूजा के दौरान मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मूर्ति पर पथराव किया। इस घटना में 10 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए आरोपितों को गिरफ्तार किया और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी। इस तरह की घटनाएँ पूजा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देती हैं और समाज में दरार पैदा करती हैं। हिंदू समुदाय ने प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

असम के करीमगंज में सांप्रदायिक हिंसा

असम के करीमगंज में दुर्गा पूजा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी। इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा स्थल पर पथराव किया, जिसके बाद दोनों समुदायों के बीच झड़पें शुरू हो गईं। पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया और स्थिति को काबू में लाया। यह घटना असम में सांप्रदायिक सौहार्द पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है, जहाँ धार्मिक त्योहारों के दौरान हिंसा और असहिष्णुता बढ़ रही है। पुलिस ने सहाबुल अहमद (21 साल), अब्दुल अहद (18 साल) और एक नाबालिग को भी गिरफ्तार किया है।

इस साल दुर्गा पूजा के दौरान भारत और बांग्लादेश में कई घटनाएँ सामने आईं, जहाँ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने पूजा स्थलों पर हमले किए। इन घटनाओं ने धार्मिक असहिष्णुता की गंभीरता को उजागर किया है। दोनों देशों की सरकारों को इस प्रकार की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करनी होगी, ताकि सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखा जा सके।

‘मदरसों को बंद करें फंडिंग, मदरसा बोर्ड भंग करें’ : NCPCR चेयरमैन ने लिखा सभी राज्य के सचिवों को पत्र, कहा- यहाँ नहीं मिलती बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के चेयरमैन प्रियांक कानूनगो ने मदरसों को राज्य सरकारों द्वारा मिलने वाले फंड को बंद करने की सिफारिश की है। इस बावत उन्होंने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भी लिखा है। अपने पत्र में प्रियांक ने मदरसों के बारे में NCPCR की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। शुक्रवार (11 सितंबर 2024) को जारी इस पत्र में प्रियांक कानूनगो ने गैर मुस्लिम छात्रों को मदरसों से निकाल कर सरकारी स्कूलों में भर्ती कराने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

प्रियांक कानूनगो का यह पत्र सभी राज्यों सहित केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को सम्बोधित है। उन्होंने पत्र की शुरुआत में ही NCPCR की एक रिपोर्ट का हवाला दिया है जिसका नाम ‘आस्था के संरक्षक या अधिकारों के उत्पीड़क: बच्चों के संवैधानिक अधिकार बनाम मदरसे’ है। उन्होंने दावा किया है कि बच्चों के मौलिक अधिकार और अल्पसंख्यक समुदाय के हक के बीच एक विरोधाभास जैसा दिख रहा है। इसकी वजह उन्होंने बताते हुए लिखा कि मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा नहीं मिल पा रही है।

अपने इसी पत्र में प्रियांक कानूनगो ने आगे सिफारिश की है कि प्रदेश सरकारों द्वारा मदरसों को दिए जाने वाले आर्थिक मदद पर रोक लगाई जाए। इसी के साथ राज्य में चल रहे मदरसा बोर्डों को भी बंद किया जाए। इन सिफारिशों के साथ मदरसों में पढ़ने वाले सभी गैर मुस्लिम छात्रों को चिन्हित करते हुए सरकारी स्कूलों में भर्ती करवाने के लिए भी कहा गया है। प्रियांक कानूनगो के मुताबिक ऐसा रोडमैप बनाया जाए जो देश के सभी बच्चों के भविष्य के लिए अनुकूल माहौल बनाए।

पत्र के अंत में प्रियांक कानूनगो ने उम्मीद जताई है कि उनकी सिफारिशें देश को और बेहतर बनाने की दिशा में कारगर साबित होंगी। उन्होंने सभी अधिकारियों से पत्र पर गौर कर के जरूरी कार्रवाई के लिए आगे निर्देशित करने को कहा है। पत्र में ‘आस्था के संरक्षक या अधिकारों के उत्पीड़क: बच्चों के संवैधानिक अधिकार बनाम मदरसे’ नाम की जिस रिपोर्ट का प्रियांक कानूनगो ने हवाला दिया है उसे वो जल्द ही सार्वजानिक कर सकते हैं।

हरियाणा के नतीजे देख कॉन्ग्रेसी नेता रोते रहे EVM का रोना, पार्टी के OBC नेता अजय यादव ने कहा- घटिया प्रबंधन के कारण हारी कॉन्ग्रेस, हाईकमान जिम्मेदार

हरियाणा के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अध्यक्ष अजय यादव ने गुरुवार (11 अक्टूबर) को हरियाणा चुनाव में हार के लिए राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व के बीच कुप्रबंधन और खराब समन्वय को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल पर चुनाव के दौरान संपर्क में नहीं आने का भी आरोप लगाया।

यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कॉन्ग्रेस हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहरा रही है। हालाँकि, समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक साक्षात्कार में अजय यादव ने कुछ हद तक इस भावना को दोहराया, लेकिन उन्होंने हार के लिए मुख्य रूप से पार्टी नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया।

अजय यादव ने सुझाव दिया कि कॉन्ग्रेस पार्टी को हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र में मिली करारी हार पर आत्म-चिंतन करना चाहिए। यहाँ की 11 में से 10 सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में गई हैं। यादव ने कहा, “कॉन्ग्रेस कार्यसमिति, पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति, अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस समिति या हरियाणा प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति में अहीरवाल का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।”

OBC कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अजय यादव ने आगे कहा, “पार्टी (कॉन्ग्रेस) ने मुझे ओबीसी विभाग का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसका कोई फायदा नहीं है, क्योंकि यह शक्तिहीन है। हम चुनाव इसलिए हार गए, क्योंकि राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच कोई समन्वय नहीं था।” इसको लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी किया है।

सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में यादव ने लिखा, “पार्टी को दक्षिणी हरियाणा खासकर गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और फरीदाबाद में अपनी विफलता पर आत्मचिंतन करना चाहिए, जहाँ उसे सिर्फ एक सीट मिली। अहीरवाल का सीडब्ल्यूसी, सीईसी, एआईसीसी महासचिवों या यहाँ तक ​​कि एचपीसीसी में भी कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। एआईसीसी ओबीसी अध्यक्ष पद एक दिखावा और बेकार है।”

एक्स पर एक अन्य पोस्ट में अजय यादव ने कॉन्ग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि वह नैरेटिव को नियंत्रित करने में असमर्थ है, क्योंकि लोगों से जनादेश प्राप्त करने से पहले ही मुख्यमंत्री पद के लिए हरियाणा कॉन्ग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह की खबरें आ रही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा भी कई मुद्दे हैं।

अपने पोस्ट के बारे में ANI को बताते हुए उन्होंने कहा, “जब चुनाव होते हैं तो जीतना प्राथमिक लक्ष्य होता है। उस समय अगर मीडिया में सीएम पद के लिए खींचतान सामने आती है तो यह पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं है। पहले जनादेश हासिल करें और उसके बाद तय करें कि सीएम कौन बनेगा। यह निर्णय कोई एक व्यक्ति नहीं ले सकता। यह विधायकों द्वारा लिया जाता है।”

उन्होंने पार्टी पर यह भी आरोप लगाया कि जब दीपक बाबरिया अस्पताल में भर्ती थे, तब पार्टी ने नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त नहीं किया। यादव ने कहा, “जब पार्टी के प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया अस्पताल में भर्ती थे तो उनकी ड्यूटी किसी दूसरे नेता को क्यों नहीं दी गई? पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उदयभान खुद चुनाव लड़ रहे थे, इसलिए वे उचित फीडबैक लेने और रणनीति को अंतिम रूप देने में उम्मीदवारों की मदद करने में विफल रहे।”

दिलचस्प बात यह है कि अजय यादव ने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने उनसे अपने क्षेत्र में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के रोड शो की व्यवस्था करने के लिए कहा था। हालाँकि, राहुल गाँधी कभी नहीं आए। यादव ने यह भी बताया कि रेवाड़ी में कुमारी शैलजा का कार्यक्रम तय था, लेकिन हेलीकॉप्टर उपलब्ध हीं होने के कारण वह रेवाड़ी नहीं गईं।

यादव ने यह भी कहा कि फिरोजपुर झिरका के मौजूदा पार्टी विधायक मम्मन खान का बयान भी पार्टी के खिलाफ गया। उन्होंने कहा, “फिरोजपुर झिरका के हमारे मौजूदा विधायक मम्मन खान भारी अंतर से जीते, क्योंकि वहाँ अधिकांश मतदाता मुस्लिम थे, लेकिन उनके विवादास्पद बयानों ने हमारी हार में योगदान दिया। हम ध्रुवीकरण और खराब चुनाव प्रबंधन के कारण हारे।”

अजय यादव कॉन्ग्रेस के अकेले ऐसे नेता नहीं, हैं जो हरियाणा चुनाव में हार के लिए पार्टी नेतृत्व को दोषी ठहरा रहे हैं। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और रोहतक से विधायक भारत भूषण बत्रा ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा, “प्रचार के आखिरी हफ़्ते में एससी और ओबीसी का भारी ध्रुवीकरण देखा गया और इसका फ़ायदा बीजेपी को मिला। हमें इस बात पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत है कि हम कहाँ गलत हुए।”

हालाँकि, उन्होंने असांध के पूर्व विधायक शमशेर सिंह गोगी के इस आरोप को खारिज कर दिया कि कॉन्ग्रेस की अंदरूनी कलह और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पार्टी की हार हुई। उन्होंने कहा कि शमशेर सिंह गोगी अक्सर मौका मिलते ही हुड्डा के खिलाफ पक्षपातपूर्ण टिप्पणी करते हैं।

HT ने एक अनाम वरिष्ठ नेता के हवाले से कहा कि चुनाव में पार्टी नेता निष्क्रिय रहे, जिसके कारण हार हुई। उन्होंने कहा, “हमारे शीर्ष नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा, अजय यादव और रणदीप सुरजेवाला ने एक बार भी मंच साझा नहीं किया। दो रैलियों में हुड्डा और शैलजा मौजूद थे, लेकिन अन्य नेता गायब थे। भाजपा लोगों को समझाने में सफल रही कि हरियाणा कॉन्ग्रेस में सब ठीक नहीं है।”

हरियाणा में हार के लिए कॉन्ग्रेस ने EVM को जिम्मेदार ठहराया

हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने फिर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। हालाँकि, इस बार उन्होंने अपने आरोपों में कुछ बदलाव किए हैं। एक अजीबोगरीब आरोप में पार्टी ने दावा किया कि अलग-अलग बैटरी चार्ज वाले ईवीएम अलग-अलग नतीजे देते हैं।

कॉन्ग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान से पहले ईवीएम में पूरी तरह चार्ज की गई बैटरी डाली जाती है, लेकिन मॉक पोल, वास्तविक मतदान और मतगणना में मशीनों के इस्तेमाल से चार्ज का स्तर कम होता जाता है।

‘हम च$% हैं और वो मुस्लिम, बिटिया को घर से उठा कर मार डाला’: दलित लड़की की नवाब अली के घर से मिली लाश, माँ बोली- मुआवजा नहीं, सिर्फ न्याय चाहिए

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में नवाब अली के घर से दलित समुदाय की एक लड़की की लाश मिली है। 21 वर्षीया मृतका की माँ का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या करके लाश को टांग दिया गया। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि स्थानीय प्रशासन आरोपित और मृतका में पुरानी जान-पहचान बताते हुए प्रथम दृष्टया इस घटना को आत्महत्या बता रहा है। घटना शुक्रवार (11 अक्टूबर 2024) की है।

यह घटना सिद्धार्थनगर जिले के थानाक्षेत्र चिल्हिया की है। यहाँ के गाँव बुकनिहा में 21 वर्षीया दलित लड़की अपने परिवार के साथ रहती थी। लड़की के परिजन मेहनत-मजदूरी कर के परिवार चलाते हैं। लड़की के पड़ोस में ही नवाब अली का मकान है। वह मुंबई में रहकर कमाता है। नवाब के घर में कैसर, वाज़िद और रोशन अली आदि सदस्य रहते हैं। हाल ही में नवाब अली मुंबई से कमा कर घर लौटा था। तब से वह पीड़िता पर नजर रखे हुए था।

इस बीच शुक्रवार को पीड़िता अचानक ही अपने घर से गायब हो गई। लड़की के घर वालों के मुताबिक नवाब अली व उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने मिलकर छत पर सो रही पीड़िता का सीढ़ी लगा कर अपहरण किया। अपहरण के बाद पीड़िता को एक कमरे में बंद कर दिया गया। आरोप है कि यहाँ पीड़िता के साथ पहले मारपीट की गई जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद लड़की की लाश को फाँसी के फंदे पर लटका दिया गया।

पीड़िता के परिजनों ने रोते हुए मीडिया को बताया कि उनकी इज्जत से लेकर बेटी तक की जान को नवाब अली के घर वालों ने ले लिया। एक अन्य महिला ने कहा, “हम च$% हैं और वो मुस्लिम, इसीलिए उन्होंने हमारी बच्ची को मार डाला।” मृतका की माँ ने कहा कि उनको सरकार से अपनी बेटी के लिए न्याय के अलावा और कुछ भी नहीं चाहिए। दावा यह भी है कि लड़की की लाश बरामद होने के बाद नवाब के घर से सभी पुरुष फरार हो गए हैं।

इस मामले में सिद्धार्थनगर पुलिस का भी बयान सामने आया है। पुलिस ने इस घटना को प्रथम दृष्टया में मृतका द्वारा आत्महत्या किया जाना बताया है। हालाँकि पुलिस ने मृतका का शव नवाब अली के घर से बरामद होने की बात स्वीकारी है। मामले में FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी गई है। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है।

US में घुस जो करते हैं रेप-मर्डर, उन अप्रवासियों को दूँगा सजा-ए-मौत: राष्ट्रपति चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप का वादा, कहा- 5 नवंबर को होगा अमेरिका आजाद

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड जॉन ट्रंप ने शुक्रवार (11 अक्तटूबर 2024) को एक चुनावी रैली में अमेरिका में आने वाले प्रवासियों को खतरनाक अपराधी बताया। कोलोराडो के ऑरोरा में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों की हत्या करने वाले आप्रवासियों के लिए मृत्युदंड की माँग की।

वेनेजुएला के गिरोह ‘ट्रेन डी अरागुआ’ के कथित सदस्यों के पोस्टरों से घिरे ट्रम्प ने यह भी कहा कि अगर वे राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो इस गिरोह को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘ऑपरेशन ऑरोरा’ शुरू करेंगे। ट्रंप ने उत्साहित समर्थकों की बड़ी भीड़ में बीच कहा, “मैं किसी भी ऐसे प्रवासी के लिए मृत्युदंड की माँग करता हूँ, जो किसी अमेरिकी नागरिक या कानून प्रवर्तन अधिकारी की हत्या करता है।”

इससे पहले भी डोनाल्ड ट्रंप ने अरागुआ गिरोह को लेकर बयान दिया था। ट्रंप ने 10 सितंबर को कमला हैरिस के साथ बहस के दौरान दावा किया था कि ट्रेन डी अरागुआ के सदस्यों ने ऑरोरा के कई अपार्टमेंट पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा था, “मैं ऑरोरा और हर उस शहर को बचाऊँगा जिस पर हमला किया गया है। हम इन क्रूर और खूनी अपराधियों को जेल में डालेंगे या देश से बाहर निकालेंगे।”

अब ट्रंप ने आव्रजन को लेकर एक बार फिर मुद्दा उठाया है। इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकियों का भारी समर्थन मिलता दिख रहा है। आव्रजन और आप्रवासियों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप काफी कठोर रवैया अपनाए रखते हैं। इस बार के चुनाव में जीत के लिए उन्होंने फिर से इस मुद्दे के साथ अपराधियों को मृत्युदंड का मुद्दा उठाया है और इसको लेकर उन्हें बढ़त हासिल होती दिख रही है।

ट्रम्प ने पहले ही अन्य अपराधियों के लिए मृत्युदंड के लिए प्रस्ताव रखा है, जिसमें महिलाओं और बच्चों की यौन तस्करी के दोषी भी शामिल हैं। हालाँकि, अमेरिका के लगभग आधे राज्यों में मृत्युदंड पर प्रतिबंध है। संघीय मृत्युदंड का प्रावधान है, लेकिन इसका इस्तेमाल शायद ही कभी किया जाता है। इस दंड के अपराधों में विस्तार के लिए अमेरिकी कॉन्ग्रेस के अधिनियम जरूरी होगी।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार है। इस पद पर 5 नवंबर को चुनाव होना है। डोनाल्ड ट्रंप का मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस से है। सर्वे से पता चलता है कि अमेरिका में अवैध आव्रजन एक प्रमुख चिंता है और अधिकांश अमेरिकी ट्रम्प को इस समस्या से निपटने में सबसे बेहतर व्यक्ति मानते हैं।

बांग्लादेश की राजधानी में दुर्गा पूजा के पंडाल पर बमबारी, पेट्रोल बम फेंककर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने फैलाई दहशत: नवरात्रि में हिंदुओं पर हमलों के 35 मामले, 17 गिरफ्तार

बांग्लादेश में इस बार दुर्गा पूजा के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमलों ने हिंदू समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। राजधानी ढाका के टाटी बाजार इलाके में शुक्रवार (11 अक्टूबर 2024) को दुर्गा पूजा पंडाल पर पेट्रोल बम फेंका गया। इस घटना से इलाके में दहशत फैल गई, और पूजा में शामिल भक्तों को जान बचाने के लिए भागना पड़ा। वीडियो में एक घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाते हुए दिखाया गया है, जिससे यह साफ है कि हमले ने गंभीर रूप से घायल किए हैं।

सोशल मीडिया पर ‘वॉयस ऑफ बांग्लादेश हिंदू’ नाम के अकाउंट से यह वीडियो शेयर किया गया। यह हमला अचानक हुआ और हमलावर, जो इस्लामी कट्टरपंथी बताए जा रहे हैं, मौके से फरार हो गए। बांग्लादेश पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

दुर्गापूजा के मंच से इस्लामिक क्रांति का गाना

इसके पहले, 9 अक्टूबर 2024 को चटगांव में दुर्गा पूजा के दौरान भी सांप्रदायिक तनाव पैदा करने का प्रयास किया गया था। कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने खुद को स्थानीय सांस्कृतिक संगठन ‘चटग्राम सांस्कृतिक अकादमी’ का सदस्य बताकर दुर्गा पूजा मंच पर प्रवेश किया और आयोजकों को धोखे में रखते हुए इस्लामी क्रांति का प्रचार करने वाले गाने गाए। पूजा मंडप में मौजूद भक्त इस घटना से हैरान रह गए और इसे सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश के रूप में देखा जा रहा है।

इस घटना को हमेशा की तरह छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन मामले के सोशल मीडिया पर फैलने और स्थानीय लोगों द्वारा इसकी पुष्टि करने के बाद प्रशासन को कदम उठाना पड़ा। हालाँकि प्रशासन ने आयोजक को भी गिरफ्तार कर लिया।

दुर्गा पूजा पर 35 हमले, 17 गिरफ्तारियाँ

बांग्लादेश के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने पुष्टि की है कि इस साल दुर्गा पूजा के दौरान कुल 35 हमलों की घटनाएँ हुई हैं, जिनमें पूजा पंडालों पर हमले और सांप्रदायिक हिंसा शामिल है। अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हैरानी की बात ये है कि बांग्लादेश के आईजीपी मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं को कमतर बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ मुस्लिमों के त्योहार के समय भी होती है।

मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने कहा, “पूरे बांग्लादेश में 32000 मंडप लगे हैं। ऐसी घटनाएँ हिंदुओं ही नहीं, मुस्लिमों के त्योहार के समय भी होती हैं।” रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में ज्यादातर हमलावर इस्लामिक कट्टरपंथी थे, जो हिंदू धार्मिक स्थलों और त्योहारों को निशाना बना रहे थे। इन घटनाओं से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जो अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत लगातार दयनीय

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। विशेष रूप से दुर्गा पूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के दौरान हुए हमलों ने साफ कर दिया है कि इस्लामी कट्टरपंथी खुलेआम सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में दुर्गा पूजा से संबंधित 35 से अधिक घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जिसमें मूर्तियों को तोड़ना, पूजा स्थलों पर हमला और भक्तों को डराने-धमकाने जैसी घटनाएँ शामिल हैं।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमलों ने पूरे हिंदू समुदाय को भयभीत कर दिया है। बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और हमलों की संख्या में इजाफा यह दिखाता है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। इस स्थिति को देखते हुए बांग्लादेश सरकार से यह उम्मीद की जा रही है कि वह हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगी और धार्मिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करेगी। ये अलग बात है कि बांग्लादेश की कट्टरपंथियों की अंतरिम सरकार इन मामलों को ही छिपाने में लगी हुई है।

75 किमी की रफ्तार से आ रही बागमती एक्सप्रेस ने मालगाड़ी में मारी टक्कर: तमिलनाडु में रेल हादसा, 12 डिब्बे पटरी से उतरे, 19 घायल

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में रेल हादसा हुआ है। वहाँ मैसूर से दरभंगा जाने वाली बागमती सुपरफास्ट एक्स्प्रेस (12578) मालगाड़ी ट्रेन से टकरा गई। हादसे में 12 डिब्बे रेल पटरी से उतर गए और अभी तक 19 लोगों के घायल होने की खबर सामने आ रही है। घटना शुक्रवार (11 अक्टूबर 2023) शाम को कावराईपेट्टई रेलवे स्टेशन के पास हुई।

बताया जा रहा है कि जिस समय बागमती एक्स्प्रेस मालगाड़ी से टकराई उस समय वह रेलवे स्टेश पर खड़ी थी, लेकिन ट्रेनों की टक्कर होते ही उनमें आग लग गई। इसके बाद घटना की सूचना रेलवे अधिकारियों को दी गई जिन्होंने मौके पर पहुँच स्थिति को संभाला और घायलों को बचाने का काम किया।

रेलवे अधिकारियों के हवाले से दी जा रही खबर के अनुसार, तमिलनाडु में शुक्रवार को 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही एक्सप्रेस ट्रेन मुख्य लाइन जाने की बजाय लूपलाइन में घुस गई थी और वहाँ वह मालगाड़ी से टकरा गई। दुर्घटना में एक कोच में आग लग गई जबकि 19 लोगों के घायल होने की खबर है।

रेलवे अधिकारी ने यह भी बताया कि उन्हें अभी तक किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली है। राहत दल और मेडिकल टीम दोनों ही दुर्घटनास्थल पर मौजूद हैं। जीएम सदन रेलवे और डीआरएम सदन चेन्नई डिवीजन दुर्घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं। बाकी यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए चेन्नई स्टेशन से रेलवे द्वारा आवश्यक व्यवस्था की जा रही है।