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लखनऊ के नीलमाथा मंदिर की दुर्गा प्रतिमा को मशीन से काट किया खंडित, बवाल के बाद पुलिस तैनात: मांस फेंकने पर इससे पहले अलीमा हुई थी अरेस्ट महिला

लखनऊ के नीलमथा में मंदिर में स्थापित माँ दुर्गा की प्रतिमा को उपद्रवियों ने खंडित कर दिया है। माता के चार हाथों को मशीन से काट दिया गया था। इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुँच गए। हालात को देखते हुए प्रशासन ने वहाँ भारी पुलिस बल तैनात किया है। पुलिस ने लोगों के गुस्सा को देखते हुए अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच कर रही है।

कैंट थाना क्षेत्र के नीलमथा में मरी माता मंदिर में माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। गुरुवार (10 अक्टूबर 2024) की सुबह मंदिर के पुजारी जब पूजा करने पहुँचे तो उन्होंने देखा प्रतिमा की हाथ कटी हुई है। उपद्रवियों ने ग्लेडर मशीन से प्रतिमा का हाथ काट दिया है। इसके बाद पुजारी ने घटना की जानकारी स्थानीय लोगों को दी। सूचना मिलते ही वहाँ भीड़ जमा हो गई और लोग आक्रोशित हो गए।

गुस्साए लोगों को शांत कराते हुए पुलिस ने आरोपितों को चार दिनों में पकड़ने का आश्वासन दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लखनऊ में विपक्षी और विधर्मी माहौल खराब करने का काम कर रहे हैं। लगातार दूसरे दिन हिंदुओं की भावनाएँ आहत की गई हैं। बाजारखाला में मंदिर के बाहर विधर्मी महिला द्वारा मांस के टुकड़े फेंकती है। फिर मंदिर में प्रतिमा के हाथ काट दिए जाते हैं।

बता दें कि बुधवार (9 अक्टूबर 2024) को शहर के बाजार खाला थाना क्षेत्र स्थित एक मंदिर के बाहर मांस के टुकड़े पड़े मिले थे। इसकी जानकारी मिलते ही लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया था। पुलिस की जाँच में सामने आया कि मांस का टुकड़ा कोई कुत्ता लेकर आया था। इस मामले में अलीमा नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया गया था।

जाँच में सामने आया कि इलाके में रहने वाली अलीमा नाम की महिला मीट की दुकान से मांस लाकर कुत्तों को डालती थी। नवरात्रि के दौरान भी उसने ऐसा करना जारी रखा। आखिरकार पुलिस ने महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया।

नीलमथा मंदिर की घटना को लेकर थाना कैंट प्रभारी गुरप्रीत कौर ने बताया कि इलाके में माहौल बिगड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया है। हालात सामान्य हैं। कौर ने कहा कि अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जाँच की जा रही है। आरोपितों को जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

एडीसीपी पूर्वी पंकज सिंह ने बताया कि अराजक तत्वों ने माता की प्रतिमा को खंडित कर दिया था। मंदिर में विधि-विधान से दूसरी प्रतिमा लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस जाँच कर रही है। आरोपितों की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। आरोपितों को बहुत जल्द पकड़ लिया जाएगा।

गोंडा में भी बवाल

लखनऊ के अलवा गोंडा में भी माहौल खराब करने की कोशिश की गई है। गोंडा के छपिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मसकनवा बाजार में देर रात कुछ अराजक तत्वों ने दुर्गा पूजा पंडाल पर जमकर ईंट-पत्थर बरसाए। आतिशबाजी से नाराज होकर के उपद्रवियों ने पथराव किया। इससे वहाँ के हालात तनावपूर्ण हो गए।

इस घटना की जानकारी मिलते ही गोंडा के डीएम और एसपी मौके पर पहुँचे। उन्होंने किसी तरह लोगों को समझा-बुझा कर उन्हें शांत किया। इस मामले में छपिया थाने की पुलिस ने एक दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसके साथ ही पूरे मामले की जाँच शुरू की है।

कुशीनगर में भी बवाल

कुशीनगर में सोमवार (7 अक्टूबर) को दुर्गा प्रतिमा स्थापना की शोभायात्रा निकाली गई थी। शोभायात्रा में माता रानी के भजन बजाने पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विवाद शुरू कर दिया। कुछ देर में बड़ी संख्या में शामिल लोगों ने शोभायात्रा पर पथराव कर दिया। दूसरी तरफ से भी जवाब दिया जाने लगा।

हिंदू पक्ष के लोगों ने आरोप लगाया था कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने माता रानी की प्रतिमा में बने शेर को क्षतिग्रस्त कर दिया। पडरौना कोतवाली क्षेत्र में हुई इस घटना के बारे में जब सूचना मिली तो एएसपी सीओ समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचे थे और हालात को काबू में किया। घटना के बाद कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था.

हैदराबाद में दुर्गा माता की मूर्ति तोड़ी, आरोपित को पकड़ पुलिस ने कहा- ये प्रसाद खाने आया था: लापरवाही के आरोप में आयोजकों पर किया केस दर्ज

हैदराबाद के नामपल्ली एग्ज़ीबिशन ग्राउंड में दुर्गा माता की मूर्ति के साथ की गई तोड़फोड़ ने स्थानीय लोगों और भक्तों में नाराज़गी पैदा कर दी है। यह घटना गुरुवार (10 अक्टूबर 2024) को घटी, जब देवी शरण नवरात्रि उत्सव के दौरान स्थापित दुर्गा माता की मूर्ति को अज्ञात व्यक्तियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। इस पंडाल का आयोजन एग्ज़ीबिशन सोसाइटी द्वारा हर साल किया जाता है और यह शहर के सबसे प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नामपल्ली एग्जीबिशन ग्राउंड में हुई उस घटना के तुरंत बाद बेगम बाज़ार पुलिस स्टेशन से पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने मौके पर पहुँचकर जाँच शुरू की। एसीपी चंद्रशेखर ने पुष्टि की कि इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और जाँच जारी है। पुलिस की उपस्थिति तब तक बनाए रखी गई जब तक कि उसी रात दांडिया कार्यक्रम सफलतापूर्वक समाप्त नहीं हो गया। इस घटना से स्थानीय निवासियों और भक्तों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इस मामले में देर रात हैदराबाद पुलिस का बयान आया है। हैदराबाद सेंट्रल ज़ोन के डीसीपी अक्षेश यादव ने कहा, “सुबह करीब 6:00 बजे हमें फोन आया कि प्रदर्शनी मैदान में रखी गई दुर्गा माता की मूर्ति का दाहिना हाथ क्षतिग्रस्त हो गया है और मूर्ति के चरणों में रखा प्रसाद और अन्य सामान बिखरा हुआ है। टीम तुरंत सुबह मौके पर पहुँची और सबूतों की तलाश की, हमने सीसीटीवी फुटेज चेक की और करीब 8:15 बजे हमने एक आरोपित को पकड़ा। आरोपित का नाम कृष्णैया गौड़ है… वह एक आवारा है… वह सुबह भूख लगने के कारण इस पंडाल में आया था और भोजन की तलाश करते समय उसने प्रसादम को हिला दिया और उसमें मूर्ति क्षतिग्रस्त हो गई। यह घटना आयोजकों की ओर से लापरवाही के कारण हुई… हमने आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है…”

इससे पहले, इस मामले में पुलिस इंस्पेक्टर विजय ने कहा था, “कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने नामपल्ली एग्ज़ीबिशन ग्राउंड में दुर्गा पूजा पंडाल के अंदर हंडी (दानपात्र) को हटा दिया, जिससे देवी दुर्गा की मूर्ति का हाथ टूट गया। आयोजकों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और जाँच जारी है।” पुलिस का कहना है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि दो साल पहले भी इस तरह की घटना हैदराबाद में सामने आई थी, जब दो महिलाओं ने हथौड़ों का इस्तेमाल कर माँ दुर्गा की प्रतिमा को खंडित कर दिया था। बाद में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने महिलाओं को मंदबुद्धि का बताते हुए घटना पर पर्दा डालने का प्रयास किया था। हालाँकि बाद में उन पर कानूनी कार्रवाई की गई थी। ताजी घटना ऐसे समय पर हुई है जब शहर में नवरात्रि का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है, और इस प्रकार की तोड़फोड़ ने धार्मिक भावना को चोट पहुँचाई है।

10 सूत्रीय कार्यक्रम पर ASEAN के साथ काम करेगा भारत, लाओस में बोले पीएम मोदी- 21वीं सदी एशिया की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्तमान में दक्षिण एशियाई देश लाओस के दौरे पर हैं। लाओस में वर्तमान में ASEAN शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इस्मने भारत का प्रतिनिधित्व करने गए हैं। उन्होंने ASEAN देशों के साथ भारत का सहयोग बढ़ाने के लिए स्थापित किए गए ASEAN-INDIA शिखर सम्मेलन की भी अध्यक्षता की है।

पीएम मोदी लाओस में वैश्विक नेताओं से भी मिल रहे हैं। यहाँ उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमन्त्री, फिलिपीन्स के राष्ट्रपति, अमेरिकी विदेश मंत्री समेत जापान के नए प्रधानमंत्री से भी मिले हैं। उन्होंने ASEAN के साथ ही कई द्विपक्षीय बैठकें भी की हैं। भारत के लिहाज से पीएम मोदी की यात्रा का मुख्य बिंदु ASEAN-INDIA शिखर सम्मेलन रहा है।

ASEAN-INDIA शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी के साथ सभी ASEAN देशों के प्रमुख शामिल हुए। इस दौरान पीएम मोदी ने भारत की एक्ट ईस्ट नीति के 10 वर्ष पूरे होने पर ख़ुशी जताई। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई देश भारत के पड़ोसी और ग्लोबल साउथ मुहिम में महत्वपूर्ण सहयोगी हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी एशियाई देशों की सदी है। उन्होंने कहा कि विश्व भर में अलग-अलग जगह संघर्ष हो रहे हैं ऐसे में ASEAN और भारत का सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने एक्ट ईस्ट नीति के 10 साल पूरे होने पर 10 सूत्रीय कार्यक्रम का ऐलान किया है।

ASEAN को लेकर भारत का 10 सूत्रीय कार्यक्रम

1. वर्ष 2025 को ASEAN-INDIA पर्यटन वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इसके लिए भारत $5 मिलियन सहयोग राशि में देगा।

2. युवा शिखर सम्मेलन, स्टार्ट-अप महोत्सव, हैकाथॉन, संगीत समारोह, ASEAN-INDIA थिंक टैंक नेटवर्क और दिल्ली डायलाग समेत अन्य कई एक्टिविटी से एक्ट ईस्ट नीति का एक दशक पूरा होने का जश्न मनाया जाएगा।

3. ASEAN-INDIA विज्ञान और तकनीक विकास फंड के तहत भारत और ASEAN देशों की महिला वैज्ञानिकों का सम्मेलन आयोजित करना।

4. नालंदा विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति की संख्या को दोगुना किया जाएगा और भारत के कृषि विश्वविद्यालयों में ASEAN देशों के छात्रों के लिए नई छात्रवृत्ति बनाई जाएगी।

5. 2025 तक ASEAN-INDIA के बीच सामानों के व्यापार समझौते की समीक्षा की जाएगी।

6. आपदा बचाव की क्षमता पर काम किया जाएगा। इसके लिए भी भारत 50 लाख डॉलर की राशि की सहायता देगा।

7. ASEAN-INDIA के स्वास्थ्य मंत्रियों के सहयोग का मंच तैयार करना

8. डिजिटल और साइबर सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में ASEAN-INDIA साइबर नीति वार्ता का तंत्र तैयार करना

9. ग्रीन हाइड्रोजन पर काम

10. ASEAN नेताओं को ‘माँ के लिए एक पेड़ लगाओ’ अभियान में शामिल होने के लिए आमंत्रित करना

क्या है ASEAN

ASEAN 10 दक्षिण एशियाई देशों का एक क्षेत्रीय समूह है। यह दस देश ब्रूनेई, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलिपीन्स, सिंगापुर , थाईलैंड और विएतनाम हैं। इसकी स्थापना 1967 में पाँच देशों ने की थी। संगठन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इन देशों में लगभग दुनिया की 10% आबादी (70 करोड़) निवास करती है।

ASEAN देश आर्थिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं। इन देशों की कुल अर्थव्यवस्था लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर है। जो संयुक्त रूप से विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था के बराबर होती है। इन देशों ने आपस में व्यापार सम्बन्धित कई समझौते भी किए हैं। इन देशों के बीच व्यापार पर कस्टम ड्यूटी भी काफी कम है।

इसके अलावा स्थानीय मुद्दों को सुलझाने के लिए भी यह मंच काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ है। ASEAN देशों में शामिल सिंगापुर, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसी तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाएँ हैं, जिसके कारण यह और भी ताकतवर हो जाता है।

भारत के लिए ASEAN क्यों जरूरी

ASEAN भारत के लिए वर्तमान वैश्विक हालात में काफी जरूरी है। इसके कई देशों की भारत से जमीन या समुद्री सीमा जुड़ी हुई है। भारतीय प्रायद्वीप में स्थित देशों के बाद यही देश भारत के सबसे करीबी हैं। यह देश भी भारत की तरह तेजी से विकासशील से विकसित अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए यह बड़ा बाजार हैं।

इसके अलावा भारत के लिए यह देश सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। इनमें से कई देशों के चीन के साथ सीमाई विवाद हैं। चीन इनकी संप्रभुता में दखल देता रहता है। ऐसे में इस इलाके में भारत ही इनका बड़ा सहयोगी है। फिलिपीन्स जैसे देश भारत से रक्षा सामान भी खरीदते हैं। चीन के खतरे को रोकने के लिए भारत के यह सहयोगी हैं।

ASEAN देशों के लिए भी भारत काफी महत्वपूर्ण है। भारत इन देशों के लोगों की मेडिकल और शिक्षा सम्बन्धी जरूरतों को पूरा करता है। इसके अलावा भारत तकनीक में भी इन देशों को सहायता करता है। भारतीय कम्पनियाँ इन देशों में बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं।

भारत और ASEAN के बीच मुक्त व्यापार समझौता भी है। भारत ASEAN+ का सदस्य भी है। इसमें ASEAN के बाहर के केवल 6 देश शामिल हैं। ASEAN पर भारत चीन का प्रभाव भी कम करना चाहता है। ASEAN को भारत अपनी एक्ट ईस्ट नीति का मुख्य स्तम्भ मानता है।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के मंच पर चढ़ जबरदस्ती गाया इस्लामी गाना: फेक वीडियो बता मामले को दबाने की कोशिश, फैक्ट चेक के बाद 6 गिरफ्तार

बांग्लादेश के चटगाँव में दुर्गा पूजा के दौरान हिंदुओं से घृणा का एक और मामला सामने आया है। यहाँ देश भक्ति का गाना गाने के नाम पर मंच पर चढ़े इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ‘इस्लामी क्रांति’ का आह्वान करने वाला गाना गा दिया, जिसके बाद माहौल खराब हो गया। इस गाने में कथित तौर पर बांग्लादेश में इस्लामिक क्रांति लाने और गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाने की बात कही गई थी।

ये मामला सामने आने के बाद बांग्लादेश के प्रशासन ने हमेशा की तरह मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन जब इसका वीडियो वायरल हुआ और फैक्ट चेक में सामने आया कि ऐसी हरकत वाकई में हुई थी, तब जाकर स्थानीय प्रशासन ने कार्रवाई की बात कही और 6 युवकों को गिरफ्तार करने की बात कही।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना चटगाँव शहर के दुर्गा पूजा मंडप में बुधवार (9 अक्टूबर 2024) को हुई। शाम के करीब 7 बजे कुछ युवाओं ने खुद को एक स्थानीय सांस्कृतिक संगठन ‘चटग्राम सांस्कृतिक अकादमी’ के सदस्य बताकर मंडप के आयोजकों से देशभक्ति के गाने गाने की अनुमति माँगी। आयोजकों को उन पर कोई शक नहीं हुआ और उन्होंने अनुमति दे दी। लेकिन इसके बाद इन इस्लामी कट्टरपंथी युवकों ने मंच पर इस्लामी क्रांति का प्रचार करते हुए एक गाना गाना शुरू कर दिया, जिसने माहौल को बिगाड़ दिया।

पूजा स्थल पर मौजूद लोग इस हरकत से हैरान रह गए। यह घटना स्थानीय हिंदू समुदाय के लिए एक बड़ा झटका थी, क्योंकि दुर्गा पूजा बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस गाने से सांप्रदायिक तनाव फैलने की आशंका बढ़ गई।

घटना के तुरंत बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ दिख रहा था कि किस तरह युवाओं ने पूजा स्थल पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई। लेकिन, हमेशा की तरह, कुछ लोगों ने इसे ‘फेक’ या ‘एडिटेड’ वीडियो बताकर घटना को दबाने का प्रयास किया। हालाँकि, स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने साफ किया कि वीडियो में दिख रही घटना असली है और इसे झूठा बताने की कोशिश गलत है।

‘एएफपी’ के फैक्ट चेक एडिटर कादरुद्दीन शिशिर ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह वीडियो फेक नहीं है, और यह घटना सच में हुई थी। उन्होंने बताया कि जिस सांस्कृतिक संगठन को आमंत्रित किया गया था, उसका संबंध जमात-ए-इस्लामी से जुड़ी सांस्कृतिक गतिविधियों से हो सकता है।

घटना के तुरंत बाद, स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। चटगांव की डिप्टी कमिश्नर फरिदा खानम ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया और घोषणा की कि मामले की जाँच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक-दो दिनों में दोषियों को पकड़ लिया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

फरिदा खानम ने कहा कि इस तरह की घटनाएँ बांग्लादेश की सांप्रदायिक एकता के लिए हानिकारक हैं और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि दुर्गा पूजा जैसी धार्मिक गतिविधियों के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान न पहुँचे।

घटना के बाद, पूजा आयोजकों पर भी सवाल उठने लगे। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पूजा मंडप के सहायक महासचिव साजल दत्ता ने इस्लामी गानों वाले इस समूह को मंच पर गाने की अनुमति दी थी। जैसे ही यह बात फैली, आयोजकों ने मंच पर घोषणा कर दी कि साजल दत्ता को पूजा उत्सव समिति से निकाल दिया गया है। इस घटना से न केवल हिंदू समुदाय में बल्कि पूरे चटगांव में आक्रोश फैल गया। स्थानीय लोग पूजा आयोजकों पर सवाल उठाने लगे और पुलिस की मौजूदगी के बीच नारेबाजी भी की। हालांकि, आयोजकों ने दावा किया कि वे इस घटना से अनजान थे और उन्हें गुमराह किया गया था।

यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में हिंदू त्योहारों के दौरान इस तरह की घटनाएँ हुई हैं। हर बार ऐसे मामलों को या तो नजरअंदाज करने की कोशिश की जाती है या फिर फेक वीडियो का बहाना बनाकर दबाने की। इस बार भी कुछ लोगों ने इस घटना को ‘फेक वीडियो’ बताकर इसे झूठा साबित करने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय मीडिया और प्रशासन की तेजी से इस बार इसे छिपाना मुश्किल हो गया।

चटगांव में हुई इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में हिंदू घृणा के बढ़ते स्तर को उजागर किया है। पिछले कुछ सालों में दुर्गा पूजा के दौरान सांप्रदायिक तनाव के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया अक्सर धीमी और सतही रही है। हर बार की तरह, इस घटना को भी फेक वीडियो बताकर छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन सोशल मीडिया पर मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन को मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ी।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बंदूकधारियों ने 20 को मौत के घाट उतारा: कोयला खदान में करते थे काम, हमले में रॉकेट और ग्रेनेड भी

पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में बंदूकधारियों ने गुरुवार (11 अक्टूबर 2024) की देर रात को 20 खनन श्रमिकों की हत्या कर दी। इस हमले में लगभग 7 श्रमिक घायल भी बताए जा रहे हैं। मृतकों में अधिकांश श्रमिक ब्लूचिस्तान के पश्तून भाषी क्षेत्रों से हैं। वहीं, मृतकों में से तीन और घायलों में से चार अफगान नागरिक हैं।

यह घटना दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान के बलूचिस्तान के डूकी जिले की है। पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत बेहद अशांत है और यह घटना हाल का सबसे भीषण हमला है। डुकी के SHO हुमायूँ खान ने बताया, “हथियारबंद लोगों के एक समूह ने भारी हथियारों का इस्तेमाल करते हुए डुकी इलाके में जुनैद कोल कंपनी की खदानों पर तड़के हमला किया।”

दरअसल, बंदूकधारियों ने कोयला खदान के पास रहने वाले लोगों के आवासों को घेर लिया और फिर उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। ये सभी कोयला खदान में काम करने वाले श्रमिक थे, जो खदान के पास ही रहते थे। हूमायूँ खान ने बताया कि हथियारबंद लोगों के समूह ने निजी कंपनी के इन खदानों पर रॉकेट और ग्रेनेड भी दागे।

डुकी के एक डॉक्टर जौहर खान शादिजई ने बताया, “हमें जिला अस्पताल में अब तक 20 शव और छह घायल मिले हैं।” इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी समूह ने नहीं ली है। बता दें कि इस इलाके में बड़ी संख्या में अलगाववादी नेता रहते हैं और बलूचिस्तान की आजादी की माँग करते हैं।

इससे पहले 6 अक्टूबर 2024 को पाकिस्तान के कराची में जिन्ना एयरपोर्ट के पास एक बम धमाका हुआ था, जिसमें 2 चीनी नागरिकों के मौत हो गई। वहीं, 1 चीनी नागरिक समेत 17 लोग घायल हो गए थे। मीडिया में आई खबरों के अनुसार, इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की सबसे खतरनाक माजिद ब्रिगेड ने ली थी।

इस साल अगस्त में 26 तारीख को बलूचिस्तान में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक हाइवे पर कई गाड़ियों पर हमला करके 23 लोगों को मार दिया था। हमलावरों ने उन लोगों को मौत के घात उतार दिया जो पंजाब प्रांत से तालुक रखते थे। हमलवारों ने लोगों को मारने के अलावा लगभग एक दर्जन गाड़ियों को आग भी लगा दी और फरार हो गए। थे

वहीं, बलूचिस्तान के विद्रोही संगठनों में से एक बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ ‘ऑपरेशन हेरोफ’ और ‘ऑपरेशन डार्क वाइंडी स्टॉर्म’ चलाया, जिसमें 100 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। उसने पाकिस्तान के आर्मी बेस के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया।

बलूचिस्तान के लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार तेल और खनिज संपदा से समृद्ध बलूचिस्तान का अनुचित तरीके से दोहन कर रही है और इसका लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि पाकिस्तान उन लोगों के साथ भेदभाव करती है। इसलिए ये पाकिस्तान सरकार से सशस्त्र लड़ाई करते हैं।

‘2047 तक भारत के कई टुकड़े’: खालिस्तानी आतंकी पन्नू की नई धमकी, चीन को अरुणाचल पर हमले के लिए उकसाया

खालिस्तानी आतंकी और प्रतिबंधित संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) के मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक बार फिर भारत की अखंडता के खिलाफ़ गंभीर धमकी दी है। अमेरिका में बसे पन्नू ने एक वीडियो जारी कर भारत के कई राज्यों में अलगाववादी ताकतों को खड़ा करने की बात कही है। उसने 2047 तक भारत को कई टुकड़ों में बाँटने का हमेशा की तरह मुंगेरीलाल का सपना फिर से देखा है, जिसमें पन्नू ने दावा किया कि 2047 तक भारत का कोई अस्तित्व नहीं रहेगा और इसका पूरा भूगोल बदल दिया जाएगा।

कनाडा के मंत्री के बयान पर भड़का पन्नू

यह वीडियो कनाडा के उप विदेश मंत्री डेविड मॉरिसन के एक बयान के बाद जारी किया गया। मॉरिसन ने हाल ही में एक सार्वजनिक सुनवाई के दौरान कहा था कि कनाडा की नीति स्पष्ट है – भारत की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक एकीकृत राष्ट्र है और इसकी संप्रभुता को कोई खतरा नहीं होना चाहिए। इस बयान से पन्नू भड़क उठा और भारत के खिलाफ जमकर आग उगला।

पन्नू ने अपने वीडियो में मुंगेरीलाल के सपने की तरह SFJ का मिशन बताया है। पन्नू ने कहा, “SFJ का मिशन 2024 से 2047 तक भारत को खत्म करना है।” उसने यह भी कहा कि पंजाब के अलावा अब जम्मू-कश्मीर, असम, मणिपुर और नागालैंड में भी स्वतंत्रता आंदोलनों को भड़काने की योजना बनाई जा रही है। इन राज्यों में भी आंदोलन शुरू कर ‘भारत संघ को खंडित’ करने की धमकी दी गई है।

चीन को अरुणाचल पर हमले के लिए उकसाया

वीडियो में पन्नू ने केवल भारत के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने की धमकी ही नहीं दी, बल्कि उसने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी समर्थन की अपील की। उसने चीनी सेना से कहा कि अरुणाचल प्रदेश को चीन का क्षेत्र मानते हुए इसे वापस लेने का समय आ गया है। पन्नू ने दावा किया कि चीन को भारत के खिलाफ अपने हितों की रक्षा के लिए कदम उठाना चाहिए।

पन्नू ने यह भी कहा कि वह और उसका संगठन SFJ भारत के खिलाफ अपने खतरनाक एजेंडे को आगे बढ़ाते रहेंगे। वह अमेरिका और कनाडा के कानूनी सुरक्षा और संरक्षण में रहकर भारत को कमजोर करने की योजना बना रहा है। उसने वीडियो में एक पोस्टर के सामने बैठकर कहा, जिस पर लिखा था “2047: नॉन इंडिया”, जिसका मतलब है कि 2047 तक भारत का कोई अस्तित्व नहीं रहेगा।

खालिस्तान के नाम जनमत संग्रह

SFJ लंबे समय से पंजाब को भारत से अलग कर खालिस्तान नाम का एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की माँग कर रहा है। इसके लिए SFJ ने एक अनौपचारिक वैश्विक जनमत संग्रह की पहल भी शुरू की है, जिसमें वह पंजाब को एक अलग देश बनाने के लिए समर्थन माँग रहा है। हालाँकि, इस जनमत संग्रह को पंजाब के अंदर कोई समर्थन नहीं मिला। साफ है कि पंजाब के लोग खालिस्तान के विचार को खारिज कर चुके हैं, लेकिन पन्नू और उसके समर्थक इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उछालने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत-कनाडा के तनाव का फायदा उठाने की कोशिश

भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ समय से रिश्तों में तनाव बना हुआ है, जिसका कारण कनाडा की धरती पर खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का बढ़ना है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के समय-समय पर खालिस्तानियों के प्रति नरम रुख अपनाने से भारत सरकार ने भी नाराज़गी जताई थी। हालाँकि, डेविड मॉरिसन के हालिया बयान से ऐसा लगता है कि कनाडा ने भारत की अखंडता का समर्थन किया है, जिससे खालिस्तान समर्थक गुटों में हलचल मच गई है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू की धमकियों के बावजूद एक बात तो साफ है कि वो लगातार सिर्फ चर्चा में बने रहने के लिए बड़ी-बड़ी बातें करता रहा है। उसकी तरफ से इस तरह की धमकियाँ पहले भी आती रही हैं। हालाँकि दिल्ली में वो पोस्टरबाजी करवाने जैसी हरकतों को अंजाम दे चुका है। बहरहाल, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही पन्नू और उसके संगठन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं, और उसकी धमकियों को गंभीरता से लिया जा रहा है।

बांग्लादेश में जेशोरेश्वरी शक्तिपीठ से माँ काली का मुकुट चोरी, पीएम मोदी ने किया था गिफ्ट: इसी जगह गिरी थी माँ सती की हथेली

बांग्लादेश के सतखीरा जिले के श्यामनगर में स्थित हिन्दू शक्तिपीठ जशोरेश्वरी काली मंदिर में बड़ी चोरी हुई है। इस शक्तिपीठ में स्थापित माँ काली की मूर्ति पर सुशोभित किया गया चाँदी का मुकुट चोरी कर लिया गया। यह मुकुट भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंदिर को भेंट में दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना गुरुवार (10 अक्टूबर, 2024) को हुई। मंदिर के पुजारी दिलीप मुखर्जी ने बताया कि उन्ह्होने दिन की पूजा 2 बजे समाप्त करके मंदिर के पट बंद कर दिए थे। इसके बाद जब मंदिर की साफ़ सफाई करने वाले यहाँ पहुँचे तो उन्हें देवी के सर से मुकुट गायब मिला।

उन्होंने यह सूचना पुलिस को दी। पुलिस अब मामले में CCTV फुटेज की जाँच कर चोर को पकड़ने का प्रयास कर रही है। हालाँकि, अभी तक किसी कि भी पहचान नहीं हो पाई है। मुकुट चोरी की घटना दुर्गा पूजा के बीच हुई है, जिसके कारण स्थानीय हिन्दू समाज में रोष है।

चोरी किया गया मुकुट वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान भेंट के रूप में दिया था। उन्होंने स्वयं ही यह मुकुट माँ काली को पहनाया था। यह मुकुट चाँदी का बना हुआ था और इस पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। यह तब से ही माँ काली को पहनाया जा रहा था।

सतखीरा में स्थित प्रसिद्ध जशोरेश्वरी काली मंदिर 51 शक्तिपीठ में से एक सुगंधा शक्तिपीठ है। बताया जाता है यहाँ देवी सती की हथेलियाँ गिरी थीं। इसके बाद एक ब्राह्मण ने यहाँ मंदिर का निर्माण कराया था। यह मंदिर लगभग 1000-1200 साल पुराना बताया जाता है। इसका जीर्णोद्धार 400 साल पहले फिर करवाया गया था।

2021 में बांग्लादेश सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले ही जशोरेश्वरी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था । बांग्लादेश के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया था कि वे प्राचीन जशोरेश्वरी काली मंदिर में देवी काली की पूजा करने के लिए काफी उत्साहित हैं।

जशोरेश्वेरी मंदिर के आसपास हर साल एक मेला लगता है। पीएम मोदी ने अपने दौरे में ऐलान किया था यहाँ इस मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक मल्टीपरपस हॉल का निर्माण भारत सरकार की तरफ से करवाया जाएगा।

अल्पसंख्यक हैं मिजोरम में हिंदू, फिर भी हरि मंदिर को बचाने में जुटे: असम राइफल्स के जाने के बाद राज्य सरकार के कब्जे में होगा मंदिर

पूर्वोत्तर भारत के ईसाई बहुल राज्य मिजोरम में हिन्दू अपना एक मंदिर सरकारी नियंत्रण में जाने से बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह मंदिर ऐतिहासिक है। मिजोरम की राजधानी आइजोल में स्थित असम राइफल्स हरि मंदिर, गोरखा हिंदुओं और ब्रू रियांगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है और श्रद्धा का बड़ा केंद्र है।

मिजोरम की आबादी का बेहद छोटा हिस्सा हिन्दू समुदाय इस बात से चिंतित है कि इस ऐतिहासिक मंदिर का प्रशासन मिजोरम सरकार के हाथों में चला जाएगा। हरि मंदिर (जिसे महादेव ट्रान के नाम से भी जाना जाता है) पहले बेथलहम में असम राइफल्स परिसर में स्थित था। यह यहाँ पिछले 70 वर्ष से स्थित है। असम राइफल्स आइजोल के इस हिंदू मंदिर का रखरखाव करता आया है। इस हरि मंदिर में दुर्गा पूजा, दिवाली और जन्माष्टमी जैसे त्यौहार भी मनाए जाते हैं और यह शादियों और कीर्तन जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का केंद्र भी है।

30 सितंबर, 2024 को मिजोरम गोरखा मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष ने आइजोल स्थित द्वितीय असम राइफल्स के कमांडेंट को पत्र लिखकर हरि मंदिर के भविष्य के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की थी। अपने पत्र में मनकुमार जैशी ने लिखा, “हरी मंदिर असम राइफल्स के सुरक्षाकर्मियों के परिवारों और वंशजों लिए गहरा भावनात्मक महत्व रखता है, उन्होंने हमारे देश की सेवा की है। ये पवित्र भूमि हमारे देश की अखंडता की रक्षा के लिए उनके बलिदान, समर्पण और अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”

उन्होंने कहा, “यह हमारी विनम्र अपील है कि इस मंदिर को संरक्षित किया जाए और असम राइफल्स के सैनिकों के वंशजों के साथ-साथ बाकी हिंदू समुदाय को भी इसमें पूजा -अर्चना दी जाए।” मंदिर को लेकर यह चिंताएँ असम राइफल्स के अपने बेस को हटा कर शहर से बाहर ले जाने के कारण उठी हैं।

केंद्र-राज्य में लम्बे समय से चल रही बात

असम राइफल्स बटालियन को आइजोल शहर के बीच से 15 किलोमीटर पूर्व में ज़ोखावसांग में एक जगह पर ले जाने के लिए 2023 से ही बातचीत हो रही है। मिजोरम सरकार ने इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया था कि असम राइफल्स को एक नए स्थान पर भेजा जाए।

जुलाई, 2024 की एक PTI रिपोर्ट में कहा गया है कि असम राइफल्स को यहाँ से हटा कर दूसरी जगह भेजने के लिए केंद्र और मिजोरम के बीच एक समझौता (MOU) को मंजूरी दी जानी थी। अभी MOU को लेकर क्या स्थिति, यह नहीं पता है। हालाँकि, यह साफ़ है कि गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद मिजोरम सरकार आइजोल के असम राइफल्स परिसर को अपने अधीन ले लेगी।

चूंकि यह ऐतिहासिक हरि मंदिर असम राइफल्स के परिसर में स्थित है, इसलिए स्थानीय हिंदुओं को डर है कि मंदिर को चलाने, प्रशासन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी मिजोरम सरकार के हाथों में आगे चली जाएगी।

स्थानीय गोरखा हिन्दुओं को मंदिर देने की माँग

मिजोरम गोरखा मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष मनकुमार जैशी ने 2nd असम राइफल्स के कमांडेंट से आग्रह किया है कि वे इस मामले को राज्य सरकार के सामने उठाएँ और मंदिर का संचालन गोरखा हिन्दुओं को दिलवाएँ। सितंबर 2024 में लिखे अपने पत्र में उन्होंने कहा, “हम आपसे हरि मंदिर को आइजोल के स्थानीय गोरखा समुदाय को देने पर विचार करने की माँग करते हैं ताकि हमें अपनी धार्मिक जरूरतों के लिए एक जगह बची रहे।”

मनकुमार जैशी ने अपने पत्र में आगे कहा कि जिस तरह असम राइफल्स का चर्च, स्थानीय चर्च को दिया गया है, उसी तरह मंदिर को भी स्थानीय हिन्दुओं के हाथ में दिया जाए। ऑपइंडिया ने मिजोरम गोरखा मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष से फोन पर बात की और उन्होंने इन चिंताओं के बारे में हमें बताया।

उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि मिजोरम सरकार कैंटीन स्क्वायर क्षेत्र का विस्तार करने और सड़कों को चौड़ा करने पर विचार कर रही है। इसके दायरे में मंदिर आने से स्थानीय हिंदुओं के सांस्कृतिक केंद्र असम राइफल्स हरि मंदिर का भविष्य अब खतरे में है।

सोशल मीडिया पर चला अभियान

इस मंदिर को बचाने की माँग अब सोशल मीडिया पर चल रही है। एक एक्स यूजर ने लिखा, “मंदिर महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र हैं। असम राइफल्स के मंदिर को हटाने से हमारे समुदाय की पहचान ही खत्म हो जाएगी।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “हम आगे की पीढ़ियों के लिए असम राइफल्स मंदिर को बचाने में एकजुट हैं। आइए इसको बचाने के लिए अपनी आवाज़ उठाएँ।”

एक और यूजर ने लिखा “असम राइफल्स मंदिर दशकों से शांति और प्रार्थना का स्थल रहा है। जो मंदिर इतने सारे लोगों के लिए इतना मायने रखता है, उसे क्यों नष्ट किया जाए?”

मिजोरम में हिन्दुओं का उत्पीड़न

2001 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार, मिजोरम ईसाइयों की आबादी 7.7 लाख है जबकि इसकी तुलना में केवल 31,562 हिंदू यहाँ रहते हैं। राज्य के हिन्दुओं में मुख्य रूप से गोरखा और ब्रू रेहंग शामिल हैं। ब्रू रेहंग को 1997 में मिज़ो लोगों के अत्याचार का सामना करना पड़ा था। ब्रू रहंग इस कारण भाग कर त्रिपुरा चले गए थे। 2018 में त्रिपुरा और मिजोरम के बीच हुए एक समझौते के बाद ही ब्रू आबादी यहाँ लौट पाई थी।

मिजोरम के भीतर मंदिर पर हमले के भी कई मामले सामने आए हैं। ऑपइंडिया को आइजोल के असम राइफल्स हरि मंदिर के बाहर एक बड़ी प्लेट मिली, जिसमें लिखा है कि इस मंदिर को उपद्रवियों ने नष्ट कर दिया था। इस मंदिर का दोबारा से निर्माण करवाया गया था। आज जैसा यह मंदिर दिखता है, उसका निर्माण ब्रिगेडियर श्री राम सिंह द्वारा करवाया गया था और अगस्त 1993 में असम राइफल्स की पहली बटालियन के कमांडेंट द्वारा इसका उद्घाटन किया गया था।

मिजोरम में हिंदू प्रथाओं के खिलाफ हमेशा ही एक शत्रुता की भावना बनी रही है। अगर किसी प्रमुख नेता को हिंदुओं से जुड़ा हुआ देखा जाता है, तो उसे बदनाम किया जाता है। 2011 में, मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) ने कोलकाता में दुर्गा पूजा और दशहरा के हिंदू त्योहारों में भाग लेने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री लाल थनहवला पर हमला किया था।

MNF के उपाध्यक्ष आर त्लांगमिंगथांगा ने कहा था, “हम लाल थनहवला के समारोह में भाग लेने की कड़ी निंदा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह गॉड से माफ़ी मांगेंगे।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने ‘ईसाई धर्म त्याग दिया’ और हिंदू अनुष्ठानों में भाग लेकर ‘अपने गॉड को धोखा दिया’।

यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। आप इसे यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

नाबालिग लड़कियों को बहलाकर शारीरिक संबंध बनाता था अशरद आलम, NCPCR की शिकायत के बाद सीवान पुलिस ने 6 लड़कियाँ छुड़ाईं, चलाता है ऑर्केस्ट्रा

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने गुरुवार (10 अक्टूबर) बिहार में अरशद आलम द्वारा संचालित ‘ऑर्केस्ट्रा’ में छह लड़कियों के शोषण के मामले में हुई कार्रवाई की जानकारी दी। कानूनगो ने कहा कि एनसीपीसीआर के निर्देश पर सीवान पुलिस ने उस स्थान पर छापेमारी की और आरोपित को दबोचते हुए लड़कियों को बचा लिया है।

प्रियांक कानूनगो ने अपने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) के जरिए इसकी जानकारी दी। इस मामले में मिशन मुक्ति फाउंडेशन नाम के एक एनजीओ ने इन नाबालिग लड़कियों सहित अन्य नाबालिगों के शोषण के बारे में एनसीपीसीआर से शिकायत की थी। इसके बाद NCPCR की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई।

NCPCR के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने कहा, “अरशद आलम बिहार में आर्केस्ट्रा चलाता है, जहाँ मिशन मुक्ति फाउंडेशन द्वारा नाबालिग लड़कियों के शोषण की शिकायत की गई थी। एनसीपीसीआर के निर्देश के बाद आज तड़के सिवान पुलिस ने छापामार कार्रवाई कर के 6 लड़कियों को रेस्क्यू किया है।”

आरोपित अरशद आलम का एक वीडियो डालते हुए उन्होंने अपने पोस्ट में आगे कहा, “अरशद का बयान सुन लीजिए। ‘लव’ के नाम पर नाबालिग लड़की को ग्रूम करके शोषण करना इनका अपराध करने का तरीक़ा है। वीडियो जनजागरण के उद्देश्य से पोस्ट किया है, ताकि समाज जाग सके और बेटियाँ बचाई जा सकें।”

इस वीडियो में बताया गया है कि कैसे उसने ‘प्यार’ के नाम पर एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर उसका शोषण किया। आरोपित अरशद बिहार के गोपालगंज का रहने वाला है। उसने बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर उसका शोषण करना शुरू कर दिया। वीडियो में उसने कहा कि वह ‘प्रेम विवाह’ कर लिया है और अब निकाह करेगा।

ध्यान देने वाली बात ये है कि अरशद आलम के बयान से लगता है कि वह नाबालिग लड़कियों को फँसाता था और उनके साथ ‘प्रेम विवाह’ का दावा करता था। इसके बाद वह नाबालिग को ‘निकाह’ के लिए अपने अम्मी-अब्बू के पास ले जाने की बात कहता होगा। इस तरह वह नाबालिग लड़कियों का शोषण करता था।

अरशद के बयान से लगता है कि जिसे वह ‘प्रेम विवाह’ कहता है, वह जरूर नाबालिग के साथ यौन संबंध स्थापित करने से होगा। वह संभवत: नाबालिग को बहला-फुसलाकर उसके साथ यौन संबंध बनाने के बाद ‘निकाह’ के लिए उसका अपहरण कर लेता था। अगर नाबालिग गैर-मुस्लिम है तो यह इस्लाम में धर्मांतरण भी करेगा।

बिहार में ईसाई धर्मांतरण की ग्राउंड रिपोर्ट, YouTube ने डिलीट किया वीडियो: क्या फेसबुक भी उड़ा देगा, बिग टेक कंपनियों की वामपंथी पॉलिसी कब तक?

सोशल मीडिया पर वामपंथियों का दबदबा कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ सालों में कई ऐसे मामले सामने आए जब बड़ी टेक कंपनियों में बैठे वामपंथी अपनी विचारधारा के अनुरूप कंटेंट को बढ़ाने और सेंसर करने का काम करते रहे। उन्होंने कभी किसी हिंदूवादी आवाज को दबाने के लिए उसकी ऑडियंस के बीच रीच कम कर दी तो कभी उनके वीडियो को हटा दिया तो कभी उसका चैनल ही उड़ा दिया।

सवाल करने पर जवाब सिर्फ ये दिया गया कि ‘कंटेट’ कम्युनिटी गाइडलाइन्स के विरुद्ध है।

दिलचस्प बात ये है कि इन बड़ी टेक कंपनियों की कम्युनिटी गाइडलाइन सिर्फ तभी आहत होती है जब कोई हिंदुओं की बात करे। ताजा उदाहरण ऑपइंडिया पर प्रकाशित एक वीडियो से जुड़ा है। य़े वीडियो 4 साल पहले यूट्यूब पर डाली गई थी। इस वीडियो में ऑपइंडिया के डिप्टी एडिटर अजीत झा ने बिहार के सुदूर ग्रामों में हो रहे ईसाई धर्मांतरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।

उन्होंने अपनी रिपोर्ट्स में बताया था कि कैसे मधुबनी इलाके में एनजीओ के नाम पर ईसाई मिशनरियाँ अपना घिनौना खेल खेलती हैं और हिंदू धर्म के खिलाफ घृणित बातें करते हुए ईसाई धर्म में आने के लिए कहती है। ऑपइंडिया पर उनकी ये कवरेज दो भागों में अपलोड की गई थी। एक 30 अक्टूबर 2020 को और दूसरी 31 अक्टूबर 2020 को।

वीडियो- यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर हर जगह थी। लेकिन अचानक अब देखा गया है कि यूट्यूब पर से उस वीडियो को हटा दिया गया है जो हमने 31 अक्टूबर 2020 को डाली थी और जिसमें ईसाई मिशनरियों के घिनौने खेल के साथ उस पादरी का चेहरा भी साफ तौर पर दिखाया गया था जो ग्रामीणों को भड़काता था।

ये कार्रवाई मास रिपोर्टिंग के कारण हुई है या किसी और टेक्निकल कारण ये तो साफ नहीं हैं लेकिन ये जरूर कहा जा सकता है कि अजीत झा की इतनी रिपोर्टों में अगर इस रिपोर्ट को निशाना बनाया गया है तो कारण सिर्फ और सिर्फ ‘ईसाई धर्मांतरण का मुद्दा’ ही नजर आता है। इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं।

अब भले ही ईसाई धर्मांतरण की पोल खोलने वाली वीडियो यूट्यूब पर मौजूद नहीं है लेकिन आप अगर इसे देखना चाहते हैं तो ये फेसबुक पर फिलहाल मौजूद है। हमने रिपोर्ट में उसका लिंक जोड़ा है। अगर भविष्य में फेसबुक भी एक ग्राउंड रिपोर्ट को डिलीट करता तो हम इसे आप तक पहुँचाने के लिए कोई और तरीका जरूर खोजेंगे।

आप इस वीडियो देखिए और समझिए कि कैसे गरीब, लाचार लोगों का ब्रेनवॉश करके उन्हें धर्मांतरित किया जाता होगा। उन्हें हिंदू धर्म से घृणा करवाई जाती होगी और धर्म परिवर्तन को सही बताया जाता होगा।

मालूम हो कि पहली बार नहीं है कि किसी मामले को लेकर बड़ी टेक कंपनियों के वामपंथी रवैये पर सवाल खड़ा किया जा रहा हो। इनका प्रभाव फेसबुक पोस्ट से लेकर इंस्टा की रीच तक पर आप देख सकते हैं।

जहाँ हिंदू को काफिर कहकर मारने की बात करने वाली रील मिलियन तक पहुँचती है और फिर भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती। वहीं हिंदूवादी पोस्ट को कम्युनिटी गाइडलाइन के विरुद्ध कहकर खारिज कर दिया जाता है।

जहाँ फेक न्यूज फैलाने वाले पोस्टों पर कार्रवाई नहीं होती, लेकिन अगर कोई उस फेक न्यूज की पोल खोल दे तो उस पोस्ट को हाइड कर दिया जाता है। तमाम यूट्यूबर्स और अन्य सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर इन समस्याओं से रोज जूझते हैं। सबका इलाज सिर्फ इन टेक कंपनियों को मेल करना नहीं हो सकता।

ये भी पता हो कि ये वामपंथी लॉबी सिर्फ हिंदुत्व की विचारधारा के खिलाफ अपनी सक्रियता नहीं दिखाती बल्कि इन्हें दक्षिणपंथी विचार वाले लोगों से समस्या है। 2020 में इन कंपनियों पर आरोप भी लगे थे कि ये चुनावों के वक्त सोशल मीडिया यूजर्स को मैनिपुलेट करने का काम कर रही थीं।

इनकी विश्वसनीयता किस आधार पर आँकी जाए ये कहना मुश्किल है लेकिन ये जरूर है कि आप अगर यूट्यूब, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कंटेंट को देखेंगे तो पाएँगे कि काम की वीडियोज से ज्यादा वो वीडियो आपके सामने होंगी जिनसे या तो आपके विचारों शून्य हो जाएँ या फिर वैसे हों जैसे वो चाहते हैं। आपके फीड में किसी वामपंथी का प्रोपगेंडा 3 मिलियन से 30 मिलियन तक पहुँचता दिखाई देगा लेकिन अगर कोई हिंदू वादी आवाज उठा ले, धर्मांतरण के खिलाफ बोल दे तो उसका वही होगा जो इस टेक कंपनी में बैठे लोग चाहते हैं। संभव है कभी उसे 30 हजार व्यूज के लिए मशक्कत करना पड़े तो कभी 3 हजार का।