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आलम करना चाहता था भाभी से निकाह… सौतेले भाई सिराज ने पीट-पीटकर की हत्या, बीवी संग मिल शव थैली में भर फेंका, दोनों गिरफ्तार

महाराष्ट्र के ठाणे में भाभी से निकाह करने की चाह रखने वाले एक शख्स को उसके सौतेले भाई ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। मृतक की पहचान आलम अंसारी के तौर पर हुई है। पुलिस ने केस दर्ज करके दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक, घटना कुलगाँव थाने की है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस का कहना है कि हत्या को अंजाम 4 अक्तूबर को दिया गया था। अब इस मामले में मोहम्मद सिराज अंसारी और उसकी बीवी रजिया को पकड़ा गया है। पुलिस को घटना की जानकारी तब हुई थी जब 4 अक्तूबर की दोपहर सिराज का शव धारोलगाँव के धारोल में मिला था। इसी के बाद पुलिस ने अपनी जाँच शुरू की थी।

जाँच के बाद सामने आया कि ये हत्या आलम के भाई सिराज ने अपनी बीवी के साथ मिलकर की थी। बाद में शव को प्लास्टिक में भरकर फेंक दिया था। पुलिस ने फौरन केस को भारतीय न्याय संहित की धारा 103 (1) के तहत दर्ज कर दोनों मियाँ-बीवी को पकड़ा ।

पूछताछ में सिराज अंसारी ने बताया कि पीड़ित उसका सौतेला भाई था। दावा है कि उसने आलम को इसलिए मारा क्योंकि वो सिराज की बीवी रजिया से शादी करना चाहता था। इसी का पता जब सिराज को चला तो उसने अपनी बीवी संग मिलकर उसे पीट-पीटकर मार डाला। बाद में दोनों ने शव को प्लास्टिक की थैली में भरा फिर स्कूटर पर लादकर उसे गाँव में फेंक दिया था।

दिखने लगा जनसांख्यिकी बदलाव और बांग्लादेशी घुसपैठ का असर… झारखंड में AIMIM लड़ेगी 35 सीटों पर विधानसभा चुनाव, समझें क्या होंगे इसके परिणाम

झारखंड में हैदराबाद बेस्ड राजनीतिक पार्टी आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। झारखंड में 82 विधानसभा सीट (81+1 नॉमिनेशन) हैं, जिसमें 81 पर चुनाव लड़े जाते हैं। इस चुनाव में AIMIM ने 35 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष मो शाकिर अली ने ये बात कही। झारखंड में AIMIM का चुनावी मैदान में, वो भी इतने बड़े पैमाने पर उतरना लोगों को अस्वाभाविक ही लग रहा है।

दरअसल, झारखंड में हालिया राजनीतिक गतिविधियाँ और जनसांख्यिकी में हो रहे बदलावों ने एक नया परिदृश्य तैयार किया है। AIMIM जैसी पार्टियाँ राज्य में चुनाव लड़ने का सपना देख रही हैं, और यह सपना झारखंड की बदलती जनसांख्यिकी से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही, बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या ने भी राज्य में गहराई से असर डाला है। इन सभी मुद्दों को मिलाकर एक व्यापक चर्चा प्रस्तुत की जा रही है, जिसमें झारखंड की बदलती राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डाला जाएगा।

आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने झारखंड विधानसभा चुनावों में जामताड़ा समेत 35 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। यह निर्णय पार्टी की एक बड़ी राजनीतिक आकांक्षा का संकेत है, जो एक छोटे राज्य से शुरू होकर अब 2000-3000 किलोमीटर दूर के राज्यों में अपने पाँव पसारने की कोशिश कर रही है। इसका मुख्य कारण राज्य की जनसांख्यिकी में हो रहा बदलाव है, खासकर मुस्लिम और ईसाई आबादी की बढ़ोतरी।

जामताड़ा और संताल परगना जैसे क्षेत्रों में जनजातीय जनसंख्या में गिरावट और मुस्लिम समुदाय की बढ़ती संख्या AIMIM जैसी पार्टियों के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के संताल परगना क्षेत्र में जनजातीय जनसंख्या घट रही है, जबकि मुस्लिम और ईसाई जनसंख्या बढ़ रही है। इस बदलाव का सीधा असर चुनावी राजनीति पर पड़ता है, क्योंकि वोट बैंक का समीकरण बदलता है।

BJP द्वारा गठित एक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में मुस्लिम बहुल बूथों की संख्या में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यह रिपोर्ट बताती है कि राज्य की 10 विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम बहुल बूथों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इस तरह के आँकड़े जनसांख्यिकी में हो रहे महत्वपूर्ण बदलाव की पुष्टि करते हैं, जो AIMIM जैसी पार्टियों के लिए रणनीतिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है।

इन बूथों की संख्या में वृद्धि यह भी दर्शाती है कि मुस्लिम समुदाय का प्रभाव राज्य के कई हिस्सों में बढ़ रहा है। यह वृद्धि न केवल राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है, बल्कि राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक ढाँचे को भी प्रभावित कर सकती है। बड़े पैमाने पर ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे राज्य की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

झारखंड में जनसांख्यिकी बदलाव का एक और महत्वपूर्ण कारण बांग्लादेशी घुसपैठ है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के संताल परगना क्षेत्र में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों के बसने की खबरें आई हैं। इस घुसपैठ को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक चिंता बढ़ रही है। रांची हाई कोर्ट ने हाल ही में इस मामले में संज्ञान लेते हुए सरकार को निर्देश दिया कि एक विशेष टीम बनाई जाए, जो अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करे और उन पर कार्रवाई करे।

अवैध घुसपैठ से झारखंड की जनसांख्यिकी पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ती संख्या न केवल स्थानीय जनसंख्या को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनके जरिए राज्य के राजनीतिक समीकरण भी बदल रहे हैं। इस स्थिति से राज्य की सामाजिक सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता पर भी गंभीर असर हो सकता है। स्थानीय समुदायों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है, जो भविष्य में सामाजिक तनाव का कारण बन सकती है।

बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या पर झारखंड हाई कोर्ट ने भी सरकार को निर्देशित किया है कि वह इस मुद्दे पर जल्द से जल्द कार्रवाई करे। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले पर रिपोर्ट माँगी है और अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए उचित कदम उठाने को कहा है। कोर्ट का यह निर्णय इस बात का प्रतीक है कि राज्य की न्यायिक प्रणाली भी जनसांख्यिकी बदलाव और घुसपैठ की समस्या को गंभीरता से ले रही है।

इस आदेश के बाद, राज्य सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह किस प्रकार से इस समस्या का समाधान करेगी। अवैध घुसपैठियों की पहचान और निष्कासन एक जटिल प्रक्रिया है, और इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ सामाजिक समन्वय भी आवश्यक होगा। अगर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो राज्य की जनसांख्यिकी में और भी बड़ा परिवर्तन हो सकता है, जिससे राजनीतिक और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और अधिक बढ़ सकता है।

झारखंड में जनसांख्यिकी परिवर्तन और अवैध घुसपैठ की समस्या से राजनीतिक ध्रुवीकरण गहरा सकता है। AIMIM जैसी पार्टियों का बढ़ता प्रभाव, मुस्लिम बहुल बूथों की संख्या में वृद्धि, और बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी—यह सब राज्य में राजनीतिक और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकते हैं।

आदिवासी समुदाय, जो इस क्षेत्र का मूल निवासी है, अपने अधिकारों और पहचान को लेकर चिंतित हो सकता है। राज्य की राजनीति में मुस्लिम और ईसाई समुदायों के बढ़ते प्रभाव से आदिवासी और अन्य हिंदू समुदायों में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है, जिससे सामाजिक तनाव और संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है।

राजनीतिक दल भी इस ध्रुवीकरण को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास कर सकते हैं। AIMIM जैसी पार्टियाँ, जो मुख्य रूप से मुस्लिम वोट बैंक पर निर्भर हैं, इन क्षेत्रों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश करेंगी। वहीं, BJP और अन्य पार्टियाँ भी इस ध्रुवीकरण का लाभ उठाने का प्रयास करेंगी, जिससे राजनीतिक वातावरण और अधिक जटिल हो सकता है।

झारखंड में हो रहे जनसांख्यिकी बदलाव, मुस्लिम बहुल बूथों में वृद्धि, बांग्लादेशी घुसपैठ, और AIMIM जैसी पार्टियों की चुनावी रणनीति से राज्य में एक नया राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य उभर रहा है। यह परिदृश्य राज्य की स्थिरता, सांप्रदायिक सौहार्द, और राजनीतिक ध्रुवीकरण पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

वैसे, मुस्लिम बहुल सीटों पर AIMIM का राजनीतिक प्रदर्शन देश भर में चौंकाने वाला है। बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव में AIMIM ने शानदार प्रदर्शन किया था, तो महाराष्ट्र के मुस्लिम बहुत इलाकों में भी इस तरह की सांप्रदायिक पार्टियों का उभार तेजी से दिखा है। पश्चिम बंगाल और असम में मुस्लिमों से जुड़ी पार्टियों का प्रदर्शन भी बेहतर होता जा रहा है, तो हाल ही में कश्मीर से लेकर हरियाणा तक में मुस्लिमों का एकतरफा वोट पार्टी विशेष को पड़ता रहा है।

अगर इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो राज्य में राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव और अधिक बढ़ सकता है। सरकार, न्यायपालिका, और समाज के विभिन्न हिस्सों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा, ताकि झारखंड की जनसांख्यिकी और सामाजिक संरचना को स्थिरता प्रदान की जा सके।

ड्राइवर की जरूरत, न हेडलाइट की…एलन मस्क ने पेश की टेस्ला की पहली RoboVan, 20 लोगों एक साथ हो सकेंगे सवार

अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता टेस्ला के CEO एलन मस्क ने एक नई वैन दुनिया के सामने पेश की है। यह वैन खुद चलेगी और आजकल रोड पर दिखने वाली किसी भी गाड़ी से कहीं अलग है। इसे टेस्ला रोबोवैन का नाम दिया गया है। इसकी अब पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है।

गुरुवार (10 अक्टूबर, 2024) को एलन मस्क ने लॉस एंजिलिस अपनी कंपनी के एक कार्यक्रम में लोगों को दिखाई। यह कार्यक्रम रोबोटिक्स से जुड़ी चीजों को दिखाने के लिए था। हालाँकि, इसी कार्यक्रम में उन्होंने एक नई मिनीवैन दिखाई।

यह मिनीवैन बाकी से अलग है। इसको चलाने के लिए किसी भी ड्राइवर की जरूरत नहीं है। यह एक मिनीबस की तरह दिखती है और एकदम अलग सी है। मस्क ने कहा कि यह ऐसे शहरों में काम आएगी जहाँ भीड़भाड़ ज्यादा होती है। उन्होंने बताया कि इसे चलाने का खर्चा भी बाकी गाड़ियों से काफी कम होगा।

इस वैन की डिजाइन एक बड़े से ट्रेन के डिब्बे की तरह दिखती है। इसके गेट भी बीच से खुलते हैं। वैन में आगे पीछे कहीं लाइट नहीं दिखीं लेकिन इसमें अलग से LED की पट्टियां लगाई गई थीं। वैन बाहर और अंदर से सफ़ेद रंग की है। इसके भीतर दो टीवी भी हैं। इसके पहिए भी नहीं दिखते हैं।

मस्क ने कहा कि यह 20 लोगों को ले जा सकती है और इससे सामान भी ढोया जा सकता है। अभी यह वैन प्रोटोटाइप ही है। यह बाजार में कब आएगी। इस संबंध में एलन मस्क ने कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने इसके अलग से डिजाइन पर कहा कि भविष्य आखिर भविष्य जैसा दिखना चाहिए।

टेस्ला इलेक्ट्रिक गाड़ियों के दुनिया में सबसे कामयाब कम्पनी मानी जाती रही है। यह अमेरिका समेत कई देशों में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सबसे बड़ी निर्माता है। टेस्ला वर्तमान में निजी उपयोग के लिए ही गाड़ियाँ बनाती है। इनमें सेडान, SUV और पिकअप ट्रक शामिल हैं।

टेस्ला ने कुछ समय पहले अपना एक इलेक्ट्रिक ट्रक भी दिखाया था। इसका नाम टेस्ला सेमी है। यह सभी उत्पाद टेस्ला भविष्य में लाएगी। एलन मस्क लगातार गाड़ियों के साथ अलग प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं। उनका यह वैन वाला प्रयोग भी इसी श्रेणी में रखा जा रहा है।

जब माँ दुर्गा ने किया चंड-मुंड का संहार, जब भगवान राम ने की रावण वध के लिए आराधना… जानें क्यों होती है नवरात्रि में विशेष ‘संधि पूजा’, ब्रह्माण्ड की ऊर्जा होती है सबसे प्रबल

नवरात्रि का उत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। आज शुक्रवार (11 अक्टूबर 2024) को शारदीय नवरात्र का अष्टमी और नवमी का संधि काल है। संधि काल में विशेष पूजा का विधान है। इस अवसर पर माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों में से एक माता चामुण्डा का विशेष अनुष्ठान किया जाता है और इस जगत एवं प्राणी मात्र के कल्याण के लिए माता जगत जननी से प्रार्थना की जाती है।

‘संधि’ का अर्थ मिलन बिंदु होता है। ‘संधि पूजा’ नवरात्रि के आठवें और नौवें दिन के मिलन पर किया जाने वाला एक विशेष अनुष्ठान है, जो आठवें दिन के अंत और नौवें दिन की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू शास्त्रों में इस संधिकाल का विशेष महत्व है। इसे बेहद शक्तिशाली और शुभ माना जाता है। संधि पूजा का महत्व बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का उत्सव है।

कहा जाता है कि माँ दुर्गा ने अष्टमी और नवमी के संधि काल में ही अत्याचारी राक्षसों का वध किया था। शास्त्रों के अनुसार, अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट को ‘संधि काल’ के रूप में माना जाता है। यह बेहद पवित्र समय होता है। यह वह समय होता है, जब दुर्गा पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान संपन्न किया जाता है।

ISCKON मंदिर के गौरांग दास ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “संधि काल में ब्रह्मांड की सबसे अच्छी और सबसे मजबूत ऊर्जा होती है। यह दिव्य नारी शक्ति का उत्सव होता है, जो शक्ति के सभी उपासकों को अधिक शक्ति और ऊर्जा प्रदान करती है। संधि पूजा में भाग लेने वाले लोग अष्टमी की शुरुआत से लेकर नवमी में संधि पूजा तक उपवास करते हैं।”

संधि काल के अनुष्ठान में एक विशाल दीपक या गोलकार थाल में 108 दीये जलाए जाते हैं। 108 दीप जलाना अंधकार पर प्रकाश के आगमन का प्रतीक है। इस दौरान माँ दुर्गा को 108 कमल के और 108 गुड़हल के चढ़ाए जाते हैं, जो जीवन की सुंदरता का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दौरान बेल के 108 पत्तों की माला पहनाई जाती है। इसके साथ ही साड़ियाँ, आभूषण और फल चढ़ाए जाते हैं।

हिंदू शास्त्रों में 108 की संख्या बेहद पवित्र मानी जाती है। यह संख्या आध्यात्मिक पूर्णता और माँ दुर्गा के कई नामों का प्रतीक है। पूजा के दौरान भक्त नकारात्मकता को दूर करने के लिए ‘उलु धूनी’ (जीभ से निकलने वाली आवाज़ें जो बार-बार गाल के एक तरफ से दूसरे तरफ टकराती हैं) देते हैं। इसके साथ ही नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने के लिए शंख बजाया जाता है और पवित्र जल छिड़का जाता है।

कहा जाता है कि देवी माँ ने संधि काल के दौरान ही चंड और मुंड नाम के दो बलशाली राक्षसों का वध किया था। जब माँ दुर्गा राक्षस महिषासुर से युद्ध कर रही थीं, तब उसके सहयोगी चंड और मुंड ने माँ दुर्गा पर पीछे से हमला कर दिया। पीछे से हमला करने पर माँ दुर्गा को बहुत गुस्सा आया। इस गुस्से के कारण उनके चेहरे का रंग नीला पड़ गया।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, तब देवी माँ ने क्रोधित होकर अपनी तीसरी आँख खोली और चामुंडा अवतार लिया और दोनों दुष्ट राक्षसों का वध किया। यह भी मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने संधि काल में 108 नीले कमलों से देवी माँ की पूजा की थी और अत्याचारी रावण का वध करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद माँ दुर्गा ने भगवान राम को यह आशीर्वाद दिया था।

कहा जाता है कि भगवान राम द्वारा माता की पूजा करने के बाद से ‘संधि पूजा’ की जाती है। इस दिन माँ दुर्गा के उग्र अवतार चामुंडा की संधि पूजा की जाती है। कई जगहों पर इस दौरान बलि देने का भी प्रावधान है। अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार माँ चामुंडा की पूजा की जाती है। कुछ लोग कद्दू, केला, ककड़ी आदि का बलि के रूप में प्रयोग करते हैं।

संधि काल की समाप्ति के बाद नवमी को माँ दुर्गा की नौवीं एवं अलौकिक शक्ति माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण में कहा गया है कि माता के पास अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व नाम की कुल आठ सिद्धियाँ हैं। माँ सिद्धिदात्री की पूजा से ये सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। देव पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने माँ सिद्धिदात्री की कृपा से सिद्धियाँ प्राप्त की थीं और अर्द्धनारीश्वर कहलाए थे।

जिन्होंने 6 गुना बढ़ाया टाटा समूह का अंतरराष्ट्रीय व्यापार, उन्हें मिली टाटा ट्रस्ट की जिम्मेदारी: जानें कौन हैं रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा

देश के बड़े उद्योगपति रतन टाटा की मृत्यु के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा ने उनकी जिम्मेदारी संभाल ली है। रतन टाटा मृत्यु के पहले तक टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन थे। अब यह जिम्मेदारी नोएल टाटा को मिली है। नोएल टाटा अब टाटा समूह की दूसरी कम्पनियों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

नोएल टाटा एक आयरिश नागरिक हैं और अब तक वह टाटा समूह की कंपनी ट्रेंट और वोल्टास के मुखिया हैं। ट्रेंट को उन्होंने देश की बड़ी फैशन चेन में बदला है। इसी के साथ वह रतन टाटा ट्रस्ट और दोराबजी टाटा ट्रस्ट के भी ट्रस्टी हैं। यह दोनों ट्रस्ट भी टाटा ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं। टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में 66% की हिस्सेदारी है और यह इस समूह का मालिक है।

टाटा समूह इस टाटा संस के अंतर्गत आता है। नोएल टाटा के प्रमुख बनाए जाने की जानकारी अभी टाटा ट्रस्ट ने आधिकारिक रूप से नहीं दी है। हालाँकि, यह बात लगभग तय है कि रतन टाटा की जगह वही ले रहे हैं। नोएल टाटा को रतन टाटा के अंतिम संस्कार के दौरान देखा गया था।

67 वर्षीय नोएल टाटा पिछले 4 दशकों से टाटा समूह से जुड़े हैं। उनकी शिक्षा इंग्लैंड से हुई है। नोएल टाटा अभी तक टाटा स्टील जैसी कम्पनियों से जुड़े हुए हैं। उनकी सबसे बड़ी सफलता टाटा समूह के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को 2010 से 2021 के बीच 6 गुना करना रही है। वह टाटा इंटरनेशनल के 2010 से 2021 के बीच मुखिया रहे हैं।

उनकी माँ सिमोन टाटा, रतन टाटा के पिता नवल टाटा की दूसरी पत्नी थीं। सिमोन टाटा स्विटज़रलैंड में जन्मी थीं और यहाँ उन्होंने फैशन ब्रांड लेक्मे की शुरुआत की थी। नोएल टाटा की पत्नी अलू मिस्त्री, टाटा के पूर्व चेयरमैन पी सायरस मिस्त्री की बहन हैं। अलू मिस्त्री के पिता पलून जी मिस्त्री टाटा में बड़े हिस्सेदार हैं।

नोएल टाटा के नाम को लेकर अंतिम फैसला ट्रस्ट का बोर्ड करेगा। लेकिन उनके नाम को पारसी समाज का भी समर्थन मिलने का अनुमान है क्योंकि वह टाटा परिवार से ही आते हैं और लम्बे समय से ट्रस्ट के तौर तरीके को जानते हैं।

टाटा समूह बीते कुछ वर्षों में काफी बड़े बदलावों से गुजरा है। उसकी कई कम्पनियाँ घाटे से निकल कर फायदे में आई हैं। हालाँकि, स्टील और जैगुआर-लैंडरोवर जैसी उसकी कम्पनियाँ उसके लिए चिंता विषय हैं। यह कम्पनियाँ बीते कुछ समय में समस्या से गुजर रही हैं। नोएल टाटा को इनसे सम्बन्धित भी कड़े फैसले लेने होंगे।

इस्लामी कट्टरपंथियों की जिस हिंसा में घायल हुए 12 पुलिसकर्मी, उसे वापस लेगी कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार: सड़क पर उतर भीड़ ने थाने, अस्पताल और मंदिर पर किया था हमला

कर्नाटक में 2022 में हुए हुबली हिंसा के मामले को कॉन्ग्रेस सरकार ने वापस लेने का निर्णय लिया है। इस मामले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लीमीन के नेता समेत कई लोग आरोपित बनाए गए थे। उनके ऊपर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ इकट्ठा करके हुबली पुलिस थाने पर धावा बोलने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने का आरोप था। उस हिंसा के दौरान न केवल पुलिस स्टेशन और पुलिस वाहनों पर पथराव किया गया था, बल्कि पास के एक हनुमान मंदिर और अस्पताल को भी निशाना बनाया गया था, जिससे काफी नुकसान हुआ था। इसके अलावा इस हिंसा में 12 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

घटना 16 अप्रैल 2022 को हुई थी। भीड़ काबू होने के बाद पुलिस ने इस केस को दर्ज किया था। हालाँकि बाद में राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार आई और इस केस को वापस लेने के लिए डिप्टी चीफ मिनिस्टर डीके शिवकुमार ने एक पत्र लिखा। ये पत्र अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को 4 अक्टूबर 2023 को लिखा गया था। इसमें उप मुख्यमंत्री ने आग्रह किया था कि केस वापस ले लिया जाएरिपोर्ट्स बताती हैं कि उसी अनुरोध के बाद राज्य के गृह विभाग को वो पत्र भेजा गया और निर्णय को मंजूरी दी गई।

गौरतलब है कि कर्नाटक में साल 2022 में हनुमान जयंती के बाद हुबली में एक सोशल मीडिया पर बवाल हुआ था। इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने सड़कों पर उतरकर पुलिस को निशाना बनाया था और सड़कों पर उपद्रव किया था।बाद में इस मामले में पुलिस ने 100+ से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया था। जाँच में सामने आया था कि भीड़ को उकसाने में एआईएमआईएम नेता मौलाना वसीम शामिल था। उसी ने दरगाह पर उन्मादी भाषण दिया था और पुलिस स्टेशन के बाहर भी भीड़ के साथ वही था। उसके अलावा इस केस में हुबली-धारवाड़ नगर निगम पार्षद नजीर अहमद को कर्नाटक पुलिस ने पकड़ा था। वह भी AIMIM पार्टी नेता था जिसके तार 16 अप्रैल 2022 को पुलिस थाने पर हुई पत्थरबाजी से जुड़े मिले थे।

B.Tech करके डिजिटल अरेस्ट करने लगा अकरम, कुछ ही दिनों में ₹4 करोड़ की ठगी: गैंग में शामिल रफीक, दानिश, कादिर

उत्तर प्रदेश की आगरा पुलिस ने लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने वाला एक गैंग पकड़ा है। इस गैंग को चार मुस्लिम युवक चला रहे थे। यह गैंग लोगों को ED-CBI अधिकारी बन कर डराता था और उन्हें डिजिटल अरेस्ट करके करोड़ों वसूलता था। इस गैंग का सरगना बीटेक कर चुका है।

आगरा पुलिस ने गुरुवार (10 अक्टूबर, 2024) को इस ठग गैंग का खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि यह चारों दिल्ली में बैठ कर ठगी करते थे। यहाँ इन्होने एक दफ्तर बनाया हुआ था। इनका एक गुरुग्राम में भी दफ्तर था। यह गैंग लोगों को फोन करता था और अपने आप को ED-CBI या TRAI जैसे संस्थानों का अधिकारी बताता था।

गैंग उन लोगों को बताता था कि वह ड्रग तस्करी या फिर पैसे के हेरफेर जैसे मामले में फंस गए हैं और उन्हें डिजिटल तौर पर अरेस्ट किया जा रहा है। इसके बाद उनसे लाखों में रूपए माँगे जाते थे। गैंग उनसे ठगी करने के बाद फोन काट देता था और लोग बाद में असलियत जान पाते थे।

पुलिस ने बताया है कि इस गैंग का सरगना सोहेल अकरम है जो असम के करीमगंज का रहने वाला है। वह चेन्नई के एक कॉलेज बीटेक कर चुका है और अब ठगी करता है। वह इससे पहले बेटिंग के नाम पर भी ठगी करता था। उसके ऊपर दिल्ली में भी कई मामले दर्ज हैं।

सोहेल को दिल्ली में गिरफ्तार भी किया जा चुका है। उसके साथ मोहम्मद राजा रफीक, दानिश और कादिर भी शामिल थे। यह ठगी के लिए फर्जी सिम का जुगाड़ करते थे। जिन खातों में पैसा मंगाया जाता था वह किसी मजदूर का होता था। उन्हें लालच देकर यह पैसा मंगाया जाता था।

आगरा पुलिस ने यह गिरफ्तारी एक छापेमारी में की है। इन ने आगरा के एक पूर्व रेलवे कर्मी को ठगा था। रेलवे कर्मी को इन्होने TRAI का अधिकारी बनके फोन किया था और धमकी देकर डिजिटल अरेस्ट कर लिया था। रेलवे कर्मी नईम मिर्जा बेग ने इनके खाते में ₹14 लाख डाले थे। उन्होंने बाद में इस मामले में शिकायत दर्ज करवाई।

जब पुलिस ने इस मामले की जाँच के लिए फोन नम्बर और खाते की जाँच चालू की। पुलिस को पता चला कि जिस खाते में इन्होने नईम बेग से ठगी की है उसमें अलग-अलग जगह से इन लोगों ने ₹2.70 करोड़ भी मँगाए हैं। पुलिस ने इसके बाद एक के बाद एक कड़ी खोलनी चालू की।

इसके बाद चारों को गिरफ्तार कर लिया गया। पता चला है कि इन लोगों ने पिछले कुछ ही दिनों में ₹4 करोड़ ठगे हैं। आगरा पुलिस ने बताया है कि उत्तर प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट के मामले में यह पहली गिरफ्तारी है। पुलिस ने कहा है कि इनके कई और साथी अभी गिरफ्तार किए जाने हैं, उनकी टीमें तलाश कर रही हैं।

लिपस्टिक पर अड़े CPM नेता, सेक्सिस्ट बयान से पीछे हटने को तैयार नहीं: कहा था, ‘अच्छे कपड़े पहनने वाले झूठे, लिपस्टिक वाली से सावधान’

सीपीएम के पोलित ब्यूरो के सदस्य और पूर्व सांसद ए विजयराघवन अपने सेक्सिस्ट (लिंगभेदी) बयान पर अड़े हुए हैं, जिसमें उन्होंने पत्रकारों के पहनावे और लिपस्टिक लगाने को लेकर टिप्पणी की थी। यह घटना केरल के त्रिशूर में गुरुवार (10 अक्टूबर 2024) को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आई।

ऑन मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व सांसद विजयराघवन ने हाल ही में नीलांबूर में आयोजित एक सीपीएम सार्वजनिक बैठक में कहा था, “जो पत्रकार अच्छे कपड़े पहनते हैं, वे झूठ बोलते हैं। अच्छे शर्ट और पैंट पहनने वालों और लिपस्टिक लगाने वालों से सावधान रहना चाहिए।”

जब एक महिला पत्रकार ने उनके इस विवादित बयान पर सवाल किया, तो विजयराघवन ने उसे प्यार भरी टिप्पणी बताते हुए कहा, “यह तो पत्रकारों के प्रति प्रेम से की गई टिप्पणी थी।” हालाँकि, सवाल पर जोर देने के बाद उन्होंने इस मामले को डायवर्ट करने की कोशिश और पूछा, “आपको लिपस्टिक से इतनी परेशानी क्यों है? क्या लिपस्टिक कोई गलत शब्द है?”

पत्रकारों ने जब उन्हें घेरा, तो उनका लहजा बदल गया और उन्होंने कहा, “आमतौर पर आप लोग हमारे बारे में काफी कुछ कहते हैं, तो बदले में आपको भी कुछ सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए। मीडिया भी झूठ बोलकर लोगों को गुमराह कर सकता है, और ऐसे मामलों में उनके पहनावे और शब्दों का असर होता है।”

इस बयान के बाद से विजयराघवन की आलोचना हो रही है, खासकर उनके महिलाओं के पहनावे पर की गई टिप्पणी को लेकर, जिसे लिंगभेदी और अपमानजनक माना जा रहा है। बता दें कि विजयराघवन लोकसभा और राज्यसभा के भी सदस्य रह चुके हैं। वो सीपीएम के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी हैं।

मौलाना मसूद की गर्लफ्रेंड कॉन्वेंट स्कूल की मास्टरनी… उसी स्कूल की हिंदू लड़कियों की फोटो भेजती अपने बॉयफ्रेंड को, फिर वो करता था ब्लैकमेल/अश्लील हरकत

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी का एक मौलाना हिन्दू लड़कियों को उनके फोटो के सहारे ब्लैकमेल करता था। यह फोटो उसे उसकी एक प्रेमिका देती थी। हिन्दू लड़कियों के परिजनों ने मौलाना के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। पुलिस ने मौलाना को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखीमपुर खीरी के नीमगाँव थाना क्षेत्र का एक मौलाना मसूद खां हिन्दू लड़कियों को ब्लैकमेल करता था। मौलाना मसूद पास के ही एक गाँव का रहने वाला है। मसूद इन हिन्दू लड़कियों को उनके फोटो के सहारे धमकाता था। यह फोटो उसे कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाने वाली उसकी दोस्त प्रियंका देती थी।

प्रियंका मौलाना मसूद को जिन लड़कियों के फोटो देती थी, वह उसके ही स्कूल में पढ़ती हैं। इस स्कूल का संचालक भी मसूद नाम का ही एक दूसरा व्यक्ति है। मौलाना मसूद एक दुकान भी चलाता है। एक पीड़िता जब एक दिन उसकी दुकान पर रिचार्ज के लिए पहुँची तो उसने उसका हाथ पकड़ लिया।

मौलाना मसूद ने हिन्दू लड़की का फ़ोन लिया और उसमें भी कुछ गड़बड़ी की। इसके बाद उसने हिन्दू लड़की का पीछा किया और उसके साथ अश्लील हरकत की। सितम्बर, 2024 में भी उसने इसी हिन्दू बालिका के साथ छेड़खानी की और धमकाया कि वह उसकी अश्लील फोटो बना लेगा। उसने व्हाट्सएप पर भी मैसेज करके लड़की को धमकाया।

इस संबंध में उसके खिलाफ पीड़िता के भाई ने FIR दर्ज करवाई है। FIR के बाद जब पुलिस ने मौलाना के फोन की जाँच की तो उसमें दर्जनों हिन्दू लड़कियों के फोटो और अश्लील वीडियो निकले। इनमें से फोटो उसी कान्वेंट स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों के हैं जहाँ उसकी दोस्त प्रियंका पढ़ाती है।

मौलाना मसूद पर हिन्दू लड़की का धर्मांतरण करने का आरोप भी लगा है। मौलाना मसूद के विरुद्ध दो मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें मौलाना मसूद के साथ ही कॉन्वेंट संचालक मसूद और उसकी दोस्त प्रियंका को भी आरोपित बनाया गया है।

पुलिस ने मौलाना मसूद को गिरफ्तार कर लिया है जबकि प्रियंका और स्कूल संचालक मसूद की तलाश जारी है। ऑपइंडिया को नीमगांव थाना की एसओ सुनीता कुशवाहा ने बताया है कि जल्द ही इन दोंनो को भी गिरफ्तार किया जाएगा और मामले में अभी विवेचना जारी है। उन्होंने यह भी बताया है कि पीड़िताओं के नाबालिग होने के एंगल से भी जाँच चल रही है।

लखनऊ के नीलमाथा मंदिर की दुर्गा प्रतिमा को मशीन से काट किया खंडित, बवाल के बाद पुलिस तैनात: मांस फेंकने पर इससे पहले अलीमा हुई थी अरेस्ट महिला

लखनऊ के नीलमथा में मंदिर में स्थापित माँ दुर्गा की प्रतिमा को उपद्रवियों ने खंडित कर दिया है। माता के चार हाथों को मशीन से काट दिया गया था। इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुँच गए। हालात को देखते हुए प्रशासन ने वहाँ भारी पुलिस बल तैनात किया है। पुलिस ने लोगों के गुस्सा को देखते हुए अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच कर रही है।

कैंट थाना क्षेत्र के नीलमथा में मरी माता मंदिर में माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। गुरुवार (10 अक्टूबर 2024) की सुबह मंदिर के पुजारी जब पूजा करने पहुँचे तो उन्होंने देखा प्रतिमा की हाथ कटी हुई है। उपद्रवियों ने ग्लेडर मशीन से प्रतिमा का हाथ काट दिया है। इसके बाद पुजारी ने घटना की जानकारी स्थानीय लोगों को दी। सूचना मिलते ही वहाँ भीड़ जमा हो गई और लोग आक्रोशित हो गए।

गुस्साए लोगों को शांत कराते हुए पुलिस ने आरोपितों को चार दिनों में पकड़ने का आश्वासन दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लखनऊ में विपक्षी और विधर्मी माहौल खराब करने का काम कर रहे हैं। लगातार दूसरे दिन हिंदुओं की भावनाएँ आहत की गई हैं। बाजारखाला में मंदिर के बाहर विधर्मी महिला द्वारा मांस के टुकड़े फेंकती है। फिर मंदिर में प्रतिमा के हाथ काट दिए जाते हैं।

बता दें कि बुधवार (9 अक्टूबर 2024) को शहर के बाजार खाला थाना क्षेत्र स्थित एक मंदिर के बाहर मांस के टुकड़े पड़े मिले थे। इसकी जानकारी मिलते ही लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया था। पुलिस की जाँच में सामने आया कि मांस का टुकड़ा कोई कुत्ता लेकर आया था। इस मामले में अलीमा नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया गया था।

जाँच में सामने आया कि इलाके में रहने वाली अलीमा नाम की महिला मीट की दुकान से मांस लाकर कुत्तों को डालती थी। नवरात्रि के दौरान भी उसने ऐसा करना जारी रखा। आखिरकार पुलिस ने महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया।

नीलमथा मंदिर की घटना को लेकर थाना कैंट प्रभारी गुरप्रीत कौर ने बताया कि इलाके में माहौल बिगड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया है। हालात सामान्य हैं। कौर ने कहा कि अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जाँच की जा रही है। आरोपितों को जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

एडीसीपी पूर्वी पंकज सिंह ने बताया कि अराजक तत्वों ने माता की प्रतिमा को खंडित कर दिया था। मंदिर में विधि-विधान से दूसरी प्रतिमा लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस जाँच कर रही है। आरोपितों की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। आरोपितों को बहुत जल्द पकड़ लिया जाएगा।

गोंडा में भी बवाल

लखनऊ के अलवा गोंडा में भी माहौल खराब करने की कोशिश की गई है। गोंडा के छपिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मसकनवा बाजार में देर रात कुछ अराजक तत्वों ने दुर्गा पूजा पंडाल पर जमकर ईंट-पत्थर बरसाए। आतिशबाजी से नाराज होकर के उपद्रवियों ने पथराव किया। इससे वहाँ के हालात तनावपूर्ण हो गए।

इस घटना की जानकारी मिलते ही गोंडा के डीएम और एसपी मौके पर पहुँचे। उन्होंने किसी तरह लोगों को समझा-बुझा कर उन्हें शांत किया। इस मामले में छपिया थाने की पुलिस ने एक दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसके साथ ही पूरे मामले की जाँच शुरू की है।

कुशीनगर में भी बवाल

कुशीनगर में सोमवार (7 अक्टूबर) को दुर्गा प्रतिमा स्थापना की शोभायात्रा निकाली गई थी। शोभायात्रा में माता रानी के भजन बजाने पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विवाद शुरू कर दिया। कुछ देर में बड़ी संख्या में शामिल लोगों ने शोभायात्रा पर पथराव कर दिया। दूसरी तरफ से भी जवाब दिया जाने लगा।

हिंदू पक्ष के लोगों ने आरोप लगाया था कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने माता रानी की प्रतिमा में बने शेर को क्षतिग्रस्त कर दिया। पडरौना कोतवाली क्षेत्र में हुई इस घटना के बारे में जब सूचना मिली तो एएसपी सीओ समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचे थे और हालात को काबू में किया। घटना के बाद कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था.