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दीवाली से पहले दिल्ली में पटाखे बैन, AAP सरकार करेगी कार्रवाई: पंजाब में लगातार जल रही पराली, अब तक 800+ मामले

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने दीवाली से पहले पटाखों पर पूर्णतया बैन लगा दिया है। AAP सरकार ने यह निर्णय दिल्ली में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए लिया है। लेकिन दूसरी तरफ पंजाब की AAP सरकार पंजाब के भीतर पराली का जलना नहीं रोक पा रही है। पंजाब में जलने वाली पराली दिल्ली के वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (DPCC) ने सोमवार (14 अक्टूबर, 2024) को एक आदेश जारी करके पटाखों की खरीद-बिक्री और बनाए जाने समेत उनके फोड़े जाने पर प्रतिबंध लगाया है। यह प्रतिबंध 1 जनवरी, 2024 तक जारी रहेगा। इस बीच पटाखे पाए जाने पर जुर्माना और कार्रवाई की जाएगी।

DPCC ने दिल्ली पुलिस को इस संबंध में कार्रवाई करने के आदेश भी दिए हैं। हालाँकि, दीवाली के पटाखे जलने से पहले ही दिल्ली की हवा खराब होना चालू हो चुकी है। सोमवार (14 अक्टूबर, 2024) को दिल्ली के आनंद विहार का AQI 302 के स्तर पर था जो कि अत्यंत खतरनाक है।

दिल्ली की AAP सरकार जहाँ एक ओर राजधानी में पटाखे बैन करके प्रदूषण रोक रही हैं वहीं पंजाब के भीतर पराली जलने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया अहि कि पंजाब के भीतर अब तक 800 से अधिक पराली जलने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं जबकि धान की कटाई अभी पूरी तरीके से चालू भी नहीं हुई है।

पंजाब के तरनतारन, अमृतसर, पटियाला और संगरूर से सबसे अधिक पराली जलने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। पंजाब में भी AAP सरकार है लेकिन वह इसे नहीं रोक पा रही है। 2023 में भी देश में पराली जलने के सर्वाधिक मामले पंजाब से ही सामने आए थे। 2023 में पराली प्रदूषण के मामलों में पंजाब का 93% से अधिक का योगदान था।

2023 में पंजाब में पराली जलाने की 36663 घटनाएँ हुई थीं। हरियाणा में इसी दौरान पराली जलाने की मात्र 2303 घटनाएँ ही हुईं थी। पंजाब में इसी दौरान कुछ शहरों का AQI भी खराब हो गया है।

बहराइच में हत्या, हावड़ा में आगजनी, गोंडा में पथराव, गढ़वा में रोका रास्ता… इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर दुर्गा पूजा: 10 घटनाएँ, जो मीडिया में आई

इस्लामी कट्टरपंथियों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में दुर्गा पूजा और हिन्दुओं को निशाना बनाया है। मुस्लिम कट्टरपंथियों ने कहीं पंडाल पर पथराव किया गया तो कहीं मूर्ति विसर्जन के जुलूस पर हमला हुआ, जुलूस के रास्तों को लेकर भी विवाद हुआ। बहराइच में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल और असम तक पथराव और हिंसा हुई है। यह हिंसा हिन्दुओं के त्योहार नवरात्र के साथ ही चालू हो गई थी। ऑपइंडिया इन्हीं घटनाओं का संकलन एक साथ कर रहा है।

बहराइच में हिंसा, हिन्दू युवक की हत्या

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान रविवार (13 अक्टूबर, 2024) को हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में मुस्लिम पक्ष द्वारा विसर्जन जुलूस में शामिल हिंदू श्रद्धालुओं पर पत्थर और गोलियाँ बरसाई गईं। जिस मकान से गोलियाँ चलाई गईं हैं, वह सलमान का है। गोली लगने से 22 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा की मौत हो गई है।

रामगोपाल मिश्रा हत्याकांड में मुस्लिम समुदाय के 6 लोग नामजद किए गए हैं। हिंदू युवक की हत्या के बाद जिले के कई हिस्सों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई है। थोड़े समय के लिए प्रतिमाओं का विसर्जन भी रुका रहा। CM योगी आदित्यनाथ ने मामले में कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

हावड़ा के श्यामगंज में हिंसा

हावड़ा के श्यामगंज में रविवार (13 अक्टूबर, 2024) को एक मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू पंडालों पर हमला किया। मुस्लिम भीड़ ने दुर्गा पूजा पंडालों को नष्ट करना चालू कर दिया। उन्होंने मूर्तियों को आग लगा दी और कई पंडालों को तबाह किया। यह मुस्लिम भीड़ उस घाट पर भी पहुँची जहाँ देवी मूर्तियों का विसर्जन होना था। यहाँ इस भीड़ ने पथराव किया। आगजनी की भी सूचना आ रही है। बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की माँग की है।

कौशाम्बी में विसर्जन यात्रा पर हमला

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में माँ दुर्गा के विसर्जन जुलूस पर हमला हुआ। इस हमले में जुलूस में शामिल महिला श्रद्धालुओं को भी निशाना बनाया गया। हमले के दौरान तलवारें लहराई गईं और पत्थरबाजी हुई। घटना में कई श्रद्धालुओं को चोटें आने की खबर है। शनिवार (12 अक्टूबर, 2024) को हुए इस हमले का आरोप मुस्लिम समुदाय के लगभग 1 दर्जन लोगों पर लगा है जिसमें ख़ातूनें भी शामिल हैं। माँ दुर्गा की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया और एक महिला से दुष्कर्म की भी कोशिश हुई। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

बलरामपुर में दुर्गा पूजा पंडाल पर हमला

उत्तर प्रदेश के ही बलरामपुर में दुर्गा पूजा के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पंडाल में घुसकर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया। आरोपितों में कलीम, अरबाज़, इमरान और मुख़्तार शामिल हैं, जिन्होंने महिला श्रद्धालुओं से अभद्रता की और पंडाल में लगे भगवा ध्वज को नोचकर नाली में फेंक दिया। 

महिलाओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना दुर्गा पूजा के शांतिपूर्ण उत्सव में बाधा डालने का एक स्पष्ट उदाहरण है। हिंदू संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और आरोपितों को कड़ी सजा देने की माँग की। पुलिस ने भी मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

गोंडा में दुर्गा पूजा के दौरान पथराव

गोंडा के मसकनवा बाजार इलाके में बुधवार (9 अक्टूबर, 2024) को दुर्गा पूजा पंडाल में मूर्ति स्थापित करने के बाद देवी की आँखों पर से पट्टी हटाई गई थी। इस मूर्ति की स्थापना बीते कई सालों से की जाती है। इस मौके पर यहाँ बड़ी संख्या में हिन्दू इकट्ठा थे।

पूजा अर्चना के बाद कुछ हिन्दू बच्चे इस पंडाल के बाहर पटाखे फोड़ने लगे। पटाखों की आवाज सुन कर पास में रहने वाले मुस्लिम भड़क गए। मुस्लिम परिवार के लोग बाहर निकल कर हिन्दुओं को गालियाँ देने लगे और हमलावर हो गए। उन्होंने पहले हिन्दुओं पर पथराव किया और फिर लाठी डंडों से हमला कर दिया।

इस हमले में मुन्ना, सुल्तान और असलम तथा बाकी लोगों के मुस्लिम परिवार शामिल थे। मुस्लिमों की इस पत्थरबाजी में लगभग 10-12 हिन्दू गंभीर रूप से घायल हो गए। मुस्लिमों को जब हिन्दुओं ने शांत करने की कोशिश की तो वह और उग्र हो गए तथा आसपास से बाकी मुस्लिमों को भी बुलाया।

कोलकाता में माइक की आवाज पर विवाद

कोलकाता में एक दुर्गा पूजा पंडाल में मुस्लिमों ने माइक की आवाज को लेकर विवाद खड़ा किया। अजान के दौरान माइक की आवाज को बंद करने की माँग करते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा समारोह को बाधित किया। आयोजकों ने उसकी बात मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हंगामा शुरू कर दिया।

शिकायत में कहा गया है कि 11 अक्तूबर की सुबह न्यू बंगाल स्पोर्टिंग क्लब द्वारा जब अष्टमी और नवमी के अनुष्ठान किए जा रहा था, तब आज दोपहर 1.13 बजे लगभग 50-60 उपद्रवी लोग आए और उन्होंने पूजा को रोकने को कहा और पूजा को भंग करने का प्रयास किया। उन्होंने धमकी दी कि अगर पूजा नहीं रोकी गई तो वो मां दुर्गा की प्रतिमा को तोड़ देंगे। इस दौरान उन्होंने धक्का-मुक्की की और हमारी महिला सदस्यों के खिलाफ गलत शब्दों का भी इस्तेमाल किया।

कुशीनगर में दुर्गा मूर्ति पर पथराव

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक और गंभीर घटना सामने आई, जब दुर्गा पूजा के दौरान मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मूर्ति पर पथराव किया। इस घटना में 10 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए आरोपितों को गिरफ्तार किया और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी। हिंदू समुदाय ने प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

करीमगंज में मजहबी हिंसा

असम के करीमगंज में दुर्गा पूजा के दौरान मजहबी हिंसा भड़क उठी। इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा स्थल पर पथराव किया, जिसके बाद दोनों समुदायों के बीच झड़पें शुरू हो गईं। पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया और स्थिति को काबू में लाया। पुलिस ने इस मामले में सहाबुल अहमद (21 साल), अब्दुल अहद (18 साल) और एक नाबालिग को भी गिरफ्तार किया है।

गढ़वा में पत्थरबाजी

झारखंड के गढ़वा में माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन जुलूस को मुस्लिम समुदाय द्वारा रोके जाने पर मजहबी तनाव फैल गया। यहाँ 2 अलग-अलग घटनाओं में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हिन्दू पक्ष जिस रास्ते से जुलूस निकालना चाह रहा था, उस पर मुस्लिम समुदाय ने ऐतराज जताया। यहाँ रविवार (13 अक्टूबर) को हिन्दू समुदाय के लोग हर वर्ष की तरह प्रतिमा लेकर विसर्जन के लिए निकले थे। रास्ते में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने प्रतिबंधित रास्ता बताकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद यात्रा पर पथराव भी हुआ।

त्रिपुरा में दुर्गा पूजा से पहले ही हिंसा

रविवार (9 अक्टूबर, 2024) को त्रिपुरा में मजहबी हिंसा हुई। यहाँ इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिन्दुओं के घरों और दुकानों पर हमला किया। इस दौरान फायरिंग भी हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। हमलावरों ने हिंसा रोकने पहुँची पुलिस को भी निशाना बनाया। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हुए हैं। यहाँ रविवार को दुर्गापूजा के लिए हिन्दू समुदाय के कुछ लोग सड़क पर चंदा माँग रहे थे।

इसी दौरान एक मुस्लिम ड्राइवर से उनकी बहस हो गई, जो बाद में बड़े विवाद में बदल गई। थोड़ी देर में ड्राइवर के समर्थन में आसपास के इलाकों से इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ जमा हो गई। भीड़ के हाथों में लाठी-डंडे और अन्य हथियार थे। उन्होंने न केवल चंदा माँग रहे हिन्दुओं पर हमला किया, बल्कि आसपास के निवासियों पर भी हमला कर दिया।

यह जानकारी उन्हीं घटनाओं की है, जो मीडिया में सामने आई हैं या जिनकी जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ को देखते हुए कहा जा सकता है कि कई घटनाएँ संभवतः बाकी शोर शराबे में दब गई होंगी।

 

अब्दुल+मुस्लिम गैंग ने रामगोपाल मिश्रा को तलवारों से काटा, गोली मारी: माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान बहराइच में हत्या, CM योगी के सख्त आदेश

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान रविवार (13 अक्टूवर 2024) को हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में मुस्लिम पक्ष द्वारा विसर्जन जुलूस में शामिल हिंदू श्रद्धालुओं पर पत्थर और गोलियाँ बरसाई गईं। जिस मकान से गोलियाँ चलाई गईं हैं, वह सलमान का है। गोली लगने से 22 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा की मौत हो गई है।

रामगोपाल मिश्रा हत्याकांड में मुस्लिम समुदाय के 6 लोग नामजद किए गए हैं। हिंदू युवक की हत्या के बाद जिले के कई हिस्सों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई है। थोड़े समय के लिए प्रतिमाओं का विसर्जन भी रुका रहा। CM योगी आदित्यनाथ ने मामले में कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

यह घटना बहराइच जिले के थानाक्षेत्र हरदी की है। रविवार को यहाँ हरिमिलन मिश्रा ने पुलिस में तहरीर दी। तहरीर में हरिमिलन ने बताया कि घटना के दिन उनका भाई रामगोपाल मूर्ति विसर्जन देखने महराजगंज बाजार गया था। इसी जगह अब्दुल हमीद, सरफराज, फहीम और साहिर खान सहित 4 अन्य अज्ञात लोग बैठे थे। इन सभी ने रामगोपाल को घर के अंदर खींच लिया। यहाँ रामगोपाल को तलवारों से काटा गया और बाद में गोली मार दी गई।

इस हमले की वजह से रामगोपाल की मौके पर ही मौत हो गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपितों को उन्होंने खुद, उनके भाई राजन और एक अन्य युवक किशन ने पहचाना है। हरिमिलन मिश्रा ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस मामले में अब्दुल हमीद, सरफराज, फहीम, साहिर खान, ननकऊ और मारूफ अली को नामजद करते हुए 4 अन्य अज्ञात आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

इन आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 190 और 103 (2) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। बहराइच की पुलिस अधीक्षक IPS वृंदा शुक्ला ने बताया कि जिस घर से गोली चलाई गई है, उसके मालिक का नाम सलमान है। इस घटना में फिलहाल 16 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

हत्या के बाद आगजनी और तोड़फोड़

रामगोपाल मिश्रा की हत्या की खबर मिलते ही जिले में साम्प्रदायिक तनाव फैल गया। कुछ जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की गई है। पुलिस ने बल प्रयोग कर के भीड़ को तितर-बितर किया है। मृतक का शव लेकर लोगों ने जाम लगाया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।

बहराइच की पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने बताया कि घटना के बाद उत्पात करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। ऑपइंडिया के पास पुलिस द्वारा बल प्रयोग के वीडियो मौजूद हैं।

पुलिस की मौजूदगी में हुई हत्या?

रामगोपाल मिश्रा की हत्या जिस जुलूस में हुई, उसके साथ पुलिस बल चल रहा था। जिस महराजगंज इलाके में यह विवाद हुआ, वह मुस्लिम बहुल बताया जाता है। हिंसा का वह वीडियो भी ऑपइंडिया के पास है, जिसमें पुलिस भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश कर रही है।

एक अन्य वीडियो में अन्य श्रद्धालु रामगोपाल का शव लेकर अस्पताल भागते दिखाई दे रहे है। विसर्जन जुलूस में शामिल एक बुजुर्ग ने बताया कि पुलिस ने उन पर लाठियाँ बरसाईं हैं। फ़िलहाल हरदी के SHO और महसी चौकी इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया है।

CM योगी की तरफ से सख्त एक्शन के आदेश

इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान आया है। उन्होंने उपद्रवियों से सख्ती से निबटने के निर्देश दिए हैं। हिंसा के बाद तनाव को देखते हुए प्रतिमाओं का विसर्जन कुछ समय के लिए रोक दिया गया था।

इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी धर्मगुरुओं से बातचीत कर के प्रतिमाओं का विसर्जन सकुशल सम्पन्न करवाएँ। बहराइच की पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने भी बताया कि कुछ समय के व्यवधान के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन सही सलामत सम्पन्न करवाया गया।

शोएब ने शुभम बन किया हिन्दू महिला को मैसेज-कॉल, इस्लाम कबूलने का दबाव: हिन्दू संगठनों ने दम भर मारा, ऋषिकेश पुलिस को सौंपा

उत्तराखंड के ऋषिकेश में शोएब नाम के युवक ने शुभम बन कर एक हिन्दू महिला से बातचीत करने की कोशिश की। उसने महिला पर इस्लाम अपनाने का दबाव डाला। महिला ने इस पर प्रश्न उठाए तो उसने धमकी दी और इसके अंजाम भुगतने को कहने लगा। हिन्दू महिला ने इसकी शिकायत अपने पति से की, जिसके बाद शोएब को हिन्दू संगठनों ने शोएब को पकड़ कर पीट दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऋषिकेश के एक व्यापारी विशाल अग्रवाल और उनकी पत्नी शहर के ही एक जिम में जाते हैं। यहाँ पर शोएब नाम का एक युवक भी आता है। शोएब ने लगभग 20 दिन पूर्व व्यापारी विशाल अग्रवाल की पत्नी को अपना नाम शुभम बताया और बातचीत करने लगा।

शोएब ने विशाल की पत्नी का नम्बर भी कहीं से तलाश लिया और फर्जी आईडी से उनको मैसेज करने लगा। वह मैसेज में लगातार उलटी सीधी बातें करता था। इसके बाद जब महिला ने शोएब को मना किया तो वह अश्लीलता पर उतर आया। उसने बदतमीजी करना चालू कर दिया। शोएब ने महिला के साथ जिम में भी छेड़खानी की।

शोएब ने महिला पर धर्मांतरण कर इस्लाम अपनाने को कहा। ना मानने पर उसने अंजाम भुगतने की धमकी भी दी। परेशान होकर महिला ने यह जानकारी अपने पति विशाल अग्रवाल को दी। इसके बाद यह मामला स्थानीय हिन्दू संगठनों के पास पहुँचा।

हिन्दू संगठनों ने एक दिन शोएब को दबोच लिया और उसकी धुनाई कर दी। इसके बाद उसका ऋषिकेश में जुलूस भी निकाला गया। उसको पीटते हुए हिन्दू संगठनों के लोग ऋषिकेश कोतवाली तक ले गए। जाँच में पता चला कि शोएब ऋषिकेश का ही रहने वाला और मंडी में काम करता है।

शोएब के खिलाफ हिन्दू संगठनों ने शिकायत भी दर्ज करवाई है। हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया है कि लगातार ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं और आगे अगर ऐसा हुआ तो वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। पुलिस ने उसके खिलाफ छेड़छाड़ और धमकाने का मामला दर्ज किया है।

गढ़वा में कट्टरपंथियों ने रोकी माँ दुर्गा की विसर्जन यात्रा, बवाल के बाद झारखंड पुलिस ने दागी गोलियाँ और आँसू गैस के गोले: हिंदुओं ने लगाया मुस्लिमों की तरफदारी का आरोप

झारखंड के गढ़वा में माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन जुलूस को मुस्लिम समुदाय द्वारा रोके जाने पर सांप्रदायिक तनाव फैल गया। यहाँ 2 अलग-अलग घटनाओं में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हिन्दू पक्ष जिस रास्ते से जुलूस निकालना चाह रहा था, उस पर मुस्लिम समुदाय ने ऐतराज जताया। नाराज हिन्दुओं ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया है। वहीं, मतगढ़ी में पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प भी हुई है।

पहला मामला गढ़वा के मतगढ़ी का है। यहाँ रविवार (13 अक्टूबर) को हिन्दू समुदाय के लोग हर वर्ष की तरह प्रतिमा लेकर विसर्जन के लिए निकले थे। रास्ते में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने प्रतिबंधित रास्ता बताकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में तनातनी हो गई। वाद-विवाद के बीच हालात बिगड़ गए और पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस दौरान पुलिस ने मामले को सँभालने की कोशिश की।

आखिरकार, पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज कर दिया और आँसू गैस के गोले भी छोड़े। इस दौरान पुलिस ने फायरिंग भी की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हिन्दू पक्ष ने पुलिस पर मुस्लिमों की तरफदारी का आरोप लगाया। इसको लेकर पुलिस और हिन्दू संगठनों में झड़प हो गई। पुलिस का कहना है कि जिस रास्ते से विसर्जन यात्रा निकाली जा रही है, वहाँ पहले भी विवाद हो चुका है।

हालाँकि प्रदर्शनकारी इसे अपनी पुरानी परम्परा बताते हुए यात्रा ले जाने पर आमादा थे। इस हिंसक झड़प के दौरान एक व्यक्ति के पैर में गोली भी लगने की बात कही जा रही है। इस घटना में कुछ पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गए हैं। वहीं, कई श्रद्धालुओं को पुलिस ने हिरासत में लिया गया है। हालात को देखते हुए इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। प्रतिमा विसर्जन नहीं होने से तनाव और बढ़ गया है।

लखना गाँव में भी रास्ते में रुकावट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दूसरा मामला गढ़वा जिले के ही लखना गाँव का है। यहाँ हिन्दू समुदाय ने हर वर्ष की भाँति इस बार भी दुर्गा पूजा कार्यक्रम का आयोजन किया था। आयोजन के बाद शनिवार (12 अक्टूबर 2024) को श्रद्धालु प्रतिमा को विसर्जन करने जा रहे थे। रास्ते में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विसर्जन जुलूस को रोक दिया। उनका कहना था कि उस रास्ते से विसर्जन यात्रा नहीं निकाली जा सकती है।

इस बात को लेकर दोनों समुदायों के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों की भीड़ जुटते देखकर मौके पर पुलिस व अन्य प्रशासनिक अधिकारी पहुँचे। प्रशासन ने दोनों पक्षों से लम्बी वार्ता की जो देर रात तक चली। हालाँकि, इस बातचीत का कोई हल नहीं निकला। घंटों प्रतिमा रास्ते में ही रुकी रही। इससे श्रद्धालु आक्रोशित हो गए। उन्होंने प्रशासन पर ढिलाई का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।

घटनास्थल पर पहुँचे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने मुस्लिम पक्ष पर जोर-जबरदस्ती करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस मार्ग पर प्रतिमा का विसर्जन रोका गया है, उसको पक्की सड़क के तौर पर सरकार ने अपने पैसों से बनवाया है। बीजेपी MLA का यह भी दावा है कि इस मार्ग पर हर साल माता सरस्वती की प्रतिमा विसर्जन होता रहा है।

बकौल तिवारी, उसी राह पर जब ताजिया निकलता है तो हिन्दू मुस्लिमों को शर्बत पिलाते हैं। तिवारी ने सरकार की एकतरफा धर्मनिरपेक्षता पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने दावा किया कि जिस इलाके में मुस्लिम पक्ष ने माँ दुर्गा की विसर्जन यात्रा रोकी है, वहीं पर एक हिन्दू ने कब्रिस्तान के लिए अपनी जमीन दान कर दी थी।

झारखंड के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली झारखंड सरकार की आलोचना की है। उन्होंने इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने X हैंडल पर लिखा, “पुलिस विसर्जन रोककर धार्मिक उन्माद फैलाने वाले लोगों पर कारवाई करने की बजाय सिर्फ चिरौरी कर रही है।”

बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के DGP से कहा कि वो प्रतिमा विसर्जन रोकने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें, अन्यथा सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ सकता है। पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की आपसी बातचीत के बाद मामले का समाधान निकाल लिया गया है। पुलिस ने यह भी कहा कि विवाद की स्थिति कुछ बाहरी लोगों द्वारा पैदा की गई थी, जिस पर कार्रवाई की जाएगी।

घुसपैठ कर हरियाणा में बसे ही नहीं हैं रोहिंग्या मुस्लिम, चला रहे मदरसे भी: मौलवी बोले- हम ब्लैक में म्यांमार से आए, भारत में मेहमान बनकर रह रहे

हरियाणा के मुस्लिम बहुत मेवात क्षेत्र के नूहं में बाहर से आए हुए रोहिंग्या मुस्लिमों की एक बड़ी आबादी अवैध रूप से रह रही है। ये सभी म्यामांर से अवैध रूप से भारत में आए और यहाँ से नूहं में स्थापित हो गए। इन अवैध घुसपैठियों के रहने वाले अस्थायी आवास बनाया गया है। ये सभी साल 2016 में ही भारत आ गए थे और तभी से यहाँ रह रहे हैं। इनमें रहने के साथ-साथ मदरसा भी संचालित किया जा रहा है।

दरअसल, ऑर्गनाइजर ने हरियाणा विधानसभा चुनावों के दौरान इन अवैध घुसपैठियों से बात की थी। इसका वीडियो अब जारी किया गया है। ऑर्गेनाइजर की ओर से पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने यहाँ मदरसे में पढ़ाने वाले मौलाना और यहाँ पढ़ने वाले बच्चों से बात की। यहाँ पढ़ाने वाले यूनुस ने कहा कि यहाँ 400 रोहिंग्या रहते हैं। हालाँकि, उनकी जुबानी ये संख्या है, लेकिन वास्तविक संख्या कितनी है, ये किसी को नहीं पता।

ये वही क्षेत्र है, जहाँ से हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरन कॉन्ग्रेस नेता मामन खान से रिकॉर्ड जीत हासिल की है। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में उन्हें एकतरफा मत मिले। चुनाव प्रचार के दौरान मामन यहाँ के हिंदुओं को धमकाते हुए कहा था कि जिन लोगों ने मुस्लिमों के खिलाफ अन्याय किया है, उन्हें कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही मेवात छोड़ना पड़ेगा। मामन का नाम 2023 के मेवात दंगों में आया था।

नूहं के नांगली गाँव में पत्रकार पहुँचे। यहाँ बाँस आदि से छप्पर के रूप में एक अस्थायी ढाँचा बनाया गया है, जिस पर लिखा है ‘मदरसा इस्लामिया दारूल उलूम इल्यासिया’। ये ढाँचा एक बड़े भूभाग पर बनाया गया है। इसमें नमाजी टोपी पहने हुए बहुत सारे बच्चे और किशोर दिखाई देते हैं। इसमें जियाउर रहमान नाम के एक व्यक्ति है, जो खुद को मौलवी बताता है।

रहमान कहता है कि वह नहूँ में रहता है कि मदरसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए वह गाँव में आता है। रहमान खुद भी म्यामांर (बर्मा) का रहने वाला है। रहमान ने बताया कि साल 2016 से यह मदरसा चल रहा है। यहाँ पढ़ने वाले सारे बच्चे म्यामांर के ही है। मदरसे में ही बच्चों को खाना भी मिलता है। रात में रहते भी हैं। उसने बताया कि यहाँ कभी रेड नहीं पड़ी और ना ही किसी ने पूछा कि वे कहाँ के रहने वाले हैं।

रहमान ने बताया कि उसे भारत में किसी तरह का खतरा नहीं है, क्योंकि वह यहाँ मेहमान के हिसाब से रह रहा है। बर्मा से आया और व्यक्ति मोहम्मद यूनुस नाम का मिला। उसने बताया कि वह बच्चों को अरबी और अंग्रेजी पढ़ाता है। यूनुस ने बताया कि यहाँ रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों की आबादी लगभग 400 है। यूनुस ने बताया कि भारत में आने के लिए उन सबों के पास कुछ भी नहीं है।

यूनुस ने कहा, “ना हमारे पास पासपोर्ट है, ना वीजा है। हम कैसे-कैसे करके यहाँ आ गए, यह बहुत मुश्किल काम है। हम ब्लैक में आ गए।” ब्लैक से संभवत: यहाँ पैसे देकर अवैध तरीके से घुसपैठ करने से संबंधित है। यूनुस ने बताया कि वह बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए भारत में घुसा। उन्होंने कहा कि वहाँ कुछ लोग उसे मिले, जिन्होंने उसे बॉर्डर पार कराया और वहाँ से वह बंगाल में रहने लगा।

यूनुस ने बताया कि बॉर्डर पार कराने वालों ने कुछ लोगों से पैसा भी लिया और कुछ लोगों को बिना पैसे का ही बॉर्डर पार करा दिया। यूनुस ने बताया कि वह उसके साथ अधिकांश लोग म्यामांर में लड़ाई शुरू होने के बाद 2016 में भारत में आए। उसका कहना है कि कुछ लोग तो भारत में साल 2012 में ही आ गए थे और तभी वे यहाँ रह रहे हैं। यूनुस का दावा है कि उसके पास UN का रिफ्यूजी कार्ड है।

हालाँकि, जब पत्रकारों ने उससे रिफ्यूजी कार्ड दिखाने के लिए कहा तो वह बोला कि वह घर पर है और घर कहीं और है। यूनुस ने बताया कि इलाके में कुछ भी होता है तो उसे खबर कर दिया जाता है कि घर से बाहर नहीं निकलना है। यूनुस ने बताया कि म्यामांर से भागे हुए रोहिंग्या हैदाराबाद, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा में रह रहे हैं।

इस मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों से जब पूछा गया कि वे पढ़ाई करके क्या करेंगे तो 99 प्रतिशत ने कहा कि वे हाफिज बनेंगे और अल्लाह की सेवा करेंगे। इन बच्चों को जाकिर नाईक के बारे में अच्छे से पता है। लगभग 12 साल के एक बच्चे ने कहा कि जाकिर नाईक इसलिए अच्छा लगता है, क्योंकि वह लोगों को दीन (इस्लाम) के रास्ते पर लाता है। यानी लोगों का इस्लाम में धर्मांतरण कराता है।

किशोर ने कहा कि जो अल्लाह को नहीं मानता है कि वह दोजख की आग में जलेगा। एक छोटे से बच्चे ने कलमा पढ़ कर सुनाया और कहा कि इसका मतलब है कि अल्लाह के सिवा और कोई भगवान नहीं है। यही बात एक किशोर ने भी कहा है। हालाँकि, बच्चे हर शब्द बोलने से पहले अपने मौलवी या हाफिज की तरफ देख रहे थे। जाहिर है कि वो काफी सोचकर बोल रहे थे।

दरअसल, इस मदरसे में पढ़ाने वाले यूनुस ने दावा किया कि रोहिंग्या मुस्लिम UN के रिफ्यूजी कार्ड पर भारत में आकर रह रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ वह कह रहा है कि बांग्लादेश सीमा के जरिए पैसे देकर कुछ लोगों की सहायता से भारत में घुसा था। इस तरह की विरोधाभासी बातें संदेह पैदा करती है। अगर यूनुस स्वयं स्वीकार करता है कि यहाँ 400 रोहिंग्या रहते हैं तो वास्तविक संख्या कितनी होगी, इसकी सही जानकारी शायद ही किसी को होगी।

पंचायत के लिए डासना मंदिर जा रहे हिन्दुओं पर लाठीचार्ज; गाजियाबाद पुलिस का कड़ा पहरा: भाजपा MLA ने कमिश्नर को बताया तानाशाह

गाजियाबाद के डासना मंदिर में हिन्दू संगठनों ने रविवार (13 अक्टूबर 2024) को महापंचायत बुलाई गई थी। इस पंचायत का आयोजन महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद के समर्थन में किया गया था। भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर समेत कई साधु-संतों ने इस पंचायत को समर्थन दिया था। पुलिस ने इस ऐलान को देखते हुए निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। अब इस आयोजन को हर हाल में पूरा करने में जुटे हिन्दू संगठनों और पुलिस के बीच झड़प की खबर है। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया और भीड़ को मंदिर तक पहुँचने से पहले ही रोक दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंचायत में शामिल होने के लिए गाजियाबाद की ही लोनी विधानसभा से भाजपा विधायक नन्द किशोर गुर्जर अपने कई साथियों के साथ डासना मंदिर की तरफ जा रहे थे। रास्ते में उन्हें पुलिस ने रोका, तो उनके समर्थक बहस करने लगे। कुछ ही देर में यह बहस नोकझोक में बदल गई। विधायक के समर्थक पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड को तोड़ कर मंदिर की तरफ जाना चाह रहे थे। हालाँकि पुलिस उनको किसी भी रूप में आगे नहीं बढ़ने दे रही थी।

लाठीचार्ज का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। भीड़ का दबाव बढ़ता देख कर थोड़ी ही देर बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज के बाद भीड़ तितर-बितर हुई। लाठीचार्ज से नाराज हिन्दू संगठन के सदस्यों ने हाइवे पर जाम लगाने की कोशिश की। इस बीच डासना मंदिर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर मंदिर के चारों तरफ से बैरिकेड लगा दिए गए।

भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर को तानाशाह बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों लोगों को रास्ते में ही रोक दिया गया। कई लोगों के नजरबंद होने का दावा करते हुए नन्द किशोर गुर्जर ने कहा कि पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं के कपड़े तक फाड़े गए हैं। बकौल नंदकिशोर गुर्जर मंदिर पर हमला कर के कई लोगों की हत्याओं की साजिश रचने वालों के बजाय पुलिस सिर्फ हिन्दुओं पर जोर दिखा रही है।

नन्द किशोर गुर्जर ने कहा कि पंचायत का फैसला साफ है कि पहले तो रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को बाहर किया जाए। दूसरी माँग के तौर पर उन्होंने डासना मंदिर पर हमला करने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई माँगी। तीसरी और अंतिम माँग के तौर पर उन्होंने कहा कि मंदिरों पर हमला करने वालों, खाने-पीने की चीजों में थूक और मूत्र मिला कर जेहाद करने वालों का केस फ़ास्टट्रैक कोर्ट में चला कर जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए। इस दौरान उन्होंने गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर की गिरफ्तारी की भी माँग की।

मंदिर के मुख्य द्वारा पर तैनात एक पुलिसकर्मी द्वारा किसी संत को माँ की गाली देने का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने इस वीडियो की जाँच व आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कुछ लोग पुलिस की हिरासत में भी बताए जा रहे हैं।

कबाड़ का काम करने गया पुणे, अब मुंबई में बाबा सिद्दीकी की हत्या में धराया: कूरियर से शूटर्स को मिले हथियार-पैसे, लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गे ने फेसबुक पोस्ट से ली जिम्मेदारी

मुंबई के एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की निर्मम हत्या ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है। बांद्रा (ईस्ट) में 12 अक्टूबर को हुई इस हत्या के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपितों की पहचान कर ली है, और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। हत्या को अंजाम देने वाले अपराधियों का संबंध कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से है, जो पहले भी कई गंभीर अपराधों में शामिल रहा है। बिश्नोई गैंग से जुड़े व्यक्ति ने फेसबुक पर हत्याओं की जिम्मेदारी ली है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में जिन तीन आरोपितों की पहचान हुई है, उनमें से एक हरियाणा का रहने वाला गुरमैल सिंह है। तो बाकी के दोनों उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रहने वाले धर्मराज कश्यप और शिवा गौतम। शिवा गौतम अभी फरार है।

दोनों अपराधी पुणे में कबाड़ का काम करते थे। इन अपराधियों का संबंध सीधे तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से बताया जा रहा है, जिन्होंने 50 हजार रुपए लेकर सिद्दीकी की हत्या की। बिश्नोई गैंग का नाम पहले भी हाई-प्रोफाइल हत्याओं और अंडरवर्ल्ड गतिविधियों में आ चुका है। खासकर बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की हत्या की साजिश में इस गैंग का नाम प्रमुखता से सामने आया था।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कनेक्शन

पुलिस की जाँच में खुलासा हुआ है कि बाबा सिद्दीकी की हत्या का पूरा षड्यंत्र लॉरेंस बिश्नोई गैंग के इशारे पर रचा गया था। आरोपितों ने सिद्दीकी की हत्या से पहले इस गिरोह से जुड़े कई लोगों से संपर्क किया था और हत्या की योजना को अंजाम देने के लिए बिश्नोई गैंग से ही हथियार और अन्य संसाधन प्राप्त किए। बिश्नोई गैंग का नाम पहले भी मुंबई में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशों के कारण चर्चाओं में रहा है, और इस हत्या से यह साफ हो गया है कि यह गैंग राजनीतिक हत्याओं में भी लिप्त हो सकता है।

आरोपितों ने दो महीने तक सिद्दीकी की दिनचर्या पर नजर रखी और उनकी हत्या के लिए सही समय और स्थान का चुनाव किया। उन्होंने बांद्रा में उनके घर के आसपास बार-बार आकर उनकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी। 12 अक्टूबर की रात, जब सिद्दीकी अपने घर के पास टहल रहे थे, तब आरोपियों ने हमला किया। खास बात यह है कि हमले को दीपावली के पटाखों की आवाज के बीच अंजाम दिया गया, ताकि गोलियों की आवाज सुनाई न दे।

धर्मराज और शिवा ने हत्या के लिए आवश्यक हथियारों को कुछ दिन पहले ही हासिल कर लिया था। इन हथियारों का इंतजाम लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने किया था। आरोपितों को इस हत्या के लिए पहले ही एडवांस में मोटी रकम दी गई थी, ताकि वे इसे सफलतापूर्वक अंजाम दे सकें। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को पिस्तौल के साथ-साथ बमों का भी इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी गई थी, ताकि वे हमले को बड़ी आसानी से अंजाम दे सकें।

गोलियों की बरसात में हुई हत्या

हमले के दौरान आरोपितों ने बाबा सिद्दीकी पर 6 राउंड गोलियाँ चलाईं, जिनमें से तीन गोलियाँ सीधे सिद्दीकी को लगीं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पटाखों की आवाज में गोलियों की आवाज दब गई, जिसके कारण आसपास के लोग तुरंत कुछ समझ नहीं पाए।

हत्या के तुरंत बाद पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आरोपितों की पहचान की। यूपी पुलिस की मदद से धर्मराज कश्यप और शिवा गौतम को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उन्होंने हत्या की पूरी योजना को कबूल किया और बताया कि यह पूरी साजिश लॉरेंस बिश्नोई गैंग के इशारे पर रची गई थी। इस बारे में बिश्नोई गैंग से जुड़ा एक फेसबुक पोस्ट भी सामने आया है। हालाँकि पोस्ट जिसके नाम से किया गया, वो फरार बताया जा रहा है। इस पोस्ट में काफी कुछ कहा गया है।

फेसबुक पोस्ट ‘शुबू लोंकर महाराष्ट्र’ नाम के अकाउंट से किया गया है। बिश्नोई गैंग ने फेसबुक पोस्ट में कहा, “सलमान खान हम ये जंग चाहते नहीं थे, पर तुमने हमारे भाई (लॉरेंस बिश्नोई) का नुकसान करवाया। आज जो बाबा सिद्दीकी की शराफत के पुल बाँधे जा रहे हैं, वो एक टाइम में दाऊद के साथ मकोका एक्ट में था। इसके मरने का कारण दाऊद को बॉलीवुड, राजनीती, प्रॉपर्टी डीलिंग से जोड़ना था।” इनके अलावा अनुज थापन का नाम भी पोस्ट में है, जिसने सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग की थी, और पुलिस कस्टडी में उसकी मौत हो गई थी। गैंग का कहना है कि यह मौत उसका बदला है।

फोटो साभार:आजतक

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में आ चुका है। सलमान खान की हत्या की साजिश से लेकर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़े कनेक्शन तक, इस गैंग ने मुंबई के आपराधिक जगत में एक गहरी पैठ बना ली है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस हत्या में और कौन-कौन लोग शामिल थे, और क्या इसके पीछे कोई और बड़ा कारण था। बाबा सिद्दीकी की हत्या इस बात की तसदीक करती है कि यह गैंग अब राजनीतिक हत्याओं में भी शामिल हो गया है।

जिसे दिग्विजय सिंह ने कहा ‘शांति का मसीहा’, उसे ‘घटिया-घिनौना-बीमार’ कह रहीं सुप्रिया श्रीनेत: जाकिर नाइक के पुराने फैन रहे हैं कॉन्ग्रेसी

शनिवार (12 अक्टूबर) को कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस्लामिक कट्टरपंथी और नफरत फैलाने वाले उपदेशक ज़ाकिर नाइक की महिलाओं पर की गई यौन उत्पीड़न संबंधी टिप्पणी को लेकर कड़ी आलोचना की।

सुप्रिया ने ट्वीट किया, “इतनी घटिया घिनौनी सोच, बीमार असल में यह खुद हैं।” उन्होंने ज़ाकिर नाइक की उस ताजा टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें नाइक ने महिलाओं, खासकर एंकरों को लेकर अपमानजनक बातें कही थीं।

यह जानना जरूरी है कि कॉन्ग्रेस में शामिल होने से पहले सुप्रिया श्रीनेत ने 17 साल तक बतौर पत्रकार काम किया था, और उन्होंने ईटी नाउ पर न्यूज एंकर के तौर पर भी सेवाएँ दी थीं।

सुप्रिया श्रीनेत के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हाल ही में पाकिस्तान में एक इंटरव्यू के दौरान ज़ाकिर नाइक ने महिलाओं को उन प्रोफेशन्स से दूर रहने की सलाह दी थी, जहां उन्हें कैमरे के सामने आना पड़ता है। नाइक का कहना था कि ऐसा करने से महिलाएँ पुरुषों की वासना का शिकार बनती हैं। इस्लामिक प्रचारक ने कहा, “अगर कोई मर्द महिला एंकर को देख कर वासना महसूस नहीं करता, तो वह मेडिकल रूप से ठीक नहीं है।”

ज़ाकिर नाइक ने यह भी कहा, “अगर आप 20 मिनट तक किसी लड़की को देखकर वासना महसूस नहीं करते, तो आप स्वस्थ नहीं हैं,” और इस दौरान उन्होंने क़ुरान की आयतों का हवाला दिया।

हाल ही में ज़ाकिर नाइक को पाकिस्तान में तीखी आलोचना झेलनी पड़ी थी, जब उसने स्वतंत्र और अविवाहित महिलाओं को ‘बाज़ारू औरत’ कहा था।

सुप्रिया श्रीनेत की ज़ाकिर नाइक पर की गई आलोचना को कॉन्ग्रेस की आधिकारिक राय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, भले ही वह पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। यह ज्यादा से ज्यादा उनकी व्यक्तिगत राय है, क्योंकि नाइक ने उनके पुराने प्रोफेशन (धंधे) को खास तौर पर निशाना बनाया था।

किसी भी अन्य कॉन्ग्रेस नेता ने ज़ाकिर नाइक के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है, भले ही उसकी यौन उत्पीड़न संबंधी टिप्पणियाँ जगजाहिर हों। असल में, पार्टी ने कभी औपचारिक रूप से इस नफरत फैलाने वाले इस्लामी कट्टरपंथी की आलोचना नहीं की।

इसके उलट, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ज़ाकिर नाइक को ‘शांति का मसीहा’ कहकर उसकी तारीफ की थी।

उन्होंने कहा था, “अस्सलाम वालेकुम। मैंने डॉ. ज़ाकिर नाइक के बारे में बहुत सुना था। अंततः मुझे उनसे मिलने का मौका मिला। मैं खुश हूँ कि वह दुनिया भर में शांति का संदेश फैला रहे हैं।”

दिग्विजय सिंह ने 2012 में अपने भाषण में कहा था, “डॉ. ज़ाकिर नाइक ने सभी धर्मों की किताबें पढ़ी हैं। अब यह जरूरी है कि आपका शांति का संदेश भारत के हर कोने में पहुँचे।”

कॉन्ग्रेस, ज़ाकिर नाइक और एक छिपा हुआ रिश्ता

हालाँकि उस समय ज़ाकिर नाइक को भगोड़ा घोषित नहीं किया गया था, लेकिन उसके हिंदू धर्म पर हमला करने वाले और कट्टर इस्लामिक भाषण ऑनलाइन उपलब्ध थे।

इसके बावजूद, मुस्लिम तुष्टिकरण के लंबे इतिहास वाली कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह को ज़ाकिर नाइक की तारीफ करने से कोई हिचक नहीं हुई।

यह जानकर कई लोग चौंक सकते हैं कि ज़ाकिर नाइक की इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) और राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट (RGCT) के बीच गहरे संबंध हैं। IRF ने दो बार RGCT को 50 लाख और 25 लाख रुपये का दान दिया है। और RGCT के ट्रस्टी कोई और नहीं बल्कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी हैं।

भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक उत्थान के लिए संघर्ष के 100 वर्ष: RSS की इस गौरवमयी यात्रा में संघ ने देश के हर पहलू को छुआ

भारत की स्वतंत्रता और उसके बाद के राष्ट्र निर्माण में कई संगठनों ने अपनी भूमिका निभाई, लेकिन जो संगठन निरंतरता और समर्पण के साथ पिछले सौ वर्षों से राष्ट्र की सेवा कर रहा है, वह है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)। संघ की यात्रा केवल संगठनात्मक नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा की यात्रा है, जो समाज के हर वर्ग को एकजुट कर भारत को सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में कार्यरत है।

RSS की स्थापना: राष्ट्र की सेवा का एक महान विचार

सन 1925 का वर्ष भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने उस समय देश के सामने आ रही चुनौतियों को समझते हुए आरएसएस की स्थापना की। हेडगेवार का यह स्पष्ट विचार था कि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही भारत को पूर्णरूपेण स्वतंत्र नहीं बना सकती, जब तक कि समाज का संगठनात्मक, सांस्कृतिक और नैतिक पुनरुत्थान न हो।

सन 1925 में विजयदशमी के दिन शुरू हुआ आरएसएस इस विजयदशमी पर अपने 99 वर्ष पूरे करके 100वे वर्ष में प्रवेश कर गया है। डॉक्टर हेडगेवार के अनुसार, समाज को संगठित और सशक्त करने के लिए एक दीर्घकालिक और अनुशासित आंदोलन की आवश्यकता थी, जिसे आरएसएस के माध्यम से साकार किया गया। भारतीय समाज में कई ऐसे तत्व थे, जो इसे भीतर से कमजोर कर रहे थे।

उनका मानना था कि जातिवाद, सांप्रदायिकता और बाहरी सांस्कृतिक प्रभावों ने भारत के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर दिया था। इनका समाधान केवल संगठित और अनुशासित समाज से ही संभव था, जो देश के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित हो। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए RSS ने एक सशक्त, संगठित और अनुशासित समाज की नींव रखी, जो राष्ट्र के पुनर्निर्माण में सहायक हो।

संघ का प्रारंभिक स्वरूप और विचारधारा

आरएसएस की शुरुआत बहुत ही छोटे स्तर पर हुई थी। हेडगेवार ने कुछ युवा लोगों को संगठित किया और उन्हें राष्ट्र सेवा, अनुशासन और संगठन के सिद्धांतों से प्रेरित किया। प्रारंभिक शाखाओं में शारीरिक प्रशिक्षण, बौद्धिक चर्चाएँ और राष्ट्रभक्ति की शिक्षा दी जाती थी। संघ की शाखाएँ एक प्रकार से प्रशिक्षण केंद्र थीं, जहाँ हर स्वयंसेवक को राष्ट्रहित में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाता था।

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन और नेतृत्व

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1889 में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा के दौरान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया था। कॉन्ग्रेस से जुड़े होने के बावजूद, उन्होंने महसूस किया कि राजनीतिक आजादी से अधिक महत्वपूर्ण सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक पुनरुत्थान है। यही विचार उनके जीवन के केंद्र में रहा और आरएसएस की स्थापना में भी इसे ही प्राथमिकता दी गई।

डॉक्टर हेडगेवार ने एक ऐसे संगठन का सपना देखा जो समाज को एकजुट कर सके और हर व्यक्ति को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित कर सके। आखिरकार डॉक्टर हेडगेवार के नेतृत्व में आरएसएस का प्राथमिक लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना था, जो अपने अंदर किसी भी प्रकार की विभाजनकारी मानसिकता को जगह न दे।

उनके विचारों में स्पष्ट था कि भारत को एक सशक्त राष्ट्र बनने के लिए समाज के सभी वर्गों के बीच समरसता और एकता की आवश्यकता है। इसी विचार के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कार्य करना शुरू किया और धीरे-धीरे यह संगठन पूरे भारत में अपनी शाखाओं के माध्यम से फैलने लगा।

RSS का विस्तार और विकास: गुरुजी का नेतृत्व (1940-1973)

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर, जिन्हें गुरुजी के नाम से जाना जाता है, सन 1940 में डॉक्टर हेडगेवार के निधन के बाद संघ के दूसरे सरसंघचालक बने। गुरुजी का कार्यकाल संघ के लिए विस्तार और विचारधारा के सुदृढ़ बनाने का समय था। डॉक्टर हेडगेवार ने जिस नींव पर संघ की स्थापना की थी, गोलवलकर उर्फ गुरुजी ने उसे एक व्यापक रूप दिया।

उन्होंने संघ को न केवल संगठनात्मक रूप से बल्कि वैचारिक रूप से भी सशक्त बनाया। गुरुजी का मानना था कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक राष्ट्र है, जिसकी जड़ें उसकी प्राचीन सभ्यता और मूल्यों में हैं। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने और उसे आधुनिक भारत की पहचान बनाने की दिशा में कार्य किया।

उनके नेतृत्व में संघ ने समाज के हर वर्ग तक पहुँचने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित किया। गुरुजी ने स्वयंसेवकों को यह सिखाया कि राष्ट्र सेवा का अर्थ केवल राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना नहीं है, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में अपना योगदान देना है। चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, ग्रामीण विकास हो या सामाजिक सुधार – स्वयंसेवक हर क्षेत्र में पुनर्निर्माण के लिए कार्य करना है।

संघ पर पहला प्रतिबंध: गाँधी जी की हत्या और संघ का संघर्ष

सन 1948 में महात्मा गाँधी की हत्या के बाद संघ को पहली बार प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। महात्मा गाँधी की हत्या के बाद तत्कालीन पंडित नेहरू की अगुवाई वाली सरकार ने आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हाथ है। इस आरोप के आधार पर आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया और संघ के कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। 

हालाँकि, संघ का इस हत्या से कोई सीधा संबंध नहीं था, लेकिन उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों में यह प्रतिबंध लगाया गया। संघ ने इस आरोप को न केवल नकारा, बल्कि अपनी निर्दोषता को साबित करने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी। जाँच आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि संघ का महात्मा गाँधी की हत्या में कोई हाथ नहीं था और इस आधार पर प्रतिबंध हटा लिया गया।

संघ का समाजिक सेवा कार्य और विस्तार

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उर्फ गुरुजी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी शाखाओं का विस्तार किया और पूरे भारत में अपने कार्यों को फैलाया। संघ के स्वयंसेवक देश के कोने-कोने में समाज सेवा के विभिन्न कार्यों में जुट गए। संघ के सेवा कार्य केवल आपातकालीन परिस्थितियों तक सीमित नहीं थे। संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और समाज कल्याण जैसे क्षेत्रों में भी अहम योगदान दिया।

संघ के स्वयंसेवकों ने आपदा प्रबंधन में भी अग्रणी भूमिका निभाई। विद्या भारती जैसी संस्थाओं के माध्यम से संघ ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान दिया। विद्या भारती के तहत संचालित स्कूलों में न केवल शिक्षा दी जाती है, बल्कि भारतीय संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों का भी प्रचार-प्रसार किया जाता है। इसी प्रकार, सेवा भारती जैसे संगठनों के माध्यम से संघ ने ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में सेवा कार्यों को बढ़ावा दिया।

बाला साहेब देवरस: सामाजिक सुधार और दलित उत्थान (1973-1994)

गुरुजी के बाद बाला साहेब देवरस ने सन 1973 में संघ का नेतृत्व सँभाला। उनके कार्यकाल में संघ ने सामाजिक सुधारों की दिशा में बड़े कदम उठाए। बाला साहेब का मानना था कि समाज में जातिवाद और भेदभाव को समाप्त किए बिना सच्चे राष्ट्र निर्माण का सपना साकार नहीं हो सकता। उन्होंने समाज के पिछड़े और दलित वर्गों के उत्थान के लिए कई कार्यक्रम चलाए।

बाला साहेब के नेतृत्व में संघ ने समाज के सभी वर्गों को एक साथ लाने की दिशा में प्रयास किए। उन्होंने समाज के हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए संघ के कार्यों को गति दी। उनके नेतृत्व में संघ ने एक ऐसा समाज बनाने की दिशा में काम किया, जहाँ हर व्यक्ति को उसकी जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति के आधार पर नहीं बल्कि उसके गुणों और कार्यों के आधार पर सम्मान मिले।

आपातकाल और दूसरा प्रतिबंध: लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघ का संघर्ष (1975)

सन 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस की सरकार ने आपातकाल की घोषणा की। इसमें संविधान के कई प्रावधानों को निलंबित कर दिया गया और विपक्षी दलों, संगठनों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इस समय राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए गुप्त रूप से आंदोलन चलाया। 

संघ के स्वयंसेवकों ने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की बहाली के लिए कठिन संघर्ष किया। इस समय संघ के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया, लेकिन उन्होंने अपने संघर्ष को जारी रखा। सन 1977 में जब आपातकाल समाप्त हुआ और लोकतंत्र की बहाली हुई, तब संघ की भूमिका को व्यापक स्तर पर सराहा गया। 

प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह उर्फ रज्जू भैया का नेतृत्व (1994-2000)

प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह को रज्जू भैया के नाम से जाना जाता था। रज्जू भैया संघ के चौथे सरसंघचालक बने। रज्जू भैया एक महान शिक्षाविद् और विद्वान थे, जिन्होंने संघ के कार्यों को शिक्षा और बौद्धिक क्षेत्रों में विस्तार दिया। उनके नेतृत्व में संघ ने शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयास किए और युवाओं को संघ के विचारों से जोड़ने का कार्य किया।

रज्जू भैया का मानना था कि राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी में निहित होता है। उन्होंने संघ के कार्यों को युवाओं तक पहुँचाने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करने के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए। उनके नेतृत्व में संघ ने शैक्षिक सुधार, नैतिक शिक्षा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

बाबरी मस्जिद विध्वंस और तीसरा प्रतिबंध (1992)

सन 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना के बाद संघ पर तीसरी बार प्रतिबंध लगाया गया। इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था और संघ पर इस घटना के पीछे होने का आरोप लगा था। इस समय भी संघ ने संयमित रुख अपनाया और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी निर्दोषता साबित की। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हमेशा यह स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य समाज में शांति, समरसता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है। इस घटना के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने समाज को जोड़ने और सांप्रदायिक सद्भावना को पुनः स्थापित करने के लिए कई कदम उठाए।

सुदर्शन जी का नेतृत्व (2000-2009): स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की दिशा में

कुप्प. सी. सुदर्शन, जिन्हें सुदर्शन जी के नाम से जाना जाता है, ने सन 2000 से सन 2009 तक संघ का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में संघ ने स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उनका मानना था कि भारत को सशक्त बनने के लिए स्थानीय संसाधनों और परंपराओं का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता के लिए कई कार्यक्रम चलाए।

सुदर्शन जी के कार्यकाल में संघ ने पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की दिशा में जागरूकता फैलाने के लिए कई अभियान चलाए। उनका नेतृत्व संघ के लिए आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाने का समय था। उन्होंने भारतीय ज्ञान, विज्ञान, और परंपराओं को आधुनिक संदर्भ में पुनः स्थापित करने की दिशा में काम किया।

मोहन भागवत: वर्तमान में संघ का नेतृत्व (2009-वर्तमान)

वर्तमान में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत हैं, जिन्होंने साल 2009 में यह पदभार सँभाला। उनके नेतृत्व में संघ ने समाज के हर वर्ग तक पहुँचने के लिए कई नई पहल की। मोहन भागवत का मानना है कि समाज में समरसता, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उनके नेतृत्व में संघ ने समाज के हर वर्ग को एक साथ लाने का प्रयास किया।

उनके नेतृत्व में संघ ने समाज में व्याप्त जातिवाद एवं भेदभाव को समाप्त करने के लिए कई कार्यक्रम चलाए। इस वर्तमान दौर में महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता प्रमुख मुद्दे हैं, जिन पर संघ विशेष ध्यान दे रहा है। मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ का यह प्रयास है कि भारत एक ऐसे राष्ट्र के रूप में उभरे, जहाँ हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले।

संघ का सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक योगदान

आरएसएस ने अपने सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक पहुँचने का प्रयास किया है। संघ के सेवा कार्य केवल किसी आपदा या संकट के समय तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह समाज के हर क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत है। संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुधारों के क्षेत्रों में अद्वितीय योगदान दिया है।

विद्या भारती जैसे संगठन के माध्यम से संघ ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति की है। विद्या भारती के तहत संचालित विद्यालयों में लाखों छात्रों को न केवल शिक्षित किया जाता है, बल्कि उन्हें नैतिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति से भी जोड़ा जाता है। इसी प्रकार, सेवा भारती के माध्यम से संघ ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

संघ ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए भी अद्वितीय कार्य किए हैं। संघ ने योग, आयुर्वेद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय ज्ञान और विज्ञान की प्राचीन विधाओं को पुनर्जीवित किया है। संघ के विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारतीय संगीत, नृत्य, और कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया जाता है। 

संघ एक गैर-राजनीतिक संगठन है, लेकिन इसका प्रभाव भारतीय राजनीति पर दिखता है। संघ ने राजनीति में नैतिकता, सेवा, और राष्ट्रप्रेम के मूल्यों को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। संघ से जुड़े कई राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं और राष्ट्र हित में कार्य कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जैसी राजनीतिक पार्टियों के निर्माण और विकास में संघ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

संघ की वैश्विक पहचान और राष्ट्र निर्माण में बढ़ते कदम

आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पहचान विश्व स्तर पर स्थापित हो चुकी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित होकर कई संगठन विदेशों में भी भारतीय संस्कृति, योग और सामाजिक सेवाओं का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। 

संघ 100 वर्षों की यात्रा पूरी करने के बाद भी अपने लक्ष्य और उद्देश्यों के प्रति उतना ही समर्पित है, जितना कि अपने प्रारंभिक दिनों में था। संघ का उद्देश्य समाज के हर व्यक्ति को राष्ट्र सेवा की दिशा में प्रेरित करना और भारत को एक सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है।