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नाबालिग लड़की का अब्बास, आफताब, शाहरुख ने रेप किया, पुलिस ने 14 दिन की रिमांड माँगी… जज MM सैयद ने दी सिर्फ 2 दिन की रिमांड

वडोदरा गैंगरेप मामले में पांचों आरोपितों की रिमांड गुरुवार (10 अक्टूबर, 2024) को पूरी हो गई है। इसके बाद उन्हें फिर से पेश किया जाएगा। इन पाँचों आरोपितों को गिरफ्तार करने के बाद वडोदरा पुलिस ने मंगलवार (8 अक्टूबर, 2024) को सभी को कोर्ट में पेश कर 14 दिन की रिमांड माँगी थी।

इस मामले की सुनवाई करने वाले जज एम. एम. सैयद ने पुलिस को मात्र 2 दिन की रिमांड दी। पांचों आरोपितों में मुन्ना अब्बास बंजारा, मुमताज उर्फ ​​आफताब बंजारा, शाहरुख बंजारा मुख्य आरोपी हैं, जिन्होंने पीड़िता के साथ गैंगरेप किया था।

इनके अन्य दो साथी भी घटना से पहले साथ थे, यह बाद में भाग गए थे। इनकी पहचान अजमल सत्तार और सैफ अली मेहंदी हसन के रूप में हुई है। इन सभी आरोपितों को जज के सामने पेश किए जाने पर जब जज ने पूछा कि क्या उन्हें पुलिस से कोई शिकायत है, जिसका सभी ने खंडन किया।

लेकिन फिर जब बहस चल रही थी, तो मुन्ना ने जज के सामने कहा, ‘जज साहब… मुझे जेल जाना है। मुझे मार देंगे साहब…’ चिल्लाया। इसके बाद कोर्ट रूम वकीलों की तालियों से गूँज उठा और ‘गुजरात पुलिस जिंदाबाद’ के नारे भी लगे।

इन पाँचों को कोई वकील भी नहीं मिला। चूंकि आरोपितों की तरफ से कोई वकील कोर्ट में पेश नहीं हुआ, इसलिए जिला विधिक सहायता समिति ने उन्हें एक वकील मुहैया कराया। जिसने रिमांड का विरोध किया और पुलिस के खिलाफ तर्क दिया कि वे जिस गाड़ी को जब्त करने के लिए कह रहे हैं वह पहले ही जब्त किया जा चुका है।

पुलिस ने कोर्ट में आरोपितों की 14 दिन की रिमांड माँगी थी, क्योंकि मामला गंभीर और संवेदनशील है और इसमें पर्याप्त जाँच की जरूरत है। पुलिस ने कहा कि अपराध के समय आरोपितों द्वारा पहने गए कपड़ों को जब्त किया जाना है और पीड़ित का मोबाइल फोन और अपराध में इस्तेमाल की गई बाइक को भी जब्त किया जाना है।

पुलिस ने कह कि आरोपितों का मेडिकल परीक्षण लंबित है और अपराध के बाद उन्होंने कहाँ शरण ली, उनका यूपी में कोई आपराधिक इतिहास है या नहीं या अपराध के समय वे नशे में थे या नहीं, इसकी भी जाँच की जानी है। हालाँकि, इन दलीलों के बावजूद जज MM सैयद ने आरोपितों की सिर्फ 2 दिन की रिमांड मंजूर की।

इस मामले में माँग की जा रही है कि यह मुकदमा एक महिला अदालत के कोर्ट में चलाया जाए। वडोदरा के एडवोकेट विराज ठक्कर ने लिखित माँग में कहा कि पाँचों आरोपितों की 14 दिन की रिमांड माँगी गई थी, लेकिन कोर्ट ने 2 दिन की रिमांड मंजूर की है। वकीलों के एक संगठन ने कहा कि पीड़िता नाबालिग है और वह महिला जज के समक्ष अपनी पीड़ा बता सकेगी।

ब्रिटिश राजकुमारी से जिस मुस्लिम का था संबंध, उसके अब्बा ने 100+ लड़कियों का किया रेप/यौन शोषण, वर्जिन लड़कियों को खोजने के लिए होती थी टीम

ब्रिटिश फैशन स्टोर हैरड्स के पूर्व मालिक मोहम्मद अल फायेद पर लगभग 100 महिलाओं ने रेप और यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। मोहम्मद अल फायेद की 2023 में 94 साल की आयु में मौत हो गई थी। इन महिलाओं ने ब्रिटिश समाचार संस्था BBC को बताया है कि उनके साथ हैरड्स में काम करने के दौरान यह यौन शोषण हुआ। कुछ महिलाओं ने बताया है कि उनको फर्जी नौकरी का झांसा देकर मोहम्मद अल फायेद ने उनका बर्बरता से रेप किया। महिलाओं ने अपनी कहानियाँ भी सुनाई हैं।

क्या है पूरा मामला

मिस्र में पैदा हुआ मोहम्मद अल फायेद एक ब्रिटिश अरबपति कारोबारी था। मोहम्मद अल फायेद लंदन के लक्ज़री स्टोर हैरड्स का मालिक था। यह स्टोर विश्वप्रसिद्ध है और इसमें दुनिया भर के अरबपति खरीददारी के लिए आते हैं। इसी हैरड्स में काम करने वाली महिलाओं का यौन उत्पीड़न मोहम्मद अल फायेद ने किया।

हैरड्स में काम करने वाली महिलाओं के साथ यौन शोषण और रेप की बात का खुलासा हाल ही में BBC ने किया। BBC ने सितम्बर माह में प्रसारित एक डॉक्यूमेंट्री में बताया था कि हैरड्स के पूर्व मालिक मोहम्मद अल फायेद ने दर्जनों महिलाओं के साथ रेप और यौन शोषण किया। BBC ने इसके लिए हैरड्स की पूर्व कर्मचारियों से बात की।

मोहम्मद अल फायेद हैरड्स के स्टोर पर लगातार आता-जाता था और यहाँ काम करने वाली लड़कियों और महिलाओं पर नजर रखता था। उसे जो भी महिला पसंद आती थी, उसे वह अपने साथ ले जाता था और बलपूर्वक उनका रेप करता था। इन महिलाओं का रेप वह हैरड्स के स्टोर, अपने लंदन के बंगले और विदेशों में ले जाकर करता था।

BBC को महिलाओं ने बताया कि उसकी यह कारस्तानी सबको पता थी लेकिन कोई इस बारे में बोल नहीं पाता था। BBC ने पाया है कि यह सिलसिला दशकों तक चलता रहा। फायेद से जुड़े बाकी लोगों ने भी बताया है कि बूढा होने के बावजूद फायेद को युवा लड़कियों में काफी रुचि थी।

फायेद महिलाओं का रेप करने के पहले उनका मेडिकल चेकअप तक करवाता था। हैरड्स में काम करने वाली महिलाओं को फायेद डरा धमका कर रखता था। यहाँ महिलाओं को आपस में बात नहीं करने दी जाती थी। उनकी बातचीत की रिकॉर्डिंग होती थी। हैरड्स के पूरे स्टोर में जगह-जगह कैमरे लगाए गए थे।

फायेद के खिलाफ उसकी मौत से पहले भी कई बार यौन शोषण के आरोप सामने आए थे। हालाँकि, इनको कोई ख़ास तवज्जो मीडिया में नहीं मिली। जब फायेद को लगा कि उसके यह अपराध दुनिया के सामने आ जाएँगे तो उसने पीड़िताओं के साथ धन-बल के शेयर समझौता कर लिया।

महिलाओं ने बताई आपबीती

मोहम्मद फायेद के लिए काम करने वाली महिलाओं ने अपनी रेप और यौन शोषण की आपबीती सुनाई है। एक 58 वर्षीय महिला मार्गरेट (नाम बदला हुआ) ने भी फायेद के अत्याचारों के विषय में BBC को जानकारी दी है। महिला ने बताया कि 1985 में जब वह 19 साल की थी तब उसने एक नौकरी का विज्ञापन देख कर आवेदन दिया था।

मारग्रेट ने बताया कि इस आवेदन में अपनी जानकारी और एक फोटो देने की माँग की गई थी। यह नौकरी बच्चों की देखरेख करने वाली महिला के लिए थी। मार्गरेट ने बताया कि उसके इंटरव्यू में यह भी पूछा गया कि क्या उसका कोई पहले बॉयफ्रेंड रहा है।(ताकि फायेद उसकी यौन जिन्दगी के बारे में जान सके)

मार्गरेट को नौकरी देने के बाद उसे फायेद ने अपने आलीशान बंगले में बुलाया। मार्गरेट को एक बड़ी गाड़ी में यहाँ लाया गया था। इसके बाद उन्हें एक अँधेरे से कमरे में बैठा दिया गया। यहाँ से उसे फायेद ने बुलाया और हर बार उसके साथ रेप किया। उसे बच्चों से मिलने तक नहीं दिया गया।

मार्गरेट ने बताया कि एक दिन उसके कमरे में आकर मोहम्मद अल फायेद सुबह सुबह आ गया और उसका काफी देर तक रेप किया। उसके साथ अप्राकृतिक यौन समबन्ध भी बनाए गए। फायेद ने उसे पाँच दिन तक बंधक बनाए रखा और उसे पैसों का भी लालच दिया। उसे धमकी भी दी गई। BBC को और कई ऐसी महिलाओं की कहानी पता चली है।

एक अन्य महिला ने बताया कि मोहम्मद अल फायेद जब दुबई में रहता था तब उसने महिला का यौन शोषण किया था। फायेद उसे लगातार नौकरी का प्रलोभन देता था। महिला एक बैंक में काम करती थी जहाँ वह आता जाता था। उसने महिला को कई बार अपने साथ हमबिस्तर होने का ऑफर दिया।

BBC को लगभग 100 ऐसी महिलाएँ अब तक मिली हैं जिन्होंने अपनी आपबीती और फायेद की करतूतें सुनाई हैं। बड़ी संख्या में महिलाएँ BBC की डॉक्यूमेंट्री के बाद सामने आई हैं। फायेद के कारनामों को तब के हैरड्स प्रशासन ने छुपाया, यह आरोप भी BBC ने लगाया है।

कौन था मोहम्मद अल फायेद

मोहम्मद अल फायेद मिस्र में पैदा हुआ था। यहाँ वह काफी गरीब था लेकिन एक करोडपति की बहन से निकाह के बाद उसके पास दौलत आ गई। इसके बाद उसने काफी पैसा अरब देशों से बनाया। वह 1970 आते-आते बहुचर्चित कारोबारी था। वह 1970 के दशक में मिस्र से ब्रिटेन आ गया था।

यहाँ उसने 1985 में हैरड्स को खरीदा, जिससे उसकी प्रतिष्ठा और बढ़ गई। वह ब्रिटेन के राजपरिवार के साथ ही अन्य बड़ी हस्तियों के साथ दिखता था। वह टीवी शो में भी आता-जाता रहता था। मोहम्मद अल फायेद सबसे अधिक चर्चा में 1990 के दशक में आया था।

मोहम्मद अल फायेद के बेटे डोडी अल फायेद को ब्रिटिश राजपरिवार की पूर्व बहू डायना के साथ लगातार देखा जाता था। दोनों की साथ में होने की काफी तस्वीरें वायरल हुई थीं। यह भी अफवाह उड़ी थी कि डोडी, डायना से शादी करने वाला है।

1999 में डोडी और डायना की एक साथ एक गाड़ी में बैठे हुए पेरिस में एक सुरंग के भीतर मौत हो गई थी। उनकी मौत इस सुरंग के भीतर उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट होने के कारण हुई थी। इसके बाद यह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना था। मोहम्मद अल फायेद ने 2010 में वह हैरड्स स्टोर बेच दिया था जहाँ पर यह रेप घटनाएँ हुई। उसकी 2023 में मौत हो गई थी।

हैरड्स के वर्तमान मालिकों ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए पीड़िताओं से सम्पर्क करना चालू कर दिया है। हैरड्स ने बताया है कि उसके पास लगातार शिकायतें आ रही हैं। हैरड्स अब दूसरे मालिकों के हाथों में है। हैरड्स ने कहा है कि वह फायेद की कारस्तानियों की कड़ी निंदा करता है।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग बड़ी समस्या

ब्रिटेन के भीतर ग्रूमिंग एक बड़ी समस्या बनी हुई है। ब्रिटेन के अधिकांश शहरों में मुस्लिम गैंग युवा और नाबालिग लड़कियों को इस दलदल में धकेलते हैं। दावा है कि इस गैंग से जुड़े मुस्लिमों ने अब तक ब्रिटेन में 5 लाख से अधिक गैर मुस्लिम लड़कियों से रेप किया है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने इस गैंग को हर हाल में खत्म करने का भरोसा देते हुए इसके खिलाफ टास्क फ़ोर्स के गठन की जानकारी दी थी। ब्रिटेन में इसके खिलाफ बोलने में भी लोग डरते हैं क्योंकि आरोपितों के मुस्लिम होने पर उन्हें ‘इस्लामोफोबिक’ करार दे दिया जाता है।

दशहरे में जहाँ भगवान राम की जीत का उत्सव मना रहे करोड़ों हिंदू, वहीं Al Jazeera छाप रहा ‘विवादित मंदिर’

दुनिया भर में इस्लामी प्रोपेगेंडा चलाने वाले क़तर के सरकारी फंड से चलने वाला आतंकवादी समर्थक मीडिया नेटवर्क अल जजीरा भारत और हिंदुओं को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ता है। इसके लिए चाहे मीडिया की संपादकीय नीतियों की तिलांजलि ही क्यों ना देनी पड़े। भारत में अभी त्योहारों का मौसम है। ऐसे में उसने नौ महीने पहले लिखे गए एक व्यंग्यात्मक लेख को आधार बनाकर भारत और हिंदुओं को निशाना बनाने की कोशिश की है।

दरअसल, इस साल जनवरी में अंग्रेजी व्यंग्यात्मक लेख पर आधारित अमेरिका पर अंग्रेजी वेबसाइट The Onion पर आधारित एक मलयालम में ‘द सावला वड़ा’ (The Savala Vada) का सोशल मीडिया हैंडल 2023 में बनाया गया था। इस हैंडल को केरल के दो अल्पसंख्यक समुदाय के लड़के चलाते थे, जिस पर राष्ट्रवादी सरकार की नीतियों की आलोचना की जाती थी।

जनवरी में सावला वड़ा हैंडल ने अयोध्या के रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर एक व्यंग्य पोस्ट किया था। इसका कैप्शन था, ‘राम मंदिर के नीचे भारतीय संविधान के अवशेष: एएसआई सर्वेक्षण’। इस हैंडल ने भारत के सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय और एक सरकारी विभाग ASI का मजाक उड़ाया था। आगे भी यह हैंडल समय-समय पर हिंदुओं और यहूदी तथा भारत एवं इजरायल का मजाक उड़ाता रहा।

हालाँकि, सबसे महत्वपूर्ण बात अल जजीरा द्वारा 9 माह पुराने इस कंटेंट पर स्टोरी करना है। यह कंटेंट अयोध्या में राम मंदिर पर आधारित था। इस समय देश और दुनिया भर के हिंदू नवरात्रि का पर्व मना रहे हैं। कहा जाता है कि नवरात्रि के अंतिम दिन यानी दशहरा को भगवान राम ने अत्याचारी रावण का वध किया था। ऐसे में अल जजीरा ने उस हैंडल के बहाने हिंदुओं और पर्व एवं त्योहार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।

अल जजीरा ने अपने लेख में अयोध्या के मंदिर को ‘विवादित मंदिर’ बताकर भारत की धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था को एक तरह से खारिज कर दिया है, क्योंकि राम मंदिर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद बना है। द सावाल वड़ा का सहारा लेकर अल जजीरा ने अपने लेख में लिखा, “हिंदू राष्ट्रवादी नेता (पीएम मोदी) पर 16वीं शताब्दी की मस्जिद के खंडहर पर बने मंदिर में धार्मिक समारोह का नेतृत्व करके भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान को कथित रूप से कमजोर करने का आरोप लगाया गया था।”

एक इस्लामी मुल्क, जहाँ गैर-मुस्लिमों को अपने हिसाब से धर्म एवं दिनचर्या का पालन करने का अधिकार नहीं है… जहाँ बादशाह के नाम पर इस्लामी तानाशाही चलती है, उस मुल्क का एक मीडिया हाउस भारत की धर्मनिरपेक्षता एवं संविधान की बात अपने लेख में कर रहा है। यह हास्यास्पद एवं वैचारिक दोगलापन के अलावा कुछ नहीं है।

अल जजीरा ने एक सरकारी संस्था ASI को, जिसने अयोध्या मामले में कोर्ट के समक्ष सारे तथ्य रखे, उस पर सवाल उठा रहा है। उसने लिखा है कि सरकार संचालित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने हिंदू समूहों के दावे का समर्थन किया। अल जजीरा जैसे कट्टरपंथी सोच वाले मीडिया में बैठे लोग इस बात अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि लोकतंत्र एवं स्वायत्तता क्या होती है।

द सावला वड़ा हैंडल चलाने वाले अल्पसंख्यक के हवाले से अल जजीरा ने लिखा कि ‘जे’ नाम का यह लड़का कभी सामने नहीं आया, क्योंकि दक्षिणपंथियों द्वारा उसकी हत्या कर दिए जाने का खतरा था। अल जजीरा का यह भी एक बड़ा प्रोपगेंडा है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में, जहाँ विमर्श की प्राचीन परंपरा रही है, वहाँ कुरान में लिखी बातों को सार्वजनिक रूप से कह देने वाले व्यक्ति का समर्थन करने पर किसी की गला काट दी जाती है, वहाँ वह एक अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति को डरा हुआ बताकर नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहा है।

इसी अल जजीरा ने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के कथित अपमान को लेकर भारत के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिमों द्वारा की गई हत्याओं की कभी आलोचना नहीं की। शायद यह कतर की इस्लामी विचारधारा एवं उसकी कट्टरपंथी नीतियों के अनुरूप शरिया कानून के तहत जायज था। यही अल जजीरा का दोगलापन है। अल जजीरा ने तो यहाँ तक लिख दिया कि उस हैंडल कोे चलाने वाले अनाम लड़के ने यह भी उससे कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय को असहमति व्यक्त करना कठिन है।

जिस तरह से 9 महीने पुराने कंटेंट पर अल जजीरा ने हिंदुओं के त्योहार के दौरान भगवान राम और अयोध्या मंदिर के साथ-साथ सरकार एवं यहाँ की निष्पक्ष न्यायपालिका पर सोच पर सवाल खड़े करने की कोशिश की है, वह उसकी सोच में कट्टरता को दर्शाती है। अल जजीरा फिलिस्तीन में आतंकी संगठन हमास का खुलकर समर्थन करता है। यहाँ तक कि उसका एक पत्रकार पार्ट टाइम आतंकी के रूप में काम करते हुए हाल में मारा गया है।

ऐसे में अल जजीरा की विश्वसनीयता इस्लामी मुल्क के बाहर संदिग्ध है। यह संगठन कतर के आमिर द्वारा फंडेंड है, जो दुनिया भर में आतंकियों के समर्थन में माहौल बनाता है और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने वालों को ही खलनायक बनाने की कोशिश करता है। समय-समय पर वह गैर-मुस्लिमों का मजाक उड़ाने से भी बाज नहीं आता है, जो कि उसके इस लेख से साफ झलकता है।

बहन नहीं… हिंदू लड़की को होटल लेकर गया था अकरम, पिटाई हुई तो इस्लामियों ने फैलाया झूठ: ‘पैगंबर मोहम्मद के अपमान’ पर UP पुलिस ने खोली पोल

सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम युवक को पीटे जाने का वीडियो वायरल हुआ तो इस्लामी कट्टरपंथी तुरंत एक्टिव हो गए। फौरन हिंदूवादी संगठनों और भीड़ को इस घटना का दोषी ठहरा दिया गया। दावा किया गया कि वीडियो गाजियाबाद का है जहाँ एक मुस्लिम लड़के ने पैगंबर मोहम्मद के अपमान के खिलाफ आवाज उठाई थी इसलिए भीड़ उसे मार रही है।

मुस्लिम मिरर जैसे हैंडल्स से कहा गया कि चूँकि मुस्लिम युवक पैगंबर मोहम्मद के अपमान किए जाने का विरोध कर रहा था इसलिए भीड़ ने उसे मारा।

कई मुस्लिम पत्रकार भी इस लिस्ट में जुड़े जिन्होंने फर्जी कहानी फैलाई। वसीम अकरम त्यागी ने तो कहा कि युवक को मजहब संबंधी गालियाँ भी दी गईं और युवक के साथ उसकी बहन थी उसको भी पीटा गया।

AIMIM समर्थक शरीक कुरैशी ने तो बिन सच्चाई जानें घटना के लिए हिंदुओं को दोषी ठहरा दिया। अपने पोस्ट में उसने साफ लिखा- “इतनी नफ़रत किसने भरी? मोटरसाइकिल सवार भाई-बहन पर 8-10 हिंदुत्व गुंडों ने हमला किया और उन्हें पीटा। यहाँ तक कि मासूम लड़की पर भी हमला किया गया। उन पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि उन्होंने पैगंबर मुहम्मद (PBUH) के अपमान का विरोध किया था!!”

अब इस वीडियो की हकीकत क्या है इसे जानते हैं-

सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए जा रहे दावे झूठे हैं। न तो ये वीडियो गाजियाबाद की है। न ही भीड़ मुस्लिम युवक को इसलिए पीट रही है क्योंकि उसने पैगंबर मोहम्मद के अपमान के खिलाफ आवाज उठाई, न ही वीडियो में उसकी कोई बहन है।

असलियत ये है कि ये वीडियो 28 सितंबर को हापुड़ जिले के धौलाना पुलिस स्टेशन की है और पिटने वाले लड़के का नाम अकरम है। आरोप है कि अकरम एक हिंदू लड़की को बहला-फुसलाकर होटल के कमरे में ले गया था। जब लड़की के भाइयों को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने उसे पकड़कर खूब पीटा, जिसकी वीडियो सामने है।

इस संबंध में हापुड़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल का भी मौजूद है। उन्होंने बताया कि इस मामले में हिंदू लड़की ने अकरम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और कहा था कि अकरम ने उसे अपने जाल में फँसाया और उसका यौन शोषण किया। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर शिकायत भी दर्ज की थी।

अब इस मामले को जिस तरह सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है उसे लेकर भी हापुड़ पुलिस कहती है इस मामले में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया गया। पुलिस उन लोगों पर एफआईआर करेगी जो गलत जानकारी फैलाएँगे।

आतंकियों के समर्थक ‘पत्रकार’ वाजिद खान को पुलिस ने दबोचा: बांग्लादेश की तरह भारत में भी ‘तख्त गिराने’ का देखता है सपना, नरसिंहानंद की हत्या के लिए उकसाता है

राजस्थान पुलिस ने सोशल मीडिया पर हिंदूफोबिक कंटेंट डालने वाले इस्लामी आतंकवाद समर्थक वाजिद खान को हिरासत में ले लिया है। पुलिस फिलहाल उसके कंटेंट और उसके संपर्कों की जाँच कर रही है। पुलिस पता लगा रही है कि वाजिद का किसी आतंकी नेटवर्क या देशद्रोही तत्वों के साथ संपर्क तो नहीं है। वह सोशल मीडिया पर हिंदू और यहूदी घृणा से पोस्ट किया करता था और कट्टरपंथी इस्लाम का समर्थन करता था।

वाजिद खान राजस्थान के अजमेर जिले के गवाना के कायड़ रोड का रहने वाला है। उसने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर खुद को पत्रकार बता रखा है। इसके साथ ही अपने बायो में ‘अल जजीरा अंग्रेजी’ लिख रहा है। हालाँकि, वह अल जजीरा में काम करता है या नहीं या वहाँ अपने लेख छपवाता है या नहीं, ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

मुस्लिम मुल्क कतर का सरकार समर्थक मीडिया हाउस अल जजीरा अपने हिंदूफोबिक कंटेंट और इस्लाम परस्ती के साथ-साथ आतंकवादियों के पक्ष में वैश्विक स्तर पर नैरेटिव तैयार करने के लिए कुख्यात है। वाजिद खान यहाँ काम करने का दावा करता है। वाजिद खान कुछ दिन पहले आतंकवादी समूह द्वारा निर्दोष यहूदी नागरिकों पर क्रूर हमले की पहली वर्षगाँठ मनाने के लिए कई ट्वीट पोस्ट किया था।

हमास के प्रति हमदर्दी और यहूदियों से घृणा

बता दें कि पिछले साल 7 अक्टूबर को फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला करके यहूदियों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया था। इस साल 7 अक्टूबर को इसके एक साल पूरे हुए। इस दौरान वाजिद खान ने अपने X हैंडल पर लिखा, “7 अक्टूबर की यादगार तस्वीरें।” इसके साथ ही उसने एक तस्वीर भी पोस्ट की थी।

इस पोस्ट में एक हथियारबंद आतंकवादी एक इजरायली सैनिक को टैंक के ऊपर पकड़े हुए है। वाजिद खान ने इस तस्वीर को विजय वाले इमोजी के साथ पोस्ट करके इसके जरिए इस्लामी आतंकवादियों का महिमामंडन किया था। उसने यह भी कहा कि यह दिन किसी त्यौहार से कम नहीं है, जो फिलिस्तीन से इजरायल की भारी हार की याद दिलाता है।

उसने एक दो अलग-अलग पोस्ट में लिखा था, “7 अक्टूबर की शुभकामनाएँ। 7 अक्टूबर को फिलिस्तीनियों ने इजरायल का सुपर पावर होने का घमंड तोड़ दिया था।” एक अन्य पोस्ट में उसने लिखा था, “इसराइल पर हमले को आज एक साल पूरा हो गया है, उसका ताकतवर बनने वाला भ्रम टूट गया है।” उसने इजरायल पर हमला करने वाले हमास के चीफ याह्या सिनवार ‘गाजा का शेर’ बताया।

हिंदुओं से नफरत और जिहादियों से वाजिद खान का प्यार

वाजिद खान न केवल यहूदियों के प्रति, बल्कि हिंदू समुदाय के प्रति भी नफरत से भरा हुआ है। दोनों के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करने के लिए वह मौत की धमकी देने से भी नहीं चूकता है। वह मुस्लिमों के आतंकवाद के खिलाफ इजरायल के साथ खड़े हिंदुओं से घृणा करता है। यह यति नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की माँग करने वाली सबसे मुखर आवाज़ों में से एक था।

वाजिद खान ने 4 अक्टूबर को नरसिंहानंद और उनके अनुयायियों को मौत की धमकी दी और कहा था, “कल अति (उनके नाम का मजाक उड़ाते हुए) नरसिंहानंद ने नबी ए करीम की शान में ग़ुस्ताखी की थी .. लेकिन कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई। और अब उस मलूँन के चेले भी नबी ए करीम और हज़रत अली की शान में ग़ुस्ताखीं कर रहे है … इनका इलाज एक ही है वो है हज़रत अली की ज़ुल्फ़िकार !!”

जुल्फिकार मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद के दामाद अली इब्न अबी तालिब की तलवार का नाम है। वाजिद खान इस पोस्ट के जरिए कहना था कि हिंदू संत नरसिंहानंद और उनके अनुयायियों को वही मौत के घाट उतारा दिया जाएगा, जो मुस्लिम खलीफाओं और शासकों के शासनकाल के दौरान इस्लाम को अस्वीकार करने वालों को भुगतना पड़ा था।

एक अन्य पोस्ट में उसने लिखा था, “इज़राइल के धर्मगुरु मूर्ति पूजा के बारे में क्या धारणा रखते हैं यह उन्हीं से खुद सुन लीजिए। इनके मुताबिक़ यहूदियों की किताब तल्मूड के अनुसार जो लोग मूर्ति पूजा करते हैं उन्हें इस दुनिया में जीने का अधिकार नहीं है। दुनियाभर के वह 6 बिलियन लोग बोझ है, जो मूर्ति पूजा कर पाखंड कर रहे है, अकाल ही उन्हें अब ख़त्म करना चाहता है, मूर्ख 21 वी सदी में भी पत्थर कलेंडर और पाखंड को पूज रहे हैं! इस वीडियो में इस यहूदी धर्मगुरु ने भारत का भी नाम लिया है।”

बांग्लादेश में जब शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ था, तब इसने कट्टरपंथी बातें लिखी थीं। 5 अगस्त 2024 को उसने बांग्लादेश में इस्लामी झंडा की तस्वीर डालते हुए लिखा था, “सब ताज उछाले जाएँगे, सब तख्त गिराए जाएँगे। बस नाम रहेगा अल्लाह का! Islamic Movement.” यह कट्टर इस्लामी मोहम्मद फैज की कविता का अंश है। वह इस नज्म के माध्यम से भारत में भी तख्ता पलट का सपना देख रहा है।

किसी महिला को सबके सामने ‘वेश्या’ बताना नहीं है अपराध (धारा 509): केरल हाई कोर्ट ने दूसरी धारा का दिया तर्क

केरल हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी महिला को दूसरों के सामने ‘वेश्या’ कहना भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत अपराध नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह अपराध तब होता जब यह बात महिला के सामने कही गई होती। हाई कोर्ट ने कहा कि महिला को लोगों से वेश्या बताना दूसरी धारा के अंतर्गत अपराध भले माना जा सकता है।

केरल हाई कोर्ट में 30 सितम्बर, 2024 को हुई एक सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी जस्टिस बदरुद्दीन ने की। जस्टिस बदरुद्दीन ने कहा कि धारा 509 के तहत इसको अपराध तब माना जाता जब यह शब्द महिला के सामने कहा गया होता और उसकी निजता का उल्लंघन किया गया होता।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि यह दोनों ही शर्तें इस मामले में पूरी नहीं होती थी। ऐसे में कोर्ट ने इसे धारा 509 के तहत अपराध मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि महिला को बाकी लोगों से वेश्या बताना दूसरी धाराओं के अंतर्गत अपराध माना जा सकता है।

कोर्ट ने कहा, “यहाँ अपराध होने के लिए जरूरी पहला शर्त नहीं बनती क्योंकि महिला को आरोपित ने सीधे तौर पर अपशब्द कहे हों। ना महिला ने ऐसा सुना या देखा है। महिला का आरोप है कि आरोपित ने फ्लैट के निवासियों और पास के दुकानदारों से ऐसा कहा था। महिला को इस संबंध में कोई भी सीधी जानकारी नहीं है।”

हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी 2021 में केरल के कोच्चि में दर्ज किए गए एक मामले में सुनवाई करते हुए की है। यहाँ एर्नाकुलम इलाके की एक सोसायटी में रहने वाली एक महिला समीरा ने इसी सोसायटी में रहने वाले राहुल जॉर्ज, एनसन आइजे और द्य्विन कुरुविल्ला पर आरोप लगाया था कि इन तीनों ने सोसायटी और आसपास के इलाके में महिला के विषय में अपशब्द बोले।

महिला का आरोप था कि इन तीनों ने आसपास के लोगों से उसे वेश्या बताया। इसी को लेकर उसने शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला की शिकायत के आधार पर तीनों के विरुद्ध धारा 509 (किसी महिला की लज्जा भंग करने के लिए अपशब्द कहना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इसके बाद आरोपितों ने यह FIR रद्द करवाने के लिए केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। केरल हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सही माना और उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई को रद्द कर दिया।

गोंडा में दुर्गा पूजा पर कट्टर मुस्लिमों का हमला: असलम, सुलतान, मुन्ना ने चलाए पत्थर, देवी-देवताओं को कहे अपशब्द – बच्चों को भी पीटा, एक्शन में UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में मुस्लिमों ने एक दुर्गा पूजा पंडाल पर हमला कर दिया। मुस्लिम भीड़ ने पूजा पंडाल में शामिल हिन्दुओं पर पथराव किया और देवी-देवताओं को अपशब्द कहे। उन्होंने बच्चों तक को लाठियाँ लेकर दौड़ाया। पुलिस ने पथराव की घटना के बाद मामला दर्ज कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोंडा के मसकनवा बाजार इलाके में बुधवार (9 अक्टूबर, 2024) को दुर्गा पूजा पंडाल में मूर्ति स्थापित करने के बाद देवी की आँखों पर से पट्टी हटाई गई थी। इस मूर्ति की स्थापना बीते कई सालों से की जाती है। इस मौके पर यहाँ बड़ी संख्या में हिन्दू इकट्ठा थे।

पूजा अर्चना के बाद कुछ हिन्दू बच्चे इस पंडाल के बाहर पटाखे फोड़ने लगे। पटाखों की आवाज सुन कर पास में रहने वाले मुस्लिम भड़क गए। मुस्लिम परिवार के लोग बाहर निकल कर हिन्दुओं को गालियाँ देने लगे और हमलावर हो गए। उन्होंने पहले हिन्दुओं पर पथराव किया और फिर लाठी डंडों से हमला कर दिया।

इस हमले में मुन्ना, सुल्तान और असलम तथा बाकी लोगों के मुस्लिम परिवार शामिल थे। मुस्लिमों की इस पत्थरबाजी में लगभग 10-12 हिन्दू गंभीर रूप से घायल हो गए। मुस्लिमों को जब हिन्दुओं ने शांत करने की कोशिश की तो वह और उग्र हो गए तथा आसपास से बाकी मुस्लिमों को भी बुलाया।

इसके बाद इस विषय में पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर गोंडा के डीएम और एसपी समेत भारी संख्या में पुलिस बल पहुँचा और मुस्लिमों का हमला रोका। इस पथराव में बच्चे भी घायल हुए हैं। घायल हुए लोगों का इलाज जारी है।

हिन्दुओं ने मुस्लिमों के खिलाफ FIR भी दर्ज करवाई है। इस हमले में पुलिस 12 मुस्लिमों को आरोपित बनाया है। कुछ अवैध लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है। हमला करने वाले मुस्लिमों की तलाश के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है। मामले की अभी जाँच चल रही है।

दिल्ली की महिला CM क्यों नहीं रह पा रही हैं अरविंद केजरीवाल के ‘शीशमहल’ में? AAP की राजनीति में हमेशा छीछालेदर क्यों?

दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास को लेकर मामला गर्माया हुआ है। 9 अक्तूबर को स्थिति ऐसी आ गई कि पीडब्लूडी (पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट/लोक निर्माण विभाग) को आवास ही सील करना पड़ा। अब इसमें न अरविंद केजरीवाल रह रहे हैं और न वर्तमान सीएम आतिशी। आवास को आवंटित करने का अधिकार पीडब्लूडी पर है। वहीं फैसला लेंगे कि ये किसे दिया जाएगा।

कहा जा रहा है जब अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा देने के बाद बंगला छोड़ा तो उन्होंने इसकी चाबी पीडब्लूडी को दी ही नहीं, जो तस्वीर सामने आई थी वो मात्र दिखावा थी। वहीं इसके बाद सीएम आतिशी इसमें सामान रखने लगीं। इसी को लेकर भाजपा ने सवाल उठाए और मामला प्रकाश में आया। अब सीएम आतिशी की ओर कहना है कि उनका सामान एलजी ने आवास से बाहर फिंकवा दिया है जबकि एलजी का इस संबंध में कहीं कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

केजरीवाल के बाद बंगले में शिफ्ट हुईं सीएम आतिशी

मालूम हो कि 17 सितंबर को अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और 21 सितंबर को आतिशी ने सीएम पद की शपथ ली थी। इसके बाद 4 अक्तूबर को खबर आई कि ‘ईमानदारी की मूरत’ केजरीवाल ने खुद ही सीएम आवास (6 फ्लैगस्टॉफ रोड बंगला) खाली कर दिया है और फिरोजशाह कोटला स्थित AAP सांसद अशोक मित्तल के आवास पर शिफ्ट हो गए हैं।

सुनीता केजरीवाल की बाकायदा चाबी सौंपते फोटो भी दिखाई गई जिसे देख कई AAP समर्थक भावुक हुए। सबने अपने अंदाज में अरविंद केजरीवाल की ईमानदारी और निष्ठा की तारीफ की। लेकिन, इसके बाद पीडब्लूडी द्वारा लिखे गए पत्र से पता चला कि सुनीता केजरीवाल ने ये चाबी पीडब्लूडी को दी ही नहीं। फोटो खिंचाते टाइम जो चाबी सौंपी गई थी वो भी बाद में वापस ले ली गई।

पीडब्लूडी को चाबी देना क्यों जरूरी

दरअसल, जब भी कोई अधिकारी या नेता सरकारी आवास को खाली करता है तो बंगले की चाबी पीडब्लूडी को दी जाती है। इसके बाद पीडब्लूडी उसे कब्जे में लेकर उसकी इंवेंट्री बनाता है और उसके बाद घर किसी को आवंटित होता है। इस मामले में चाबी पीडब्लूडी तक पहुँची ही नहीं। सीधे 7 अक्तूबर को सीएम आतिशी बंगले में शिफ्ट हो गईं और अपना सामान वहाँ रखवा दिया।

इसके बाद पहले विजिलेंस विभाग ने केजरीवाल के स्पेशल सेक्रेट्री समेत तीन अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस भेजा। सवाल हुए कि सीएम आवास की चाबियाँ पीडब्लूडी को क्यों नहीं सौंपी गईं। वहीं जब अन्य दलों को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने भी सवाल खड़े किए। भाजपा ने भी पूछा कि आखिर शीशमहल में ऐसा क्या है जो चाबियाँ देकर वापस ले ली गई। विवाद बढ़ा तो पीडब्लूडी ने इस पर एक्शन लेते हुए 9 अक्तूबर को बंगला सील कर दिया।

बंगला हुआ सील

जानकारी के मुताबिक, PWD के अधिकारी 9 अक्तूबर 2024 की सुबह 11-11:30 बजे सीएम आवास आए थे जहाँ उन्हें आवास की चाबियाँ सीएम आतिशी के पास मिलीं, जब सवाल हुए तो पता चला कि आतिशी पर सिर्फ चाबियाँ हैं, बंगले से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज नहीं। ऐसे में उनसे चाबियाँ ले ली गईं और आवास सील कर दिया गया।

इसके बाद सीएम आतिशी ने एलजी पर इल्जाम लगाया कि उन्होंने भाजपा के कहने पर उनको सीएम आवास से बाहर करवाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम आवास किसी बड़े भाजपा नेता को देने की तैयारी हो रही है। वो बंगले को हथियाना चाहते हैं। इसी प्रकार आप नेता संजय सिंह ने भी कहा कि भाजपा ये आवास कब्जाना चाहती है इसलिए ये सब हुआ है।

क्या ‘शीशमहल’ है मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास

सच्चाई जबकि ये है कि जिस ‘शीशमहल’ बंगले पर ताला लगा है वो कोई आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास नहीं है। इसके मालिक पीडब्लूडी हैं। उन्हें ही अधिकार है कि वो इसे किसे आवंटित करेंगे। वहीं सीएम आतिशी को पहले से 17एबी मथुरा रोड का आवास मिला हुआ है। ऐसे में उन्हें दो आवास कैसे मिल सकते हैं। जानकारी ये भी हो कि दिल्ली में मुख्यमंत्री के लिए कोई आधिकारिक आवास नहीं है। अरविंद केजरीवाल से पहले सीएम रहीं शीला दीक्षित पहले एबी-17 मथुरा रोड और दूसरे कार्यकाल में 3 मोतीलाल नेहरू मार्ग वाला बंगला में रही थीं। वहीं 1993 में मदनलाल खुराना को 33 शामनाथ मार्ग मिला था और साहिब सिंह वर्मा 9 शामनाथ मार्ग मिला था।

हनुमान पाँचों वक्त का नमाज पढ़ते थे, राम जी ने पहली बार पढ़वाया था: सरकारी टीचर जियाउद्दीन ने क्लास में कहा- वे मूर्ख थे, गंगा भी देवी नहीं

बिहार के बेगूसराय में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने हिंदुओं के आराध्य भगवान राम और हनुमान जी को मुस्लिम बताया है। क्लास में पढ़ाते समय जियाउद्दीन ने बच्चों से कहा कि ‘भगवान राम और उनके भक्त हनुमान पहले मुसलमान थे। वे नमाज पढ़ा करते थे।’ इतना ही नहीं, उसने हनुमान जी को मूर्ख और माँ गंगा को शक्तिहीन बताया। इसकी जानकारी लोगों को मिली तो उन्होंने हंगामा कर दिया। वहीं, बेगूसराय से भाजपा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शिक्षक पर कार्रवाई की बात कही है।

मोहम्मद जियाउद्दीन बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड में स्थित हरिपुर कादराबाद के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षक है। मंगलवार (8 अक्टूबर 2024) को वह 7वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ा रहा था। सामान्य ज्ञान और व्याकरण की कक्षा के दौरान उसने यह आपत्तिजनक बातें कही। शिक्षक जियाउद्दीन ने कहा, हनुमान जी पाँचों वक्त का नमाज पढ़ते थे। रामजी ने उन्हें पहली बार नमाज पढ़वाया था।”

इतना ही नहीं, ईटीवी के रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 से इस स्कूल में पदस्थापित शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने क्लास में बच्चों को पढ़ाते वक्त माँ गंगा के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। गंगा नदी की शक्ति पर सवाल खड़ा करते हुए उसने बच्चों से कहा, “गंगा नदी देवी का रूप नहीं है। अगर ऐसा होता तो लोग गंगा नदी में डूब क्यों जाते… मर क्यों जाते…?” 

स्कूल के विद्यार्थी जब घर गए तो उन्होंने परिजनों और गाँव वालों को इस बात की जानकारी दी। इसके बाद गाँव वाले एकजुट होकर उसी दिन शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन के घर गए थे। कहा जा रहा है कि लोगों के गुस्से को देखते हुए शिक्षक ने माफी माँग ली। हालाँकि, लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ। अगले दिन बुधवार को जब स्कूल खुला तो छात्रों के परिजन स्कूल पहुँच गए और विद्यार्थियों से पूछताछ की।

साहिबा परवीन नाम की छात्रा ने कहा, “टीचर ने कहा कि हनुमान जी हिंदू धर्म के पहले ऐसे भगवान हैं, जिन्होंने नमाज पढ़ी थी। उनको रामजी ने नमाज पढ़वाया था। हनुमान जी मुसलमान हैं।” वहीं, मानव कुमार नाम के छात्र ने कहा, “जियाउद्दीन सर ने क्लास में हनुमान जी मुस्लिम थे। हनुमान जी पढ़ने-लिखने में मूर्ख थे। मूर्खता के कारण ही वो पर्वत उठा लाए थे। उन्हें राम जी ने पहली बार नमाज पढ़ाया था।”

अन्य विद्यार्थियों ने भी यही बातें दोहराईं। इतनी बातें सुनकर परिजनों के साथ-साथ स्कूल के अन्य शिक्षक भी सन्न रह गए। उन्होंने मोहम्मद जियाउद्दीनसे नाराजगी जाहिर जाहिर की। विद्यार्थियों के मुँह से इतना सुनते ही परिजनों का गुस्सा बढ़ गया और हंगामा करते हुए शिक्षक पर कार्रवाई की माँग करने लगे। परिजनों की नाराजगी को देखते हुए मोहम्मद जियाउद्दीन ने एक बार फिर माफी माँगी।

शिक्षक मोहम्मद जियाउद्दीन ने कहा, “मैंने गलती से ऐसी बातें बच्चों को पढ़ा दी। मुझसे गलती हो गई, माफ कर दीजिए। आज के बाद ऐसा नहीं होगा।” जियाउद्दीन ने परिजनों से कहा कि वह उसने ‘मुसल्लम ईमान’ की बात छात्रों को बताई। जब परिजनों ने उससे पूछा कि बच्चों को उसने क्या पढ़ाया था तो इस सवाल के वह जवाब में चुप्पी साधे रहा। इसके बाद परिजनों के गुस्सा और बढ़ गया।

परिजनों ने शिक्षक जियाउद्दीन को निलंबित कर उस पर एफआईआर दर्ज करने की माँग पर अड़े रहे। विवाद बढ़ने की जानकारी जब अधिकारियों को हुई तो बीडीओ अभिषेक राज और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी निर्मला कुमारी स्कूल पहुँचे और जाँच की। बीडीओ ने कहा कि शिक्षक ने परिजनों के सामने सार्वजनिक रूप से माफी माँग ली है। हालाँकि, जाँच के दौरान शिक्षक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है।

इस घटना के बाद बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी हिंदू धर्म के महान भक्त हैं। इस प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँची है। उन्होंने धार्मिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जिला प्रशासन से शिक्षक पर तुरंत कार्रवाई करने की माँग की है।

गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया साइट X पर अपने बयान का वीडियो जारी करते हुए कहा, “बछवाड़ा प्रखंड के हरपुर, कादराबाद (बेगूसराय) के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षक जियाउद्दीन द्वारा भगवान राम और हनुमान जी को मुसलमान बताने पर ग्रामीणों ने विरोध जताया। जियाउद्दीन ने इसे स्वीकारा और मुस्लिम छात्राओं समेत अन्य ने पुष्टि की। समाज में विद्वेष फैलाने वाले ऐसे शिक्षकों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”

अवैध संजौली मस्जिद गिराने पर पलटे मुस्लिम, पहले की तोड़ने की बात, अब हाई कोर्ट जाने का किया ऐलान: मंडी की अवैध मस्जिद भी नहीं तोड़ी

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अवैध रूप से बनाई गई संजौली मस्जिद को लेकर मुस्लिम अपनी ही बातों से पीछे हट रहे हैं। विरोध प्रदर्शन के बाद पहले मुस्लिमों ने इस मस्जिद के अवैध हिस्से को गिराने का प्रस्ताव दिया था लेकिन अब मुस्लिम संगठन इसको लेकर कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं। शिमला के अलावा मंडी की मस्जिद को मुस्लिमों ने ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी गिराना चालू नहीं किया है। हिन्दुओं ने इसको लेकर अल्टीमेटम दिया है।

शिमला की संजौली मस्जिद को लेकर सितम्बर माह में काफी बवाल हुआ था। स्थानीय हिन्दुओं ने इसको गिराए जाने की माँग की थी। तब मस्जिद कमिटी ने नगर निगम कार्यालय में स्वयं आवेदन देकर माँग की थी कि मस्जिद के अवैध हिस्से को तोड़ दिया जाए। मस्जिद कमिटी ने कहा था कि बाहरी लोगों ने आकर इस मस्जिद में अवैध रूप से निर्माण किया है और इसको गिराने जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा था कि भाईचारे के चलते हम यह मस्जिद गिराना चाहते हैं।

मस्जिद कमिटी के इस आवेदन पर 5 अक्टूबर, 2024 को नगर निगम ने तोड़ने की अनुमति दी थी। इसको लेकर शिमला के नगर निगम आयुक्त ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। उन्होंने मस्जिद की तीन मंजिलों को गिराने जाने की अनुमति दी थी। इसको लेकर लिखित आदेश भी मस्जिद कमिटी को जल्द ही भेज दिया जाएगा।

मस्जिद तोड़ने का आदेश जारी होने के बाद ऑल हिमाचल मुस्लिम्स ऑर्गनाइजेशन ने हाई कोर्ट जाने की बात कहना चालू कर दी है। बुधवार (9 अक्टूबर, 2024) को शिमला में हुई इस संगठन की बैठक में फैसला लिया गया है कि यह संगठन मस्जिद गिराने के आदेश के विरुद्ध हाई कोर्ट का रुख करेगा।

मुस्लिम संगठन ने कहा है कि वह हर मुसलमान की मजहबी आजादी के लिए लड़ेंगे और नगर निगम के फैसले को हाई कोर्ट में घसीटेंगे। संगठन ने यह भी कहा है कि नगर निगम का फैसला तथ्यों से परे है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

वहीं दूसरी तरफ संजौली मस्जिद कमिटी ने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया है। संजौली मस्जिद कमिटी ने कहा है कि वह नगर निगम के फैसले से संतुष्ट हैं। उन्होंने मुस्लिम संगठन के फैसले से किनारा किया है और कहा कि वह उनका निजी फैसला है।

मस्जिद कमिटी के मुखिया लतीफ़ ने कहा है आदेश की कॉपी उन्हें जितनी जल्दी मिलेगी, वह उतनी जल्दी मस्जिद के अविअध हिस्से को गिराना चालू कर देंगे। उन्होंने मुस्लिम संगठन पर लोगों को भड़काने का भी आरोप लगाया है।

मंडी मस्जिद पर हिन्दू संगठनों ने दिया अल्टीमेटम

शिमला के अलवा हिमाचल प्रदेश के मंडी में अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद को लेकर भी हिन्दू संगठनों ने अल्टीमेटम दिया है। मंडी की जेल रोड पर बनी मस्जिद के निर्माण को नगर निगम ने सितम्बर माह में अवैध करार दिया था। नगर निगम ने मस्जिद गिराने को लेकर नोटिस भी जारी किया था। नगर निगम ने मस्जिद का बिजली और पानी का कनेक्शन भी काट दिया था।

इसके तहत 12 अक्टूबर, 2024 तक मस्जिद का अवैध हिस्सा तोड़ा जाना था। हालाँकि, मुस्लिमों ने अभी भी इस मस्जिद को तोड़ने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है। इससे गुस्साए हिन्दुओं ने कहा है कि अगर ऐसा नहीं होता तो वह नगर निगम कार्यालय का घेराव करेंगे।