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पुलिस वाले का बेटा कैसे बना गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, जेल में बंद फिर कैसे करवाता है हत्या, क्या सलमान खान से करीबी में गई बाबा सिद्दीकी की जान: सारे सवालों का जवाब एक साथ

एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की शनिवार (12 अक्टूबर 2024) को मुंबई में हत्या कर दी गई। बाबा सिद्दीकी को 6 गोलियाँ मारी गई, जिसमें से तीन उन्हें लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया। बाबा सिद्दीकी को मुंबई की राजनीतिक और फिल्मी दुनिया में अपने कनेक्शनों की वजह से जाना जाता था। वो कॉन्ग्रेस पार्टी से 3 बार विधायक और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी रहे थे। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में 2 हमलावर पकड़े गए, जो हरियाणा और यूपी के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इनकी पहचान लॉरेंस बिश्नोई गैंग के शूटरों के तौर पर हुई है।

लॉरेंस बिश्नोई का नाम आज भारत में अपराध और गैंगस्टरों की दुनिया में बहुत ऊपर आ चुका है। वह एक ऐसे गैंगस्टर के रूप में उभरा है, जिसने न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने आपराधिक साम्राज्य का विस्तार किया है। उसकी कहानी एक साधारण पुलिस कॉन्स्टेबल के बेटे से शुरू होती है, जो अंततः भारत का सबसे खतरनाक अपराधी बन गया। इस रिपोर्ट में लॉरेंस बिश्नोई के जीवन, उसकी आपराधिक गतिविधियों और उसके गिरोह के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है।

लॉरेंस बिश्नोई की शुरुआती जिंदगी और पढ़ाई-लिखाई

लॉरेंस बिश्नोई का जन्म 12 फरवरी 1993 को पंजाब के फिरोजपुर जिले के एक छोटे से गाँव में हुआ था। उसके पिता हरियाणा पुलिस में कॉन्स्टेबल थे, जो 1992 में पुलिस में शामिल हुए थे, लेकिन कुछ साल बाद नौकरी छोड़कर खेती करने लगे। बचपन में लॉरेंस का सपना था कि वह एक बड़ा अधिकारी बने। उसकी माँ को भी उम्मीद थी कि उनका बेटा उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक सफल व्यक्ति बनेगा। लॉरेंस ने पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की और चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। लेकिन उसकी जिंदगी तब बदल गई जब वह कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में हार गया।

छात्र राजनीति से अपराध की दुनिया तक का सफर

कॉलेज चुनाव में हार ने लॉरेंस के जीवन को पूरी तरह बदल दिया। हार का अपमान वह सहन नहीं कर पाया और उसने अपराध की दुनिया की ओर कदम बढ़ा दिया। इस दौरान उसने छात्र राजनीति के माध्यम से गोल्डी बराड़ से मुलाकात की, जिसने उसे अपराध की दुनिया में खींच लिया। लॉरेंस के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ था। उसने अपना पहला अपराध 2011 में चंडीगढ़ में किया, जब एक लड़ाई के दौरान उसने गोली चला दी। इसके बाद उसके खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज हुई और यहीं से उसका आपराधिक सफर शुरू हो गया।

लॉरेंस की खतरनाक गैंग, कई हाई-प्रोफाइल मामलों में आया नाम

लॉरेंस बिश्नोई ने धीरे-धीरे अपना गिरोह खड़ा करना शुरू किया। उसका सबसे करीबी सहयोगी संपत नेहरा था, जो एक पुलिस इंस्पेक्टर का बेटा था और एक बेहतरीन एथलीट भी था। लॉरेंस की खासियत यह थी कि वह खुद कभी हिटमैन नहीं बना, बल्कि उसने अपने गिरोह के लिए शार्प शूटरों को शामिल किया। बिश्नोई का गैंग उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में सक्रिय है, जिसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। उसके गैंग में लगभग 700 से ज्यादा शार्प शूटर शामिल हैं, जो उसकी हर योजना को सफल बनाने में सक्षम हैं।

लॉरेंस बिश्नोई का नाम उस समय चर्चा में आया जब उसने 2018 में बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता सलमान खान को जान से मारने की धमकी दी। उसने अपने साथी संपत नेहरा को मुंबई भेजा, ताकि वह सलमान खान को मार सके। हालाँकि, नेहरा को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया, जिससे यह योजना नाकाम हो गई।

सलमान खान को धमकी और बाबा सिद्दीकी पर हमले का कनेक्शन?

लॉरेंस बिश्नोई की सलमान खान से दुश्मनी का कारण 1998 का काले हिराण के शिकार का मामला है, जिसमें सलमान आरोपित थे। बिश्नोई समुदाय ब्लैकबक को पवित्र मानता है और इसी के चलते बिश्नोई ने सलमान को जान से मारने की धमकी दी थी। सवाल उठता है कि क्या बाबा सिद्दीकी की हत्या का संबंध सलमान खान से उनकी नजदीकी के कारण है? बाबा सिद्दीकी और सलमान खान के अच्छे संबंध किसी से छिपे नहीं थे। यह भी संभव है कि लॉरेंस बिश्नोई ने बाबा सिद्दीकी को सलमान खान से नजदीकी के कारण टारगेट किया हो, हालांकि पुलिस की जाँच अभी इस दिशा में स्पष्ट निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।

इसके अलावा, लॉरेंस का नाम पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी आया। 2022 में मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह ने ली। यह हत्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में रही। इसके बाद से ही लॉरेंस और उसके गिरोह पर कानून का शिकंजा कसता चला गया।

सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बढ़ाया दबदबा

लॉरेंस बिश्नोई का एक और अहम पहलू उसकी सोशल मीडिया पर सक्रियता है। जेल में रहते हुए भी उसने सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने डर और आतंक को फैलाने के लिए किया। वह अक्सर अपने गैंगस्टर जीवन की तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करता था, जिससे उसकी छवि और भी डरावनी हो गई। फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर उसकी बढ़ती लोकप्रियता ने उसकी अपराधी छवि को और मजबूत किया। इसके माध्यम से वह नई भर्तियों को आकर्षित करता और अपना आपराधिक नेटवर्क फैलाता था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपराधिक साम्राज्य

लॉरेंस बिश्नोई का गिरोह केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार विदेशों तक फैले हुए हैं। उसके करीबी सहयोगी गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा जैसे अपराधी विदेश से बैठकर भारत में अपराधों को अंजाम देते हैं। लॉरेंस का गैंग न केवल रंगदारी और हत्या जैसे अपराध करता है, बल्कि अवैध हथियारों की तस्करी, फिरौती, और अन्य संगठित अपराधों में भी शामिल है। उसके गैंग का नेटवर्क इतना मजबूत है कि जेल में रहते हुए भी वह अपने गैंग को कंट्रोल करता है और नए अपराधों की योजना बनाता है।

आतंकवाद के भी आरोप, UAPA का केस

लॉरेंस बिश्नोई के खालिस्तानी समर्थकों और आईएसआई से संबंधों की भी जाँच हो रही है। उसकी गतिविधियों पर नजर रखने वाली राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामले दर्ज किए हैं। इस आरोप के पीछे की वजह यह है कि बिश्नोई के गिरोह के लोग खालिस्तानी समर्थक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही उसके आईएसआई से भी संबंध होने के आरोप लगे हैं, जो भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।

लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह की सबसे बड़ी खासियत है कि उसके पास एक मजबूत नेटवर्क और पेशेवर शूटरों की टीम है। ये शूटर किसी भी बड़ी सुपारी को अंजाम देने में सक्षम होते हैं। लॉरेंस की खासियत यह है कि वह जेल में रहते हुए भी अपना अपराधी साम्राज्य चला रहा है। वह कई छोटे गिरोहों के साथ मिलकर बड़े अपराधों को अंजाम देता है, जो उसके गिरोह को और भी खतरनाक बनाता है।

जुर्म की दुनिया का बड़ा नाम

लॉरेंस बिश्नोई का जीवन अपराध और हिंसा से भरा रहा है। वह एक साधारण कॉलेज स्टूडेंट से लेकर भारत के सबसे खतरनाक गैंगस्टर के रूप में उभरा है। उसकी कहानी यह दिखाती है कि किस प्रकार एक साधारण इंसान अपराध की दुनिया में जाकर कितना खतरनाक बन सकता है। उसका गिरोह आज भी सक्रिय है, और भारतीय कानून व्यवस्था के लिए यह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उसकी गिरफ्तारी और जेल में बंद होने के बावजूद, उसका आपराधिक नेटवर्क देश और विदेश दोनों जगह सक्रिय है, जो यह साबित करता है कि वह जुर्म की दुनिया का एक बड़ा नाम बन चुका है।

काली मंदिर में चोरी करने वाले 4 संदिग्ध गिरफ्तार, PM मोदी का दिया मुकुट अब तक नहीं मिला: बांग्लादेश के हिंदुओं में असंतोष, भारत सरकार ने जाहिर की थी चिंता

बांग्लादेश के सतखीरा में एक हिन्दू मंदिर में चोरी के मामले में पुलिस ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन संदिग्धों पर श्यामनगर स्थित जेशोरेश्वरी मंदिर से देवी काली की प्रतिमा का मुकुट चुराने का आरोप है। पकड़े गए चोरों की पहचान सार्वजानिक नहीं की गई है। यह मुकुट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2021 में अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान भेंट किया था। चाँदी के इस मुकुट पर सोने का पानी चढ़ा हुआ था जिसे गुरुवार (10 अक्टूबर 2024) को चुरा लिया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला सतरीखा के थानाक्षेत्र श्यामनगर का है। यहाँ स्थित जेशोरेश्वरी माँ काली का मंदिर आसपास के हिन्दू लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर के पुजारी ज्योति प्रकाश चट्टोपाध्याय हैं जिन्होंने गुरुवार को पुलिस में तहरीर दी थी। तहरीर में उन्होंने बताया कि माँ काली की मूर्ति का मुकुट किसी ने चोरी कर लिया है। यह चोरी महज 10-12 सेकेंड के अंदर तब हुई जब मंदिर परिसर में कई श्रद्धालु नवरात्रि के अवसर पर मौजूद थे।

चोरी की घटना CCTV में कैद भी हो गई। इस फुटेज में लगभग 25 वर्षीय एक संदिग्ध मंदिर से मुकुट चुरा कर ले जाता दिख रहा है। मंदिर में आराम से घूमते टहलते हुए इस संदिग्ध ने चोरी के बाद मुकुट को अपनी टी शर्ट में छिपा लिया था। प्रथम दृष्टया में यह माना जा रहा है कि चोर ने इस घटना को पूरी तैयारी करके अंजाम दिया है और उसे मंदिर की भौगोलिक स्थिति के बारे में पूरी जानकारी थी। चोरी का खुलासा तब हुआ जब दिन भर की पूजा अर्चना के बाद मंदिर को बंद किया जा रहा था।

चोरी का केस दर्ज होने के बाद सतखीरा जिला पुलिस ने शुक्रवार (11 अक्टूबर 2024) को अपने फेसबुक पेज पर घटना की CCTV फुटेज शेयर की। तब पुलिस ने लोगों से अपील की थी कि वो संदिग्ध की पहचान करने में मदद करें। इस मदद की एवज में उचित इनाम दिए जाने की भी घोषणा की गई थी। घटना के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के युवा और खेल सलाहकार आसिफ महमूद शोजिब भुइयां ने जेशोरेश्वरी मंदिर का दौरा किया।

आसिफ महमूद शोजिब भुइयां ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वो चोर को जल्द से जल्द गिरफ्तार करके मुकुट बरामद करे। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने चोरी की इस घटना पर गहरी चिंता जाहिर की है। इन सभी ने बांग्लादेश के अधिकारियों से अपील की है कि वो चोरी हुआ मुकुट जल्द ही बरामद करें। बताते चलें कि जेशोरेश्वरी मंदिर हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है।

चोरी के इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए 4 लोगों लोगों से पूछताछ की जा रही है। फ़िलहाल मुकुट को अभी बरामद नहीं किया जा सका है। मुकुट की बरामदगी में हो रही देरी से बांग्लादेश के हिन्दुओं में निराशा बढ़ रही है। गौरतलब है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मार्च 2021 को यहाँ स्थापित प्रतिमा पर खुद मुकुट चढ़ाया था। मुकुट के चोरी होने के बाद से अब तक मंदिर में कोई पूजा नहीं हुई है।

सुशांत-दिशा सालियान पर जो रहे चुप, वे बाबा सिद्दीकी पर बेचैन क्यों… जिस हत्या पर मची राजनीतिक रार, उसकी विद्रूप सच्चाइयों को एक नेता ने ही खोला

भारत का भगोड़ा दाऊद इब्राहिम कब का मुंबई से भागकर पाकिस्तान चला गया, लेकिन उसकी दुम के बाल जगह-जगह सफेदपोश बनकर तो कहीं कारोबारी या ड्रग-हवाला-माफिया-अंडरवर्ल्ड रैकेट के एजेंट और बॉलीवुड दुनिया के सितारे बनकर आज तक जीवंत हैं।दिलचस्प है कि मुंबई की महानगरीय एलीट या संभ्रांत समाज-संस्कृति ने इन सभी को बहुत अच्छे से अपने में समाहित कर प्रासंगिक बनाया है। ऊपर से इनको सेलिब्रिटी स्टेट्स भी बखूबी प्रदान किया है, जिनके पीछे देशभर के लोग दीवानगी करते नजर आते हैं। इन फिल्मी सेलिब्रिटीज के कपड़े-घर-गाड़ियों एवं रहन-सहन की चकाचौंध में इनके चाल-चरित्र-चेहरे के बड़े ही घटिया स्तर के ऐब भी छुप जाते हैं।

सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियन की संदेहास्पद मृत्यु पर कितनी भी परदेदारी क्यों न की जाए, लेकिन सच तो मुंबई की इन चमकीली बदनाम गलियों में गोल-गोल घूम ही रहा है। इस मामले में पुलिस-प्रशासन या सीबीआई कानूनन सत्य को कभी साबित कर पाएगा, इस पर आम लोगों को गंभीर संदेह है। सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं तो इन शातिर गिरोहों से कौन लड़ेगा? सहमति के सिद्धांत पर आधारित सब अपनी-अपनी दुकान चलाने के लिए जुगाड़ लगाने-भिड़ाने में लगे हैं।

भारत में बड़ी संख्या में खाॅंटी मुस्लिमपरस्त, राष्ट्रविरोधी एवं सत्य सनातन हिंदू विरोधी भी सफेदपोश राजनीतिक, व्यवसायी, बॉलीवुड स्टार बनकर एक अलग तरह का घेटो सिस्टम वाला कूप- मंडूक समाज खड़ा कर चुका है। यह जो दूर से दिखता जन्नत वाला समाज है वो नैतिकता के तकाजे पर नरक से कम नहीं है। बाहर से तो लोगों को उनका चमकीला स्वार्गिक सुख दिखाई देता है और लोग उनकी नकल उतारने में भी लगे रहते है। इस फिल्मी दुनिया में सब कुछ स्टेज मैनेज्ड सा लगता है या फिर ऐसा लगता है कि सब कुछ स्पॉन्सर्ड है या फिर प्री प्लांड पीआर (पब्लिक रिलेशन)-ब्रांडिंग-एडवर्टाइजमेंट का मकसद है।

बॉलीवुड में कुछ भी ऐसे ही नहीं होता और ना ही ये स्टार्स कुछ भी बिना मकसद के करते हैं। इनके लिए पीआर एजेंट या कंपनियाँ, यहाँ तक तय करती हैं कि किसी के मरने पर कौन स्टार कब जाएगा, नहीं जाएगा या फिर जाना चाहिए कि नहीं। यह सब कुछ सेलिब्रिटीज की छवि से जुड़े नफा-नुकसान पर आधारित पर पीआर स्टंट की तरह है। सुशांत सिंह राजपूत के मरने पर अस्पताल या शमशान कौन-कौन पहुँचा और फिर बाबा सिद्दीकी के मरने पर कौन-कौन पहुँचा, यह भी एक बड़ा सवाल है! इन सब के पीछे क्यों और किसलिए जोड़कर सवाल की गंभीर पड़ताल करने पर दिलचस्प तथ्य जरूर निकाल सकते हैं।

भारत देश की त्रासदी है कि आजादी के बाद देश के तमाम सामाजिक-राजनीतिक क्रांति करने वाले पुरोधाओं के ऊपर महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू का चेहरा थोप दिया गया और उसके आगे-पीछे मौजूद तमाम पुरोधाओं और महानायकों को भुला दिया गया। आज भारत में बहुत देर से ही सही महात्मा फुले, सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, कर्पूरी ठाकुर, बीपी मंडल की प्रासंगिकता स्थापित हो सकी है तो यह गैर- कॉन्ग्रेसी सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन की देन है।

दिलचस्प है कि आजादी के लगभग 60 सालों तक तो किसी भी दलित-आदिवासी-पिछड़ा नायकों को मान-सम्मान तक नहीं मिला और ना ही उनकी प्रासंगिकता स्थापित हो सकी थी। देश की आजादी के ऐसे महानायक जिनको दोहरी काला पानी की सजा दी गई थी, ऐसे वीर सावरकर जी को स्वतंत्रता सेनानी मानने से इनकार करने वालों की एक बड़ी जमात इस देश में 70 सालों तक राज करती रही थी। यह महज संयोग नहीं था, बल्कि गंभीर प्रयोग था जो भारत को आज के पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान जैसा बनाने की ओर अग्रसर था।

इसी बुनियाद पर सारे साहित्य, शैक्षणिक कोर्स करिकुलम या सिलेबस बनाए गए थे जिसका कोर्स करेक्शन अत्यंत ही जरूरी था। अब कालांतर में प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति अथवा राजनीतिक दल अपनी पार्टियों के नेताओं को स्वयंभू भारत रत्न घोषित करने की परंपरा बना चुके हों तो उस देश को उनके हकीकत के आदर्श पुरोधाओं से वंचित रखने की साजिश भी नजर आती है। आज भारत में एक ओबीसी-अति पिछड़ा समाज के व्यक्ति श्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जिस तरह की प्रतिक्रियाएँ सामाजिक-राजनीतिक और खास धार्मिक समूह की ओर से व्यक्त की जाती है, इसका अध्ययन हमें कई बेहतर निष्कर्ष की ओर ले जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की राजनीतिक सफलताएँ साबित करती है कि राष्ट्रवाद और सामाजिक न्याय एक समानांतर चलने वाली वैचारिक धारा है जिसकी आवश्यकता भारत को है। अबतक समाजवाद, वामपंथ और कॉन्ग्रेस की राजनीति में जिस तरीके से धर्मनिरपेक्षता की राजनीति को अति-प्रमुखता देकर सामाजिक न्याय की धारा को कुंद करने का काम हुआ, वह दलित-आदिवासी-पिछड़ा समाज के लिए अफीम के नशे से कम नहीं है। पूरे भारतीय सबाल्टर्न समाज को 70 सालों तक छद्म धर्मनिरपेक्षता की घुट्टी पिलाकर सामाजिक न्याय की पूरी राजनीति को मुस्लिमपरस्ती, राष्ट्रविरोध और सत्य सनातन हिंदू विरोध की धारा पर स्थापित करने का काम किया गया है। अब भारत निश्चित तौर पर हर घटना-दुर्घटना और हर पल स्थापित प्रचलित धारणा पर नए तरीके एवं नई दृष्टि से विमर्श की जरूरत को महसूस करने लगा है।

मौत किसी की भी हो दुखद है। वैसे भारत देश में तो किसी अपराधी या आतंकवादी की फाँसी की सजा पर भी प्रोपेगेंडा विमर्श और गंभीर सवाल उठाए जाने की परंपरा रही है। फिर इस सवाल में पीड़ित-मृतक-आरोपी एवं अपराधी की जाति और धर्म भी उतना ही महत्वपूर्ण सवाल बनते रहे हैं। बाबा सिद्दीकी की मौत से जुड़े रहस्यों का पर्दाफाश जरूरी है ही, अपराधियों को सख्त से सख्त सजा भी मिलनी चाहिए। इस बात की पूरी उम्मीद है कि मुंबई और महाराष्ट्र पुलिस का वह रवैया निश्चित ही इस मामले में नहीं होगा जो सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान के मामले में था। लेकिन मुंबई की बदनाम गलियों में देर-सवेर यह भी घूमना शुरू हो जाएगा कि किसके पैसे कौन लगाता था? कौन ब्लैक को व्हाइट करता था? किसके हवाला कारोबार थे? और फिर किस सेलिब्रिटीज या सफेदपोशों के कितने पैसे डूबे। बाबा सिद्दीकी की मौत के बाद सामने आ रहे राजनीतिक-सामाजिक-सेलिब्रिटी लोगों की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रतिक्रियाओं और व्यक्तिगत तौर पर इनकी सक्रिय या बेचैन गतिविधियों में इस बात का जवाब ढूँढने की कोशिश की जा सकती है।

जीवन सबका महत्वपूर्ण है, लेकिन जीवन के प्रति हर व्यक्ति का नजरिया अलग हो सकता है। जो बाबा सिद्दीकी के मौत पर बेचैन हैं, वह निश्चित तौर पर सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर बेचैन नहीं थे और दिशा सालियान की मौत पर तो वे मरघट जैसी चुप्पी साधे हुए थे। बुरा लग सकता है पर खुलकर कहना जरूरी है कि नाली में कीड़े भी तो बड़े मजे से जिंदगी जीते हैं और ये कीड़े मानव जीवन, समाज एवं राष्ट्र के लिए कितने खतरनाक है इसका अंदाजा हम लगा ही सकते हैं। इन कीड़ों को क्या हम अपने ड्राइंग रूम में एक्वेरियम के भीतर इस तरह रख सकते हैं जिस तरह छोटी रंगीन मछलियों को रखते हैं।

जाहिर है कि हर चमकने वाली चीज सोना-चाँदी या हीरा नहीं होती। हर जगह खुदाई करके सोना-चाँदी-हीरा नहीं निकाल सकते और इसकी असली पहचान बहुत हद तक खुदाई करने वाले से ज्यादा जौहरी पर भी निर्भर करता है। भारत का हर आम नागरिक देश-दुनिया में हो रही सभी घटना पर नजर रखे हुए है और पूरी तन्मयता से उसका विश्लेषण करने में जुटा है। सच सिर्फ वही नहीं होता जो कानून या पुलिस-प्रशासन साबित करता है, बल्कि सच वह भी है जो आम जनता जानती है जिसे कोर्ट में साबित नहीं किया जा सकता और कई बार कोर्ट सबूतों के अभाव में सच साबित भी नहीं कर पाती है।

सवाल है कि भारत का समाज 72 हूरों वाले जन्नत के फर्जी अवधारणा या ख्वाब के आधार पर चलेगा या फिर संविधान आधारित नीति-नैतिकता-सिद्धांत और सामाजिक-धार्मिक नैतिकता एवं मर्यादा के आधार पर चलेगा? भारत के भीतर ही यह मुंबई अलग क्यों दिखता है? मुंबई दिशा सालियान, सुशांत सिंह राजपूत और बाबा सिद्दीकी में फर्क क्यों महसूस करता है? इसी सवाल की तह में छुपा है कि यह मुंबई इतना खतरनाक क्यों है?

इस आलेख के लेखक डॉ० निखिल आनंद हैं। निखिल ने लगभग दो दशकों तक पत्रकारिता की है। वे बिहार भाजपा के प्रवक्ता रहे और वर्तमान में भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं। ट्विटर/फेसबुक/ इंस्टाग्राम: @NikhilAnandBJP

हरियाणा चुनाव के बाद ‘बेइज्जती’ के पर्यायवाची बने राजदीप सरदेसाई, मुँह पर अंडा लेपने की आई नौबत: कॉन्ग्रेस का ‘प्रचार’ करने में करवाई फजीहत, 3 अनुमान गलत निकले

विवादित पत्रकार राजदीप सरसराई हरियाणा चुनाव से पहले तक हर जगह दावा कर रहे थे कि प्रदेश में कॉन्ग्रेस ही आएगी। नतीजे आए तो उनकी खूब फजीहत हुई। अब उनकी एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो ‘द लल्लनटॉप’ के ‘नेतानगरी’ एपिसोड की है। इसमें वो कबूलते नजर आ रहे हैं कि उनकी हरियाणा चुनावों में बहुत बेइज्जती हुई है।

वीडियो में राजदीप कहते हैं- “यहाँ एक अंडे की प्लेट रखी है। मैं इसे अपने चेहरे पर लगाने वाला हूँ ताकि आपका शो वायरल हो जाए। मैंने जो अनुमान लगाए थे उससे मेरी बड़ी बेइज्जती हुई कि लोग ये अंडा मेरे मुँह पर फेंके। गजब बेइज्जती हुई है।”

उनका ये बयान हरियाणा चुनाव के नतीजे देखने के बाद आया है जिसमें भाजपा ने तीसरी बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की। भाजपा की जीत के बाद सोशल मडिया पर नेटीजन्स राजदीप सरदेसाई जैसे ‘विशेषज्ञों’ को ट्रोल कर रहे थे और पूछ रहे थे कि आखिर उनके दावों का क्या हुआ। अपनी इसी ट्रोलिंग को देख शायद सरदेसाई का ये बयान आया।

राजदीप सरदेसाई की वीडियो

बता दें कि हरियाणा चुनाव से पहले कई बार सरदेसाई को कॉन्ग्रेस की वाहवाही करने अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्मों पर देखा गया था। इनमें से 3 बार का जिक्र हम नीचे कर रहे हैं।

न्यूज तक से बातचीत में सरदेसाई ने कहा था, “मैं दीपेंद्र सिंह हुड्डा के घर पर था। मैंने इतने लंबे समय में किसी कॉन्ग्रेस नेता के घर पर लोगों की इतनी बड़ी भीड़ नहीं देखी। कॉन्ग्रेस इस चुनावी दौड़ में बहुत आगे है। यह दौड़ जीतने में सबसे आगे है।” इस दौरान उन्होंने ये भी कहा था कि हरियाणा में चाहे किसानों का प्रदर्शन हो या महिला पहलवानों का.. सभी मुद्दे कॉन्ग्रेस के पक्ष में हैं।

इसी तरह एक अन्य वीडियो में उनका कहना था हरियाणा में कॉन्ग्रेस के प्रशंसक कम हो गए हैं। वह भाजपा को हार से नहीं बचा सकते। उन्होंने कहा था कि यहाँ तक ​​कि प्रधानमंत्री मोदी, जिन्हें एक दशक पहले तक हरियाणा में इतने प्रेम से देखा जाता था और जिनके दम पर 2014 में पहली बार भाजपा सत्ता में आई… वो मोदी भी अपनी पार्टी को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं और वे भी अब मतदाताओं को नहीं पसंद आ रहे।”

इसके बाद राजदीप सरदेसाई ने एक प्रीति चौधरी नाम की पत्रकार से वीडियो में बात करते हुए भाजपा का मजाक उड़ाया था। उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा को हरियाणा में जीतना है तो उन्हें प्रार्थना करनी होगी। उन्होंने ये भी कहा था हरियाणा में भाजपा के साथ सब गलत हो रहा है चाहे तो कंगना रनौत का बयान देख लो, कैसे समय में आया।

उन्होंने यहाँ लोकसभा सीटों पर बात करते हुए कहा था, “हरियाणा में 90 सीट हैं। कॉन्ग्रेस हर सीट पर बढ़त बना रही है। सिर्फ भिवानी और करनाल ही सीटें जहाँ भाजपा उनसे आगे हैं। तो मेरा ख्याल एक दम साफ है। अगर कोई ऐसा राज्य है जो इस समय सत्ता विरोधी लहर को दर्शाता है जहाँ लोगों में गुस्सा और ऊबाऊपन दोनों हैं तो वो हरियाणा हैं।”

सैयद सुहैल ने पत्थर मारकर हिंदू महिला की हत्या की, फिर शव से किया बलात्कार: 125 CCTV खँगालने के बाद पुलिस ने पकड़ा, मानसिक तौर पर बीमार थी मृतका

कर्नाटक के कोलार में मानसिक रूप से बीमार 50 वर्षीया एक हिन्दू महिला की हत्या कर शव से रेप का मामला सामने आया है। बलात्कार और कत्ल का आरोप एक सैयद सुहैल नाम के एक ऑटो चालक पर लगा है। घटना के बाद सुहैल महिला की लाश को सड़क के किनारे फेंक कर भाग गया था। यह घटना 25 सितंबर 2024 की है। सोमवार (7 अक्टूबर 2024) को पुलिस ने सुहैल को गिरफ्तार कर लिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलार के मुलबागिलु नगर थाना क्षेत्र में पुलिस 25 सितंबर 2024 को सर्च अभियान चला रही थी। इसी दौरान महिला की लाश मिली। शव के सिर पर चोट के निशान थे। पुलिस ने शव को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बहुत प्रयास के बाद पीड़िता की पहचान 50 वर्षीया हिन्दू महिला के तौर पर हुई। वह लगभग 20 साल से मानसिक रूप से बीमार थी।

कोलार पुलिस ने बताया कि महिला के पति ने 25 सितंबर 2024 को मुलबागिलु नगर पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई थी। पति ने बताया था कि वह मानसिक रूप से बीमार है और लम्बे समय से उसका इलाज चल रहा है। शिकायत में कहा गया था कि 24 सितंबर की शाम लगभग 7 बजे महिला खाना खाकर घर से बाहर निकली थी, लेकिन लौटकर घर नहीं आई।

पति ने कहा कि कई जगह खोजबीन करने के बावजूद महिला का कहीं पता नहीं चला तो पुलिस में शिकायत दी गई। अगले दिन मृतका की लाश मिली तो पुलिस ने शिकायतकर्ता पति को पहचान के लिए बुलाया, जिसकी पहचान उसने अपनी पत्नी के रूप में की। कोलार पुलिस ने अज्ञात कातिल को पकड़ने के लिए स्पेशल टीम तैयार की। टीम ने शहर के लगभग 125 से ज्यादा CCTV कैमरे खँगाले।

इसी दौरान एक फुटेज में पुलिस को 24-25 सितंबर की रात लगभग 1:15 बजे मृतका एपीएमसी मार्केट के पास बैठी दिखी। उसके बगल में एक ऑटो दिखा। पुलिस ने ऑटो और उसके चालक की तलाश की तो सैयद सुहैल की पहचान हो गई। वह मुलबागिलु टाउन के हैदरी नगर इलाके का रहने वाला है। घटना के बाद से वह फरार चल रहा था। उसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही थी।

आखिरकार 7 अक्टूबर (सोमवार) की सुबह 8 बजे पुलिस ने सैयद सुहैल को मुरागामल्ला के चिंतामणि इलाके से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। सैयद सुहैल ने पुलिस को बताया कि 25 सितंबर की रात लगभग 1 बजे उसने एक महिला को अकेले बैठा देखा। महिला को अकेला पाकर उसकी नीयत खराब हो गई। उसने महिला को साथ चलने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया।

सुहैल ने पुलिस को बताया कि उसने महिला को उसके घर छोड़ने का झाँसा दिया। इसके बाद महिला उसके ऑटो में आकर बैठ गई। सुहैल महिला को उसके घर ले जाने के बजाय उसे नेशनल हाइवे के सुनसान इलाके पर ले जाने लगा। इस दौरान किसी अनहोनी की आशंका से महिला ऑटो से नीचे कूद गई। तब सुहैल ने ऑटो रोक कर महिला को पकड़ लिया और उसके सिर पत्थर से एक वार कर दिया।

इससे महिला बेहोश होकर गिर पड़ी। उसके कान और नाक से भारी मात्रा में खून बहने लगा। इसके कारण महिला की मौके पर ही मौत हो गई। सुहैल ने मृत महिला के शव को ऑटो में डाला और हैदरी नगर के अपने इलाके में ले गया। वहाँ एक खेत में ले जाकर सुहैल ने शव के साथ बलात्कार किया। रेप के बाद उसने शव को सुनसान जगह पर फेंक दिया और वहाँ भाग निकला।

माता रानी को मारी लात, मूर्ति पर थूका: कौशांबी में दुर्गा विसर्जन के दौरान मुस्लिम भीड़ ने तलवार लेकर किया हमला, महिला श्रद्धालुओं की रोते हुए वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में माँ दुर्गा के विसर्जन जुलूस पर हमला हुआ। इस हमले में जुलूस में शामिल महिला श्रद्धालुओं को भी निशाना बनाया गया। हमले के दौरान तलवारें लहराई गईं और पत्थरबाजी हुई। घटना में कई श्रद्धालुओं को चोटें आने की खबर है। शनिवार (12 अक्टूबर 2024) को हुए इस हमले का आरोप मुस्लिम समुदाय के लगभग 1 दर्जन लोगों पर लगा है जिसमें ख़ातूनें भी शामिल हैं। माँ दुर्गा की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया और एक महिला से दुष्कर्म की भी कोशिश हुई। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह घटना कौशांबी जिले के थानाक्षेत्र मंझनपुर की है। यहाँ शनिवार को मंदीप कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में मंदीप ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी वो माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करने कई श्रद्धालुओं के साथ तय मार्ग से जा रहे थे। जुलूस में महिला श्रद्धालु भी शामिल थीं जो भक्तिभाव से गुलाल आदि उड़ा रहीं थीं। जैसे ही यह जुलूस मंझनपुर के इमाम चौक के पास पहुँचा वहाँ मौजूद मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग इमामबाड़ा चबूतरा पर गुलाल लग जाने का आरोप लगा कर विवाद करने लगे।

आरोप है कि महताब नाम के व्यक्ति के घर के पास पहुँचते ही जुलूस पर पत्थरबाजी होने लगी। यह पथराव छतों से हो रहा था। जुलूस में शामिल कुछ हिन्दुओं को जातिसूचक शब्द (मारो धोबी को) बोलकर कई हमलवार नीचे आए जिनके हाथों में तलवारें दिख रहीं थीं। मंदीप का दावा है कि हमलावरों ने माँ दुर्गा की मूर्ति को पैरों से मार कर क्षतिग्रस्त कर दिया और उस पर थूकने लगे। एक महिला श्रद्धालु को कुछ हमलावर दुष्कर्म की नीयत से खींचकर अपनी तरफ ले जाने लगे जिसे जैसे-तैसे बचाया गया।

शिकायत में मुख्य हमलावरों के तौर पर गुलाम वारिस, सईद अहमद, रहमत अली, हशमत अली, करीम, समीर, समद, जलील, मुनव्वर, सगीर, खलील, शमी मोहम्मद, इदरीश, मोहम्मद आशिक, अल फैज़ आदि के नाम बताए गए हैं। इन हमलवारों में कुछ मुस्लिम महिलाएँ भी शामिल बताई गईं हैं। इन खातूनों में महताब की बीवी सोनी, रहमान की बेगम बानो के साथ समीर, करीम और जलील की भी बीवियाँ शामिल हैं। इन हमले में महिलाओं सहित लगभग आधे दर्जन श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं।

ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। हिंसा के बाद एक पीड़ित श्रद्धालु का वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक लड़की को हमले का भुक्तभोगी बता कर रोते देखा जा सकता है। युवक का आरोप है कि उन्हें न सिर्फ मुस्लिमों के हमले बल्कि उसी के साथ पुलिस के लाठीचार्ज का भी शिकार बनना पड़ा है। कौशांबी पुलिस ने विवाद की बात स्वीकार करते हुए बताया है कि मामले में FIR दर्ज कर के जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

रेल पटरी से तोड़फोड़, इसलिए खड़ी मालगाड़ी से टकराई बागमती एक्सप्रेस? NIA को साजिश का शक, उत्तराखंड के रुड़की में ट्रैक पर मिला गैस सिलेंडर

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में शुक्रवार शाम मैसूर-दरभंगा एक्सप्रेस की मालगाड़ी से टकराने के बाद हुए हादसे की जाँच ने तोड़फोड़ की आशंका को जन्म दिया है। इस घटना में 13 डिब्बे पटरी से उतर गए थे और 19 यात्री घायल हो गए थे। शुरुआती जाँच में यह सामने आया कि रेल ट्रैक से कुछ महत्वपूर्ण हिस्से, जैसे बोल्ट और अन्य उपकरण, गायब थे। एनआईए (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) को शक है कि ट्रैक के साथ हथौड़े से छेड़छाड़ की गई हो सकती है। यह जाँच इसलिए भी अहम है क्योंकि ऐसा ही हादसा 2023 में बालासोर में हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये हादसा चेन्नई से 46 किलोमीटर दूर कावारापेट्टई स्टेशन के पास हुआ, जब मैसूर-दरभंगा एक्सप्रेस मुख्य लाइन की बजाय गलती से लूप लाइन में चली गई और वहाँ खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रेन के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए और मालगाड़ी के पार्सल वैन में आग लग गई। हालांकि, कोई जनहानि नहीं हुई क्योंकि मालगाड़ी खाली थी और पैसेंजर ट्रेन के एलएचबी डिब्बे सुरक्षित साबित हुए।

दक्षिण रेलवे के अनुसार, ट्रेन ने पोननेरी स्टेशन से सही सिग्नल के साथ मुख्य लाइन की ओर बढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन अचानक जोर का झटका महसूस हुआ और ट्रेन लूप लाइन में चली गई। इस टक्कर के बाद रेलवे ने उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं।

एनआईए ने शुरू की जाँच

इस हादसे के 18 घंटों के भीतर एनआईए ने दो बार घटना स्थल का निरीक्षण किया। एनआईए के पुलिस अधीक्षक श्रीजित टी ने शनिवार (12 अक्टूबर 2024) शाम को दुर्घटनास्थल का दौरा किया और रेलवे अधिकारियों से इंटरलॉक सिस्टम के बारे में जानकारी ली। शुरुआती जाँच में संकेत मिले हैं कि सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रैक पर छेड़छाड़ की गई हो सकती है। एनआईए और रेलवे सुरक्षा आयुक्त यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या सिग्नल गियर और कनेक्टिंग रॉड्स के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी।

हालाँकि, इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन कॉन्ग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने एनआईए की जाँच पर सवाल उठाते हुए इसे “ध्यान भटकाने की कोशिश” कहा है। हादसे के बाद रेल सेवाओं में भारी बाधा आई, जिससे चेन्नई-विजयवाड़ा सेक्शन पर लगभग 40 ट्रेनें डायवर्ट और कई ट्रेनें रद्द की गईं। दक्षिण रेलवे के महाप्रबंधक आर एन सिंह ने कहा कि लोको पायलट पोननेरी स्टेशन तक सही सिग्नल का पालन कर रहा था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह लूप लाइन में क्यों चला गया। इस घटना में 19 लोग घायल हुए, जिनमें से सात का इलाज चल रहा है।

इस हादसे के बाद करीब 1,200 यात्रियों को ईएमयू ट्रेन से चेन्नई सेंट्रल लाया गया। रेलवे ने अब प्राथमिकता के आधार पर ट्रैक शुरू करने का काम चल रहा है। इसका वीडियो भी सामने आया है।

रुड़की के पास रेलवे ट्रैक पर मिला खाली सिलेंडर

उत्तराखंड में रुड़की के पास एक मालगाड़ी के लोको पायलट ने रेलवे ट्रैक पर सिलेंडर पाए जाने की सूचना दी। यह घटना रुड़की स्टेशन (आरके) से लंढौरा (एलडीआर) और धनधेरा (डीएनआरए) के बीच, किलोमीटर 1553/01 पर हुई। लोको पायलट ने सुबह 06:35 बजे स्टेशन मास्टर को सूचित किया कि ट्रैक पर एक सिलेंडर पड़ा हुआ है, जो धनधेरा स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर दूर था। पॉइंट्समैन मौके पर तुरंत पहुँचा और पाया कि सिलेंडर पूरी तरह से खाली था। इसके बाद सिलेंडर को धनधेरा स्टेशन मास्टर की निगरानी में सुरक्षित रखा गया।

स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (जीआरपी) को इस बारे में जानकारी दी गई है। मामला दर्ज करने के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन (सिविल लाइंस, रुड़की) में एफआईआर दर्ज की जा रही है। घटना की जाँच चल रही है।

माँ दुर्गा के विसर्जन का निकल रहा था जुलूस, मुस्लिम बहुल इलाके में पहुँचते ही पत्थरबाजी: दशहरा पर बिगड़ा गोंडा का माहौल, UP पुलिस ने स्थिति सँभाली

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस पर पत्थर फेंके जाने से साम्प्रदायिक तनाव फैल गया। इस दौरान सब्जियों के ठेले पलट दिए गए और नारेबाजी हुई। मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल ने पहुँचकर मोर्चा संभाला। थोड़ी देर की नोकझोंक के बाद मूर्तियों को कड़ी सुरक्षा में विसर्जित करवाया गया। पत्थर फेंकने वाले की तलाश की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना गोंडा के थानाक्षेत्र नगर कोतवाली में 12 अक्टूबर 2024 को घटी। यहाँ शनिवार की शाम लगभग 7 बजे माँ दुर्गा का विसर्जन जुलूस खैरा मंदिर तालाब की तरफ जा रहा था। जुलूस में सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। जुलूस के रास्ते में मुस्लिम बहुल कहा जाने वाला मोहल्ला घोसियाना पड़ा। आरोप है कि घोसियाना से निकलने के दौरान जुलूस में शामिल लोगों पर पत्थरबाजी हुई। इस पत्थरबाजी से थोड़ी देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया।

घटनास्थल के पास ही गोंडा की नामी तकिया मस्जिद भी है। यहाँ नाराज श्रद्धालुओं ने नारेबाजी शुरू कर दी और वहीं धरने पर बैठ गए। आसपास सब्ज़ियों के ठेले पलट दिए गए जिससे तनाव की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने लोगों को समझाने का प्रयास किया। क्षेत्र में सीनियर अधिकारियों के साथ अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया जिससे कुछ देर की गहमा-गहमी के बाद हालात सामान्य हुए। बाद में कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच मूर्तियों का विसर्जन करवाया गया।

मिली जानकारी के मुताबिक विसर्जन मार्ग में बने 2 व 3 मंजिला घरों से पत्थर फेंके गए थे। गोंडा के पुलिस अधीक्षक IPS विनीत जयसवाल ने बताया कि पत्थरबाजी करने वालों की तलाश की जा रही है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के मुताबिक जुलूस पूरी तरह से सकुशल सम्पन्न हुआ है।

भारत ने कनाडा की खोली पोल-पट्टी, PM मोदी संग जस्टिन ट्रूडो की चर्चा का कर रहा था दावा: आतंकी निज्जर की हत्या में माँगे सबूत, पूछा- खालिस्तानियों पर एक्शन क्यों नहीं

भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो बिना किसी सबूत के आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप मोदी सरकार पर नहीं लगा सकते। भारत ने कनाडा से यह भी कहा है कि इस मामले में भारत को बदनाम करने के लिए ट्रुडो अपनी जाँच एजेंसियों को राजनीतिक निर्देश भी नहीं दे सकते। भारत ने खालिस्तानी और देश विरोधी तत्वों के खिलाफ कनाडा को कार्रवाई करने के लिए कहा है।

भारत ने शनिवार (12 अक्टूबर 2024) को किसी तीसरे देश में अपनी स्थिति से जस्टिन ट्रूडो सरकार के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों और राजनयिकों को अवगत करा दिया। भारत ने यह भी कहा कि कनाडाई पीएम और वहाँ की जाँच एजेंसी रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के आरोपों में विसंगतियाँ हैं। RCMP ‘खालिस्तान टाइगर फोर्स’ के आतंकी निज्जर की हत्या के मामले की जाँच कर रही है।

भारत के अधिकारियों ने कनाडाई अधिकारियों से साफ कह दिया कि जाँच एजेंसियों को राजनीतिक निर्देश देना कानूनन अपराध है। दरअसल, वार्ताकारों की यह बैठक 11 अक्टूबर 2024 को ASEAN देशों की सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ट्रूडो द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जुबानी हमला करने के बाद हुई है। उस समय ट्रूडो लाउंज से भोजन स्थल की ओर जाते हुए पीएम मोदी से बात करते हुए दिखे थे।

इसके बाद ट्रूडो ने अपने सरकारी मीडिया के माध्यम से दावा किया कि उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच एक संक्षिप्त बातचीत हुई थी, लेकिन पता चला है कि भारतीय नेता ने उन्हें बातचीत के लिए समय और स्थान नहीं बताया। इससे लगता है कि ट्रूडो का यह कदम वहाँ अगले साल होने वाले चुनावों में खालिस्तानी वोट बैंक की राजनीति के तहत की गई है।

हालाँकि, बाद में भारत ने इस तथाकथित संक्षिप्त बातचीत को लेकर एक विस्तृत बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि दोनों नेताओं के बीच कोई ठोस चर्चा नहीं हुई। इस पूरे मामले में सच्चाई ये है कि ट्रूडो ने 16 अक्टूबर को संघीय चुनाव प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संस्थानों में विदेशी हस्तक्षेप की सार्वजनिक जाँच के समक्ष पेश होने होने से पहले पीएम मोदी का नाम घसीटा।

वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास इस मामले में छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। वहीं, ट्रूडो सरकार को भारत को बदनाम करने के कारणों बताना चाहिए। इसको देखते हुए शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों और राजनयिकों की बैठक तीसरे देश में तय की गई। माना जाता है कि इस बैठक में कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नैथली जी ड्रोइन और उपविदेश मंत्री डेविड मॉरिसन भी शामिल हुए।

कनाडा की राजनीति के जानकारों का कहना है कि ट्रूडो सरकार लड़खड़ा रही है और वित्त विधेयक पर फरवरी 2025 में वह गिर सकती है। ऐसे में खालिस्तान समर्थक प्रधानमंत्री RCMP और आयोग पर निज्जर मामले में भारत को घेरने का दबाव डालेंगे। हालाँकि, मोदी सरकार ट्रूडो की इस राजनीतिक साजिश को हल्के में नहीं ले रही। इसलिए भारत ने स्पष्ट कर दिया कि बेहतर संबंधों के लिए भारत विरोधी एवं खालिस्तानी गतिविधियों को रोकना ही होगा।

बता दें कि कनाडा की यह मंशा पहले भी जाहिर हो चुकी है। कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली पहले ही तथाकथित आयोग के समक्ष पेश हो चुकी हैं और किसी भी कीमत पर मोदी सरकार को फंसाने का इरादा सार्वजनिक कर चुकी हैं। कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री को भी 15 अक्टूबर को आयोग के समक्ष पेश होना है। दरअसल, ट्रूडो खालिस्तान समर्थक पार्टी से ही सरकार चला रहे हैं।

ट्रूडो को खालिस्तान समर्थक एनडीपी और क्यूबेक पार्टियों के साथ मुद्दों पर आधारित समर्थन प्राप्त है। ऐसे में खालिस्तान के समर्थन में बोलना उनकी मजबूरी है। बता दें कि ट्रूडो ने 18 सितंबर 2023 को कनाडा की संसद में बोलते हुए निज्जर की हत्या के लिए मोदी सरकार पर आरोप लगाया था। हालाँकि, भारत के बार-बार सबूत माँगने के बावजूद कनाडा ने आज तक कोई सबूत नहीं दिया।

अब, इस मामले की जाँच कर रही एजेंसी RCMP पर ट्रूडो सरकार भारत को फँसाने का दबाव डाल रही है। RCMP लगातार कहती आ रही है कि वह अभी भी इस मामले की जाँच कर रही है। निज्जर की हत्या के मामले में जाँच एजेंसी ने चार सिख युवकों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला आपसी गैंगवार से लगता है। निज्जर की 18 जून 2023 को हत्या कर दी गई थी।

दिल्ली में चल रही थी रामलीला, सीने में उठा दर्द तो मंच पर बैठ गए ‘कुंभकर्ण’… हो गई मौत: लाइव परफॉर्मेंस के दौरान ही ‘राम’ की भी हार्ट अटैक से हुई थी मौत

दिल्ली के चिराग इलाके में चल रही रामलीला के दौरान एक दुखद घटना घटी, जब कुंभकर्ण का किरदार निभा रहे अभिनेता की मंच पर ही मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब पश्चिम विहार के रहने वाले विक्रम तनेजा, जो मालवीय नगर में रामलीला के मंच पर कुंभकर्ण की भूमिका निभा रहे थे। उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द महसूस हुआ, और वह मंच पर ही बैठ गए। घटना के तुरंत बाद उन्हें आकाश अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पीएसआरआई अस्पताल रेफर कर दिया गया।

पुलिस के अनुसार, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों का अनुमान है कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। पुलिस ने तनेजा के परिवार वालों के बयान दर्ज कर लिए हैं और मौत की वजह की जाँच जारी है। यह घटना शारदीय नवरात्रि के दौरान दूसरी बार हुई है, जब रामलीला में भूमिका निभाते समय किसी कलाकार की जान चली गई। विक्रम तनेजा की मौत से रामलीला समिति और उनके परिवार में शोक का माहौल है।

भगवान राम का किरदार निभाते हुए शाहदरा में हुई थी कलाकार की मौत

इससे पहले, नवरात्रि के दौरान दिल्ली के शाहदरा स्थित विश्वकर्मा नगर में जय श्री रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला के दौरान भगवान राम की भूमिका निभाते समय एक अन्य दुखद हादसा हुआ था। शाहदरा में भगवान राम का किरदार निभाने वाले सुनील कौशिक (59 वर्ष), जो पेशे से प्रॉपर्टी डीलर थे और रामलीला समिति के संस्थापक सदस्यों में से एक थे, मंच पर दिल का दौरा पड़ने से गिर पड़े।

यह घटना तब हुई जब सुनील रामलीला के सीता स्वयंवर के दृश्य में धनुष तोड़ने का प्रदर्शन कर रहे थे। गाना गाते समय अचानक उन्हें सीने में दर्द हुआ, और वह मंच के पीछे चले गए। वहां उपस्थित उनके परिवार के सदस्यों ने तुरंत उन्हें पास के अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा। हालाँकि, एक घंटे बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुनील के भतीजे राहुल कौशिक के अनुसार, सुनील 1987 से राम की भूमिका निभा रहे थे और उनका यह अंतिम प्रदर्शन था।