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हरियाणा के नतीजे देख कॉन्ग्रेसी नेता रोते रहे EVM का रोना, पार्टी के OBC नेता अजय यादव ने कहा- घटिया प्रबंधन के कारण हारी कॉन्ग्रेस, हाईकमान जिम्मेदार

हरियाणा के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अध्यक्ष अजय यादव ने गुरुवार (11 अक्टूबर) को हरियाणा चुनाव में हार के लिए राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व के बीच कुप्रबंधन और खराब समन्वय को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल पर चुनाव के दौरान संपर्क में नहीं आने का भी आरोप लगाया।

यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कॉन्ग्रेस हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहरा रही है। हालाँकि, समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक साक्षात्कार में अजय यादव ने कुछ हद तक इस भावना को दोहराया, लेकिन उन्होंने हार के लिए मुख्य रूप से पार्टी नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया।

अजय यादव ने सुझाव दिया कि कॉन्ग्रेस पार्टी को हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र में मिली करारी हार पर आत्म-चिंतन करना चाहिए। यहाँ की 11 में से 10 सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में गई हैं। यादव ने कहा, “कॉन्ग्रेस कार्यसमिति, पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति, अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस समिति या हरियाणा प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति में अहीरवाल का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।”

OBC कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अजय यादव ने आगे कहा, “पार्टी (कॉन्ग्रेस) ने मुझे ओबीसी विभाग का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसका कोई फायदा नहीं है, क्योंकि यह शक्तिहीन है। हम चुनाव इसलिए हार गए, क्योंकि राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच कोई समन्वय नहीं था।” इसको लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी किया है।

सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में यादव ने लिखा, “पार्टी को दक्षिणी हरियाणा खासकर गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और फरीदाबाद में अपनी विफलता पर आत्मचिंतन करना चाहिए, जहाँ उसे सिर्फ एक सीट मिली। अहीरवाल का सीडब्ल्यूसी, सीईसी, एआईसीसी महासचिवों या यहाँ तक ​​कि एचपीसीसी में भी कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। एआईसीसी ओबीसी अध्यक्ष पद एक दिखावा और बेकार है।”

एक्स पर एक अन्य पोस्ट में अजय यादव ने कॉन्ग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि वह नैरेटिव को नियंत्रित करने में असमर्थ है, क्योंकि लोगों से जनादेश प्राप्त करने से पहले ही मुख्यमंत्री पद के लिए हरियाणा कॉन्ग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह की खबरें आ रही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा भी कई मुद्दे हैं।

अपने पोस्ट के बारे में ANI को बताते हुए उन्होंने कहा, “जब चुनाव होते हैं तो जीतना प्राथमिक लक्ष्य होता है। उस समय अगर मीडिया में सीएम पद के लिए खींचतान सामने आती है तो यह पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं है। पहले जनादेश हासिल करें और उसके बाद तय करें कि सीएम कौन बनेगा। यह निर्णय कोई एक व्यक्ति नहीं ले सकता। यह विधायकों द्वारा लिया जाता है।”

उन्होंने पार्टी पर यह भी आरोप लगाया कि जब दीपक बाबरिया अस्पताल में भर्ती थे, तब पार्टी ने नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त नहीं किया। यादव ने कहा, “जब पार्टी के प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया अस्पताल में भर्ती थे तो उनकी ड्यूटी किसी दूसरे नेता को क्यों नहीं दी गई? पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उदयभान खुद चुनाव लड़ रहे थे, इसलिए वे उचित फीडबैक लेने और रणनीति को अंतिम रूप देने में उम्मीदवारों की मदद करने में विफल रहे।”

दिलचस्प बात यह है कि अजय यादव ने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने उनसे अपने क्षेत्र में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के रोड शो की व्यवस्था करने के लिए कहा था। हालाँकि, राहुल गाँधी कभी नहीं आए। यादव ने यह भी बताया कि रेवाड़ी में कुमारी शैलजा का कार्यक्रम तय था, लेकिन हेलीकॉप्टर उपलब्ध हीं होने के कारण वह रेवाड़ी नहीं गईं।

यादव ने यह भी कहा कि फिरोजपुर झिरका के मौजूदा पार्टी विधायक मम्मन खान का बयान भी पार्टी के खिलाफ गया। उन्होंने कहा, “फिरोजपुर झिरका के हमारे मौजूदा विधायक मम्मन खान भारी अंतर से जीते, क्योंकि वहाँ अधिकांश मतदाता मुस्लिम थे, लेकिन उनके विवादास्पद बयानों ने हमारी हार में योगदान दिया। हम ध्रुवीकरण और खराब चुनाव प्रबंधन के कारण हारे।”

अजय यादव कॉन्ग्रेस के अकेले ऐसे नेता नहीं, हैं जो हरियाणा चुनाव में हार के लिए पार्टी नेतृत्व को दोषी ठहरा रहे हैं। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और रोहतक से विधायक भारत भूषण बत्रा ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा, “प्रचार के आखिरी हफ़्ते में एससी और ओबीसी का भारी ध्रुवीकरण देखा गया और इसका फ़ायदा बीजेपी को मिला। हमें इस बात पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत है कि हम कहाँ गलत हुए।”

हालाँकि, उन्होंने असांध के पूर्व विधायक शमशेर सिंह गोगी के इस आरोप को खारिज कर दिया कि कॉन्ग्रेस की अंदरूनी कलह और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पार्टी की हार हुई। उन्होंने कहा कि शमशेर सिंह गोगी अक्सर मौका मिलते ही हुड्डा के खिलाफ पक्षपातपूर्ण टिप्पणी करते हैं।

HT ने एक अनाम वरिष्ठ नेता के हवाले से कहा कि चुनाव में पार्टी नेता निष्क्रिय रहे, जिसके कारण हार हुई। उन्होंने कहा, “हमारे शीर्ष नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा, अजय यादव और रणदीप सुरजेवाला ने एक बार भी मंच साझा नहीं किया। दो रैलियों में हुड्डा और शैलजा मौजूद थे, लेकिन अन्य नेता गायब थे। भाजपा लोगों को समझाने में सफल रही कि हरियाणा कॉन्ग्रेस में सब ठीक नहीं है।”

हरियाणा में हार के लिए कॉन्ग्रेस ने EVM को जिम्मेदार ठहराया

हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने फिर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। हालाँकि, इस बार उन्होंने अपने आरोपों में कुछ बदलाव किए हैं। एक अजीबोगरीब आरोप में पार्टी ने दावा किया कि अलग-अलग बैटरी चार्ज वाले ईवीएम अलग-अलग नतीजे देते हैं।

कॉन्ग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान से पहले ईवीएम में पूरी तरह चार्ज की गई बैटरी डाली जाती है, लेकिन मॉक पोल, वास्तविक मतदान और मतगणना में मशीनों के इस्तेमाल से चार्ज का स्तर कम होता जाता है।

‘हम च$% हैं और वो मुस्लिम, बिटिया को घर से उठा कर मार डाला’: दलित लड़की की नवाब अली के घर से मिली लाश, माँ बोली- मुआवजा नहीं, सिर्फ न्याय चाहिए

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में नवाब अली के घर से दलित समुदाय की एक लड़की की लाश मिली है। 21 वर्षीया मृतका की माँ का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या करके लाश को टांग दिया गया। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि स्थानीय प्रशासन आरोपित और मृतका में पुरानी जान-पहचान बताते हुए प्रथम दृष्टया इस घटना को आत्महत्या बता रहा है। घटना शुक्रवार (11 अक्टूबर 2024) की है।

यह घटना सिद्धार्थनगर जिले के थानाक्षेत्र चिल्हिया की है। यहाँ के गाँव बुकनिहा में 21 वर्षीया दलित लड़की अपने परिवार के साथ रहती थी। लड़की के परिजन मेहनत-मजदूरी कर के परिवार चलाते हैं। लड़की के पड़ोस में ही नवाब अली का मकान है। वह मुंबई में रहकर कमाता है। नवाब के घर में कैसर, वाज़िद और रोशन अली आदि सदस्य रहते हैं। हाल ही में नवाब अली मुंबई से कमा कर घर लौटा था। तब से वह पीड़िता पर नजर रखे हुए था।

इस बीच शुक्रवार को पीड़िता अचानक ही अपने घर से गायब हो गई। लड़की के घर वालों के मुताबिक नवाब अली व उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने मिलकर छत पर सो रही पीड़िता का सीढ़ी लगा कर अपहरण किया। अपहरण के बाद पीड़िता को एक कमरे में बंद कर दिया गया। आरोप है कि यहाँ पीड़िता के साथ पहले मारपीट की गई जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद लड़की की लाश को फाँसी के फंदे पर लटका दिया गया।

पीड़िता के परिजनों ने रोते हुए मीडिया को बताया कि उनकी इज्जत से लेकर बेटी तक की जान को नवाब अली के घर वालों ने ले लिया। एक अन्य महिला ने कहा, “हम च$% हैं और वो मुस्लिम, इसीलिए उन्होंने हमारी बच्ची को मार डाला।” मृतका की माँ ने कहा कि उनको सरकार से अपनी बेटी के लिए न्याय के अलावा और कुछ भी नहीं चाहिए। दावा यह भी है कि लड़की की लाश बरामद होने के बाद नवाब के घर से सभी पुरुष फरार हो गए हैं।

इस मामले में सिद्धार्थनगर पुलिस का भी बयान सामने आया है। पुलिस ने इस घटना को प्रथम दृष्टया में मृतका द्वारा आत्महत्या किया जाना बताया है। हालाँकि पुलिस ने मृतका का शव नवाब अली के घर से बरामद होने की बात स्वीकारी है। मामले में FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी गई है। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है।

US में घुस जो करते हैं रेप-मर्डर, उन अप्रवासियों को दूँगा सजा-ए-मौत: राष्ट्रपति चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप का वादा, कहा- 5 नवंबर को होगा अमेरिका आजाद

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड जॉन ट्रंप ने शुक्रवार (11 अक्तटूबर 2024) को एक चुनावी रैली में अमेरिका में आने वाले प्रवासियों को खतरनाक अपराधी बताया। कोलोराडो के ऑरोरा में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों की हत्या करने वाले आप्रवासियों के लिए मृत्युदंड की माँग की।

वेनेजुएला के गिरोह ‘ट्रेन डी अरागुआ’ के कथित सदस्यों के पोस्टरों से घिरे ट्रम्प ने यह भी कहा कि अगर वे राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो इस गिरोह को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘ऑपरेशन ऑरोरा’ शुरू करेंगे। ट्रंप ने उत्साहित समर्थकों की बड़ी भीड़ में बीच कहा, “मैं किसी भी ऐसे प्रवासी के लिए मृत्युदंड की माँग करता हूँ, जो किसी अमेरिकी नागरिक या कानून प्रवर्तन अधिकारी की हत्या करता है।”

इससे पहले भी डोनाल्ड ट्रंप ने अरागुआ गिरोह को लेकर बयान दिया था। ट्रंप ने 10 सितंबर को कमला हैरिस के साथ बहस के दौरान दावा किया था कि ट्रेन डी अरागुआ के सदस्यों ने ऑरोरा के कई अपार्टमेंट पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा था, “मैं ऑरोरा और हर उस शहर को बचाऊँगा जिस पर हमला किया गया है। हम इन क्रूर और खूनी अपराधियों को जेल में डालेंगे या देश से बाहर निकालेंगे।”

अब ट्रंप ने आव्रजन को लेकर एक बार फिर मुद्दा उठाया है। इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकियों का भारी समर्थन मिलता दिख रहा है। आव्रजन और आप्रवासियों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप काफी कठोर रवैया अपनाए रखते हैं। इस बार के चुनाव में जीत के लिए उन्होंने फिर से इस मुद्दे के साथ अपराधियों को मृत्युदंड का मुद्दा उठाया है और इसको लेकर उन्हें बढ़त हासिल होती दिख रही है।

ट्रम्प ने पहले ही अन्य अपराधियों के लिए मृत्युदंड के लिए प्रस्ताव रखा है, जिसमें महिलाओं और बच्चों की यौन तस्करी के दोषी भी शामिल हैं। हालाँकि, अमेरिका के लगभग आधे राज्यों में मृत्युदंड पर प्रतिबंध है। संघीय मृत्युदंड का प्रावधान है, लेकिन इसका इस्तेमाल शायद ही कभी किया जाता है। इस दंड के अपराधों में विस्तार के लिए अमेरिकी कॉन्ग्रेस के अधिनियम जरूरी होगी।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार है। इस पद पर 5 नवंबर को चुनाव होना है। डोनाल्ड ट्रंप का मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस से है। सर्वे से पता चलता है कि अमेरिका में अवैध आव्रजन एक प्रमुख चिंता है और अधिकांश अमेरिकी ट्रम्प को इस समस्या से निपटने में सबसे बेहतर व्यक्ति मानते हैं।

बांग्लादेश की राजधानी में दुर्गा पूजा के पंडाल पर बमबारी, पेट्रोल बम फेंककर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने फैलाई दहशत: नवरात्रि में हिंदुओं पर हमलों के 35 मामले, 17 गिरफ्तार

बांग्लादेश में इस बार दुर्गा पूजा के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमलों ने हिंदू समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। राजधानी ढाका के टाटी बाजार इलाके में शुक्रवार (11 अक्टूबर 2024) को दुर्गा पूजा पंडाल पर पेट्रोल बम फेंका गया। इस घटना से इलाके में दहशत फैल गई, और पूजा में शामिल भक्तों को जान बचाने के लिए भागना पड़ा। वीडियो में एक घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाते हुए दिखाया गया है, जिससे यह साफ है कि हमले ने गंभीर रूप से घायल किए हैं।

सोशल मीडिया पर ‘वॉयस ऑफ बांग्लादेश हिंदू’ नाम के अकाउंट से यह वीडियो शेयर किया गया। यह हमला अचानक हुआ और हमलावर, जो इस्लामी कट्टरपंथी बताए जा रहे हैं, मौके से फरार हो गए। बांग्लादेश पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

दुर्गापूजा के मंच से इस्लामिक क्रांति का गाना

इसके पहले, 9 अक्टूबर 2024 को चटगांव में दुर्गा पूजा के दौरान भी सांप्रदायिक तनाव पैदा करने का प्रयास किया गया था। कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने खुद को स्थानीय सांस्कृतिक संगठन ‘चटग्राम सांस्कृतिक अकादमी’ का सदस्य बताकर दुर्गा पूजा मंच पर प्रवेश किया और आयोजकों को धोखे में रखते हुए इस्लामी क्रांति का प्रचार करने वाले गाने गाए। पूजा मंडप में मौजूद भक्त इस घटना से हैरान रह गए और इसे सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश के रूप में देखा जा रहा है।

इस घटना को हमेशा की तरह छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन मामले के सोशल मीडिया पर फैलने और स्थानीय लोगों द्वारा इसकी पुष्टि करने के बाद प्रशासन को कदम उठाना पड़ा। हालाँकि प्रशासन ने आयोजक को भी गिरफ्तार कर लिया।

दुर्गा पूजा पर 35 हमले, 17 गिरफ्तारियाँ

बांग्लादेश के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने पुष्टि की है कि इस साल दुर्गा पूजा के दौरान कुल 35 हमलों की घटनाएँ हुई हैं, जिनमें पूजा पंडालों पर हमले और सांप्रदायिक हिंसा शामिल है। अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हैरानी की बात ये है कि बांग्लादेश के आईजीपी मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं को कमतर बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ मुस्लिमों के त्योहार के समय भी होती है।

मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने कहा, “पूरे बांग्लादेश में 32000 मंडप लगे हैं। ऐसी घटनाएँ हिंदुओं ही नहीं, मुस्लिमों के त्योहार के समय भी होती हैं।” रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में ज्यादातर हमलावर इस्लामिक कट्टरपंथी थे, जो हिंदू धार्मिक स्थलों और त्योहारों को निशाना बना रहे थे। इन घटनाओं से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जो अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत लगातार दयनीय

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। विशेष रूप से दुर्गा पूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के दौरान हुए हमलों ने साफ कर दिया है कि इस्लामी कट्टरपंथी खुलेआम सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में दुर्गा पूजा से संबंधित 35 से अधिक घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जिसमें मूर्तियों को तोड़ना, पूजा स्थलों पर हमला और भक्तों को डराने-धमकाने जैसी घटनाएँ शामिल हैं।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमलों ने पूरे हिंदू समुदाय को भयभीत कर दिया है। बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और हमलों की संख्या में इजाफा यह दिखाता है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। इस स्थिति को देखते हुए बांग्लादेश सरकार से यह उम्मीद की जा रही है कि वह हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगी और धार्मिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करेगी। ये अलग बात है कि बांग्लादेश की कट्टरपंथियों की अंतरिम सरकार इन मामलों को ही छिपाने में लगी हुई है।

75 किमी की रफ्तार से आ रही बागमती एक्सप्रेस ने मालगाड़ी में मारी टक्कर: तमिलनाडु में रेल हादसा, 12 डिब्बे पटरी से उतरे, 19 घायल

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में रेल हादसा हुआ है। वहाँ मैसूर से दरभंगा जाने वाली बागमती सुपरफास्ट एक्स्प्रेस (12578) मालगाड़ी ट्रेन से टकरा गई। हादसे में 12 डिब्बे रेल पटरी से उतर गए और अभी तक 19 लोगों के घायल होने की खबर सामने आ रही है। घटना शुक्रवार (11 अक्टूबर 2023) शाम को कावराईपेट्टई रेलवे स्टेशन के पास हुई।

बताया जा रहा है कि जिस समय बागमती एक्स्प्रेस मालगाड़ी से टकराई उस समय वह रेलवे स्टेश पर खड़ी थी, लेकिन ट्रेनों की टक्कर होते ही उनमें आग लग गई। इसके बाद घटना की सूचना रेलवे अधिकारियों को दी गई जिन्होंने मौके पर पहुँच स्थिति को संभाला और घायलों को बचाने का काम किया।

रेलवे अधिकारियों के हवाले से दी जा रही खबर के अनुसार, तमिलनाडु में शुक्रवार को 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही एक्सप्रेस ट्रेन मुख्य लाइन जाने की बजाय लूपलाइन में घुस गई थी और वहाँ वह मालगाड़ी से टकरा गई। दुर्घटना में एक कोच में आग लग गई जबकि 19 लोगों के घायल होने की खबर है।

रेलवे अधिकारी ने यह भी बताया कि उन्हें अभी तक किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली है। राहत दल और मेडिकल टीम दोनों ही दुर्घटनास्थल पर मौजूद हैं। जीएम सदन रेलवे और डीआरएम सदन चेन्नई डिवीजन दुर्घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं। बाकी यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए चेन्नई स्टेशन से रेलवे द्वारा आवश्यक व्यवस्था की जा रही है।

आलम करना चाहता था भाभी से निकाह… सौतेले भाई सिराज ने पीट-पीटकर की हत्या, बीवी संग मिल शव थैली में भर फेंका, दोनों गिरफ्तार

महाराष्ट्र के ठाणे में भाभी से निकाह करने की चाह रखने वाले एक शख्स को उसके सौतेले भाई ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। मृतक की पहचान आलम अंसारी के तौर पर हुई है। पुलिस ने केस दर्ज करके दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक, घटना कुलगाँव थाने की है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस का कहना है कि हत्या को अंजाम 4 अक्तूबर को दिया गया था। अब इस मामले में मोहम्मद सिराज अंसारी और उसकी बीवी रजिया को पकड़ा गया है। पुलिस को घटना की जानकारी तब हुई थी जब 4 अक्तूबर की दोपहर सिराज का शव धारोलगाँव के धारोल में मिला था। इसी के बाद पुलिस ने अपनी जाँच शुरू की थी।

जाँच के बाद सामने आया कि ये हत्या आलम के भाई सिराज ने अपनी बीवी के साथ मिलकर की थी। बाद में शव को प्लास्टिक में भरकर फेंक दिया था। पुलिस ने फौरन केस को भारतीय न्याय संहित की धारा 103 (1) के तहत दर्ज कर दोनों मियाँ-बीवी को पकड़ा ।

पूछताछ में सिराज अंसारी ने बताया कि पीड़ित उसका सौतेला भाई था। दावा है कि उसने आलम को इसलिए मारा क्योंकि वो सिराज की बीवी रजिया से शादी करना चाहता था। इसी का पता जब सिराज को चला तो उसने अपनी बीवी संग मिलकर उसे पीट-पीटकर मार डाला। बाद में दोनों ने शव को प्लास्टिक की थैली में भरा फिर स्कूटर पर लादकर उसे गाँव में फेंक दिया था।

दिखने लगा जनसांख्यिकी बदलाव और बांग्लादेशी घुसपैठ का असर… झारखंड में AIMIM लड़ेगी 35 सीटों पर विधानसभा चुनाव, समझें क्या होंगे इसके परिणाम

झारखंड में हैदराबाद बेस्ड राजनीतिक पार्टी आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। झारखंड में 82 विधानसभा सीट (81+1 नॉमिनेशन) हैं, जिसमें 81 पर चुनाव लड़े जाते हैं। इस चुनाव में AIMIM ने 35 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष मो शाकिर अली ने ये बात कही। झारखंड में AIMIM का चुनावी मैदान में, वो भी इतने बड़े पैमाने पर उतरना लोगों को अस्वाभाविक ही लग रहा है।

दरअसल, झारखंड में हालिया राजनीतिक गतिविधियाँ और जनसांख्यिकी में हो रहे बदलावों ने एक नया परिदृश्य तैयार किया है। AIMIM जैसी पार्टियाँ राज्य में चुनाव लड़ने का सपना देख रही हैं, और यह सपना झारखंड की बदलती जनसांख्यिकी से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही, बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या ने भी राज्य में गहराई से असर डाला है। इन सभी मुद्दों को मिलाकर एक व्यापक चर्चा प्रस्तुत की जा रही है, जिसमें झारखंड की बदलती राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डाला जाएगा।

आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने झारखंड विधानसभा चुनावों में जामताड़ा समेत 35 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। यह निर्णय पार्टी की एक बड़ी राजनीतिक आकांक्षा का संकेत है, जो एक छोटे राज्य से शुरू होकर अब 2000-3000 किलोमीटर दूर के राज्यों में अपने पाँव पसारने की कोशिश कर रही है। इसका मुख्य कारण राज्य की जनसांख्यिकी में हो रहा बदलाव है, खासकर मुस्लिम और ईसाई आबादी की बढ़ोतरी।

जामताड़ा और संताल परगना जैसे क्षेत्रों में जनजातीय जनसंख्या में गिरावट और मुस्लिम समुदाय की बढ़ती संख्या AIMIM जैसी पार्टियों के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के संताल परगना क्षेत्र में जनजातीय जनसंख्या घट रही है, जबकि मुस्लिम और ईसाई जनसंख्या बढ़ रही है। इस बदलाव का सीधा असर चुनावी राजनीति पर पड़ता है, क्योंकि वोट बैंक का समीकरण बदलता है।

BJP द्वारा गठित एक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में मुस्लिम बहुल बूथों की संख्या में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यह रिपोर्ट बताती है कि राज्य की 10 विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम बहुल बूथों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इस तरह के आँकड़े जनसांख्यिकी में हो रहे महत्वपूर्ण बदलाव की पुष्टि करते हैं, जो AIMIM जैसी पार्टियों के लिए रणनीतिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है।

इन बूथों की संख्या में वृद्धि यह भी दर्शाती है कि मुस्लिम समुदाय का प्रभाव राज्य के कई हिस्सों में बढ़ रहा है। यह वृद्धि न केवल राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है, बल्कि राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक ढाँचे को भी प्रभावित कर सकती है। बड़े पैमाने पर ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे राज्य की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

झारखंड में जनसांख्यिकी बदलाव का एक और महत्वपूर्ण कारण बांग्लादेशी घुसपैठ है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के संताल परगना क्षेत्र में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों के बसने की खबरें आई हैं। इस घुसपैठ को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक चिंता बढ़ रही है। रांची हाई कोर्ट ने हाल ही में इस मामले में संज्ञान लेते हुए सरकार को निर्देश दिया कि एक विशेष टीम बनाई जाए, जो अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करे और उन पर कार्रवाई करे।

अवैध घुसपैठ से झारखंड की जनसांख्यिकी पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ती संख्या न केवल स्थानीय जनसंख्या को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनके जरिए राज्य के राजनीतिक समीकरण भी बदल रहे हैं। इस स्थिति से राज्य की सामाजिक सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता पर भी गंभीर असर हो सकता है। स्थानीय समुदायों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है, जो भविष्य में सामाजिक तनाव का कारण बन सकती है।

बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या पर झारखंड हाई कोर्ट ने भी सरकार को निर्देशित किया है कि वह इस मुद्दे पर जल्द से जल्द कार्रवाई करे। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले पर रिपोर्ट माँगी है और अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए उचित कदम उठाने को कहा है। कोर्ट का यह निर्णय इस बात का प्रतीक है कि राज्य की न्यायिक प्रणाली भी जनसांख्यिकी बदलाव और घुसपैठ की समस्या को गंभीरता से ले रही है।

इस आदेश के बाद, राज्य सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह किस प्रकार से इस समस्या का समाधान करेगी। अवैध घुसपैठियों की पहचान और निष्कासन एक जटिल प्रक्रिया है, और इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ सामाजिक समन्वय भी आवश्यक होगा। अगर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो राज्य की जनसांख्यिकी में और भी बड़ा परिवर्तन हो सकता है, जिससे राजनीतिक और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और अधिक बढ़ सकता है।

झारखंड में जनसांख्यिकी परिवर्तन और अवैध घुसपैठ की समस्या से राजनीतिक ध्रुवीकरण गहरा सकता है। AIMIM जैसी पार्टियों का बढ़ता प्रभाव, मुस्लिम बहुल बूथों की संख्या में वृद्धि, और बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी—यह सब राज्य में राजनीतिक और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकते हैं।

आदिवासी समुदाय, जो इस क्षेत्र का मूल निवासी है, अपने अधिकारों और पहचान को लेकर चिंतित हो सकता है। राज्य की राजनीति में मुस्लिम और ईसाई समुदायों के बढ़ते प्रभाव से आदिवासी और अन्य हिंदू समुदायों में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है, जिससे सामाजिक तनाव और संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है।

राजनीतिक दल भी इस ध्रुवीकरण को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास कर सकते हैं। AIMIM जैसी पार्टियाँ, जो मुख्य रूप से मुस्लिम वोट बैंक पर निर्भर हैं, इन क्षेत्रों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश करेंगी। वहीं, BJP और अन्य पार्टियाँ भी इस ध्रुवीकरण का लाभ उठाने का प्रयास करेंगी, जिससे राजनीतिक वातावरण और अधिक जटिल हो सकता है।

झारखंड में हो रहे जनसांख्यिकी बदलाव, मुस्लिम बहुल बूथों में वृद्धि, बांग्लादेशी घुसपैठ, और AIMIM जैसी पार्टियों की चुनावी रणनीति से राज्य में एक नया राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य उभर रहा है। यह परिदृश्य राज्य की स्थिरता, सांप्रदायिक सौहार्द, और राजनीतिक ध्रुवीकरण पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

वैसे, मुस्लिम बहुल सीटों पर AIMIM का राजनीतिक प्रदर्शन देश भर में चौंकाने वाला है। बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव में AIMIM ने शानदार प्रदर्शन किया था, तो महाराष्ट्र के मुस्लिम बहुत इलाकों में भी इस तरह की सांप्रदायिक पार्टियों का उभार तेजी से दिखा है। पश्चिम बंगाल और असम में मुस्लिमों से जुड़ी पार्टियों का प्रदर्शन भी बेहतर होता जा रहा है, तो हाल ही में कश्मीर से लेकर हरियाणा तक में मुस्लिमों का एकतरफा वोट पार्टी विशेष को पड़ता रहा है।

अगर इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो राज्य में राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव और अधिक बढ़ सकता है। सरकार, न्यायपालिका, और समाज के विभिन्न हिस्सों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा, ताकि झारखंड की जनसांख्यिकी और सामाजिक संरचना को स्थिरता प्रदान की जा सके।

ड्राइवर की जरूरत, न हेडलाइट की…एलन मस्क ने पेश की टेस्ला की पहली RoboVan, 20 लोगों एक साथ हो सकेंगे सवार

अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता टेस्ला के CEO एलन मस्क ने एक नई वैन दुनिया के सामने पेश की है। यह वैन खुद चलेगी और आजकल रोड पर दिखने वाली किसी भी गाड़ी से कहीं अलग है। इसे टेस्ला रोबोवैन का नाम दिया गया है। इसकी अब पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है।

गुरुवार (10 अक्टूबर, 2024) को एलन मस्क ने लॉस एंजिलिस अपनी कंपनी के एक कार्यक्रम में लोगों को दिखाई। यह कार्यक्रम रोबोटिक्स से जुड़ी चीजों को दिखाने के लिए था। हालाँकि, इसी कार्यक्रम में उन्होंने एक नई मिनीवैन दिखाई।

यह मिनीवैन बाकी से अलग है। इसको चलाने के लिए किसी भी ड्राइवर की जरूरत नहीं है। यह एक मिनीबस की तरह दिखती है और एकदम अलग सी है। मस्क ने कहा कि यह ऐसे शहरों में काम आएगी जहाँ भीड़भाड़ ज्यादा होती है। उन्होंने बताया कि इसे चलाने का खर्चा भी बाकी गाड़ियों से काफी कम होगा।

इस वैन की डिजाइन एक बड़े से ट्रेन के डिब्बे की तरह दिखती है। इसके गेट भी बीच से खुलते हैं। वैन में आगे पीछे कहीं लाइट नहीं दिखीं लेकिन इसमें अलग से LED की पट्टियां लगाई गई थीं। वैन बाहर और अंदर से सफ़ेद रंग की है। इसके भीतर दो टीवी भी हैं। इसके पहिए भी नहीं दिखते हैं।

मस्क ने कहा कि यह 20 लोगों को ले जा सकती है और इससे सामान भी ढोया जा सकता है। अभी यह वैन प्रोटोटाइप ही है। यह बाजार में कब आएगी। इस संबंध में एलन मस्क ने कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने इसके अलग से डिजाइन पर कहा कि भविष्य आखिर भविष्य जैसा दिखना चाहिए।

टेस्ला इलेक्ट्रिक गाड़ियों के दुनिया में सबसे कामयाब कम्पनी मानी जाती रही है। यह अमेरिका समेत कई देशों में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सबसे बड़ी निर्माता है। टेस्ला वर्तमान में निजी उपयोग के लिए ही गाड़ियाँ बनाती है। इनमें सेडान, SUV और पिकअप ट्रक शामिल हैं।

टेस्ला ने कुछ समय पहले अपना एक इलेक्ट्रिक ट्रक भी दिखाया था। इसका नाम टेस्ला सेमी है। यह सभी उत्पाद टेस्ला भविष्य में लाएगी। एलन मस्क लगातार गाड़ियों के साथ अलग प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं। उनका यह वैन वाला प्रयोग भी इसी श्रेणी में रखा जा रहा है।

जब माँ दुर्गा ने किया चंड-मुंड का संहार, जब भगवान राम ने की रावण वध के लिए आराधना… जानें क्यों होती है नवरात्रि में विशेष ‘संधि पूजा’, ब्रह्माण्ड की ऊर्जा होती है सबसे प्रबल

नवरात्रि का उत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। आज शुक्रवार (11 अक्टूबर 2024) को शारदीय नवरात्र का अष्टमी और नवमी का संधि काल है। संधि काल में विशेष पूजा का विधान है। इस अवसर पर माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों में से एक माता चामुण्डा का विशेष अनुष्ठान किया जाता है और इस जगत एवं प्राणी मात्र के कल्याण के लिए माता जगत जननी से प्रार्थना की जाती है।

‘संधि’ का अर्थ मिलन बिंदु होता है। ‘संधि पूजा’ नवरात्रि के आठवें और नौवें दिन के मिलन पर किया जाने वाला एक विशेष अनुष्ठान है, जो आठवें दिन के अंत और नौवें दिन की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू शास्त्रों में इस संधिकाल का विशेष महत्व है। इसे बेहद शक्तिशाली और शुभ माना जाता है। संधि पूजा का महत्व बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का उत्सव है।

कहा जाता है कि माँ दुर्गा ने अष्टमी और नवमी के संधि काल में ही अत्याचारी राक्षसों का वध किया था। शास्त्रों के अनुसार, अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट को ‘संधि काल’ के रूप में माना जाता है। यह बेहद पवित्र समय होता है। यह वह समय होता है, जब दुर्गा पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान संपन्न किया जाता है।

ISCKON मंदिर के गौरांग दास ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “संधि काल में ब्रह्मांड की सबसे अच्छी और सबसे मजबूत ऊर्जा होती है। यह दिव्य नारी शक्ति का उत्सव होता है, जो शक्ति के सभी उपासकों को अधिक शक्ति और ऊर्जा प्रदान करती है। संधि पूजा में भाग लेने वाले लोग अष्टमी की शुरुआत से लेकर नवमी में संधि पूजा तक उपवास करते हैं।”

संधि काल के अनुष्ठान में एक विशाल दीपक या गोलकार थाल में 108 दीये जलाए जाते हैं। 108 दीप जलाना अंधकार पर प्रकाश के आगमन का प्रतीक है। इस दौरान माँ दुर्गा को 108 कमल के और 108 गुड़हल के चढ़ाए जाते हैं, जो जीवन की सुंदरता का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दौरान बेल के 108 पत्तों की माला पहनाई जाती है। इसके साथ ही साड़ियाँ, आभूषण और फल चढ़ाए जाते हैं।

हिंदू शास्त्रों में 108 की संख्या बेहद पवित्र मानी जाती है। यह संख्या आध्यात्मिक पूर्णता और माँ दुर्गा के कई नामों का प्रतीक है। पूजा के दौरान भक्त नकारात्मकता को दूर करने के लिए ‘उलु धूनी’ (जीभ से निकलने वाली आवाज़ें जो बार-बार गाल के एक तरफ से दूसरे तरफ टकराती हैं) देते हैं। इसके साथ ही नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने के लिए शंख बजाया जाता है और पवित्र जल छिड़का जाता है।

कहा जाता है कि देवी माँ ने संधि काल के दौरान ही चंड और मुंड नाम के दो बलशाली राक्षसों का वध किया था। जब माँ दुर्गा राक्षस महिषासुर से युद्ध कर रही थीं, तब उसके सहयोगी चंड और मुंड ने माँ दुर्गा पर पीछे से हमला कर दिया। पीछे से हमला करने पर माँ दुर्गा को बहुत गुस्सा आया। इस गुस्से के कारण उनके चेहरे का रंग नीला पड़ गया।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, तब देवी माँ ने क्रोधित होकर अपनी तीसरी आँख खोली और चामुंडा अवतार लिया और दोनों दुष्ट राक्षसों का वध किया। यह भी मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने संधि काल में 108 नीले कमलों से देवी माँ की पूजा की थी और अत्याचारी रावण का वध करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद माँ दुर्गा ने भगवान राम को यह आशीर्वाद दिया था।

कहा जाता है कि भगवान राम द्वारा माता की पूजा करने के बाद से ‘संधि पूजा’ की जाती है। इस दिन माँ दुर्गा के उग्र अवतार चामुंडा की संधि पूजा की जाती है। कई जगहों पर इस दौरान बलि देने का भी प्रावधान है। अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार माँ चामुंडा की पूजा की जाती है। कुछ लोग कद्दू, केला, ककड़ी आदि का बलि के रूप में प्रयोग करते हैं।

संधि काल की समाप्ति के बाद नवमी को माँ दुर्गा की नौवीं एवं अलौकिक शक्ति माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण में कहा गया है कि माता के पास अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व नाम की कुल आठ सिद्धियाँ हैं। माँ सिद्धिदात्री की पूजा से ये सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। देव पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने माँ सिद्धिदात्री की कृपा से सिद्धियाँ प्राप्त की थीं और अर्द्धनारीश्वर कहलाए थे।

जिन्होंने 6 गुना बढ़ाया टाटा समूह का अंतरराष्ट्रीय व्यापार, उन्हें मिली टाटा ट्रस्ट की जिम्मेदारी: जानें कौन हैं रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा

देश के बड़े उद्योगपति रतन टाटा की मृत्यु के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा ने उनकी जिम्मेदारी संभाल ली है। रतन टाटा मृत्यु के पहले तक टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन थे। अब यह जिम्मेदारी नोएल टाटा को मिली है। नोएल टाटा अब टाटा समूह की दूसरी कम्पनियों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

नोएल टाटा एक आयरिश नागरिक हैं और अब तक वह टाटा समूह की कंपनी ट्रेंट और वोल्टास के मुखिया हैं। ट्रेंट को उन्होंने देश की बड़ी फैशन चेन में बदला है। इसी के साथ वह रतन टाटा ट्रस्ट और दोराबजी टाटा ट्रस्ट के भी ट्रस्टी हैं। यह दोनों ट्रस्ट भी टाटा ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं। टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में 66% की हिस्सेदारी है और यह इस समूह का मालिक है।

टाटा समूह इस टाटा संस के अंतर्गत आता है। नोएल टाटा के प्रमुख बनाए जाने की जानकारी अभी टाटा ट्रस्ट ने आधिकारिक रूप से नहीं दी है। हालाँकि, यह बात लगभग तय है कि रतन टाटा की जगह वही ले रहे हैं। नोएल टाटा को रतन टाटा के अंतिम संस्कार के दौरान देखा गया था।

67 वर्षीय नोएल टाटा पिछले 4 दशकों से टाटा समूह से जुड़े हैं। उनकी शिक्षा इंग्लैंड से हुई है। नोएल टाटा अभी तक टाटा स्टील जैसी कम्पनियों से जुड़े हुए हैं। उनकी सबसे बड़ी सफलता टाटा समूह के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को 2010 से 2021 के बीच 6 गुना करना रही है। वह टाटा इंटरनेशनल के 2010 से 2021 के बीच मुखिया रहे हैं।

उनकी माँ सिमोन टाटा, रतन टाटा के पिता नवल टाटा की दूसरी पत्नी थीं। सिमोन टाटा स्विटज़रलैंड में जन्मी थीं और यहाँ उन्होंने फैशन ब्रांड लेक्मे की शुरुआत की थी। नोएल टाटा की पत्नी अलू मिस्त्री, टाटा के पूर्व चेयरमैन पी सायरस मिस्त्री की बहन हैं। अलू मिस्त्री के पिता पलून जी मिस्त्री टाटा में बड़े हिस्सेदार हैं।

नोएल टाटा के नाम को लेकर अंतिम फैसला ट्रस्ट का बोर्ड करेगा। लेकिन उनके नाम को पारसी समाज का भी समर्थन मिलने का अनुमान है क्योंकि वह टाटा परिवार से ही आते हैं और लम्बे समय से ट्रस्ट के तौर तरीके को जानते हैं।

टाटा समूह बीते कुछ वर्षों में काफी बड़े बदलावों से गुजरा है। उसकी कई कम्पनियाँ घाटे से निकल कर फायदे में आई हैं। हालाँकि, स्टील और जैगुआर-लैंडरोवर जैसी उसकी कम्पनियाँ उसके लिए चिंता विषय हैं। यह कम्पनियाँ बीते कुछ समय में समस्या से गुजर रही हैं। नोएल टाटा को इनसे सम्बन्धित भी कड़े फैसले लेने होंगे।