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जिस सरकारी अस्पताल में काम करते हैं जब्बार खान-मुशीर अहमद, वहाँ ‘जैविक जिहाद’ की कर रहे थे तैयारी: डॉक्टर यशवीर के खाने में TB मरीज का बलगम मिलाने का था प्लान

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक सरकारी डॉक्टर और उसके परिवार को मारने की साजिश का मामला सामने आया है। इस साजिश में डॉक्टर यशवीर सिंह के खाने में टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) से पीड़ित मरीज का बलगम और कुछ घातक रसायन मिलाने की योजना बनाई गई थी। यह घटना तब उजागर हुई जब डॉक्टर यशवीर सिंह ने सोमवार (7 अक्टूबर 2024) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

डॉक्टर यशवीर के मुताबिक, उनके अस्पताल में कार्यरत संविदाकर्मी जब्बार खान और लैब टेक्नीशियन मुशीर अहमद ने मिलकर इस घातक साजिश की योजना बनाई। इनका मकसद डॉक्टर और उनके परिवार को धीरे-धीरे जहरीले रसायन और टीबी मरीज का बलगम खिलाकर नुकसान पहुँचाना था। यह योजना लंबे समय से चल रही थी, लेकिन इसका खुलासा तब हुआ जब सफाईकर्मी टिंकू ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया।

डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने जब्बार खान और मुशीर अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 61 (2), 62 और 105 के तहत दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि आरोपितों पर गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है और मामले की पूरी जाँच की जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। हिन्दू युवा वाहिनी ने दोनों मुस्लिम आरोपितों की इस करतूत को जैविक जिहाद बताते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने बताया कि मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

डॉक्टर को पता ही नहीं कि दोनों को दिक्कत क्या थी ?

ऑपइंडिया ने इस मामले में डॉ यशवीर सिंह से बात की। डॉक्टर यशवीर सिंह ने हमें बताया कि उनको पता ही नहीं है कि मुशीर और जब्बार उनको मारना क्यों चाहते थे। दोनों से मुशीर से डॉक्टर कभी मिले ही नहीं थे जबकि जब्बार से महीने में महज एक या दो बार ही मुलाकात होती थी। जब डॉक्टर ने दोनों आरोपितों को बुला कर इसकी वजह पूछी तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार करते हुए महज इतना कहा, “साहब गलती हो गई”। बकौल यशवीर यह पुलिस पता करे कि उन दोनों को दिक्कत क्या थी।

डॉक्टर ने कहा कि न सिर्फ उन्हें बल्कि उनके परिवार को मारने की साजिश रची गई थी। पहली साजिश डॉक्टर को ऑफिस में मिलने वाली चाय या नाश्ते में टी बी के मरीज का बलगम व घातक केमिकल मिलाने की थी। साजिश का दूसरा हिस्सा डॉक्टर के बच्चों को आवास में भेजे जाने वाले पिज्जा आदि में यही सब मिलाना था। डॉ यशवीर इस बात से भी हैरान हैं कि जब्बार और मुशीर को उनके उन बच्चों से क्या दिक्कत थी, जिसमें से एक की उम्र महज 7 और दूसरे की 10 साल है।

हिन्दू संगठनों ने इस घटना को “जैविक जिहाद” का नाम दिया है। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित हमला है, जिसमें मुस्लिम आरोपितों ने एक हिन्दू डॉक्टर और उसके परिवार को निशाना बनाने की कोशिश की। इस घटना को लेकर हिन्दू युवा वाहिनी ने सख्त कार्रवाई की माँग की है और प्रशासन से आग्रह किया है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। इस घटना ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया है, और अब सभी की नजरें पुलिस की जाँच और आरोपितों पर कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

RG Kar अस्पताल के 50 सीनियर डॉक्टर ने एक साथ दिया इस्तीफा, आमरण अनशन पर जूनियर डॉक्टर्स: जानिए वजह, यहीं हुआ था रेप-मर्डर

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 50 वरिष्ठ डॉक्टरों ने जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। यह कदम एक डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में न्याय की माँग को लेकर उठाया गया है।

जूनियर डॉक्टर शनिवार (5 अक्टूबर 2024) से आमरण अरशन पर हैं, जिनकी प्रमुख माँगें अस्पतालों में भ्रष्टाचार का खात्मा, मरीजों के लिए बेहतर सुविधा और सुरक्षा बढ़ाने की हैं। उन्होंने सीसीटीवी, वॉशरूम जैसी सुविधाओं की स्थापना और पुलिस सुरक्षा बढ़ाने की भी माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 50 वरिष्ठ डॉक्टरों ने जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। यह कदम डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में आमरण अनशन कर रहे जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में उठाया गया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में दिख रहा है कि 50 वरिष्ठ डॉक्टरों ने अपने इस्तीफे अस्पताल के प्रशासन को सौंपे, और छात्रों ने इस पर तालियाँ बजाई।

जूनियर डॉक्टर शनिवार से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी मांगें हैं: अपने साथी के लिए न्याय, अस्पतालों में भ्रष्टाचार का खात्मा, और एक मरीजों के सेंट्रलाइज सिस्टम बनाना। इसके अलावा, वे चाहते हैं कि सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के लिए एक केंद्रीकृत रेफरल सिस्टम लागू किया जाए। इसके साथ ही, बेड की उपलब्धता की निगरानी, सीसीटीवी, ऑन-काल रूम और वॉशरूम की सुविधाओं का सुनिश्चित होना भी उनकी माँगों में शामिल है।

इस विरोध प्रदर्शन के बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत ने सोमवार (07 अक्टूबर 2024) को आश्वासन दिया कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में 90 प्रतिशत चल रहे काम अगले महीने तक पूरी हो जाएँगे। उन्होंने प्रदर्शनकारी डॉक्टरोंसे काम पर लौटने की अपील की। बता दें कि शनिवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के 59 स्टाफ को सस्पेंड कर दिया गया था, जिसमें 10 डॉक्टर भी शामिल थे।

जूनियर डॉक्टरों ने हाल ही में मरीज के परिवार द्वारा डॉक्टरों पर हमले के बाद एक बार फिर “पूर्ण काम बंद” का प्रदर्शन शुरू किया था, लेकिन उन्होंने 4 अक्टूबर को इसे समाप्त कर दिया और “आमरण अनशन” शुरू कर दिया। इस प्रदर्शन ने दुर्गा पूजा के उत्सव के माहौल को भी प्रभावित किया है। डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर बड़ा दबाव पड़ा है, और यह सभी की नजरों में है कि सरकार उनकी माँगों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करती है।

जहाँ 80% मुस्लिम, वहाँ वह जीता जिसका हिंदू विरोधी दंगों में नाम, BJP के मुस्लिम नहीं कबूल: जिनको मामन खान चाहिए, ‘सबका विकास’ नहीं जीत सकता उनका भरोसा

भारत में हर तीन-चार महीने पर एक-दो चुनाव आते रहते हैं। हर चुनाव के साथ देश की वोटबैंक राजनीति और उससे जुड़े मुद्दे भी उठते हैं। प्रत्येक चुनाव में जब भाजपा अपने उम्मीदवार घोषित करती है तो लिस्ट में मुस्लिम नाम ढूँढने वाले हमेशा शोर मचाते हैं। उनका आरोप रहता है कि भाजपा की राजनीति में मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है और वह मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं देती। यह आरोप गुजरात चुनाव से लेकर उत्तर प्रदेश और हालिया लोकसभा चुनावों तक लगता आया है।

भाजपा पर यह आरोप लगाने 2024 के हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में निरुत्तर हो गए। भाजपा ने इन चुनावों में कुल 28 मुस्लिमों को टिकट दिया। 2 मुस्लिमों को हरियाणा में जबकि 26 मुस्लिम उम्मीदवारों को भाजपा ने जम्मू कश्मीर में उतारा। भाजपा ने हरियाणा के नूंह जिले की 3 में से 2 सीटों में पर मुस्लिम उम्मीदवार दिए। उसने फिरोजपुर झिरका से नसीम अहमद जबकि पुन्हाना से एजाज खान को उतारा था।

चुनाव नतीजों में इनमें से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार जीतने में सफल नहीं रहा है। जम्मू कश्मीर में भी भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवारों को सफलता नहीं हासिल हुई। हरियाणा में भी उसके दोनों उम्मीदवार हार गए। हरियाणा में उन सीटों पर भी भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार हारे जहाँ लगभग 80% जनसंख्या मुस्लिम है। फिरोजपुर झिरका में मुस्लिम आबादी ने भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार नसीम अहमद को ना चुन कर कॉन्ग्रेस के मामन खान को चुना।

मामन खान की जीत

कॉन्ग्रेस के मामन खान ने हरियाणा के अंदर सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। वह 98000 वोटों के अंतर से जीते हैं। गौरतलब है कि यह वही मामन खान हैं जो नूंह दंगों में आरोपित हैं और इस मामले में जेल तक जा चुका है। मामन खान को इन नूंह दंगों, जिनमें एक युवक की मौत हुई थी, उनका सरगना बताया गया था। मामन खान पर मात्र दंगा भड़काने ही नहीं बल्कि धमकी देने का भी आरोप है। हाल ही में उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस सरकार बनेगी तो अन्याय करने वालों मेवात छोड़ना पड़ेगा।

मामन खान को जिताना और वह भी हरियाणा में सबसे बड़े अंतर से जिताना दिखाता है कि मुस्लिम जनसंख्या को भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार पसंद नहीं है। इसका अर्थ है कि यदि उनके सामने भाजपा मुस्लिम उम्मीदवार देती भी है तो उसे मुस्लिम वोट नहीं देंगे। उनका वोट ऐसे व्यक्ति को जाने की संभावना अधिक दिखाई पड़ती है जो दंगे में आरोपित है और विकास-इन्फ्रा जैसी बातों से कोसों दूर है। मामन खान की जीत यह भी दर्शाती है कि मुस्लिम वोट उसे पसंद करता है जो भाजपा को हराता हो, भले ही वह दंगा आरोपित क्यों ना हो।

मामन खान और आफताब खान जैसे उम्मीदवारों की जीत में बड़े अंतर यह भी दिखाते हैं कि मुस्लिम आबादी का ध्यान विकास की तरफ कम और खुद को वोटबैंक बना कर राजनीति की तरफ अधिक है। मेवात देश के सबसे अधिक पिछड़े, गरीब और अपराध ग्रसित इलाकों में से एक है।

राजधानी दिल्ली से मात्र 100 किलोमीटर के दायरे में होने के बावजूद हाल तक यहाँ मूलभूत सुविधाएँ नहीं पहुँची थी। यहाँ महिलाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। यही पर बीत वर्ष नल्हड़ महादेव में जल चढ़ाने गए हिन्दुओं पर कट्टरपंथी भीड़ ने हमला किया था। लेकिन इन सब मुद्दों को सुलझाने का वादा करने के बजाय मामन जैसे लोगों को चुना जाता है।

ऐसे में मुस्लिमों को खुद इस यह सोचना होगा कि कब तक केवल भाजपा को हराने के नाम पर ही वोट करते रहेंगे भले ही उनके पास अपने ही समुदाय का उम्मीदवार हो। उन्हें यह भी सोचना होगा कि मात्र भाजपा का हौव्वा दिखा कर उनसे वोट लेने वाली पार्टियाँ उनका विकास कब करेंगी। भाजपा पर यह आरोप लगाने वाले मुस्लिम समाज को यह समझना होगा कि सबका साथ और सबका विश्वास का नारा तभी आगे बढेगा जब मुस्लिम उसमें शामिल हो जाएँ।

कॉन्ग्रेस नेता अब्दुल मोईद था बहराइच की कट्टरपंथी भीड़ का अगुआ, 14 साल के हिंदू छात्र का ‘सर तन से जुदा’ करने के लगे नारे: पीड़ित परिजन बोले- मुस्लिम छात्र के गंदे कमेंट से हुआ फसाद

उत्तर प्रदेश के बहराइच में सोमवार (7 अक्टूबर 2024) को इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने 14 साल के हिंदू छात्र को ‘गुस्ताख’ बताकर बवाल किया। भीड़ ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का आरोप लगाते हुए उत्तेजक नारेबाजी की। नाबालिग के खिलाफ FIR दर्ज की गई, लेकिन उसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गईं। इस भीड़ की अगुवाई कॉन्ग्रेस का नेता अब्दुल मोईद कर रहा था। हालाँकि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर किसी बड़ी घटना को होने से रोक लिया।

यह घटना बहराइच के नानपारा थाना क्षेत्र की है। यहाँ रहमत अली ने 14 वर्षीय हिंदू छात्र के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि छात्र ने इंस्टाग्राम पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 298, 299, 302, 352 और 353 के तहत केस दर्ज किया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

एक तरफ जब FIR दर्ज हो रही थी, तब इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ नानपारा के सर्राफा बाजार में जमा हो गई थी। इसमें छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे, जो उत्तेजक नारे लगा रहे थे। प्रशासन ने समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ नहीं मानी। पुलिस ने आखिरकार बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। ऑपइंडिया के पास हंगामे से जुड़े कई वीडियो मौजूद है, जिसमें इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ को उन्मादी नारेबाजी करते देखा जा सकता है।

वायरल की गईं नाबालिग आरोपित की तस्वीरें और वीडियो

इस घटना के बाद नाबालिग की पहचान, फोटो और वीडियो सार्वजनिक कर दी गईं, जबकि मामला दो नाबालिगों के बीच की बहस का था। हिन्दू छात्र के परिजनों का कहना है कि गाली-गलौज मुस्लिम छात्र की तरफ से भी हुई, पर उसने अपने कमेंट्स डिलीट कर दिए। इसके बाद भीड़ ने हिन्दू छात्र के कमेंट को वीडियो बनाकर फैलाया।

X प्लेटफॉर्म के यूजर विजय पटेल ने इसकी शिकायत राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के चेयरमैन प्रियांक कानूनगो से की है। विजय ने यह हरकत करने वालों पर एक्शन की माँग उठाई है। आरोपों के समर्थन में विजय ने कुछ स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं।

दोनों तरफ से दी गई गालियाँ, पर कार्रवाई एकतरफा

ऑपइंडिया ने इस घटना के बाद हिन्दू छात्र के चाचा से बात की। हमें बताया गया कि मामला लगभग 10 दिन पुराना है जब बहराइच के कालीकुंडा माता मंदिर में 2 मुस्लिम महिलाओं ने बुर्का पहन कर पूजापाठ की थी। इसी बात को ले कर सोशल मीडिया पर कई लोग आपस में चर्चा कर रहे थे। घटना से पहले दोनों छात्रों के बीच में भी इसी बात को ले कर चर्चा की शुरुआत हुई थी। हिन्दू छात्र के परिजन का आरोप है कि गाली-गलौज मुस्लिम छात्र की तरफ से भी हुई लेकिन उसने बड़े दिमाग से अपने कमेंट डिलीट कर लिए।

आरोपित बनाए गए हिन्दू छात्र के चाचा ने हमें आगे बताया कि उनके भतीजे को मुस्लिम छात्र द्वारा जेल में बंद और भड़काऊ बयानबाज सलमान अज़हरी का वीडियो भी भेजा गया था। इसी के साथ भगवान राम को गाली दे कर कमेंट डिलीट कर लिया गया। बाद में हिन्दू छात्र के कमेंट का बाकायदा वीडियो बना कर स्टेट्स लगाया गया और बाकी मुस्लिमों से भी ऐसा ही करने को कहा गया। कुछ ही देर में ये वीडियो नानपारा व आसपास के इलाकों में वायरल हो गया।

हिन्दू परिवार को लगा कि मामला खत्म हो गया पर आखिरकार ये उनकी गलतफहमी साबित हुई। शुरुआत में दोपहर 11 बजे के आसपास मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग हिन्दू छात्र के घर आए। उन्होंने छात्र से माफ़ी मंगवाई और इसका वीडियो भी बनवाया। इतने के बावजूद आखिरकार रात में मुस्लिम भीड़ ने एकजुट हो कर बवाल कर दिया। इस बवाल में हिन्दू परिवार की सर्राफे की दुकान को घेर लिया गया था।

पीड़ित के मुताबिक भीड़ सिर तन से जुदा की नारेबाजी कर रही थी। उन्होंने यह भी बताया कि अगर पुलिस एक्टिव न होती तो शायद पूरी सर्राफा बाजार फूँक दी गई होती। हिन्दू छात्र के परिवार को इस बात की भी तकलीफ है उन पर तत्काल FIR कर देने वाले प्रशासन ने अभी तक उनके द्वारा दी गई तहरीर पर मुस्लिम पक्ष पर केस क्यों नहीं दर्ज किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन न सिर्फ उनकी तहरीर पर बल्कि हिंसक भीड़ पर भी केस दर्ज कर के कानूनी कार्रवाई करेगी।

सैलून वाला मोहसिन, नावेद सर्राफा और कॉन्ग्रेस नेता ने जुटाई भीड़

नाबालिग हिन्दू छात्र के परिजनों ने ऑपइंडिया को आगे बताया कि हिंसक हो चली भीड़ को जुटाने में सबसे ज्यादा हाथ उनके ही मोहल्ले में सैलून चलाने वाले मोहसिन और सर्राफा के कारोबारी नावेद का रहा। भीड़ का नेतृत्व कॉन्ग्रेस पार्टी का नेता व पूर्व चेयरमैन अब्दुल मोईद कर रहा था। इन तीनों के साथ एक मुस्लिम वकील व इन्ही के मजहब का एक सभासद भी उन्माद फ़ैलाने की कोशिश करता हुआ दिखा था। यह भीड़ जिन सर्राफे की दुकान की तरफ बढ़ना चाहती थी वो अधिकतर सोनी और रस्तोगी समाज के लोगों की है।

जिसके पिता-चाचा को इस्लामी आतंकियों ने गोलियों से भूना, उसने किश्तवाड़ में खिलाया ‘कमल’: जीत के बाद बोलीं शगुन परिहार- हर बच्चे के सर पर पिता का साया हो

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार शगुन परिहार ने जोरदार जीत दर्ज की है। शगुन परिहार जम्मू कश्मीर की किश्तवाड़ सीट से उम्मीदवार से चुनाव लड़ रहीं थी। शगुन परिहार के पिता और चाचा की इस्लामी आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

मंगलवार (8 अक्टूबर, 2024) को आए नतीजों में शगुन परिहार को 29053 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंदी नेशनल कॉन्फ्रेंस उम्मीदवार सज्जाद अहमद किचलू को 28532 वोट ही मिले। शगुन परिहार ने इस तरह 500 वोटों के अंतर से चुनाव जीत लिया।

चुनाव जीतने के बाद शगुन परिहार ने मडिया से बात भी की है। उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं यहाँ सुरक्षा का मुद्दा सुलझाऊँगी, क्योंकि हमने बहुत से जवानों को और अपने लोगों को खोया है। मैंने अपने पिता को खोया है। किसी ने यहाँ अपने बेटे, किसी ने अपने भाई को खोया है। मेरी कोशिश रहेगी कि यहाँ के हर बच्चे के सर पर पिता का साया हो।”

शगुन परिहार मात्र 29 वर्ष की हैं और उन्हें पार्टी ने पहली बार किश्तवाड़ से मौक़ा दिया था। शगुन परिहार ने टिकट मिलने के बाद कहा था, “वह काला दिन आज भी मेरी आँखों में बसा है, जिस दिन मेरा घर वीरान कर दिया गया। मेरे परिवार ने अपने खून का कतरा-कतरा किश्तवाड़ के लिए दे दिया, यह चुनाव उनके लिए है।”

शगुन परिहार के चाचा अनिल परिहार जम्मू कश्मीर में भाजपा के बड़े नेता था। उनके पास राज्य में भाजपा के सचिव पद की जिम्मेदारी थी। वो अपने राजनीतिक करियर में आगे बढ़ ही रहे थे कि इस्लामी कट्टरपंथियों की नजर में वो खटकने लगे और साल 2018 में अनिल परिहार के साथ उनके भाई व शगुन परिहार के पिता को मौत के घाट उतार दिया गया।

कैसे हुई थी अनिल परिहार और अजीत परिहार की हत्या

नवंबर 2018 की बात है। बीजेपी की राज्य इकाई के सचिव अनिल परिहार और उनके भाई अजीत परिहार किश्तवाड़ में अपनी दुकान से लौट रहे थे कि इसी दौरान उन पर करीब से गोलीबारी हुई। बाद में पता चला कि हमलावर हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी थे जो उस रात रास्ते में खड़े होकर सिर्फ दोनों भाइयों के लौटने का इंतजार कर रहे थे।

इस घटना के बाद किश्तवाड़ा में हालात ऐसे हो गए थे कि कर्फ्यू लगाना पड़ा था और इंटरनेट बंद करने पड़े थे। पड़ताल के बाद इस मामले में तीन आतंकी गिरफ्तार हुए थे। अनिल परिहार अनुच्छेद 370 हटाए जाने के प्रबल समर्थन थे और इस्लामी आतंकवाद का जम कर विरोध करते थे, इसीलिए उनकी हत्या आतंकियों ने कर दी थी।

‘कैसा लगा मेरा मजाक’: हरियाणा में कॉन्ग्रेस की ही नहीं, Exit Polls की भी लग गई लंका… जम्मू-कश्मीर में भी चुनावी वैज्ञानिक फेल, सोशल मीडिया में मीमबाजों की चाँदी

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 और एग्जिट पोल्स को लेकर अब सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है। एग्जिट पोल्स की भविष्यवाणी और वास्तविक परिणामों में बड़े अंतर ने जनता को चौंका दिया है। एग्जिट पोल्स में जहाँ कॉन्ग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाया गया था, वहीं चुनाव के वास्तविक नतीजों ने पोल्स को गलत साबित कर दिया। यही नहीं, एग्जिट पोल्स में बीजेपी को भी कमजोर दिखाया गया था, लेकिन नतीजे इससे एकदम विपरीत निकले।

इसी तरह जम्मू-कश्मीर के चुनावों में त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की गई थी, लेकिन यहाँ भी एग्जिट पोल्स गलत ही साबित हुए। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एग्जिट पोल्स ने गलत अनुमान लगाया और इसका राजनीतिक परिणाम क्या रहा।

हरियाणा में एग्जिट पोल्स की बुरी हालत

इस बार, हरियाणा विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल्स ने साफ-साफ यह संकेत दिया था कि कॉन्ग्रेस राज्य में बड़े बहुमत से सरकार बनाएगी। अधिकांश पोल्स के अनुसार कॉन्ग्रेस को 50 से 60 सीटों का अनुमान था, जबकि बीजेपी को मात्र 20-28 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। कई एग्जिट पोल्स ने दावा किया कि हरियाणा में बीजेपी का प्रभाव कम हो चुका है और कॉन्ग्रेस एक दशक बाद सत्ता में वापसी करने जा रही है। यह अनुमान मतदान के बाद जनता की प्रतिक्रिया और जमीनी रिपोर्ट्स के आधार पर लगाए गए थे।

ऑपइंडिया टीम द्वारा तैयार

हालाँकि, जब चुनाव परिणाम सामने आए, तो यह साफ हो गया कि एग्जिट पोल्स बुरी तरह गलत थे। बीजेपी ने न सिर्फ चुनाव में जबरदस्त वापसी की, बल्कि कॉन्ग्रेस को कड़ी टक्कर दी। बीजेपी ने खुद को मजबूत स्थिति में रखा और कई सीटों पर कब्जा किया। यह देखकर चुनाव विशेषज्ञ और राजनीतिक पंडित भी हैरान रह गए, क्योंकि एग्जिट पोल्स के मुकाबले हकीकत कुछ और ही थी।

जम्मू-कश्मीर में भी फेल रहे एग्जिट पोल्स

जम्मू-कश्मीर को लेकर भी एग्जिट पोल्स पूरी तरह से गलत साबित हुए। अधिकांश पोल्स ने जम्मू-कश्मीर में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना जताई थी, जहाँ किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल रहा था। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस के गठबंधन को थोड़ी बढ़त दिखाई गई, लेकिन यह बढ़त निर्णायक नहीं मानी गई थी। बीजेपी को भी कुछ सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन किसी भी पार्टी के लिए पूर्ण बहुमत का दावा नहीं किया गया था।

असल में जब चुनाव के परिणाम आए, तो कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन ने जोरदार जीत हासिल की, जबकि बीजेपी को उम्मीद से कम सीटें मिलीं। यहाँ भी एग्जिट पोल्स का अनुमान गलत साबित हुआ और चुनाव परिणाम एकतरफा रहे।

अब सवाल उठता है कि आखिर एग्जिट पोल्स इतने गलत क्यों साबित होते हैं? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

सैंपल साइज और गलत अनुमान: एग्जिट पोल्स में सीमित सैंपल लिया जाता है, यानी कुछ चुने हुए मतदाताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर पूरे राज्य का अनुमान लगाया जाता है। ऐसे में यदि सैंपल साइज सही न हो या विश्लेषण में गलती हो जाए, तो परिणाम गलत आने की संभावना बढ़ जाती है।

सीक्रेट वोटिंग पैटर्न: कई बार मतदाता अपने असली इरादे सार्वजनिक रूप से नहीं बताते। हो सकता है कि वे पोल्स में एक बात कहें, लेकिन वोट कुछ और डालें। इसे ‘साइलेंट वोटर’ का प्रभाव कहा जाता है। खासकर बीजेपी के पक्ष में यह देखा गया है कि कई बार लोग खुलकर समर्थन नहीं करते, लेकिन वोटिंग में वे उसे ही चुनते हैं।

स्थानीय मुद्दों की उपेक्षा: एग्जिट पोल्स में कई बार राष्ट्रीय मुद्दों या बड़े दलों के आधार पर अनुमान लगाया जाता है, जबकि स्थानीय स्तर पर मुद्दे और समीकरण पूरी तरह अलग हो सकते हैं। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के मामलों में भी यह देखने को मिला, जहाँ स्थानीय जातिगत समीकरण, उम्मीदवार की छवि और अन्य कारक पोल्स में सही तरीके से शामिल नहीं किए गए थे।

एग्जिट पोल्स को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या इन पर भरोसा किया जा सकता है? पिछले कुछ वर्षों मे नतीजों से एग्जिट पोल्स की साख पर बट्टा लगने लगा, और सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर मजाक बनाया। कुछ लोग तो यह कह रहे हैं कि एग्जिट पोल्स एक ‘कॉमेडी शो’ बन गए हैं। इन ट्वीट्स और मेम्स की बाढ़ से यह साफ है कि लोग एग्जिट पोल्स पर अब गंभीरता से यकीन नहीं कर रहे हैं।

सागर नाम के यूजर ने लोकप्रिय वेब-सीरीज की एक तस्वीर शेयर की और कुछ अलग अंदाज में चुटकी ली।

एग्जिट पोल्स को लेकर ट्विटर और फेसबुक पर लोगों के व्यंग्यपूर्ण टिप्पणियों ने यह साबित किया है कि अब लोग इन भविष्यवाणियों को हल्के में लेने लगे हैं। एग्जिट पोल्स को सिर्फ एक मनोरंजन के रूप में देखा जा रहा है, और असली खेल चुनावी नतीजों के साथ ही शुरू होता है। चाचा मॉन्क नाम के यूजर ने कुछ ऐसी ही चुटकी ली।

एक यूजर ने लिखा, “एग्जिट पोल्स से ज्यादा भरोसेमंद तो मेरे दोस्त की भविष्यवाणी है, जिसने कभी सही जवाब नहीं दिया!” #ElectionLaughs

एक ट्वीट में कहा गया, “लगता है एग्जिट पोल्स के पंडितों ने कॉन्ग्रेस की जीत के लिए पहले ही मिठाई बांट दी थी।” एक और ट्वीट में लिखा गया, “कॉन्ग्रेस की 55 सीटों का जश्न मनाने से पहले बीजेपी की 30 सीटों पर सोचिए, खेल तो वहीं हो गया था।”

एक एक्स यूजर ने लिखा, “अब तो एग्जिट पोल्स का भी एग्जिट हो जाना चाहिए। 55 सीटें, 25 सीटें… कुछ भी हो सकता है।” इसी तरह एक और ट्वीट में कहा गया, “एग्जिट पोल्स भी अब मौसम की भविष्यवाणी जैसे हो गए हैं, कभी सही तो कभी गलत।”

जमीनी हकीकत से जुड़ना जरूरी

हरियाणा और जम्मू-कश्मीर चुनावों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि एग्जिट पोल्स पर पूरी तरह से भरोसा करना सही नहीं है। यह केवल एक ट्रेंड बताने का माध्यम हैं, लेकिन अंतिम नतीजे मतदाताओं के वास्तविक वोटों पर निर्भर करते हैं। इस बार हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में एग्जिट पोल्स की गलतियों ने यह साफ कर दिया है कि जमीन पर असली माहौल क्या है, इसे समझने के लिए गहन विश्लेषण और जमीनी हकीकत से जुड़े रहना जरूरी है।

जलने से पहले ही जम्मू-कश्मीर की जनता ने बुता दी वंशवाद की एक रोशनी, ‘गोदी मीडिया’ का टैग बाँट सेकुलर गैंग की बनी थी लाडली: जानिए कौन है इल्तिजा मुफ्ती

मंगलवार (8 अक्टूबर, 2024) को हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों के नतीजे आए हैं। जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस के गठबंधन ने भी बहुमत का आँकड़ा छू लिया। जम्मू कश्मीर की राजनीति में अब तक दो राजनीतिक परिवारों का बोलबाला रहा है।

इनमें से एक अब्दुल्लाह परिवार है, जिसकी तीन पीढ़ियाँ राज्य के मुख्यमंत्री पद तक पहुँची हैं। जबकि दूसरे तरफ मुफ़्ती परिवार है जहाँ बाप-बेटी ने राज्य के मुखिया का पद पाया है। लेकिन अब मुफ़्ती परिवार की राजनीति पर अस्तित्व का संकट आ गया है।

मुफ़्ती परिवार की तीसरी पीढ़ी और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिजा मुफ़्ती जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव हार गई हैं। जम्मू कश्मीर की बिजबिहारा-श्रीगुफवाडा सीट से PDP उम्मीदवार इल्तिजा मुफ़्ती को नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार बशीर अहमद के हाथों हार झेलनी पड़ी है।

उन्हें बशीर अहमद 9770 वोटों के अंतर से मात दी है। यह इल्तिजा का पहला चुनाव था। 2024 जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में मुफ़्ती परिवार से वह अकेली उम्मीदवार थीं।

इल्तिजा मुफ़्ती

इल्तिजा मुफ़्ती ने अपनी हार स्वीकार करते हुए एक ट्वीट भी किया है। उन्होंने लिखा, “मैं लोगों के फैसले को स्वीकार करती हूँ। बिजबबिहांरा में सभी से मुझे जो प्यार और स्नेह मिला है, वह हमेशा मेरे साथ रहेगा। इस प्रचार अभियान के दौरान कड़ी मेहनत करने वाले पीडीपी कार्यकर्ताओं का आभार।”

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव नतीजों में जहाँ कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के गठबंधन ने 40 से अधिक सीटों पर कब्जा जमाया है तो वहीं PDP मात्र 4 सीटों पर सिमट गई है। PDP के लिए यह चुनाव अस्तित्व बचाने की लड़ाई था, इसमें वह विफल होती दिखाई दे रही है। PDP जहाँ एक ओर चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई तो वहीं दूसरी तरफ इल्तिजा मुफ़्ती का हारना मुफ़्ती परिवार के लिए साख का संकट भी पैदा करेगा।

कौन हैं इल्तिजा मुफ़्ती?

कश्मीर में लेखक, राजनीतिक विश्लेषक एवं कारोबारी जावेद इकबाल शाह और महबूबा मुफ्ती के घर साल 1987 में छोटी बेटी इल्तिजा पैदा हुई थीं। उनकी बड़ी बहन का नाम इरतिका मुफ्ती है। इल्तिजा की पैदायश होने के एक साल बाद ही उनके पैरेंट्स में अलगाव हो गया। इकबाल शाह कुछ वक्त तक जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य भी रहे थे।

इल्तिजा का निक नाम सना है। वो दो साल तक कश्मीर में पढ़ीं। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चली गईं। हालाँकि, बचपन से ही अंतरिक्ष यात्री बनने की चाह रखने वाली इल्तिजा ने युवा होने पर दिल्ली विश्वविद्यालय के वेंकेटश्वेर कॉलेज से राजनीति विज्ञान में ऑनर्स की डिग्री ली।

इसके बाद वो यूके चली गईं, वहाँ इंग्लैंड के वारविक विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मास्टर डिग्री की। अपने निजी जिंदगी के बारे में खुलकर बात न करने वाली इल्तिजा ने लंदन में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के तौर पर काम किया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया-भारत के एक इंस्टीट्यूट में भी काम किया।

कभी राजनीति में शामिल होने से किया इनकार

इल्तिजा ने सितंबर, 2022 में कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर में मौजूदा कथित ‘भयभीत माहौल’ के तहत राजनीति में शामिल नहीं होना चाहती हैं। हालाँकि, उन्होंने इसे पूरी तरह से खारिज नहीं किया था और कहा था कि भविष्य कोई नहीं जानता।

इल्तिजा मुफ़्ती ने जम्मू में एक सम्मेलन में कहा था, ”मौजूदा माहौल में जहाँ राजनेता, पत्रकार और बाद में स्टेनोग्राफर बन गए हैं, मैं ऐसे में राजनीति नहीं करना चाहती। राजनीति जनता के साथ अपना रिश्ता बनाने के बारे में है। आपके जीवन में कुछ परिस्थितियाँ आती हैं, जो आपका मार्गदर्शन करती हैं।”

उन्होंने ये भी कहा था कि दिवंगत पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की नातिन होने के नाते उन्होंने अपने जन्म के बाद से राजनीति को करीब से देखा है। उन्होंने कहा था, ”अन्य लोगों के लिए यह आकर्षक हो सकता है। मुझे इसके लिए कोई आकर्षण नहीं है।”

बखेड़ा बनाने में भी हैं माहिर

इस साल की शुरुआत में इल्तिजा ने अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण को लेकर अधिकारियों को निशाने पर लिया था। उनका पासपोर्ट 2 जनवरी 2023 को खत्म हो रहा था। इसके लिए उन्होंने 8 जून 2022 को नए पासपोर्ट के लिए पहले ही दरख्वास्त दी थी।

क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) श्रीनगर द्वारा पासपोर्ट जारी नहीं करने पर वो फरवरी में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट पहुँच गई थीं। आरपीओ ने सीआईडी की बताई गई गुप्त प्रतिकूल सत्यापन रिपोर्ट के बावजूद अप्रैल में उन्हें पासपोर्ट जारी किया था।

इल्तिजा मुफ़्ती का चुनाव प्रचार के दौरान एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इस वीडियो में उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI के एक रिपोर्टर से बदसलूकी थी। उन्होंने ANI को गोदी मीडिया का टैग दिया था और उसका माइक पकड़ने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पूरा लिबरल गैंग उनकी वाहवाही में जुट गया था। अब सामने आया है कि वह अपना चुनाव हार गई हैं।

शिव कुमार तिवारी का बेटा है सोनू, लेकिन आधार कार्ड में बना दिया ‘फिरोज अंसारी’: माँ-मामा ने किया ‘खेला’, अब दस्तावेज ठीक कराने को काट रहा चक्कर

छत्तीसगढ़ के दुर्ग से एक हिंदू युवक को आधार कार्ड में मुस्लिम बना देने का मामला सामने आया है। पीड़ित का नाम सोनू तिवारी है। उसके पिता शिव कुमार तिवारी है। लेकिन आधार कार्ड में उसका नाम फिरोज अंसारी और पिता का नाम राजू अंसारी कर दिया गया है।

शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों में सोनू और उसके पिता का असली नाम दर्ज है। अब आधार कार्ड में हुए इस ‘खेल’ को दुरुस्त करवाने के लिए वह दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। सोनू के अनुसार उसकी पहचान बदलने का ‘खेला’ उसकी माँ और मामा ने ही किया है। उसकी माँ परवीन बानो मुस्लिम है।

दैनिक भास्कर ने सोनू की पीड़ा को लेकर विस्तार से रिपोर्ट छापी है। रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला दुर्ग जिले के कसारीडीह इलाके का है। सोनू के पिता शिव कुमार तिवारी अपने इलाके के हिस्ट्रीशीटर थे और मुस्लिम महिला परवीन बानो से लव मैरिज की थी। 8 सितंबर 1992 को परवीन ने एक बच्चे को जन्म दिया। इस बच्चे का नाम सोनू तिवारी रखा गया।

पीड़ित ने बताया कि उसकी प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा सोनू तिवारी के ही नाम से कसारीडीह के प्राइमरी स्कूल में हुई। इस स्कूल से मिली टीसी और मार्कशीट में भी उसका नाम सोनू तिवारी दर्ज है। उसकी पढ़ाई के ही दौरान शिवकुमार तिवारी को किसी मामले में जेल हो गई। पिता के जेल जाने के बाद परवीन अपने बच्चे के साथ मायके चली आई। यहाँ सोनू तिवारी का नया आधार कार्ड बनवाया गया। इस आधार कार्ड में सोनू का नाम फ़िरोज़ अंसारी कर दिया गया।

सोनू का कहना है कि आधार कार्ड में उसके पिता का भी नाम बदला दिया गया है। शिव प्रसाद तिवारी की जगह आधार कार्ड में राजू अंसारी लिखा हुआ है। इसी आधार कार्ड पर सोनू तिवारी का ड्राइविंग लाइसेंस भी फ़िरोज़ अंसारी के नाम से बनवा दिया गया। सोनू तिवारी ने इस साजिश में अपने मामा की मिलीभगत भी बताई है। फ़िलहाल सोनू अपनी असली पहचान वापस पाने की लड़ाई लड़ रहा है।

वह 2 साल से जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे कर इस गलती को दुरुस्त करने की गुहार लगा रहा है। सोनू का कहना है कि वह हिंदू है और इसी पहचान के साथ रहना चाहता है। उसने SDM को इस संबंध में आवेदन दिया है। बताया जाता है कि अब उसकी माँ ने भी सहमति दे दी है। SDM मुकेश रावटे के अनुसार मामले में जाँच कर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

अम्मी के दोस्त ही नाबालिग लड़की से कर रहे थे रेप, गर्भवती होने के बाद खुलासा: युसूफ, मोहम्मद अनस और मोमन अली गिरफ्तार

केरल के कोझिकोड में 15 साल की नाबालिग लड़की से गैंगरेप के मामले में पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपित 15 साल की लड़की के साथ काफी समय से बलात्कार कर रहे थे, जिसकी वजह से वो 6 माह की गर्भवती हो गई थी। पकड़े गए आरोपितों की पहचान मोहम्मद अनस, युसूफ और मोमन अली के रूप में हुई है। तीनों आरोपित पीड़िता की माँ से पहले से परिचित थे, इसी का फायदा उठाकर वो लड़की को अपनी हवस का शिकार बना रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना कोझिकोड के मुक्कम थानाक्षेत्र की है। यहाँ 15 वर्षीया एक लड़की की माँ ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला ने बताया कि उनकी बेटी हाईस्कूल की छात्रा है। कुछ दिनों ने उसके पेट में दर्द हो रहा था। जब पीड़िता की माँ ने अपनी बेटी का इलाज करवाया तो वह 6 महीने की गर्भवती निकली। पूछताछ करने पर बेटी ने अपनी माँ को मोहम्मद अनस, युसूफ और मोमन अली की करतूत बताई, जो उसकी माँ के पुराने परिचित थे।

तीनों पिछले लम्बे समय से पीड़िता से बलात्कार कर रहे थे। आरोपितों में मोहम्मद अनस और युसूफ केरल के ही मलप्पुरम के अरीकोड उरंगगिरी के निवासी हैं। तीसरा आरोपित मोमन असम का रहने वाला है जो मजदूरी करने केरल आया हुआ था। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर समुचित धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को थामरसेरी अदालत में पेश किया है।

अदालत ने तीनों को विस्तृत पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड अपर भेज दिया है। पीड़िता की काउंसिलिंग करवाई गई है। उसको इलाज के लिए तिरुवनंतपुरम चाइल्ड केयर भेज दिया गया है। इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि गैंगरेप में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

हरियाणा में लगातार तीसरी बार BJP सरकार के आसार से बिफरी कॉन्ग्रेस, चुनाव आयोग को लगी घेरने: जब तक रूझानों में थी आगे तब तक भेज रही थी PM मोदी को जलेबी

मंगलवार (8 अक्टूबर, 2024) को हरियाणा विधानसभा चुनाव की वोटों की गिनती हो रही है। भाजपा ने अनुमानों के विपरीत बड़ा उलटफेर करते हुए रुझानों में बहुमत पा लिया है। हरियाणा चुनाव में वोटों की शुरूआती गिनती में बाजी मारने वाली कॉन्ग्रेस भाजपा के आगे निकलने के बाद चुनाव में गड़बड़ी का रोना रोने लगी है।

कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और मीडिया प्रमुख जयराम रमेश ने हरियाणा विधानसभा के रुझानों में भाजपा के आगे निकलने के बाद आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की वेबसाइट धीमे अपडेट हो रही है। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में आयोग से शिकायत की है।

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 10-11 राउंड की गिनती होने के बाद भी मात्र 4-5 राउंड की जानकारी वेबसाइट पर रखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के भीतर स्थानीय प्रशासन पर दबाव डाला जा रहा है। जयराम रमेश की इस शिकायत के बाद भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने जवाब दिया है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “अगर जयराम रमेश ने यह कहना चालू कर दिया है और चुनाव आयोग पर प्रश्न उठा रहे हैं तो यह मान लिया जाना चाहिए कि उन्होंने अपनी हार मान ली है। मुझे लगता है कि हम एक निर्णायक जीत की तरफ बढ़ रहे हैं और कॉन्ग्रेस अपनी भावी पराजय की पेशबंदी करना चालू कर दिया है।”

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, हरियाणा विधानसभा चुनाव के रुझानों में 12:40 बजे तक भाजपा 49 जबकि कॉन्ग्रेस 35 सीटों पर आगे है। यदि यही रूझान बने रहे तो भाजपा की तीसरी बार हरियाणा में सरकार बन जाएगी और उसे स्पष्ट बहुमत होगा। यह उसकी हरियाणा में अब तक की सबसे बड़ी जीत होगी।

गौरतलब है कि जहाँ कॉन्ग्रेस चुनाव में पिछड़ने पर चुनाव आयोग से प्रश्न उठाने लगी तो वहीं वह सुबह तक जश्न मना रही थी। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता का दावा था कि भाजपा राज्य में 20 सीट के ऊपर नहीं पाएगी। एक कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पीएम मोदी को जलेबी भेज रहे थे। रुझान बदलते ही वह चुनाव प्रक्रिया पर प्रश्न उठाने लगे।

जहाँ हरियाणा में कॉन्ग्रेस जीत से दूर है तो वहीं जम्मू कश्मीर में वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन में जीत की ओर बढ़ रही है। दोनों पार्टियाँ मिल कर 90 में से 50 सीटें पर आगे हैं। उसको लेकर कॉन्ग्रेस ने कोई प्रश्न नहीं उठाए। इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान जब भाजपा की सीटें कम हुई थी तब कॉन्ग्रेस ने ऐसा कोई जिक्र नहीं किया था।