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10 साल छोटे मोहसिन मीर से 8 साल पहले निकाह, अब तलाक ले रही हैं उर्मिला मातोंडकर: रिपोर्टस में दावा- लम्बे समय से अलग रह रहे मियाँ-बीवी

बॉलीवुड अभिनेत्री और नेता उर्मिला मातोंडकर कथित तौर पर अपने पति मोहसिन अख्तर मीर से तलाक ले रही हैं। उन्होंने इसके लिए कोर्ट में आवेदन भी दे दिया है। अभी तलाक का कारण स्पष्ट नहीं है। दोनों की शादी को 8 वर्ष हो चुके हैं। इस तलाक का आधिकारिक तौर पर ऐलान नहीं किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई की जिस अदालत में उर्मिला मातोंडकर ने तलाक के लिए आवेदन दिया है वहाँ के एक सूत्र ने इसकी जानकारी दी है। यह भी बताया गया है कि उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन मीर के बीच हो रहे तलाक को लेकर आपसी सहमति नहीं है।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन मीर के बीच तलाक की शर्तों पर भी सहमति नहीं बनी है। उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन मीर की तरफ से इस संबंध में अभी आधिकारिक रूप से कोई सूचना नहीं दी गई है। तलाक का कारण दोनों के रिश्ते में खटास आना माना जा रहा है।

इंडिया टुडे को उर्मिला मातोंडकर की टीम ने बताया है कि वह तलाक लेकर बॉलीवुड में वापस आना चाहती हैं। टीम ने यह बताया कि वह फिल्मों में दोबारा से काम करना चाहती हैं। उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन मीर कुछ समय से अलग-अलग रह रहे हैं, यह भी टीम ने बताया है।

उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन अख्तर मीर ने 2016 में निकाह किया था। उर्मिला मातोंडकर, मोहसिन मीर से 10 वर्ष बड़ी हैं। उर्मिला की उम्र 50 वर्ष है और मोहसिन 40 वर्ष के हैं। दोनों की पृष्ठभूमि भी काफी अलग है। बताया गया कि 2014 में ही यह दोनों एक दूसरे से मिले थे और 2016 में निकाह करने का निर्णय किया था।

उर्मिला मातोंडकर का करियर बॉलीवुड में रहा है, जबकि मोहसिन अख्तर मीर कश्मीरी व्यापारी और मॉडल हैं। मोहसिन अख्तर मीर ने कुछ फिल्मों में भी काम किया है। हालाँकि, वह एक्टर के तौर पर ज्यादा सफल नहीं हो पाए। वर्तमान में वह बड़े डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के साथ मिलकर फैशन डिजाइनिंग में हैं।

उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन अख्तर मीर की 2016 में शादी को लेकर भी खूब चर्चा हुई थी। तब दोनों के मजहब अलग-अलग लेने को लेकर चर्चा हुई थी। 8 साल चले इस विवाह के रिश्ते में अब खटास होने की बातें सामने आ रही हैं। शादी के इन्हीं सालों के बीच उर्मिला मातोंडकर 2019 में उर्मिला ने मुंबई से चुनाव भी लड़ा था लेकिन हार गई थीं।

उर्मिला मातोंडकर के तलाक की खबर के बाद लोगों ने बॉलीवुड में बढ़ते तलाक के मामलों पर चिंता जताई है।

वहीं एक और व्यक्ति ने लिखा कि उर्मिला मातोंडकर का भी तलाक हो रहा है ऐसे में देखना है कि सोनाक्षी सिन्हा की शादी कितने दिन चलती है। उन्होंने मुस्लिमों की तरफ इशारा करते हुए विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठाए।

उर्मिला मातोंडकर के तलाक के आवेदन की बात तो सामने आ गई है लेकिन मोहसिन मीर की तरफ ऐसा कोई कदम उठाया गया है या नहीं इसकी कोई जानकारी नहीं सामने आई है।

‘न्यायालय में जो कुछ भी हो रहा है उसे दबाना नहीं चाहिए’: सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग पर लगी रोक हटाई, कर्नाटक हाई कोर्ट ने क्लिप शेयर करने से भी रोका था

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने बुधवार (25 सितंबर 2024) को कहा कि न्यायाधीशों द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के वायरल होने से हुए विवाद के कारण अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग नहीं बंद की जा सकती। CJI ने कहा कि सूर्य के प्रकाश का उत्तर है अधिक सूर्य का प्रकाश। न्यायालय में जो कुछ भी हो रहा है, उसे दबाना नहीं चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ दरअसल कर्नाटक हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति वी श्रीशानंद द्वारा की गई टिप्पणियों पर स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की। इसका वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया था।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में जजों को स्त्री द्वेषी या किसी समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह वाली टिप्पणी से बचने की जरूरत को लेकर कुछ सख्त टिप्पणी भी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक युग में कार्यवाही की व्यापक रिपोर्टिंग होती है। ऐसे में न्यायाधीशों को सावधानी और सतर्कता से काम करने की जरूरत है। पीठ ने न्यायाधीश द्वारा क्षमा याचना के बाद स्वत: संज्ञान वाली कार्यवाही बंद कर दी।

गौरतलब है कि विवाद के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक अधिसूचना जारी करके लोगों को लाइव-स्ट्रीम वीडियो की अनधिकृत क्लिपिंग और शेयरिंग के खिलाफ नियमों की याद दिलाई थी। साथ ही हाई कोर्ट ने एक आदेश पारित कर अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीम से बनाई गई क्लिप को शेयर करने पर रोक लगा दी थी।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश एडवोकेट एसोसिएशन बेंगलुरु की एक याचिका पर दिया। एडवोकेट ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि लाइव स्ट्रिमिंग से उनकी प्रतिष्ठा का हनन हो रहा है। ये याचिका पब्लिक में, खासकर सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा कोर्ट प्रोसिडिंग्स की लाइव स्ट्रीम वीडियो के इस्तेमाल के खिलाफ दायर की गई है।

एक वीडियो में जस्टिस श्रीशानंद बेंगलुरु के एक इलाके को ‘पाकिस्तान’ कहते नज़र आए थे। दूसरे वीडियो में वे एक महिला वकील के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नज़र आए थे। वीडियो वायरल होने के बाद इसकी बड़े पैमाने पर आलोचना हुई थी। इसके बाद जज श्रीशानंद ने शनिवार (21 सितंबर 2024) को न्यायालय में अपनी टिप्पणी के लिए खेद व्यक्त किया था। 

बताते चलें कि इसी तरह की कुछ दलील RG कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई रेप एवं उसकी हत्या के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे कपिल सिब्बल ने भी दिया था। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का विरोध किया था और कहा था कि 5 दशकों में बनाई गई प्रतिष्ठा लाइव स्ट्रीमिंग से नष्ट हो जाएगी।

इजरायल के हमले में हिजबुल्लाह का मिसाइल प्रोग्राम का सरगना ढेर, 250 से ज्यादा फाइटर जेट बरसा रहे बम: अब तक 550+ की मौत

इजरायल के हवाई हमले में लेबनान के भीतर छुप कर बैठे इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के मिसाइल प्रोग्राम का कमांडर ढेर हो गया। इजरायल के हवाई हमलों के कारण हिजबुल्लाह की कमर टूट गई है। हिजबुल्लाह के समर्थक ईरान ने कहा है कि यह आतंकी संगठन अकेले इजरायल का मुकाबला नहीं कर सकता।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने मंगलवार (24 सितम्बर, 2024) को इजरायल ने बेरूत के दाहियेह इलाके में हवाई हमला किया। इस हमले में हिजबुल्लाह का रॉकेट और मिसाइल विशेषज्ञ इब्राहीम कुबाईसी मारा गया। कुबाईसी हिजबुल्लाह की रॉकेट यूनिट का बड़ा नाम था और इजरायल में कई हमलों के लिए जिम्मेदार था।

कुबाईसी की मौत की पुष्टि आतंकी संगठन हिजबुल्लाह ने भी कर दी है। हिजबुल्लाह ने उसे शहीद बताया है। इजरायल ने बताया कि कुबाईसी इजरायल के भीतर होने वाले सैकड़ों रॉकेट हमले के लिए जिम्मेदार था। उसके इन हमलों के कारण 2000 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हमले में हिजबुल्लाह के दो और कमांडर मारे गए हैं।

कुबाईसी 1980 से ही हिजबुल्लाह से जुड़ा हुआ था। उसकी मौत के बाद हिजबुल्लाह ने बदला लेने की बात कही है। इजरायल हिजबुल्लाह पर बीते लगभग एक सप्ताह से हमलावर है। इजरायल लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है।

इजरायल के लगभग 250 जेट विमान लेबनान के भीतर बम बरसा रहे हैं। इजरायल उन इमारतों को निशाना बनाया है कि जहाँ हिजबुल्लाह ने अपने हथियार छुपा कर रखे थे। हिजबुल्लाह ने लेबनान के कई घरों में रॉकेट और मिसाइल भी भर रखे थे। इजरायल ने इसकी तस्वीरें भी जारी की।

हिजबुल्लाह ने इजरायल का जवाब देने के लिए रॉकेट इजरायल की तरफ दागे हैं। उसने अब तक 300 से अधिक रॉकेट हमले इजरायल के अलग-अलग हिस्सों में किए हैं। इजरायल ने बताया कि एक क्रूज मिसाइल भी उसकी तरफ दागी गई थी लेकिन उसे रास्ते में ही मार गिराया गया।

इजरायल के लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह पर बढ़ते हमलों के बीच ईरान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने कहा है कि हिजबुल्लाह इजरायल के खिलाफ अकेले खड़ा नहीं हो सकता। ईरान का कहना है कि इजरायल को पश्चिमी देश लगातार मदद करते हैं और ऐसे में हिजबुल्लाह उसका सामना नहीं कर सकता।

लेबनान ने कहा है कि इजरायली हमलों में अब 550 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जबकि बड़ी संख्या में लोग उन इलाकों से भागने पर मजबूर हैं जहाँ हिजबुल्लाह का प्रभाव है। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हैं। इससे पहले इजरायल ने लेबनान के भीतर हजारों पेजरों पर एक साथ हमला किया था।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया था। इस हमले में 1000 से अधिक लोग मारे गए थे। हिजबुल्लाह ने इस हमले का समर्थन किया था और लेबनान की तरफ से इजरायल को निशाना बनाया था। अब इजरायल हिजबुल्लाह पर कहर बरपा रहा है।

जम्मू के रियाज अहमद ने हिंदू बन त्रिपुरा की महिला से की दोस्ती, फिर आंध्र प्रदेश के मंदिर में की शादी: अब कह रहा- मुस्लिम बनो, नहीं तो हत्या कर दूँगा

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक हिन्दू महिला से लव जिहाद का मामला सामने आया है। त्रिपुरा की रहने वाली पीड़िता ने सोमवार (23 सितंबर 2024) को दी गई तहरीर में आरोप कि जम्मू-कश्मीर का रहने वाले रियाज़ ने गुलशन बनकर उससे शादी की और बच्चा होने के बाद उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाने लगा। इनकार करने पर उसने पीड़िता को शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक NGO के माध्यम से बच्चों को पढ़ाती है। सोमवार को वह शिकायत लेकर रायगढ़ कलेक्ट्रेट पहुँची। अपनी शिकायत में पीड़िता ने कहा कि लगभग 4 साल पहले सोशल मीडिया के जरिए उसका परिचय जम्मू के गाँव कांदी का रहने वाले रियाज़ अहमद से हुआ था। तब रियाज़ ने अपनी प्रोफ़ाइल गुलशन मन्हास के नाम से बना रखी थी।

लगभग 4-5 महीनों की बातचीत में ही रियाज़ और पीड़िता में गहरी दोस्ती हो गई। उन्होंने आपस में मोबाइल नंबर शेयर करके बातचीत शुरू कर दी। साल भर के अंदर ही रियाज़ ने पीड़िता को अपने प्यार के जाल में फँसा लिया। साल 2021 में रियाज़ अहमद ने महिला से शादी करने के लिए कहा और जब वह तैयार हो गई तो उसे आंध्र प्रदेश के व्रदापालम शहर बुलाया।

पीड़िता बिना किसी को बताए व्रदापालम पहुँच गई और वहाँ के एक मंदिर में जून 2021 में दोनों ने शादी कर ली। यह शादी हिन्दू विधि विधान से हुई। शादी के बाद रियाज़ पीड़िता के साथ आंध्र प्रदेश में ही एक किराए के मकान में रहने लगा। जब भी पीड़िता उससे परिवार के बारे में पूछती तो वो टाल-मटोल करने लगता था। थोड़े समय बाद पीड़िता गर्भवती हो गई।

इसके बाद पीड़िता ने 7 दिसंबर 2022 को आंध्र प्रदेश के एक अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया। इस बच्चे का नाम गुरदीप रखा गया। जब बच्चा 4 माह का हो गया तब पहली बार रियाज़ पीड़िता के साथ अपने गाँव जम्मू गया। जब पीड़िता उसके घर पहुँची तो वहाँ गुलशन बने रियाज़ का घरेलू माहौल एवं तौर-तरीका हिन्दू जैसा नहीं लगा। वह असमंजस में फँस गई।

एक दिन पीड़िता के सामने रियाज़ मुर्गा काटने लगा। मुर्गा को हलाल करते देख पीड़िता को लग गया कि उसने किसी मुस्लिम से शादी कर ली है। महिला ने आसपास पूछताछ शुरू की। तमाम मुस्लिम पड़ोसियों ने राज को दबाए रखा। हालाँकि, कुछ हिन्दू परिवारों ने पीड़िता को बताया कि गुलशन का असली नाम रियाज़ अहमद है। इसके बाद पीड़िता सन्न रह गई। पीड़िता के सामने अब रियाज़ की पोल खुल गई थी।

पोल खुल जाने के बाद रियाज पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। इसमें रियाज़ और उसके परिजन भी शामिल थे। हालाँकि, पीड़िता ने धर्मांतरण से इनकार किया तो उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। रियाज़ और उसके घर वालों ने पीड़िता को कत्ल करने की भी धमकी दी। पीड़िता का दावा है कि इस अत्याचार की शिकायत उसने जम्मू के कांदी थाने में की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

पुलिस से मदद नहीं मिलने पर पीड़िता रियाज़ के घर से भागने की फिराक में जुट गई। एक दिन मौक़ा पाते ही वह जम्मू से निकल गई और सीधे दिल्ली पहुँची। खुद को बचाने के लिए पीड़िता ने बार-बार अपनी लोकेशन बदली। वह दिल्ली से भागकर राजस्थान पहुँची। इस बीच रियाज़ को पता चला कि पीड़िता राजस्थान में है और वह वहाँ पहुँचकर पीड़िता को जबरन अपने घर जम्मू ले आया।

जम्मू आने के बाद रियाज और उसके घर वालों ने पीड़िता के कहीं आने-जाने पर सख्त पहरा लगा दिया। खुद को संकट में घिरा देखकर पीड़िता 5 माह बाद फिर से जैसे-तैसे करके रियाज़ के घर से भागने में कामयाब रही। इस बार वह राजस्थान के बजाय छत्तीसगढ़ पहुँची। यहाँ उसे एक NGO ने सहारा दिया।

वह इसी NGO में बच्चों को पढ़ाने का काम करने लगी। बच्चा गुरदीप फिलहाल पीड़िता के ही पास है। सोमवार को महिला ने राजगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई। राजगढ़ के एडिशनल एसपी आकाश मरकाम के मुताबिक, पूरे मामले की जाँच कर के कार्रवाई की जाएगी।

कॉन्ग्रेस की सरकार बनी तो अन्याय करने वालों को मेवात छोड़ना होगा: मामन खान, नूहँ दंगों में गया था जेल; फिर से पार्टी ने दिया है टिकट

हरियाणा के कॉन्ग्रेस के विधायक मामन खान ने विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान एक बार फिर भड़काऊ भाषण दिया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही अन्याय करने वालों को को मेवात छोड़ना पड़ेगा। फिरोजपुर झिरका विधानसभा सीट से विधायक का नाम नूहँ दंगों के दौरान आया था और उन पर हिंदुओं पर हमले के लिए मुस्लिमों को भड़काने का आरोप लगा था।

हरियाणा में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है और कॉन्ग्रेस ने फिर से उन्हें फिरोजपुर झिरका सीट से टिकट दी है। चुनाव प्रचार के लिए वे बीवाँ गाँव में गए थे। यहीं पर लोगों को संबोधित करते हुए मामन खान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जिन लोगों ने मेवात के बच्चों के साथ अन्याय किया है, कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही उन्हें मेवात छोड़ना पड़ेगा।

नूहँ दंगों को लेकर मामन खान ने कहा, “मुझे पता है कि जब यह कांड हुआ था तो तब काफी घरों में चूल्हे भी नहीं सुलगे थे। सरकार ने मुझे बेवजह जेल में डाल दिया था, लेकिन हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। मेरा परिवार और आपका परिवार कोई अलग नहीं है। हम सबका परिवार एक है। हमें इस बात का दुख नहीं होना चाहिए कि मेरे घर में चूल्हा नहीं सुलगा, आपके घर में चूल्हा नहीं सुलगा।”

कॉन्ग्रेस विधायक ने आगे कहा, “मेरे बच्चे ने रोटी नहीं खाई, आपके बच्चे ने रोटी नहीं खाई। दर्द सबको है। पता सबको है। वक्त आएगा और सरकार बनेगी। इंशाअल्लाह। जिन जालिमों ने हमारे बच्चों के साथ अन्याय किया है, मुझे एक-एक की जानकारी है। एक-एक को जानता हूँ। जिन्होंने लिस्ट दी है, किसी भी सूरत में बख्शूंगा नहीं। उन्हें मेवात छोड़ना पड़ेगा और बाहर जाना पड़ेगा।”

मामन खान का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बयान ने कॉन्ग्रेस की पोल-पट्टी खोल दी। है। इसके बाद मामन खान ने एक स्पष्टीकरण जारी किया और कहा कि कुछ लोगों ने उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया है। हालाँकि, लोगों पर उनकी इस लीपापोती पर विश्वास नहीं हो रहा है।

मामन खान के इस बयान पर हरियाणा भाजपा ने सोशल मीडिया X पर लिखा, “अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो दंगे करवाएगी। गलती से भी अगर कॉन्ग्रेस की सरकार बन गई तो हिंदुओं को पलायन करना पड़ेगा।” वहीं, राज्य के वन मंत्री एवं भाजपा नेता संजय सिंह ने कहा कि मामन खान में अगर हिम्मत है किसी भी व्यक्ति को हाथ लगाकर दिखाएँ। उन्होंने चुनाव आयोग से मामन खाँ को अयोग्य घोषित करने की माँग की।

बताते चलें कि 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हमला किया गया, जिसमें कई मौत हो गई और पुलिस सहित दर्जनों लोग घायल हो गए थे। कट्टरपंथियों ने पानीपत बजरंग दल के प्रखंड संयोजक अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत की हत्या कर दी। अभिषेक को पहले गोली मारी गई, फिर उनका गला काट दिया गया था। उन्होंने एक महिलाओं को बचाने के लिए अपनी जान गँवा दी थी।

VHP ने स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान और आफताब पर हिंसा के उकसाने का आरोप लगाया और इनके द्वारा किए गए कई ट्वीट को साझा किया। विश्व हिंदू परिषद के महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि मामन खान ने चार महीने पहले विधानसभा में कहा था कि किसी की हिम्मत है तो मेवात में घुसकर दिखा दे। उन्होंने कहा कि मामन खान की तरह ही कॉन्ग्रेस नेता आफताब ने कहा था कि अगर गाँव में पुलिस वाले आएँ तो उनके हाथ-पैर तोड़ दो। उनकी चिंदी-चिंदी कर दो। उन्होंने कहा कि आफताब मेवात में ही रहते हैं।

असम के ईसाई स्कूल में बच्चों को जबरन बीफ खिलाने पर FIR दर्ज, अभिभावकों ने किया प्रदर्शन: शिकायत पर स्कूल से निकालने की धमकी

असम के कामरूप में एक ईसाई स्कूल में स्थानीय हिन्दू बच्चों को कथित तौर पर बीफ खिलाया गया। स्कूल प्रशासन से जब इसकी शिकायत की गई तो उन्होंने मामले का संज्ञान लेने के बजाय छात्रों को ही धमकी दी। यह मामला जब बच्चों के अभिभावकों के पास पहुँचा तो उन्होंने FIR करवाई। उन्होंने स्कूल के बाहर इस मामले में प्रदर्शन भी किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कामरूप के अन्धेरीजुली में स्थित ईसाई मिशनरी कार्मेल स्कूल में यह घटना हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि गुरुवार (19 सितम्बर, 2024) को स्कूल में भोजन के समय के दौरान कुछ छात्रों को जबरन बीफ खिलाया गया। बीफ खिलाने का आरोप स्कूल में पढ़ने वाले मणिपुरी छात्रों पर लगाया गया है।

स्थानीय रिपोर्ट में बताया गया कि कक्षा 7 में पढ़ने वाले स्थानीय हिन्दू छात्रों को मणिपुरी छात्रों ने जबरन बीफ खिलाया। मणिपुरी छात्रों पर स्थानीय छात्रों को पीटने का भी आरोप है। यह घटना पहले दबी रही और बाद में अभिभावकों पता चली। छात्रों ने जब इसे स्कूल प्रशासन को बताया तो उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश की।

एक अभिभावक ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी स्कूल के बाहर के एक दुकानदार से हुई। दुकानदार ने उन्हें स्कूल में बीफ बाँटे जाने की सूचना दी। बच्चे के अभिभावक ने कहा कि उनका बेटा इसी स्कूल में पढ़ता है, उसने उन्हें बताया कि स्कूल के भीतर कुछ छात्र बीफ बाँट रहे थे।

पीड़ित अभिभावक ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चे को मणिपुरी छात्रों से कुछ ना लेने की हिदायत दी थी, क्योंकि यह बीफ हो सकता है। हालाँकि, गुरुवार को उनके बच्चे को एक मणिपुरी छात्र ने मांस खाने को दिया और जब उसने पूछा तो मणिपुरी छात्र ने इसके बीफ होने की बात बताई।

एक अन्य अभिभावक ने मीडिया से कहा कि उनकी बेटी ने उन्हें यह सूचना दी कि मैगी में बीफ मिला गया था। उन्होंने कहा कि जब इस बारे में प्रिंसिपल से पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अन्य अभिभावकों ने भी स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

अभिभावकों ने माँग की है कि उन छात्रों को स्कूल से निकाला जाए जिन्होंने जबरन दूसरे छात्रों को बीफ खिलाया। स्कूल के प्रिंसिपल से जब कार्रवाई की माँग की तो उन्होंने स्थानीय छात्रों को धमकाया। उनसे कहा गया कि यदि वह इस विषय में बोले तो उन्हें स्कूल से निष्कासित कर दिया जाएगा।

अभिभावकों ने इस संबंध में स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया है। उन्होंने स्थानीय थाने में इस मामले में FIR भी दर्ज करवाई है। स्कूल प्रशासन इस मामले में जवाब देने से बच रहा है। स्थानीय प्रशासन ने यहाँ सुरक्षाबलों की तैनाती की है। ऑपइंडिया ने इस विषय स्कूल से सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका।

दानिश ने नाबालिग के साथ मिलकर 5वीं कक्षा की छात्रा का कर लिया अपहरण, होटल ले जाकर किया गैंगरेप: लखनऊ पुलिस ने एक को दबोचा, दूसरे की तलाश जारी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कक्षा 5 में पढ़ने वाली नाबलिग बच्ची से गैंगरेप का मामला सामने आया है। स्कूल से लौटते हुए पीड़िता का अपहरण किया गया फिर एक होटल में ले जाकर सामूहिक बलात्कार हुआ। बच्ची के पिता ने दानिश और एक नाबालिग के खिलाफ खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है। पीड़िता की अश्लील वीडियो बना ली गई और कहीं मुँह खोलने पर उसे जान से मार डालने की धमकी भी मिली। पुलिस ने केस दर्ज कर के 1 आरोपित को हिरासत में ले लिया है। घटना सोमवार (23 सितंबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वारदात लखनऊ के सरोजनी नगर थाना इलाके की है। जहाँ सोमवार को 14 वर्षीया पीड़िता के पिता ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में बच्ची के पिता ने बताया कि हर दिन की तरह सोमवार को भी कक्षा 5 में पढ़ने वाली उनकी बेटी स्कूल गई थी। दोपहर लगभग 1 बजे वह छुट्टी के बाद घर लौट रही थी। इसी दौरान 2 युवक एक कार से पहुँचे और बच्ची का बैग छीनने लगे। जब पीड़िता ने विरोध किया तो आरोपितों ने उसे भी कार में खींच लिया।

इनमें एक का नाम दानिश है, जबकि दूसरा नबाालिग बताया जा रहा है। आरोप है कि दोनों पीड़िता का अपहरण कर के कृष्णानगर क्षेत्र में ही पड़ने वाले एक होटल में ले गए जिसका नाम पैराडाइज शाँति इन है। यहाँ दोनों आरोपितों ने बारी-बारी पीड़िता से गैंगरेप किया और इसका वीडियो भी बनाया। गैंगरेप के बाद दोनों ने बच्ची को धमकाते हुए कहा कि अगर उसने कहीं मुँह खोला तो न सिर्फ फोटो और वीडियो वायरल कर दिया जाएगा, बल्कि पूरे परिवार का कत्लेआम भी कर दिया जाएगा।

इन धमकियों से पीड़िता बेहद डर गई। लगभग 3 घंटे तक लड़की से गैंगरेप के बाद आरोपितों ने शाम 4 बजे उसे कृष्णानगर में छोड़ दिया। घर आ कर उसने रोते हुए अपने पिता को दानिश और नाबालिग की सारी करतूत बताई। इस घटना के बारे में पीड़ित के पिता ने तुरंत सरोजनीनगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपित को हिरासत में ले लिया है। दूसरे आरोपित की गिरफ्तारी के लिए सर्च ऑपरेशन चल रहा है। पुलिस मामले की गहराई से जाँच कर रही है और CCTV फुटेज सहित अन्य सबूत एकत्रित किए जा रहे हैं। एसीपी विनय कुमार ने बताया कि मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है और पीड़िता को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

रफीक खान सपा की लोहिया वाहिनी का राष्ट्रीय सचिव, नौशाद खान सपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ का अध्यक्ष… चला रहे थे जाली नोटों का गैंग, जमीनों पर कब्जा करने के भी उस्ताद

उत्तर प्रदेश की कुशीनगर पुलिस ने नकली नोट छापने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें समाजवादी पार्टी के दो राष्ट्रीय स्तर के नेता, रफीक खान और नौशाद, सहित 10 मुस्लिम आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर नकली नोटों की तस्करी, अवैध हथियार रखने, और गरीबों की जमीनों पर अवैध कब्जा करने के आरोप हैं।

रफीक और नौशाद के अलावा रफी अंसारी, लादेन उर्फ़ औरंगजेब, शेख जमालुद्दीन, रियाजुद्दीन, रेहान, हासिम, सेराज हशमती और परवेज़ इलाही भी पकड़े गए हैं। इसमें से रफ़ीक खान और नौशाद समाजवादी पार्टी में राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी हैं। इन आरोपितों के पास से नकली नोटों की खेप के अलावा अवैध हथियारों के साथ दर्जनों सिम, मोबाइल, फर्जी पहचान पत्र, लक्जरी गाड़ियाँ व अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुई हैं।

यह घटना कुशीनगर जिले के थानाक्षेत्र तरयासुजान की है। जहाँ पुलिस ने सोमवार (23 सितंबर 2024) को कार्रवाई करते हुए इतने बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस ने नकली नोटों की छपाई की एक सूचना पर टीम बना कर एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी। इस टीम में 2 थानों सहित साइबर सेल के भी स्टाफ शामिल थे। दबिश के दौरान आरोपितों को पकड़ा और तलाशी ली। इन सभी के पास से न सिर्फ नकली नोटों बल्कि अवैध हथियारों का भी जखीरा बरामद हुआ।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों के पास से 5 लाख 62 हजार रुपए के नकली नोट मिले हैं। इन रूपयों को हूबहू असली नोटों की तरह छापा गया था। इसी के साथ असली 1 लाख 10 हजार रुपए भी बरामद हुए हैं। इन रुपयों का नकली नोटों से सौदा किया गया था। आरोपितों के पास 3 हजार मूल्य की नेपाली मुद्रा भी मिली है। जाली नोटों की तस्करी के साथ ये आरोपित आपराधिक कृत्यों को भी अंजाम देते थे।

पुलिस ने नकली, असली व नेपाली नोटों के साथ इस गिरोह के पास से 10 तमंचे, 30 जिन्दा व 12 दगे कारतूस, 4 सुतली बम भी बरामद करने में सफलता पाई है। इनके पास से अपराध में प्रयोग हुए 13 मोबाइल फोन, 26 फर्जी सिम, 13 फर्जी आधार कार्ड, 10 ATM कार्ड और 4 लैपटॉप भी बरामद हुए। ये सभी आरोपित लक्जरी कारों के भी शौक़ीन हैं।

आरोपितों के पास एक स्कार्पियो व एक अन्य वीनस कार भी मिली है जिसे सीज कर दिया गया है। इन सभी आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 179 व 62 (2) के साथ आर्म्स एक्ट और विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। कुशीनगर पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आरोपित लोगों को डराने-धमकाने सहित गरीबों की जमीनों पर अवैध कब्ज़े जैसे आपराधिक कृत्यों में शामिल हैं।

पुलिस इन सभी के नेटवर्क और और ज्यादा जानकारियाँ जुटाने में लगी हुई है। इन आरोपितों को जब कोर्ट में पेश किया गया तो अधिकतर के पैरों में पट्टी बंधी मिली। इसमें से कुछ को व्हीलचेयर पर लाया गया था। आरोपित पुलिस को देख कर रोते हुए हाथ जोड़ रहे थे।

नौशाद और रफी का सपा कनेक्शन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पकड़े गए आरोपितों में नौशाद और रफीक खान का समाजवादी पार्टी से कनेक्शन है। रफीक खान सपा की लोहिया वाहिनी का राष्ट्रीय सचिव है। अखिलेश यादव के साथ उसकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। रफीक खान ही इस गिरोह का मास्टरमाइंड है। दूसरा आरोपित नौशाद खान समाजवादी पार्टी की सांस्कृतिक प्रकोष्ठ में उपाध्यक्ष है। वह भी अक्सर सपा के बड़े मंचों पर दिखाई देता है।

भारतीय जनता पार्टी ने नकली नोटों के इस आपराधिक गिरोह में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों का नाम आने पर तंज कसा है। उत्तर प्रदेश भाजपा के आधिकारिक हैंडल से सवाल किया गया है कि अब अखिलेश यादव इनका बचाव कैसे करेंगे ?” एक न्यूज़ चैनल की क्लिप शेयर करते हुए भाजपा ने वीडियो में ‘लाल टोपी के काले कारनामों का एक और खुलासा’ और ‘अंतरराष्ट्रीय सरगना निकला सपा नेपा’ जैसे कैप्शन भी दिए हैं।

रेलवे के 3 कर्मचारियों ने पहले खुद खोली रेल लाइन की फिश प्लेट, फिर नाम-इनाम के लिए सूचना भी दी: लेकिन खुल गया भेद, पकड़े गए

गुजरात के सूरत में किम रेलवे स्टेशन के पास पटरी से फिशप्लेट और चाभियाँ निकाल कर ट्रेन पलटने की साजिश रचने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह तीनों रेलवे के कर्मचारी हैं। ट्रेन को बेपटरी करने की यह साजिश 21 सितम्बर को फेल की गई थी।

पुलिस ने इस मामले में अपनी जाँच में पाया कि ट्रेन पलटने की साजिश इन रेलवे कर्मचारियों ने ही रची थी। इन तीनों रेलवे कर्मचारियों ने ट्रेन बेपटरी करने की साजिश का नाटक रचने को लिए पटरी से कुछ चाभियाँ और फिशप्लेट हटा दी और फिर इसकी तस्वीरें और वीडियो बनाई। इसे बड़े अधिकारियों को भेजा गया था ताकि यह दिखाया जा सके कि यह तीनों मुस्तैद हैं।

घटना वाले दिन रेलवे ने बताया था कि वड़ोदरा डिविजन में यह घटना हुई जब पटरियों पर से किसी ने फिशप्लेट और चाभियाँ हटा दी और पटरी को ऐसे ही छोड़ दिया। यह सभी हिस्से अप लाइन पर से निकाले गए और उन्हें डाउन लाइन पर रख दिया गया। रेलवे ने बताया था कि इस मामले में कोई दुर्घटना नहीं हुई और संचालन कुछ देर बाद सामान्य हो गया।

अब इस मामले में गिरफ्तार तीनों की पहचान ट्रैकमैन सुभाष पोद्दार और मनीष मिस्त्री तथा एक ठेका कर्मचारी शुभम जायसवाल के रूप में हुई है। इस मामले में पुलिस ने यात्रियों की जान को खतरा पहुँचाने और साजिश रचने समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इन तीनों के खिलाफ रेलवे एक्ट के अंतर्गत मामला भी दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुभाष पोद्दार ने ही अपने अधिकारियों को पटरी पर से फिश प्लेट हटाए जाने के बारे में सूचना दी थी। इसके बाद अधिकारी यहाँ पहुँचे और उन्होंने समय रहते पटरियों की मरम्मत करवाई। इस कारण कई ट्रेनें पटरी से उतरने से बच गईं और जान माल का नुकसान नहीं हुआ।

सूरत ग्रामीण एसपी ने बताया कि 21 सितंबर की रात को किम और कोसांबा रेलवे स्टेशनों के बीच 1.5 किलोमीटर की पटरियों से फिश प्लेटें हटाई हुई पाई गईं थी। बताया गया कि जब सुभाष पोद्दार और उसका साथी पैडलॉक और स्क्रू हटा चुका था, उस समय उस पटरी से 15 ट्रेनें गुजरीं।

ट्रेनों के निकलने के समय यह तीनों छिप जाते थे। इनका मिशन था कि जब सुबह यहाँ से गरीब रथ ट्रेन निकलने वाली हो तब अधिकारियों को घटना के बारे में सूचना दी जाए। यह लोग ट्रेन के इस घटनास्थल पर पहुँचने से कुछ देर पहले अधिकारियों को बताने की साजिश रच कर आए थे। इनका मानना था कि यदि यह बड़ी ट्रेन को पलटने से रोकेंगे तो इन्हें सम्मान मिलेगा।

सम्मान और इनाम के अलावा, इन तीनों को उम्मीद थी कि उन्हें उनकी नाइट शिफ्ट ड्यूटी से हटाकर दिन की शिफ्ट में रखा जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, सुभाष पोद्दार 9 साल से भारतीय रेलवे के साथ काम कर रहा है। सूरत के एसपी हितेश जॉयसर ने कहा: “उनके फोन की जाँच के दौरान, हमें उनके रीसायकल बिन से उन फिशप्लेट और चाभियों के फोटो मिले, यह सुबह 2 बजे से 5 बजे के बीच शूट किए गए थे। लेकिन अलर्ट सुबह 5 बजे के बाद भेजा गया था। जा पूछा गया तो वह साफ जवाब नहीं दे पाए, इसके बाद शक और गहरा हो गया।”

सिद्दारमैया जमीन घोटाले से पूरी तरह अलग थे यह विश्वास करना मुश्किल: कर्नाटक हाई कोर्ट, कॉन्ग्रेसी CM पर चलेगा केस; जानिए क्या है MUDA स्कैम

कर्नाटक हाई कोर्ट से राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने सिद्दारमैया की कर्नाटक राज्यपाल के फैसले के विरुद्ध दायर याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने सिद्दारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी को बरकरार रखा है। उन पर MUDA घोटाले में अब मुकदमा चलाया जा सकेगा।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंगलवार (24 सितम्बर, 2024) को सिद्दारमैया की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया। हाई कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है और इसकी राज्यपाल से अनुमति ली है, वह अपनी जगह पर सही हैं।

कोर्ट ने राज्यपाल के इस मामले को मंजूरी देने के मामले में कहा कि राज्यपाल अपने फैसले लेने को स्वतंत्र है। हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही सामान्य स्थिति में राज्यपाल को मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करना होता हो लेकिन वर्तमान मामले में परिस्थितियाँ अलग थीं।

राज्यपाल के फैसले को कोर्ट ने एकदम सही बताया और इसमें कोई भी चूक नहीं बताई। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिद्दारमैया इस घोटाले में से पूरी तरह अलग थे, इस पर विश्वास करना मुश्किल है। कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार के पक्ष में कैसे नियमों को तोड़ा-मरोड़ा गया, इस बात की जाँच की आवश्यकता है।

हाई कोर्ट ने कहा, “यह मानना कठिन है कि इस पूरे लेन-देन का लाभार्थी जिसमें मुआवजा ₹3.56 लाख निर्धारित किया गया और यह ₹56 करोड़ बन गया, याचिकाकर्ता (सिद्दारमैया) का परिवार नहीं है। मुख्यमंत्री के परिवार के पक्ष में नियम कैसे और क्यों मोड़ा गया, इसकी जाँच की आवश्यकता है। अगर इस बात की जाँच की आवश्यकता नहीं है, तो मैं यह नहीं समझ पा रहा कि आखिर किस मामले की जाँच होनी चाहिए।” कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों को फायदा हुआ वह CM का परिवार हैं, ऐसे में कोर्ट राहत नहीं दे सकती।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कथित घोटाले की समयावधि के दौरान सिद्दारमैया बड़े पदों पर रहे, अगर ऐसा नहीं होता तो मुआवजे की रकम इतनी बड़ी नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि कोई आम आदमी कभी ऐसे फायदे पाया हो, ऐसा सुनने में नहीं आता।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कई बिन्दुओं को जोड़ने की जरूरत है, इसके लिए जाँच करनी होगी और राज्यपाल की मंजूरी से यही काम हो रहा है, ऐसे में यह सही है। MUDA मामले में तथ्यों की गहराई को देखते हुए हाई कोर्ट ने सिद्दारमैया को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिका रद्द कर दी। हाई कोर्ट से सिद्दारमैया ने याचिका खारिज होने के बाद अपील दाखिल करने की 2 सप्ताह की मोहलत माँगी थी लेकिन अदालत ने यह भी देने से मना कर दिया।

क्या है MUDA घोटाला?

शॉर्ट में MUDA (मुडा) कहलाने वाला मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण कर्नाटक की विकास एजेंसी है, जो मैसूर में शहरी विकास और बुनियादी ढाँचे का विकास करती है। यह दिल्ली के DDA और नोएडा के Noida ऑथिरिटी की तरह ही है। इन एजेंसियों की तरह ही MUDA भी लोगों को किफायती कीमत पर आवास उपलब्ध कराने का काम करता है। 

शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए MUDA एक योजना लेकर आई थी। साल 2009 में पहली बार लागू की गई इस योजना का नाम 50:50 था। इसमें जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50 प्रतिशत के हकदार थे। यह 30’x40’ आयाम के लगभग 9 विकसित भूखंडों के बराबर है और वे इसे मौजूदा बाजार दर पर किसी को भी बेचने के लिए स्वतंत्र थे।

50:50 योजना में घोटाला

आरोप है कि ये भूखंड अवैध रूप से उन लोगों को आवंटित किए, गए जो खुद को भूमिहीन बता रहे थे। इस घोटाले में बिचौलियों की भूमिका के अलावा MUDA अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत का भी संदेह है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 15 जून 2024 को दो भूमिहीनों को भूखंड आवंटित करने के आदेश किए गए थे।

इनमें तत्कालीन MUDA आयुक्त दिनेश कुमार ने 8.14 एकड़ भूमि के मूल मालिक के उत्तराधिकारी को 98,206 वर्ग फुट विकसित भूमि आवंटित की। इस भूमि को MUDA ने गोकुलम लेआउट के विकास के लिए अधिग्रहित किया था। मैसूर में गोकुलम लेआउट के लिए अधिग्रहण की कार्यवाही 1968 में शुरू हुई थी।

सीएम सिद्धारमैया की पत्नी को दिया गया लाभ

राज्य में जब भाजपा की सरकार आई तो उसने साल 2020 में इस योजना को बंद कर दिया। आरोप है कि इस योजना के बंद हो जाने के बाद भी MUDA ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। इस योजना के तहत वर्तमान सीएम सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को लाभ पहुँचाया गया। MUDA के इस घोटाले में प्राधिकरण के आयुक्त पर भी आरोप हैं।

पार्वती की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि MUDA द्वारा अधिग्रहित की गई। मैसूर के बाहरी इलाके केसारे में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने साल 1996 में खरीदा था। इसके बाद उन्होंने साल 2010 में इसे पार्वती को उपहार में दे दिया था। आरोप है कि MUDA ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही इस पर देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी। 

बाद में पार्वती ने जमीन अधिग्रहण का दावा करते हुए मुआवजे के लिए आवेदन किया। उनकी जमीन के बदले पार्वती को मैसूर के एक महंगे इलाके विजयनगर III और IV फेज में उन्हें 14 साइटें आवंटित की गईं। यह आवंटन 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। इस आवंटन में विपक्ष मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी पर घोटाले का आरोप लगा रहा है।