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‘काफिरों की मदद कर रहे हो, तुम्हें देख लेंगे’: वक्फ बिल पर JPC के सामने विचार रख रहे थे ‘गुलशन फाउंडेशन’ के इरफान अली, ओवैसी और TMC सांसद ने बाहर निकलवाया

मुंबई में आयोजित वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की एक बैठक के दौरान एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) सांसद कल्याण बनर्जी पर एक व्यक्ति को धमकाने और धार्मिक घृणा फैलाने के आरोप लगे हैं। गुलशन फाउंडेशन के सदस्य इरफान अली परीज़ादे ने बैठक में विधेयक का समर्थन किया, जिस पर ओवैसी और बनर्जी ने नाराजगी जाहिर की और उन्हें बाहर निकलवा दिया।

परीज़ादे का आरोप है कि ओवैसी और बनर्जी ने सुरक्षा गार्ड को इशारा किया और उन्हें धक्का देकर बाहर निकलवाया। गार्ड ने परीज़ादे से कहा, “काफिरों की मदद कर रहे हो, तुम्हें देख लेंगे।” इसके बाद परीज़ादे ने मुंबई एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में ओवैसी और बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। आरोप है कि दोनों नेताओं ने धार्मिक घृणा पैदा करने और धमकाने की कोशिश की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 115(2) और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक का उद्देश्य वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर विभिन्न विचार-विमर्श करना था। बैठक में मुस्लिम विद्वानों, बुद्धिजीवियों और कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और विधेयक पर अपनी आपत्तियां दर्ज करवाई। कई संगठनों और मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने इस विधेयक का जोरदार विरोध किया, जिसके चलते JPC के सदस्यों और उपस्थित संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

इसी दौरान, एक विवाद खड़ा हुआ जिसमें गुलशन फाउंडेशन के सदस्य इरफान अली परीज़ादे ने इस विधेयक का समर्थन किया। उनकी इस राय के बाद, बैठक में उपस्थित AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने उन्हें बैठक से बाहर निकालने का इशारा किया।

इरफान अली परीज़ादे ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्हें वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 के बारे में बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। उनके साथ गुलशन फाउंडेशन के चेयरमैन जमशिद खान भी मौजूद थे। जब विभिन्न संस्थानों के लोग अपनी राय दे रहे थे, तब परीज़ादे ने भी विधेयक का समर्थन किया। इस पर, असदुद्दीन ओवैसी और कल्याण बनर्जी ने सुरक्षा गार्ड के जरिए उन्हें धक्का देकर बाहर निकलवा दिया। परीज़ादे ने आरोप लगाया कि सुरक्षा गार्ड ने उन्हें धक्का देने के साथ यह भी कहा, “काफिरों की मदद कर रहे हो, तुम्हें देख लेंगे।”

परीज़ादे ने यह भी आरोप लगाया कि यह पूरी घटना धार्मिक घृणा फैलाने और धमकाने का प्रयास था। इसके बाद उन्होंने ओवैसी और बनर्जी के खिलाफ धार्मिक विद्वेष फैलाने और धमकाने के आरोप में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 115(2) और 351(2) के तहत दोनों नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

इस बैठक का आयोजन संयुक्त संसदीय समिति (JPC) द्वारा किया गया था, जिसका उद्देश्य वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर विभिन्न समुदायों, कानूनी विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों से प्रतिक्रिया एकत्र करना था। बैठक में पाँच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्ड सदस्यों और समुदाय के प्रतिनिधियों की भागीदारी थी, ताकि विधेयक को व्यापक दृष्टिकोण से सुधारा जा सके। हालाँकि, बैठक में शामिल गुलशन फाउंडेशन के प्रतिनिधियों द्वारा विधेयक का समर्थन किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया, जो बैठक में शामिल अन्य मुस्लिम संगठनों और JPC सदस्यों के लिए असहज स्थिति पैदा कर गया।

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर पहले से ही कई मुस्लिम संगठनों और उनके प्रतिनिधियों ने अपनी असहमति जताई है। उनका कहना है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ है और इससे उनके धार्मिक और सामाजिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। दूसरी ओर, गुलशन फाउंडेशन जैसे कुछ संगठन इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, जिनका मानना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और प्रशासन के लिए आवश्यक है।

दरगाह-कब्रिस्तान बचाना है, बुलडोजर आए तो सामने लेट जाना: मुस्लिमों को कॉन्ग्रेस MLA ने भड़काया, सोमनाथ मंदिर के पास अवैध कब्जों पर कार्रवाई रोकने का बनाया था प्लान

कुछ दिन पहले गुजरात सरकार ने सोमनाथ मंदिर की जमीन पर हुए कथित लैंड जिहाद के खिलाफ के बड़ा अभियान चलाया था, तब प्रशासन ने बुलडोजर चला कर करोड़ों रुपए कीमत की सरकारी जमीन खाली करवाई थी। अवैध तौर पर बनी मस्जिदों, दरगाहों व मजारों पर यह कार्रवाई लगभग 1 महीने की जाँच के बाद शुरू की थी। अब कॉन्ग्रेस पार्टी इस एक्शन के विरोध में उतर आई है। शनिवार (28 सितंबर 2024) को गुजरात के एक बड़े कॉन्ग्रेसी ने प्रशासनिक कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन बताया है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान विधायक अमित चावड़ा ने अवैध इबादतगाहों को तोड़ने का विरोध अपने X हैंडल के जरिए जारी बयान से किया है। शनिवार को उन्होंने मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा, “विकास के नाम पर बुलडोज़र की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है। वेरावल में सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बावजूद शासकों के द्वारा धार्मिक स्थानों, घरों पर बुलडोज़र चला के डर -भय का शासन प्रस्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। शासकों द्वारा संविधान को तार-तार कर मनमानी हो रही है।”

कॉन्ग्रेस के नेताओं ने इस कार्रवाई के बाद कब्जेदारों के बजाय सरकारी कार्रवाई में ही कमी निकालनी शुरू कर दी है। हालाँकि ध्वस्तीकरण के इस एक्शन का सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से कोई संबंध नहीं है। भले MLA अमित चावड़ा संविधान का हवाला देकर अत्याचार का रोना रो रहे हैं पर सच्चाई ये है कि वहाँ कई वर्षों से करोड़ों रुपयों की सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया था। प्रशासन का भी दावा है कि कार्रवाई एक महीने की जाँच के बाद जरूरी नियमों के तहत हुई है।

कॉन्ग्रेस MLA ने मुस्लिमों को भड़काया

लैंड जिहाद पर बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ अमित चावड़ा की ही तरह एक अन्य कॉन्ग्रेसी विधायक विमल चुस्माडा के भी विचार हैं। अवैध इबादतगाहों पर एक्शन के बाद विमल चुस्माडा मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच गए और लोगों को बुलडोजर एक्शन के खिलाफ भड़काया। कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा, “जब कोई बुलडोजर लेकर आए तो अपना मोबाइल फोन ऑन करके उसके आगे लेट जाना।”

कॉन्ग्रेस विधायक की इस भड़काऊ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि उसके साथ मौजूद मुस्लिमों की भीड़ तालियाँ बजा कर विमल चुस्माडा की वाहवाही कर रही है। विमल चुस्माडा ने मस्जिदों और दरगाहों को मंदिरो के जैसा ही बताया। उन्होंने दावा किया कि मोबाइल ऑन कर के लेटने के बाद बुलडोजर आगे नहीं बढ़ पाएगा। इसी दौरान कॉन्ग्रेस MLA ने कहा, “हमें क्या बचाना है?” इसके जवाब में सामने मौजूद भीड़ कहती है ‘दरगाह’।

लोगों की नारेबाजी को और उकसाते हुए विमल चुस्माडा ने कहा, “हमें दरगाह और कब्रिस्तान बचाना है”। कॉन्ग्रेसी ने अपने बयान में आगे हिन्दुओं को भी भड़काने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “अगर आज दरगाह को ध्वस्त कर दिया गया है तो कल मंदिर को भी गिराया जाएगा।” इन बातों के साथ कॉन्ग्रेस MLA ने खुद को हिन्दू मुस्लिम भाईचारे का पैरोकार साबित करने का प्रयास किया है।

लोगों को भड़काने के लिए कुख्यात हैं विमल चुस्माडा

यह पहली बार नहीं है कि कॉन्ग्रेस विधायक विमल चुडास्मा ने ऐसी भड़काऊ बयानबाजी की हो। कुछ समय पहले जब सोमनाथ क्षेत्र में कई अन्य अवैध कब्ज़ों को हटाया गया था तब भी उन्होंने भीड़ को भड़काने की कोशिश की थी। तब विमल चुडास्मा ने प्रशासन को ‘उल्टा’ करने के लिए धमकाया था। तब प्रशासन सोमनाथ मंदिर की मुख्य सड़क और उसके आसपास मौजूद अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई कर रहा था। विमल चुडास्मा ने प्रशासन को ‘उल्टा’ करने की धमकी दी थी।

पुडुचेरी की रम्या, कोझिकोड के सुब्रह्मण्यन, झाँसी की जल सहेली… देश को PM मोदी ने ‘स्वच्छता दूतों’ से कराया परिचित: मन की बात के 10 साल पूरे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ ने 29 सितंबर 2024 को अपने 10 साल पूरे कर लिए। यह एक ऐसा कार्यक्रम है जो 2014 में शुरू हुआ और अब यह देशभर के लाखों लोगों के दिलों में अपनी जगह बना चुका है। हर महीने के अंतिम रविवार को प्रसारित हुए इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देश के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हैं और देशवासियों से सीधे संवाद स्थापित करते हैं। इस खास मौके पर पीएम मोदी ने अपने 114वें एपिसोड में देशवासियों को धन्यवाद दिया और कहा कि इस कार्यक्रम के असली सूत्रधार देश के करोड़ों श्रोता हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात‘ एक जन आंदोलन बन चुका है, जो भारत के हर कोने से लोगों को जोड़ता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने न केवल सरकार की नीतियों को जनता तक पहुँचाया, बल्कि आम लोगों की प्रेरणादायक कहानियों को भी मंच दिया। यह कार्यक्रम हर बार नई कहानियों और उपलब्धियों को सामने लाता है, जो भारतीय समाज की विविधता और उसकी शक्ति को दर्शाता है। पीएम ने इसे “जनता का कार्यक्रम” कहा और बताया कि इसमें लोगों के प्रयास और उनकी प्रेरणा ही इसकी सफलता के पीछे का सबसे बड़ा कारण है।

इस खास मौके पर पीएम मोदी ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। सबसे पहले उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन की सफलता का जिक्र किया और बताया कि कैसे यह अभियान महात्मा गाँधी के सपनों को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर 2024 को स्वच्छ भारत मिशन के 10 साल पूरे हो रहे हैं, और यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनता के प्रयासों से सफल हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पुडुचेरी की रम्या जी जैसे लोग समुद्र तटों की सफाई में जुटे हैं और स्वच्छता को अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। इसी प्रकार, कोझिकोड के 74 वर्षीय सुब्रह्मण्यन जी का उल्लेख किया, जिन्होंने 23,000 से अधिक कुर्सियों की मरम्मत कर उन्हें पुनः उपयोगी बनाया​।

पीएम मोदी ने अपने ‘मन की बात’ के 114वें एपिसोड में झाँसी की एक महिला से भी संवाद किया। उन्होंने बताया कि झाँसी की महिलाओं ने नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में काफी काम किया है और मैं उन्हें जल सहेली कह कर संबोधित करूँगा। पीएम मोदी ने कहा कि इन महिलाओं ने स्वच्छता अभियान को बढ़ावा दिया और स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए लोगों को जागरूक किया।

पीएम मोदी ने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के सिद्धांत पर भी जोर दिया, जिसमें कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने के विचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में अब ‘रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल’ की अवधारणा लोकप्रिय हो रही है, और लोग इसे अपनाकर समाज में योगदान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छता केवल एक दिन या एक साल का अभियान नहीं है, बल्कि इसे हमें अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार, दोस्तों और साथियों के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाएं और इसे निरंतर जारी रखें​।

पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक सीमावर्ती गाँव है ‘झाला’। यहाँ के युवाओं ने अपने गाँव को स्वच्छ रखने के लिए एक विशेष पहल की है, जिसका नाम है ‘धन्यवाद प्रकृति’ या ‘थैंक यू नेचर’ अभियान। इसके अभियान के तहत गाँव में रोजाना दो घंटे सफाई की जाती है। गाँव की गलियों में बिखरे कूड़े को समेटकर, उसे गाँव के बाहर तय स्थान पर डाला जाता है। इससे झाला गांव स्वच्छ हो रहा है और लोग जागरूक भी हो रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसे ही हर गांव और मोहल्ले में ‘थैंक यू’ अभियान शुरू किया जाए, तो कितना बड़ा परिवर्तन आ सकता है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ‘धन्यवाद प्रकृति’ अभियान की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि हमें प्रकृति का आभार व्यक्त करने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान चलाना चाहिए, जिसमें हम सभी लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि हर गाँव और हर शहर में यह अभियान शुरू होना चाहिए, ताकि हम प्रकृति की रक्षा कर सकें और उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित कर सकें। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय समस्याएँ आज की दुनिया के सबसे बड़े मुद्दे हैं, और हमें इनसे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे​।

‘मन की बात’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के आम नागरिकों की कहानियों को सामने लाना और उन्हें प्रेरित करना है। पिछले 10 वर्षों में इस कार्यक्रम ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है, जिनमें छात्र, किसान, महिला, उद्यमी, और समाज के अन्य वर्ग शामिल हैं। पीएम मोदी ने बताया कि उन्हें इस कार्यक्रम के माध्यम से जो पत्र और संदेश मिलते हैं, वे उन्हें देश की वास्तविक तस्वीर दिखाते हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल देश के शहरी क्षेत्रों में, बल्कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी पैठ बनाई है, जहाँ से लोग अपनी समस्याओं, सफलताओं और विचारों को साझा करते हैं​।

पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ सिर्फ एक संवाद का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक जन आंदोलन बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्य प्रणाली को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का भी एक सशक्त माध्यम बन चुका है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम सरकारी योजनाओं का प्रचार नहीं करता, बल्कि यह आम नागरिकों की कहानियों को सामने लाने का एक मंच है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री ने समाज के अनसुने नायकों की कहानियों को प्रमुखता से सामने रखा है, जिन्होंने समाज में उल्लेखनीय योगदान दिया है​।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देश के युवाओं से भी संवाद किया और उन्हें नवाचार और उद्यमशीलता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि देश के युवा भविष्य के नेता हैं और उन्हें समाज में बदलाव लाने की दिशा में काम करना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ ने युवाओं को एक मंच दिया है, जहाँ वे अपनी सफलता की कहानियों को साझा कर सकते हैं और दूसरों को प्रेरित कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आएँ और देश के विकास में योगदान दें​।

10 साल पूरे होने के इस मौके पर पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम की सफलता का श्रेय देशवासियों को दिया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम जनता की भागीदारी से ही सफल हो पाया है। प्रधानमंत्री ने देश के हर नागरिक से आह्वान किया कि वे इस जन आंदोलन का हिस्सा बनें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ के अगले दशक में भी यह कार्यक्रम इसी प्रकार समाज को जोड़ता रहेगा और देश के हर कोने तक अपनी बात पहुँचाएगा​।

‘मन की बात’ के माध्यम से प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न मुद्दों जैसे कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, और विज्ञान एवं तकनीकी विकास पर चर्चा की है। इस कार्यक्रम ने न केवल भारतीय समाज को जागरूक किया है, बल्कि इसे एक नई दिशा भी दी है। पिछले 10 वर्षों में यह कार्यक्रम भारत के सामूहिक चेतना का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है और आगे भी यह देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

नाम- हिंदुत्व वॉच, काम- हिंदू घृणा फैलाना, चलाने वाला- रकीब अहमद… भारत में कार्रवाई हुई तो बुरा मान गया एलन मस्क का X, हाई कोर्ट से कहा- सरकारी निर्देश अनुचित

दिग्गज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि स्वयंभू घृणा अपराध (Hate Crime) ट्रैकर ‘हिंदुत्व वॉच’ के अकाउंट को ब्लॉक करने का भारत सरकार का फैसला अनुचित था। दरअसल, कश्मीरी पत्रकार रकीब हमीद द्वारा संचालित इस X अकाउंट को बंद करने पर उसने कोर्ट में इसे चुनौती दी थी। इसके बाद कोर्ट को दिए गए जवाब में X ने यह बात कही है।

कोर्ट को सौंपे गए जवाब में एक्स ने कहा कि अगर कोर्ट आदेश दे तो वह हिंदुत्व वॉच (@HindutvaWatchIn) अकाउंट को बहाल करने के लिए तैयार है। हालाँकि, उसने यह भी कहा कि रकीब हमीद की रिट याचिका एक्स के खिलाफ विचारणीय नहीं है, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म महज एक मध्यस्थ है और संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ का हिस्सा नहीं है।

सारा दोष सरकार पर डालते हुए एक्स ने कहा, “यह स्वीकार किया जाता है कि प्रतिवादी नंबर 1 (भारत सरकार) द्वारा याचिकाकर्ता (हिंदुत्व वॉच के संस्थापक रकीब हमीद) के संपूर्ण सोशल मीडिया अकाउंट को कुछ कथित आपत्तिजनक पोस्ट के आधार पर ब्लॉक करना आईटी अधिनियम की धारा 69ए के विपरीत है, अनुचित है और संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत निर्धारित सीमाओं को पार करता है।”

उसने आगे कहा, “कम अधिकार-उल्लंघन वाले दृष्टिकोण में कानून का उल्लंघन पाए जाने पर उस पोस्ट को हटाना शामिल होता है। प्रारंभिक आपत्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उत्तर देने वाला प्रतिवादी (एक्स) याचिकाकर्ता के अकाउंट को बहाल करने के उसके अनुरोध का विरोध नहीं करता है। यदि कोर्ट अकाउंट बहाल करने के लिए कहे तो वह इस आदेश का पालन करेगा।”

एक्स ने बताया कि जनवरी 2024 में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने एक नोटिस जारी किया था। इसमें कई सोशल मीडिया अकाउंट के नाम थे, जिन्हें सरकार ब्लॉक करना चाहती थी। इन सभी सोशल मीडिया अकाउंट द्वारा हिंसा भड़काने और सार्वजनिक कानून को बाधित करने अंदेशा था। इस सूची में @HindutvaWatchIn भी शामिल था।

एक्स ने कहा कि उसने इस नोटिस पर आपत्ति जताई है और दावा किया है कि ‘हिंदुत्ववॉचइन’ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (आईटी अधिनियम) की धारा 69A के तहत निर्दिष्ट आधारों के अंतर्गत नहीं आता है और MeitY ने बिना किसी आधार के पोस्ट को भड़काऊ बताया है। एक्स की आपत्ति को MeitY ने खारिज कर दिया। एक्स की आपत्ति के बावजूद MeitY ने एक ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी किया।

इसमें ‘एक्स’ को हिंदुत्ववॉचइन को ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया। एक्स ने आपत्ति पत्र के साथ जवाब दिया, जिसमें कहा गया कि ब्लॉकिंग ऑर्डर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और आईटी अधिनियम की धारा 69 ए का उल्लंघन है। एक्स ने मंत्रालय से समीक्षा समिति की सुनवाई के लिए अनुरोध किया, लेकिन MeitY ने कोई जवाब नहीं दिया।

आखिरकार X ने एक्स ने हिंदुत्व वॉच के खाते को ब्लॉक कर दिया। जब हमीद (खाताधारक) ने इसको लेकर X से सवाल किया तो उसने हमीद को बताया कि यह कार्रवाई कानूनी माँग के की जा रही है। एक्स ने यह भी कहा कि वह हमीद को और जानकारी नहीं दे सकता, क्योंकि MeitY ने एक्स को ब्लॉकिंग आदेश की सामग्री को गोपनीय रखने का निर्देश दिया था।

एक्स अकाउंट ब्लॉकिंग आदेश को इसके संस्थापक रकीब हमीद ने अप्रैल 2024 में दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। इस मामले में अब अगली सुनवाई 3 अक्टूबर 2024 को होगी। रकीब हमीद का दावा है कि उसका X अकाउंट ‘हिंदुत्व वॉच’ एक शोध पहल है, जिसका उद्देश्य भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों की रिपोर्ट की निगरानी करना है। हालाँकि, यह हैंडल हिंदुओं के खिलाफ घृणा फैलाने के लिए कुख्यात रहा है।

दुकान में काम करने वाली हिंदू महिला के घर में घुस गया नूर बख्श… लव जिहाद पर हल्द्वानी में बवाल: हिंदुओं का प्रदर्शन, सड़क पर हनुमान चालीसा पाठ

उत्तराखंड के हल्द्वानी से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक हिन्दू महिला के घर पहुँचे बाल-बच्चेदार नूर बख्स नाम के व्यक्ति पर लव जिहाद का आरोप लगा कर स्थानीय लोगों ने हंगामा किया है। आरोपित हल्द्वानी शहर का ही कारोबारी है जिसकी दुकान और घर पर हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों ने गुस्से में तोड़फोड़ की है। पीड़ित महिला नूर बख्स की दुकान में ही काम करती है। पुलिस ने नूर बख्स को हिरासत में लेकर जाँच शुरू कर दी है। घटना गुरुवार (26 सितंबर 2024) की है। प्रशासन की जाँच के में नूर बख्स का मकान भी अवैध तौर पर बना पाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हल्द्वानी के छड़ायल इलाके में नूर बख्स की मॉड्यूलर किचन की दुकान है। इसका नाम हिंदुस्तान मॉड्यूलर किचन है। दुकान में ही बने मकान में वह पिछले 4 वर्षों से अपनी बीवी और बच्चों के साथ रहता है। इसी शहर के काठगोदाम थानाक्षेत्र में रहने वाली एक हिन्दू लड़की नूर बख्स की दुकान पर नौकरी करती है। गुरुवार की रात नूर बख्स अपनी स्टाफ के घर पहुँच गया। आसपास के लोगों को इसकी भनक लग गई तो वो महिला के घर के आगे जुट गए।

उन्होंने नूर बख्स की नीयत पर सवाल उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उस पर लव जिहाद के भी आरोप लगे जिससे हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्य भी आक्रोशित हो गए। मामला बढ़ता देख कर पुलिस मौके पर पहुँची और नूर बख्स को हिरासत में ले लिया। इस बीच अगले दिन कई लोग नूर बख्स के मुखानी स्थित दुकान और घर पहुँचे। सड़क पर हनुमान चालीसा हुआ। यहाँ शुरू में नारेबाजी हुई और बाद में आक्रोशित लोगों ने आरोपित के मकान और दुकान में तोड़फोड़ शुरू कर दी। पुलिस ने हालत को बमुश्किल संभाला।

आक्रोशित भीड़ ने नूर बख्स की दुकान के बाहरी हिस्से के साथ 3 बाइकों में भी तोड़फोड़ की है। शुक्रवार को पुलिस ने नूर बख्स का शाँतिभंग की धाराओं में चालान किया है। प्रशासन ने नूर बख्स की सम्पतियों की जाँच करवाई। इस जाँच में उसके मकान के मानक पूरे नहीं पाए गए। फिलहाल आरोपित के मकान को सील कर दिया गया है। नूर बख्स का परिवार भी हल्द्वानी से कहीं और शिफ्ट हो गया है। लोगों के आक्रोश को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

इस मामले में हुए विरोध प्रदर्शन में कई महिलाएँ भी शामिल हुईं। उनका कहना है कि उन्हें आते-जाते छेड़ा जाता है और अश्लील फब्तियाँ कसी जाती हैं। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझा कर शांत किया। इस हंगामे की वजह से शहर में काफी समय तक अफरातफरी जैसे हालत बने रहे। नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पी एन मीणा ने कहा कि शहर का माहौल खराब करने वालों को चिन्हित करके कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने तोड़फोड़ व हिंसक गतिविधियाँ करने वालों को भी चिन्हित कर के एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।

1 किलोमीटर दौड़ा कर महिला ने पकड़ा नूर को

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में स्थानीय गौरक्षक जोगिंदर सिंह राणा उर्फ़ जोगी से बात की। जोगी ने हमको बताया कि नूर बख्स पिछले लम्बे समय से हिन्दू लड़की के घर आ रहा था। लड़की की उम्र 21 साल है। इतनी ही उम्र नूर बख्स की बेटी की भी है। शुरू में आसपास की महिलाओं ने समझा कि कोई मैकेनिक आदि है लेकिन गुरुवार को उससे पूछताछ की कोशिश हुई।

जब स्थानीय महिलाएँ एकजुट हुईं तो नूर बख्स अपनी कार छोड़ कर भागने लगा। नूर बख्स को भागते देख कर आसपास की महिलाओं ने उसको दौड़ाना शुरू कर दिया। जोगिंदर राणा ने आगे बताया कि एक हिन्दू महिला लगभग 1 किलोमीटर तक नूर बख्स को खदेड़ती चली गई। आखिरकार आसपास के लोग जुटे और उन्होंने नूर बख्स को दबोच लिया। उसकी पिटाई करके पुलिस के हवाले कर दिया गया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

लेबनान में ढेर हुआ आतंकी सरगना नसरल्लाह, गमजदा हो गईं जम्मू-कश्मीर की महबूबा, चुनाव प्रचार रोका: ईरान से बोले नेतन्याहू- कहीं भी पहुँच सकता है इजरायल

हिज्बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की मौत के बाद इज़रायल और ईरान के बीच तनाव और गहराता जा रहा है। इस घटना ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नसरल्लाह की मौत को एक बड़ी सफलता बताते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि इज़रायल कहीं भी पहुँच सकता है।

नेतन्याहू ने कहा, “यह इज़रायल की ताकत का सबूत है, और हमारे दुश्मनों को सावधान रहना चाहिए कि हम अपने दुश्मनों को जहाँ भी हो, निशाना बना सकते हैं। ईरान का कोई भी हिस्सा हमारी पहुँच से बाहर नहीं है।”

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने मुसलमानों से इज़रायल का विरोध करने की अपील की है। उन्होंने इस घटना को “जिहाद का आह्वान” बताते हुए कहा कि मुसलमानों को एकजुट होकर इज़रायल के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। इस बयान के बाद ईरान और उसके समर्थक गुटों में नाराजगी और रोष फैल गया है, और ईरान-इज़रायल संबंधों में तनाव तेजी से बढ़ा है। ईरान ने इस्लामिक सहयोग संगठन (IOC) की आपातकालीन बैठक भी बुलाने की बात कही है। यही नहीं, ईरान ने खुलकर कहा है कि वो हिज्बुल्लाह का पूरा समर्थन करता रहेगा। इस बीच, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सुरक्षित जगह ले जाया गया है।

पीडीपी की मुखिया ने चुनाव प्रचार रोका

इस तनाव का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। भारत में, खासकर जम्मू-कश्मीर में, इस्लामिक कट्टरपंथी झुकाव वाली पार्टियों में इस घटना को लेकर सहानुभूति और विरोध दोनों ही देखने को मिल रहे हैं। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने नसरल्लाह की मौत पर शोक जताते हुए अपना चुनाव प्रचार भी स्थगित कर दिया है। महबूबा ने कहा कि “यह समय शांति और संवेदना का है, न कि राजनीति का।” महबूबा मुफ्ती ने नरसल्लाह की मौत को बलिदान करार दिया है।

हालाँकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत सरकार की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं है। भारत ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन यह साफ है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर भारत के भीतर भी हो सकता है, खासकर धार्मिक और राजनीतिक मोर्चों पर। महबूबा मुफ्ती का चुनाव प्रचार स्थगित करना और कट्टरपंथी गुटों की प्रतिक्रियाएं इस बात का संकेत हैं कि यह मामला भारत के भीतर एक संवेदनशील मुद्दा बन सकता है।

बता दें कि भारत में इज़रायल और ईरान दोनों के साथ अच्छे कूटनीतिक संबंध रहे हैं। इज़रायल भारत का महत्वपूर्ण सैन्य और तकनीकी साझेदार है, जबकि ईरान भारत के लिए ऊर्जा और व्यापार के संदर्भ में एक अहम देश है। ऐसे में, भारत के लिए इन दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को संतुलित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

10 साल की उम्र में गलती से भारत में घुसा फिर भी बना रहा ‘मुसलमान’, 22 साल बाद पाकिस्तान लौटा तो अपने भी कह रहे ‘काफिर’: सिराज मुहम्मद की कहानी फिल्मी है, पर सच्ची है

10 साल की उम्र में एक लड़का गलती से गलत ट्रेन पकड़कर भारत आ गया था। यहाँ आकर वो करीबन 22 साल रहा। यहाँ उसने शादी की, उसके बच्चे हुए, एक परिवार: बना। इसके बाद उसने सोची कि क्यों न सबको लेकर अपने ही मुल्क चला जाए। उसने लौटने का फैसला किया। लेकिन उस समय उसे ये नहीं पता था जिस जगह को वो अपना समझकर जा रहा है वहाँ उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाएगा।

हम बात कर रहे हैं कि 38 साल के सिराज मुहम्मद खान की जिनकी कहानी हाल में पाकिस्तानी समाचार पोर्टल डॉन पर प्रकाशित हुई है। सिराज खान पिछले छह साल से खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत के बट्टाग्राम में एक किराए के कमरे में रहता है। उसकी बीवी और तीन बच्चे हैं। सिराज के पास पाकिस्तानी पहचान है लेकिन उसका परिवार भारतीय है।

सिराज बताते हैं कि उनका जन्म 1986 में मनसेहरा जिले के बाहपी इलाके कोंश घाटी के शरकूल गाँव में हुआ था। वह 1996 में 10 साल की उम्र में बस में सवार होकर लाहौर पहुँचे और बस टर्मिनल से रेलवे स्टेशन तक पैदल चलकर एक ट्रेन में चढ़ गए। उन्हें लगा कि वह ट्रेन उन्हें कराची लेकर जाएगी लेकिन वो ट्रेन समझौता एक्सप्रेस थी जिसमें चढ़ वह भारत पहुँच गए। छोटा बच्चा होने के नाते उस समय उन्हें इमीग्रेशन की सख्त प्रक्रिया से भी नहीं गुजरना पड़ा।

वह भारत पहुँचे ये सोचकर कि वो कराची आ गए। धीरे-धीरे समझ आया कि ये कराची नहीं भारत है। वह घबराए, रास्ते में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन लोग अच्छे मिले तो मुश्किलें इतनी बड़ी नहीं लगीं। कहीं किसी ने उन्हें पैसे देकर दिल्ली से मुंबई जाने को कहा, तो किसी ने उन्हें अहमदाबाद के आश्रय स्थान तक पहुँचा दिया। उनकी पहचान के लिए उन्हें शिमला से कश्मीर तक ले जाया गया। उनके बताए पते पर चिट्ठियाँ भेजी गईं और भी बहुत कुछ हुआ।

सिराज ने भारत में रहकर छोटे-मोटे काम करते हुए अपना गुजारा शुरू किया। फिर तनख्वाह आने पर उन्होंने मुबंई के विजय नगर झुग्गी में कमरा किराए पर लिया। यहाँ उनकी मुलाकात साजिदा से हुई। दोनों ने 2005 में शादी की। पहले उन्हें एक बेटी हुई फिर 2010 में दो जुड़वा लड़के।

इस तरह सिराज ने भारत में अपना पूरा परिवार बनाया। उनके बच्चों के जन्म के साथ उन्होंने भारत में नागरिकता के लिए आवेदन किया। धीरे-धीरे उन्हें आधार, राशन और मतदाता कार्ड सब मिल गया। 2009 में उन्हें भारत की नागरिकता मिल गई।

सब ठीक था, मगर सिराज को ये लगने लगा कि जब उनका असली परिवार पाकिस्तान में है तो वो इस परिवार को उनसे दूर क्यों रखे। वह प्रवर्तन निदेशालय के पास गए। कहानी सुनाई और पाकिस्तान जाने की इच्छा रखी। शुरू में तो उन्हें कानून के तहत अवैध रूप से भारत आने पर पकड़कर जेल में रख दिया गया, लेकिन बाद में किसी तरह वो पाकिस्तान पहुँचे। सीमा पार करने के बाद उनसे पूछताछ हुई उन्हें उनके घर जाने की इजाजत मिली। बस में बैठ उन्होंने सोचा कि शायद कुछ ठीक हो, मगर ठीक होने की बजाए चीजें बिगड़ गईं।

दरअसल, करीबन 22 साल बाद सिराज घर लौटे तो उनके परिजन उन्हें देख खुश नहीं हुए। उलटा भाई ने तो ये कह दिया कि वो प्रॉपर्टी के लिए लौटे हैं। उन्हें उनके अम्मी-अब्बा संदेह की नजर से देखने लगे। उन्हें जासूस, हिंदू और काफिर कहा जाने लगा। उनकी हालत ऐसी कर दी गई कि उन्हें पाकिस्तान लौटने पर पछतावा होने लगा।

इसी बीच उनका परिवार उनसे मिलने वीजा लेकर पाकिस्तान आया। मगर साजिदा के साथ तो सिराज से भी बद्तर हुआ। साजिदा ने बताया कि वहाँ लोग साजिदा के रंग रूप को लेकर गंदी टिप्पणी करते थे। साजिदा ने दुखी होकर कहा कि लोग कहते रहते हैं कि भारत में मुसलमानों के लिए रहना मुश्किल है लेकिन हकीकत यह है कि यहाँ कभी उन्होंने ऐसी नफरत नहीं झेली जैसी पाकिस्तान में झेली। उनके बच्चों को स्कूल में बहिष्कृत किया गया, हर बार मजाक उड़ाया गया। डर से पूरा परिवार एक कमरे में रह था क्योंकि उन्हें लगता था कि उनके साथ इससे भी बुरा हो सकता है।

हालात इतने बुरे हो गए कि साजिदा को घर लौटना पड़ा। उन्होंने पाकिस्तान में अपने अनुभव को नरक जैसा बताया। बाद में बच्चों को देखते हुए उन्हें दोबारा सिराज के पास जाना पड़ा। अब उनका परिवार एक है लेकिन पाकिस्तान में उनके परिवार के वीजा एक्सटेंशन करवाने के लिए रिश्वत माँगी जा रही हैं। उन्हें कुछ नहीं समझ आ रहा कि वो क्या करें और कैसे उस परिवार के साथ रहें जिसे उन्होंने भारत में बनाया था।

कैंसर इलाज के लिए ‘मेडिकल वीजा’ पर भारत आया, उपचार की जगह देख रहा था क्रिकेट मैच: कानपुर में पिटाई का लगाया झूठा आरोप, बांग्लादेश भेजा गया टाइगर रोबी

कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में बांग्लादेश और भारत के बीच टेस्ट मैच के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया था, जिसमें बांग्लादेशी क्रिकेट फैन, रबी-उल-इस्लाम उर्फ़ टाइगर रोबी ने मारपीट का आरोप लगाया था। अब पता चला है कि वो मेडिकल वीज़ा पर भारत आया था, उसे वीज़ा नियमों के उल्लंघन के आरोप में भारत से डिपोर्ट कर दिया गया। साथ ही, भारत सरकार ने उस पर 5 साल का वीजा प्रतिबंध भी लगा दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाइगर रोबी, जो मेटास्टेटिक कैंसर से पीड़ित था, मेडिकल उपचार के लिए भारत आया था। उसने कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज कराने का दावा किया था, परंतु वह देश में क्रिकेट मैच देखने के उद्देश्य से विभिन्न शहरों में घूमता रहा। उसने चेन्नई में बांग्लादेश क्रिकेट टीम का समर्थन किया और फिर कानपुर टेस्ट मैच के लिए वहां पहुंच गया। हालांकि, उसने अपने वीजा की शर्तों के तहत कोई भी मेडिकल टेस्ट नहीं कराया।

शुक्रवार (27 सितंबर 2024) को कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में रोबी बांग्लादेशी झंडे के साथ देखा गया। इस दौरान उसने भारत के कुछ प्रशंसकों पर मारपीट का आरोप भी लगाया, जिसे बाद में उसने खुद ही खारिज कर दिया। रोबी ने पहले दावा किया था कि उसे स्टेडियम के अंदर सुरक्षा कर्मियों द्वारा मारा-पीटा गया था। हालाँकि, जब उसे अस्पताल ले जाया गया और उसका इलाज किया गया। इसके बाद उसने अपना बयान बदल दिया और कहा कि उसकी तबीयत सिर्फ खराब थी और किसी ने उसे नहीं मारा।

वापस बांग्लादेश किया गया डिपोर्ट, 5 साल का बैन लगा

पुलिस द्वारा की गई जाँच में यह पाया गया कि टाइगर रोबी भारत में मेडिकल वीजा पर आया था, लेकिन उसने वीजा की शर्तों का दुरुपयोग किया। अधिकारियों ने बताया कि उसके पास भारत आने का असली मकसद इलाज करवाना था, लेकिन उसने इसका इस्तेमाल क्रिकेट मैच देखने के लिए किया। कानपुर पुलिस ने शनिवार को उसे दिल्ली की फ्लाइट में बैठाया, जहाँ से उसे ढाका भेजा गया।

पुलिस अधिकारी, एडीसीपी (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि रोबी की हालत खराब हो गई थी, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उसकी तबीयत में सुधार हुआ, लेकिन उसकी सच्चाई जानने के बाद उसे देश छोड़ने के लिए बाध्य किया गया। भारत में वीजा नियमों का उल्लंघन करने के कारण टाइगर रोबी पर 5 साल का प्रतिबंध लगाया गया है। उसे अब आने वाले समय में भारत आने की अनुमति नहीं होगी।

अब केवल गुलाम कश्मीर (PoK) वापस लेना है: संयुक्त राष्ट्र से जयशंकर ने दुनिया को बताया मोदी सरकार का इरादा, कहा- अपने कर्मों का फल भोग रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGC) में कश्मीर का मसला उठाने के बाद भारत ने करारा दिया है। पहले तो संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिनिधि भाविका मंगलनंदन ने पाकिस्तान को उसको हैसियत याद दिलाई और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चेतावनी भी दे दी है। उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के बीच सुलझाया जाने वाला मुद्दा केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) को वापस लेना है।

अमेरिका के न्यूयॉर्क में 79वें UNGC को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, “हमने कल इसी मंच से कुछ विचित्र बातें सुनीं। मैं भारत की स्थिति को स्पष्ट कर दूँ कि पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की नीति कभी सफल नहीं होगी और उसे दंड से बचने की कोई उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए। इसके विपरीत, कार्रवाई के निश्चित रूप से परिणाम होंगे।”

पूर्व विदेश सचिव रह चुके सुब्रमण्यम जयशंकर (एस जयशंकर) ने कश्मीर नीति और आतंकवाद को लेकर भारत का रूख स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारे बीच सुलझाया जाने वाला मुद्दा केवल पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना और आतंकवाद के साथ पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे लगाव को त्यागना है।”

पाकिस्तान की अपनी धरती पर ‘आतंकवादियों को पनाह देने’ की नीति के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “कई देश अपने नियंत्रण से परे की परिस्थितियों के कारण पीछे छूट जाते हैं, लेकिन कुछ देश जानबूझकर ऐसे फैसले लेते हैं जिनके परिणाम विनाशकारी होते हैं। इसका एक बेहतरीन उदाहरण हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है। दुर्भाग्य से, उनके कुकृत्यों का असर दूसरों पर भी पड़ता है, खासकर पड़ोस पर।”

उन्होंने कहा, “जब राजनीति अपने लोगों में इस तरह की कट्टरता भरती है तो इसकी जीडीपी को सिर्फ कट्टरपंथ और आतंकवाद के निर्यात के रूप में मापा जा सकता है। आज हम देखते हैं कि दूसरों पर जो बुराइयाँ लाने की कोशिश की गई थी, वे उसके अपने समाज को निगल रही हैं। यह दुनिया को दोष नहीं दे सकते। यह केवल उनका कर्म है।”

पाकिस्तानी पीएम ने कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन की थी

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने UNGC में बोलते हुए कश्मीर में भारत सरकार की कार्रवाई की आलोचना की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने जम्मू-कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से की है। शहबाज शरीफ ने कहा था, “फिलिस्तीन के लोगों की तरह जम्मू और कश्मीर के लोगों ने भी अपनी स्वतंत्रता और आत्म-निर्णय के अधिकार के लिए एक सदी तक संघर्ष किया है।”

शहबाज शरीफ ने यह आशंका जताई कि अगर पाकिस्तान किसी तरह का दुस्साहस करने की सोचता है तो भारत उसे छोड़ेगा नहीं है। भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के नेतृत्व ने ‘नियंत्रण रेखा पार करने की धमकी’ दी है। हालाँकि उन्होंने अपनी कमजोर छिपाते हुए कहा कि पाकिस्तान जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस भारत की ओर से जवाब देते हुए भारतीय राजनयिक भाविका मंगलनंदन ने कहा, “पाकिस्तान ने लंबे समय से अपने पड़ोसियों के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। इसने हमारी संसद, हमारी वित्तीय राजधानी मुंबई, बाजारों और तीर्थस्थलों पर हमला किया है। यह सूची लंबी है। ऐसे देश के लिए कहीं भी हिंसा के बारे में बात करना सबसे बड़ा पाखंड है।”

आतंकवाद पर पाकिस्तान को लताड़ लगाते हुए भाविका मंगलनंदन ने कहा, “पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद के परिणाम उसे निश्चित रूप से भुगतने होंगे। यह हास्यास्पद है कि एक राष्ट्र जिसने 1971 में नरसंहार किया और जो आज भी अपने अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार करता है, वह असहिष्णुता और भय के बारे में बोलने की हिम्मत करता है।”

जातिगत आरक्षण: जरूरतमंदों को लाभ पहुँचाना उद्देश्य या फिर राजनीतिक हथियार? विभाजनकारी एजेंडे का शिकार बनने से बचना जरूरी

जब हमारे नेता जातिगत आरक्षण की बात करते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि हम उन्हें हिंदुत्व की सच्चाई याद दिलाई जाए। क्या ये नहीं सही है कि हमारी राजनीतिक व्यवस्था, जो अपने आप को भारतीय संस्कृति का रक्षक बताती है, वास्तव में वो जातिवाद को बढ़ावा दे रही है? इतिहास से छेड़छाड़ और पूर्वजों की उपाधियों को ध्वस्त करना केवल एक राजनीतिक खेल है।

हमारी सांस्कृतिक धरोहर में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहाँ हमारे पूर्वजों ने समानता एवं सामाजिक न्याय के लिए लड़ाई लड़ी। आज जब हम जातिगत आरक्षण पर बहस करते हैं तो हमें यह समझना होगा कि असली शोषण कौन कर रहा है। असली शोषित कौन कौन है? ये सब कुछ स्पष्ट होना बेहद जरूरी है, ताकि आम जनता इसके पीछे की सच्चाई समझ सके।

आज देश में जिस जातिगत आरक्षण की बात हो रही है, उसे भी समझना आवश्यक होगा कि क्या यह हमारे समाज के कमजोर वर्गों से जुड़ा मसला है, जो केवल जातिगत पहचान के आधार पर विभाजित हो गए हैं या फिर यह उन नेताओं के हित से जुड़ा मामला है, जो अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बाँटने का काम कर रहे हैं?

यह सच है कि आरक्षण की आवश्यकता है, लेकिन क्या यह सही तरीके से लागू हो रहा है? क्या इसके जरिए हम वास्तव में उन लोगों की मदद कर रहे हैं, जिनके लिए इसे हम आवश्यक मानते हैं या फिर हम एक नई जातिगत विभाजन की नींव रख रहे हैं? हमें यह सोचना होगा कि क्या हम अपने पूर्वजों के मूल्यों को भूल रहे हैं?

हमें सोचना होगा कि कहीं हम अपनी पहचान को एक नए राजनीतिक एजेंडे का शिकार तो नहीं बन रहे हैं। इन बातों को ध्यान रखते हुए हमें चुप नहीं रहना चाहिए। अगर हम इतिहास को भूलेंगे और अपने पूर्वजों की छत्रियों को ध्वस्त होने देंगे तो हमारा समाज किस दिशा में बढ़ेगा? यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह मुद्दा हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे मूल्यों का मामला है।

इनके बिना हम कुछ भी नहीं है। इसलिए, साहस के साथ हमें यह प्रश्न उठाने चाहिए कि क्या यह समय नहीं है कि हम अपने नेताओं को उनकी ज़िम्मेदारियों का अहसास कराएँ? हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जातिगत आरक्षण की बहस केवल राजनीतिक हथियार न बने। जातिगत आरक्षण सकारात्मक बदलाव की ओर ले जाने वाला एक माध्यम बनना चाहिए।

समाज की भलाई के लिए हमें जागरूक रहना होगा और अपनी आवाज उठानी होगी। हिंदुत्व का असली मतलब एकता, समानता और सामाजिक न्याय है। क्या हम इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं या फिर जातिगत आरक्षण के बहाने केवल विभाजन का खेल खेलते रहेंगे? यह हम पर निर्भर करता है कि हम किस रास्ते का चयन करते हैं।