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अमेरिका में फिर से मंदिर पर हमला, लिखा- हिंदू वापस जाओ, मोदी-जयशंकर आतंकी… अमेरिकी सांसद बोले- इस घृणा अपराध के जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई

अमेरिका में फिर से हिंदू मंदिर पर हमला करने का मामला सामने आया है। ताजा घटना कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो काउंटी में बुधवार (25 सितंबर 2024) की है। पुलिस अपनी जाँच कर रही है। बताया जा रहा है कि अराजक तत्वों ने मंदिर के बाहर हिंदू विरोधी बातें बोर्ड पर लिखीं। साथ ही साथ पीएम मोदी को गाली भी लिखी। अनुमान है कि इसके पीछे खालिस्तानी तत्वों का हाथ हो सकता है।

इस हमले की जानकारी बीएपीएस पब्लिक अफेयर नाम के अकॉउंट से साझा की गई है। उन्होंने बताया- न्यूयॉर्क में मंदिर को अपवित्र करने की घटना के 10 दिन के भीतर कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में मंदिर को अपवित्र करने का काम किया गया। साथ ही घृणित नारे भी लिखे गए जिसमें ‘हिंदू वापस जाओ’ जैसी हिंदू घृणा फैलाने वाली बातें थीं।

बता दें कि ये घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दौरे के बाद सामने आई है। वीडियो में देख सकते हैं कि बोर्ड पर लिखा है- ‘मोदी और जयशंकर आतंकी हैं’ वहीं नीचे जमीन पर ‘फ$ मोदी’ लिखा हुआ है।

इस घटना के बाद सैक्रामेंटो काउंटी शेरिफ के अधिकारी ने चेतावनी देते हुए– जो किया गया है वो ऐसी चीज नहीं है जो दब जाएगी या उसे भुला दिया जाएगा। जिसने भी यह किया है उसे न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। अगर आपने किया है तो खुद सामने आ जाएँ।

इस मामले को अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भी उठाया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- “हिंदू अमेरिकियों के प्रति इस प्रकार की नफरत और बर्बरता भयावह और नैतिक रूप से गलत है। न्याय विभाग को इन घृणा अपराधों की जाँच करनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को कानून के तहत पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

न्यूयॉर्क में भी हुआ था हिंदू मंदिर पर हमला

बता दें कि इससे पहले 16 सितंबर को न्यूयॉर्क से हिंदू मंदिर पर हमले की खबर आई थी। बताया गया था कि न्यूयॉर्क के मेलविले क्षेत्र में स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर को असामाजिक तत्वों द्वारा नुकसान पहुँचाया गया था। सोशल मीडिया पर सामने आई फुटेज के अनुसार, मेलविले में हिंदू मंदिर के बाहर सड़क और प्रतीक चिह्नों पर स्प्रे पेंट से आपत्तिजनक शब्द लिखे गए थे।

बंगाल पुलिस ने थाने में बदले रिकॉर्ड, फैक्ट के साथ की छेड़छाड़: डॉक्टर की रेप-हत्या केस में CBI का खुलासा, RG Kar के पूर्व प्रिंसिपल-SHO की हिरासत बढ़ी

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज (RG Kar Medical college and hospital) में डॉक्टर से हुई रेप-हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। ये खुलासा सीबीआई ने कोर्ट में किया। सीबीआई ने बताया कि ताला पुलिस थाने में रिकॉर्ड्स के साथ न केवल छेड़छाड़ हुई थी बल्कि कुछ झूठे रिकॉर्ड भी तैयार किए गए थे।

केंद्रीय जाँच एजेंसी ने इस बाबत कोलकाता की स्पेशल कोर्ट को बताया कि उन्हें जाँच के दौरान थाने के कुछ सीसीटीवी फुटेज हाथ लगे थे जो उन्होंने जब्त करके सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब के पास भेजे हैं।

वहीं अभिजीत मंडल और संदीप घोष से पूछताछ में सामने आया कि उन लोगों ने मामले को नया मोड़ देने के लिए कुछ फर्जी बातें रिकॉर्ड में डाली थीं और जो हकीकत थी उससे छेड़छाड़ की थी।

सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने दोनों आरोपितों के मोबाइल फोन को भी डेटा निकालने के लिए सीएफएसएल भेज दिया है। इन दोनों डेटा के आधार पर अहम सबूत मिलने की संभावना है।

बता दें कि सीबीआई ने दोनों आरोपितों की रिमांड पूरी होने पर इन्हें स्पेशल कोर्ट के सामने पेश किया था, जहाँ कोर्ट ने दोबारा से इन्हें 30 सितंबर के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

इस मामले में अब तक संजय रॉय, संदीप घोष और अभिजीत मंडल की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस छानबीन कर रही है कि कहीं अपराध की साजिश में तीनों मिले हुए तो नहीं थे।

डॉक्टर रेप हत्या

गौरतलब है कि आरजी कर अस्पताल में डॉक्टर की रेप-हत्या का मामला 9 अगस्त 2024 का है। ताला थाने में उसी दिन इस घटना की सूचना सुबह 10 बजे दी गई थी लेकिन पुलिस अधिकारी ने एफआईआर रात के 11:30 बजे जाकर लिखी थी। तमाम डॉक्टर इस घटना के बाद सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने उतर आए थे। उन्होंने न्याय की गुहार लगाई थी और सबूतों से छेड़छाड़ की बात का उल्लेख किया था। वहीं मृतिका के परिजनों ने भी बताया था कि उन्हें उनकी बेटी से बहुत देर बाद जाकर मिलने दिया गया था।

विवाद बढ़ने पर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज में नजर आए संजय रॉय को घटना के कुछ समय बाद ही गिरफ्तार कर लिया था। वहीं थाना प्रभारी अभिजीत मंडल की गिरफ्तारी 14 सितंबर को हुई थी और घोष की गिरफ्तारी 15 सितंबर को। पुलिस ने दोनों से पूछताछ के बाद सीबीआई में ये खुलासे किए हैं।

नाम ‘मुंबई चलो रैली’, नारे ‘सर तन से जुदा’ के: AIMIM नेता ने जुटाए जो हुड़दंगी उनसे सड़क खाली कराने के लिए पुलिस ने किया लाठीचार्ज, FIR भी दर्ज

AIMIM के नेता सैयद मोइन और इम्तियाज जलील की अगुवाई में निकाली गई रैली के कारण शहर में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद मुंबई पुलिस ने मंगलवार (24 सितंबर) को सड़क जाम करके अराजकता फैला रहे लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने शहर के कोपरी हाईवे पर ‘रास्ता रोको’ प्रदर्शन करने के लिए AIMIM कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR भी दर्ज की है।

रिपोर्ट के अनुसार, घटना सोमवार (23 सितंबर) की रात करीब 11:30 बजे हुई। यह घटना तब हुई, जब पार्टी कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उनके नेता इम्तियाज जलील मौके पर नहीं हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके बाद इस्लामी कार्यकर्ताओं ने हाईवे पर घंटों इंतजार करते हुए अराजकता फैलाई। इसके बाद मुंबई पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसके कई वीडियो सामने आए हैं।

यह भी कहा जा रहा है कि रैली को मुलुंड चेक नाका पर रोक दिया गया और 12,000 से ज़्यादा इस्लामी प्रदर्शनकारियों को छत्रपति संभाजीनगर में अपने घरों को वापस जाने को कहा गया। मुलुंड चेक नाका पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सोमवार की रात को बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, एसीपी और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक भी मौके पर मौजूद थे।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई पुलिस ने ने जलील और उनके नेतृत्व वाली रैली को शहर में घुसने से रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की थी। पुलिस ने शहर की सभी सीमाओं पर चेक पोस्ट स्थापित किए और कहा कि AIMIM के नेता और किसी भी मुस्लिम संगठन को मुलुंड चेक पोस्ट से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

मुंबई पुलिस और ठाणे पुलिस ने कल मिलकर यह सुनिश्चित किया कि शहर की शांति को भंग करने वाले किसी भी मुस्लिम संगठन या AIMIM समूह को शहर में नहीं आने दिया जाए। हालाँकि, हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कोपरी हाईवे पर सड़कें जाम कर दीं। इसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में AIMIM ने हिंदू संत रामगिरी महाराज और भाजपा के नितेश राणे द्वारा कथित तौर पर इस्लाम विरोधी टिप्पणियों के विरोध में राज्य विधानसभा चुनाव से पहले ‘चलो मुंबई तिरंगा रैली’ का आयोजन किया था। 22 सितंबर को एक रैली AIMIM के महाराष्ट्र उपाध्यक्ष सैयद मोइन ने आयोजित की थी।

इसके अगले दिन यानी 23 सितंबर को AIMIM नेता इम्तियाज जलील ने एक और रैली आयोजित की। दोनों रैलियाँ छत्रपति संभाजीनगर से महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई तक निकाली गईं। जलील ने कल सभा के दौरान कहा कि कथित तौर पर बढ़ते जातिगत और धार्मिक विभाजन का सामना करने की तत्काल आवश्यकता है।

जलील ने कहा, “महाराष्ट्र में जाति और धर्म की दीवारें खड़ी की जा रही हैं। दंगे भड़काने की कोशिश की जा रही है। मंच पर मुसलमानों को धमकाया जा रहा है। क्या ये गैरकानूनी काम नहीं हैं? क्या कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए? मैं राणे के खिलाफ उनके भड़काऊ बयानों के लिए कई एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं होने से चिंतित हूँ।”

जलील ने आगे कहा कि उनका इरादा सीएम को यह याद दिलाना था कि यह देश संविधान के अनुसार… कानून के अनुसार काम करेगा। उन्होंने कहा, “हम ऐसा कानून चाहते हैं जो जाति या धर्म के आधार पर बयानबाजी या धार्मिक हस्तियों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी पर रोक लगाए। अगर ऐसे बयान दिए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कानून होने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि रैली शांतिपूर्ण होगी, लेकिन पहली रैली में भाग लेने वाले इस्लामवादियों ने भड़काऊ नारे लगाए और पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने वाले व्यक्ति की मौत की माँग की। दूसरी रैली में मुंबई में सड़कों को अवरुद्ध करने का प्रयास किया गया। ‘रास्ता रोको’ रैली का आयोजन करने वाले AIMIM कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

पहले अवॉर्ड दिया, फिर साथ किया डिनर… क्या जॉर्जिया मेलोनी को डेट कर रहे एलन मस्क? जानिए क्यों कहा- ये जितनी बाहर से सुंदर, उससे कहीं अधिक भीतर से…

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की हाल ही में अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने काफी प्रशंसा की। इटली की प्रधानमंत्री की प्रशंसा एलन मस्क ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में की। इसका एक वीडियो भी जॉर्जिया मेलोनी ने अपने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया।

इस वीडियो में एलन मस्क मस्क, मेलोनी के इटली में किए गए कामों और उससे आए परिणामों को बताते हैं। इसके बाद मस्क ने यह भी कहा कि मेलोनी जितनी बाहर से सुंदर हैं, उससे ज्यादा अंदर से सुंदर हैं। दोनों की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

इस तस्वीर में दोनों एक डिनर में एक साथ बैठे हैं और एक दूसरे की तरफ देख रहे हैं। यह फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। इस तस्वीर के बाद लोगों ने इस बात को लेकर चर्चा की क्या एलन मस्क और जॉर्जिया मेलोनी एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं।

एलन मस्क ने डेटिंग के इस सवाल का खुद ही जवाब दे दिया है। उन्होंने डेटिंग के कयास को लेकर एक्स पर की गई एक पोस्ट के जवाब में साफ किया कि वह डेट नहीं कर रहे। उन्होंने लिखा, “हम डेट नहीं कर रहे हैं।” उनका यह जवाब भी अब वायरल है। यह ऐसा पहला मौका नहीं है जब जॉर्जिया मेलोनी चर्चाओं में बनी हुई हैं, इससे पहले भी वह कई बार कई मामलों को लेकर इंटरनेट पर छाई रही है।

कौन हैं जॉर्जिया मेलोनी

जॉर्जिया मेलोनी का जन्म 15 जनवरी 1977 को हुआ। प्रधानमंत्री बनने से पहले वह एक इतालवी पत्रकार और पॉलिटिशियन थीं। सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के समर्थकों ने एक आंदोलन शुरू किया था। इसे इटालियन सोशल मूवमेंट नाम दिया गया था। 15 साल की उम्र में मेलोनी ने इसके यूथ विंग में काम किया। मेलोनी के पिता अकाउंटेंट थे। रोम में जन्मीं मेलोनी अंग्रेजी, स्पेनिश और फ्रेंच बोलती हैं। उनकी एक बेटी है, जिसका जन्म 2006 में हुआ।

इटली की पहली दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री 

बता दें कि जॉर्जिया मेलोनी साल 2008 में 31 साल की उम्र में इटली की सबसे युवा मंत्री बनी थीं। वहीं साल 2012 में उन्होंने ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी की स्थापना की। इसके बाद 2021 में मेलोनी की किताब आई ‘आइ एम जॉर्जिया’, जिसमें उनके विजन और विचारों पर खूब बात हुई है 

जॉर्जिया मेलोनी के बारें में एक तथ्य ये भी है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद इटली में ये पहली बार हुआ है जब राइट विंग कि कोई नेता प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठी हों। ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी की नेता मेलोनी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले ही मुस्लिम अप्रवासियों को शरण देने का खुलकर विरोध किया था और इसके साथ ही समलैंगिकों (LGBT) का भी उन्होंने जमकर विरोध किया था।

कट्टरपंथी इस्लाम, आतंकवाद और समलैंगिकता की मुखर विरोधी 

25 सितंबर, 2022 को अपनी जीत के बाद से ही मेलोनी समर्थक जहाँ खुश हैं वहीं उनके आलोचक उनकी दक्षिणपंथी ब्रदर्स ऑफ़ इटली पार्टी के उदय के बाद से ही लगातार हमले कर रहे हैं। मेलोनी जिन मुद्दों पर चुनाव जीतकर आईं थीं, उन्होंने प्रधानमंत्री बनते ही स्पष्ट कर दिया है कि वह एलजीबीटी लॉबी, जेंडर आइडियोलॉजी और कट्टरपंथी इस्लाम का विरोध करती हैं, इसके साथ अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोप की वह नव-फासीवादी हैं, उन्होंने साफ़ मना कर दिया था।

डब्बे जैसी मशीन में अमेरिकी महिला ने खुद को बंद कर मार डाला: जानिए क्या होता है ‘सुसाइड पॉड’, कैसे करता है काम, पहली डेथ के बाद क्यों हो रही गिरफ्तारी

स्विट्जरलैंड में एक महिला ने आत्महत्या करने वाली मशीन ‘सुसाइड पॉड’ में खुद को बंद करके जीवनलीला समाप्त कर ली। अब स्विटज़रलैंड की पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। इस बीच इच्छामृत्यु को लेकर बहस चालू हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्विटज़रलैंड में हाल ही में एक 64 वर्षीय अमेरिकी महिला ने ‘लास्ट रिजॉर्ट’ नाम की एक कंपनी द्वारा बनाई गई एक मशीन का इस्तेमाल किया। इसे कम्पनी ने ‘सुसाइड पॉड’ का नाम दिया है। इसके बाद उसकी मौत हो गई। उसकी मौत के कुछ दिनों बाद पुलिस ने कथित तौर 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार किए जाने वालों में इस कम्पनी की एक महिला अधिकारी और 2 पत्रकार शामिल हैं। बताया गया कि महिला ने मशीन में यह आत्महत्या स्विटज़रलैंड के दूरदराज के एक कस्बे के पास के जंगल में की। यहाँ पर गिरफ्तार की गई महिला ही केवल मौजूद थी।

जिस कम्पनी की मशीन में यह आत्महत्या की गई, उसने दावा किया है कि महिला ऐसी बीमारियों से पीड़ित थी जो सही नहीं की सकती थीं। ऐसे में उसने उसने अपना जीवन खत्म करने का रास्ता चुना और उसने इस मशीन का उपयोग किया। मशीन के उपयोग से आत्महत्या का यह पहला मामला है।

इससे पहले भी लोगों की वैध तरीके से आत्महत्या के लिए दवाइयों का उपयोग होता रहा है। इसके लिए उन्हें ऐसी दवाइयाँ दी जाती हैं जो मृत्यु देती हैं। मशीन का इस्तेमाल होने के बाद इसकी वैधता और तौर तरीके पर बहस चालू हो गई है।

क्या है यह मशीन?

अमेरिकी महिला ने जिस मशीन में बंद करके आत्महत्या की है, उसे कम्पनी ने ‘सारको’ का नाम दिया है। कम्पनी का कहना है कि यह मशीन उन लोगों के काम आएगी जो बिना पीड़ा के अपना जीवन खत्म करना चाहते हैं। इस मशीन को एक ऑस्ट्रेलियन वैज्ञानिक ने बनाया है।

कम्पनी का कहना है कि इस मशीन को वही व्यक्ति चला सकता है, जिसे आत्महत्या करनी है। किसी कैप्सूल सी दिखनी वाली इस मशीन के अंदर उस व्यक्ति को लेटना होगा और फिर बटन दबाने के बाद आत्महत्या की प्रक्रिया चालू हो जाएगी।

इस मशीन के भीतर लेटने वाले व्यक्ति जैसे ही बटन दबाता है वैसे ही इसके अंदर नाइट्रोजन गैस का तेज प्रवाह होता है। इस कारण अंदर ऑक्सीजन का स्तर लगातार घटता जाता है जिस भीतर लेटे व्यक्ति का दम घुट जाता है और उसकी मौत हो जाती है।

अभी इस मशीन को स्विटज़रलैंड में कानूनी मान्यता नहीं मिली है, ऐसा वहाँ की सरकार ने बताया है। मशीन की वकालत भी कई समूह कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे लोगों को पीड़ादायक जीवन से मुक्ति मिल सकेगी और किसी भी व्यक्ति को दूसरे की हत्या का भागी भी नहीं बनना होगा।

इच्छामृत्यु पर हो रही बहस

इस मशीन के भीतर महिला की मौत और उसके बाद लोगों की गिरफ्तारी के बीच इच्छामृत्यु को लेकर बहस हो रही है। विश्व के अधिकांश देशों में इच्छामृत्यु अवैध है। भारत में भी किसी को आत्महत्या करने का अधिकार नहीं है। हालाँकि, कई समूह इस बात की वकालत करते आए हैं कि लोगों को अपना जीवन समाप्त करने का अधिकार होना चाहिए। इनका तर्क है कि यदि कोई ऐसी समस्या में है जहाँ कोई रास्ता नहीं बचा तो उसे इच्छामृत्यु की आजादी दी जानी चाहिए।

मैदान DDA का, दावा कर रहा था वक्फ: हाई कोर्ट ने कहा- शाही ईदगाह में लगेगी झाँसी की रानी की प्रतिमा, मस्जिद कमिटी से कहा- माफी माँगो, सांप्रदायिक राजनीति मत करो

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (25 सितंबर 2024) को एकल न्यायाधीश के खिलाफ निंदनीय दलीलें देने के लिए शाही ईदगाह प्रबंध समिति को फटकार लगाई और माफी माँगने के लिए कहा। एकल न्यायाधीश ने शहर के सदर बाजार क्षेत्र में स्थित शाही ईदगाह पार्क में स्थित जगह को DDA का बताया था और ‘झाँसी की रानी’ की मूर्ति स्थापित करने के खिलाफ ईदगाह समिति की याचिका खारिज कर दी थी।

न्यायालय ने मस्जिद समिति द्वारा दायर आवेदन की कुछ पंक्तियों पर कड़ी आपत्ति जताई। उसमें एकल न्यायाधीश के उस फैसले की सत्यता पर सवाल उठाया गया था, जिसके तहत दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को शाही ईदगाह पार्क में लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति दी गई थी। दरअसल, मस्जिद समिति इस जमीन को अपना बताता है, जबकि कोर्ट ने उसे DDA का घोषित किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने इस विवाद को सांप्रदायिक रंग देने के लिए मस्जिद समिति की आलोचना की। इसके साथ ही उसने यह भी निर्देश दिया है कि ईदगाह मस्जिद समिति इस तरह के आचरण के लिए कल तक बिना शर्त माफी माँगे।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने ईदगाह मस्जिद समिति से कहा, “अदालत के माध्यम से सांप्रदायिक राजनीति खेली जा रही है! आप (मस्जिद समिति) मामले को ऐसे पेश कर रहे हैं, जैसे कि यह एक धार्मिक मुद्दा है, लेकिन यह कानून और व्यवस्था की स्थिति से संबंधित मुद्दा है।” वहीं, न्यायमूर्ति गेडेला ने कहा कि झाँसी की रानी की प्रतिमा का होना बहुत गर्व की बात है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने आगे कहा, “वह (लक्ष्मीबाई) एक राष्ट्रीय नायक हैं, जो धार्मिक सीमाओं से परे हैं। याचिकाकर्ता (मस्जिद समिति) सांप्रदायिक रेखाएँ खींच रही है और अदालत का इस्तेमाल कर रही है। सांप्रदायिक आधार पर विभाजन न करें। आपका सुझाव ही विभाजनकारी है। अगर ज़मीन आपकी थी तो आपको मूर्ति स्थापित करने के लिए स्वेच्छा से आगे आना चाहिए था!”

मस्जिद समिति के वकील ने दलील दी कि शाही ईदगाह के सामने झाँसी की रानी की मूर्ति स्थापित करने से इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली अल्पसंख्यक समिति ने यथास्थिति का आदेश दिया था। इसलिए मूर्ति स्थापित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समिति के इस आदेश को एकल न्यायाधीश के समक्ष चुनौती नहीं दी गई थी। इसलिए यह आदेश अभी भी लागू होगा।

मस्जिद समिति के वकील ने आगे तर्क दिया कि DDA और दिल्ली नगर निगम ने एक वैकल्पिक स्थल की पहचान की है, जहाँ मूर्ति स्थापित की जा सकती है। इसी दौरान DDA के वकील ने कोर्ट का ध्यान मस्जिद समिति की दलीलों में कुछ ‘निंदनीय’ पैराग्राफों की ओर आकर्षित किया। इसे कोर्ट के एकल न्यायाधीश को लेकर कहा गया था, जिन्होंने हाल ही में आदेश दिया था कि विवादित भूमि डीडीए की है।

खंडपीठ ने शाही ईदगाह प्रबंध समिति को इस तरह की दलीलें देने के लिए कल तक माफीनामा देने का आदेश दिया है। कोर्ट की फटकार के बाद समिति के वकील ने बिना शर्त माफीनामा जारी करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही उन्होंने अपनी अपील को भी वापस लेने की अनुमति माँगी। इस मामले में कोर्ट की अगली सुनवाई 27 सितंबर को है।

दरअसल, एकल न्यायाधीश के समक्ष पेश की गई अपनी याचिका में मस्जिद समिति ने कोर्ट से यह माँग की थी कि वह शाही ईदगाह पर अतिक्रमण नहीं करने के लिए निगम के अधिकारियों को निर्देश दे। उसने यह भी दावा किया था कि यह एक वक्फ संपत्ति है। मस्जिद समिति ने कहा कि साल 1970 में प्रकाशित एक राजपत्र अधिसूचना में शाही ईदगाह पार्क को मुगल काल के दौरान निर्मित बताया गया है।

याचिका में मस्जिद समिति ने आगे कहा था कि इस शाही ईदगाह परिसर का उपयोग नमाज अता करने के लिए किया जा रहा है। इसमें एक साथ 50,000 नमाजी नमाज पढ़ सकते हैं। हालाँकि, एकल न्यायाधीश ने याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि ईदगाह की सीमा के अंदर का क्षेत्र, जो पार्क या खुला मैदान है, वह DDA का है। उन्होंने यह भी कहा था कि दिल्ली वक्फ बोर्ड भी धार्मिक गतिविधियों के इस पार्क का इस्तेमाल करने के लिए अधिकृत नहीं करता है।

अब हिमाचल में भी योगी के UP का मॉडल, भोजनालय-फास्टफूड रेहड़ी पर लिखना होगा मालिक का नाम: काँवड़ यात्रा के समय आदेश को कॉन्ग्रेस ने बताया था ‘संविधान पर हमला’

हिमाचल प्रदेश में खाने-पीने की हर दुकान और रेहड़ियों पर विक्रेता का पहचान पत्र लगाया जाएगा। इससे उसकी सही पहचान का अंदाजा लोगों को हो सकेगा। खाने-पीने के सामान में शुद्धता बनी रहे, इसके लिए यह कदम उठाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश यह कदम उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उठा रहा है।

हिमाचल प्रदेश में खाने-पीने की दुकान चलाने वालों की पहचान सामने रखने के इस कदम का ऐलान हिमाचल की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने किया। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए यह ऐलान किया है। उन्होने इस संबंध में आदेश जारी करने की जानकारी भी दी है।

विक्रमादित्य सिंह ने एक पोस्ट में लिखा, “हिमाचल में भी हर भोजनालय और फास्टफूड रेहड़ी पर ओनर की ID लगाई जाएगी, ताकि लोगों को किसी भी तरीक़े की परेशानी न हो। इसके लिए कल ही शहरी विकास एवं नगर निगम बैठक में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।”

हिमाचल प्रदेश में यह कदम उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के बाद सामने आया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाल ही में आदेश दिया है कि होटल-रेस्टोरेंट, ढाबों और दुकानों पर मालिक और मैनेजर का नाम और उनका पता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा सरकार ने आदेश दिया है कि रेस्टोरेंट-होटल में सब कहीं CCTV भी लगाए जाएँ।

सरकार ने कहा है कि इस CCTV फीड को मालिकों को सुरक्षित रखना होगा और माँगने पर पुलिस को दिखाना भी होगा। योगी सरकार ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि ढाबे-होटल पर काम करने वाले हर कर्मचारी का पुलिस सत्यापन भी करवाना होगा। योगी सरकार ने साफ-सफाई बरतने के विशेष ध्यान दिए हैं।

योगी सरकार ने यह आदेश खाने-पीने के सामान में मिलावट की हालिया घटनाओं को लेकर उठाए हैं। योगी सरकार ने इससे पहले काँवड यात्रा के दौरान भी श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने की शुद्धता बनाए रखने के लिए नियम बनाए थे। योगी सरकार के इस आदेश को लेकर कॉन्ग्रेस ने भी खूब हल्ला किया था।

योगी सरकार के इस निर्णय को लेकर कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने भी हमला बोला था। कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने दुकानों पर नाम लिखने के आदेश को विभाजनकारी और संविधान पर हमला करार दे दिया था। उन्होंने इस आदेश को वापस लेने की माँग की थी। हालाँकि, अब हिमाचल में कॉन्ग्रेस सरकार ने ऐसा ही निर्णय लागू कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश में भी यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य में अवैध मस्जिदों और बाहर से अवैध रूप से आने वाले मुस्लिमों को लेकर गुस्सा है। यह विवाद शिमला की संजौली मस्जिद से चालू होकर पूरे राज्य में फ़ैल चुका है। हिन्दू संगठन लगातार अवैध मस्जिदों और पहचान को लकर गड़बड़ियो को उजागर कर रहे हैं।

‘मुस्लिम आक्रांताओं ने लूटे मंदिर, अब वही काम कर रही हिंदू विरोधी सरकारें’: मुक्ति के लिए आंदोलन करेगी VHP, कहा- साधु-संतों के करो हवाले

आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर के प्रसाद में जानवरों की चर्बी मिलने का बाद देश भर के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की आवाज उठने लगी है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मंगलवार (24 सितंबर) को कहा कि जब अल्पसंख्यक अपने संस्थान और धार्मिक स्थलों का खुद प्रबंधन कर सकते हैं तो हिंदू क्यों नहीं कर सकते। इसके लिए उसने आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए विहिप राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाएगी। संबोधित करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकारें मंदिरों को हिंदू समाज को नहीं सौंपती हैं, तो संगठन अदालत का भी दरवाजा खटखटाएगा। विहिप ने कहा कि मंदिरों का सरकारीकरण नहीं, बल्कि समाजीकरण होना चाहिए।

जैन ने कहा कि देश के मंदिरों पर अपना नियंत्रण हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को भड़काने के साथ-साथ संविधान की आड़ में धोखाधड़ी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का अधिग्रहण करके सरकारें संंविधान की धारा 12, 25 और 26 खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट कई बार कह चुका है कि सरकारों को मंदिरों के संचालन एवं उनकी संपत्ति की व्यवस्था से अलग रहना चाहिए।

उन्होंने विभिन्न सरकारों से पूछा कि आजादी के 77 सालों के बाद भी हिंदुओं को उनके धार्मिक स्थलों को संचालित करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है। मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा मंदिरों को लूटने और अंग्रेजों द्वारा उन पर कपट से नियंत्रण करने की बात कहते हुए सुरेंद्र जैन ने कहा कि औपनिवेशिक व्यवस्था को बनाए रखकर सरकारें मंदिरों को लूट रही हैं।

सुरेंद्र जैन ने कहा कि तमिलनाडु में 400 से अधिक मंदिरों पर कब्जा करके वहाँ की हिंदू विरोधी सरकार उसे मनमाने ढंग से लूट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहाँ के कई मंदिरों में विशाल चढ़ावे आने के बाद भी उन मंदिरों को घाटे में दिखाया जाता है। इसके कारण वहाँ पूजा सामग्री आदि की उचित व्यवस्था तक नहीं हो पाती है। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार की लूटने वाली प्रवृत्ति बताई।

राजस्थान की पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकार की हरकतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय ने जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देवजी मंदिर से 9.82 करोड़ रुपए निकालकर ईदगाह को दिए थे। इतना ही नहीं, विहिप नेता ने आंध्र प्रदेश द्वारा स्थापित बोर्ड के द्वारा संचालित तिरुपति मंदिर से राशि निकालकर धर्मांतरण करने वाली संस्थाओं को अनुदान देने का भी आरोप लगाया।

सुरेंद्र जैन ने कहा कि हिंदू मंदिरों की संपत्ति और उनकी आय का उपयोग मंदिरों के विकास और हिंदुओं के धार्मिक कार्यों के लिए होना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि ‘हिंदू आस्था की संपत्ति हिंदू कार्यों के लिए’ उपयोग होना चाहिए। उन्होंने तिरुपति मंदिर में मिलने वाले महाप्रसाद में जानवरों की चर्बी मिलने की बात हिंदुओं की श्रद्धा एवं आस्था पर घनघोर चोट पहुँचाई है।

जैन ने कहा कि राज्य सरकारों को अपने कब्जे में लिए मंदिरों को अविलंब अपने अवैधानिक एवं अनैतिक नियंत्रण से मुक्त करना चाहिए। विहिप ने कहा कि एक व्यवस्था के तहत इन मंदिरों को साधु संतों के हवाले कर देना चाहिए। जैन का कहना है कि इसके लिए साधु-संतों ने एक प्रारूप बनाया गया है, जिसका इस्तेमाल कई जगहों पर किया जा रहा है। इन मंदिरों में भी यही प्रारूप अपनाया जाना चाहिए।

जियारत के बहाने आते हैं, माँगने लगते हैं भीख: जानिए ‘उमराह वीजा’ के नाम पर चल रहा कैसा फ्रॉड, क्यों पाकिस्तानी भिखारी बने सऊदी अरब के लिए सिरदर्द

सऊदी अरब ने अपने यहाँ बढ़ती भिखारियों की संख्या को लेकर पाकिस्तान को चेताया है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह उमराह के बहाने बड़ी संख्या में भिखारी ना भेजे। सऊदी अरब के अधिकारियों ने कहा है कि अगर पाकिस्तान इस पर जल्द एक्शन नहीं लेता तो इससे दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो सकते हैं। यदि भिखारी बढ़ते रहे तो पाकिस्तानियों के हज और उमरा करने को लेकर भी एक्शन लिया जा सकता है, सऊदी अरब सरकार ने इस बात की धमकी भी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब के हज मंत्रालय ने पाकिस्तान के धार्मिक मंत्रालय के मामलों से कहा है कि वह उमराह के लिए दिए गए वीजा के सहारे सऊदी में घुसने वाली भिखारियों को लेकर कुछ एक्शन ले। उमरा पूरे साल चलने वाली यात्रा है जबकि हज कुछ ही दिनों का कार्यक्रम होता है।

पाकिस्तान ने इसके बाद भिखारियों को रोकने के लिए उमराह एक्ट लाने की योजना बनाई है। यह उमराह एक्ट पाकिस्तान का धार्मिक मामलों का मंत्रालय लाएगा। मंत्रालय इस एक्ट के जरिए किसी पाकिस्तानी के उमराह करने और उमराह तथा हज करवाने वाली एजेंसियों को लेकर नियम कड़े कर देगा। उसने सरकार से अपील की है कि वह भी इस संबंध में एक्शन ले।

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सऊदी अरब के राजदूत नवाफ बिन सईद अहमद अल-मल्की को आश्वासन दिया है कि सऊदी अरब में भिखारियों को भेजने वाले आपराधिक गैंग के खिलाफ कड़े एक्शन लिए जाएँगे। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने इन गैंग की जाँच केन्द्रीय जाँच एजेंसी (FIA) को सौंप दी है।

अब FIA उन गैंग को ढूंढ कर कार्रवाई करेगी जो भिखारियों को उमराह के बहाने अवैध रूप सऊदी अरब के भीतर भेजते हैं। सऊदी अरब भी इस संबंध में एक्शन ले चुका है। उसने हाल ही में बिना अनुमति के हज करने वालों पर 10,000 रियाल (₹2.2 लाख) का जुर्माना लगाने का ऐलान किया था।

क्या होता है उमराह वीजा

सऊदी अरब में मक्का और मदीना स्थित हैं जिनकी यात्रा पूरे विश्व के मुस्लिम करते हैं। हज यात्रा जहाँ साल में एक बार निश्चित समय के लिए होती है तो वहीं उमराह पूरे साल चलता है। हज के सऊदी अरब ने हर देश का कोटा भी तय किया हुआ है। इस कर्ण इसके वीजा निश्चित होते हैं।

वहीं उमराह के लिए साल भर वीजा मिलते हैं। पाकिस्तान के कई गैंग ने इसका फायदा उठा कर भिखारियों को सऊदी अरब भेजना चालू कर दिया। सऊदी अरब जाने वाले यह भिखारी उमराह सहारे भेजे जाते हैं और फिर यह वहाँ बैठ कर भीख माँगते हैं। सऊदी अरब के लोग इनसे आतंकित हो चुके हैं और सरकार इन पर एक्शन लेना चाह रही है।

2000 भिखारियों के पासपोर्ट ब्लॉक

इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने 2000 से ज़्यादा भिखारियों के पासपोर्ट ब्लॉक करने का फ़ैसला किया था। डॉन टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के अधिकारियों ने फ़ैसला किया है कि विदेश में भीख माँगने वाले उनके नागरिकों का पासपोर्ट सात साल के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।

2023 में FIA ने मुल्तान के हवाई अड्डे पर सऊदी अरब जाने वाली एक उड़ान से 16 भिखारियों को उतारा था। इस भिखारी गैंग में 11 महिलाएँ, 4 पुरुष और 1 बच्चा शामिल था। इन लोगों ने उमराह करने का नाटक किया था। यह सभी उमराह का वीजा हासिल कर चुके थे।

इन सभी ने यह खुलासा भी किया था कि सऊदी अरब में जितनी अवह भीख मांगते, उसका आधा हिस्सा वह उस ट्रैवल एजेंसी को देते, जो उन्हें सऊदी अरब भेज रही है। कई मामलों में सऊदी अरब में भीख माँगने वाले 90% भिखारी पाकिस्तानी निकले हैं। पाकिस्तान के भिखारियों से मात्र सऊदी अरब अरब ही नहीं बल्कि बाकी खाड़ी देश भी परेशान हैं।

भिखारी ही नहीं कामगार भी परेशानी

सिर्फ भिखारी ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी कामगार भी खाड़ी देशों में परेशानी का सबब बने हैं। सऊदी अरब और UAE ने यह मुद्दा पाकिस्तान के साथ उठाया था। यह भी सामने आया था कि UAE के भीतर होने वाले 50% अपराध पाकिस्तानी कर रहे हैं। यह सरे खुलासे एक पाकिस्तानी संसदीय कमिटी के सामने हुए थे।

कमेटी को बताया गया था कि UAE जैसे देश पाकिस्तान से आने वाले कामगारों से कतई खुश नहीं हैं और वह अब पाकिस्तानियों को काम के लिए बुलाने की जगह बांग्लादेश जैसे जगहों के लोगों को तरजीह दे रहे हैं। पाकिस्तानी UAE के भीतर बदतमीजी भी करते हैं। UAE इनके व्यवहार से परेशान है। पाकिस्तानी दुबई जैसे शहरों में महिलाओं की बिना इजाजत के वीडियो बनाते हैं। इसके अलावा इराक ने पाकिस्तानी भिखारियों से समस्या जताई थी।

अमेरिका, सिंगापुर, स्पेन, नॉर्वे… 15 देशों के राजनयिक जम्मू-कश्मीर में घूम-घूमकर देख रहे मतदान, बोले मुख्य चुनाव आयुक्त- बन रहा है इतिहास

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में बुधवार (25 सितंबर 2024) को दूसरे चरण का मतदान जारी है। इस केंद्र शासित प्रदेश में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इस प्रक्रिया को देखने के लिए विभिन्न देशों के राजनयिकों का एक प्रतिनिधिमंडल राजधानी श्रीनगर पहुँचा और मतदान केंद्रों का दौरा करता है। अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद राज्य में कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

इस प्रतिनिधिमंडल में अमेरिका, मैक्सिको, गुयाना, दक्षिण कोरिया, सोमालिया, पनामा, सिंगापुर, नाइजीरिया, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे, तंजानिया, रवांडा, अल्जीरिया और फिलीपींस के राजनयिक शामिल हैं। विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने बडगाम के ओमपोरा में मतदान केंद्रों का दौरा किया। इसके बाद लाल चौक निर्वाचन क्षेत्र के अमीरा कदल और एसपी कॉलेज, चिनार बाग का जायजा लिया।

चिनार बाग के एसपी कॉलेज में विदेशी प्रतिनिधियों को एक विशेष गुलाबी मतदान केंद्र का दौरा करने का मौका मिला। इस मतदान केंद्र का प्रबंधन पूरी तरह से महिलाओं द्वारा किया जाता है। यह चौथा मतदान केंद्र है, जिसका उन्होंने आज दौरा किया। इनमें से कई मतदान केंद्रों पर साल 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान बहुत कम मतदान हुआ था।

जम्मू-कश्मीर में जारी मतदान को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, “लोग बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए निकल रहे हैं… यह इतिहास बनने जा रहा है… हमें बहुत खुशी है कि पूरी घाटी और जम्मू में उत्साह के साथ मतदान हो रहा है… चाहे वह श्रीनगर की घाटी हो, चाहे वह ऊँची पर्वत चोटियाँ हों, जहाँ से व्यवधान के आह्वान आते थे। हर जगह लोग मतदान करने के लिए निकल रहे हैं।”

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ने आगे कहा, “यहाँ तक ​​कि उन इलाकों में भी जहाँ से बहिष्कार के आह्वान होते थे, मतदाताओं में उत्साह है… यह दुनिया को देखना है कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष तरीके से कैसे हो सकते हैं… विधानसभा चुनाव देखने के लिए बड़ी संख्या में राजनयिक भी इलाके में हैं।”

बता दें कि राज्य की 90 विधानसभा सीटों पर मतदान होने हैं। इसमें पहले चरण का चुनाव 18 सितंबर को हो चुका है, जबकि आज 25 सितंबर को दूसरे चरण का चुनाव हो रहा है। इसके बाद तीसरा एवं अंतिम चरण का मतदान 1 अक्टूबर 2024 को होगा। पहले फेज में 24 सीटों, दूसरे फेज में 26 सीटों और तीसरे फेज में 40 सीटों पर मतदान होना है। नतीजे 4 अक्टूबर को घोषित होंगे।