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‘पाकिस्तान जिंदाबाद है, जिंदाबाद था, जिंदाबाद रहेगा’ : बागपत से वायरल हुई सैलून वाले अबरार की वीडियो, UP पुलिस ने देशद्रोह में केस दर्ज कर की गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी का वीडियो वायरल हो रहा है। नारेबाजी करने वाला एक सैलून संचालक है जिसका नाम अबरार है। पुलिस ने केस दर्ज करके अबरार को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर देशद्रोह की धाराओं में कार्रवाई की गई है। आरोपित के पाकिस्तान कनेक्शन की भी पड़ताल चल रही है। घटना की FIR मंगलवार (17 सितंबर 2024) को दर्ज हुई थी। अबरार की पाकिस्तान परस्ती का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

यह घटना बागपत जिले के थानाक्षेत्र सिंघावली अहीर की है। यहाँ 17 सितंबर 2024 को सब इंस्पेक्टर प्रवीण शर्मा ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया है कि उनको अपने मोबाइल नंबर पर वायरल होती एक वीडियो मिली है। इस वीडियो में टेड़ा गाँव का रहने वाला अबरार कुछ लड़कों के साथ दिखाई दे रहा है। पुलिस के मुताबिक वीडियो में अबरार ने कहा, “पाकिस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और रहेगा।” यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई।

वायरल वीडियो में अबरार सिर पर टोपी रखकर कुछ लोगों के बीच देखा जा सकता है। उसने हाथ में लाल रंग का कलावा जैसा कुछ बाँध रखा है। पाकिस्तान को जिंदाबाद बोलकर अबरार जोर से हँसता भी है। आसपास खड़े कुछ लोगों ने इस वीडियो को ग्रुप में भेजने की बात कही जिसका अबरार पर कोई फर्क नहीं पड़ा। ये वीडियो किसी हिन्दू के घर के आगे बनाया गया था। घर के आगे बड़े-बड़े अक्षरों में ॐ लिखा हुआ है।

कुछ ही देर में यह लगभग 17 सेकेंड लम्बा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बागपत में हिन्दू संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने अबरार को पहचान लिया और उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठने लगी। पुलिस ने अबरार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत केस दर्ज कर लिया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

न तेलंगाना की 90% मस्जिदों के पास है कागज, न UP की 1.12 लाख वक्फ संपत्तियों के पास: असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिमों को डराया, बोले- वक्फ संशोधन के बाद सरकार ले लेगी संपत्ति

AIMIM के अध्यक्ष एवं हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी मोदी सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन विधेयक का लगातार विरोध कर रहे हैं। इस विधेयक के कथित खतरों के बारे में बात करते हुए ओवैसी ने हैदराबाद में दावा किया कि देश की लगभग 90 प्रतिशत मस्जिदों पर अपना स्वामित्व साबित करने के लिए मुस्लिमों के पास कोई कागजात नहीं हैं।

ओवैसी ने दावा किया कि अगर वक्फ बिल कानून बन जाता है तो मस्जिद, ईदगाह और दूसरे मुस्लिम दीनी स्थान मुस्लिमों से छिन जाएँगे। उन्होंने कहा कि एक बार जब मुस्लिम किसी जगह को इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर देता है तो वह जगह हमेशा के लिए मुस्लिमों की संपत्ति बन जाती है और अब मोदी सरकार उस प्रावधान को बदल रही है।

उन्होंने कहा कि तेलंगाना में 33,000 वक्फ संपत्तियाँ हैं और उनमें से 90 प्रतिशत के पास जमीन का पंजीकृत दस्तावेज नहीं है। ओवैसी ने आगे आँकड़े देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में 1.21 लाख वक्फ संपत्तियाँ हैं और उनमें से 1.12 लाख संपत्तियों के पास कोई दस्तावेज नहीं है। ओवैसी ने पूछा, “अगर उनका स्वामित्व छीन लिया गया तो संपत्तियों पर किसका कब्जा होगा?”

उन्होंने कहा, “मस्जिद पर आपका (मुस्लिमों का) कोई कानूनी अधिकार नहीं होगा, कोई भी उस पर कब्जा कर सकेगा।” उन्होंने पूछा कि अगर कोई मक्का और मदीना का पंजीकृत दस्तावेज माँगे तो क्या इसे उपलब्ध कराया जा सकता है। ओवैसी ने दावा किया कि 300-400 साल पहले कोई पंजीकरण दस्तावेज नहीं थे। इसलिए ये मस्जिदें सरकार द्वारा छीन ली जाएँगी।

सांसद ओवैसी ने अयोध्या में रामजन्मभूमि पर मुस्लिम आक्रांता द्वारा बनाई गई बाबरी मस्जिद का भी रोना रोया। उन्होंने कहा, “हमने एक बाबरी मस्जिद खो दी, अब हम 90 प्रतिशत मस्जिदें खो देंगे।” असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि आगे चलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) दफन हुए मंदिरों को खोजने के लिए मस्जिदों की खुदाई की माँग करेगा।

सेना और रेलवे के बाद भारत में वक्फ बोर्ड के तीसरे सबसे बड़े भू-स्वामी होने को लेकर ओवैसी ने कहा कि हिंदू मंदिरों और मठों के पास बहुत ज़्यादा ज़मीन है। अलग-अलग राज्यों में हिंदू मंदिरों की ज़मीन मिलाकर वक्फ बोर्ड की संपत्ति से कहीं ज़्यादा होगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ तीन राज्यों, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में हिंदू संपत्तियाँ वक्फ संपत्तियों से ज़्यादा हैं।

ओवैसी के बयानों पर भाजपा IT हेड अमित मालवीय ने सोशल मीडिया X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “असदुद्दीन ओवैसी ने मान लिया कि उत्तर प्रदेश में 1.21 लाख वक्फ संपत्तियों में से 1.12 लाख संपत्तियों का दस्तावेज नहीं है! यह समस्या का एक हिस्सा है। वक्फ ने कई संपत्तियों पर अवैध दावा किया है, जिनमें से अधिकांश गरीब मुस्लिमों की हैं, वो भी बिना वैध दस्तावेजों के।”

आतिशी बनीं दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री, शपथ लेने के बाद छुए अरविंद केजरीवाल के पाँव: सामने आया वीडियो, 6 महीने बाद फिर होने हैं चुनाव

अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आज (21 सितंबर 2024) दिल्ली को नया मुख्यमंत्री मिल गया। उपराज्यपाल सचिवालय में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ दिल्ली कैबिनेट के पाँच अन्य मंत्रियों—सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय, कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन, और मुकेश अहलावत ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। आतिशी दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री बन गई हैं। उनसे पहले कांग्रेस की शीला दीक्षित और बीजेपी की सुषमा स्वराज इस महत्वपूर्ण पद पर रह चुकी हैं।

महज 4 साल में विधायक से मंत्री और फिर मुख्यमंत्री पद का सफर

आतिशी का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। वह आम आदमी पार्टी (AAP) के शुरुआती दौर से ही पार्टी के साथ जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2013 में जब पार्टी ने दिल्ली में पहली बार चुनाव लड़ा, तब आतिशी घोषणापत्र मसौदा समिति की सदस्य रहीं और पार्टी का पहला मैनिफेस्टो तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षा, स्वास्थ्य, और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर आतिशी की विशेष पकड़ रही है, और पार्टी की नीतियों को आकार देने में उनका अहम योगदान रहा है।

आतिशी ने पार्टी प्रवक्ता के तौर पर कई मंचों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा है। वैसे, आतिशी ने सफलता की सीढ़ियाँ काफी तेजी से चढ़ी हैं। साल 2020 में वो पहली बार विधायक बनीं, और साल 2023 में पहली बार मंत्री और अब अगले ही साल वो दिल्ली की मुख्यमंत्री बन गई हैं। अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति घोटाले में जेल से लौटने के बाद इस्तीफा दे दिया था।

केजरीवाल सरकार की विफलताओं का बोझ पड़ सकता है भारी

अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आतिशी ने दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, लेकिन यह पद उनके लिए कई चुनौतियाँ लेकर आया है। केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने कई मोर्चों पर विफलताएँ झेली, जिनमें प्रदूषण, जल संकट, और महिला सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। इन विफलताओं का असर आतिशी के कार्यकाल पर भी पड़ेगा, क्योंकि जनता का विश्वास पहले ही कमजोर हो चुका है। आगामी 6 महीनों में उन्हें न केवल इन विफलताओं को दूर करना होगा, बल्कि पार्टी की छवि सुधारने की भी जिम्मेदारी उठानी होगी।

मुखौटा मुख्यमंत्री?

केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आतिशी पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है, क्योंकि दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी से जो उम्मीदें लगा रखी हैं, उन्हें पूरा करने की चुनौती अब आतिशी के कंधों पर है। चूँकि अरविंद केजरीवाल एक विफल मुख्यमंत्री साबित हुए हैं, ऐसे में आतिशी पर जिम्मेदारियों को बोझ कहीं ज्यादा है। हालाँकि राजनीतिक जानकार उन्हें अरविंद केजरीवाल का मुखौटा मुख्यमंत्री कहने से नहीं चूक रहे हैं। इस बीच, उनका अरविंद केजरीवाल का पैर छूने का वीडियो भी सामने आ गया, जो शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद का है।

इन पाँच मंत्रियों ने भी ली शपथ

आतिशी के साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों में सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय, कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन और मुकेश अहलावत भी शामिल हैं। ये सभी नेता अपने-अपने विभागों में कुशल और अनुभवी माने जाते हैं, और सरकार के सफल संचालन के लिए इनका सहयोग महत्वपूर्ण होगा। कैबिनेट में आतिशी के साथ सौरभ भारद्वाज पहले से ही कई बड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और दिल्ली में सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन के क्षेत्र में उन्होंने काम किया है। वहीं, गोपाल राय किसानों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।

हालाँकि आतिशी को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर 6 महीनों का कार्यकाल मिला है, लेकिन यह समय उनके लिए कई चुनौतियों से भरा रहेगा। आगामी चुनावों में पार्टी की स्थिति को मजबूत बनाए रखना और जनता का विश्वास जीतना भी आतिशी के लिए प्राथमिकताओं में होगा।

हालाँकि राजनीति में उनकी अनुभवहीनता को देखते हुए उनके मुख्यमंत्री बनने पर सवाल उठ रहे हैं। चुनावों से पहले उनकी इस छोटी अवधि में विपक्षी पार्टियाँ इन मुद्दों को जोर-शोर से उठाने वाली हैं। उनके नेतृत्व में दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को जनता के सामने नई योजनाओं और कामकाज के दम पर विश्वास जीतना होगा, जो फिलहाल आसान नहीं दिख रहा।

दिल्ली के बाद कर्नाटक में भी राहुल गाँधी पर केस दर्ज, BJP नेताओं ने कराई FIR: अमेरिका में आरक्षण पर दिए बयान पर मचा बवाल

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ भाजपा नेताओं द्वारा बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। यह मामला उनके हालिया अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए आरक्षण संबंधी बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी समानता स्थापित होने के बाद आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने पर विचार करेगी। इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा नेताओं ने राहुल गाँधी पर संविधान विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया है। विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी और भाजपा कानूनी समिति के समन्वयक वसंत कुमार समेत कई नेताओं ने उनके बयान की निंदा की और एफआईआर दर्ज कराई। भाजपा का कहना है कि राहुल गाँधी का यह बयान न केवल आरक्षण के खिलाफ है बल्कि यह समाज में विभाजन पैदा करने वाला भी है।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी राहुल गाँधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी। उनका आरोप है कि राहुल गाँधी ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान सिख समुदाय के खिलाफ ‘घृणित’ टिप्पणी की, जिससे समाज में वैमनस्य बढ़ सकता है। इसके साथ ही, राहुल गाँधी की ‘हम आरक्षण हटा देंगे’ टिप्पणी को लेकर भाजपा ने उन्हें विभाजनकारी और उत्तेजक बयानबाजी का दोषी ठहराया है।

बता दें कि राहुल गाँधी ने कहा था कि भारत में समानता स्थापित होने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने के बारे में सोचेगी। हालाँकि बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मेरे बयान का गलत मतलब निकाला गया जैसे कि मैं आरक्षण के खिलाफ हूँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम आरक्षण की सीमा को 50% से अधिक बढ़ाने जा रहे हैं।

इससे पहले, भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार (19 सितंबर 2024) को राहुल गाँधी की हाल की अमेरिकी यात्रा के दौरान आरक्षण पर की गई टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ दिल्ली में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पंजाबी बाग, तिलक नगर, पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशनों में दर्ज की गई थी। इसके अलावा एक शिकायत बीजेपी ने राहुल गाँधी के खिलाफ मध्य प्रदेश में दर्ज कराई है।

अमेठी के मंदिर में हिन्दू लड़की संग घूम रहा था मुस्लिम युवक, सवाल पूछने पर बताया फर्जी नाम: महंत ने पकड़ कर पुलिस को सौंपा, सख्त कार्रवाई की उठाई माँग

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक हिन्दू संत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में संत एक लड़की और लड़के के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। उनका आरोप है कि वीडियो में दिख रहा लड़का मुस्लिम है जो हिन्दू लड़की के साथ मंदिर परिसर में घूम रहा था। इस हरकत को संत ने लव जिहाद बताते हुए कार्रवाई की माँग उठाई है। घटना शनिवार (21 सितंबर 2024) की है। पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए लड़का और लड़की को हिरासत में ले लिया है। मामले की जाँच की जा रही है।

यह घटना अमेठी जिले के थानाक्षेत्र गौरीगंज की है। यहाँ के बाबूगंज में सगरा आश्रम आसपास के हिन्दुओं की आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है। इस आश्रम के महंत मौनी महाराज हैं। मौनी महाराज ने शनिवार को एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में उनके बगल चेकदार शर्ट व डैमेज जींस पहने बड़े बाल वाला एक लड़का दिख रहा। लड़के के पीछे काले लिबास में एक लड़की खड़ी है। लगभग 1 मिनट के वीडियो की शुरुआत मौनी महाराज ने लड़के को मुस्लिम और लड़की को हिन्दू बताकर की है।

वीडियो में आगे मौनी महाराज ने आरोप लगाया है कि लड़के ने पहले अपना परिचय हिन्दू के तौर पर देते हुए उनको गुमराह करने का प्रयास किया था। उनका दावा है कि मुस्लिम लड़का दर्शन करने के बहाने मंदिर में आया था पर वो असल में एक लव जिहाद का अपराधी है। बकौल मौनी महाराज आरोपित ने आश्रम के अंदर भी अपराध का प्रयास किया है। इसी वीडियो में जिला प्रशासन से माँग की गई है कि युवक को गिरफ्तार करके उसकी जाँच करवाई जाए। ऑपइंडिया के पास वीडियो मौजूद है।

मौनी महाराज यहीं नहीं रुके। उन्होंने इसी वीडियो में आगे बताया कि एक सोची समझी साजिश के तहत मंदिरों को अपवित्र किया जा रहा है। उनका दावा है कि पकड़े गए युवक की सोच आतंकवाद से प्रेरित है जो छोटी-छोटी हिन्दू बच्चियों को फँसाकर उनके साथ अपराध कर रहे हैं। मौनी महाराज ने आगाह किया है कि पुलिस ने अगर पकड़े गए लड़के पर कड़ा एक्शन नहीं लिया तो सामाजिक सौहार्द पर गलत असर पड़ेगा जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

मौनी महाराज ने युवक के परिजनों की भी जाँच कराए जाने की माँग की है। उन्होंने बताया कि पकड़े गए लड़के की हरकतें संदिग्ध हैं। इस वीडियो का अमेठी पुलिस ने संज्ञान लिया है। गौरीगंज क्षेत्र के डिप्टी एसपी अखिलेश वर्मा ने बताया कि लड़के और लड़की को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। लड़का रायबरेली जिले का रहने वाला है। इन दोनों के परिजनों को भी सूचित किया जा रहा है। बकौल DSP लड़की के परिजनों से अगर कोई तहरीर प्राप्त होती है तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

शिव मंदिर में मांस, सिर तन से जुदा की पोस्ट और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे: राजस्थान के भीलवाड़ा और शाहपुरा में हालात तनावपूर्ण, कट्टरपंथी मौलवी को लोगों ने पीटा

राजस्थान के जहाजपुर में शनि मंदिर में तोड़फोड़ और शिव मंदिर में मांस मिलने के बाद एक बार फिर महौल बिगड़ गया है। उधर, भीलवाड़ा में फेसबुक पर एक समाज के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ का पोस्ट करने के बाद बवाल हो गया है। इस मामले में पुलिस ने आरोपितों को हिरासत में लिया है। वहीं, मांडलगढ़ उपखंड में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के बाद एक मौलवी की पिटाई कर दी गई है।

दरअसल, भीलवाड़ा से सटे शाहपुरा जिले के कोटडी जहाजपुर रोड पर शनिदेव का एक मंदिर है। इस मंदिर में तोड़फोड़ करके करीब आधा दर्जन मूर्तियों को दूर फेंक दिया गया है। ये मूर्तियाँ नवग्रह देवों की हैं। इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है। वहीं, जहाजपुर के शिव मंदिर के चबूतरे पर मांस फेंक दिया गया है।

यह शिव मंदिर दर्जियों के मोहल्ले में जगत शरण मंदिर के नाम से जाना जाता है। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुँच गए। वहीं, मोहल्ले वालों की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी घटनास्थल पर पहुँचकर उसका मुआयना किया। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर उन्हें शांति बनाए रखने की अपील की।

इससे पहले जहाज़पुर जलझूलनी एकादशी के जुलूस पर हुए पथराव किया गया था। इसके कारण माहौल खराब हो गया था। इतना ही नहीं, शाहपुरा में एक दिन पहले ही गणेश पंडाल में जानवर के अवशेष पाए गए थे। इसको लेकर लोगों ने काफी हंगामा किया था। अब यह मामला सामने आने के बाद फिर से माहौल खराब हो गया है।

इतना ही नहीं, भीलवाड़ा के काछोला थाना क्षेत्र के कछोला गाँव में 19 सितंबर को सोशल मीडिया फेसबुक पर मुस्लिम समाज के कुछ युवकों द्वारा विवादित टिप्पणी की गई। इसमें एक एक समाज को निशाना बनाते हुए ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में आक्रोश फैल गया है। उन्होंने कार्रवाई की माँग करते हुए थाने का घेराव किया।

कोटड़ी के डीएसपी प्रमोद शर्मा ने बताया कि फेसबुक पर विवादित टिप्पणी को लेकर उन्हें शिकायत मिली है। आईटी एक्ट में मामला दर्ज करके तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाने लाया गया है। उधर, ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले में 5 लोग शामिल हैं, लेकिन पुलिस ने सिर्फ 3 को ही हिरासत में लिया है। दो आरोपित अभी भी फरार हैं।

ग्रामीण फरार दोनों फरार आरोपितों की अविलंब गिरफ्तारी की माँग की हैं। ग्रामीणों का कहना है कि काछोला में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग बाहर से आए हैं और वे गाँव में सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों के विरोध के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने बाहर से आए एक मौलवी को गाँव से निकाल दिया।

दूसरी तरफ, भीलवाड़ा के मांडलगढ़ उपखंड के महुआ गाँव में बुधवार (18 सितंबर 2024) की देर शाम को एक शख्स की ओर से भारत विरोधी और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए। इसको लेकर विवाद हो गया और ग्रामीणों ने नारे लगाने वाले एक मौलवी की पिटाई कर दी। लोगों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश का एक मौलाना यहाँ रहता है और उसने लोगों से आपत्तिजनक नारे लगवाए थे।

मांडलगढ़ थाना प्रभारी चंद्र प्रभात ने बताया कि पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है। इसके साथ ही पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। इसके बाद गुरुवार (19 सितंबर 2024) को महुआ में बाजार को बंद रखकर धरना प्रदर्शन किया गया। बता दें कि सांगानेर में भी गणेश पांडाल पर पथराव के बाद माहौल गर्म हो गया था।

5000+ घंटे विमान उड़ाने का है अनुभव, सामने हुआ था तेजस का टेस्ट: जानें कौन हैं एयर मार्शल एपी सिंह, बने भारतीय वायु सेना के नए प्रमुख

भारतीय वायु सेना (IAF) से जुड़ी महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है, जिसमें एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह (ए.पी. सिंह) को अगला मुख्य वायु सेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। वह वर्तमान में वाइस चीफ के पद पर कार्यरत हैं और 30 सितंबर 2024 को इस पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे, जब मौजूदा एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी सेवानिवृत्त होंगे।

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, “सरकार ने एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह, जो वर्तमान में वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ के रूप में कार्यरत हैं, को एयर चीफ मार्शल के पद पर अगला मुख्य वायु सेना प्रमुख नियुक्त किया है, जो 30 सितंबर 2024 की दोपहर से प्रभावी होगा।”

एयर मार्शल ए.पी. सिंह का वायु सेना में एक शानदार करियर रहा है। उन्होंने 21 दिसंबर 1984 को फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया और तब से उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उनके पास 5000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है और वे एक शानदार फाइटर ट्रेनर और टेस्टिंग पायलट हैं।

उनकी प्रमुख उपलब्धियों में ऑपरेशनल फाइटर स्क्वाड्रन का नेतृत्व करना और एक अग्रिम एयर बेस का संचालन शामिल है। वे रूस में मिग-29 अपग्रेड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम के प्रमुख भी रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने हल्के लड़ाकू विमान (तेजस) के उड़ान परीक्षण के लिए राष्ट्रीय उड़ान परीक्षण केंद्र में परियोजना निदेशक के रूप में कार्य किया है।

एयर मार्शल ए.पी. सिंह ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज, और राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है, जो उनकी नेतृत्व और रणनीतिक विशेषज्ञता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे “परम विशिष्ट सेवा मेडल” और “अति विशिष्ट सेवा मेडल” जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों के प्राप्तकर्ता हैं, जो उनकी सेवा और योगदान को मान्यता देते हैं।

एयर मार्शल ए.पी. सिंह की नियुक्ति भारतीय वायु सेना के लिए एक नई दिशा में संकेत देती है। उनकी विशाल अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण से भारतीय वायु सेना की क्षमताओं में सुधार होने की संभावना है। रक्षा मंत्रालय का यह बयान उनके अनुभव और क्षमता को देखते हुए एक सकारात्मक संकेत है। इस बदलाव के साथ, भारतीय वायु सेना के महत्वपूर्ण कार्यों और मिशनों को और मजबूती मिलेगी।

30 सितंबर को एयर मार्शल ए.पी. सिंह का कार्यभार ग्रहण करना, भारतीय वायु सेना के लिए एक महत्वपूर्ण घटना होगी, जो न केवल उनके लिए, बल्कि समस्त वायु सेना के लिए गर्व का क्षण है। इस प्रकार, एयर मार्शल ए.पी. सिंह का नेतृत्व वायु सेना की नई दिशा को तय करेगा और उन्हें अपने अनुभव का लाभ उठाते हुए भारतीय वायु सेना की क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

200 घरों-दुकानों में मुस्लिम भीड़ ने लगाई आग, 3 को मौत के घाट उतारा: बांग्लादेश में फिर हिन्दुओं और बौद्धों पर हमले की खबर, अपराधी की मौत पर भड़के इस्लामी कट्टरपंथी

अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और राजनैतिक उथलपुथल से जूझ रहे बांग्लादेश में एक बार फिर से मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं और बौद्धों को निशाना बनाया है। यह हमला गुरुवार (19 सितंबर 2024) को चटगाँव डिवीजन में किया गया है। इस हिंसा में 200 से अधिक मकानों व दुकानों को आग लगा दी गई है। एक बौद्ध मंदिर को तो क्षतिग्रस्त कर डाला गया है। मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए इस हमले में मरने वालों की आधिकारिक तौर पर तादाद 3 बताई जा रही है। हालाँकि असल संख्या इससे अधिक होने का अनुमान है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना चटगांव के दिघिनाला और खगराचारी सदर इलाके में हुआ है। बताया जा रहा है कि बुधवार (18 सितंबर) को खगराचारी इलाके में मोहम्मद मामून नाम के अपराधी की हत्या कर दी गई थी। उस पर पहले से 17 केस दर्ज थे। यह हत्या तब हुई जब मोहम्मद मामून एक बाइक चुराने की कोशिश कर रहा था। मोहम्मद मामून की हत्या के बाद साजिशन एक अफवाह उड़ाई गई कि जनजातीय लोगों ने बंगालियों पर हमला बोल कर एक व्यक्ति को मार दिया है।

अपराधी की मौत का बदला हिन्दुओं और बौद्धों से

इस अफवाह को उड़ाने के लिए मस्जिदों का भी दुरूपयोग किया गया। इस अफवाह ने आग में घी का काम किया। अपराधी मामून की मौत के विरोध में ‘बंगाली छात्र परिषद’ नाम के संगठन ने गुरुवार (19 सितंबर) की शाम जुलूस निकाला। इसी जुलूस में शामिल लोगों ने बौद्ध चकमाओं और हिन्दू त्रिपुरियों के खिलाफ हिंसा की शुरुआत की। मुस्लिम भीड़ घरों से निकल कर बौद्धों और हिन्दुओं पर हमला करने लगी।

हमले में इनके घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया। लगभग 200 मकानों व दुकानों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। आगजनी की चपेट में बौद्धों का एक मंदिर भी आ गया। बच्चे, बूढ़े और महिलाएँ जो भी हिंसक भीड़ के आगे पड़ा, उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। कुछ ही देर में खगराचारी में शुरू हुई ये हिंसा पास के जिले रंगमती में फ़ैल गई। हिंसक भीड़ के हमले में कई लोगों की मौत हो गई।

हिंसा भड़काने के लिए मस्जिदों का इस्तेमाल

आधिकारिक तौर पर मृतकों की तादाद 3 बताई जा रही है। इन तीनों में 20 वर्षीय जुनान चकमा, 60 वर्षीय धनंजय व 30 साल के रुबेल त्रिपुरा शामिल हैं। हालाँकि स्थानीय निवासियों का दावा है कि मृतकों की तादाद इस से कहीं अधिक है। ये तीनों बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। हिंसक भीड़ गुरुवार की रात लगभग 8:30 तक आतंक मचाती रही और अगले दिन शुक्रवार (20 सितंबर) को भी मुस्लिम भीड़ की हिंसा जारी रही।

सामने आई जानकारी के अनुसार रंगमती इलाके में भी अल्पसंख्यकों पर हमले के लिए भीड़ को एक मस्जिद से उकसाया गया था। इस दौरान एक व्यक्ति को चकमा व त्रिपुरी समुदाय के सदस्यों को पीछे हटने वरना गंभीर परिणाम भुगतने का फरमान सुनाते देखा जा सकता है। एक पीड़ित अल्पंसख्यक ने इस हमले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कई अन्य लोगों की ही तरह, हम भी उस इलाके से भाग निकले। जंगल में हमारा कोई ठिकाना नहीं था क्योंकि वहाँ से भी आग और धुआँ देखा जा सकता था।”

हमले के विरोध में हिन्दुओं की रैली

इस हिंसा और नरसंहार के विरोध में बांगलदेश के अल्पसंख्यकों ने भी जुलूस निकाला। लगभग 40 हजार की तादाद में बौद्ध चकमा और त्रिपुरी हिन्दुओं ने मिल कर खगराचारी में जुलूस निकाला। इस जुलूस का नाम उन्होंने “पहचान के लिए मार्च” दिया। इस रैली में शामिल राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप (RRAG) के निदेशक सुहास चकमा ने बताया, “बांग्लादेश के सुरक्षा बलों ने दिघिनाला सदर में अल्पसंख्यकों की दुकानों व घरों को जलाने का समर्थन किया।” बताया जा रहा है कि दिघिनाला सदर से सभी बौद्ध पलायन कर गए हैं।

अल्पसंख्यकों की प्रताड़ना के इस अपराध पर चिंता जताते हुए सुहास चकमा ने इसको संयुक्त राष्ट्र व अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में उठाने का ऐलान किया है। फिलहाल प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है। जिस खागराचारी और रंगमती की यह घटना है वह पहाड़ी इलाका है। जहाँ कई जनजातियाँ रहती हैं जिसमें चकमा, मरमा, त्रिपुरी, चक, बोम, लुशेई और खुमारी आदि प्रमुख हैं।

पीड़ितों को ही हिंसक बताकर भारत के खिलाफ बड़ी साजिश

ऑपइंडिया ने इस हिंसा के बाद प्रभावित इलाके की जमीमी पड़ताल कर के जानकारी जुटाई। चटगाँव की एक हिन्दू महिला ने बताया कि उनके खुद के घर पर 5 अगस्त 2024 को मुस्लिम भीड़ हमला कर चुकी है। ऐसे हमलों को पीड़िता ने बांग्लादेश में आम बात बताया। पीड़िता का दावा है कि बौद्धों और हिन्दुओं के साथ अन्य अल्पसंख्यकों पर बार-बार इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया जाता है। कई गरीब अल्पसंख्यक पैसों या नौकरी आदि के लालच में फँस कर धर्मान्तरित भी हो चुके हैं।

पीड़िता ने ऑपइंडिया को आगे बताया कि जो भी अल्पंसख्यक धर्म परिवर्तन से इंकार करता है उनको डरा-धमका कर मजबूर कर दिया जाता है। ऐसी घटनाओं को बंगाली बनाम आदिवासी कह कर दबाने की कोशिश करने वालों की भी पीड़िता ने निंदा की। महिला का दावा है कि ऐसे हमले मुस्लिम भीड़ के मज़हबी चरमपंथ का परिणाम होते हैं। सुरक्षा के मद्देनजर हम उस पीड़िता का नाम सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं।

19 सितंबर की हिंसा के एक अन्य पीड़ित से ऑपइंडिया ने सम्पर्क किया। वह घर से भाग कर किसी सुरक्षित स्थान पर छिपा हुआ है। पीड़िता का दावा है कि स्थानीय स्तर पर चकमा और त्रिपुरी लोगों के समूह को हिंसक साबित करने की भी साजिश रची जा रही है जिस से इनके खिलाफ प्रशासन भी कार्रवाई करे। इसी साजिश का एक हिस्सा यह भी है कि वो बौद्धों और हिन्दुओं को हिंसक बता कर भारत को इसका जिम्मेदार बता कर बदनामी करें।

जातीय संघर्ष बता कर हमलावरों को बांग्लादेशी मीडिया का कवर फायर

इस मज़हबी चरमपंथ से उपजी हिंसा को बांग्लादेश की मीडिया जातीय संघर्ष बता कर हमलावरों को कवर फायर जैसी देती दिखाई दे रही है। बांग्लादेशी मीडिया की मानें तो यह बंगालियों और जनजातियों के बीच लड़ाई है। इन खबरों में अल्पसंख्यकों के पलायन और बौद्ध मंदिर में आगजनी की वजह का जिक्र जानबूझ कर नहीं किया गया है। इससे पहले भी शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेशी मीडिया वहाँ हुए हिन्दुओं पर भीषण अत्याचारों को फर्जी और बढ़ा-चढ़ा कर कही जा रही बात घोषित कर चुकी है।

बताते चलें कि भारत से विभाजन के बाद से ही पहले पूर्वी पाकिस्तान और अब बांगलादेश में अल्पसंख्यक निशाने पर हैं। यहाँ धर्मान्तरण से लेकर जमीन कब्ज़ा लेने और पलायन की घटनाएँ आम हैं। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश के मंदिरों, घरों और दुकानों आदि को मिल कर लगभग 205 हमले हुए हैं। इसी हिंसा में खुलना शहर के सोनाडांगा में ‘ईशनिंदा’ के आरोप में उत्सव मंडल की मुस्लिम भीड़ द्वारा पीट कर हत्या, गणेश विसर्जन जुलूस पर हमला मुस्लिम छात्रों द्वारा 60 हिंदू शिक्षकों, प्रोफेसरों और सरकारी अधिकारियों को इस्तीफे के लिए मजबूर करना जैसे अपराध भी शामिल हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर असद नूर का दावा है कि अल्पसंख्यक समुदाय को अब ‘जमात-ए-इस्लामी’ में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

बिलकुल शुद्ध है पटना महावीर मंदिर का ‘नैवेद्यम’ प्रसाद, हर 3 महीने में होती है जाँच: तिरुपति विवाद के बाद आचार्य कुणाल किशोर का बयान, प्रमाण पत्र भी दिखाए

तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू में आपत्तिजनक वस्तुओं की मिलावट की खबरों ने पूरे देश में आस्था से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा दिया है। इस विवाद के बीच, पटना के महावीर मंदिर ने अपने प्रसाद ‘नैवेद्यम’ की शुद्धता पर जोर देते हुए बयान जारी किया है। महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने स्पष्ट किया कि महावीर मंदिर का नैवेद्यम प्रसाद पूरी तरह से शुद्ध और स्वच्छ है।

आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि महावीर मंदिर में नैवेद्यम गाय के शुद्ध घी से तैयार किया जाता है, जो कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के ‘नंदिनी’ ब्रांड से आता है। उन्होंने कहा, “नैवेद्यम की गुणवत्ता की हर तीन महीने में जाँच होती है और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन से हर खेप की गुणवत्ता रिपोर्ट प्राप्त की जाती है।”

प्रसाद कैसे तैयार होता है?

नैवेद्यम को तैयार करने की प्रक्रिया में पूर्ण स्वच्छता और शुद्धता का पालन किया जाता है। पहले चना दाल से बेसन तैयार किया जाता है, जिसे शुद्ध घी में पकाकर बूंदी बनाई जाती है। इसमें काजू, किशमिश और इलायची का सही अनुपात में मिश्रण कर लड्डू तैयार किए जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया मशीनों के जरिए होती है, जिससे किसी भी प्रकार के हाथों के सीधे संपर्क की गुंजाइश नहीं रहती।

आचार्य किशोर कुणाल ने यह भी बताया कि महावीर मंदिर में नैवेद्यम हर दिन तिरुपति के लगभग 100 दक्ष कारीगरों द्वारा ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और पूजा के बाद तैयार किया जाता है। नैवेद्यम की माँग दिन-ब-दिन बढ़ रही है और इससे प्राप्त आय का उपयोग महावीर कैंसर संस्थान समेत सात अस्पतालों में गरीब मरीजों की सेवा में किया जाता है।

महावीर मंदिर के प्रसाद नैवेद्यम को भारत सरकार के ‘भोग’ सर्टिफिकेट से मान्यता प्राप्त है। यह सर्टिफिकेट पूजा स्थलों की स्वच्छता और शुद्धता की गारंटी देता है, जो खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत आता है। आचार्य किशोर कुणाल ने यह भी बताया कि तिरुपति के बाद सबसे ज्यादा लड्डू की बिक्री महावीर मंदिर के नैवेद्यम की होती है। यहां हर महीने लगभग 1.25 लाख किलो लड्डू की खपत होती है, जिसके लिए 15 हजार किलो शुद्ध घी का उपयोग किया जाता है।

उन्होंने कहा, “बाजार में शुद्ध घी के बहुत सारे ब्रांड हैं, लेकिन गाय के दूध से तैयार होने और एकदम शुद्ध होने के कारण कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के नंदिनी घी का ही इस्तेमाल महावीर मंदिर में किया जा रहा है। यहाँ प्रसाद बनता है तो उसमें मिलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की भी हर 3 महीने में जाँच होती है।”

आचार्य किशोर कुणाल कौन हैं?

आचार्य किशोर कुणाल एक प्रतिष्ठित धर्माचार्य और महावीर मंदिर न्यास के सचिव हैं। उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर धार्मिक और सामाजिक सेवा की दिशा में काम किया। उनके नेतृत्व में महावीर मंदिर ने कई धार्मिक और सामाजिक कार्यों को अंजाम दिया है। वो भारत सरकार द्वारा बनाई गई अयोध्या सेल के भी सदस्य रहे हैं, साथ ही अयोध्या विवाद के समय ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी के पद पर भी तैनात रहे।

‘हम आजम खान को किनारे लगा रहे हैं’: सपा के पूर्व सहयोगी रहे ओपी राजभर ने बताया अखिलश यादव ने कही थी ये बात, जेल में मिलने जाने से भी रोका था

उत्तर प्रदेश के पंचायती राज एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर आजम खान को किनारे लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब वे सपा के साथ थे, तब आजम खान से मिलने के लिए वे सीतापुर जेल जा रहे थे। उस समय अखिलेश यादव ने उन्हें रोक दिया था और कहा था कि वे आजम खान किनारे लगा रहे हैं।

शुक्रवार (20 सितंबर 2024) को रामपुर आए राजभर ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए कहा, “जब हम सपा के साथ थे, तब आजम खान से मिलने के लिए सीतापुर जेल जा रहे थे। उस समय अखिलेश यादव ने मुझे रोक दिया और हमसे कहा कि आप वहाँ मत जाइए। हम उनको किनारे लगा रहे हैं। आप उनको बढ़ाने के लिए जा रहे हैं।”

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को लेकर राजभर ने कहा आज वे जेल में बंद हैं। इसके लिए समाजवादी पार्टी जिम्मेदार है। अखिलेश यादव आजम खान को पहले से ही किनारे करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश ने मुस्लिम वोट लिया, लेकिन उनका साथ नहीं दिया। मुस्लिमों के लिए कोई भर्ती नहीं निकाली, जबकि सपा की चार-चार बार सरकार रही।

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव ने आजम खान का इस्तेमाल किया है। अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “वो (आजम खान) समाजवादी पार्टी में एक कद्दावर नेता थे, लेकिन कभी उनको डिप्टी सीएम नहीं बनाया। बस उनका इस्तेमाल किया। उनके काम पर वोट तो लिया, लेकिन जब हिस्सेदारी देने की बात आई तो किनारा कर लिया।”

ओपी राजभर के अनुसार, जिस केस में आजम खान जेल में हैं, उसमें समाजवादी पार्टी ने ही उनको फँसाया है। उनका कहना है कि अगर समाजवादी पार्टी ने कानून के दायरे में रहकर सही काम किया होता तो आज आजम खान जेल में नहीं होते। उन्होंने इशारों में कहा कि अखिलेश यादव खुद नहीं चाहते हैं कि आजम खान बाहर आएँ।

यह पूछे जाने पर कि क्या अखिलेश यादव ने आजम खान के साथ पक्षपात किया है, इस पर ओमप्रकाश राजभर ने कहा, “सौ प्रतिशत किया है। टीवी चैनल पर सब चला है। मैं आजम से सीतापुर मिलने के लिए जा रहा था तो उन्होंने मुझे मना किया। कहा कि आप वहाँ मत जाइए, हम उनको किनारे लगा रहे हैं। अखिलेश को गुलाम नेता चाहिए जो बोले ना। गूँगा रहे, बहरा रहे। बस उनकी हाँ में हाँ मिलाए।”

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव जब से कॉन्ग्रेस के दरबारी बने हैं, तब से उल्टा-सीधा बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के ‘समाप्तवादी पार्टी‘ बनने का कारण अखिलेश स्वयं बनेंगे। कोर्ट में आजम खान के 10 हजार रुपए के लिए मोहलत माँगे जाने पर राजभर ने कहा, “परिस्थितियाँ होती हैं। कभी राजा थे, तब तूती बोलती थी। अब तो बेचारे जेल में हैं। अब वह जलवा नहीं रह गया।”