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‘पैगंबर मुहम्मद न लिखना जानते थे, न पढ़ना… कुरान लिखने में कई गलती हुई वो अब तक ठीक नहीं किया गया’: मौलाना का ही सिर माँग रहे मुस्लिम कट्टरपंथी

पाकिस्तानी मौलाना तारिक मसूद पर इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद और कुरान के अपमान के आरोप लगे हैं। तारिक मसूद के एक बयान पर इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए हैं। वह मसूद के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगा रहे हैं। तारिक मसूद के माफी माँगने के बाद भी मामला शांत नहीं हो रहा। मौलाना तारिक मसूद इससे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुका है।

मौलाना तारिक मसूद का हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में मौलाना मसूद ने कथित तौर पर एक सभा में इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद की शैक्षणिक स्थिति पर टिप्पणी की। मौलाना तारिक मसूद ने कहा, “हमारे नबी के बारे में पूरी उम्मत का मानना है कि ना वो लिखना जानते थे ना पढ़ना। वह उम्मी (अरबी में इसका अर्थ अशिक्षित या ऐसे आदमी से होता है जो लिखना ना जानता हो) थे। कुरान कहता है कि पैगम्बर जो कुरान पेश कर रहे हैं, उसका एक इनके दाएँ हाथ ने नहीं लफ्ज लिखा है।”

आगे तारिक मसूद ने कहा, “जैसे ही कोई नई आयत बनती तो किसी को बुला रहे हैं, भाई लिखो। हमारे नबी ने जब कुरान लिखवाया, चूँकि आप लिखना-पढ़ना नहीं जानते थे तो कई बार लिखने वालों से कुरान में व्याकरण की गलती हुई। हमारे नबी ने उसको सही नहीं करवाया, आपको नहीं पता चला कि ये व्याकरण के रूप से गलत है, वो आज तक चला आ रहा है।”

तारिक मसूद ने इसके बाद कुरान की कुछ आयतों के उदाहरण दिए जिनमें वह मानते हैं कि गलतियाँ हैं। मसूद ने इसके बाद कहा कि इन गलतियों को कोई सुधार नहीं पाया क्योंकि अल्लाह ने बता दिया कि नबी उम्मी थे। इसने बताया कि हमने कुरान की हिफाजत की है।

तारिक मसूद के इस बयान पर पाकिस्तान में विवाद हो गया। उन पर कई अन्य मौलानाओं और आम लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने पैगम्बर और कुरान का अपमान किया है। लोगों ने कहा कि तारिक मसूद ने उन पर टिप्पणी करके एक सीमारेखा पार कर दी है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनके खिलाफ कई संगठनों ने कार्रवाई की माँग की।

तारिक मसूद का यह बयान वायरल होने के बाद उन्हें जान के लाले पड़ गए हैं। तारिक मसूद ने इसको लेकर माफ़ी भी माँगी है। तारिक मसूद ने एक वीडियो जारी करके कहा है कि वह अपने शब्द वापस ले रहे हैं और उनसे गलती हुई है। मौलाना तारिक मसूद ने कुरान का हवाला देकर माफ़ी माँगी है।

उन्होंने पिछले 48 घंटों में कई बार माफी माँगी है। उन्होंने ट्विटर पर भी एक बयान जारी किया है। मसूद ने कहा है कि वह नबी के अपमान के बारे में सोच तक नहीं सकते हैं।

माफ़ी के बाद भी तारिक मसूद के खिलाफ मामला ठंडा नहीं हो रहा है। लोग उनके ही पुराने बयानों को उनके खिलाफ उपयोग में ला रहे हैं। इन बयानों में मौलाना तारिक खुद ईशनिंदा करने वालों के खिलाफ कड़े कानून बनाने की माँग कर रहे हैं। एक और वीडियो में उन्हें ईशनिंदा करने वाले को मारने की वकालत करते तक सुना गया। इस वीडियो में वह कहते हैं कि अगर आप किसी को पैगम्बर मुहम्मद का अपमान करते सुने तो उसे मौत के घाट उतार दें।

मौलाना तारिक मसूद इससे पहले निकाह पर दिए बयानों को लेकर चर्चा में रहा है। पाकिस्तान में मौलाना तारिक मसूद पर ईशनिंदा का आरोप ऐसे समय में लगा है जब पिछले ही कुछ दिनों में दो लोगों की इन्हीं आरोपों पर हत्या हो चुकी है। पाकिस्तान में हाल ही में एक व्यक्ति को एक पुलिसवाले ने ही पुलिस हिरासत में मार दिया था।

उस व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप था। वहीं एक और मामले में एक डॉक्टर को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस ने कहा कि ईशनिंदा का आरोपित भागने का प्रयास कर रहा था, इसके बाद उसे मार दिया गया। पाकिस्तान में इन सभी पुलिस वालों का सम्मान किया गया।

इजरायल के एयर स्ट्राइक के बाद लेबनान छोड़कर भाग रहे लोग, हिजबुल्लाह के 1600 ठिकानों पर हमले: 492 की मौत, पेजर-वॉकी टॉकी ब्लास्ट के बाद डायरेक्ट अटैक

इजरायल ने इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह आतंकियों के पेजर में धमाका करने के बाद अब सीधे हमले चालू कर दिए हैं। इजरायल ने लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया है और उसके हथियारों को भी नष्ट कर दिया है। इजरायल के इस हमले में अब तक 400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने सोमवार (23 सितम्बर, 2024) को लेबनान के भीतर कई हमले किए। इजरायल ने लेबनान के भीतर 1600 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। यह सभी हिजबुल्लाह की पनाहगाह थे। इजरायल ने यह हमले उन ठिकानों पर किए जहाँ हिजबुल्लाह ने रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन छुपा रखे थे।

लेबनान ने कहा कि इजरायल के इन हमलों में 490 से अधिक लोगों की मौत हो गई जबकि 1600 से अधिक लोग घायल हुए। हिजबुल्लाह पर इजरायल के हमलों के कारण बड़ी संख्या में लोग इन इलाकों को छोड़ गए जहाँ हिजबुल्लाह के ठिकाने हैं। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर गाड़ियाँ लेकर भागते हुए दिखे।

इजरायल ने उन घरों की फोटो भी जारी की जिन पर हमला किया गया। इजरायल द्वारा जारी की गई फोटो में एक घर के भीतर मिसाइल रखी दिखती है। इजरायल ने कहा कि उसने हमला इसलिए किया क्योंकि हिजबुल्लाह पर उस पर हमले की तैयारी कर रहा था।

इजरायली सुरक्षा बलों के प्रवक्ता डेनियल हगारी ने कहा कि हिजबुल्लाह उत्तरी इजरायल में वह करने का प्रयास कर रहा था जो हमास ने अक्टूबर, 2023 में दक्षिणी इजरायल में किया था। इजरायल ने कहा कि हिजबुल्लाह इजरायली लोगों का नरसंहार करने की तैयारी में था।

इजरायल ने यह भी बताया कि उसने बेरुत के भीतर हमला तब किया जब हिजबुल्लाह के कमांडर एक हमले की तैयारी में जुटे हुए थे। इजरायल के इस हमले के बाद लेबनान के भीतर अफरा तफरी का माहौल है। कई ऐसी वीडियो सामने आई हैं जिनमें धुआँ उठता दिखता है।

हिजबुल्लाह ने भी इस हमले के जवाब में इजरायल के भीतर हमले किए हैं। हिजबुल्लाह ने इजरायल के भीतर लगभग 50 रॉकेट छोड़े हैं। हिजबुल्लाह ने इजरायल के भीतर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया है। हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच लड़ाई के कारण बेरुत में हवाई सेवाएं भी बंद हो गई हैं। इससे पहले इजरायल ने पेजर हमले भी किए थे।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया था। इस हमले में 1000 से अधिक लोग मारे गए थे। हिजबुल्लाह ने इस हमले का समर्थन किया था और लेबनान की तरफ से इजरायल को निशाना बनाया था। अब इजरायल हिजबुल्लाह पर कहर बरपा रहा है।

UP में 96 बीघा जमीन वक्फ बोर्ड से मुक्त: मंदिर के पास है भूमि, लेकिन 70 साल से अलाउद्दीन खिलजी के नाम पर कर रखा था कब्जा; अब सरकार के नाम हुई

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में हाल ही में एक बड़ा भूमि विवाद सुलझाया गया, जिसमें प्रशासन ने 96 बीघा जमीन को वक्फ बोर्ड के कब्जे से मुक्त करवा लिया। यह जमीन हिन्दुओं के एक प्रसिद्ध और पौराणिक धर्मस्थल, कड़ा धाम मंदिर के पास स्थित थी। भूमि विवाद कई दशकों से चला आ रहा था, जिसमें जमीन पर कब्जा अलाउद्दीन खिलजी के नाम पर दावा किया गया था।

इस प्रकरण में कोर्ट की सुनवाई और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद अंततः प्रशासन ने जमीन को ग्राम समाज के नाम पर दर्ज कर दिया। इस फैसले के बाद शासकीय अधिवक्ता ने शासन को 4 बिंदुओं पर सुझाव भेजा है। इसमें से अधिकतर सुझावों को शासन ने स्वीकार भी कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला कौशाम्बी जिले के कड़ा धाम इलाके का है। कड़ा धाम हिन्दुओं का एक प्रसिद्ध और पौराणिक धर्मस्थल है। इसी मंदिर के पास 96 बीघे जमीन पर लम्बे समय से विवाद था। मुस्लिम समुदाय के लोग इस पर कब्ज़ा जमाए हुए थे। एक स्थानीय निवासी सैयद नियाज अशरफ अली विवादित जमीन को अलाउद्दीन खिलजी के समय से जोड़ कर बयानबाजी करते थे। बकौल नियाज अशरफ वह भूमि अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में ख्वाजा कड़क शाह के नाम से माफीनामा पर दर्ज है।

नियाज अशरफ ने 1945 में दीवानी अदालत में मुकदमा दायर किया, जिसमें उन्होंने जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज करने की माँग की। हालाँकि, लम्बी सुनवाई के बाद अदालत ने इस दावे को खारिज कर दिया और जमीन को वक्फ संपत्ति मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद, 1952 में इस जमीन को आधिकारिक तौर पर ग्राम समाज के नाम पर दर्ज कर दिया गया।

करीब 24 साल की खामोशी के बाद, 1974 में नियाज अशरफ ने फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस बार भी अदालत ने सुनवाई के बाद जमीन को वक्फ संपत्ति मानने से इंकार कर दिया। यह दूसरा मौका था जब नियाज अशरफ का दावा खारिज कर दिया गया।

अदालत में 2 बार हारने के बावजूद नियाज़ ने हार नहीं मानी और वो कोशिशों में लगे रहे। साल 1979 में तत्कालीन चकबंदी अधिकारी ने इस जमीन को वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया। चकबंदी अधिकारी के फैसले से नाखुश कई स्थानीय निवासियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कौशाम्बी जिले के अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM न्यायिक) को मामले की सुनवाई करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान एडीएम ने दोनों पक्षों से सबूत तलब किए।

आखिरकार मजिस्ट्रेट ने जमीन के वक्फ संपत्ति होने वाले दावों को निराधार पाया। वक्फ बोर्ड इस केस में कोई भी ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। आखिरकार 2 दिसंबर 2022 को एडीएम (न्यायिक) ने वक्फ द्वारा काबिज़ इस भूमि को ग्राम सभा में दर्ज करने का आदेश दे दिया था।

इस आदेश के बाद भी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने में प्रशासन को लगभग डेढ़ साल का समय लगा। अंततः 2024 में प्रशासन ने सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया और जमीन को वक्फ बोर्ड के कब्जे से मुक्त करवा दिया। इस फैसले के बाद, जमीन अब आधिकारिक तौर पर ग्राम समाज के नाम पर दर्ज हो गई है।

इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद, कौशाम्बी के जिला शासकीय अधिवक्ता शिवमूर्ति द्विवेदी ने उत्तर प्रदेश शासन को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में उन्होंने जमीन को वक्फ बोर्ड के कब्जे से मुक्त कराने की पुष्टि की और शासन को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी भेजे। उनके अधिकांश सुझावों को शासन ने स्वीकार कर लिया है।

इस प्रकरण की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि वक्फ बोर्ड ने इस भूमि पर कब्जा बनाए रखने के लिए बार-बार अदालत का सहारा लिया, लेकिन हर बार उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा। 1945 में पहला मुकदमा दायर किया गया, जिसमें अदालत ने भूमि को वक्फ संपत्ति मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद 1974 में फिर से मामला उठाया गया और फिर से वक्फ बोर्ड की हार हुई। बावजूद इसके, 1979 में चकबंदी अधिकारी ने इसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया, लेकिन स्थानीय निवासियों के विरोध के बाद यह निर्णय भी पलट दिया गया और अंतत: ये जमीन खाली करा ली गई है।

कड़ा धाम का धार्मिक महत्व

कड़ा धाम हिन्दुओं के लिए एक पवित्र स्थल है, जो प्राचीन काल से धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस मंदिर में हर साल लाखों भक्त आते हैं और यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र है। इसलिए, मंदिर के पास स्थित भूमि को लेकर विवाद ने न केवल कानूनी बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी हासिल किया।

कौशाम्बी जिले में 96 बीघा जमीन के विवाद को सुलझाना प्रशासन के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से भी इसका बड़ा प्रभाव है। वक्फ बोर्ड की लगातार हार और जमीन को ग्राम समाज के नाम पर दर्ज किए जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायालय ने सभी तथ्यों और प्रमाणों की गहन जांच के बाद निष्पक्ष निर्णय लिया।

अब तिरुपति के प्रसाद में तंबाकू मिलने का दावा, महिला भक्त का Video वायरल: ‘बीफ वाले लड्डू’ को लेकर पहले से ही विवादों में है मंदिर

तिरुपति के प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर मंदिर के एक भक्त ने दावा किया है कि उन्हें प्रसाद के रूप में मिले लड्डू में तंबाकू मिला है। यह घटना उस समय सामने आई है जब लड्डुओं में पशुओं की चर्बी पाए जाने के बाद से आंध्र प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक विवाद छिड़ा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, खम्मम जिले की रहने वाली डोंथु पद्मावती 19 सितंबर 2024 को तिरुपति मंदिर गई थी। उनका दावा है कि उन्हें प्रसाद के रूप में मिले लड्डू में कागज में लिपटा तंबाकू मिला। डोंथु पद्मावती ने बताया कि 19 सितंबर 2024 को तिरुपति मंदिर की यात्रा के बाद जब वह लड्डू अपने परिवार और पड़ोसियों में बाँटने जा रही थीं, तब उन्होंने लड्डू के अंदर छोटे कागज में लिपटा तंबाकू पाया।

पद्मावती ने कहा, “जैसे ही मैं लड्डू बाँटने जा रही थी, मैं यह देखकर दंग रह गई कि उसमें तंबाकू के टुकड़े कागज में लिपटे हुए थे। प्रसाद को पवित्र माना जाता है, और उसमें ऐसी मिलावट होना दिल दहला देने वाला है।”

यह खुलासा तिरुपति के लाखों भक्तों के बीच गहरी चिंता का विषय बन गया है। इससे पहले भी लड्डुओं में इस्तेमाल किए गए घी में पशुओं की चर्जी मिलने के आरोपों ने आंध्र प्रदेश में राजनीतिक माहौल गरमा दिया था। तिरुपति के लड्डू, जो भक्तों के लिए श्रद्धा और पवित्रता का प्रतीक माने जाते हैं, इन विवादों के बाद उनकी शुद्धता पर सवाल उठने लगे हैं। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD), जो मंदिर का प्रबंधन करता है, के गुणवत्ता नियंत्रण उपायों पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालाँकि बाद में प्रसाद की शुद्धता बहाल कर दी गई।

क्या है विवाद?

यह विवाद तब बढ़ा जब आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में दावा किया कि पिछले जगन मोहन रेड्डी सरकार के दौरान तिरुपति मंदिर में प्रसाद के रूप में दिए गए लड्डुओं में घटिया सामग्री, जिसमें पशु वसा भी शामिल थी, पाई गई। नायडू ने गुजरात की एक निजी लैब की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि लड्डुओं में “बीफ टैलो” (गाय की चर्बी), “लार्ड” (सूअर की चर्बी) और मछली का तेल मिला हुआ था। इस दावे ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी।

हालाँकि, पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि उनके शासनकाल में ऐसा कोई उल्लंघन नहीं हुआ। रेड्डी ने नायडू पर भगवान के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उन्हें “आदतन झूठा” बताया। इस पूरे विवाद के कारण तिरुपति मंदिर के भक्तों में भ्रम और चिंता का माहौल है, और यह घटना लड्डू की शुद्धता और धार्मिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

‘चंद पैसों की नौकरी के लिए अपना धर्म भ्रष्ट नहीं करूँगा’: अयोध्या की कोका-कोला फैक्ट्री में हिंदू कर्मचारियों को कलावा काटने को किया मजबूर, Video वायरल पर होने ‘खाद्य सुरक्षा’ का बहाना

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में स्थित कोका-कोला की फैक्ट्री ‘अमृत बॉटलर्स’ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक सुरक्षा गार्ड पर फैक्ट्री में काम करने वाले हिंदू कर्मचारियों के कलावे काटने का आरोप लगाया जा रहा है।

यह मामला सोमवार (23 सितंबर 2024) को सामने आया और इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि गार्ड कर्मचारियों के हाथों में बंधे कलावे काटते हुए नजर आ रहा है। इसके चलते फैक्ट्री प्रबंधन पर धार्मिक भावनाओं के अपमान का आरोप लग रहा है।

यह घटना अयोध्या जिले के थानाक्षेत्र पूरा कलंदर स्थित कोका-कोला की फैक्ट्री में घटी। वीडियो में दिखाया गया है कि कई कर्मचारियों के हाथों से गार्ड ने कलावे काट दिए। कलावा, जिसे हिंदू धर्म में धार्मिक पहचान और आस्था का प्रतीक माना जाता है, को काटे जाने से वहाँ के कर्मचारियों में रोष फैल गया। वीडियो में कर्मचारियों और गार्ड के बीच हुई बहस को भी देखा जा सकता है, जिसमें कर्मचारियों ने अपने धार्मिक अधिकारों के उल्लंघन की बात की है।

वहीं, वीडियो में कलावा काटते दिख रहे सिक्योरिटी गार्ड ने जवाब दिया कि “ऊपर से ऑर्डर आता है, जिसका वो पालन करता है।” इस बीच लोगों ने सुपरवाइजर को बुलाने की बात कही। सुपरवाइजर के आने के बावजूद समाधान नहीं निकला। वीडियो बनाने वाले एक व्यक्ति ने गुस्से में कहा, “जहाँ हिन्दू धर्म का अपमान हो रहा हो, वहाँ मुझे काम ही नहीं करना। मैं चंद पैसों के लिए अपना धर्म भ्रष्ट नहीं कर सकता।” उन्होंने यह भी साफ किया कि वे नौकरी छोड़ने को भी तैयार हैं लेकिन अपने धार्मिक प्रतीकों का अनादर नहीं सहेंगे।

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, फैक्ट्री प्रबंधन को सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा। फैक्ट्री के जनसंपर्क अधिकारी अर्जुन दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कलावा काटने का आदेश गुणवत्ता बनाए रखने के लिए दिया गया था। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता है, ताकि उत्पाद में किसी प्रकार की अशुद्धि न आए।

अर्जुन दास के अनुसार, यदि कलावा या कोई धागा गलती से बोतल में चला जाता है, तो यह कम्पनी के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। फैक्ट्री के अधिकारियों ने यह भी दावा किया है कि इस वीडियो को वायरल कर संस्थान की बदनामी करने की कोशिश की गई है। अर्जुन दास का कहना है कि इस वीडियो के पीछे कुछ लोग हैं जो कंपनी की छवि को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि इस नियम के तहत कर्मचारियों को घड़ी, अंगूठी, और अन्य पहनावे भी हटाने पड़ते हैं। लेकिन कर्मचारियों का कहना था कि सिर्फ उन लोगों का सामान हटाया जाए जो सीधे तौर पर मशीनों के पास काम करते हैं, सभी कर्मचारियों पर यह नियम लागू करना उचित नहीं है।

विवाद बढ़ता देख फैक्ट्री प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सुरक्षा गार्ड को बर्खास्त कर दिया। फैक्ट्री के मुख्य सुरक्षा अधिकारी सच्चिदानंद तिवारी ने कहा कि वे खुद सनातनी हैं और कंपनी में सभी धर्मों का पूरा सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह घटना गलतफहमी की वजह से बढ़ी है और इसका उद्देश्य किसी भी धर्म का अपमान नहीं था। फिलहाल, अब तक इस मामले में किसी प्रकार की पुलिस कार्रवाई नहीं की गई है।

AIMIM नेता ने उकसाया, मुंबई में जमा हो गए लाखों मुस्लिम कट्टरपंथी: लगाए ‘सर तन से जुदा’ के नारे, रामगिरी महाराज-नितेश राणे के बयान पर कर रहे बवाल

इस्लामी कट्टरपंथियों ने फिर एक बार खुलेआम हत्या और सर काटने की धमकियों के साथ देश की आर्थिक आर्थिक राजधानी को पंगु बनाने की कोशिश की है। पूरे महाराष्ट्र से लाखों की तादाद में मुस्लिम मुंबई पहुँचे हैं। यहाँ उनकी भीड़ ईशनिंदा के आरोप लगा कर ‘गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ के नारे लगा रही है। कट्टरपंथी मुस्लिमों का यह हुजूम भाजपा नेता नितेश राणे और संत रामगिरी महाराज के खिलाफ यह भड़काऊ नारे लगा रहा है।

इनकी अगुवाई AIMIM का नेता इम्तियाज जलील कर रहा है। सोशल मीडिया पर मुंबई के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में दिखता है कि मुंबई की सरहदों पर लाखों की भीड़ जमा है।

इसमें हजारों की तादाद में गाड़ियाँ भी हैं। गाड़ियों पर हरे झंडे फहराए जा थे हैं। इस भीड़ में कई मौलवी भी शामिल हैं। एक मौलवी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में मौलवी से कई लोग हाथ मिला रहे हैं। मौलवी का नाम सैयद मोईन बताया जा रहा है। उसके आसपास मुस्लिम युवकों की भीड़ जमा है।

मौलवी के पास जमा मुस्लिम भीड़ पहले नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर और फिर सर तन से जुड़ा के नारे लगाती है। मौलवी इन्हें नहीं रोकता और काफिला आगे बढ़ जाता है। दूसरे वीडियो में दिखता है कि एक-एक गाड़ी पर 10-10 लोग बैठ कर मुंबई की तरफ बढ़ रहे हैं।

सामने आया है कि मुस्लिमों की इस भीड़ को मुंबई ले जाने का ऐलान AIMIM नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने किया है। उसने महाराष्ट्र के मुस्लिमों को ‘चलो मुंबई’ का नारा दिया है। मुस्लिमों की इस भीड़ को रोकने के लिए मुंबई पुलिस तैनात है और मुंबई की सीमाओं को सील कर रही है। ठाणे की सीमाओं पर भी पुलिस बंदोबस्त किया गया है।

मुस्लिमों की यह भीड़ स्वामी रामगिरी महाराज और भाजपा नेता नितेश राणे के बयान को लेकर मुंबई पहुँची है। स्वामी रामगिरी महाराज ने बीते दिनों इस्लाम को लेकर एक सभा में कुछ कहा था जिसे मुस्लिमों ने इस्लाम की तौहीनी बता दिया और उनकी गिरफ्तारी की माँग करने लगे। स्वामी रामगिरी महाराज को मिल रही धमकियों के बाद नितेश राणे ने उनका बचाव किया था।

नितेश राणे ने कहा था कि यदि स्वामी रामगिरी महाराज को कोई नुकसान पहुँचाया गया तो हिन्दू उसका जवाब देंगे। नितेश राणे के एक दो और बयानों को लकर भी मुस्लिम मुंबई पर कब्जा करने चले आए हैं। मुंबई में पुलिस ने कई रूट भी बंद किए हैं।

वहीं विधायक नितेश राणे इस हुजूम से बेफिक्र नजर आ रहे हैं। नितेश राणे ने मंगलवार (24 सितम्बर, 2024) को एक ट्वीट किया है। उन्होंने इसमें हलके मूड में अपने नाश्ता करने की बात लिखी है।

गौरतलब है कि इससे पहले 2022 में सर तन से जुदा के नारे भाजपा की पूर्व नेता नुपुर शर्मा के विरुद्ध लगाए गए थे। नुपुर शर्मा को तब से सुरक्षा के साथ रहना पड़ता है। हिन्दू नेता कमलेश तिवारी के विरुद्ध भी यही नारे लगाए गए थे, बाद में उनकी गला रेत कर हत्या कर दी गई थी।

शेर खान ने किया श्रीराम मंदिर पर हमला, गेट तोड़ने और पुजारी को मंदिर न खोलने की धमकी: मथुरा पुलिस के ‘मानसिक विक्षिप्त’ बयान पर गुस्से में हिंदू

मथुरा के श्रीराम मंदिर में मुस्लिम युवक शेर खान ने पुजारी पर हमला किया और मंदिर में ईंट-पत्थर फेंके। यह घटना तब हुई जब मंदिर के पुजारी अरुण चौधरी सोमवार (23 सितंबर 2024) की सुबह मंदिर की सफाई कर रहे थे। तभी शेर खान नाम के हमलावर ने ईंट-पत्थर फेंककर मंदिर पर हमला किया और महंत को धमकी दी कि वे मंदिर न खोलें।

मथुरा की घटना

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मथुरा के राया थाना इलाके में स्थित श्रीराम मंदिर पर शेर खान नामक युवक ने हमला किया। मंदिर की सफाई करते समय शेर खान नाम का युवक पहुँचा और पुजारी को धमकाने लगा। यही नहीं, पुजारी अरुण चौधरी को शेर खान ने साफ तौर पर कहा कि वो अगले दिन से मंदिर को खोले ही न, वर्ना अंजाम बुरा होगा।

शेर खान ने दावा किया कि मंदिर उसका है और अगली बार इसे खोलने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पुजारी ने हमले के बाद मंदिर के अंदर छुपकर अपनी जान बचाई और पुलिस को सूचित किया। इस दौरान शेर खान ने मंदिर के गेट को तोड़ने की कोशिश की और जमकर गाली-गलौच की।

मौके पर पुलिस पहुँचती, उससे पहले ही शेर खान फरार हो गया। मौके पर पहुँचे पुलिस कर्मियों ने भी पुजारी से बदतमीजी की, जिसके बाद स्थानीय लोग भड़क गए। सूचना पर एसपी देहात त्रिगुन विसेन क्षेत्राधिकारी महावन भूषण वर्मा मौके पर पहुँचे और गलत भाषा का प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया।

वहीं, घटना के बाद पुलिस ने हमलावर शेर खान को गिरफ्तार कर लिया और उसे मानसिक विक्षिप्त करार दिया। इस दावे पर हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है।

गुस्साए लोगों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू धार्मिक स्थल पर हमला किया हो और उसे मानसिक विक्षिप्त बताकर बचाने का प्रयास किया गया हो।

मानसिक विक्षिप्तता का पैटर्न

भारत में हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले हमलों की घटनाएँ हाल के वर्षों में बढ़ी हैं, और कई मामलों में पुलिस या संबंधित लोग हमलावरों को मानसिक रूप से विक्षिप्त बताकर उनके बचाव का प्रयास करते दिखते हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा की घटना में भी हमलावर शेर खान को मानसिक विक्षिप्त करार दिया गया।

मथुरा की यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है। ऐसी घटनाएँ आम होती जा रही हैं, और एक पैटर्न दिख रहा है कि मुस्लिम समुदाय के लोग जब हिंदू धार्मिक स्थलों पर हमला करते हैं, तो उन्हें मानसिक विक्षिप्त बताकर बचाने की कोशिश की जाती है। कई उदाहरण हमारे सामने हैं, जिसमें हिंदू धार्मिक स्थलों पर हुए हमलों में मुस्लिम हमलावरों को मानसिक विक्षिप्त बताकर उनका बचाव किया गया। कुछ ऐसे ही मामलों पर नजर डालते हैं:

शिवमोग्गा की घटना (2024): प्राण-प्रतिष्ठा के उत्सव के दौरान एक बुर्काधारी महिला ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए। जब उसके परिजनों से पूछा गया, तो उन्होंने उसे मानसिक रूप से बीमार बताया।

मोहम्मद मोइउद्दीन का हमला (2023): बिहार में ईद के दिन मोइउद्दीन ने मंदिर में घुसकर देवी के सामने पेशाब किया। पुलिस ने उसे मानसिक विक्षिप्त बताकर बचाने का प्रयास किया।

जावेद का उन्नाव महादेव मंदिर पर हमला (2023): जावेद ने उन्नाव के महादेव मंदिर में हमला किया और 8 लोगों को घायल कर दिया। मीडिया ने उसे मानसिक विक्षिप्त बताकर पेश किया।

शाह आलम का दुर्गा पूजा पंडाल में प्रवेश (2023): एक व्यक्ति ने दुर्गा पूजा पंडाल में कुरान लेकर प्रवेश किया और लोगों ने उसे पकड़ लिया। पुलिस ने उसे मानसिक रूप से बीमार बताकर छोड़ दिया।

आरा शेख का शिवलिंग पर पेशाब करना (2023): पश्चिम बंगाल में एक युवक ने मंदिर में शिवलिंग पर पेशाब किया और इसका वीडियो वायरल हुआ। पुलिस ने उसे मानसिक विक्षिप्त बताकर कार्रवाई नहीं की।

सद्दाम का काली मंदिर में हमला (2023): उत्तराखंड में सद्दाम ने काली मंदिर में पेशाब किया। पुलिस ने उसे मानसिक रूप से बीमार बताकर बचाने का प्रयास किया, जबकि उसे पकड़ने के लिए 200 से ज्यादा सीसीटीवी की फुटेज छाननी पड़ी।

ऐसे हमलों की बढ़ती घटनाएँ

साल 2022 में भी कई ऐसी घटनाएँ सामने आईं, जहाँ मुस्लिम समुदाय के हमलावरों को मानसिक विक्षिप्त बताकर बचाने की कोशिश की गई। जैसे कि गोरखपुर में अहमद मुर्तजा अब्बासी ने चाकुओं से हमला किया और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उसका बचाव मानसिक विक्षिप्त बताकर किया, जबकि बाद में उसे आतंकवादी संगठनों से जुड़ा पाया गया। वो आईएसआईएस जैसे दुर्दांत आतंकवादी संगठन से जुड़ने वाला था।

राँची में मंदिर के गेट का ताला खोलकर फिर बजरंग बली की मूर्ति तोड़ने वाला रमीज अहमद फरार हो गया। आराम से अपनी जिंदगी जीने लगा। सीसीटीवी फुटेज में उसका चेहरा दिखा, तो पकड़ा गया। लेकिन जो रमीज मंदिर का ताला तोड़कर मूर्ति तोड़ने के समय पूरी तरह से होश में था, वो राँची की पुलिस मानसिक विक्षिप्त बताने लगी।

कई लोग सवाल उठाते हैं कि आखिर क्यों हर बार मुस्लिम हमलावरों को मानसिक विक्षिप्त बताकर उनके अपराध को हल्का किया जाता है। आप बताइए, क्या सिर्फ मानसिक विक्षिप्त व्यक्ति ऐसा कर सकता है? ऐसे में पुलिस और प्रशासन पर यह आरोप लगने लगे हैं कि वे धार्मिक हमलों पर ढील बरत रहे हैं, जिससे समुदायों के बीच तनाव बढ़ रहा है।

सांप्रदायिक तनाव न बढ़े, इसके लिए सहते रहें हिंदू?

इस पूरे मामले के पीछे राजनीतिक और सामाजिक कारण भी हो सकते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मुस्लिम हमलावरों को मानसिक विक्षिप्त बताकर उनके समुदाय की छवि को बचाने का प्रयास किया जाता है, ताकि सांप्रदायिक तनाव न बढ़े। लेकिन यह रणनीति हिंदू समुदाय में असंतोष पैदा कर रही है। वे इसे अपने धार्मिक स्थलों पर हमला और अपनी मान्यताओं का अपमान मानते हैं।

मथुरा में श्रीराम मंदिर पर हमला और उससे जुड़ी मानसिक विक्षिप्तता की राजनीति केवल एक घटना नहीं है, बल्कि एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा है, जो बार-बार देखा जा रहा है। हर बार जब मुस्लिम समुदाय से संबंधित कोई व्यक्ति हिंदू धार्मिक स्थलों पर हमला करता है, उसे मानसिक विक्षिप्त बताकर बचाने का प्रयास किया जाता है। यह स्थिति दोनों समुदायों के बीच तनाव को बढ़ाने का कारण बन रही है, और इसे जल्द ही सुलझाने की आवश्यकता है।

मदरसे की जमीन का आवंटन रद्द करवाने सड़क पर उतरे हिंदू, विरोध में उदयपुर के कई बाजार बंद: रजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने दिखाई थी ‘मजहबी दरियादिली’

राजस्थान के उदयपुर में साल 2021 में तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने एक मदरसे के लिए जमीन आवंटित की थी। अब हिन्दू समुदाय के लोगों ने इस आवंटन का विरोध करना शुरू कर दिया। आवंटन निरस्त करने की माँग को ले कर बाजार बंद रखे गए। सोमवार (23 सितंबर 2024) को SDM को ज्ञापन दे कर सड़क पर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। भाजपा सांसद सीपी जोशी ने भी जनभावनाओं के सम्मान का ऐलान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला उदयपुर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूरी पर स्थित मावली कस्बे का है। साल 2021 में राज्य में जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी, तब यहाँ एक मदरसे के लिए लगभग 4 बीघा 16 बिस्वा जमीन आवंटित कर दी गई थी। हालाँकि तब से लोगों का आरोप है कि मदरसे के नाम पर दी गई जमीन जमीन जलभराव क्षेत्र में मौजूद है। सोमवार को इस आवंटन को रद्द करने की माँग के साथ सर्व समाज के लोग मावली में एकजुट होने लगे। तमाम प्रदर्शनकारियों के हाथों में बजरंग बली के चित्रों वाले भगवा ध्वज थे।

सर्व समाज के बैनर तले हुए हजारों लोगों के इस जमावड़े को देखते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। प्रदर्शन की घोषणा पहले ही कर दी गई थी। इस वजह से स्कूलों में भी छुट्टी कर दी गई थी। प्रदर्शन का असर सिर्फ बाजार में ही नहीं बल्कि आसपास के गाँवों में भी साफ दिखा। ग्रामीण इलाकों के भी लोग बड़ी तादाद में प्रदर्शन में शामिल हुए थे। पास ही स्थित घास तहसील में भी इस बंदी का असर दिखा। वहाँ के लोगों ने भी मावली के लोगों के समर्थन का एलान किया है।

लोगों ने मावली के पुराने बस अड्डे से एक रैली निकाली जो बाजार से घूमती हुई SDM कार्यालय पर जा कर खत्म हुई। कार्यालय के पास लोगों ने सड़क पर बैठ कर हनुमान चालीसा पढ़ी गई। बाद में ADM प्रशासन दीपेंद्र सिंह राठौर को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मदरसे के लिए आवंटित जमीन को रद्द करने की माँग की गई है।

इस प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद सीपी जोशी ने मीडिया से बात की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की माँग का समर्थन किया और मावली में किसी भी प्रकार के मदरसे को गैर-जरूरी बताया। भाजपा सांसद ने ऐलान किया कि मदरसे के लिए जमीन का जो आवंटन हुआ है उसे रद्द करवाया जाएगा।

सीपी जोशी ने कहा कि ये भाजपा की सनातनी ​सरकार है जिसमें ऐसा कोई काम नहीं होगा जिस से भविष्य में किसी को दिक्कत हो। लोगों का विरोध देखते हुए मावली SDM मनसुखराम डामोर ने अपनी अनुशंसा जिलाधिकारी को भेज दी है। इस अनुशंसा में उन्होंने जमीन का आवंटन निरस्त करने की सिफारिश की है।

तिरुपति मंदिर में 4 घंटे चला ‘महाशांति यज्ञ’, रसोई का शुद्धिकरण-घी सिस्टम बदला: ‘बीफ वाले लड्डू’ को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी भी पहुँचे सुप्रीम कोर्ट, कहा- अदालत की निगरानी में हो जाँच

तिरुपति मंदिर के प्रसादम लड्डू में पशु चर्बी वाले घी और मछली तेल की मौजूदगी की रिपोर्ट के बाद शुद्धिकरण हवन किया गया है। मंदिर के पुजारियों और धर्मगुरुओं ने यहाँ मंदिर के साथ ही उस जगह को भी शुद्ध किया जहाँ लड्डू बनते हैं। वहीं इस मामले में अब तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के पूर्व मुखिया सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए हैं। उन्होंने लड्डू में मिलावट के आरोपों को खारिज किया है। इसी मामले को लेकर पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी सुप्रीम कोर्ट पहुँचे हैं।

मंदिर अब शुद्ध, श्रद्धालु रहें निश्चिंत

सोमवार (23 सितम्बर, 2024) को सुबह 6 बजे से तिरुपति मंदिर में यह शुद्धिकरण शांति हवन चालू हुआ। इस हवन में मंदिर के प्रमुख पुजारी, यहाँ के धर्मगुरु और साथ ही TTD के अधिकारी भी शामिल हुए। पुजारियों ने कहा है कि उनकी यह पूजा लड्डुओं में हुई गड़बड़ी से आए बुरे प्रभाव को खत्म करेगी और साथ ही श्रद्धालुओं का कल्याण करेगी।

मंदिर के पुजारियों ने कहा है कि अभी मंदिर में सब कुछ पूरी तरीके से शुद्ध किया जा चुका है और अब चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मंदिर आकर दर्शन करने और लड्डू ग्रहण करने की बात कही है। TTD के अधिकारी श्यामला राव ने बताया कि यह पूजा सुबह 6 बजे से चालू हुई थी और 10 बजे तक चली।

श्यामला राव ने बताया कि शांति हवन और शुद्धिकरण का मुख्य फोकस मंदिर की रसोई में था जहाँ लड्डू तैयार किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ भी धर्मगुरुओं ने शुद्धिकरण किया है। उन्होंने यह भी बताया कि अब मंदिर में गाय का घी लिए जाने का सिस्टम भी बदल दिया गया है, इससे लड्डुओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

TTD ने मंदिर में हुई पूजा की तस्वीरें भी जारी की हैं। TTD के पुजारी इन तस्वीरों में मंदिर के अलग-अलग हिस्सों को शुद्ध करते दिखते हैं। इन तस्वीरों में पुजारी लड्डुओं और उनके बनाने वाले सामान पर भी शुद्धिकरण के लिए जल छिड़कते दिखे हैं।

इससे पहले TTD ने बताया था कि वह जल्द ही घी की टेस्टिंग के लिए स्वयं ही क्षमताएँ विकसित कर लेगी। इसके लिए उसे डेयरी विकास बोर्ड से मशीनें मिल रही हैं। इसके अलावा मंदिर में एक्सपर्ट की टीम भी बुलाई गई है, यह घी के उपयोग से पहले उसको परखेगी।

सुब्रमण्यम स्वामी पहुँचे सुप्रीम कोर्ट

तिरुपति लड्डू में चर्बी और मछली तेल के मामले के सामने के बाद सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ भी लग चुकी हैं। भाजपा नेता और पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका लगाई है। स्वामी ने माँग की है कि घी में मिलावट सम्बन्धी दावों की जाँच के लिए कमिटी का गठन किया जाए।

उन्होंने माँग की है कि इस कमिटी की निगरानी सुप्रीम कोर्ट स्वयं करे। सुब्रमण्यम स्वामी ने माँग की है कि मंदिर में घी कहाँ से आता है और किस्से आपूर्ति होती है, इस बात को लेकर आंध्र प्रदेश एक रिपोर्ट दाखिल करे। स्वामी ने माँग की है कि इसको लेकर आंध्र प्रदेश को निर्देश दिए जाएँ।

सुब्रमण्यम स्वामी से पहले हिन्दू सेना के कुलदीप सिंह यादव ने भी इस मामले में जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई है। उन्होंने कहा है कि प्रसाद में चर्बी की मिलावट से करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का अपमान हुआ है। उन्होंने माँग की है कि इस मामले में एक SIT गठित की जाए जो पूरी जाँच करे। सुप्रीम कोर्ट में अभी इन याचिकाओं की सुनवाई होनी बाकी है।

पूर्व चेयरमैन का दावा- नहीं हुई कोई गड़बड़ी

सुप्रीम कोर्ट में TTD के पूर्व चेयरमैन और YSRCP के पूर्व सांसद YV सुब्बा रेड्डी ने भी एक जनहित याचिका लगाई है। वह जगन मोहन रेड्डी की सरकार में TTD के मुखिया थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई जनहित याचिका में दावा किया है कि लड्डुओं को बनाने में गड़बड़ घी इस्तेमाल नहीं हुआ है।

रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में YSRCP सरकार के दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए उठाए गए क़दमों की बात भी की है। उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर आरोप लगाया है कि वह इस मामले में आरोप लगाकर करोड़ों हिन्दुओं की आस्था को चोटिल कर रहे हैं।

उन्होंने याचिका में कहा, “आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की हैसियत से तिरुमाला श्री वेंकटेश्वर स्वामी के पवित्र प्रसाद ‘लड्डू’ में इस्तेमाल किए जाने वाले घी में बाहरी तत्व मिलाए जाने के आरोप लगाए गए हैं, जिससे लाखों हिंदू भक्तों और हिंदू समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उनके कार्यों से मंदिर की पवित्रता, प्रतिष्ठा और आस्था को अपूर्णीय क्षति पहुँची है।”

रेड्डी ने दावा किया है कि लड्डू या अन्य किसी प्रसाद में गड़बड़ घी हो ही नहीं सकता क्योंकि जैसे ही घी से भरा ट्रक मंदिर पहुँचता है तो TTD का एक अधिकारी उसकी जाँच करता है। रेड्डी ने कहा कि ऐसे में यह दावा करना गलत है कि यहाँ प्रसाद में गड़बड़ घी का इस्तेमाल हुआ होगा।

रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट से माँग की है कि वह इस मामले में स्वतंत्र जाँच का आदेश दे। उन्होंने माँग की है कि इस जाँच की निगरानी या तो कोर्ट स्वयं करे या फिर किसी रिटायर्ड जज के नेतृत्व में इस मामले के विशेषज्ञों की टीम इसकी जाँच करे। रेड्डी ने यह भी माँग की है कि बोर्ड घी के बारे में एक रिपोर्ट तैयार करे।

गौरतलब है कि हाल ही में तिरुपति मंदिर के प्रसाद के रूप में बाँटे जाने वाले लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी और मछली के तेल के उपयोग की बात कही गई थी। एक लैब से जाँच में इसकी पुष्टि भी हुई थी। आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार ने बताया कि यह कारनामा पूर्ववर्ती जगन मोहन रेड्डी सरकार में हुआ।

दिल्ली की जिस Rau IAS के बेसमेंट में डूबकर मर गए 3 छात्र, उस एकेडमी के CEO और कोर्डिनेटर को मिली जमानत: ₹2.5 करोड़ जमा करने का आदेश

दिल्ली के राजेंद्र नगर में स्थित राव IAS स्टडी सर्कल के बेसमेंट में जलभराव के कारण तीन UPSC अभ्यर्थियों की मौत के मामले में कोचिंग सेंटर के CEO अभिषेक गुप्ता और कोऑर्डिनेटर देशपाल सिंह को 7 दिसंबर 2024 तक अंतरिम जमानत मिल गई है। इस दौरान उन्हें 2.5 करोड़ रुपये का जुर्माना रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास जमा करना होगा। घटना 27 जुलाई 2024 की है, जब भारी बारिश के बाद बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्र डूब गए थे।

राउज एवेन्यू कोर्ट की प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज अंजू बजाज चंदना ने इस मामले में CEO अभिषेक गुप्ता और कोऑर्डिनेटर देशपाल सिंह को जमानत दी। इसके साथ ही अदालत ने एक शर्त लगाई है कि अभिषेक गुप्ता को 2.5 करोड़ रुपये का जुर्माना जमा करना होगा, जो 30 नवंबर 2024 तक दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर के नियंत्रण में रेड क्रॉस सोसाइटी को दिया जाएगा।

यह मामला 27 जुलाई 2024 का है, जब दिल्ली के पुराने राजेंद्र नगर इलाके में स्थित राव के IAS स्टडी सर्कल के बेसमेंट में तीन UPSC अभ्यर्थियों की डूबने से मौत हो गई थी। भारी बारिश के बाद इलाके में जलभराव हो गया था, जिससे बेसमेंट में पानी भर गया था। यह बेसमेंट कोचिंग सेंटर के रूप में उपयोग हो रहा था, जो नियमों के अनुसार अवैध था।

इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में चार जमीन मालिकों को भी जमानत दी थी, जिन्होंने इस अवैध बेसमेंट को कोचिंग सेंटर के रूप में उपयोग करने की अनुमति दी थी। हाई कोर्ट ने इन चार मालिकों को 5 करोड़ रुपये का जुर्माना रेड क्रॉस सोसाइटी में जमा करने का आदेश दिया था। अदालत ने दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर से एक समिति बनाने का भी अनुरोध किया था, जो रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की निगरानी में दिल्ली में सभी अवैध कोचिंग सेंटरों पर रोक लगाने का काम करेगी, खासकर उन केंद्रों पर जो बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं।

हाई कोर्ट ने इस मामले में CBI को निर्देश दिया कि वह इलाके में जलभराव की स्थिति और उस दिन की बारिश का डेटा जमा करे। इससे यह पता चल सके कि इतनी गंभीर घटना के पीछे मुख्य कारण क्या थे। यह भी सामने आया कि कोचिंग सेंटर का संचालन अवैध था, क्योंकि बिना अनुमति के बेसमेंट का उपयोग किया जा रहा था।

ट्रायल कोर्ट ने पहले चार जमीन मालिकों की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनकी जिम्मेदारी इस अवैध कोचिंग सेंटर के संचालन से जुड़ी है। जमीन मालिकों ने बेसमेंट कोचिंग सेंटर के लिए अवैध रूप से किराए पर दिया था, जिससे छात्रों की सुरक्षा में लापरवाही हुई और इस त्रासदी का कारण बना।

राव IAS स्टडी सर्कल की इस घटना के बाद दिल्ली के अन्य कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा और वैधता पर भी सवाल उठने लगे। एक और लोकप्रिय कोचिंग सेंटर, दृष्टि IAS, को भी सुरक्षा मानकों की कमी के कारण सील कर दिया गया। यह मामला उन समस्याओं को उजागर करता है जो दिल्ली के राजेंद्र नगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में अवैध कोचिंग सेंटरों के संचालन से उत्पन्न होती हैं। UPSC की तैयारी करने वाले हजारों छात्र इस इलाके में रहते हैं और विभिन्न कोचिंग सेंटरों में अध्ययन करते हैं, लेकिन इन सेंटरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस मामले में दोनों आरोपितों को फिलहाल जमानत मिल चुकी है, लेकिन उनके खिलाफ जाँच और कानूनी कार्यवाही जारी है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि इस मामले में जुड़े सभी पक्षों पर जुर्माना लगाया जाए और यह धनराशि रेड क्रॉस सोसाइटी में जमा कराई जाए। साथ ही, हाई कोर्ट की दिशा में बने इस समिति के तहत सभी अवैध कोचिंग सेंटरों पर नजर रखी जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।