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असम के ईसाई स्कूल में बच्चों को जबरन बीफ खिलाने पर FIR दर्ज, अभिभावकों ने किया प्रदर्शन: शिकायत पर स्कूल से निकालने की धमकी

असम के कामरूप में एक ईसाई स्कूल में स्थानीय हिन्दू बच्चों को कथित तौर पर बीफ खिलाया गया। स्कूल प्रशासन से जब इसकी शिकायत की गई तो उन्होंने मामले का संज्ञान लेने के बजाय छात्रों को ही धमकी दी। यह मामला जब बच्चों के अभिभावकों के पास पहुँचा तो उन्होंने FIR करवाई। उन्होंने स्कूल के बाहर इस मामले में प्रदर्शन भी किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कामरूप के अन्धेरीजुली में स्थित ईसाई मिशनरी कार्मेल स्कूल में यह घटना हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि गुरुवार (19 सितम्बर, 2024) को स्कूल में भोजन के समय के दौरान कुछ छात्रों को जबरन बीफ खिलाया गया। बीफ खिलाने का आरोप स्कूल में पढ़ने वाले मणिपुरी छात्रों पर लगाया गया है।

स्थानीय रिपोर्ट में बताया गया कि कक्षा 7 में पढ़ने वाले स्थानीय हिन्दू छात्रों को मणिपुरी छात्रों ने जबरन बीफ खिलाया। मणिपुरी छात्रों पर स्थानीय छात्रों को पीटने का भी आरोप है। यह घटना पहले दबी रही और बाद में अभिभावकों पता चली। छात्रों ने जब इसे स्कूल प्रशासन को बताया तो उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश की।

एक अभिभावक ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी स्कूल के बाहर के एक दुकानदार से हुई। दुकानदार ने उन्हें स्कूल में बीफ बाँटे जाने की सूचना दी। बच्चे के अभिभावक ने कहा कि उनका बेटा इसी स्कूल में पढ़ता है, उसने उन्हें बताया कि स्कूल के भीतर कुछ छात्र बीफ बाँट रहे थे।

पीड़ित अभिभावक ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चे को मणिपुरी छात्रों से कुछ ना लेने की हिदायत दी थी, क्योंकि यह बीफ हो सकता है। हालाँकि, गुरुवार को उनके बच्चे को एक मणिपुरी छात्र ने मांस खाने को दिया और जब उसने पूछा तो मणिपुरी छात्र ने इसके बीफ होने की बात बताई।

एक अन्य अभिभावक ने मीडिया से कहा कि उनकी बेटी ने उन्हें यह सूचना दी कि मैगी में बीफ मिला गया था। उन्होंने कहा कि जब इस बारे में प्रिंसिपल से पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अन्य अभिभावकों ने भी स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

अभिभावकों ने माँग की है कि उन छात्रों को स्कूल से निकाला जाए जिन्होंने जबरन दूसरे छात्रों को बीफ खिलाया। स्कूल के प्रिंसिपल से जब कार्रवाई की माँग की तो उन्होंने स्थानीय छात्रों को धमकाया। उनसे कहा गया कि यदि वह इस विषय में बोले तो उन्हें स्कूल से निष्कासित कर दिया जाएगा।

अभिभावकों ने इस संबंध में स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया है। उन्होंने स्थानीय थाने में इस मामले में FIR भी दर्ज करवाई है। स्कूल प्रशासन इस मामले में जवाब देने से बच रहा है। स्थानीय प्रशासन ने यहाँ सुरक्षाबलों की तैनाती की है। ऑपइंडिया ने इस विषय स्कूल से सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका।

दानिश ने नाबालिग के साथ मिलकर 5वीं कक्षा की छात्रा का कर लिया अपहरण, होटल ले जाकर किया गैंगरेप: लखनऊ पुलिस ने एक को दबोचा, दूसरे की तलाश जारी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कक्षा 5 में पढ़ने वाली नाबलिग बच्ची से गैंगरेप का मामला सामने आया है। स्कूल से लौटते हुए पीड़िता का अपहरण किया गया फिर एक होटल में ले जाकर सामूहिक बलात्कार हुआ। बच्ची के पिता ने दानिश और एक नाबालिग के खिलाफ खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है। पीड़िता की अश्लील वीडियो बना ली गई और कहीं मुँह खोलने पर उसे जान से मार डालने की धमकी भी मिली। पुलिस ने केस दर्ज कर के 1 आरोपित को हिरासत में ले लिया है। घटना सोमवार (23 सितंबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वारदात लखनऊ के सरोजनी नगर थाना इलाके की है। जहाँ सोमवार को 14 वर्षीया पीड़िता के पिता ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में बच्ची के पिता ने बताया कि हर दिन की तरह सोमवार को भी कक्षा 5 में पढ़ने वाली उनकी बेटी स्कूल गई थी। दोपहर लगभग 1 बजे वह छुट्टी के बाद घर लौट रही थी। इसी दौरान 2 युवक एक कार से पहुँचे और बच्ची का बैग छीनने लगे। जब पीड़िता ने विरोध किया तो आरोपितों ने उसे भी कार में खींच लिया।

इनमें एक का नाम दानिश है, जबकि दूसरा नबाालिग बताया जा रहा है। आरोप है कि दोनों पीड़िता का अपहरण कर के कृष्णानगर क्षेत्र में ही पड़ने वाले एक होटल में ले गए जिसका नाम पैराडाइज शाँति इन है। यहाँ दोनों आरोपितों ने बारी-बारी पीड़िता से गैंगरेप किया और इसका वीडियो भी बनाया। गैंगरेप के बाद दोनों ने बच्ची को धमकाते हुए कहा कि अगर उसने कहीं मुँह खोला तो न सिर्फ फोटो और वीडियो वायरल कर दिया जाएगा, बल्कि पूरे परिवार का कत्लेआम भी कर दिया जाएगा।

इन धमकियों से पीड़िता बेहद डर गई। लगभग 3 घंटे तक लड़की से गैंगरेप के बाद आरोपितों ने शाम 4 बजे उसे कृष्णानगर में छोड़ दिया। घर आ कर उसने रोते हुए अपने पिता को दानिश और नाबालिग की सारी करतूत बताई। इस घटना के बारे में पीड़ित के पिता ने तुरंत सरोजनीनगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपित को हिरासत में ले लिया है। दूसरे आरोपित की गिरफ्तारी के लिए सर्च ऑपरेशन चल रहा है। पुलिस मामले की गहराई से जाँच कर रही है और CCTV फुटेज सहित अन्य सबूत एकत्रित किए जा रहे हैं। एसीपी विनय कुमार ने बताया कि मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है और पीड़िता को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

रफीक खान सपा की लोहिया वाहिनी का राष्ट्रीय सचिव, नौशाद खान सपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ का अध्यक्ष… चला रहे थे जाली नोटों का गैंग, जमीनों पर कब्जा करने के भी उस्ताद

उत्तर प्रदेश की कुशीनगर पुलिस ने नकली नोट छापने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें समाजवादी पार्टी के दो राष्ट्रीय स्तर के नेता, रफीक खान और नौशाद, सहित 10 मुस्लिम आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर नकली नोटों की तस्करी, अवैध हथियार रखने, और गरीबों की जमीनों पर अवैध कब्जा करने के आरोप हैं।

रफीक और नौशाद के अलावा रफी अंसारी, लादेन उर्फ़ औरंगजेब, शेख जमालुद्दीन, रियाजुद्दीन, रेहान, हासिम, सेराज हशमती और परवेज़ इलाही भी पकड़े गए हैं। इसमें से रफ़ीक खान और नौशाद समाजवादी पार्टी में राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी हैं। इन आरोपितों के पास से नकली नोटों की खेप के अलावा अवैध हथियारों के साथ दर्जनों सिम, मोबाइल, फर्जी पहचान पत्र, लक्जरी गाड़ियाँ व अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुई हैं।

यह घटना कुशीनगर जिले के थानाक्षेत्र तरयासुजान की है। जहाँ पुलिस ने सोमवार (23 सितंबर 2024) को कार्रवाई करते हुए इतने बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस ने नकली नोटों की छपाई की एक सूचना पर टीम बना कर एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी। इस टीम में 2 थानों सहित साइबर सेल के भी स्टाफ शामिल थे। दबिश के दौरान आरोपितों को पकड़ा और तलाशी ली। इन सभी के पास से न सिर्फ नकली नोटों बल्कि अवैध हथियारों का भी जखीरा बरामद हुआ।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों के पास से 5 लाख 62 हजार रुपए के नकली नोट मिले हैं। इन रूपयों को हूबहू असली नोटों की तरह छापा गया था। इसी के साथ असली 1 लाख 10 हजार रुपए भी बरामद हुए हैं। इन रुपयों का नकली नोटों से सौदा किया गया था। आरोपितों के पास 3 हजार मूल्य की नेपाली मुद्रा भी मिली है। जाली नोटों की तस्करी के साथ ये आरोपित आपराधिक कृत्यों को भी अंजाम देते थे।

पुलिस ने नकली, असली व नेपाली नोटों के साथ इस गिरोह के पास से 10 तमंचे, 30 जिन्दा व 12 दगे कारतूस, 4 सुतली बम भी बरामद करने में सफलता पाई है। इनके पास से अपराध में प्रयोग हुए 13 मोबाइल फोन, 26 फर्जी सिम, 13 फर्जी आधार कार्ड, 10 ATM कार्ड और 4 लैपटॉप भी बरामद हुए। ये सभी आरोपित लक्जरी कारों के भी शौक़ीन हैं।

आरोपितों के पास एक स्कार्पियो व एक अन्य वीनस कार भी मिली है जिसे सीज कर दिया गया है। इन सभी आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 179 व 62 (2) के साथ आर्म्स एक्ट और विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। कुशीनगर पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आरोपित लोगों को डराने-धमकाने सहित गरीबों की जमीनों पर अवैध कब्ज़े जैसे आपराधिक कृत्यों में शामिल हैं।

पुलिस इन सभी के नेटवर्क और और ज्यादा जानकारियाँ जुटाने में लगी हुई है। इन आरोपितों को जब कोर्ट में पेश किया गया तो अधिकतर के पैरों में पट्टी बंधी मिली। इसमें से कुछ को व्हीलचेयर पर लाया गया था। आरोपित पुलिस को देख कर रोते हुए हाथ जोड़ रहे थे।

नौशाद और रफी का सपा कनेक्शन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पकड़े गए आरोपितों में नौशाद और रफीक खान का समाजवादी पार्टी से कनेक्शन है। रफीक खान सपा की लोहिया वाहिनी का राष्ट्रीय सचिव है। अखिलेश यादव के साथ उसकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। रफीक खान ही इस गिरोह का मास्टरमाइंड है। दूसरा आरोपित नौशाद खान समाजवादी पार्टी की सांस्कृतिक प्रकोष्ठ में उपाध्यक्ष है। वह भी अक्सर सपा के बड़े मंचों पर दिखाई देता है।

भारतीय जनता पार्टी ने नकली नोटों के इस आपराधिक गिरोह में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों का नाम आने पर तंज कसा है। उत्तर प्रदेश भाजपा के आधिकारिक हैंडल से सवाल किया गया है कि अब अखिलेश यादव इनका बचाव कैसे करेंगे ?” एक न्यूज़ चैनल की क्लिप शेयर करते हुए भाजपा ने वीडियो में ‘लाल टोपी के काले कारनामों का एक और खुलासा’ और ‘अंतरराष्ट्रीय सरगना निकला सपा नेपा’ जैसे कैप्शन भी दिए हैं।

रेलवे के 3 कर्मचारियों ने पहले खुद खोली रेल लाइन की फिश प्लेट, फिर नाम-इनाम के लिए सूचना भी दी: लेकिन खुल गया भेद, पकड़े गए

गुजरात के सूरत में किम रेलवे स्टेशन के पास पटरी से फिशप्लेट और चाभियाँ निकाल कर ट्रेन पलटने की साजिश रचने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह तीनों रेलवे के कर्मचारी हैं। ट्रेन को बेपटरी करने की यह साजिश 21 सितम्बर को फेल की गई थी।

पुलिस ने इस मामले में अपनी जाँच में पाया कि ट्रेन पलटने की साजिश इन रेलवे कर्मचारियों ने ही रची थी। इन तीनों रेलवे कर्मचारियों ने ट्रेन बेपटरी करने की साजिश का नाटक रचने को लिए पटरी से कुछ चाभियाँ और फिशप्लेट हटा दी और फिर इसकी तस्वीरें और वीडियो बनाई। इसे बड़े अधिकारियों को भेजा गया था ताकि यह दिखाया जा सके कि यह तीनों मुस्तैद हैं।

घटना वाले दिन रेलवे ने बताया था कि वड़ोदरा डिविजन में यह घटना हुई जब पटरियों पर से किसी ने फिशप्लेट और चाभियाँ हटा दी और पटरी को ऐसे ही छोड़ दिया। यह सभी हिस्से अप लाइन पर से निकाले गए और उन्हें डाउन लाइन पर रख दिया गया। रेलवे ने बताया था कि इस मामले में कोई दुर्घटना नहीं हुई और संचालन कुछ देर बाद सामान्य हो गया।

अब इस मामले में गिरफ्तार तीनों की पहचान ट्रैकमैन सुभाष पोद्दार और मनीष मिस्त्री तथा एक ठेका कर्मचारी शुभम जायसवाल के रूप में हुई है। इस मामले में पुलिस ने यात्रियों की जान को खतरा पहुँचाने और साजिश रचने समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इन तीनों के खिलाफ रेलवे एक्ट के अंतर्गत मामला भी दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुभाष पोद्दार ने ही अपने अधिकारियों को पटरी पर से फिश प्लेट हटाए जाने के बारे में सूचना दी थी। इसके बाद अधिकारी यहाँ पहुँचे और उन्होंने समय रहते पटरियों की मरम्मत करवाई। इस कारण कई ट्रेनें पटरी से उतरने से बच गईं और जान माल का नुकसान नहीं हुआ।

सूरत ग्रामीण एसपी ने बताया कि 21 सितंबर की रात को किम और कोसांबा रेलवे स्टेशनों के बीच 1.5 किलोमीटर की पटरियों से फिश प्लेटें हटाई हुई पाई गईं थी। बताया गया कि जब सुभाष पोद्दार और उसका साथी पैडलॉक और स्क्रू हटा चुका था, उस समय उस पटरी से 15 ट्रेनें गुजरीं।

ट्रेनों के निकलने के समय यह तीनों छिप जाते थे। इनका मिशन था कि जब सुबह यहाँ से गरीब रथ ट्रेन निकलने वाली हो तब अधिकारियों को घटना के बारे में सूचना दी जाए। यह लोग ट्रेन के इस घटनास्थल पर पहुँचने से कुछ देर पहले अधिकारियों को बताने की साजिश रच कर आए थे। इनका मानना था कि यदि यह बड़ी ट्रेन को पलटने से रोकेंगे तो इन्हें सम्मान मिलेगा।

सम्मान और इनाम के अलावा, इन तीनों को उम्मीद थी कि उन्हें उनकी नाइट शिफ्ट ड्यूटी से हटाकर दिन की शिफ्ट में रखा जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, सुभाष पोद्दार 9 साल से भारतीय रेलवे के साथ काम कर रहा है। सूरत के एसपी हितेश जॉयसर ने कहा: “उनके फोन की जाँच के दौरान, हमें उनके रीसायकल बिन से उन फिशप्लेट और चाभियों के फोटो मिले, यह सुबह 2 बजे से 5 बजे के बीच शूट किए गए थे। लेकिन अलर्ट सुबह 5 बजे के बाद भेजा गया था। जा पूछा गया तो वह साफ जवाब नहीं दे पाए, इसके बाद शक और गहरा हो गया।”

सिद्दारमैया जमीन घोटाले से पूरी तरह अलग थे यह विश्वास करना मुश्किल: कर्नाटक हाई कोर्ट, कॉन्ग्रेसी CM पर चलेगा केस; जानिए क्या है MUDA स्कैम

कर्नाटक हाई कोर्ट से राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने सिद्दारमैया की कर्नाटक राज्यपाल के फैसले के विरुद्ध दायर याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने सिद्दारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी को बरकरार रखा है। उन पर MUDA घोटाले में अब मुकदमा चलाया जा सकेगा।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंगलवार (24 सितम्बर, 2024) को सिद्दारमैया की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया। हाई कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है और इसकी राज्यपाल से अनुमति ली है, वह अपनी जगह पर सही हैं।

कोर्ट ने राज्यपाल के इस मामले को मंजूरी देने के मामले में कहा कि राज्यपाल अपने फैसले लेने को स्वतंत्र है। हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही सामान्य स्थिति में राज्यपाल को मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करना होता हो लेकिन वर्तमान मामले में परिस्थितियाँ अलग थीं।

राज्यपाल के फैसले को कोर्ट ने एकदम सही बताया और इसमें कोई भी चूक नहीं बताई। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिद्दारमैया इस घोटाले में से पूरी तरह अलग थे, इस पर विश्वास करना मुश्किल है। कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार के पक्ष में कैसे नियमों को तोड़ा-मरोड़ा गया, इस बात की जाँच की आवश्यकता है।

हाई कोर्ट ने कहा, “यह मानना कठिन है कि इस पूरे लेन-देन का लाभार्थी जिसमें मुआवजा ₹3.56 लाख निर्धारित किया गया और यह ₹56 करोड़ बन गया, याचिकाकर्ता (सिद्दारमैया) का परिवार नहीं है। मुख्यमंत्री के परिवार के पक्ष में नियम कैसे और क्यों मोड़ा गया, इसकी जाँच की आवश्यकता है। अगर इस बात की जाँच की आवश्यकता नहीं है, तो मैं यह नहीं समझ पा रहा कि आखिर किस मामले की जाँच होनी चाहिए।” कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों को फायदा हुआ वह CM का परिवार हैं, ऐसे में कोर्ट राहत नहीं दे सकती।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कथित घोटाले की समयावधि के दौरान सिद्दारमैया बड़े पदों पर रहे, अगर ऐसा नहीं होता तो मुआवजे की रकम इतनी बड़ी नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि कोई आम आदमी कभी ऐसे फायदे पाया हो, ऐसा सुनने में नहीं आता।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कई बिन्दुओं को जोड़ने की जरूरत है, इसके लिए जाँच करनी होगी और राज्यपाल की मंजूरी से यही काम हो रहा है, ऐसे में यह सही है। MUDA मामले में तथ्यों की गहराई को देखते हुए हाई कोर्ट ने सिद्दारमैया को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिका रद्द कर दी। हाई कोर्ट से सिद्दारमैया ने याचिका खारिज होने के बाद अपील दाखिल करने की 2 सप्ताह की मोहलत माँगी थी लेकिन अदालत ने यह भी देने से मना कर दिया।

क्या है MUDA घोटाला?

शॉर्ट में MUDA (मुडा) कहलाने वाला मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण कर्नाटक की विकास एजेंसी है, जो मैसूर में शहरी विकास और बुनियादी ढाँचे का विकास करती है। यह दिल्ली के DDA और नोएडा के Noida ऑथिरिटी की तरह ही है। इन एजेंसियों की तरह ही MUDA भी लोगों को किफायती कीमत पर आवास उपलब्ध कराने का काम करता है। 

शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए MUDA एक योजना लेकर आई थी। साल 2009 में पहली बार लागू की गई इस योजना का नाम 50:50 था। इसमें जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50 प्रतिशत के हकदार थे। यह 30’x40’ आयाम के लगभग 9 विकसित भूखंडों के बराबर है और वे इसे मौजूदा बाजार दर पर किसी को भी बेचने के लिए स्वतंत्र थे।

50:50 योजना में घोटाला

आरोप है कि ये भूखंड अवैध रूप से उन लोगों को आवंटित किए, गए जो खुद को भूमिहीन बता रहे थे। इस घोटाले में बिचौलियों की भूमिका के अलावा MUDA अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत का भी संदेह है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 15 जून 2024 को दो भूमिहीनों को भूखंड आवंटित करने के आदेश किए गए थे।

इनमें तत्कालीन MUDA आयुक्त दिनेश कुमार ने 8.14 एकड़ भूमि के मूल मालिक के उत्तराधिकारी को 98,206 वर्ग फुट विकसित भूमि आवंटित की। इस भूमि को MUDA ने गोकुलम लेआउट के विकास के लिए अधिग्रहित किया था। मैसूर में गोकुलम लेआउट के लिए अधिग्रहण की कार्यवाही 1968 में शुरू हुई थी।

सीएम सिद्धारमैया की पत्नी को दिया गया लाभ

राज्य में जब भाजपा की सरकार आई तो उसने साल 2020 में इस योजना को बंद कर दिया। आरोप है कि इस योजना के बंद हो जाने के बाद भी MUDA ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। इस योजना के तहत वर्तमान सीएम सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को लाभ पहुँचाया गया। MUDA के इस घोटाले में प्राधिकरण के आयुक्त पर भी आरोप हैं।

पार्वती की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि MUDA द्वारा अधिग्रहित की गई। मैसूर के बाहरी इलाके केसारे में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने साल 1996 में खरीदा था। इसके बाद उन्होंने साल 2010 में इसे पार्वती को उपहार में दे दिया था। आरोप है कि MUDA ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही इस पर देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी। 

बाद में पार्वती ने जमीन अधिग्रहण का दावा करते हुए मुआवजे के लिए आवेदन किया। उनकी जमीन के बदले पार्वती को मैसूर के एक महंगे इलाके विजयनगर III और IV फेज में उन्हें 14 साइटें आवंटित की गईं। यह आवंटन 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। इस आवंटन में विपक्ष मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी पर घोटाले का आरोप लगा रहा है।

‘पलानी मंदिर के पंचामृत में मर्दों को नपुंसक बनाने वाली दवाई’: दावे के बाद गिरफ्तार हुआ तमिल फिल्मों का निर्देशक मोहन जी, तमिलनाडु के मंत्री ने चेताया

तमिलनाडु में तमिल फिल्मों के मशहूर डायरेक्टर मोहन जी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मोहन जी पर आरोप है कि उन्होंने पलानी मंदिर के ‘पंचामृतम’ (मंदिर में दिया जाने वाला प्रसाद) में नपुंसकता लाने वाली दवा मिलाए जाने का दावा किया था। यह टिप्पणी उन्होंने एक यूट्यूब चैनल पर दिए इंटरव्यू में की थी, जहाँ वह तिरुपति लड्डू के विवाद पर चर्चा कर रहे थे।

मोहन जी का दावा और विवाद की शुरुआत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहन जी, जो ‘द्रौपदी’, ‘रुद्रतांडवम’ और ‘बगासुरन’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने तिरुपति लड्डू के विवाद पर बोलने के दौरान कहा कि तमिलनाडु के मंदिरों में भी इसी तरह की घटनाएँ हुई हैं। उन्होंने यह आरोप लगाया कि पलानी मंदिर के पंचामृतम में एक बार नपुंसकता लाने वाली दवा मिलाई गई थी और इस खबर को छिपा दिया गया था।

मोहन जी ने कहा, “मैंने सुना था कि पुरुषों में नपुंसकता लाने वाली दवा पंचामृतम में मिलाई गई थी। इस खबर को छिपाया गया और उस पंचामृतम को नष्ट कर दिया गया।” उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कोई स्पष्ट सफाई नहीं दी गई, और कुछ मंदिर के कर्मचारियों ने उन्हें बताया था कि गर्भनिरोधक गोलियाँ हिंदुओं पर हमला हैं।

तमिलनाडु सरकार की प्रतिक्रिया

तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के मंत्री सेकर बाबू ने मोहन जी के इस बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने ऐसे किसी भी आरोप को सिरे से खारिज किया और चेतावनी दी कि जो भी इस तरह की झूठी खबर फैलाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने इसे मंदिर की छवि को धूमिल करने की कोशिश बताया और कहा कि सरकार इस मामले में किसी भी गलत जानकारी को बर्दाश्त नहीं करेगी।

त्रिची पुलिस की साइबर क्राइम इकाई ने मंगलवार (24 सितंबर 2024) को मोहन जी को गिरफ्तार कर लिया। उन पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और झूठी जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया। गिरफ्तारी के बाद यह मामला और अधिक विवादित हो गया, खासकर उनके समर्थकों और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं के बीच। बीजेपी नेता अश्वथामन ने मोहन जी की गिरफ्तारी को असंवैधानिक करार दिया और सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मोहन जी के परिवार को उनकी गिरफ्तारी की कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई और यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के खिलाफ है।

बीजेपी नेता अश्वथामन ने ट्वीट किया, “परिवार को यह नहीं बताया गया कि गिरफ्तारी का कारण क्या था और मामला क्या था। यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोहन जी की गिरफ्तारी तमिलनाडु सरकार की धार्मिक असहिष्णुता को दर्शाती है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। उनके अनुसार, राज्य सरकार अपने आलोचकों को दबाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

दरअसल, मोहन जी आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर के प्रसाद में मिलावट के मामले पर बोल रहे थे। बता दें कि आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एक लैब रिपोर्ट के हवाले से दावा किया था कि तिरुपति लड्डू बनाने में इस्तेमाल किए गए घी में पशु वसा और मछली के तेल के अंश पाए गए थे। लैब रिपोर्ट में कहा गया था कि घी के नमूने में “बीफ टैलो”, “लार्ड” (सूअर की चर्बी) और मछली के तेल के अंश मिले थे। यह रिपोर्ट वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान के प्रसाद से जुड़ी थी और इस मामले ने आंध्र प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक विवाद को जन्म दिया था। मोहन जी ने इसी संदर्भ में तमिलनाडु के मंदिरों में भी इसी प्रकार की घटनाओं की ओर इशारा किया था।

इस घटना के बाद तमिलनाडु सरकार की आलोचना और तेज हो गई है। कई विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों ने सरकार पर हिंदू धार्मिक स्थलों की प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उन लोगों को निशाना बना रही है जो धार्मिक स्थलों में हो रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि तमिलनाडु सरकार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा है कि राज्य में सभी धार्मिक स्थलों का संचालन पारदर्शी तरीके से हो रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक स्थल के खिलाफ कोई भी गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मोहन जी की गिरफ्तारी और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों ने तमिलनाडु सरकार और हिंदू धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को लेकर एक नए विवाद को जन्म दिया है। जहाँ एक ओर सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है और सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा और मोहन जी के समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं। यह मामला अभी और तूल पकड़ सकता है, खासकर राज्य की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, जहाँ धर्म और राजनीति आपस में जुड़े हुए हैं।

खतना, नमाज, इस्लाम… कहानी 10 साल की उम्र में गायब हुए ‘सत्यम’ को कबाड़ी ‘समीर खान’ बनाने की, ब्रेनवॉश ऐसा कि अब अपने परिवार के साथ भी रहना नहीं चाहता

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में शनिवार (14 सितंबर 2024) को धर्मान्तरण केस में नामजद राशिद नाम के आरोपित की पुलिस से मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में राशिद घायल हो गया था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह पिछले 19 वर्षों से फरार चल रहा था। राशिद 2005 में घर से लापता हुए हिन्दू बच्चे को इस्लाम कबूल करवाने का आरोपित है। उसके पास से अवैध हथियार और गोला-बारूद भी बरामद हुआ है। अब 30 साल के हो चुके सत्यम नाम के बच्चे को फिलहाल समीर खान बना दिया गया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए सत्यम की माँ ने बताया कि उनके बेटे का ब्रेनवॉश इस हद कर तक कर दिया गया है कि वो अब अपने परिजनों के संग रहने को तैयार ही नहीं है।

19 साल पहले गायब हुए सत्यम को बनाया गया समीर खान

यह मामला रामपुर जिले के थानाक्षेत्र शाहाबाद का है। यहाँ 13 सितंबर को मंजू देवी नाम की महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में मंजू ने बताया है कि साल 2005 में उनका 10 वर्षीय बेटा सत्यम अचानक कहीं लापता हो गया था। तब पीड़िता ने इसकी शिकायत हापुड़ के पिलखुआ थाने में दर्ज करवाई थी। बच्चे के लापता होने की खबर अख़बार में भी प्रकाशित करवाई गई थी। काफी खोजबीन कर के मंजू ने पता लगाया कि उनका बेटा रामपुर जिले में राशिद के घर रहता है।

बच्चे को खोजते हुए मंजू देवी रामपुर पहुँची। यहाँ उनकी मुलाकात अपने बेटे से हुई। मंजू के बेटे ने यहाँ बताया कि 2005 में उसको पहले उनको दिल्ली ले जाया गया। वहाँ से बच्चे को कबाड़ी राशिद अपने साथ रामपुर ले आया। राशिद ने बच्चे को अपने साथ रखा और रुपए पैसे का लालच दे कर इस्लाम कबूल करवा दिया। कुछ दिनों बाद सत्यम का नाम बदल कर समीर खान रख दिया गया। एक नया आधार कार्ड भी बनवा दिया गया जिसमें समीर के अब्बा का नाम वाज़िद खान छाप दिया गया।

सत्यम की माँ का आरोप है कि उनके बेटे का खतना करवा दिया गया था और नमाज़ पढ़वाई जा रही थी। पीड़िता मंजू राय ने राशिद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। इस तहरीर पर पुलिस ने राशिद के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर लिया। उस पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। केस दर्ज होने की जानकारी मिलते ही राशिद फरार हो गया। पुलिस ने उसकी तलाश में दबिश देनी शुरू कर दी।

पुलिस पर भी राशिद ने बरसाईं गोलियाँ

13 सितंबर को राशिद के खिलाफ FIR दर्ज कर के पुलिस ने दबिश देनी शुरू कर दी थी। इस बीच अगले दिन 14 सितंबर को शाहाबाद थाने के SHO इंस्पेक्टर पंकज पंत अपने साथी पुलिसकर्मियों के साथ गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उनको मुखबिर ने राशिद के एक खंडहर के पास छिपे होने की सूचना दी। पुलिस टीम इस सूचना पर बताए गए खंडहर की तरफ निकल पड़ी। सूचना सही पाई गई। राशिद खंडहर के पास मौजूद था।

पुलिस के मुताबिक पुलिस बल को अपनी तरफ बढ़ता देख राशिद भड़क गया। वह चीख कर बोला, “सालों पुलिस वालों, तुम भी आ गए। आज तुम्हारा भी काम तमाम करता हूँ।” इतना कह कर राशिद ने पुलिस पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। राशिद की फायरिंग से पुलिस ने खुद को बचाते हुए सरेंडर करने की चेतावनी दी। हालाँकि जब इस चेतावनी का उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा तो पुलिस ने जवाबी फायरिंग की। पुलिस की गोली चलने पर राशिद भागने लगा जिसे दौड़ा कर दबोच लिया गया।

राशिद की तलाशी में उसके पास से एक तमंचा और कारतूस बरामद हुए। पुलिस पर हमले के आरोप पर उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 के साथ आयुध अधिनियम के तहत एक और FIR दर्ज हुई है। पूछताछ में राशिद ने बताया कि वो फ़िलहाल दिल्ली के ओखला फेज 1 में रहता है। वह कीपैड फोन ले कर चलता था। पुलिस की पूछताछ में उसने सत्यम के धर्मान्तरण मामले में अपने ऊपर लगे आरोपों को कबूल किया है। फिलहाल राशिद को जेल भेज दिया गया है। ऑपइंडिया के पास पुलिस की FIR मौजूद है।

लापता नहीं हुआ मेरा बेटा, बल्कि रची गई थी साजिश

ऑपइंडिया ने इस मामले में मंजू देवी से सम्पर्क किया। मंजू देवी ने बताया कि उनको आशंका है कि 2005 में उनका बेटा खुद लापता नहीं हुआ था बल्कि उसे साजिशन गायब किया गया था। बचपन में ही सत्यम की संगति गलत हो जाने का दावा करते हुए मंजू ने बताया कि सबसे पहले उसे दिल्ली में लगभग 4 महीने रखा गया। यहाँ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उसे अपने रंग में ढाला और कबाड़ आदि बीनने के काम पर लगाया। बाद में सत्यम को रामपुर शाहाबाद में भेज दिया गया। रामपुर में सत्यम को राशिद के पास रखा गया।

मंजू देवी आगे बताती हैं कि राशिद ने सत्यम को नौकरों की तरह रख कर काम करवाए। यहीं पर उसे मुस्लिम बना दिया गया और खतना भी करवाया गया। थोड़े समय बाद सत्यम को शाहाबाद के ही रहने वाले वाज़िद खान के सुपुर्द कर दिया गया। वाज़िद ने सत्यम का समीर खान नाम से आधार कार्ड बनवाया और खुद को उसका अब्बा दिखा दिया। वाज़िद ने भी अपने पूरे परिवार को कमा कर खिलाने की जिम्मेदार सत्यम पर डाल दी। सत्यम कभी कबाड़ बीन कर तो कभी फेरी लगा कर वाज़िद के परिवार का पेट भरता रहा।

लौट आया था अपने परिवार में, पर फिर हुआ ब्रेनवॉश

मंजू देवी आते बताती हैं कि साल 2017 में ही उन्होंने अपने बेटे को खोज निकाला था। तब वो जैसे-तैसे रामपुर से मिन्नत कर के अपने बेटे को वापस हापुड़ ले आईं थीं। यहाँ सत्यम महज 2 से ढाई महीने के बीच रहा। सत्यम का नाम भी आधार कार्ड में बदलवा दिया गया। इस बीच कोई विक्की खान उसको लगातार कॉल कर के वापस लौटने के लिए ब्रेनवॉश करता रहा। इस ब्रेनवॉश का असर ये रहा कि सत्यम मंदिर जाने और पूजापाठ आदि से चिढ़ने लगा था। आखिरकार लगभग ढाई महीने बाद सत्यम फिर से अपना घर छोड़ कर रामपुर चला गया।

मंजू देवी बताती हैं कि इसके बाद उन्होंने अपने बेटे को वापस पाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहीं। पीड़िता के एक और बेटा है जो सत्यम से छोटा है। मंजू देवी के पति मेहनत मजदूरी कर के परिवार पालते हैं। खुद मंजू भी एक प्राइवेट स्कूल में काम कर के अपने परिवार के लिए चार पैसे जुटाती हैं। इसी पैसे से वो अपने दूसरे बेटे की पढ़ाई आदि करवा रहीं हैं। मंजू चाहती हैं कि उनके बेटे के धर्मान्तरण में शामिल सिर्फ राशिद ही नहीं बल्कि दिल्ली से रामपुर तक प्रकाश में आए सभी आरोपितों पर एक्शन हो।

परिवार के साथ रहने को तैयार नहीं सत्यम

मंजू देवी ने हमको आगे बताया कि भले ही राशिद जेल चला गया है लेकिन उनको सत्यम वापस नहीं मिल पाया। पुलिस के आगे सत्यम ने उनको माँ मानने से ही इंकार कर दिया। सत्यम ने खुद को मुस्लिम बताते हुए कहा कि उसको हिन्दू धर्म में आस्था नहीं बची है। पुलिस के आगे कोई भी मुस्लिम सत्यम पर अपना दावा करने नहीं आया। मंजू देवी के मुताबिक उनके बेटे को मुस्लिमों द्वारा वर्तमान समय में साजिशन उत्तराखंड एक रुद्रपुर कहीं शिफ्ट कर दिया गया है।

मंजू ने हमको आगे बताया कि भले ही उनका बेटा उन्हें दोबारा वापस न मिले पर वो मुस्लिम मत छोड़ कर अपने मूल धर्म में वापस लौट आए। उन्होंने कहा कि अगर वो कहीं गौशाला में गायों की सेवा करे, किसी मठ या मंदिर का पुजारी बन जाए या किसी हिन्दू अधिकारी/व्यापारी के घर नौकरी करने लगे तो उन्हें बहुत सुकून मिलेगा। मंजू ने प्रशासन के साथ हिन्दू संगठनों से भी उम्मीद जताई है कि वो उनके बेटे को मुस्लिम मत से बाहर निकालने में मदद करें।

पीड़िता ने अपने परिवार की सुरक्षा भी खतरे में होने की बात कहते हुए भविष्य में चरमपंथियों द्वारा किसी अनहोनी की भी आशंका जाता है। अंत में वो फूट-फूट कर रोने लगीं और कहा कि कुछ साजिशकर्ताओं ने उनके परिवार को बर्बाद कर दिया। मंजू को यह भी चिंता है कि इस विवाद से उनके छोटे बेटे की शादी-ब्याह में दिक्कत पेश आ सकती है। फ़िलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

कर्नाटक में अब उर्दू तुष्टिकरण: आँगनबाड़ी शिक्षक बहाली के आदेश पर विवाद, भाजपा बोली- निजाम और टीपू का सपना पूरा कर रही कॉन्ग्रेस

कर्नाटक के चिकमंगलुरू जिले के भीतर आँगनबाड़ी शिक्षक बनने के लिए उर्दू जानना जरूरी कर दिया गया है, यह आरोप भाजपा ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर लगाया है। भाजपा ने कहा है कि कॉन्ग्रेस में निजाम की आत्मा घुस गई है क्योंकि वह भी कन्नड़ के विरुद्ध था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्ग्रेस सरकार ने हाल ही में एक आदेश में कहा है कि चिकमंगलुरु जिले के मुडिगिरी में आँगनबाड़ी में शिक्षक पद पर आवेदन करने वालों को उर्दू जरूर आनी चाहिए। यह आदेश राज्य के महिला और बाल कल्याण एवं विकास विभाग (DCW) ने दिया है।

विभाग ने कहा कि जिस इलाके में स्थानीय जनसंख्या में अल्पसंख्यकों का हिस्सा 25% से अधिक है वहाँ शिक्षकों को कन्नड़ के साथ ही अल्पसंख्यकों की भाषा जाननी होगी। मुडिगिरी में मुस्लिम जनसंख्या 31% है इसलिए यहाँ उर्दू जानने वाले शिक्षकों की भर्ती करने का निर्णय लिया गया है। कॉन्ग्रेस इस निर्णय के बाद बैकफुट पर है।

भाजपा कॉन्ग्रेस पर इस निर्णय के बाद तुष्टिकरण का आरोप लगा रही है। भाजपा ने इस फैसले पर कहा, “कन्नड़ जमीन पर उर्दू का बोलबाला है, कॉन्ग्रेस सरकार के महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने चिकमंगलूर जिले के मुडिगिरी में आँगनबाड़ी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए उर्दू अनिवार्य करने के लिए आधिकारिक आदेश जारी किया है। सीएम सिद्दारमैया और मंत्री लक्ष्मी हेब्बलकर इस बात को जान लीजिए, मुडिगिरी कर्नाटक में है, कन्नड़ कर्नाटक की आधिकारिक भाषा है, तब आखिर उर्दू अनिवार्य क्यों है, जवाब दीजिए।”

कर्नाटक के दक्षिणी कन्नड़ से सांसद नलिन कुमार कटील ने भी इस पर हमला बोला। उन्होंने लिखा, “कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार का आँगनबाड़ी शिक्षिका की नौकरी पाने के लिए उर्दू भाषा को अनिवार्य करना निंदनीय है। आँगनबाड़ी शिक्षकों की भर्ती में मुस्लिम समुदाय को खुश करने और केवल उन्हें ही नौकरी देने के लिए पिछले दरवाजे से की गई कोशिश एक बार फिर कॉन्ग्रेस की नीति को उजागर कर रही है।”

भाजपा नेता CT रवि ने इस पर कहा, “निजाम ने भी हैदरबाद और कर्नाटक में कन्नड़ पढ़ाने पर रोक लगा दी थी और उर्दू को बढ़ावा देने का प्रयास किया था, अब कॉन्ग्रेस में निजाम की आत्मा घुस गई है। टीपू सुल्तान ने भी यहाँ फ़ारसी भाषा थोपने की कोशिश की थी। आज कॉन्ग्रेस टीपू और निजाम के सपने को पूरा करने में लगी है।”

बताया गया है कि मुडिगिरी के स्थानीय शिक्षा विभाग ने भी इस मामले में अपनी आपत्ति जताई है। कॉन्ग्रेस सरकार की तरफ से इस मामले में अभी कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इस बीच भाजपा भाषाई मुद्दे को लेकर लगातार हमलावर है।

तिरुपति बालाजी प्रसाद में चर्बी: 189 साल पहले रची गई साजिश का नतीजा, आज भी भोग रहा हिंदू समाज

गुरुकुल पद्धति को तहस-नहस कर कॉन्वेंट शिक्षा पद्धति की नींव रखा था लॉर्ड मैकाले ने। क्यों उसने ऐसा किया था, यह इतिहास की बात है। वर्तमान में भी उसका कितना असर पड़ रहा है, यह सीखने-समझने की जरूरत है। उसके द्वारा लिखे पत्रों से इस बात का खुलासा होता है कि अपनी शिक्षा पद्धति के माध्यम से वह कौन से विष बीज बो रहा था भारतीय समाज में, जिनकी फसल निकट भविष्य में आनी ही थी, वो आज दिख भी रही है।

मैकाले लिखता है कि आने वाले वक्त में भारतीय समाज शरीर से हिन्दुस्तानी होगा लेकिन आत्मा उसकी एक अंग्रेज की होगी। आज वही सब परिलक्षित होता दिखाई दे रहा है।

सनातन आस्था के सबसे बड़े केन्द्र तिरुपति बालाजी के प्रसादम् में गाय और सुअर की चर्बी की मिलावट का मामला बेहद निंदनीय और गहरा षड्यंत्र है। यह सनातन आस्था पर गहरी चोट करता है। बड़ी चिंता का विषय लेकिन यह है कि ऐसे घृणित मामले पर समाज के उस बड़े तबके से विरोध के जो स्वर उठने चाहिए थे, वह नज़र नहीं आते।

ऐसे ही मसले पर इतिहास में हिंदू समाज की क्या प्रतिक्रिया थी, वह जानने लायक है। 1857 में एक अफ़वाह उठी थी (जिसके पुख़्ता प्रमाण नहीं हैं) कि अंग्रेज कारतूसों में चर्बी मिलाते थे। इस एक अफवाह पर पूरी क्रान्ति की ज्वाला भड़क उठी थी। तब की क्रान्ति की तुलना वर्तमान मामले से कर लेते हैं। तिरुपति बालाजी प्रसादम् में चर्बी वाली बात लैब टेस्टिंग में प्रमाणित हो चुकी है। बावजूद इसके एक सन्नाटा पसरा है हिंदू समाज में।

सेकुलरिजम का रोग, नेताओं से अधिक पॉलिटिकल करेक्टनेस का भूत शायद हिंदू समाज पर हद से ज्यादा हावी है। अफसोस यह कि इस समाज को चुनाव भी नहीं लड़ना है। फिर भी विदेशी शिक्षा के संंस्कार शायद इस कदर घर कर चुके हैं कि हम गंभीर से गंभीर मामले का भी सरलीकरण करने के अभ्यासी हो चुके हैं।

हमें नहीं भूलना चाहिए कि यह हमारे पूर्वजों का पौरुष और बलिदान ही था कि गुरु गोविन्द सिंह जैसे तपस्वियों ने अपने दो पुत्रों को बलि वेदी पर जाते हुए भी धर्म नहीं बदला। वंदा वैरागी को उनके पुत्र का सीना चीरकर उसके धड़कते हृदय को खाने पर मजबूर किया लेकिन फिर भी उन्होंने मतांतरण स्वीकार नहीं किया। ऐसे बलिदानियों के बदौलत ही आज भी यह समाज सनातन है!

एक समाज के तौर पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आज कई तरह के खतरों की आहट है। आज के समय में भी ताड़का और पूतना की राक्षसी वृत्तियाँ निगलना चाहती हैं हमको। एक का औज़ार हथियार है और दूसरे का प्यार। फिलहाल पूतना वक्ष में विष लपेटकर निकली है मातृत्व के दिखावे के साथ।

वक्त है अभी चेत जाने का। विरोधी स्वर बुलंद करने का। अन्यथा आने वाला वक्त यह अवसर भी छीन लेगा। सेकुलरिज्म का रोग दीमक बन कर खा रहा है। अब सेकुलर नहीं, मुखर होने की माँग कर रहा वक्त आपसे और हमसे। यहाँ रूसी विचारक लियोन ट्रॉट्स्की का विचार  प्रसंगिक है:

“You may not be interested in war, but war is interested in you.”

मतलब समाज में कुछ सड़-गल रहा हो, कुछ अनैतिक हो रहा हो… और आप यह सोच कर बैठ जाएँ कि उसका प्रभाव आप तक नहीं होगा, यह मूर्खतापूर्ण है। आपके इर्द-गिर्द जो भी हो रहा है, आप उसकी चपेट में परोक्ष या प्रत्यक्ष तौर पर आएँगे ही, यह निश्चित है। 

आप भले ही किसी से जलन न रखें, उन्हें नुक़सान न पहुँचाएँ, लेकिन कुछ विचार धाराएँ हैं, जो आप पर आघात करने को आतुर हैं। इसीलिए हों सावधान, रहें सतर्क… और सबसे जरूरी – रहें एकजुट!

UP में खाने-पीने की हर दुकान पर लिखना होगा नाम, कर्मचारियों का होगा पुलिस वेरिफिकेशन: योगी सरकार का आदेश, ‘थूक और मूत जिहाद’ पर छिड़ी हुई है बहस

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। हाल ही में हुई बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस क्रम में सभी रेस्तराँ और ढाबों के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जूस, दाल और रोटी जैसी खाद्य सामग्रियों में मानव अपशिष्ट मिलाने की घटनाओं को अत्यंत वीभत्स बताया। बता दें कि हाल ही में सामने आए घटनाओं के बाद, जिसमें जूस, दाल और रोटी जैसी खान-पान की वस्तुओं में थूक और पेशाब मिलाने के वीभत्स मामले सामने आए, सरकार ने तत्काल और सख्त कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए हैं।

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस संदर्भ में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की, जिसमें मिलावटखोरों और खाद्य सामग्री में गंदगी मिलाने वालों के खिलाफ ठोस नीतियाँ बनाई गईं। इन नीतियों का उद्देश्य सिर्फ दंड देना नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाना है।

पुलिस वेरिफिकेशन और नाम डिस्प्ले अनिवार्य

योगी सरकार का सबसे बड़ा कदम यह है कि अब राज्य में सभी रेस्तराँ, ढाबों और खाने-पीने के प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संदिग्ध व्यक्ति इन प्रतिष्ठानों में काम न कर सके, जिससे ग्राहकों की सुरक्षा और भरोसे को मजबूत किया जा सके। इसके अलावा, हर प्रतिष्ठान के मालिक और प्रबंधकों को अपने नाम और पते प्रमुखता से डिस्प्ले करने का निर्देश दिया गया है।

यह निर्देश इस बात को सुनिश्चित करेगा कि प्रतिष्ठान संचालकों की जिम्मेदारी बढ़ेगी और कोई भी अनियमितता या मिलावट की घटना होने पर उन्हें तुरंत पकड़ा जा सके। सरकार का यह कदम एक स्पष्ट संदेश देता है कि अब किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सीसीटीवी कैमरे और सफाई पर सख्त नज़र

सरकार ने हर रेस्तराँ और ढाबे में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश भी दिया है। यह केवल ग्राहकों की सुरक्षा के लिए नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने के लिए है कि खाने की तैयारियों में किसी भी प्रकार की अशुद्धता न हो। हर प्रतिष्ठान के हर कोने को सीसीटीवी से कवर किया जाएगा, ताकि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा, हर कर्मचारी को मास्क और ग्लव्स पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।

यह सुनिश्चित करना सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि कोई भी कर्मचारी, चाहे वह शेफ हो या वेटर, बिना उचित साफ-सफाई के भोजन को न छू सके। इस प्रकार के निर्देश यह स्पष्ट करते हैं कि अब ग्राहकों के स्वास्थ्य और भोजन की शुद्धता से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।

खाद्य सुरक्षा कानूनों में संशोधन

योगी सरकार सिर्फ दिशा-निर्देश जारी करने पर ही नहीं रुकी, बल्कि उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (Food Safety and Standards Act) में आवश्यकतानुसार संशोधन किए जाएं। इसका उद्देश्य नियमों को और सख्त बनाना है, ताकि भविष्य में कोई भी खाद्य सामग्री में मिलावट न कर सके।

साथ ही, इन नियमों के उल्लंघन पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे प्रतिष्ठानों को सील करने के साथ ही उन पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। सरकार का यह कदम पूरी तरह से जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

मिलावटखोरों में डर पैदा करना जरूरी

उत्तर प्रदेश सरकार का यह सख्त कदम उन मिलावटखोरों और धोखेबाजों के लिए एक कड़ा संदेश है जो खाद्य पदार्थों में गंदगी मिलाकर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब राज्य में ऐसी किसी भी प्रकार की गतिविधि को सहन नहीं किया जाएगा। जो भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान खाने-पीने की वस्तुओं में गंदगी मिलाने की कोशिश करेगा, उसे कानूनी रूप से भारी सजा दी जाएगी।

मिलावट करने वालों के खिलाफ अब सरकार ने ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। हाल ही में, जब कुछ घटनाओं में जूस में थूकने और खाने में अपशिष्ट मिलाने की घटनाएँ सामने आईं, तो सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती का जवाब

सरकार के इस कदम के पहले भी जब कांवड़ यात्रा के दौरान इसी प्रकार के दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, तब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने उस वक्त इन निर्देशों पर अंतरिम रोक लगा दी थी, लेकिन इस बार योगी सरकार ने पूरी तैयारी के साथ यह निर्देश जारी किए हैं।

सरकार ने कोर्ट में यह स्पष्ट कर दिया था कि यह निर्देश केवल कांवड़ यात्रा की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए जारी किए गए थे। लेकिन अब जब मिलावट और गंदगी मिलाने के कई मामले सामने आ चुके हैं, सरकार ने यह सुनिश्चित कर लिया है कि ऐसे कड़े निर्देश अब पूरे प्रदेश में लागू होंगे।

जनता की सुरक्षा सर्वोपरि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य की जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ कोई भी खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। अब समय आ गया है कि राज्य में मिलावटखोरी और खाद्य सामग्री में गंदगी मिलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह राज्य की जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इन कड़े कदमों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अब कोई भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट कर जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं कर सकेगा।

योगी सरकार के इन सख्त कदमों के बाद अब राज्य में मिलावटखोरों और गंदगी फैलाने वालों के लिए जगह नहीं बची है। सरकार का उद्देश्य केवल कानून लागू करना नहीं है, बल्कि एक साफ-सुथरे और सुरक्षित खाद्य वातावरण का निर्माण करना है। अब समय आ गया है कि ऐसे सभी प्रतिष्ठान और लोग जो इन कड़े नियमों का उल्लंघन करेंगे, उन्हें अपने कृत्यों का परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।