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बिलकुल शुद्ध है पटना महावीर मंदिर का ‘नैवेद्यम’ प्रसाद, हर 3 महीने में होती है जाँच: तिरुपति विवाद के बाद आचार्य कुणाल किशोर का बयान, प्रमाण पत्र भी दिखाए

तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू में आपत्तिजनक वस्तुओं की मिलावट की खबरों ने पूरे देश में आस्था से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा दिया है। इस विवाद के बीच, पटना के महावीर मंदिर ने अपने प्रसाद ‘नैवेद्यम’ की शुद्धता पर जोर देते हुए बयान जारी किया है। महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने स्पष्ट किया कि महावीर मंदिर का नैवेद्यम प्रसाद पूरी तरह से शुद्ध और स्वच्छ है।

आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि महावीर मंदिर में नैवेद्यम गाय के शुद्ध घी से तैयार किया जाता है, जो कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के ‘नंदिनी’ ब्रांड से आता है। उन्होंने कहा, “नैवेद्यम की गुणवत्ता की हर तीन महीने में जाँच होती है और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन से हर खेप की गुणवत्ता रिपोर्ट प्राप्त की जाती है।”

प्रसाद कैसे तैयार होता है?

नैवेद्यम को तैयार करने की प्रक्रिया में पूर्ण स्वच्छता और शुद्धता का पालन किया जाता है। पहले चना दाल से बेसन तैयार किया जाता है, जिसे शुद्ध घी में पकाकर बूंदी बनाई जाती है। इसमें काजू, किशमिश और इलायची का सही अनुपात में मिश्रण कर लड्डू तैयार किए जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया मशीनों के जरिए होती है, जिससे किसी भी प्रकार के हाथों के सीधे संपर्क की गुंजाइश नहीं रहती।

आचार्य किशोर कुणाल ने यह भी बताया कि महावीर मंदिर में नैवेद्यम हर दिन तिरुपति के लगभग 100 दक्ष कारीगरों द्वारा ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और पूजा के बाद तैयार किया जाता है। नैवेद्यम की माँग दिन-ब-दिन बढ़ रही है और इससे प्राप्त आय का उपयोग महावीर कैंसर संस्थान समेत सात अस्पतालों में गरीब मरीजों की सेवा में किया जाता है।

महावीर मंदिर के प्रसाद नैवेद्यम को भारत सरकार के ‘भोग’ सर्टिफिकेट से मान्यता प्राप्त है। यह सर्टिफिकेट पूजा स्थलों की स्वच्छता और शुद्धता की गारंटी देता है, जो खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत आता है। आचार्य किशोर कुणाल ने यह भी बताया कि तिरुपति के बाद सबसे ज्यादा लड्डू की बिक्री महावीर मंदिर के नैवेद्यम की होती है। यहां हर महीने लगभग 1.25 लाख किलो लड्डू की खपत होती है, जिसके लिए 15 हजार किलो शुद्ध घी का उपयोग किया जाता है।

उन्होंने कहा, “बाजार में शुद्ध घी के बहुत सारे ब्रांड हैं, लेकिन गाय के दूध से तैयार होने और एकदम शुद्ध होने के कारण कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के नंदिनी घी का ही इस्तेमाल महावीर मंदिर में किया जा रहा है। यहाँ प्रसाद बनता है तो उसमें मिलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की भी हर 3 महीने में जाँच होती है।”

आचार्य किशोर कुणाल कौन हैं?

आचार्य किशोर कुणाल एक प्रतिष्ठित धर्माचार्य और महावीर मंदिर न्यास के सचिव हैं। उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर धार्मिक और सामाजिक सेवा की दिशा में काम किया। उनके नेतृत्व में महावीर मंदिर ने कई धार्मिक और सामाजिक कार्यों को अंजाम दिया है। वो भारत सरकार द्वारा बनाई गई अयोध्या सेल के भी सदस्य रहे हैं, साथ ही अयोध्या विवाद के समय ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी के पद पर भी तैनात रहे।

‘हम आजम खान को किनारे लगा रहे हैं’: सपा के पूर्व सहयोगी रहे ओपी राजभर ने बताया अखिलश यादव ने कही थी ये बात, जेल में मिलने जाने से भी रोका था

उत्तर प्रदेश के पंचायती राज एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर आजम खान को किनारे लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब वे सपा के साथ थे, तब आजम खान से मिलने के लिए वे सीतापुर जेल जा रहे थे। उस समय अखिलेश यादव ने उन्हें रोक दिया था और कहा था कि वे आजम खान किनारे लगा रहे हैं।

शुक्रवार (20 सितंबर 2024) को रामपुर आए राजभर ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए कहा, “जब हम सपा के साथ थे, तब आजम खान से मिलने के लिए सीतापुर जेल जा रहे थे। उस समय अखिलेश यादव ने मुझे रोक दिया और हमसे कहा कि आप वहाँ मत जाइए। हम उनको किनारे लगा रहे हैं। आप उनको बढ़ाने के लिए जा रहे हैं।”

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को लेकर राजभर ने कहा आज वे जेल में बंद हैं। इसके लिए समाजवादी पार्टी जिम्मेदार है। अखिलेश यादव आजम खान को पहले से ही किनारे करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश ने मुस्लिम वोट लिया, लेकिन उनका साथ नहीं दिया। मुस्लिमों के लिए कोई भर्ती नहीं निकाली, जबकि सपा की चार-चार बार सरकार रही।

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव ने आजम खान का इस्तेमाल किया है। अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “वो (आजम खान) समाजवादी पार्टी में एक कद्दावर नेता थे, लेकिन कभी उनको डिप्टी सीएम नहीं बनाया। बस उनका इस्तेमाल किया। उनके काम पर वोट तो लिया, लेकिन जब हिस्सेदारी देने की बात आई तो किनारा कर लिया।”

ओपी राजभर के अनुसार, जिस केस में आजम खान जेल में हैं, उसमें समाजवादी पार्टी ने ही उनको फँसाया है। उनका कहना है कि अगर समाजवादी पार्टी ने कानून के दायरे में रहकर सही काम किया होता तो आज आजम खान जेल में नहीं होते। उन्होंने इशारों में कहा कि अखिलेश यादव खुद नहीं चाहते हैं कि आजम खान बाहर आएँ।

यह पूछे जाने पर कि क्या अखिलेश यादव ने आजम खान के साथ पक्षपात किया है, इस पर ओमप्रकाश राजभर ने कहा, “सौ प्रतिशत किया है। टीवी चैनल पर सब चला है। मैं आजम से सीतापुर मिलने के लिए जा रहा था तो उन्होंने मुझे मना किया। कहा कि आप वहाँ मत जाइए, हम उनको किनारे लगा रहे हैं। अखिलेश को गुलाम नेता चाहिए जो बोले ना। गूँगा रहे, बहरा रहे। बस उनकी हाँ में हाँ मिलाए।”

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव जब से कॉन्ग्रेस के दरबारी बने हैं, तब से उल्टा-सीधा बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के ‘समाप्तवादी पार्टी‘ बनने का कारण अखिलेश स्वयं बनेंगे। कोर्ट में आजम खान के 10 हजार रुपए के लिए मोहलत माँगे जाने पर राजभर ने कहा, “परिस्थितियाँ होती हैं। कभी राजा थे, तब तूती बोलती थी। अब तो बेचारे जेल में हैं। अब वह जलवा नहीं रह गया।”

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षाकर्मियों पर अटैक, 6 की मौत, 13 घायल: जवाबी कार्रवाई में 12 हमालवर मारे, तहरीक-ए-तालिबान ने ली जिम्मेदारी

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पुलिसकर्मियों पर हमले की खबर है। बताया जा रहा है इस हमले में 6 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। अटैक की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने ली है।

जानकारी के मुताबिक, हमलावरों ने दक्षिणी वजीरिस्तान जिले की लाढा तहसील में मिश्ता गाँव स्थित एक जाँच चौकी पर हमला किया था जिसमें सुरक्षाकर्मियों हताहत हुए। वहीं पाँच आतंकियों को भी मारा गया।

इस घटना के अलावा खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक जगह और पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों और हमलावरों के बीच मुठभेड़ हुई। ये मामला अजाम वरसाक इलाके का है। वहाँ पाकिस्तानी फौज ने हमलावरों के पाकिस्तान में आने से पहले उन्हें मार गिराया जबकि दो सुरक्षाकर्मी वहाँ भी घायल हो गए।

लोकल मीडिया की खबरों के अनुसार, दोनों घटनाओं में 12 हमलावरों को मारा गया है। वहीं कुल 13 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं और 6 की मौत हुई है।

ऐसा पहली बार नहीं है कि पाकिस्तान में पुलिस चौकियों को इस कदर निशाना बनाया गया हो। बीते महीने अगस्त में ही खैबर पख्तूनख्वा में आतंकियों ने सुरक्षा चौकी पर हमला किया था। इस हमले में कम से कम सात पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए थे और 11 अन्य घायल हुए थे।

इसके अलावा मई में डेरा इस्माइल शहर में एयरबेस को निशाना बनाते हुए कई बम धमाके हुए थे। बमबारी में 5 लोगों की जान गई थी जबकि 20 लोग घायल हुए थे। उस समय किसी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी लेकिन सबका संदेह पाकिस्तान तालिबान पर ही था।

बता दें कि नवंबर 2022 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और पाकिस्तान सरकार के बीच सीजफायर का समझौता खत्म हुआ था। इसके बाद से PAK फौज पर हमले की घटनाएँ बढ़ीं। जिसके कारण पाकिस्तान के कई फौजियों की जान गई।

‘अंबानी का ‘एंटीलिया’ वक्फ का, PM मोदी का आदमी मुझसे मिलने आया’: जाकिर नाइक ने पाकिस्तानी यूट्यूबर के पॉडकॉस्ट में जमकर बोला झूठ, समझे कैसे सारे दावे मनगढ़ंत

जाकिर नाइक, जो एक समय मजहबी उपदेशक के रूप में जाना जाता था, अब भारत में भगौड़ा घोषित हो चुका है और मलेशिया में शरण लेकर भारत के खिलाफ विवादास्पद बयानबाजी कर रहा है। इस लेख में हम पाकिस्तानी यूट्यूबर के साथ जाकिर नाइक के हालिया पॉडकास्ट में किए गए दावों का विश्लेषण करेंगे, जहाँ उसने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भेजे गए व्यक्ति से मुलाकात का दावा किया, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर टिप्पणी की, और भारत में मुस्लिमों की स्थिति पर अपनी राय दी। हालाँकि, जाकिर नाइक के अधिकतर दावे तथ्यहीन और झूठे साबित होते हैं। आइए, इस लेख में उसके बयानों की सच्चाई पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

मोदी से मुलाकात का दावा: सच्चाई या झूठ?

जाकिर नाइक ने पॉडकास्ट में सबसे बड़ा और सबसे विवादास्पद दावा यह किया कि 2019 में, अनुच्छेद 370 हटाने से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक प्रतिनिधि को मलेशिया भेजा था। इस प्रतिनिधि ने जाकिर नाइक से मुलाकात की और भारत आने का निमंत्रण दिया। नाइक के अनुसार, यह मुलाकात इसलिए हुई थी क्योंकि भारत सरकार और जाकिर नाइक के बीच रिश्ते सुधारने की बात हो रही थी।

लेकिन यहाँ सवाल उठता है कि अगर जाकिर नाइक का दावा सच होता, तो भारत सरकार उसे भगौड़ा घोषित क्यों करती? जाकिर नाइक के खिलाफ भारत में आतंकी संगठनों से संबंध रखने, युवाओं को कट्टरपंथ की तरफ धकेलने और नफरत फैलाने के गंभीर आरोप हैं। उसकी गतिविधियों को देखते हुए भारत सरकार ने उसे कानूनन अपराधी माना है। इस संदर्भ में पीएम मोदी द्वारा भेजे गए व्यक्ति से मुलाकात का दावा पूरी तरह झूठ प्रतीत होता है।

नाइक ने यह भी दावा किया कि पीएम मोदी के प्रतिनिधि ने उसे अनुच्छेद 370 पर सरकार का समर्थन करने के लिए कहा था। उसने कहा कि वह कश्मीरियों की आजादी का समर्थन करता है और अनुच्छेद 370 को हटाना संविधान के खिलाफ है। यह बयान जाकिर नाइक की भारत विरोधी सोच को स्पष्ट करता है, जहाँ वह देश की एकता और अखंडता को चुनौती दे रहा है। अनुच्छेद 370 के हटाने के बाद कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, और इस पर किसी प्रकार का विवाद पैदा करना राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का हिस्सा है।

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर दावे: झूठ और सच्चाई का मिश्रण

जाकिर नाइक ने वक्फ बोर्ड और उसकी संपत्तियों पर भी लंबी चर्चा की। उसने कहा कि वक्फ बोर्ड के पास भारत में तीसरी सबसे बड़ी मिल्कियत है, जिसमें रक्षा और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन आती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि वक्फ बोर्ड के पास बड़ी मात्रा में जमीन है, जो मुस्लिम समाज के लिए उपयोगी है। लेकिन नाइक ने इसके पीछे छिपे तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया।

उसने दावा किया कि सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है और इसके लिए वक्फ कानून में बदलाव की कोशिश कर रही है। यह दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत है। भारतीय संविधान हर धर्म के अधिकारों की रक्षा करता है और सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने की कोई योजना नहीं है। जाकिर नाइक ने केवल अपने झूठे एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मुस्लिम समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश की है।

जाकिर नाइक ने कहा, “कुछ मुस्लिमों ने वक्फ के फायदे उठाए, उसे बहाना बनाकर मोदी सरकार वक्फ कानून में बदलाव करना चाहती है, ताकि वो इसे हड़प सके। आपको शायद पता नहीं होगा, दुनिया का सबसे महंगा घर मुकेश अंबानी का मुंबई में है। दुनिया में सबसे महंगा घर, जो 27 मंजिला घर है। छत पर हेलीपैड है। उसकी प्रॉपर्टी वक्फ बोर्ड की है। किसी मुसलमान ने ही गड़बड़ की होगी, जो जमीन उसके पास है। उस पर केस हुआ था। केस होने की वजह से वो अपने घर में घुस भी नहीं सकता था, लेकिन कानून की वजह से कुछ नहीं कर सकते।”

नाइक ने साफ दावा किया कि मुकेश अंबानी का 27 मंजिला घर, जो दुनिया का सबसे महंगा घर माना जाता है, वक्फ की जमीन पर बना है। यह दावा भी पूरी तरह से झूठा और सनसनीखेज है। जाकिर नाइक ने बिना किसी प्रमाण के इस तरह के बयान देकर केवल विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। वक्फ की संपत्तियों का मुस्लिम समाज के लिए धार्मिक और सामाजिक महत्व है, लेकिन उसे बिना किसी आधार के अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों से जोड़कर नाइक ने केवल मीडिया में सुर्खियाँ बटोरने का प्रयास किया।

भारत में मुस्लिमों की स्थिति: सच्चाई पर भ्रम का पर्दा

जाकिर नाइक ने अपने पॉडकास्ट में भारत में मुस्लिमों की स्थिति पर भी चर्चा की। उसने कहा कि भारत मुस्लिमों के लिए सबसे अच्छा देश है, जो सही है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहाँ हर धर्म को समान अधिकार प्राप्त हैं। मुस्लिमों के लिए यहाँ पर्सनल लॉ बोर्ड, वक्फ बोर्ड जैसी संस्थाएँ हैं, जो उनके धार्मिक और सामाजिक अधिकारों की रक्षा करती हैं।

लेकिन जाकिर नाइक ने इस सच्चाई का इस्तेमाल भी अपने झूठ को छिपाने के लिए किया। उसने कहा कि अगर मोदी सरकार वक्फ कानून में बदलाव करती है, तो इससे मुस्लिम समाज की संपत्तियों पर खतरा मंडराएगा। यह बयान एक भय पैदा करने की रणनीति है, ताकि मुस्लिम समाज सरकार के खिलाफ खड़ा हो सके।

भारतीय संविधान ने सभी धार्मिक संस्थाओं को समान अधिकार दिए हैं और सरकार के किसी भी कदम का उद्देश्य समाज की भलाई और देश की एकता को बनाए रखना है। जाकिर नाइक ने जानबूझकर ऐसे बयान दिए ताकि वह मुस्लिम समाज को भड़काकर सरकार के खिलाफ खड़ा कर सके।

जाकिर नाइक एक मजहबी नेता या एक कट्टरपंथी?

जाकिर नाइक ने अपने पॉडकास्ट में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि वह निर्दोष है और भारत सरकार ने उसके खिलाफ गलत आरोप लगाए हैं। उसने यह दावा किया कि वह इस्लाम के प्रचार के लिए काम कर रहा है और उसका मकसद शांति और सौहार्द को बढ़ावा देना है। लेकिन सच्चाई इससे कहीं अलग है।

जाकिर नाइक के भाषण और उपदेशों ने कई युवाओं को कट्टरपंथ की तरफ धकेला है। उसके उपदेशों से प्रभावित होकर कई युवाओं ने आतंकवादी संगठनों में शामिल होने का प्रयास किया है। नाइक के भाषणों में नफरत और विवादास्पद बातें होती हैं, जो समाज में धार्मिक तनाव को बढ़ावा देती हैं। उसने अपने बयानों से न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर में इस्लाम और अन्य धर्मों के बीच दूरी बढ़ाने का काम किया है।

भारत में उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें आतंकी संगठनों से संबंध रखने और नफरत फैलाने के आरोप शामिल हैं। यह कहना कि जाकिर नाइक निर्दोष है, एक भ्रामक बयान है। उसके भाषणों और कार्यों से स्पष्ट है कि वह एक कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने वाला व्यक्ति है, जो समाज में नफरत और विभाजन की राजनीति करता है।

वक्फ बोर्ड का विवाद: सरकार का उद्देश्य या जाकिर नाइक की साजिश?

जाकिर नाइक ने वक्फ बोर्ड और उसकी संपत्तियों पर किए गए बदलावों के बारे में कहा कि मोदी सरकार मुस्लिम समाज की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है। उसने कहा कि अगर वक्फ कानून में बदलाव होता है, तो इससे मुस्लिम समाज की हजारों मस्जिदें और कब्रिस्तान हाथ से निकल जाएँगी। इसके इतर बहुत सारी जमीनों पर वक्फ बोर्ड ने फर्जी तरीके से कब्जा किया हुआ है।

यह बयान न केवल तथ्यहीन है, बल्कि जाकिर नाइक द्वारा फैलाया गया एक और झूठ है। वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और संरक्षण भारतीय संविधान द्वारा सुरक्षित है और सरकार के किसी भी कदम का उद्देश्य समाज के हित में होता है। जाकिर नाइक ने इस मुद्दे को लेकर मुस्लिम समाज में एक गलत संदेश फैलाया है, ताकि वह अपने आप को एक नेता के रूप में प्रस्तुत कर सके और समाज को गुमराह कर सके।

वास्तव में, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और संरक्षण करने के लिए कुछ बदलावों की जरूरत हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार उन संपत्तियों को हड़पना चाहती है। जाकिर नाइक ने इस मुद्दे को केवल विवादास्पद बनाने के लिए अपने पॉडकास्ट में पेश किया है, ताकि वह सरकार के खिलाफ एक नई साजिश रच सके।

जाकिर नाइक एक भ्रम फैलाने वाला व्यक्ति

जाकिर नाइक के अधिकांश दावे झूठे और भ्रम फैलाने वाले हैं। उसने अपने पॉडकास्ट में मोदी सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाए, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर झूठे दावे किए और मुस्लिम समाज को गुमराह करने की कोशिश की। उसकी असलियत एक कट्टरपंथी और समाज में विभाजन की राजनीति करने वाले व्यक्ति के रूप में सामने आई है।

जाकिर नाइक का उद्देश्य केवल समाज में धार्मिक उन्माद और नफरत फैलाना है। उसने अपने भाषणों से कई युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेला है और आतंकवादी संगठनों से संबंध स्थापित करने का प्रयास किया है। ऐसे व्यक्ति को मजहबी विद्वान के रूप में प्रस्तुत करना समाज और देश दोनों के लिए खतरनाक है।

झूठ और सच्चाई का पर्दाफाश

जाकिर नाइक के पॉडकास्ट में किए गए दावे अधिकतर मनगढ़ंत और झूठे हैं। उसने मोदी सरकार द्वारा भेजे गए व्यक्ति से मुलाकात का झूठा दावा किया, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर गलत जानकारी दी और मुस्लिम समाज में डर फैलाने का प्रयास किया। जाकिर नाइक का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिक विभाजन पैदा करना और अपने कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देना है।

भारत जैसे लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश में हर धर्म को समान अधिकार प्राप्त हैं, और सरकार का उद्देश्य समाज की भलाई और देश की एकता को बनाए रखना है। जाकिर नाइक जैसे लोगों को बेनकाब करना और उनके झूठ का पर्दाफाश करना बेहद जरूरी है।

धारावी में अवैध मस्जिद गिराने पहुँची BMC की टीम पर मुस्लिम भीड़ का हमला: पथराव और गाड़ियों में तोड़फोड़, तनाव के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के धारावी इलाके में मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर तनाव फैल गया है। अवैध निर्माण की सूचना पर बृहन्नमुंबई नगर निगम (BMC) तोड़फोड़ करने पहुँची। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उन पर हमला कर दिया। निगम की गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की गई है। हालात को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

दुनिया के सबसे बड़े स्लम इलाके धारावी में 90 फीट रोड पर 25 साल पुरानी एक मस्जिद है, जिसका नाम महबूब-ए-सुभानिया मस्जिद है। आरोप है कि इसमें अवैध निर्माण किया गया है। इसको गिराने के लिए BMC ने नोटिस दिया था। हालाँकि, इस नोटिस का जबाव ना ही किसी मस्जिद कमिटी की ओर से दी गई और ना ही किसी मुस्लिम संगठन ने दिया।

आखिरकार BMC ने इसे गिराने की घोषणा की थी। इसकी जानकारी मिलते ही मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार (20 सितंबर 2024) की रात से ही सड़कों पर बैठ गए और पूरे रास्ते को जाम कर दिया। मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि यह मस्जिद बहुत पुरानी है। इसलिए इसे नहीं तोड़ा जाना चाहिए।

हालाँकि, BMC की गाड़ियाँ जब अवैध निर्माण को तोड़ने पहुँचीं तो मुस्लिम समुदाय के प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों पर पथराव कर दिया। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी भी की। इस पथराव में कितने लोग घायल हुए हैं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, पुलिस अधिकारी मुस्लिमों को पथराव नहीं करने और ट्रैफिक नहीं रोकने का आग्रह किया है।

कहा जा रहा है कि ये सारा हंगामा एक चिट्ठी के सामने आने के बाद हुआ। धारावी इलाके में आई चिट्ठी में लिखा गया है कि ‘मस्जिद गिराने के लिए बीएमसी की टीम पुलिस के साथ 21 सितंबर को सुबह 9 बजे आने वाली है। इसलिए आप सभी लोगों से गुजारिश है कि मस्जिद की हिफाजत के लिए ज्यादा से ज्यादा तादाद में जमा हों।’ इसके बाद भारी संख्या में लोग धारावी में जमा हो गए।

वहीं, मस्जिद पर कार्रवाई को रुकवाने के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीएमसी की डिमोलीशन की नोटिस को लेकर मुलाकात की और लोगों की भावनाओं से अवगत कराया।

5 आधार कार्ड, कई इंस्टा ID और हिन्दू नाम: बरेली में कुछ यूँ नौशाद और आमान ने फँसा रखी थी 30+ गैर मुस्लिम लड़कियाँ, गिरफ्तारी के बाद सच उगला

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 2 मुस्लिम युवकों द्वारा सामूहिक लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ नौशाद और आमान पर लगभग 30 हिन्दू महिलाओं से नाम बदल कर चैट करने का खुलासा हुआ है। ये दोनों इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्म पर हिन्दू नाम से ID बनाते थे। इसके बाद महिलाओं की अश्लील वीडियो बनाकर उनके साथ ब्लैकमेलिंग की जाती थी। आरोपितों ने फर्जी आधार कार्ड भी बनवा रखे हैं। शुक्रवार (20 सितंबर 2024) को पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना बरेली के इज्जतनगर थानाक्षेत्र की है। गुरुवार (19 सितंबर 2024) को कर्मचारी नगर इलाके में 2 लड़कियाँ सड़क पर 2 लड़कों से गुस्से में बात कर रहीं थीं। शोरगुल सुनकर आसपास के लोग जमा हुए। लोगों को देख कर लड़कियाँ चुपचाप वहाँ से चली गईं पर दोनों लड़कों को लोगों ने पकड़ लिया। जब दोनों से उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने सतीश और राहुल बताया। उनकी बातों पर लोगों को शक हुआ तो उन्होंने पुलिस बुला कर दोनों को उनके हवाले कर दिया।

बताया जा रहा है कि पुलिस के आगे ही राहुल और सतीश बने दोनों आरोपितों ने सच उगलना शुरू कर दिया। एक ने अपना नाम नौशाद जबकि दूसरे ने खुद को आमान बताया। पुलिस ने इन दोनों के खातों की पड़ताल की तो कई गंभीर खुलासे हुए। इन दोनों के पास 5 आधार कार्ड बरामद हुए। ये आधार कार्ड अलग-अलग हिन्दू और मुस्लिम नामों से बने हुए थे। इन पर फोटो भी अलग-अलग लगी हुई थी। इन दोनों के मोबाइल फोन खंगाले गए तो कई फर्जी सोशल प्रोफाइलों का भी खुलासा हुआ।

दोनों आरोपित मूलतः बरेली के ही रहने वाले हैं। नौशाद और आमान ने इंस्टाग्राम पर 6 अलग-अलग प्रोफ़ाइल बना रखी थी। आधार कार्ड की ही तरह ये प्रोफ़ाइल हिन्दू और मुस्लिम दोनों नाम से थीं। इन दोनों ने इस प्रोफाइलों से कई लड़कियों और महिलाओं से अश्लील चैटिंग भी की थी। इन महिलाओं से वीडियो कॉल कर के उनके अश्लील वीडियो भी बनाए गए थे। पुलिस ने पाया कि ये दोनों आरोपित आपत्तिजनक वीडियो बना कर लड़किओं को ब्लैकमेल भी करते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपितों ने राहुल, सुरेश और सतीश नाम से सोशल मीडिया हैंडल बना रखे थे। ये आरोपित लगभग 30 लड़कियों के सम्पर्क में थे जिसमें अधिकतर गैर-मुस्लिम थीं। वीडियो कॉल की रिकार्डिंग कर के ब्लैकमेलिंग के बाद ये दोनों लड़कियों से पैसों की उगाही करते थे। अपनी बदनामी के डर से पीड़िताएँ पुलिस और अपने घर में शिकायत भी नहीं करती थीं। अब पुलिस ने आमान और नौशाद की कॉल डिटेल भी निकलवाई है।

माना जा रहा है कि आगे कुछ अन्य पीड़िताओं का भी खुलासा हो सकता है। पुलिस ने दोनों आरोपितों के मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है। नौशाद और आमान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 339, 340, 336 (3 के साथ IT एक्ट की धारा 66-D के तहत कार्रवाई की गई है। दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनके पास से कुल 8 फर्जी आधार कार्ड और 2 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

दलितों-पिछड़ों के नाम पर कटी जमीन की रसीद, दावा वक्फ बोर्ड कर रहा: मधुबनी में अल्पसंख्यक छात्रावास निर्माण पर बवाल, BJP विधायक ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे

बिहार के मधुबनी में दलित-पिछड़ों के नाम वाली जमीन पर अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय बनाने की मंजूरी के बाद बवाल हो गया है। सैकड़ों की संख्या में निकलकर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ धरने पर बैठ गए। लोगों का कहना है कि जिस जमीन पर अल्पसंख्यक विद्यालय बनाने की मंजूरी दी गई है, उस जमीन की रसीद यहाँ के लोगों के नाम कटी है।

मामला मधुबनी के बिस्फी प्रखंड क्षेत्र के उसौथू गाँव से जुड़ा है। इस गाँव के साथ-साथ आसपास के लोग उसौथू डीह में धरने पर बैठ गए हैं। बता दें कि 17 सितंबर 2024 को प्रशासन ने यहाँ की जमीन पर लगी हुई फसल को जोतकर हटा दिया था। जिलाधिकारी के आदेश पर अल्पसंख्यक विभाग ने लगभग 5 एकड़ जमीन को ‘अतिक्रमण मुक्त’ कराकर इस दावा करने वाले वक्फ बोर्ड को सौंप दिया था।

इस जमीन पर सरकार अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय का निर्माण करवा रही है। इसकी शुरुआत दो दिन पहले ही की गई है। हालाँकि, लोगों ने अल्पसंख्यक विद्यालय के निर्माण कार्य को बंद करवा दिया है। लोगों के विरोध को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी वहाँ से लौट गया है। इसकी सूचना मिलने पर बिहार सरकार के भूमि एवं राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल भी सक्रिय हो गए।

जायसवाल ने स्थानीय भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल से बात की और उनसे कहा कि वे इस संबंध में विभाग को एक आवेदन विभाग को दें। आगे का काम विभाग करेगा। धरना पर बैठे लोगों का कहना है कि जिस जमीन को सरकार ने अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय के आवंटित किया है, उस जमीन की रसीद उन लोगों के नाम से कटी है। ऐसे में उस जमीन पर आवासीय विद्यालय कैसे बनाया जा सकता है।

वक्फ बोर्ड इस जमीन पर अपना दावा करता है। वहीं, कुछ लोग इस जमीन को बिहार सरकार की तो कुछ लोग भारत सरकार का कहते हैं। यह जमीन लगभग 5 एकड़ की है। यहाँ बनने वाले आवासीय अल्पसंख्यक विद्यालय की लागत 60 करोड़ रुपए है। बचौल ने कहा कि जमीन वक्फ बोर्ड की है या बिहार सरकार या भारत सरकार की या दलित-पिछड़ों की, सबसे पहले इसकी जाँच होनी चाहिए।

धरने का नेतृत्व कर रहे स्थानीय भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने कहा कि इस हिन्दू बाहुल्य क्षेत्र में अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय बनाने से सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार यहाँ केन्द्रीय विद्यालय बनवाना चाह रही है। इसके लिए जिला प्रशासन को राशि भी आवंटित की जा चुकी है, लेकिन पिछले सात सालों से जमीन नहीं मिलने के कारण इसका निर्माण नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस जगह पर अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय की जगह केंद्रीय विद्यालय का निर्माण होना चाहिए। इससे हर समाज के बच्चे पढ़ाई कर सकेंगे। इस जमीन पर अल्पसंख्यक विद्यालय के निर्माण का विरोध जारी रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 17 सितंबर को जिन लोगों की फसल प्रशासन ने जोतकर बर्बाद की है, उन्हें इसका मुआवजा दिया जाए।

गुजरात के सूरत में ट्रेन को पलटने की थी साजिश, ट्रैक पर लगी मिली फिश प्लेट: केस दर्ज, लाइनमैन की सतर्कता से हादसा टला

गुजरात के सूरत में ट्रेन को पटरी से उतारने की साजिश रचने का खुलासा हुआ है। घटना 20-21 सितंबर रात की है। किम रेलवे स्टेशन के पास जाँच में फिश प्लेट और चाबियाँ बरामद हुई हैं।

मामले में पश्चिमी रेलवे के वडोदरा डिवीजन ने कहा कि कुछ अज्ञात बदमाशों ने यूपी लाइन से कुछ फिश प्लेट और चाबियाँ खोलकर उसी ट्रैक पर रख दीं थी, जिसके कारण ट्रेन की आवाजाही रुक गई और बाद में जाँच के बाद ट्रेनों को चलाया गया।

सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि ये फिशप्लेट और नट जाबूझकर ट्रैक पर दूर तक लगाए गए हैं। वीडियो बनाने वाला शख्स भी इस बात को खुद कहता है कि ट्रेन में अवरोध पैदा करने के लिए ये कब्जे और नट आगे तक लगाए गए हैं।

वहीं मामले को लेकर डिप्टी एसपी आरआर सरवैया ने बताया- वडोदरा के किम स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक से फिश प्लेट और चाबियाँ हटा दी गईं, उसके कारण करीब 20 मिनट तक ट्रेनों का परिचालन बाधित रहा। जीआरपी, आरपीएफ और एलसीबी ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

उन्होंने बताया कि इन फिश प्लेट्स की जानकारी किम के पास गश्त कर रहे रेलवे लाइनमैन ने दी थी। बाद में मरम्मत के बाद ट्रैक पर ट्रेन सेवा शुरू कर दी गई… पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में जगह-जगह से ट्रेनों को डीरेल करने की साजिश सामने आई है। कभी रेलवे ट्रैक पर लोहा फेंक दिया जाता है तो कभी बोरी। इससे पहले उत्तर प्रदेश के रामपुर में अराजक तत्वों ने रेल की पटरी पर 6 मीटर लंबा लोहा रख दिया था।

हालाँकि उस समय लोको पायलट की सूझबूझ के कारण हादसा टल गया। इससे पहले इसी तरह फर्रुखाबाद में हुआ था। वहाँ भी ट्रेन को पटरी से उतारने के लिए एक लकडी को रख दिया था।

तिरुपति प्रसाद की पवित्रता हुई बहाल, TTD ने बयान जारी कर दिया आश्वासन: ‘जानवर की चर्बी’ वाले विवाद पर Amul ने कहा- हमने कभी नहीं की वहाँ घी सप्लाई

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू प्रसादम की शुद्धता बहाल होने की पुष्टि की गई है। टीटीडी ने इस विवाद के बाद स्पष्ट किया कि अब लड्डू प्रसादम का घी बिना किसी गड़बड़ी के है और उसकी शुद्धता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह बयान तब आया, जब तिरुमाला मंदिर के लड्डू प्रसादम के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे।

शुद्धता पर टीटीडी का बयान

टीटीडी ने कहा है कि प्रसादम की शुद्धता को फिर से स्थापित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि घी आपूर्ति और उसके इस्तेमाल में पूरी सावधानी बरती जाती है, ताकि प्रसाद की पवित्रता और भक्तों की आस्था बनी रहे। बता दें कि पिछले कई महीनों से यह आरोप लगाया जा रहा था कि लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता घट गई है। घी अशुद्ध था और उसमें जानवरों की चर्बियाँ पाई गई थी।

अब तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने कहा है कि अब प्रसाद पूरी तरह से पवित्र और बेदाग है। तिरुमाला की पहाड़ियों पर स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का प्रबंधन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड (टीटीडी) करता है। शुक्रवार (20 सितंबर 2024) रात को सोशल मीडिया पर साझा किए पोस्ट में टीटीडी ने लिखा कि ‘श्रीवारी लड्डू की दिव्यता और पवित्रता अब बेदाग है। टीटीडी सभी श्रद्धालुओं की संतुष्टि के लिए लड्डू प्रसादम की पवित्रता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

घी आपूर्तिकर्ताओं पर विशेष ध्यान

टीटीडी ने यह भी कहा कि प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक कठोर जाँच प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इसमें शामिल आपूर्तिकर्ताओं की छानबीन की जाती है और घी की हर खेप का परीक्षण किया जाता है। टीटीडी ने यह भी कहा कि भक्तों की आस्था और प्रसादम की शुद्धता बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।

प्रसादम की शुद्धता पर टीटीडी के इस आश्वासन के बाद भक्तों में राहत महसूस हुई है। सोशल मीडिया पर भी टीटीडी के प्रयासों की सराहना की जा रही है। कई भक्तों ने कहा कि लड्डू प्रसादम के साथ उनकी आस्था जुड़ी हुई है और टीटीडी द्वारा उठाए गए कदमों ने उनकी आस्था को और मजबूत किया है। अमूल के बयान के बाद भक्तों में फैली गलतफहमी भी दूर हो गई है।

विवाद और अफवाहों के बीच अमूल की सफाई

विवाद के बीच, एक और बड़ा नाम उभरा—अमूल। सोशल मीडिया पर अफवाहों के चलते दावा किया गया कि तिरुमाला मंदिर के लिए घी की आपूर्ति अमूल द्वारा की जाती है। हालाँकि, अमूल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से स्पष्ट किया कि उसने कभी तिरुमाला मंदिर के लिए घी सप्लाई नहीं किया है। अमूल के इस बयान ने उन अफवाहों पर विराम लगा दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि अमूल का घी प्रसादम की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। अमूल ने यह साफ किया कि उनका घी प्रसादम में शामिल नहीं है, और इससे जुड़ी सभी बातें झूठी हैं।

लड्डू प्रसादम की महत्ता

तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसादम की पवित्रता और महत्ता हर भक्त के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्रसादम न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका आर्थिक महत्त्व भी है। टीटीडी द्वारा प्रति वर्ष लाखों लड्डू तैयार किए जाते हैं, जिन्हें भक्तगण अपने साथ घर ले जाते हैं। इस लड्डू की शुद्धता पर उठे सवाल ने मंदिर प्रशासन और भक्तों के बीच हलचल मचा दी थी।

अहमद को रीना की चिट्ठी- तुम कैसे हो… तुम्हारी याद आती है: कक्षा 3 की क्लास में हो रही पढ़ाई, NCERT सिलेबस की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुँचा बच्ची का पिता

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एनसीईआरटी की तीसरी कक्षा की पर्यावरण की पुस्तक पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें एक हिंदू लड़की और एक मुस्लिम लड़के के बीच संवाद को लेकर लव जिहाद का आरोप लगाया गया है। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब एक स्थानीय निवासी, डॉ. राघव पाठक, ने पुलिस को शिकायत देकर किताब पर गंभीर आपत्ति जताई।

विवाद की वजह: तीसरी कक्षा की पुस्तक में संवाद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. राघव पाठक ने अपनी बेटी की किताब में छपे एक पाठ पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह आपत्ति तीसरी कक्षा की एनसीईआरटी पर्यावरण की पुस्तक के 17वें पेज पर प्रकाशित ‘चिट्ठी आई है’ नामक पाठ पर है। पाठ में रीमा नाम की हिंदू लड़की, अहमद नाम के मुस्लिम लड़के को एक चिट्ठी लिखती है, जिसमें वह उसे छुट्टियों में अगरतला आने का निमंत्रण देती है और पत्र के अंत में लिखती है, “तुम्हारी रीना।”

पाठक ने आरोप लगाया है कि यह पाठ सीधे तौर पर ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देता है और छोटी उम्र के बच्चों के मन में धार्मिक आधार पर प्रेम संबंधों के प्रति आकर्षण पैदा कर सकता है। उनकी आपत्ति का आधार यह है कि एक हिंदू लड़की को एक मुस्लिम लड़के को पत्र लिखाते समय एक ऐसा नामांकित संबंध दिखाया गया है, जो भविष्य में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दे सकता है।

‘लव जिहाद’ का डर और सांस्कृतिक चिंता

डॉ. राघव पाठक ने खजुराहो के एसडीओपी (उप पुलिस अधीक्षक) सुनील शर्मा को इस मामले में एक लिखित शिकायत दी है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह किताब लव जिहाद के प्रति बच्चों के मन में आकर्षण पैदा कर सकती है। पाठक ने कहा, “मेरी बेटी तीसरी कक्षा में पढ़ती है। जब मैंने उसकी किताब में यह संवाद देखा, तो मुझे घोर आपत्ति हुई। एक हिंदू लड़की कैसे किसी मुस्लिम लड़के को पत्र लिख सकती है, और खुद को उसकी रीना बता सकती है? यह सीधे तौर पर सांस्कृतिक और धार्मिक विभाजन पैदा करने वाला है।”

उन्होंने इस पर जोर दिया कि सरकार जहाँ लव जिहाद जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून बना रही है, वहीं एनसीईआरटी की किताबें इस तरह के संवाद दिखाकर बच्चों के मन में गलत धारणाएँ पैदा कर रही हैं। उन्होंने माँग की कि किताब के इस पाठ को हटाया जाए या पात्रों के नाम बदल दिए जाएँ ताकि बच्चों के मन में धर्म-परिवर्तन जैसे विचार न पनपे।

पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच

एसडीओपी सुनील शर्मा ने बताया कि उन्हें डॉ. राघव पाठक की शिकायत प्राप्त हुई है, जिसमें उन्होंने एनसीईआरटी की किताब पर लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। यह मामला पाठ्य पुस्तक से संबंधित होने के कारण इसे उच्चाधिकारियों को भेजा गया है, ताकि उनकी सलाह पर उचित कार्रवाई की जा सके।

शर्मा ने आगे कहा कि चूँकि यह मामला राज्य स्तर पर प्रकाशित पाठ्य पुस्तकों से जुड़ा है, इसलिए इसे राज्य सरकार को भी सूचित किया जाना चाहिए। पाठक को सलाह दी गई है कि वे राज्य सरकार को भी इस विषय पर लिखें, ताकि इस मामले में उचित जाँच और समाधान हो सके। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है।

पाठ्य पुस्तक में सुधार की माँग

डॉ. पाठक ने यह भी कहा कि वह एक जिम्मेदार नागरिक और पिता के नाते इस मामले को आगे तक ले जाएँगे। उन्होंने माँग की है कि जिस संवाद में हिंदू लड़की रीना और मुस्लिम लड़के अहमद के बीच संवाद दिखाया गया है, उसे पूरी तरह से बदला जाए। उन्होंने कहा, “यह छोटी बात नहीं है। यह एक सोची-समझी साजिश है, जो बच्चों के कोमल मन में सांप्रदायिकता और धार्मिक परिवर्तन के बीज बो रही है।”

पाठक ने कहा कि यदि इस मामले में कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो इस तरह की घटनाएं समाज में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकती हैं और बच्चों के मन में गलत विचार उत्पन्न कर सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और लव जिहाद जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पाठ्य पुस्तकों में परिवर्तन करना चाहिए।

इस मामले पर केवल पाठक ही नहीं, बल्कि कई हिंदूवादी संगठनों ने भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एनसीईआरटी जैसी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में इस प्रकार के संवाद बच्चों के मन में धार्मिक ध्रुवीकरण को जन्म दे सकते हैं।

सांस्कृतिक चिंताओं पर गंभीरता से विचार आवश्यक

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में उठाए गए इस मामले ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि शिक्षा के माध्यम से दी जा रही जानकारी को बेहद सावधानीपूर्वक तैयार किया जाना चाहिए। जबकि सरकार और पुलिस इस मामले में अपनी कार्रवाई कर रही है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विषय पर राज्य सरकार और एनसीईआरटी क्या निर्णय लेती है। इस प्रकार के विवाद एक बार फिर इस बात पर जोर देते हैं कि शिक्षा में घालमेल करने वाली ऐसी कोई भी सामग्री नहीं होनी चाहिए जो बच्चों के कोमल मन को प्रदूषित कर सके।