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‘दुर्गा पूजा करनी है तो अल्लाह के नाम पर दो 5 लाख टका, वरना काटे जाओगे’ : बांग्लादेश के खुलना में हिंदू मंदिरों को मिली धमकी, 1 हफ्ते में पैसे देने को कहा

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिंदू समूहों का अपने समुदाय की सुरक्षा को लेकर डर सही साबित हुआ। खुलना में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को धमकाते हुए कहा है कि अगर उन लोगों को दुर्गा पूजा करनी है तो उन्हें 5 लाख टका देने ही होंगे। बताया जा रहा है कि कई हिंदू मंदिरों को खुलना जिले में गुमनाम नाम से धमकी भरे पत्र आए हैं जिसमें लिखा है कि अगर भुगतान नहीं किया गया तो दुर्गा पूजा नहीं होने दी जाएगी और उन्हें गंभीर परिणाम भी भुगतने होंगे।

पत्र डाक के जरिए हिंदू मंदिरों को भेजे गए हैं। इसमें साफ कहा गया है कि अगर प्रशासन और मीडिया को इस बारे में सूचना दी गई तो सिर कलम करवा दिए जाएँगे। ये भी कहा गया है कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनके घर लूट लिए जाएँगे ठीक वैसे जैसे आवामी लीग के ज्वाइंट सेक्रेट्री महबूब उल आलम हानिफ का घर लूटा गया था।

पत्र में लिखा है, “सुनो, अगर तुम 2024 में दुर्गा पूजा करना चाहते हो तो तुम्हें हर मंदिर से पाँच लाख टका का चंदा देना होगा। नहीं तो तुम किसी भी तरह से पूजा नहीं कर पाओगे। जैसा हनीफ के प्रोजेक्ट में हुआ, वैसा ही तुम्हारा हश्र होगा। एक सप्ताह के अंदर सारा पैसा तैयार रखना। कालीनगर बाजार में जो जगह बताई जाएगी, वहाँ पैसे दे देना। बाद में जगह बता देंगे।”

पत्र में आगे कहा गया, “अगर तुमने ये बातें प्रशासन, पत्रकारों या किसी और को बताई तो याद रखना कि तुम्हें काट दिया जाएगा। तुम्हारे परिवार को भी नहीं बख्शा जाएगा। ये बात अपने आस-पास के सभी मंदिरों को बता देना क्योंकि हम सभी मंदिरों के नाम नहीं जानते। प्रशासन और सेना के हमें बरगलाने से कोई फायदा नहीं होगा, पैसे तो देने ही पड़ेंगे। अल्लाह के नाम पर अगर हमें पैसे नहीं मिले तो हम तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर देंगे। हम तुम पर नजर बनाए हुए हैं।”

बता दें कि ये पत्र 9 सितंबर 2024 को लिखा गया है। अब इन्हें हिंदू मंदिरों और पूजा समितियों के अध्यक्षों और महासचिवों को भेजा जा रहा है। इनके प्राप्त होने के बाद खुलना के चार अलग-अलग मंदिरों ने डाकोप पुलिस स्टेशन से संपर्क किया और पत्र दिखाते हुए शिकायतें दीं।

शिकायत मिलने के बाद थाना प्रभारी अधिकारी सिराजुल इस्लाम ने इस मामले में कहा है कि वो लोग इस बाबत जाँच कर रहे हैं कि आखिर पत्र कहाँ से आया। हम लोग मंदिरों की सुरक्षा के प्रयास करेंगे। हम सेना की टीम के साथ पुलिस स्टेशन से नियमित रूप से गश्त कर रहे हैं। गाँव की पुलिस और यूनियन पुलिस के अधिकारी चौबीसों घंटे गश्त पर हैं।

एक मंदिर के महासचिव ने बताया कि पत्र मिलने के बाद वे इस मामले को लेकर काफी चिंता में हैं। उन्होंने अपने इलाके में लोगों के साथ बैठक की है। लोगों ने यही माना कि इस वर्ष पूजा का आयोजन न करना ही बेहतर होगा, लेकिन अंत में कुछ मान गए कि सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना होनी ही चाहिए।

रिपोर्ट बताती हैं कि कुछ मंदिर समितियों ने खतरे के कारण दुर्गा पूजा का आयोजन न करने का निर्णय लिया है जबकि कुछ अन्य ने कहा है कि वो इस पूजा का आयोजन शांति से करेंगे। इस मामले पर डाकोप के कमरखोला सर्वजनिन दुर्गा पूजा उत्सव समिति के अध्यक्ष शेखर चंद्र गोलदार ने भी बयान दिया। उन्होने कहा कि इस वर्ष बहुत छोटे पैमाने पर पूजा आयोजित करने की बात चल रही है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही नेशनल हिंदू अलायंस ने दुर्गा पूजा की बाबत बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अपनी सुरक्षा की माँग की थी। उन्होंने डिमांड की थी कि पंडालों पर सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड की जाए। सुरक्षा हेतु वहाँ पुलिसकर्मी और सेना के लोग तैनात हों ताकि अराजक तत्व पूजा के दौरान कोई उपद्रव न कर सकें।

‘भारत के साथ संबंध मजबूत करने के लिए हूँ प्रतिबद्ध’ : श्रीलंका के नए राष्ट्रपति ने PM मोदी को दिया धन्यवाद, प्रधानमंत्री बोले- हम साथ काम करने को उत्सुक

श्रीलंका को कल (22 सितंबर 2024) अनुरा कुमारा दिसानायके के रूप में 10 वें राष्ट्रपति मिल गए हैं। 56 वर्षीय दिसानायके ने सामगी जन बालवेगया (एसजेबी) के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी साजिथ प्रेमदासा को हराया। उन्होंने कहा कि सदियों से जो उन्होंने सपना संजोया था वो अब जाकर सच हो रहा है।

उन्होंने कहा कि लाखों आशा और उम्मीद भरी आँखों ने हमें आगे बढ़ाया है और हम फिर से इतिहास लिखने को तैयार हैं। उन्होंने जीत का श्रेय सिंहली, तमिल, मुस्लिम और तमाम श्रीलंकाई लोगों को दिया।

उनकी जीत की घोषणा होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा, “श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनावों में जीत पर दिसानायके को बधाई। श्रीलंका भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और विजन सागर में एक विशेष स्थान रखता है। मैं हमारे लोगों और पूरे क्षेत्र के लाभ के लिए हमारे बहुमुखी सहयोग को और मजबूत करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूँ।”

वहीं दिसानायके ने उनकी बधाई के जवाब में धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि वो दोनों देशों के संबंधो को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि अपने लोगों और पूरे क्षेत्र के लाभ के लिए भारत के साथ सहयोग करते हुए काम करने को तैयार हैं।

बता दें कि अनुरा कुमार दिसानायके नेशनल पीपुल्स पावर और जनता विमुक्ति पेरमुना पार्टी के नेता हैं और साथ ही कोलंबो से सांसद भी थे। उन्हें राष्ट्रपति पद पर उम्मीदवार के तौर पर नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) ने उतारा था। उन्हें उनकी मार्क्सवादी विचारधारा और चीन का समर्थक होने के नाते जाना जाता है। इसके अलावा वो कभी भारत के हस्तक्षेप के समर्थक नहीं रहे हैं। उन्होंने हाल में श्रीलंका में अडानी ग्रुप के 484 मेगावाट वाले 44 करोड़ के समझौते को रद्द करने की भी बात उन्होंने कही थी। उन्होंने प्रचार के दौरान कहा भी था कि राष्ट्रपति बनने के बाद वह प्रोजेक्ट को रद्द कर देंगे।

झूठे मामलों की वजह से कोर्ट पर दबाव, पति और ससुराल पक्ष को प्रताड़ना: जानिए घरेलू हिंसा से जुड़े कानून की समीक्षा क्यों है जरूरी?

भारत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होते ही जो सबसे महत्वपूर्ण बात उठ खड़ी हुई है, वह है घरेलू हिंसा के खिलाफ बने कानूनों की समीक्षा। घरेलू हिंसा कानून इस आधार पर बना था कि चूँकि महिलाएँ कमजोर होती हैं, इसलिए वही हिंसा का शिकार होती हैं। हालाँकि, काफी समय से यह भी देखा जा रहा है कि घरेलू कलह के कारण जीवनलीला समाप्त करने वालों में पुरुष भी शामिल हैं।

घरेलू क्लेश कैसे भी हो सकते हैं? वे माता-पिता से लेकर पत्नी तक से संबंधित हो सकते हैं। ऐसे में जो पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं, उनकी रक्षा या संरक्षण के लिए कोई कानून क्यों नहीं है? कानून का कोई भी पक्ष इस पर बात क्यों नहीं करता है? बार-बार जब यह प्रश्न उठता है। समाज में यह भी मानसिकता है कि पत्नी से प्रताड़ित पुरुष को सहानुभूति नहीं, बल्कि हिकारत की दृष्टि से देखा जाता है।

ऐसे पुरुष को अपमानित किया जाता है। सामाजिक अस्वीकृति तथा कानून की असंवेदनशीलता के चलते ऐसे कई पुरुष या तो अपराध की तरफ चले जाते हैं या फिर अपना जीवन समाप्त कर लेते हैं। कई ऐसे भी होते हैं, जो घुट-घुटकर अपना जीवन बिताते हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर ऐसे पुरुषों के साथ न्याय क्यों नहीं होना चाहिए?

एक बात समझना आवश्यक है कि जैसे महिला कानूनों की माँग करना पुरुष विरोध नहीं होता, वैसे ही पुरुषों के लिए न्याय की बात करना महिलाओं का विरोध नहीं होता है। न्याय लिंग निरपेक्ष होना चाहिए। घरेलू हिंसा का कानून लिंग निरपेक्ष होना चाहिए। शादी कभी भी दो लोगों के बीच न होकर दो परिवार का मामला होता है।

कई मामलों में देखा गया है कि पुरुष को उसकी पत्नी और ससुराल वाले प्रताड़ित करते हैं। आखिरकार पुरुष भी घरेलू हिंसा का शिकार बन जाते हैं। कुछ दुष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति की महिलाएँ महिलाओं की रक्षा के लिए बने कानूनों का दुरुपयोग करती हैं। ऐसे में झूठे मामले सिर्फ पुरुषों को फँसाने के लिए ही नहीं, बल्कि वास्तविक पीड़ित महिलाओं के लिए भी खतरा ही हैं।

भारतीय न्याय संहिता में घरेलू हिंसा को लेकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय भी चिंता जता चुका है। 12 सितंबर 2024 को शीर्ष न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और 86 पर चिंता जताते हुए कहा कि ये कानून आईपीसी की धारा 498A से जस से तस लिए गए हैं। न्यायालय ने कहा था कि विवाहित महिलाओं की हिंसा से रक्षा के लिए बने कानूनों का दुरुपयोग कुछ महिलाएँ करती हैं।

ऐसे कई मामले आए हैं। लगभग हर न्यायालय का कहना है कि महिलाओं के लिए बने कानूनों का दुरुपयोग रोका जाए। पुरुष आयोग संस्था की अध्यक्ष होने के नाते मैं भी यही मानती हूँ कि इन कानूनों का दुरुपयोग रोका जाए, क्योंकि कानूनों के दुरुपयोग से पीड़ित महिलाओं के प्रति भी गुस्सा बढ़ता है। लोगों में यह धारणा बन जाती है कि हर पीड़ित महिला झूठ बोल रही है।

परिवार बचाने के लिए आवश्यक है कि इसमें परिवर्तन हो। केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने घोषणा भी की है कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और 86 की समीक्षा की चर्चाएँ चल रही हैं। यही कारण है कि हमें अपने वोट पर गर्व होना चाहिए और मोदी जी और भाजपा को हमें धन्यवाद देना चाहिए कि कम-से-कम उन्होंने मामले को संज्ञान लिया। दूसरी सरकारें तो इस पर सोचा तक नहीं था। पुरुष आयोग संस्था के अध्यक्ष के रूप में मैं इस संबंध में कानून मंत्री से भी भेंट करने वाली हूँ।

दीपक बनकर फहाद हुसैन ने महिला को फाँसा, धर्मांतरण के बाद निकाह कर देह व्यापार में धकेला: आगरा पुलिस ने आरोपित और भाई आमिर पर दर्ज किया केस

आगरा में लव जिहाद का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ फहाद हुसैन नामक एक व्यक्ति ने अपनी पहचान छुपाकर एक महिला को फंसाया और बाद में उसकी जिंदगी को नर्क बना दिया। महिला ने अपने बयान में कहा कि उसने जिसे दीपक समझकर दोस्ती की थी, वह असल में फहाद था। उसने प्यार की खातिर न सिर्फ अपना मजहब बदला, बल्कि उसके साथ निकाह भी कर लिया। परंतु, उसकी मुसीबतों का अंत यहाँ नहीं हुआ। निकाह के बाद फहाद ने उससे देह व्यापार कराना शुरू कर दिया।

लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है, जिसमें फहाद और उसके भाई आमिर को नामजद किया गया है। यह मुकदमा कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ। पुलिस ने बताया कि इस मामले में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गई हैं। पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है और सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

धोखे से दोस्ती और निकाह

पीड़िता, जो मूल रूप से डौकी क्षेत्र की रहने वाली है और फिलहाल आगरा के सदर के शहीद नगर इलाके में निवास कर रही है, ने बताया कि उसकी मुलाकात एक युवक से हुई थी, जिसने खुद को दीपक बताया था। दोनों के बीच संबंध बने और उसने इस युवक से गहरा लगाव बना लिया। लेकिन कुछ समय बाद उसे पता चला कि दीपक का असली नाम फहाद हुसैन है। हालात से मजबूर होकर पीड़िता ने उसके साथ निकाह कर लिया और अपना नाम भी बदल लिया।

देह व्यापार में धकेला

निकाह के बाद महिला की जिंदगी और भी बर्बाद हो गई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि फहाद ने उसे जबरन देह व्यापार में धकेल दिया। उसकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए उसे इस गंदे काम में शामिल किया गया। महिला का कहना है कि फहाद ने उसे माँ बनने से भी रोक दिया, ताकि वह इस घिनौने धंधे में बनी रहे। यह आरोप बेहद संगीन हैं और पुलिस ने इनकी जाँच शुरू कर दी है।

इस बीच, फहाद ने दूसरी महिला से भी निकाह कर लिया, जिसके बारे में जब पीड़िता को जानकारी मिली तो उसने इसका विरोध किया। इस पर फहाद ने न सिर्फ उसके साथ मारपीट की बल्कि उसकी जान लेने की कोशिश भी की। पीड़िता ने बताया कि फहाद और उसके भाई आमिर ने उसे फर्जी मुकदमों में फंसाने की साजिश भी रची, ताकि वह अपनी आवाज न उठा सके।

कोर्ट में न्याय की गुहार

पीड़िता ने अपनी आवाज दबने नहीं दी और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने फहाद और आमिर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपों की गहन जाँच की जा रही है और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी। इस मामले में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराएँ भी लागू की गई हैं, जो इसे और गंभीर बनाती हैं।

पुलिस की कार्रवाई

आगरा की पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। पुलिस ने बताया कि फहाद और आमिर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। थाना सदर पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है और जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार किया जा सकता है।

यह मामला न सिर्फ लव जिहाद की एक और निंदनीय घटना को उजागर करता है, बल्कि समाज में महिलाओं के खिलाफ हो रहे शोषण की भी एक गंभीर तस्वीर पेश करता है। पीड़िता की हिम्मत और उसकी कानूनी लड़ाई ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

कोयले की खदान में विस्फोट से 51 की मौत, कई किलोमीटर तक सुनी गई आवाज: ईरानी राष्ट्रपति का ऐलान- जो भी होगा जिम्मेदार, उसे मिलेगी सज़ा

ईरान में विस्फोट रविवार (22 सितंबर 2024) को एक कोयले की खदान में विस्फोट होने से अब तक 51 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। कई घायलों की हालात बेहद गंभीर है, जिसकी वजह से मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। वहीं, खदान में काम करने वाले कई लोग अभी भी अंदर फँसे हुए हैं। धमाके की वजह की जाँच कराई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना पूर्वी ईरान की है। राजधानी तेहरान से लगभग 540 किलोमीटर दूर तबास नाम की जगह है। यहाँ पर कोयले की बड़ी खदान है। रविवार को अन्य दिनों की तरह इस खदान में काम चल रहा था। खदान के B और C ब्लॉक में लगभग 70 लोग मौजूद थे। काम सामान्य रूप से चल ही रहा था कि अचानक खदान के अंदर जोरदार विस्फोट हो गया।

विस्फोट इतना तेज था कि इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। कोई कुछ समझ पाता तब तक लगभग 51 लोगों की मौत हो चुकी थी। कुछ लोग घायल हो गए। घायलों में कइयों की हालात गंभीर है। कई लोगों के अभी भी खदान में फँसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही ईरानी प्रशासन ने बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है।

राजधानी तेहरान से भी बचाव दल को घटनास्थल की तरफ रवाना किया गया है। घायलों को बेहतर अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। ईरान की सरकार ने मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए 3 दिनों के लिए राजकीय शोक की घोषणा की है। अभी तक विस्फोट की असली वजह सामने नहीं आई है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे मीथेन गैस द्वारा आग पकड़ना बताया गया है।

हालाँकि, ईरान की सरकार धमाके के असल कारणों की पड़ताल में जुटी है। अमेरिका की यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने एलान किया है कि विस्फोट की जाँच करवा करके दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। उन्होंने धमाके में जान गँवाने वाले परिवारों को हर सम्भव मदद करने का आदेश दिया है।

मनीष सिसोदिया ने की खुद और अरविंद केजरीवाल की राम-लक्ष्मण से तुलना, छिड़ी राजनीतिक बहस: जंतर-मंतर पर आप ने लगाई ‘जनता की अदालत’

आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने खुद की और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तुलना भगवान राम और लक्ष्मण से की। इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बड़ी बहस छिड़ गई है।

मनीष सिसोदिया का बयान तब आया जब वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक सभा में जनता को संबोधित कर रहे थे। इस सभा में उन्होंने बताया कि जेल में रहते समय उनसे सीबीआई ने क्या बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि उन्हें जेल में अधिकारियों द्वारा यह कहने का प्रयास किया गया कि अरविंद केजरीवाल ने उनका नाम दे दिया है, और यदि सिसोदिया भी केजरीवाल का नाम ले लें तो वह बच सकते हैं। इस पर सिसोदिया ने जवाब दिया, “आप लक्ष्मण को राम से अलग करने की कोशिश कर रहे हो। दुनिया में कोई ताकत नहीं जो लक्ष्मण को राम से अलग कर सके।”

इस बयान में सिसोदिया ने खुद को लक्ष्मण और केजरीवाल को राम की तरह प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी और केजरीवाल की 26 साल पुरानी दोस्ती का हवाला देते हुए कहा कि उनका रिश्ता अटूट है, और कोई भी ताकत इसे तोड़ नहीं सकती।

मनीष सिसोदिया ने कहा, “इनकी कोशिश थी कि ये टूट जाए जब बाहर से नहीं टूटा तो अंदर से तोड़ने की कोशिश की। बेशर्मी देखिए इनकी सीबीआई ने कहा कि मनीष सिसोदिया ने केजरीवाल का नाम दिया। मुझे जेल में कहा गया कि देखो केजरीवाल ने आपका नाम ले दिया आप उनका नाम ले दो और आप बच जाओगे। मैं उनसे कहता था आप लक्ष्मण को राम से अलग करने की कोशिश कर रहे हो। दुनिया में किसी में ताकत नहीं जो लक्ष्मण को राम से अलग कर सके। अरविंद केजरीवाल से मेरी 26 साल पुरानी दोस्ती है। वह मेरे राजनैतिक गुरु हैं।”

राम और लक्ष्मण की तुलना न केवल एक व्यक्तिगत रिश्ते को आदर्श बनाने का प्रयास है, बल्कि इससे यह संदेश जाता है कि राजनीति में कुछ नेता खुद को ईश्वर के समान समझते हैं। उन्होंने अपने बयान में यह संकेत दिया कि विपक्ष और जाँच एजेंसियाँ उनकी दोस्ती और राजनीतिक साझेदारी को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन इस तुलना को धार्मिक नजरिए से देखना अलग मुद्दा है।

MP में आर्मी ट्रेन को उड़ाने की साजिश नाकाम… ट्रैक पर बिछे थे 10 डेटोनेटर, रेल गुजरने से पहले फूटे: पंजाब में भी सरिया मिला, कानपुर में गैस सिलेंडर

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में सेना के जवानों को लेकर जा रही एक स्पेशल ट्रेन को धमाका करके पलटने की कोशिश की गई। इसके लिए नेपानगर में रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर बिछाए गए थे। हालांकि, ट्रेन के पहुँचने से पहले ही कुछ डेटोनेटर फूट गए और रेलवे अधिकारी सतर्क हो गए। इसके बाद सागफाटा स्टेशन पर ट्रेन रुकवा दी गई। यह ट्रेन जम्मू-कश्मीर से कर्नाटक जा रही थी।

यह घटना बुधवार (18 सितंबर 2024) की है, लेकिन जानकरी अब सामने आई है। रेलवे सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर सागफाटा से डोंगरगाँव के बीच 10 डेटोनेटर रखे गए हैं। इन्हें एक से डेढ़ फीट की दूरी पर रखा गया था, ताकि लगातार धमाके हों। यह ट्रेन खंडवा से होते हुए तिरुवनंतपुरम जा रही थी। इसमें सेना के अधिकारी, जवान और हथियार थे।

आर्मी की यह स्पेशल ट्रेन जब डिटोनेटर के पास से गुजरी तो लोको पायलट ने विस्फोट की आवाज सुनी। उसने तुरंत ट्रेन रोक दी और नेपानगर के स्पेशन मास्टर को इसकी सूचना दी। इसके बाद नेपानगर कंट्रोल रूम से सागफाटा स्टेशन के कंट्रोल रूम को ट्रैक पर डेटोनेटर होने की सूचना दी गई। ट्रेन वहाँ कुछ देर रुकने के बाद ट्रेन भुसावल की ओर रवाना हो गई। 

भुसावल पहुँचकर भी घटना की शिकायत स्टेशन मास्टर से की गई। इसके बाद आनन-फानन में रेलवे के अधिकारी से लेकर प्रशासन तक घटनास्थल पर पहुँच गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, डेटोनेटर साल 2014 के बताए जा रहे हैं। यह पाँच साल के लिए ही वैध रहते हैं। छठे साल में इनका टेस्ट होता है। इन्हें रेलवे ही बनाता है। इन्हें ट्रैक पर किसने रखा, इसकी जाँच की जा रही है।

कहा जा रहा है कि ट्रैक पर जो डेटोनेटर मिला था वो RDX वाला नहीं, फ़ॉग डेटोनेटर था। जाड़े में कुहासा के कारण ट्रेन के लोको पायलट को अलर्ट करने के लिए इसका इस्तेमाल पटरी के पास आवाज करने के लिए किया जाता है। एक स्थान पर एक डेटोनेटर रखा जाता है। हालाँकि, यहाँ डेटोनेटर रेलवे की ओर से नहीं रखा गया था।

अज्ञात लोगों ने रेलवे का यह एक्सपायर्ड डेटोनेटर हासिल करके उसे एक साथ पटरी पर रख दिया था। ये डेटोनेटर सिर्फ आवाज करते हैं। यह कहा जा रहा है कि ट्रैक पर काम करने वाले रेलवे के गैंगमैन एवं ट्रैकमैन को इस तरह के पटाखे दिए जाते हैं, ताकि विशेष परिस्थितियों में इसे छोड़कर आने वाली ट्रेन को लोको पायलट को संकेत दे सके।

इस मामले को रेल मंत्रालय ने काफी गंभीरता से लिया है। आर्मी भी जाँच में जुट गई है। इसके अलावा, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और आतंक निरोधी दस्ता (ATS) के साथ-साथ देश की कई सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियाँ भी जाँच में जुटी हुई हैं। RPF (रेलवे सुरक्षा बल) भी इसकी जाँच कर रहा है। आर्मी के अधिकारियों ने पूछताछ के लिए रेलवे के चाबीदार और ट्रैकमैन की हिरासत की माँग की है।

कहा जा रहा है कि इस मामले से जुड़े 4 से 5 संदिग्धों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। हालाँकि, मामला गंभीर होने के साथ-साथ सेना से जुड़े होने के चलते अधिकारी इस मामले को लेकर गोपनीयता बरत रहे हैं और कोई भी अधिकारी कुछ बोलने या जानकारी देने से बच रहा है। हालाँकि, किसी गिरफ्तारी की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बता दें कि आज रविवार (22 सितंबर) को उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के प्रेमपुर रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर खाली गैस सिलेंडर मिला। यह घटना सुबह लगभग 8 बजे की है। वहाँ से एक मालगाड़ी प्रयागराज के लिए जा रही है। ट्रेन के लोको पायलट ने सिलिंडर देखकर आपातकालीन ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी। यह सिलेंडर पाँच किलो का था और खाली था। इस मामले की भी जाँच की जा रही है।

इससे पहले 8 सितंबर को प्रयागराज से भिवानी जा रही कालिंदी एक्सप्रेस को ट्रैक पर LPG सिलेंडर रखकर पटरी से उतारने की कोशिश की गई थी। ट्रेन जब सिलेंडर से टकराई तो तेज धमाका हुआ। इसके बाद लोको पायलट ने तुरंत आपातकालीन ब्रेक लगा दिया। इससे पहले 17 अगस्त 2024 को कानपुर में ही साबरमती एक्सप्रेस के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। लोको पायलट ने बताया था कि किसी चीज से ट्रेन के टकराने के बाद हादसा हुआ था।

बीते दो महीनों में देश भर में ट्रेन पलटने की 23 साजिशों का पता चला है। बताते चलें कि रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 151 के अंतर्गत रेल दुर्घटना के साजिश साबित होने पर आरोपित को अधिकतम 10 साल की सजा और जुर्माने के का प्रावधान है। अब सरकार इस अधिनियम में एक उपधारा जोड़कर इसे देशद्रोह की श्रेणी में लाने और इसके लिए मृत्युदंड देने की योजना बना रही है।

निकाह से पहले किया प्रेग्नेंट, एबॉर्शन करवा के दिया तीन तलाक: गाजियाबाद में सादिक मलिक पर केस दर्ज, हिन्दू युवती से चल रहा है अफेयर

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से तीन तलाक का मामला सामने आया है। यहाँ एक पीड़िता ने अपने शौहर सहित अन्य ससुरालीजनों के खिलाफ मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में आरोपितों द्वारा गर्भपात कराए जाने और किसी हिन्दू महिला से अफेयर का भी जिक्र है। पीड़िता पर दहेज़ लाने का भी दबाव डाला गया। शुक्रवार (20 सितंबर 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

यह घटना गाजियाबाद के थानाक्षेत्र टीला मोड़ की है। अमर उजाला यहाँ शुक्रवार को यहाँ पीड़िता ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में पीड़िता ने बताया कि वह अमनपसंद और कानून में यकीन रखने वाली महिला है। 1 मार्च 2024 पीड़िता का निकाह गाजियाबाद में ही मुरादनगर के निवासी सादिक मलिक से हुआ था। इस निकाह में सादिक को पर्याप्त दान-दहेज़ भी दिया गया। निकाह से पहले भी सादिक और पीड़िता के बीच शारीरिक संबंध थे। इस वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई थी।

पीड़िता की प्रेग्नेंसी सादिक की जानकारी में थी। 9 मार्च को 2024 को पीड़िता का अल्ट्रासॉउन्ड करवाया गया। अल्ट्रासॉउन्ड के बाद सादिक के परिजन पीड़िता पर गर्भपात का दबाव बनाने लगे। उन्होने पीड़िता से इस बात को राज ही रखने की नसीहत भी दी। आरोप है की एक दिन पीड़िता के शौहर के मोबाइल पर किसी लड़की की कॉल आई। पूछने पर सादिक ने कॉलर को अपनी गर्लफ्रेंड बताया और उसी के साथ लिव-इन में रहने की बात कही। पीड़िता ने इसका विरोध किया।

आरोप है कि इसी विरोध से भड़क कर सादिक ने पीड़िता की पिटाई की और मायके भेज दिया। अप्रैल 2024 में सादिक के अब्बा शाहिद, उसकी अम्मी रुकसाना, भाई आदिल, बहन आइशा, बहनोई सुहैल और फुफेरी बहन सायरीन ने पीड़िता को मायके से बुला कर अस्पताल में एबॉर्शन करवा दिया। एबॉर्शन के बाद पीड़िता को उसके ससुरालीजन अपने घर ले आए। यहाँ जब पीड़िता ने अपने गर्भपात का विरोध किया तो सभी आरोपितों ने मिलकर पीड़िता की पिटाई की। इसी के साथ पीड़िता से और दहेज़ की भी माँग की गई।

महिला ने अपनी शिकायत में आगे बताया कि पिटाई के दौरान उनके शौहर का दूसरा निकाह करवाने की धमकी दी गई। जैसे-तैसे पीड़िता ने अपने मायके वालों को कॉल कर पूरी बात बताई। जब पीड़िता के परिजन अपनी बेटी के पास पहुँचे तो उनके साथ भी मारपीट हुई। इसी दौरान पीड़िता को उसके शौहर सादिक ने तीन तलाक दे कर घर से निकाल दिया। अपनी शिकायत में महिला ने अपने ससुरालीजनों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने पीड़िता की इस शिकायत पर उसके शौहर सादिक सहित शाहिद, रुखसाना, आदिल, आएशा, सुहैल और सायरीन को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498- A, 323, 504, 506 व 313 के साथ दहेज़ एक्ट व तीन तलाक कानून के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। ACP सलोनी अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘जानवर की चर्बी’ वाले सारे आरोप निराधार और भ्रामक: तिरुपति प्रसाद में मामले में घिरे पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी ने PM मोदी को चिट्ठी लिखी, CM नायडू के दावे को फर्जी कहा

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को लेकर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद तब और गहरा हो गया जब जगन मोहन रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक कड़ी चिट्ठी लिखी, जिसमें उन्होंने चंद्रबाबू नायडू द्वारा टीटीडी और तिरुपति लड्डू के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता पर उठाए गए सवालों को निराधार और भ्रामक बताया।

चंद्रबाबू नायडू पर गंभीर आरोप

जगन मोहन रेड्डी ने अपनी चिट्ठी में चंद्रबाबू नायडू को एक “आदतन झूठा” बताते हुए कहा कि नायडू ने राजनीतिक लाभ के लिए करोड़ों हिंदू भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाई है। रेड्डी के अनुसार, नायडू द्वारा तिरुमला तिरुपति देवस्थानम पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं और सिर्फ राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू नायडू की ये टिप्पणी न केवल टीटीडी की पवित्रता को धूमिल करती है, बल्कि इससे भक्तों के मन में टीटीडी के प्रति संदेह भी उत्पन्न होता है। रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि नायडू की इस हरकत पर सख्त कार्रवाई की जाए और सच्चाई को उजागर किया जाए ताकि भक्तों का विश्वास टीटीडी पर बना रहे।

तिरुपति लड्डू घी विवाद

यह विवाद तब शुरू हुआ जब चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी की शुद्धता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि तिरुमला मंदिर में तैयार होने वाले प्रसिद्ध लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाला घी उच्च गुणवत्ता का नहीं है और इसमें मिलावट की जा रही है। जाँच में ये बात सही निकली, जिसमें पशुओं की चर्बी की पुष्टि हुई।

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि टीटीडी में प्रसादम बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी सामग्रियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रक्रियाएँ लागू की जाती हैं। रेड्डी ने बताया कि घी की खरीदारी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से की जाती है और इसे एनएबीएल-प्रमाणित लैब टेस्ट के तहत कड़े गुणवत्ता मानकों पर परखा जाता है।

रेड्डी ने यह भी कहा कि टीटीडी की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली इतनी सख्त है कि कुछ महीने पहले घी के एक टैंकर को मानकों पर खरा न उतरने के कारण अस्वीकार कर दिया गया था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि टीटीडी की ये सख्त प्रक्रियाएँ चंद्रबाबू नायडू के टीडीपी शासन के दौरान भी लागू थीं।

चंद्रबाबू नायडू पर राजनीतिक एजेंडे का आरोप

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने इस पूरे विवाद को चंद्रबाबू नायडू की राजनीतिक चाल बताया। रेड्डी का कहना है कि नायडू ने ये आरोप अपनी सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने और अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए लगाए हैं। उन्होंने कहा कि नायडू के ये आरोप उनकी हताशा को दर्शाते हैं और यह उनका सिर्फ एक राजनीतिक प्रयास है।

रेड्डी ने आरोप लगाया कि नायडू जानबूझकर टीटीडी जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान को विवाद में घसीट रहे हैं ताकि जनता का ध्यान राज्य की मौजूदा समस्याओं से हट सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राजनीति न केवल राज्य के विकास में बाधा डालती है, बल्कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है।

प्रधानमंत्री से सख्त कार्रवाई की माँग

जगन मोहन रेड्डी ने अपनी चिट्ठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें। उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू नायडू के निराधार दावों से टीटीडी की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान हो सकता है और करोड़ों हिंदू भक्तों की आस्था पर चोट पहुँच सकती है। रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री को नायडू के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि इस तरह के भ्रामक बयानों का अंत हो और सच्चाई सामने आ सके।

रेड्डी का मानना है कि नायडू की इस हरकत से सिर्फ टीटीडी ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि नायडू को उनके बयान के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए और भविष्य में इस तरह की हरकतों से बचना चाहिए।

टीटीडी की पवित्रता और भक्तों का विश्वास

टीटीडी, जो कि तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रबंधन का कार्य देखता है, भारत के सबसे प्रतिष्ठित और समृद्ध धार्मिक संस्थानों में से एक है। यहाँ हर साल करोड़ों भक्त दर्शन करने आते हैं और तिरुपति लड्डू मंदिर का प्रसादम होता है, जिसे भक्त बड़े आदर और श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं।

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अपनी चिट्ठी में इस बात पर जोर दिया कि टीटीडी की पवित्रता को बनाए रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि टीटीडी के खिलाफ ऐसे निराधार आरोपों से भक्तों का विश्वास डगमगा सकता है, इसलिए इन आरोपों का खंडन करना और सच्चाई को सामने लाना आवश्यक है।

इस विवाद ने आंध्र प्रदेश की राजनीति और धार्मिक भावनाओं को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। जहाँ एक ओर वाईएस जगन मोहन रेड्डी चंद्रबाबू नायडू पर टीटीडी की पवित्रता पर सवाल उठाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं नायडू घी की गुणवत्ता पर अपने सवालों को लेकर डटे हुए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और टीटीडी की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे पर FIR, अपहरण के बाद मारपीट और धमकी का आरोप: BJP बोली- जिस गाड़ी पर सपा का झंडा, उस गाड़ी में बैठा है गुंडा

फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। अवधेश प्रसाद अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के नेता हैं। रवि कुमार तिवारी की तहरीर पर अयोध्या की नगर कोतवाली थाने में अजीत पर अपहरण, मारपीट और धमकी देने का मामला दर्ज हुआ है। बता दें कि अजीत प्रसाद अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव की तैयारी कर रहे हैं।

रवि तिवारी की तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर में अजीत प्रसाद के साथ ही राजू यादव, श्रीकांत राय और 10 15 अज्ञात लोगों को नामजद किया है। ये पूरा विवाद जमीन की रजिस्ट्री और पैसों के लेन-देन से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शनिवार (21 सितंबर) को वे सिविल लाइंस में एसबीआई बैंक के पास खड़े थे।

इसी दौरान अजीत प्रसाद अपने समर्थक राजू यादव, एक सिपाही और 10 से 15 अज्ञात लोगों के साथ चार पहिया गाड़ी से वहाँ आए। इसके बाद उन लोगों ने उन्हें जबरन गाड़ी में बैठा लिया। रवि तिवारी का आरोप है कि अजीत प्रसाद ने उन्हें तमंचा लगा दिया और सभी ने मिलकर गाड़ी में उसके साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। गाड़ी में पूरे रास्ते उसके साथ मारपीट की जाती रही।

तिवारी ने आगे बताया कि अजीत प्रसाद एवं उनके साथियों ने तहसील के पास गाड़ी खड़ी कर दी और उनसे 1 लाख रुपए वापस लेने का वीडियो भी बना लिया। इसके साथ ही अजीत प्रसाद ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी है। फिलहाल अयोध्या पुलिस मामले की जाँच कर रही है। रवि तिवारी पूराकलंदर थाना इलाके के पलिया के रहने वाले हैं।

रवि का दावा है कि उन्होंने अकवारा की रहने वालीं अपनी परिचित शीतला प्रसाद की जमीन को अजीत प्रसाद और लाल बहादुर नाम के नाम पर बैनामा कराने में मध्यस्थता की थी। इस दौरान अजीत प्रसाद ने चेक के जरिए एक लाख रुपए दिया था। गाड़ी में अजीत प्रसाद ने चेक के माध्यम से दिए गए एक लाख रुपए वापस ले लिए और इसका वीडियो भी बनाया है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया X पर लिखा, “फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद, जिन्हें आजकल अखिलेश यादव अपनी छाती से लगाकर घूम रहे हैं, उनके बेटे अजीत प्रसाद ने रवि तिवारी का अपहरण करके उसकी पिटाई की। सपा कुछ सीटें क्या जीत गई, बलात्कार और गुंडागर्दी का सिलसिला थम ही नहीं रहा। उत्तर प्रदेश में एक कहावत है- जिस गाड़ी पर सपा का झंडा, उस गाड़ी में बैठा है गुंडा। ये उसी का प्रमाण है।”

बता दें कि अजीत प्रसाद के पिता अवधेश प्रसाद ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की टिकट पर फैजाबाद सीट से जीत हासिल की है। अयोध्या में अवधेश प्रसाद के नजदीकी सपा नेता मोईद खान ने एक नाबालिग से गैंग रेप किया था। उस समय अवधेश प्रसाद की जमकर किरकिरी हुई थी।

सांसद बनने से पहले अवधेश प्रसाद अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। उनके सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हो गई है और अब इस पर उपचुनाव होना है। हालाँकि, उपचुनाव की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन जल्दी ही चुनाव घोषित हो सकते हैं। माना जा रहा है कि सपा यहाँ से अजीत प्रसाद को टिकट देगी।