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अंडमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर अब कहलाएगा ‘श्री विजयपुरम’, मोदी सरकार ने बदला नाम: चोल साम्राज्य का इस जगह से रहा है गहरा नाता

केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर ‘श्री विजयपुरम’ कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को इसकी जानकारी दी। पोर्ट ब्लेयर का चोल साम्राज्य से गहरा नाता रहा है। इसके साथ ही यह वीर सावरकर सहित कई स्वतंत्रता सेनाओं से जुड़ा है।

नाम बदलने की जानकारी देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि देश को गुलामी के सभी प्रतीकों से मुक्ति दिलाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प से प्रेरित होकर आज गृह मंत्रालय ने पोर्ट ब्लेयर का नाम ‘श्री विजयपुरम’ करने का निर्णय लिया है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे लिखा, “श्री विजयपुरम नाम हमारे स्वाधीनता के संघर्ष और इसमें अंडमान और निकोबार के योगदान को दर्शाता है। इस द्वीप का हमारे देश की स्वाधीनता और इतिहास में अद्वितीय स्थान रहा है। चोल साम्राज्य में नौसेना अड्डे की भूमिका निभाने वाला यह द्वीप आज देश की सुरक्षा और विकास को गति देने के लिए तैयार है।”

अपनी पोस्ट में अमित शाह ने सुभाषचंद्र बोस और विनायक दामोदर सावरकर को भी याद किया। उन्होंने आगे कहा, “यह द्वीप नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी द्वारा सबसे पहले तिरंगा फहराने से लेकर सेलुलर जेल में वीर सावरकर व अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के द्वारा माँ भारती की स्वाधीनता के लिए संघर्ष का स्थान भी है।”

दरअसल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ प्राचीन चोल साम्राज्य से भी जुड़ा है। चोल साम्राज्य का यहाँ एक महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डा हुआ करता था। इस अड्डे से सैन्य संचालन के साथ-साथ समुद्री व्यापार मार्ग के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता था। चोल राजाओं ने यहाँ से अपने बड़े-बड़े नौसैनिक चलाए थे।

इस द्वीप की भौगोलिक एवं रणनीतिक स्थिति के कारण यह आज भी भारतीय उपमहाद्वीप के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह आज भी भारतीय सेना और नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र बना हुआ है। इसके अलावा, हाल के वर्षों में यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी तेजी से उभरा है। ऐसे में इसका महत्वपूर्ण योगदान बन जाता है।

बता दें कि साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अंडमान निकोबार के दौरे पर गए थे तो उन्होंने यहाँ के तीन द्वीपों के नाम बदलने की घोषणा की थी। उन्होंने हैवलॉक द्वीप का नाम स्वराज द्वीप, नील द्वीप को इसी नाम से और रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र द्वीप कर दिया था।

हरियाणा के सरकारी स्कूल में हिन्दू लड़कियों को पहनाया हिजाब, भड़के ग्रामीणों ने किया विरोध: प्रिंसिपल ने माँगी माफी, बोलीं- ईद का था कार्यक्रम

हरियाणा के एक सरकारी स्कूल में हिन्दू लड़कियों को हिजाब पहनाया गया। इसके बाद उनसे कार्यक्रम भी करवाया गया। हिन्दू लड़कियों को हिजाब उनके शिक्षकों ने ही पहनाया। जब यह जानकारी ग्रामीणों तक पहुँची तो उन्होंने इस बात का विरोध किया। हिन्दू संगठनों ने भी इस मामले में प्रदर्शन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोनीपत के बड़ौली गाँव के राजकीय स्कूल में यह घटना हुई। यहाँ के सरकारी स्कूल की कुछ फोटो वायरल हुई जिसमें हिन्दू लडकियाँ हिजाब और बुर्का जैसी ड्रेस पहने हुए थीं। इसमें लडकियाँ नमाज पढ़ने की मुद्रा भी बनाए हुए थीं। कुछ लडकियाँ गले मिलते हुए दिखाई दी।

यह कार्यक्रम बुधवार (11 सितम्बर, 2024) का बताया गया। इन फोटो के वायरल होने के बाद आसपास के ग्रामीण और हिन्दू संगठनों के लोग इस स्कूल में पहुँच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ लड़कियों पर एक धर्म थोपा गया और हिन्दू धर्म का अपमान किया गया। यह भी आरोप लगाया कि छात्राओं को इस्लाम की तरफ धकेला जा रहा है।

हँगामा बढ़ते देख स्कूल की प्रिंसिपल ने इस मामले में पर सफाई दी। स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि 11 सितम्बर को ईद के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम सर्वधर्म मिलन समारोह था। प्रिंसिपल ने दावा किया कि इस दौरान एक नाटक की प्रस्तुति हुई थी, इसके लिए लड़कियों को हिजाब पहनाया गया था।

प्रिंसिपल की इस सफाई का ग्रामीणों पर कोई असर नहीं पड़ा। वह लगातार विरोध करते रहे। प्रिंसिपल ने इसके बाद इस मामले में माफ़ी माँगने और आगे ऐसा कोई और कार्यक्रम ना करवाने की बात कही। वहीं हिन्दू संगठन इस बात पर अड़े रहे कि स्कूल के स्टाफ का तबादला कर दिया जाए।

इस मामले में प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। जिले के शिक्षा अधिकारियों ने स्कूल से रिपोर्ट तलब की है। वहीं प्रशासन ने दोनों पक्षों के बीच शांति करवा दी है। जिस गाँव में यह स्कूल है और वह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल का है, इसलिए यह मामला और हाई प्रोफाइल हो गया।

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब स्कूलों के भीतर हिन्दू बच्चों को इस्लामी लिबास पहनाए गए हों। इसे पहले उत्तरखंड के रुड़की में छोटी बच्चियों को इस्लामी कपड़े पहनाने का एक मामला सामने आया था। इसके अलावा मध्य प्रदेश के गुना में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी।

ITI छात्रा मेहनाज ने प्रेमी सोनू का सिर करवाया कलम, फिर झोले में भरकर ले गई साथ: धड़ को नंगा कर फेंका, भाई सद्दाम और रिजवान सहित गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में छात्रा मेहनाज ने अपने भाई सद्दाम और उसके दोस्त रिजवान के साथ मिलकर अपने प्रेमी सोनू की हत्या कर दी। इतना ही नहीं, हत्या प्रेमिका मेहनाज ने सोनू का सिर धड़ से अलग करवाकर अपने साथ झोले में भरकर ले गई थी और उसे फेंक कर आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने सिर के अवशेष बरामद करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।

रामपुर की ITI की छात्रा मेहनाज ने पुलिस को बताया कि सोनू उसका पीछा नहीं छोड़ रहा था। इसके बाद उसने यह बात अपने भाई सद्दाम को बताई और उसकी हत्या की योजना बना ली। मेहनाज ने कहा, “उसका गला काटा, सिर धड़ से अलग किया और शरीर से कपड़े उतार दिए, ताकि उसकी पहचान न हो सके। उसका सिर मुरादाबाद से 2 किलोमीटर दूर सैफानी के डंपिंग ग्राउंड में पड़ा है।”

दरअसल, रामपुर के थाना सैफनी क्षेत्र में बैरूआ पुल के पास एक जंगल है। बुधवार (11 सितंबर) को यहाँ गन्ने के एक खेत में अज्ञात युवक की लाश मिली। धड़ पर सिर नहीं था। इसके साथ ही शव पर कपड़े भी नहीं थे। लोगों ने शव देखा तो इसकी जानकारी पुलिस को दी। मौके पर पहुँच कर पुलिस धड़ को जब्त कर लिया और आसपास के इलाकों में सिर की तलाश करती है।

शव की शिनाख्त के लिए उसे मोर्चरी में रखवा दिया गया। इसके साथ ही आसपास के थानों में सूचना भेज दी गई कि कहीं कोई लड़का गुमशुदा तो नहीं। 12 सितंबर को सैफानी पुलिस को जानकारी मिली कि मुरादाबाद जिले के थाना बिलारी के गढी रुस्तमनगर सहसपुर गाँव का सोनू पुत्र साबिर 9 सितंबर से लापता है। पुलिस ने साबिर को बुलाकर शव दिखाया तो उसने उसकी पहचान अपने बेटे सोनू के रूप में की।

इसके बाद पुलिस ने साबिर से सोनू का मोबाइल नंबर लेकर उसका कॉल डिटेल निकाला तो 22 साल की मेहनाज के बारे में पुलिस को जानकारी मिली। पुलिस को पता चला कि थाना सैफानी के मजरा कस्बा की रहने वाली मेहनाज पुत्री इस्माइल ने अंतिम बार सोनू को फोन किया था। पुलिस ने सोनू के पिता से मेहनाज के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि उनका बेटा अक्सर बताता था कि मेहनाज उसकी दोस्त है।

सोनू के अब्बू ने यह भी बताया कि बीच में दोनों की बातचीत बंद हो गई थी। इसके बाद सोनू के अब्बू साबिर ने शक जाहिर करते हुए मेहनाज और उसके घरवालों को नामजद करते हुए थाने में FIR लिखवा दी। इसके बाद पुलिस ने मेहनाज और उसके भाई सद्दाम को हिरासत में ले लिया। शुरुआत ना-नुकूर के बाद दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

सद्दाम ने बताया कि वह अपनी बहन को परेशान देखकर उससे पूछा तो मेहनाज बोली कि सोनू की हत्या कर दो। मेहनाज का कहना है कि सोनू के पास उसके कुछ फोटो थे और वह उन्हें वायरल करने की धमकी देकर उससे बुलाता रहता था। इसके कारण वह अपने प्रेमी सोनू से पीछा छुड़ाना चाहती थी और उसने यह बात सद्दाम को बताई।

पूछताछ में सद्दाम ने बताया है कि उसकी बहन मेहनाज ने सोनू को फोन करके बुलाया और गन्ने के खेत के पास ले गई। वहाँ पर उसका दोस्त रिजवान और उसकी बहन मेहनाज ने कपड़े से सोनू के पैर बाँध दिए। इसके बाद सद्दाम ने सोनू की गर्दन धड़ से अलग कर दिया। उसकी पहचान छुपाने के लिए उसके कपड़ों को भी दिया और शव गन्ने के खेत में फेंक दिया।

इसके बाद सद्दाम ने सोनू का कटा हुआ सिर एवं उसकी चप्पल तथा मोबाइल मेहनाज को दे दी। तीनों उसे प्लास्टिक के थैले में रखकर सैफनी के डम्पिंग ग्राउण्ड में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। तीनों ने अपने भी कपड़ों को जला दिया। हालाँकि, सोनू की बाइक पुल के निकट छोड़ ही छोड़ दी। इसके बाद वे अपने घर आ गए।

इलाके में कुछ सौ मुस्लिम, लेकिन मस्जिद बन रही तीन मंजिल की: स्थानीय लोग बोले- सरकारी जमीन पर बनी है इमारत, शिमला-मंडी के बाद बिलासपुर में उठ रहे सवाल

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और मंडी में मस्जिदों के निर्माण के बाद अब राज्य भर से ही ऐसी मस्जिदों की खबरें आ रही हैं। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में भी एक अवैध मस्जिद के निर्माण की बात सामने आई है। हिन्दू संगठन ने आरोप लगाया है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाई जा रही है।

मस्जिद के अवैध निर्माण का आरोप बिलासपुर के घुमारवीं में लगाया गया है। हिन्दू जागरण मंच ने आरोप लगाया है कि घुमारवीं के बड्डू मुहल्ले में मस्जिद सरकारी जगह पर बनाई जा रही है, इसके लिए किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है। नगर परिषद ने इस मामले में अनभिज्ञता जताई है।

घुमारवीं में हिन्दू जागरण मंच पदाधिकारी विशाल नड्डा ने इस मामले में ऑपइंडिया से बताया कि इस मस्जिद का मौलवी सहारनपुर का रहने वाला है। वह यहाँ पर मजदूर लाकर इस मस्जिद का निर्माण करवा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर मस्जिद बन रही है, उसमें से संभवतः एक छोटा हिस्सा ही उनका खुद का है, बाक़ी जमीन सरकारी है।

विशाल नड्डा ने बताया कि घुमारवीं में मुस्लिम जनसंख्या काफी कम है लेकिन मस्जिद का निर्माण कहीं बड़ी आबादी के लिए हो रहा है। विशाल नड्डा ने ऑपइंडिया को बताया कि घुमारवीं में मुस्लिम जनसंख्या पाँच वर्ष पहले 917 थी जो अब बढ़ कर लगभग 1500 हो चुकी होगी। लेकिन मस्जिद तीन मंजिल की बन रही है।

जागरण की रिपोर्ट बताती है कि घुमारवीं नगर पालिका को इस मस्जिद के विषय में कोई जानकारी नहीं है। नगर पालिका परिषद के अधिकारियों का का कहना है कि यह इलाका पहले उनके अंतर्गत नहीं आता था इसलिए कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। नगर परिषद के अधिकारियों ने यह भी बताया कि मस्जिद निर्माण से सम्बन्धित कोई भी अनुमति नहीं ली गई है।

अब घुमारवीं मामले में हिन्दू जागरण मंच पुराने रिकॉर्ड खंगाल रहा है। हिन्दू जागरण मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि वह इस मस्जिद पर कार्रवाई की माँग करेंगे। मंच ने यह भी कह कि पिछले कुछ सालों में उनके इलाके में मुस्लिम जनसंख्या तेजी से बढ़ी है।

गौरतलब है कि घुमारवीं से पहले शिमला के संजौली और मंडी के जेल रोड पर बनी अवैध मस्जिद को लेकर विवाद गहराया है। शिमला मस्जिद मामले में हिन्दू संगठनों के जबरदस्त विरोध के बाद मुस्लिम पक्ष ने माना है कि निर्माण अवैध है। वहीं मंडी में मस्जिद को गिराने का आदेश नगर निगम ने दिया है। इसको लेकर हिन्दुओं ने सड़कों पर प्रदर्शन भी किया है।

कर्नाटक दंगे में 10 FIR, 50 गिरफ्तार और 94 की तलाश: इंस्पेक्टर निलंबित, कट्टरपंथी मुस्लिमों ने मस्जिद के पास गणपति विसर्जन यात्रा पर किया था हमला

कर्नाटक के मांड्या जिले के नागमंगला कस्बे में 11 सितंबर 2024 को गणपति विसर्जन के दौरान पथराव के मामले में पुलिस इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को 10 प्राथमिकी दर्ज की है। घटना में शामिल अब तक 56 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 90 अन्य की तलाश की जा रही है। वहीं, शिक्षण संस्थानों में छुट्टी कर दी गई है।

इस बीच दंगों के दौरान ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में शुक्रवार (13 सितंबर) को एक पुलिस इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया। पुलिस इंस्पेक्टर अशोक कुमार पिछले साल भी गणेश चतुर्थी के दौरान इसी तरह की दंगे की घटना के बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने में विफल रहे थे। इस बार भी अशोक कुमार सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में विफल रहे थे।

मांड्या के एसपी मल्लिकार्जुन बालादंडी ने कहा कि मांड्या के बदरीकोप्पलु गाँव में मस्जिद के पास का स्थान संवेदनशील क्षेत्र है। वहाँ और अधिक सुरक्षा बल तैनात किए जा सकते थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हिंसा और दंगे के लिए 150 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। BNSS की धारा 16, 109, 115, 118, 121, 132, 189, 190 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस इलाके की सीसीटीवी फुटेज जुटाकर आरोपितों की पहचान कर रही है और उनके बारे में जानकारी जुटा रही है। इस तरह शुक्रवार को भी पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले गिरफ्तार किए गए 52 आरोपितों को गुरुवार (12 सितंबर) की शाम को अदालत में पेश किया गया। मंड्या जिला अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

सबूत जुटाने के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम ने गुरुवार को घटनास्थल का दौरा किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। पुलिस विभाग ने 14 सितंबर तक कर्फ्यू लगा दिया है। वहीं, अगले आदेश तक स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। पुलिस ने स्थिति को देखते हुए नागमंगला शहर में फ्लैग मार्च किया और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।

इस घटना को लेकर कर्नाटक भाजपा ने एक समिति गठित की है। पाँच सदस्यीय इस समिति के बारे में जानकारी देते हुए प्रदेश भाजपा ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “नागमंगला में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुई घटना की सच्चाई का पता लगाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने नेताओं की एक तथ्यान्वेषी टीम गठित की है और एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।”

दरअसल, बदरीकोप्पलु गाँव के युवक कस्बे में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस निकाल रहे थे। जुलूस जैसे ही एक मस्जिद के पास सड़क पार करने लगा, तभी मैसूर रोड पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों से तीखी बहस शुरू कर दी। इस विवाद को देखते हुए उपद्रवियों ने जुलूस के ऊपर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके अलावा लोगों को हथियार भी दिखाए गए।

इस हमले में कुछ पुलिसकर्मी सहित कई लोग भी घायल हो गए थे। उपद्रवियों ने कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की और सामान में आग लगा दी। रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 25 दुकानों में लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इसके अलावा, कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया।

बता दें कि कर्नाटक के मांड्या से पहले भी गणपति विसर्जन के दौरान हिंसा की घटनाएँ घटीं। गुजरात के सूरत में भी पंडाल पर मुस्लिम नाबालिगों ने पथराव किया था। इसके अलावा लखनऊ में भी इस्लामी भीड़ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए पंडाल पर अटैक किया था। वहीं, वडोदरा में भी गणेश पंडाल का विरोध करते हुए मुस्लिमों ने अपने घर के बाहर अरबी झंडे लगा लिए थे। इसके अलावा कच्छ में भी भगवान गणेश की प्रतिमा पर हमला हुआ था। भरूच में भी गणेश चतुर्थी के मौके पर मजहबी झंडे लगाने को लेकर बवाल हुआ था।

पैरालंपिक खिलाड़ियों ने खेलो इंडिया-TOPS को क्यों समर्पित किए सभी 29 मेडल, क्यों PM मोदी का मतलब बताया ‘परम मित्र’: जानिए सब कुछ

हाल ही में सम्पन्न हुए पैरालंपिक खेलों में भारत के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। भारतीय खिलाड़ियों ने इन खेलों में 29 मेडल जीते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार (12 सितम्बर, 2024) को देश के पैरालंपिक खिलाड़ियों से मुलाक़ात की और उनकी राय जानी। उन्होंने उनका उत्साह वर्धन भी किया। इस दौरान खिलाड़ियों ने कहा कि मोदी सरकार के समर्थन के कारण मेडल की संख्या में बढ़ोतरी आई है। मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों ने पीएम मोदी को अपना परम मित्र बताया।

पीएम मोदी से मिलने पहुँचे पैरालंपिक सिल्वर मेडल विजेता शरद कुमार ने कहा, “यह मेरा दूसरा मेडल है, मैं तीन बार पैरालंपिक खेल चुका हूँ। मैं एक खिलाड़ी के तौर पर यह कहूँगा कि मुझे अपना दल देख कर गर्व महसूस होता है। हमें अब मजबूत टीम माना जा सकता है। जाने से पहले आप सबसे बात करते हैं और आप वापस आकर बात करते हैं इससे हमें बल मिलता है। लोगों ने पैरा खेलों को उस तरह नहीं अपनाया जिस तरह आपने अपनाया है।”

वहीं सिल्वर मेडल जीतने वाले योगेश कठूरिया ने कहा, “मैं अपना अनुभव साझा करना चाहता हूँ। मुझे बताना है कि आपकी वजह से लगातार हमारा प्रदर्शन सुधरा है, आपने को खेलो इंडिया उअर TOPS जैसी स्कीम चालू की हैं, आपकी वजह से हम 29 मेडल लाए हैं। बाकी लोगन के लिए पीएम का मतलब प्राइम मिनिस्टर होता है हमारे लिए परम मित्र होता है।”

खेलो इंडिया और TOPS से मिली बड़ी सफलता

दरअसल, मोदी सरकार की जिन योजनाओं की खिलाड़ी तारीफ़ कर रहे हैं, उनके कारण हर प्रतिभा को आगे आने का मौक़ा मिला है। इसके अलावा शुरुआत से ही किस प्रकार खेलों को लेकर खिलाडियों को तैयार किया जा सकता है, उस दिशा में भी काम हुआ है। खिलाड़ियों ने इस दौरान खेलो इंडिया स्कीम का नाम भी लिया। खेलो इंडिया स्कीम को मोदी सरकार ने 2017 में चालू की थी। इस योजना के जरिए सरकार स्कूल स्तर से लेकर आगे तक खिलाड़ियों को मौके देती है।

खेलो इंडिया के लिए मोदी सरकार ने बड़ा बजट भी दिया है। मोदी सरकार ने 2020-24 के बीच खेलो इंडिया के तहत लगभग ₹2700 करोड़ दिए हैं। खेलो इंडिया सेंटर भी स्थापित किए गए हैं, इनमें खिलाड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं। खेलो इंडिया गेम्स का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें पहचानी जाने वाली प्रतिभाओं को आगे अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार किया जाता है।

वहीं खिलाड़ियों ने TOPS स्कीम का नाम भी लिया है। इसका पूरा नाम टार्गेटिंग ओलंपिक पोडियम है। इसे केंद्र सरकार ने 2014 में चालू किया था। इसके तहत ओलम्पिक की तैयारी करने वाले खिलाड़ियों को ₹50,000 महीना स्टाइपेंड दिया जाता है। इसके अलावा उनकी विदेशों में ट्रेनिंग का खर्चा भी सरकार उठाती है। इस स्कीम के कारण ओलंपिक और कॉमनवेल्थ खेलों में बड़ी संख्या में मेडल आए हैं। इसका एक उदाहरण नीरज चोपड़ा हैं।

पैरालंपिक को भी सरकार ने दिया बड़ा बजट

एक रिपोर्ट बताती है कि पेरिस में हुए पैरालंपिक खेलों के लिए भारत सरकार ने 2021-24 के बीच ₹74 करोड़ खर्च किए हैं। टोक्यो पैरालंपिक खेलों के लिए केंद्र सरकार ने ₹26 करोड़ खर्च किए थे, यानी इस बार के खेलों के लिए सरकार ने बजट में लगभग 2.8 गुने की बढ़ोतरी कर दी। केंद्र सरकार ने पैरालंपिक खिलाड़ियों को भी वही सुविधाएँ दी हैं जो उसने सामान्य ओलम्पिक खिलाड़ियों को दी। इसका असर पैरालंपिक में भारत के प्रदर्शन पर साफ़ तौर पर दिखा है।

मोदी सरकार के प्रोत्साहन के चलते पैरालंपिक खेलों में भारत में आने वाले मेडल की सँख्या 29 गुने बढ़ी है। वर्ष 2012 के लंदन पैरालंपिक खेलों में भारत को केवल 1 मेडल मिला था थे। वहीं 2024 में यह संख्या 29 हो गई। भारत ने उन खेलों में भी मेडल जीते हैं, जिनमे वह पहले अंतिम मुकाबले तक नहीं पहुँच पाता था। भारत ने 2024 पैरालंपिक खेलों में तीरंदाजी और शूटिंग जैसे खेलों में मेडल जीते हैं। इन 29 मेडल में से भारत ने 7 गोल्ड जीते हैं।

सरवर चिश्ती ने ‘वक्फ बिल’ पर मुस्लिमों को भड़काया, कहा- सो क्यों रहे हो मियाँ, सड़कों पर उतरना पड़ेगा: ‘शाकाहारी लंगर’ वाले अजमेर दरगाह में आखिर पक क्या रहा है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर अजमेर दरगाह ने ‘शाकाहारी लंगर‘ का ऐलान किया है। इसी दरगाह के अंजुमन कमेटी का सदस्य सरवर चिश्ती है जो वक्फ बिल पर मुस्लिमों को भड़का रहा है। उसका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें वह वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के विरोध में सड़कों पर उतरने के लिए मुस्लिम समुदाय को उकसा रहा है। यह वीडियो बुधवार (11 सितंबर 2024) को सामने आया था।

वीडियो में चिश्ती कहता है, “यह शर्म की बात है कि हमारी इज्जत खतरे में है। हमारे घरों पर बुलडोज़र चलाए जा रहे हैं, भीड़ हमें मार रही है, मस्जिदों, दरगाहों और मजारों को तोड़ा जा रहा है।” चिश्ती ने सरकार द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लाने पर भी नाराजगी जाहिर की और कहा कि मुसलमानों को इस बिल के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।

सरवर चिश्ती ने कहा, “हम मुसलमानों से कह रहे हैं कि क्यूआर कोड को स्कैन करें और इस विधेयक को खारिज करने की मुहिम में शामिल हों। 10 सितंबर तक सिर्फ 40 लाख मुसलमानों ने क्यूआर कोड स्कैन किया है।”

चिश्ती ने मुस्लिम समुदाय से अपील की, “तुम सो क्यों रहे हो, मियाँ? तुम्हें जल्दी सड़कों पर उतरना पड़ेगा। तुमने पहले ही बहुत देर कर दी है, बेवजह अन्याय सहन कर रहे हो।” अजमेर दरगाह के खादीम ने लोगों को भड़काते हुए यह भी कहा कि जो व्यक्ति अन्याय सहन करता है, वह एक क्रूर व्यक्ति से भी बदतर होता है।

चिश्ती ने आगे कहा, “आप एक लोकतांत्रिक देश में रह रहे हैं, कम से कम अपने अधिकारों का उपयोग करो। आप ऐसा क्यों नहीं कर रहे?” उन्होंने मुसलमानों से कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा, “मैंने पहले भी यह बात कही है और फिर से दिल से कहना चाहता हूँ – किसी को अपना नेता मानो। मैं असदुद्दीन ओवैसी को देखता हूँ, जो बहादुरी से मुसलमानों के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते हैं।”

वीडियो में चिश्ती मौलाना तौकीर रजा और सज्जाद नोमानी जैसे कट्टर इस्लामिक उपदेशकों का समर्थन करता नजर आया, जिन पर भगवा लव ट्रैप साजिश का प्रचार करने का आरोप है।

बता दें कि ये वीडियो उसी दिन का है, जिस दिन अजमेर दरगाह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शाकाहारी लंगर लगाने की घोषणा की गई थी। अजमेर शरीफ के सैयद अफशां चिश्ती ने बुधवार को कहा था कि शाही देग में सालों से शाकाहारी भोजन तैयार होता आया है और आने वाली 17 सितंबर को इसमें 4,000 किलो शाकाहारी भोजन तैयार होगा, जिसमें शुद्ध चावल और इसके साथ ही घी, मेवे आदि डाले जाएँगे। बाद में इसे गरीबों को बाँटा जाएगा।

पहले भी विवादों में रहता है सरवर चिश्ची, लड़कियों को बताया था चीज

बता दें कि अजमेर 92 नाम की फिल्म, जिसमें सरवर चिश्ती और अजमेर दरगाह के खादिम के परिवार के लोगों की कारगुजारी बताई गई थी। अजमेर 92 फिल्म अजमेर ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े ब्लैकमेलिंग-रेप कांड पर आधारित थी, जिसमें इसका परिवार भी शामिल था। उस फिल्म के ट्रेलर के सामने आने के बाद सरवर चिश्ती ने लड़कियों को ‘चीज’ बताया था और कहा था कि बड़े-बड़े फिसल जाते हैं।

सरवर चिश्ती ने कहा था, ‘लड़की चीज ही ऐसी होती है… बड़े से बड़ा फिसल जाता है।’ इस मामले को हिंदुओं से जोड़ते हुए कहा था, “आदमी पैसों से करप्ट नहीं हो सकता, मूल्यों से करप्ट नहीं हो सकता। लड़की चीज ही ऐसी है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है। वो थी ना… नाम क्या था… जो पेड़ के नीचे बैठे थे, विश्वामित्र जैसे भटक सकते हैं।” चिश्ती ने आगे कहा था, “अच्छा… जितने भी बाबा लोग जेल में हैं, ये सिर्फ वो हैं जो लड़की के मामले में फँसे हैं। यह ऐसा सब्जेक्ट है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है।”

‘अजमेर 92’ 90 के दशक में 100 से अधिक लड़कियों को ब्लैकमेल कर रेप करने की घटना पर बनी है। देश के इस सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल के मास्टरमाइंड दरगाह के खादिम परिवारों से जुड़े थे। युवक कॉन्ग्रेस के महत्वपूर्ण पदों पर थे।

विवादित बयानों के लिए कुख्यात है सरवर चिश्ती

सरवर चिश्ती वही शख्स है, जिसने नूपुर शर्मा मामले में लोगों को भड़काने का काम किया था। उसने कहा था, “इस वक्त मुल्क में जो हालात हैं। नामूस ए रसूल सललल्लाहु अलेही वसल्लम की शान में गुस्ताखी हो रही है। ये हम कभी कबूल नहीं करेंगे। ऐसा आंदोलन करेंगे कि पूरा भारत हिल जाएगा।”

चिश्ती पर प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से कनेक्शन होने का भी आरोप है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे इस संगठन के सदस्यों के साथ कई बार देखा जा चुका है। वह मंचों से कई बार पीएफआई की तारीफ कर चुका है। 2020 में, उसने यह कहते हुए पीएफआई का बचाव किया था कि संगठन ‘भारत के संविधान को बचा रहा है’। 

कर्नाटक में PFI के मंच से भाषण देते हुए सरवर चिश्ती ने नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक बात कही थी। तब नरेंद्र मोदी को PM उम्मीदवार बनाने की अटकलें लग रही थीं। उस समय सरवर चिश्ती ने कहा था, “अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गया तो कोई ताज्जुब नहीं होगा कि सभी मुसलमान आतंकवादी बन जाएँ।” चिश्ती के इस बयान के बाद कर्नाटक में उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। हालाँकि, उस मामले का क्या हुआ, किसी को ज्ञात नहीं है।

सरवर का बेटा आदिल चिश्ती ने हिंदू-देवताओं का मजाक बनाते हुए 23 जून 2022 को कहा था, “333 करोड़ खुदाओं का अस्तित्व कैसे माना जाएगा? यह कैसे तार्किक है? एक खुदा का तो समझ में आता है, लेकिन 333 करोड़ खुदा, थोक में देवता (Wholesale of Gods), उसको कैसे माना जाएगा? मैं सोचता हूँ कि अगर व्यक्ति को हजार साल की जिंदगी मिले तो भी वह सभी 333 करोड़ खुदाओं को राजी नहीं कर सकता है।”

क्या राहुल गाँधी बांग्लादेशी हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे? यही है वह सवाल जिस पर कॉन्ग्रेसियों ने इंडिया टुडे के पत्रकार को अमेरिका में धमकाया, पीड़ित ने बताया- गला पकड़ा, फोन छीना

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी विदेश में जाकर अफवाह उड़ाते हैं कि भारत की मौजूदा सरकार के शासन में देश में पत्रकारिता की स्वतंत्रता कम हो गई है। वे अपनी हर अमेरिकी यात्रा में इस बात को दोहराते रहे हैं, लेकिन राहुल गाँधी के टीम के लोग ही मनमाफिक सवाल नहीं पूछने पर पत्रकारों के साथ मारपीट करते हैं और उनके मोबाइल फोन छिन लेते है। इंडिया टुडे के पत्रकार के साथ अमेरिका में ऐसा हुआ था।

राहुल गाँधी की हालिया अमेरिका यात्रा के दौरान इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ ऐसा ही हुआ। उन्होंने इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के चेयरमैन सैम पित्रोदा से बांग्लादेश के हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर सवाल किया तो वहाँ बैठे कॉन्ग्रेस समर्थक लोगों ने पत्रकार का मोबाइल फोन लिया और फुटेज को डिलीट करने के लिए धमकाने लगे।

कहा जा रहा है कि ऐसा करने वालों में राहुल गाँधी के निजी सचिव अलंकार भी शामिल थे। एक X यूजर अंकुर सिंह ने इसको लेकर पोस्ट किया है। उन्होंने कहा, “अलंकार ने इंटरव्यू रोक दिया। रिकॉर्डिंग डिलीट करने को कहा। पत्रकार ने मना कर दिया तो अलंकार ने उनका आईफोन छीन लिया और उनकी गर्दन पकड़ी। इसके बाद फोन को जबरन अनलॉक करके रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी।”

इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा ने इस पूरे वाकये को बताया है। उन्होंने लिखा है कि वे 7 सितंबर 2024 को भारत के विपक्ष के नेता राहुल गाँधी की बहुप्रतीक्षित यात्रा को कवर करने के लिए अमेरिका के डलास स्थित टेक्सास गए थे। यहाँ राहुल गाँधी आने वाले थे और भारतीय प्रवासियों, छात्रों, प्रेस और कैपिटल हिल के नेताओं के साथ मुलाकात करने वाले थे।

शर्मा ने इंडिया टुडे पर लिखे अपने लेख में बताया, “अपनी तैयारी के हिस्से के रूप में मैंने इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा से संपर्क किया। मैंने पहले भी उनका साक्षात्कार लिया है। सैम इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए। शाम करीब 7.30 बजे मैं टेक्सास के इरविंग में रिट्ज कार्लटन पहुँचा। वहाँ मुझे सैम के विला में ले जाया गया, जहाँ करीब 30 लोग बैठे थे, जिनमें भारत से आए कुछ लोग भी थे।”

इसके बाद पत्रकार शर्मा इंटरव्यू रिकॉर्ड करने के लिए अपना फोन सेट किया और राहुल गाँधी की यात्रा पर चर्चा करने लगे थे। इस दौरान सैम पित्रोदा ने उनके चार सवालों का सहजता से जवाब दिया। उन्होंने अंतिम सवाल पूछा कि ‘क्या राहुल गाँधी अमेरिकी सांसदों के साथ अपनी बैठकों के दौरान बांग्लादेश में मारे जा रहे हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे?’

इस सवाल का जवाब देने से पहले सैम पित्रोदा ने कहा, “यह राहुल और सांसदों पर निर्भर है कि वे तय करें कि क्या प्रासंगिक है। मैं उनकी ओर से नहीं बोल सकता लेकिन…।” इसी बीच वहाँ बैठे लोग हंगामा करने लगे। कमरे में मौजूद एक व्यक्ति ने चिल्लाकर कहा कि यह सवाल ‘विवादास्पद’ है। वहाँ मौजूद अन्य लोगों भी उस व्यक्ति के हाँ में हाँ मिलाई।

रोहित शर्मा ने कहा, “राहुल की टीम के एक सदस्य ने मेरा फ़ोन छीन लिया और चिल्लाने लगा- ‘बंद करो! बंद करो!, साक्षात्कार बंद करो!” उन्होंने आगे कहा, “सैम भी मेरी तरह घबराए हुए थे और लोगों से शांत रहने की अपील कर रहे थे। हालाँकि, राहुल गाँधी के टीम के लोगों एवं समर्थकों ने उनकी बात नहीं मानी और मेरी माइक छीनने लगे। मैंने विरोध किया और उन्होंने मोबाइल की रिकॉर्डिंग बंद कर दी।”

इस हंगामे के बीच ही सैम पित्रोदा को राहुल गाँधी से मिलने के लिए एयरपोर्ट ले जाया गया। हालाँकि, कमरे में कम से कम 15 लोग रह गए। रोहित ने आगे कहा, “उन्होंने मुझसे साक्षात्कार से अंतिम प्रश्न हटाने के लिए कहा। मैं उन्हें समझाता रहा कि प्रश्न में कुछ भी विवादास्पद नहीं है और उनकी हरकतें गलत हैं। इसके बावजूद वे अड़े रहे और मेरा फोन लेकर उसमें खोजबीन करने लगे।”

इसके बाद उन लोगों ने उस साक्षात्कार को पत्रकार की फ़ोटो लाइब्रेरी से डिलीट कर दिया, लेकिन वह डिलीट फ़ोल्डर में वह रह गया और उसे खोलने के लिए पत्रकार के फेस आईडी की जरूरत थी। रोहित ने बताया, “जब मैं वहाँ बैठा था तो दो आदमी मेरे बगल में खड़े थे। उनमें से एक ने चुपके से मेरा फ़ोन मेरे चेहरे के पास लाया और मेरी सहमति के बिना उसे अनलॉक कर दिया।”

इसके बाद उन्होंने डिलीट किए गए फ़ोल्डर से इंटरव्यू को डिलीट करना शुरू कर दिया। iCloud भी चेक किया। रिकॉर्डिंग के दौरान फ़ोन एयरप्लेन मोड में था। इसलिए वीडियो सिंक नहीं हो पा रहा था। इस तरह वे लगभग आधे घंटे तक हर तरह की हरकत करने के बाद शांत बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद भी वे फोन नहीं लौटाए और उसे चार दिनों तक अपने पास रखा।

इस तरह इंडिया टुडे के वॉशिंगटन स्थित संवाददाता रोहित शर्मा के साथ राहुल गाँधी की टीम के लोगों ने जबरदस्ती की और प्रेस की स्वतंत्रता को हर तरह से कुचलने की कोशिश की। हालाँकि, रोहित के जिस सवाल को लेकर यह बवाल किया गया, उस सवाल को उनके ही एक मित्र ने राहुल गाँधी से पूछ लिया और कॉन्ग्रेस ने इसे अपने X हैंडल पर इसे पोस्ट भी किया।

कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ 1984 के सिख दंगों में आरोप तय, पुल बंगश में सिखों पर हमले के लिए उकसाया: कोर्ट ने कहा- पर्याप्त सबूत

कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को टाइटलर के खिलाफ हत्या और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप तय किए। विशेष न्यायाधीश राकेश सियाल ने यह निर्देश दिया कि टाइटलर को अब इन आरोपों का सामना अदालत में करना होगा, क्योंकि उन्होंने इन अपराधों के लिए खुद को निर्दोष बताया है। अदालत का यह आदेश सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले के संबंध में आया है।

प्रत्यक्षदर्शी गवाह के बयान

अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में शुक्रवार को जगदीश टाइटलर के खिलाफ हत्या और अन्य अपराधों के आरोप तय किए, लेकिन जगदीश ने आरोपों से इनकार कर दिया। जिसके बाद विशेष न्यायाधीश राकेश सियाल ने निर्देश दिया कि टाइटलर द्वारा अपराध के लिए दोषी न होने की बात स्वीकार करने के बाद उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। उन पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत है।

इससे पहले, 30 अगस्त को अदालत ने कहा था कि टाइटलर के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। इस मामले में एक गवाह ने आरोप लगाया था कि 1 नवंबर, 1984 को टाइटलर ने गुरुद्वारा पुल बंगश के पास एक सफेद एम्बेसडर कार से उतरकर भीड़ को उकसाया। गवाह के अनुसार, टाइटलर ने भीड़ से कहा, “सिखों को मारो, उन्होंने हमारी माँ को मार डाला है”, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। इस उकसावे का परिणाम तीन लोगों की हत्या के रूप में सामने आया।

कोर्ट ने कहा- सबूत पर्याप्त

अदालत ने टाइटलर के खिलाफ हत्या, गैरकानूनी सभा, दंगा, विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, घर में अतिक्रमण और चोरी जैसे गंभीर अपराधों के तहत आरोप तय किए हैं। इन सभी आरोपों के तहत अब टाइटलर को कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा, जहां उन पर मुकदमा चलेगा।

1984 के सिख दंगों में भूमिका

1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद पूरे देश में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे, जिसमें दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। इन दंगों में हजारों सिखों की हत्या कर दी गई थी और सैकड़ों गुरुद्वारों और घरों को लूटा व जलाया गया था। कॉन्ग्रेस के कई नेताओं पर इन दंगों में शामिल होने और भीड़ को उकसाने के आरोप लगे थे, जिनमें से एक प्रमुख नाम जगदीश टाइटलर का भी है।

जगदीश टाइटलर कौन हैं?

जगदीश टाइटलर कॉन्ग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हैं। उनका राजनीतिक करियर कई दशकों का है और वे दिल्ली में कई बार सांसद रह चुके हैं। टाइटलर का नाम 1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद से विवादों में रहा है, जब उन पर आरोप लगे कि उन्होंने दंगों के दौरान सिख समुदाय के खिलाफ भीड़ को उकसाया।

टाइटलर का जन्म 11 जनवरी, 1944 को हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा दिल्ली में प्राप्त की और भारतीय राजनीति में कॉन्ग्रेस के टिकट पर प्रवेश किया। 1980 के दशक में, टाइटलर दिल्ली की राजनीति में उभरे और केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे। हालाँकि सिख दंगों से जुड़ी विवादित घटनाओं के कारण उनका राजनीतिक करियर कई बार प्रभावित हुआ है। उनके खिलाफ आरोपों के चलते कॉन्ग्रेस ने भी कई बार उन्हें जिम्मेदार पदों से हटाया है।

जगदीश टाइटलर के खिलाफ अदालत का यह आदेश न केवल सिख दंगों से जुड़े मामले को फिर से सुर्खियों में लाता है, बल्कि देश की न्यायिक प्रणाली में विश्वास को भी प्रबल करता है। हालाँकि, टाइटलर ने खुद को निर्दोष बताया है, लेकिन अब उन्हें अदालत में मुकदमे का सामना करना होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले का कानूनी परिणाम क्या होता है, और क्या यह फैसला सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक कदम साबित होगा।

झारखंड के 6 जिलों में 13%, 2 जिलों में 35% बढ़े मुस्लिम: घुसपैठ-धर्मांतरण से बदल रही डेमोग्राफी, पूर्व CM बोले- राज्य में 7% घटे हिंदू

झारखंड के संथाल परगना में हो रहा डेमोग्राफिक बदलाव इस समय राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हाल में केंद्र सरकार ने इलाके में हो रहे जनसांख्यिकी बदलाव से संबंधित हाई कोर्ट में एक जवाब दाखिल किया जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए।

केंद्र द्वारा दिए गए जवाब से पता चला कि कैसे संथाल परगना के साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, गोड्डा व जामताड़ा समेत 6 जिलों से 16 फीसदी (44% से 28%) जनजातीय समुदाय के लोग घटे हैं जबकि मुस्लिमों की आबादी में 13% की वृद्धि हुई है और दो जिले- साहिबगंज और पाकुड़ में तो इनकी संख्या 35% बढ़ी है।

कैसे उठा डेमोग्राफी बदलाव का मामला

राज्य में होते इस बदलाव के पीछे पलायन, घुसपैठ और धर्मांतरण को कारण माना जा रहा है। वहीं इसका समाधान सिर्फ और सिर्फ एनआरसी को कहा जा रहा है। पहले इस मामले में सोमा उरांव द्वारा जनहित याचिका के जरिए जनजातीय समुदाय के लोगों के धर्म परिवर्तन का मामला उठाया गया था। वहीं बाद में दानियाल दानिश ने जनहित के जरिए बांग्लादेशी घुसपैठियों के घुसने का मुद्दा उठाया था। इन लोगों की चिंता संथाल परगना में हो रहा डेमोग्राफिक बदलाव था। प्रार्थियों ने ये भी बताया था कि कैसे घुसपैठियों को प्रवेश देने के लिए इलाकों में सिंडिकेट काम कर रहा है जो उन्हें आधार कार्ड बनाकर देता है।

इस गंभीर मसले के कोर्ट में पहुँचने के बाद छह जिलों के डिप्टी कमीशनर ने कोर्ट को बताया था कि उनके क्षेत्रों में घुसपैठ समस्या नहीं है। हालाँकि कोर्ट ने उन्हें आगाह कर दिया था कि अगर ये जानकारी झूठ निकली तो वो उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस चलाएँगे।

केंद्र का कहना है कि राज्य में घुसने वाले घुसपैठियों के खिलाफ संविधान के तहत कार्रवाई के अधिकार राज्य सरकार को दिए गए हैं। इसके लिए एक समिति राज्य सरकार के पास है। अगर राज्य को भी इस बाबत सहायता चाहिए तो केंद्र देने को तैयार है।

पूर्व CM ने जनता को किया आगाह

गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई कोर्ट में अब 17 सितंबर को होगी, लेकिन उससे पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को जनता के समक्ष उठाया है। उन्होंने 12 सितंबर को जामताड़ा के यज्ञ मैदान में जनआक्रोश रैली की। उन्होंने समझाया कि कैसे इस डेमोग्राफी बदलाव से सरकारी क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए आरक्षित सीटों पर प्रभाव पड़ेगा। अगर क्षेत्र में आबादी कम होगी तो लोकसभा, विधानसभा, सरकारी नौकरी हर जगह आबादी कम होगी।

उन्होंने बताया कि 1951 के जनगणना के अनुसार, झारखंड में जनजातीय समुदाय की आबादी 36% थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर 26% हो गई है। वहीं मुसलमानों की आबादी 9% से बढ़कर लगभग 14.5% तक जा पहुँची है। इसी दरम्यान हिंदुओं की आबादी भी लगभग 7% घटकर, 88% से 81% पर पहुँच गई है। उन्होंने आँकड़े देकर समझाया कि झारखंड में जनजातीय, हिंदू की आबादी घट रही है और उसी अनुपात में मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है।