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कनाडा में भारतीय उच्चायोग पर ग्रेनेड फेंकने वाला निकला सांसद अमृतपाल सिंह का जीजा, NIA ने परिजनों के यहाँ की थी छापेमारी: घर से फोन, लैपटॉप सब कब्जे में लिया

कनाडा के ओटावा में पिछले साल 23 मार्च 2023 को भारतीय उच्चायोग में ग्रेनेड फेंकने का मामला सामने आया था। अब इस केस में छानबीन के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि वो ग्रेनेड फेंकने वाला कोई और नहीं बल्कि सांसद अमृतपाल सिंह का जीजा अमरजोत था।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार अमरजोत पर आरोप है कि उसने न केवल खालिस्तान के समर्थन में प्रदर्शन किया था बल्कि उच्चायोग के परिसर में खालिस्तान का झंडा भी लगाया था। अमरजोत, अमृतसर के गाँव बुताला का रहने वाला है।

ग्रेनेड फेंकने के मामले में उससे जुड़ी जानकारी उस समय प्रकाशित हुई है जब एनआईए ने शुक्रवार को पंजाब के चार जिलों में एक साथ छापेमारी की। ये छापेमारी शुक्रवार सुबह करीब पाँच बजे गुरदासपुर जिले में तीन स्थानों पर, अमृतसर जिले में दो, पटियाला और मोदा जिले में एक-एक घर में दबिश देकर जाँच की।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि ये सारे स्थान वो हैं जहाँ अमृतपाल के रिश्तेदार रहते हैं। बुतला में अमृतपाल सके जीजा अमरजोत, गुरदासपुर जिले के हाँव में उसके साले गुरमुख सिंह व अमृतसर के जल्लूखेड़ा में अमृतपाल सिंह के चाचा परगट सिंह आदि लोग रहते हैं। छापेमारी के दौरान घर में मौजूद लोगों से पूछताछ की गई और परिवार के मोबाइल फोन, लैपटॉप, डीवीआर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में ले लिया गया।

गौरतलब है कि पिछले साल खालिस्तान समर्थक भीड़ ने ओटावा में भारतीय उच्चायोग पर दो ग्रेनेड फेंकते हुए हमला किया था। इसके बाद जाँच एजेंसियों ने इस मामले में कुछ लोगों की शिनाख्त की। बाद में इस मामले में पाकिस्तान की संलिप्ता पर भी शंका हु और मामले की जाँच एनआईए ने अपने हाथ में ले ली।

24 जून 2023 को एक रिपोर्ट हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित हुई जिसमें एनआईए के हवाले से बताया गया कि अमरजोत सिंह ने खालिस्तान समर्थक भीड़ का नेतृत्व किया था। उसने ये तब किया था जब पंजाब पुलिस अमरजोत की खोज में जुटे थे।

इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े इमान सिंह खारा ने इस मामले में सख्त कानूनी एक्शन लेने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि जो चीज हुई ही नहीं उसमें अमरजोत सिंह (अमृतपाल सिंह के जीजा) का नाम लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं ओटावा में घटी घटना को तो लोगों ने काल्पनिक तक कहा था। हालाँकि अब एक बार फिर से नाम अमरजोत सिंह का नाम आया है।

‘आर्य समाज का विवाह सर्टिफिकेट मान्य नहीं’: हाईकोर्ट ने दिया संस्था के मंदिरों की जाँच का आदेश, प्रशासन से कहा – इनकी गतिविधियाँ खँगालें

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में विवाह प्रमाण पत्र प्रदान देने वाले आर्य समाज के मंदिरों, सोसायटियों, ट्रस्टों और संस्थाओं की जाँच का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने इनके कामकाज और उसके तरीकों की गहन एवं विवेकपूर्ण जाँच करने के लिए कहा है।

दरअसल, न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने यह आदेश पारित किया है। कोर्ट को कई मामलों में पुलिस सत्यापन से पता चला कि बाल विवाह निरोधक अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए आर्य समाज के मंदिरों द्वारा विवाह किए जा रहे हैं और साथ में प्रमाण पत्र भी जारी किए जा रहे हैं।

ऐसे जोड़ों द्वारा दायर याचिकाओं के साथ दिए गए आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज जाली पाए गए हैं। यहाँ तक ​​कि नोटरीकृत शपथ पत्र भी फर्जी पाए गए हैं। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह पंजीकरण अधिकारी ने बिना सत्यापन के फर्जी और अमान्य विवाह प्रमाणपत्र के आधार पर विवाह पंजीकृत कर दिया।

कोर्ट ने कहा, “इस तरह की शादियाँ मानव तस्करी, यौन शोषण और जबरन श्रम को बढ़ावा देती हैं। बच्चे सामाजिक अस्थिरता, शोषण, जबरदस्ती और शिक्षा में व्यवधान के कारण भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक आघात सहते हैं। इसके अलावा ये मुद्दे अदालतों पर बोझ डालते हैं। इसलिए, दस्तावेज़ सत्यापन और ट्रस्टों/सोसायटी की जवाबदेही के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है।”

विवाह प्रमाण-पत्र जारी करने वाली 15 ऐसी समितियों/ट्रस्टों/मंदिरों के नामों पर गौर करते हुए न्यायालय ने पाया कि पुलिस सत्यापन के बाद अधिकांश मामलों में यह पाया गया कि या तो समितियाँ धोखाधड़ी कर रही थीं या मुख्यालय से संबद्ध नहीं थीं या विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5 का उल्लंघन करके संपन्न किए गए थे।

यहाँ तक ​​कि पार्टियों द्वारा दिए गए विवरण और दस्तावेज भी जाली थे। इसको देखते हुए कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद के पुलिस आयुक्तों को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5 और बाल विवाह निषेध अधिनियम 1929 के प्रावधानों का उल्लंघन करके विवाह संपन्न कराने में शामिल ट्रस्टों की गहन और विवेकपूर्ण जाँच करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ताओं ने अपने जीवन की सुरक्षा के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में दलील दी थी कि वे बालिग हैं और उन्होंने आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था। मंदिर द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने रजिस्ट्रार के समक्ष विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन किया था।

अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने न्यायालय में कहा कि यह विवाह प्रमाण-पत्र आर्य समाज मंदिर ग्रेटर नोएडा द्वारा जारी किया गया प्रतीत होता है। इसमें पुजारी का नाम-पता, मंदिर का पता, गवाहों का विवरण और यह घोषणा नहीं है। इसमें यह भी नहीं बताया गया है कि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार किया गया है या नहीं। इसलिए प्रमाण-पत्र जाली हो सकता है।

जाली आर्य समाज प्रमाण पत्रों के साथ न्यायालय के समक्ष सुरक्षा की माँग को लेकर लगातार मामले दायर किए जा रहे हैं। इसको देखते हुए कोर्ट ने गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर के सहायक महानिरीक्षक पंजीकरण (स्टाम्प और पंजीकरण) को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा है। इसके साथ ही 1 अगस्त 2023 से 1 अगस्त 2024 के बीच उनके अधिकार क्षेत्र में विवाह के सभी विवरणों को रिकॉर्ड में रखने के लिए भी कहा है।

इसके अलावा महानिरीक्षक स्टाम्प, उत्तर प्रदेश को उसी अवधि के लिए यूपी राज्य में पंजीकृत विवाहों की संख्या को जिलेवार दर्ज करने का निर्देश जारी किया है। हालांँकि, न्यायालय के समक्ष सुझाव रखे गए थे, लेकिन राजधानी लखनऊ के 5 मीराबाई मार्ग पर स्थित आर्य समाज प्रतिनिधि सभा की ओर से कोई भी व्यक्ति कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ।

इसको देखते हुए कोर्ट ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त को निम्नलिखित पहलुओं की जाँच करने का निर्देश दिया है-

(i) आर्य समाज प्रतिनिधि सभा के कार्य और गतिविधियों की प्रकृति के बारे में;

(ii) विवाह संपन्न कराने के लिए समितियों को अधिकृत करने की योग्यता;

(iii) ऐसी समितियों की सूची, जो उत्तर प्रदेश राज्य में उनके प्राधिकरण और पर्यवेक्षण के तहत विवाह संपन्न करा रही हैं;

(iv) पूर्ण पता और टेलीफोन नंबर के साथ समिति के पदाधिकारियों की सूची

न्यायालय ने पाया कि आर्य समाज विवाह मान्यता अधिनियम 1937 और हिंदू विवाह अधिनियम 1955 का उल्लंघन करते हुए फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने पर नियंत्रण जरूरी है।

मानसी मामले में कोर्ट का यह निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह निर्देश में मानसी व अन्य सहित 42 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आया है। अगली सुनवाई में इन संस्थाओं द्वारा शादी करवाने के लिए ली जाने वाली फीस, विवाह कराने वाले पंजित/पुजारी का नाम-पता आदि की जानकारी कोर्ट के सामने प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इन याचिकाओं में याचियों का कहना था कि परिवार वालों की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी की गई है।

मानसी मामले में कहा गया है कि उसकी और उसके पति की जान को खतरा है। याचिकाकर्ता मानसी ने सिविल लाइन्स के नवाब यूसुफ रोड पर स्थित रजिस्टर्ड आर्य समाज संस्थान से शादी कर कोर्ट में विवाह का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। इसी मामले को लेकर जज ने यह निर्देश दिया है। यह संस्थान आर्य प्रतिनिधि लखनऊ से संबद्ध होने का दावा करती है।

पहले भी इलाहाबाद हाई कोर्ट उठा चुका है सवाल

इससे पहले जून 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज के कृष्णानगर स्थित आर्य समाज को निर्देश दिया था कि वह दो महीने की अवधि यानी 20 जून 2023 तक ऐसे विवाह न कराए, जहाँ प्रस्तावित दूल्हा और दुल्हन के परिवारों की सहमति न हो। आर्य समाज ने एक ऐसे व्यक्ति को विवाह प्रमाणपत्र जारी किया था, जिसके खिलाफ लड़की के परिवार ने मामला दर्ज कराया था।

उसमें आरोप लगाया गया था कि लड़के ने लड़की को बहला-फुसलाकर भगाया है और उससे जबरन शादी कर ली है। वहीं, आर्य समाज द्वारा जोड़े को जारी किए गए विवाह प्रमाणपत्र में यह नहीं बताया गया था कि लड़की की उम्र का सत्यापन कैसे किया गया। लड़की के परिवार का दावा था कि वह नाबालिग थी। हालाँकि, आरोपित ने दावा किया था कि लड़की वयस्क है।

इसके पहले जून 2022 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐसी जाँच का आदेश दिया था। उस समय जस्टिस अश्विनी मिश्रा और जस्टिस रजनीश कुमार की खंडपीठ ने प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को निर्देश दिया था कि वे प्रयागराज के कीडगंज स्थित आर्य समाज के प्रधान संतोष कुमार शास्त्री के माध्यम से विवाह प्रमाण पत्र जारी करने के तरीके और कार्यप्रणाली की जाँच करें।

पीठ ने यह भी कहा था कि इस बात की जाँच की जानी चाहिए क्या शादी संपन्न कराए जा रहे हैं या सिर्फ विवाह प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। संतोष कुमार शास्त्री को पिछले पाँच वर्षों में उनके द्वारा किए गए सभी विवाहों के रजिस्टर पेश करने का भी निर्देश दिया गया था, खासकर अगस्त 2016 में उनके खिलाफ विशिष्ट प्रतिबंध आदेश पारित होने के बाद से।

तब पीठ ने कहा था, “बाहरी कारणों से काम कर रहे एक संगठित रैकेट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, जिसमें दूसरों की भागीदारी/सहायता संभव है।” दरअसल, इस मामले में याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष दावा किया था कि उसने निजी प्रतिवादी के साथ विवाह किया है और इसलिए उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना अनुचित है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी उठाया था मामला

इसी तरह का एक मामला साल 2022 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में आया था। केस एक मध्य प्रदेश की मुस्लिम लड़की के अपहरण का था, जिसका आरोप एक हिन्दू लड़के पर था। लड़की को पुलिस ने बरामद कर लिया था, जिसने अपने अम्मी-अब्बू के साथ जाने से मना कर दिया था। लड़की लगातार उस लड़के के साथ जाने की जिद पर अड़ी थी, जिस पर उसके अपहरण का आरोप था।

लड़की ने बाद में गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में धर्म परिवर्तन कर लिया। लड़की के परिजनों ने अवैध धर्मांतरण बताकर लड़की को लड़के के घर जाने से रोकने की माँग की थी। इस बहस में जस्टिस रोहित आर्य को एक बार कहते सुना गया कि ‘बिलकुल सही बात है।’ दो जजों में एक जज कह रहा था, “ये तमाशा हम स्वीकार नहीं करेंगे। ये अभी जेल जाएगा। तुम काजी के पास जाओ और मुस्लिम बन जाओ। वही ज्यादा अच्छा है। फ्रॉड कर के उसका धर्मांतरण कर दिया, ये कोई तरीका है? किसी मुस्लिम को हिन्दू बना रहे हो, मज़ाक बात है?”

इसी बहस के बीच में 5:30वें मिनट पर जस्टिस रोहित आर्य ने SSP को कुल पुलिस फ़ोर्स उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मामले में कुछ फ्रॉड की आशंका दिखाई दे रही है। इसी क्रम में उन्होंने लड़की को हिन्दू बनाने वाले गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर को मात्र एक ट्रस्ट डीड बना कर रखने वाला बताया। जज ने आर्य समाज मंदिर के वकील से पहले मंदिर की प्रमाणिकता साबित करने को कहा।

आर्य समाज मंदिर में शादी के प्रावधान

दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज में शादियँ हिंदू रीति-रिवाज से ही होती हैं और अग्नि के सात फेरे दिलवाए जाते हैं। इसके बाद एक मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। आर्य समाज से होने वाली शादियों को आर्य समाज मैरिज वैलिडेशन 1937 और हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत मान्यता देने की बात होती है।

इसमें दूल्हे की उम्र 21 साल से अधिक और दुल्हन की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए। इसमें दो अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग भी शादी कर सकते हैं। यहाँ शादी करने वाले जोड़े को पहले रजिस्ट्रेशन कराना होता है। दोनों पक्षों को हलफनामा देना होता है। इसके बाद दोनों के दस्तावेजों को देखने के बाद उनकी शादी आर्य समाज मंदिर में कराई जाती है।

अगर लड़का-लड़की एक ही धर्म का है तो शादी हिंदू एक्ट के तहत मानी जाती है। अगर जोड़ा अलग-अलग धर्म का होता है तो आर्य समाज मैरिज वैलिडेशन एक्ट के तहत उसे मान्यता दी जाती है। हालाँकि, कानूनी तौर पर शादी को तभी वैध माना जाता है जब शादी को एसडीएम कोर्ट में रजिस्ट्रेशन कराया जाता है।  

‘2 दिन बाद दूँगा इस्तीफा, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठूँगा’: केजरीवाल की घोषणा, सोशल मीडिया पर लोग सुनीता केजरीवाल को बना रहे CM

बेल मिलने के बाद जेल से बाहर आए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया ने इस्तीफा देने की घोषणा की है। भारतीय जनता पार्टी पर हमला करते हुए उन्होंने राजनीतिक चाल चली। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा पर बोलते हुए केजरीवाल ने कहा – 

“अगर देश की जनता को लगता है कि मैं बेईमान हूँ, तो मैं कुर्सी छोड़ दूँगा। अगर जनता को लगता है कि मैं ईमानदार हूँ, तो मुझे वोट देना। आप जब जिता दोगे तभी मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठूँगा।”

सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करते हुए अपने इस्तीफे की बात रखी। उन्होंने कहा कि वो 2 दिन बाद सीएम की कुर्सी से इस्तीफा देंगे।

केजरीवाल की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। इन कयासों में सबसे ज्यादा सुनीता केजरीवाल को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना बताई जा रही है।

PM मोदी ने झारखंड को दिया 6 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का तोहफा, कहा – ‘अब देश की प्राथमिकता आदिवासी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर 2024 को झारखंड के जमशेदपुर में 6 नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत की। इस अवसर पर, उन्होंने राज्य के विकास और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया। उन्होंने रांची एयरपोर्ट से ही विभिन्न योजनाओं का ऑनलाइन उद्घाटन किया। चूँकि उन्हें जमशेदपुर में जाकर उद्घाटन करना था, लेकिन बारिश की वजह से उन्होंने रांची एयरपोर्ट से ही उद्घाटन किया। यही वजह रही कि जमशेदपुर में प्रस्तावित उनके रोड-शो को रद्द कर दिया गया। हालाँकि वो जमशेदपुर सड़क मार्ग से पहुँच रहे हैं और जनसभा को संबोधित भी करेंगे।

पीएम मोदी ने दिया इन वंदे भारत ट्रेनों का तोहफा

  1. टाटानगर – पटना वंदे भारत एक्सप्रेस
  2. भागलपुर – दुमका- हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस
  3. ब्रह्मपुर – टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस
  4. गया – हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस
  5. देवघर – वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस
  6. राउरकेला – हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “आज का दिन झारखंड के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत से न केवल झारखंड की यातायात सुविधा में सुधार होगा, बल्कि यह हमारे देश की प्रौद्योगिकी और उन्नति की दिशा में एक कदम और बढ़ाएगा। इस आधुनिक ट्रेन से यात्रियों को न केवल सुविधा मिलेगी बल्कि यह राज्य की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगी।”

पीएम मोदी ने कहा, “6 नई वंदे भारत ट्रेनें, 650 करोड़ से ज्यादा की रेलवे परियोजनाएँ, कनेक्टिविटी और यात्रा सुविधाओं का विस्तार, मैं झारखंड की जनता-जनार्दन को इन सभी विकास कार्यों के लिए बधाई देता हूँ।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्देश्य केवल यातायात को सुगम बनाना नहीं है, बल्कि यह हमारे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हम चाहते हैं कि हमारे देश के हर हिस्से में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचे और हर नागरिक को इसका लाभ मिले। यह ट्रेनें हमारी आधुनिक यात्रा की अवधारणा को वास्तविकता में बदल रही हैं और हमारी प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, “आज झारखंड भी उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहाँ रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत झारखंड के 50 से अधिक रेलवे स्टेशनों का भी कायाकल्प किए जा रहे हैं। देश के गरीबों को सशक्त बनाने के लिए 2014 से कई कदम उठाए गए हैं। आदिवासी लोगों को जोड़ने के लिए पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) योजना चल रही है…”

पीएम मोदी ने कहा, “अब देश की प्राथमिकता देश का गरीब है। अब देश की प्राथमिकता देश का आदिवासी है। अब देश की प्राथमिकता देश का दलित, वंचित और पिछड़ा समाज है। अब देश की प्राथमिकता महिलाएँ हैं, युवा हैं, किसान हैं।” पीएम मोदी ने शुरुआत में कहा, “आज बहुत ही मंगल दिन है। इस समय झारखंड में प्रकृति पूजा के पर्व कर्मा की उमंग है। आज सुबह जब मैं रांची एयरपोर्ट पर पहुंचा तो एक बहन ने ‘करमा’ पर्व के प्रतीक ‘जावा’ से मेरा स्वागत किया। इस पर्व में बहनें अपने भाई की कुशलता की कामना करती हैं।”

पीएम मोदी राँची से जमशेद सड़क मार्ग से पहुँच रहे हैं। बारिश की वजह से उन्होंने उद्घाटन कार्यक्रम रांची से ही किया। जमशेदपुर में पीएम मोदी जनसभा को संबोधित करेंगे।

नाम: जामा मस्जिद, पता: अखाड़ा बाजार, श्रीराम गली – शिमला और मंडी के बाद कुल्लू में अवैध मस्जिद को लेकर बवाल, हिंदुओं ने कार्रवाई तक शुरू किया हनुमान चालीसा का पाठ

हिमाचल प्रदेश में अवैध मस्जिदों को लेकर हिंदुओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शिमला के संजौली और मंडी के जेल रोड में मस्जिद की अवैध निर्माण के बाद कुल्लू में भी कुल्लू में भी बने अवैध मस्जिद के खिलाफ लोग आ गए। इसको लेकर हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। वहीं, मंडी में अवैध मस्जिद गिराए जाने तक लोगों ने हनुमान चालीसा का अखंड पाठ शुरू किया है।

कुल्लू में जिस मस्जिद को लेकर लोगों में आक्रोश फैला है, वह मस्जिद अखाड़ा बाजार के श्रीराम गली में स्थित है और इसका नाम जामा मस्जिद है। हिंदू संगठनों का कहना है कि जामा मस्जिद खादी ग्रामोद्योग की भूमि पर बना दी गई है। इस मस्जिद के अवैध निर्माण के खिलाफ लोगों ने हनुमान मंदिर रामशिला से ढालपुर चौक तक प्रदर्शन किया।

हिंदू जागरण मंच एवं अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने अखाड़ा बाजार पहुँचकर मस्जिद से 10 मीटर की दूरी पर हनुमान चालीसा का पाठ किया। यहाँ पाठ खत्म होने के बाद प्रदर्शनकारी ढालपुर चौक पहुँचे और वहाँ एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और इस अवैध मस्जिद को गिराने और पूरे इलाके मे अवैध मस्जिदों की जाँच की माँग की। जिले कुल 11 मस्जिदें बताई जा रही हैं।

हिंदू संगठनों का कहना है कि साल 2017 से चल रहे पत्राचार में कुल्लू नगर परिषद ने यह स्वीकार किया है कि यह मस्जिद अवैध तरीके से बनाई गई है। इसे खादी ग्रामोद्योग की भूमि पर बनाया गया है। उनका कहना कि बिना पंजीकरण के दूसरे राज्यों के सैकड़ों लोग रोज हिमाचल प्रदेश में आ रहे हैं और अपनी अनैतिक गतिविधियों से यहाँ की संस्कृति और सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं।

हिंदू संगठनों ने कहा कि कुछ ही दिन पहले गड़सा घाटी में गौहत्या का मामला सामने आया था। लोगों ने पता चलने पर आरोपितों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। आक्रोशित लोगों का कहना है कि ये बाहरी अराजक तत्व बिना बिल के सामान बेच रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है और करदाता व्यापारियों का व्यापार चौपट हो रहा है। 

दरअसल, अखाड़ा बाजार में बनी जामा मस्जिद का निर्माण साल 1990-91 बताया जाता है। उस समय इसकी इमारत एक मंजिल की थी, लेकिन साल 2017 तक इसका निर्माण किया गया और अब मस्जिद चार मंजिल की हो गई है। 2017 में हिंदू संगठनों के प्रयास से इस पर रोक लगा दी गई थी। उनका कहना है कि इस स्थान पर जो नक्शा पास हुआ है, उसके मुताबिक यह भवन नहीं बना है।

पूरा मामला सामने आने के बाद कुल्लू नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी हरि सिंह यादव ने कहा, “नगर परिषद को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस जमीन का रिकॉर्ड बंदोबस्ती के पास है। हिंदू संगठनों के आरोप के बाद इसकी जाँच की जाएगी।” वहीं, कुल्लू के एसडीएम ने कहा कि जामा मस्जिद की जाँच की जा रही है। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच मस्जिद के इमाम नवाब हाशमी ने निर्माण की वैधता और भूमि के मालिकाना हक का बचाव किया है। उन्होंने दावा किया कि वक्फ बोर्ड कानूनी तौर पर 1 बीघा और 2 बिस्वा जमीन का मालिक है और वह इसके लिए किराया वसूल रहा है। हाशमी ने कहा, “विवादित भूमि 1999 में कॉन्ग्रेस नेताओं की मदद से खादी बोर्ड से मस्जिद को हस्तांतरित की गई थी। इसमें निर्माण भी वैधानिक तरीके से हुई है।”

मंडी में अवैध मस्जिद गिरने तक होगा हनुमान चालीसा

हिंदू जागरण मंच ने कहा है कि वह मंडी के जेल रोड में मस्जिद के अवैध निर्माण के गिरने तक रोज हनुमान चालीसा का पाठ करेगा। इसके साथ ही शहर के विभिन्न मंदिरों में तीस दिनों तक पाठ के साथ कीर्तन होगा। मंच ने यह भी कहा कि आयुक्त कोर्ट की ओर से दी गई समयावधि तक मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद के अवैध निर्माण को नहीं हटाया तो हिंदू इसे गिराएँगे।

दरअसल, शनिवार (14 सितंबर 2024) को हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने मंडी शहर के इंदिरा मार्केट में स्थित माता सिद्ध काली के प्रांगण में हनुमान चालीसा का पाठ और माता के कीर्तन का आयोजन किया। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इनमें बुजुर्ग से लेकर महिलाएँ तक शामिल थीं। हिंदू संगठनों का कहना है प्रशासन ने हिंदुओं को आश्वस्त किया है।

ईद-ए-मिलाद पर ट्रैफिक से लेकर पुलिस-प्रशासन सब की व्यवस्था, कैद में भगवान गणेश की मूर्ति: कर्नाटक में और क्या-क्या करेगी कॉन्ग्रेसी सरकार?

कर्नाटक में जहाँ ईद-ए-मिलाद के लिए हर मोड़ पर ट्रैफिक से लेकर पुलिस की व्यवस्था की गई है, वहीं गणेश चतुर्थी के जश्न में भगवान गणेश की मूर्ति को “कैद” कर दिया गया। ये स्थिति एक बार फिर इस सवाल को खड़ा करती है कि हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों पर सुरक्षा व्यवस्था की जगह उन पर अंकुश क्यों लगाया जाता है? और अगर सुरक्षा का दावा किया जा रहा है, तो भगवान गणेश की मूर्ति को पुलिस वैन में क्यों ले जाया गया? ऐसा लग रहा है कि कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार भगवान से भी ज़्यादा कानून-व्यवस्था को भगवान मान बैठी है, और अगर ये कानून हिंदू परंपराओं से टकरा जाए, तो गणेश जी तक को पुलिस स्टेशन में ले जाना पड़ता है।

ईद-ए-मिलाद पर प्रशासन अलर्ट, और गणेश चतुर्थी पर?

कर्नाटक के बेंगलुरु में 16 सितंबर 2024 के लिए ईद-ए-मिलाद के अवसर पर पुलिस ने शहरभर में ट्रैफिक को मैनेज करने के लिए एडवाइजरी जारी की है। हर गली-मोहल्ले में पुलिस तैनात की गई है, और एक-एक सड़क पर नजर रखी जाएगी कि कहीं कोई जुलूस के दौरान असुविधा न हो। बेंगलुरु पुलिस ने बाकायदा ट्रैफिक रूट्स को बदल दिया, ताकि ईद के जुलूसों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। लेकिन दुख की बात यह है कि इसी ट्रैफिक व्यवस्था में गणेश विसर्जन के जुलूस के दौरान भगवान गणेश को “कैद” किया गया।

एक तरफ ईद-ए-मिलाद पर पूरी पुलिस फोर्स मुसलमानों की भीड़ के लिए अलर्ट मोड पर थी, तो दूसरी तरफ हिंदू धर्म के त्योहार पर भगवान की मूर्ति को ट्रैफिक और लॉ एंड ऑर्डर का हवाला देते हुए पुलिस वैन में ले जाया गया। क्या भगवान गणेश की भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल था, या फिर यह हिंदू त्योहारों के प्रति प्रशासन की दोहरी मानसिकता का परिणाम था?

क्या हिंदू त्योहार पर सुरक्षा का अभाव है?

सोचने वाली बात है कि जब ईद-ए-मिलाद के लिए सरकार इतनी चौकन्नी है, तो गणेश चतुर्थी पर ऐसा क्या हो गया कि भगवान गणेश की मूर्ति को पुलिस की हिरासत में रखना पड़ा? यह वाकया एक सच्चाई को उजागर करता है कि हिंदू त्योहारों पर सरकार का रवैया अलग होता है। प्रशासन के लिए ईद का जुलूस शांति से निकल जाए, इसके लिए हर संभव इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन जब गणेश चतुर्थी की बात आती है, तो हिंदुओं के धार्मिक प्रतीक को ‘कानून व्यवस्था’ के नाम पर पुलिस वैन में बंद किया जाता है।

जरा सोचिए, ईद पर जुलूस निकलता है और प्रशासन पूरी ताकत लगाता है कि किसी भी इस्लामी मजहबी को दिक्कत न हो। वहीं गणेश चतुर्थी पर अगर कोई हिंदू परिवार भगवान गणेश की मूर्ति को विसर्जन के लिए लेकर जा रहा है, तो उसे क्या मिलता है? पुलिस, जो हिंदुओं के धार्मिक अधिकारों को ‘कंट्रोल’ करने का काम करती है।

गणेश जी की ‘गिरफ्तारी’ का सच?

बेंगलुरु में गणेश चतुर्थी के दौरान की एक वायरल तस्वीर ने सबको चौंका दिया, जिसमें गणेश जी की मूर्ति पुलिस वैन में रखी गई थी। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से फैली, और लोग सवाल करने लगे कि यह क्या हो रहा है? क्या भगवान गणेश को भी कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार ने “गिरफ्तार” कर लिया? असल में, यह घटना कर्नाटक के यादगिरी जिले की है, जहाँ गणेश चतुर्थी के जुलूस के दौरान प्रशासन ने कहा कि सुरक्षा कारणों से गणेश जी की मूर्ति को विसर्जन स्थल तक पुलिस वैन में लेकर जाना होगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब ईद-ए-मिलाद के जुलूसों को पुलिस सुरक्षा में बिना किसी रुकावट के जाने दिया जा सकता है, तो गणेश जी के जुलूस को क्यों नहीं?

क्या यही “धर्मनिरपेक्षता” है?

इस तरह की घटनाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या यह वही ‘धर्मनिरपेक्षता’ है जिसका दावा कॉन्ग्रेस की सरकारें करती हैं? जब ईद के जुलूस के लिए सड़कों पर बैरिकेड लगाए जाते हैं, ट्रैफिक डायवर्ट किया जाता है, और पुलिस बल तैनात होते हैं, तो गणेश चतुर्थी पर भगवान की मूर्ति को ‘गिरफ्तार’ क्यों करना पड़ता है? क्या यह प्रशासन का दोहरा रवैया नहीं है?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन अगर गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख हिंदू त्योहारों पर भीड़ और कानून-व्यवस्था के नाम पर भगवान को ही ‘कैद’ करना पड़े, तो यह धर्मनिरपेक्षता नहीं, बल्कि भेदभाव का प्रतीक है।

ईद-ए-मिलाद और गणेश चतुर्थी की तुलना

ईद-ए-मिलाद और गणेश चतुर्थी, दोनों धार्मिक त्योहार हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया में इतना बड़ा अंतर क्यों है? क्या गणेश चतुर्थी के दौरान सड़कों पर भीड़ नहीं होती? क्या विसर्जन के दौरान कोई ट्रैफिक व्यवधान नहीं होता? फिर क्यों ईद के लिए तो रूट बदल दिए जाते हैं और गणेश चतुर्थी के लिए भगवान गणेश की मूर्ति को पुलिस वैन में रखना पड़ता है?

ईद के जुलूस के लिए पुलिस प्रशासन सड़कें बंद करवा सकता है, पर हिंदू त्योहारों पर ऐसा करना उनके लिए मुश्किल क्यों हो जाता है? क्या गणेश विसर्जन का जुलूस इतना छोटा था कि उसे पुलिस वैन में ‘कैद’ कर देना ही एकमात्र उपाय था?

यह दिखावा कब तक चलेगा?

सरकार की ‘धर्मनिरपेक्षता’ सिर्फ कागजों पर है या फिर केवल कुछ विशेष धर्मों के लिए? कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर पहले भी तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस घटना ने इस धारणा को और मजबूत किया। ईद-ए-मिलाद के जुलूस को शांतिपूर्वक निकालने के लिए पूरी व्यवस्थाएँ की गईं, जबकि गणेश चतुर्थी के विसर्जन के दौरान भगवान गणेश की मूर्ति को ‘कैद’ कर लिया गया। यह केवल धार्मिक भावनाओं का अपमान नहीं, बल्कि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार की प्राथमिकताएं कहाँ हैं।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार का असली चेहरा

कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार ने एक बार फिर दिखा दिया कि उनकी प्राथमिकताएँ क्या हैं। ईद-ए-मिलाद के लिए तो प्रशासन चौकन्ना था, लेकिन गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान की मूर्ति को ही कैद कर लिया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि कर्नाटक में सरकार की प्राथमिकता हिंदू त्योहारों की सुरक्षा नहीं, बल्कि उन्हें सीमित करने की है। जब तक यह दोहरा रवैया जारी रहेगा, तब तक हिंदू समाज के धार्मिक अधिकारों का हनन होता रहेगा।

अब यह सवाल सरकार से है कि क्या वे अपनी ‘धर्मनिरपेक्षता’ का सही मायने में पालन करेंगे, या फिर भगवान गणेश की मूर्ति को ‘गिरफ्तार’ करने जैसे कदम उठाते रहेंगे?

महोबा में गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान पथराव, इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया जुलूस पर हमला: बवाल के बाद हिन्‍दुओं ने किया कोतवाली का घेराव

महोबा जिले में गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान दो समुदायों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई। यह घटना तब हुई जब गणेश मूर्ति का जुलूस मुस्लिम बाहुल्य कसौराटोरी इलाके से गुजर रहा था। जुलूस के दौरान आतिशबाजी में एक जलता हुआ पटाखा गलती से एक कच्चे मकान में गिर गया, जिससे विवाद शुरू हो गया। इसके तुरंत बाद, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जुलूस पर पानी की बाल्टियाँ फेंकनी शुरू कर दीं और फिर पथराव भी होने लगा। इस कारण जुलूस में अफरा-तफरी मच गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और मौके पर कई थानों की फोर्स को तैनात कर दिया। पुलिस ने दर्जन भर लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, इस घटना के बाद हिंदू संगठनों ने गुस्से में आकर कोतवाली का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की।

यह घटना महोबा के शहर कोतवाली क्षेत्र के कसौराटोरी मोहल्ले की है। शनिवार (14 सितंबर 2024) को गणेश मूर्ति विसर्जन के लिए निकाले जा रहे जुलूस में शामिल भक्त डीजे की धुन पर उत्सव मना रहे थे। जैसे ही जुलूस कसौराटोरी इलाके से गुजरा, आतिशबाजी के दौरान एक जलता पटाखा कच्चे मकान के अंदर गिर गया, जिससे विवाद की शुरुआत हुई। इसके बाद जुलूस में शामिल भक्तों पर पानी की बाल्टियाँ फेंकी गईं, जिससे दोनों पक्षों में टकराव और पथराव शुरू हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुँचा, लेकिन गुस्साए हिंदू संगठन के कार्यकर्ता कोतवाली पहुँच गए और गिरफ्तारी की माँग करने लगे। उन्होंने कोतवाली का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की। संगठन के पदाधिकारी कार्रवाई की माँग पर अड़े रहे और देर रात तक कोतवाली में डटे रहे।

पुलिस ने स्थिति को शांत करने के लिए दोनों पक्षों से बातचीत की और तनाव को कम करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने दर्जन भर लोगों को हिरासत में लिया और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष मनोज शिवहरे ने बताया कि गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान भक्तों पर पथराव करने की घटना से लोग बेहद आक्रोशित हैं। उन्होंने माँग की है कि पुलिस जल्द से जल्द आरोपितों को गिरफ्तार करे। वहीं, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुँच गए और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की।

CBI ने RG कर मेडिकल अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और पुलिस अधिकारी अभिजीत मंडल को किया गिरफ्तार, सबूतों से छेड़छाड़ और साजिश रचने का आरोप

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर की रेप और फिर हत्या के मामले में RG कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को सीबीआई ने गिऱफ्तार कर लिया है। घोष के साथ ही इंपेक्टर अभिजीत मंडल को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों को आज सियालदह में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा।

सीबीआई का कहना है कि दोनों अपराध स्थल को बिगाड़ने, सबूतों से छेड़छाड़ करने, आधिकारिक नियमों का उल्लंघन करने, आपराधिक साजिश रचने और जाँचकर्ताओं को गुमराह करने में शामिल थे। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, ताला पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी के रूप में अभिजीत मंडल महिला डॉक्टर की लाश मिलने के बाद अपनी भूमिका के बारे में उचित जवाब नहीं दे पाए।

मेडिकल अस्पताल में अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर संदीप घोष पहले से ही एजेंसी की न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें 2 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में सीबीआई उन्हें रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी। इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच कर रही है।

इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य डायरी (जीडी) प्रविष्टि और एफआईआर के पंजीकरण के समय के बीच विसंगति की ओर इशारा किया था। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था, “यह बहुत स्पष्ट है कि एफआईआर दर्ज करने में कम से कम 14 घंटे की देरी हुई है।”

दरअसल, 31 वर्षीया ट्रेनी डॉक्टर की रेप और हत्या के बाद रात में पोस्टमार्टम किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। हालाँकि, डॉक्टरों के तीन सदस्यीय पैनल ने शुरू में शाम को पोस्टमार्टम करने से इनकार कर दिया था, लेकिन पुलिस अधिकारी अभिजीत मंडल ने ‘कुछ जरूरी मामले’ का हवाला देकर शाम 6.10 से 7.10 बजे के बीच पोस्टमार्टम करने की अनुमति दी।

रात में शव का पोस्टमार्टम करने को लेकर मृतक डॉक्टर के माता-पिता ने सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि अभिजीत मंडल ने शव का अंतिम संस्कार जल्द करने के लिए उन पर दबाव डाला था। सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान संदीप घोष के बयान से भी एजेंसी को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनसे पुलिस अधिकारी मंडल की भूमिका पर संदेह पैदा हुआ।

अभिजीत मंडल को सबूतों से छेड़छाड़ करने और अपराध की सूचना मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज करने में देरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। CBI के एक अधिकारी ने कहा, “पुलिसकर्मी से पहले आठ बार पूछताछ की जा चुकी है और हर बार उसने अलग-अलग बयान दिए हैं। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।” गिरफ्तारी से पहले शनिवार को मंडल से कई घंटों तक पूछताछ की गई।

इन दोनों गिरफ्तारियों पर प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने जश्न मनाया। एक डॉक्टर ने कहा, “हम पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और पुलिस अधिकारी अभिजीत मंडल की गिरफ़्तारी की माँग कर रहे थे, क्योंकि वे सबूतों से छेड़छाड़ करने में शामिल थे। हम बहुत खुश हैं क्योंकि सीबीआई ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है। सीबीआई को उन अन्य लोगों को भी गिरफ़्तार करना चाहिए जिन्होंने सबूतों से छेड़छाड़ की है।”

इससे पहले संदीप घोष के बाउंसर एवं सुरक्षाकर्मी अफसर अली खान और हावड़ा में मेडिकल शॉप चलाने वाली सुमन हजारा को पहले की गिरफ्तार कर लिया गया है। सुमन हजारा पर आरोप है कि उनकी दुकान से रिसाइकल किया हुआ मेडिकल उपकरण RG कर मेडिकल अस्पताल में सप्लाई किया जाता था। इसके अलावा, वेंडर विप्लव सिंघा और रेप के आरोपित संजय राय को गिरफ्तार किया जा चुका है।

राम रेवाड़ी की शोभा यात्रा पर मस्जिद के अंदर से पथराव, कई हिंदू घायल: ‘अवैध जामा मस्जिद’ पर बुलडोजर एक्शन की माँग, भीलवाड़ा में MLA समेत सैकड़ों लोग धरने पर

राजस्थान के भीलवाड़ा में राम रेवाड़ी की शोभायात्रा पर इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा पथराव किया गया, जब शोभायात्रा मस्जिद के सामने से गुजर रही थी। भीलवाड़ा के जहाजपुर में राम रेवाड़ी की शोभायात्रा के दौरान जामा मस्जिद के बाहर अचानक पथराव होने से माहौल तनावपूर्ण हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भीलवाड़ा के जहाजपुर में शनिवार (14 सितंबर 2024) को यह घटना तब हुई, जब शोभायात्रा भगवान के बेवाण किले से आ रही थी। शोभा यात्रा जैसे ही जामा मस्जिद के पास पहुँची, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। घटना के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया और प्रदर्शनकारियों ने आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग करते हुए मौके पर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान शहर के बाजार भी बंद हो गए। इस मामले में 10 पत्थरबाजों को गिरफ्तार किया गया है, जो मस्जिद के अंदर से पत्थरबाजी कर रहे थे।

मस्जिद से पत्थरबाजी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना की जानकारी मिलने पर जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा मौके पर पहुँचे और प्रदर्शनकारियों के साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने जामा मस्जिद को अवैध बताते हुए इसे बुलडोजर से तोड़ने की माँग की। इसके बाद नगर पालिका ने जामा मस्जिद को स्वामित्व और निर्माण स्वीकृति संबंधी दस्तावेज पेश करने के लिए 24 घंटे का नोटिस जारी किया। देर रात तक ये धरना चला और प्रशासन से 3 दौर की वार्ता के बाद धरना समाप्त हुआ।

रात में नगर पालिका ने बस स्टैंड के पास मुस्लिमों की कुछ केबिनों को अतिक्रमण मानकर जेसीबी से हटवा दिया। इस दौरान बाईपास के पास दो केबिनों को कुछ युवाओं द्वारा आग के हवाले कर दिया गया। इससे माहौल और अधिक बिगड़ गया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी से स्थिति नियंत्रण में रही।

शाहपुरा एसपी राजेश कांवट ने बताया कि इस मामले में अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि कस्बे के हालात तनावपूर्ण जरूर हैं, लेकिन नियंत्रण में हैं। क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

रात में जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह शेखावत, एसपी राजेश कांवट, और अजमेर के आईजी ओमप्रकाश भी मौके पर पहुँचे। उन्होंने हालात का जायजा लिया और निर्देश दिए कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जाए।

वहीं, विधायक गोपीचंद मीणा ने देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट कर धरना समाप्त करने की घोषणा की और बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को मामले की जानकारी दे दी गई है। अब जिला प्रशासन सीएमओ के निर्देशन में कार्रवाई करेगा।

एक्सप्रेसवे की बदहाली पर एक्शन मोड में NHAI: 4 इंजीनियरों पर गिरी गाज, ठेकेदार पर ₹50 लाख का जुर्माना – खराब सड़क की वायरल हुई थी वीडियो

केंद्र सरकार ने सड़कों की मरम्मत एवं रख-रखाव के मामले में लापरवाही बरतने वाले चार इंजीनियरों ऐक्शन लिया है और ठेकेदार पर 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। पिछले दिनों अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर और दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे की बदहाली की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए थे। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इसका संज्ञान लिया था।

दरअसल, पिछले दिनों अलवर में दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक्सप्रेसवे पर चल रही एक कार सड़क में खामियों के कारण हवा में उछलती हुई दिखाई दी थी। इसके अलावा, कई जगहों की तस्वीरें भी लोगों ने सोशल मीडिया पर वायरल की थी।

इस मामले में NHAI ने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के निर्देश पर इस मामले की जाँच की गई। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। NHAI ने कहा कि वक्त रहते खामियों को दूर न करने के मामले में ठेकेदार पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

इसके अलावा, निर्माण कार्य की ठीक से देखभाल नहीं करने और अपने काम में लापरवाही के चलते NHAI के इंजीनियर के टीम लीडर-कम-रेजिडेंट इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही संबंधित साइट इंजीनियर को भी बर्खास्त कर दिया गया है। संबंधित पीडी और मैनेजर (टेक) को भी इन खामियों के लिए कारण बताओ नोटिस दिया गया है।

बता दें कि सुपर एक्सप्रेसवे कहलाने वाले अलवर में दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियाँ 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं। हालाँकि, निर्धारित सीमा से भी अधिक रफ्तार से गाड़ियाँ दौड़ती हैं। लेकिन, यहाँ सड़कों की बैलेंसिंग सही नहीं है। कहीं उबड़-खाबड़ है तो कहीं गड्ढे बन गए हैं। कहीं गिट्टी फैली है तो कहीं कुछ। इसके कारण इस क्षेत्र में सड़क हादसे भी खूब होते हैं।

इतना ही नहीं, इन एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्से की अस्थायी मरम्मत कराया गया है। इसके साथ ही आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञ प्रोफेसर केएस रेड्डी और आईआईटी गाँधीनगर के प्रोफेसर जीवी राव को एक्सप्रेसवे को हुई इस क्षति का कारण पता करने के लिए कहा गया है। वहीं, दिल्ली का श्रीराम इंस्टीट्यूट इसके नमूने एकत्र करके उनकी जाँच करेगा।