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UP से ले जाकर नेपाल में भारतीयों को बना रहे थे ईसाई, हिंदू संगठनों ने पोत दी कालिख: पादरी की पिटाई, बसों में भरकर ले जाए जा रहे थे चर्च

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज से लगने वाले नेपाल के सीमाई इलाके में ईसाई धर्मांतरण को लेकर जम कर बवाल हुआ। भारत से ईसाई बनाने के लिए नेपाल ले जाए गए लोगों का विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल नेपाल के कार्यकर्ताओं ने जम कर विरोध किया। इस दौरान नेपाल के स्थानीय लोगों ने धर्मांतरण करवाने वालों के मुंह पर कालिख भी पोत दी और भारत वापस भेज दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (14 सितम्बर, 2024) को महाराजगंज के ठूठीबारी कस्बे से लगभग 100 लोगों का एक जत्था नेपाल की तरफ निकला। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे शामिल थे। नेपाल जाने वाले लोगों में इस इलाके के दलित-पिछड़े वर्ग के लोग भी शामिल थे।

बताया गया कि इन्हें अमोस नाम के एक पादरी अमोस ने नेपाल के खैरहनी स्थित चर्च में बुलाया था। यहाँ उनका धर्मांतरण किया जाना था। इनके लिए नेपाल नंबर की दो विशेष बसें भी नेपाल में खड़ी की गईं थी। यह बसें नेपाल के महेशपुर बस स्टैंड पर खड़ी थीं। यहीं सभी लोग इकट्ठा हुए थे।

यह सभी बसों में बैठते इससे पहले इनके धर्मांतरण की सूचना नेपाल के विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ ही स्थानीय लोगों को लग गई। वह तुरंत ही इस बस स्टैंड के पास पहुँच गए और धर्मांतरण के विरोध में प्रदर्शन करने लगे।

बताया गया है कि यहाँ मौजूद स्थानीय लोगों ने भारत से धर्मांतरण के लिए जाने वालों के साथ बदसलूकी की और उनके मुँह पर कालिख पोत दी। स्थानीय लोगों ने यहाँ के पादरी अमोस की भी पिटाई की। इसके बाद भारत से गए सभी लोगों को स्थानीय लोगों ने यहाँ से भगा दिया और भारत की सीमा पर छोड़ गए।

नेपाल के लोगों ने इस दौरान पुलिस भी बुला ली। पुलिस ने इन सभी लोगों के नाम-पते नोट किए और चेतावनी भी दी। नेपाल पुलिस के अलावा यहाँ स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी पहुँच गए। भारतीयों को वापस भेजने के बाद यह मामला शांत हुआ।

महाराजगंज पुलिस ने इस मामले को ट्विटर पर स्पष्टीकरण दिया है। महाराजगंज पुलिस ने बताया है कि घटना उसके अधिकार क्षेत्र में ना होकर नेपाल में हुई है और इसके संबंध में नेपाल पुलिस से बातचीत चल रही है। पुलिस ने अपील की है कि इस घटना को महाराजगंज का बता कर प्रसारित ना किया जाए।

इस इलाके में धर्मांतरण का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले 31 अगस्त, 2024 को भी ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया था। तब नेपाल के सीमावर्ती इलाके में केरल के दो पादरी पकड़े गए थे। यह यहीं के एक स्थानीय चर्च में धर्मांतरण करवाने की फिराक में थे। इनको पकड़ कर यूपी पुलिस को सौंप दिया गया था।

प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी संग इंजीनियर राशिद की आवामी इत्तेहाद पार्टी ने किया गठबंधन: J&K चुनाव से पहले बयान में कहा- कुलगाम और पुलवामा में करेंगे JEI का समर्थन​

आगामी जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों से पहले आवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) और भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) ने गठबंधन किया है। रविवार (15 सितंबर 2024) को दोनों पार्टियों के बीच संयुक्त बैठक के बाद निर्णय लिया गया। इस दौरान लोकसभा सांसद इंजीनियर राशिद, एआईपी के मुख्य प्रवक्ता इनाम उन नबी समेत पार्टी के अन्य सदस्य शामिल हुए। वहीं जमात-ए-इस्लामी की ओर से गुलाम कादिर वानी और पार्टी के प्रमुख नेता भी शामिल हुए।

बैठक के बाद जारी बयान में इस गठबंधन की जानकारी दी गई। बयान में बताया गया कि दोनों दलों ने क्षेत्र के लोगों के हित में मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के लिए सीट बँटवारे पर चर्चा की।

बयान में कहा गया है कि एआईपी कुलगाम और पुलवामा जिलों में जमात-ए-इस्लामी समर्थित उम्मीदवारों का समर्थन करेगी, जबकि जेईआई पूरे कश्मीर में एआईपी उम्मीदवारों का समर्थन करेगी। साथ ही कहा कि ये गठबंधन जम्मू-कश्मीर में लोगों के लिए शांति, न्याय और राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एकजुट मोर्चा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बता दें कि राज्य में इससे पहले कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन हुआ था। जिसके बाद फैसला लिया गया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस 90 में से 51 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कॉन्ग्रेस 32 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ये चुनाव प्रदेश में अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद पहले विधानसभा चुाव हैं। इसमें 7 सीटें एससी और 9 सीटें एसटी के लिए होंगी। यहाँ तीन चरण में चुनाव होंगे 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर। वहीं मतगणना 8 अक्तूबर को होगी।

नोट: जमात-ए-इस्लामी संगठन पर भारत सरकार ने बैन लगाया हुआ था। इस संगठन को सबसे पहले 2019 में गैर कानूनी घोषित किया गया था। बाद में ये प्रतिबंध 2024 में फिर बढ़ा दिया गया।

‘आतंकवादी हैं राहुल गाँधी, कर रहे बाँटने की कोशिश’: सिख नेता के बयान पर भड़की कॉन्ग्रेस, बताया ‘भौंकने वाला आस्तीन का साँप’

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने हालिया बयान में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को आतंकवादी बताया है। उन्होंने राहुल गाँधी पर आरोप लगाया कि राहुल सिखों को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं। अपने बयान में उन्होंने राहुल गाँधी को पकड़ने के लिए इनाम रखने की भी बात कही। उनके इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस भड़की हुई है। पार्टी प्रवक्ता ने उन्हें आस्तीन का साँप कहा है।

बिहार के मीडिया से बात करते हुए रवनीत सिंह बिट्टू राहुल गाँधी के लिए कहा– “पहले उन्होंने मुसलमानों का इस्तेमाल करने की कोशिश की, जब ऐसा नहीं हुआ तो अब वे सिखों को विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं। सिख किसी पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है मगर चिंगारी लगाने की कोशिश हो रही है। राहुल गाँधी देश के नंबर वन टेररिस्ट हैं।”

रवनीत सिंह ने कहा, “जो देश के सबसे बड़े वांटेड हैं, अलगाववादी, वो जो पहले बयान देते थे, आज वही बयान राहुल गाँधी ने दिया है। जो गोला, बंदूक बनाने में माहिर हैं उन्होंने राहुल गाँधी की बात को सराहा है। उनकी बात ही राहुल गाँधी ने कही है। आप देख लीजिए जो देश के दुश्मन हैं, जो हर टाइम मारने की कोशिश करते हैं, जहाजों, ट्रेनों, रोड को उड़ाने की कोशिश करते हैं, जब वो लोग राहुल गाँधी के समर्थन में आ गए तो आप अंदाजा लगा लीजिए। राहुल गाँधी देश का नंबर वन आतंकवादी है। अगर किसी पर इनाम रखना चाहिए तो वो राहुल गाँधी है।”

केंद्रीय मंत्री ने आगे राहुल गाँधी के भारतीय होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “देखिए मेरी राय में राहुल गाँधी भारतीय नहीं हैं। उन्होंने अपना अधिकांश समय दुनिया से बाहर बिताया है। उनके दोस्त और परिवार वहीं हैं, इसलिए मुझे लगता है कि कहीं न कहीं वह अपने देश से इतना प्यार नहीं करते हैं क्योंकि वह चले जाते हैं. वे विदेश में रहते हैं और भारत के बारे में ऐसी नकारात्मक बातें कहते हैं।”

उनके इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस भड़की हुई है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “जिसने राहुल गाँधी के आगे पीछे करके अपना पूरा राजनीतिक करियर बनाया। वो सत्ता के लालच में विरोधियों की गोदी में बैठ कर सस्ते बयान दे रहा है। रवनीत बिट्टू तुम और भौंको क्योंकि दुनिया को तुम्हारी ग़लीच असलियत पता चलनी चाहिए। शास्त्रों में तुम जैसों को ही आस्तीन का साँप कहा गया है।”

गौरतलब है कि रवनीत सिंह बिट्टू ने यह बयान राहुल गाँधी के उस बयान के विरुद्ध दिया है जो उन्होंने अमेरिका के वर्जीनिया में दिया था। राहुल गाँधी ने वहाँ कहा था, “भारत में लड़ाई इस बात को लेकर है कि क्या एक सिख को गुरुद्वारे में पगड़ी और कड़ा पहनने की अनुमति दी जाएगी।” उनके इसी बयान पर बिट्टू बोले कि आखिर ऐसा कब हुआ कि किसी सिख को पगड़ी या कड़ा पहनने से रोका गया हो।

सबूतों से की छेड़छाड़, मामले को दबाया: कोलकाता RG कर अस्पताल में डॉक्टर की रेप-हत्या केस में पूर्व प्रिंसिपल और SHO 3 दिन रहेंगे CBI हिरासत में, कोर्ट ने दिया फैसला

कोलकाता में डॉक्टर की रेप/हत्या के मामले में एक स्थानीय अदालत ने सुनवाई करते हुए 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और एक पुलिस अधिकारी को 17 सितंबर तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया।

संदीप घोष को जहाँ सीबीआई ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया था तो वहीं ताला पुलिस स्टेशन के प्रभारी अभिजीत मंडल को केंद्रीय एजेंसी ने शनिवार को एफआईआर दर्ज करने में कथित देरी और मामले में सबूत गायब करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीबीआई अधिकारी ने पीटीआई न्यूज एजेंसी को बताया कि उन्हें दोनों आरोपितों की हिरासत तीन दिन के लिए मिली है। अब दोनों से एक साथ पूछताछ की जाएगी।

बताया जा रहा है कि सीबीआई ने घोष के खिलाफ साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोप भी लगाए हैं। वहीं अभिजीत मंडल पर सबूतों से छेड़छाड़, एफआईआर दर्ज करने में देरी का आरोप लगाकर बात जोड़ी गई है।

सीबीआई ने अदालत में बताया कि मंडल को 9 अगस्त की सुबह 10 बजे के आसपास डॉक्टर की मौत के बारे में पता चल गया था लेकिन एफआईआर 11 बजे के करीब दर्ज हुई। उनसे जब सवाल किए गए तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया

वहीं संदीप घोष की बात करें तो । उन्हें 2 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में सीबीआई उन्हें रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी। इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच कर रही है।

इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य डायरी (जीडी) प्रविष्टि और एफआईआर के पंजीकरण के समय के बीच विसंगति की ओर इशारा किया था।

ब्रिटेन में 16 साल में पाकिस्तानियों ने किया सैकड़ों लड़कियों का रेप, 14 साल की लड़की को शिकार बनाने वाले वाजिद को 20 साल बाद सज़ा: 1400+ पीड़िताएँ आईं सामने

ब्रिटेन के रोथरहैम शहर में दो दशक पहले 14 वर्षीय किशोरी के साथ किए गए जघन्य अपराध के मामले में 42 वर्षीय वलीद अली को सजा सुनाई है। यह मामला ब्रिटेन के सबसे बड़े बाल यौन शोषण की जाँच ‘ऑपरेशन स्टोववुड’ के तहत सामने आया, जो 1997 से 2013 के बीच रोथरहैम में हुए ऐतिहासिक यौन शोषण मामलों की पड़ताल कर रहा है, जिसमें पाकिस्तानी मूल के यौन अपराधियों ने सैकड़ों लड़कियों का रेप किया और उन्हें धमकाकर उनका मुँह बंद रखा।

यूके की नेशनल क्राइम एजेंसी के मुताबिक, यह दर्दनाक घटना 2003 और 2004 के बीच की है, जब वलीद अली, जो उस समय अपने शुरुआती 20 के दशक में था, ने 14 साल की लड़की को रोथरहैम के टाउन सेंटर में एक पानी के फव्वारे के पास अकेले बैठे देखा। अली ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर उस लड़की से संपर्क किया और उसे एक नजदीकी गली में चलने के लिए कहा। जब लड़की ने मना किया, तो अली ने उसका हाथ पकड़कर उसे जबरन उठाने की कोशिश की।

अली और उसके साथियों की मौजूदगी से डरकर लड़की को गली में जाना पड़ा, जहाँ अली ने उससे बलात्कार किया। यह गली लोगों की नजर से दूर थी, जिसकी वजह से उसे कोई देख नहीं पाया। वलीद ऐसे मामलों का पुराना अपराधी रहा है। उसने उसी दौरान एक और लड़की का रेप किया था, जिसमें वो जेल की सजा काट चुका है।

इस भयावह घटना के बाद, पीड़िता ने लगभग 20 साल तक अपनी पीड़ा को छिपाए रखा और चुप रही। हालाँकि, 2021 में उसने ‘ऑपरेशन स्टोववुड‘ टीम के सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई। पीड़िता के साहस और उसके बयान के आधार पर वलीद अली को गिरफ्तार किया गया और उस पर मुकदमा चलाया गया।

शेफ़ील्ड क्राउन कोर्ट ने शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को वलीद अली को 14 साल की लड़की के साथ बलात्कार के मामले में दोषी करार दिया। वलीद को 5 साल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने उसे 13 साल की सजा सुनाई। इसके पहले, अली को 2003 में 13 साल की एक अन्य लड़की के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है। उस मामले में भी अपराध उसी गली में हुआ था।

साउथ यॉर्कशायर पुलिस और नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) की ‘ऑपरेशन स्टोववुड’ जांच टीम ने इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस मामले के वरिष्ठ जाँच अधिकारी, स्टुअर्ट कॉब ने कहा, “पीड़िता ने 21 साल तक अपनी पीड़ा को दबाए रखा, लेकिन उनके साहस और हमारे जाँच कार्य ने सुनिश्चित किया कि अपराधी को सजा मिले। हम सभी पीड़ितों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अपनी आपबीती साझा करें और पुलिस से संपर्क करें।”

ऑपरेशन स्टोववुड: बाल यौन शोषण की सबसे बड़ी जाँच

‘ऑपरेशन स्टोववुड’ ब्रिटेन में बाल यौन शोषण के मामलों की सबसे बड़ी जाँच है, जो रोथरहैम में 1997 से 2013 के बीच हुए सैकड़ों यौन शोषण मामलों की पड़ताल कर रहा है। इस जाँच में अब तक कई आरोपित दोषी पाए गए हैं, जिनमें से दर्जनों को सजा हो चुकी है।

रिपोर्टों के अनुसार, 1997 से 2013 के बीच रोथरहैम में 1,400 से अधिक लड़कियों का यौन शोषण हुआ था। इस अपराध के पीछे मुख्य रूप से पाकिस्तान मूल के गिरोहों का हाथ बताया गया है। अब तक की जाँच में 1,100 से अधिक पीड़ितों की पहचान की जा चुकी है और जाँच प्रक्रिया 2027 तक जारी रहने की उम्मीद है। पुलिस और न्यायिक एजेंसियाँ इस काम में लगी हैं ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और अपराधियों को सजा दी जा सके।

हिंदुओं की आवाज उठाने वाली नाजिया इलाही खान पर ‘झूठा’ ईशनिंदा का केस, गिरफ्तारी के बाद बात लिंचिंग तक पहुँची: जानें क्या है मामला

सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाने वाली नाजिया इलाही खान को 10 सितंबर को ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनपर आरोप था कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया। उनके विरुद्ध शिकायत वकील नूर महविश ने दर्ज कराई थी।

शिकायत में कहा था कि नाजिया देश में सांप्रदायिक हिंसा और मजहबी तनाव पैदा करना चाहती हैं। महविश ने शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 299, 353 और 362 के तहत केस को दर्ज कराया था। इस मामले में अलीपुर कोर्ट में पेश होने के बाद नाजिया को भले जमानत मिल गई लेकिन कट्टरपंथियों की नफरत उनके लिए कम नहीं हुई।

नाजिया पर ये केस 3 अगस्त 2024 को दिए एक इंटरव्यू के बाद दर्ज हुआ था। अपने इंटरव्यू में उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि आखिर हिंदू नाम से मुस्लिम दुकान क्यों खोल रहे हैं। उन्होंने पूछा था कि आखिर वो सलीम जो हिंदुओं को काफिर समझता है, उसने महादेव के नाम पर ढाबा क्यों खोला है।

जब पत्रकार ने उनसे कहा कि ये तो लोगों की इच्छा है कि वो क्या नाम रखेंगें, क्या नहीं… इस पर नाजिया ने कहा था कि फिर तो हिंदू भी अपनी मनमर्जी का नाम लिख सकते हैं।

नाजिया ने इस दौरान कुछ उदाहरण ऐसे दिए जिन्हें लेकर विवाद उपजा। उन्होंने कहा था कि अगर हिंदू कोई मुस्लिम नाम के साथ दुकान का नाम रख लेंगे तो हल्ला मच जाएगा और गुस्ताख-ए-रसूल की एक सजा सिर तन से जुदा के नारे लगने लगेंगे।

वीडियो में हालाँकि सुना जा सकता है कि नाजिया सिर्फ मुस्लिम नाम लगाकर उदाहरण दे रही हैं उन्होंने कहीं पैंगबर मोहम्मद के बारे में कुछ नहीं कहा है। उन्होंने मुस्लिम नाम के साथ दुकान का नाम जोड़ सिर्फ पूछा कि क्या अच्छा लगेगा अगर हिंदू ऐसे नाम से दुकान खोल लें। मगर, इस्लामी कट्टरपंथी इसी बात से नाराज हो गए और मामला थाने तक पहुँच गया।

नाजिया ने अपनी वीडियो में थूक जिहाद का खतरा बताते हुए कहा था कि नाम बदलकर कारोबार करने की क्या जरूरत है जिसके मन में चोर होता है वो ही ऐसा करता है। इस दौरान उन्होंने योगी आदित्यनाथ के फैसले का समर्थन किया था जहाँ दुकानों पर मालिक का असली नाम लिखने को कहा गया था।

इस इंटरव्यू के बाद इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें सोशल मीडिया पर गाली देने लगे। क्रिकेटर शिवम दुबे की बीवी अंजुम खान तक ने उनके खिलाफ जहर उगला। अपनी स्टोरी में अंजुम ने कहा- “अगर नबी के शान में गुस्ताखी होने पर आपको गुस्सा नहीं आता तो अपना ईमान मर चुका है और अगर आपका ईमान जिंदा है तो नाजिया की गिरफ्तारी की माँग करिए।”

इसी तरह अन्य मुस्लिम समूहों ने भी नाजिया के खिलाफ जहर उगला। नतीजा ये हुआ कि नाजिया को धमकियाँ आने लगीं। एजाज असलम नाम के मुस्लिम यूट्यूबर ने भी धमकी दी।

4 सितंबर को सोशल मीडिया पर नाजिया ने बताया जहाँ पूरा देश आरजी कर अस्पताल की डॉक्टर के लिए इंसाफ माँग रहा है, वहीं बंगाल के मुस्लिम उनके खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में कोलकाता पुलिस और टीएमसी नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया था।

उन्होंने ये भी बताया कि जब उन्हें अलीपुर कोर्ट ले जाया जा रहा था तब लोगों ने उनकी लिंचिंग की कोशिश की। उन्होंने कहा, “पहले मुझे पोर्ट एरिया गार्डन रीच पुलिस स्टेशन से झूठे ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किया गया, फिर कोलकाता पुलिस के गार्डन रीच पुलिस स्टेशन के अधिकारी की मिलीभगत से अलीपुर कोर्ट में लाखों मुसलमानों को इकट्ठा करके मेरी मॉब लिंचिंग की साजिश रची गई। मेरा गला काटने की साजिश में कई टीएमसी विधायक, मुस्लिम महिला टीएमसी नेता का सीधा हाथ है!”

जानिए कौन हैं पंडित टीका लाल टपलू, जिनके नाम पर कश्मीरी पंडितों के लिए पुनर्वास योजना शुरू करेगी BJP: यासीन मलिक के JKLF के आतंकियों ने कर दी थी हत्या

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (14 सितंबर) को जम्मू में एक जनसभा को संबोधित करते हुए टीका लाल टपलू को याद किया। टपलू कश्मीर के निवासी थे और आतंकियों ने उनकी क्रूरता से हत्या कर दी थी। जम्मू-कश्मीर के लिए भाजपा द्वारा जारी संकल्प पत्र में टपलू के नाम से एक योजना शुरू करने की बात कही गई है। यह योजना कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास के लिए होगा।

भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में कहा है कि वह विधानसभा में जीतकर सत्ता में आती है तो वह टीका लाल टपलू विस्थापित समाज पुनर्वास योजना (TLTVSPY) शुरू करेगी और कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास करेगी। इस योजना के माध्यम से कश्मीरी पंडितों, पश्चिमी कश्मीर के शरणार्थियों, वाल्मीकि, गोरखाओं सहित अन्य विस्थापित लोगों के पुनर्वास में तेजी लाने की बात कही गई है।

जम्मू के डोडा में टपलू को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमने पंडित टीका लाल टपलू के सम्मान में एक योजना शुरू करने का फैसला किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कश्मीर पंडितों को उनके अधिकार तेजी से मिलें।” बता दें कि टपलू की साल 1989 में आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

कौन थे टपलू?

टीका लाल टपलू घाटी में रहने वाले वकील और भाजपा के शुरुआती नेताओं में से एक थे। उनका जन्म श्रीनगर में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए पंजाब और उत्तर प्रदेश चले गए। हालाँकि, शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे अपने लोगों की सेवा करने के लिए वापस जम्मू-कश्मीर लौट गए। लोग उन्हें प्यार से लालाजी या बड़े भाई कहते थे।

आतंकी उन्हें मारने के लिए लंबे समय से साजिशें रच रहे थे जिसका टपलू को इस बात का अहसास था। इसीलिए कट्टरपंथियों से बचाने के लिए उन्होंने अपने परिवार को दिल्ली में बसा दिया था, लेकिन वो खुद कश्मीर लौट गए थे। आखिरकार, 14 सितंबर 1989 को यासीन मलिक के आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकियों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया।

घटना के दिन उनकेे घर के बाहर एक बच्ची जोर-जोर से रो रही थी। टपलू बाहर निकलकर उसके पास गए और उसकी माँ से पूछा कि वह क्यों रो रही है। उसकी माँ ने बताया कि बच्ची के स्कूल में कोई फंक्शन है और उसके पास पैसा नहीं है, इसलिए वह रो रही है। इसके बाद टपलू ने जेब से 5 रुपए निकालकर बच्ची को पकड़ा दिया। ठीक उसी समय सामने से आए आतंकियों ने उन्हें गोलियों से भून दिया।

‘हिंदू लड़के से करती हूँ प्यार, मेरे घरवाले मुझे मार देंगे’ : अलीगढ़ से मुस्लिम युवती की वीडियो वायरल, माँगी CM योगी से मदद, भाई पर लगाया गंदे ढंग से छूने का आरोप

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से एक युवती की वीडियो वायरल हो रही है। वीडियो में युवती उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगा रही है। उसका कहना है कि उसे एक हिंदू लड़के से प्यार हो गया है लेकिन उसके घरवाले मान नहीं रहे। उसे घर में बंद कर दिया गया है और उसे शक है कि उसकी हत्या भी की जा सकती है।

मामला खैर थाना क्षेत्र का है। वायरल वीडियो में लड़की ने बताया कि उसके प्रेमी का नाम शौर्य वर्मा है। वह एक हिंदू है। लड़की कहती है कि वो भी हिंदू धर्म में विश्वास करती है और शौर्य से शादी करना चाहती है। लेकिन उसके घरवाले इसके खिलाफ है। उन्होंने दोनों के रिश्ते की जानकारी होने पर लड़की को घर में कैद कर लिया है। लड़की को डर है कि उसे मारा जा सकता है।

उसने कहा कि वो अपने परिवार से रिश्ता तोड़ दिया है और कभी अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी। वायरल वीडियो में युवती ने अपने भाई पर भी आरोप लगाया कि उसका भाई उसे गंदे ढंग से छुआ और उसकी छाती पर हाथ भी मारा। यही सब घटनाएँ देख उसने अपने घर में सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा है।

दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, वीडियो वायरल होने के बाद खैर सीओ वरुण सिंह ने बताया कि लड़की और लड़का दोनों बालिग हैं और एक दूसरे से शादी करना चाहते हैं। पुलिस उनकी पूरी मदद करेगी।

सीओ ने जानकारी दी कि पीड़िता की अपने परिजनों से बातचीत भी हो गई है। एक नई वीडियो बनाकर उसने कहा कि उसे परिवार से कोई दिक्कत नहीं है, फिर भी पुलिस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और उन्हें सुरक्षा दी जा रही है।

मुस्लिम भीड़ ने हिंदू युवकों पर किया हमला, पुलिस की मौजूदगी में पत्थर फेंके: गुजरात में इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर हिंसा

गुजरात के खेडा में फिर से शांति भंग करने की कोशिश की गई है। इस बार महुधा में एक धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली इंस्टाग्राम पोस्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पर मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं पर हमला कर दिया। इस घटना में लगभग 2,500 से 3,000 लोगों की भीड़ ने “मार डालने” की धमकी देते हुए हिंदू युवकों पर पत्थर बरसाए। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

घटना तब शुरू हुई जब मुस्लिम युवकों ने इंस्टाग्राम पर एक भड़काऊ पोस्ट डाली। इस पोस्ट से हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची, जिसके बाद तीन हिंदू युवक पुलिस स्टेशन शिकायत दर्ज कराने पहुँचे। लेकिन जब वे पुलिस स्टेशन पहुँचे, तो वहाँ मुस्लिम भीड़ ने उन्हें घेर लिया और धमकाया। पुलिस की मौजूदगी में भी हिंदू युवकों पर पत्थरबाजी की गई।

महुधा पुलिस स्टेशन, खेड़ा में एक एफआईआर दर्ज की गई है, जिसकी एक प्रति ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है। हिंदू युवक ने शिकायत में कहा है कि शनिवार (14 सितंबर 2024) को जब वह अपने शो रूम में था, तो उसका दोस्त आया और उसे अपने मोबाइल फोन पर एक व्हाट्सएप ग्रुप में एक स्क्रीनशॉट दिखाया, जिसमें हिंदुओं की भावनाओं को चोट पहुँचाने और उकसाने वाली बात लिखी हुई थी। इसलिए उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर इस पोस्ट के खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। उसने अपने एक अन्य दोस्त को इसकी जानकारी दी और तीनों महुधा थाने पहुँचे।

इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या था?

यह पोस्ट इंस्टाग्राम यूजर आईडी ताहिर और कोनेन काज़ी से की गई थी। जिसमें लिखा था कि- ‘स्पेशल कठलाल वालों के लिए। जो कुफ्र के डर से सरकार के मिलाद का जुलूस ना निकल सके वो कोम कुत्ते सुवर उर्फ ​​के खिलाफ बोलते हैं उनके खिलाफ क्या बोलेंगे कायर लोग। ‘सरकार के मिलाद का जुलूस देखना हो तो आना महुधा में, ऐसा जुलूस निकलता है कि आके दुश्मन अपार से नीचे तक जल खड़े हैं।’

आगे लिखा था, ‘अगर किसी विधायक या कट्टरपंथी संगठन के डर से ये फैसला लिया है तो हम महुधा वालों को कहते हैं कि आधार कार्ड और जमीन लेकर आएंगे और इजाजत दिलाएंगे और इत्मिनान से जुलूस फिराकर दिखा देंगे।’

इससे पहले कि तीनों हिंदू युवक शिकायत दर्ज कराने थाने पहुँचते, पुलिस ने पोस्टर पकड़ लिए और उन्हें बचाने के लिए मुस्लिम नेता भी वहाँ पहुँच गए। हालाँकि, जब हिंदू युवक ने शिकायत दर्ज करने की तैयारी दिखाई, तो मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग उनके पास आए और सुलह की बात की और कहा कि उन्हें शिकायत दर्ज नहीं करनी चाहिए और उस व्यक्ति को माफी पत्र लिखा जाएगा। लेकिन हिंदू युवक ने समझौते की बात न करते हुए कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

जब तक हिंदू युवक शिकायत दर्ज करा कर लौटा, तब तक थाने के बाहर सैकड़ों मुसलमानों की भीड़ जमा हो चुकी थी और नारेबाजी करने लगी। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए हिंदू युवकों को वहां से भेज दिया और सुरक्षा के लिए एक पुलिस वाहन भी भेजा। साथ ही पीआई और पीएसआई हिंदू युवकों को अपनी गाड़ी में लेकर रवाना हो गए।

पीआई की मौजूदगी में पथराव हुआ

जब हिंदू युवा, पुलिस अधिकारियों के साथ, महुधा शहर छोड़कर नडियाद-कथलाल रोड पर पहुंचे, तो भीड़ ने उन्हें फिर से घेर लिया और फिर से नारे लगाने शुरू कर दिए। शिकायत के मुताबिक ये वही लोग थे जो पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हुए थे। वे चिल्ला रहे थे, ‘यह हमारे समुदाय के लोगों के खिलाफ शिकायत है…जिओ मत जाने दो…’ और भीड़ के लोगों के पास तलवार-लाठी, पाइप आदि हथियार भी थे।

इसी बीच जब हिंदू युवक गाड़ी रोककर बाहर निकले तो हुसैन अब्बास नाम का एक इस्लामिक व्यक्ति तलवार लेकर दौड़ा और बोला “तुमने हमारे खिलाफ शिकायत क्यों दर्ज कराई? ‘आज मैं तुम्हें मार डालूँगा” कहते हुए उसने मुझ पर तलवार से हमला किया, लेकिन हिंदू युवक झुक गया और घायल नहीं हुआ। इस दौरान भीड़ में शामिल मुस्लिम लोग यह भी चिल्ला रहे थे कि “आज इसे मत जाने दो…इसे मार डालो”। लेकिन जैसे ही पुलिस अधिकारी और पीछे वाली गाड़ी पहुंची, भीड़ तितर-बितर हो गई और भाग गई। फिर पुलिस ने हिंदू युवकों को अपनी गाड़ी में बिठाकर भेज दिया।

ढाई से तीन हजार मुसलमानों की भीड़

एफआईआर में सौ-सौ की भीड़ का जिक्र है, लेकिन शिकायतकर्ता हिंदू युवक ने ऑपइंडिया को बताया कि हमले के वक्त करीब ढाई से तीन हजार मुसलमानों की भीड़ जमा थी और लगातार सांप्रदायिक नारे लगा रही थी। उन्होंने कहा कि थाने के बाहर भी भीड़ द्वारा उन पर पथराव किया गया। साथ ही, जब हमला हुआ तब वापसी में पुलिस अधिकारी भी उनके साथ थे, फिर भी चरमपंथियों ने हमला करने में संकोच नहीं किया।

इस मामले में एक हिंदू युवक की शिकायत के आधार पर नामजोग में 37 लोगों के खिलाफ और बाकी भीड़ के खिलाफ धारा 189(2), 189(4), 191(2), 191(3), 190, 109, 125, 324(5), 324 भारतीय न्याय संहिता (6), 352, 351(3) और 61(2) और गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया गया है और जाँच की जा रही है। जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है उनमें मोईन, शहजाद, तौकीर, नासिर, समीर, वाजिद, हुसैन, नाजिर, फारूक, वाहिद, जावेद, मोइद हुसैन आदि शामिल हैं। कुल 37 मुस्लिम व्यक्तियों पर मामला दर्ज किया गया है जबकि गिरोह के बाकी लोगों पर मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस जाँच जारी, आरोपित को राउंडअप किया जा रहा है- पीआई

महुधा टाउन पीआई केके झाला ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को घेरने की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है। जिनके खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आगे की जाँच चल रही है।

मूल खबर गुजराती भाषा में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

तेजस MK1: भारतीय वायुसेना का स्वदेशी फाइटर जेट, पाकिस्तान और चीन के लड़ाकू विमानों से होगा मुकाबला

अगले महीने के आखिर तक भारत की वायुसेना को तेजस MK1 सौंप दिए जाएँगे। भारतीय वायुसेना ने कुल 83 तेजस MK2 का ऑर्डर दिया है। इसी के साथ मिग-21 पूरी तरह से सेना से बाहर हो जाएँगे। भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम है, क्योंकि यह भारत का स्वदेशी निर्मित हल्का लड़ाकू विमान है।

अक्टूबर 2024 के अंत तक तेजस MK2 के भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की घोषणा के साथ, भारत की रक्षा क्षमताओं में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। तेजस MK1 कई विशेषताओं और क्षमताओं से लैस है, जो इसे पाकिस्तान और चीन के फाइटर जेट्स के मुकाबले भारतीय वायुसेना के लिए एक मजबूत बढ़त प्रदान करता है। इस लेख में हम तेजस MK1 की खासियतों, उसकी रफ्तार, वजन, उसके बनने में लगे समय और उसकी मुकाबला क्षमताओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

तेजस MK1 की खासियतें

हल्का वजन: तेजस MK1 का वजन लगभग 6.5 टन है, जो इसे दुनिया के सबसे हल्के लड़ाकू विमानों में से एक बनाता है। इसकी हल्की संरचना इसे हवा में तेज़ और अधिक गतिशील बनाती है। इसका हल्का वजन इसे अधिक फुर्तीला और आसानी से नियंत्रित करने योग्य बनाता है, जिससे पायलट को उच्च गति पर भी बेहतर नियंत्रण मिलता है।

स्पीड (गति): तेजस MK1 की अधिकतम गति 1.8 मैक (2222 किलोमीटर प्रति घंटा) तक हो सकती है। यह तेज गति इसे हवा में अन्य लड़ाकू विमानों के मुकाबले एक बढ़त दिलाती है, खासकर दुश्मन के विमानों के खिलाफ।

सुपर सॉनिक क्षमता: तेजस MK1 को सुपरसोनिक गति से उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह तेज गति दुश्मन के विमानों से जल्दी बचने और हमला करने की क्षमता प्रदान करती है। इसकी सुपर सॉनिक क्षमता इसे दुश्मन के रडार से बचने में भी मदद करती है, जिससे यह तेजी से हमला कर सकता है और वापस सुरक्षित लौट सकता है।

स्वदेशी निर्मित: तेजस MK1 को पूरी तरह से भारत में विकसित और निर्मित किया गया है। यह भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उद्देश्यों का एक प्रमुख हिस्सा है। इससे भारत की विदेशी विमानों पर निर्भरता कम होगी और देश के तकनीकी विकास में भी सुधार होगा।

मल्टीरोल लड़ाकू विमान: तेजस MK1 एक मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसका मतलब है कि यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों प्रकार के अभियानों में सक्षम है। यह इसे एक बेहद बहुमुखी लड़ाकू विमान बनाता है, जो किसी भी परिस्थिति में प्रभावी साबित हो सकता है।

हथियार ले जाने की क्षमता: तेजस MK1 की हथियार ले जाने की क्षमता लगभग 3.5 टन है। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, हवा से जमीन पर हमला करने वाली मिसाइलें, बम और रॉकेट शामिल हैं। यह इसे एक शक्तिशाली हथियार बनाता है, जो किसी भी युद्ध में दुश्मन को कड़ी टक्कर दे सकता है।

अत्याधुनिक एवियोनिक्स: तेजस MK1 में अत्याधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम लगाया गया है, जिसमें रडार, ईसीएम (Electronic Counter Measures), फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम और अन्य अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। यह इसे अधिक सक्षम और सटीक बनाता है, जिससे यह किसी भी स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया कर सकता है।

लड़ाई की दूरी (रेंज): मार्क-1ए पिछले वैरिएंट से थोड़ा हल्का है, लेकिन यह आकार में उतना ही बड़ा है। यानी 43.4 फीट की लंबाई, 14.5 फीट की ऊंचाई। अधिकतम 2222 km/hr की स्पीड से उड़ान भर सकता है। कॉम्बैट रेंज 739 किलोमीटर है। वैसे इसका फेरी रेंज 3000 किलोमीटर है।

जटिल एयरोडायनामिक्स डिज़ाइन: इसका डिज़ाइन इस प्रकार किया गया है कि यह उच्च गति और गतिशीलता के बावजूद स्थिर रहता है। यह डिज़ाइन इसे दुश्मन के हमलों से बचने और हवा में लंबी दूरी तक उड़ान भरने में मदद करता है।

हर मौसम में उड़ान: तेजस MK1 किसी भी मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है, चाहे दिन हो या रात। यह इसे हर परिस्थिति में इस्तेमाल किए जाने वाला एक विश्वसनीय लड़ाकू विमान बनाता है।

पाकिस्तान और चीन के फाइटर जेट्स से तुलना

चीन के J-10 और JF-17 से मुकाबला: तेजस MK1 की तुलना में चीन का J-10 और पाकिस्तान के साथ मिलकर बनाए गए JF-17 जैसे फाइटर जेट्स अधिक भारी हैं। JF-17 की गति लगभग 1.6 मैक है, जो तेजस के बराबर है, लेकिन तेजस MK1 की एवियोनिक्स और हथियार प्रणाली अधिक उन्नत मानी जाती है। तेजस का हल्का वजन इसे अधिक फुर्तीला बनाता है, जबकि JF-17 और J-10 थोड़े भारी होते हैं।

हथियार प्रणाली: तेजस MK1 की हथियार ले जाने की क्षमता और उसकी मारक शक्ति चीन और पाकिस्तान के विमानों के मुकाबले अधिक है। इसका रडार और ईसीएम सिस्टम इसे दुश्मन के रडार से बचने में सक्षम बनाता है, जो J-10 और JF-17 में उतनी क्षमता नहीं होती।

तकनीकी उन्नति: तेजस MK1 की तकनीकी उन्नति और स्वदेशी निर्मित होने के कारण इसकी रखरखाव की लागत भी कम होती है। इसके अलावा, इसकी स्पेयर पार्ट्स और मरम्मत की सुविधाएं भारत में ही उपलब्ध हैं, जबकि पाकिस्तान को JF-17 के लिए चीन पर निर्भर रहना पड़ता है।

मल्टीरोल क्षमता: तेजस MK1 की मल्टीरोल क्षमता इसे हवा से जमीन और हवा से हवा दोनों अभियानों में प्रभावी बनाती है। J-10 और JF-17 भी मल्टीरोल विमान हैं, लेकिन तेजस की उन्नत तकनीकी इसे युद्ध के मैदान में अधिक लाभकारी बनाती है।

तेजस के बनने में इतना समय क्यों लगा?

तेजस परियोजना की शुरुआत 1980 के दशक में की गई थी, लेकिन इसे पूरा करने में कई दशकों का समय लग गया। इसके पीछे कई कारण हैं:

तकनीकी चुनौतियाँ: भारत के लिए यह पहली बार था कि उसने पूरी तरह से स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित करने का प्रयास किया। इसमें कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं, जैसे कि एवियोनिक्स, इंजन और एयरोडायनामिक्स को संतुलित करना। इससे परियोजना में देरी हुई।

संसाधनों की कमी: तेजस परियोजना के दौरान भारत में रक्षा अनुसंधान और विकास के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी थी। इससे विकास की गति धीमी रही।

बजट और वित्तीय समस्याएँ: इस परियोजना के दौरान कई बार बजट में कटौती हुई, जिससे विमान के विकास में बाधा आई।

वैश्विक सहयोग की कमी: तेजस के निर्माण में शुरुआत में भारत को अन्य देशों से बहुत कम तकनीकी सहयोग मिला। भारत को अपने खुद के अनुसंधान और विकास पर अधिक निर्भर रहना पड़ा, जिससे परियोजना में देरी हुई।

इंजन की समस्या: तेजस का Kaveri इंजन विकास में विफल रहा, जिसके कारण इसे GE के इंजन से बदलना पड़ा। यह प्रक्रिया भी लंबी चली और विकास में देरी का कारण बनी।

टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन: किसी भी फाइटर जेट को विकसित करने के बाद उसकी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की लंबी प्रक्रिया होती है। तेजस की टेस्टिंग में कई साल लगे और इसमें कई सुधार भी किए गए, जो इसकी देरी का कारण बने।

भारत को कितनी बढ़त दिलाएगा?

स्वदेशी रक्षा क्षमता: तेजस MK1 भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। इससे भारत को विदेशी विमानों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी, जिससे रक्षा बजट में भी बचत होगी।

पाकिस्तान और चीन के खिलाफ बढ़त: तेजस की उन्नत तकनीकी क्षमता और हथियार प्रणाली इसे पाकिस्तान और चीन के विमानों के मुकाबले एक मजबूत विकल्प बनाती है। इसकी हल्की संरचना और तेज गति इसे हवाई युद्ध में अधिक फुर्तीला बनाती है।

भविष्य की परियोजनाएँ: तेजस MK1 के सफल विकास के बाद, भारत अब तेजस MK2 और AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) जैसे और भी उन्नत विमान बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। इससे भारत की रक्षा क्षमताएँ और भी मजबूत होंगी। भारत तेजस का नया वर्जन तेजस-एमके2 भी बना रहा है, जो जल्द ही तैयार हो जाएगा। तेजस एमके2 पाँचवीं पीढ़ी का शानदार लड़ाकू विमान होगा।

रणनीतिक लाभ: तेजस का स्वदेशी निर्माण भारत को एक रणनीतिक लाभ देता है, क्योंकि इसे किसी भी समय उन्नत किया जा सकता है और भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।

तेजस MK1 भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसका हल्का वजन, तेज गति, उन्नत एवियोनिक्स और हथियार प्रणाली इसे पाकिस्तान और चीन के विमानों के मुकाबले अधिक प्रभावी बनाते हैं। हालांकि इसके विकास में समय लगा, लेकिन इसके परिणामस्वरूप भारत ने एक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हासिल किया है, जो आने वाले दशकों तक देश की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करेगा। तेजस MK1 भारत के लिए गर्व का प्रतीक है, जो आत्मनिर्भरता और उन्नति का संदेश देता है।