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जानिए कौन हैं पंडित टीका लाल टपलू, जिनके नाम पर कश्मीरी पंडितों के लिए पुनर्वास योजना शुरू करेगी BJP: यासीन मलिक के JKLF के आतंकियों ने कर दी थी हत्या

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (14 सितंबर) को जम्मू में एक जनसभा को संबोधित करते हुए टीका लाल टपलू को याद किया। टपलू कश्मीर के निवासी थे और आतंकियों ने उनकी क्रूरता से हत्या कर दी थी। जम्मू-कश्मीर के लिए भाजपा द्वारा जारी संकल्प पत्र में टपलू के नाम से एक योजना शुरू करने की बात कही गई है। यह योजना कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास के लिए होगा।

भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में कहा है कि वह विधानसभा में जीतकर सत्ता में आती है तो वह टीका लाल टपलू विस्थापित समाज पुनर्वास योजना (TLTVSPY) शुरू करेगी और कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास करेगी। इस योजना के माध्यम से कश्मीरी पंडितों, पश्चिमी कश्मीर के शरणार्थियों, वाल्मीकि, गोरखाओं सहित अन्य विस्थापित लोगों के पुनर्वास में तेजी लाने की बात कही गई है।

जम्मू के डोडा में टपलू को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमने पंडित टीका लाल टपलू के सम्मान में एक योजना शुरू करने का फैसला किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कश्मीर पंडितों को उनके अधिकार तेजी से मिलें।” बता दें कि टपलू की साल 1989 में आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

कौन थे टपलू?

टीका लाल टपलू घाटी में रहने वाले वकील और भाजपा के शुरुआती नेताओं में से एक थे। उनका जन्म श्रीनगर में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए पंजाब और उत्तर प्रदेश चले गए। हालाँकि, शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे अपने लोगों की सेवा करने के लिए वापस जम्मू-कश्मीर लौट गए। लोग उन्हें प्यार से लालाजी या बड़े भाई कहते थे।

आतंकी उन्हें मारने के लिए लंबे समय से साजिशें रच रहे थे जिसका टपलू को इस बात का अहसास था। इसीलिए कट्टरपंथियों से बचाने के लिए उन्होंने अपने परिवार को दिल्ली में बसा दिया था, लेकिन वो खुद कश्मीर लौट गए थे। आखिरकार, 14 सितंबर 1989 को यासीन मलिक के आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकियों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया।

घटना के दिन उनकेे घर के बाहर एक बच्ची जोर-जोर से रो रही थी। टपलू बाहर निकलकर उसके पास गए और उसकी माँ से पूछा कि वह क्यों रो रही है। उसकी माँ ने बताया कि बच्ची के स्कूल में कोई फंक्शन है और उसके पास पैसा नहीं है, इसलिए वह रो रही है। इसके बाद टपलू ने जेब से 5 रुपए निकालकर बच्ची को पकड़ा दिया। ठीक उसी समय सामने से आए आतंकियों ने उन्हें गोलियों से भून दिया।

‘हिंदू लड़के से करती हूँ प्यार, मेरे घरवाले मुझे मार देंगे’ : अलीगढ़ से मुस्लिम युवती की वीडियो वायरल, माँगी CM योगी से मदद, भाई पर लगाया गंदे ढंग से छूने का आरोप

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से एक युवती की वीडियो वायरल हो रही है। वीडियो में युवती उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगा रही है। उसका कहना है कि उसे एक हिंदू लड़के से प्यार हो गया है लेकिन उसके घरवाले मान नहीं रहे। उसे घर में बंद कर दिया गया है और उसे शक है कि उसकी हत्या भी की जा सकती है।

मामला खैर थाना क्षेत्र का है। वायरल वीडियो में लड़की ने बताया कि उसके प्रेमी का नाम शौर्य वर्मा है। वह एक हिंदू है। लड़की कहती है कि वो भी हिंदू धर्म में विश्वास करती है और शौर्य से शादी करना चाहती है। लेकिन उसके घरवाले इसके खिलाफ है। उन्होंने दोनों के रिश्ते की जानकारी होने पर लड़की को घर में कैद कर लिया है। लड़की को डर है कि उसे मारा जा सकता है।

उसने कहा कि वो अपने परिवार से रिश्ता तोड़ दिया है और कभी अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी। वायरल वीडियो में युवती ने अपने भाई पर भी आरोप लगाया कि उसका भाई उसे गंदे ढंग से छुआ और उसकी छाती पर हाथ भी मारा। यही सब घटनाएँ देख उसने अपने घर में सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा है।

दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, वीडियो वायरल होने के बाद खैर सीओ वरुण सिंह ने बताया कि लड़की और लड़का दोनों बालिग हैं और एक दूसरे से शादी करना चाहते हैं। पुलिस उनकी पूरी मदद करेगी।

सीओ ने जानकारी दी कि पीड़िता की अपने परिजनों से बातचीत भी हो गई है। एक नई वीडियो बनाकर उसने कहा कि उसे परिवार से कोई दिक्कत नहीं है, फिर भी पुलिस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और उन्हें सुरक्षा दी जा रही है।

मुस्लिम भीड़ ने हिंदू युवकों पर किया हमला, पुलिस की मौजूदगी में पत्थर फेंके: गुजरात में इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर हिंसा

गुजरात के खेडा में फिर से शांति भंग करने की कोशिश की गई है। इस बार महुधा में एक धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली इंस्टाग्राम पोस्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पर मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं पर हमला कर दिया। इस घटना में लगभग 2,500 से 3,000 लोगों की भीड़ ने “मार डालने” की धमकी देते हुए हिंदू युवकों पर पत्थर बरसाए। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

घटना तब शुरू हुई जब मुस्लिम युवकों ने इंस्टाग्राम पर एक भड़काऊ पोस्ट डाली। इस पोस्ट से हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची, जिसके बाद तीन हिंदू युवक पुलिस स्टेशन शिकायत दर्ज कराने पहुँचे। लेकिन जब वे पुलिस स्टेशन पहुँचे, तो वहाँ मुस्लिम भीड़ ने उन्हें घेर लिया और धमकाया। पुलिस की मौजूदगी में भी हिंदू युवकों पर पत्थरबाजी की गई।

महुधा पुलिस स्टेशन, खेड़ा में एक एफआईआर दर्ज की गई है, जिसकी एक प्रति ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है। हिंदू युवक ने शिकायत में कहा है कि शनिवार (14 सितंबर 2024) को जब वह अपने शो रूम में था, तो उसका दोस्त आया और उसे अपने मोबाइल फोन पर एक व्हाट्सएप ग्रुप में एक स्क्रीनशॉट दिखाया, जिसमें हिंदुओं की भावनाओं को चोट पहुँचाने और उकसाने वाली बात लिखी हुई थी। इसलिए उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर इस पोस्ट के खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। उसने अपने एक अन्य दोस्त को इसकी जानकारी दी और तीनों महुधा थाने पहुँचे।

इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या था?

यह पोस्ट इंस्टाग्राम यूजर आईडी ताहिर और कोनेन काज़ी से की गई थी। जिसमें लिखा था कि- ‘स्पेशल कठलाल वालों के लिए। जो कुफ्र के डर से सरकार के मिलाद का जुलूस ना निकल सके वो कोम कुत्ते सुवर उर्फ ​​के खिलाफ बोलते हैं उनके खिलाफ क्या बोलेंगे कायर लोग। ‘सरकार के मिलाद का जुलूस देखना हो तो आना महुधा में, ऐसा जुलूस निकलता है कि आके दुश्मन अपार से नीचे तक जल खड़े हैं।’

आगे लिखा था, ‘अगर किसी विधायक या कट्टरपंथी संगठन के डर से ये फैसला लिया है तो हम महुधा वालों को कहते हैं कि आधार कार्ड और जमीन लेकर आएंगे और इजाजत दिलाएंगे और इत्मिनान से जुलूस फिराकर दिखा देंगे।’

इससे पहले कि तीनों हिंदू युवक शिकायत दर्ज कराने थाने पहुँचते, पुलिस ने पोस्टर पकड़ लिए और उन्हें बचाने के लिए मुस्लिम नेता भी वहाँ पहुँच गए। हालाँकि, जब हिंदू युवक ने शिकायत दर्ज करने की तैयारी दिखाई, तो मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग उनके पास आए और सुलह की बात की और कहा कि उन्हें शिकायत दर्ज नहीं करनी चाहिए और उस व्यक्ति को माफी पत्र लिखा जाएगा। लेकिन हिंदू युवक ने समझौते की बात न करते हुए कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

जब तक हिंदू युवक शिकायत दर्ज करा कर लौटा, तब तक थाने के बाहर सैकड़ों मुसलमानों की भीड़ जमा हो चुकी थी और नारेबाजी करने लगी। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए हिंदू युवकों को वहां से भेज दिया और सुरक्षा के लिए एक पुलिस वाहन भी भेजा। साथ ही पीआई और पीएसआई हिंदू युवकों को अपनी गाड़ी में लेकर रवाना हो गए।

पीआई की मौजूदगी में पथराव हुआ

जब हिंदू युवा, पुलिस अधिकारियों के साथ, महुधा शहर छोड़कर नडियाद-कथलाल रोड पर पहुंचे, तो भीड़ ने उन्हें फिर से घेर लिया और फिर से नारे लगाने शुरू कर दिए। शिकायत के मुताबिक ये वही लोग थे जो पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हुए थे। वे चिल्ला रहे थे, ‘यह हमारे समुदाय के लोगों के खिलाफ शिकायत है…जिओ मत जाने दो…’ और भीड़ के लोगों के पास तलवार-लाठी, पाइप आदि हथियार भी थे।

इसी बीच जब हिंदू युवक गाड़ी रोककर बाहर निकले तो हुसैन अब्बास नाम का एक इस्लामिक व्यक्ति तलवार लेकर दौड़ा और बोला “तुमने हमारे खिलाफ शिकायत क्यों दर्ज कराई? ‘आज मैं तुम्हें मार डालूँगा” कहते हुए उसने मुझ पर तलवार से हमला किया, लेकिन हिंदू युवक झुक गया और घायल नहीं हुआ। इस दौरान भीड़ में शामिल मुस्लिम लोग यह भी चिल्ला रहे थे कि “आज इसे मत जाने दो…इसे मार डालो”। लेकिन जैसे ही पुलिस अधिकारी और पीछे वाली गाड़ी पहुंची, भीड़ तितर-बितर हो गई और भाग गई। फिर पुलिस ने हिंदू युवकों को अपनी गाड़ी में बिठाकर भेज दिया।

ढाई से तीन हजार मुसलमानों की भीड़

एफआईआर में सौ-सौ की भीड़ का जिक्र है, लेकिन शिकायतकर्ता हिंदू युवक ने ऑपइंडिया को बताया कि हमले के वक्त करीब ढाई से तीन हजार मुसलमानों की भीड़ जमा थी और लगातार सांप्रदायिक नारे लगा रही थी। उन्होंने कहा कि थाने के बाहर भी भीड़ द्वारा उन पर पथराव किया गया। साथ ही, जब हमला हुआ तब वापसी में पुलिस अधिकारी भी उनके साथ थे, फिर भी चरमपंथियों ने हमला करने में संकोच नहीं किया।

इस मामले में एक हिंदू युवक की शिकायत के आधार पर नामजोग में 37 लोगों के खिलाफ और बाकी भीड़ के खिलाफ धारा 189(2), 189(4), 191(2), 191(3), 190, 109, 125, 324(5), 324 भारतीय न्याय संहिता (6), 352, 351(3) और 61(2) और गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया गया है और जाँच की जा रही है। जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है उनमें मोईन, शहजाद, तौकीर, नासिर, समीर, वाजिद, हुसैन, नाजिर, फारूक, वाहिद, जावेद, मोइद हुसैन आदि शामिल हैं। कुल 37 मुस्लिम व्यक्तियों पर मामला दर्ज किया गया है जबकि गिरोह के बाकी लोगों पर मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस जाँच जारी, आरोपित को राउंडअप किया जा रहा है- पीआई

महुधा टाउन पीआई केके झाला ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को घेरने की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है। जिनके खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आगे की जाँच चल रही है।

मूल खबर गुजराती भाषा में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

तेजस MK1: भारतीय वायुसेना का स्वदेशी फाइटर जेट, पाकिस्तान और चीन के लड़ाकू विमानों से होगा मुकाबला

अगले महीने के आखिर तक भारत की वायुसेना को तेजस MK1 सौंप दिए जाएँगे। भारतीय वायुसेना ने कुल 83 तेजस MK2 का ऑर्डर दिया है। इसी के साथ मिग-21 पूरी तरह से सेना से बाहर हो जाएँगे। भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम है, क्योंकि यह भारत का स्वदेशी निर्मित हल्का लड़ाकू विमान है।

अक्टूबर 2024 के अंत तक तेजस MK2 के भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की घोषणा के साथ, भारत की रक्षा क्षमताओं में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। तेजस MK1 कई विशेषताओं और क्षमताओं से लैस है, जो इसे पाकिस्तान और चीन के फाइटर जेट्स के मुकाबले भारतीय वायुसेना के लिए एक मजबूत बढ़त प्रदान करता है। इस लेख में हम तेजस MK1 की खासियतों, उसकी रफ्तार, वजन, उसके बनने में लगे समय और उसकी मुकाबला क्षमताओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

तेजस MK1 की खासियतें

हल्का वजन: तेजस MK1 का वजन लगभग 6.5 टन है, जो इसे दुनिया के सबसे हल्के लड़ाकू विमानों में से एक बनाता है। इसकी हल्की संरचना इसे हवा में तेज़ और अधिक गतिशील बनाती है। इसका हल्का वजन इसे अधिक फुर्तीला और आसानी से नियंत्रित करने योग्य बनाता है, जिससे पायलट को उच्च गति पर भी बेहतर नियंत्रण मिलता है।

स्पीड (गति): तेजस MK1 की अधिकतम गति 1.8 मैक (2222 किलोमीटर प्रति घंटा) तक हो सकती है। यह तेज गति इसे हवा में अन्य लड़ाकू विमानों के मुकाबले एक बढ़त दिलाती है, खासकर दुश्मन के विमानों के खिलाफ।

सुपर सॉनिक क्षमता: तेजस MK1 को सुपरसोनिक गति से उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह तेज गति दुश्मन के विमानों से जल्दी बचने और हमला करने की क्षमता प्रदान करती है। इसकी सुपर सॉनिक क्षमता इसे दुश्मन के रडार से बचने में भी मदद करती है, जिससे यह तेजी से हमला कर सकता है और वापस सुरक्षित लौट सकता है।

स्वदेशी निर्मित: तेजस MK1 को पूरी तरह से भारत में विकसित और निर्मित किया गया है। यह भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उद्देश्यों का एक प्रमुख हिस्सा है। इससे भारत की विदेशी विमानों पर निर्भरता कम होगी और देश के तकनीकी विकास में भी सुधार होगा।

मल्टीरोल लड़ाकू विमान: तेजस MK1 एक मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसका मतलब है कि यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों प्रकार के अभियानों में सक्षम है। यह इसे एक बेहद बहुमुखी लड़ाकू विमान बनाता है, जो किसी भी परिस्थिति में प्रभावी साबित हो सकता है।

हथियार ले जाने की क्षमता: तेजस MK1 की हथियार ले जाने की क्षमता लगभग 3.5 टन है। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, हवा से जमीन पर हमला करने वाली मिसाइलें, बम और रॉकेट शामिल हैं। यह इसे एक शक्तिशाली हथियार बनाता है, जो किसी भी युद्ध में दुश्मन को कड़ी टक्कर दे सकता है।

अत्याधुनिक एवियोनिक्स: तेजस MK1 में अत्याधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम लगाया गया है, जिसमें रडार, ईसीएम (Electronic Counter Measures), फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम और अन्य अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। यह इसे अधिक सक्षम और सटीक बनाता है, जिससे यह किसी भी स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया कर सकता है।

लड़ाई की दूरी (रेंज): मार्क-1ए पिछले वैरिएंट से थोड़ा हल्का है, लेकिन यह आकार में उतना ही बड़ा है। यानी 43.4 फीट की लंबाई, 14.5 फीट की ऊंचाई। अधिकतम 2222 km/hr की स्पीड से उड़ान भर सकता है। कॉम्बैट रेंज 739 किलोमीटर है। वैसे इसका फेरी रेंज 3000 किलोमीटर है।

जटिल एयरोडायनामिक्स डिज़ाइन: इसका डिज़ाइन इस प्रकार किया गया है कि यह उच्च गति और गतिशीलता के बावजूद स्थिर रहता है। यह डिज़ाइन इसे दुश्मन के हमलों से बचने और हवा में लंबी दूरी तक उड़ान भरने में मदद करता है।

हर मौसम में उड़ान: तेजस MK1 किसी भी मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है, चाहे दिन हो या रात। यह इसे हर परिस्थिति में इस्तेमाल किए जाने वाला एक विश्वसनीय लड़ाकू विमान बनाता है।

पाकिस्तान और चीन के फाइटर जेट्स से तुलना

चीन के J-10 और JF-17 से मुकाबला: तेजस MK1 की तुलना में चीन का J-10 और पाकिस्तान के साथ मिलकर बनाए गए JF-17 जैसे फाइटर जेट्स अधिक भारी हैं। JF-17 की गति लगभग 1.6 मैक है, जो तेजस के बराबर है, लेकिन तेजस MK1 की एवियोनिक्स और हथियार प्रणाली अधिक उन्नत मानी जाती है। तेजस का हल्का वजन इसे अधिक फुर्तीला बनाता है, जबकि JF-17 और J-10 थोड़े भारी होते हैं।

हथियार प्रणाली: तेजस MK1 की हथियार ले जाने की क्षमता और उसकी मारक शक्ति चीन और पाकिस्तान के विमानों के मुकाबले अधिक है। इसका रडार और ईसीएम सिस्टम इसे दुश्मन के रडार से बचने में सक्षम बनाता है, जो J-10 और JF-17 में उतनी क्षमता नहीं होती।

तकनीकी उन्नति: तेजस MK1 की तकनीकी उन्नति और स्वदेशी निर्मित होने के कारण इसकी रखरखाव की लागत भी कम होती है। इसके अलावा, इसकी स्पेयर पार्ट्स और मरम्मत की सुविधाएं भारत में ही उपलब्ध हैं, जबकि पाकिस्तान को JF-17 के लिए चीन पर निर्भर रहना पड़ता है।

मल्टीरोल क्षमता: तेजस MK1 की मल्टीरोल क्षमता इसे हवा से जमीन और हवा से हवा दोनों अभियानों में प्रभावी बनाती है। J-10 और JF-17 भी मल्टीरोल विमान हैं, लेकिन तेजस की उन्नत तकनीकी इसे युद्ध के मैदान में अधिक लाभकारी बनाती है।

तेजस के बनने में इतना समय क्यों लगा?

तेजस परियोजना की शुरुआत 1980 के दशक में की गई थी, लेकिन इसे पूरा करने में कई दशकों का समय लग गया। इसके पीछे कई कारण हैं:

तकनीकी चुनौतियाँ: भारत के लिए यह पहली बार था कि उसने पूरी तरह से स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित करने का प्रयास किया। इसमें कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं, जैसे कि एवियोनिक्स, इंजन और एयरोडायनामिक्स को संतुलित करना। इससे परियोजना में देरी हुई।

संसाधनों की कमी: तेजस परियोजना के दौरान भारत में रक्षा अनुसंधान और विकास के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी थी। इससे विकास की गति धीमी रही।

बजट और वित्तीय समस्याएँ: इस परियोजना के दौरान कई बार बजट में कटौती हुई, जिससे विमान के विकास में बाधा आई।

वैश्विक सहयोग की कमी: तेजस के निर्माण में शुरुआत में भारत को अन्य देशों से बहुत कम तकनीकी सहयोग मिला। भारत को अपने खुद के अनुसंधान और विकास पर अधिक निर्भर रहना पड़ा, जिससे परियोजना में देरी हुई।

इंजन की समस्या: तेजस का Kaveri इंजन विकास में विफल रहा, जिसके कारण इसे GE के इंजन से बदलना पड़ा। यह प्रक्रिया भी लंबी चली और विकास में देरी का कारण बनी।

टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन: किसी भी फाइटर जेट को विकसित करने के बाद उसकी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की लंबी प्रक्रिया होती है। तेजस की टेस्टिंग में कई साल लगे और इसमें कई सुधार भी किए गए, जो इसकी देरी का कारण बने।

भारत को कितनी बढ़त दिलाएगा?

स्वदेशी रक्षा क्षमता: तेजस MK1 भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। इससे भारत को विदेशी विमानों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी, जिससे रक्षा बजट में भी बचत होगी।

पाकिस्तान और चीन के खिलाफ बढ़त: तेजस की उन्नत तकनीकी क्षमता और हथियार प्रणाली इसे पाकिस्तान और चीन के विमानों के मुकाबले एक मजबूत विकल्प बनाती है। इसकी हल्की संरचना और तेज गति इसे हवाई युद्ध में अधिक फुर्तीला बनाती है।

भविष्य की परियोजनाएँ: तेजस MK1 के सफल विकास के बाद, भारत अब तेजस MK2 और AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) जैसे और भी उन्नत विमान बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। इससे भारत की रक्षा क्षमताएँ और भी मजबूत होंगी। भारत तेजस का नया वर्जन तेजस-एमके2 भी बना रहा है, जो जल्द ही तैयार हो जाएगा। तेजस एमके2 पाँचवीं पीढ़ी का शानदार लड़ाकू विमान होगा।

रणनीतिक लाभ: तेजस का स्वदेशी निर्माण भारत को एक रणनीतिक लाभ देता है, क्योंकि इसे किसी भी समय उन्नत किया जा सकता है और भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।

तेजस MK1 भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसका हल्का वजन, तेज गति, उन्नत एवियोनिक्स और हथियार प्रणाली इसे पाकिस्तान और चीन के विमानों के मुकाबले अधिक प्रभावी बनाते हैं। हालांकि इसके विकास में समय लगा, लेकिन इसके परिणामस्वरूप भारत ने एक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हासिल किया है, जो आने वाले दशकों तक देश की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करेगा। तेजस MK1 भारत के लिए गर्व का प्रतीक है, जो आत्मनिर्भरता और उन्नति का संदेश देता है।

कनाडा में भारतीय उच्चायोग पर ग्रेनेड फेंकने वाला निकला सांसद अमृतपाल सिंह का जीजा, NIA ने परिजनों के यहाँ की थी छापेमारी: घर से फोन, लैपटॉप सब कब्जे में लिया

कनाडा के ओटावा में पिछले साल 23 मार्च 2023 को भारतीय उच्चायोग में ग्रेनेड फेंकने का मामला सामने आया था। अब इस केस में छानबीन के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि वो ग्रेनेड फेंकने वाला कोई और नहीं बल्कि सांसद अमृतपाल सिंह का जीजा अमरजोत था।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार अमरजोत पर आरोप है कि उसने न केवल खालिस्तान के समर्थन में प्रदर्शन किया था बल्कि उच्चायोग के परिसर में खालिस्तान का झंडा भी लगाया था। अमरजोत, अमृतसर के गाँव बुताला का रहने वाला है।

ग्रेनेड फेंकने के मामले में उससे जुड़ी जानकारी उस समय प्रकाशित हुई है जब एनआईए ने शुक्रवार को पंजाब के चार जिलों में एक साथ छापेमारी की। ये छापेमारी शुक्रवार सुबह करीब पाँच बजे गुरदासपुर जिले में तीन स्थानों पर, अमृतसर जिले में दो, पटियाला और मोदा जिले में एक-एक घर में दबिश देकर जाँच की।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि ये सारे स्थान वो हैं जहाँ अमृतपाल के रिश्तेदार रहते हैं। बुतला में अमृतपाल सके जीजा अमरजोत, गुरदासपुर जिले के हाँव में उसके साले गुरमुख सिंह व अमृतसर के जल्लूखेड़ा में अमृतपाल सिंह के चाचा परगट सिंह आदि लोग रहते हैं। छापेमारी के दौरान घर में मौजूद लोगों से पूछताछ की गई और परिवार के मोबाइल फोन, लैपटॉप, डीवीआर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में ले लिया गया।

गौरतलब है कि पिछले साल खालिस्तान समर्थक भीड़ ने ओटावा में भारतीय उच्चायोग पर दो ग्रेनेड फेंकते हुए हमला किया था। इसके बाद जाँच एजेंसियों ने इस मामले में कुछ लोगों की शिनाख्त की। बाद में इस मामले में पाकिस्तान की संलिप्ता पर भी शंका हु और मामले की जाँच एनआईए ने अपने हाथ में ले ली।

24 जून 2023 को एक रिपोर्ट हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित हुई जिसमें एनआईए के हवाले से बताया गया कि अमरजोत सिंह ने खालिस्तान समर्थक भीड़ का नेतृत्व किया था। उसने ये तब किया था जब पंजाब पुलिस अमरजोत की खोज में जुटे थे।

इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े इमान सिंह खारा ने इस मामले में सख्त कानूनी एक्शन लेने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि जो चीज हुई ही नहीं उसमें अमरजोत सिंह (अमृतपाल सिंह के जीजा) का नाम लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं ओटावा में घटी घटना को तो लोगों ने काल्पनिक तक कहा था। हालाँकि अब एक बार फिर से नाम अमरजोत सिंह का नाम आया है।

‘आर्य समाज का विवाह सर्टिफिकेट मान्य नहीं’: हाईकोर्ट ने दिया संस्था के मंदिरों की जाँच का आदेश, प्रशासन से कहा – इनकी गतिविधियाँ खँगालें

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में विवाह प्रमाण पत्र प्रदान देने वाले आर्य समाज के मंदिरों, सोसायटियों, ट्रस्टों और संस्थाओं की जाँच का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने इनके कामकाज और उसके तरीकों की गहन एवं विवेकपूर्ण जाँच करने के लिए कहा है।

दरअसल, न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने यह आदेश पारित किया है। कोर्ट को कई मामलों में पुलिस सत्यापन से पता चला कि बाल विवाह निरोधक अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए आर्य समाज के मंदिरों द्वारा विवाह किए जा रहे हैं और साथ में प्रमाण पत्र भी जारी किए जा रहे हैं।

ऐसे जोड़ों द्वारा दायर याचिकाओं के साथ दिए गए आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज जाली पाए गए हैं। यहाँ तक ​​कि नोटरीकृत शपथ पत्र भी फर्जी पाए गए हैं। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह पंजीकरण अधिकारी ने बिना सत्यापन के फर्जी और अमान्य विवाह प्रमाणपत्र के आधार पर विवाह पंजीकृत कर दिया।

कोर्ट ने कहा, “इस तरह की शादियाँ मानव तस्करी, यौन शोषण और जबरन श्रम को बढ़ावा देती हैं। बच्चे सामाजिक अस्थिरता, शोषण, जबरदस्ती और शिक्षा में व्यवधान के कारण भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक आघात सहते हैं। इसके अलावा ये मुद्दे अदालतों पर बोझ डालते हैं। इसलिए, दस्तावेज़ सत्यापन और ट्रस्टों/सोसायटी की जवाबदेही के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है।”

विवाह प्रमाण-पत्र जारी करने वाली 15 ऐसी समितियों/ट्रस्टों/मंदिरों के नामों पर गौर करते हुए न्यायालय ने पाया कि पुलिस सत्यापन के बाद अधिकांश मामलों में यह पाया गया कि या तो समितियाँ धोखाधड़ी कर रही थीं या मुख्यालय से संबद्ध नहीं थीं या विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5 का उल्लंघन करके संपन्न किए गए थे।

यहाँ तक ​​कि पार्टियों द्वारा दिए गए विवरण और दस्तावेज भी जाली थे। इसको देखते हुए कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद के पुलिस आयुक्तों को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5 और बाल विवाह निषेध अधिनियम 1929 के प्रावधानों का उल्लंघन करके विवाह संपन्न कराने में शामिल ट्रस्टों की गहन और विवेकपूर्ण जाँच करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ताओं ने अपने जीवन की सुरक्षा के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में दलील दी थी कि वे बालिग हैं और उन्होंने आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था। मंदिर द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने रजिस्ट्रार के समक्ष विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन किया था।

अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने न्यायालय में कहा कि यह विवाह प्रमाण-पत्र आर्य समाज मंदिर ग्रेटर नोएडा द्वारा जारी किया गया प्रतीत होता है। इसमें पुजारी का नाम-पता, मंदिर का पता, गवाहों का विवरण और यह घोषणा नहीं है। इसमें यह भी नहीं बताया गया है कि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार किया गया है या नहीं। इसलिए प्रमाण-पत्र जाली हो सकता है।

जाली आर्य समाज प्रमाण पत्रों के साथ न्यायालय के समक्ष सुरक्षा की माँग को लेकर लगातार मामले दायर किए जा रहे हैं। इसको देखते हुए कोर्ट ने गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर के सहायक महानिरीक्षक पंजीकरण (स्टाम्प और पंजीकरण) को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा है। इसके साथ ही 1 अगस्त 2023 से 1 अगस्त 2024 के बीच उनके अधिकार क्षेत्र में विवाह के सभी विवरणों को रिकॉर्ड में रखने के लिए भी कहा है।

इसके अलावा महानिरीक्षक स्टाम्प, उत्तर प्रदेश को उसी अवधि के लिए यूपी राज्य में पंजीकृत विवाहों की संख्या को जिलेवार दर्ज करने का निर्देश जारी किया है। हालांँकि, न्यायालय के समक्ष सुझाव रखे गए थे, लेकिन राजधानी लखनऊ के 5 मीराबाई मार्ग पर स्थित आर्य समाज प्रतिनिधि सभा की ओर से कोई भी व्यक्ति कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ।

इसको देखते हुए कोर्ट ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त को निम्नलिखित पहलुओं की जाँच करने का निर्देश दिया है-

(i) आर्य समाज प्रतिनिधि सभा के कार्य और गतिविधियों की प्रकृति के बारे में;

(ii) विवाह संपन्न कराने के लिए समितियों को अधिकृत करने की योग्यता;

(iii) ऐसी समितियों की सूची, जो उत्तर प्रदेश राज्य में उनके प्राधिकरण और पर्यवेक्षण के तहत विवाह संपन्न करा रही हैं;

(iv) पूर्ण पता और टेलीफोन नंबर के साथ समिति के पदाधिकारियों की सूची

न्यायालय ने पाया कि आर्य समाज विवाह मान्यता अधिनियम 1937 और हिंदू विवाह अधिनियम 1955 का उल्लंघन करते हुए फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने पर नियंत्रण जरूरी है।

मानसी मामले में कोर्ट का यह निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह निर्देश में मानसी व अन्य सहित 42 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आया है। अगली सुनवाई में इन संस्थाओं द्वारा शादी करवाने के लिए ली जाने वाली फीस, विवाह कराने वाले पंजित/पुजारी का नाम-पता आदि की जानकारी कोर्ट के सामने प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इन याचिकाओं में याचियों का कहना था कि परिवार वालों की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी की गई है।

मानसी मामले में कहा गया है कि उसकी और उसके पति की जान को खतरा है। याचिकाकर्ता मानसी ने सिविल लाइन्स के नवाब यूसुफ रोड पर स्थित रजिस्टर्ड आर्य समाज संस्थान से शादी कर कोर्ट में विवाह का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। इसी मामले को लेकर जज ने यह निर्देश दिया है। यह संस्थान आर्य प्रतिनिधि लखनऊ से संबद्ध होने का दावा करती है।

पहले भी इलाहाबाद हाई कोर्ट उठा चुका है सवाल

इससे पहले जून 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज के कृष्णानगर स्थित आर्य समाज को निर्देश दिया था कि वह दो महीने की अवधि यानी 20 जून 2023 तक ऐसे विवाह न कराए, जहाँ प्रस्तावित दूल्हा और दुल्हन के परिवारों की सहमति न हो। आर्य समाज ने एक ऐसे व्यक्ति को विवाह प्रमाणपत्र जारी किया था, जिसके खिलाफ लड़की के परिवार ने मामला दर्ज कराया था।

उसमें आरोप लगाया गया था कि लड़के ने लड़की को बहला-फुसलाकर भगाया है और उससे जबरन शादी कर ली है। वहीं, आर्य समाज द्वारा जोड़े को जारी किए गए विवाह प्रमाणपत्र में यह नहीं बताया गया था कि लड़की की उम्र का सत्यापन कैसे किया गया। लड़की के परिवार का दावा था कि वह नाबालिग थी। हालाँकि, आरोपित ने दावा किया था कि लड़की वयस्क है।

इसके पहले जून 2022 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐसी जाँच का आदेश दिया था। उस समय जस्टिस अश्विनी मिश्रा और जस्टिस रजनीश कुमार की खंडपीठ ने प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को निर्देश दिया था कि वे प्रयागराज के कीडगंज स्थित आर्य समाज के प्रधान संतोष कुमार शास्त्री के माध्यम से विवाह प्रमाण पत्र जारी करने के तरीके और कार्यप्रणाली की जाँच करें।

पीठ ने यह भी कहा था कि इस बात की जाँच की जानी चाहिए क्या शादी संपन्न कराए जा रहे हैं या सिर्फ विवाह प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। संतोष कुमार शास्त्री को पिछले पाँच वर्षों में उनके द्वारा किए गए सभी विवाहों के रजिस्टर पेश करने का भी निर्देश दिया गया था, खासकर अगस्त 2016 में उनके खिलाफ विशिष्ट प्रतिबंध आदेश पारित होने के बाद से।

तब पीठ ने कहा था, “बाहरी कारणों से काम कर रहे एक संगठित रैकेट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, जिसमें दूसरों की भागीदारी/सहायता संभव है।” दरअसल, इस मामले में याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष दावा किया था कि उसने निजी प्रतिवादी के साथ विवाह किया है और इसलिए उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना अनुचित है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी उठाया था मामला

इसी तरह का एक मामला साल 2022 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में आया था। केस एक मध्य प्रदेश की मुस्लिम लड़की के अपहरण का था, जिसका आरोप एक हिन्दू लड़के पर था। लड़की को पुलिस ने बरामद कर लिया था, जिसने अपने अम्मी-अब्बू के साथ जाने से मना कर दिया था। लड़की लगातार उस लड़के के साथ जाने की जिद पर अड़ी थी, जिस पर उसके अपहरण का आरोप था।

लड़की ने बाद में गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में धर्म परिवर्तन कर लिया। लड़की के परिजनों ने अवैध धर्मांतरण बताकर लड़की को लड़के के घर जाने से रोकने की माँग की थी। इस बहस में जस्टिस रोहित आर्य को एक बार कहते सुना गया कि ‘बिलकुल सही बात है।’ दो जजों में एक जज कह रहा था, “ये तमाशा हम स्वीकार नहीं करेंगे। ये अभी जेल जाएगा। तुम काजी के पास जाओ और मुस्लिम बन जाओ। वही ज्यादा अच्छा है। फ्रॉड कर के उसका धर्मांतरण कर दिया, ये कोई तरीका है? किसी मुस्लिम को हिन्दू बना रहे हो, मज़ाक बात है?”

इसी बहस के बीच में 5:30वें मिनट पर जस्टिस रोहित आर्य ने SSP को कुल पुलिस फ़ोर्स उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मामले में कुछ फ्रॉड की आशंका दिखाई दे रही है। इसी क्रम में उन्होंने लड़की को हिन्दू बनाने वाले गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर को मात्र एक ट्रस्ट डीड बना कर रखने वाला बताया। जज ने आर्य समाज मंदिर के वकील से पहले मंदिर की प्रमाणिकता साबित करने को कहा।

आर्य समाज मंदिर में शादी के प्रावधान

दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज में शादियँ हिंदू रीति-रिवाज से ही होती हैं और अग्नि के सात फेरे दिलवाए जाते हैं। इसके बाद एक मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। आर्य समाज से होने वाली शादियों को आर्य समाज मैरिज वैलिडेशन 1937 और हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत मान्यता देने की बात होती है।

इसमें दूल्हे की उम्र 21 साल से अधिक और दुल्हन की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए। इसमें दो अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग भी शादी कर सकते हैं। यहाँ शादी करने वाले जोड़े को पहले रजिस्ट्रेशन कराना होता है। दोनों पक्षों को हलफनामा देना होता है। इसके बाद दोनों के दस्तावेजों को देखने के बाद उनकी शादी आर्य समाज मंदिर में कराई जाती है।

अगर लड़का-लड़की एक ही धर्म का है तो शादी हिंदू एक्ट के तहत मानी जाती है। अगर जोड़ा अलग-अलग धर्म का होता है तो आर्य समाज मैरिज वैलिडेशन एक्ट के तहत उसे मान्यता दी जाती है। हालाँकि, कानूनी तौर पर शादी को तभी वैध माना जाता है जब शादी को एसडीएम कोर्ट में रजिस्ट्रेशन कराया जाता है।  

‘2 दिन बाद दूँगा इस्तीफा, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठूँगा’: केजरीवाल की घोषणा, सोशल मीडिया पर लोग सुनीता केजरीवाल को बना रहे CM

बेल मिलने के बाद जेल से बाहर आए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया ने इस्तीफा देने की घोषणा की है। भारतीय जनता पार्टी पर हमला करते हुए उन्होंने राजनीतिक चाल चली। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा पर बोलते हुए केजरीवाल ने कहा – 

“अगर देश की जनता को लगता है कि मैं बेईमान हूँ, तो मैं कुर्सी छोड़ दूँगा। अगर जनता को लगता है कि मैं ईमानदार हूँ, तो मुझे वोट देना। आप जब जिता दोगे तभी मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठूँगा।”

सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करते हुए अपने इस्तीफे की बात रखी। उन्होंने कहा कि वो 2 दिन बाद सीएम की कुर्सी से इस्तीफा देंगे।

केजरीवाल की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। इन कयासों में सबसे ज्यादा सुनीता केजरीवाल को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना बताई जा रही है।

PM मोदी ने झारखंड को दिया 6 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का तोहफा, कहा – ‘अब देश की प्राथमिकता आदिवासी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर 2024 को झारखंड के जमशेदपुर में 6 नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत की। इस अवसर पर, उन्होंने राज्य के विकास और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया। उन्होंने रांची एयरपोर्ट से ही विभिन्न योजनाओं का ऑनलाइन उद्घाटन किया। चूँकि उन्हें जमशेदपुर में जाकर उद्घाटन करना था, लेकिन बारिश की वजह से उन्होंने रांची एयरपोर्ट से ही उद्घाटन किया। यही वजह रही कि जमशेदपुर में प्रस्तावित उनके रोड-शो को रद्द कर दिया गया। हालाँकि वो जमशेदपुर सड़क मार्ग से पहुँच रहे हैं और जनसभा को संबोधित भी करेंगे।

पीएम मोदी ने दिया इन वंदे भारत ट्रेनों का तोहफा

  1. टाटानगर – पटना वंदे भारत एक्सप्रेस
  2. भागलपुर – दुमका- हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस
  3. ब्रह्मपुर – टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस
  4. गया – हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस
  5. देवघर – वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस
  6. राउरकेला – हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “आज का दिन झारखंड के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत से न केवल झारखंड की यातायात सुविधा में सुधार होगा, बल्कि यह हमारे देश की प्रौद्योगिकी और उन्नति की दिशा में एक कदम और बढ़ाएगा। इस आधुनिक ट्रेन से यात्रियों को न केवल सुविधा मिलेगी बल्कि यह राज्य की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगी।”

पीएम मोदी ने कहा, “6 नई वंदे भारत ट्रेनें, 650 करोड़ से ज्यादा की रेलवे परियोजनाएँ, कनेक्टिविटी और यात्रा सुविधाओं का विस्तार, मैं झारखंड की जनता-जनार्दन को इन सभी विकास कार्यों के लिए बधाई देता हूँ।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्देश्य केवल यातायात को सुगम बनाना नहीं है, बल्कि यह हमारे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हम चाहते हैं कि हमारे देश के हर हिस्से में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचे और हर नागरिक को इसका लाभ मिले। यह ट्रेनें हमारी आधुनिक यात्रा की अवधारणा को वास्तविकता में बदल रही हैं और हमारी प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, “आज झारखंड भी उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहाँ रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत झारखंड के 50 से अधिक रेलवे स्टेशनों का भी कायाकल्प किए जा रहे हैं। देश के गरीबों को सशक्त बनाने के लिए 2014 से कई कदम उठाए गए हैं। आदिवासी लोगों को जोड़ने के लिए पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) योजना चल रही है…”

पीएम मोदी ने कहा, “अब देश की प्राथमिकता देश का गरीब है। अब देश की प्राथमिकता देश का आदिवासी है। अब देश की प्राथमिकता देश का दलित, वंचित और पिछड़ा समाज है। अब देश की प्राथमिकता महिलाएँ हैं, युवा हैं, किसान हैं।” पीएम मोदी ने शुरुआत में कहा, “आज बहुत ही मंगल दिन है। इस समय झारखंड में प्रकृति पूजा के पर्व कर्मा की उमंग है। आज सुबह जब मैं रांची एयरपोर्ट पर पहुंचा तो एक बहन ने ‘करमा’ पर्व के प्रतीक ‘जावा’ से मेरा स्वागत किया। इस पर्व में बहनें अपने भाई की कुशलता की कामना करती हैं।”

पीएम मोदी राँची से जमशेद सड़क मार्ग से पहुँच रहे हैं। बारिश की वजह से उन्होंने उद्घाटन कार्यक्रम रांची से ही किया। जमशेदपुर में पीएम मोदी जनसभा को संबोधित करेंगे।

नाम: जामा मस्जिद, पता: अखाड़ा बाजार, श्रीराम गली – शिमला और मंडी के बाद कुल्लू में अवैध मस्जिद को लेकर बवाल, हिंदुओं ने कार्रवाई तक शुरू किया हनुमान चालीसा का पाठ

हिमाचल प्रदेश में अवैध मस्जिदों को लेकर हिंदुओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शिमला के संजौली और मंडी के जेल रोड में मस्जिद की अवैध निर्माण के बाद कुल्लू में भी कुल्लू में भी बने अवैध मस्जिद के खिलाफ लोग आ गए। इसको लेकर हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। वहीं, मंडी में अवैध मस्जिद गिराए जाने तक लोगों ने हनुमान चालीसा का अखंड पाठ शुरू किया है।

कुल्लू में जिस मस्जिद को लेकर लोगों में आक्रोश फैला है, वह मस्जिद अखाड़ा बाजार के श्रीराम गली में स्थित है और इसका नाम जामा मस्जिद है। हिंदू संगठनों का कहना है कि जामा मस्जिद खादी ग्रामोद्योग की भूमि पर बना दी गई है। इस मस्जिद के अवैध निर्माण के खिलाफ लोगों ने हनुमान मंदिर रामशिला से ढालपुर चौक तक प्रदर्शन किया।

हिंदू जागरण मंच एवं अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने अखाड़ा बाजार पहुँचकर मस्जिद से 10 मीटर की दूरी पर हनुमान चालीसा का पाठ किया। यहाँ पाठ खत्म होने के बाद प्रदर्शनकारी ढालपुर चौक पहुँचे और वहाँ एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और इस अवैध मस्जिद को गिराने और पूरे इलाके मे अवैध मस्जिदों की जाँच की माँग की। जिले कुल 11 मस्जिदें बताई जा रही हैं।

हिंदू संगठनों का कहना है कि साल 2017 से चल रहे पत्राचार में कुल्लू नगर परिषद ने यह स्वीकार किया है कि यह मस्जिद अवैध तरीके से बनाई गई है। इसे खादी ग्रामोद्योग की भूमि पर बनाया गया है। उनका कहना कि बिना पंजीकरण के दूसरे राज्यों के सैकड़ों लोग रोज हिमाचल प्रदेश में आ रहे हैं और अपनी अनैतिक गतिविधियों से यहाँ की संस्कृति और सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं।

हिंदू संगठनों ने कहा कि कुछ ही दिन पहले गड़सा घाटी में गौहत्या का मामला सामने आया था। लोगों ने पता चलने पर आरोपितों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। आक्रोशित लोगों का कहना है कि ये बाहरी अराजक तत्व बिना बिल के सामान बेच रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है और करदाता व्यापारियों का व्यापार चौपट हो रहा है। 

दरअसल, अखाड़ा बाजार में बनी जामा मस्जिद का निर्माण साल 1990-91 बताया जाता है। उस समय इसकी इमारत एक मंजिल की थी, लेकिन साल 2017 तक इसका निर्माण किया गया और अब मस्जिद चार मंजिल की हो गई है। 2017 में हिंदू संगठनों के प्रयास से इस पर रोक लगा दी गई थी। उनका कहना है कि इस स्थान पर जो नक्शा पास हुआ है, उसके मुताबिक यह भवन नहीं बना है।

पूरा मामला सामने आने के बाद कुल्लू नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी हरि सिंह यादव ने कहा, “नगर परिषद को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस जमीन का रिकॉर्ड बंदोबस्ती के पास है। हिंदू संगठनों के आरोप के बाद इसकी जाँच की जाएगी।” वहीं, कुल्लू के एसडीएम ने कहा कि जामा मस्जिद की जाँच की जा रही है। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच मस्जिद के इमाम नवाब हाशमी ने निर्माण की वैधता और भूमि के मालिकाना हक का बचाव किया है। उन्होंने दावा किया कि वक्फ बोर्ड कानूनी तौर पर 1 बीघा और 2 बिस्वा जमीन का मालिक है और वह इसके लिए किराया वसूल रहा है। हाशमी ने कहा, “विवादित भूमि 1999 में कॉन्ग्रेस नेताओं की मदद से खादी बोर्ड से मस्जिद को हस्तांतरित की गई थी। इसमें निर्माण भी वैधानिक तरीके से हुई है।”

मंडी में अवैध मस्जिद गिरने तक होगा हनुमान चालीसा

हिंदू जागरण मंच ने कहा है कि वह मंडी के जेल रोड में मस्जिद के अवैध निर्माण के गिरने तक रोज हनुमान चालीसा का पाठ करेगा। इसके साथ ही शहर के विभिन्न मंदिरों में तीस दिनों तक पाठ के साथ कीर्तन होगा। मंच ने यह भी कहा कि आयुक्त कोर्ट की ओर से दी गई समयावधि तक मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद के अवैध निर्माण को नहीं हटाया तो हिंदू इसे गिराएँगे।

दरअसल, शनिवार (14 सितंबर 2024) को हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने मंडी शहर के इंदिरा मार्केट में स्थित माता सिद्ध काली के प्रांगण में हनुमान चालीसा का पाठ और माता के कीर्तन का आयोजन किया। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इनमें बुजुर्ग से लेकर महिलाएँ तक शामिल थीं। हिंदू संगठनों का कहना है प्रशासन ने हिंदुओं को आश्वस्त किया है।

ईद-ए-मिलाद पर ट्रैफिक से लेकर पुलिस-प्रशासन सब की व्यवस्था, कैद में भगवान गणेश की मूर्ति: कर्नाटक में और क्या-क्या करेगी कॉन्ग्रेसी सरकार?

कर्नाटक में जहाँ ईद-ए-मिलाद के लिए हर मोड़ पर ट्रैफिक से लेकर पुलिस की व्यवस्था की गई है, वहीं गणेश चतुर्थी के जश्न में भगवान गणेश की मूर्ति को “कैद” कर दिया गया। ये स्थिति एक बार फिर इस सवाल को खड़ा करती है कि हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों पर सुरक्षा व्यवस्था की जगह उन पर अंकुश क्यों लगाया जाता है? और अगर सुरक्षा का दावा किया जा रहा है, तो भगवान गणेश की मूर्ति को पुलिस वैन में क्यों ले जाया गया? ऐसा लग रहा है कि कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार भगवान से भी ज़्यादा कानून-व्यवस्था को भगवान मान बैठी है, और अगर ये कानून हिंदू परंपराओं से टकरा जाए, तो गणेश जी तक को पुलिस स्टेशन में ले जाना पड़ता है।

ईद-ए-मिलाद पर प्रशासन अलर्ट, और गणेश चतुर्थी पर?

कर्नाटक के बेंगलुरु में 16 सितंबर 2024 के लिए ईद-ए-मिलाद के अवसर पर पुलिस ने शहरभर में ट्रैफिक को मैनेज करने के लिए एडवाइजरी जारी की है। हर गली-मोहल्ले में पुलिस तैनात की गई है, और एक-एक सड़क पर नजर रखी जाएगी कि कहीं कोई जुलूस के दौरान असुविधा न हो। बेंगलुरु पुलिस ने बाकायदा ट्रैफिक रूट्स को बदल दिया, ताकि ईद के जुलूसों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। लेकिन दुख की बात यह है कि इसी ट्रैफिक व्यवस्था में गणेश विसर्जन के जुलूस के दौरान भगवान गणेश को “कैद” किया गया।

एक तरफ ईद-ए-मिलाद पर पूरी पुलिस फोर्स मुसलमानों की भीड़ के लिए अलर्ट मोड पर थी, तो दूसरी तरफ हिंदू धर्म के त्योहार पर भगवान की मूर्ति को ट्रैफिक और लॉ एंड ऑर्डर का हवाला देते हुए पुलिस वैन में ले जाया गया। क्या भगवान गणेश की भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल था, या फिर यह हिंदू त्योहारों के प्रति प्रशासन की दोहरी मानसिकता का परिणाम था?

क्या हिंदू त्योहार पर सुरक्षा का अभाव है?

सोचने वाली बात है कि जब ईद-ए-मिलाद के लिए सरकार इतनी चौकन्नी है, तो गणेश चतुर्थी पर ऐसा क्या हो गया कि भगवान गणेश की मूर्ति को पुलिस की हिरासत में रखना पड़ा? यह वाकया एक सच्चाई को उजागर करता है कि हिंदू त्योहारों पर सरकार का रवैया अलग होता है। प्रशासन के लिए ईद का जुलूस शांति से निकल जाए, इसके लिए हर संभव इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन जब गणेश चतुर्थी की बात आती है, तो हिंदुओं के धार्मिक प्रतीक को ‘कानून व्यवस्था’ के नाम पर पुलिस वैन में बंद किया जाता है।

जरा सोचिए, ईद पर जुलूस निकलता है और प्रशासन पूरी ताकत लगाता है कि किसी भी इस्लामी मजहबी को दिक्कत न हो। वहीं गणेश चतुर्थी पर अगर कोई हिंदू परिवार भगवान गणेश की मूर्ति को विसर्जन के लिए लेकर जा रहा है, तो उसे क्या मिलता है? पुलिस, जो हिंदुओं के धार्मिक अधिकारों को ‘कंट्रोल’ करने का काम करती है।

गणेश जी की ‘गिरफ्तारी’ का सच?

बेंगलुरु में गणेश चतुर्थी के दौरान की एक वायरल तस्वीर ने सबको चौंका दिया, जिसमें गणेश जी की मूर्ति पुलिस वैन में रखी गई थी। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से फैली, और लोग सवाल करने लगे कि यह क्या हो रहा है? क्या भगवान गणेश को भी कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार ने “गिरफ्तार” कर लिया? असल में, यह घटना कर्नाटक के यादगिरी जिले की है, जहाँ गणेश चतुर्थी के जुलूस के दौरान प्रशासन ने कहा कि सुरक्षा कारणों से गणेश जी की मूर्ति को विसर्जन स्थल तक पुलिस वैन में लेकर जाना होगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब ईद-ए-मिलाद के जुलूसों को पुलिस सुरक्षा में बिना किसी रुकावट के जाने दिया जा सकता है, तो गणेश जी के जुलूस को क्यों नहीं?

क्या यही “धर्मनिरपेक्षता” है?

इस तरह की घटनाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या यह वही ‘धर्मनिरपेक्षता’ है जिसका दावा कॉन्ग्रेस की सरकारें करती हैं? जब ईद के जुलूस के लिए सड़कों पर बैरिकेड लगाए जाते हैं, ट्रैफिक डायवर्ट किया जाता है, और पुलिस बल तैनात होते हैं, तो गणेश चतुर्थी पर भगवान की मूर्ति को ‘गिरफ्तार’ क्यों करना पड़ता है? क्या यह प्रशासन का दोहरा रवैया नहीं है?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन अगर गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख हिंदू त्योहारों पर भीड़ और कानून-व्यवस्था के नाम पर भगवान को ही ‘कैद’ करना पड़े, तो यह धर्मनिरपेक्षता नहीं, बल्कि भेदभाव का प्रतीक है।

ईद-ए-मिलाद और गणेश चतुर्थी की तुलना

ईद-ए-मिलाद और गणेश चतुर्थी, दोनों धार्मिक त्योहार हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया में इतना बड़ा अंतर क्यों है? क्या गणेश चतुर्थी के दौरान सड़कों पर भीड़ नहीं होती? क्या विसर्जन के दौरान कोई ट्रैफिक व्यवधान नहीं होता? फिर क्यों ईद के लिए तो रूट बदल दिए जाते हैं और गणेश चतुर्थी के लिए भगवान गणेश की मूर्ति को पुलिस वैन में रखना पड़ता है?

ईद के जुलूस के लिए पुलिस प्रशासन सड़कें बंद करवा सकता है, पर हिंदू त्योहारों पर ऐसा करना उनके लिए मुश्किल क्यों हो जाता है? क्या गणेश विसर्जन का जुलूस इतना छोटा था कि उसे पुलिस वैन में ‘कैद’ कर देना ही एकमात्र उपाय था?

यह दिखावा कब तक चलेगा?

सरकार की ‘धर्मनिरपेक्षता’ सिर्फ कागजों पर है या फिर केवल कुछ विशेष धर्मों के लिए? कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर पहले भी तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस घटना ने इस धारणा को और मजबूत किया। ईद-ए-मिलाद के जुलूस को शांतिपूर्वक निकालने के लिए पूरी व्यवस्थाएँ की गईं, जबकि गणेश चतुर्थी के विसर्जन के दौरान भगवान गणेश की मूर्ति को ‘कैद’ कर लिया गया। यह केवल धार्मिक भावनाओं का अपमान नहीं, बल्कि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार की प्राथमिकताएं कहाँ हैं।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार का असली चेहरा

कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार ने एक बार फिर दिखा दिया कि उनकी प्राथमिकताएँ क्या हैं। ईद-ए-मिलाद के लिए तो प्रशासन चौकन्ना था, लेकिन गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान की मूर्ति को ही कैद कर लिया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि कर्नाटक में सरकार की प्राथमिकता हिंदू त्योहारों की सुरक्षा नहीं, बल्कि उन्हें सीमित करने की है। जब तक यह दोहरा रवैया जारी रहेगा, तब तक हिंदू समाज के धार्मिक अधिकारों का हनन होता रहेगा।

अब यह सवाल सरकार से है कि क्या वे अपनी ‘धर्मनिरपेक्षता’ का सही मायने में पालन करेंगे, या फिर भगवान गणेश की मूर्ति को ‘गिरफ्तार’ करने जैसे कदम उठाते रहेंगे?