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राजस्थान के स्कूलों में 28 मई को सावरकर जयंती और 5 अगस्त को धारा 370 हटाने का उत्सव: भाजपा सरकार ने दिया निर्देश, होगा ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’ का आयोजन

सीएम भजनलाल शर्मा की अगुवाई वाली राजस्थान की भाजपा सरकार ने प्रदेश के स्कूलों में 28 मई को सावरकर जयंती मनाने का निर्देश दिया है। वहीं, 29 मई को महाराणा प्रताप की जयंती पर छुट्टी रहेगी। हालाँकि, इस दौरान गर्मी की छुट्टियाँ होती हैं। वहीं, 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने को ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’ के रूप में मनाने और 13 अगस्त को वीर दुर्गादास राठौड़ जयंती मनाने के लिए कहा गया है।

शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष मोदी ने रविवार (28 जुलाई 2024) को प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों के लिए 2024-25 का कैलेंडर जारी किया। कैलेंडर के अनुसार, इस बार साल के 365 दिनों में 213 दिन ही स्कूल संचालित होंगे। 152 दिन त्योहारों और अन्य कारणों से अवकाश रहेगा। इन अवकाशों में रविवार का अवकाश भी शामिल है।

राजस्थान सरकार का निर्देश

शिक्षा विभाग के कैलेंडर में कहा गया है कि 19 अगस्त को रक्षाबंधन (अवकाश)/संस्कृत दिवस (उत्सव) के रूप में मनाया जाएगा। इस बार दीपावली का अवकाश 27 अक्टूबर से 7 नवंबर तक यानी 12 दिन का रहेगा। सर्दियों की छुट्टियाँ हर बार की तरह 25 दिसंबर से शुरू और 5 जनवरी तक रहेंगी।

स्कूलों में फर्स्ट टेस्ट 21 अगस्त से 23 अगस्त तक होंगे, जबकि सेकेंड टेस्ट 14 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक होंगे। इस बार अर्ध वार्षिक परीक्षा 12 दिसंबर से 24 दिसंबर तक होंगे। वहीं, वार्षिक परीक्षा (बोर्ड क्लास को छोड़कर) 24 अप्रैल से 8 मई तक होंगे। परीक्षा का परिणाम 16 मई को घोषित होगा।

शिक्षा विभाग ने हर महीने के दूसरे व चौथे शनिवार को ‘नो बेग डे’ घोषित किया है। इस दिन स्कूलों में अलग-अलग गतिविधियाँ आयोजित होगी, जिसमें बच्चों को स्टेज पर आने का अवसर दिया जाएगा। स्कूलों में नया सेशन एक जुलाई से शुरू होगा। इससे पहले रिजल्ट घोषित होने के साथ ही स्कूलों में छुट्टियाँ घोषित हो जाएँगी। 

सरकारी स्कूलों में वीर सावरकर जयंती मनाने और जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का उत्सव मनाने के आदेश पर पूर्व शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने कहा, “शिक्षा के क्षेत्र में या पंचांग में किसी भी तरह की राजनीति का समावेश नहीं होना चाहिए।”

‘दुर्गा वाहिनी छोड़ दे, वरना जान से मार देंगे’ : गुजरात में VHP की महिला कार्यकर्ता को सादिक खान ने दी धमकी, सड़क पर बाल नोचकर थप्पड़ मारे, FIR दर्ज

कच्छ के विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता पर हुए हमले को अभी कुछ ही दिन हुए है और इसी बीच पाटन जिले से भी एक और गंभीर घटना सामने आई है। घटना गंभीर इस वजह से है, क्योंकि इस बार एक हिंदू संगठन से जुडी महिला कार्यकर्ता पर हमला किया गया है। पाटन जिले के सांतलपुर तहसील में सिधाड़ा गाँव की दुर्गा वाहिनी की स्वयंसेविका पर सादिक खान नाम के मुस्लिम लड़के ने हमला करके अगवा करने का प्रयत्न किया।

जानकारी के मुताबिक, घटना पाटन जिले के सांतलपुर थाना क्षेत्र के सिंधरा गाँव में 27 जुलाई 2024 को घटी। पीड़िता की पहचान रामिलाबेन परमार के तौर पर हुई है। महिला अपने परिजनों के साथ ही गाँव में रहती है वहीं घटना का आरोपित सादिक खान भी उसी गाँव का है। पीड़िता की ओर से दर्ज शिकायत के मुताबिक, प्राथमिकी में उसने कहा है कि काम करने के बाद जब वह अपने मुँहबोले भाई गमन भरवाड़ के साथ बाइक से घर लौट रही थी, तो शाम करीब साढ़े सात बजे केमिकल फैक्ट्री के पास सादिक मिला जिसने उनकी बाइक के आगे कार रोकी। सादिक के साथ एक अन्य व्यक्ति भी था, जिसकी पहचान नहीं हो सकी है। जब ऐसी हरकत पर महिला ने सादिक से पूछा कि उसने ये ऐसा क्यों किया तो सादिक ने बिना कोई जवाब दिए उसके बाल पकड़ लिए और उसे थप्पड़ मारना शुरू कर दिया।

अचानक हुए हमले के बाद गमन भरवाड़ बीच में गिर गए और जब उन्होंने खुद को बचाने की कोशिश की तो उन पर भी हमला कर दिया गया। शिकायत के मुताबिक, इसी दौरान सादिक ने अपने साथ आए शख्स को कहा कि वो विहिप कार्यकर्ता को गाड़ी में डाले। उसने कहा, “इसे गाड़ी में डालो, आज ये जान से मरेगी।” बाद में वो लोग भाग गए। शिकायत के मुताबिक, वहाँ से जाने से पहले सादिक ने महिला को धमकी देते हुए कहा, “दुर्गा वाहिनी का काम छोड़ दे, आज तो तू बच गई लेकिन दोबारा आई तो जान से मार डालूँगा।”

घटना के बाद दुर्गा वाहिनी सेविका रमिला ने परिजनों को सूचना दी और सब संतालपुर पुलिस स्टेशन पहुँचे। बाद में इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने सादिक के खिलाफ भारतीय न्यायिक संहिता की सुसंगत धाराओं और गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 के तहत मामला दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है।

मामले की अधिक जानकारी पाने के लिए ऑपइंडिया ने संतालपुर पुलिस से भी संपर्क किया। पुलिस ने बताया कि मामले में कार्रवाई जारी है, आरोपित सादिक गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस अब आरोपित के साथ गए एक अन्य व्यक्ति की तलाश कर रही है।

पीड़िता की बहन से बात

ऑपइंडिया ने इस मामले की पूछताछ के दौरान ऑपइंडिया की पीड़िता बहन भगवती परमार से भी बात की। भगवती विश्व हिंदू परिषद और दुर्गा वाहिनी की भी सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “कल मेरी बहन को काम से आने में देर हो गई तो मैंने अपने मुँहबोले भाई को, जो गाँव में ही रहता है, उसे अपनी बहन को लेने के लिए भेजा। इसी दौरान सादिक उसके पीछे था और वीडियो बना रहा था। उनका इरादा वीडियो बनाकर बाइक पर आ रहे मेरे भाई-बहनों को बदनाम करने का था, तो मेरी बहन ने उससे वीडियो न बनाने को कहा। यह सुनकर वह कार में घुसा, उन्हें खड़ा रखा और बहन को पीटना शुरू कर दिया।”

उन्होंने कहा, ”ये वीडियो तो एक बहाना था। मूलतः उन लोगों को हमारी दुर्गा वाहिनी और विश्व हिंदू परिषद में काम करने से आपत्ति है। पिछले 15 दिनों से हम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने साफ धमकी दी थी कि वह हिंदुत्व का मुद्दा नहीं छोड़ेंगे तो उन्हें मार डाला जाएगा। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है,हमारे संगठन हमारे साथ हैं और मामले को लेकर बैठकें चल रही हैं।”

भगवती परमार ने ऑपइंडिया को बताया कि गाँव में 50% से अधिक मुस्लिम आबादी है और सरपंच भी उन्हीं में से है। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में आरती, हनुमान चालीसा, नवरात्रि या रामनवमी जैसे त्योहारों के दौरान उन लोगों को हमेशा परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा, “हममें से कई हिंदू युवक-युवतियाँ संगठन में काम करते हैं, इसलिए गाँव के मुसलमान उन्हें संगठन छोड़ने की धमकी देते रहते हैं। उनका खौफ इतना है कि कोई भी उनके खिलाफ नहीं बोलता। हिंदुओं को कहा जाता है कि उन्हें घर पर ही रहना होगा। यहाँ तक ​​कि हमारे गाँव में हनुमान चालीसा करने पर भी पिटाई की जाती है।”

संगठनों ने की न्याय की माँग

दूसरी ओर, पाटन की दुर्गा वाहिनी के स्वयंसेवक पर हमले का मामला सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और गुजरात की दुर्गा वाहिनी समेत हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया। घटना को लेकर तुरंत अलग-अलग जगहों पर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। संगठन इस मामले में न्याय की माँग को लेकर विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित करने जा रहा है। पता चला है कि जल्द ही साधु संत पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ समेत सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।

Google कर रहा कमला हैरिस की मदद, दबाई जा रही ट्रंप पर हमले की खबर: अमेरिका में चुनाव से पहले भड़के पूर्व राष्ट्रपति के बेटे, सर्च इंजन पर लगाया इल्जाम

दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन गूगल पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के असफल प्रयास को खोज परिणामों में छिपाने का आरोप लगा है। इससे विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, ट्रंप की हत्या के बारे में लोग गूगल पर जानकारी खोज रहे हैं, लेकिन सर्च इंजन उन्हें वह नहीं दिखा रहा है। रिपब्लिकन ने गूगल पर राष्ट्रपति चुनावों में कमला हैरिस को मदद करने का आरोप लगाया है।

गूगल सर्च इंजन के ऑटोकम्प्लीट टूल ने डोनाल्ड ट्रंप पर 13 जुलाई 2024 को की गई गोलीबारी के किसी भी उल्लेख को अनदेखा कर दिया है। इससे पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के बेटे गूगल पर भड़क गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह दिग्गज टेक कंपनी अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनावों में हेराफेरी करने की कोशिश कर रही है।

यहाँ तक कि यूजर ने सर्च इंजन पर ‘हत्या का प्रयास’ टाइप किया तो भी उन्हें 13 जुलाई को बटलर, पेनसिल्वेनिया में हुई घटना के बारे में कोई सुझाव नहीं मिला। 13 जुलाई को बटलर में हुई ट्रंप की हत्या की कोशिश ने अमेरिका ही नहीं, पूरे विश्व को हिला कर रखा दिया था। इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद गूगल उसे सुझाव के तौर पर नहीं दिखा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप जूनियर डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई के नेतृत्व वाली टेक फर्म पर जानबूझकर खोज परिणामों में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने एक्स अकाउंट पर लिखा, “बड़ी टेक कंपनियाँ कमला हैरिस की मदद करने के लिए चुनाव में फिर हस्तक्षेप कर रही हैं। हम सभी जानते हैं कि गूगल जानबूझकर चुनाव में हस्तक्षेप कर रहा है। यह वाकई घृणित है।”

बता दें कि अमेरिका में नवंबर 2024 में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर देश में दोनों दलों की ओर से जोरदार अभियान चल रहा है। वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस चुनाव में कमला हैरिस को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया है, जो एक डेमोक्रेट हैं। वहीं, रिपब्लिकन की ओर से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मैदान में हैं।

इस राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान ही डोनाल्ड ट्रंप पर हमला किया गया था। शूटर द्वारा चलाई गई गोली उनके कान को छूती हुई निकल गई थी और वे बाल-बाल बच गए थे। ऐसे में Google के अपडेट से राजनीतिक ड्रामा खड़ा हो गया है। FBI निदेशक क्रिस्टोफर रे की आलोचना के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि उन्होंने ‘लोकतंत्र के लिए गोली खाई’।

गूगल की इस कारस्तानी का फॉक्स न्यूज ने विश्व भर के यूजर्स द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में अनेकों की समीक्षा की। गूगल के खोज सुझावों में विभिन्न ऐतिहासिक घटनाएँ शामिल थीं। जैसे कि रोनाल्ड रीगन की असफल हत्या, आर्चड्यूक फर्डिनेंड की हत्या, बॉब मार्ले की गोली मारकर हत्या तथा पूर्व राष्ट्रपति गेराल्ड फोर्ड के खिलाफ असफल षडयंत्र। लेकिन, डोनाल्ड ट्रम्प से जुड़ी हालिया घटना नहीं थी।

इन आरोपों के बाद गूगल ने सफाई दी है। गूगल के एक प्रवक्ता ने बताया कि इन खोज सुझावों में कोई मैन्युअल परिवर्तन नहीं किया गया था। गूगल के सिस्टम में राजनीतिक हिंसा के बारे में खुद ही पूर्ण सुझावों को रोकने के लिए अंदरुनी सिक्योरिटी फीचर हैं। हालाँकि, यूजर्स का कहना है कि कैनेडी, अब्राहम लिंकन, रोनाल्ड रीगन, रूजवेल्ट आदि नेताओं की हत्या के प्रयासों के बारे में खोजने पर ऐसा नहीं होता था।

गूगल के प्रवक्ता ने कहा, “हम अपने सिस्टम को और अधिक अपडेट के लिए काम कर रहे हैं। ऑटोकम्प्लीट सिर्फ़ लोगों को समय बचाने में मदद करने वाला एक उपकरण है और वे अभी भी अपनी इच्छानुसार कुछ भी खोज सकते हैं। इस भयानक कृत्य (ट्रंप की हत्या का प्रयास) के बाद लोगों ने जानकारी खोजने के लिए Google का रुख किया। हमने उन्हें सुझाव परिणामों से जोड़ा और ऐसा करना जारी रखेंगे।”

चर्च के कॉलेज में पढ़ेंगे नमाज… जगह दो: केरल में मुस्लिम छात्रों की डिमांड सुन विरोध में उतरे ईसाई संगठन, BJP ने पूछा- क्या खुद इस्लामी संस्थानों में देते हो प्रार्थना की जगह

केरल के एर्नाकुलम में स्थित चर्च संचालित निर्मला कॉलेज में मुस्लिम छात्रों के नमाज के लिए अलग कमरा माँगने पर विवाद हो गया है। इसके विरोध में कॉलेज प्रशासन और चर्च उतर आया है और इसे मजहबी दखल बताते हुए नमाज को अनुमति ना देने की बात कही है। ईसाई संगठन भी इसके खिलाफ हैं।   

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला शुक्रवार (26 जुलाई, 2024) से चालू हुआ। निर्मला कॉलेज के वेटिंग हॉल में कुछ मुस्लिम छात्राओं ने नमाज पढ़ी। इसकी जानकारी कॉलेज के कर्मचारियों ने कॉलेज प्रशासन को दी। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने लड़कियों को यहाँ नमाज पढ़ने से रोक दिया। 

इसके बाद कॉलेज में मुस्लिम छात्रों ने प्रदर्शन चालू कर दिया और कैम्पस के भीतर ही रोज नमाज पढ़ने के लिए अलग से एक कमरे की माँग करने लगे। मुस्लिम छात्रों ने कहा कि यह उनके मजहब का हिस्सा है और उन्हें अलग से कमरा चाहिए ही। इस पर कॉलेज के प्रिंसिपल जस्टिन कन्नड़न ने साफ इनकार कर दिया। 

कॉलेज प्रशासन ने कहा कि यह एक सेक्युलर संस्थान है और यहाँ किसी को नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कॉलेज प्रशासन ने मुस्लिम छात्रों से कहा कि यदि वह नमाज ही पढ़ना चाहते हैं तो उन्हें शुक्रवार को इसके लिए छुट्टी दे दी जाएगी, बस उन्हें लिखित आवेदन देना होगा।

कॉलेज प्रशासन ने कहा कि कॉलेज से मस्जिद की दूरी मात्र 200 मीटर है और छात्र-छात्राएँ वहाँ जाने के लिए स्वतंत्र हैं। मुस्लिम छात्रों के समर्थन में कुछ छात्र संगठन भी उतर आए। कॉलेज में हुई इस घटना के बाद केरल के साइरो मालाबार चर्च और कैथोलिक कॉन्ग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई।

ईसाई संगठन विरोध में उतरे

साइरो मालाबार चर्च ने इसे ईसाई संस्थानों में मजहबी दखल का नाम दिया है। साइरो मालाबार चर्च की पब्लिक अफेयर्स कमिटी ने कहा है कि ईसाई संस्थानों में मजहबी दखल के प्रयासों का विरोध किया जाएगा। इसके मुखिया बिशप थारयिल ने कहा, ”मुवत्तुपुझा निर्मला कॉलेज में हुई घटनाओं ने यहाँ के माहौल को बिगाड़ दिया है। यह एक स्वायत्त संस्थान है जो अपने शैक्षणिक मानकों को बनाए रखता है। छात्रों के एक समूह ने कॉलेज के प्रिंसिपल को घेर लिया और नारे लगाए कि कॉलेज परिसर में नमाज पढ़ने के लिए एक छात्रों को एक कमरा दिया जाए।”

उन्होंने मुस्लिम छात्रों की मांगों को मनवाने के लिए छात्र संगठनों के समर्थन पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा, ”यह चिंता का विषय है कि केरल के दो मुख्य छात्र संगठन भी ऐसी माँग उठाकर कॉलेज के माहौल को दूषित किया। इस माँग का कोई भी नैतिक या कानूनी आधार नहीं है। इन गतिविधियों के पीछे साजिश और इनके मकसद की जाँच होनी चाहिए।” 

केरल के एक और बड़े ईसाई संगठन कैथोलिक कॉन्ग्रेस ने भी नमाज के लिए कमरे दिए जाने की माँग का विरोध किया है। कैथोलिक कॉन्ग्रेस ने कहा, ”चर्च संचालित कॉलेज और स्कूलों में नमाज़ पढ़ने के लिए कोई कमरा या जगह नहीं दी जाएगी। हालाँकि, छात्रों को नमाज़ के लिए नज़दीकी मस्जिदों में जाने की अनुमति होगी।”

उसने आगे कहा, “कुछ जगहों से यह माँग उठ रही है कि मस्जिदों के पास में स्थित शिक्षण संस्थानों में महिलाओं के लिए नमाज़ पढ़ने के लिए जगह बनाई जानी चाहिए। हालाँकि, इस बात को समझने की जरूरत है कि केवल मस्जिद में लड़कियों को नमाज के लिए जगह नहीं मिल रही, इस आधार पर उन्हें चर्च में जगह नहीं दी जा सकती।”  

कैथोलिक कॉन्ग्रेस ने इस मामले में मौलवियों से अपील की कि वह रुढ़िवादी ना बनें और मस्जिदों में महिलाओं के लिए जगह बनाएँ। कैथोलिक कॉन्ग्रेस ने कहा कि चर्च संचालित संस्थानों के संविधान में है कि यहाँ ईसाई धार्मिक भावनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा और संरक्षित किया जाएगा। ऐसे में किसी को भी इसे डिस्टर्ब नहीं करने दिया जा सकता।

भाजपा ने पूछा- क्या मुस्लिम देते हैं जगह

नमाज के लिए कमरा माँगने को लेकर भाजपा ने विरोध जताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सुरेन्द्रन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “केरल में हिंदू और ईसाई संस्थानों में जानबूझकर अराजकता फैलाने की कोशिशें हो रही हैं जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रिंसिपल के अनुशासन लागू करने पर धमकियाँ देना कॉन्ग्रेस और वामपंथी संगठनों का असली चेहरा दिखाता है।”

आगे उन्होंने इस माँग को लेकर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा, ” क्या कोई मुस्लिम संस्थान गैर-मुस्लिम प्रार्थना की अनुमति देता है? सरकार को मुवत्तुपुझा मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।भाजपा इस तरह के उकसावे के खिलाफ़ है और संस्थानों को हर संभव सहायता भी देगी।”

गौरतलब है कि निर्मला कॉलेज 1953 में स्थापित किया गया था। यह एक ईसाई अल्संपख्यक संस्थान है। इसका संचालन केरल की सीरियन कैथोलिक चर्च करता है। इस संस्थान के भीतर 3000 छात्र पढ़ते हैं और यहाँ एक चर्च भी है। मुस्लिम छात्रों की नमाज पढ़ने की जगह के माँग के बाद यहाँ अब विवाद खड़ा हो गया है।

रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुस्लिमों का सर्टिफिकेट बनाता जीशान, विजय यादव करता मदद: 20 हजार की आबादी वाले गाँव में 19184 फर्जी दस्तावेज, ATS की जाँच में चौंकाने वाले खुलासे

उत्तर प्रदेश के कई जिले रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों के पनाहगाह बन गए हैं। कानपुर के बाद उन्नाव एवं रायबरेली में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने वाले तंत्र के खुलासे के बाद शासन-प्रशासन और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। करीब 20,000 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले में गिरफ्तार जीशान और ग्राम विकास अधिकारी विकास यादव ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

यूपी ATS की जाँच में अभी तक पता चला है कि पकड़ा गया सीएससी संचालक जीशान बस मोहरा है। इस पूरे खेल का असली सूत्रधार कोई और है। सूत्रधार के इशारे पर ही ये सारा खेल हुआ है। भाजपा के स्थानीय विधायक अशोक कुमार ने इसे आतंकी साजिश बताया है। वहीं, हिंदू संगठन भी इन मामलों में आतंकियों के शामिल होने का आरोप लगाकर अपना रोष बताया है।

यूपी के अलग-अलग जिलों में फैला है नेटवर्क

दरअसल, 18 जुलाई को यूपी एटीएस ने जनसेवा केंद्र संचालक जीशान खान, सुहैल, रियाज खान और VDO विजय यादव से अलग-अलग पूछताछ की थी। इस दौरान ATS को एक बड़े नेटवर्क की जानकारी मिली। यह नेटवर्क बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुस्लिमों को जगह-जगह बसाने में लगा हुआ है। कानपुर, उन्नाव, प्रयागराज, लखनऊ में भी इस तरह का खेल चल रहा है।

एटीएस इस मामले में बिहार, असम, कर्नाटक, केरल, मुंबई तक के तार जोड़ने में लगी हुई है। पुलिस को पता चला है कि इन लोगों को 20 हजार से अधिक बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर अलग-अलग जगहों पर बसाया है। रायबरेली का सलोन इलाका शुरू से ही संवेदनशील रहा है और यहाँ एक से बढ़कर एक आतंकी हुए हैं।

उधर, सलोन के प्रखंड विकास अधिकारी ने कहा है कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले ग्राम विकास अधिकारी विजय यादव के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। इसके अलावा, यादव को निलंबित करके उनके खिलाफ विभागीय जाँच शुरू की गई है। कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। विजय यादव की आईडी से दो साल में 20 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

कस्बे की जनसंख्या 20 हजार, 19 हजार से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र बनाए

रायबरेली के पलाही गाँव की कुल जनसंख्या 4500 है और यहाँ सिर्फ एक मुस्लिम परिवार है, लेकिन इस गाँव के पते पर 819 मुस्लिमों के जन्म प्रमाण पत्र बना दिए गए। इसी तरह एक अन्य गाँव नूरुद्दीनपुर की जनसंख्या 8,000 है लेकिन यहाँ के पते पर 12,000 से अधिक मुस्लिमों के जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं। ये लोग कुछ लोगों के हिंदू नाम से प्रमाण पत्र देते थे, ताकि शंका ना हो।

वहीं, 20 हजार की आबादी वाले सलोन कस्बे में 19,184 जन्म प्रमाण पत्र बना दिए गए।स्थानीय जन्म प्रमाण पत्र के लिए 3 से 5 हजार और बिहार, बंगाल एवं झारखंड आदि जगहों के लिए 5 से 10 हजार रुपए तक लिए जाते थे। बांग्लादेशी-रोहिंग्या मुस्लिमों से मिले इन पैसों का बँटवारा रोज शाम को विजय यादव, जीशान, रियाज और सुहैल के बीच होता था।

स्थानीय लोगों रायबरेली ये बानगी हैं। इनका नेटवर्क प्रयागराज, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, अमेठी, लखनऊ सहित तमाम जिलों में फैला हुआ है। माना जा रहा है कि दूसरे राज्यों में भी इनका नेटवर्क होगा। दरअसल, रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों को बसाने के लिए एक गैंग रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों के नामों की सूची देता था और जीशान उनका जन्म प्रमाण पत्र बनाकर देता था।

अभी दो दिन पहले लखनऊ से नजमा नाम की बांग्लादेशी महिला को दो अन्य महिलाओं के साथ गिरफ्तार किया था। उसके घर से आधार कार्ड मिला है, जिसमें उसे मध्य प्रदेश की इंदौर का पता है। वहीं, उसके साथ की एक महिला आखी ने अपना नाम मधु सिंह रखा था। उसका भी पता इंदौर का है। रिपोर्ट के मुताबिक, असम में भी बांग्लादेशियों का प्रमाण पत्र बनाया जाता है।

PFI आतंकी का भी जीशान ने बनाया था प्रमाण पत्र

जीशान ने प्रतिबंधित इस्लामी आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के एक सदस्य का भी प्रमाण पत्र बनाया था। PFI के एक आतंकी को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था। उसके पास से दस्तावेज बरामद किए गए थे। उसके सभी दस्तावेज रायबरेली के पलाही गाँव के पते पर ही बने थे। इन प्रमाण पत्रों को जीशान ने अपने जन सुविधा केंद्र से जारी किए गए थे।

गिरफ्तार PFI के आतंकी ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह बात कबूल की थी कि सिर्फ केरल ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और गुजरात के उसके कई साथियों के जन्म प्रमाण पत्र भी यहीं से बनवाए गए थे। अगर यहाँ की विस्तृत जाँच की जाए तो और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। वैसे भी सलोन आतंकियों से संबंधित रहा है।

आतंकियों और दाऊद के गैंग से कनेक्शन

रायबरेली 90 के दशक में लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और दाऊद इब्राहिम के गैंग के लिए सुरक्षित पनाहगाह रहा है। साल 1992 में आतंकी अब्दुल करीम टुंडा रायबरेली आया था। इसी तरह हिजबुल मुजाहिद्दीन का एरिया कमांडर बिलाल अहमद भी रायबरेली के खिन्नी तल्ला में शरण लिया था।

इसी तरह सलोन में लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर इमरान अंसारी सक्रिय रहा। साल 2006 में ATS ने उसे पकड़ा था। बछरावाँ दाऊद गैंग का सेंटर रहा है। इसके अलावा भी समय-समय पर अन्य देश विरोधी एवं समाज विरोधी तत्व यहाँ से सक्रिय रहा। यहाँ आतंकियों से लेकर इन माफियाओं तक को किसने पनाह दिया, इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है।

भाजपा विधायक ने बताया ISI का हाथ

सलोन के भाजपा विधायक अशोक कुमार ने कहा कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को भारत में बसाने और उन्हें नागरिकता दिलाने के लि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा रहे थे।

उन्होंने कहा कि इन सबके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ और उनकी फंडिंग है। उन्होंने कहा कि फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के जरिए वोटर आईडी समेत अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए और इसके जरिए फर्जी लोगों ने रायबरेली-अमेठी जिले के लोकसभा चुनाव में वोटिंग भी की है। उन्होंने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

जानवरों को खाना देने पर मुस्लिम भीड़ करती है प्रताड़ित, दरवाजे पर फेंकती है मीट: हिंदू महिला पत्रकार की सोशल मीडिया पर Video, बोलीं- कभी न लें मुस्लिम इलाके में घर

सोशल मीडिया पर एक महिला पत्रकार की वीडियो सामने आई है। पत्रकार का नाम आम्रपाली शर्मा है। वीडियो में आम्रपाली आरोप लगाती दिख रही हैं कि उनकी हिंदू पहचान की वजह से और पशु प्रेमी होने के कारण उन्हें महाराष्ट्र के मलाड में लोकल मुस्लिम परेशान करते हैं और उनके दरवाजे पर मीट फेंकते हैं।

वीडियो में उनके कहे अनुसार, वो इसकी शिकायत करने पुलिस के पास भी जाती हैं लेकिन कोई उनकी सुनवाई नहीं करता। स्थानीय मुस्लिम लगातार बस उन्हें परेशान करते रहते हैं।आम्रपाली कहती हैं कि वो सेकुलर हिंदू हैं लेकिन आज उनके साथ जो कुछ भी हो रहा है वो सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि वो हिंदू ब्राह्मण महिला हैं और जानवरों से प्यार करती हैं।

उनकी शिकायत है गार्ड और अन्य लोगों की मदद से उनके दरवाजे पर माँस फेंका गया। साथ ही साथ वो पुलिस के पास भी जब शिकायत कराने गईं तो किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। किसी ने ये तक चेक नहीं किया कि उनके घर के बाहर जो चीज फेंकी गई वो बीफ था या क्या था।

आम्रपाली वीडियो में कहती हैं कि पता नहीं उन लोगों से (जो मुस्लिम उन्हें परेशान कर रहे हैं) उनका क्या कनेक्शन है जो सिर्फ उन्हें टारगेट ही किया जा रहा है और मजबूर किया जा रहा है कि वो सुसाइड कर लें या मलाड से भाग जाएँ ताकि मुस्लिम लोग उनके फ्लैट पर कब्जा कर पाएँ।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर ये भी लिखा है कि कभी भी हिंदू महिला होकर मुंबई, मलाड और मुंब्रा जैसे मुस्लिम बहुल इलाके में घर नहीं लेना चाहिए वरना हाल ऐसा ही होता है। अपने ट्वीट में उन्होंने कुछ वीडियो साझा की है। इन वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोकल लोग उन्हें सड़क पर जानवरों को खाना देने से मना कर रहे हैं। आम्रपाली उन्हें कहती हैं कि ये नियम बिलडिंग में लागू होते हैं पब्लिक प्लेस पर नहीं।

बता दें कि आम्रपाली शर्मा के एक्स अकॉउंट से जानकारी मिलती है कि उन्होंने आजतक, आईबीएन7 जैसे चैनलों में अपनी सेवा दी है। आज वो लाचार होकर अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालती है कि पता नहीं कि क्यों सिर्फ जानवरों को खाना देने के नाम पर उनके साथ ये सब हो रहा है।

यूपी के बरेली में ईसाई धर्मांतरण करवाने वाले तीन गिरफ्तार, ‘नीति शास्त्र’ की पुस्तक बाँट ईसाइयत कबूल करवाने का आरोप: बच्चे-महिलाएँ बनते थे निशाना

उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने तीन लोगों को हिन्दू बच्चों का प्रलोभन से ईसाई धर्मांतरण करवाने के मामले में गिरफ्तार किया है। तीनों एक किराए के घर में बच्चों को बहका कर उनका धर्मांतरण करवाते थे। पुलिस को इस मामले में बाहरी फंडिंग का भी शक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बरेली के इज्जतनगर इलाके में यह काम चल रहा था। इज्जतनगर के ही निवासी गुलशन बहादुर ने जब यहाँ जाकर सच्चाई जाननी चाहिए तो मिशनरी वालों ने उनका भी धर्मांतरण करवाने का प्रयास किया। गुलशन बहादुर ने बताया कि वह रविवार (28 जुलाई, 2024) को इस इलाके में अपने किसी काम से पहुँचे थे।

यहाँ पर रहने वालों ने उन्हें सूचना दी कि कुछ लोग एक घर में कुछ बच्चों को लेकर गए हैं और उनको ईसाई धर्मांतरण के लिए प्रलोभन दे रहे हैं। वह स्वयं जब अंदर गए तो उन्होंने देखा कि यहाँ तीन लोग मौजूद थे और उन्होंने काफी बच्चों को यहाँ इकट्ठा कर रखा था। तीनों ने बताया कि वह बच्चों को ईसाई धर्म में दीक्षित कर रहे हैं।

उन्होंने गुलशन बहादुर को एक किताब पकड़ाई जिसका नाम नीति शास्त्र था लेकिन उसके अंदर ईसाई धर्म से जुड़ी बातें लिखी हुई थीं। उन्होंने गुलशन बहादुर को भी इसमें से कुछ पढ़वाया और उनका भी धर्मांतरण करवाने का प्रयास किया। गुलशन ने इसके बाद पुलिस बुलवा ली।

जब पुलिस यहाँ पहुँची तो उसे काफी संख्या में बच्चे मिले। पुलिस ने यहाँ से तीन लोगों को गिरफ्तार किया जिनके नाम प्रेम जायल, विनोद उपाध्याय और नितिन हैं। पुलिस ने यहाँ से बरामद बच्चों को उनके घर पहुँचा दिया और तीनों को थाने ले आई।

इन तीनों अपर आरोप है कि कि यह तीनों पहले भी ईसाई धर्मांतरण में लिप्त रहे हैं। यह अपनी सभाओं में बच्चों को ही मुख्यतः बुलाते थे और उन्हें खाने पीने का सामान देकर धर्मांतरण करवाते थे। इनमें से प्रेम जायल कुछ साल पहले ही धर्मांतरित हुआ था। इसके बाद वह बाक़ी लोगों को निशाना बनाने लगा।

बताया गया है कि वह ऐसी सभाओं में मुख्यतः बच्चों और महिलाओं को बुलाता और उन्हें ईसाई धर्म क़ुबूल करवाता। इसके बाद उन्हें हर रविवार को प्रार्थना सभा में आने को कहता। पुलिस ने अब उसके विरुद्ध धर्मान्तरण समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जाँच चालू कर दी है। हिन्दू संगठनों ने भी इस मामले में कार्रवाई की माँग की है।

जो कार्यकर्ता उठाता है पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण के खिलाफ आवाज, उसे ईशनिंदा के आरोप में मिली ‘सिर तन से जुदा’ की धमकी: मारने वाले को ₹1674450 देने की घोषणा

थायलैंड में लंबे समय से रह रहे पाकिस्तानी ईसाई कार्यकर्ता को कट्टरपंथी संगठनों से ‘सर तन से जुदा’ की धमकी मिली है। शनिवार (27 जुलाई) को उन्होंने इस धमकी को लेकर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ‘अल्लामा मुहम्मद राशिद मदनी हमदी जामिया दारुल उलूम हमदिया’ नामक देवबंदी संगठन ने उनकी हत्या करने वाले को 20,000 डॉलर (₹1674450) का इनाम देने की घोषणा की है।

कट्टर संगठनों का आरोप है कि फराज परवेज ने पैगंबर मोहम्मद की तस्वीर बनाकर ईशनिंदा की है। इसके बाद पाकिस्तान में ईसाई कार्यकर्ता के खिलाफ ‘सिर तन से जुदा’ का आह्वान किया गया। उनके खिलाफ पोस्टर जारी किया गया।

पोस्टर में लिखा है, “शरिया के अनुसार, ऐसे व्यक्ति मौत की सजा का हकदार है। ऐसे व्यक्ति को मौत की सजा दी जानी चाहिए।” जामिया दारुल उलूम ने मुसलमानों से अपील की है कि वो थायलैंड जाकर फराज परवेज से बदला लें।

फेसबुक पर पोस्ट की गई वीडियो में इस्लामी उलेमा मुहम्मद राशिद मदानी ने परवेज की हत्या की बात कही है। जिसके बाद ऑपइंडिया ने थायलैंड से फराज परवेज से बात की। इस पर उन्होंने कहा, “मेरे सिर पर इनाम रखने का मकसद यही है कि मैं हिंदू लड़कियों के धर्म परिवर्तन और रेप के खिलाफ जो आवाज उठाता हूँ वो शांत हो जाए।”

फ़राज़ परवेज़ ने भयावह योजनाओं का खुलासा करते हुए कहा, “पाकिस्तानी मुसलमान मुझे फ़ोन कर रहे हैं, भारतीय दूतावास के अधिकारी होने का नाटक कर रहे हैं। वे मेरी मदद करने का दावा करते हैं और ज़ोर देते हैं कि मैं उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलूँ। यह हनी ट्रैपिंग जैसा है। वे मुझे पकड़ना चाहते हैं, प्रताड़ित करना चाहते हैं और फिर मुझे मार डालना चाहते हैं।”

बता दें कि ऑपइंडिया ने इसी साल फराज परवेज पर डिटेल रिपोर्ट की। उसमें बताया गया था कि कैसे उन्हें पाकिस्तान से थायलैंड जाना पड़ा था सिर्फ इन्हीं कट्टरपंथियों के कारण। 2017 में भी उनके विरुद्ध फर्जी ईशनिंद का आरोप लगाकर उन्हें धमकियाँ दी गई थीं।

3 छात्रों की मौत के बाद केजरीवाल सरकार पर फूटा लोगों का गुस्सा, मेयर के पोस्टर पर कालिख पोती: AAP नेता के खिलाफ प्रदर्शन जारी

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में शनिवार (27 जुलाई 2024) को बारिश के बाद बेसमेंट में पानी भरने से हुए हादसे में तीन अभ्यर्थियों की मौत के बाद रविवार को दिल्ली में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने अपने साथियों की मौत पर दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच, छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया है। इसमें कई छात्र घायल हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। इस बीच, छात्रों ने दिल्ली की मेयर शैली ओबेरॉय के पोस्टर पर कालिख भी पोत दी।

दिल्ली में तीन छात्रों की मौत को लेकर युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है और भारी संख्या में छात्र करोल बाग मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने वी वॉन्ट जस्टिस के नारे लगाए।

उधर, दिल्ली की मेयर शैली ओबेरॉय के घर के बाहर भी प्रदर्शन किया गया। कोचिंग माफिया और शैली ओबेरॉय के खिलाफ ABVP के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज भी किया।

वहीं AAP सांसद स्वाति मालीवाल भी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच पहुँची। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बच्चे बहुत दु:खी हैं और बहुत गुस्से में हैं। 12 घंटे से ज्यादा हो गए हैं लेकिन अभी तक न दिल्ली सरकार के कोई मंत्री या दिल्ली की मेयर आई हैं, कोई अधिकारी नहीं आया है। इन बच्चों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। मैं मानती हूं कि ये मौत कोई आपदा नहीं है बल्कि ये हत्या है, जितने भी दिल्ली सरकार के बड़े-बड़े लोग हैं उन पर FIR दर्ज होनी चाहिए। जितने बच्चों की मौत हुई है उनके घर पर जाकर 1 करोड़ का मुआवजा देना चाहिए। दिल्ली सरकार की मंत्री और मेयर को तुरंत यहाँ पर आना चाहिए।

प्रदर्शन कर रहे छात्र ने दिल्ली नगर निगम (MCD) पर निशाना साधते हुए कहा, “MCD का कहना है कि यह एक आपदा है, लेकिन मैं कहूंगा कि यह पूरी तरह से लापरवाही है। आधे घंटे की बारिश में घुटनों तक पानी भर जाता है। ‘आपदा’ ऐसी चीज है जो कभी-कभी होती है। मेरे मकान मालिक ने बताया कि वह पिछले 10-12 दिनों से पार्षद से नाले की सफाई कराने की कह रहे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

मामले में दिल्ली की मंत्री आतिशी ने मजिस्ट्रेट जाँच का आदेश देते हुए मुख्य सचिव से 24 में भीतर रिपोर्ट माँगी है। इस पर अभ्यर्थियों ने कहा, “घटना की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। हम चाहते हैं दिल्ली सरकार से कोई यहाँ आए और उन सभी छात्रों की जिम्मेदारी ले, जिन्होंने अपनी जान गँवाई है। सरकार के मंत्री और प्रतिनिधि अपने एसी कमरों से ट्वीट करके या पत्र लिखकर किसका भविष्य सुधार रहे हैं? हमें मामले में न्याय चाहिए।”

गौरतलब है कि दिल्ली में शनिवार (27 जुलाई 2024) शाम को जबरदस्त बारिश हुई। कई इलाकों में जलभराव होने के बाद कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में 12 फीट तक पानी भर जाने से 2 छात्राओं और 1 छात्र की मौत हो गई। मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश निवासी श्रेया, तेलंगाना निवासी तान्या और केरल नेविन के रूप में हुई है। घटना के समय कोचिंग सेंटर में 30 से अधिक छात्र थे, जिन्हें गोताखारों की मदद से बाहर निकाला, लेकिन 3 अभ्यर्थी काल का ग्रास बन गए।

बलूचियों को देखते ही गोली मार रहे पाकिस्तानी फौजी, हजारों प्रदर्शनकारी हिरासत में… 1 की मौत, कई घायल: बलूचिस्तानियों ने दुनिया से लगाई मदद की गुहार

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना नस्लीय नरसंहार को अंजाम दे रही है। आज पूरा ग्वादर अशांत हो चला है। हर तरफ संगीनों का साया है। बलूचियों को देखते ही गोली मार दी जा रही है, विरोध करने वालों को अगवा कर गायब कर दिया जा रहा है। हजारों बलूची नागरिक गलत तरीके से डिटेन कर लिए गए हैं। हाल ही में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की भी मौत हो गई, तो दर्जनों लोग घायल हो गए। यही नहीं, अब प्रशासन ने बलूच नेताओं को खुलेआम सफाए की धमकी भी दी है, जिसके खिलाफ लोगों ने आवाज उठाई है।

अब इस मामले में ग्वादर के मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलूच ने आवाज उठाई है और ग्वादर में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों को दुनिया के सामने रखा है। महरंग ने बताया है कि ग्वादर को पूरी तरह से कैद कर लिया गया है, जिसकी वजह से न कोई शह में आ सकता है और न ही बाहर जा सकता है। दुनिया को संदेश देते हुए कहा कि सुरक्षा बल ग्वादर में स्थानीय लोगों पर गोलाबारी और गोलीबारी कर रहे हैं, जिससे किसी को भी शहर में प्रवेश करने या बाहर जाने से रोका जा रहा है। यही नहीं, ग्वादर में इंटरनेट भी बैन किया जा चुका है।

ग्वादर में कड़ाई तह से बढ़ गई है, जब से महरंग बलूच के नेतृत्व वाली बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) ने 13 जून, 2024 को कराची प्रेस क्लब में ‘बलूच नरसंहार’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी। इसके बाद से महरंग बलूच और अन्य बीवाईसी नेताओं को उत्पीड़न और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार (27 जुलाई 2024) को स्थिति और भी खराब हो गई। महरंग बलूच ने कहा, “सेना ने बलूचिस्तान को सैनिक इलाके में बदल दिया है। हम बलोच लोग शांत हैं और शांति से ही विरोध कर रहे हैं। हम लोकतांत्रिक अधिकारों से आवाज उठा रहे हैं और बलूचों को बलूच नरसंहार के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है।”

इस मामले में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली बलूचिस्तान सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ग्वादर में विरोध प्रदर्शन के आयोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। महरंग ने कहा कि बीवाईसी ने कुछ घंटों के लिए सार्वजनिक सभा आयोजित करने की योजना बनाई थी, जिसमें पूरे राज्य से लोग शामिल होने वाले थे। लेकिन बलूचिस्तान सरकार और आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) ने कार्यकर्ताओं के घरों पर छापे मारना और बलूचों का अपहरण करना शुरू कर दिया है। अब तक 200 से ज़्यादा बलूचों को हिरासत में लिया जा चुका है।

मस्तुंग में धरने का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ता बेबर्ग बलूच ने कहा, “मस्तुंग में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिसमें 14 लोग घायल हो गए, जबकि एक व्यक्ति की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रांत के अन्य इलाकों, जिनमें दलबांडिन, मकरान, तुर्बत, मस्तुंग और ग्वादर शामिल हैं, में संचार सेवाएं बंद कर दी गई हैं और वहाँ के लोगों की स्थिति के बारे में कोई नहीं जानता। क्वेटा में भी धरना जारी है, स्थानीय लोग स्वेच्छा से बाजार बंद कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। इस बीच, संचार पूरी तरह से कट गया है, और लोगों को नहीं पता कि ग्वादर में क्या हो रहा है।”

ग्वादर के जिला कलेक्टर ने महरंग बलूच को फोन पर धमकाते हुए कहा कि उन्हें और बीवाईसी नेतृत्व को गोली मारने का आदेश है। उन्होंने यह भी कहा कि जब मोबाइल सेवाएँ बंद हो जाएँगी, तो वे बीवाईसी नेतृत्व के खिलाफ अपना अभियान शुरू कर देंगे। तब से ग्वादर प्रांत के बाकी हिस्सों से पूरी तरह से कट गया है, और यहांँतक ​​कि स्थानीय पत्रकारों या कार्यकर्ताओं को भी स्थिति के बारे में पता नहीं है। महरंग बलूच ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं से राज्य की क्रूर हिंसा की निंदा करने और इस समय बलूचों के साथ खड़े होने की अपील की।

बता दें कि ग्वादर में पाकिस्तान चीन की मदद और पैसों से सीपीईसी प्रोजेक्ट के तहत पोर्ट बना रहा है। यहाँ हाईवे से लेकर कई प्रोजेक्ट हो रहे हैं, जिनका बलोच विरोध कर रहे हैं। बलोचों को कुचलने के लिए पाकिस्तान सरकार लगातार क्रैकडाउन कर रही है। यही नहीं, चीन के दबाव में बलूच प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सेना को काम पर लगा दिया गया है। हजारों बलोचों के गायब होने के मामले में लाखों बलोच प्रदर्शन भी कर रहे हैं, लेकिन चीन के दबाव में पाकिस्तान सरकार अपने ही लोगों को मारने से नहीं चूक रही है।