Home Blog Page 766

यूपी में माँ-बाप-बहन सब मर गए, पर ओडिशा की जेल में बंद दारा सिंह को नहीं मिली पेरोल: सरेंडर को दिखाया गिरफ्तारी, पूरे परिवार को किया टॉर्चर

साल 1999 में ओडिशा के मनोहरपुर में स्थानीय लोगों को ईसाई में धर्मान्तरण कराने के आरोप में ऑस्ट्रेलियाई पादरी ग्राहम स्टेंस की हत्या उनकी 2 बेटों के साथ कर दी गई थी। इस मामले में दारा सिंह का नाम चर्चा में आया था। साल 2000 में ओडिशा की तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने दारा सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से दारा सिंह को एक दिन का भी परोल नहीं मिला है।

दारा सिंह की गिरफ्तारी के 24 साल गुजर गए हैं। इन 24 वर्षों में दारा सिंह के परिवार में कई बदलाव हुए है। परिवार कई बार ख़ुशी और गम के मौकों से गुजरा है। इन सभी अवसरों पर तमाम प्रयासों के बावजूद दारा सिंह को परोल नहीं मिला। ऑपइंडिया ने दारा सिंह के परिवार से मुलाकात करके इस मामले की शुरुआत से अब तक के हालातों की जानकारी जुटाई है।

ऐसे दारा सिंह बने रवींद्र पाल

दारा सिंह का मूल नाम रवींद्र कुमार पाल है। रवींद्र पाल के भाई अरविन्द पाल ने ऑपइंडिया को बताया कि उनका परिवार खानदानी तौर पर हिन्दू धर्म को समर्पित है। रवींद्र के पिता भी पूजा-पाठ करके ही अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते थे। इंटरमीडियट की पढ़ाई के बाद रवींद्र पाल ने घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए नोएडा में नौकरी शुरू कर दी।

रवींद्र कुमार पाल भी जो काम करते थे, उसको सही समय से अपने अंजाम तक पहुँचाते थे। कर्मठता और लगन को देखते हुए कम्पनी के स्टाफ और अधिकारी रवींद्र कुमार पाल को दारा सिंह नाम से बुलाने लगे थे। उस समय देश में दारा सिंह नाम के एक पहलवान हुआ करते थे। उनकी चर्चा देश-विदेश में थी। इस तरह रवींद्र पाल का नाम दारा सिंह पड़ गया।

नोएडा से शिफ्ट हुए ओडिशा

अरविन्द कुमार पाल हमें आगे बताते हैं कि नोएडा में नौकरी करने के ही दौरान उन्हें ओडिशा का एक साथी मिला। उस साथी से दारा सिंह से इतनी अच्छी दोस्ती हो गई कि दोनों एक-दूसरे के घर आने-जाने लगे। दारा सिंह को ओडिशा पसंद आने लगा और वो कुछ दिनों बाद अपने साथी के साथ नोएडा की नौकरी छोड़ कर ओडिशा में बस गए।

ओडिशा में दारा सिंह ने क्योंझर जिले में प्राइवेट तौर पर बच्चों को पढ़ाने की नौकरी कर ली। वे बच्चों को हिंदी भाषा पढ़ाते थे और साथ ही उन्हें हिन्दू धर्म की अच्छाइयाँ बताते थे। यहाँ बताना जरूरी है कि रवींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह मूलत: उत्तर प्रदेश के औरैया के रहने वाले थे। हालाँकि, अब वे ओडिशा को अपनी कर्मभूमि बना लिया था।

ऐसे जुड़े बजरंग दल से

दारा सिंह के परिजनों ने बताया कि उनके द्वारा स्कूल में की जाने वाली धर्म-चर्चा आसपास के गाँवों में फ़ैल गई। इस चर्चा से प्रभावित होकर कई अभिभावक भी दारा सिंह से हिन्दू धर्म के बारे में बातचीत करने लगे। थोड़े ही दिनों में दारा सिंह की ख्याति पूरे क्योंझर और मयूरभंज आदि जिलों में फ़ैल गई।

वो स्कूल से समय मिलने के बाद जनजातीय समुदाय की बस्तियों में घूमने लगे और उन्हें हिन्दू धर्म के बारे में जागरूक करने लगे। बहुत कम समय में ही दारा सिंह को उड़िया भाषा का भी ज्ञान हो गया। उनकी इसी प्रसिद्धि से हिन्दू संगठन के सदस्यों ने उन्हें सम्पर्क किया और बाद में दारा सिंह बजरंग दल से जुड़ गए।

ओडिशा में ईसाई मिशनरियाँ थीं सक्रिय

अरविन्द कुमार पाल हमें आगे बताते हैं कि जब दारा सिंह ने बजरंग दल पदाधिकारी के तौर पर कार्यभार सँभाला तब ओडिशा ईसाई धर्मान्तरण से बुरी तरह से प्रभावित था। उनका कहना है कि गाँव के गाँव कन्वर्ट हो रहे थे। कन्वर्जन के इस रैकेट का मुखिया ग्राहम स्टेंस को माना जा रहा था। ग्राहम स्टेंस ऑस्ट्रेलिया का रहने वाला एक पादरी था।

बताते हैं कि ग्राहम स्टेंस 25 साल पहले लोगों को प्रभावित करने के लिए खूब पैसे उड़ाता है। वह उस समय वैसे ही जीप में चला करता था, जिस तरह की गाड़ी में उससमय सांसद-विधायक चला करते थे। बकौल अरविन्द, उनके भाई ने धर्मान्तरण के खिलाफ लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया। इसी वजह से वो कई साजिशकर्ताओं के निशाने पर भी आ चुके थे।

दारा नहीं मिले तो भाई को पकड़ कर ले गए

अरविन्द कुमार पाल कहना है कि साल 1999 में ग्राहम स्टेंस की हत्या के बाद जब दारा सिंह को ओडिशा पुलिस और सीबीआई की संयुक्त टीम नहीं पकड़ पाई तो उन्हें ही घर से उठा लिया गया था। तब स्थानीय पत्रकारों द्वारा खबर उड़ाई गई कि दारा सिंह का भाई गिरफ्तार कर लिया गया है।

अरविन्द कुमार का कहना है कि उस समय पुलिस और सीबीआई का व्यवहार उनके परिवार के प्रति बेहद क्रूर था। सीबीआई की टीम ने उनकी माँ, पिता और बहनों से भी दुर्व्यवहार किया था। अरविंद का कहना है कि वे बिना किसी जुर्म के लम्बे समय तक हिरासत में रखे गए थे और उन्हें ओडिशा के जंगलों में घुमाया गया था।

दारा सिंह का भाई अरविन्द कुमार और भतीजा गोलू

सरेंडर को दिखाया गया गिरफ्तारी

दारा सिंह के भाई का दावा है कि उनकी गिरफ्तारी की फैलाई गई झूठी खबर को सुनकर दारा सिंह ने ओडिशा के एक पुलिस थाने में सरेंडर कर दिया था। आरोप है कि तब सरकार ने दारा सिंह पर लाखों रुपए का इनाम रखा था, जिसे लेने के लालच में ओडिशा पुलिस के संबंधित थाने ने दारा सिंह के सरेंडर को गिरफ्तारी दिखा दिया था।

जिस थाने में दारा सिंह ने आत्म समर्पण किया था, उसके बारे में परिजनों ने बताया कि उसके पुलिसकर्मी दारा सिंह को जंगल में लेकर गए और वहाँ से सरेंडर को गिरफ्तारी का रूप देने का प्रयास किया। हालाँकि, बाद में इस साजिश की पोल खुल गई थी। इसलिए दावा है कि इनाम की राशि अब तक किसी को भी नहीं दी गई।

कथित गिरफ्तारी (सरेंडर) के बाद दारा सिंह की पहली फोटो

टॉर्चर और माँ-पिता की मौत पर परोल नहीं

अरविन्द कुमार पाल का आरोप है कि तब सीबीआई और ओडिशा पुलिस ने उनके भाई दारा सिंह को काफी टॉर्चर किया था। दारा सिंह के परिजन इसके खिलाफ आवाज उठाते थे, लेकिन उनकी कोई कहीं सुनवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि तब किसी भी नेता, मीडिया या अदालत ने दारा सिंह के समर्थन में डाली गई किसी भी अर्जी पर कोई सकारात्मक रुख नहीं अपनाया।

अरविन्द कुमार पाल हमें बताते हैं कि क्योंझर के साथ कटक व एक अन्य जेल में दारा सिंह की अदला-बदली की गई। कटक जेल में दारा सिंह पर विवाद की एक FIR अलग से भी दर्ज की गई थी। पिछले 24 वर्षों में उनके पिता, माँ और फिर एक बहन की अकाल मौत हो गई। ये सभी दारा सिंह के लिए हमेशा परेशान रहते थे।

इन सभी की इच्छा मौत से पहले एक बार दारा सिंह से मिलने की थी। हालाँकि, इन सभी की इच्छा अधूरी ही रह गई। दारा सिंह ने अपने पिता, माता और बहन आदि की मौत के बाद पेरोल की अर्जी डाली पर उनको जेल से बाहर नहीं निकलने दिया गया। किसी न किसी स्तर पर दारा सिंह की अर्जी पर अड़ंगा डाला गया।

गोलू अपने चाचा की मौजूदगी में ही करेगा ब्याह

माता, पिता और बहन की मौतों के अतिरिक्त पिछले साल दारा सिंह की भतीजी का ब्याह भी हुआ। इस शादी में भी तमाम कोशिशों के बावजूद दारा सिंह को शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। अब आने वाले समय में दारा सिंह के लगभग 24 वर्षीय भतीजा और 22 वर्षीया भतीजी का ब्याह होना है। इन दोनों की इच्छा है कि उनकी शादी दारा सिंह की मौजूदगी में हो।

दारा सिंह की भतीजी बड़ी होकर पुलिस अधिकारी बनना चाहती है, जबकि घर की आर्थिक स्थिति खराब देखते हुए भतीजा गोलू पास की ही एक कम्पनी में प्राइवेट जॉब कर रहा है। गोलू का कहना है कि भले ही कितना भी इंतजार करना पड़े, लेकिन वो शादी अपने बड़े पिताजी दारा सिंह की मौजूदगी में ही करेगा।

मिट्टी में दबी अस्थियाँ 20 साल बाद प्रवाहित

दारा सिंह उर्फ़ रवींद्र कुमार पाल की अपने पिता और माता की मौत से पहले मुलाकात नहीं हो पाई। उनके माता-पिता की अस्थियाँ एक घड़े में डालकर खेतों में लंबे समय तक दबाकर रखी गईं। उनके माता-पिता की अंतिम इच्छा थी कि जेल से रिहा होने के बाद दारा सिंह ही उनकी अस्थियाँ गंगा में विसर्जित करें। उनकी यह इच्छा भी अधूरी रह गई।

लगभग 20 साल के इंतजार के बाद आखिरकार दारा सिंह के भाई ने अपने माता-पिता की अस्थियों को गंगा में विधि-विधान से प्रवाहित कर दिया। इसकी वजह बताते हुए अरविन्द कुमार पाल ने कहा कि उन्हें बड़ी बेटी की शादी करनी थी और घर-परिवार में दबी अस्थियाँ हिन्दू धर्म के नियमानुसार विवाह आदि कार्यों में शुभ नहीं मानी जाती हैं।

कुछ गिने-चुने लोगों से ही मिली मदद, बाकी सब रहे खामोश

अरविन्द कुमार पाल ने अपनी पीड़ा को दुनिया के लोगों को बताने के लिए ऑपइंडिया का धन्यवाद किया। बेहद भावुक मन से उन्होंने कहा कि पिछले 24 वर्षों में बहुत कम लोगों ने उनके परिवार की मदद की। पिछले 2 दशक में वो और उनका परिवार हर प्रकार की प्रताड़ना का शिकार हुआ है।

अरविंद कुमार का कहना है कि उनके परिवार को अभी भी उम्मीद है कि दारा सिंह अपने जीवन के अंतिम समय को अपने घर और परिवार के साथ ही बिताएँगे। फिलहाल अगस्त 2024 में दारा सिंह की रिहाई वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

पहले अशरफ मंसूरी ने आशु बन इज्जत लूटी, फिर भरी कोर्ट में उतारी गई इज्जत: लव जिहाद पीड़िता ने माँगी इच्छामृत्यु, कहा- अश्लील सवाल किए, सब लगा रहे थे ठहाके

इंदौर में एक रेप पीड़िता न्याय माँगने कोर्ट के दरवाजे तक गई थी, लेकिन उसे नहीं पता था वहाँ उसका ऐसा हाल कर दिया जाएगा कि वो शर्म से इच्छामृत्यु माँगने को मजबूर हो जाएगी। लड़की ने इस बाबत राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई), राष्ट्रीय महिला आयोग और हाईकोर्ट के प्रशासनिक जज को पत्र लिखा है। अपनी शिकायत में उसने कोर्ट में पूछे गए सवालों के बारे में सबको बताया है और लिखा कि अगर उसे न्याय नहीं दिया जा सकता है तो उसे इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी जाए।

पीड़िता को अशरफ मंसूरी ने फँसाया था झांसे में

पीड़िता ने बताया कि साल 2015 में उसकी शादी हुई थी बाद में वो 2017 में अलग हो गए। 2019 में ‘हेलो’ ऐप के माध्यम से आरोपित अशरफ मंसूरी उसके संपर्क में आया। अशरफ लगातार युवती को मैसेज भेजता था। के बाद एक दिन युवती ने कहा कि वो उससे दोस्ती नहीं कर सकती क्योंकि वो मुस्लिम है। घरवाले रिश्ते के लिए नहीं मानेंगे। अशरफ ने बहुत मनाने की कोशिश की, मगर युवती ने साफ मना कर दिया था। हालाँकि कुछ दिन बाद अशरफ ने आशु नाम से आईडी बनाकर युवती को संपर्क किया, उसकी दोस्ती की और खुद को हिंदू बताया।

धीरे-धीरे दोनों के बीच मुलाकात हुई, रिश्ता आगे बढ़ा। युवती बोल चुकी थी कि उसे शादी करनी है टाइम पास नहीं, मगर अशरफ ने कहा कि उसकी शादी भाई-बहन की शादी के बाद ही होगी। युवती मान गई। दोनों लगातार मिलने लगे। आशु बनकर अशरफ बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ लाकर युवती को घुमाने लगा, दोस्तों के फ्लैट पर ले जाने लगा, संबंध बनाने लगा, मगर एक दिन अचानक उसका फोन बंद हो गया। युवती ने परेशान होकर उसके दोस्त को फोन किया और तब उसे पता चला कि वो आशु नहीं अशरफ मंसूरी है। पीड़िता यह सुन सदमे में आ गई। कुछ देर बार अशरफ का फोन आया तो उसने विरोध किया और अशरफ से बातचीत बंद कर दी। लेकिन तब अशरफ उसे घर और दफ्तर के बाहर आकर तंग करने लगा। फोटो लीक करने के लिए ब्लैकमेल करने लगा। अंत में पीड़िता ने थाने में शिकायत दी।

पीड़िता की शिकायत पर युवक के खिलाफ आरोपित युवक के खिलाफ धारा 376, 354, एससी-एसटी एक्ट और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया। आरोपित जेल भेजा गया और मामले की सुनवाई इंदौर जिला कोर्ट में शुरू हुई। 25 जुलाई को जब कोर्ट में पीड़िता पहुँची तो वहाँ उसके बयान का प्रति परीक्षण हुआ। इस बीच कुछ सवाल भी पीड़िता से ऐसे हुए कि पीड़िता कोर्ट में शर्मसार हो गई।

इंदौर जिला अदालत में पीड़िता हुई शर्मसार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रेप पीड़िता ने जज के बर्ताव के खिलाफ जो शिकायत राष्ट्रपति, सीजेआई, राष्ट्रीय महिला आयोग, हाईकोर्ट के जज से की है। उसमें कहा गया कि सुनवाई के दौरान अशरफ मंसूरी के वकील को सवाल करने थे लेकिन जज ने उन्हें रोका और कहा, “इस तरह की लड़कियों का प्रति परीक्षण तो मैं स्वयं ही करता हूँ।’ उन्होंने प्रति परीक्षण से पहले कोर्ट रूम के बंद दरवाजे खुलवा दिए। प्रति परीक्षण शुरू होते ही जज ने पूछा- ‘एक गाड़ी में कैसे रेप हो सकता है? रेप के बाद तुम्हें रुपए मिल गए थे?’ मैंने अपने वकील के माध्यम से इस पर आपत्ति ली तो जज ने उन्हें डांटकर चुप करा दिया।”

पीड़िता ने शिकायत में कहा “जज ने कोर्ट रूम का दरवाजा खुलवाकर मेरे बयान लिए। मुझसे ऐसे सवाल पूछे कि सिर शर्म से झुक गया। कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग हँस रहे थे। जज ने मुझे बाजारू लड़की कहा। पूछा कि तुम्हें रेप के बाद पैसे मिल गए कि नहीं‌? इतना ही नहीं खुद के लिए कहा कि मैं भी जींस-टी शर्ट पहनकर निकलूँगा तो तुम्हारे जैसी लड़कियाँ मेरे साथ घूमने निकल जाएँगी। आजकल इस तरह की बाजारु लड़कियों का कोई चरित्र नहीं बचा है। और ये रुपए लेने की नीयत से झूठे केस दर्ज कराती हैं। इस तरह के शब्द सुनकर कोर्ट में मौजूद आरोपित के वकील सहित सभी लोग ठहाके मारकर हँस रहे थे।”

आगे शिकायत में पीड़िता ने कहा, “जिन शब्दों के साथ न्यायाधीश महोदय ने मेरे चरित्र और गरिमा का हनन किया है, वह वापस लौटना संभव नहीं है। जिस प्रकार से न्यायाधीश महोदय के द्वारा मेरे साथ अश्लील तरीके से चर्चा की गई है। आरोपित के वकील को जैसा विश्वास दिलाया गया उससे ऐसा लग रहा है कि मुझे उनके न्यायालय में न्याय नहीं मिलेगा। मुझे न्याय नहीं दिलवा सकते तो इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान करें।'”

पीड़िता के वकील ने कहा कि 25 जुलाई को जज ने पीड़िता से प्रति परीक्षण किया था। इस दौरान पीड़िता के साथ अभद्र भाषा का उपयोग किया और अश्लील सवाल किए। स्त्री लज्जा का ध्यान नहीं रखा। अब उन्होंने पत्र लिख इच्छा मृत्यु माँगी है। पीड़िता ने कहा, “जज साहब के शब्दों से मेरे मन में कोर्ट की छवि धूमिल हुई। जब जज साहब सवाल पूछ रहे तो वहाँ बैठे लोग ठहाके लगा रहे थे। जब मुझसे सवाल पूछे जा रहे थे तो कोर्ट रूम का दरवाजा खुला था। जज साहब ने कई ऐसे सवाल किए जिससे मुझे काफी लज्जा महसूस हुआ।ठ

पेरिस ओलंपिक में जिसने लगाया ‘अल्लाहू अकबर’ का नारा, उसका कंधा टूटा… लाद कर ले जाना पड़ा: ओपनिंग सेरेमनी के लिए कमेटी ने ईसाइयों से माँगी माफी

ओलम्पिक खेल 2024 में भी इजरायल फिलिस्तीन के मुद्दे को उठाने से मुस्लिम खिलाड़ी बाज नहीं आ रहे। इसी क्रम में एक ताजिकिस्तानी जुडो खिलाड़ी ने इजरायली खिलाड़ी से हाथ मिलाने से मना कर दिया और अल्लाहू अकबर के नारे भी लगाए। इसके अगले ही राउंड में उन्हें बाहर होना पड़ा और वह चोटिल हो गया। वहीं दूसरी तरफ ओलम्पिक आयोजक कमिटी ने ईसाई भावनाओं को आहत करने को लेकर माफी माँगी है।

पेरिस ओलम्पिक के दूसरे दिन रविवार (28 जुलाई, 2024) को ताजिकिस्तान के जुडो खिलाड़ी नुराली एमोमाली का इजरायली खिलाड़ी तोहार बुत्बुल से मुकाबला था। इस मुकाबले में एमोमाली ने बुत्बुल को हरा दिया। मैच खत्म होने के बाद एमोमाली ने परम्पराओं का निर्वहन करने से इनकार कर दिया।

एमोमाली ने यहाँ बुत्बुल से हाथ मिलाने से मना कर दिया, जैसा हर मैच के बाद होता है। ऐसा संभवतः उन्होंने इसलिए किया क्योंकि वह मुस्लिम हैं और उनका समर्थन फिलिस्तीन को है जिसके साथ इजरायल का वर्तमान में युद्ध चल रहा है। एमोमाली ने यहाँ अल्लाहू अकबर का नारा भी लगाया। इस मुकाबले के बाद इजरायली खिलाड़ी बाहर हो गया।

इजरायली खिलाड़ी से हाथ ना मिलाने और अल्लाहू अकबर कहने के कुछ देर बाद एमोमाली जापानी खिलाड़ी से भिड़े। जापानी खिलाड़ी हिफुमी आबे से भिड़े। आबे ने उन्हें इस मैच में हरा दिया और जोरदार पटखनी दी। अंत में आबे ने एमोमाली को इतनी तेज जमीन पर पटका कि उनका कन्धा ही अपनी जगह से हट गया।

एमोमाली जमीन पर पड़े रहे और उन्हें अन्य लोग वहाँ से उठा कर ले गए। उनको मैट पर कराहते हुए देखा गया जबकि आबे अगले मैच में फिर विजयी हुए और उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। एमोमाली की कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

ओलम्पिक से जुड़े एक दूसरे विवाद में ओलम्पिक आयोजन समिति ने माफी माँगी है। ओलम्पिक आयोजन समिति ने इसकी ओपनिंग सेरेमनी में लियोनार्दो की एक पेंटिंग ‘द लास्ट सपर’ का चित्र गलत ढंग से करने पर माफ़ी माँगी है। यह पेंटिंग ईसाइयों के पैगम्बर जीसस के अंतिम भोज के संबंध में बनाई गई थी। कहा जाता है कि उन्होंने अपने अनुयायियों के साथ भोज किया था।

ओलम्पिक सेरेमनी में इस पेंटिंग के किरदारों की जगह ट्रांसजेंडर लोगों को दिखाया गया था और इसका भौंडा चित्रण किया था। इसमें ग्रीक देवता और बाक़ी ईसाइयों को दिखाया गया था। इससे दुनिया भर में ईसाइयों की भावनाएँ आहत हुई थीं। इसको लेकर विश्व भर आलोचना की गई थी। अब पेरिस की ओलम्पिक कमेटी ने इसको लेकर माफी माँगी है।

उनका कहना है कि वह इसके जरिए एक सन्देश भेजना चाह रहे थे और वह सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर इसाइयों की भावनाएँ इससे आहत हुई हैं तो वह माफ़ी माँगते हैं। आयोजकों ने कहा कि किसी की भावनाएँ आहत करने का उनका लक्ष्य नहीं था।

सीने में तलवार घोंप कर RSS स्वयंसेवक की हत्या, रिपोर्ट में आवा – मुंबई पुलिस के सामने ही मार डाला: आरिफ-सद्दाम ने साथियों संग मिल कर दिया घटना को अंजाम

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में अरविन्द वैश्य नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई है। हत्या का आरोप अल्लू, आरिफ और शेर अली व उसके कुछ अन्य साथियों पर लगा है। आरोप है कि इन तीनों ने अरविन्द को पुलिस के आगे ही मार डाला है। मृतक RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़ा बताया जा रहा है। हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अब तक 1 आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। बाकी हमलावरों की तलाश में दबिश दी जा रही है। घटना रविवार (28 जुलाई, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुंबई के धारावी इलाके की है। रविवार को यहाँ अरविन्द के भाई शैलेन्द्र वैश्य ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के मुताबिक, घटना रविवार शाम सवा 7 बजे के आसपास की है। तब अल्लू, आरिफ, शुभम और शेर अली का सिद्धेश नाम के व्यक्ति से किसी बात को ले कर झगड़ा हो रहा था। इन अल्लू और उसके साथी सिद्धेश और उसके पिता को पीटने लगे। इसी झगड़े में बीच-बचाव करने अरविन्द भी पहुँच गया। आरोप है कि अल्लू और उसके साथियों ने अरविन्द की भी पिटाई कर दी।

बताया जा रहा है कि अपने साथ हुई मारपीट की शिकायत करने अरविन्द धारावी पुलिस स्टेशन गया। यहाँ ड्यूटी पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर ने अरविन्द के साथ 2 पुलिस कॉन्स्टेबलों को घटनास्थल पर भेजा। आरोप है कि तब सद्दाम और जुम्मन ने अरविन्द को पुलिस के आगे ही केस वापस लेने की धमकी दी। धमकी को अनदेखा कर के अरविन्द पुलिसकर्मियों के साथ राजीव नगर स्थित वसीम के गैराज के आगे पहुँचा ही था कि अचानक उस पर हमला हो गया। हमले में अल्लू, आरिफ, सद्दाम, जुम्मन, शेर अली और शुभम शामिल बताए जा रहे हैं।

आरोप है कि हमलावरों ने दोनों पुलिस कॉन्स्टेबलों के आगे ही अरविन्द के सीने में तलवार घोंप दी। पुलिस ने अल्लू को दौड़ा कर पकड़ लिया, बाकी हमलावर फरार हो गए। घायल अरविन्द वहीं गिर कर तड़पने लगा जिसे अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने अरविन्द को मृत घोषित कर दिया। विश्व हिन्दू परिषद का आरोप है कि अरविन्द की हत्या में कुल 7 हमलावर शामिल थे लेकिन पुलिस ने महज 2 आरोपितों के ही खिलाफ FIR दर्ज की है। नाराज हिन्दू संगठनों ने थाने के आगे प्रदर्शन किया और बाकी हमलावरों पर भी कार्रवाई की माँग की है।

‘हम परमेश्वर यीशु की पूजा कर रहे थे’: उदयराज के घर में लगा था जमावड़ा, VHP का दावा- हिंदुओं को लालच देकर बना रहे थे ईसाई

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में रविवार (28 जुलाई 2024) को ईसाई में धर्मान्तरण की कोशिश का मामला सामने आया है। यहाँ बिना अनुमति के एक प्रार्थना सभा चल रही थी। आरोप है कि यहाँ हिंदुओं का सामूहिक धर्मांतरण की कोशिश की जा रही है। हिन्दू संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर 7 लोगों को हिरासत में लिया है। इन लोगों के पास से ईसाई साहित्य बरामद हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अयोध्या के कोतवाली क्षेत्र का है। यहाँ के दर्शननगर बाजार में साईं का पुरवा नाम से एक गाँव है। रविवार को इस गाँव में उदय राज नाम के व्यक्ति के घर कुछ लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था। बताया जा रहा है कि इन्हें प्रार्थना के नाम पर जमा किया गया था। इसी दौरान वहाँ विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता पहुँच गए।

वीएचपी के कार्यकर्ताओं ने प्रार्थना सभा की आड़ में ईसाई धर्मान्तरण का आरोप लगाकर हंगामा करना शुरू कर दिया। इसके बाद उदयराज के घर प्रार्थना सभा में पहुँचे दूसरे पक्ष के लोगों ने हिन्दू संगठन के सदस्यों का विरोध शुरू कर किया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस फ़ौरन मौके पर पहुँची। वहाँ पुलिस दोनों पक्षों को लेकर थाने आ गई और उनसे पूछताछ शुरू कर दी।

पड़ताल में पुलिस को बाइबिल सहित अन्य ईसाई साहित्य मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। अब तक कुल 7 लोगों को हिरासत में लिया गया है। विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने प्रार्थना सभा में मौजूद लोगों के बाइबिल पढ़ते हुए वीडियो भी बनाए हैं। इनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। VHP सदस्यों ने हिरासत में लिए गए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री लालजी शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उदय राज पिछले 5 साल से इस तरह के काम में शामिल है। वह सेवा बस्तियों में जाकर दलितों को ईसाई बना रहा था। शर्मा ने कहा है कि उनका संगठन लम्बे समय से उदय राज पर नजर रखे हुए था। घटना के समय उदय राज के घर में 200 लोगों की मौजूदगी बताई जा रही है।

प्रार्थना सभा में मौजूद एक महिला ने बताया कि उनको काफी दुःख सहना पड़ा था, जिसकी वजह से वो परमेश्वर यीशु मसीह की प्रार्थना कर रही थी। इसी दौरान वहाँ हिन्दू संगठन के सदस्यों ने आकर हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि ये लोगों को पैसे आदि का लालच देकर लोगों को ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराते थे।

रेप, गर्भपात और प्राइवेट पार्ट में पैर की उंगली: हिंदू लड़की को सैफुद्दीन ने विदेश में फँसाया, देश में न्याय माँगने पर ‘कॉन्ग्रेस नेता’ ने लताड़ा

सोशल मीडिया पर लव जिहाद की एक पीड़िता का वीडियो सामने आया है। वीडियो में पीड़िता बताती दिख रही है कि उसके साथ कर्नाटक के सैफुद्दीन ने बहरीन में नशीला पदार्थ देकर धोखे से पहले रेप किया और बाद में उसे ब्लैकमेल करके उसका धर्मांतरण करवा दिया, उससे निकाह कर लिया। पीड़ित युवती का कहना है कि उस पर होने वाले अत्याचार बहरीन से शुरू हुए और कर्नाटक तक चलते रहे। कर्नाटक के बीदर में सैफुद्दीन के घर पर न केवल पीड़िता के साथ बदसलूकी हुई, मारपीट हुई बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट तक में उंगली डाली गई और कहा गया कि अब बताते हैं कि रेप कैसे होता है।

यौन शोषण का शिकार हुई पीड़िता की पहचान हम इस रिपोर्ट में उजागर नहीं कर रहे। उसका बदला हुआ नाम ‘अंकिता शर्मा’ इस रिपोर्ट में प्रयोग करेंगे, मगर साथ ही सारी वो बात भी जस की तस बताएँगे जो पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताई है।

अंकिता शर्मा, बहरीन में एक वीजा फर्म में काम करती थीं। वहीं उनकी मुलाकात बिजनेस क्लाइंट के तौर पर सैफुद्दीन से हुई। अंकिता को लगा बाहरी देश में कोई भारतीय मिला है तो उससे बात करनी चाहिए। उनकी यही सोच बाद में उसके लिए गले की फांस बन गई क्योंकि सैफुद्दीन के मंसूबे अलग थे। सैफुद्दीन एक दिन अंकिता से मिला और उसकी ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला दिया। अंकिता को अंदाजा भी नहीं था कि उस ड्रिंक को पीने के बाद उसके साथ क्या होने वाला है।

सैफुद्दीन ने उसके बेहोश होने के बाद उसका रेप किया उसकी नग्न तस्वीरें निकाली और फिर ब्लैकमेल करने लगा। बाद में पता चला अंकिता प्रेगनेंट है। अंकिता ने इसकी शिकायत बहरीन पुलिस को दी। पुलिस ने 3 घंटे में सैफुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया और 14 दिन बाद जाकर छोड़ा जब उसने कहा कि वो लड़की से निकाह करेगा, बच्चे का ख्याल रखेगा।

जेल से निकलने के बाद सैफुद्दीन ने अंकिता का धर्मांतरण करवा दिया और फिर उससे निकाह भी कर लिया। अंकिता अब भी कुछ समझ पाती तो शायद संभल जाती, लेकिन बात पहुँच गई उसके प्रेगनेंट होने तक। सैफुद्दीन ने उसे बरगलाया और कहा कि वो बहरीन से मुंबई चले क्योंकि बहरीन में उसका ध्यान रखने को कोई नहीं होगा। अंकिता ने फिर सैफुद्दीन पर यकीन कर लिया। मुंबई पहुँचकर अंकिता का सालवा अस्पताल में अबॉर्शन करवा दिया गया बिन उसकी मंजूरी के और एक दिन में ही उसे अस्पताल से भी चलता कर दिया गया।

अंकिता के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सैफुद्दीन अस्पताल के संपर्क में था। वो लगातार प्रक्रिया के बारे में पूछ रहा था, लेकिन जब उसके साथ मेडिकल लापरवाही की गई और अंकिता की हालत बिगड़ गई तो कोई उसका ध्यान रखने नहीं आया। अंकिता की तबीयत बिगड़ती रही और सैफुद्दीन गायब रहा।

अंकिता बताती है कि सैफुद्दीन और उसके परिवार वाले अपने कनेक्शन अंडरवर्ल्ड तक से बताते थे। कहते थे कि वो पहले पाकिस्तानी थे। इन्हीं सब बातों से वो अंकिता को डराने का प्रयास करते थे, लेकिन अंकिता को डराना उनका ज्यादा दिन नहीं चला। गर्भपात के बाद अंकिता ने डरना बंद कर दिया। किसी तरह वो दोस्त की मदद लेकर सैफुद्दीन के परिवार के पास पहुँची, यहाँ उसे उसके अधिकार मिलने की जगह और भी ज्यादा बदसलूकी की गई। कहा गया- पहले ये चेक करवाओ की इस लड़की ने आखिरी बार सेक्स कब किया है।

इसके अलावा, अंकिता के शिकायत पत्र के अनुसार, जब वो कर्नाक के बीदर में सैफुद्दीन के घर गई तो वहाँ उन्हें मारने की कोशिश हुई, प्राइवेट पार्ट छूने का प्रयास हुआ, उसमें पैर की उंगली भी डाली गई, कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई। इस दौरान उसके घर पर एक कॉन्ग्रेस नेता भी था।

अंकिता के अनुसार, इन सब घटनाओं के बीच सैफुद्दीन का भाई वीडियो बना रहा था। बीच में उसका भाई अंकिता पर हाथ उठाने आया। बाद में बाकी भाइ भी आ गए और घर में मौजूद मोहम्मद अलीमुद्दीन (शिकायत के अनुसार कॉन्ग्रेस नेता) घर की महिला को बोला- ‘इसे पकड़ो हम बताते हैं कि रेप कैसे होता है।’ जब अंकिता चीखने चिल्लाने लगी तो उसे थप्पड़ मारकर कमरे में बंद कर दिया गया। बाद में उसने कमरे से जाने की कोशिश की तो एक भाई ने आकर उसे छाती से पकड़ लिया और फिर बिन टीशर्ट बाहर जाने को कहा।

अंकिता बताती है कि उसके साथ कमरे में बंद कर जो हुआ उसकी वीडियो सैफुद्दीन के भाई ने बनाई थी। वो लोग धमकी दे रहे थे कि रही-सही जिंदगी खराब कर देंगे। अंकिता किसी तरह बचकर जब बीदर से निकली तो उसके परिजनों ने उन्हें घर बुला लिया। वह काफी समय सदमे में थीं। बाद में उसने गुंडवा थाना निरीक्षक के आगे अपनी शिकायत दर्ज कराई और अपनी सारी व्यथा सोशल मीडिया पर साझा की है। उसने गर्भपात की तस्वीर, सैफुद्दीन के घर में हुई बातचीत, थाने की वीडियो आदि अपने अकॉउंट पर डाली है। अंकिता का कहना है कि उसे टारगेट इसलिए किया गया क्योंकि वो हिंदू ब्राह्मण लड़की है और यूपी से है। अंकिता बताती हैं कि उसके साथ जो कुछ भी हुआ उसकी वीडियो जब उन्होंने सोशल मीडिया पर डाली तब तमाम महिलाएँ ऐसी सामने आईं जिन्होंने बताया कि वो भी ऐसी साजिशों का शिकार हुई है।

अयोध्या के रामलला लाओस के पोस्टेज स्टाम्प पर: प्राचीन है ‘हजार हाथियों की भूमि’ से भारत का कनेक्शन, रामायण से लेकर पंचतंत्र तक वहाँ लोकप्रिय

आपने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर को देखा होगा, उसमें रामलला की जो सुंदर प्रतिमा स्थापित की गई है उनका दर्शन भी अपने किया होगा और उनकी तस्वीरें अपने मोबाइल फोन में और सोशल मीडिया हैंडल में भी होंगी। लेकिन, ताज़ा खबर ये है कि अब रामलला का एक स्टाम्प भी जारी हुआ है। ये रामलला की तस्वीर वाला दुनिया का पहला पोस्टेज स्टाम्प है। इससे पहले कि आप समझें कि ये भारत में हुआ है, आपको बता दें कि ये दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश में हुआ है। इसे ‘हजार हाथियों की भूमि’ भी कहा जाता है।

भारत के विदेश मंत्री S जयशंकर के साथ लाओस के डिप्टी PM सलेउमक्से कोमासिथ

लाओस की संस्कृति भारत से काफी प्रभावित है। केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर हाल ही में लाओस दौरे पर गए थे, उसी दौरान ये पोस्टेज स्टाम्प जारी किया गया। भारत और ‘लाओ पीपल डेमोक्रेटिक कंट्री’ (LPDR) के बीच प्राचीन काल से ही चली आ रही सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत जुड़ाव को भी ये दर्शाता है। वहाँ के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सलेउमक्से कोमासिथ और भारत के विदेश मंत्री ने इस स्मारक पोस्टेज स्टाम्प को साथ मिल कर जारी किया।

यही है रामलला की तस्वीर वाला पोस्टेज स्टाम्प, जिसे लाओस ने जारी किया

ये कार्यक्रम राजधानी व्यिंचन में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में लाओस में भारत के एम्बेस्डर प्रशांत अग्रवाल भी मौजूद थे। असल में S जयशंकर ASEAN (दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों का समूह) की बैठक के लिए वहाँ पहुँचे थे। इस विशेष स्टाम्प सेट में 2 स्टाम्प हैं – एक में लुआंग फाबांग के बुद्ध को दिखाया गया है, दूसरे में अयोध्या के रामलला को दर्शाया गया है। बता दें कि लुआंग फाबांग पुराने समय में लाओस की राजधानी हुआ करती थी।

महात्मा बुद्ध भी इस सेट के एक पोस्टेज स्टाम्प पर दिखे, भारत ही थी उनकी कर्मभूमि

भारत और लाओ PDR के बीच बौद्ध धर्म एक पुल की तरह रहा है। भारत ही महात्मा बुद्ध की कर्मभूमि रही, उन्होंने यहीं पर यात्राएँ की, ऐसे में दक्षिण एशिया में जहाँ-जहाँ बौद्ध धर्म मजबूत है वहाँ भारत के साथ जुड़ाव बना। बता दें कि अयोध्या में रामलला की जो प्रतिमा स्थापित की है, उसमें उन्हें 5 वर्ष का दर्शाया गया है। कृष्णशिला से बनी इस प्रतिमा को कर्नाटक के अरुण योगीराज ने तराशा है। मंदिर के शिलान्यास और फिर प्राण-प्रतिष्ठा में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे थे।

बता दें कि लाओस में पहले जीववाद/सर्वात्मवाद की विचारधारा वाला धर्म चलता था। इसके बाद वहाँ हिन्दू धर्म पहुँचा, फिर बौद्ध धर्म। स्थानीय इतिहासकार मानते हैं कि यीशु मसीह के जन्म के पूर्व ही बौद्ध धर्म वहाँ पहुँच गया था। माना जाता है कि व्यिंचन में स्थित लुआंग को इसीलिए निर्मित किया गया था, ताकि वहाँ राजगीर से आए बौद्ध धर्म के अवशेषों को संरक्षित किया जा सके। बौद्ध भिक्षु फ्रा चाओ चंथाबुरी पसिथिसाक ने इसे बनवाया था।

लाओस में बौद्ध धर्म के साथ-साथ रामायण भी लोकप्रिय हो गया। दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में संस्कृत राजसभाओं की भाषाएँ बन गईं। इसके बाद दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में राजाओं ने सम्राट अशोक की नक़ल शुरू कर दी, जिन्हें ‘चक्रवर्ती’ माना जाता था। इसके बाद सर्वमान्य बनने के लिए वहाँ के राजा खुद को विष्णु, शिव और बुद्ध से जुड़ा हुआ दिखाने लगे। इससे वहाँ की राजनीति में स्थायित्व आया, संघर्ष कम हुआ। वहाँ अभिवादन की मुद्रा से लेकर शादी-विवाह की परंपराएँ, सब भारत से मिलती-जुलती हैं।

वहाँ की लाओ भाषा भी संस्कृत-प्राकृत से प्रभावित है। लाओस की विभिन्न लिपियाँ, वर्तमान में उपयोग में आने वाली ‘अक्सन लाओ’ और पुरानी ताई नोई लिपि, साथ ही धार्मिक पांडुलिपियों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तुआ थाम लिपि, सभी पल्लव लिपि से निकली हैं, जिसकी वंशावली खुद ब्राह्मी लिपि से जुड़ी है। ‘अक्सन’ शब्द ही संस्कृत शब्द ‘अक्षर’ से आया है। दोनों भाषाओं में कई शब्द मिलते-जुलते हैं: कुमारा (कुमारा), पतिवत (प्रतिवाद), प्रोम (ब्रह्मा), मित्ताफाब (दोस्ती), शांतिफाब (शांति), पथेट (प्रदेश), प्रणाम (प्रणाम), रुसी (ऋषि), शांति (शांति), श्री (श्री), सुत (सूत्र), सेट्ठी (श्रेष्ठी), युवतनारी (युवनारी), सभा (सभा), चंपा (कैंपा), नंग मेखला (मणि मेखला)।

वहाँ पर ‘विवाह’ को भी ‘विवाह’ ही कहा जाता है। लाओस में रामायण की कथा को कुछ ऐसे विकसित किया गया है, जैसे ये वहीं हुआ हो। वहाँ के बौद्ध विहारों की दीवारों पर आपको रामायण के दृश्य उकेरे हुए मिलेंगे। ओडिशा के विष्णु शर्मा द्वारा रचित ‘पंचतंत्र’ का भी वहाँ फ्रा संघराजा द्वारा सन् 1507 में अनुवादित किया गया था। फोउ लोखोन पहाड़ी पर राजा महेन्द्रवर्मन द्वारा स्थापित शिवलिंग और शिलालेख उपलब्ध है, एक अन्य शिलालेख में श्रीदेवानिका को युधिष्ठिर और धनंजय को इन्द्रद्युम्न की तुलना की गई है।

श्रीदेवानिका ने लाओस में एक ‘कुरुक्षेत्र’ की स्थापना करने का निर्णय लिया, क्योंकि जहाँ महाभारत का युद्ध हुआ था वो जगह उनके लिए ‘महातीर्थ’ जैसा था। भद्रेश्वर शिव वाले वट फु मंदिर में जयवर्मन प्रथम के शिलालेख में उल्लेख है कि पहाड़ी का नाम लिंग पर्वत था। 835 ई. के एक शिलालेख में श्रेष्ठपुरा को एक पवित्र स्थान बताया गया है क्योंकि यह शिव पूजा से जुड़ा था। जयवर्मन VI के ग्यारहवीं शताब्दी के शिलालेख में दर्ज है कि राजा के दरबारी पंडित तिलका की माँ की तुलना उनकी विद्या के कारण देवी सरस्वती से की गई है।

बिहार में नहीं मिलेगा 65% कोटा, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक से किया इनकार: जाति गिनने के बाद बढ़ाया था आरक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (29 जुलाई 2024) को बिहार में बढ़ाए गए आरक्षण को लेकर पटना हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। याचिका में बिहार सरकार ने पटना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती है। दरअसल, पटना हाई कोर्ट ने SC, ST, OBC और EBC के लिए आरक्षण को 50% से बढ़ाकर 65% करने के बिहार सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने अपील पर सुनवाई की अनुमति दी है। बिहार राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट से पटना उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ से संबंधित इसी तरह के कानून में अंतरिम आदेश पारित किया है।

श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ से इसी तरह अंतरिम राहत देने का आग्रह किया। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर एक बड़ी बेंच द्वारा भी विचार करने की आवश्यकता हो सकती है। इस मामले पर सितंबर में सुनवाई होगी।

बता दें कि 20 जून 2024 को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की पीठ ने एक जनहित याचिका पर बिहार आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) (संशोधन) अधिनियम 2023 और बिहार (शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश में) आरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2023 को रद्द कर दिया था।

दरअसल, साल 2023 में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की गठबंधन सरकार ने राज्य में जाति सर्वे कराया था। सर्वे के आँकड़ों के आधार पर राज्य सरकार ने कानून में संशोधन किया। नए कानून के तहत अत्यंत पिछड़े वर्गों (EBC) के लिए मौजूदा कोटा 18% से बढ़ाकर 25% कर दिया गया था। इसके साथ ही पिछड़े वर्गों (OBC) के आरक्षण कको 12% से बढ़ाकर 18% कर दिया गया।

इसके साथ सरकार ने अनुसूचित जातियों (SC) के आरक्षण को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों (ST) के कोटा को दोगुना करके 1 प्रतिशत को बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया था। ये सब कुछ राज्य में जनसंख्या के आधार पर आरक्षण को बढ़ाया गया था। लालू यादव की पार्टी राजद लगातार इसकी माँग कर रही थी।

इस कानून के खिलाफ जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई। इस पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार द्वारा किए गए आरक्षण संबंधी संशोधनों को भारतीय संविधान के खिलाफ बताया। हाई कोर्ट ने कहा कि ये संशोधन अनुच्छेद 15(4) और 16 (4) के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन करने वाला बताते हुए इसे खारिज कर दिया।

संविधान का अनुच्छेद 15(4) राज्य को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े नागरिकों के किसी भी वर्ग की उन्नति के लिए कोई विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है। इसी तरह अनुच्छेद 16 (4) में प्रावधान है कि राज्य किसी भी पिछड़े वर्ग के लिए पद आरक्षित कर सकता है, जिनका राज्य की सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

कर्नाटक में सरकारी खजाने से कॉन्ग्रेस नेताओं को मिलेगी ‘सैलरी’, जिलाध्यक्ष को ₹40 हजार और तहसील मुखिया को ₹25 हजार: गारंटी देखने के बहाने होगी भर्ती

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार अपनी गारंटी योजनाओं के जरिए राज्य के खजाने पर एक बार फिर जोर डालने जा रही है। कॉन्ग्रेस सरकार ने यह योजनाएँ सही से लागू हों, इसके लिए राज्य के हर जिले में एक कमेटी गठित करने की बात की है। इस कमेटी में कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को भरा जाएगा। इस कमेटी के काम करने का खर्चा सरकार उठाएगी।

कॉन्ग्रेस सरकार ने ऐलान किया है कि उसकी पाँच गारंटी योजनाएँ सही से लागू हों, इस बात को देखने के लिए राज्य, जिला और तालुक(तहसील) स्तर पर कमेटी बनेगी। राज्य स्तर की कमेटी का गठन भी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जून, 2024 में ही ऐलान कर दिया था कि इन कमेटियों के सदस्य कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता होंगे।

कर्नाटक सरकार ने अब ऐलान किया है कि जिला स्तर पर बनने वाली कमेटी के मुखिया को ₹40,000 प्रति माह मानदेय मिलेगा। इसके अलावा उन्हें प्रति बैठक भी एक अच्छी खासी धनराशि दी जाएगी। सरकार ने ऐलान किया है कि तहसील स्तर पर बनने वाली समितियों के मुखिया को ₹25,000 प्रति माह मानदेय मिलेगा।

इससे पहले बताया गया था कि इनको हर बैठक में जाने का पैसा भी मिलेगा। जिला स्तर की कमेटी में 21 सदस्य होंगे और इन्हें भी हर बैठक में जाने पर पैसा मिलेगा। इसके अलावा तहसील की कमेटी में 11 लोग होंगे। इनको भी बैठक में शामिल होने का पैसा मिलेगा। यह सारा पैसा सरकार के खजाने से दिया जाएगा। कर्नाटक के सभी 31 जिलों में यह कमेटियाँ बनाई जाएँगी।

इन सब जिला कमेटियों के ऊपर एक राज्यस्तरीय कमेटी भी बनाई गई है। इसमें एक अध्यक्ष और चार उपाध्यक्ष हैं। इसके मुखिया कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री HM रेवन्ना को बनाया गया है। इसके अलावा इसके चारों उपाध्यक्ष भी कॉन्ग्रेस नेता हैं। इन सबको बेंगलुरु में एक ऑफिस भी दिया गया है। इसमें 31 सदस्यों को भी रखा गया है।

राज्य स्तर की कमेटी के मुखिया HM रेवन्ना को कैबिनेट मंत्री और बाकी सदस्यों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। उनके लिए और भी सुविधाएँ सरकार देगी। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जून, 2024 में एक बैठक में यह ऐलान किया था कि कमेटी के सभी सदस्य पार्टी के कार्यकर्ता होंगे।

कमेटी में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के भरे जाने को लेकर भी CM सिद्दारमैया से सवाल पूछा गया था। उन्होंने इसका जवाब दिया था कि भले ही सरकारी कर्मचारी इन योजनाओं को पहुँचाने के लिए हैं लेकिन कार्यकर्ता ज्यादा अच्छे जानते हैं कि किसे लाभ मिल रहा है या नहीं।

कर्नाटक में 31 जिले और 240 तालुक हैं। इस हिसाब से पैनल में लगभग 3600 कार्यकर्ताओं की भर्ती होगी। इन्हें सरकारी खजाने से मानदेय और बैठक में आने के लिए पैसा मिलेगा, जो राज्य सरकार वहन करेगी। यह खर्चा इन गारंटी स्कीम पर 2023-24 में खर्च हो रहे लगभग ₹60,000 करोड़ से इतर होगा।

राजस्थान के स्कूलों में 28 मई को सावरकर जयंती और 5 अगस्त को धारा 370 हटाने का उत्सव: भाजपा सरकार ने दिया निर्देश, होगा ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’ का आयोजन

सीएम भजनलाल शर्मा की अगुवाई वाली राजस्थान की भाजपा सरकार ने प्रदेश के स्कूलों में 28 मई को सावरकर जयंती मनाने का निर्देश दिया है। वहीं, 29 मई को महाराणा प्रताप की जयंती पर छुट्टी रहेगी। हालाँकि, इस दौरान गर्मी की छुट्टियाँ होती हैं। वहीं, 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने को ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’ के रूप में मनाने और 13 अगस्त को वीर दुर्गादास राठौड़ जयंती मनाने के लिए कहा गया है।

शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष मोदी ने रविवार (28 जुलाई 2024) को प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों के लिए 2024-25 का कैलेंडर जारी किया। कैलेंडर के अनुसार, इस बार साल के 365 दिनों में 213 दिन ही स्कूल संचालित होंगे। 152 दिन त्योहारों और अन्य कारणों से अवकाश रहेगा। इन अवकाशों में रविवार का अवकाश भी शामिल है।

राजस्थान सरकार का निर्देश

शिक्षा विभाग के कैलेंडर में कहा गया है कि 19 अगस्त को रक्षाबंधन (अवकाश)/संस्कृत दिवस (उत्सव) के रूप में मनाया जाएगा। इस बार दीपावली का अवकाश 27 अक्टूबर से 7 नवंबर तक यानी 12 दिन का रहेगा। सर्दियों की छुट्टियाँ हर बार की तरह 25 दिसंबर से शुरू और 5 जनवरी तक रहेंगी।

स्कूलों में फर्स्ट टेस्ट 21 अगस्त से 23 अगस्त तक होंगे, जबकि सेकेंड टेस्ट 14 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक होंगे। इस बार अर्ध वार्षिक परीक्षा 12 दिसंबर से 24 दिसंबर तक होंगे। वहीं, वार्षिक परीक्षा (बोर्ड क्लास को छोड़कर) 24 अप्रैल से 8 मई तक होंगे। परीक्षा का परिणाम 16 मई को घोषित होगा।

शिक्षा विभाग ने हर महीने के दूसरे व चौथे शनिवार को ‘नो बेग डे’ घोषित किया है। इस दिन स्कूलों में अलग-अलग गतिविधियाँ आयोजित होगी, जिसमें बच्चों को स्टेज पर आने का अवसर दिया जाएगा। स्कूलों में नया सेशन एक जुलाई से शुरू होगा। इससे पहले रिजल्ट घोषित होने के साथ ही स्कूलों में छुट्टियाँ घोषित हो जाएँगी। 

सरकारी स्कूलों में वीर सावरकर जयंती मनाने और जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का उत्सव मनाने के आदेश पर पूर्व शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने कहा, “शिक्षा के क्षेत्र में या पंचांग में किसी भी तरह की राजनीति का समावेश नहीं होना चाहिए।”