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यूपी के बरेली में ईसाई धर्मांतरण करवाने वाले तीन गिरफ्तार, ‘नीति शास्त्र’ की पुस्तक बाँट ईसाइयत कबूल करवाने का आरोप: बच्चे-महिलाएँ बनते थे निशाना

उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने तीन लोगों को हिन्दू बच्चों का प्रलोभन से ईसाई धर्मांतरण करवाने के मामले में गिरफ्तार किया है। तीनों एक किराए के घर में बच्चों को बहका कर उनका धर्मांतरण करवाते थे। पुलिस को इस मामले में बाहरी फंडिंग का भी शक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बरेली के इज्जतनगर इलाके में यह काम चल रहा था। इज्जतनगर के ही निवासी गुलशन बहादुर ने जब यहाँ जाकर सच्चाई जाननी चाहिए तो मिशनरी वालों ने उनका भी धर्मांतरण करवाने का प्रयास किया। गुलशन बहादुर ने बताया कि वह रविवार (28 जुलाई, 2024) को इस इलाके में अपने किसी काम से पहुँचे थे।

यहाँ पर रहने वालों ने उन्हें सूचना दी कि कुछ लोग एक घर में कुछ बच्चों को लेकर गए हैं और उनको ईसाई धर्मांतरण के लिए प्रलोभन दे रहे हैं। वह स्वयं जब अंदर गए तो उन्होंने देखा कि यहाँ तीन लोग मौजूद थे और उन्होंने काफी बच्चों को यहाँ इकट्ठा कर रखा था। तीनों ने बताया कि वह बच्चों को ईसाई धर्म में दीक्षित कर रहे हैं।

उन्होंने गुलशन बहादुर को एक किताब पकड़ाई जिसका नाम नीति शास्त्र था लेकिन उसके अंदर ईसाई धर्म से जुड़ी बातें लिखी हुई थीं। उन्होंने गुलशन बहादुर को भी इसमें से कुछ पढ़वाया और उनका भी धर्मांतरण करवाने का प्रयास किया। गुलशन ने इसके बाद पुलिस बुलवा ली।

जब पुलिस यहाँ पहुँची तो उसे काफी संख्या में बच्चे मिले। पुलिस ने यहाँ से तीन लोगों को गिरफ्तार किया जिनके नाम प्रेम जायल, विनोद उपाध्याय और नितिन हैं। पुलिस ने यहाँ से बरामद बच्चों को उनके घर पहुँचा दिया और तीनों को थाने ले आई।

इन तीनों अपर आरोप है कि कि यह तीनों पहले भी ईसाई धर्मांतरण में लिप्त रहे हैं। यह अपनी सभाओं में बच्चों को ही मुख्यतः बुलाते थे और उन्हें खाने पीने का सामान देकर धर्मांतरण करवाते थे। इनमें से प्रेम जायल कुछ साल पहले ही धर्मांतरित हुआ था। इसके बाद वह बाक़ी लोगों को निशाना बनाने लगा।

बताया गया है कि वह ऐसी सभाओं में मुख्यतः बच्चों और महिलाओं को बुलाता और उन्हें ईसाई धर्म क़ुबूल करवाता। इसके बाद उन्हें हर रविवार को प्रार्थना सभा में आने को कहता। पुलिस ने अब उसके विरुद्ध धर्मान्तरण समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जाँच चालू कर दी है। हिन्दू संगठनों ने भी इस मामले में कार्रवाई की माँग की है।

जो कार्यकर्ता उठाता है पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण के खिलाफ आवाज, उसे ईशनिंदा के आरोप में मिली ‘सिर तन से जुदा’ की धमकी: मारने वाले को ₹1674450 देने की घोषणा

थायलैंड में लंबे समय से रह रहे पाकिस्तानी ईसाई कार्यकर्ता को कट्टरपंथी संगठनों से ‘सर तन से जुदा’ की धमकी मिली है। शनिवार (27 जुलाई) को उन्होंने इस धमकी को लेकर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ‘अल्लामा मुहम्मद राशिद मदनी हमदी जामिया दारुल उलूम हमदिया’ नामक देवबंदी संगठन ने उनकी हत्या करने वाले को 20,000 डॉलर (₹1674450) का इनाम देने की घोषणा की है।

कट्टर संगठनों का आरोप है कि फराज परवेज ने पैगंबर मोहम्मद की तस्वीर बनाकर ईशनिंदा की है। इसके बाद पाकिस्तान में ईसाई कार्यकर्ता के खिलाफ ‘सिर तन से जुदा’ का आह्वान किया गया। उनके खिलाफ पोस्टर जारी किया गया।

पोस्टर में लिखा है, “शरिया के अनुसार, ऐसे व्यक्ति मौत की सजा का हकदार है। ऐसे व्यक्ति को मौत की सजा दी जानी चाहिए।” जामिया दारुल उलूम ने मुसलमानों से अपील की है कि वो थायलैंड जाकर फराज परवेज से बदला लें।

फेसबुक पर पोस्ट की गई वीडियो में इस्लामी उलेमा मुहम्मद राशिद मदानी ने परवेज की हत्या की बात कही है। जिसके बाद ऑपइंडिया ने थायलैंड से फराज परवेज से बात की। इस पर उन्होंने कहा, “मेरे सिर पर इनाम रखने का मकसद यही है कि मैं हिंदू लड़कियों के धर्म परिवर्तन और रेप के खिलाफ जो आवाज उठाता हूँ वो शांत हो जाए।”

फ़राज़ परवेज़ ने भयावह योजनाओं का खुलासा करते हुए कहा, “पाकिस्तानी मुसलमान मुझे फ़ोन कर रहे हैं, भारतीय दूतावास के अधिकारी होने का नाटक कर रहे हैं। वे मेरी मदद करने का दावा करते हैं और ज़ोर देते हैं कि मैं उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलूँ। यह हनी ट्रैपिंग जैसा है। वे मुझे पकड़ना चाहते हैं, प्रताड़ित करना चाहते हैं और फिर मुझे मार डालना चाहते हैं।”

बता दें कि ऑपइंडिया ने इसी साल फराज परवेज पर डिटेल रिपोर्ट की। उसमें बताया गया था कि कैसे उन्हें पाकिस्तान से थायलैंड जाना पड़ा था सिर्फ इन्हीं कट्टरपंथियों के कारण। 2017 में भी उनके विरुद्ध फर्जी ईशनिंद का आरोप लगाकर उन्हें धमकियाँ दी गई थीं।

3 छात्रों की मौत के बाद केजरीवाल सरकार पर फूटा लोगों का गुस्सा, मेयर के पोस्टर पर कालिख पोती: AAP नेता के खिलाफ प्रदर्शन जारी

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में शनिवार (27 जुलाई 2024) को बारिश के बाद बेसमेंट में पानी भरने से हुए हादसे में तीन अभ्यर्थियों की मौत के बाद रविवार को दिल्ली में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने अपने साथियों की मौत पर दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच, छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया है। इसमें कई छात्र घायल हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। इस बीच, छात्रों ने दिल्ली की मेयर शैली ओबेरॉय के पोस्टर पर कालिख भी पोत दी।

दिल्ली में तीन छात्रों की मौत को लेकर युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है और भारी संख्या में छात्र करोल बाग मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने वी वॉन्ट जस्टिस के नारे लगाए।

उधर, दिल्ली की मेयर शैली ओबेरॉय के घर के बाहर भी प्रदर्शन किया गया। कोचिंग माफिया और शैली ओबेरॉय के खिलाफ ABVP के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज भी किया।

वहीं AAP सांसद स्वाति मालीवाल भी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच पहुँची। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बच्चे बहुत दु:खी हैं और बहुत गुस्से में हैं। 12 घंटे से ज्यादा हो गए हैं लेकिन अभी तक न दिल्ली सरकार के कोई मंत्री या दिल्ली की मेयर आई हैं, कोई अधिकारी नहीं आया है। इन बच्चों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। मैं मानती हूं कि ये मौत कोई आपदा नहीं है बल्कि ये हत्या है, जितने भी दिल्ली सरकार के बड़े-बड़े लोग हैं उन पर FIR दर्ज होनी चाहिए। जितने बच्चों की मौत हुई है उनके घर पर जाकर 1 करोड़ का मुआवजा देना चाहिए। दिल्ली सरकार की मंत्री और मेयर को तुरंत यहाँ पर आना चाहिए।

प्रदर्शन कर रहे छात्र ने दिल्ली नगर निगम (MCD) पर निशाना साधते हुए कहा, “MCD का कहना है कि यह एक आपदा है, लेकिन मैं कहूंगा कि यह पूरी तरह से लापरवाही है। आधे घंटे की बारिश में घुटनों तक पानी भर जाता है। ‘आपदा’ ऐसी चीज है जो कभी-कभी होती है। मेरे मकान मालिक ने बताया कि वह पिछले 10-12 दिनों से पार्षद से नाले की सफाई कराने की कह रहे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

मामले में दिल्ली की मंत्री आतिशी ने मजिस्ट्रेट जाँच का आदेश देते हुए मुख्य सचिव से 24 में भीतर रिपोर्ट माँगी है। इस पर अभ्यर्थियों ने कहा, “घटना की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। हम चाहते हैं दिल्ली सरकार से कोई यहाँ आए और उन सभी छात्रों की जिम्मेदारी ले, जिन्होंने अपनी जान गँवाई है। सरकार के मंत्री और प्रतिनिधि अपने एसी कमरों से ट्वीट करके या पत्र लिखकर किसका भविष्य सुधार रहे हैं? हमें मामले में न्याय चाहिए।”

गौरतलब है कि दिल्ली में शनिवार (27 जुलाई 2024) शाम को जबरदस्त बारिश हुई। कई इलाकों में जलभराव होने के बाद कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में 12 फीट तक पानी भर जाने से 2 छात्राओं और 1 छात्र की मौत हो गई। मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश निवासी श्रेया, तेलंगाना निवासी तान्या और केरल नेविन के रूप में हुई है। घटना के समय कोचिंग सेंटर में 30 से अधिक छात्र थे, जिन्हें गोताखारों की मदद से बाहर निकाला, लेकिन 3 अभ्यर्थी काल का ग्रास बन गए।

बलूचियों को देखते ही गोली मार रहे पाकिस्तानी फौजी, हजारों प्रदर्शनकारी हिरासत में… 1 की मौत, कई घायल: बलूचिस्तानियों ने दुनिया से लगाई मदद की गुहार

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना नस्लीय नरसंहार को अंजाम दे रही है। आज पूरा ग्वादर अशांत हो चला है। हर तरफ संगीनों का साया है। बलूचियों को देखते ही गोली मार दी जा रही है, विरोध करने वालों को अगवा कर गायब कर दिया जा रहा है। हजारों बलूची नागरिक गलत तरीके से डिटेन कर लिए गए हैं। हाल ही में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की भी मौत हो गई, तो दर्जनों लोग घायल हो गए। यही नहीं, अब प्रशासन ने बलूच नेताओं को खुलेआम सफाए की धमकी भी दी है, जिसके खिलाफ लोगों ने आवाज उठाई है।

अब इस मामले में ग्वादर के मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलूच ने आवाज उठाई है और ग्वादर में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों को दुनिया के सामने रखा है। महरंग ने बताया है कि ग्वादर को पूरी तरह से कैद कर लिया गया है, जिसकी वजह से न कोई शह में आ सकता है और न ही बाहर जा सकता है। दुनिया को संदेश देते हुए कहा कि सुरक्षा बल ग्वादर में स्थानीय लोगों पर गोलाबारी और गोलीबारी कर रहे हैं, जिससे किसी को भी शहर में प्रवेश करने या बाहर जाने से रोका जा रहा है। यही नहीं, ग्वादर में इंटरनेट भी बैन किया जा चुका है।

ग्वादर में कड़ाई तह से बढ़ गई है, जब से महरंग बलूच के नेतृत्व वाली बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) ने 13 जून, 2024 को कराची प्रेस क्लब में ‘बलूच नरसंहार’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी। इसके बाद से महरंग बलूच और अन्य बीवाईसी नेताओं को उत्पीड़न और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार (27 जुलाई 2024) को स्थिति और भी खराब हो गई। महरंग बलूच ने कहा, “सेना ने बलूचिस्तान को सैनिक इलाके में बदल दिया है। हम बलोच लोग शांत हैं और शांति से ही विरोध कर रहे हैं। हम लोकतांत्रिक अधिकारों से आवाज उठा रहे हैं और बलूचों को बलूच नरसंहार के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है।”

इस मामले में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली बलूचिस्तान सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ग्वादर में विरोध प्रदर्शन के आयोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। महरंग ने कहा कि बीवाईसी ने कुछ घंटों के लिए सार्वजनिक सभा आयोजित करने की योजना बनाई थी, जिसमें पूरे राज्य से लोग शामिल होने वाले थे। लेकिन बलूचिस्तान सरकार और आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) ने कार्यकर्ताओं के घरों पर छापे मारना और बलूचों का अपहरण करना शुरू कर दिया है। अब तक 200 से ज़्यादा बलूचों को हिरासत में लिया जा चुका है।

मस्तुंग में धरने का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ता बेबर्ग बलूच ने कहा, “मस्तुंग में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिसमें 14 लोग घायल हो गए, जबकि एक व्यक्ति की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रांत के अन्य इलाकों, जिनमें दलबांडिन, मकरान, तुर्बत, मस्तुंग और ग्वादर शामिल हैं, में संचार सेवाएं बंद कर दी गई हैं और वहाँ के लोगों की स्थिति के बारे में कोई नहीं जानता। क्वेटा में भी धरना जारी है, स्थानीय लोग स्वेच्छा से बाजार बंद कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। इस बीच, संचार पूरी तरह से कट गया है, और लोगों को नहीं पता कि ग्वादर में क्या हो रहा है।”

ग्वादर के जिला कलेक्टर ने महरंग बलूच को फोन पर धमकाते हुए कहा कि उन्हें और बीवाईसी नेतृत्व को गोली मारने का आदेश है। उन्होंने यह भी कहा कि जब मोबाइल सेवाएँ बंद हो जाएँगी, तो वे बीवाईसी नेतृत्व के खिलाफ अपना अभियान शुरू कर देंगे। तब से ग्वादर प्रांत के बाकी हिस्सों से पूरी तरह से कट गया है, और यहांँतक ​​कि स्थानीय पत्रकारों या कार्यकर्ताओं को भी स्थिति के बारे में पता नहीं है। महरंग बलूच ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं से राज्य की क्रूर हिंसा की निंदा करने और इस समय बलूचों के साथ खड़े होने की अपील की।

बता दें कि ग्वादर में पाकिस्तान चीन की मदद और पैसों से सीपीईसी प्रोजेक्ट के तहत पोर्ट बना रहा है। यहाँ हाईवे से लेकर कई प्रोजेक्ट हो रहे हैं, जिनका बलोच विरोध कर रहे हैं। बलोचों को कुचलने के लिए पाकिस्तान सरकार लगातार क्रैकडाउन कर रही है। यही नहीं, चीन के दबाव में बलूच प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सेना को काम पर लगा दिया गया है। हजारों बलोचों के गायब होने के मामले में लाखों बलोच प्रदर्शन भी कर रहे हैं, लेकिन चीन के दबाव में पाकिस्तान सरकार अपने ही लोगों को मारने से नहीं चूक रही है।

तमिलनाडु में भाजपा कार्यकर्ता की निर्मम हत्या, अज्ञात लोगों ने घर जाते समय घेरकर मारा: BJP ने डीएमके पर निशाना साधा, कहा- राज्य में पुलिस का नहीं बचा डर

तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में भारतीय जनता पार्टी के जिला सचिव सेल्वाकुमार की निर्मम हत्या का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि शनिवार को भाजपा कार्यकर्ता को सड़क पर घेरकर अज्ञात लोगों ने मौत के घाट उतार दिया। अब बीजेपी ने इस हत्या के बाबत डीएमके पर निशाना साधा है और राज्य में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं जबकि इलाके के सांसद कार्ति पी चिदंबरम का कहना है कि इस हत्या का कोई राजनीतिक कारण नहीं था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेल्वाकुमार शनिवार (27 जुलाई 2024) को अपने ईंट भट्टे से मोटरसाइकल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उन पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद आरोपित फरार हो गए। राहगीरों ने सेल्वाकुमार को खून से लथपथ देखा और अधिकारियों को सूचित किया। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुँच देखा तो सेल्वाकुमार को अस्पताल लेकर गया जहाँ पता चला कि उसकी मौत हो चुकी थी।

हत्या की खबर सुनने के बाद भाजपा कार्यकर्ता समेत सेल्वाकुमार के समर्थक और ग्रामीण सड़कों पर आ गए। सबकी माँग थी कि आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए इलाके में पुलिस बल को तैनात किया है।

वहीं राज्य भाजपा प्रमुख के अन्नामलाई ने तमिलनाडु में बिगड़ते कानून व्यवस्था की ओर ध्यान दिलाते हुए इसे हत्याओं की राजधानी कहा। उन्होंने कहा, “असामाजिक तत्वों को सरकार या पुलिस का कोई डर नहीं है। मुख्यमंत्री, जिनके नियंत्रण में पुलिस है, एक राजनीतिक नाटक चला रहे हैं।” उन्होंने एमके स्टालिन से यह भी कहा कि वे आत्मचिंतन करें कि क्या उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का अधिकार है। उन्होंने मृतक के परिजनों को आश्वासन दिया है कि भाजपा उन्हें हर तरह से सपोर्ट करेगी।

इस मामले में सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने दावा किया कि सेल्वाकुमार की हत्या में कोई राजनीतिक संबंध नहीं है। कार्ति चिदंबरम ने एक्स पर कहा, “हत्या के संबंध में शिवगंगा जिले के एसपी से बात की, जिन्होंने कहा कि हत्या दो समूहों के बीच दुश्मनी के कारण हुई है और उन्होंने संदिग्धों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। इसमें कोई राजनीतिक कोण नहीं है। लेकिन हत्याओं की बढ़ती आवृत्ति चिंताजनक है।”

लाइन पर आ रहा मालदीव… आँख दिखाने वाले राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत को दिया धन्यवाद, माना- कर्ज चुकाने में चीन के अलावा इंडिया ने दी सबसे ज्यादा मदद

कुछ समय पहले तक भारत को आँख दिखाने वाला मालदीव और उसके नेता अब भारत का आभार जताते नहीं थक रहे। हाल में मालदीव के राष्ट्रपत मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव की नाजुक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करने के लिए चीन के साथ भारत को भी धन्यवाद दिया।

मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जु जिन्हें चीन का समर्थक माना जाता है, उन्होंने अपने देश की आजादी की 59वीं वर्षगाँठ के मौके पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चीन और भारत देश के कर्ज को चुकाने में सबसे अधिक मदद प्रदान करते हैं।

इसके अलावा एक स्थानीय समाचार पोर्टल ने मुइज्जू के हवाले से कहा, “मैं अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, आर्थिक संप्रभुता को सुनिश्चित करने और जनता की खातिर सहयोग करने के लिए मालदीव की ओर से चीन सरकार और भारत सरकार को धन्यवाद देता हूँ।”

बता दें कि मोहम्मद मुइज्जू पिछले वर्ष मालदीव में भारत विरोधी एजेंडा ‘इंडिया आउट’ अभियान के सहारे सत्ता में आए थे और सरकार में आते ही इन्होंने भारत से करीबन 80 सैन्यकर्मियों को वापस बुलाने की बात कही थी। वहीं बाद में मुइज्जू सरकार में मंत्री ने पीएम मोदी को अनाप-शनाप कहा था।

इस घटना के बाद अचानक मालदीव बॉयकॉट का ट्रेंड चला था जिसका असर मालदीव को अपने यहाँ आने वाले टूरिस्टों में कमी से देखना पड़ा था। बाद में मुइज्जु ने भारत के साथ बैर के दुष्परिणामों को समझा और दोनों देशों के संबंध सुधारने पर काम करना शुरू किया।

हाल की बात करें तो मुइज्जू ने प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के लिए आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भी शिरकत की थी। इसके अलावा मालदीव ने भारत की तरफ से दिए गए डोर्नियर विमान और हेलिकाप्टरों का इस्तेमाल इमरजेंसी चिकित्सा सेवाओं के लिए फिर से शुरू कर दिया है।

ओलंपिक के मैदान में उतरा ’12 साल की बच्ची का बलात्कारी’, दर्शकों के विरोध के बाद खुली सच्चाई: तरफदारी करने पर BBC पैनलिस्ट को माँगनी पड़ी माफी

नीदरलैंड्स की तरफ से एक ऐसा खिलाड़ी पेरिस ओलंपिक में उतरा है, जिसने 12 साल की बच्ची का इंग्लैंड जाकर रेप किया था। उसे 4 साल की सजा सुनाई गई थी। ये मामला 2014 का था, तब उस खिलाड़ी की उम्र 19 साल थी। इस खिलाड़ी का नाम स्टीवन वान डे वेल्डे (Steven van de Velde) है, जो वॉलीबाल खिलाड़ी है। पेरिस में स्टीवन जब नीदरलैंड के लिए खेलने के लिए मैदान पर उतरा, तो दर्शकों ने उसको खूब उल्टा-सीधा सुनाया और जमकर हूटिंग की, जिसके बाद ये मामला पूरी दुनिया की नजर में आ गया।

हैरानी की बात है कि एक तरफ स्टार महिला घुड़सवार चार्लोट दुजार्डिन को इसलिए ओलंपिक से बाहर कर दिया गया, क्योंकि 4 साल पहले उन्होंने अपने घोड़े को 24 कोड़े मारे थे। इस काम को अमानवीय और जानवरों पर अपराध करार दिया गया था और हॉर्स चैरिटी के एंबेसडर पद से भी हटा गिया गया था। वहीं, स्टीवन जैसे बलात्कारी को ओलंपिक में जगह दी जा रही है। ये ओलंपिक खेलों के आयोजकों के दोहरे रवैय्ये को भी दर्शाता है।

हैरानी की बात है कि एक ओलंपियन पाउला रैडक्लिफ, जो बीबीसी की कमेंट्री एक्सपर्ट टीम में शामिल है, उन्होंने ये कह कर स्टीवन का बचाव किया कि वो पुरानी बात हो गई है और अब स्टीवन शादीशुदा है, साथ ही काफी बदल गया है।

मैदान पर जबरदस्त हूटिंग के बाद खुला मामला

यूँ तो ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाले एथलीट्स को हीरो माना जाता है, लेकिन स्टीवन वान डे वेल्डे एक घोषित अपराधी हैं और 12 साल की बच्ची के रेप के अपराध में जेल की सजा काट चुके हैं। मामला 2014 का है, जब उस समय 19 साल के स्टीवन वान डे वेल्डे ने सोशल मीडिया के जरिए 12 साल की ब्रिटिश लड़की को अपने जाल में फंसाया था। वो ब्रिटेन गए थे और 12 साल की बच्ची को शराब पिलाकर उसके साथ संबंध बनाए थे। बच्ची को स्टीवन वान डे वेल्डे ने तबतक नहीं छोड़ा, जबतक उसने दर्द की शिकायत नहीं की और रोने नहीं लगी।

इस मामले में स्टीवन वान डे वेल्डे को गिरफ्तार कर लिया गया और 2016 में 4 साल की जेल की सजा सुनाई गई। एक साल की सजा उसे इंग्लैंड में काटनी पड़ी, और फिर उसे नीदरलैंड भेज दिया गया। बाकी कुछ महीने उसने नीदरलैंड की जेल में बिताए, फिर उसे रिहा कर दिया गया। स्टीवन वान डे वेल्डे आज के समय में नीदरलैंड का स्टार खिलाड़ी है और वॉलीबाल के खेल में पेरिस ओलंपिक में नीदरलैंड की टीम का प्रतिनिधित्व कर रहा है, जबकि पीड़ित लड़की उस भयावह हादसे से कभी उबर ही नहीं पाई और ड्रग्स में डूब गई। उस लड़की की जिंदगी फटेहाल और नर्क सरीखी बीती।

ओलंपिक गाँव से अलग हाई सिक्योरिटी होटल में रखा गया है स्टीवन वान डे वेल्डे

स्टीवन वान डे वेल्डे एक बाल यौन शोषक है, जिसकी वजह से उसे ओलंपिक खेलों के आयोजन वाली जगह से दूर रखा गया है। चूँकि ओलंपिक खेल में 11 साल की एथलीट भी हिस्सा ले रही है, ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक महासंघ ने उसे ओलंपिक गाँव में ठहराने की जिम्मेदारी ही नहीं ली, जिसके बाद नीदरलैंड्स की ओलंपिक कमेटी ने उसे अपनी गारंटी पर एक होटल में ठहराया है।

नीदरलैंड की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति का कहना है कि स्टीवन वान डे वेल्डे ने अपनी सजा पूरी कर ली है, साथ ही पुनर्वास कार्यक्रम पूरा कर लिया है। विशेषज्ञ भी इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि वो अब दोबारा ऐसा अपराध नहीं करेगा। वहीं, वान डी वेल्डे के वॉलीबॉल पार्टनर मैथ्यू इमर्स ने उन्हें “दूसरे पिता की तरह” बताया, जिनके साथ वह “सहज” महसूस करते हैं। हालाँकि आम दर्शकों ने स्टीवन को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया है और वो इस खिलाड़ी को लगातार हूट कर रहे हैं।

बीसीसी की पैनलिस्ट ने दी थी शुभकामनाएँ

बीबीसी की स्पोर्ट्स एक्सपर्ट और खुद ओलंपियन रह चुकी पाउला रैडक्लिफ ने स्टीवन वान डे वेल्डे को शुभकामनाएँ दी, साथ ही ये कहकर बचाव किया कि वो अब शादीशुदा व्यक्ति हैं और पूरी तरह से बदल चुके हैं। उन्होंने कहा, “वह उन्हें “शुभकामनाएँ” देती हैं, क्योंकि उन्होंने अपना जीवन बदल लिया है और अब विवाहित हैं।” हालाँकि लोगों ने जब रेडक्लिफ की तीखी आलोचना की, तो उन्होंने माफी माँग ली।

ये पूरा मामला बताता है कि ओलंपिक जैसे खेल भी ऐसे अपराधियों से अछूते नहीं हैं, जहाँ बाल यौन शोषण के अपराधी भी हिस्सा ले रहे हैं। हालाँकि इस पूरे मामले के सामने आने के बाद बाल यौन अपराधों और अपराधियों को लेकर लोगों में जागरुकता भी आ रही है। वहीं वान डे वेल्डे जैसे खिलाड़ियों की हूटिंग ये बताती है कि भले ही उसने सजा काट ली है और पुनर्वास कार्यक्रम में हिस्सा लिया हो, लेकिन उसके सर पर से अपराधी होने का टैग कभी नहीं हट सकता।

गीता में कृष्ण ने अर्जुन से जो कहा… बस वही था दिमाग में: पेरिस ओलंपिक्स 2024 में भारत को पहला मेडल दिलाने के बाद बोलीं मनु भाकर, कहा- सिर्फ कर्म पर था ध्यान

पेरिस ओलंपिक-2024 में भारत को पहला मेडल दिलाने के बाद मनु भाकर ने अपनी जीत पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया है कि खेल के अंतिम क्षणों में उनके मन में क्या चल रहा था। इस दौरान उन्होंने अपनी गीता पढ़ने की आदत और श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दी गई सीख की बात की।

दरअसल, मैच जीतने के बाद जब वो कैमरे के सामने आईं तो उन्होंने कहा कि वो इस जीत से बेहद खुश हैं। ये वो मेडल है जिसका भारत को इंतजार था, वो सिर्फ जो कुछ महसूस कर रही हैं वो बहुत अद्भुत है। उन्होंने बहुत मेहनत की थी और हर शॉट पूरी ताकत से लगाया। उन्होंने कहा कि वो खुद हैं कि उन्हें कास्य पदक मिला। आगे वो कोशिश करेंगी कि मेडल का रंग बदल सकें।

मनु से जब आखिरी पलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह शांत थीं और अपना कर्म करना चाहती थीं और ये उन्होंने गीता पढ़कर सीखा जिससे उन्हें मेडल जीतने में मदद मिली। उन्होंने कहा, “मैं गीता पढ़ती हूँ तो आखिरी में मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि मैं वो करता हूँ जो मैं कर सकता हूँ, मैं वो करूँ जो करने की मुझसे उम्मीद की जा रही है और बाकी सब कुछ किस्मत पर छोड़ देती हूँ। गीता में कृष्णा ने कहा है कि आप अपने कर्म पर ध्यान दो उसका जो परिणाम है उस पर नहीं। मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि अपना काम करती हूँ बाकी देखा जाएगा।”

बता दें कि मनु भाकर के इस मेडर से भारत का पेरिस ओलंपिक में खाता खुला। मनु भाकर ने 10 मीटर विमेंस एयर पिस्टल में कांस्य पदक जीत लिया है। उन्होंने आखिर तर कोरियाई खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर दी, लेकिन वो तीसरे नंबर पर रही। इस स्पर्धा का स्वर्ण और रजत पदक, दोनों ही दक्षिण कोरियाई खिलाड़ियों ने जीता है। दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता है। मनु भाकर ने फाइनल में 221.7 अंक के साथ कांस्य पदक जीता है।

सिर पर थूका और पटक कर किया गैंगरेप, हमले में बचे टेनिस कोच ने हमास के आतंक की सुनाई कहानी: कहा- मैं तबसे तनाव में

इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमले से बच कर आए एक व्यक्ति ने अपनी दास्तान मीडिया को सुनाई है। उसने बताया है कि हमास के आतंकियों ने उसके साथ रेप किया और उसे पकड़ कर प्रताड़ित किया। उसने तबसे घर से बाहर निकलना बंद कर दिया है।

ब्रिटिश न्यूज वेबसाइट डेली मेल को दिए एक इंटरव्यू में पीड़ित ने अपनी कहानी बताई है। उसने बताया कि वह इजरायल का एक विख्यात टेनिस कोच है। वह हमास के हमले से पहले एक सामान्य जीवन जी रहा था। लेकिन हमले ने उसका जीवन बदल दिया।

उसने बताया कि वह 6 अक्टूबर, 2024 को इजरायल के किब्बुत्ज़ इलाके में पहुँचे थे जहाँ नोवा म्यूजिक फेस्टिवल चल रहा था। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर की सुबह तक पार्टी अच्छी तरीके से चल रही थी और यहाँ हजारों लोग शामिल हो रहे थे। यहाँ माहौल काफी अच्छा था।

उन्होंने बताया कि सुबह उन्हें अलर्ट सायरन सुनाई दिए। उन्होंने बताया कि वह पहले कुछ समझ नहीं पाए लेकिन कुछ ही देर में साफ़ हो गया कि यहाँ आतंकी घुस आए हैं। पीड़ित ने बताया कि वह इसके बाद भागे लेकिन उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था।

थोड़ी देर बाद उन्हें आतंकियों ने पकड़ लिया। आतंकियों ने उन्हें घेर रखा था। पीड़ित ने बताया कि आतंकियों ने उनको जमीन पर गिरा दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें पकड़ने वाले आतंकी हमास की नकबा ब्रिगेड के थे। यह ब्रिगेड हमास की स्पेशल फ़ोर्स है।

इसके बाद उनके साथ मारपीट की जाने लगी। आतंकियों ने उनके कपड़े उतरवा दिए। उसके बाद आतंकियों ने उनके सर पर थूकना चालू कर दिया। उन्हें यहूद के नाम से पुकार कर गालियाँ दी। आतंकी इन सबके बीच हंस रहे थे। वह आपस में लोगों की हालत को लेकर मजाक बना रहे थे।

इसके बाद आतंकियों ने पीड़ित का रेप चालू कर दिया। पाँच आतंकियों ने मिल कर उनका रेप किया। इस बीच मारपीट और थूकना जारी रहा। वह लगातार रेप करते रहे और कई लोगों को इस बीच अपने साथ उठा ले गए। पीड़ित को उन्होंने वहीं छोड़ दिया जिसके बाद उसने छुप कर अपनी जान किसी तरह बचाई।

जब उन्हें बचाने वाले आए तो उन्होंने बाहर निकल कर घटना के बारे में बताया। उन्होंने बताया वह तबसे कहीं निकल कर नहीं जाते हैं। उनके घर में रहने के कारण टेनिस का करियर भी रुक गया है। तनाव के कारण उनका 20 किलोग्राम वजन भी बढ़ चुका है।

गौरलतब है कि 7 अक्टूबर, 2024 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल में बड़ा आतंकी हमला किया था। हजारों हमास आतंकियों ने इजरायली सीमा में घुस कर एक म्यूजिक फेस्टिवल में 1200 से अधिक लोगों को मार दिया था। उन्होंने कई गाँव भी तबाह कर दिए थे। हमास के आतंकी अपने साथ 250 से अधिक लोगो को पकड़ ले गए थे।

हमास के आतंकियों ने एक जर्मन यहूदी महिला शानी लौक की अर्धनग्न देह की परेड पूरे फिलिस्तीन में करवाई थी। फिलिस्तीन के लोगों ने शानी के शरीर पर थूका था। इसके कई वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुए थे। उन्होंने अन्य कई महिलाओं के साथ भी बलात्कार किया था। तब से लगातार इजरायल और हमास आमने सामने हैं।

पोर्न की जकड़ में बेटा, हैवानियत का शिकार बनी बेटी… लाश देख भी नहीं रोया घरवालों का दिल, लड़के को बचाने में जुटे: खोखले होते रिश्तों की भयावह तस्वीर, क्या होगा आगे

बहन-भाई का रिश्ता समाज में सबसे पवित्र रिश्तों में से एक माना जाता है लेकिन क्या हो अगर इस रिश्ते को तार-तार करने वाले उदाहरण कंटेंट बनाकर बच्चों के आगे परोसे जाएँ। क्या उसका असर उनके दिमाग पर या आपसी रिश्तों में नहीं पड़ेगा?

हाल में एक शर्मनाक मामला मध्यप्रदेश के रीवा से सामने आया है। 13 साल के लड़के ने पोर्न फिल्म देखने के बाद अपनी 9 साल की मासूम बहन का रेप किया और बाद में जब बहन ने कहा कि वो पापा से शिकायत करेगी तो डर से उसकी हत्या कर दी। लड़का पकड़ा न जाए इसके लिए उसने माँ को कॉन्फिडेंस में लिया, माँ को सारी बात बताई… लेकिन माँ ने सबकुछ जानते हुए बेटी की हत्या पर विरोध नहीं किया और न ही दोनों 17 और 18 साल की बड़ी बहनों ने पूछा कि उनके भाई ने ये क्या किया है। उलटा सबने लड़के को बचाने के लिए मामले को बरगलाने का पूरा प्रयास किया। वो तो पुलिस के संज्ञान में मामला आने के बाद केस का खुलासा हुआ और मीडिया में जानकारी आई।

अब ऐसा नहीं है कि ऐसी घटना पहली बार देखने को मिली है। आप एक बार गूगल पर सर्च करके देखिए तो आपको तमाम ऐसे मामले देखने को मिलेंगे जब पोर्न देखने के बाद रिश्तों की खिल्ली उड़ी। बच्चियों ने अपने भाई, पिता, चाचा या मामा में ही हैवान देखा। ऑपइंडिया पर कुछ दिन पहले ही एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी जिसमें तमाम वो मामले गिनाए गए थे जब अश्लील सामग्री देखने के बाद लड़कों ने बहन, बेटियों को ही हवस का शिकार बना लिया।

जैसे मध्यप्रदेश से ही कुछ समय पहले एक मामला सामने आया था जहाँ 9 साल की ही लड़की को निशाना बनाया था। मामले में फर्क सिर्फ इतना था कि उस बच्ची के साथ हैवानियत करने वाला उसका पिता था। पूछताछ में आरोपित ने बताया था कि उसे पोर्न देखने की आदत थी और इसी लत के चलते उसने अपना निशाना अपनी बच्ची को बनाया।

अब सोचिए ये भाई और पिता के रिश्तों का हाल है तो बाकी पुरूष जिनका लड़की से किसी रूप में लेना-देना नहीं होता तो उन पर पोर्न आदि का क्या असर पड़ता होगा… उनका मन क्या एक भी बार लड़की को शिकार बनाने से पहले झिझकेगा। पोर्न की सुलभता सिर्फ मानसिक रूप से किसी को उग्र नहीं कर रही बल्कि रिश्तों को खोखला भी कर रही है।

आसानी से मौजूद है पोर्न और अश्लील कंटेंट

छोटे बच्चों के हाथ में आज के समय में मोबाइल का होना चिंताजनक नहीं है बल्कि मोबाइल पर आसानी से उपलब्ध होने वाली सामग्री चिंताजनक है। बच्चे मोबाइल पर क्या करते हैं किसी को नहीं पता। मान लीजिए वो फिल्म या कोई सीरिज ही देख रहे हैं… क्या आप इस चीज को सुनिश्चित कर पाएँगे कि वहाँ उसे अश्लील सामग्री देखने को न मिले… नहीं। ऐसा हो ही नहीं सकता है। एक बटन दबाने के साथ सब कुछ सामने आ जाता है।

रही-सही कसर फिल्में और ओटीटी कंटेंट पूरा कर देते हैं। अश्लील सामग्री आज के फिल्म निर्माताओं की सबसे बड़ी पसंद है। चाहे छोटा सा सीन डालकर ही फिल्म को तड़कता भड़कता बनाएँ लेकिन वो ऐसा करते जरूर हैं। आप देखेंगे आजकल हर सामान्य फिल्म में भी अश्लीलता का छौंक लगाकर उसे दर्शकों तक पहुँचाया जाता है। शायद फिल्म निर्माताओं के लिए वो सिर्फ कंटेंट होता है जिससे उनकी कमाई के मौके बढ़ें, लेकिन नैतिकता के नाते यदि सोचें तो ये सवाल तो उठता है न कि आखिर इसे भोगेगा कौन, उनकी टारगेट ऑडियंस क्या होगी… क्या ऐसी सामग्री देखने वाले इतने परिपक्व होंगे कि उसे सिर्फ वो मनोरंजन के लिहाज से ग्रहण करें और दिमाग पर असर न होने दें… ।

आज फिल्ममेकरों से अश्लील सामग्रियों को फिल्म कंटेंट बनाने पर अगर कोई सवाल भी करे तो वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसे पेश करने के तरीकों पर बहस करने लगते हैं। आखिर में तर्क दियाय जाता है कि जो समाज में हो रहा है वो उसी को तो दिखा रहे हैं।

पोर्न देखने का असर

दुखद बात ये है कि ये पोर्न का कॉन्सेप्ट बच्चों तक पहुँचना उन्हें कितना रोगी बना रहा है इसका अंदाजा कोई लगा ही नहीं सकता। पोर्न की पकड़ में आने के बाद बच्चे मानसिक रूप से तो प्रभावित हो ही रहे हैं, साथ में उन्हें समाज से भी कोई लेना-देना नहीं रह गया। उनके भीतर हर चीज को लेकर बढ़ रहे नीरसता के भाव ने उनके अंदर से उन्हें संभालने और समझने की शक्ति को शून्य कर दिया है।इंटरनेट पर मौजूदा लेख भी बताते हैं कि पोर्न देखने की लत एक बच्चे को पहले उसके परिवार से दूर करती है, मानसिक रूप से कमजोर बनाती है। धीरे-धीरे वो इतना टॉक्सिक हो जाता है कि कोई सामान्य बात भी हो तो उसे चिड़चिड़ापन रहता है। उसके भीतर की इंसानियत खत्म कर देती है। नतीजा भाई-बहन का लिहाज नहीं करता, पिता-बेटी का। इसके अलावा निजी जीवन की बात करें तो लोग ऐसी वीडियो देखने के बाद उसे अपने पार्टनर पर आजमाने की कोशिश करते हैं और तरह-तरह से पार्टनर को टॉर्चर किया जाता है।

समाज में लड़के की गलती कुछ नहीं

इन सब बिंदुओं के अलावा मध्यप्रदेश से जो मामला सामने आया है ये एक पहलू और आपके सामने रखता है। वो क्या है इसे समझिए। एक लड़के ने अपनी बहन का रेप किया, फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी, लेकिन घर के लोग उसे बचाने में लगे रहे। जिस घर में ये सब हुआ वहाँ लड़कियाँ तीन थीं और लड़का एक। बहनों को भी अपने बहन की हत्या पर गुस्से से ज्यादा भाई को बचाने का भाव था। शायद उन्हें लगा हो कि जो चला गया उसे वो ला नहीं सकते लेकिन जो है उसे उन्हें बचाना चाहिए। ये स्थिति मध्यप्रदेश के रीवा के सिर्फ उस घर की नहीं है। ये हाल ज्यादातर जगह है। बेटे के प्रेम में कई बार परिजन अच्छे-बुरे और सही-गलत में फर्क करना भूल जाते हैं। उन्हें लड़की पर होने वाले अत्याचार, उसके साथ होने वाला भेदभाव इस हद्द तक नजर नहीं आता कि लड़की की लाश सामने होने के बाद भी वो बेटे का समर्थन करते हैं जैसे कि इस मामले में हुआ है।

ये स्थिति शर्मनाक और विचार करने वाली दोनों है। क्या लड़की के साथ हुए अत्याचार पर तभी आवाज उठाई जाएगी जब वहशी कोई बाहरवाला होगा। अगर कोई घर का उसके साथ गलत करता है तो क्यों उस हरकत को छिपाया जाता है… रीवा का मामला पहला या आखिर नहीं है। ऐसे स्थिति पहले भी आई हैं और आने वाले वक्त में भी आएँगी…बस हमें सटीक आँकड़े नहीं पता चल पाएँगे क्योंकि जरूरी नहीं हर बार ये मामले पुलिस तक पहुँचें और मीडिया में इनकी जानकारी आए। कई बार ऐसे मामले घर के भीतर ही दबाकर रख दिए जाते हैं और लड़की धीरे-धीरे मान लेती है कि जो उसके साथ हुआ वही उसकी किस्मत में था…।